Narada Purana· Nārada Purāṇa
161
अध्याय 161 / 167

Book 2 - Adhyaya 37

46 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ46 श्लोक

श्लोक पर जाएं:

अध्याय १६१

श्लोक 1

इति श्रीबृहन्नारदीयपुराणोत्तरभागे मोहिनीचरिते षट्त्रिंशत्तमो ऽध्यायः मोहिन्युवाच एकादशीसमं देवाः पावनं नापरं भवेत् ।यया पूता महापापा गच्छन्ति हरिमन्दिरम्

iti śrībṛhannāradīyapurāṇottarabhāge mohinīcarite ṣaṭtriṃśattamo 'dhyāyaḥ mohinyuvāca ekādaśīsamaṃ devāḥ pāvanaṃ nāparaṃ bhavet / yayā pūtā mahāpāpā gacchanti harimandiram

हिन्दी अर्थ

अश्वितीर्थमें जाकर श्रद्धालु एवं जितेन्द्रिय पुरुष वहाँ स्नान करे। इससे वह यशस्वी तथा रूपवान् होता है। वहाँसे भगवान् विष्णुद्दारा निर्मित वाराहतीर्थमें जाकर श्रद्धापूर्वक डुबकी लगानेवाला मनुष्य उत्तम गतिको पाता है। वरानने! वहाँसे सोमतीर्थमें जाय, जहाँ सोम तपस्या करके नीरोग हुए थे। वहाँ स्नान करना चाहिए। उस तीथर्थमें एक गोदान करके मनुष्य राजसूय यज्ञका फल

English

The eight days, remembered in the Agamas (Scrip¬ tures), of the devotees of Visnu as 'Mahadvadasis' are those days wherein Ekadasi is also present. They are observed as the days of fast by the devotees of Visnu.

अध्याय १६१

श्लोक 2

तत्समीपे मम स्थानं युक्तं भाति विचार्यताम् ।देवा ऊचुः वेधो निशीथे देवानामुपकाराय मोहिनी

tatsamīpe mama sthānaṃ yuktaṃ bhāti vicāryatām / devā ūcuḥ vedho niśīthe devānāmupakārāya mohinī

हिन्दी अर्थ

पाता है। वहीं भूतेश्वर, ज्वालामालेश्रर तथा ताण्डेश्रर शिव-लिड्ग हैं। उनकी पूजा करके मनुष्य फिर संसारमें जन्म नहीं लेता। एकहंस तीर्थमें स्नान करके मनुष्य सहस्न गोदानका फल

English

In the evening of the previous (i.e. DasamI) day and in the morning of the following ( i.e. Dvadasi) day meal is missed. (Of course, both the meals are eschewed in the middle day i.e. Ekadasi day). But if Ekadasi is overlapped (by the previous Tithi), the observance of full fast is on the next day. The holy rite, in that case, should be performed on the Dvadasi

अध्याय १६१

श्लोक 3

सूर्योदये सुराणां च हरिणा परिकल्पितः ।पारणं च त्रयोदश्यामुपवासविनाशनम्

sūryodaye surāṇāṃ ca hariṇā parikalpitaḥ / pāraṇaṃ ca trayodaśyāmupavāsavināśanam

हिन्दी अर्थ

पाता है और कृतशौचतीर्थमें स्नान करनेपर उसे पुण्डरीक-यज्ञका फल प्राप्त होता है। तदनन्तर भगवान् शिवके मुझवट नामक तीर्थमें जाकर वहाँ एक रात निवास करे। फिर दूसरे दिन भगवान् शिवकी पूजा करके वह उनके गणोंका अधिपति होता है। तदनन्तर उस तीर्थमें परिक्रमा करके पुष्करतीर्थमें जाय। वहाँ स्नान और पितरोंका पूजन करके मनुष्य कृतकृत्य हो जाता है।

English

Those who are physically incapable of observing full fast can take water, vegetables, fruits, milk or theNaivedya offer¬ ings of Hari. In any case the quantity must not exceed a fourth of the usual diet.

अध्याय १६१

श्लोक 4

महाद्वादशिका ह्यष्टौ याः स्मृता वैष्णवागमे ।तास्तु ह्येकादशीभिन्ना उपोष्यन्ते च वैष्णवैः

mahādvādaśikā hyaṣṭau yāḥ smṛtā vaiṣṇavāgame / tāstu hyekādaśībhinnā upoṣyante ca vaiṣṇavaiḥ

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर रामहदको जाय और वहाँ विधिपूर्वक स्नान करके देवताओं, ऋषियों तथा पितरोंका पूजन (तर्पण) आदि करे। इससे वह भोग और मोक्ष दोनों प्राप्त कर लेता है। जो उत्तम श्रद्धापूर्वक

English

O chaste lady, the Smartas (those who follow Smrtis) eschew the Ekadasi that is overlapped (by Dasami) at sunrise. Those who are devoid of any desire (from this Vrata) leave off (the Ekadasi) that is overlapped by Dasami even at midnight.

अध्याय १६१

श्लोक 5

एकादशीव्रतं भिन्नं वैष्णवानां महात्मनाम् ।नित्यं पक्षद्वये प्रोक्तं विधिना त्रिदिनात्मके

ekādaśīvrataṃ bhinnaṃ vaiṣṇavānāṃ mahātmanām / nityaṃ pakṣadvaye proktaṃ vidhinā tridinātmake

हिन्दी अर्थ

परशुरामजीकी पूजा करके वहाँ सुवर्ण-दान करता है, वह धनी होता है। वंशमूलतीर्थमें जाकर स्नान करनेसे तीर्थयात्री अपने वंशका उद्धार करता है और कायशोधन-तीर्थमें ्नान करके शुद्धशरीर हो श्रीहरिमें प्रवेश करता है। तत्पश्चात् लोकोद्धारतीर्थमें जाकर वहाँ स्नान करके भगवान् जनार्दनका पूजन करे। ऐसा करनेवाला पुरुष उस शाश्रत लोकको प्राप्त होता

English

O splendid lady, thanks to this, even the task of the Devas can be realised. Staying along the border of DaSamI, you will traverse along with the Sun and the Moon too.

