Narada Purana· Nārada Purāṇa
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अध्याय 163 / 167

Book 2 - Adhyaya 39

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अध्याय १६३

श्लोक 1

इति श्रीबृहन्नारदीयपुराणोत्तरभागे मोहिनीवसुसंवादे गङ्गामाहात्म्यवर्णनं नामाष्टत्रिंशत्तमो ऽध्यायः वसुरुवाच शृणु मोहिनि वक्ष्यामि गङ्गाया दर्शने फलम् ।यदुक्तं हि पुराणेषु मुनिभिस्तत्त्वदर्शिभिः

iti śrībṛhannāradīyapurāṇottarabhāge mohinīvasusaṃvāde gaṅgāmāhātmyavarṇanaṃ nāmāṣṭatriṃśattamo 'dhyāyaḥ vasuruvāca śṛṇu mohini vakṣyāmi gaṅgāyā darśane phalam / yaduktaṃ hi purāṇeṣu munibhistattvadarśibhiḥ

हिन्दी अर्थ

अग्नितीर्थ कहते हैं, विद्यमान है। देवि! उसमें स्नान करके मनुष्य अग्निलोकमें जाता है। वहाँ उपवासपूर्वक भगवान् कपर्दीश्वरकी पूजा करके मानव इहलोकमें मनोवाञ्छित भोगोंका उपभोग

English

The drops of waters of the Ganga are superior to many wish-yielding jewels, since they grant the devotees whatever benefit they desire.

अध्याय १६३

श्लोक 2

भवन्ति निर्विषाः सर्पा यथा तार्क्ष्यस्य दश नात् ।गङ्गासंदर्शनात्तद्वत्सर्वपापैः प्रमुच्यते

bhavanti nirviṣāḥ sarpā yathā tārkṣyasya daśa nāt / gaṅgāsaṃdarśanāttadvatsarvapāpaiḥ pramucyate

हिन्दी अर्थ

करता और अन्तमें शिवलोकको प्राप्त होता है। तदनन्तर केदारेश्रके समीप जाकर विधिपूर्वक उनकी पूजा करके मनुष्य देवपूजित हो विमानद्वारा स्वर्गलोकमें जाता है। कपर्दीश्वर और केदारेश्वरके भास्करेश्वर, अड्जभरेथर, गुर्वीश्वर, सोमेश्वर, भृगुजेश्वर, शनीश्वर, राह्मीश्वर तथा केत्वीश्वरकी पूजा करे। इस प्रकार क्रमश: चौदह लिड्रोंकी यात्रा करनी चाहिए। विधिज्ञ पुरुष भक्तिभावसे उन सबकी

English

Even if a person gargles once with the waters of the Ganga devoutly, he enjoys in heaven the divine juices originating from the udders of the wish-yielding cow.

अध्याय १६३

श्लोक 3

सप्तावरान् सप्तपरान् पितृंस्तेभ्यश्च ये परे ।पुमांस्तारयते गङ्गां वीक्ष्य स्पृष्ट्वावगाह्य च

saptāvarān saptaparān pitṛṃstebhyaśca ye pare / pumāṃstārayate gaṅgāṃ vīkṣya spṛṣṭvāvagāhya ca

हिन्दी अर्थ

पृथक्ु-पृथक् पूजा करके भगवान् शिवका सालोक्य पाता और निग्रहानुग्रहमें समर्थ हो जाता है।

English

He who sprinkles the Ganga water on the Salagrama stone, shines like the sun that dispels dense darkness at the time of rising.

अध्याय १६३

श्लोक 4

दर्शनात्स्पर्शनात्पानात्तथा गङ्गेति कीर्तनात् ।पुमान्पुनाति पुरुषाञ्छतशो ऽथ सहस्रशः

darśanātsparśanātpānāttathā gaṅgeti kīrtanāt / pumānpunāti puruṣāñchataśo 'tha sahasraśaḥ

हिन्दी अर्थ

इन देवियोंका क्रमश: पूजन करके मनुष्य निष्पाप हो जाता है। लक्ष्मीश्वर, बाडवेश्वर, अर्घ्येश्वर तथा कामकेश्वरका भक्तिपूर्वक पूजन करके मानव लोकेश ब्रह्माजीका पद प्राप्त कर लेता है। गौरी- तपोवनमें जाकर गौरीश्वर, वरुणेश्वर तथा उषेश्वरका पूजन करके मानव स्वर्गलोक पाता है। जो मानव

English

He who always partakes of alms sprinkled with the Ganga water, sheds off all sins like the serpent that casts off its slough.

अध्याय १६३

श्लोक 5

ज्ञानमैश्वर्यमतुलं प्रतिष्ठायुर्यशस्तथा ।शुभानामाश्रमाणां च गङ्गादर्शनजं फलम्

jñānamaiśvaryamatulaṃ pratiṣṭhāyuryaśastathā / śubhānāmāśramāṇāṃ ca gaṅgādarśanajaṃ phalam

हिन्दी अर्थ

२१०० हाथ लंबी-और इतनी ही चौड़ी भूमिको 'गोचर्म भूमि” कहते हैं। (हिंदी-शब्दसागर )

English

Heaps of sinful vicious actions as big as the Himalayas or the Vindhya mountains perish through the waters of the Ganga like misfortunes through devotion to Visnu.

अध्याय १६३

श्लोक 6

सर्वेन्द्रियाणां चाञ्चल्यं व्यसनानि च पातकम् ।निर्घृणत्वं च नश्यन्ति गङ्गादर्शन मात्रतः

sarvendriyāṇāṃ cāñcalyaṃ vyasanāni ca pātakam / nirghṛṇatvaṃ ca naśyanti gaṅgādarśana mātrataḥ

हिन्दी अर्थ

गणेश, कुमारेश, स्वाककेश, कुलेश्वर, उत्तड्ढेश, वह्लीश, गौतम तथा देैत्यसूदनका विधिपूर्वक पूजन करता है, वह कभी दुर्गतिमें नहीं पड़ता। तदनन्तर चक्रतीर्थमें जाकर वहाँ विधिपूर्वक स्नान और गौरीदेवीकी पूजा करके मनुष्य मनोवाज्छित फल पाता है। वरानने ! सन्निहत्यतीर्थमें जाकर वहाँ स्नान तथा देवता आदिका तर्पण करके उसका पूरा फल पाता है। जो भूतेश्वर

English

At the very moment when men devoutly enter the Ganga for taking ablution, their sins of Brahmana slaughter etc. cry out 'Alas!' and disappear.

