Narada Purana· Nārada Purāṇa
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अध्याय 65 / 167

Book 1 - Adhyaya 66

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अध्याय ६५

श्लोक 1

इति श्रीबृहन्नारदीयपुराणे पूर्वभागे बृहदुपाख्याने तृतीयपादे पञ्चषष्टिमो ऽध्यायः सनत्कुमार उवाच ततः श्वासानुसारेण दत्वा पादं महीतले ।समुद्रमेखले देवि पर्वतस्तनमण्डले

iti śrībṛhannāradīyapurāṇe pūrvabhāge bṛhadupākhyāne tṛtīyapāde pañcaṣaṣṭimo 'dhyāyaḥ sanatkumāra uvāca tataḥ śvāsānusāreṇa datvā pādaṃ mahītale / samudramekhale devi parvatastanamaṇḍale

हिन्दी अर्थ

प्रियमप्रियम्। जीवितं मरणं चैव ब्रह्म सम्पद्यते तदा॥

English

He should apply clay once in the penis, thrice in the rectum, ten times on the left hand, seven times on both the hands and thtcc times on cacli of the feet.

अध्याय ६५

श्लोक 2

विष्णुवत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे ।इति भूमिं तु संप्रार्थ्य विहरेञ्च यथाविधि

viṣṇuvatni namastubhyaṃ pādasparśaṃ kṣamasva me / iti bhūmiṃ tu saṃprārthya vihareñca yathāvidhi

हिन्दी अर्थ

उत्कण्ठा होती है, न गीत सुननेकी। आपका कहीं भी राग है ही नहीं। न तो बन्धुओंके प्रति आपकी आसक्ति है, न भयदायक पदार्थोंसे भय। महाभाग! मैं देखता हँ--आपकी दृष्टिमें अपनी

English

Having done the purification he should gargle twelve limes. He shall then make a prayer to the tree with (he following mantra.

अध्याय ६५

श्लोक 3

रक्षः कोणे ततो ग्रामाद्गत्वा मन्त्रमुदीरयेत् ।गच्छन्तु ऋषयो देवाः पिशाचा ये च गुह्यकाः

rakṣaḥ koṇe tato grāmādgatvā mantramudīrayet / gacchantu ṛṣayo devāḥ piśācā ye ca guhyakāḥ

हिन्दी अर्थ

निन्दा और स्तुति एक-सी है। मैं तथा दूसरे मनीषी विद्वानू भी आपको अक्षय एवं अनामय पथ (मोक्षमार्ग)-पर स्थित मानते हैं। विप्रवर ! इस लोकमें ब्राह्मण होनेका जो फल है और

English

*'0 king of the forest (tree), grant us longevity, strength, renown, splendour, progeny, animals, riches, glory, intellect and ready wisdom.*'

अध्याय ६५

श्लोक 4

पितृभूतगणाः सर्वे करिष्ये मलमोचनम् ।इति तालत्रयं दत्वा शिरः प्रावृत्य वाससा

pitṛbhūtagaṇāḥ sarve kariṣye malamocanam / iti tālatrayaṃ datvā śiraḥ prāvṛtya vāsasā

हिन्दी अर्थ

मोक्षका जो स्वरूप है, उसीमें आपकी स्थिति है।

English

See Manu yij divmlkya (AcAra lectioo)*

अध्याय ६५

श्लोक 5

दक्षिणाभिमुखं रात्रौ दिवा स्थित्वा ह्युदङ्मुखः ।मलं विसृज्य सौचं तु मृदाद्भिः समुपाचरेत्

dakṣiṇābhimukhaṃ rātrau divā sthitvā hyudaṅmukhaḥ / malaṃ visṛjya saucaṃ tu mṛdādbhiḥ samupācaret

हिन्दी अर्थ

सनन्दनजी कहते हैं--नारद! राजा जनककी यह बात सुनकर शुद्ध अन्त:करणवाले शुकदेवजी एक दृढ़ निश्चयपर पहुँच गये और बुद्धिके द्वारा आत्माका साक्षात्कार करके उसीमें स्थित होकर

English

For further informatioD regardinx lee ivachanla tantra.

अध्याय ६५

श्लोक 6

एका लिङ्गे गुदे तिस्रो दश वामकरे मृदः ।करयोः सप्त वै दद्यात्रित्रिवरं च पादयोः

ekā liṅge gude tisro daśa vāmakare mṛdaḥ / karayoḥ sapta vai dadyātritrivaraṃ ca pādayoḥ

हिन्दी अर्थ

और परम शान्तिका अनुभव हुआ। इसके बाद वे

English

These verxs give details of manCraiMiia. For further deiaili lee

अध्याय ६५

श्लोक 7

एवं शौचं विधायाथ गण्डूषान्द्वादशैव तु ।कृत्वा वनस्पतिं चाथ प्रार्थयेन्मनुनामुना

evaṃ śaucaṃ vidhāyātha gaṇḍūṣāndvādaśaiva tu / kṛtvā vanaspatiṃ cātha prārthayenmanunāmunā

हिन्दी अर्थ

हिमालय पर्वतको लक्ष्य करके चुपचाप उत्तर दिशाकी ओर चल दिये और वहाँ पहुँचकर उन्होंने अपने पिता व्यासजीको देखा, जो पैल आदि शिष्योंको वैदिकसंहिता पढ़ा रहे थे। शुद्ध अन्तःकरणवाले

English

One should perform the ablution of one's body three times with the mulamantra and four times with other mantras. O sage, the four mantras as mentioned in the Tantras are recounted to you.

अध्याय ६५

श्लोक 8

आयुर्बलं यशो वर्चः प्रजाः पशुवसूनि च ।श्रियं प्रज्ञां च मेधां च त्वं नो देहि वनस्पते

āyurbalaṃ yaśo varcaḥ prajāḥ paśuvasūni ca / śriyaṃ prajñāṃ ca medhāṃ ca tvaṃ no dehi vanaspate

हिन्दी अर्थ

शुकदेव अपनी दिव्य प्रभासे सूर्यके समान प्रकाशित हो रहे थे। उन्होंने प्रसन्नचित्त होकर बड़े आदरसे पिताके चरणोंमें प्रणाम किया। तदनन्तर उदार- बुद्धि शुकने राजा जनकके साथ जो मोक्षसाधन-

English

With the desire to create the entire universe the semen comes out again and again. The waters are the goddesses, the mothers of all beings. May they sanctify me.

अध्याय ६५

श्लोक 9

संप्रार्थ्यैवं दन्तकाष्टं द्वादशाङ्गुलसंमितम् ।गृहीत्वा काममन्त्रेण कुर्यान्मन्त्री समाहितः

saṃprārthyaivaṃ dantakāṣṭaṃ dvādaśāṅgulasaṃmitam / gṛhītvā kāmamantreṇa kuryānmantrī samāhitaḥ

हिन्दी अर्थ

बताया। उसे सुनकर वेदोंका विस्तार करनेवाले व्यासजीने हर्षोल्लासपूर्ण हृदयसे पुत्रको छातीसे

English

Dhenumuir6 6r CmuJri li defined as follows: Clasp both the palms of the hand and put all the imgeri inside the joints of them, then touch the tip of the middle Hagen csf the rtt hand with the foreHngen of the left and vice versa. Similarly, touch the tip of the ring Hngers with the little Hngeis and vice vena.

अध्याय ६५

श्लोक 10

कामदेवपदं ङेन्तं तथा सर्वजनप्रियम् ।हृदन्तः कामबीजाढ्यं दन्तांश्चानेन शोधयेत्

kāmadevapadaṃ ṅentaṃ tathā sarvajanapriyam / hṛdantaḥ kāmabījāḍhyaṃ dantāṃścānena śodhayet

हिन्दी अर्थ

पैल आदि ब्राह्मण व्यासजीसे वेदोंका अध्ययन करके उस शैलशिखरसे पृथ्वीपर आये और यज्ञ कराने तथा वेद पढ़ानेके कार्यमें संलग्र हो गये।

English

k deHned thus: The little finger of the right hand lies ionde the thumb of the right hand and similarly the little 6nger of the left hand lies inside the lefl thumb, then the fingers of the both hands remain straight but the position of hands will ebasge, Le. right comes tu the left and vice-vena and then all the stretched ltn|en will touch one another.

अध्याय ६५

श्लोक 11

जिह्वोल्लेखो वाग्भवेन मूलेन क्षालयेन्मुखम् ।देवागारं ततो गत्वा निर्माल्यमपसार्य च

jihvollekho vāgbhavena mūlena kṣālayenmukham / devāgāraṃ tato gatvā nirmālyamapasārya ca

हिन्दी अर्थ

व्यासजीका शुकदेवको अनध्यायका कारण बताते हुए 'प्रवह' आदि सात वायुओंका परिचय देना तथा सनत्कुमारका शुकको ज्ञानोपदेश

English

Misfortunes are lying in all beings in the form of impurities. The waters, the go<ldesscs wash it off by ihcir touch. May they sanctify me.

अध्याय ६५

श्लोक 12

परिधायांबरं शुद्धं मङ्गलारार्तिकं चरेत् ।अस्रेण पात्रं संप्रोक्ष्य मूलेन ज्वालयेञ्च तम्

paridhāyāṃbaraṃ śuddhaṃ maṅgalārārtikaṃ caret / asreṇa pātraṃ saṃprokṣya mūlena jvālayeñca tam

हिन्दी अर्थ

सनन्दनजी कहते हैं--नारदजी! जब पैल आदि ब्राह्मण पर्वतसे नीचे उतर आये, तब पुत्रसहित परम बुद्धिमान् भगवान् व्यास एकान्तमें मौनभावसे ध्यान लगाकर बैठ गये। उस समय

English

O apah (waters), Obeisance unto you. May the waters dispel the misfortune that is in my hair, my head, on my forehead, in my cars and in my eyes.

अध्याय ६५

श्लोक 13

संपूज्य पात्रमादायोत्थाय घण्टां च वादयेत् ।सुगोघृतप्रदीपेन भ्रामितेन समन्ततः

saṃpūjya pātramādāyotthāya ghaṇṭāṃ ca vādayet / sugoghṛtapradīpena bhrāmitena samantataḥ

हिन्दी अर्थ

आकाशवाणीने पुत्रसहित व्यासजीको सम्बोधित करके कहा-- वसिष्ठ-कुलमें उत्पन्न महर्षि व्यास! इस समय वेद-ध्वनि क्‍यों नहीं हो रही है ? तुम अकेले कुछ चिन्तन करते हुए-से चुपचाप ध्यान

English

May I have longevity, health, riches, the pleasure born of the annihilation of the l>and of enemies, contentment, forbearance, faith in God (astikya) and learning. Obeisance unto you all.

अध्याय ६५

श्लोक 14

वाद्यैर्गीतैर्मनोज्ञैश्च देवस्यारार्तिकं भवेत् ।इति नीराजनं कृत्वा प्रार्थयित्वा निजेश्वरम्

vādyairgītairmanojñaiśca devasyārārtikaṃ bhavet / iti nīrājanaṃ kṛtvā prārthayitvā nijeśvaram

हिन्दी अर्थ

लगाये क्‍यों बैठे हो? इस समय वेदोच्चारणकी ध्वनिसे रहित होकर यह पर्वत सुशोभित नहीं हो रहा है। अतः भगवन्! अपने वेदज्ञ पुत्रके साथ परम प्रसन्नचित्त हो सदा वेदोंका स्वाध्याय

English

One should drink water from the salagrama stone after drinking water with which the feet of the brahmin have been washed. No one should do anything otherwise. This is the invincible rule.

अध्याय ६५

श्लोक 15

स्नातुं यायान्निम्रगादौ कीर्तयन्देवतागुणान् ।गत्वा तीर्थं नमस्कृत्य स्नानीयं च निधाय वै

snātuṃ yāyānnimragādau kīrtayandevatāguṇān / gatvā tīrthaṃ namaskṛtya snānīyaṃ ca nidhāya vai

हिन्दी अर्थ

करो।' आकाशवाणीद्वारा उच्चारित यह वचन सुनकर व्यासजीने अपने पुत्र शुकदेवजीके साथ

English

He shall perform the japa of Gayatif one hundred and eight times according to his own Kalpa or twentyeight times and then dedicate it by uttering the mantra guhya.

अध्याय ६५

श्लोक 16

मूलाभिमन्त्रितमृदमादाय कटिदेशतः ।विलिप्यपादपर्यन्तं क्षालयेत्तीर्थवारिणा

mūlābhimantritamṛdamādāya kaṭideśataḥ / vilipyapādaparyantaṃ kṣālayettīrthavāriṇā

हिन्दी अर्थ

वेदोंकी आवृत्ति आरम्भ कर दी। द्विजश्रेष्ठ! वे दोनों पिता-पुत्र दीर्घकालतक वेदोंका पारायण करते रहे। इसी बीचमें एक दिन समुद्री हवासे प्रेरित होकर बड़े जोरकी आँधी उठी। इसे

English

During the morning he shall meditate on Brahmi resembling the rising sun, having the book and rosary in her iotas-like hands and clad in Kvsujina (black deer skin). He shall meditate on her in the star-studded sky.

अध्याय ६५

श्लोक 17

ततश्च पञ्चभिः पादौ प्रक्षाल्यान्तर्जले पुनः ।प्रविश्य नाभिमात्रे तु मृदं वामकरस्य च

tataśca pañcabhiḥ pādau prakṣālyāntarjale punaḥ / praviśya nābhimātre tu mṛdaṃ vāmakarasya ca

हिन्दी अर्थ

अनध्यायका हेतु समझकर व्यासजीने पुत्रकों वेदोंके स्वाध्यायसे रोक दिया। तब उन्होंने पितासे पूछा--' भगवन्! यह इतने जोरकी हवा क्यों उठी थी? वायुदेवकी यह सारी चेष्टा आप

English

Then the knower of procedure shall propitiate devas, sages, and pitrs and then perform tarpau rite to his desired deity in accordance with the procedure laid down in the kalpas.

अध्याय ६५

श्लोक 18

मणिबन्धे हस्ततले तदग्रे च तथा पुनः ।कृत्वाङ्गुल्या गाङ्गमृगमादायास्त्रेण तत्पुनः

maṇibandhe hastatale tadagre ca tathā punaḥ / kṛtvāṅgulyā gāṅgamṛgamādāyāstreṇa tatpunaḥ

हिन्दी अर्थ

शुकदेवजीकी यह बात सुनकर व्यासजी अनध्यायके निमित्तस्वरूप वायुके विषयमें इस प्रकार बोले--' बेटा! तुम्हें दिव्यदृष्टि उत्पन्न हुई है, तुम्हारा मन स्वतः निर्मल है। तुम तमोगुण

English

Thus propitiating the sun, O eminent among the hrhh* maas, and ofTcring arhya to the sun and returning to the chamber of worship he should wash his feet and perform the kcamana rite.

