Matsya Purana· Matsya Purāṇa
92
अध्याय 92 / 176

Adhyaya 92

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अध्याय ९२

श्लोक 1

मत्स्य-पुराण ९२ अथातः सम्प्रवक्ष्यामि शर्कराशैलमुत्तमम् यस्य प्रदानाद्विष्ण्वर्करुद्रास्तुष्यन्ति सर्वदा

matsya-purāṇa 92 athātaḥ sampravakṣyāmi śarkarāśailamuttamam yasya pradānādviṣṇvarkarudrāstuṣyanti sarvadā

हिन्दी अर्थ

द्वितीय आवहन् वायुर्मेघास्ते त्वभिसंश्रिताः । इतो योजनमात्राच्च अध्यर्धविकृता अपि वृष्टिसर्गस्तथा तेषां धारासारः प्रकीर्तितः। पुष्करावर्तका नाम ते मेघाः पक्षसम्भवाः

English

He will be succeeded by (9) Sruton;o;/a Tho will be for forty years. Afterwards (10) Vibliu will obtain the earth and will reign for twerdy-eicflit yeara, and then (11 fluc/ii will rule the kingdom lor fifty-eight plus six years (i.e. 61). — 23-24.

अध्याय ९२

श्लोक 2

अष्टाभिः शर्कराभारैर् उत्तमः स्यान्महाचलः चतुर्भिर्मध्यमः प्रोक्तो भाराभ्यामधमः स्मृतः

aṣṭābhiḥ śarkarābhārair uttamaḥ syānmahācalaḥ caturbhirmadhyamaḥ prokto bhārābhyāmadhamaḥ smṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

कामगानां समृद्धानां भूतानां नाशमिच्छताम् पुष्करा नाम ते पक्षा बृहन्तस्तोयधारिणः। पुष्करावर्तका नाम कारणेनेह शब्दिताः कल्पान्तवृष्टिकर्तारः कल्पान्ताग्नेर्नियामकाः

English

The king (12) Kema will enjoy the earth for twenty-eight years. After whom the powerful (13) Anuorata will reign for sixty-four years. — 25.

अध्याय ९२

श्लोक 3

भारेण वार्धभारेण कुर्याद्यः स्वल्पवित्तवान् विष्कम्भपर्वतान्कुर्यात् तुरीयांशेन मानवः

bhāreṇa vārdhabhāreṇa kuryādyaḥ svalpavittavān viṣkambhaparvatānkuryāt turīyāṃśena mānavaḥ

हिन्दी अर्थ

वाय्वाधारा वहन्ते वै सामृताः कल्पसाधकाः । यान्यस्याण्डस्य भिन्नस्य प्राकृतान्यभवंस्तदा यस्मिन् ब्रह्मा समुत्पन्नश्चतुर्वक्त्रः स्वयं प्रभुः। तान्येवाण्डकपालानि सर्वे मेघाः प्रकीर्तिताः

English

(14) Su7ietra will enjoy the earth for twenty-five another reading thirty-five) years. (15; Nirvriti will enjoy it for fijly-eight years. -26.

अध्याय ९२

श्लोक 4

धान्यपर्वतवत्सर्वम् आसाद्यामरसंयुतम् मेरोरुपरि तद्वच्च स्थाप्यं हेमतरुत्रयम्

dhānyaparvatavatsarvam āsādyāmarasaṃyutam merorupari tadvacca sthāpyaṃ hematarutrayam

हिन्दी अर्थ

आकाशमण्डलमें जो यह (चौदह) नक्षत्रोंके मध्यमें स्थित शिशुमार नामक चक्र है वही उत्तानपादका पुत्र ध्रुव है, जो (उस चक्रमें) मेंढीके समान है। वह धुव स्वयं भ्रमण करता हुआ ग्रहोंके साथ सूर्य और चन्द्रमाको भी घुमाता है। नक्षत्रगण भी चक्रकी भाँति घूमते हुए ध्रुवके पीछे-पीछे चलते हैं । जो ज्योतिर्गण वायुमय बन्धनोंद्वारा ्रुवमें निबद्ध है, वह ध्रुवके मानसिक संकल्पसे ही घूमता है। उन ज्योतिर्गणोंके भेद, योग, कालका निश्चय, अस्त, उदय, उत्पात, उत्तरायण एवं दक्षिणायनमें गमन, विषुवत्

English

After that (16 Tinnetra will enjoy the kingdom for twenty-eight. years. (17) DyumatHena Dridhasena) will be for forty-eight years. — 27.