अध्याय १६३

श्लोक 7

परहिंसा च कौटिल्यं परदोषाद्यवेक्षणम् ।दांभिकत्वं नृणां गङ्गादर्शनादेव नश्यति

parahiṃsā ca kauṭilyaṃ paradoṣādyavekṣaṇam / dāṃbhikatvaṃ nṛṇāṃ gaṅgādarśanādeva naśyati

हिन्दी अर्थ

आदि ग्यारह लिड्रोंका पूजन करता है, वह इस लोकमें उत्तम भोग प्राप्त करके अन्तमें भगवान् रुद्रके लोकमें जाता है। देवि! जो श्रेष्ठ मानव भगवान् आदिनारायणकी पूजा करता है, वह

English

The man who continuously stays on the banks of the Ganga, and who drinks the water of the Ganga always shall be liberated from the sins accumulated before.

अध्याय १६३

श्लोक 8

मुहुर्मुहुस्तथा पश्येत्स्पृशेद्वापि मुहुर्मुहुः ।भक्त्या यदिच्छति नरः शाश्वतं पदमव्ययम्

muhurmuhustathā paśyetspṛśedvāpi muhurmuhuḥ / bhaktyā yadicchati naraḥ śāśvataṃ padamavyayam

हिन्दी अर्थ

मोक्षका भागी होता है। नरेश्वरि! तत्पश्चात् मानव बालब्रह्माके समीप जाकर सब देवताओंसे पूजित हो भोग एवं मोक्षका अधिकारी होता है। तदनन्तर गड़ा- गणपतिके पास जाकर उनकी विधिपूर्वक पूजा करनेसे श्रद्धालु पुरुष इहलोक और परलोकमें मनोवाज्छित कामनाए प्राप्त कर लेता है। तत्पश्चात् जाम्बवती नदीमें जाकर वहाँ भक्तिभावसे एकाग्रचित्त

English

Verily, he who, resorting to the Ganga, always stays there fearlessly, deserves to be worshipped by gods, mortals and great sages.

अध्याय १६३

श्लोक 9

वापीकूपतडागादिप्रपासत्रादिभिस्तथा ।अन्यत्र यद्भवेत्पुण्यं तद्गङ्गादर्शनाद्भवेत्

vāpīkūpataḍāgādiprapāsatrādibhistathā / anyatra yadbhavetpuṇyaṃ tadgaṅgādarśanādbhavet

हिन्दी अर्थ

होकर स्नान और देवता आदिका पूजन करनेसे मनुष्य कृतकृत्य हो जाता है। तदनन्तर पाण्डुकूपमें स्नान करके पाण्डवेश्वरकी पूजा करनी चाहिए। ऐसा करनेवाला मानव स्वर्गलोकमें जाता है।

English

Why should you go in for many Yajnas, words of Japas, austerities and gifts of wealth? For, the Ganga that can be easily served and that bestows heavenly pleasures and salvation is present nearby.

अध्याय १६३

श्लोक 10

यत्फलं जायते पुंसां दर्शने परमात्मनः ।तद्भवेदेव गङ्गाया दर्शनाद्भक्तिभावतः

yatphalaṃ jāyate puṃsāṃ darśane paramātmanaḥ / tadbhavedeva gaṅgāyā darśanādbhaktibhāvataḥ

हिन्दी अर्थ

तत्पश्चात् यादवस्थलमें जाकर मानव यदि वर्षेश्वरका पूजन करे तो वह देवराज इन्द्रसे सम्मानित होकर मनोवाज्छित सिद्धिलाभ करता है। हिरण्यासंगममें स्नान करके जो मानव भक्तिपूर्वक भगवान् शिवकी प्रसन्नताके लिये ब्राह्मणको सुवर्णयुक्त रथ दान करता है, वह अक्षय लोक पाता है। तत्पश्चात् नगरादित्यकी पूजा करके मानव सूर्यलोक प्राप्त कर लेता है। नगरादित्यके समीप बलभद्र,

English

By means of Yajnas, observances, restraints, charitable gifts and renunciation one does not attain that benefit which one attains by resorting to the Ganga.

अध्याय १६३

श्लोक 11

नैमिषे च कुरुक्षेत्रे नर्मदायां च पुष्करे ।स्नानात्संस्पर्शना सेव्य यत्फलं लभते नरः

naimiṣe ca kurukṣetre narmadāyāṃ ca puṣkare / snānātsaṃsparśanā sevya yatphalaṃ labhate naraḥ

हिन्दी अर्थ

श्रीकृष्ण और सुभद्राका दर्शन एवं विधिपूर्वक पूजन करनेसे मानव भगवान् श्रीकृष्णका सायुज्य-

English

The benefit that a man derives at Prabhasa by giving away a thousand cows when the sun is swallowed byRahu (i.e. at the time of solar eclipse), can be derived by taking bath in the Ganga by a single day.

अध्याय १६३

श्लोक 12

तद्गङ्गादर्शनादेव कलौ प्राहुर्महर्षयः ।अथ ते स्मरणस्यापि गङ्गाया भूपभामिनि

tadgaṅgādarśanādeva kalau prāhurmaharṣayaḥ / atha te smaraṇasyāpi gaṅgāyā bhūpabhāmini

हिन्दी अर्थ

लाभ करता है। तदनन्तर कुमारिकाके समीप जाकर विधिपूर्वक पूजा करके मनुष्य मनोवाज्छित कामनाओंको प्राप्त कर लेता है और इन्द्रलोकका अधिकारी होता है। जो सरस्वतीके तटपर स्थित ब्रह्मेश्वका पूजन करता है, वह सब पापोंसे मुक्त हो ब्रह्मलोकमें प्रतिष्ठित होता है। पिज्गला नदीके समीप जाकर उसमें स्नान करके जो मनुष्य देवता आदिका तर्पण और श्राद्ध करता है, वह फिर इस

English

In Varanasi particularly, the Ganga bestows liberation immediately. Every month, on the eighth or fourteenth day, it confers emancipation from Samsara.

