Narada Purana· Nārada Purāṇa
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अध्याय 68 / 167

Book 1 - Adhyaya 69

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अध्याय ६८

श्लोक 1

इति श्रीबृहन्नारदीयपुराणे पूर्वभागे बृहदुपाख्याने तृतीयपादे गणेशमन्त्रविधाननिरूपणं नामाष्टषष्टितमो ऽध्यायः सनत्कुमार उवाच अथ वक्ष्ये त्रयीमूर्तेर्विधानं त्वब्जिनीपतेः ।मन्त्राणां यत्समाराध्य सर्वेष्टं प्रामुयाहृवि

iti śrībṛhannāradīyapurāṇe pūrvabhāge bṛhadupākhyāne tṛtīyapāde gaṇeśamantravidhānanirūpaṇaṃ nāmāṣṭaṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ sanatkumāra uvāca atha vakṣye trayīmūrtervidhānaṃ tvabjinīpateḥ / mantrāṇāṃ yatsamārādhya sarveṣṭaṃ prāmuyāhṛvi

हिन्दी अर्थ

धारिणी तथा क्षमा। चन्द्रमाकौ कलाओंके नाम इस प्रकार जानने चाहिए--अमृता, मानदा, पूषा, तुष्टि, पुष्टि, रति, धृति, शशिनी, चन्द्रिका, कान्ति,

English

The reading AouW be changed loJwWprtWTT:.

अध्याय ६८

श्लोक 2

तारो रेचिकया युक्तो मेधानेत्रयुता रतिः ।ससर्गा बामकर्णोढ्यो भृगुर्वढ्यासनो मरुत्

tāro recikayā yukto medhānetrayutā ratiḥ / sasargā bāmakarṇoḍhyo bhṛgurvaḍhyāsano marut

हिन्दी अर्थ

ये सोलह चन्द्रमाकी कलाएँ कही गयी हैं। कलशको दो वस्त्रोंस लपेट करके उसके भीतर सर्वोषधि डाले। फिर नौ रत्न छोड़कर

English

should be read as RtnVTI. to

अध्याय ६८

श्लोक 3

शेषोदित्य इति प्रोक्तो वस्वर्णो भुक्तिमुक्तिदः ।देवभागो मुनिश्छन्दो गायत्री देवता रविः

śeṣoditya iti prokto vasvarṇo bhuktimuktidaḥ / devabhāgo muniśchando gāyatrī devatā raviḥ

हिन्दी अर्थ

और वकुल--इन पाँच वृक्षोंके पल्‍लवोंको यहाँ पञ्मपल्लव माना गया है। मोती, माणिक्य, वैदूर्य,

English

The meaning! given under Kwnbha and Mbia are tentative*

अध्याय ६८

श्लोक 4

माया वीजं रमा शक्तिर्दृष्टादृष्टे नियोगकः ।सत्याय हृदयं पश्चाद्ब्रह्मणे शिर ईरितम्

māyā vījaṃ ramā śaktirdṛṣṭādṛṣṭe niyogakaḥ / satyāya hṛdayaṃ paścādbrahmaṇe śira īritam

हिन्दी अर्थ

नीलमणि-- इन नौ रत्रोंको क्रमश: कलशमें

English

atTTghr....ftlfinrtiTP thwld be read as arrrftt

अध्याय ६८

श्लोक 5

विष्णवे तु शिखावर्म रुद्राय परिकीर्तितम् ।नेत्रं स्यादग्रये पश्चात्शर्वायास्रमुदाहृतम्

viṣṇave tu śikhāvarma rudrāya parikīrtitam / netraṃ syādagraye paścātśarvāyāsramudāhṛtam

हिन्दी अर्थ

छोड़कर उसमें इष्ट देवताका आवाहन करे और

English

ITV should be emended as

अध्याय ६८

श्लोक 6

नेत्रो ज्वाला मनो हुं फट्स्वाहान्ता मनवो गणाः ।पुनः षडर्णैर्ह्री लक्ष्म्याः कृत्वान्तः स्थैः षडङ्गकम्

netro jvālā mano huṃ phaṭsvāhāntā manavo gaṇāḥ / punaḥ ṣaḍarṇairhrī lakṣmyāḥ kṛtvāntaḥ sthaiḥ ṣaḍaṅgakam

हिन्दी अर्थ

सम्पन्न करके वस्त्राभूषणोंसे विभूषित शिष्यको वेदीपर बिठावे और प्रोक्षणीके जलसे उसका अभिषेक करे। फिर उसके शरीरमें विधिपूर्वक भूतशुद्धि आदि करके न्यासोंके द्वारा शरीरशुद्धि

English

ffrdm should be read as fvvt fT, and f as

अध्याय ६८

श्लोक 7

शिष्टारौजठरे पृष्टे तयोर्ङेंताख्यया न्यसेत् ।आदित्यं च रविं पश्चाद्भानुं भास्करमेव च