अध्याय ९२

श्लोक 5

मन्दारः पारिजातश्च तृतीयः कल्पपादपः एतद्वृक्षत्रयं मूर्ध्नि सर्वेष्वपि नियोजयेत्

mandāraḥ pārijātaśca tṛtīyaḥ kalpapādapaḥ etadvṛkṣatrayaṃ mūrdhni sarveṣvapi niyojayet

हिन्दी अर्थ

रेखापर स्थिति और ग्रहोंके वर्ण आदि सभी कार्य ध्रुवकी प्रेरणासे होते हैं । (भगणके नीचे मेघ हैं ।) जिनसे जीवोंकी उत्पत्ति होती है, उन मेघोंको जीमूत कहते हैं। वे मेघ यहाँसे एक योजन दूर आवह नामक दूसरी वायुके आश्रयपर रिके हुए हैं। उनमें कुछ विकार उत्पन्न हो जानेपर वे ही वृष्टि करते हैं, जो महावृष्टि कही जाती है। पूर्वकालमें महान् ओजस्वी इन्द्रने प्राणियोंके कल्याणकी भावनासे स्वच्छन्दचारी एवं समृद्धिशाली पर्वतोंके पंखोंको काट डाला था। उन

English

(18) Mahinetra will be resplendent for thirtydhree years (19) Achala or (Suchala) will be king for thirty-two years— 28.

अध्याय ९२

श्लोक 6

हरिचन्दनसंतानौ पूर्वपश्चिमभागयोः निवेश्यौ सर्वशैलेषु विशेषाच्छर्कराचले

haricandanasaṃtānau pūrvapaścimabhāgayoḥ niveśyau sarvaśaileṣu viśeṣāccharkarācale

हिन्दी अर्थ

पंखोंसे उत्पन्न हुए मेघोंको पुष्करावर्तक कहते हैं । पर्वतोंके पंखोंका नाम पुष्कर था, वे बहुत बड़े-बड़े और जलसे भी परिपूर्ण थे, इसी कारण वे मेघ भी पुष्करावर्तक नामसे कहे गये हैं। ये अनेकों प्रकारके रूप धारण करनेवाले, महान् भयंकर गर्जनासे युक्त, कल्पान्तके समय वृष्टि करनेवाले, कल्पान्तकी अग्निके प्रशामक, अमृतयुक्त और कल्प अर्थात् प्रलयके साधक हैं ॥४--१४॥ वे वायुके आधारपर चलते-फिरते हैं । इस अण्डके विदीर्ण होनेपर उससे जो प्राकृतिक कपाल निकले थे और जिसमें सामर्थ्यशाली स्वयं चतुर्मुख ब्रह्मा उत्पन्न हुए थे, उन्हीं अण्डकपालोंको सभी मेघोंके रूपमें बतलाया

English

(20) Ripunjayt will obtain the earth for fifty-years, and these 32

अध्याय ९२

श्लोक 7

मन्दरे कामदेवस्तु प्रत्यग्वक्त्रः सदा भवेत् गन्धमादनशृङ्गे तु धनदः स्यादुदङ्मुखः

mandare kāmadevastu pratyagvaktraḥ sadā bhavet gandhamādanaśṛṅge tu dhanadaḥ syādudaṅmukhaḥ

हिन्दी अर्थ

जाता है। उन सभी मेघोंको समानरूपसे तृप्त करनेवाला धूम है। उनमें पर्जन्य नामक मेघ सबसे श्रेष्ठ है। इसके अतिरिक्त ऐरावत, वामन, अञ्जन आदि चार दिग्गज हैं। हाथी, पर्वत, मेघ और सर्प-इन सबका कुल एक है जो दो भागोंमें विभक्त हो गया है; परंतु इनकी योनि

English

kings will be the future Brihadrathas.— 29.

अध्याय ९२

श्लोक 8

प्राङ्मुखो वेदमूर्तिस्तु हंसः स्याद्विपुलाचले हैमी सुपार्श्वे सुरभिर् दक्षिणाभिमुखी भवेत्

prāṅmukho vedamūrtistu haṃsaḥ syādvipulācale haimī supārśve surabhir dakṣiṇābhimukhī bhavet

हिन्दी अर्थ

कुलमेकं द्विधाभूतं योनिरेका जलं स्मृतम्॥ १८ (उत्पत्ति-स्थान) एक ही है, जो जल नामसे कही जाती १. शिशुमार (सूँस) एक जलीय जन्तु होता है, जो प्रायः सर्पवत् वृत्ताकार कुण्डल (गेंडुर) मारकर स्थित रहता है। उसके समान स्थितिको ' शिशुमार ' चक्र कहते हैं। उसीके समान गोल होनेसे नक्षत्रमण्डलकी उससे उपमा दी गयी है। २. दौंरीके केन्द्रमें स्थित खम्भेको मेंढी कहते हँ । उसके आश्रयपर कई बैल चलकर अन्रकणको दाँते हँ । इस सम्बन्धमें विशेष जानकारीके लिये श्रीमद्भागवत तथा विष्णुपुराण देखना चाहिए।

English

supplied l),y Mr. Pargitor.