अध्याय १६३

श्लोक 13

प्रवक्ष्यामि फलं यत्तु पुराणेषु प्रकीर्तितम् ।अशुभैः कर्मभिर्युक्तान्मज्जमानान्भवार्णवे

pravakṣyāmi phalaṃ yattu purāṇeṣu prakīrtitam / aśubhaiḥ karmabhiryuktānmajjamānānbhavārṇave

हिन्दी अर्थ

संसारमें जन्म नहीं लेता। सज्भमेश्वरका पूजन करनेसे मनुष्य कभी दुर्गतिमें नहीं पड़ता । शड्डूरादित्य, घटेश तथा महेश्वरका पूजन करके मनुष्य निश्चय ही अपनी सम्पूर्ण कामनाएँ पा लेता है।

English

The residence on the banks of the Ganga as long as one lives, is the bestower of final beatitude. On the banks of the Ganga, one obtains that benefit and happiness which is usually obtained after performing Krcchra rites or the Candrayana expiation always.

अध्याय १६३

श्लोक 14

पततो नरके गङ्गा स्मृता दूरात्समुद्धरेत् ।योजनानां सहस्रेषु गङ्गां स्मरति यो नरः

patato narake gaṅgā smṛtā dūrātsamuddharet / yojanānāṃ sahasreṣu gaṅgāṃ smarati yo naraḥ

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर ऋषितीर्थमें जाय; वहाँ स्नान करके मनको संयममें रखते हुए ऋषियोंका पूजन करे। ऐसा करनेवालेको सम्पूर्ण तीर्थॉका फल प्राप्त होता है। तदनन्तर नन्दादित्यकी पूजा करके मनुष्य सब रोगोंसे मुक्त होता है। तत्पश्चात् त्रित कूपके समीप जाकर वहाँ स्नान करनेसे मनुष्य स्वर्गलोकमें जाता है। तदनन्तर न्यंकुमती नदीके समीप जाकर वहाँ विधिपूर्वक स्नान और सिद्धेश्वरका

English

There is no doubt about this that even after death he will be its devotee and engrossed in devotion. The man who devoutly touches its waters and drinks them, obtains the means of salvation without any strain.

अध्याय १६३

श्लोक 15

अपि दुष्कृतकर्मा हि लभते परमां गतिम् ।स्मरणादेव गङ्गायाः पापसंघातपञ्जरम्

api duṣkṛtakarmā hi labhate paramāṃ gatim / smaraṇādeva gaṅgāyāḥ pāpasaṃghātapañjaram

हिन्दी अर्थ

पूजन करे। ऐसा करनेवाला पुरुष अणिमा आदि सिद्धियोंका भागी होता है। वाराह स्वामीका दर्शन करके मनुष्य भवसागरसे मुक्त हो जाता है। छायालिड़का पूजन करके पुरुषको सम्पूर्ण पातकोंसे

English

Just as Indra and other Devas imbibe the nectarine juice present in the moon and the sun, so also men drink the Ganga water through their mouths.

अध्याय १६३

श्लोक 16

भेदं सहस्रधा याति गिरिर्वज्रहतो यथा ।गच्छंस्तिष्ठन्स्वपन्ध्यायञ्जाग्रद्भुञ्जन् हसन् रुदन्

bhedaṃ sahasradhā yāti girirvajrahato yathā / gacchaṃstiṣṭhansvapandhyāyañjāgradbhuñjan hasan rudan

हिन्दी अर्थ

छुटकारा मिल जाता है। सती मोहिनी ! जो मानव कनकनन्दा देवीका भलीभाँति पूजन करता है, वह सम्पूर्ण कामनाओंको पाता और शरीरका अन्त होनेपर स्वर्गलोकमें जाता है। कुन्तीश्वरका पूजन करनेसे मनुष्य सब पातकोंसे छूट जाता है। जो मानव गड्जाजीमें स्नान करके गड़ेश्वरका पूजन करता है, वह तीन प्रकारके पापोंसे मुक्त हो जाता है। जो चमसोद्धेदतीर्थमें स्नान करके पिण्डदान

English

If one drinks a mouthful of the Ganga water, one attains the benefit of a horse-sacrifice. Salvation is within the grasp of that person who drinks the water of the Ganga freely.

अध्याय १६३

श्लोक 17

यः स्मरेत्सततं गङ्गां स च मुच्येत बन्धनात् ।सहस्रयोजनस्थाश्च गङ्गां भक्त्या स्मरन्ति ये

yaḥ smaretsatataṃ gaṅgāṃ sa ca mucyeta bandhanāt / sahasrayojanasthāśca gaṅgāṃ bhaktyā smaranti ye

हिन्दी अर्थ

करता है, वह गयाकी अपेक्षा कोटिगुने पुण्यका भागी होता है। ब्रह्मकुमारी! तत्पश्चात् उत्तम

English

The water of the Sarasvati becomes stale in three months; that of the Yamuna in seven months, that of the Narmada in ten months and that of the Ganga in a year.

अध्याय १६३

श्लोक 18

गङ्गागङ्गेति चाक्रुश्य मुच्यन्ते ते ऽपि पातकात् ।ये च स्मरन्ति वै गङ्गां गङ्गाभक्तिपराश्च ये

gaṅgāgaṅgeti cākruśya mucyante te 'pi pātakāt / ye ca smaranti vai gaṅgāṃ gaṅgābhaktiparāśca ye

हिन्दी अर्थ

विदुराश्रममें जाकर त्रिग और क्‍ पूजन करनेसे मनुष्य सुखी होता है। मड्ढणेश्वरका पूजन करके मानव उत्तम गति पाता है। त्रैपुर और त्रिलिड्रकी पूजा करनेपर सब पापोंसे छुटकारा मिल जाता है। जो मनुष्य षण्डतीर्थमें जाकर स्नान करके सुवर्ण दान करता है, वह सब पापोंसे शुद्धचित्त हो भगवान् शिवके धाममें जाता है। त्रिलोचनमें स्नान करनेसे रुद्रलोककी

English

If in the case of any dead person the obsequies and the water libations are not performed in accordance with the injunctions in the scriptures, they can have the subsequent benefit by casting the bones in the Ganga.

