अध्याय १५५
श्लोक 1
इति श्रीबृहन्नारदीयपुराणोत्तरभागे मोहिनीचरिते काष्ठीलाचरितं नाम त्रिंशत्तमो ऽध्यायः वसिष्ठ उवाच तच्छ्रुत्वा वचनं तस्याः काष्ठीलायाः शुचिस्मिते ।सन्ध्यावली नाम भृशं तामुवाच ह सादरम्
iti śrībṛhannāradīyapurāṇottarabhāge mohinīcarite kāṣṭhīlācaritaṃ nāma triṃśattamo 'dhyāyaḥ vasiṣṭha uvāca tacchrutvā vacanaṃ tasyāḥ kāṣṭhīlāyāḥ śucismite / sandhyāvalī nāma bhṛśaṃ tāmuvāca ha sādaram
हिन्दी अर्थ
नेत्रोंसे सुशोभित है। मनोहर भौंहों, सुन्दर केशों और दिव्य मुकुटसे अलंकृत है। सुन्दर कर्णलतासे उसकी शोभा और बढ़ गयी है। उस मुखपर मन्द-मन्द मुसकान बड़ी मनोहर लगती है। दन्तावली भी बड़ी सुन्दर है। कपोलोंपर मनोहर कुण्डल झिलमिला रहे हैं। नासिका, कपोल सभी परम सुन्दर और उत्तम लक्षणोंसे सम्पन्न हैं। देवि! प्राचीन कालकी बात है। सत्ययुगमें
English
O lady of charming eyebrows, even if you are going to give the entire earth for my sake, I cannot all of a sudden extricate myself from this base birth.