अध्याय ६५

श्लोक 19

निजोपरि च मन्त्रज्ञो भ्रामयित्वा त्यजेत्सुधी ।तलस्थां च षडङ्गेषु तन्मन्त्रैः प्रविलेपयेत्

nijopari ca mantrajño bhrāmayitvā tyajetsudhī / talasthāṃ ca ṣaḍaṅgeṣu tanmantraiḥ pravilepayet

हिन्दी अर्थ

तथा रजोगुणसे दूर एवं सत्यमें प्रतिष्ठित हुए हो,

English

After making an oblation to the fire and worshipping it properly, he should come to the altar: he should worship the deities on the door4inteL

अध्याय ६५

श्लोक 20

निमज्य क्षालयेत्सम्यग् मलस्नानमितीरितम् ।विभाव्येष्टमयं सर्वमान्तरं स्नानमाचरेत्

nimajya kṣālayetsamyag malasnānamitīritam / vibhāvyeṣṭamayaṃ sarvamāntaraṃ snānamācaret

हिन्दी अर्थ

अतः अपने हृदयमें वेदोंका विचार करके स्वयं ही बुद्धिद्वार अनध्यायके कारणरूप वायुके

English

Nanda, Sunanda, Canda, Pracanda, Pravala, Vala,

अध्याय ६५

श्लोक 21

अनन्ता दित्यसंकाशं निजभूषायुधैर्युतम् ।मन्त्रमूर्तिं प्रभुं स्मृत्वा तत्पादोदकसंभवाम्

anantā dityasaṃkāśaṃ nijabhūṣāyudhairyutam / mantramūrtiṃ prabhuṃ smṛtvā tatpādodakasaṃbhavām

हिन्दी अर्थ

पृथ्वी और अन्तरिक्षमें जो वायु चलती है, उसके सात मार्ग हैं। जो धूम तथा गरमीसे उत्पन्न बादल-समूहों और ओलोंको इधर-से-उधर ले जाता है, वह प्रथम मार्ममें प्रवाहित होनेवाला

English

Nandin, Bhriigin, Riti, Skanda, Gane£a, Uma- maheivara, Vfsabha andMahakaia are the doorkeepers according to Saivas.

अध्याय ६५

श्लोक 22

धारां च ब्रह्मरन्ध्रेण प्रविशन्तीं निजां तनुम् ।तया संक्षालयेत्सर्वमन्तर्द्देहगतं मलम्

dhārāṃ ca brahmarandhreṇa praviśantīṃ nijāṃ tanum / tayā saṃkṣālayetsarvamantarddehagataṃ malam

हिन्दी अर्थ

'प्रवह” नामक प्रथम वायु है। जो आकाशमें रसकी मात्राओं और बिजली आदिकी उत्पत्तिके लिये प्रकट होता है, वह महान् तेजसे सम्पन्न द्वितीय वायु 'आवह ' नामसे प्रसिद्ध है और बड़ी

English

The eight mothers Brkhmi and others are the eight Saktis stationed at the door. They are worshipped with pranava «cm in the beginning, their names in the dative case and ending with namah.

अध्याय ६५

श्लोक 23

तत्क्षणाद्विरजा मन्त्री जायते स्फटिकोपमः ।ततः श्रौतोक्तविधिना स्नात्वा मन्त्री समाहितः

tatkṣaṇādvirajā mantrī jāyate sphaṭikopamaḥ / tataḥ śrautoktavidhinā snātvā mantrī samāhitaḥ

हिन्दी अर्थ

भारी आवाजके साथ बहता है। जो सदा सोम- सूर्य आदि ज्योतिर्मय ग्रहोंका उदय एवं उद्धव करता है, मनीषी पुरुष शरीरके भीतर जिसे उदान कहते हैं, जो चारों समुद्रोंसे जल ग्रहण

English

The intelligent one should sit steadily in the seat and after doing kcamana he should be pure and be of effort. He

अध्याय ६५

श्लोक 24

मन्त्रस्नानं ततः कुर्यात्तद्विधानमथोच्यते ।देशकालौ च संकीर्त्य प्राणायामषडङ्गकैः

mantrasnānaṃ tataḥ kuryāttadvidhānamathocyate / deśakālau ca saṃkīrtya prāṇāyāmaṣaḍaṅgakaiḥ

हिन्दी अर्थ

करता है और उसे ऊपर उठाकर 'जीमूतों' को देता है तथा जीमूतोंको जलसे संयुक्त करके उन्हें 'पर्जन्य' के हवाले करता है, वह महान् वायु 'उद्द!' कहलाता है। जिससे प्रेरित होकर अनेक

English

Srikantba

अध्याय ६५

श्लोक 25

कृत्वार्कमण्डलात्तीर्थान्याह्वयेन्मुष्टिमुद्रया ।ब्रह्माण्डोदरतीर्थानि करैः स्पृष्टानि ते रवेः

kṛtvārkamaṇḍalāttīrthānyāhvayenmuṣṭimudrayā / brahmāṇḍodaratīrthāni karaiḥ spṛṣṭāni te raveḥ

हिन्दी अर्थ

प्रकारके नीले महामेघ घटा बाँधकर जल बरसाना आरम्भ करते हैं तथा जो देवताओंके आकाशमार्गसे

English

Trimurtib

अध्याय ६५

श्लोक 26

तेन सत्येन मे देव देहि तीर्थं दिवाकर

tena satyena me deva dehi tīrthaṃ divākara

हिन्दी अर्थ

जानेवाले विमानोंको स्वयं ही वहन करता है, वह पर्वतोंका मान मर्दन करनेवाला चतुर्थ वायु 'संवह' नामसे प्रसिद्ध है। जो रूक्षभावसे वेगपूर्वक बहकर वक्षोंकों तोड़ा और उखाड़ फेंकता है

English

Amareivaral)

अध्याय ६५

श्लोक 27

गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति ।नर्मदे सिंधुकावेरि जले ऽस्मिन्संनिधिं कुरु

gaṅge ca yamune caiva godāvari sarasvati / narmade siṃdhukāveri jale 'sminsaṃnidhiṃ kuru

हिन्दी अर्थ

तथा जिसके द्वारा संगठित हुए प्रलयकालीन मेघ “बलाहक' संज्ञा धारण करते हैं, जिसका संचरण भयानक उत्पात लानेवाला है तथा जो अपने साथ मेघोंकी घटाएँ लिये चलता है, वह अत्यन्त

English

Arghisah

अध्याय ६५

श्लोक 28

इत्यावाह्य जले तानि सुधाबीजेन योजयेत् ।गोमुद्रयामृतीकृत्य कवचेनावगुण्ठ्य च

ityāvāhya jale tāni sudhābījena yojayet / gomudrayāmṛtīkṛtya kavacenāvaguṇṭhya ca

हिन्दी अर्थ

वेगवान् पञ्चम वायु 'विवह” कहा गया है। जिसके आधारपर आकाशमें दिव्य जल प्रवाहित होते हैं, जो आकाशगड़ाके पवित्र जलको धारण करके स्थित है और जिसके द्वारा दूरसे ही

English

Bhirbhutilab

अध्याय ६५

श्लोक 29

संरक्ष्यास्त्रेण तत्पश्चाच्चक्रमुद्रां प्रदर्शयेत् ।वह्न्यर्केन्दुमण्डलानि तत्र संचितयेद्रुधः

saṃrakṣyāstreṇa tatpaścāccakramudrāṃ pradarśayet / vahnyarkendumaṇḍalāni tatra saṃcitayedrudhaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रतित' होकर सहस्नों किरणोंके उत्पत्तिस्थान सूर्यदेव एक ही किरणसे युक्त प्रतीत होते हैं, जिनसे यह पृथ्वी प्रकाशित होती है तथा अमृतकी दिव्यनिधि चन्द्रमाका भी जिससे पोषण

English

Sihaukah

अध्याय ६५

श्लोक 30

मन्त्रयेदर्कमन्त्रेण सुधाबीजेन तज्जलम् ।मूलेन चैकादशधा तत्र संमन्त्र्य भावयेत्

mantrayedarkamantreṇa sudhābījena tajjalam / mūlena caikādaśadhā tatra saṃmantrya bhāvayet

हिन्दी अर्थ

होता है, उस छठे वायुका नाम “परिवह ' है, वह सम्पूर्ण विजयशील तत्त्वोमें श्रेष्ठ है। जो अन्तकालमें सम्पूर्ण प्राणियोंके प्राणोंको शरीरसे निकालता है, जिसके इस प्राणनिष्कासनरूप मार्गका मृत्यु तथा

English

Bhautikab

अध्याय ६५

श्लोक 31

पूजायन्त्रं च तन्मध्ये स्वान्तादावाह्य देवताम् ।स्नापयित्वार्चयेत्तां च मानसैरुपचारकैः

pūjāyantraṃ ca tanmadhye svāntādāvāhya devatām / snāpayitvārcayettāṃ ca mānasairupacārakaiḥ

हिन्दी अर्थ

वैवस्वत यम अनुगमन मात्र करते हैं, सदा अध्यात्मचिन्तनमें लगी हुई शान्त बुद्/धिके द्वारा भलीभाँति विचार या अनुसंधान : करनेवाले ध्यानाभ्यासपरायण पुरुषोंको जो अमृतत्व देनेमें

English

Sadyojstab

अध्याय ६५

श्लोक 32

सिंहासनस्थां तां नत्वा तज्जलं प्रणमेत्सुधीः ।आधारः सर्वभातानां विष्णोरतुलतेजसः

siṃhāsanasthāṃ tāṃ natvā tajjalaṃ praṇametsudhīḥ / ādhāraḥ sarvabhātānāṃ viṣṇoratulatejasaḥ

हिन्दी अर्थ

समर्थ है, जिसमें स्थित होकर प्रजापति दक्षके दस हजार पुत्र बड़े वेगसे सम्पूर्ण दिशाओंके अन्तमें पहुँच गये तथा जिससे वृष्टिका जल तिरोहित होकर वर्षा बंद हो जाती है, वह

English

Mahaaenab

अध्याय ६५

श्लोक 33

तद्रूपाश्च ततो जाता आपस्ताः प्रणमाम्यहम् ।इति नत्वा समारुन्ध्य सप्तच्छिद्राणि साधकः

tadrūpāśca tato jātā āpastāḥ praṇamāmyaham / iti natvā samārundhya saptacchidrāṇi sādhakaḥ

हिन्दी अर्थ

सर्वश्रेष्ठ सत्म वायु 'परावह' नामसे प्रसिद्ध है। उसका अतिक्रमण करना सबके लिये कठिन है। इस प्रकार ये सात मरुद्ृण दितिके परम अद्भुत पुत्र हैं। इनकी सर्वत्र गति है। ये सब जगह

English

Krodhiiab

अध्याय ६५

श्लोक 34

निमज्य सलिले तस्मिन्मूलं देवाकृतिं स्मरेत् ।निमज्ज्योन्मज्ज्य त्रिश्चैवं सिंचेत्कं कुंभमुद्रया

nimajya salile tasminmūlaṃ devākṛtiṃ smaret / nimajjyonmajjya triścaivaṃ siṃcetkaṃ kuṃbhamudrayā

हिन्दी अर्थ

विचरते रहते हैं; किंतु बड़े आश्चर्यकी बात है कि उस वायुके वेगसे आज यह पर्वतोंमें श्र

English

PaicantaJcab

अध्याय ६५

श्लोक 35

त्रिर्मूलेन चतुर्मन्त्रैरभिषिञ्चेन्निजां तनुम् ।चत्वारो मनवस्ते ऽत्र कथ्यन्ते तान्त्रिका मुने

trirmūlena caturmantrairabhiṣiñcennijāṃ tanum / catvāro manavaste 'tra kathyante tāntrikā mune

हिन्दी अर्थ

हिमालय भी सहसा काँप उठा है। बेटा! यह वायु भगवान् विष्णुका नि:श्वास है। जब कभी सहसा वह नि:श्वास वेगसे निकल पड़ता है, उस समय सारा जगत् व्यथित हो उठता है। इसलिये

English

ivottamab

अध्याय ६५

श्लोक 36

सिसृक्षोर्निखिलं विश्वं मुहुः शुक्रं प्रजापतेः ।मातरः सर्वभूतानामापो देव्यः पुनन्तु माम्

sisṛkṣornikhilaṃ viśvaṃ muhuḥ śukraṃ prajāpateḥ / mātaraḥ sarvabhūtānāmāpo devyaḥ punantu mām

हिन्दी अर्थ

ब्रह्मवेत्ता पुरुष प्रचण्ड वायु (आँधी) चलनेपर वेदका पाठ नहीं करते हैं। वेद भी भगवान्का नि:ध्वास ही है। उस समय वेद-पाठ करनेपर वायुसे वायुको क्षोभ प्राप्त होता है।

English

Ekarudrab

अध्याय ६५

श्लोक 37

अलक्ष्मीर्मलरूपा या सर्वभूतेषु संस्थिता ।क्षालयन्ति च तां स्पर्शादापो देव्यः पुनन्तु माम्

alakṣmīrmalarūpā yā sarvabhūteṣu saṃsthitā / kṣālayanti ca tāṃ sparśādāpo devyaḥ punantu mām

हिन्दी अर्थ

अनध्यायके विषयमें यह बात कहकर पराशरनन्दन भगवान् व्यास अपने पुत्र शुकदेवसे बोले--' अब तुम वेद-पाठ करो।' यों कहकर वे आकाशगड़के तटपर गये। जब व्यासजी स्नान

English

KOmab S8« Bkanetrab

अध्याय ६५

श्लोक 38

यन्मे केशेषु दौर्भाग्यं सीमन्ते यञ्च मूर्द्धनि ।ललाटे कर्णयोरक्ष्णोरापस्तद्धन्तु वो नमः

yanme keśeṣu daurbhāgyaṃ sīmante yañca mūrddhani / lalāṭe karṇayorakṣṇorāpastaddhantu vo namaḥ

हिन्दी अर्थ

करने चले गये, तब ब्रह्मवेत्ताओंमें श्रेष्ठ शुकदेवजी वेदोंका स्वाध्याय करने लगे। वे वेद और बेदाड़ोंके पारड्गभत विद्वान् थे। नारदजी! व्यासपुत्र शुकदेवजी जब स्वाध्यायमें लगे हुए थे, उसी

English

Calur&nanab

अध्याय ६५

श्लोक 39

आयुरारोग्यमैश्वर्यमरिपक्षक्षयं शुभम् ।सन्तोषः क्षान्तिरास्तिक्यं विद्या भवतु वो नमः

āyurārogyamaiśvaryamaripakṣakṣayaṃ śubham / santoṣaḥ kṣāntirāstikyaṃ vidyā bhavatu vo namaḥ

हिन्दी अर्थ

समय वहाँ भगवान् सनत्कुमार एकान्तमें उनके पास आये'। व्यासनन्दन शुकने ब्रह्मपुत्र सनत्कुमारजीका उठकर स्वागत-सत्कार किया। विप्रेन्द ! तत्पश्चात् ब्रह्मवेत्ताओंमें श्रेष्ठ सनत्कुमारजीने

English

Llihgali

अध्याय ६५

श्लोक 40

विप्रपादोदकं पीत्वा शालग्रामशिलाजलम् ।पिबेद्धिरुद्धं नो कुर्यादेषां तु नियतो विधिः

viprapādodakaṃ pītvā śālagrāmaśilājalam / pibeddhiruddhaṃ no kuryādeṣāṃ tu niyato vidhiḥ

हिन्दी अर्थ

शुकदेवजीसे कहा--'महाभाग! महातेजस्वी व्यासपुत्र! क्या कर रहे हो?!