अध्याय १६३

श्लोक 19

ते ऽप्यशेषैर्महापापैर्मुच्यन्ते नात्र संशयः ।भवनानि विचित्राणि विचित्राभरणाः स्त्रियः

te 'pyaśeṣairmahāpāpairmucyante nātra saṃśayaḥ / bhavanāni vicitrāṇi vicitrābharaṇāḥ striyaḥ

हिन्दी अर्थ

प्राप्ति होती है। देविकामें उमानाथका पूजन करके श्रेष्ठ मानव मनोवाज्छित कामनाओंको पाता और शरीरका अन्त होनेपर स्वर्गलोकमें जाता है। भूद्दारकी पूजा करनेसे अभीष्ट फलकी प्राप्ति होती

English

Of the two—one performing a thousand Candrayana Vratas (vows) subjecting himself to bodily strain and the other drinking the Ganga water as he pleases—it is the latter that excels the former.

अध्याय १६३

श्लोक 20

आरोग्यं वित्त्रसंपत्तिर्गङ्गास्मरणञ्ज फलम् ।मनसा संस्मरेद्यस्तु गङ्गां दूरस्थितो नरः

ārogyaṃ vittrasaṃpattirgaṅgāsmaraṇañja phalam / manasā saṃsmaredyastu gaṅgāṃ dūrasthito naraḥ

हिन्दी अर्थ

है। शूलस्थानमें वाल्मीकिको नमस्कार करके मनुष्य कवि होता है। तदनन्तर च्यवनादित्यका पूजन करके तीर्थसेवी पुरुष सम्पूर्ण भोगसामग्रियोंसे सम्पन्न होता है। च्यवनेश्वरके पूजनसे मानव भगवान् शिवका अनुचर होता है। प्रजापालेश्वरकी पूजासे धन-धान्यकी वृद्धि होती है। बालादित्यकी पूजा करनेवाला मनुष्य विद्वानू और धनवान् होता है। कुबेरस्थानमें स्नान करके मानव निश्चय

English

He who sees, eulogises and bathes in the Ganga and he who drinks water of the Ganga, attains heavenly pleasures, pure knowledge, Yogic power and salvation.

अध्याय १६३

श्लोक 21

चान्द्रायणसहस्रस्य स फलं लभते ध्रुवम् ।गङ्गा गङ्गा जपन्नाम योजनानां शते स्थितः

cāndrāyaṇasahasrasya sa phalaṃ labhate dhruvam / gaṅgā gaṅgā japannāma yojanānāṃ śate sthitaḥ

हिन्दी अर्थ

ही निधि पाता है। ऋषितोया नदीमें जाकर वहाँ स्नान करनेसे मानव पवित्र हो ब्राह्मणको सुवर्ण दान करे तो सब पातकोंसे छूट जाता है। सड्भालेश्वरकी पूजा करनेसे रुद्रलोकमें प्रतिष्ठा प्राप्त

English

He who drinks water of the Ganga warmed by the rays of the sun gains merits. The drinking of the Ganga water is superior to the partaking of barley grains soaked in cow's urine.

अध्याय १६३

श्लोक 22

मुच्यते सर्वपापेभ्यो विष्णुलोकं च गच्छति ।कीर्तनान्मुच्यते पापाद्दर्शनान्मङ्गलं लभेत्

mucyate sarvapāpebhyo viṣṇulokaṃ ca gacchati / kīrtanānmucyate pāpāddarśanānmaṅgalaṃ labhet

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर नारायणदेवकी पूजा करनेसे मनुष्य मोक्षका भागी होता है। तप्तकुण्डोदकमें स्नान करके मूलचण्डीश्वरकी पूजा करे। इससे समस्त पापोंसे मुक्त हुआ मानव मनोवाज्छित वस्तुको पा लेता है। चतुर्मुख विनायककी पूजा करनेसे भी अभीष्ट वस्तुकी प्राप्ति होती है। क्षेमादित्यके पूजनसे मनुष्य क्षेमयुक्त, सफलमनोरथ तथा सत्यका भागी होता है। रुक्मिणी देवीकी पूजा की जाय

English

"O Mohinl listen. I shall recount to you the meritorious benefit of seeing the Ganga as mentioned in the Puranas by sages, the seers of the Truth.

अध्याय १६३

श्लोक 23

अवगाह्य तथा पीत्वा पुनात्यासप्तमं कुलम् ।सप्तावपरान्परान्सप्त सप्ताथ परतः परान्

avagāhya tathā pītvā punātyāsaptamaṃ kulam / saptāvaparānparānsapta saptātha parataḥ parān

हिन्दी अर्थ

तो वे मनुष्योंको अभीष्ट वस्तु देती हैं। दुर्वासेधर

English

Bathing in and drinking (Ganga water), one purifies the family to the seventh generation, seven lower, seven higher, and seven beyond them.