अध्याय १६१

श्लोक 6

सायं प्रातस्त्यजेद्भुक्तिं क्रमात्पूर्वापराह्णयोः ।एकादशी यदा भिन्ना उपोष्या हि परे ऽहनि ।द्वादश्यां हि व्रतं कार्यं निरंबु समुपोषणम्

sāyaṃ prātastyajedbhuktiṃ kramātpūrvāparāhṇayoḥ / ekādaśī yadā bhinnā upoṣyā hi pare 'hani / dvādaśyāṃ hi vrataṃ kāryaṃ niraṃbu samupoṣaṇam

हिन्दी अर्थ

है, जहाँ सनातन भगवान् विष्णु विराजमान हैं। वहाँसे श्रीतीर्थ एवं परम उत्तम शालग्रामतीर्थमें

English

In order to dispel your sins, you move about the various sacred places on the Earth. You can have the benefit of the rite of Ekadasi witliin the period of time between Aruno- daya (dawn) and sunrise.

अध्याय १६१

श्लोक 7

लङ्घने त्वसमर्थानां जलं शाकं फलं पयः ।नैवेद्यं वा हरेः प्रोक्तं स्वाहारात्पादसंमितम्

laṅghane tvasamarthānāṃ jalaṃ śākaṃ phalaṃ payaḥ / naivedyaṃ vā hareḥ proktaṃ svāhārātpādasaṃmitam

हिन्दी अर्थ

जाकर, जो वहाँ स्नान करके श्रीहरिका पूजन करता है, वह प्रतिदिन भगवान्को अपने समीप विद्यमान देखता है। कपिलाहदतीर्थमें जाकर वहाँ सन्रान और देवता, पितरोंका पूजन करके मनुष्य सहस्र कपिलादानका पुण्य पाता है। भद्रे! वहाँ जगदीश्वर कपिलका विधिपूर्वक पूजन करके मनुष्य देवताओंकेद्वारा सत्कृत हो साक्षात् भगवान् शिवका पद प्राप्त कर लेता है। तदनन्तर सूर्यतीर्थमें

English

If any one observes the holy rite of Ekadasi on the day when it has been occupied by you, he will be the person assisting you, O beloved one of the Devas. The period of two Muhurtas of the dawn should be known ( as your period of occupancy).

अध्याय १६१

श्लोक 8

स्वाती सूर्योदये विद्धो त्यजन्त्यकादशीं सति ।निष्कामा मध्यरात्रे च विद्धां मुञ्चन्ति याम्यया

svātī sūryodaye viddho tyajantyakādaśīṃ sati / niṣkāmā madhyarātre ca viddhāṃ muñcanti yāmyayā

हिन्दी अर्थ

जाकर उपवासपूर्वक भगवान् सूर्यका पूजन करे। इससे यात्री अग्रिष्टोम यज्ञ़का फल पाकर स्वर्गलोकमें जाता है। पृथ्वीके विवरद्वारपर साक्षात् गणेशजी विराजमान हैं। उनका दर्शन और पूजन करके

English

You come (and occupy your place) after the thir¬ teenth Muhurta of the night. O lady of pure smiles, erivmg merit of those who observe fast on that day, be appy-

अध्याय १६१

श्लोक 9

सर्वेष्वपि तु लोकेषु विदिता दशमी तिथिः ।यमस्य तस्याः प्रान्ति तु स्थितिः कार्या त्वयानघे

sarveṣvapi tu lokeṣu viditā daśamī tithiḥ / yamasya tasyāḥ prānti tu sthitiḥ kāryā tvayānaghe

हिन्दी अर्थ

मनुष्य यज्ञानुष्ठानका फल पाता है। देवीतीर्थमें स्नान करनेसे मनुष्यको उत्तम रूपकी प्राप्ति होती है और ब्रह्मावर्तमें स्नान करके वह ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर लेता है। सुतीर्थमें ज्नान करके देवताओं, ऋषियों, पितरों तथा मनुष्योंका पूजन करनेपर मानव अश्वमेध-यज्ञका फल पाता है। कामे श्वरतीर्थमें श्रद्धापूर्वक स्नान करके सब व्याधियोंसे मुक्त पुरुष शाश्रत ब्रह्मको प्राप्त कर लेता है। देवि!

English

O splendid lady, enjoy the benefit of the merit of those persons who assiduously observe the holy rite of Ekadasi on the day of your occupancy and overlapping. Be gracious unto this Brahmana (? )

अध्याय १६१

श्लोक 10

एतेन देवकार्यं च सिद्धं भवति शोभने ।सूर्येन्दुचारा तिथ्यास्तु दशम्याः प्रान्तगामिनी

etena devakāryaṃ ca siddhaṃ bhavati śobhane / sūryenducārā tithyāstu daśamyāḥ prāntagāminī

हिन्दी अर्थ

मातृतीर्थमें श्रद्धापूर्वक स्नान और पूजन करनेवाले पुरुषके घर सात पीढ़ियोंतक उत्तम लक्ष्मी बढ़ती रहती है। शुभे! तदनन्तर सीतावन नामक महान् तीर्थमें जाय। वहाँ अपना केश मुँड़ाकर मनुष्य

English

Thus advised and guided by the lotus-seated deity (Brahma) and others, MohinI became much more delighted. She considered her life contented and blessed by the opportu¬ nity to resort to holy centers for wiping off her sins.

अध्याय १६१

श्लोक 11

भुवि तीर्थानि चैव त्वं स्वाघनाशाय संचर ।अरुणोदयमारभ्य यावत्सूर्योदयो भवेत्

bhuvi tīrthāni caiva tvaṃ svāghanāśāya saṃcara / aruṇodayamārabhya yāvatsūryodayo bhavet

हिन्दी अर्थ

पापसे शुद्ध हो जाता है। वहीं तीनों लोकोंमें विख्यात दशाश्रमेध नामक तीर्थ है, जिसके दर्शनमात्रसे मानव पापमुक्त हो जाता है। विधिनन्दिनी! यदि पुनः मनुष्य-जन्म पानेकी इच्छा हो तो मानुषतीर्थमें जाकर स्नान करना चाहिए। मानुषतीर्थसे एक कोसकी दूरीपर आपगा नामसे विख्यात एक महानदी है। वहाँ विधिपूर्वक स्नान करके श्रेष्ठ ब्राह्मणोंको साँवाँके चावलकी

English

"Although my body had been reduced to ashes, this task of the Devas has been achieved. Although the body is reduced to a mere mass of ashes and consciousness of aerial nature (Linga-Sarira) remains, the path made by the king is swept clean.

