Narada Purana· Nārada Purāṇa
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अध्याय 160 / 167

Book 2 - Adhyaya 36

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अध्याय १६०

श्लोक 1

इति श्रीबृहन्नारदीयपुराणोत्तरभागे मोहिनी चरिते शापप्राप्तिर्नाम पञ्चत्रिंशो ऽध्यायः वसिष्ठ उवाच मोहिनी मोहमुत्सृज्य गता विबुधमन्दिरम् ।भर्त्सिता देवदूतेन स्थितिस्ते ऽत्र न पापिनी

iti śrībṛhannāradīyapurāṇottarabhāge mohinī carite śāpaprāptirnāma pañcatriṃśo 'dhyāyaḥ vasiṣṭha uvāca mohinī mohamutsṛjya gatā vibudhamandiram / bhartsitā devadūtena sthitiste 'tra na pāpinī

हिन्दी अर्थ

प्रयागमें माघ-मकरके स्न्रानकी महिमा तथा वहाँके भिन्न-भिन्न तीर्थोका माहात्म्य पुरोहित वसु कहते हैं--मोहिनी ! सुनो, अब मैं प्रयागके वेदसम्मत माहात्म्यका वर्णन करता हूँ, जहाँ स्नान करके मानव सर्वथा शुद्ध हो जाता है। गड़ामें जहाँ-कहीं भी स्नान किया जाय, यह

English

Recovering herself from her unconscious senseless condition, Mohini went to the mansions of the Devas, (the Heaven). She was then rebuked by the messenger of the Devas, ctYou are a sinning woman and you have no place here.

अध्याय १६०

श्लोक 2

पापशीले सुदुर्मेधे भर्तृनिन्दापरायणे ।हरिवासरलोपिन्यां वासस्ते न त्रिविष्टपे

pāpaśīle sudurmedhe bhartṛnindāparāyaṇe / harivāsaralopinyāṃ vāsaste na triviṣṭape

हिन्दी अर्थ

कुरुक्षेत्रके समान पुण्यदायिनी है। उससे दसगुना पुण्य देनेवाली गड़ा वह बतायी गयी है, जहाँ वह विन्ध्यपर्वतसे संयुक्त होती है। काशीकी उत्तरवाहिनी गड्भा विन्ध्यपर्वतके निकटवर्तिनी

English

O foolish woman, a habitual sinner, O woman indulging in censuring your own husband, you have no place for staying in the heaven, since you have violated the day of Hari (the Ekadasx Vrata).

अध्याय १६०

श्लोक 3

धर्मतो विमुखानां च नरके वास इष्यते ।एवमुक्त्वा तु तां वायुः क्रूरं वचनपद्भुतम्

dharmato vimukhānāṃ ca narake vāsa iṣyate / evamuktvā tu tāṃ vāyuḥ krūraṃ vacanapadbhutam

हिन्दी अर्थ

गड्जासे सौगुनी पुण्यदायिनी कही गयी है। काशीसे भी सौ गुना पुण्य वहाँ बताया गया है, जहाँ गड्ढा यमुनासे मिलती है। वह भी जहाँतक पश्चिमवाहिनी हैं, वहाँ उसमें सहस्नगुना पुण्य प्राप्त होता है। देवि! पश्चिमवाहिनी गड्डा दर्शनमात्रसे ही त्रह्महत्या आदि पापोंका निवारण करनेवाली है। देवि!

English

She was taken to hells in the order and made to fall therein. They rebuked her, "O sinful woman, your son Dharmangada had been killed by you through the hands of your husband. Hence experience here the evil effects of the sinful actions perpetrated by you.

अध्याय १६०

श्लोक 4

ताडयित्वा च दण्डेन प्रेरयामास यातनाम् ।एवं संताडिता राजन् देवदूतेन मोहिनी

tāḍayitvā ca daṇḍena prerayāmāsa yātanām / evaṃ saṃtāḍitā rājan devadūtena mohinī

हिन्दी अर्थ

पश्चिमाभिमुखी गड़ग यमुनाके साथ मिली हैं। वे सौ कल्पोंका पाप हर लेती हैं। माघ मासमें तो वे और भी दुर्लभ हैं। भद्रे! पृथ्वीपर वे अमृतरूप कही जाती हैं। गड़ा और यमुनाके सड्भरमका जल

English

They were afflicted due to the contact with her limbs. They were frightened. With palms joined in reverence, they said, "O Lord of the Devas, O Lord of the universe, O Dharma¬ raja, be merciful.

अध्याय १६०

श्लोक 5

ब्रह्मदण्डपराभूता संप्राप्ता नरकं नृप ।तत्र धर्माज्ञया सा तु दूतैः संताडिता चिरम्

brahmadaṇḍaparābhūtā saṃprāptā narakaṃ nṛpa / tatra dharmājñayā sā tu dūtaiḥ saṃtāḍitā ciram

हिन्दी अर्थ

'वेणी 'के नामसे प्रसिद्ध है, जिसमें माघ मासमें दो घड़ीका स््रान देवताओंके लिये भी दुर्लभ है। हैं, वे मकर राशिपर सूर्यके रहते हुए माघ मासमें वेणीमें स्नान करनेके लिये आती हैं। शुभे! ब्रह्मपुत्री मोहिनी! ब्रह्मा, विष्णु, महादेव, रुद्र,

English

Take away this lady from the place of tortures im¬ mediately for the sake of our relief. O lord, at her very touch, we are being instantaneously reduced to ashes.

अध्याय १६०

श्लोक 6

सर्वेषु क्रमशो गत्वा नरकेषु निपातिता ।पापे धर्माङ्गदः पुत्रो घातितः पतिपाणिना

sarveṣu kramaśo gatvā narakeṣu nipātitā / pāpe dharmāṅgadaḥ putro ghātitaḥ patipāṇinā

हिन्दी अर्थ

गुह्मक, अणिमादि गुणोंसे युक्त अन्यान्य तत्त्वदर्शी पुरुष, ब्रह्माणी, पार्वती, लक्ष्मी, शची, मेधा, अदिति, रति, समस्त देवपत्रियाँ, नागपत्नियाँ तथा

English

Hence banish her from all hells." On hearing their words, Dharmaraja was mnch surprised.

अध्याय १६०

श्लोक 7

त्वया यतस्ततो भुङ्क्ष्व कृतकर्मफलं त्विह ।प्रजाहितं स्थिरप्रज्ञं महेन्द्रवरुणोपमम्

tvayā yatastato bhuṅkṣva kṛtakarmaphalaṃ tviha / prajāhitaṃ sthiraprajñaṃ mahendravaruṇopamam

हिन्दी अर्थ

समस्त पितृगण--ये सब-के-सब माघ मासमें त्रिवेणी-सत्रानके लिये आते हैं। सत्ययुगमें तो उक्त सभी तीर्थ प्रत्यक्षरूप धारण करके आते थे, किंतु कलियुगमें वे छिपे रूपसे आते हैं। पापियोंके सड्भदोषसे काले पड़े हुए सम्पूर्ण तीर्थ प्रयागमें माघ मासमें स्रान करनेसे श्वेत वर्णके हो जाते हैं।

English

Dharmaraja then commanded his messengers, "This woman is to be banished from my mansion. Tortures (in my hell) do not wish to have any contact with that sinner who

अध्याय १६०

श्लोक 8

सप्तद्वीपाधिपं पुत्रं हत्वेदृक्फलभोगिनी ।प्राकृतस्यापि पुत्रस्य हिंसायां ब्रह्महा भवेत्

saptadvīpādhipaṃ putraṃ hatvedṛkphalabhoginī / prākṛtasyāpi putrasya hiṃsāyāṃ brahmahā bhavet

हिन्दी अर्थ

मकरस्थे रवो माघे गोविन्दाच्युत माधव॥

English

Thereafter, O king, the distressed woman of delusion, MohinI went to the nether-worlds. She was prevented (from entering the region) by the people there.