English

UmAkAntab

अध्याय ६५

श्लोक 41

पृथिव्यां यानि तीर्थानि दक्षाङ्घ्रौ तानि भूसुरे ।स्वेष्टदेवं समुद्वास्य मन्त्री मार्तण्डमण्डले

pṛthivyāṃ yāni tīrthāni dakṣāṅghrau tāni bhūsure / sveṣṭadevaṃ samudvāsya mantrī mārtaṇḍamaṇḍale

हिन्दी अर्थ

शुकदेवजी बोले--ब्रह्मकुमार! इस समय मैं वेदोंके स्वाध्यायमें लगा हूँ। मेरे किसी अज्ञात पुण्यके फलसे आपका दर्शन प्राप्त हुआ है। अत: महाभाग! मैं आपसे किसी ऐसे तत्त्वके

English

Cbagata94*h

अध्याय ६५

श्लोक 42

ततस्तीरं समागत्यं वस्त्रं संक्षाल्य यत्नतः ।वाससी परिधायाथ कुर्यात्सन्ध्यादिकं सुधीः

tatastīraṃ samāgatyaṃ vastraṃ saṃkṣālya yatnataḥ / vāsasī paridhāyātha kuryātsandhyādikaṃ sudhīḥ

हिन्दी अर्थ

साधक हो। अतः आप कृपापूर्वक बतावें, जिससे मुझे भी उसका ज्ञान हो।

English

Dvicaitdciab

अध्याय ६५

श्लोक 43

रोगाद्यशक्तो मनुजः कुर्यात्तत्राघर्मषणम् ।अथवा भस्मना स्नातो रजोभिश्चैव वाक्षमः

rogādyaśakto manujaḥ kuryāttatrāgharmaṣaṇam / athavā bhasmanā snāto rajobhiścaiva vākṣamaḥ

हिन्दी अर्थ

सनत्कुमारजीने कहा--ब्रह्मन्! विद्याके समान कोई नेत्र नहीं है, सत्यके तुल्य कोई तपस्या नहीं है, रागके समान कोई दुःख नहीं है और त्यागके सदृश कोई सुख नहीं है। पाप-कर्मसे दूर रहना,

English

MabAkAlab

अध्याय ६५

श्लोक 44

अथ सन्ध्यादिकं कुर्यान् स्थित्वा चैवासने शुभे ।केशवेन तथा नारायणेन माधवेन च

atha sandhyādikaṃ kuryān sthitvā caivāsane śubhe / keśavena tathā nārāyaṇena mādhavena ca

हिन्दी अर्थ

सदा पुण्यका सञ्जय करते रहना, साधु पुरुषोंके बर्तावको अपनाना और उत्तम सदाचारका पालन करना--यह सर्वोत्तम श्रेयका साधन है। जहाँ सुखका नाम भी नहीं है, ऐसे मानव-शरीरको

English

Bhujaiigeaab

अध्याय ६५

श्लोक 45

संप्राश्य तोयं गोविन्दविष्णुभ्यां क्षालयेत्करौ ।मधुसूदनत्रिविक्रमाभ्यामोष्ठौ च मार्जयेत्

saṃprāśya toyaṃ govindaviṣṇubhyāṃ kṣālayetkarau / madhusūdanatrivikramābhyāmoṣṭhau ca mārjayet

हिन्दी अर्थ

पाकर जो विषयोंमें आसक्त होता है, वह मोहमें डूब जाता है। विषयोंका संयोग दुःखरूप है, वह कभी दुःखसे छुटकारा नहीं दिला सकता। आसक्त मनुष्यकी बुद्धि चञ्बल हो जाती है और

English

PioAkiaab

अध्याय ६५

श्लोक 46

वामनश्रीधराभ्यां च मुखं हस्तौ स्पृशेत्ततः ।हृषीकेशपद्मनाभाभ्यां स्पृशेञ्चरणौ ततः

vāmanaśrīdharābhyāṃ ca mukhaṃ hastau spṛśettataḥ / hṛṣīkeśapadmanābhābhyāṃ spṛśeñcaraṇau tataḥ

हिन्दी अर्थ

मोहजालका विस्तार करनेवाली होती है। जो उस मोहजालसे घिर जाता है, वह इस लोक और परलोकमें भी दुःखका ही भागी होता है। जो अपना कल्याण चाहता हो, उसे सभी उपायोंसे

English

Bhargvlsab

अध्याय ६५

श्लोक 47

दामोदरेण मूर्द्धानं मुखं संकर्षणेन च ।वासुदेवेन प्रद्युम्नेन स्पृशेन्नासिके ततः

dāmodareṇa mūrddhānaṃ mukhaṃ saṃkarṣaṇena ca / vāsudevena pradyumnena spṛśennāsike tataḥ

हिन्दी अर्थ

काम और क्रोधको काबूमें करना चाहिए, क्योंकि वे दोनों दोष मनुष्यके श्रेयका विनाश करनेके लिये उद्यत रहते हैं। मनुष्यको चाहिए कि तपको क्रोधसे, सम्पत्तिको डाहसे, विद्याको मान-अपमानसे

English

ArdhanAriara

अध्याय ६५

श्लोक 48

अनिरुद्धपुरुषोत्तमाभ्यां नेत्रे स्पृशेत्ततः ।अधोक्षजनृसिंहाभ्यां श्रवणे संस्पृशेत्तथा

aniruddhapuruṣottamābhyāṃ netre spṛśettataḥ / adhokṣajanṛsiṃhābhyāṃ śravaṇe saṃspṛśettathā

हिन्दी अर्थ

और अपनेको प्रमादसे बचावे। क्र्रस्वभावका परित्याग सबसे बड़ा धर्म है। क्षमा सबसे महान् बल है। आत्मज्ञान सर्वोत्तम ज्ञान है और सत्य ही सबसे बढ़कर हितका साधन है'। सत्य बोलना

English

Sumukhah

अध्याय ६५

श्लोक 49

नाभिं स्पृशेदच्युतेन जनार्दनेन वक्षसि ।हरिणा विष्णुनांसौ च वैष्णवाचमनं त्विदम्

nābhiṃ spṛśedacyutena janārdanena vakṣasi / hariṇā viṣṇunāṃsau ca vaiṣṇavācamanaṃ tvidam

हिन्दी अर्थ

सबसे श्रेष्ठ है, किंतु हितकारक बात कहना सत्यसे भी बढ़कर है। जिससे प्राणियोंका अत्यन्त हित होता हो, उसीको मैं सत्य मानता हूँ। जो नये-नये कर्म आरम्भ करनेका संकल्प छोड

English

VighnarAjah

अध्याय ६५

श्लोक 50

प्रणवाद्यैर्ङेन्तस्वाहान्तैः केशवादिकनामभिः ।मुखे नसोः प्रदेशिन्यानामया नेत्रकर्णयोः

praṇavādyairṅentasvāhāntaiḥ keśavādikanāmabhiḥ / mukhe nasoḥ pradeśinyānāmayā netrakarṇayoḥ

हिन्दी अर्थ

चुका है, जिसके मनमें कोई कामना नहीं है, जो

English

Pramodakah

अध्याय ६५

श्लोक 51

कनिष्ठया नाभिदेशं सर्वत्राङ्गुष्ट्योजनम् ।आत्मविद्याशिवैस्तत्त्वैः स्वाहान्तैः शैवमीरितम्

kaniṣṭhayā nābhideśaṃ sarvatrāṅguṣṭyojanam / ātmavidyāśivaistattvaiḥ svāhāntaiḥ śaivamīritam

हिन्दी अर्थ

१. यहाँ सनत्कुमारजीने शुकदेवजीसे मिलकर उनको जो उपदेश दिया है, वह या तो जनकके उपदेश देनेके पूर्वका प्रसंग समझना चाहिए अथवा ऐसा समझना चाहिए कि यह उपदेश सनत्कुमारजीने संसारके हितके लिये

English

Viniyakah

अध्याय ६५

श्लोक 52

दीर्घत्रयेन्दुयुग्व्योमपूर्वकैश्च पिबेज्जलम् ।आत्मविद्यासिवैरेव शैवं स्वाहावसानिकैः

dīrghatrayenduyugvyomapūrvakaiśca pibejjalam / ātmavidyāsivaireva śaivaṃ svāhāvasānikaiḥ

हिन्दी अर्थ

शुकदेवजीको निमित्त बनाकर दिया है।

English

EkapAdah

अध्याय ६५

श्लोक 53

वाग्लज्जाश्री मुखैः प्रोक्तं शाक्तं स्वाहावसानिकैः ।वाग्लज्जाश्रीमुखैः प्रोक्तं द्विजाचमनमर्थदम्

vāglajjāśrī mukhaiḥ proktaṃ śāktaṃ svāhāvasānikaiḥ / vāglajjāśrīmukhaiḥ proktaṃ dvijācamanamarthadam

हिन्दी अर्थ

आनृशंस्यं परो: धर्म: क्षमा च परम॑ बलम् । आत्मज्ञानं पर ज्ञानं सत्यं हि परम हितम्॥

English

Sivoitamah

अध्याय ६५

श्लोक 54

तिलकं च ततः कुर्याद्भाले सुष्ठु गदाकृति ।नन्दकं हृदये शङ्खचक्रे चैव भुजद्वये

tilakaṃ ca tataḥ kuryādbhāle suṣṭhu gadākṛti / nandakaṃ hṛdaye śaṅkhacakre caiva bhujadvaye

हिन्दी अर्थ

किसी वस्तुका संग्रह नहीं करता तथा जिसने सब कुछ त्याग दिया है, वही विद्वान है और वही पण्डित है। जो अपने वशमें की हुई इन्द्रियोंके द्वारा अनासक्त भावसे विषयोंका अनुभव करता

English

Di'ijihvab

अध्याय ६५

श्लोक 55

शार्ङ्गबाणं मस्तके च विन्यसेत्क्रमशः सुधीः ।कर्णमूले पार्श्वयोश्च पृष्टे नाभौ ककुद्यपि

śārṅgabāṇaṃ mastake ca vinyasetkramaśaḥ sudhīḥ / karṇamūle pārśvayośca pṛṣṭe nābhau kakudyapi

हिन्दी अर्थ

है, जिसके अन्त:करणमें सदा शान्ति विराजती है, जो निर्विकार एवं एकाग्रचित्त है तथा जो आत्मीय कहलानेवाले शरीर और इन्द्रियोंके साथ रहकर भी उनसे एकाकार न होकर विलग-सा

English

Vighnakrt

अध्याय ६५

श्लोक 56

एवं तु वैष्णवः कुर्यान्मृद्भिस्तीर्थोद्भवादिभिः ।अग्निहोत्रोद्भवं भस्म गृहीत्वा त्र्यंबकेण तु

evaṃ tu vaiṣṇavaḥ kuryānmṛdbhistīrthodbhavādibhiḥ / agnihotrodbhavaṃ bhasma gṛhītvā tryaṃbakeṇa tu

हिन्दी अर्थ

ही रहता है, वह सब बन्धनोंसे छूटकर शीघ्र ही परम कल्याण प्राप्त कर लेता है। मुने! जिसकी किसी भी प्राणीकी ओर दृष्टि नहीं जाती, जो किसीका स्पर्श तथा किसीसे बातचीत नहीं

English

GaiiarSt

अध्याय ६५

श्लोक 57

किंवाग्निरिति मन्त्रेणाभिमन्त्र्य पञ्चमन्त्रकैः ।क्रमात्तत्पुरुषाघोरसद्योजातादिनामभिः

kiṃvāgniriti mantreṇābhimantrya pañcamantrakaiḥ / kramāttatpuruṣāghorasadyojātādināmabhiḥ

हिन्दी अर्थ

करता, उसे महान् श्रेयकी प्राप्ति होती है। किसी भी जीवकी हिंसा न करे। सब प्राणियोंके साथ मित्रतापूर्ण बर्ताव करे। इस जन्म (अथवा शरीर) - को लेकर किसीके साथ वैरभाव न करे। जो

English

6 aomukhah

अध्याय ६५

श्लोक 58

पञ्च कुर्यात्रिपुण्ड्राणि भालांसोदरहृत्सु च ।शैवं शाक्तस्त्रिकोणा भं नारीवद्वा समाचरेत्

pañca kuryātripuṇḍrāṇi bhālāṃsodarahṛtsu ca / śaivaṃ śāktastrikoṇā bhaṃ nārīvadvā samācaret

हिन्दी अर्थ

आत्मतत्त्वका ज्ञाता तथा मनको वशमें रखनेवाला है, उसे चाहिए कि किसी भी वस्तुका संग्रह न करे। मनमें पूर्ण संतोष रखे। कामना तथा चपलताको त्याग दे। इससे परम कल्याणकी

English

Vakratundab

अध्याय ६५

श्लोक 59

कृत्वा तु वैदिकीं संध्यां तान्त्रिकीं च समाचरेत् ।आचम्य विधिवन्मन्त्री तीर्थान्यावाह्य पूर्ववत्

kṛtvā tu vaidikīṃ saṃdhyāṃ tāntrikīṃ ca samācaret / ācamya vidhivanmantrī tīrthānyāvāhya pūrvavat

हिन्दी अर्थ

सिद्धि होती है। जिन्होंने भोगोंका परित्याग कर दिया है, वे कभी शोकमें नहीं पड़ते, इसलिये प्रत्येक मनुष्यको भोगासक्तिका त्याग करना चाहिए। जो किसीसे भी पराजित न होनेवाले परमात्माको

English

Gajavaktrati

अध्याय ६५

श्लोक 60

ततस्त्रिवारं दर्भेण भूमौ तोयं विनिःभिपेत् ।सप्तधा तज्जलेनाथ मूर्द्धानमभिषेचयेत्

tatastrivāraṃ darbheṇa bhūmau toyaṃ viniḥbhipet / saptadhā tajjalenātha mūrddhānamabhiṣecayet

हिन्दी अर्थ

जीतना चाहता हो, उसे तपस्वी, जितेन्द्रिय, मननशील, संयतचित्त तथा सम्पूर्ण विषयोंमें अनासक्त होना चाहिए। जो ब्राह्मण त्रिगुणात्मक विषयोंमें आसक्त न होकर सदा एकान्तवास करता है, वह