अध्याय ९२

श्लोक 9

धान्यपर्वतवत्सर्वम् आवाहनविधानकम् कृत्वा तु गुरवे दद्यान् मध्यमं पर्वतोत्तमम् ऋत्विग्भ्यश् चतुरः शैलान् इमान्मन्त्रानुदीरयन्

dhānyaparvatavatsarvam āvāhanavidhānakam kṛtvā tu gurave dadyān madhyamaṃ parvatottamam ṛtvigbhyaś caturaḥ śailān imānmantrānudīrayan

हिन्दी अर्थ

षष्ठः परिवहो नाम वायुस्तेषां परायणः। योऽसौ बिभर्ति भगवान् गङ्गामाकाशगोचराम् तस्या विस्पन्दितं तोयं दिग्गजाः पृथुभिः करे:

English

" Gtiatvarim sat sama p5 jft Rnnetro bhoksyato tatah

अध्याय ९२

श्लोक 10

सौभाग्यामृतसारो ऽयं पर्वतः शर्करायुतः तस्मादानन्दकारी त्वं भव शैलेन्द्र सर्वदा

saubhāgyāmṛtasāro 'yaṃ parvataḥ śarkarāyutaḥ tasmādānandakārī tvaṃ bhava śailendra sarvadā

हिन्दी अर्थ

शीकरान् सम्प्रमुञ्चन्ति नीहार इति स स्मृतः। दक्षिणेन गिरिर्योऽसौ हेमकूट इति स्मृतः मेघाश्चाप्यायनं चैव सर्वमेतत् प्रकीर्तितम्। सूर्य एव तु वृष्टीनां स्त्रष्टा समुपदिश्यते तेजोभिः सर्वलोकेभ्य आदत्ते रश्मिभिर्जलम्

English

Satyajit prithivira rfija try asitim bhoksyate samah

अध्याय ९२

श्लोक 11

अमृतं पिबतां ये तु निपेतुर्भुवि शीकराः देवानां तत्समुत्थस्त्वं पाहि नः शर्कराचल

amṛtaṃ pibatāṃ ye tu nipeturbhuvi śīkarāḥ devānāṃ tatsamutthastvaṃ pāhi naḥ śarkarācala

हिन्दी अर्थ

समुद्राद् वायुसंयोगाद् वहन्त्यापो गभस्तयः। ततस्त्वृतुबशात्काले परिवर्तन् दिवाकरः है। पर्जन्य मेघ और चारों वृद्ध दिग्गज हेमन्त-ऋतुमें अन्नकी वृद्धिके लिये शीतसे उत्पन्न हुए तुषारकी वर्षा करते हैं। परिवह नामक छठी वायु इनका आश्रय है। यह ऐश्वर्यशाली पवन आकाशगामिनी गङ्गाको, जो दिव्य

English

Prapyaemain VH'vajichchapi pahcha-vinisnd bhavisyati."

अध्याय ९२

श्लोक 12

मनोभवधनुर्मध्याद् उद्भूता शर्करा यतः तन्मयो ऽसि महाशैल पाहि संसारसागरात्

manobhavadhanurmadhyād udbhūtā śarkarā yataḥ tanmayo 'si mahāśaila pāhi saṃsārasāgarāt

हिन्दी अर्थ

अमृतरूपी जलसे परिपूर्ण, पुण्यमयी तथा त्रिपथगा नामसे विख्यात हैं, धारण करता है, गङ्गासे निकले हुए जलको दिग्गज अपने मोटे-मोटे शुण्डोंसे फुहारेके रूपमें छोड़ते हैं। उसे नीहार (कुहासा) कहते हैं। दक्षिण पार्श्वमें जो पर्वत है, वह हेमकूट नामसे प्रसिद्ध है। वह हिमालय पर्वतके उत्तर और दक्षिण-दोनों दिशाओंमें फैला हुआ है। वहाँ पुण्ड नामक एक प्रसिद्ध नगर है। उसी नगरमें वह तुषारसे उत्पन्न हुई वर्षा होती है। तदनन्तर हिमवान् पर्वतसे उद्भूत हुई वायु वहाँ उत्पन्न हुए शीकरोंको अपने साथ ले आती है और बड़े वेगसे उस महान् गिरिको सींचती हुई उसका अतिक्रमण करके इभास्य नामक वर्षमें निकल जाती है। तत्पश्चात् प्राणियोंकी वृद्धिके

English

Ring Suuctra will next enjoy the kingdom for forty years. King Satyajit will enjoy the earth for eighty-threo years, (eighty years). And Visvsajit will obtain this earth and be king for twenty-flve years.-— 29A.

अध्याय ९२

श्लोक 13

यो दद्याच्छर्कराशैलम् अनेन विधिना नरः सर्वपापैर् विनिर्मुक्तः स याति परमं पदम्

yo dadyāccharkarāśailam anena vidhinā naraḥ sarvapāpair vinirmuktaḥ sa yāti paramaṃ padam

हिन्दी अर्थ

लिये .वहाँ शेष वृष्टि होती है। पहले जिन दो वर्षाका वर्णन किया गया है, उनमें अच्छी तरह वृष्टि होती है। इस प्रकार मैंने मेघों तथा उनसे उत्पन्न हुई सारी वृष्टिका वर्णन कर दिया॥ १५-२६ ई ॥ सूर्य ही सब प्रकारकी वृष्टियोंके मूल कारण कहे जाते हैं। इस लोकमें वर्षा, धूप, हिम, रात्रि, दिन, दोनों संध्याएँ और शुभ एवं अशुभ कर्मोके फल ध्रुवसे प्रवर्तित होते हैं। ध्रुवद्वारा अधिष्ठित जलको सूर्य ग्रहण

English

iVotr. -Our reading is dvfttrirnsatttt nripft hyeta. Another reading is "Sodas-aite nripftjiioyft bhavitftro Brihadrathfth." And then the verse will moan these sixteen kings are to be known as the future Brihadrathas.*' Then there is further this lino in the same manuscript Trayo-vims-adhikain tesftm rftjyam cha sata*saptakani.'* And it moans "and their kingdom will last sovon-hunclred twonty-hee years.*' According to this reading the sixteen future B&rhadrathas will reign for 723 years. Of coarse this includes Scnftjit also.