अध्याय १६०

श्लोक 9

किं पुनर्द्धर्मयुक्तस्य पापे धर्माङ्गदस्य च ।एवं निर्भत्सिता दूतैर्यमस्य नृपसत्तम

kiṃ punarddharmayuktasya pāpe dharmāṅgadasya ca / evaṃ nirbhatsitā dūtairyamasya nṛpasattama

हिन्दी अर्थ

स्रानेनानेन मे देव यथोक्तफलदो भव। “गोविन्द! अच्युत ! माधव ! देव! मकर राशिपर सूर्यके रहते हुए माघ मासमें त्रिवेणीके जलमें किये हुए मेरे इस स्रानसे संतुष्ट हो आप शास्त्रोक्त

English

Extremely ashamed due to this, MohinI, the daughter of Brahma, went to her father's presence and intimated her own grief to him.

अध्याय १६०

श्लोक 10

बुभुजे यातनाः सर्वाः क्रमशः शमनोदिताः ।ब्रह्मदण्डहतायास्तु देहस्पर्शेन यातनाः

bubhuje yātanāḥ sarvāḥ kramaśaḥ śamanoditāḥ / brahmadaṇḍahatāyāstu dehasparśena yātanāḥ

हिन्दी अर्थ

--इस मन्त्रका उच्चारण करके मौनभावसे स्नान करे। 'वासुदेव, हरि, कृष्ण और माधव! आदि नामोंका बार-बार स्मरण करे। मनुष्य अपने घरपर गरम जलसे साठ वर्षोतक जो स्रान

English

"O father, there is no place of rest for me in all the three worlds consisting of mobile and immobile beings. Wher¬ ever I go they throw me out after rebuking me.

अध्याय १६०

श्लोक 11

ज्वलिताङ्गा बभूवुस्ता धारणाय न तु क्षमाः ।ततस्ते नरका राजन् धर्मराजमुपागताः

jvalitāṅgā babhūvustā dhāraṇāya na tu kṣamāḥ / tataste narakā rājan dharmarājamupāgatāḥ

हिन्दी अर्थ

करता है, उसके समान फलकी प्राप्ति सूर्यके मकर राशिपर रहते समय एक बारके स्लानसे हो जाती है। बाहर बावड़ी आदिमें किया हुआ स्रान बारह वर्षोके स्नानका फल देनेवाला है। पोखरेमें स्नान करनेपर उससे दूना और नदी आदियमें स्नान करनेपर चौगुना फल प्राप्त होता है। देवकुण्डमें वही फल दसगुना और महानदीमें सौगुना होता है। दो महानदियोंके संगममें स्नान करनेपर चार

English

I have been banished by the people of the world who struck me hard with weapons. It was at your behest that I had gone to Rukmangada at the outset.

अध्याय १६०

श्लोक 12

प्रोचुः प्राञ्जलयो भीतास्तदङ्गस्पर्शपीडिताः ।देवदेव जगन्नाथ धर्मराज दयां कुरु

procuḥ prāñjalayo bhītāstadaṅgasparśapīḍitāḥ / devadeva jagannātha dharmarāja dayāṃ kuru

हिन्दी अर्थ

सौ गुने फलकी प्राप्ति होती है; किंतु सूर्यके मकर राशिपर रहते समय प्रयागकी गड्जामें स्नान करनेमात्रसे वह सारा फल सहसख्रगुना होकर मिलता है--ऐसा बताया गया है। इस प्रयाग

English

(For the same reason) this sinful activity was indulged in by me though that course of action was despi¬ cable to the entire world. I had caused distress to my husband; I had got my son killed with sword; I had made Sandhyavall perturbed. Hence, O father, I am reduced to this plight.

अध्याय १६०

श्लोक 13

इमां निःसारयाशु त्वं यातनाभ्यः सुखाय नः ।यस्याः स्पर्शनतो नाथ भस्मभूताः क्षणादहो

imāṃ niḥsārayāśu tvaṃ yātanābhyaḥ sukhāya naḥ / yasyāḥ sparśanato nātha bhasmabhūtāḥ kṣaṇādaho

हिन्दी अर्थ

तीर्थको पूर्वकालमें ब्रह्माजीने प्रकट किया था। जिसके गर्भमें सरस्वती छिपी हैं, वह श्वेत और श्याम जलकी धारा ब्रह्मलोकमें जानेका मार्ग है। हिमालयकी घाटियोंमें जो तीर्थ हैं, उनमें माघ मासका स््रान सब पापोंका नाश करनेवाला है।

English

If out of love for me, you, accompanied by gods, can propitiate and persuade the Brahmana who had cursed me, then alone any better state of existence can be brought about."

अध्याय १६०

श्लोक 14

भविष्यामस्ततस्त्वेनां नरकेभ्यो विवासय ।तच्छ्रुत्वा वचनं तेषां धर्मराजो ऽतिविस्मितः

bhaviṣyāmastatastvenāṃ narakebhyo vivāsaya / tacchrutvā vacanaṃ teṣāṃ dharmarājo 'tivismitaḥ

हिन्दी अर्थ

सब मासोंमें उत्तम माघ मास यदि बदरीवनमें प्रात्त हो तो वह मोक्ष देनेवाला है। नर्मदाके जलमें माघका स्नान पापनाशक, दुःखहारी, सम्पूर्ण मनोवाब्छित फलोंका दाता तथा रुद्रलोककी

English

With great devotion, he made all of them sit and eulogised the lotus-born deity. Then the lord and creator of the worlds, the preceptor of the universe became delighted.

अध्याय १६०

श्लोक 15

दूतान्स्वान्प्रत्युवाचेयं निःसार्या मम मन्दिरात् ।यो ब्रह्मदण्डनिर्दग्धः पुमान् स्त्री वा च तस्करः

dūtānsvānpratyuvāceyaṃ niḥsāryā mama mandirāt / yo brahmadaṇḍanirdagdhaḥ pumān strī vā ca taskaraḥ

हिन्दी अर्थ

प्राप्ति करानेवाला कहा गया है। सरस्वतीके जलमें वह सब पापराशियोंका नाशक तथा सम्पूर्ण लोकोंके सुखोंकी प्राप्ति करानेवाला बताया गया है। गज्भाका जल यदि माघ मासमें सुलभ हो तो वह पापरूपी ईंधनको जलानेके लिये दावानल, गर्भवासके कष्टका नाश करनेवाला तथा विष्णुलोक एवं मोक्षकी प्राप्ति करानेवाला बताया गया है।

English

A On behalf of MohinI, they requested the Brahmana who had been honoured by the king before. <fO dear one, O Brahmana of good conduct, O helper of the other world, O Ocean of mercy, please show some compassion. Be the bestower of salvation on MohinI.

अध्याय १६०

श्लोक 16

तस्य पापस्य संस्पर्शं नेच्छति यातना मम ।तस्मादिमां महापापां भर्तुर्वचनलोपिनीम्

tasya pāpasya saṃsparśaṃ necchati yātanā mama / tasmādimāṃ mahāpāpāṃ bharturvacanalopinīm

हिन्दी अर्थ

सरयू, गण्डकी, सिन्धु, चन्द्रभागा, कौशिकी,

English

What she had done against the crestjewel of a king who was extremely meritorious was a sin by which she was cursed and reduced to ashes by your imprecations.