अध्याय १६३

श्लोक 24

गङ्गा तारयते पुंसां प्रसंगेनापि कीर्तिता ।अश्रद्धयापि गङ्गाया यत्तु नामानुकीर्तनम्

gaṅgā tārayate puṃsāṃ prasaṃgenāpi kīrtitā / aśraddhayāpi gaṅgāyā yattu nāmānukīrtanam

हिन्दी अर्थ

करनेसे मनुष्य पापमुक्त हो जाता है। भद्रासड्भरममें स्नान करके मनुष्य सैकड़ों कल्याणकी बातें देखता है। मोक्षतीर्थमें स्नान करके मानव भवसागरसे मुक्त हो जाता है। नारायणगृहमें जाकर मानव फिर कभी शोक नहीं करता। हुंकारतीर्थमें स्नान करनेवाला पुरुष गर्भवासका कष्ट नहीं पाता तथा चण्डीश्वरका पूजन करनेसे सब तीर्थोंका फल मिल जाता है। आशापुरनिवासी

English

The Ganga saves men even when merely mentioned in passing. Even he who without faith utters the name of the Ganga,

अध्याय १६३

श्लोक 25

करोति पुण्यवाहिन्याः सो ऽपि स्वर्गस्य भाजनम् ।सर्वावस्थां गतो वापि सर्वधर्मविवर्जितः

karoti puṇyavāhinyāḥ so 'pi svargasya bhājanam / sarvāvasthāṃ gato vāpi sarvadharmavivarjitaḥ

हिन्दी अर्थ

विप्लेश्रका पूजन करनेसे विप्नकी प्राप्ति नहीं होती। कलाकुण्डमें स्नान करनेवाला मानव निस्संदेह मोक्षका भागी होता है। नारदेश्वरका पूजक भगवान् विष्णु और शड्डूरका भक्त होता है।

English

the holy river, becomes a vessel of heaven. Whatever his condition, even devoid of all dharma,

अध्याय १६३

श्लोक 26

गङ्गायाः कीर्तनेनैव शुभां गतिमवाप्नुयात् ।ब्रह्महा गुरुहागोघ्नः स्पृष्टो वा सर्वपातकैः

gaṅgāyāḥ kīrtanenaiva śubhāṃ gatimavāpnuyāt / brahmahā guruhāgoghnaḥ spṛṣṭo vā sarvapātakaiḥ

हिन्दी अर्थ

भल्लतीर्थमें स्नान करके मानव समस्त पापोंसे मुक्त हो जाता है और कर्दमालतीर्थमें स्नान करनेसे मनुष्यके समस्त पातक दूर हो जाते हैं। गुप्त सोमनाथका दर्शन करके मनुष्य फिर कभी शोकमें नहीं पड़ता। श्रुड्ेध्रवका पूजन करनेवाला पुरुष दुःखोंसे पीड़ित नहीं होता। नारायणतीर्थमें स्नान करनेवाला मानव मोक्ष प्राप्त कर लेता है। मार्कण्डेयेश्वरके पूजनसे मनुष्य दीर्घायु होता है।

English

by praising the Ganga alone he would obtain an auspicious goal. Whether a slayer of a Brahmin, teacher or cow, or touched by all sins,

अध्याय १६३

श्लोक 27

गङ्गातोयं नरः स्पृष्ट्वा मुच्यते सर्वपातकैः ।कदा द्रक्ष्यामि तां गङ्गां कदा स्नानं लभे ह्यहम्

gaṅgātoyaṃ naraḥ spṛṣṭvā mucyate sarvapātakaiḥ / kadā drakṣyāmi tāṃ gaṅgāṃ kadā snānaṃ labhe hyaham

हिन्दी अर्थ

कोटिहदमें स्नान करके कोटीश्वरका पूजन करनेसे मानव सुखी होता है। फिर सिद्धस्थानमें स्नान करके जो मनुष्य वहाँके असंख्य शिव-लिज्ोंका पूजन करता है, वह इस पृथ्वीपर सिद्ध होता है।

English

a man touching Ganga water is freed from all sins. "When shall I see that Ganga? When shall I get a bath?"

अध्याय १६३

श्लोक 28

इति पुंसाभिलषिता कुलानां तारयेच्छतम् ।अथ स्नानफलं देवि गङ्गायाः प्रवदामि ते

iti puṃsābhilaṣitā kulānāṃ tārayecchatam / atha snānaphalaṃ devi gaṅgāyāḥ pravadāmi te

हिन्दी अर्थ

दामोदरगृहका दर्शन करके मनुष्य उत्तम सुख पाता है। शुभे ! प्रभासके नाभिस्थानमें वस्त्रापथतीर्थ है। वहाँ भगवान् शट्डरकी आराधना करनेसे मनुष्य स्वयं साक्षात् शद्भूरके समान हो जाता है। दामोदरमें स्वर्णरेखातीर्थ, रेवतक पर्वतपर ब्रह्मकुण्ड, उज्जयन्ततीर्थमें कुन्तीश्वीर और महातेजस्वी भीमेश्वर तथा वबस्त्रापथक्षेत्रमें मृगीकुण्डतीर्थ सर्वस्व माना गया है। इनमें क्रमश: स्नान करके

English

Thus desired by a man, she saves a hundred of his family. Now I shall tell you, goddess, the fruit of bathing in the Ganga,

अध्याय १६३

श्लोक 29

यच्छ्रुत्वा सर्वपापेभ्यो मुच्यते नात्र संशयः ।स्नातस्य गङ्गासलिले सद्यः पापं प्रणश्यति

yacchrutvā sarvapāpebhyo mucyate nātra saṃśayaḥ / snātasya gaṅgāsalile sadyaḥ pāpaṃ praṇaśyati

हिन्दी अर्थ

तर्पण करनेसे मनुष्य सम्पूर्ण तीर्थोॉका फल पाता है। तदनन्तर गड्ेश्वरका पूजन करनेसे मनुष्यको गड्डास्नानका फल मिलता है। देवि! रैवतक पर्वतपर बहुतसे तीर्थ हैं। उनमें स्नान करके

English

hearing which one is freed from all sins, without doubt. For one who bathes in Ganga water, sin is at once destroyed,

अध्याय १६३

श्लोक 30

अपूर्वपुण्यप्राप्तिश्च सद्यो मोहिनि जायते ।स्नातानां शुचिभिस्तोयैर्गाङ्गेयैः प्रयतात्मनाम्

apūrvapuṇyaprāptiśca sadyo mohini jāyate / snātānāṃ śucibhistoyairgāṅgeyaiḥ prayatātmanām

हिन्दी अर्थ

भक्तिपूर्वक ब्रह्मा, विष्णु, शिव और इन्द्र आदि लोकपालोंकी पूजा करनेसे मनुष्य भोग और मोक्ष दोनों पा लेता है। सुन्दरि! ये सब तीर्थ तुमसे बहुत थोड़ेमें बताये गये हैं। इनमें अवान्तरतीर्थ तो अनन्त हैं, जिनका वर्णन नहीं किया जा सकता। मोहिनी! तीनों लोकोंमें प्रभास-क्षेत्रके समान दूसरा कोई तीर्थ नहीं है।