अध्याय १६१

श्लोक 12

तदन्तस्त्वं व्रते प्राप्ता लभस्वैकादशीफलम् ।यः कश्चित्कुरुते विद्धं त्वया ह्येकादशीव्रतम्

tadantastvaṃ vrate prāptā labhasvaikādaśīphalam / yaḥ kaścitkurute viddhaṃ tvayā hyekādaśīvratam

हिन्दी अर्थ

खीर भोजन करावे। ऐसा करनेवाले पुरुषके पापोंका नाश हो जाता है और वहाँ श्राद्ध करनेसे

English

For the delusion of the people, she stationed herself in the transition period of time of Dasami (that is called Surya- vihina (devoid of the Sun or Arunodaya Vedha). She enjoys the whole day (?) in the form of Krcchranta for the downfall into hell of men (? )

अध्याय १६१

श्लोक 13

स तीपकारकस्तुभ्यं भविष्यति सुरप्रिये ।मुहूर्तद्वयमात्रं तु ज्ञेयं चात्रारुणोदयम्

sa tīpakārakastubhyaṃ bhaviṣyati surapriye / muhūrtadvayamātraṃ tu jñeyaṃ cātrāruṇodayam

हिन्दी अर्थ

पितरोंकी सद्ोति होती है। भाद्रपद मासके कृष्णपक्षमें, जिसे 'पितृपक्ष' एवं “महालय' भी कहते हैं, चतुर्दशीको मध्याहमें आपगाके तटपर पिण्डदान करनेवाला मनुष्य मोक्ष पाता है। वहाँसे ब्रह्माजीके स्थान ब्राह्मोदुम्बरकतीर्थमें जाय। वहाँ ब्रह्मर्षियोंके कुण्डोंमें स्नान करके मनुष्य सोमयागका फल पाता है। वृद्धकेदारकतीर्थमें दण्डीसहित स्थाणुकी पूजा करके कलशीतीर्थमें

English

If Dasami touches Ekadasi at the time of Sunrise what is called Suryodaya Vedha it is always condemned. The sunrise that is not touched will be conducive to the fasci¬ nation of men.

अध्याय १६१

श्लोक 14

मूहूर्ताः पञ्चदश च स्मृता रात्रेर्दिनस्य च ।ज्ञेयास्ते ह्रस्वदीर्घत्वे त्रैराशिक विधानतः

mūhūrtāḥ pañcadaśa ca smṛtā rātrerdinasya ca / jñeyāste hrasvadīrghatve trairāśika vidhānataḥ

हिन्दी अर्थ

जाय, जहाँ साक्षात् अम्बिकादेवी विराजमान हैं। वहाँ स्नान करके अम्बिकाजीकी पूजा करनेसे मानव भवसागरके पार हो जाता है। सरकतीर्थमें कृष्णपक्षकी चतुर्दशीको भगवान् महेश्वरका दर्शन

English

By stationing myself on the border of Yama's Tithi, the universe has been deluded by me. O dear father, thanks to your power, Yama who had been formerly conquered by the king is now made victorious.

अध्याय १६१

श्लोक 15

त्रयोदशान्मुहूर्तान्त्तु रात्रैरूर्द्ध्वा समागता ।सब्ध्वोपवासिनां पुण्यं स्वस्था भव शुचिस्मिते

trayodaśānmuhūrtānttu rātrairūrddhvā samāgatā / sabdhvopavāsināṃ puṇyaṃ svasthā bhava śucismite

हिन्दी अर्थ

करके श्रद्धालु मनुष्य शिवधाममें जाता है। भामिनि! सरकमें तीन करोड़ तीर्थ हैं। सरोवरके मध्यमें जो कूप है, उसमें कोटि रुद्रोंका निवास है। जो मानव उस सरोवरमें स्नान करके उन कोटिरुद्रोंका स्मरण करता है, उसके द्वारा वे करोड़ों रुद्र पूजित होते हैं। वहीं ईहास्पद नामक तीर्थ है, जो सब पापोंका नाश करनेवाला है। उस तीर्थमें जाकर उसके दर्शनमात्रसे मानव मोक्ष प्राप्त

English

On hearing those words of MohinI, god Brahma the ordainer of the worlds, mollified the Brahmana once again for the sake of his daughter.

अध्याय १६१

श्लोक 16

यमसंस्थापनार्थाय वैकुण्ठध्वंसनाय च ।पाखण्डानां विवृद्ध्यर्थं पापसंचनाय च

yamasaṃsthāpanārthāya vaikuṇṭhadhvaṃsanāya ca / pākhaṇḍānāṃ vivṛddhyarthaṃ pāpasaṃcanāya ca

हिन्दी अर्थ

कर लेता है। वहाँके देवताओं और पितरोंका पूजन करके वह कभी दुर्गतिमें नहीं पड़ता और मनचाही वस्तुओंको प्राप्त कर लेता है। केदार नामक महातीर्थ मनुष्यके सब पापोंका नाश कर

English

"O deer one, O Vasu, understand this that I speak which is beneficial to this lady. O blessed one, this is conducive to the benefit of all the worlds.

अध्याय १६१

श्लोक 17

दत्तं ते मोहिनि स्थानं प्रत्यूषसमयाङ्कितम्

dattaṃ te mohini sthānaṃ pratyūṣasamayāṅkitam

हिन्दी अर्थ

देता है। वहाँ स्नान करके पुरुष सब दानोंका फल पाता है। सरकसे पूर्व दिशामें अन्यजन्म नामसे विख्यात तथा स्वच्छ जलसे भरा हुआ एक सरोवर है, जहाँ भगवान् विष्णु और शिव दोनों स्थित हैं। भगवान् विष्णु तो वहाँ चतुर्भुजरूपसे विराजमान हैं और भगवान् शिव लिड्डरूपमें स्थित हैं। वहाँ स्नान करके उन दोनोंका दर्शन और स्तवन करनेपर मनुष्य मोक्ष प्राप्त कर लेता

English

But she became a sinner inasmuch as she was anta¬ gonistic to Visnu's day. O leading Brahmana may something be done immediately so that she is sanctified."