अध्याय १६०

श्लोक 17

पुत्रघ्नीं धर्महन्त्रीं च ब्रह्मदण्डहतामपि ।निःसारयत मे बापि देहो ज्वलति दर्शंनात्

putraghnīṃ dharmahantrīṃ ca brahmadaṇḍahatāmapi / niḥsārayata me bāpi deho jvalati darśaṃnāt

हिन्दी अर्थ

कावेरी, तुड्रभद्रा तथा अन्य जो समुद्रगामिनी नदियाँ हैं, उनमें स्नान करनेवाला मनुष्य पापरहित हो स्वर्गलोकमें जाता है। नेमिषारण्यमें माघ-स््नान करनेसे भगवान् विष्णुका सारूप्य प्राप्त होता है। पुष्करमें नहानेसे ब्रह्माका सामीप्य मिलता है। विधिनन्दिनी ! गोमतीमें माघ नहानेसे फिर जन्म नहीं होता। हेमकूट, महाकाल, ऊँकार, नीलकण्ठ तथा अर्बुद तीर्थमें माघ मासका स्नान रुद्रलोककी

English

This woman strove for the Devas, for the increase of worldly existence and for rendering help to the king. She is not selfish. O Brahmana, how can she incur dis¬ respect? If at all there is any disservice on her part, kindly forgive it.

अध्याय १६०

श्लोक 18

इत्युक्तास्ते तदा दूता धर्मराजेन भूपते ।प्रहरन्तो ऽस्त्रशस्त्रैश्च बहिश्चक्रुर्यमक्षयात्

ityuktāste tadā dūtā dharmarājena bhūpate / praharanto 'straśastraiśca bahiścakruryamakṣayāt

हिन्दी अर्थ

प्राप्ति करानेवाला माना गया है। देवि! सूर्यके मकर राशिपर रहते समय सम्पूर्ण सरिताओंके संगममें माघ-स्नान करनेसे सम्पूर्ण कामनाओंकी प्राप्ति होती है। स्वर्गवासी देवता सदा यह गाया

English

Be merciful, resort to tranquillity and quiescence, the grinding of the pounded flour (i.e. superfious exertion) is not justifiable. This woman was struck down by your cursing her. Be pleased. Be the bestower of salvation. O Brahmana, if this is performed, this Mohini will eschew her cruel grudge against you, who are worthy of being worshipped.' *

अध्याय १६०

श्लोक 19

ततः सा दुःखिता राजन् मोहिनी मोहसंयुता ।पातालं प्रययौ तत्र पातालस्थैर्निवारिता

tataḥ sā duḥkhitā rājan mohinī mohasaṃyutā / pātālaṃ prayayau tatra pātālasthairnivāritā

हिन्दी अर्थ

करते हैं कि ' क्‍या प्रयागमें कभी माघ मास हमें मिलेगा, जहाँ स्नान करनेवाले मानव फिर कभी गर्भकी वेदनाका अनुभव नहीं करते और भगवान् विष्णुके समीप स्थित होते हैं।!' जल और वायु पीकर रहने, पत्ते चबाने, देह सुखाने, दीर्घधकालतक घोर तपस्या करने और योग साधनेसे मनुष्य जिस गतिको प्राप्त होते हैं, उसे प्रयागके स्लानमात्रसे ही पा लेते हैं। प्रयागमण्डलका विस्तार पाँच योजन

English

On being urged thus by the lotus-seated deity, he (the Brahmana) thought intelligently and abandoned his anger. Then the leading Brahmana said to the lord of the Devas (Brahma) who created the body of Mohini.

अध्याय १६०

श्लोक 20

ततस्तु व्रीडितात्यर्थः मोहिनी ब्रह्मणः सुता ।जनकस्यान्तिकं गत्वा दुःखं स्वं संन्यवेदयत्

tatastu vrīḍitātyarthaḥ mohinī brahmaṇaḥ sutā / janakasyāntikaṃ gatvā duḥkhaṃ svaṃ saṃnyavedayat

हिन्दी अर्थ

है। सुभगे! वहाँ तीन कुण्ड हैं। उनके बीचमें

English

"O lord, inasmuch as your daughter Mohini is burdened with so many sins, she has no place in this world teem¬ ing with living beings.

अध्याय १६०

श्लोक 21

तात तन्नास्ति मे स्थानं त्रैलोक्ये सचरा चरे ।यत्र यत्र तु गच्छामि तत्र तत्र क्षिपन्ति माम्

tāta tannāsti me sthānaṃ trailokye sacarā care / yatra yatra tu gacchāmi tatra tatra kṣipanti mām

हिन्दी अर्थ

गड्जा हैं। प्रयागमें प्रवेश करनेमात्रसे पापोंका तत्काल नाश हो जाता है। जो पवित्र है, वह मन और इन्द्रियोंको संयममें रखकर, हिंसासे दूर हो यदि श्रद्धापूर्वक स्नान करता है तो पापमुक्त होता और परम पदको प्राप्त करता है। नैमिष, पुष्कर,

English

"Father, I have no place in the three worlds with their moving and unmoving; wherever I go, they drive me away.

अध्याय १६०

श्लोक 22

अहं निर्वासिता लोकैर्घातयित्वायुधैर्दृढम् ।भवदाज्ञां समादाय गता रुक्मविभूषणम्

ahaṃ nirvāsitā lokairghātayitvāyudhairdṛḍham / bhavadājñāṃ samādāya gatā rukmavibhūṣaṇam

हिन्दी अर्थ

गड़ासागरसंगम--ये तथा और भी जो बहुत-से पुण्यमय पर्वत हैं, वे सब मिलकर तीन करोड़ दस हजार तीर्थ प्रयागमें विद्यमान हैं। सूर्यपुत्री यमुनादेवी तीनों लोकोंमें विख्यात हैं। वे लोकपावनी

English

I was banished by the people, struck firmly with weapons; taking your command I went to the gold-adorned Rukmangada.

अध्याय १६०

श्लोक 23

मया व्यवसितं चेदं सर्वलोकविगर्हितम् ।क्लेशयित्वा तु भर्तारं पुत्रं हत्वा वरासिना

mayā vyavasitaṃ cedaṃ sarvalokavigarhitam / kleśayitvā tu bhartāraṃ putraṃ hatvā varāsinā

हिन्दी अर्थ

यमुना प्रयागमें गड्ासे मिली हैं। गड़ा और यमुनाके बीचका भू-भाग पृथ्वीपर सर्वोत्तम माना गया है। सुन्दरी! तीनों लोकोंमें प्रयागसे बढ़कर परम पवित्र तीर्थ नहीं है। प्रयाग परम पद- स्वरूप है। उसका दर्शन करके मनुष्य सब पापोंसे मुक्त हो जाते हैं।

English

This deed resolved by me is censured by all the worlds: having troubled my husband and killed my son with the best sword,

अध्याय १६०

श्लोक 24

संध्यावलीं क्षोभयित्वा पितः प्राप्ता दशा मिमाम् ।न गतिर्विद्यते देव पापाया मम सांप्रतम्

saṃdhyāvalīṃ kṣobhayitvā pitaḥ prāptā daśā mimām / na gatirvidyate deva pāpāyā mama sāṃpratam

हिन्दी अर्थ

अतः सम्पूर्ण देवताओंसे सुरक्षित प्रयागतीर्थमें जाकर जो ब्रह्मचर्यका पालन तथा देवता और पितरोंका तर्पण करते हुए एक मासतक वहाँ

English

having agitated Sandhyavali, father, this plight has come to me. There is no goal now for me, a sinner, O God.