अध्याय ९२

श्लोक 14

चन्द्रतारार्कसंकाशम् अधिरुह्यानुजीविभिः सहैव यानमातिष्ठेत् तत्र विष्णुप्रचोदितः

candratārārkasaṃkāśam adhiruhyānujīvibhiḥ sahaiva yānamātiṣṭhet tatra viṣṇupracoditaḥ

हिन्दी अर्थ

करते हैं। जल सभी प्राणियोंके शरीरोंमें परमाणुरूपसे स्थित है। इसी कारण स्थावर-जङ्गम सभी प्राणियोंके शरीरोंके जलाये जानेपर उनमेंसे वह जल धुएँके रूपमें बाहर निकलता है। उसी धूमसे बादल बनते हैं, इसलिये धूमको अभ्रमय स्थान कहा जाता है। सूर्य अपनी तेजोमयी किरणोंद्वारा सभी लोक (स्थानों)-से जल ग्रहण करते हैं। इसी प्रकार वे ही किरणें वायुके संयोगसे समुद्रसे भी जल खींचती हैं । तदनन्तर सूर्य ऋतुओंके अनुसार समय-समयपर जलको परिवर्तित कर अपनी श्वेत किरणांद्वारा वह शुद्ध जल मेघोंको देते हैं। तब वायुद्दारा प्रेरित हुआ वह मेघस्थित जल वर्षके रूपमें भूतलपर गिरता है। इस प्रकार सूर्य सभी प्राणियोंको समृद्धिके निमित्त छः

English

Tlieir kingdom will last full 1000 years indeed. Then Balaka (son of) Pulaka will be tlie conqueror of Ksatriyas.— 30.

अध्याय ९२

श्लोक 15

ततः कल्पशतान्ते तु सप्तद्वीपाधिपो भवेत् आयुरारोग्यसम्पन्नो यावज्जन्मार्बुदत्रयम्

tataḥ kalpaśatānte tu saptadvīpādhipo bhavet āyurārogyasampanno yāvajjanmārbudatrayam

हिन्दी अर्थ

महीनेतक वर्षा करते हैं। उस समय वायुके आघातसे मेघ-निर्घोष भी होता है। (बिजली भी चमकती है।) वायुभिः स्तनितं चैव विद्युतस्त्वग्निजाः स्मृताः ॥ ३४ ये बिजलियाँ अग्निसे प्रादुर्भूत बतलायी जाती हैं।

English

— The translation is according to the I'oading

अध्याय ९२

श्लोक 16

भोजनं शक्तितः कुर्यात् सर्वशैलेष्वमत्सरः सर्वत्राक्षारलवणम् अश्नीयात्तदनुज्ञया पर्वतोपस्करान्सर्वान् प्रापयेद्ब्राह्मणालयम्

bhojanaṃ śaktitaḥ kuryāt sarvaśaileṣvamatsaraḥ sarvatrākṣāralavaṇam aśnīyāttadanujñayā parvatopaskarānsarvān prāpayedbrāhmaṇālayam

हिन्दी अर्थ

स तस्य ब्रह्मणा सृष्टो रथो ह्यर्थवशेन तु। असङ्गः काञ्चनो दिव्यो युक्तः पवनगैर्हयैः अक्षकोय्योर्युगान्यस्य आर्तवाहाः कलाः स्मृताः तस्य काष्टा स्मृता घोणा दन्तपङ्क्तिः क्षणास्तु वै। निमेषश्चानुकर्षोऽस्य ईषा चास्य कला स्मृता

English

swfdiawftmhTOW. I

अध्याय ९२

श्लोक 17

आसीत्पुरा बृहत्कल्पे धर्ममूर्तिर्जनाधिपः सुहृच्छक्रस्य निहता येन दैत्याः सहस्रशः

āsītpurā bṛhatkalpe dharmamūrtirjanādhipaḥ suhṛcchakrasya nihatā yena daityāḥ sahasraśaḥ

हिन्दी अर्थ

युगाक्षकोटी ते तस्य अर्थकामावुभौ स्मृतौ। सप्ताश्वरूपाश्छन्दांसि वहन्ते वायुरंहसा “मिह सेचने” अर्थात् 'मिह” धातु सेचन अथवा मेहनके

English

g OR? ii

अध्याय ९२

श्लोक 18

सोमसूर्यादयो यस्य तेजसा विगतप्रभाः भवन्ति शतशो येन शत्रवश्चापराजिताः यथेच्छारूपधारी च मनुष्यो ऽप्यपराजितः

somasūryādayo yasya tejasā vigataprabhāḥ bhavanti śataśo yena śatravaścāparājitāḥ yathecchārūpadhārī ca manuṣyo 'pyaparājitaḥ