अध्याय १६१

श्लोक 18

विद्धं त्वयैकादशिकाव्रतं ये कुर्वन्ति कर्तार इह प्रयत्नात् ।तेषां भवेद्यत्सुकृतं शुभे फलं भुङ्क्ष्व प्रसन्ना भव भूसुरे त्वम्

viddhaṃ tvayaikādaśikāvrataṃ ye kurvanti kartāra iha prayatnāt / teṣāṃ bhavedyatsukṛtaṃ śubhe phalaṃ bhuṅkṣva prasannā bhava bhūsure tvam

हिन्दी अर्थ

है। तदनन्तर नागहदमें जाकर स््रान करे। वहाँ चैत्र शुक्ला पूर्णिमाको श्राद्धका दान करनेवाला पुरुष यमलोक नहीं देखता। उसे मोक्ष प्रास हो जाता है। तत्पश्चात् देवसेवित त्रिविष्टपतीर्थमें

English

On hearing god Brahma's words of request, the sacrificial priest (of Mohini's family) delightfully passed orders for reunion of the physical body (after its creation) with (the jlva) of hisYajya.

अध्याय १६१

श्लोक 19

एवं प्रदिष्टा कमलासनाद्यैः सा मोहिनी हृष्टतरा बभूव ।मेने कृतार्थं निजजीवितं च स्वपापतीर्थाभिनिषेवणेन

evaṃ pradiṣṭā kamalāsanādyaiḥ sā mohinī hṛṣṭatarā babhūva / mene kṛtārthaṃ nijajīvitaṃ ca svapāpatīrthābhiniṣevaṇena

हिन्दी अर्थ

जाय, जहाँ सब पापोंसे मुक्त करनेवाली बवैतरणी नामकी पवित्र नदी है। उसमें स्नान करके शूलपाणि भगवान् वृषध्वजका पूजन करनेपर सब पापोंसे शुद्धचित्त हो मनुष्य परम गति प्राप्त कर लेता है। रसावर्ततीर्थमें स्नान करनेसे मनुष्यको परम उत्तम सिद्धि प्राप्त होती है। चैत्र मासके शुक्लपक्षकी चतुर्दशीको विलेपकतीर्थमें स्लान करके जो भक्ति-भावसे भगवान् शिवकी पूजा

English

On hearing the words of the Brahmana, Brahma, the grandfather of the worlds, sprinkled water from his waterpot on the ashes of the body of Mohinl.

अध्याय १६१

श्लोक 20

संसाधितं कार्यमिदं सुराणां भस्मावशेषं हि गते ऽपि देहे ।चैतन्यमात्रे पवनात्मके ऽस्मिन् संमार्जितो भूपकृतस्तु पन्थाः

saṃsādhitaṃ kāryamidaṃ surāṇāṃ bhasmāvaśeṣaṃ hi gate 'pi dehe / caitanyamātre pavanātmake 'smin saṃmārjito bhūpakṛtastu panthāḥ

हिन्दी अर्थ

करता है, वह सब पापोंसे छूट जाता है।

English

When the ashes were sprinkled with water by Brahma, the maker of the worlds, Mohinl was endowed with a physical body. After bowing down to her father, she humbly bowed down to Vasu, the priest and grasped his feet.

अध्याय १६१

श्लोक 21

नीतं मया चात्मकृतं हि वाक्यं प्रहृष्टया वै यदुदाहृतं हि ।एवं विमृश्य क्षिप्तिपालदे वान्प्रणम्य हृष्टा च पुरोधसं स्वम्

nītaṃ mayā cātmakṛtaṃ hi vākyaṃ prahṛṣṭayā vai yadudāhṛtaṃ hi / evaṃ vimṛśya kṣiptipālade vānpraṇamya hṛṣṭā ca purodhasaṃ svam

हिन्दी अर्थ

देवि! तत्पश्चात् मनुष्य परम उत्तम फलकीवनमें जाय, जहाँ देवता और गन्धर्व बड़ी भारी तपस्या करते हैं। वहाँ दृषद्वती नदीमें विधिपूर्वक स्नान करके मनुष्य देवताओं और पितरोंका तर्पण करनेपर अग्निष्टोम और अतिरात्र यज्ञका फल पाता है। जो वहाँ अमावास्या तथा पूर्णिमाको श्राद्ध करता है, उसे गयाश्राद्धंके समान उत्तम फल प्राप्त होता है। श्राद्धमें फलकीवनके स्मरणका

English

Then Vasu, the Yajaka (priest) of the king, became joyous. He spoke these words to (Mohinl) who was the wife of his Yajya (one on whose behalf he had to perform a Yajna), whose prowess was wellknown and who had been abandoned by her husband and son.

अध्याय १६१

श्लोक 22

प्रान्ते स्थिता सूर्यविहीनसंज्ञे काले दशम्या जनमोहनाय ।कृच्छ्रान्तरूपा च दिनं च भुङ्क्ते प्रकृष्टरूपा नरकाय नॄणाम्

prānte sthitā sūryavihīnasaṃjñe kāle daśamyā janamohanāya / kṛcchrāntarūpā ca dinaṃ ca bhuṅkte prakṛṣṭarūpā narakāya nṝṇām

हिन्दी अर्थ

फल पितरोंको तृप्ति देनेवाला है। तदनन्तर पाणिघाततीर्थमें पितरोंका तर्पण करके मानव राजसूय-यज्ञका फल पाता और सांख्य एवं योगीको भी प्राप्त कर लेता है। तत्पश्चात् मिश्रकतीर्थमें

English

Vasu said:- "O gentle lady, anger has been abandon¬ ed by me at the instance of Brahma. I shall facilitate your salvation by means of such rites as visiting holy centres and taking holy dips".