अध्याय १६०

श्लोक 25

विशेषाद्द्विजशापेन जाताहं दुःखभागिनी ।विप्रवाक्यहताना च दग्धानां चित्रभानुना

viśeṣāddvijaśāpena jātāhaṃ duḥkhabhāginī / vipravākyahatānā ca dagdhānāṃ citrabhānunā

हिन्दी अर्थ

निवास करता है, वह जहाँ-कहीं भी रहकर सम्पूर्ण मनोवाज्छित कामनाओंको प्राप्त कर लेता है। गड़ाा और यमुनाका संगम सम्पूर्ण लोकोंमें विख्यात है। वहाँ शक्तिपूर्वक स्नान करनेसे जिसके- जिसके मनमें जो-जो कामना होती है। उसको वह कामना अवश्य पूर्ण हो जाती है। हरिद्वार, प्रयाग और गड्भ़ासागरसंगममें स्नान करनेमात्रसे मनुष्य अपनी रुचिके अनुसार ब्रह्मा, विष्णु तथा

English

Especially I am a sharer of sorrow, born through a Brahmin's curse. For those struck by a Brahmin's word, for those burned by fire,

अध्याय १६०

श्लोक 26

दिवाकीर्तिहतानां च भक्षितानां मृगादिभिः ।शतह्रदाविपन्नानां मुक्तिदा स्वर्णदी पितः

divākīrtihatānāṃ ca bhakṣitānāṃ mṛgādibhiḥ / śatahradāvipannānāṃ muktidā svarṇadī pitaḥ

हिन्दी अर्थ

शिवके धाममें चला जाता है। सुलोचने! माघ मासमें सितासितसंगमके जलमें जो स्नान किया जाता है, वह सौ कोटि कल्‍ल्पोंमें भी कभी पुनरावृत्तिका अवसर नहीं देता। जो सत्यवादी

English

for those killed by Divakirti (outcastes), for those eaten by animals and the like, for those who died in the Shatahrada — the golden river is the giver of liberation, father.

अध्याय १६०

श्लोक 27

यदि त्वं त्रिदशैः सार्द्धं विप्रं तं शापदायिनम् ।प्रसादयसि मत्प्रीत्या तर्हि मे विहिता गतिः

yadi tvaṃ tridaśaiḥ sārddhaṃ vipraṃ taṃ śāpadāyinam / prasādayasi matprītyā tarhi me vihitā gatiḥ

हिन्दी अर्थ

तथा क्रोधको जीतनेवाला है, जो उच्चकोटिको अहिंसाका आश्रय ले चुका है, जो धर्मका अनुसरण करनेवाला, तत्त्वज्ञ, गौ-ब्राह्मणके हितमें तत्पर रहनेवाला है तथा गड्ढा-यमुनाके सड्भममें स्नान करनेवाला है, वह सब पापोंसे मुक्त हो जाता है।

English

If you, with the gods, propitiate that Brahmin who gave the curse out of love for me, then a goal is prepared for me."

अध्याय १६०

श्लोक 28

तां तथावादिनीं राजन् ब्रह्मा लोकपितामहः ।शिवेन्द्रधर्मसूर्याग्निदेवेशैर्मुनिभिर्युतः

tāṃ tathāvādinīṃ rājan brahmā lokapitāmahaḥ / śivendradharmasūryāgnideveśairmunibhiryutaḥ

हिन्दी अर्थ

वहाँ प्रतिष्ठानपुर (झूँसी)-में एक अत्यन्त विख्यात कूप है। वहाँ मनको संयममें रखकर स्नान करनेके पश्चात् देवताओं और पितरोंका तर्पण करे और ब्रह्मचर्यका पालन करते हुए

English

To her speaking so, O king, Brahma, grandfather of the world, with Shiva, Indra, Dharma, Surya, Agni and the lords of gods and sages,

अध्याय १६०

श्लोक 29

मोहिनीमग्रतः कृत्वा जगाम द्विजसन्निधौ ।तत्र गत्वा महीपाल ब्रह्मा देवादिभिर्वृतः

mohinīmagrataḥ kṛtvā jagāma dvijasannidhau / tatra gatvā mahīpāla brahmā devādibhirvṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

क्रोधको जीते। इस प्रकार जो तीन रात वहाँ निवास करता है, वह सब पापोंसे शुद्धचित्त हो अश्वमेध-यज्ञका फल पाता है। प्रतिष्ठानसे उत्तर और भागीरथीसे पूर्व “हंस-प्रतपन” नामक लोकविख्यात तीर्थ है। वहाँ स्नान करनेमात्रसे अश्वमेध-यज्ञका फल प्राप्त होता है और जबतक चन्द्रमा और सूर्य रहते हैं, तबतक वह स्वर्गलोकमें प्रतिष्ठित होता है। तदनन्तर वासुकिनागसे उत्तर

English

placing Mohini in front, went to the Brahmin. Arriving there, O protector of the earth, Brahma surrounded by gods and others,

अध्याय १६०

श्लोक 30

महता गौरवेणापि नमश्चक्रे स्वयं विधिः ।भूप रुद्रादिदेवैस्तु पूज्यो मान्यः पितामहः

mahatā gauraveṇāpi namaścakre svayaṃ vidhiḥ / bhūpa rudrādidevaistu pūjyo mānyaḥ pitāmahaḥ

हिन्दी अर्थ

भोगवतीके पास जाकर दशाश्रमेधतीर्थ है। वह परम उत्तम माना गया है। वहाँ स्नान करके मनुष्य अश्वमेध-यज्ञका फल पाता है और इहलोकमें धनाढ्य, रूपवान्, दक्ष, दाता एवं धार्मिक होता

English

with great honour himself bowed. O king, Pitamaha is to be worshipped and honoured by Rudra and the other gods;

अध्याय १६०

श्लोक 31

मोहिनीप्रीतये मुग्धः स्वयं चक्रे नमस्क्रियाम् ।कार्ये महति संप्राप्ते ह्यसाध्ये भुवनत्रये

mohinīprītaye mugdhaḥ svayaṃ cakre namaskriyām / kārye mahati saṃprāpte hyasādhye bhuvanatraye

हिन्दी अर्थ

है। चारों वेदोंका स्वाध्याय करनेवाले पुरुषोंको जो पुण्य प्राप्त होता है, सत्यवादियोंको जो फल मिलता है और अहिंसाके पालनसे जो धर्म होता है, उन सबका फल दशाश्रमेथतीर्थमें जानेमात्रसे मिल जाता है। पायतीके उत्तर और प्रयागके

English

deluded, for Mohini's sake he himself made salutation. When a great task has arisen, impossible in the three worlds,

अध्याय १६०

श्लोक 32

न दूषितं भवेद्भूप यविष्ठस्याभिवादनम् ।स द्विजो वेदवेदाङ्गपरगस्तपसि स्थितः

na dūṣitaṃ bhavedbhūpa yaviṣṭhasyābhivādanam / sa dvijo vedavedāṅgaparagastapasi sthitaḥ

हिन्दी अर्थ

दक्षिण तटपर “ऋणमोचन' नामक तीर्थ है, जो परम उत्तम माना गया है। वहाँ स्नान करके एक रात रहनेसे मनुष्य सब ऋणोंसे मुक्त हो जाता है और देवता होकर स्वर्गलोकमें जाता है।