हिन्दी अर्थ

अर्थमें प्रयुक्त होती है, इसलिये 'मिह'-धातुसे मेघ शब्द निष्पन्न होता है। इसी प्रकार 'अपो विश्रति' या “न भ्रश्यन्ते आपो यस्मात्’ जिससे जल नहीं गिरते, उसे अब्भ्र या अभ्र कहते हैं। इस तरह धुवद्वारा अधिकृत सूर्य वृष्टिसर्गकी सृष्टि करते हैं। पुनः धुवद्वारा नियुक्त वायु उस वृष्टिका संहार करती है। नक्षत्रमण्डल सूर्यमण्डलसे निवृत्त होकर विचरण करता है और जब विचरण समाप्त हो जाता है, तब ध्रुवद्वारा अधिष्ठित सूर्यमें प्रविष्ट हो जाता है

English

But the kings emimopated are 22 only. The reading of the Brahmanda Purina is irAqf wn " These 22 Kings." This is more accurate.

अध्याय ९२

श्लोक 19

तस्य भानुमती नाम भार्या त्रैलोक्यसुन्दरी लक्ष्मीवद् दिव्यरूपेण निर्जितामरसुन्दरी

tasya bhānumatī nāma bhāryā trailokyasundarī lakṣmīvad divyarūpeṇa nirjitāmarasundarī

हिन्दी अर्थ

इसके बाद अब सूर्यके रथकी रचना बतलायी जाती है। उसमें एक पहिया, पाँच अरे (अरगजे) और तीन नाभियाँ हैं। उस चक्रकी नेमि (घेरे)-में स्वर्णमयी आठ छोटी-छोटी पुट्टियाँ लगी हैं। ऐसे उद्दीप्त एवं शीघ्रगामी रथपर बैठकर सूर्य विचरण करते हैं। उस रथकी लम्बाई एक लाख योजन बतलायी जाती है। उसका ईषादण्ड (हरसा) रथके उपस्थ (मध्यभाग)- से प्रमाणमें दुगुना है । ब्रह्माने किसी मुख्य प्रयोजनवश

English

Here ends chapter 271 dealing with the genealogies of future Iltvuhns and Brihadrathas.

अध्याय ९२

श्लोक 20

राज्ञस्तस्याग्र्यमहिषी प्राणेभ्यो ऽपि गरीयसी दशनारीसहस्राणां मध्ये श्रीरिव राजते

rājñastasyāgryamahiṣī prāṇebhyo 'pi garīyasī daśanārīsahasrāṇāṃ madhye śrīriva rājate

हिन्दी अर्थ

उस रथका निर्माण किया था। उसका असङ्ग (वह रस्सी, जिससे घोड़े रथमें बँधे रहते हैं) दिव्य एवं स्वर्णमय है। उसमें पवनके समान शीघ्रगामी घोड़े जुते हुए हैं। चक्रके अनुकूल चलनेवाले छन्द ही उन घोड़ोंके रूपमें उपस्थित होते हैं। वह रथ वरुणके रथके लक्षणोंसे मिलता-जुलता-सा है। उसी रथसे सूर्य प्रतिदिन गगन-मण्डलमें विचरते हैं। सूर्यके अङ्गों तथा रथके अवयवोंकी समतामें क्रमश: कल्पना की गयी है। दिनको सूर्यके एक पहियेवाले रथकी नाभि कहा जाता है। वर्ष उसके अरे और छहों ऋतुएँ उसकी नेमि कहलाती हैं। रात्रि उसका वरूथ (कवच, बख्तर) और धूप ऊपर फहरानेवाला ध्वज है। चारों युग इसके धुरेके

English

APPBmiX 111. CHAFTBB COLXXU.

अध्याय ९२

श्लोक 21

नृपकोटिसहस्रेण न कदाचित्स मुच्यते कदाचिदास्थानगतः पप्रच्छ स पुरोधसम् विस्मयेनावृतो राजा वसिष्ठमृषिसत्तमम्

nṛpakoṭisahasreṇa na kadācitsa mucyate kadācidāsthānagataḥ papraccha sa purodhasam vismayenāvṛto rājā vasiṣṭhamṛṣisattamam

हिन्दी अर्थ

दोनों छोर हैं और कलाएँ आर्तवाह कही गयी हैं। काष्ठा उसकी नासिका तथा क्षण उसके दाँतोंकी पङ्क्तियाँ हैं। निमेषको इसका अनुकर्ष (रथका तला) और कलाको ईषा (हरसा) कहते हैं। उनके जुएके दोनों छोर अर्थ और और उष्णिक्-ये सातों छन्द सातों घोड़ोंके रूपमें हैं, जो वायु-वेगसे रथको वहन करते हैं।

English

Pradyota or Bdldka Dynasty.