English

and unprecedented merit is at once obtained, Mohini. For those who bathed in pure Ganga waters, with restrained self,

अध्याय १६३

श्लोक 31

व्युष्टिर्भवति या पुंसां न सा क्रतुशतैरपि ।अपहत्य तमस्तीव्रं यथा भात्युदये रविः

vyuṣṭirbhavati yā puṃsāṃ na sā kratuśatairapi / apahatya tamastīvraṃ yathā bhātyudaye raviḥ

हिन्दी अर्थ

मोहिनी बोली--द्विजश्रेष्ठ ! प्रभासक्षेत्रका अत्यन्त पुण्यदायक माहात्म्य सुना। अब पुष्करतीर्थका, जो कि मेरे पिता ब्रह्माजीका यज्ञलसदन है, माहात्म्य विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिये।

English

the merit that men have is not equalled even by hundreds of sacrifices. As the sun at rising shines, driving away intense darkness,

अध्याय १६३

श्लोक 32

तथापहत्य पाप्मानं भाति गङ्गाजलोक्षितः ।एकेनैवापि विधिना स्नानेन नृपसुन्दरि

tathāpahatya pāpmānaṃ bhāti gaṅgājalokṣitaḥ / ekenaivāpi vidhinā snānena nṛpasundari

हिन्दी अर्थ

पुरोहित वसुने कहा-- भद्रे ! सुनो; मैं पुष्करके पवित्र माहात्म्यका, जो मनुष्योंको सदा अभीष्ट वस्तु देनेवाला है, वर्णन करता हूँ। इसमें अनेक तीर्थोंका माहात्म्य सम्मिलित है। जहाँ भगवान् विष्णुके साथ इन्द्र आदि देवता, गणेश, रैवत और सूर्य विराजमान हैं, उस पुष्करवनमें जो बिना किसी साधनके भी निवास करता है, वह अष्टाज्रयोग-साधनका पुण्य पाता है। पृथ्वीपर

English

so one sprinkled with Ganga water shines, having driven away sin. Even by one single rite of bathing, O king's beauty,

अध्याय १६३

श्लोक 33

अश्वमेधफलं मर्त्यो गङ्गायां लभते ध्रुवम् ।अनेकजन्मसंभूतं पुंसः पापं प्रणश्यति

aśvamedhaphalaṃ martyo gaṅgāyāṃ labhate dhruvam / anekajanmasaṃbhūtaṃ puṃsaḥ pāpaṃ praṇaśyati

हिन्दी अर्थ

इससे बढ़कर दूसरा कोई क्षेत्र नहीं है। अतः श्रेष्ठ मानवोंको सर्वथा प्रयत्न करके इस उत्तम क्षेत्रका सेवन करना चाहिए। जो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य अथवा शुद्र इस क्षेत्रमें निवास करते हुए सर्वतोभावेन

English

a mortal in the Ganga surely obtains the fruit of a horse-sacrifice. Sin born over many births is destroyed for a man,

अध्याय १६३

श्लोक 34

स्नानमात्रेण गङ्गायाः सद्यः स्यात्पुण्यभाजनम् ।अन्यस्थानकृतं पापं गङ्गातीरे विनश्यति

snānamātreṇa gaṅgāyāḥ sadyaḥ syātpuṇyabhājanam / anyasthānakṛtaṃ pāpaṃ gaṅgātīre vinaśyati

हिन्दी अर्थ

ब्रह्माजीमें भक्ति रखते और सभी जीवोंपर दया करते हैं, वे ब्रह्माजीके लोकमें जाते हैं। पुष्करवनमें, जहाँ प्राची सरस्वती बहती हैं, जानेसे मनुष्यको और बुद्धि (निश्चयात्मक वृत्ति) प्राप्त होती है। जो वहाँ तटपर स्थित होकर प्राची सरस्वतीके उस जलको पीते हैं, वे भी अश्वमेध-यज्ञका फल पाकर सुखस्वरूप ब्रह्मको प्राप्त होते हैं। पुष्करमें

English

and by mere bathing in the Ganga he at once becomes a vessel of merit. Sin done in other places is destroyed on the Ganga bank;

अध्याय १६३

श्लोक 35

गङ्गातीरे कृतं पापं गङ्गास्नानेन नश्यति ।रात्रौ दिवा च संध्यायां गङ्गायां तु प्रयत्नतः

gaṅgātīre kṛtaṃ pāpaṃ gaṅgāsnānena naśyati / rātrau divā ca saṃdhyāyāṃ gaṅgāyāṃ tu prayatnataḥ

हिन्दी अर्थ

तीन उज्वल शिखर हैं, तीन निर्मल झरने हैं तथा ज्येष्ठ, मध्य और कनिष्ठ--ये तीन सरोवर हैं। सती मोहिनी ! वहाँ नन्दासरस्वतीके नामसे सुप्रसिद्ध महान् तीर्थ है, जो पुष्करसे एक योजन दूर

English

sin done on the Ganga bank is destroyed by bathing in the Ganga. By day, night and at twilights, with effort in the Ganga,

अध्याय १६३

श्लोक 36

स्नात्वाश्वमेधजं पुण्यं गृहे ऽप्युद्धृतततज्जलैः ।सर्वतीर्थेषु यत्पुण्यं सर्वेष्टायतनेषु च

snātvāśvamedhajaṃ puṇyaṃ gṛhe 'pyuddhṛtatatajjalaiḥ / sarvatīrtheṣu yatpuṇyaṃ sarveṣṭāyataneṣu ca

हिन्दी अर्थ

पश्चिम दिशामें विद्यमान है। वहाँ विधिपूर्वक स्नान और वेददेत्ता ब्राह्मणको दूध देनेवाली गौका दान करनेसे मनुष्य ब्रह्मलोकमें जाता है। इसके सिवा वहाँ कोटितीर्थ है, जहाँ करोड़ों ऋषियोंका आगमन हुआ था। वहाँ स्नान और ब्राह्मणोॉंका पूजन करके मनुष्य सब पातकोंसे मुक्त हो जाता है। उसके बाद अगस्त्याश्रममें जाकर स्नान और कुम्भज ऋषिका पूजन करके