अध्याय १६१

श्लोक 23

प्रान्तस्थितां तां रविजो निरीक्ष्य प्रहृष्टवक्त्रो वचनं जगाद ।त्वया प्रतिष्ठा मम चारुनेत्रे कृतात्र लोके पुनरेव सम्यक् ।विभोदितो रुक्मविभूषणस्य मत्तेभसंस्थः पटहः सुघैषः

prāntasthitāṃ tāṃ ravijo nirīkṣya prahṛṣṭavaktro vacanaṃ jagāda / tvayā pratiṣṭhā mama cārunetre kṛtātra loke punareva samyak / vibhodito rukmavibhūṣaṇasya mattebhasaṃsthaḥ paṭahaḥ sughaiṣaḥ

हिन्दी अर्थ

विधिपूर्वक स्नान करके मनुष्य सम्पूर्ण तीर्थोंके फलका भागी होता और उत्तम गति पाता है। वहाँसे व्यासवनमें जाकर जो मनोजवतीर्थमें स्लान और मनीषी प्रभुका दर्शन करता है, वह मनचाही वस्तु प्राप्त कर लेता है। तदनन्तर मधुवनमें जाकर देवीतीर्थमें ज्लान करके शुद्ध हुआ मनुष्य देवताओं तथा ऋषियोंकी पूजा करके उत्तम सिद्धि (मोक्ष)

English

After saying this to Mohinl, the Brahmana joyously bowed down to Brahma, the lord of the worlds, and the father of Mohinl, and bade goodbye to him.

अध्याय १६१

श्लोक 24

दृष्टे कार्ये जनः सर्वः प्रत्ययं कुरुते त्विति

dṛṣṭe kārye janaḥ sarvaḥ pratyayaṃ kurute tviti

हिन्दी अर्थ

पूर्णिमान्त मासकी मान्यताके अनुसार पितृपक्ष आश्विनमें पड़ता है। अतः यहाँ भाद्रपदका अर्थ आश्विन

English

Bidden farewell by Mohinl and Vasu out of affection Brahma went to the world beyond darkness through the unmanifest path.

अध्याय १६१

श्लोक 25

सूर्योदय स्पृषा ह्येषा दशमी गर्हिता सदा ।अस्पृष्टमुदयं नॄणां मोहनाय भविष्यति

sūryodaya spṛṣā hyeṣā daśamī garhitā sadā / aspṛṣṭamudayaṃ nṝṇāṃ mohanāya bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

प्राप्त कर लेता है। कौशिकी-सड्मतीर्थमें जाकर दूषद्वती नदीमें स्नान करनेवाला पुरुष यदि नियमित आहार करके नियमपूर्वक रहे तो सब पापोंसे मुक्त हो जाता है। वहाँसे व्यासस्थलीको जाय, वहाँ जानेसे मनुष्य शोकका भागी नहीं होता। किन्दुशू कूपमें जाकर वहाँ सेरभर तिल दान करके मानव परम सिद्धि प्राप्त करता है और मरनेपर मुक्त हो जाता है। आह और मुदित--

English

This chapter serves as a background for the Tirtha-Yatra (Pilgrimage, to holy places) section that follows.

अध्याय १६१

श्लोक 26

विहाय तां यत्प्रिययोगभुक्तिं पादस्थिता सापि ह्यदृष्यरूपा ।सत्यं हि ते नाम विशालनेत्रे यन्मोहिनीत्येव जनो ब्रवीति

vihāya tāṃ yatpriyayogabhuktiṃ pādasthitā sāpi hyadṛṣyarūpā / satyaṃ hi te nāma viśālanetre yanmohinītyeva jano bravīti

हिन्दी अर्थ

ये दो तीर्थ भूतलपर विख्यात हैं। इनमें स्नान करके शुद्धचित्त हुआ मानव सूर्यलोकको प्राप्त कर लेता है। तदनन्तर मृगमुच्यतीर्थमें जाकर जो गड़ाको प्रणाम करके स्थित होता है, वह महादेवजीका

English

"Leaving her — the enjoyment of union with her beloved — she, standing at his feet in invisible form, your name, wide-eyed one, is true: people say 'Mohini'.

अध्याय १६१

श्लोक 27

विमोहयित्वा हि जनं समस्तं पटे मदीये लिखितं करोषि ।इत्येव मुक्त्वा तनयो विवस्वतः प्रणम्य तां ब्रह्मसुतां प्रहृष्टः

vimohayitvā hi janaṃ samastaṃ paṭe madīye likhitaṃ karoṣi / ityeva muktvā tanayo vivasvataḥ praṇamya tāṃ brahmasutāṃ prahṛṣṭaḥ

हिन्दी अर्थ

पूजन करके अश्वमेध-यज्ञका फल पाता है। इसके बाद तीनों लोकोंमें विख्यात वामनतीर्थमें जाय, जहाँ बलिके यज्ञमें उनके राज्यको हर लेनेकी इच्छासे भगवान् वामनका प्रादुर्भाव हुआ था। वहाँ विष्णुपदमें स्नान और वामनजीका पूजन करके सब पापोंसे शुद्धचित्त हुआ मनुष्य भगवान् विष्णुके लोकमें प्रतिष्ठित होता है। वहीं सब पातकोंका नाश करनेवाला ज्येष्ठाश्रमतीर्थ है। ज्येष्ट

English

Having bewildered all the people, you make a writing on my ledger." Having said so, the son of Vivasvan, delighted, bowed to the daughter of Brahma

अध्याय १६१

श्लोक 28

जगाम देवैः सह नाकलोकं करे गृहीत्वा लिपिलेखितारम् ।गतेषु देवेषु विमोहिनी सा ब्रह्माणमासाद्य सुरासुरेशम्

jagāma devaiḥ saha nākalokaṃ kare gṛhītvā lipilekhitāram / gateṣu deveṣu vimohinī sā brahmāṇamāsādya surāsureśam

हिन्दी अर्थ

शुक्ला एकादशीको उपवास करके दूसरे दिन द्वादशीको वहाँ विधिपूर्वक स्नान करनेवाला पुरुष मनुष्योंमें श्रेष्ठठा प्राप्त कर लेता है। देवि! उस तीर्थमें किया हुआ श्राद्ध पितरोंको अत्यन्त संतोष

English

and went with the gods to the world of heaven, taking the ledger-writer by the hand. When the gods had gone, Mohini approached Brahma, lord of gods and demons,