English

Dvirandkah

अध्याय ६५

श्लोक 61

ततश्च प्राणानायम्य कृत्वा न्यासं षडङ्गकम् ।आदाय वामहस्तेंऽबु दक्षेणाच्छाद्य पाणिना

tataśca prāṇānāyamya kṛtvā nyāsaṃ ṣaḍaṅgakam / ādāya vāmahasteṃ'bu dakṣeṇācchādya pāṇinā

हिन्दी अर्थ

बहुत शीघ्र सर्वोत्तम सुख (मोक्ष) प्राप्त कर लेता है। मुने! जो मैथुनमें सुख समझनेवाले प्राणियोंके बीचमें रहकर भी (स्त्रियोंसे रहित) अकेले रहनेमें ही आनन्द मानता है, उसे ज्ञानानन्दसे तृप्त

English

Niraftjanah

अध्याय ६५

श्लोक 62

वियद्वाय्वग्नितोयक्ष्माबीजैः संमन्त्र्य मन्त्रवित् ।मूलेन तस्मात् श्चोतद्भिर्बिन्दुभिस्तत्त्वमुद्रया

viyadvāyvagnitoyakṣmābījaiḥ saṃmantrya mantravit / mūlena tasmāt ścotadbhirbindubhistattvamudrayā

हिन्दी अर्थ

समझना चाहिए। जो ज्ञानानन्दसे पूर्णतः तृप्त है, वह शोकमें नहीं पड़ता। जीव सदा कमेोके

English

Kapardavin

अध्याय ६५

श्लोक 63

स्वशिरः सप्तधा प्रोक्ष्यावशिष्टं तत्पुनर्जलम् ।कृत्वा तदक्षरं मन्त्री नासिकान्तिकमानयेत्

svaśiraḥ saptadhā prokṣyāvaśiṣṭaṃ tatpunarjalam / kṛtvā tadakṣaraṃ mantrī nāsikāntikamānayet

हिन्दी अर्थ

अधीन रहता है, वह शुभ कर्मोसे देवता होता है, शुभ और अशुभ दोनोंके आचरणसे मनुष्ययोनिमें जन्म पाता है तथा केवल अशुभ कमीौसे पशु- पक्षी आदि नीच योनियोंमें जन्म ग्रहण करता है।

English

DIrgbamukhah

अध्याय ६५

श्लोक 64

जलं तेजोमयं तञ्चाकृष्यान्तश्चेडया पुनः ।प्रक्षाल्यान्तर्गतं तेन कल्मषं तज्जलं पुनः

jalaṃ tejomayaṃ tañcākṛṣyāntaśceḍayā punaḥ / prakṣālyāntargataṃ tena kalmaṣaṃ tajjalaṃ punaḥ

हिन्दी अर्थ

उन-उन योनियोंमें जीवको सदा जरा-मृत्यु तथा नाना प्रकारके दुःखोंका शिकार होना पड़ता है। इस प्रकार संसारमें जन्म लेनेवाला प्रत्येक प्राणी संतापकी आगमें पकाया जाता है।

English

Sahkukarnah

अध्याय ६५

श्लोक 65

कृष्णवर्णं पिङ्गलया रेचयेत्स्वाग्रतस्तथा ।क्षिपेदस्त्रेण तत्पश्चात्कल्पिते कुलिशोपले

kṛṣṇavarṇaṃ piṅgalayā recayetsvāgratastathā / kṣipedastreṇa tatpaścātkalpite kuliśopale

हिन्दी अर्थ

यहाँ विभिन्न वस्तुओंके संग्रह-परिग्रहको कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि संग्रहसे महान् दोष प्रकट होता है। रेशमका कीड़ा अपने संग्रहके कारण ही बन्धनमें पड़ता है। स्त्री, पुत्र

English

Vimattab

अध्याय ६५

श्लोक 66

एतद्ध्वि सर्वपापघ्नं प्रोक्तं चैवाघमर्षणम् ।ततश्च हस्तौ प्रक्षाल्य प्राग्वदाचम्य मन्त्रवित्

etaddhvi sarvapāpaghnaṃ proktaṃ caivāghamarṣaṇam / tataśca hastau prakṣālya prāgvadācamya mantravit

हिन्दी अर्थ

आदि कुटुम्बमें आसक्त रहनेवाले जीव उसी प्रकार कष्ट पाते हैं, जैसे जंगलके बूढ़े हाथी तालाबके दलदलमें फँसकर दुःख भोगते हैं। जैसे महान् जालमें फँसकर पानीके बाहर आये हुए

English

Vrhvajah

अध्याय ६५

श्लोक 67

समुत्थाय च मन्त्रज्ञस्ताम्रपात्रे सुमादिकम् ।प्रक्षिप्यार्घं प्रदद्याद्वै मूलान्तैर्मन्त्रमुच्चरन्

samutthāya ca mantrajñastāmrapātre sumādikam / prakṣipyārghaṃ pradadyādvai mūlāntairmantramuccaran

हिन्दी अर्थ

मत्स्य तड़पते हैं, उसी प्रकार स्नेह-जालमें फँसकर अत्यन्त कष्ट उठाते हुए इन प्राणियोंकी ओर दृष्टिपात करो। कुटुम्ब, पुत्र, स्त्री, शरीर और द्रव्यका संग्रह, यह सब कुछ पराया है, सब

English

Mattavahanaii

अध्याय ६५

श्लोक 68

रविमण्डलसंस्थाय देवायार्घ्यं प्रकल्पयेत् ।दत्त्वार्घं त्रिरनेनाथ देवं रविगतं स्मरेत्

ravimaṇḍalasaṃsthāya devāyārghyaṃ prakalpayet / dattvārghaṃ triranenātha devaṃ ravigataṃ smaret

हिन्दी अर्थ

अनित्य है। यहाँ अपना क्या है? केवल पुण्य और पाप। अर्थ (परमात्मा)-की प्राप्तिके लिये विद्या, कर्म, पवित्रता और अत्यन्त विस्तृत ज्ञानका सहारा लिया जाता है। जब अर्थकी

English

Gananaihali

अध्याय ६५

श्लोक 69

स्वकल्पोक्तां च गायत्रीं जपेदष्टोत्तरं शतम् ।अष्टांविंशतिवारं वा गुह्येतिमनुनार्पयेत्

svakalpoktāṃ ca gāyatrīṃ japedaṣṭottaraṃ śatam / aṣṭāṃviṃśativāraṃ vā guhyetimanunārpayet

हिन्दी अर्थ

सिद्धि (परमात्माकी प्राप्ति हो जाती है तो मनुष्य मुक्त हो जाता है। गाँवमें रहनेवाले मनुष्यकौ

English

6 urpakari}ah

अध्याय ६५

श्लोक 70

उद्यदादित्यसंकाशां पुस्तकाक्षकरांबुजाम् ।कृष्णाजिनांबरां ब्राह्मीं ध्यायेत्ताराङ्किते ऽम्बरे

udyadādityasaṃkāśāṃ pustakākṣakarāṃbujām / kṛṣṇājināṃbarāṃ brāhmīṃ dhyāyettārāṅkite 'mbare

हिन्दी अर्थ

बाँधनेवाली रस्सीके समान है। पुण्यात्मा पुरुष उस रस्सीको काटकर आगे परमार्थके पथपर बढ़ जाते हैं; परंतु पापी जीव उसे नहीं काट पाते। यह संसार एक नदीके समान है। रूप इसका

English

Trilocanah

अध्याय ६५

श्लोक 71

मध्याह्ने वरदां देवीं पार्वतीं संस्मरेत्पराम् ।शुक्लांबरां वृषारूढां त्रिनेत्रां रविबिंबगाम्

madhyāhne varadāṃ devīṃ pārvatīṃ saṃsmaretparām / śuklāṃbarāṃ vṛṣārūḍhāṃ trinetrāṃ ravibiṃbagām

हिन्दी अर्थ

है। गन्ध इस नदीका कीचड़, शब्द जल और स्वर्गरूपी दुर्गग घाट है। इस नदीको मनुष्य-

English

Varmyali

अध्याय ६५

श्लोक 72

वरं पाशं च शूलं च दधानां नृकरोटिकाम् ।सायाह्ने रत्नभूषाढ्यां पीतकौशेयवाससाम्

varaṃ pāśaṃ ca śūlaṃ ca dadhānāṃ nṛkaroṭikām / sāyāhne ratnabhūṣāḍhyāṃ pītakauśeyavāsasām

हिन्दी अर्थ

शरीररूपी नौकाकी सहायतासे पार किया जा सब प्रकारके बन्धनोंसे मुक्त, सर्वज्ञ, सर्वविजयी, सकता है। क्षमा इसको खेनेवाले डॉड और धर्म सिद्ध तथा भाव, अभावसे रहित हो जाओ। बहुत- इसको स्थिर करनेवाला लंगर है। विषयासक्तिके से ज्ञानी पुरुष संयम और तपस्याके बलसे नवीन त्यागरूपी शीघ्रगामी वायुद्वारा ही इस नदीको पार बन्धनोंका उच्छेद करके नित्य सुख देनेवाली

English

Bhakiyapriyah

अध्याय ६५

श्लोक 73

श्यामरङ्गां चतुर्हस्तां शङ्खचक्रलसत्कराम् ।गदापद्मधरां देवीं सूर्यासनकृताश्रयाम्

śyāmaraṅgāṃ caturhastāṃ śaṅkhacakralasatkarām / gadāpadmadharāṃ devīṃ sūryāsanakṛtāśrayām

हिन्दी अर्थ

किया जा सकता है। इसलिये तुम कर्मोसे निवृत्त, अवाधसिद्धि (मुक्ति)-को प्राप्त हो चुके हैं।

English

Caturmurtih

अध्याय ६५

श्लोक 74

ततो देवानृषींश्चैव पितॄंश्चापि विधानवित् ।तर्पयित्वा स्वेष्टदेवं तर्पयेत्कल्पमार्गतः

tato devānṛṣīṃścaiva pitṝṃścāpi vidhānavit / tarpayitvā sveṣṭadevaṃ tarpayetkalpamārgataḥ

हिन्दी अर्थ

शुकदेवजीको सनत्कुमारका उपदेश

English

SadAlivab

अध्याय ६५

श्लोक 75

गुरुपङ्क्तिं च संतर्प्यं सांगं सावरणं तथा ।सायुधं वैनतेयं संतर्पयामीति तर्पयेत्

gurupaṅktiṃ ca saṃtarpyaṃ sāṃgaṃ sāvaraṇaṃ tathā / sāyudhaṃ vainateyaṃ saṃtarpayāmīti tarpayet

हिन्दी अर्थ

कप कहते हैं--शुकदेव! शास्त्र मनुष्य भूतकालमें मरे हुए किसी व्यक्ति अथवा शोकको दूर करनेवाला है। वह शान्तिकारक नष्ट हुई किसी वस्तुके लिये निरन्तर शोक तथा कल्याणमय है। अपने शोकका नाश करनेके करता है, वह एक दुःखसे दूसरे दुःखको प्राप्त लिये शास्त्रका श्रवण करनेसे उत्तम बुद्धि प्राप्त होता है। इस प्रकार उसे दो अनर्थ भोगने पड़ते

English

MeghanAdab

अध्याय ६५

श्लोक 76

नारदं पर्वतं जिष्णुं निशठोद्धवदारुकान् ।विष्वक्सेन च शैलेयं वैष्णवः परितर्पयेत्

nāradaṃ parvataṃ jiṣṇuṃ niśaṭhoddhavadārukān / viṣvaksena ca śaileyaṃ vaiṣṇavaḥ paritarpayet

हिन्दी अर्थ

होती है। उनके मिलनेपर मनुष्य सुखी एवं हैं। यदि कोई शारीरिक और मानसिक दुःख अभ्युदयशील होता है। शोकके हजारों और उपस्थित हो जाय तथा उसे दूर करनेमें कोई भयके सैकड़ों स्थान हैं। वे प्रतिदिन मूढ़ उपाय काम न दे सके, तो उसके लिये चिन्ता मनुष्यपर ही अपना प्रभाव डालते हैं। विद्वान न करनी चाहिए। दुःख दूर करनेकी सबसे

English

GanelvaraU

अध्याय ६५

श्लोक 77

एवं संतर्प्य विप्रेन्द्र दत्त्वार्ध्यं च विवस्वते ।पूजागारं समागत्य प्रक्षाल्याङ्घ्री उपस्पृशेत्

evaṃ saṃtarpya viprendra dattvārdhyaṃ ca vivasvate / pūjāgāraṃ samāgatya prakṣālyāṅghrī upaspṛśet

हिन्दी अर्थ

पुरुषपर उनका जोर नहीं चलता। अल्प बुद्धिवाले अच्छी दवा यही है कि उसका बार-बार मनुष्य ही अप्रिय वस्तुके संयोग और प्रिय चिन्तन न किया जाय। चिन्तन करनेसे वह वस्तुके वियोगसे मन-ही-मन दुःखी होते हैं। घटता नहीं, बल्कि और बढ़ता ही जाता है। जो वस्तु भूतकालके गर्भमें छिप गयी (नष्ट हो इसलिये मानसिक दुःखको बुद्धिके विचारसे

English

DUrmukhab

अध्याय ६५

श्लोक 78

अग्निहोत्रस्थितानग्नीन् हुत्वोपस्थाय यत्नतः ।पूजास्थलं समागत्य द्वारपूजां समाचरेत्

agnihotrasthitānagnīn hutvopasthāya yatnataḥ / pūjāsthalaṃ samāgatya dvārapūjāṃ samācaret

हिन्दी अर्थ

गयी), उसके गुणोंका स्मरण नहीं करना चाहिए; और शारीरिक कष्टको औषध-सेवनद्वारा नष्ट क्योंकि जो आदरपूर्वक उसके गुणोंका चिन्तन करना चाहिए। शास्त्रज्ञानके प्रभावसे ही ऐसा करता है, वह उसकी आसक्तिके बन्धनसे मुक्त होना सम्भव है। दुःख पड़नेपर बालकोंकी तरह नहीं हो पाता। जहाँ चित्तकी आसक्ति बढ़ने रोना उचित नहीं है। रूप, यौवन, जीवन, धन-

English

Vr$adhvaja i$ united with Nanda» Gai>anayaka with SuxcSi Gajcndra with KamarupiI, 8urpakari;ia with Uma.