अध्याय ९२

श्लोक 22

भगवन्केन धर्मेण मम लक्ष्मीरनुत्तमा कस्माच्च विपुलं तेजो मच्छरीरे सदोत्तमम्

bhagavankena dharmeṇa mama lakṣmīranuttamā kasmācca vipulaṃ tejo maccharīre sadottamam

हिन्दी अर्थ

अक्षः सहैव चक्रेण भ्रमतेऽसौ श्षुवेरितः। एवमर्थवशात् तस्य सन्निवेशो रथस्य तु तथा संयोगभागेन सिद्धो वै भास्करो रथः। तेनाऽसौ तरणिर्देवो नभसः सर्पते दिवम् युगाक्षकोटी ते तस्य दक्षिणे स्यन्दनस्य तु। भ्रमतो भ्रमतो रश्मी तौ चक्रयुगयोस्तु वै

English

Sdta said Wlien Bfibadrathas and Vitibotras and Avantis itave passed away, Pulaka, after killing bis master will instal his sou (Pradyota or Bftlaka) as king.— 1. He wiU instal, Biilaka, born of Pulaka, in tbe very sight of the Ktriyas (by assasinating his master, Ripunjnya). That son of Pulaka will subjugate the neighbouring kings by force and not by right, and will be devoid of royal policy.— 2.

अध्याय ९२

श्लोक 23

पुरा लीलावती नाम वेश्या शिवपरायणा तया दत्तश्चतुर्दश्यां गुरवे लवणाचलः हेमवृक्षादिभिः सार्धं यथावद्विधिपूर्वकम्

purā līlāvatī nāma veśyā śivaparāyaṇā tayā dattaścaturdaśyāṃ gurave lavaṇācalaḥ hemavṛkṣādibhiḥ sārdhaṃ yathāvadvidhipūrvakam

हिन्दी अर्थ

युगाक्षकोटी ते तस्य वातोर्मी स्यन्दनस्य तु। संक्रमेते श्षुवमहो मण्डले सर्वतोदिशम् युगाक्षकोटी सम्बद्धौ द्वे रश्मी स्यन्दनस्य ते। श्रुवेण प्रगृहीतौ तौ रश्मी धारयता रविम्

English

That {Pulaka'' the best of men will reign for 23 years, (2) PAlaka or B&laka will be king for 28 years (or 24 according to the Vfiyu). — 3.

अध्याय ९२

श्लोक 24

शूद्रः सुवर्णकारश्च नाम्ना शौण्डो ऽभवत्तदा भृत्यो लीलावतीगेहे तेन हेम्ना विनिर्मिताः

śūdraḥ suvarṇakāraśca nāmnā śauṇḍo 'bhavattadā bhṛtyo līlāvatīgehe tena hemnā vinirmitāḥ

हिन्दी अर्थ

अशीतिमण्डलशतं काष्ठयोरुभयोश्चरन्। श्रुवेण मुच्यमानेन पुना रश्मियुगेन च इस रथका चक्र अक्षमें बँधा हुआ है और वह अक्ष ध्रुवसे संलग्न है। इसलिये चक्रके साथ अक्ष और अक्षके साथ ध्रुव घूमता रहता है। इस प्रकार धुवद्वारा प्रेरित अक्ष चक्रके साथ ही घूमता है। किसी मुख्य प्रयोजनवश ब्रह्माने इस रथका निर्माण किया है तथा इस प्रकारके अवयवोंके संयोगसे यह सूर्यका रथ सिद्ध हुआ है। इसी रथसे सूर्यदेव आकाशमण्डलमें भ्रमण करते हैं। उस रथके जुए और धुरेके छोर दाहिनी

English

(3j King VisdkhayApa will reign for 53 years (50 according to VAyu) (4) and SAryaka will be king for 21 years. (5) Nandimrdhana, his son, will be king for 30 years (20 years another reading). These five kings, after enjoying the earth, for 52 years (evidently a mistake for 155 or 152) will perish. — 4-5. isundka Dynasty.

अध्याय ९२

श्लोक 25

तरवः सुरमुख्याश्च श्रद्धायुक्तेन पार्थिव अतिरूपेण सम्पन्ना घटयित्वा विना भृतिम् धर्मकार्यमिति ज्ञात्वा न गृह्णाति कथंचन

taravaḥ suramukhyāśca śraddhāyuktena pārthiva atirūpeṇa sampannā ghaṭayitvā vinā bhṛtim dharmakāryamiti jñātvā na gṛhṇāti kathaṃcana

हिन्दी अर्थ

ओरसे घूमते हैं। जब वह रथ आकाशमें मण्डलाकार घूमता है, उस समय उसकी किरणें भी मण्डलाकार घूमती-सी दीख पड़ती हैं। यह मण्डल कुम्हारके चाककी भाँति चारों दिशाओंमें घूमता है। उस रथकी दोनों युगाक्षकोटि और वातोर्मिके चारों दिशाओंमें मण्डलाकार घूमते समय उस रथकी किरणें बढ़ जाती हैं और दक्षिणायनमें घट जाती हैं। वे दोनों किरणें रथकी युगाक्षकोटिमें बँधी हुई हैं और वे धुवमें निबद्ध हैं। ये

English

Then SikAniiha destroying all tlieir glory will place his son in Benares and himself go to Girivraja. The King iQuaka will reign for 40 years.— 6.

