Narada Purana· Nārada Purāṇa
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अध्याय 154 / 167

Book 2 - Adhyaya 30

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अध्याय १५४

श्लोक 1

इति श्रीबृहन्नारदीयपुराणोत्तरभागे मोहिनीचरिते काष्ठीलोपाख्याने राक्षसीचरिते काशीवर्णनं नाम एकोनत्रिंशो ऽध्यायः काष्ठीलोवाच भार्यायास्तद्वचः श्रुत्वा राक्षस्या धर्मसंमितम् ।पृष्ठात्करोणुरूपिण्याः सकन्यो ऽवातरद्द्विजः

iti śrībṛhannāradīyapurāṇottarabhāge mohinīcarite kāṣṭhīlopākhyāne rākṣasīcarite kāśīvarṇanaṃ nāma ekonatriṃśo 'dhyāyaḥ kāṣṭhīlovāca bhāryāyāstadvacaḥ śrutvā rākṣasyā dharmasaṃmitam / pṛṣṭhātkaroṇurūpiṇyāḥ sakanyo 'vātaraddvijaḥ

हिन्दी अर्थ

होकर स्वर्गमें निवास करते हैं। जो मुक्तात्मा पुरुष एकाग्रचित्त हो इन्द्रिय-समुदायको संयममें रखकर ध्यान लगाये हुए शतरुद्रीका जप करते हैं और अविमुक्तक्षेत्रमें सदा निवास करते हैं, वे उत्तम

English

When the Brahmana got down, that ogress became once again a beautiful young woman with her face resembling the moon and with plump and protruding breasts.

अध्याय १५४

श्लोक 2

अवतीर्णे द्विजे साभूत्सुरूपा प्रमदा पुनः ।क्षपाचरी क्षपानाथवक्त्रा पीनोन्नतस्तनी

avatīrṇe dvije sābhūtsurūpā pramadā punaḥ / kṣapācarī kṣapānāthavaktrā pīnonnatastanī

हिन्दी अर्थ

द्विज कृतार्थ हो जाते हैं। यशस्विनी ! जो काशीमें एक दिन उपवास करेगा, उसे सौ वर्षोतक उपवास करनेका फल प्राप्त होगा। इससे आगे गड्भा और वरणाका संगमरूप उत्तम तीर्थ है, जो सायुज्य मुक्ति देनेवाला है। जब बुधवारको श्रवण और द्वादशीका योग हो, उस समय उसमें स्नान करके मनुष्य मोक्षरूप

English

On reaching the splendid city of her own father, that virgin spoke to the city governor who had come there in the course of his duty of guarding the exterior limits of the city.

अध्याय १५४

श्लोक 3

सा कुमारी ततः प्राप्य नगरं स्वपितुः शुभम् ।बाह्यरक्षास्थित प्राप्तं पुरपालमुवाच ह

sā kumārī tataḥ prāpya nagaraṃ svapituḥ śubham / bāhyarakṣāsthita prāptaṃ purapālamuvāca ha

हिन्दी अर्थ

फल पाता है। शुभानने ! जो वहाँ उस समय श्राद्ध करता है, वह अपने समस्त पितरोंका उद्धार करके विष्णुलोकमें जाता है। गड्भाके साथ वरणा और असीका जो संगम है, वह समस्त लोकोंमें

English

On hearing the words of the virgin, the city-governor who was well known as Abahu reached the presence of Sudyu¬ mna in a hurry.

अध्याय १५४

श्लोक 4

गच्छ त्वं नृपतेः पार्श्वं पितुर्मम पुराधिप ।ब्रूहि मां समनुप्राप्तां रत्नशालां पुरा हृताम्

gaccha tvaṃ nṛpateḥ pārśvaṃ piturmama purādhipa / brūhi māṃ samanuprāptāṃ ratnaśālāṃ purā hṛtām

हिन्दी अर्थ

विख्यात है; वहाँ विधिपूर्वक अश्वदान करके मनुष्य फिर इस संसारमें जन्म नहीं लेता। जो मनुष्य वहाँ भक्तिपूर्वक संगमेश्वरका पूजन करता है, वह निग्रह और अनुग्रहमें समर्थ साक्षात् देवदेवेश्वर शिव (-तुल्य) है। देवेश्वरसे पूर्वमें भगवान् केशव विद्यमान हैं और केशवतके पूर्वमें जगद्ठिख्यात संगमेश्वर विद्यमान हैं।

English

Urged by her, O Lord, I have come to report the matter to you. She says "I am unravaged. May my father inow that I have come back.

अध्याय १५४

श्लोक 5

रत्नावलिं रत्नभूतां सुद्युम्नस्य महीक्षितुः ।तल्पस्था रक्षसा रात्रौ स्वपुरस्था हृता द्विज

ratnāvaliṃ ratnabhūtāṃ sudyumnasya mahīkṣituḥ / talpasthā rakṣasā rātrau svapurasthā hṛtā dvija

हिन्दी अर्थ

काशीके तीर्थ एवं शिवलिड्रोेंके दर्शन-पूजन आदिकी महिमा

English

Taking me with him, the demon went to his city beyond the ocean on a mountain full of different kinds of jewels. I was confined in a cave.

अध्याय १५४

श्लोक 6

पुनः सा समनुप्राप्ता जीवमानाक्षता पितः ।समाश्वसिहि शोकं त्वं मा कृथा मत्कृते क्वचित्

punaḥ sā samanuprāptā jīvamānākṣatā pitaḥ / samāśvasihi śokaṃ tvaṃ mā kṛthā matkṛte kvacit

हिन्दी अर्थ

पुरोहित वसु कहते हैं--सुन्दरि! संगमेश्वर पीठके वायव्य भागमें राजा सगरके द्वारा स्थापित किया हुआ चतुर्मुख शिवलिजड्भ है। उससे वायव्य कोणमें भद्रदेह नामक तालाब है, जो गौओंके दूधसे भरा गया है। वह सम्पूर्ण पातकोंका करनेवाला है। मोहिनी ! सहस्नों कपिला गौओंके विधिपूर्वक दान करनेका जो फल है, उसे मनुष्य वहाँ स्नान करनेमात्रसे पा लेता है। जब पूर्वाभाद्रपदा

English

This ogress found that her husband was a defiler of virtue. Moreover, she became enamoured of the hand-

अध्याय १५४

श्लोक 7

अविप्लुतास्मि राजेन्द्र गाङ्गा आप इवामलाः ।तव कीर्तिकरी तद्वन्मातुः सौशील्यसूचिका

aviplutāsmi rājendra gāṅgā āpa ivāmalāḥ / tava kīrtikarī tadvanmātuḥ sauśīlyasūcikā

हिन्दी अर्थ

नक्षत्रसे युक्त पूर्णिमा हो, उस समय वहाँके लिये अतिशय पुण्यकाल माना गया है, जो अश्वमेध- यज्ञका फल देनेवाला है। वहीं श्मशानभूमिमें विख्यात देवी भीष्मचण्डिकाका दर्शन होता है।

English

With her permission give me in marriage to this Brahmana. I shared the same seat with him. Hence he has become my husband.

अध्याय १५४

श्लोक 8

तत्कुमारीवचः श्रुत्वा पुरापालस्त्वरान्वितः ।अबाहुरिति विख्यातः प्राप्तः सुद्युम्रसन्निधौ

tatkumārīvacaḥ śrutvā purāpālastvarānvitaḥ / abāhuriti vikhyātaḥ prāptaḥ sudyumrasannidhau

हिन्दी अर्थ

उनकी पूजा करनेसे मनुष्य कभी दुर्गतिमें नहीं पड़ता। अन्तकेश्वरसे पूर्व, सर्वेश्वरके दक्षिणभागमें और मातलीश्वरसे उत्तर दिशामें कृत्तिवासेश्वर नामक शिवलिड् है। देवि! कृत्तिवासेश्वरका दर्शन और पूजन करके मनुष्य एक ही जन्ममें शिवके समीप परम गति प्राप्त कर लेता है। सत्ययुगमें पहले उसका नाम “त्र्यम्बकेश्वर' था, त्रेतामें वही “कृत्तिवासेश्वरर के नामसे प्रसिद्ध

English

"He alone shall be the husband of a woman, with whom she shares the same seat. No one else, so we hear in the Puranas and Agamas.

अध्याय १५४

श्लोक 9

कृतप्रणामः संपृष्टः प्राह राजानमादरात् ।राजन्नुपागता नष्टा दिहिता तव मानद

kṛtapraṇāmaḥ saṃpṛṣṭaḥ prāha rājānamādarāt / rājannupāgatā naṣṭā dihitā tava mānada

हिन्दी अर्थ

हुआ। द्वापरमें उन्हीं भगवान् शिवका नाम 'महेश्वर' कहा जाता है तथा कलियुगमें सिद्ध पुरुष उन्हें हस्तिपालेश्वर' कहते हैं। यदि सनातन मोक्षप्रद तारकज्ञान प्राप्त करनेकी इच्छा हो तो बारंबार

English

I had occupied her back with delight alongwith this Brahmana. Hence, in my opinion he must be my husband, according to Dharma.

अध्याय १५४

श्लोक 10

रत्नावलीति विख्याता सस्त्रीकद्विदजसंयुता ।पुरबाह्ये स्थिता दृष्टा मया ज्ञाता न चाभवत्

ratnāvalīti vikhyātā sastrīkadvidajasaṃyutā / purabāhye sthitā dṛṣṭā mayā jñātā na cābhavat

हिन्दी अर्थ

भगवान् कृत्तिवासेश्वरका दर्शन करना चाहिए। उन देवाधिदेवका दर्शन करनेसे ब्रह्महत्यारा भी पापमुक्त हो जाता है। उनका स्पर्श और पूजन करनेपर सम्पूर्ण यज्ञोंका फल मिलता है। जो उन सनातन महादेवजीका बड़ी श्रद्धासे पूजन करते हैं और फाल्गुन कृष्णा चतुर्दशीको एकाग्रचित्त हो

English

Hence, dear father, console this lady and give me to the Brahmana in accordance with the injunctions in the Agamas and other scriptural texts. I do not wish to choose any other husband."