अध्याय ६५

श्लोक 79

गणेशं चोर्द्ध्वशाखायां महालक्ष्मीं च दक्षिणे ।सरस्वतीं वामभागे दक्षे विघ्नेश्वरं पुनः

gaṇeśaṃ corddhvaśākhāyāṃ mahālakṣmīṃ ca dakṣiṇe / sarasvatīṃ vāmabhāge dakṣe vighneśvaraṃ punaḥ

हिन्दी अर्थ

लगे, वहीं दोषदृष्टि करनी चाहिए और उसे संग्रह, आरोग्य तथा प्रियजनोंका सहवास--ये अनिष्टको बढ़ानेवाला समझना चाहिए। ऐसा सब अनित्य हैं। विद्वान् पुरुषको इनमें आसक्त करनेपर उससे शीघ्र ही वैराग्य हो जाता है। जो नहीं होना चाहिए। आये हुए संकटके लिये बीती बातके लिये शोक करता है, उसे धर्म, शोक करना उचित नहीं है। यदि उस संकटको

English

Mul united with Subhaga, Khadgt with Durbhaga, Varenya with 8ivi, Vffaketana is with Bhaga.

अध्याय ६५

श्लोक 80

क्षेत्रपालं तथा वामे दक्षे गङ्गां प्रपूजयेत् ।वामे च यमुनां दक्षे धातारं वामतस्तथा

kṣetrapālaṃ tathā vāme dakṣe gaṅgāṃ prapūjayet / vāme ca yamunāṃ dakṣe dhātāraṃ vāmatastathā

हिन्दी अर्थ

अर्थ और यशकी प्राप्ति नहीं होती। वह उसके टालनेका कोई उपाय दिखलायी दे तो शोक अभावका दुःखमात्र उठाता है। उससे अभाव दूर छोड़कर उसे ही करना चाहिए। इसमें संदेह नहीं होता। सभी प्राणियोंको उत्तम पदार्थोंसे नहीं कि जीवनमें सुखकी अपेक्षा दुःख ही संयोग और वियोग प्राप्त होते रहते हैं। किसी अधिक होता है तथापि जरा और मृत्युके दुःख

English

The malfkas of Ganesa have Ganaka as its sage, the metre is nivrt gayatrz, the lord is Sakti Ganeivara, with the Bija (seed letter) added with long vowels, ahganyasa is to be performed. Then one should meditate thus:

अध्याय ६५

श्लोक 81

विधातारं शङ्खपद्मनिधींश्च वामदक्षयोः ।द्वारपालांस्ततो ऽभ्यर्चेत्तत्तत्कल्पोदितान्सुधीः

vidhātāraṃ śaṅkhapadmanidhīṃśca vāmadakṣayoḥ / dvārapālāṃstato 'bhyarcettattatkalpoditānsudhīḥ

हिन्दी अर्थ

एकपर ही यह शोकका अवसर नहीं आता। जो महान् हैं, अत: उनसे अपने प्रिय आत्माका

English

Pita (yellow), ivcia (white), aru (red) asita (black) and ananta are the Kalas of bindu. Thus arc the Kali matrkas recounted. The different devotees shall perform the rite accordingly.

अध्याय ६५

श्लोक 82

नन्दः सुनन्दश्चण्डश्च प्रचण्डः प्रचलोबलः ।भद्रः सुभद्रश्चेत्याद्या वैष्णवा द्वारपालकाः

nandaḥ sunandaścaṇḍaśca pracaṇḍaḥ pracalobalaḥ / bhadraḥ subhadraścetyādyā vaiṣṇavā dvārapālakāḥ

हिन्दी अर्थ

१. शोकस्थानसहस्नाणि भयस्थानशतानि च। दिवसे दिवसे मूढमाविशन्ति न पण्डितम्॥

English

One should perform sadahga of the mulamantra (the principal mantra). He shall join the jalis like hrdaya etc. in the dative and then make the placement of letters.

अध्याय ६५

श्लोक 83

नन्दी भृङ्गी रिटी स्कन्दो गणेशोमामहेश्वराः ।वृषभश्च महाकालः शैवा वै द्वारपालकाः

nandī bhṛṅgī riṭī skando gaṇeśomāmaheśvarāḥ / vṛṣabhaśca mahākālaḥ śaivā vai dvārapālakāḥ

हिन्दी अर्थ

उद्धार करे। शारीरिक और मानसिक रोग सुदृढ़ धनुष धारण करनेवाले वीर पुरुषके छोड़े हुए तीखी धारवाले बाणोंकी तरह शरीरको पीड़ित करते हैं। तृष्णासे व्यथित, दुःखी एवं विवश

English

(The following arc the jatis): Namah, Svaha, Va.saf, hum, vuut and phat. Thereafter he shall meditate on the favourite lord endowed with ornaments and weapons. After making six nyasas in the image, he shall begin worship.

अध्याय ६५

श्लोक 84

ब्राह्मयाद्या मातरो ऽष्टौ तु शक्त्यो द्वाःस्थिताः स्वयम् ।सेंदुः स्वनामाघर्णाद्या ङेनम्ॐता इमे स्मृताः

brāhmayādyā mātaro 'ṣṭau tu śaktyo dvāḥsthitāḥ svayam / seṃduḥ svanāmāgharṇādyā ṅenamoṃtā ime smṛtāḥ

हिन्दी अर्थ

होकर जीनेकी इच्छा रखनेवाले मनुष्यका नाशवान् शरीर क्षण-क्षणमें विनाशको प्राप्त हो रहा है। जैसे नदियोंका प्रवाह आगेकी ओर ही बढ़ता जाता है, पीछेकी ओर नहीं लौटता, उसी प्रकार

English

The eight Mothers beginning with Brahmi, as powers, stand at the doors themselves; with the Moon, their own names beginning "gharna", ending in "namah" are held.

अध्याय ६५

श्लोक 85

ततः स्थित्वासने धीमानाचम्य प्रयतः शुचिः ।दिव्यान्तरिक्षभौमांश्च विघ्नानुत्सार्य यत्नतः

tataḥ sthitvāsane dhīmānācamya prayataḥ śuciḥ / divyāntarikṣabhaumāṃśca vighnānutsārya yatnataḥ

हिन्दी अर्थ

रात और दिन भी मनुष्योंकी आयुका अपहरण करते हुए एक-एक करके बीतते चले जा रहे हैं। यदि जीवके किये हुए कर्मोका फल पराधीन न होता तो वह जो चाहता, उसकी

English

Then, seated on a seat, the wise one, having sipped water, pure, having driven away with effort obstacles divine, atmospheric and earthly,

अध्याय ६५

श्लोक 86

केशवाद्यां मातृकान्तु न्यसेद्वैष्णवसत्तमः ।केशवः कीर्तिसंयुक्तः कान्त्या नारायणस्तथा

keśavādyāṃ mātṛkāntu nyasedvaiṣṇavasattamaḥ / keśavaḥ kīrtisaṃyuktaḥ kāntyā nārāyaṇastathā

हिन्दी अर्थ

वही कामना पूरी हो जाती। बड़े-बड़े संयमी, चतुर और बुद्धिमान् मनुष्य भी अपने कर्मोंके फलसे वज्ञचित होते देखे जाते हैं तथा गुणहीन, मूर्ख और नीच पुरुष भी किसीके आशीर्वाद

English

the best Vaishnava should place the Keshava-matrika (the alphabet-deities): Keshava with Kirti, Narayana with Kanti,

अध्याय ६५

श्लोक 87

माधवस्तुष्टिसहितो गोविन्दः पुष्टिसंयुतः ।विष्णुस्तु धृतिसंयुक्तः शान्तियुङ्मधुसूदनः

mādhavastuṣṭisahito govindaḥ puṣṭisaṃyutaḥ / viṣṇustu dhṛtisaṃyuktaḥ śāntiyuṅmadhusūdanaḥ

हिन्दी अर्थ

बिना ही समस्त कामनाओंसे सम्पन्न दिखायी देते हैं। कोई-कोई मनुष्य तो सदा प्राणियोंकी हिंसामें ही लगा रहता है और संसारको धोखा दिया करता है, किंतु कहीं-कहीं ऐसा पुरुष भी

English

Madhava with Tushti, Govinda with Pushti, Vishnu with Dhriti, Madhusudana with Shanti,

अध्याय ६५

श्लोक 88

त्रिविक्रमः क्रियायुक्तो वामनो दयितायुतः ।श्रीधरो मेधया युक्तो हृषीकिशश्च हर्षया

trivikramaḥ kriyāyukto vāmano dayitāyutaḥ / śrīdharo medhayā yukto hṛṣīkiśaśca harṣayā

हिन्दी अर्थ

सुखी देखा जाता है। कितने ही ऐसे हैं, जो कोई काम न करके चुपचाप बैठे रहते हैं, फिर भी उनके पास लक्ष्मी अपने-आप पहुँच जाती है और कुछ लोग बहुत-से कार्य करते हैं, फिर

English

Trivikrama with Kriya, Vamana with Dayita, Shridhara with Medha, Hrishikesha with Harsha,

अध्याय ६५

श्लोक 89

पद्मनाभयुता श्रद्धा लज्जा दामोदरान्विता ।वासुदेवश्च लक्ष्मीयुक् संकर्षणसरस्वती

padmanābhayutā śraddhā lajjā dāmodarānvitā / vāsudevaśca lakṣmīyuk saṃkarṣaṇasarasvatī

हिन्दी अर्थ

भी मनचाही वस्तु नहीं पाते। इसमें पुरुषका प्रारब्ध ही प्रधान है। देखो, वीर्य अन्यत्र पैदा होता है और अन्यत्र जाकर संतान उत्पन्न करता है। कभी तो वह योनिमें पहुँचकर गर्भ धारण

English

Padmanabha with Shraddha, Damodara with Lajja, Vasudeva with Lakshmi, Sankarshana with Sarasvati,

अध्याय ६५

श्लोक 90

प्रद्युम्नः प्रीतिसंयुक्तो ऽनिरुद्धो रतिसंयुतः ।चक्री जयायुतः पश्चाद्गदी दुर्गासमन्वितः

pradyumnaḥ prītisaṃyukto 'niruddho ratisaṃyutaḥ / cakrī jayāyutaḥ paścādgadī durgāsamanvitaḥ

हिन्दी अर्थ

करानेमें समर्थ होता है और कभी नहीं होता। कितने ही लोग पुत्र-पौत्रकी इच्छा रखकर उसकी सिद्धिके लिये यत्र करते रहते हैं, तो भी उनके संतान नहीं होती और कितने ही मनुष्य

English

Pradyumna with Priti, Aniruddha with Rati, the Discus-bearer with Jaya, then Mace-bearer with Durga,

अध्याय ६५

श्लोक 91

शार्ङ्गी तु प्रभया युक्तः खड्गी युक्तस्तु सत्यया ।शङ्खी चण्डासमायुक्तो हली वाणीसमायुतः

śārṅgī tu prabhayā yuktaḥ khaḍgī yuktastu satyayā / śaṅkhī caṇḍāsamāyukto halī vāṇīsamāyutaḥ

हिन्दी अर्थ

संतानको क्रोधमें भरा हुआ साँप समझकर सदा उससे डरते रहते हैं तो भी उनके यहाँ दीर्घजीवी पुत्र उत्पन्न हो जाता है, मानो वह

English

the Bow-bearer with Prabha, Sword-bearer with Satya, Conch-bearer with Chanda, Plough-bearer with Vani,

अध्याय ६५

श्लोक 92

मुसली च बिलासिन्या शूली विजययान्वितः ।पाशी विरजया युक्तो कुशी विश्वासमन्वितः

musalī ca bilāsinyā śūlī vijayayānvitaḥ / pāśī virajayā yukto kuśī viśvāsamanvitaḥ

हिन्दी अर्थ

स्वयं किसी प्रकार परलोकसे आकर प्रकट हो गया हो। कितने ही गर्भ ऐसे हैं,जो पुत्रकी

English

Pestle-bearer with Vilasini, Trident-bearer with Vijaya, Noose-bearer with Viraja, Goad-bearer with Vishvasa,

अध्याय ६५

श्लोक 93

मुकुन्दो विनतायुक्तो नन्दजश्च सुनन्दया ।निन्दी स्मृत्या समायुक्तो नरो वृद्ध्या समन्वितः

mukundo vinatāyukto nandajaśca sunandayā / nindī smṛtyā samāyukto naro vṛddhyā samanvitaḥ

हिन्दी अर्थ

जाते हैं और दस महीनेतक माताके उदरमें धारण किये जानेके बाद जन्म लेनेपर कुलाड्ार निकल जाते हैं। उन्हीं माड़्रलिक कृत्योंसे प्राप्त हुए बहुत-से ऐसे पुत्र हैं, जो जन्म लेनेके साथ

English

Mukunda with Vinata, Nandaja with Sunanda, Nandin with Smriti, Nara with Vriddhi,

अध्याय ६५

श्लोक 94

समृद्धियुङ्नरकजिच्छुद्धियुक्च हरिः स्मृतः ।कृष्णो बुद्ध्या युतः सत्यो भुक्त्या मुक्त्याथ सात्वतः

samṛddhiyuṅnarakajicchuddhiyukca hariḥ smṛtaḥ / kṛṣṇo buddhyā yutaḥ satyo bhuktyā muktyātha sātvataḥ

हिन्दी अर्थ

ही पिताके संचित किये हुए अपार धन-धान्य और विपुल भोगोंके अधिकारी होते हैं। (इन सबमें प्रारब्ध ही प्रधान है।)

English

Hari with Samriddhi, Narakajit with Shuddhi; Krishna with Buddhi, Satya with Bhukti, Sattvata with Mukti,

अध्याय ६५

श्लोक 95

सौरिक्षमे सूररमे उमायुक्तो जनार्दनः ।भूधरः क्लेदिनीयुक्तो विश्वमूर्तिश्च क्लिन्नया

saurikṣame sūrarame umāyukto janārdanaḥ / bhūdharaḥ kledinīyukto viśvamūrtiśca klinnayā

हिन्दी अर्थ

जो सुख और दुःख दोनोंकी चिन्ता छोड़ देता है, वह अविनाशी ब्रह्मको प्राप्त होता है और परमानन्दका अनुभव करता है। धनके उपार्जनमें बड़ा कष्ट होता है, उसकी रक्षामें भी

English

Shauri with ... Janardana with Uma; Bhudhara with Kledini; Vishvamurti with Klinna,

अध्याय ६५

श्लोक 96

वैकुण्ठो वसुधायुक्तो वसुदःपुरुषोत्तमः ।बली तु परया युक्तो बलानुजपरायणे

vaikuṇṭho vasudhāyukto vasudaḥpuruṣottamaḥ / balī tu parayā yukto balānujaparāyaṇe

हिन्दी अर्थ

सुख नहीं है तथा उसके खर्च करनेमें भी क्लेश ही होता है, अत: धनको प्रत्येक दशामें दुःखदायक समझकर उसके नष्ट होनेपर चिन्ता नहीं करनी चाहिए। मनुष्य धनका संग्रह करते-

English

Vaikuntha with Vasudha; Purushottama with Vasuda; Bali with Para; (Balanuja with ...),

अध्याय ६५

श्लोक 97

बालसूक्ष्मे वृषघ्नस्तु संध्यायुक् प्रज्ञया वृषः ।हंसः प्रभासमायुक्तो वराहो निशया युतः

bālasūkṣme vṛṣaghnastu saṃdhyāyuk prajñayā vṛṣaḥ / haṃsaḥ prabhāsamāyukto varāho niśayā yutaḥ

हिन्दी अर्थ

करते पहलेकी अपेक्षा ऊँची स्थितिको प्राप्त करके भी कभी तृप्त नहीं होते, वे और अधिक धन कमानेकी आशा लिये हुए ही मर जाते हैं। इसलिये विद्वान् पुरुष सदा संतुष्ट रहते हैं (वे

English

... Vrishaghna with Sandhya; Vrisha with Prajna; Hamsa with Prabha; Varaha with Nisha;

अध्याय ६५

श्लोक 98

विमलो धारया युक्तो नृसिंहो विद्युता युतः ।केशवादिमातृकाया मुनिर्नारायणो मतः

vimalo dhārayā yukto nṛsiṃho vidyutā yutaḥ / keśavādimātṛkāyā munirnārāyaṇo mataḥ

हिन्दी अर्थ

धनकी तृष्णामें नहीं पड़ते)। संग्रहका अन्त है विनाश, सांसारिक ऐश्वर्यकी उन्नतिका अन्त है उस ऐशथ्वर्ययी अवनति। संयोगका अन्त है वियोग और जीवनका अन्त है मरण। तृष्णाका

English

Vimala with Dhara; Nrisimha with Vidyut. The sage of the Keshava-matrika is held to be Narayana.