अध्याय १६१

श्लोक 29

विज्ञापयामास पितः पुरोधा ममायमत्युग्रतरश्च कोपात् ।दग्धं शरीरं मम लोकनाथ पुनः प्रपत्स्ये ऽथ तथा कुरुष्व

vijñāpayāmāsa pitaḥ purodhā mamāyamatyugrataraśca kopāt / dagdhaṃ śarīraṃ mama lokanātha punaḥ prapatsye 'tha tathā kuruṣva

हिन्दी अर्थ

देनेवाला होता है। वहीं सूर्यतीर्थ है, उसमें स््रान करके मानव सूर्यलोकका भागी होता है। कुलोत्तारणतीर्थमें जाकर स्नान करनेवाला पुरुष अपने कुलका उद्धार करके कल्पपर्यन्त स्वर्गलोकमें निवास करता है। पवनकुण्डमें स्नान करके भगवान् महेश्वरका दर्शन करनेसे मनुष्य सब पापोंसे मुक्त हो भगवान् शिवके धाममें जाता है। हनुमत्तीर्थमें स्नान करके मानव मोक्ष प्राप्त कर लेता है। राजर्षि

English

and informed him: "Father, this priest of mine is exceedingly fierce in anger; my body is burned, Lord of the world. Do something so that I may attain a body again.

अध्याय १६१

श्लोक 30

विमोहितं चैव जगन्मयेदं प्रान्ते समास्थाय यमस्य तिथ्याः ।जितो हि राज्ञा शमनः पुराद्य कृतो जयी तात तव प्रभावात्

vimohitaṃ caiva jaganmayedaṃ prānte samāsthāya yamasya tithyāḥ / jito hi rājñā śamanaḥ purādya kṛto jayī tāta tava prabhāvāt

हिन्दी अर्थ

शालहोत्रके तीर्थमें स्नान करनेसे सब पाप दूर हो जाते हैं। सरस्वतीके श्रीकुम्भ नामक तीर्थमें स्नान

English

I bewildered this world; at the end, standing on Yama's tithi (Ekadashi), the king long ago conquered Yama; by your power, father, he was made victorious.

अध्याय १६१

श्लोक 31

तव कृत्यमिदं तात यत्पुनर्देहधारिणी ।भूयामहं जगन्नाथ ब्रह्मणं सांत्ययस्व भोः

tava kṛtyamidaṃ tāta yatpunardehadhāriṇī / bhūyāmahaṃ jagannātha brahmaṇaṃ sāṃtyayasva bhoḥ

हिन्दी अर्थ

करके यज्ञका भागी होता है। नैमिषकुण्डमें स्नान करनेसे नैमिषारण्यमें स््ानका पुण्य प्राप्त होता है। वेदवतीतीर्थमें स्नान करके नारी सतीधर्मके पालनका पुण्य प्रा्त कर लेती है। ब्रह्मतीर्थमें स्नान करनेसे मनुष्य ब्राह्मणत्व प्राप्त करता है और ब्रह्माजीके उस परम धाममें जाता है, जहाँ जाकर कोई शोक नहीं करता। सोमतीर्थमें स्नान करके मनुष्य स्वर्गीय गति प्राप्त कर लेता है। सप्तसारस्वततीर्थमें

English

This is your work, father, that again I be embodied, Lord of the world; console the Brahmin."

अध्याय १६१

श्लोक 32

तच्छ्रुत्वा मोहिनीवाक्यं ब्रह्मा लोकविधानकृत् ।ब्राह्मणं सांत्वयामास पुनरेव सुताकृते

tacchrutvā mohinīvākyaṃ brahmā lokavidhānakṛt / brāhmaṇaṃ sāṃtvayāmāsa punareva sutākṛte

हिन्दी अर्थ

जाकर स््रान करनेवाला मनुष्य मोक्षका भागी होता है। सप्तसारस्वततीर्थ वह स्थान है, जहाँ सातों सरस्वतीकी धाराओंका भलीभाँति सद्भम हुआ है। उन सबके नाम इस प्रकार हैं--सुप्रभा, काझनाक्षी,

English

Hearing Mohini's words, Brahma, maker of the worlds' order, again consoled the Brahmin for his daughter's sake:

अध्याय १६१

श्लोक 33

वसो तात निबोधेदं यद्ब्रवीमि हितावहम् ।तव चास्या महाभाग सर्वलोकहिताय च

vaso tāta nibodhedaṃ yadbravīmi hitāvaham / tava cāsyā mahābhāga sarvalokahitāya ca

हिन्दी अर्थ

विमलोदका। उसी प्रकार औशनसतीर्थमें स्नान करके मनुष्य सब पापोंसे छूट जाता है। कपालमोचनमें स्नान करके ब्रह्महत्यारा भी शुद्ध हो जाता है। विश्वामित्र-तीर्थमें स्नान करनेवाला मानव ब्राह्मणत्व प्रात्त कर लेता है। तदनन्तर पृथूदकतीर्थमें स्नान करके तीर्थसेवी पुरुष भवबन्धनसे मुक्त हो जाता है और अवकीज्णमें स्नान करनेसे उसे ब्रह्मचर्यका फल मिलता है। जो मधुस्रावमें जाकर स्नान

English

"Vasu, dear, understand this which I say for your benefit and hers, great-fortuned, and for the good of all the worlds.

अध्याय १६१

श्लोक 34

त्वयेयं मोहिनी कोपात्कृता भस्मावशेषिता ।पुनः शरीरं याचेत तदाज्ञां देहि मानद

tvayeyaṃ mohinī kopātkṛtā bhasmāvaśeṣitā / punaḥ śarīraṃ yāceta tadājñāṃ dehi mānada

हिन्दी अर्थ

करता है, वह पातकोंसे मुक्त हो जाता है। वसिष्ठतीर्थमें स्नान करनेसे वसिष्ठ-लोककी प्राप्ति होती है। अरुणा-सड्भममें स्नान करके तीन रात उपवास करनेवाला मनुष्य पुन: स्नान करके मोक्षका भागी

English

By you Mohini was reduced to ash in anger; she asks for a body again; give your command, honourer.