अध्याय १५४

श्लोक 11

तयाहं प्रेरितः प्रागां त्वां विज्ञापयितुं प्रभो ।अविप्लुताहं वदति मां जानातु समागताम्

tayāhaṃ preritaḥ prāgāṃ tvāṃ vijñāpayituṃ prabho / aviplutāhaṃ vadati māṃ jānātu samāgatām

हिन्दी अर्थ

भक्ष्यपदार्थ दूध, दही, घी, मधु और जलसे उस उत्तम शिवलिड्गका अर्चन तथा डमरूके डिंडिम

English

On hearing these words of his daughter, Sudyumna the king, consoled the ogress in the form of the lady of slender waist. He stood bowing down with humility.

अध्याय १५४

श्लोक 12

पितरं मम सत्कृत्यै नात्र कार्या विचारणा ।तदद्भुतं वचः श्रुत्वा पुरपालस्य तत्क्षणात्

pitaraṃ mama satkṛtyai nātra kāryā vicāraṇā / tadadbhutaṃ vacaḥ śrutvā purapālasya tatkṣaṇāt

हिन्दी अर्थ

घोष, नमस्कार, नृत्य, गीत, अनेक प्रकारके मुखवाद्य, स्तोत्र एवं मन्त्रोंद्वारा शुभस्वरूप भगवान् शिवको तृप्त करते हैं और मोहिनी! एक रात उपवास करके परम भक्तिभावसे पूजन करके श्रीमहादेवजीको संतुष्ट करते हैं, वे परम पदको प्रात्त कर लेते हैं।

English

"This, my daughter, afraid of losing her merits (Dharma), has sought refuge in you alone. For that reason O chaste woman, your previous husband was killed by you.

अध्याय १५४

श्लोक 13

सामात्यः सकलत्रस्तु सद्विजो निर्ययौ नृपः ।स तु गत्वा पुराद्ब्राह्ये गङ्गातीरे व्यवस्थिताम्

sāmātyaḥ sakalatrastu sadvijo niryayau nṛpaḥ / sa tu gatvā purādbrāhye gaṅgātīre vyavasthitām

हिन्दी अर्थ

जो चैत्र मासकी चतुर्दशीको परमेश्वर शिवकी पूजा करता है, वह धनके स्वामी कुबेरके समीप जाकर उन्हींकी भाँति क्रीड़ा करता है। जो वैशाखकी चतुर्दशीको पवित्रचित्तसे भगवान् शिवकी अर्चना

English

Hence, O gentle lady, she has become one subservient to you. This, my daughter wishes to have as her husband the same gentleman who had been made by you your husband.

अध्याय १५४

श्लोक 14

अपश्यद्भास्कराकारां सस्त्रीकद्विजसंयुताम् ।सहजे नैव वेषेण भूषितां भूषणप्रियाम्

apaśyadbhāskarākārāṃ sastrīkadvijasaṃyutām / sahaje naiva veṣeṇa bhūṣitāṃ bhūṣaṇapriyām

हिन्दी अर्थ

करता है, वह स्वामिकार्तिकेयके लोकमें जाकर उन्हींका अनुचर होता है। जो ज्येष्ठ मासकी चतुर्दशीको श्रद्धापूर्वक भगवान् शद्भूरकी पूजा करता है, वह स्वर्गलोकमें जाता है और प्रलयकाल आनेतक वहाँ निवास करता है। भद्रे! जो आषाढ़ मासकी चतुर्दशीको पवित्रभावसे कृत्तिवासेश्वर शिवकी पूजा करता है, वह सूर्यलोकमें जाकर इच्छानुसार क्रीड़ा करता है। जो श्रावणकी चतुर्दशीको वहाँ प्रकट

English

O Ogress, you have been requested by me by means of obeisances and gifts. O lady of beautiful eyes, give your consent to my daughter by extending your help to her.

अध्याय १५४

श्लोक 15

अम्लानकुसुमप्रख्यां तत्पकाञ्चनसुप्रभाम् ।दूराद्दृष्ट्वान्तिकं गत्वा पर्यष्वजत भूपतिः

amlānakusumaprakhyāṃ tatpakāñcanasuprabhām / dūrāddṛṣṭvāntikaṃ gatvā paryaṣvajata bhūpatiḥ

हिन्दी अर्थ

हुए कामेश्वर शिवकी पूजा करता है, उसे भगवान् शिव वरुणलोक देते हैं। जो भाद्रपद मासकौ चतुर्दशीको भाँति-भाँतिके पुष्पों और फलोंद्वारा भगवान् शट्डरकी पूजा करता है, उसे इन्द्रका

English

At your instance, may my daughter be even the hand-maid of the Brahmana. Eschew the feelings of rivalry common among co-wives and protect my daughter.

अध्याय १५४

श्लोक 16

पितरं सापि संहृष्टा समाश्लिष्य ननाम ह ।ततश्च मात्रा संगम्य हृष्टया हर्षितान्तरा

pitaraṃ sāpi saṃhṛṣṭā samāśliṣya nanāma ha / tataśca mātrā saṃgamya hṛṣṭayā harṣitāntarā

हिन्दी अर्थ

सालोक्य प्राप्त होता है। जो आश्विन कृष्णा चतुर्दशीको भगवान् शिवकी पूजा करता है, वह पितरोंके लोकमें जाता है। जो कार्तिक मासकी चतुर्दशीको देवेश्वर महादेवजीकी पूजा करता है, वह चन्द्रलोकमें जाकर जबतक इच्छा हो, तबतक वहाँ क्रीड़ा करता है। जो मार्गशीर्ष कृष्णा चतुर्दशीको पिनाकधारी भगवान् शिवकी पूजा करता है, वह भगवान् विष्णुके लोकमें जाता है और वहाँ अनन्त कालतक

English

"O excellent king, since you bowed to me with pure feelings, may this lady be the second wife of the Brahmana.

अध्याय १५४

श्लोक 17

प्राह वाक्यं विशालाक्षी संबोध्य पितरं नृपम् ।सुप्ताहं रत्नशालायां सखीभिः परिवारिता

prāha vākyaṃ viśālākṣī saṃbodhya pitaraṃ nṛpam / suptāhaṃ ratnaśālāyāṃ sakhībhiḥ parivāritā

हिन्दी अर्थ

क्रौड़ा-सुखमें निमग्र रहता है। जो पौष मासमें प्रसन्नचित्त होकर भगवान् शिवकी अर्चना करता है, वह नैर्क्रत्यलोकमें जाता है और निर्क्रतिके

English

In the bright half of the month of Phalguna, I must be worshipped in the temple by you alongwith all the citizens.

अध्याय १५४

श्लोक 18

उदकूकृत्वा शिरस्ताताधौताङ्घ्रिर्मञ्चकोपरि ।चिन्तयत्नी भर्तृयोगं निशीथे रक्षसा हृता

udakūkṛtvā śirastātādhautāṅghrirmañcakopari / cintayatnī bhartṛyogaṃ niśīthe rakṣasā hṛtā

हिन्दी अर्थ

साथ ही आनन्दका अनुभव करता है। जो माघ मासमें सुन्दर पुष्प एवं मूल-फल आबदिके द्वारा भगवान् शद्भूरकी आराधना करता है, वह संसार- सागरका त्याग करके भगवान् शिवके लोकमें जाता है। अत: यदि शिवधाममें जानेकी इच्छा हो तो यल्रपूर्वक कृत्तिवासेश्वरका पूजन तथा अविमुक्त-क्षेत्रमें निवास करना चाहिए। काशीमें व्यासेश्वरके पश्चिम घण्टाकर्ण (या कर्णघण्टा)

English

Oblations of intoxicating beverages, meat, blood, etc. must be given in the course of worship. If you continue to do in this manner I shall always be the cause of your welfare. O leading king, keep your own words."

अध्याय १५४

श्लोक 19

स मां गृहीत्वा स्वपुरं प्रागादर्णवगे गिरौ ।नानारत्नमये तत्र गुहायां स्थापिता ह्यहम्

sa māṃ gṛhītvā svapuraṃ prāgādarṇavage girau / nānāratnamaye tatra guhāyāṃ sthāpitā hyaham

हिन्दी अर्थ

नामक सरोवर है। देवि! उस सरोवरमें स्नान करके व्यासेश्वरका दर्शन करनेसे मनुष्यकी जहाँ- कहीं भी मृत्यु हो, उसे काशीमें मरनेका ही फल प्राप्त होता है। मोहिनी! यदि मनुष्य दण्डघात-

English

She lovingly spoke to the Brahmana "O excellent Brahmana, make this splendid princess also your wife in the manner laid down in the Grhya texts.

अध्याय १५४

श्लोक 20

स तत्रोद्वहनोपायचिन्तयान्तर्व्यवस्थितः ।तस्य भार्या त्वियं सुभ्रूर्या तिष्ठति सुमध्यमा

sa tatrodvahanopāyacintayāntarvyavasthitaḥ / tasya bhāryā tviyaṃ subhrūryā tiṣṭhati sumadhyamā

हिन्दी अर्थ

तीर्थमें स्नान करके अपने पितरोंका तर्पण करे तो उसके नरक-निवासी पितर वहाँसे निकलकर पितृलोकमें चले जाते हैं। देवि! जो पापकर्मी मनुष्य पिशाचयोनिको प्राप्त हो गये हैं, उनके लिये यदि वहाँ पिण्डदान किया जाय तो उनका उस पिशाच-शरीरसे उद्धार हो जाता है। उस घातके दर्शनसे मानव कृतकृत्य हो जाता है। वहीं लोकको कल्याण प्रदान करनेवाली ललितादेवी

English

Then I heard thus — "O gentle lady, your husband

अध्याय १५४

श्लोक 21

बिभ्रती मानुषं रूपं राक्षसी राक्षसप्रिया ।अनया बुद्धियोगेन शक्त्या शक्रस्य भूपते

bibhratī mānuṣaṃ rūpaṃ rākṣasī rākṣasapriyā / anayā buddhiyogena śaktyā śakrasya bhūpate

हिन्दी अर्थ

विद्यमान हैं। यह मनुष्य-जन्म दुर्लभ है। विद्युत्पातके समान चञ्जल है, उसे पाकर जिसने ललितादेवीका दर्शन कर लिया, उसे जन्मका भय कहाँसे हो सकता है ? पृथ्वीकी परिक्रमा करके मनुष्य जिस

English

O blessed lady, in case of woman the riches in¬ herited from parents are fickle and unsteady. It is stated that the riches earned by her husband are permanent.