अध्याय ९२

श्लोक 26

उज्ज्वालिताश्च तत्पत्न्या सौवर्णामरपादपाः लीलावती गिरेः पार्श्वे परिचर्यां च पार्थिव

ujjvālitāśca tatpatnyā sauvarṇāmarapādapāḥ līlāvatī gireḥ pārśve paricaryāṃ ca pārthiva

हिन्दी अर्थ

सूर्यसे भी सम्बद्ध हैं। ध्रुव जब उन दोनों किरणोंको खींचते हैं, तब सूर्य मण्डलके अन्तर्गत ही भ्रमण करते हैं। उस समय सूर्य दोनों दिशाओंके एक सौ अस्सी मण्डलोंमें चक्कर लगाते हैं। पुनः जब ध्रुव दोनों किरणोंको छोड़ देते हैं, तब सूर्य मण्डलोंके बाह्य भागमें घूमने लगते हैं। उस समय वे मण्डलोंको उद्देष्टित करते हुए बड़े वेगसे चलते हैं ॥४६--५८ ॥ इति श्रीमत्स्ये महापुराणे भुवनकोश सूर्याचन्द्रमसोश्चारो नाम पञ्जबिंशत्यधिकशततमोऽध्यायः

English

His son Kdkavarna will obtain the earth for 2G years, K§emadharma will be king for 36 years. — 7. Kfemajit will obtain the earth for 24 years, Vindhyasena will be king for 28 years. — 8.

अध्याय ९२

श्लोक 27

कृत्वा ताभ्याम् अशाठ्येन गुरुशुश्रूषणादिकम् सा च लीलावती वेश्याकालेन महतापि च

kṛtvā tābhyām aśāṭhyena guruśuśrūṣaṇādikam sā ca līlāvatī veśyākālena mahatāpi ca

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार श्रीमत्स्यमहापुराणके भुवनकोश-वर्णन-प्रसङ्गमें सूर्य-चन्द्रमाकी गति नामक एक सौ पचीसवाँ अध्याय सम्पूर्ण हुआ सूर्य-रथ पर प्रत्येक मासमें भिन्न-भिन्न देवताओंका अधिरोहण तथा चन्द्रमाकी विचित्र गति

English

Kanvayana will be king for 9 years, his sou, Bhumimitra will be king for 14 years.— 9.

अध्याय ९२

श्लोक 28

कालधर्ममनुप्राप्ता कर्मयोगेण नारद सर्वपापविनिर्मुक्ता जगाम शिवमन्दिरम्

kāladharmamanuprāptā karmayogeṇa nārada sarvapāpavinirmuktā jagāma śivamandiram

हिन्दी अर्थ

स रथोऽधिष्ठितो देवैर्मासि मासि यथाक्रमम्। सूतजी कहते हैं-ऋषियो! सूर्यका वह रथ प्रत्येक मासमें क्रमश: देवताओंद्वारा अधिष्ठित रहता है।

English

JVote.— This verso 0 is evidently misplaced hero. Its proper place is in the Kftnva Ajatasatru will be king for 27 years, Vaimaha will be king for 24 years. —10.

अध्याय ९२

श्लोक 29

यो ऽसौ सुवर्णकारस्तु दरिद्रो ऽप्यतिसत्त्ववान् न मौल्यमादाद्वेश्यातः स भवानिह साम्प्रतम्

yo 'sau suvarṇakārastu daridro 'pyatisattvavān na maulyamādādveśyātaḥ sa bhavāniha sāmpratam

हिन्दी अर्थ

ततो वहत्यथादित्यं बहुभिर्क्रषिभिः सह॥ १ इस प्रकार वह बहुत-से ऋषियों, गन्धर्वो, अप्सराओं, ग्रामणियों, सर्पो और राक्षसोंके साथ सूर्यको वहन करता

English

Plis son Ud&st will be king for 33 years, Nandivardhana will be king for 40 years.— 'll.

अध्याय ९२

श्लोक 30

सप्तद्वीपपतिर्जातः सूर्यायुतसमप्रभः यया सुवर्णकारस्य तरवो हेमनिर्मिताः सम्यगुज्ज्वालिताः पत्न्या सेयं भानुमती तव

saptadvīpapatirjātaḥ sūryāyutasamaprabhaḥ yayā suvarṇakārasya taravo hemanirmitāḥ samyagujjvālitāḥ patnyā seyaṃ bhānumatī tava

हिन्दी अर्थ

एते वसन्ति वै सूर्ये मासौ दवौ द्वौ क्रमेण च॥ २ है। ये सभी देवगण दो-दो मासके क्रमसे सूर्यके निकट यह विषय भी भागवत स्कन्ध १२, अ० ११, वायुपुराण अ० ५२ तथा अन्य विष्णु आदि सभी पुराणांमें स्वल्पान्तरसे प्राप्त होता है। उरगौ वासुकिश्चैव संकीर्णश्चैव तावुभौ

English

Mahdnandi will be king for 43 years Tliese will be the kings in the lisunaka dynasty.— 12. The Sirfunnkas will bo kings for full 360 years, and the kings will be low born Katriyas (Ksatrabandini). — 13.