अध्याय १६१

श्लोक 35

मत्पुत्री तव याज्येयं दुर्गतिं तात गच्छति ।त्वया मया च सपाल्या कृतकार्या तपस्विनी

matputrī tava yājyeyaṃ durgatiṃ tāta gacchati / tvayā mayā ca sapālyā kṛtakāryā tapasvinī

हिन्दी अर्थ

मोहिनी ! वहाँ दूसरा सोमतीर्थ है। उसमें स्नान करके चैत्र शुक्ला षष्ठीको श्राद्ध करनेवाला पुरुष अपने पितरोंका उद्धार कर देता है। पश्चवटमें स्रान करके योगमूर्तिधारी भगवान् शिवकी विधिपूर्वक पूजा करनेसे मानव देवताओंके साथ आनन्दका भागी होता है। कुरुतीर्थमें स्नान करनेवाला मनुष्य सम्पूर्ण सिद्धियोंको पा लेता है। स्वर्गद्वारमें गोता लगानेवाला मानव स्वर्गलोकमें पूजित होता है।

English

My daughter is your sacrificer; she is going to a bad end, dear. She is protected by you and me; she has done her task and practised austerity.

अध्याय १६१

श्लोक 36

यदि त्वं शुद्धभावेन मां ज्ञापयसि मानद ।तातो ऽहमस्या भूयो ऽपि देहमुत्पादयाम्यहम्

yadi tvaṃ śuddhabhāvena māṃ jñāpayasi mānada / tāto 'hamasyā bhūyo 'pi dehamutpādayāmyaham

हिन्दी अर्थ

अनरकतीर्थमें स्नान करनेवाला पुरुष सब पापोंसे प्राप्त कर लेता है और शरीरका अन्त होनेपर वह छूट जाता है। देवि! तदनन्तर उत्तम काम्यकवनमें स्वर्गलोकमें जाता है। शुक्रतीर्थमें स्नान करके जाना चाहिए। जिसमें प्रवेश करते ही सब श्राद्धदान करनेवाला पुरुष अपने पितरोंका उद्धार पापराशियोंसे छुटकारा मिल जाता है। फिर कर देता है। विशेषत: चेत्र मासके कृष्णपक्षमें

English

If you, honourer, inform me with a pure heart, then I, her father, shall again produce a body for her.

अध्याय १६१

श्लोक 37

किन्तु विष्णुदिनस्यैषा वैरिणी पापकारिणी ।यथा शुद्ध्येति विप्रेन्द्र तथैवाशु विधीयताम्

kintu viṣṇudinasyaiṣā vairiṇī pāpakāriṇī / yathā śuddhyeti viprendra tathaivāśu vidhīyatām

हिन्दी अर्थ

आदित्यवनमें जाकर आदित्यके दर्शनसे ही मानव अष्टमी या चतुर्दशी तिथिको वहाँ श्राद्ध करना मोक्षका भागी होता है। रविवारको वहाँ स्रान चाहिए। ब्रह्मतीर्थमें उपवास करनेवाला पुरुष करके मनुष्य मनोवाडज्छित फल पा लेता है और निः:सन्देह मोक्षका भागी होता है। तदनन्तर यज्ञोपवीतिकती र्थमें स्नान करके वह स्वधर्मफलका स्थाणुतीर्थमें स्नान करके स्थाणुवटका दर्शन करनेसे भागी होता है। तत्पश्चात् श्रेष्ठ मानव चतु:प्रवाह कुरुक्षेत्रकी यात्रा पूरी हो जाती है। नामक तीर्थमें स्नान करे। इससे वह सम्पूर्ण। देवि! मैंने तुम्हें कुरुक्षेत्रका माहात्म्य ठीक- तीर्थोका फल पाकर स्वर्गलोकमें देवताकी भाँति ठीक बताया है। कुरुक्षेत्रके समान दूसरा कोई आनन्दित होता है। विहारतीर्थमें ज्नान करनेवाला तीर्थ न हुआ है, न होगा। वहाँ किया हुआ

English

But she is the enemy of Vishnu's day, a doer of sin. As she may become pure, O best of Brahmins, let that be done at once."

अध्याय १६१

श्लोक 38

तच्छ्रुत्वा वचनं तस्य ब्रह्मणः स पुरोहितः ।याज्याया देहयोगार्थमादिदेश मुदान्वितः

tacchrutvā vacanaṃ tasya brahmaṇaḥ sa purohitaḥ / yājyāyā dehayogārthamādideśa mudānvitaḥ

हिन्दी अर्थ

पुरुष सब प्रकारके सुख पाता है। दुर्गातीर्थमें स्नान इष्टापूर्त कर्म, तप, विधिपूर्वक होम और दान आदि सब कुछ अक्षय होता है।

English

Hearing Brahma's word, that priest gladly ordered a body for the sacrificer.

अध्याय १६१

श्लोक 39

विप्रवाक्यं समाकर्ण्य ब्रह्मा लोकपितमहः ।कमण्डलुजलेनौक्षन्मोहिन्या देहभस्म तत्

vipravākyaṃ samākarṇya brahmā lokapitamahaḥ / kamaṇḍalujalenaukṣanmohinyā dehabhasma tat

हिन्दी अर्थ

+ पुण्यपर्वोंके दिन कुरुक्षेत्रमें स्नान की: करनेवाला पुरुष अक्षय फलका भागी होता है। महात्मा पुरुषोंके कलियुगजनित पापोंका शोधन करनेके लिये ब्रह्माजीने सुखदायक कुरुक्षेत्रतीर्थका निर्माण किया है। जो मनुष्य इस पापनाशक पुण्यकथाका भक्तिभावसे कीर्तन

English

Hearing the Brahmin's word, Brahma, grandfather of the world, sprinkled the ashes of Mohini's body with water from his water-pot.

अध्याय १६१

श्लोक 40

समुक्षिते ब्रह्मणा लोककर्त्रा सा मोहिनी देहयुता बभूव ।प्रणम्य तातं च वसोः पुरोधसो जग्राह पादौ विनयेन नत्वा

samukṣite brahmaṇā lokakartrā sā mohinī dehayutā babhūva / praṇamya tātaṃ ca vasoḥ purodhaso jagrāha pādau vinayena natvā

हिन्दी अर्थ

४2225 22.7. हा अथवा श्रवण करता है, वह भी इन 22222. 22 25 ७. सब पापोंसे छूट जाता है। जो मल ,- ८-० मनुष्य सूर्यग्रहणके समय कुरुक्षेत्रमें करके मानव कभी दुर्गतिमें नहीं पड़ता। तदनन्तर जो-जो वस्तुएँ देता है, उसी-उसीको वह सदा

English

When sprinkled by Brahma, maker of the worlds, Mohini became embodied; bowing to her father and to the priest Vasu, she took their feet, bowing humbly.