अध्याय १५४

श्लोक 22

घातितो विप्रहस्तेन क्रूरकर्मा पतिः स्वकः ।पुरैव मम तं शैलं प्राप्तो देवेन भूसुरः

ghātito viprahastena krūrakarmā patiḥ svakaḥ / puraiva mama taṃ śailaṃ prāpto devena bhūsuraḥ

हिन्दी अर्थ

फलको पाता है, वही फल उसे काशीमें ललितादेवीके दर्शनसे मिल जाता है। प्रत्येक मासकी चतुर्थीको उपवास करके ललितादेवीकी पूजा और उनके समीप रातमें जागरण करे। देवि! ऐसा करनेसे उसे सम्पूर्ण समृद्धियाँ प्राप्त होती हैं। मोहिनी! तीनों लोकोंद्वारा पूजित नलकूबरकेश्वर सब सिद्धियोंके दाता हैं। उनकी पूजा करके मनुष्य कृतकृत्य हो जाता है। देवि! उनके दक्षिणभागमें मणिकर्णाी

English

He had once been rebuked by you with harsh words. How can you dare to speak to him now? Your entry

अध्याय १५४

श्लोक 23

इयं तु राक्षसी दृष्ट्वा पतिं स्वं धर्मदूषकम् ।विप्रेण संविदं कृत्वा दांपत्ये निजकर्मणा

iyaṃ tu rākṣasī dṛṣṭvā patiṃ svaṃ dharmadūṣakam / vipreṇa saṃvidaṃ kṛtvā dāṃpatye nijakarmaṇā

हिन्दी अर्थ

नामसे प्रसिद्ध शिवलिड्र है। उसके आगे एक महान् तीर्थ (जलाशय) है, जो सब पापोंका नाश

English

How can he who had been wickedly abandoned by me believe me now." Even as I was thinking thus in my perturbed mind, the palanquin surrounded by kinsmen arrived there. It was tender and elegant. It shone with an umbrella resembling the moon in lustre. Deer skins were spread within it. Stout men bore it on their shoulders.

अध्याय १५४

श्लोक 24

रूपेणाप्यस्य संमुग्धा घातयामास राक्षसम् ।एवं कृत्वा पतिं विप्रं हस्तिनीरूपधारिणी

rūpeṇāpyasya saṃmugdhā ghātayāmāsa rākṣasam / evaṃ kṛtvā patiṃ vipraṃ hastinīrūpadhāriṇī

हिन्दी अर्थ

करनेवाला है। भगवान् मणिकर्णीश्वर कुण्डमें विराजमान हैं। उनका दर्शन, नमस्कार और पूजन करनेसे फिर गर्भमें निवास नहीं करना पड़ता। मणिकर्णीश्वरके दक्षिण पार्श्वमें गड्राजीके जलमें स्थापित परम उत्तम गड़्ेश्वरलिड्भ है। उसकी पूजा करनेसे देवलोककी प्राप्ति होती है।

English

O fair-faced lady, we had been sent by your husband immediately after his arrival, to fetch you who have been staying in the house of your parents."

अध्याय १५४

श्लोक 25

गृहीत्वा वास्तुकं वित्तं पृष्ठमारोप्य मामपि ।समायातात्र भूपाल मामत्तुं तव मन्दिरम्

gṛhītvā vāstukaṃ vittaṃ pṛṣṭhamāropya māmapi / samāyātātra bhūpāla māmattuṃ tava mandiram

हिन्दी अर्थ

मोहिनी! अब मैं काशीके दूसरे मन्दिरका वर्णन करता हूँ, जहाँ देवाधिदेव महादेवजीका रुचिर एवं अभीष्ट स्थान है। सुभगे! पूर्वकालमें कुछ राक्षस भगवान् चन्द्रमौलिका शुभ लिड्र साथ

English

O gentle lady, on noting that act of my husband I became ashamed. I did not say anything in reply to them. I remained silent.

अध्याय १५४

श्लोक 26

अनया रक्षिता राजन् राक्षस्याराक्षसात्ततः ।तस्मादिमां पूजयस्व सत्कृत्याग्रजसंयुताम्

anayā rakṣitā rājan rākṣasyārākṣasāttataḥ / tasmādimāṃ pūjayasva satkṛtyāgrajasaṃyutām

हिन्दी अर्थ

ले अन्तरिक्ष-मार्गसे बड़ी उतावलीके साथ जा रहे थे। जिस समय वह शिवलिज्ग इस काशी- क्षेत्रमें पहँचा, उस समय महादेवजीने सोचा- ' क्या उपाय किया जाय, जिससे मेरा अविमुक्तक्षेत्रसे वियोग न हो।' शुभे! देवेश्वर भगवान् शिव इस बातका विचार कर ही रहे थे कि उस स्थानपर मुर्गेका शब्द सुनायी दिया। देवि! उस शब्दको सुनकर राक्षसोंके मनमें भय समा गया और वे

English

O daughter, if the wife does not rejoin her husband when invited (to do so) she is born as a female crow for fifteen births."

अध्याय १५४

श्लोक 27

अस्या एवामुमत्या मां देह्यस्मै ब्राह्मणाय हि ।अनेनैकासनगता जाता भर्ता स मे भवत्

asyā evāmumatyā māṃ dehyasmai brāhmaṇāya hi / anenaikāsanagatā jātā bhartā sa me bhavat

हिन्दी अर्थ

प्रातःकाल उस शिवलिड्गको वहीं छोड़कर वहाँसे भाग गये। राक्षसोंके चले जानेपर वहीं अत्यन्त रुचिर एवं सुन्दर स्थानमें वह लिड्भ स्थित हुआ। साक्षात् देवदेव भगवान् शिव उस अविमुक्त्षेत्रमें

English

They said thus and assuaged my grief. They took me hurriedly and made me sit in the palanquin with affection, they repeatedly said, 'Go'.

अध्याय १५४

श्लोक 28

येनैकासनगा नारी भवेद्भर्ता स एव हि ।नान्य इत्थं पुराणेषु श्रूयते ह्यागमेष्वपि

yenaikāsanagā nārī bhavedbhartā sa eva hi / nānya itthaṃ purāṇeṣu śrūyate hyāgameṣvapi

हिन्दी अर्थ

उस शिवलिड्के रूपमें विराजमान हुए। इसीलिये उसे “अविमुक्त' कहते हैं। उस समय देवताओंने महादेवजीका नाम “अविमुक्त” रख दिया, जो परम पवित्र अक्षरोंसे युक्त है। जो प्राणी वहाँ मृत्युको प्राप्त होते हैं, वे स्थावर हों या जड्डभम, उन सबको वह शिवलिड्ड मोक्ष देनेवाला है। भगवान् अविमुक्तके दक्षिण भागमें एक सुन्दर बावड़ी है, उसका जल पीनेसे इस लोकमें पुनरावृत्ति

English

Thereafter those men placed the palanquin on their shoulders and started immediately with speed. They reached the city of Mahodaya where my husband was staying.

अध्याय १५४

श्लोक 29

अस्याः पृष्ठे निविष्टाहं प्रीत्या सह द्विजन्मना ।धर्मत स्तेन मद्भर्ता भवेदेषा मतिर्मम

asyāḥ pṛṣṭhe niviṣṭāhaṃ prītyā saha dvijanmanā / dharmata stena madbhartā bhavedeṣā matirmama

हिन्दी अर्थ

नहीं होती। जिन मनुष्योंने उक्त बावड़ीका जल पीया है, वे क॒तार्थ हैं। उन्हें निश्चय ही तारक- ज्ञान प्राप्त होता है। मनुष्य बावड़ीके जलमें स्नान करके यदि दण्डकेश्वर एवं अविमुक्तेश्वरका दर्शन

English

Thereafter, soon after sunset my husband called me and immediately clasped me within his arms. He made me sit on the couch and kept me within his embrace for a long time.

अध्याय १५४

श्लोक 30

तस्मादिमां सांत्वयित्वा शास्त्रागमविधानतः ।देहि विप्राय मां तात पितमन्यं वृणे न च

tasmādimāṃ sāṃtvayitvā śāstrāgamavidhānataḥ / dehi viprāya māṃ tāta pitamanyaṃ vṛṇe na ca

हिन्दी अर्थ

करे तो वह क्षणमात्रमें कैवल्य-मोक्षका भागी होता है। काशीपुरी, श्मशानघाट, अविमुक्तस्थान और अपिमुक्तेश्वर लिड़का दर्शन करके मनुष्य शिवगणोंका अधिपति होता है। अविमुक्तेश्वर लिड्रका दर्शन करनेसे मानव सम्पूर्ण पापों, रोगों तथा पशुपाश (जीवके अज्ञानमय बन्धन)-से मुक्त हो

English

Then he called the ogress and the princess and said: ■"Service to this lady's feet should be rendered by both of you with due devotion.

अध्याय १५४

श्लोक 31

तच्छ्रुत्वा दुहितुर्वाक्यं सुद्युम्नो भूपतिस्तदा ।सांत्वयामास तन्वङ्गीं राक्षसीं प्रश्रयानतः

tacchrutvā duhiturvākyaṃ sudyumno bhūpatistadā / sāṃtvayāmāsa tanvaṅgīṃ rākṣasīṃ praśrayānataḥ

हिन्दी अर्थ

अविमुक्तके आगे एक शिवलिड्ड स्थित है, जिसका मुख पश्चिमकी ओर है। भद्रे! वह “लक्षणेश्वर' नामसे विख्यात है। उसके दर्शनमात्रसे मनुष्य ज्ञानी हो जाता है। देवि! उसके उत्तरमें चतुर्मुख

English

She had been my wife previously. Hence she is certainly the eldest and senior-most to both of you." Then at the instance of our husband, my feet were touched by those two ladies.