English

having bathed, the merit of a horse-sacrifice, even in one's home with water brought from there; the merit in all holy places and all desired shrines

अध्याय १६३

श्लोक 37

तत्फलं लभते मर्त्यो गङ्गास्नानान्न संशयः ।महापातकसंयुक्तो युक्तो वा सर्वपातकैः

tatphalaṃ labhate martyo gaṅgāsnānānna saṃśayaḥ / mahāpātakasaṃyukto yukto vā sarvapātakaiḥ

हिन्दी अर्थ

मनुष्य भोगसामग्रीसे सम्पन्न और दीर्घायु झेता है तथा शरीरका अन्त होनेपर वह स्वर्गलोकमें जाता है। सप्तर्षियोंके आश्रममें जाकर वहाँ एकाग्रचित्त

English

a mortal obtains from bathing in the Ganga, without doubt. Whether joined with great sins or all sins,

अध्याय १६३

श्लोक 38

गङ्गास्नानेन विधिवन्मुच्यते सर्वपातकैः ।गङ्गा स्नानात्परं स्नानं न भूतं न भविष्यति

gaṅgāsnānena vidhivanmucyate sarvapātakaiḥ / gaṅgā snānātparaṃ snānaṃ na bhūtaṃ na bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

हो स्रान तथा भक्तिभावसे उनका पूजन करके मनुष्य सप्तर्षिलोकमें जाता है। मनुके आश्रममें स्नान करके मानव सर्वत्र पूजा प्राप्त करता है। गड़के उद्गमस्थानमें स्नान करनेसे गड्रास्नानका फल मिलता है। ज्येष्ठ पुष्करमें स्नान करके ब्राह्मणको गोदान देनेसे मनुष्य इहलोकमें सम्पूर्ण भोगोंके पश्चात् ब्रह्मलोकमें प्रतिष्ठित होता है। मध्यम पुष्करमें स्नान करके ब्राह्मणको भूदान

English

by bathing in the Ganga by rule one is freed from all sins. There has been and will be no bath better than a bath in the Ganga.

अध्याय १६३

श्लोक 39

विशेषतः कलियुगे पापं हरति जाह्नवी ।निहत्य कामजान्दोषान्कायवाक्चित्तसंभवान्

viśeṣataḥ kaliyuge pāpaṃ harati jāhnavī / nihatya kāmajāndoṣānkāyavākcittasaṃbhavān

हिन्दी अर्थ

करनेवाला पुरुष श्रेष्ठ विमानपर बैठकर भगवान् विष्णुके लोकमें जाता है। कनिष्ठ पुष्करमें स्नान और ब्राह्मणको सुवर्ण दान करके मनुष्य सम्पूर्ण कामनाओंको पाता और अन्तमें भगवान् रुद्रके

English

Especially in the Kali age Jahnavi removes sin. Having destroyed the faults born of desire, produced by body, speech and mind,

अध्याय १६३

श्लोक 40

गङ्गास्नानेन भक्त्या तु मोदते दिवि देववत् ।वर्षं स्नाति च गङ्गायां यो नरो भक्तिसंयुतः

gaṅgāsnānena bhaktyā tu modate divi devavat / varṣaṃ snāti ca gaṅgāyāṃ yo naro bhaktisaṃyutaḥ

हिन्दी अर्थ

लोकमें प्रतिष्ठित होता है। तदनन्तर विष्णुपदमें स्नान और ब्राह्मणको कुछ दान करके मनुष्य भगवान् विष्णुके प्रसादसे समस्त कामनाओंको प्राप्त कर लेता है। तत्पश्चात् नागतीर्थमें स्नान और नागोंका पूजन करके ब्राह्मणोंको दान देनेसे मनुष्य एक युगतक स्वर्गमें आनन्द भोगता है। आकाशमें पुष्करका चिन्तन करके 'आपो हि ष्ठा' इत्यादि

English

by bathing in the Ganga with devotion he rejoices in heaven like a god. The man who with devotion bathes in the Ganga for a year

अध्याय १६३

श्लोक 41

तस्य स्याद्वैष्णवे लोके स्थितिः कल्पं न संशयः ।आमृत्युं स्नाति गङ्गायां यो नरो नित्यमेव च

tasya syādvaiṣṇave loke sthitiḥ kalpaṃ na saṃśayaḥ / āmṛtyuṃ snāti gaṅgāyāṃ yo naro nityameva ca

हिन्दी अर्थ

शाश्वत ब्रह्मपदको प्राप्त कर लेता है।

English

has a stay for a kalpa in Vishnu's world, without doubt. The man who bathes in the Ganga always until death

अध्याय १६३

श्लोक 42

समस्तपापनिमुक्तः समस्तकुलसंयुतः ।समस्तभोगसंयुक्तो विष्णुलोके महीयते

samastapāpanimuktaḥ samastakulasaṃyutaḥ / samastabhogasaṃyukto viṣṇuloke mahīyate

हिन्दी अर्थ

जब कभी कार्तिककी पूर्णिमाको कृत्तिका नक्षत्र हो तो वह महातिथि समझी जाती है। उस समय आकाश पुष्करमें स्नान करना चाहिए। भरणी नक्षत्रसे युक्त कार्तिककी पूर्णिमाको मध्यम पुष्करमें स्नान करनेवाला मानव आकाश पुष्करमें स्नान करनेका पुण्यफल पाता है। रोहिणी नक्षत्रसे युक्त कार्तिककी पूर्णिमाको कनिष्ठ पुष्करमें स्नान करनेवाला पुरुष आकाश पुष्करजनित पुण्यफलका

English

is freed from all sins, with his whole family, with all enjoyments, and is honoured in Vishnu's world.