अध्याय ६५

श्लोक 99

अमृताद्या च गायत्री छन्दो विष्णुश्च देवता ।चक्राद्यायुधसंयुक्तं कुंभादर्शधरं हरिम्

amṛtādyā ca gāyatrī chando viṣṇuśca devatā / cakrādyāyudhasaṃyuktaṃ kuṃbhādarśadharaṃ harim

हिन्दी अर्थ

कभी अन्त नहीं होता। संतोष ही परम सुख है। अत: पण्डितजन इस लोकमें संतोषको ही उत्तम धन कहते हैं। आयु निरन्तर बीती जा रही है। वह पलभर भी विश्राम नहीं लेती। अब अपना

English

The metre is Amritadya Gayatri, the deity Vishnu. One should worship Hari endowed with discus and other weapons, holding a pot and mirror,

अध्याय ६५

श्लोक 100

लक्ष्मीयुतं विद्युदाभं बहुभूषायुतं भजेत् ।एवं ध्यात्वा न्यसेच्छक्तिं श्रीकामपुटिताक्षरम्

lakṣmīyutaṃ vidyudābhaṃ bahubhūṣāyutaṃ bhajet / evaṃ dhyātvā nyasecchaktiṃ śrīkāmapuṭitākṣaram

हिन्दी अर्थ

शरीर ही अनित्य है, तब इस संसारकी दूसरी किस वस्तुको नित्य समझा जाय। जो मनुष्य सब प्राणियोंके भीतर मनसे परे परमात्माकी स्थिति जानकर उन्हींका चिन्तन करते हैं, वे

English

with Lakshmi, bright as lightning, with many ornaments. Having thus meditated, he should place the power, the syllable enclosed by "shri" and "kama".

अध्याय ६५

श्लोक 101

वदेत्तद्विष्णुशक्तिभ्यां हृदयं प्रणवादिकम् ।त्वगंसृङ्मांसमेदो ऽस्थिमज्जाशुक्राण्यसून्वदेत्

vadettadviṣṇuśaktibhyāṃ hṛdayaṃ praṇavādikam / tvagaṃsṛṅmāṃsamedo 'sthimajjāśukrāṇyasūnvadet

हिन्दी अर्थ

संसारयात्रा समाप्त होनेपर परमपदका साक्षात्कार करते हुए शोकके पार हो जाते हैं।

English

With Vishnu and Shakti he should say "heart" with Om at the start. He should assign skin, blood, flesh, fat, bone, marrow and semen to the life-breaths.

अध्याय ६५

श्लोक 102

प्राणं क्रोधं तथा मभ्यामन्तान्यादिदशस्वपि ।एक मौलौ मुखे चैक द्विक नेत्रे द्विकं श्रुतौ

prāṇaṃ krodhaṃ tathā mabhyāmantānyādidaśasvapi / eka maulau mukhe caika dvika netre dvikaṃ śrutau

हिन्दी अर्थ

जैसे बनमें नयी-नयी घासकी खोजमें विचरते हुए अतृप्॑त पशुको सहसा व्याप्र आकर दबोच लेता है, उसी प्रकार भोगोंकी खोजमें लगे हुए अतृप्त मनुष्यको मृत्यु उठा ले जाती है। इसलिये

English

Prana and anger, and in the ten beginning with "ma", "bhya": one on the head, one on the face, two on the eyes, two on the ears,

अध्याय ६५

श्लोक 103

नसोर्द्वयं कपोले च द्वयं द्वे द्विरदच्छदे ।एकं तु रसनामूले ग्रीवायामेकमेव च

nasordvayaṃ kapole ca dvayaṃ dve dviradacchade / ekaṃ tu rasanāmūle grīvāyāmekameva ca

हिन्दी अर्थ

इस दुःखसे छुटकारा पानेका उपाय अवश्य सोचना चाहिए। जो शोक छोड़कर साधन आरम्भ करता है और किसी व्यसनमें आसक्त नहीं होता, उसकी मुक्ति हो जाती है। धनी हो

English

two on the nostrils, two on the cheeks, two on the lips, one at the root of the tongue and one on the neck.

अध्याय ६५

श्लोक 104

कवर्गं दक्षिणे बाहौ चवर्गं वामबाहुके ।टतवर्गौं पादयोस्तु पफौ कुङ्क्षिद्वये न्यसेत्

kavargaṃ dakṣiṇe bāhau cavargaṃ vāmabāhuke / ṭatavargauṃ pādayostu paphau kuṅkṣidvaye nyaset

हिन्दी अर्थ

या निर्धन, सबको उपभोगकालमें ही शब्द, स्पर्श, रूप, रस और उत्तम गन्ध आदि विषयोंमें किज्चित् सुखका अनुभव होता है। उपभोगके पश्चात् उनमें कुछ नहीं रहता। प्राणियोंको एक-

English

He should place the "ka" series on the right arm, the "cha" series on the left arm, the "ta" and "ta" series on the feet, and "pa" and "pha" on the two sides.

अध्याय ६५

श्लोक 105

पृष्ठवंशे वमित्युक्तं नाभौ भं हृदये तु मम् ।यादिसप्तापि धातुस्था हं प्राणे लं तथात्मनि

pṛṣṭhavaṃśe vamityuktaṃ nābhau bhaṃ hṛdaye tu mam / yādisaptāpi dhātusthā haṃ prāṇe laṃ tathātmani

हिन्दी अर्थ

दूसरेसे संयोग होनेके पहले कोई दुःख नहीं होता। जब संयोगके बाद प्रियका वियोग होता है तभी सबको दुःख हुआ करता है; अतः विवेकी पुरुषको अपने स्वरूपमें स्थित होकर

English

On the spine "va"; on the navel "bha"; on the heart "ma"; the seven beginning with "ya" in the constituents; "ha" in the breath, "la" in the self,

अध्याय ६५

श्लोक 106

क्षं क्रोधे क्रमतो न्यस्य विष्णु पूजाक्षमो भवेत् ।पूर्णोदर्या तु श्रीकण्ठो ह्यनन्तो विजरान्वितः

kṣaṃ krodhe kramato nyasya viṣṇu pūjākṣamo bhavet / pūrṇodaryā tu śrīkaṇṭho hyananto vijarānvitaḥ

हिन्दी अर्थ

कभी भी शोक नहीं करना चाहिए। धैर्यके द्वारा शिश्न और उदरकी, नेत्रद्वारा हाथ और पैरकी, मनके द्वारा आँख और कानकी तथा सद्दिद्याके

English

"ksha" in anger: placing them in order, one becomes able to worship Vishnu. With Purnodari, Shrikantha; Ananta with Vija...

अध्याय ६५

श्लोक 107

सूक्ष्मेशः शाल्मलीयुक्तो लोलाक्षीयुक्त्रिमातकः ।महेश्वरो वर्तुलाक्ष्याधींशो वै दीर्घघोणया

sūkṣmeśaḥ śālmalīyukto lolākṣīyuktrimātakaḥ / maheśvaro vartulākṣyādhīṃśo vai dīrghaghoṇayā

हिन्दी अर्थ

द्वारा मन और वाणीकी रक्षा करनी चाहिए। पूजनीय तथा अन्य मनुष्योंमें आसक्ति हटाकर शान्तभावसे विचरण करता है, वही सुखी और वही विद्वान् है। जो अध्यात्म-विद्यामें अनुरक्त,

English

Sukshmesha with Shalmali; Trimata with Lolakshi; Maheshvara with Vartulakshi; the lord ... with Dirghaghona;

अध्याय ६५

श्लोक 108

दिर्घमुख्या भारभूतिस्तिथीशो गोमुखीयुतः ।स्थावरेशो दिर्घजिह्वायुग्धरः कुडोदरीयुतः

dirghamukhyā bhārabhūtistithīśo gomukhīyutaḥ / sthāvareśo dirghajihvāyugdharaḥ kuḍodarīyutaḥ

हिन्दी अर्थ

निष्काम तथा भोगासक्तिसे दूर है और सदा अकेला ही विचरता रहता है, वह सुखी होता है। जब मनुष्य सुखको दुःख और दुःखको सुख समझने लगता है, उस अवस्थामें बुद्धि, सुनीति

English

Bharabhuti with Dirghamukhi; Tithisha with Gomukhi; Sthaveresha with Dirghajihva; Dhara with Kudodari;

अध्याय ६५

श्लोक 109

उर्द्धकेश्या तु झिण्टीशो भौतिको विकृतास्यया ।सद्यो ज्वालामुखीयुक्तोल्कामुख्यानुग्रहो युतः

urddhakeśyā tu jhiṇṭīśo bhautiko vikṛtāsyayā / sadyo jvālāmukhīyuktolkāmukhyānugraho yutaḥ

हिन्दी अर्थ

और पुरुषार्थ भी उसकी रक्षा नहीं कर पाते। अतः मनुष्यको ज्ञानप्राप्कि लिये स्वभावत: यत्र करना चाहिए; क्‍योंकि यत्र करनेवाला पुरुष कभी दुःखमें नहीं पड़ता।

English

Jhintisha with Urdhvakeshi; Bhautika with Vikritasya; Sadya with Jvalamukhi; Anugraha with Ulkamukhi;

अध्याय ६५

श्लोक 110

अक्रूर आस्यया युक्तो महासेनो विद्यया युतः ।क्रोधीशश्चमहाकाल्या चण्डेशेन सरस्वती

akrūra āsyayā yukto mahāseno vidyayā yutaḥ / krodhīśaścamahākālyā caṇḍeśena sarasvatī

हिन्दी अर्थ

सनन्दनजी कहते हैं--व्यासपुत्र शुकदेवसे ऐसा कहकर उनकी अनुमति ले महामुनि सनत्कुमारजी उनसे सादर पूजित हो वहाँसे चले गये। योगियोंमें श्रेष्ठ शुकदेवजी भी अपनी

English

Akrura with Asya; Mahasena with Vidya; Krodhisha with Mahakali; Sarasvati with Chandesha;

अध्याय ६५

श्लोक 111

पञ्चान्तकः सिद्धगौर्या युक्तश्चाथ शिरोत्तमः ।त्रैलोक्यविद्यया युक्तो मन्त्रशक्त्यैकरुद्रकः

pañcāntakaḥ siddhagauryā yuktaścātha śirottamaḥ / trailokyavidyayā yukto mantraśaktyaikarudrakaḥ

हिन्दी अर्थ

स्वरूपस्थितिको भलीभाँति जानकर ब्रह्मपदका अनुसंधान करनेके लिये उत्सुक हो पिताके पास गये। पितासे मिलकर महामुनि शुकने उन्हें प्रणाम किया और उनकी परिक्रमा करके वे

English

Panchantaka with Siddhagauri; then Shirottama; Trailokyavidya; Ekarudra with Mantrashakti;

अध्याय ६५

श्लोक 112

क्रूर्मेशः कमठीयुक्तो भूतमात्रैकनेत्रकः ।लम्बोदर्या चतुर्वक्रो ह्यजेशो द्राविणीयुतः

krūrmeśaḥ kamaṭhīyukto bhūtamātraikanetrakaḥ / lambodaryā caturvakro hyajeśo drāviṇīyutaḥ

हिन्दी अर्थ

श्रीशुकदेवजीकी ऊर्ध्वगति, श्रेतद्वीप तथा वैकुण्ठधाममें जाकर शुकदेवजीके द्वारा भगवान् विष्णुकी स्तुति और भगवान्की आज्ञासे शुकदेवजीका व्यासजीके पास आकर भागवतशास्त्र पढ़ना

English

Kurmesha with Kamathi; Ekanetra with Bhutamatra; Chaturvaktra with Lambodari; Ajesha with Dravini;

अध्याय ६५

श्लोक 113

सर्वेशो नागरीयुक्तः सोमेशः खेचरीयुतः ।मर्यादया लाङ्गलीशो दारुकेशेन रूपिणी

sarveśo nāgarīyuktaḥ someśaḥ khecarīyutaḥ / maryādayā lāṅgalīśo dārukeśena rūpiṇī

हिन्दी अर्थ

सनन्दनजीने कहा--देव्षे ! केलास-पर्वतपर जाकर सूर्यके उदय होनेपर विद्वान् शुकदेव हाथ- पैरोंकी यथोचित रीतिसे रखकर विनीतभावसे पूर्वकी ओर मुँह करके बैठे और योगमें लग गये।

English

Sarvesha with Nagari; Somesha with Khecari; Langalisha with Maryada; Rupini with Darukesha;

अध्याय ६५

श्लोक 114

वारुण्या त्वर्द्धनारीशो उमाकान्तो गुनीश्वरः ।काकोदर्या तथाषाढी पूतनासंयुक्तो मतः

vāruṇyā tvarddhanārīśo umākānto gunīśvaraḥ / kākodaryā tathāṣāḍhī pūtanāsaṃyukto mataḥ

हिन्दी अर्थ

उस समय उन्होंने सब प्रकारके सड्रोंसे रहित परमात्माका दर्शन किया। यों उस परमात्माका साक्षात्कार करके शुकदेवजी खूब खुलकर हँसे। फिर वे वायुके समान आकाशमें विचरने लगे।

English

Ardhanarisha with Varuni; Umakanta with Gunishvara; Kakodari; Ashadhi; with Putana;