अध्याय १५४

श्लोक 32

सुतैषा धर्मभीता मे त्वामेव शरणं गता ।यदर्थं निहतः कान्तस्त्वया पूर्वतरः सति

sutaiṣā dharmabhītā me tvāmeva śaraṇaṃ gatā / yadarthaṃ nihataḥ kāntastvayā pūrvataraḥ sati

हिन्दी अर्थ

लिड़् है, जो चतुर्थश्वरके नामसे प्रसिद्ध है। वह श्रेष्ठ शिवलिड़़् पाप-भयका निवारण करनेवाला है। वाराणसी नामक क्षेत्र पृथ्वीपर प्राणियोंके लिये मुक्तिदायक है। उसमें भी अविमुक्तेश्वर तो जीवन्मुक्त कहा गया है (वह जीवन्मुक्ति देनेवाला

English

O lady of beautiful eyes, they eschewed ( completely ) the jealousy and malice originating from the feeling that I am a cowife. Then, my husband called the servants and spoke those

अध्याय १५४

श्लोक 33

त्वदधीना ततो भद्रे जातेयं मत्सुता किल ।इममिच्छति भर्तारं यो ऽयं भर्ता कृतस्त्वया

tvadadhīnā tato bhadre jāteyaṃ matsutā kila / imamicchati bhartāraṃ yo 'yaṃ bhartā kṛtastvayā

हिन्दी अर्थ

है)। काशीमें जहाँ-कहीं भी जो रह चुका है, उसके लिये गणपति-पदकी प्रासि बतायी गयी है और जो वहाँ प्राण-त्याग करता है, वह आत्यन्तिक मोक्षको प्राप्त करता है। उपर्युक्त सीमाके भीतरी

English

Then I attained the torture in the hell assigned to me by Yama. O splendid lady, after covering that period I experi¬ enced anguish and misery and was born as a Kasthila

अध्याय १५४

श्लोक 34

मया प्रणामदानाभ्यां याचिता त्वं निशाचरि ।अनुमोदय साहाय्ये सुतां मम सुलोचने

mayā praṇāmadānābhyāṃ yācitā tvaṃ niśācari / anumodaya sāhāyye sutāṃ mama sulocane

हिन्दी अर्थ

क्षेत्रमें प्रथभथ आवरण बताया गया है। द्वितीय आवरणमें पूर्व दिशामें मणिकर्णिका है। उस स्थानमें सात करोड़ शिवलिड् विद्यमान हैं। उनके दर्शनमात्रसे यज्ञोंका फल प्राप्त होता है। ये सब सिद्ध लिड्ग हैं। काशीमें जो पवित्र कूप, सरोवर, बावड़ी, नदी और कुण्ड कहे गये हैं, वे ही सिद्धपीठ हैं। जो एकाग्रचित्त हो इन सबमें स्नान करेगा और वहाँके शिवलिज्रोंका दर्शन करेगा, वह फिर इस

English

With a great deal of merits the woman goes to the region of Visnu alongwith her husband if her body is cremated alongwith him. But a woman greedy of wealth and of her body (?) attains Yama's torture and the affliction of being bom in base wombs in lower species.

अध्याय १५४

श्लोक 34-2

अङ्गीचकार तत्सर्वं यदुक्तं प्रीतया तया ।प्रतिपन्ने तु वचसि राज्ञा तुष्टा तु राक्षसी

aṅgīcakāra tatsarvaṃ yaduktaṃ prītayā tayā / pratipanne tu vacasi rājñā tuṣṭā tu rākṣasī

हिन्दी अर्थ

संसारमें जन्म नहीं ले सकता। पृथ्वीपर और अन्तरिक्षमें जो-जो तीर्थ हैं, उनमें मुख्य तीर्थोंका मैंने तुमसे वर्णन किया है। वरारोहे ! तीर्थयात्राको सब पापोंका नाश करनेवाली कहा गया है।

English

She accepted all that was said by her with affection. When the king's word was accepted, the pleased she-demon said:

अध्याय १५४

श्लोक 35

त्वद्वाक्याद्भवतु प्रेष्या मत्सुता ब्राह्मणस्य तु ।सापत्नभावं त्यक्त्वा तु सुतां मे परिपालय

tvadvākyādbhavatu preṣyā matsutā brāhmaṇasya tu / sāpatnabhāvaṃ tyaktvā tu sutāṃ me paripālaya

हिन्दी अर्थ

काशी-यात्राका काल, यात्राकालमें यात्रियोंक लिये आवश्यक कृत्य, अवान्तर तीर्थ और शिवलिड्रोंका वर्णन पुरोहित बसु कहते हैं--मोहिनी! अब मैं यात्राकालका वर्णन करता हूँ, जिसे देवता आदिने नियत किया है। वह यात्रा यथायोग्य फलकी प्राप्ति करानेवाली है। पूर्वकालमें देवताओंने काशीमें

English

"By your word let my daughter be the Brahmin's servant; abandoning co-wife rivalry, protect my daughter.

अध्याय १५४

श्लोक 36

सुताया मम भार्याया मद्बलस्य जनस्य च ।पुरस्य विषयस्यापि स्वामिनी त्वं न संशयः

sutāyā mama bhāryāyā madbalasya janasya ca / purasya viṣayasyāpi svāminī tvaṃ na saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

रहकर चैत्र मासमें यह तीर्थयात्रा की थी। वे कामकुण्डपर स्थित होकर स्रान एवं पूजनमें तत्पर रहते थे। शुभानने! ज्येष्ठ मासमें रुद्रावास कुण्डपर स््रान-पूजामें तत्पर रहनेवाले सिद्धोंने

English

You are, without doubt, mistress of my daughter, of my wife, of my powerful people, of the city and the realm.

अध्याय १५४

श्लोक 37

तव वाक्ये स्थिता ह्येषा सदैवापि भविष्यति ।एतच्छ्रुत्त्वा तु वचनं सुद्युम्नस्य निशाचरी

tava vākye sthitā hyeṣā sadaivāpi bhaviṣyati / etacchruttvā tu vacanaṃ sudyumnasya niśācarī

हिन्दी अर्थ

वहाँकी शुभ यात्रा की है। गन्धवोंने आषाढ़ मासमें यहाँकी यात्रा की थी। वे प्रियादेवी- कुण्डपर रहकर स्रान-पूजन किया करते थे। मोहिनी! विद्याधरोंने श्रावण मासमें यह यात्रा की थी। वे लक्ष्मीकुण्डपर रहकर स्नान-पूजन करते थे। वरानने! यक्षोंने आश्विन मासमें यह यात्रा सम्पन्न की है। वे मार्कण्डेय-कुण्डपर रहकर

English

She will always stay by your word." Hearing that, Sudyumna's night-ranging companion

अध्याय १५४

श्लोक 38

अन्वमोदत शुद्धेन चेतसा सहचारिणी ।उवाच च धरापालं प्रदानाय कृतोद्यमम्

anvamodata śuddhena cetasā sahacāriṇī / uvāca ca dharāpālaṃ pradānāya kṛtodyamam

हिन्दी अर्थ

स्नान-पूजनमें संलग्न थे। मोहिनी ! नागोंने मार्गशीर्ष मासमें यह यात्रा की है। वे कोटितीर्थमें रहकर स्नान-पूजन आदि करते थे। शुभलोचने ! गुद्यकोंने कपालमोचनतीर्थमें रहकर स्रान-ध्यान एवं पूजन

English

with a pure heart approved, and said to the king who was ready to give:

अध्याय १५४

श्लोक 39

यदर्थं प्रणतस्त्वं मां सद्भावेन नृपोत्तम ।तस्माद्द्वितीया भार्येयं भवत्वस्य द्विजन्मनः

yadarthaṃ praṇatastvaṃ māṃ sadbhāvena nṛpottama / tasmāddvitīyā bhāryeyaṃ bhavatvasya dvijanmanaḥ

हिन्दी अर्थ

आदि करते हुए पौष मासमें यहाँकी यात्रा सम्पन्न की है। शोभने! पिशाचोंने फाल्गुन मासमें काशीकी यात्रा की थी। वे कालेश्वर-कुण्डपर रहकर स्रान-पूजन आदियमें तत्पर रहते थे। देवि! शुभ फाल्गुन मासमें शुक्ल पक्षकी जो चतुर्दशी है, उसीमें पिशाचोंने यात्रा की थी। इसीलिये उसे 'पिशाच-चतुर्दशी ' कहते हैं।

English

"O best of kings, for the reason that you bowed to me with good feeling, let this be the second wife of this twice-born.

अध्याय १५४

श्लोक 40

अहं च भवता पूज्या कृत्वार्चां देवमन्दिरे ।सर्वैश्च नागरैः सार्द्धं फाल्गुने धवले दले

ahaṃ ca bhavatā pūjyā kṛtvārcāṃ devamandire / sarvaiśca nāgaraiḥ sārddhaṃ phālgune dhavale dale

हिन्दी अर्थ

शुभानने! अब मैं यात्राका आवश्यक कृत्य बतलाऊँगा, जिसके करनेसे मनुष्य यात्राका फल पाता है। यात्राके समय जलसे भरे हुए सुन्दर घड़ोंको वस्त्रसे ढककर फल, फूल और

English

And I should be worshipped by you, having made worship in the temple of the goddess, with all citizens, in the bright fortnight of Phalguna:

अध्याय १५४

श्लोक 41

सप्ताहमुत्सवः कार्यो ह्यष्टम्या आचतुर्दशीम् ।नटनर्तकयुक्तेन गीतवाद्येन भूरिणा

saptāhamutsavaḥ kāryo hyaṣṭamyā ācaturdaśīm / naṭanartakayuktena gītavādyena bhūriṇā

हिन्दी अर्थ

मिष्ठान्कें साथ उनका दान करना चाहिए। चैत्रके शुक्लपक्षमें महान् फल देनेवाली जो तृतीया है, उसमें मनुष्योंको भक्तिभावसे गौरी- देवीका दर्शन करना चाहिए। वरानने! स्नान करके गोप्रेक्षतीर्थमें जाना चाहिए और स्वर्गद्वारमें जो कालिका देवी हैं, उनकी यत्रपूर्वक पूजा करनी चाहिए। उनके सिवा संवर्ता और ललिता भी श्रेष्ठ एवं कल्याणमयी देवी कही

English

a festival of seven days from the eighth to the fourteenth with actors, dancers, abundant song and music,

अध्याय १५४

श्लोक 42

मैरेयमांसरक्तादिबलिभिश्चापि पूजया ।एवं प्रकुर्वते तुभ्यं सदा क्षेमकरी ह्यहम्

maireyamāṃsaraktādibalibhiścāpi pūjayā / evaṃ prakurvate tubhyaṃ sadā kṣemakarī hyaham

हिन्दी अर्थ

गयी हैं, उनका भी भक्तिभावसे दर्शन करना

English

and with worship by offerings of mead, meat and blood. Thus doing for you I shall always bring welfare,

अध्याय १५४

श्लोक 43

भवेयं नृपशार्दूल स्वं वचः प्रतिपालय ।तच्छ्रुत्वा वचनं तस्याः सुद्युम्नो नृपतिस्तदा

bhaveyaṃ nṛpaśārdūla svaṃ vacaḥ pratipālaya / tacchrutvā vacanaṃ tasyāḥ sudyumno nṛpatistadā