English

the greeting of a younger person is not blamed, O king. That Brahmin, master of the Vedas and Vedangas, established in austerity,

अध्याय १६०

श्लोक 33

संप्रेक्ष्य लोककर्तारं देवैः सह समागतम् ।समुत्थाय नमश्चक्रे ब्रह्माणं तान्मुनीन्सुरान्

saṃprekṣya lokakartāraṃ devaiḥ saha samāgatam / samutthāya namaścakre brahmāṇaṃ tānmunīnsurān

हिन्दी अर्थ

प्रयागमें मुण्डन करावे, गयामें पिण्डदान करे, कुरुक्षेत्रमें दान दे और काशीमें शरीरका त्याग करे। मनुष्योंके सब पाप केशोंकी जड़का आश्रय लेकर टिके रहते हैं, अतः तीर्थमें स्नान करनेके पहले उन सबका वहाँ मुण्डन करा दे। यदि पौष और माघके महीनेमें श्रवण नक्षत्र, व्यतीपात योग तथा रविवारसे युक्त अमावास्या तिथि हो तो उसे 'अर्धोदय' पर्व समझना चाहिए। इसका महत्त्व

English

seeing the maker of the worlds come with the gods, rose and bowed to Brahma, the sages and the gods,

अध्याय १६०

श्लोक 34

वासयामास भक्त्या च स्तुतिं चक्रे ऽब्जजन्मनः ।ततः प्रसन्नो भगवान् लोककर्त्ता जगद्गुरुः

vāsayāmāsa bhaktyā ca stutiṃ cakre 'bjajanmanaḥ / tataḥ prasanno bhagavān lokakarttā jagadguruḥ

हिन्दी अर्थ

सौ सूर्यग्रहणोंसे भी अधिक है। विधिनन्दिनी ! इसमें कुछ कमी हो तो “महोदय ' पर्व माना गया है। यदि प्रयागतीर्थमें अरुणोदयके समय माघ शुक्ला सप्तमी प्राप्त हो तो वह एक हजार

English

seated them with devotion and praised the lotus-born. Then the Lord, maker of the world, teacher of the world, pleased,

अध्याय १६०

श्लोक 35

ते द्विजं प्रार्थयामासुर्मोहिन्यर्थे नृपार्चितम् ।तात विप्र सदाचार परलोकोपकारक

te dvijaṃ prārthayāmāsurmohinyarthe nṛpārcitam / tāta vipra sadācāra paralokopakāraka

हिन्दी अर्थ

सूर्यग्रहणोंक समान है। यदि अयनारम्भके दिन प्रयागका स्नान मिले तो कोटिगुना पुण्य होता है और विषुव योगमें लाखगुने फलकी प्राप्ति होती है। षडशीति तथा विष्णुपदीमें सहस््नगुना पुण्य प्रात होता है। अपने वैभव-विस्तारके अनुसार सबको प्रयागमें दान करना चाहिए। विधिनन्दिनी ! इससे तीर्थका फल बढ़ता है। भद्रे! जो गड़ा और यमुनाके बीचमें सुवर्ण, मणि, मोती या दूसरा

English

the gods begged that Brahmin, honoured by the king, for Mohini: "Dear Brahmin, of good conduct, benefactor of the other world,

अध्याय १६०

श्लोक 36

कृपां कुरु कृपासिंधो मोहिनीगतिदो भव ।मया संप्रेषिता ब्रह्मन् रुक्माङ्गदविमोहने

kṛpāṃ kuru kṛpāsiṃdho mohinīgatido bhava / mayā saṃpreṣitā brahman rukmāṅgadavimohane

हिन्दी अर्थ

कोई प्रतिग्रह देता है एवं जो वहाँ लाल या कपिल वर्णकी ऐसी गौ देता है, जिसकी सींगमें सोना, खुरोंमें चाँदी, गलेमें वस्त्र हो, जो दूध देती हो और बछड़ा उसके साथ हो; शुक्ल वस्त्र

English

show mercy, ocean of mercy; be the giver of a goal to Mohini. She was sent by me, O Brahmin, to bewilder Rukmangada.

अध्याय १६०

श्लोक 37

सुता मे यमलोकं तु शून्यं दृष्ट्वा च मानद ।वैकुण्ठं संकुलं प्रेक्ष्य लोकैः सर्वैर्नि राकुलैः

sutā me yamalokaṃ tu śūnyaṃ dṛṣṭvā ca mānada / vaikuṇṭhaṃ saṃkulaṃ prekṣya lokaiḥ sarvairni rākulaiḥ

हिन्दी अर्थ

धारण करनेवाले, शान्त, धर्मज्ञ, वेदज्ञ एवं श्रोत्रिय ब्राह्मणको विधिपूर्वक जो पूर्वोक्त गौ देकर स्वीकार कराता है तथा उसके साथ बहुमूल्य वस्त्र और नाना प्रकारके रत्न भी देता है; उस गौ तथा बछड़ेके शरीरमें जितने रोमकूप होते हैं, उतने सहस्र वर्षोतक वह दाता स्वर्गलोकमें

English

My daughter, seeing Yama's world empty, O honourer, and Vaikuntha crowded with all the untroubled people,

अध्याय १६०

श्लोक 38

मनसोत्पादिता देवी देवानां हितकारिणी ।निशामय धरादेव यद्ब्रवीमि तवाग्रतः

manasotpāditā devī devānāṃ hitakāriṇī / niśāmaya dharādeva yadbravīmi tavāgrataḥ

हिन्दी अर्थ

प्रतिष्ठित होता है। उस दानकर्मसे दाता लोग कभी नरकका दर्शन नहीं करते। सामान्य लाखों गौओंकी अपेक्षा एक ही दूध देनेवाली गौ दान करे। वह एक ही गौ स्त्री-पुत्र तथा भृत्यवर्गका

English

was produced by mind, the goddess doing good to the gods. Hear, O god on earth, what I tell you:

अध्याय १६०

श्लोक 39

गतिं धर्मस्यातिसूक्ष्मां लोककल्याणकारिणीम् ।अनया निकषाश्याङ्ग्या परीक्ष्य स्वर्णभूषणः

gatiṃ dharmasyātisūkṣmāṃ lokakalyāṇakāriṇīm / anayā nikaṣāśyāṅgyā parīkṣya svarṇabhūṣaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

उद्धार कर देती है। इसलिये सब दानोंमें गोदानका महत्त्व अधिक है। दुर्गम स्थानमें, विषम परिस्थितिमें तथा घोर संकटके समय अथवा महापातकोंके संक्रमणकालमें गौ ही मनुष्यकी रक्षा करती है। अत: श्रेष्ठ ब्राह्मणको गौ देनी चाहिए।

English

the very subtle course of dharma that does good to the world. By this fair-limbed one, having tested the gold-adorned,

अध्याय १६०

श्लोक 40

सदारः ससुतो ब्रह्मन्प्रापितो हरिमन्दिरम् ।राज्ञाप्रहतया भक्त्या हरिवासरपालनात्

sadāraḥ sasuto brahmanprāpito harimandiram / rājñāprahatayā bhaktyā harivāsarapālanāt

हिन्दी अर्थ

तीर्थमें तथा पुण्यमय देवमन्दिरोंमें दान नहीं लेना चाहिए। ब्राह्मणफो चाहिए कि वह सभी निमित्तोंमें सावधान रहे। अपने कामके लिये, पितरोंके श्राद्धके लिये अथवा देवताके पूजनके

English

with wife and son, Brahmin, he was brought to Hari's abode — the king struck by devotion by observing Hari's day.

