अध्याय ७८
श्लोक 1
मत्स्य-पुराण ७८ अतः परं प्रवक्ष्यामि तद्वत्कमलसप्तमीम् यस्याः संकीर्तनादेव तुष्यतीह दिवाकरः
matsya-purāṇa 78 ataḥ paraṃ pravakṣyāmi tadvatkamalasaptamīm yasyāḥ saṃkīrtanādeva tuṣyatīha divākaraḥ
हिन्दी अर्थ
मनसे अपने पतिके ऊपर जल उछाल रही थी। पतिके ऊपर जल फेंकनेसे किसीकी चोटी खुल गयी थी, जिससे उसका मुख बालोंसे ढक गया था। उस समय वह ऐसी प्रतीत हो रही थी मानो भ्रमरोंसे घिरी हुई कमलिनी हो। कोई अपने नेत्रोंके समान कमल- पुष्पोंसे ढके हुए उस कमलिनीके वनमें छिप गयी थी, जिसे उसके पतिने बड़ी देरके बाद प्रयत्नपूर्वक खोजकर प्राप्त किया। किसीको उसका पति गलेमें पड़ी हुई मालाके
English
iva said: — 1 shall now describe to you that Kam.'ila Saptami vrata, by the mere mention of which the God Sun becomes pleased. — 1.