हिन्दी अर्थ

चाहिए। वे सम्पूर्ण कामनाओंका फल देनेवाली हैं। तदनन्तर पवित्र ब्रतका पालन करनेवाले शिवभक्त ब्राह्मगोंको भोजन कराना और बत्त्र तथा भरपूर दक्षिणाद्वारा उनका यथायोग्य सत्कार अब मैं उन विनायकोंका परिचय देता हूँ, जो काशीक्षेत्रके निवासमें विपज्न डालनेवाले हैं। देवि! उनका पूजन करके मनुष्य काशीवासका निर्विघ्न फल प्राप्त करता है। पहले ढुंढिविनायक,

English

O tiger among kings; keep your word." Hearing her words King Sudyumna

अध्याय १५४

श्लोक 45

उवाच ब्राह्मणं प्रेम्णा कुरु भार्यामिमामपि ।राजकन्यां द्विजश्रेष्ठ गृह्योक्तविधिना शुभाम्

uvāca brāhmaṇaṃ premṇā kuru bhāryāmimāmapi / rājakanyāṃ dvijaśreṣṭha gṛhyoktavidhinā śubhām

हिन्दी अर्थ

फिर किलविनायक, देवीविनायक, गोप्रेक्षविनायक, हस्तिहस्तीविनायक तथा सिन्दूर्यविनायकका दर्शन

English

said lovingly to the Brahmin: "Take this king's daughter also as wife, O best of Brahmins, auspicious, by the rule stated in the domestic texts.

अध्याय १५४

श्लोक 46

ईर्ष्यां त्यक्त्वा विशालाक्ष्या भवाम्येषा सहोदरी ।राक्षस्या वचनेनेह परिणीय नृपात्मजाम्

īrṣyāṃ tyaktvā viśālākṣyā bhavāmyeṣā sahodarī / rākṣasyā vacaneneha pariṇīya nṛpātmajām

हिन्दी अर्थ

करना चाहिए। देवि! चतुर्थीको इन सभी विनायकोंका दर्शन करे और इनकी प्रसन्नताके लिये ब्राह्मगको मिठाई खिलावे। इस कार्यसे मनुष्यको सिद्धि प्राप्त होती है। अब मैं काशीक्षेत्रकी रक्षा करनेवाली चण्डिकाओंका वर्णन करता हूँ। दक्षिण दिशामें दुर्गा रक्षा करती हैं। नैर्ऋ्रत्य कोणमें अन्तरेश्वरी, पश्चिममें अड्भरेथ्वरी, वायव्य कोणमें भद्रकाली,

English

Giving up jealousy, I shall be a sister to this wide-eyed one." By the she-demon's word, having married the king's daughter,

अध्याय १५४

श्लोक 47

बहुवित्तयुतां विप्रो महोदयपुरं ययौ ।आरुह्य करिणीरूपां राक्षसीं क्षणमात्रतः

bahuvittayutāṃ vipro mahodayapuraṃ yayau / āruhya kariṇīrūpāṃ rākṣasīṃ kṣaṇamātrataḥ

हिन्दी अर्थ

उत्तर दिशामें भीमचण्डा, ईशानकोणमें महामत्ता, पूर्व दिशामें ऊर्ध्वकेशीसहित शाड्डूरीदेवी, अग्निकोणमें अध:केशी तथा मध्यभागमें चित्रघण्टादेवी रक्षा करती हैं। जो मानव इन चण्डिका देवियोंका

English

the Brahmin, with much wealth, went to Mahodayapura, climbing on the she-demon in her elephant form, in a moment.

अध्याय १५४

श्लोक 48

ततो मया श्रुतं देवि भर्ता ते समुपागतः ।धनरत्नसमायुक्तो भार्याद्वयसमन्वितः

tato mayā śrutaṃ devi bhartā te samupāgataḥ / dhanaratnasamāyukto bhāryādvayasamanvitaḥ

हिन्दी अर्थ

दर्शन करता है, उसपर प्रसन्न होकर वे सब-कौ- सब तत्परतापूर्वक उसके लिये क्षेत्रकी रक्षा करती हैं। देवि! ये पापियोंके लिये सदा विप्र उपस्थित करती हैं, अत: रक्षाके लिये विनायकोंसहित उक्त देवियोंकी सदा पूजा करनी चाहिए।

English

Then I heard, goddess, that your husband had arrived, joined with wealth and jewels, with two wives.

अध्याय १५४

श्लोक 49

ततो ऽहं बन्धुवर्गेण पितृभ्यां च सखीगणैः ।बहुशो भर्त्सिता रूक्षैर्वचनैर्मर्मभेदिभिः

tato 'haṃ bandhuvargeṇa pitṛbhyāṃ ca sakhīgaṇaiḥ / bahuśo bhartsitā rūkṣairvacanairmarmabhedibhiḥ

हिन्दी अर्थ

भीष्मजी काशीपुरीमें आकर उत्तम पञ्चायतनरूपसे देवेश्वर शिवकी आराधना करते हुए कुछ कालतक यहाँ रहे। सुभगे! उस स्थानपर भगवान् शिव स्वयं प्रकट हुए थे, जो “गोप्रेक्षक' के नामसे

English

Then I was reproached many times by relatives, parents and friends with harsh words that pierced the vitals:

अध्याय १५४

श्लोक 50

कथं यास्यसि भर्तारं धनलुब्धे श्रिया वृतम् ।यस्त्वया निर्द्धनः पूर्वं परित्यक्तः सुदीनवत्

kathaṃ yāsyasi bhartāraṃ dhanalubdhe śriyā vṛtam / yastvayā nirddhanaḥ pūrvaṃ parityaktaḥ sudīnavat

हिन्दी अर्थ

विख्यात हुए। सम्पूर्ण देवता उनकी स्तुति करते हैं। गोप्रेक्षेध्रके पास आकर उनका दर्शन और पूजन करके मनुष्य कभी दुर्गतिमें नहीं पड़ता और सब पापोंसे मुक्त हो जाता है। एक समय वनकी गौए दावानलसे दग्ध हो इधर-उधर भटकती हुई इस कुण्डके समीप आयी और यहाँका जल पीकर शान्त हुईं। तबसे यह “कपिलाहद' कहलाता है। यहाँ प्रकट होकर

English

"How will you go to your husband, greedy for wealth, surrounded by prosperity, whom you earlier abandoned as poor, as a wretch?

अध्याय १५४

श्लोक 51

चञ्चलानीह वित्तानि पित्र्याणि किल योषिताम् ।कान्तार्जितानि सुभगे स्थिराणीति निगद्यते

cañcalānīha vittāni pitryāṇi kila yoṣitām / kāntārjitāni subhage sthirāṇīti nigadyate

हिन्दी अर्थ

साक्षात् भगवान् शिव 'वृषध्वज' नामसे विख्यात हुए। भगवान् शिवने न केवल वहाँ निवास किया, वे वहाँ सबको प्रत्यक्ष दर्शन देते हुए शिवलिड्डरूपमें विराजमान हैं। जो एकाग्रचित्त हो

English

Wealth is fickle; the fathers' property of women, it is said, is steady when earned by the husband."

अध्याय १५४

श्लोक 52

परुषैर्वचनैर्यस्तु क्षिप्तस्तद्भाषणं कथम् ।भविष्यति प्रवेशो ऽपि दुष्करस्तस्य वेश्मनि

paruṣairvacanairyastu kṣiptastadbhāṣaṇaṃ katham / bhaviṣyati praveśo 'pi duṣkarastasya veśmani

हिन्दी अर्थ

इस कपिलाहद-तीर्थमें स्नान करके वृषध्वज शिवका दर्शन करता है, वह सम्पूर्ण यज्ञोंका फल पाता है। वह स्वर्गलोकमें जाता है। भगवान् वृषध्वजकी पूजा करके वहाँ मरा हुआ पुरुष शिवरूप हो जाता है। अथवा शरीर-भेदसे

English

"How could he speak to one whom he rebuked with harsh words? Even entering his house will be difficult for him.

अध्याय १५४

श्लोक 53

गताया अपि ते तत्र शयनं पतिना सह ।भविष्यति दुराचारे सुखदं न कदाचन

gatāyā api te tatra śayanaṃ patinā saha / bhaviṣyati durācāre sukhadaṃ na kadācana

हिन्दी अर्थ

अत्यन्त दुर्लभ शिवगणका स्वरूप धारण करता है। इसी प्रदेशमें गौओंने स्वयं ब्रह्माजीके अनुरोधसे सम्पूर्ण लोकोंकी शान्तिके लिये तथा सबको पवित्र करनेके उद्देश्य्से अपना दुग्ध दान किया

English

Even if you go there, sleeping with the husband will never be pleasant, O ill-conducted one.

अध्याय १५४

श्लोक 54

लोकापवादाद्यदि चेद्ग्रहीष्यति पतिस्तव ।त्वां स्नेहहीनचित्तस्तु न कदाचिन्मिलिष्यति

lokāpavādādyadi cedgrahīṣyati patistava / tvāṃ snehahīnacittastu na kadācinmiliṣyati

हिन्दी अर्थ

था; जिससे “ भद्रदोह ' नामक सरोवर प्रकट हुआ, जो पवित्र, पापहारी एवं शुभ है। उस स्थानमें स्नान करनेवाला मनुष्य साक्षात् वागीश्वर होता है। वहाँ परमेष्ठी ब्रह्माजीनी स्वयं ले आकर एक शिवलिड्गज स्थापित किया है। फिर ब्रह्माजीसे लेकर भगवान् विष्णुने दूसरा शिवलिड्ड स्थापित किया, जो 'हिरण्यगर्भ' के नामसे वहाँ विद्यमान है। तदनन्तर ब्रह्माजीनी पुनः इसी कारणसे

English

If your husband takes you for fear of public blame, with a heart devoid of love he will never meet you.