अध्याय १६१

श्लोक 41

ततो वसुर्याजक एव राज्ञो मुदान्वितो याज्यनितंबिनीं ताम् ।विमोहिनीं स्वामिसुतोञ्ज्झितां च जगाद वाक्यं विदुतामवीराम्

tato vasuryājaka eva rājño mudānvito yājyanitaṃbinīṃ tām / vimohinīṃ svāmisutoñjjhitāṃ ca jagāda vākyaṃ vidutāmavīrām

हिन्दी अर्थ

पितृतीर्थ नामक सरस्वती कूपमें स्नान करके प्रत्येक जन्ममें पाता है। ब्रह्मपुत्री मोहिनी! बहुत गतिको पाता है। प्राची सरस्वतीमें स्नान और यदि कोई संसारबन्धनसे मुक्त होना चाहे तो उसे विधिपूर्वक श्राद्ध करके मनुष्य दुर्लभ कामनाओंको कुरुक्षेत्रकरा सेवन करना ही चाहिए।

English

Then Vasu, the king's priest, glad, said to his sacrificer — fair-hipped Mohini, abandoned by her master's son and widowed (heroless) —

अध्याय १६१

श्लोक 42

वसुरुवाच क्रोधस्त्यक्तो मया देवि ब्रह्मणो वचनादथ ।गतिं ते कारयिष्यामि तीर्थस्नानादिकर्मणा

vasuruvāca krodhastyakto mayā devi brahmaṇo vacanādatha / gatiṃ te kārayiṣyāmi tīrthasnānādikarmaṇā

हिन्दी अर्थ

मोहिनी बोली--द्विजश्रेष्ठ मैंने आपके मुखसे कुरुक्षेत्रका उत्तम माहात्म्य सुना है। गुरुदेव! अब गड्जाद्वार नामसे विख्यात जो पुण्यदायक तीर्थ है, उसका वर्णन कीजिये।

English

Vasu said: "Goddess, anger has been given up by me at Brahma's word. I shall make a goal for you by bathing at holy places and similar rites."

अध्याय १६१

श्लोक 43

इत्युक्त्वा मोहिनीं विप्रो ब्रह्माणां जगतां पतिम् ।विससर्ज नमस्कृत्य मोहिनीपितरं मुदा

ityuktvā mohinīṃ vipro brahmāṇāṃ jagatāṃ patim / visasarja namaskṛtya mohinīpitaraṃ mudā

हिन्दी अर्थ

पुरोहित बसुने कहा--भद्रे ! राजा भगीरथके रथके पीछे चलनेवाली अलकनन्दा गड़ा सहस्तरों पर्वतोंको विदीर्ण करती हुई जहाँ भूमिपर उतरी हैं, जहाँ पूर्वकालमें दक्ष प्रजापतिने यज्ञेश्वर भगवान् विष्णुका यजन किया है, वह पुण्यदायक क्षेत्र (हरिद्वार) ही गड्जाद्वार है, जो मनुष्योंके समस्त पातकोंका नाश करनेवाला है। प्रजापति दक्षके उस यक्ञमें इन्द्रादि सब देवता बुलाये गये

English

Having said so to Mohini, the Brahmin, gladly bowing, dismissed Brahma, Lord of the worlds, father of Mohini.

अध्याय १६१

श्लोक 44

मोहिन्या वसुना चैव प्रीत्या ब्रह्मा विसर्जितः ।जगाम लोकं तमसः परमव्यक्तवर्त्मना

mohinyā vasunā caiva prītyā brahmā visarjitaḥ / jagāma lokaṃ tamasaḥ paramavyaktavartmanā

हिन्दी अर्थ

थे और वे सब अपने-अपने गणोंके साथ यज्ञमें भाग लेनेकी इच्छासे वहाँ आये थे। शुभे ! उसमें देवर्षि, शिष्य-प्रशिष्योंसहित शुद्ध अन्तःकरणवाले ब्रह्मषि तथा राजर्षि भी पधारे थे। पिनाकपाणि

English

Dismissed by Mohini and Vasu with love, Brahma went to the world beyond darkness by the unmanifest path.

अध्याय १६१

श्लोक 45

स वसुर्ब्राह्मणश्रेष्ठो रुक्माङ्गदपुरोहितः ।मोहिनीं समनुग्राह्यां मत्वा हृदि विचारयन्

sa vasurbrāhmaṇaśreṣṭho rukmāṅgadapurohitaḥ / mohinīṃ samanugrāhyāṃ matvā hṛdi vicārayan

हिन्दी अर्थ

भगवान् शट्डूरको छोड़कर अन्य सब देवताओंको निमन्त्रित किया गया था। वे सब देवता विमानोंपर बैठकर अपनी प्रिय पत्रियोंके साथ दक्ष प्रजापतिके यज्ञोत्सवमें जा रहे थे और प्रसन्नतापूर्वक आपसमें उस उत्सवका वर्णन भी करते थे। कैलासपर रहनेवाली देवी सतीने उनकी बातें सुनीं। सुनकर वे पिताका यक्ञोत्सव देखनेके लिये उत्सुक हुईं। उस समय सतीने महादेवजीसे उस उत्सवमें

English

That Vasu, best of Brahmins, priest of Rukmangada, thinking Mohini worthy of favour, reflected in his heart,

अध्याय १६१

श्लोक 46

मुहूर्त्तं ध्यानमापन्नो बुबुधे कारणं गतेः

muhūrttaṃ dhyānamāpanno bubudhe kāraṇaṃ gateḥ

हिन्दी अर्थ

चलनेकी प्रार्थना की । उनकी बात सुनकर भगवान् शिवने कहा--' देवि ! वहाँ जाना कल्याणकर नहीं होगा।' किंतु सतीजी अपने पिताका यज्ञोत्सव देखनेके लिये चल दीं। भद्रे! सतीदेवी वहाँ पहुँच

English

and after a moment's meditation understood the cause of her goal.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_nAradapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Narada Purana — Chapter 161
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.