अध्याय ६५

श्लोक 115

दण्डीशो भद्रकालीयुत्रीशो योगिनीयुतः ।मीनेशः शङ्खिनीयुक्तो मेषेशस्तर्जयनीयुतः

daṇḍīśo bhadrakālīyutrīśo yoginīyutaḥ / mīneśaḥ śaṅkhinīyukto meṣeśastarjayanīyutaḥ

हिन्दी अर्थ

उस समय उनका तेज उदयकालीन अरुणके समान प्रकाशित हो रहा था। वे मन और वायुके

English

Dandisha with Bhadrakali; ... with Yogini; Minesha with Shankhini; Meshesha with Tarjani;

अध्याय ६५

श्लोक 116

लोहितः कालरात्र्या च शिखीशः कुजनीयुतः ।छलगण्डः कपर्दिन्या द्विरण्डेशश्च वज्रया

lohitaḥ kālarātryā ca śikhīśaḥ kujanīyutaḥ / chalagaṇḍaḥ kapardinyā dviraṇḍeśaśca vajrayā

हिन्दी अर्थ

शक्ति तथा रीति-नीतिके अनुसार उनका पूजन किया। देवताओंने उनपर दिव्य पुष्पोंकी वर्षा की। उन्हें इस प्रकार ऊपर उठते देख गन्धर्व, अप्सरा, महर्षि तथा सिद्धगण सब आश्चर्यसे

English

Lohita with Kalaratri; Shikhisha with Kujani; Chhalaganda with Kapardini; Dviranda with Vajra;

अध्याय ६५

श्लोक 117

महाबलो जयायुक्तो बलीशः सुमुखेश्वरी ।भुजङ्गो रेवतीयुक्तः पिनाकी माधवीयुतः

mahābalo jayāyukto balīśaḥ sumukheśvarī / bhujaṅgo revatīyuktaḥ pinākī mādhavīyutaḥ

हिन्दी अर्थ

लिड्ररहित ब्रह्मपदमें स्थित हो गये। उस समय उनका तेज धूमरहित अग्निकी भाँति उद्दीत्त हो रहा था। आगे बढ़नेपर शुकदेवजीने पर्वतके दो अनुपम शिखर देखे, जिनमें एक तो हिमालयके

English

Mahabala with Jaya; Balisha with Sumukheshvari; Bhujanga with Revati; Pinaki with Madhavi;

अध्याय ६५

श्लोक 118

खड्गीशो वारुणीयुक्तो बकेशो वायवीयुतः ।श्वेतोरस्को विदारिण्या भृगुः सहजया युतः

khaḍgīśo vāruṇīyukto bakeśo vāyavīyutaḥ / śvetorasko vidāriṇyā bhṛguḥ sahajayā yutaḥ

हिन्दी अर्थ

समान श्वेत तथा दूसरा मेरुके समान पीतवर्ण था।

English

Khadgisha with Varuni; Bakesha with Vayavi; Shvetoraska with Vidarini; Bhrigu with Sahaja;

अध्याय ६५

श्लोक 119

लकुलीशश्च लक्ष्मीयुक् शिवेशो व्यापिनीयुतः ।संवर्तके महामाया प्रोक्ता श्रीकण्ठमातृका

lakulīśaśca lakṣmīyuk śiveśo vyāpinīyutaḥ / saṃvartake mahāmāyā proktā śrīkaṇṭhamātṛkā

हिन्दी अर्थ

एक-दूसरेसे सटे हुए और सुन्दर थे। नारद! इनका विस्तार ऊपरकी ओर तथा अगल-बगलमें सौ-सौ योजनका था। शुकदेवजी दोनों शिखरोंके बीचसे सहसा आगे निकल गये। वह श्रेष्ठ पर्वत

English

Lakulisha with Lakshmi; Shivesha with Vyapini; in Samvartaka, Mahamaya. Thus is declared the Shrikantha-matrika.

अध्याय ६५

श्लोक 120

यत्र स्वीशपदं नोक्तं तत्र सर्वत्र योजयेत् ।मुनिःस्याद्दक्षिणामूर्तिर्गायत्रीछन्द ईरितम्

yatra svīśapadaṃ noktaṃ tatra sarvatra yojayet / muniḥsyāddakṣiṇāmūrtirgāyatrīchanda īritam

हिन्दी अर्थ

उनकी गतिको रोक न सका। उस समय शुकदेवजी वायुलोकसे ऊपर अन्तरिक्षमें यात्रा करते हुए अपना प्रभाव दिखाकर सर्वस्वरूप हो सम्पूर्ण लोकोंमें विचरण करने लगे। परम योगवेत्ता

English

Where the word "svisha" (own lord) is not said, one should supply it everywhere. The sage is Dakshinamurti; the metre is said to be Gayatri;

अध्याय ६५

श्लोक 121

देवता चार्द्धनारीशो विनियोगो ऽखिलाप्तये ।हलो बीजानि चोक्तानि स्वराः शक्तय ईरिताः

devatā cārddhanārīśo viniyogo 'khilāptaye / halo bījāni coktāni svarāḥ śaktaya īritāḥ

हिन्दी अर्थ

शुकदेवजी श्रेतद्वीपमें जा पहुँचे। वहाँ उन्होंने पहले भगवान् श्रीनारायणदेवका प्रभाव देखा। तत्पश्चात् जिन्हें वेदकी ऋचाएँ भी ढूँढ़ती फिरती हैं, उन देवाधिदेव जनार्दनका साक्षात् दर्शन

English

the deity is Ardhanarishvara; the application is for obtaining all. The consonants are the seeds; the vowels are the powers.

अध्याय ६५

श्लोक 122

कुर्याद्भृगुस्थाकाशेन षड्दीर्घाढ्येन चाङ्गकम् ।बन्धूकस्वर्णवर्णागं वराक्षाङ्कुशपाशिनम्

kuryādbhṛgusthākāśena ṣaḍdīrghāḍhyena cāṅgakam / bandhūkasvarṇavarṇāgaṃ varākṣāṅkuśapāśinam

हिन्दी अर्थ

किया। दर्शनके अनन्तर शुकदेवजीने भगवान्की स्तुति की। नारद! उनकी स्तुतिसे प्रसन्न होकर

English

He should make the limbs with the "bhrigu" syllable joined with space and enriched with six long vowels; body bandhuka-gold in colour, with boon, rosary, goad and noose,

अध्याय ६५

श्लोक 123

अर्द्धेन्दुशेखरं त्र्यक्षं देववन्द्यं विचिन्तयेत् ।ध्यात्वैवं शिवशक्तीश्च चतुर्थी हृदयान्तिम्

arddhenduśekharaṃ tryakṣaṃ devavandyaṃ vicintayet / dhyātvaivaṃ śivaśaktīśca caturthī hṛdayāntim

हिन्दी अर्थ

श्रीभगवानने कहा--योगीन्द्र ! मैं सम्पूर्ण

English

crowned with a half-moon, three-eyed, worshipped by gods: he should contemplate. Having meditated thus, Shiva and Shakti and the fourth case, ending in "heart".

अध्याय ६५

श्लोक 124

सौबीजमातृकापूर्वे विन्यसेन्मातृका स्थले ।विघ्नेशश्च ह्रिया युक्तो विघ्नराजः श्रिया युतः

saubījamātṛkāpūrve vinyasenmātṛkā sthale / vighneśaśca hriyā yukto vighnarājaḥ śriyā yutaḥ

हिन्दी अर्थ

फिर भी तुमने मेरा दर्शन कर लिया है। ब्रह्मचारी शुक ! तुम सनत्कुमारजीके बताये हुए योगके द्वारा सिद्ध हो चुके हो। अत: वायुके मार्गमें स्थित होकर इच्छानुसार सम्पूर्ण लोकोंको देखो।

English

He should place, in the place of the alphabet, with the sau seed before the alphabet. Vighnesha with Hri; Vighnaraja with Shri;

अध्याय ६५

श्लोक 125

विनायकस्तथा पुष्ट्या शान्तियुक्तः शिवोत्तमः ।विघ्नकृत्स्वस्तिसंयुक्तो विघ्नहर्ता सरस्वती

vināyakastathā puṣṭyā śāntiyuktaḥ śivottamaḥ / vighnakṛtsvastisaṃyukto vighnahartā sarasvatī

हिन्दी अर्थ

विप्रवर! भगवान् वासुदेवके ऐसा कहनेपर शुकदेवमुनि उन्हें प्रणम करके अखिलविश्ववन्दित विष्णुधामको गये। नारद! वैकुण्ठलोक विमानपर विचरनेवाले देवताओंसे सेवित है। उसे विरजा

English

Vinayaka with Pushti; Shivottama with Shanti; Vighnakrit with Svasti; Vighnahartri with Sarasvati;

अध्याय ६५

श्लोक 126

स्वाहया गणनाथश्च एकदन्तः सुमेधया ।कान्त्या युक्तो द्विदन्तस्तु कामिन्या गजवक्रकः

svāhayā gaṇanāthaśca ekadantaḥ sumedhayā / kāntyā yukto dvidantastu kāminyā gajavakrakaḥ

हिन्दी अर्थ

नामवाली दिव्य नदीने चारों ओरसे घेर रखा है। उस दिव्य धामके प्रकाशित होनेसे ही ये सम्पूर्ण लोक प्रकाशित हो रहे हैं। वहाँ सुन्दर-सुन्दर बावड़ियाँ बनी हैं, जो कमलोंसे आच्छादित रहती

English

Ganapati with Svaha; Ekadanta with Sumedha; Dvidanta with Kanti; Gajavakra with Kamini;

अध्याय ६५

श्लोक 127

निरञ्जनो मोहिनीयुक्कपर्द्दीतुनटीयुतः ।दीर्घजिह्वः पार्वतीयुग्ज्वालिन्या शङ्कुकर्णकः

nirañjano mohinīyukkaparddītunaṭīyutaḥ / dīrghajihvaḥ pārvatīyugjvālinyā śaṅkukarṇakaḥ

हिन्दी अर्थ

हैं। उनके घाट मूँगेके बने हुए हैं, जिनमें सुवर्ण और रत्र जड़े हुए हैं। वे सब बावड़ियाँ निर्मल जलसे भरी रहती हैं। वहाँके द्वारपाल चार भुजाधारी होते हैं। नाना प्रकारके आभूषण उनकी

English

Niranjana with Mohini; Kapardin with Nati; Dirghajihva with Parvati; Shankukarna with Jvalini;

अध्याय ६५

श्लोक 128

वृषध्वजो नन्दया च सुरेश्या गणनायकः ।गजेन्दः कामरूपिण्या शूर्पकर्णस्तथोमया

vṛṣadhvajo nandayā ca sureśyā gaṇanāyakaḥ / gajendaḥ kāmarūpiṇyā śūrpakarṇastathomayā

हिन्दी अर्थ

शोभा बढ़ाते हैं। वे सभी विष्वक्सेनजीके अनुयायी एवं सिद्ध हैं। उनकी कुमुद आदि नामोंसे प्रसिद्धि है। शुकदेवजीको उनमेंसे किसीने नहीं रोका। वे बिना बाधा भीतर प्रवेश कर गये। वहाँ उन्होंने

English

Vrishadhvaja with Nanda; Ganayaka with Sureshi; Gajendra with Kamarupini; Shurpakarna with Uma;

अध्याय ६५

श्लोक 129

विरोचनस्तेजोवत्या सत्या लम्बोदरेण च ।महानन्दश्च विघ्नेश्या चतुर्मूर्तिस्वरूपिणी

virocanastejovatyā satyā lambodareṇa ca / mahānandaśca vighneśyā caturmūrtisvarūpiṇī

हिन्दी अर्थ

सिद्ध-समुदायके द्वारा निरन्तर सेवित देवाधिदेव भगवान् विष्णुका दर्शन किया। उनके चार भुजाएँ

English

Virochana with Tejovati; Lambodara with Satya; Mahananda with Vighneshi; Chaturmurti with Svarupini;

अध्याय ६५

श्लोक 130

सदाशिवः कामदया ह्यामोदो मदजिह्वया ।दुमुखो भूतिसंयुक्तः सुमुखो भौतिकीयुतः

sadāśivaḥ kāmadayā hyāmodo madajihvayā / dumukho bhūtisaṃyuktaḥ sumukho bhautikīyutaḥ

हिन्दी अर्थ

उनके श्रीअड्भोंपर रेशमी पीताम्बर शोभा पा रहा था। शट्डु, चक्र, गदा और पद्म मूर्तिमान् होकर भगवान्की सेवामें उपस्थित थे। उनके वक्ष:स्थलमें भगवती लक्ष्मी विराज रही थीं और कौस्तुभमणिसे

English

Sadashiva with Kamada; Amoda with Madajihva; Dumukha with Bhuti; Sumukha with Bhautiki;

अध्याय ६५

श्लोक 131

प्रमोदधः सितया युक्त एकपादो रमायुतः ।द्विजिह्वो महिषीयुक्तो जभिन्या शूरनामकः

pramodadhaḥ sitayā yukta ekapādo ramāyutaḥ / dvijihvo mahiṣīyukto jabhinyā śūranāmakaḥ

हिन्दी अर्थ

वे प्रकाशित हो रहे थे। उनके कटिभागमें करधनी, बायें कंधेपर यज्ञोपवीत, हाथोंमें कड़े तथा भुजाओंमें अद्भद सुशोभित थे। माथेपर मण्डलाकार किरीट और चरणोंमें नूपुर शोभा दे

English

Pramodadha with Sita; Ekapada with Rama; Dvijihva with Mahishi; Shura with Jabhini;

अध्याय ६५

श्लोक 132

वीरो विकर्णया युक्तः षण्मुखो भृकुटीयुतः ।वरदो लज्जया वामदेवंशो दीर्घघोणया

vīro vikarṇayā yuktaḥ ṣaṇmukho bhṛkuṭīyutaḥ / varado lajjayā vāmadevaṃśo dīrghaghoṇayā

हिन्दी अर्थ

रहे थे। भगवान् मधुसूदनका दर्शन करके शुकदेवने

English

Vira with Vikarna; Shanmukha with Bhrikuti; Varada with Lajja; Vamadeva with Dirghaghona;

अध्याय ६५

श्लोक 133

धनुर्द्धर्या वक्रतुडो द्विंरण्डो यामिनीयुतः ।सेनानी रात्रिसंयुक्तः कामान्धो ग्रामणीयुतः

dhanurddharyā vakratuḍo dviṃraṇḍo yāminīyutaḥ / senānī rātrisaṃyuktaḥ kāmāndho grāmaṇīyutaḥ

हिन्दी अर्थ

शुकदेवजी बोले---सम्पूर्ण लोकोंके एकमात्र साक्षी आप भगवान् वासुदेवको नमस्कार है। सम्पूर्ण जगत्के बीजस्वरूप, सर्वत्र परिपूर्ण एवं

English

Vakratunda with Dhanurdhari; Dviranda with Yamini; Senani with Ratri; Kamandha with Gramani;