अध्याय १५४

श्लोक 55

नेदृशं दुःखदं किञ्चिद्यादृशं दूरचित्तयोः ।दंपकत्योर्मिलनं लोके वैकल्यकरणं महत्

nedṛśaṃ duḥkhadaṃ kiñcidyādṛśaṃ dūracittayoḥ / daṃpakatyormilanaṃ loke vaikalyakaraṇaṃ mahat

हिन्दी अर्थ

स्वर्गीय लीलाका दर्शन करानेवाला है। देवताओंके स्वामी उन स्वलेकिश्वरका दर्शन करके मनुष्य शिवलोकमें प्रतिष्ठित होता है। यहाँ प्राणत्याग करनेसे फिर कभी वह संसारमें जन्म नहीं लेता।

English

Nothing in the world is so painful as the meeting of a couple with distant minds; it causes great disarray."

अध्याय १५४

श्लोक 56

एवं बहुविधा वाचः शृण्वाना बन्धुभाषिताः ।अधोमुख्यस्रुपूर्णाक्षी बभूवाहं सुदुःखिता

evaṃ bahuvidhā vācaḥ śṛṇvānā bandhubhāṣitāḥ / adhomukhyasrupūrṇākṣī babhūvāhaṃ suduḥkhitā

हिन्दी अर्थ

उसकी वह अक्षयगति होती है, जो केवल योगियोंके लिये सुलभ बतायी गयी है। भूमण्डलके उसी प्रदेशमें देवताओंके लिये कण्टकरूप हैत्य व्याप्रका रूप धारण करके रहता था। वह बड़ा बलवान्ू और अभिमानी था। भगवान् शद्भूरने उसे मारा और उस स्थानपर व्याप्रेश्र नामसे प्रसिद्ध होकर नित्य निवास किया। उन देवेश्वरका दर्शन करके मनुष्य कभी

English

Hearing many such words from relatives, with face down and eyes full of tears, I became very unhappy.

अध्याय १५४

श्लोक 57

चेतसार्चितयं चाहं पूर्वलोभेन मुह्यती ।न दत्तं कङ्कणं पाणेर्न दत्तं कटिसूत्रकम्

cetasārcitayaṃ cāhaṃ pūrvalobhena muhyatī / na dattaṃ kaṅkaṇaṃ pāṇerna dattaṃ kaṭisūtrakam

हिन्दी अर्थ

दुर्गतिमें नहीं पड़ता। हिमवानूके द्वारा स्थापित एक शिवलिडज़़् है, जो 'शैलेश्वर 'के नामसे विख्यात है। भद्रे! शैलेथ्वरका दर्शन करके मनुष्य कभी दुर्गतिमें नहीं पड़ता। उत्पल और विदल नामके

English

Worshipped in mind, but deluded by earlier greed, I had not given my hand's bracelet or girdle,

अध्याय १५४

श्लोक 58

न चापि नूपुरे दत्ते येन तुष्टिं व्रजेत्पतिः ।धनजीवितयोः स्वामी भर्ता लोकेषु गीयते

na cāpi nūpure datte yena tuṣṭiṃ vrajetpatiḥ / dhanajīvitayoḥ svāmī bhartā lokeṣu gīyate

हिन्दी अर्थ

जो दो हैत्य ब्रह्माजीके वरदानसे बलोन्मत्त हो रहे थे, वे दोनों स्त्री-विषयक लोलुपताके कारण पार्वतीजीके हाथसे मारे गये। एक शार्ड्रधनुषसे मारा गया और दूसरा कुन्तक अर्थात् भालेसे। इन किये गये हैं। भद्रे! जो मनुष्य श्रेष्ठ स्थानमें विद्यमान उक्त दोनों लिड्रोंका दर्शन करता है, वह जन्म-जन्ममें सिद्ध होकर कभी शोक नहीं करता। देवताओंने उनके सब ओर बहुत-से

English

nor even given anklets, by which a husband would be satisfied. The husband is called the lord of wealth and life in the world.

अध्याय १५४

श्लोक 59

तन्मयापहृतं वित्तं भवित्री का गतिर्मम ।कथं यास्यामि तद्वेश्म कथं संभाषये पुनः

tanmayāpahṛtaṃ vittaṃ bhavitrī kā gatirmama / kathaṃ yāsyāmi tadveśma kathaṃ saṃbhāṣaye punaḥ

हिन्दी अर्थ

शिवलिज्ग स्थापित किये हैं। उनका दर्शन करके मनुष्य देहत्यागके पश्चात् भगवान् शिवका गण होता है। वाराणसी नदी परम पवित्र और सब पापोंका नाश करनेवाली है। यह इस पवित्र

English

"The wealth was taken by me; what will be my fate? How shall I go to his house, how speak with him again?

अध्याय १५४

श्लोक 60

यो मया दुष्टया त्यक्तः स प्रत्येति कथं हि माम् ।एवं विचिंये यादद्धृदयेन विदूयता

yo mayā duṣṭayā tyaktaḥ sa pratyeti kathaṃ hi mām / evaṃ viciṃye yādaddhṛdayena vidūyatā

हिन्दी अर्थ

क्षेत्रतो सुशोभित करके गड़ामें मिली है। उसके सड़मपर ब्रह्माजीने उत्तम शिवलिड्रकी स्थापना की है, जो 'सड्मेश्वर 'के नामसे संसारमें विख्यात है, उसका दर्शन करना चाहिए। शुभे ! जो मानव इन देवनदियोंके सड़ममें स्नान करके सड़मेश्वरका पूजन करता है, उसे जन्म लेनेका भय कैसे हो सकता है ? भद्रे! भृगुपुत्र शुक्राचार्यने यहाँ एक शिवलिड्र स्थापित किया है, जो 'शुक्रेश्वर 'के

English

How will he receive me, whom I, wicked, abandoned?" As I thought so, my heart in pain,

अध्याय १५४

श्लोक 61

वेष्टिता बन्धुवर्गेण तावद्दोला समागता ।छत्रेण शशिवर्णेन शोभमाना सुकोमला

veṣṭitā bandhuvargeṇa tāvaddolā samāgatā / chatreṇa śaśivarṇena śobhamānā sukomalā

हिन्दी अर्थ

नामसे विख्यात है। सम्पूर्ण सिद्ध और देवता भी उसकी पूजा करते हैं। इसका दर्शन करके मनुष्य तत्काल सब पापोंसे मुक्त हो जाता है और मरनेपर फिर इस संसारमें जन्म नहीं लेता।

English

surrounded by relatives, a palanquin arrived, shining, very soft, with an umbrella bright as the moon,

अध्याय १५४

श्लोक 62

आस्तृता राङ्कवैः पीनैः पुरुषोर्विधृतांसकैः ।ते समागत्य पुरुषाः प्रोचुर्मामसकृच्छभे

āstṛtā rāṅkavaiḥ pīnaiḥ puruṣorvidhṛtāṃsakaiḥ / te samāgatya puruṣāḥ procurmāmasakṛcchabhe

हिन्दी अर्थ

मोहिनी ! महादेवजीने यहाँ जम्बुक नामक हैत्यका वध किया था। तत्सम्बन्धी शिवलिड्रका दर्शन करके मानव सम्पूर्ण कामनाओंको प्राप्त कर लेता है। इन्द्र आदि देवताओंके द्वारा स्थापित किये हुए इन शिवलिड्रोंको तुम पुण्यलिड्र समझो। ये समस्त कामनाओंको देनेवाले हैं। मोहिनी! इस प्रकार इस अविमुक्तक्षेत्रमें मैंने तुम्हें ये सब शिवलिड्ग बताये हैं।

English

spread with soft wool, borne on the shoulders of strong men. Those men came and said to me again and again, O auspicious one:

अध्याय १५४

श्लोक 63

आकारितासि पत्या ते व्रज शीघ्रं मुदान्विता ।धनरत्नयुतो भर्ता सद्धिभार्यः समागतः

ākāritāsi patyā te vraja śīghraṃ mudānvitā / dhanaratnayuto bhartā saddhibhāryaḥ samāgataḥ

हिन्दी अर्थ

काशीकी गड़ाके वरणा-संगम, असी-संगम तथा पश्ञगड़ा आदि तीर्थोंका माहात्म्य

English

"You are called by your husband; go quickly, joyful. Your husband has come with wealth and jewels, with a good wife.

अध्याय १५४

श्लोक 64

प्रविष्टमात्रेण गृहे त्वामानेतुं वरानने ।प्रेषिताः सत्वरं पत्या संस्थितां पितृवेश्मनि

praviṣṭamātreṇa gṛhe tvāmānetuṃ varānane / preṣitāḥ satvaraṃ patyā saṃsthitāṃ pitṛveśmani

हिन्दी अर्थ

पुरोहित वसु कहते हैं--भद्रे! अब मैं तुम्हें काशीकी गड्जाका उत्तम माहात्म्य बताता हूँ, जो भोग और मोक्षरूप फल देनेवाला है। अविमुक्त- क्षेत्रमें जो भी कर्म किया जाता है, वह अक्षय हो जाता है। कोई भी पापी अविमुक्तक्षेत्र (काशी )- में जाकर पापरहित हो जानेके कारण कभी नरकमें नहीं पड़ता। शुभे! अविमुक्तक्षेत्रमें किया हुआ पाप वज्रतुल्य हो जाता है। तीनों लोकोंमें जो

English

As soon as he entered the house, we were quickly sent by your husband to fetch you, who are in your father's house."

अध्याय १५४

श्लोक 65

ततो ऽहं व्रीडिता देवि भर्तुस्तद्वीक्ष्य चेष्टितम् ।नैवोत्तरमदां तेभ्यः किञ्चिन्मौनं समास्थिता

tato 'haṃ vrīḍitā devi bhartustadvīkṣya ceṣṭitam / naivottaramadāṃ tebhyaḥ kiñcinmaunaṃ samāsthitā

हिन्दी अर्थ

मोक्षदायक तीर्थ हैं, वे सम्पूर्ण सदा काशीकी उत्तरवाहिनी गड़ाका सेवन करते हैं। जो दशाश्रमेधघाटमें स्नान करके विश्वनाथजीका दर्शन करता है, वह शीघ्र ही पापमुक्त होकर संसारबन्धनसे

English

Then I, ashamed, goddess, seeing my husband's action, gave no reply to them and remained somewhat silent.