अध्याय १६०

श्लोक 41

कृतं शून्यं यमस्थानं लिपिमार्जनकर्मणा ।देवापकारो विप्रर्षे न क्षमो बाहुजन्मना

kṛtaṃ śūnyaṃ yamasthānaṃ lipimārjanakarmaṇā / devāpakāro viprarṣe na kṣamo bāhujanmanā

हिन्दी अर्थ

लिये भी किसीसे कुछ दान न ले। जबतक वह दूसरेके धनका उपभोग या ग्रहण करता है, तबतक उसका तीर्थसेवन व्यर्थ होता है। जो गड्ढा और यमुनाके सद्भमपर कन्यादान करता है, वह उस पुण्यकर्मके प्रभावसे कभी भयंकर नरकका दर्शन नहीं करता प्रयाग-प्रतिष्ठानसे लेकर वासुकि- नागके तालाबसे आगेतक 'कम्बल' और 'अश्वतर' नामक जो दोनों नाग हैं, वहाँसे बहुमूलक

English

Yama's place was made empty by the work of wiping the ledger. A harm done to the gods, O Brahmin sage, cannot be endured by those born from arms;

अध्याय १६०

श्लोक 42

भूसुराणां विशेषेणं यातास्ते तत्सहायकाः

bhūsurāṇāṃ viśeṣeṇaṃ yātāste tatsahāyakāḥ

हिन्दी अर्थ

नागतकका जो भूभाग है, यही प्रजापतिक्षेत्र है, जो तीनों लोकोंमें विख्यात है। इस क्षेत्रमें जो स्नान करते हैं, वे स्वर्गमें जाते हैं और मर जाते हैं, उनका फिर जन्म नहीं होता। सम्मार्गमें स्थित

English

especially those who went with him as his companions, among the Brahmins.

अध्याय १६०

श्लोक 43

न प्राप्यते साङ्घ्यविदा तु यच्च नाष्टाङ्गयोगेन तु भक्तिगम्यम् ।तत्प्रापितं भूसुर भूपभर्तुर्निजस्य पुत्रस्य तथा सपत्न्याः

na prāpyate sāṅghyavidā tu yacca nāṣṭāṅgayogena tu bhaktigamyam / tatprāpitaṃ bhūsura bhūpabharturnijasya putrasya tathā sapatnyāḥ

हिन्दी अर्थ

बुद्धिमानू योगीको जो गति प्राप्त होती है, वही गड़ा-यमुनाके सड़ममें प्राणत्याग करनेवालेको प्रयागके दक्षिण यमुना-तटपर विख्यात अग्रितीर्थ है। पश्चिममें धर्मराजतीर्थ है। वहाँ जो स्नान करते

English

What cannot be reached by the Sankhya-knower nor by eightfold yoga but by devotion, that was got by the Brahmin-king's husband, his son and his co-wife.

अध्याय १६०

श्लोक 44

यत्पुण्यशीलस्य नृपस्य भूपशिरोमणेराचरितं प्रतीपम् ।तत्पापवेगेन बभूव विद्रुता भस्मावशेषा तव शापदग्धा

yatpuṇyaśīlasya nṛpasya bhūpaśiromaṇerācaritaṃ pratīpam / tatpāpavegena babhūva vidrutā bhasmāvaśeṣā tava śāpadagdhā

हिन्दी अर्थ

हैं, वे स्वर्गमें जाते हैं और जो मरते हैं, उनका करनेवाले स्वर्ग-लोकको जाते हैं और जो मर फिर संसारमें जन्म नहीं होता। मोहिनी ! यमुनाके जाते हैं, उनका मोक्ष हो जाता है। गड्भा और उत्तर तटपर बहुत-से पापनाशक तीर्थ हैं, जो यमुना दोनोंका पुण्यफल एक समान है। केवल बड़े-बड़े मुनीश्चरोंस सेवित हैं, उनमें स्नान जेठी होनेसे गड्डा सर्वत्र पूजी जाती हैं।

English

What was opposed to the conduct of that meritorious king, crest-jewel of kings, by the force of that sin she fled, left as ashes, burned by your curse.

अध्याय १६०

श्लोक 45

देवार्थमेषा भववर्द्धनार्थं नृपोपकाराय च संप्रवृत्ता ।न स्वार्थकामा लभते ऽवमानं कथं द्विजातो ऽपकृतिं क्षमस्व

devārthameṣā bhavavarddhanārthaṃ nṛpopakārāya ca saṃpravṛttā / na svārthakāmā labhate 'vamānaṃ kathaṃ dvijāto 'pakṛtiṃ kṣamasva

हिन्दी अर्थ

मोहिनी बोली--पुरोहितजी ! आप बड़े कृपालु प्रकट हुआ। तत्पश्चात् वहाँ परशुरामकुण्ड हुआ और धर्मज्ञ हैं। आपको बहुत-से विषयोंका ज्ञान और उसके बाद वह कुरुक्षेत्रके नामसे प्रसिद्ध है। आपने मुझे तीर्थराज प्रयागका माहात्म्य हुआ। पूर्वकालमें ब्रह्माजीनी जिसका निर्माण बताया है। समस्त मुख्य तीर्थोमें जो शुभकारक किया था, वह सरोवर आज भी वहाँ स्थित है। कुरुक्षेत्र है, वह सम्पूर्ण लोकोंमें परम पवित्र है, तदनन्तर जो यह ब्रह्मवेदी है, वह उसकीौ अत: आप उसीका मुझसे वर्णन कीजिये। बाह्मदिशामें स्थित है। मुनिवर मार्कण्डेयने जहाँ

English

She acted for the gods, for increase of the world, and for the king's benefit; not seeking her own aim, she gets an insult. How, O twice-born, forgive her wrong.

अध्याय १६०

श्लोक 46

दयां कुरुष्व प्रशमं भजस्व पिष्टस्य पेषो नहि नीतियुक्तः ।शापप्रदानेननिपातितेयं कुरु प्रसादं गतिदो भवत्वम् ।यस्मिन्कृते ब्राह्मण मोहिनीयं बुद्धिं त्यजेत्क्रूरतरां त्वयीज्ये

dayāṃ kuruṣva praśamaṃ bhajasva piṣṭasya peṣo nahi nītiyuktaḥ / śāpapradānenanipātiteyaṃ kuru prasādaṃ gatido bhavatvam / yasminkṛte brāhmaṇa mohinīyaṃ buddhiṃ tyajetkrūratarāṃ tvayījye

हिन्दी अर्थ

पुरोहित बसुने कहा--मोहिनी! सुनो; मैं उत्तम तपस्या की, वहाँ प्लक्ष (पाकरके वृक्ष)- उत्तम पुण्य देनेवाले कुरुक्षेत्रका वर्णन करता हूँ, से प्रकट होकर सरस्वती नदी आयी है। जहाँ जाकर स्त्रान करनेसे मनुष्य सब पापोंसे धर्मात्मा मुनिने सरस्वतीका पूजन करके उनको मुक्त हो जाता है। कुरुक्षेत्रमें मुनीश्चरोंद्वारा सेवित स्तुति की। वहाँ उनके समीप जो तालाब था,

English

Show mercy and take peace; grinding what is ground is not in keeping with policy. She has been struck down by your curse; show favour; be the giver of her goal, you, in whose act this Mohini would give up her cruel intention toward you the sacrificer."