अध्याय १६३

श्लोक 43

परार्द्धद्वितयं यावन्नात्र कार्या विचारणा ।गङ्गायां स्नाति यो मर्त्यो नैरन्तर्येण नित्यदा

parārddhadvitayaṃ yāvannātra kāryā vicāraṇā / gaṅgāyāṃ snāti yo martyo nairantaryeṇa nityadā

हिन्दी अर्थ

भागी होता है। जब सूर्य भरणी नक्षत्रपर, बृहस्पति कृत्तिकापर तथा चन्द्रमा रोहिणी नक्षत्रपर हों और नन्‍्दा तिथिका योग हो तो उस समय पुष्करमें स्नान करनेपर आकाश पुष्करका सम्पूर्ण

English

For two parardhas, no doubt is to be made: the mortal who constantly bathes in the Ganga without interruption

अध्याय १६३

श्लोक 44

जीवन्मुक्तः स चात्रैव मृतो विष्णुपदं व्रजेत् ।प्रातःस्नानाद्दशगुणं पुण्यं मध्यन्दिने स्मृतम्

jīvanmuktaḥ sa cātraiva mṛto viṣṇupadaṃ vrajet / prātaḥsnānāddaśaguṇaṃ puṇyaṃ madhyandine smṛtam

हिन्दी अर्थ

फल प्राप्त होता है। जब विशाखा नक्षत्रपर सूर्य और कृत्तिका नक्षत्रपर चन्द्रमा हों, तब आकाश पुष्कर नामक योग होता है। उसमें स्नान करनेवाला पुरुष स्वर्गलोकमें जाता है। आकाशमें उतरे हुए इस कल्याणमय पितामहतीर्थमें जो मनुष्य स्नान करते हैं, उन्हें महान् अभ्युदयकारी लोक प्राप्त होते हैं। सती मोहिनी! पुष्करवनमें पदञ्चस्रोता सरस्वती नदीमें सिद्ध महर्षियोंने बहुत-से तीर्थ

English

is liberated while living, and when dead goes to Vishnu's abode. The merit of bathing at noon is held ten times that of the morning bath;

अध्याय १६३

श्लोक 45

सायङ्काले शतगुणमनन्तं शिवसन्निधौ ।कपिलाकोटिदानाद्धि गङ्गास्नानं विशिष्यते

sāyaṅkāle śataguṇamanantaṃ śivasannidhau / kapilākoṭidānāddhi gaṅgāsnānaṃ viśiṣyate

हिन्दी अर्थ

और देवस्थान स्थापित किये हैं। जो मनुष्य यहाँ श्रेष्ठ ब्राह्यपको धान्य और तिल दान करता है, वह इहलोक और परलोकमें परम गतिको प्राप्त होता है। जो गड्ा-सरस्वतीके सज्भममें स्नान

English

in the evening a hundredfold, and endless in the presence of Shiva. Bathing in the Ganga surpasses a gift of ten million tawny cows.

अध्याय १६३

श्लोक 46

कुरुक्षेत्रसमा गङ्गा यत्र तत्रावगाहिता ।हरिद्वारे प्रयागे च सिंधुसंगे फलाधिका

kurukṣetrasamā gaṅgā yatra tatrāvagāhitā / haridvāre prayāge ca siṃdhusaṃge phalādhikā

हिन्दी अर्थ

करके ब्राह्मणोंका पूजन करता है, वह इहलोककमें मनोवाज्छित भोग भोगनेके पश्चात् श्रेष्ठ गतिको प्राप्त होता है। सती मोहिनी! जो मानव अवियोगा बावड़ीमें स्नान करके विधिपूर्वक पिण्डदान देता है, वह अपने पितरोंको स्वर्गलोकमें पहुँचा देता है। जो अजगन्ध शिवके समीप जाकर उनकी विधिपूर्वक पूजा करता है, वह इहलोक और परलोकमें भी मनोवाज्छित भोग पाता है। पुष्करतीर्थमें

English

Wherever the Ganga is bathed in is equal to Kurukshetra; at Haridvara, Prayaga and the confluence with the Indus the fruit is greater.

अध्याय १६३

श्लोक 47

ये मदीयांशुसंतप्ते जले ते स्नान्ति जाह्नवि ।ते भित्वा मण्डलं यान्ति मोक्षं चेति रवेर्वचः

ye madīyāṃśusaṃtapte jale te snānti jāhnavi / te bhitvā maṇḍalaṃ yānti mokṣaṃ ceti ravervacaḥ

हिन्दी अर्थ

सरोवरसे दक्षिण भागमें एक पर्वतशिखरपर सावित्री देवी विराजमान हैं। जो उनकी पूजा करता है, वह वेदके तत्त्वका ज्ञाता होता है। मोहिनी! वहाँ भगवान् वाराह, नृसिंह, ब्रह्मा, विष्णु, शिव, सूर्य,

English

"Those who bathe, O Jahnavi, in water heated by my rays pierce the circle and go to liberation" — so says the Sun's word.

अध्याय १६३

श्लोक 48

यो गृहे स्वे स्थितो ऽपि त्वां स्नाने संकीर्तयिष्यति ।सो ऽपि यास्यति नाकं वै इत्याह वरुणश्च ताम्

yo gṛhe sve sthito 'pi tvāṃ snāne saṃkīrtayiṣyati / so 'pi yāsyati nākaṃ vai ityāha varuṇaśca tām

हिन्दी अर्थ

चन्द्रमा, कार्तिकेय, पार्वती तथा अग्निके पृथक्- पृथक् तीर्थ हैं। महाभागे! जो मनुष्य एकाग्रचित्त होकर उनमें स्नान करके ब्राह्मणोंको दान देता है, वह उत्तम गति पाता है। पुष्करमें स्नान दुर्लभ है, पुष्करमें तपस्याका अवसर भी दुर्लभ है, पुष्करमें दान दुर्लभ है और पुष्करमें रहनेका सुयोग भी दुर्लभ है। सौ योजन दूर रहकर भी जो मनुष्य सस्‍नानके समय भक्तिभावसे पुष्करका चिन्तन

English

"He who, though staying in his own house, praises you at the time of bathing will also go to heaven" — thus Varuna said to her.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_nAradapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Narada Purana — Chapter 163
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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