अध्याय १५४

श्लोक 66

ततो ऽहं बन्धुवर्गेण भूयोभूयः प्रबोधिता ।आहूता स्वामिना गच्छ सम्मानेन तदन्तिकम्

tato 'haṃ bandhuvargeṇa bhūyobhūyaḥ prabodhitā / āhūtā svāminā gaccha sammānena tadantikam

हिन्दी अर्थ

छूट जाता है। यों तो पुण्यसलिला गड्डा सर्वत्र ही ब्रह्महत्या-जैसे पापोंका निवारण करनेवाली हैं, तथापि काशीमें जहाँ उनकी धारा उत्तरकी ओर बहती है, वहाँ उनकी विशेष महिमा प्रकट होती है। वरणा और गड़ाके तथा असी और गड्ढाके सड्ढममें स्नान करनेमात्रसे मनुष्य सम्पूर्ण पातकोंसे मुक्त हो जाता है। काशीकी उत्तरवाहिनी गड्जममें कार्तिक और माघ मासमें स्नान करके मनुष्य

English

Then I was exhorted by relatives again and again: "Called by your lord, go to him with honour.

अध्याय १५४

श्लोक 67

स्वामिनाकारिता पत्नी या न याति तदन्तिकम् ।सा तु ध्वाङ्क्षी भवेत्पुत्रि जन्मानि दश पञ्च च

svāminākāritā patnī yā na yāti tadantikam / sā tu dhvāṅkṣī bhavetputri janmāni daśa pañca ca

हिन्दी अर्थ

महापाप आदि पातकोंसे मुक्त हो जाते हैं। सुन्दरी ! वहाँ धर्मनद नामसे विख्यात एक कुण्ड है। उसमें धर्म स्वरूपत: प्रकट होकर बड़े-बड़े पातकोंका नाश करता है। वहीं धूली एवं धूतपापा भी है,

English

A wife who, called by her husband, does not go to him becomes a crow for fifteen births, daughter."

अध्याय १५४

श्लोक 68

एवमुक्त्वा समाश्वास्य मां गृहीत्वा त्वरान्विताः ।दोलामारोप्य गच्छेति प्रोचुः स्निग्धा मुहुर्मुर्हुः

evamuktvā samāśvāsya māṃ gṛhītvā tvarānvitāḥ / dolāmāropya gaccheti procuḥ snigdhā muhurmurhuḥ

हिन्दी अर्थ

जो सर्वतीर्थभयी एवं शुभकारक है। जैसे नदीका बेग तटवर्ती वृक्षोंको गिरा देता है, उसी प्रकार वह धूतपापा समस्त पापराशिको हर लेती है। काशीमें किरणा, धूतपापा, पुण्य-सलिला एकत्र बतायी गयी हैं। इनसे त्रिभुवनविख्यात पश्चनद (पञ्ञगड़ा) तीर्थ प्रकट हुआ है। उसमें डुबकी लगानेवाला मानव फिर पाञ्ञभौतिक शरीर

English

Having said so and reassured me, they took me hurriedly, put me on the palanquin, and affectionately said again and again, "Go."

अध्याय १५४

श्लोक 69

ततस्ते पुरुषा दोलां निधायांसेषु सत्वरम् ।जग्मुर्महोदयपुरं यत्र तिष्ठति मे पतिः

tataste puruṣā dolāṃ nidhāyāṃseṣu satvaram / jagmurmahodayapuraṃ yatra tiṣṭhati me patiḥ

हिन्दी अर्थ

नहीं धारण करता। यह पाँच नदियोंका सड्भम समस्त पापराशियोंका नाश करनेवाला है। उसमें स्रान करनेमात्रसे मनुष्य ब्रह्माण्डमण्डपका भेदन करके परम पदको प्राप्त होता है। प्रयागमें माघ

English

Then those men, placing the palanquin on their shoulders, quickly went to Mahodayapura, where my husband lived.

अध्याय १५४

श्लोक 70

दृष्टं मया गृहं तस्य सर्वतः काञ्चनावृतम् ।आसनीयैश्च भोज्यैश्च धनैर्वस्त्रैर्युतं ततः

dṛṣṭaṃ mayā gṛhaṃ tasya sarvataḥ kāñcanāvṛtam / āsanīyaiśca bhojyaiśca dhanairvastrairyutaṃ tataḥ

हिन्दी अर्थ

मासमें विधिपूर्वक स्रान करनेसे जो फल प्राप्त होता है, वह काशीके पद्चगड्भातीर्थमें एक ही दिनके स्रानसे मिल जाता है। पश्ञगड़ामें स्नान और पितरोंका तर्पण करके 'माधव' नामसे प्रसिद्ध भगवान् विष्णुकी पूजा करनेवाला पुरुष फिर इस संसारमें जन्म नहीं लेता। जिन्होंने पञ्ञगड़ामें श्रद्धापूर्वक श्राद्ध किया है, उनके पितर अनेक योनियोंमें पड़े होनेपर भी मुक्त हो जाते हैं।

English

I saw his house all covered with gold, furnished with seats, food, wealth and clothes.

अध्याय १५४

श्लोक 71

अथ सा राक्षसी देवी सा चापि नृपनन्दिनी ।प्रीत्या च भक्त्या कुरुतां प्रणतिं मम सुन्दरि

atha sā rākṣasī devī sā cāpi nṛpanandinī / prītyā ca bhaktyā kurutāṃ praṇatiṃ mama sundari

हिन्दी अर्थ

पञ्जनदतीर्थमें श्राद्धकर्मकी महिमाका प्रत्यक्ष दर्शन करके यमलोकमें पितरलोग यह गाथा गाया करते हैं कि 'क्या हमारे वंशमें भी कोई ऐसा होगा, जो काशीके पद्चनदतीर्थमें आकर श्राद्ध

English

Then the she-demon goddess and also the king's daughter, with love and devotion, bowed to me, O fair one.

अध्याय १५४

श्लोक 72

ततस्ताभ्याममहं प्रेम्णा यथार्हमभिपूजिता ।भर्तृवाक्येन संप्रीता स्नात्वाभुजं तथाहृता

tatastābhyāmamahaṃ premṇā yathārhamabhipūjitā / bhartṛvākyena saṃprītā snātvābhujaṃ tathāhṛtā

हिन्दी अर्थ

करेगा ? जिससे हम लोग मुक्त हो जायेंगे।' पदञ्चनदतीर्थमें जो कुछ धन दान किया जाता है, कल्पके अन्ततक उसके पुण्यका क्षय नहीं होता। वन्ध्या स्त्री भी एक वर्षतक पशञ्ञगड्जातीर्थमें स्नान करके यदि मड्ुलागौरीका पूजन करे तो वह अवश्य ही पुत्रको जन्म देती है। वस्त्रसे छाने हुए पञ्चगड़ाके पवित्र जलसे यहाँ दिकुश्रुतादेवीको स्नान कराकर मनुष्य महान् फलका भागी होता

English

Then I was honoured by them both with love as was proper; pleased by my husband's word, bathed, I was brought food.

अध्याय १५४

श्लोक 73

ततो ऽस्तसमयात्पश्चाद्भर्ता चाहूय सत्वरम् ।परिष्वज्य चिरं दोर्भ्यां पर्यङ्के संन्यवेशयत्

tato 'stasamayātpaścādbhartā cāhūya satvaram / pariṣvajya ciraṃ dorbhyāṃ paryaṅke saṃnyaveśayat

हिन्दी अर्थ

है। पञ्मामृके एक सौ आठ कलशोंके साथ तुलना करनेपर पञ्ञगड़ाका एक बूँद जल भी उनसे श्रेष्ठ सिद्ध होता है। इस लोकमें पश्मकूर्च (पञ्ञगव्य) पीनेसे जो शुद्धि कही गयी है, वही

English

After sunset my husband quickly called me, embraced me long with his arms, and seated me on a couch.

अध्याय १५४

श्लोक 74

ततो निशाचरीं राजपुत्रीं चाहूय सो ऽब्रवीत् ।भक्त्या युवाभ्यां कर्तव्यमस्याश्चरणसेवनम्

tato niśācarīṃ rājaputrīṃ cāhūya so 'bravīt / bhaktyā yuvābhyāṃ kartavyamasyāścaraṇasevanam

हिन्दी अर्थ

शुद्धि श्रद्धापूर्वक पञ्चगड़ाके जलकी एक बूँद पीनेसे प्रात्त होती है और उसके कुण्डमें स्नान करनेसे राजसूय तथा अश्वमेधयज्ञका जो फल कहा गया है, उससे सौगुना उत्तम फल उपलब्ध होता है। राजसूय और अश्वमेध-यज्ञ केवल स्वर्गके साथक हैं, किंतु पञ्नगड़ाके जलसे ब्रह्मतोकतकके सम्पूर्ण द्न्द्दोंस मुक्ति मिल जाती है। सत्ययुगमें वह “धर्मनद” के नामसे प्रसिद्ध हुआ, जेतामें

English

Then calling the night-ranger and the king's daughter, he said: "With devotion you two must serve her feet.

अध्याय १५४

श्लोक 75

इयं प्राक्कालिकी भार्या ज्येष्ठा च युवयोर्द्भुवम् ।पत्युर्वाक्यात्ततस्ताभ्यां गृहीतौ चरणौ मम

iyaṃ prākkālikī bhāryā jyeṣṭhā ca yuvayordbhuvam / patyurvākyāttatastābhyāṃ gṛhītau caraṇau mama

हिन्दी अर्थ

उसीका नाम “ धूतपापा' हुआ। द्वापरमें उसे 'विन्दुतीर्थ कहा जाने लगा और कलियुगमें 'पञ्चनद' के नामसे उसकी ख्याति होती है। पञ्जनदतीर्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष--इन चारों पुरुषार्थोका शुभ

English

She is my first wife and elder to you both." At the husband's word, my feet were then held by them,

अध्याय १५४

श्लोक 76

सापत्नभावजामीर्ष्यां परित्यज्य सुलोचने ।ततः प्रेष्यान्समाहूय भर्ता मे वाक्यमब्रवीत्

sāpatnabhāvajāmīrṣyāṃ parityajya sulocane / tataḥ preṣyānsamāhūya bhartā me vākyamabravīt

हिन्दी अर्थ

आश्रय है, उसकी अत्यन्त महिमाका कोई भी वर्णन नहीं कर सकता। भद्रे! इस प्रकार मैंने तुम्हें काशीका उत्तम माहात्म्य बताया है। वह मनुष्योंके लिये सुखद, मोक्षप्रद तथा बड़े-बड़े पातकोंका नाश करनेवाला है। महापातकी एवं उपपातकी मानव भी अविमुक्तक्षेत्रके इस माहात्म्यको सुनकर शुद्ध हो जाता है। ब्राह्मण इसको सुनने और पढ़नेसे वेदोंका विद्वान् होता है। क्षत्रिय युद्धमें