अध्याय १६०

श्लोक 47

स एवमुक्तः कमलासनेन विमृश्य बुद्ध्या विससर्ज कोपम् ।उवाच देवं त्रिदशाधिनाथं विमोहिनीदेहकृतं द्विजेन्द्रः

sa evamuktaḥ kamalāsanena vimṛśya buddhyā visasarja kopam / uvāca devaṃ tridaśādhināthaṃ vimohinīdehakṛtaṃ dvijendraḥ

हिन्दी अर्थ

अनेक तीर्थ हैं। उन सबका मैं तुम्हें परिचय देता उसको अपने जलसे भरकर सरस्वती नदी हूँ। वे श्रोताओंको भी मोक्ष देनेवाले हैं। पश्चिम दिशाकी ओर चली गयीं। तदनन्तर राजा ब्रह्मज्ञान, गयाश्राद्ध, गायको संकटसे बचाते कुरुने आकर चारों ओरसे उस क्षेत्रकों हलसे समय मृत्युको प्राप्त होना और कुरुक्षेत्रमें निवास जोता। उसका विस्तार पाँच योजनका था। वहाँ करना--इन चारों साधनोंसे मोक्ष प्राप्त होता है। दया, सत्य और क्षमा आदि गुणोंका उदृम है। सरस्वती और दृषद्वती--इन दोनों देवनदियोंके तभीसे समन्तपञ्ञक नामक क्षेत्रको कुरुक्षेत्र कहा बीचका जो देश है, उसे देवसेवित “त्रह्मावर्त' जाने लगा। देवि! यहाँ स्नान करनेवाले मानंव (कुरुक्षेत्र, कहते हैं। जो दूर रहकर भी “मैं अक्षय पुण्य लाभ करते हैं और वहाँ मरे हुए

English

Thus addressed by the Lotus-seated, reflecting with intellect, the best of Brahmins gave up his anger and said to the lord of the gods what had been done to Mohini's body:

अध्याय १६०

श्लोक 48

बहुपापयुता देव मोहिनी तनया तव ।न लोकेषु स्थितिस्तस्मात्प्राणिभिः संकुलेषु च

bahupāpayutā deva mohinī tanayā tava / na lokeṣu sthitistasmātprāṇibhiḥ saṃkuleṣu ca

हिन्दी अर्थ

कुरुक्षेत्रमें जाऊँगा और वहीं निवास करूँगा', लोग विमानपर बैठकर -ब्रह्मलोकमें जाते हैं। इस प्रकार सदा कहा करता है, वह भी पापोंसे कुरुक्षेत्रमें उपवास, दान, होम, जप और देवपूजन-- मुक्त हो जाता है। जो धीर पुरुष वहाँ सरस्वतीके ये सब अक्षयभावको प्राप्त होते हैं। कुरुक्षेत्रकी तटपर निवास करेगा, उसे निस्सन्देह ब्रह्मज्ञान ब्रह्मवेदीमें मरे हुए मनुष्य फिर इस संसारमें

English

"God, your daughter Mohini is full of much sin; therefore she has no place in the worlds crowded with living beings.

अध्याय १६०

श्लोक 49

मया विमृश्य सुचिरं मोद्दिन्यर्थं विचिन्तितम् ।तद्दास्यमि तव प्रीत्या त्वं हि पूज्यतरो मम

mayā vimṛśya suciraṃ moddinyarthaṃ vicintitam / taddāsyami tava prītyā tvaṃ hi pūjyataro mama

हिन्दी अर्थ

प्रातत होगा। देवि! देवता, महर्षि और सिद्धगण जन्म नहीं लेते। मोहिनी! जो कुरुक्षेत्रके वनों, कुरुक्षेत्रका सेवन करते हैं; उसके सेवनसे मनुष्य तीर्थों और सरिताओंकी पुण्यदायिनी यात्रा करता अपने-आपमें ही ब्रह्मका साक्षात्कार करता है।। है, उसके लिये इहलोक और परलोकमें भी पहले उस स्थानपर पुण्यमय ब्रह्मसरोवर कोई कमी नहीं रहती।

English

Having reflected long, I have thought about Mohini; out of love for you I shall give it, for you are more worthy of honour to me.

अध्याय १६०

श्लोक 50

यथा तव वचः सत्यं मम चापि सुरेश्वर ।देवकार्यं च भविता मोहिनीकृतत्यमेव च

yathā tava vacaḥ satyaṃ mama cāpi sureśvara / devakāryaṃ ca bhavitā mohinīkṛtatyameva ca

हिन्दी अर्थ

कुरुक्षेत्रके वन, नदी और भिन्न-भिन्न तीर्थोका माहात्म्य तथा यात्राविधिका क्रमिक वर्णन मोहिनीने पूछा--विप्रवर ! कुरुक्षेत्रमें कौन- तत्काल मुक्त हो जाता है।

English

As your word is true, so is mine too, O lord of the gods; the work of the gods will be done, and what Mohini did too.

अध्याय १६०

श्लोक 51

यन्नाक्रान्तं हि भूतौघैस्तत्स्थाने मोहिनीस्थितिः ।जङ्गमाजङ्गमैर्भूमिर्व्याप्ता द्वीपवती सदा

yannākrāntaṃ hi bhūtaughaistatsthāne mohinīsthitiḥ / jaṅgamājaṅgamairbhūmirvyāptā dvīpavatī sadā

हिन्दी अर्थ

कौन-से वन हैं और कौन-सी शुभकारक सरिताएँ हैं ? सम्पूर्ण सिद्धियोंको देनेवाली कुरुक्षेत्र- यात्राकी विधि मुझे क्रमसे बताइये। अत्यन्त पुण्यदायक कुरुक्षेत्रमें जो-जो तीर्थ हैं, उन काम्यकवन, महान् अदितिवन, पुण्यदायक व्यासवन, फलकीवन, सूर्यवन, पुण्यमय मधुवन तथा सुविख्यात सीतावन-- कुरुक्षेत्रमें ये सात वन हैं और उन वनोंमें अनेक तीर्थ हैं। पुण्यसलिला

English

Where the throngs of beings have not intruded, in that place Mohini shall stay. The earth with its continents is always pervaded by moving and unmoving beings,

अध्याय १६०

श्लोक 52

तलानि चापि दैत्याद्यैराकाशः पक्षिपूर्वकैः ।नाकः सुकृतिभिर्जीवैर्नरकाः पापकर्मभिः

talāni cāpi daityādyairākāśaḥ pakṣipūrvakaiḥ / nākaḥ sukṛtibhirjīvairnarakāḥ pāpakarmabhiḥ

हिन्दी अर्थ

गड़ा, मधुस््रवा, दृषद्बती, कौशिकी तथा पुण्यमयी हैरण्वती नदी--इनमें सरस्वती नदीको छोड़कर शेष सब नदियाँ केवल वर्षाकालमें बहनेवाली हैं। इनका जल स्पर्श करने, पीने एवं नहानेके

English

the nether regions by demons and the like, the sky by birds and the like, heaven by souls of merit, the hells by those of sinful deeds,

अध्याय १६०

श्लोक 53

झषाद्यैः सागरा व्याप्ता नैष्वस्पृष्यास्थितिस्ततः ।ततो ब्रह्मा सुरैः सर्वैः संमन्त्र्य नृपसत्तम

jhaṣādyaiḥ sāgarā vyāptā naiṣvaspṛṣyāsthitistataḥ / tato brahmā suraiḥ sarvaiḥ saṃmantrya nṛpasattama

हिन्दी अर्थ

लिये सदा पवित्र माना गया है। पुण्यक्षेत्रके प्रभावसे इनमें रजस्वलापनका दोष नहीं आता। पहले महाबली द्वारपाल रन्तुकके समीप जाकर यक्षको प्रणाम करके वहाँकी यात्रा प्रारम्भ करे। भद्रे! तदनन्तर पुण्यमय महान् अदितिवनमें जाय। यदि नारी वहाँ स्नान करके देवमाता अदितिकी पूजा करे तो वह समस्त शुभ लक्षणोंसे युक्त और महान् शूरवीर पुत्रको जन्म देती है। वरारोहे !