अध्याय ९२

श्लोक 31

उज्ज्वालनादुज्ज्वलरुपमस्याः संजातमस्मिन्भुवनाधिपत्यम् यस्मात्कृतं तत्परिकर्म रात्राव् अनुद्धताभ्यां लवणाचलस्य

ujjvālanādujjvalarupamasyāḥ saṃjātamasminbhuvanādhipatyam yasmātkṛtaṃ tatparikarma rātrāv anuddhatābhyāṃ lavaṇācalasya

हिन्दी अर्थ

मधुमाधवयोह्णोष गणो वसति भास्करे। वसन् ग्रीष्मे तु द्वौ मासौ मित्रश्च वरुणश्च वै ऋषिरत्रिर्वसिष्ठश्च नागौ तक्षकरम्भकौ। मेनका सहजन्या च हाहा हूहूश्च गायकौ

English

above figures wo get 821 only.

अध्याय ९२

श्लोक 32

तस्माच्च लोकेष्वपराजितत्वम् आरोग्यसौभाग्ययुता च लक्ष्मीः तस्मात्त्वमप्यत्र विधानपूर्वं धान्याचलादीन्दशधा कुरुष्व

tasmācca lokeṣvaparājitatvam ārogyasaubhāgyayutā ca lakṣmīḥ tasmāttvamapyatra vidhānapūrvaṃ dhānyācalādīndaśadhā kuruṣva

हिन्दी अर्थ

ततः सूर्ये पुनश्चान्या निवसन्ति स्म देवता: नभस्यनभसोरेतैर्वसन्तश्च दिवाकरे मासौ द्वौ देवताः सूर्ये वसन्ति च शरदूतौ। पर्जन्यश्चैव पूषा च भरद्वाजः सगौतमः

English

MATS7A WBA'A, OHAPTBU m. xxxi Early Contemporary Dynaetiea.

अध्याय ९२

श्लोक 33

तथेति सत्कृत्य स धर्ममूर्तिर् वचो वसिष्ठस्य ददौ च सर्वान् धान्याचलदीञ्छतशो मुरारेर् लोकं जगामामरपूज्यमानः

tatheti satkṛtya sa dharmamūrtir vaco vasiṣṭhasya dadau ca sarvān dhānyācaladīñchataśo murārer lokaṃ jagāmāmarapūjyamānaḥ

हिन्दी अर्थ

चित्रसेनश्च गन्धर्वस्तथा वा सुरुचिश्च यः। विश्वाची च घृताची च उभे ते पुण्यलक्षणे सेनजिच्च सुषेणश्च सेनानीर्ग्रामणीस्तथा

English

Contemporaneous with all these kings will flourish in Ealiyuga other kings also, andlthey will endure an equal time. There will be 24 IkT&ku kings, 27 Panch&las, 24 kings of Xftii and 28 Haihayas kings. —14-15.

अध्याय ९२

श्लोक 34

पश्येदपीमानधनो ऽतिभक्त्या स्पृशेन्मनुष्यैरपि दीयमानान् शृणोति भक्त्याथ मतिं ददाति विकल्मषः सो ऽपि दिवं प्रयाति

paśyedapīmānadhano 'tibhaktyā spṛśenmanuṣyairapi dīyamānān śṛṇoti bhaktyātha matiṃ dadāti vikalmaṣaḥ so 'pi divaṃ prayāti

हिन्दी अर्थ

हैमन्तिकौ च द्वौ मासौ निवसन्ति दिवाकरे। अंशो भगश्च द्वावेतौ कश्यपश्च क्रतुश्च तौ भुजङ्गश्च महापदाः सर्पः कर्कोटकस्तथा। चित्रसेनश्च गन्धर्वः पूर्णायुश्चैव गायनौ तक्षावारिष्टनेमिश्च सेनानीर्ग्रमणीश्च तौ

English

Then there will he 32 Kalinga kings, 25 Asmaka, 36 Kurava, 28 Maithila, 23 Surasonas, and 20 '\tahotra kings. All these kings will endure the same time and will be contemporaries. The Nandas. 422 B.C. — 322 B.C.

अध्याय ९२

श्लोक 35

दुःस्वप्नं प्रशममुपैति पठ्यमानैः शैलेन्द्रैर्भवभयभेदनैर्मनुष्यैः यः कुर्यात्किमु मुनिपुंगवेह सम्यक् शान्तात्मा सकलगिरीन्द्रसम्प्रदानम्

duḥsvapnaṃ praśamamupaiti paṭhyamānaiḥ śailendrairbhavabhayabhedanairmanuṣyaiḥ yaḥ kuryātkimu munipuṃgaveha samyak śāntātmā sakalagirīndrasampradānam

हिन्दी अर्थ

निवास करते हैं। धाता और अर्यमा दो देव, प्रजापति पुलस्त्य और प्रजापति पुलह दो ऋषि, वासुकि और संकीर्ण दो नाग, गायकोंमें श्रेष्ठ तुम्बुरु और नारद दो

English

Then, as an incarnation of Kali, will be born Mahdpadma, a son of MahSnandi fi-om a iddra woman and he will be the exterminator of the Katriya kings. — 16-18.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_matsyapurANa1-176.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Matsya Purana — Chapter 92
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.