English

both giving up the jealousy born of co-wife rivalry, O fair-eyed one. Then my husband, calling servants, said:

अध्याय १५४

श्लोक 77

यत्किञ्चिद्रक्षसः पार्श्वान्मया प्राप्तं पुरा वसु ।सुतामुद्वहतो राज्ञो यच्च लब्धं मयाखिलम्

yatkiñcidrakṣasaḥ pārśvānmayā prāptaṃ purā vasu / sutāmudvahato rājño yacca labdhaṃ mayākhilam

हिन्दी अर्थ

विजय पाता है, वेश्य धन-सम्पत्तिसे भरपूर होता है और शूद्रको वैष्णव भक्तोंका सड़ प्रास होता है। सम्पूर्ण यज्ञोमें जो फल मिलता है, समस्त तीर्थोमें जो फल प्राप्त होता है, वह सब इसके

English

"Whatever wealth I obtained earlier from the demon, and everything I got from the king when I married his daughter,

अध्याय १५४

श्लोक 78

तत्सर्वं भक्तिभावेन समानयत मा चिरम् ।इयं हि स्वामिनी प्राप्ता तस्य वित्तस्य किङ्कराः

tatsarvaṃ bhaktibhāvena samānayata mā ciram / iyaṃ hi svāminī prāptā tasya vittasya kiṅkarāḥ

हिन्दी अर्थ

पाठसे और श्रवणसे भी मनुष्य प्राप्त कर लेता है। विद्यार्थी इससे विद्या पाता है, धनार्थी धन पाता है, पत्री चाहनेवाला पत्नी और पुत्रकी इच्छावाला पुरुष पुत्र पाता है। उत्कलदेशके पुरुषोत्तम-क्षेत्रकी महिमा, राजा इन्द्रह््॒का वहाँ जाकर मोक्ष प्राप्त करना

English

bring it all with devotion, without delay. This is the mistress; you are servants of that wealth."

अध्याय १५४

श्लोक 79

तद्वाक्यात्सहसा प्रेष्यैः समानीतं धनं शुभे ।भर्ता समर्पयामास प्रीत्या युक्तो ऽखिलं तदा

tadvākyātsahasā preṣyaiḥ samānītaṃ dhanaṃ śubhe / bhartā samarpayāmāsa prītyā yukto 'khilaṃ tadā

हिन्दी अर्थ

मोहिनी बोली--विप्रवर! मैंने आपके मुखारविन्दसे काशीका उत्तम माहात्म्य सुना। पुराणोंमें मुनियों और ब्राह्मणोंका यह वर्णन सुना जाता है कि पुरुषोत्तम भगवान् विष्णुका क्षेत्र

English

By his word the servants brought the wealth at once, auspicious one; the husband, joyful, offered all of it.

अध्याय १५४

श्लोक 80

सत्कृत्य भूषणैर्वस्त्रैख्यलीकेन चेतसा ।उभयोस्तत्र पश्यन्त्यो राक्षसीराजकन्ययोः

satkṛtya bhūṣaṇairvastraikhyalīkena cetasā / ubhayostatra paśyantyo rākṣasīrājakanyayoḥ

हिन्दी अर्थ

मोक्ष देनेवाला है। महाभाग ! अब उस पुरुषोत्तम- क्षेत्रका माहात्म्य कहिये। पुरोहित बसुने कहा--देवि। सुनो, मैं तुम्हें ब्रह्माजीके द्वारा कहा हुआ पुरुषोत्तम-द्षेत्रका उत्तम माहात्म्य बतलाता हूँ। भारतवर्षमें दक्षिण समुद्रके तरतक फैला हुआ एक उत्कल नामका

English

Honouring me with ornaments, clothes and ... with a sincere heart, in the sight of both the she-demon and the king's daughter,

अध्याय १५४

श्लोक 81

पर्यङ्कस्थां परिष्वज्य मां चुञ्चुबाधरे शुभे ।तद्दृष्ट्वा चाद्भुतं भर्तुर्देहवित्तसमर्पणम्

paryaṅkasthāṃ pariṣvajya māṃ cuñcubādhare śubhe / taddṛṣṭvā cādbhutaṃ bharturdehavittasamarpaṇam

हिन्दी अर्थ

प्रदेश है, जो स्वर्ग और मोक्ष देनेवाला है। समुद्रसे उत्तर विरज-मण्डलतकका जो प्रदेश है, वह पुण्यात्माओंका देश है। वह भू-भाग सम्पूर्ण गुणोंसे अलंकृत है। विशालाक्षि! समुद्रके उत्तर

English

he embraced me seated on the couch and kissed my lower lip. Seeing that wonder — the husband's offering of body and wealth —

अध्याय १५४

श्लोक 82

उल्लासकरण वाक्यं करेण कुचपीडनम् ।छिन्ना गौरिव खङ्गेन गताः प्राणा ममाभवन्

ullāsakaraṇa vākyaṃ kareṇa kucapīḍanam / chinnā gauriva khaṅgena gatāḥ prāṇā mamābhavan

हिन्दी अर्थ

तटवर्ती उस सर्वोत्तम उत्कल प्रदेशमें सभी पुण्य तीर्थ और पवित्र मन्दिर आदि हैं, जिनका परिचय जानने योग्य है। मुक्ति देनेवाला परम उत्तम एवं पापनाशक पुरुषोत्तम-क्षेत्र परम गोपनीय है। सर्वत्र बालुका-आच्छादित भू-भागमें वह

English

hearing a delighting word and having my breasts pressed by his hand, I seemed to have my life struck like Gauri cut by a sword.

अध्याय १५४

श्लोक 83

ततो ऽहं यमनिर्द्दिष्टां प्राप्ता नरकयातनाम् ।तामतीत्य सुदुःखार्ता काष्ठीला चाभवं शुभे

tato 'haṃ yamanirddiṣṭāṃ prāptā narakayātanām / tāmatītya suduḥkhārtā kāṣṭhīlā cābhavaṃ śubhe

हिन्दी अर्थ

पवित्र एवं धर्म और कामकी पूर्ति करनेवाला परम दुर्लभ क्षेत्र दस योजनतक फैला हुआ है। जैसे नक्षत्रोंमें चन्द्रमा और सरोवरोंमें सागर श्रेष्ठ है, उसी प्रकार समस्त तीर्थोमें पुरुषोत्तम-द्षेत्र

English

Then I reached the hell-torment ordered by Yama; passing through it, in great pain, I became a wooden (house-lizard), auspicious one.

अध्याय १५४

श्लोक 84

यास्यामि पुनरेवाहं तिर्यग्योनिं सहस्रशः ।या भर्तुर्नापयेद्वित्तं जीवितं च शुभानने

yāsyāmi punarevāhaṃ tiryagyoniṃ sahasraśaḥ / yā bharturnāpayedvittaṃ jīvitaṃ ca śubhānane

हिन्दी अर्थ

सबसे श्रेष्ठ है। भगवान् पुरुषोत्तमका एक बार दर्शन करके, सागरके भीतर एक बार स्रान करनेसे तथा ब्रह्मविद्याको एक बार जान लेनेसे मनुष्यको गर्भमें नहीं आना पड़ता। देवेश्वर पुरुषोत्तम समस्त जगतूमें व्यापक और सम्पूर्ण विश्वके आत्मा हैं। वे जगत्की उत्पत्तिके कारण तथा जगदीश्वर हैं। सब कुछ उन्हींमें प्रतिष्ठित है। जो देवताओं, ऋषियों और पितरोंद्वारा सेवित तथा

English

I shall again go to animal wombs a thousand times: the woman who does not preserve her husband's wealth and life, fair-faced one,

अध्याय १५४

श्लोक 85

सापीदृशीमवस्था वै यास्यत्येव न संशयः ।एवं ज्ञात्वानिशं रक्षेत्पत्युर्वित्तं च जीवितम्

sāpīdṛśīmavasthā vai yāsyatyeva na saṃśayaḥ / evaṃ jñātvāniśaṃ rakṣetpatyurvittaṃ ca jīvitam

हिन्दी अर्थ

सर्वभोगसम्पन्न है, ऐसे पुण्यात्मा प्रदेशमें निवास करना किसको नहीं अच्छा लगेगा। इससे बढ़कर इस देशकी श्रेष्ठताके विषयमें और क्या कहा जा सकता है ? जहाँ सबको मुक्ति देनेवाले जगदी श्वर

English

she too will surely reach such a state, without doubt. Knowing this, one should always guard the husband's wealth and life.

अध्याय १५४

श्लोक 86

पतिर्माता पिता वित्तं जीवितं च गुरुर्गतिः

patirmātā pitā vittaṃ jīvitaṃ ca gururgatiḥ

हिन्दी अर्थ

भगवान् पुरुषोत्तम निवास करते हैं, उस उत्कल- देशमें जो मनुष्य निवास करते हैं, वे देवताओंके समान तथा धन्य हैं। जो तीर्थराज समुद्रके जलमें स्रान करके भगवान् पुरुषोत्तमका दर्शन करते हैं, वे मनुष्य स्वर्गमें निवास करते हैं। जो उत्कलमें परम पवित्र श्रीपुरुषोत्तमक्षेत्रके भीतर निवास करते हैं, उन उत्तम बुद्धिवाले उत्कलवासियोंका

English

Husband, mother, father, wealth, life, teacher and goal.

अध्याय १५४

श्लोक 87

प्रयाति नारी बहुभिः सुपुण्यैः सहैव भर्त्रा स्वशरीरदाहात् ।विष्णोः पदं वित्तशरीरलुब्धा प्रयाति यामीं च कुयोनिपीडाम्

prayāti nārī bahubhiḥ supuṇyaiḥ sahaiva bhartrā svaśarīradāhāt / viṣṇoḥ padaṃ vittaśarīralubdhā prayāti yāmīṃ ca kuyonipīḍām

हिन्दी अर्थ

ही जीवन सफल है; क्योंकि वे भगवान् श्रीकृष्णके उस मुखारविन्दका दर्शन करते हैं, जो तीनों लोकोंको आनन्द देनेवाला है। भगवान्का मुख लाल ओष्ठ और प्रसन्नतासे खिले हुए विशाल

English

A woman goes with her husband, through great merit, from the burning of her own body to Vishnu's abode; one greedy for wealth and body goes to Yama's torments and a wretched womb.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_nAradapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Narada Purana — Chapter 154
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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