English

the oceans by fish and the like; therefore there is no standing place for her." Then Brahma, having consulted all the gods, O best of kings,

अध्याय १६०

श्लोक 54

उवाच मोहिनीं देवीं नास्ति स्थानं तव क्वचित् ।तच्छ्रुत्वा मोहिनी वाक्यं पितुराज्ञाविधायिनी

uvāca mohinīṃ devīṃ nāsti sthānaṃ tava kvacit / tacchrutvā mohinī vākyaṃ piturājñāvidhāyinī

हिन्दी अर्थ

वहाँसे भगवान् विष्णुके परम उत्तम विमल नामसे विख्यात तीर्थस्थानको जाय, जहाँ भगवान् श्रीहरि सदा विद्यमान रहते हैं। जो मनुष्य विमलतीर्थमें स्नान करके भगवान् विमलेश्वरका दर्शन करता

English

said to the goddess Mohini: "You have no place anywhere." Hearing those words, Mohini, obeying her father's command,

अध्याय १६०

श्लोक 55

उवाच प्रणता सर्वान् हरिवासरनाशिनी ।पुरोधसा समेतानो देवानां लोकसाक्षिणाम्

uvāca praṇatā sarvān harivāsaranāśinī / purodhasā sametāno devānāṃ lokasākṣiṇām

हिन्दी अर्थ

है, वह विमल होकर देवाधिदेव चक्रधारी भगवान् विष्णुके लोकको प्राप्त कर लेता है। मोहिनी! वहाँ भगवान् श्रीहरि और बलदेवजीको एक आसनपर बैठे देखकर मनुष्य सब पापोंसे फिर वहाँके लोकविख्यात पारिप्लवतीर्थमें जाय; वहाँ स्नान और जलपान करके जो वेदोंके पारड्गभत विद्वान् ब्राह्मणको दक्षिणा आदिसे संतुष्ट करता है, वह ब्रह्मययज्ञका फल पाता है। भभद्रे!

English

the destroyer of Hari's day, bowed and said to all, in the company of the priest, to the gods, witnesses of the world:

अध्याय १६०

श्लोक 56

भवतां त्रिदशश्रेष्ठा एष बद्धो मयाञ्जलिः ।प्रणिपातशतेनापि प्रसन्नेन हृदा सुराः

bhavatāṃ tridaśaśreṣṭhā eṣa baddho mayāñjaliḥ / praṇipātaśatenāpi prasannena hṛdā surāḥ

हिन्दी अर्थ

जहाँ कौशिकी नदीका पापनाशक सड्म है, वहाँ भत्तिपूर्वक स्नान करके मनुष्य प्रियजनोंका सड्भ पाता है। महाभागे! तदनन्तर क्षमाशील मनुष्य पृथ्वीतीर्थमें जाकर भक्तिपूर्वक स्रान करे तो वह

English

"O best of the thirty gods, I have folded my hands to you; with a gracious heart, gods, even with a hundred prostrations,

अध्याय १६०

श्लोक 57

दातव्यं याचितं मंह्यं सर्वेषां प्रीतिकारकम् ।एकादश्याः प्रभावेण सर्वेषां पापिनां गतिः

dātavyaṃ yācitaṃ maṃhyaṃ sarveṣāṃ prītikārakam / ekādaśyāḥ prabhāveṇa sarveṣāṃ pāpināṃ gatiḥ

हिन्दी अर्थ

उत्तम गतिको पाता है। पुरुषके द्वारा इस पृथ्वीपर जितने अपराध किये गये हैं, उन सबको देहधारी जीवके वहाँ स्नान करनेपर पृथ्वीदेवी क्षमा कर देती हैं। तत्पश्चात् परम पुण्यमय दक्षके आश्रममें दक्षेश्रर शिवका दर्शन करनेसे मनुष्यको अश्वमेध- यज्ञका फल प्राप्त होता है। उसके बाद शालकिनीतीर्थमें जाय और वहाँ अपने मनोरथकी सिद्धिके लिये भगवान् शिवसे संयुक्त हुए श्रीहरिका पूजन करे।

English

what I asked should be given to me, to please all. By the power of Ekadashi the goal of all sinners

अध्याय १६०

श्लोक 58

साध्यते तां सुरश्रेष्ठा वर्धितुं मे प्रयोजनम् ।पतिः सपत्नी पुत्रश्च मया वैकुण्ठगाः कृताः

sādhyate tāṃ suraśreṣṭhā vardhituṃ me prayojanam / patiḥ sapatnī putraśca mayā vaikuṇṭhagāḥ kṛtāḥ

हिन्दी अर्थ

तत्पश्चात् विधिको जाननेवाला पुरुष नागतीर्थमें जाकर स्त्रान करे और वहाँ घी तथा दही खाकर नागोंसे अभय प्राप्त करे। उसके बाद त्रिभुवनविख्यात पञ्जनदतीर्थकों जाय । वहाँ भगवान् शट्डूरने असुरोंको

English

is accomplished; so, best of gods, for increase of my purpose — husband, co-wife and son were made by me to go to Vaikuntha.

अध्याय १६०

श्लोक 59

भूर्लोके विधवाद्याहं वर्तामि भवतां कृते ।यथा हरिदिनं दुष्टं जायते मम मानदाः

bhūrloke vidhavādyāhaṃ vartāmi bhavatāṃ kṛte / yathā haridinaṃ duṣṭaṃ jāyate mama mānadāḥ

हिन्दी अर्थ

डरानेवाले पाँच सिंहनाद किये थे; इससे वह सम्पूर्ण पातकोंका नाश करनेवाला तीर्थ 'पश्चनद' नामसे विख्यात हुआ। वहाँ स्नान और दानसे मनुष्य निर्भय हो जाता है। मोहिनी! तत्पश्चात् कोटि-तीर्थमें जाय, जहाँ महात्मा रुद्रने कोटि तीर्थोोको लाकर स्थापित किया था। उस तीर्थमें स्नान और कोयैश्वर शिवका दर्शन करके मनुष्य तभीसे पश्चयज्ञजनित पुण्यका सहैव लाभ करता

English

On earth I live as a widow and the like for your sake, so that Hari's day, O honourers, may seem evil to me.

अध्याय १६०

श्लोक 60

एतत्प्रयाचे ददत स्वार्थार्थं तद्धि नान्यथा

etatprayāce dadata svārthārthaṃ taddhi nānyathā

हिन्दी अर्थ

रहता है। वहीं सम्पूर्ण देवताओंने भगवान् वामनकी भी स्थापना की है। अत: उनका पूजन करके मानव अग्रिष्टोम-यज्ञका फल पा लेता है। वहाँसे

English

I ask this; give it for my own purpose, otherwise not."

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_nAradapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Narada Purana — Chapter 160
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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