अध्याय ६५

श्लोक 134

मत्तः शशिप्रभायुक्तो विमत्तो लोलनेत्रया ।मत्तवाहश्चञ्चलया जटी दीप्तिसमन्वितः

mattaḥ śaśiprabhāyukto vimatto lolanetrayā / mattavāhaścañcalayā jaṭī dīptisamanvitaḥ

हिन्दी अर्थ

निश्चल आत्मरूप आपको नमस्कार है। वासुकि नागकी शय्यापर शयन करनेवाले श्वेतद्वीपनिवासी श्रीहरिको नमस्कार है। आप हंस, मत्स्य, वाराह तथा नरसिंहरूप धारण करनेवाले हैं। ध्रुवके

English

Matta with Shashiprabha; Vimatta with Lolanetra; Mattavahana with Chanchala; Jati with Dipti;

अध्याय ६५

श्लोक 135

मुंही सुभगया युक्तः खड्गी दुर्भगया युतः ।वरेण्यश्च शिवायुक्तो भगया वृषकेतनः

muṃhī subhagayā yuktaḥ khaḍgī durbhagayā yutaḥ / vareṇyaśca śivāyukto bhagayā vṛṣaketanaḥ

हिन्दी अर्थ

आराध्यदेव भी आप ही हैं। आप सांख्य और योग दोनोंके स्वामी हैं। आपको नमस्कार है। चारों सनकादि आपके ही अवतार हैं। आपने ही कच्छप और पृथुरूप धारण किया है।

English

Mundi with Subhaga; Khadgi with Durbhaga; Vareṇya with Shiva; Vrishaketana with Bhaga;

अध्याय ६५

श्लोक 136

भक्ष्यप्रियो भगिन्या च गणेशो भगिनीयुतः ।मेघनादः सुभगया व्यापी स्यात्कालरात्रियुक्

bhakṣyapriyo bhaginyā ca gaṇeśo bhaginīyutaḥ / meghanādaḥ subhagayā vyāpī syātkālarātriyuk

हिन्दी अर्थ

आत्मानन्द ही आपका स्वरूप है। आप ही नाभिपुत्र ऋषभदेवजीके रूपमें प्रकट हुए हैं। जगत्की सृष्टि, पालन और संहार करनेवाले आप ही हैं। आपको नमस्कार है। भृगुनन्दन

English

Bhakshyapriya with Bhagini; Ganesha with Bhagini; Meghanada with Subhaga; Vyapin with Kalaratri;

अध्याय ६५

श्लोक 137

गणेश्वरः कालिङ्कया प्रोक्ता विघ्नेशमातृकाः ।गणेशमातृकायास्तु गणो मुनिभिरीरितः

gaṇeśvaraḥ kāliṅkayā proktā vighneśamātṛkāḥ / gaṇeśamātṛkāyāstu gaṇo munibhirīritaḥ

हिन्दी अर्थ

वेदव्यास, बुद्ध तथा कल्कि भी आपके ही स्वरूप हैं। आपको नमस्कार है। कृष्ण, बलभद्र, प्रयुम्न और अनिरुद्ध-इन चार व्यूहोंके रूपमें आप ही विराज रहे हैं। जानने और चिन्तन

English

Ganeshvara with Kalinka — thus the Mothers of Vighnesha are declared. The group of the Ganesha-matrika is told by the sages.

अध्याय ६५

श्लोक 138

त्रिवृद्गायत्रिकाछन्दो देवः शक्तिगणेश्वरः ।षड्दीर्घाढ्येन बीजेन कृत्वाङ्गानि ततः स्मरेत्

trivṛdgāyatrikāchando devaḥ śaktigaṇeśvaraḥ / ṣaḍdīrghāḍhyena bījena kṛtvāṅgāni tataḥ smaret

हिन्दी अर्थ

करने योग्य परमात्मा भी आप ही हैं। नर- नारायण, शिपिविष्ट तथा विष्णु नामसे प्रसिद्ध आपको नमस्कार है। सत्य ही आपका धाम है। आप धामरहित हैं। गरुड़ आपके ही स्वरूप हैं।

English

The metre is Trivrit Gayatri; the deity is Shakti-Ganeshvara. Having made the limbs with the seed rich in six long vowels, he should then remember:

अध्याय ६५

श्लोक 139

पांशाङ्कुशाभयवरान्दधानं कञ्जहस्तया ।पत्न्याश्लिष्टं रक्ततनुं त्रिनेत्रं गणपे भवेत्

pāṃśāṅkuśābhayavarāndadhānaṃ kañjahastayā / patnyāśliṣṭaṃ raktatanuṃ trinetraṃ gaṇape bhavet

हिन्दी अर्थ

आप स्वयंप्रकाश, ऋभु (देवता), उत्तम ब्रतका पालन करनेके लिये विख्यात, उत्कृष्ट धामवाले और अजित हैं। आपको नमस्कार है। सम्पूर्ण विश्व आपका स्वरूप है। आप ही विश्वरूपमें

English

bearing noose, goad, protection and boon, with a lotus in the hand of his wife, embraced by his wife, red-bodied, three-eyed — thus Ganapati should be.

अध्याय ६५

श्लोक 140

एवं ध्यात्वा न्यसेत्स्वीयबीजपूर्वाक्षरान्वितम् ।निवृत्तिश्च प्रतिष्ठा च विद्या शान्तिस्ततेधिकाः

evaṃ dhyātvā nyasetsvīyabījapūrvākṣarānvitam / nivṛttiśca pratiṣṭhā ca vidyā śāntistatedhikāḥ

हिन्दी अर्थ

प्रकट हैं। सृष्टि, पालन और संहार करनेवाले भी आप ही हैं। यज्ञ और उसके भोक्ता, स्थूल और सूक्ष्म तथा याचना करनेवाले वामनरूप आपको नमस्कार है। सूर्य और चन्द्रमा आपके

English

Having meditated thus, he should place it with his own seed's first letter. Nivritti, Pratishtha, Vidya, Shanti and others:

अध्याय ६५

श्लोक 141

दीपिका रेचिका चापि मोचिका च पराभिधा ।सूक्ष्मासूक्ष्मामृता ज्ञानामृता चाप्यायिनी तथा

dīpikā recikā cāpi mocikā ca parābhidhā / sūkṣmāsūkṣmāmṛtā jñānāmṛtā cāpyāyinī tathā

हिन्दी अर्थ

नेत्र हैं। साहस, ओज और बल आपसे भिन्न नहीं हैं। आप यज्ञोंद्ार यजन करने योग्य,

English

Dipika, Rechika, Mochika, Para; Sukshma, Asukshma, Amrita, Jnanamrita, Apyayini;

अध्याय ६५

श्लोक 142

व्यापिनी व्योमरूपा चानन्ता सृष्टिः समृद्धिका ।स्मृतिर्मेधा ततः कान्तिर्लक्ष्मीर्द्धृतिः स्थिरा स्थितिः

vyāpinī vyomarūpā cānantā sṛṣṭiḥ samṛddhikā / smṛtirmedhā tataḥ kāntirlakṣmīrddhṛtiḥ sthirā sthitiḥ

हिन्दी अर्थ

मस्तकवाले हैं। आपको नमस्कार है। आप लक्ष्मीके स्वामी, उनके निवासस्थान तथा भक्तोंके

English

Vyapini, Vyomarupa, Ananta, Srishti, Samriddhika; Smriti, Medha, Kanti, Lakshmi, Dhriti, Sthira, Sthiti;

अध्याय ६५

श्लोक 143

सिद्धिर्जरा पालिनी च क्षान्तिरीश्वरीका रतिः ।कामिको वरदा वाथ ह्लादिनी प्रीतिसंयुता

siddhirjarā pālinī ca kṣāntirīśvarīkā ratiḥ / kāmiko varadā vātha hlādinī prītisaṃyutā

हिन्दी अर्थ

अधीन रहनेवाले हैं। आप शार्ड्र नामक धनुष धारण करते हैं। आठ' प्रकृतियोंक अधिपति, ब्रह्मा तथा अनन्त शक्तियोंसे सम्पन्न आप परमेश्वरको नमस्कार है। बृहदारण्यक उपनिषद्के द्वारा आपके

English

Siddhi, Jara, Palini, Kshanti, Ishvarika, Rati; Kamika, Varada, Hladini, Priti;

अध्याय ६५

श्लोक 144

दीर्घा तीक्ष्णा तथा रौद्रा प्रोक्ता निद्रा च तन्द्रिका ।क्षुधा च क्रोधिनी पश्चाक्रियाकारी समृत्युका

dīrghā tīkṣṇā tathā raudrā proktā nidrā ca tandrikā / kṣudhā ca krodhinī paścākriyākārī samṛtyukā

हिन्दी अर्थ

तत्त्वका बोध होता है। आप इन्द्रियोंके प्रेरक तथा जगत्स्ष्टा ब्रह्मा हैं। आपके नेत्र विकसित कमलके समान हैं। क्षेत्रज्ञषक रूपमें आप ही प्रकाशित हो रहे हैं। आपको नमस्कार है।

English

Dirgha, Tikshna, Raudra, Nidra, Tandrika; Kshudha, Krodhini, Kriyakari, Mrityuka;

अध्याय ६५

श्लोक 145

पीता श्रेतारुणा पश्चादसितानन्तया युता ।उक्ता कलामातृकैवं तत्तद्भक्तः समाचरेत्

pītā śretāruṇā paścādasitānantayā yutā / uktā kalāmātṛkaivaṃ tattadbhaktaḥ samācaret

हिन्दी अर्थ

गोविन्द, जगत्कर्ता, जगन्नाथ, योगी, सत्य, सत्यप्रतिज्ञ, वैकुण्ठ और अच्युतरूप आपको नमस्कार है। अधोक्षज, धर्म, वामन, त्रिधातु, तेज:पुझ्न धारण करनेवाले, विष्णु, अनन्त एवं कपिलरूप आपको

English

Pita, Sveta, Aruna, then Asita, with Ananta: thus the Kala-matrika is declared; each devotee should practise it accordingly.

अध्याय ६५

श्लोक 146

कलायुङ्मातृकायास्तु मुनिः प्रोक्तः प्रजापतिः ।गायत्रीछन्द आख्यातं देवता शारदाभिधा

kalāyuṅmātṛkāyāstu muniḥ proktaḥ prajāpatiḥ / gāyatrīchanda ākhyātaṃ devatā śāradābhidhā

हिन्दी अर्थ

नमस्कार है। आप ही विरिश्वि नामसे प्रसिद्ध ब्रह्माजी हैं। तीन शिखरोंवाला त्रिकूट पर्वत आपका ही स्वरूप है। ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद आपके अभिन्न विग्रह हैं। एक सींगवाले

English

The sage of the Kala-matrika is said to be Prajapati; the metre is Gayatri, and the deity is named Sharada.

अध्याय ६५

श्लोक 147

ह्रस्वदीर्घान्तरस्थैश्च तारैः कुर्यात्षडङ्गकम् ।पद्मचक्रगुणैणांश्च दधतीं च त्रिलोचनाम्

hrasvadīrghāntarasthaiśca tāraiḥ kuryātṣaḍaṅgakam / padmacakraguṇaiṇāṃśca dadhatīṃ ca trilocanām

हिन्दी अर्थ

श्रुद्धी ऋषि भी आपकी ही विभूति हैं। आपका यश परम पवित्र है तथा सम्पूर्ण वेद-शास्त्र आपसे ही प्रकट हुए हैं। आपको नमस्कार है। आप वृषाकपि (धर्मको अविचल रूपसे स्थापित

English

With Om-seeds in the short and long intervals he should perform the six limbs. Holding a lotus, wheel, rosary and deer-mark, three-eyed,

अध्याय ६५

श्लोक 148

पञ्चवक्रां भारतीं तां मुक्ताभूषां भजेत्सुधीः ।ध्यात्वैवं तारपूर्वां तां न्यसेन्ङन्तकलान्विताम्

pañcavakrāṃ bhāratīṃ tāṃ muktābhūṣāṃ bhajetsudhīḥ / dhyātvaivaṃ tārapūrvāṃ tāṃ nyasenṅantakalānvitām

हिन्दी अर्थ

करनेवाले विष्णु, शिव और इन्द्र) हैं। सम्पूर्ण समृद्धियोंसे सम्पन्न तथा प्रभु सर्वशक्तिमान् हैं। यह सम्पूर्ण विश्व आपकी ही रचना है। भूलोंक, भुवर्लोक और स्वर्लोक आपके ही स्वरूप हैं।

English

five-faced Bharati adorned with pearls — the wise man should worship her. Having thus meditated, he should place her preceded by Om with the Kalas.

अध्याय ६५

श्लोक 149

ततश्च मूलमन्त्रस्य षडङ्गानि समाचरेत् ।हृदयादिचतुर्थ्यन्ते जातीः संयोज्य विन्यसेत्

tataśca mūlamantrasya ṣaḍaṅgāni samācaret / hṛdayādicaturthyante jātīḥ saṃyojya vinyaset

हिन्दी अर्थ

आप हैत्योंका नाश करनेवाले तथा निर्गुण रूप हैं। आपको नमस्कार है। आप निरञ्जन, नित्य, अव्यय और अक्षररूप हैं। शरणागतवत्सल ईश्वर! आपको नमस्कार है। आप मेरी रक्षा कीजिये'।

English

Then he should perform the six limbs of the root mantra. At the end of the heart and the rest, in the fourth case, joining the class-terms, he should place:

अध्याय ६५

श्लोक 150

नमः स्वाहा वषट् हुं वौषट् फट् जातय ईरिताः ।ततो ध्यात्वेष्टदेवं तं भूषायुधसमन्वितम्

namaḥ svāhā vaṣaṭ huṃ vauṣaṭ phaṭ jātaya īritāḥ / tato dhyātveṣṭadevaṃ taṃ bhūṣāyudhasamanvitam

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार स्तुति करनेपर प्रणतजनोंपर दया करनेवाले शड्ख, चक्र और गदाधारी भगवान् विष्णु शुकदेवजीसे इस प्रकार बोले। श्रीभगवानने कहा--उत्तम ब्रतका पालन

English

"namah, svaha, vashat, hum, vaushat, phat" are called the class-terms. Then, having meditated on the chosen deity adorned and armed,

अध्याय ६५

श्लोक 151

न्यस्याङ्गषट्कं तन्मूर्तौं ततः पूजनमारभेत्

nyasyāṅgaṣaṭkaṃ tanmūrtauṃ tataḥ pūjanamārabhet

हिन्दी अर्थ

करनेवाले महाभाग व्यासपुत्र! मैं तुमपर बहुत प्रसन्न हूँ। तुम्हें विद्या और भक्ति दोनों प्राप्त हों।

English

having placed the six limbs in his form, he should begin worship.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_nAradapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Narada Purana — Chapter 65
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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