śiṣṭāraujaṭhare pṛṣṭe tayorṅeṃtākhyayā nyaset / ādityaṃ ca raviṃ paścādbhānuṃ bhāskarameva ca

हिन्दी अर्थ

करे और मस्तकमें पल्‍लव मन्त्रोंका न्यास करके एक सौ आठ मूलमन्त्रद्वारा अभिमन्त्रित जलसे प्रिय शिष्यका अभिषेक करे। उस समय मन- ही-मन मूलमन्त्रका जप करते रहना चाहिए।

English

should be read as and as

अध्याय ६८

श्लोक 8

सूर्यं च मूर्ध्नि वदने हृदि गुह्ये च पादयोः ।सद्यादिपञ्च ह्रस्वाद्यान् न्यसेन्ङें हृदय्ॐऽतिमान्

sūryaṃ ca mūrdhni vadane hṛdi guhye ca pādayoḥ / sadyādipañca hrasvādyān nyasenṅeṃ hṛdayoṃ'timān

हिन्दी अर्थ

अवशिष्ट जलसे आचमन करके शिष्य दूसरा वस्त्र धारण करे और गुरुको विधिपूर्वक प्रणाम करके पवित्र हो उनके सामने बैठे तदनन्तर गुरु शिष्यके मस्तकपर हाथ देकर जिस मन्त्रकी

English

is to be read as and mfiral as

अध्याय ६८

श्लोक 9

ह्रीं रमामध्यगामष्टौ वर्णांस्तारादिकान्न्यसेत् ।मूर्द्धास्यकण्ठहृत्कुक्षिनाभिलिङ्गगुदेषु च

hrīṃ ramāmadhyagāmaṣṭau varṇāṃstārādikānnyaset / mūrddhāsyakaṇṭhahṛtkukṣinābhiliṅgagudeṣu ca

हिन्दी अर्थ

दीक्षा देनी हो, उसका विधिपूर्वक एक सौ आठ बार जप करे। 'समः अस्तु' (शिष्य मेरे समान हो) इस भावसे शिष्यको अक्षर-दान करे। तब शिष्य गुरुकी पूजा करे। इसके बाद गुरु शिष्यके

English

Tliese verses contain many unintelligible readings:

अध्याय ६८

श्लोक 10

सचन्द्रस्वरपूर्वं तु ङेतं शीतांशुमण्डलम् ।मूर्द्धादिकण्ठपर्यन्तं न्यसेञ्चान्द्रिमनुस्प्ररन्

sacandrasvarapūrvaṃ tu ṅetaṃ śītāṃśumaṇḍalam / mūrddhādikaṇṭhaparyantaṃ nyaseñcāndrimanuspraran

हिन्दी अर्थ

मस्तकपर चन्दनयुक्त हाथ रखकर एकाग्रचित्त हो, उसके कानमें आठ बार मन्त्र कहे। इस प्रकार

English

Read tntff »nd troft m ilroraY

अध्याय ६८

श्लोक 11

स्पर्शान्सेंदून्समुञ्चार्य ङेंतं भास्करमण्डलम् ।न्यसेत्कण्ठादिनाभ्यन्तं ध्यायन्प्रद्योतनं हृदि

sparśānseṃdūnsamuñcārya ṅeṃtaṃ bhāskaramaṇḍalam / nyasetkaṇṭhādinābhyantaṃ dhyāyanpradyotanaṃ hṛdi

हिन्दी अर्थ

गिर जाय। उस समय गुरु इस प्रकार कहे, “बेटा!

English

?r should be reawi as gWTW:; 5®TOtt as it ift; ftyifipn.

अध्याय ६८

श्लोक 12

यादीन्सचन्द्रानुञ्चार्य ङेतं च वह्निमण्डलम् ।नाभ्यादिपादपर्यन्तं न्यसेद्वह्निमनुस्मरन्

yādīnsacandrānuñcārya ṅetaṃ ca vahnimaṇḍalam / nābhyādipādaparyantaṃ nyasedvahnimanusmaran

हिन्दी अर्थ

बनो। तुम्हें सदा कीर्ति, श्री, कान्ति, पुत्र, आयु, बल और आरोग्य प्राप्त हो।' तब शिष्य उठकर गन्ध आदिके द्वारा गुरुकी पूजा करे और उनके लिये दक्षिणा दे। इस प्रकार गुरुमन्त्र पाकर शिष्य

English

should be read as and tR as or

अध्याय ६८

श्लोक 13

प्रोक्तो ऽयं मण्डलन्यासो महातेजोविधायकः ।आदिठान्तार्णपूर्वं ङेंनमोन्तं सोममण्डलम्

prokto 'yaṃ maṇḍalanyāso mahātejovidhāyakaḥ / ādiṭhāntārṇapūrvaṃ ṅeṃnamontaṃ somamaṇḍalam

हिन्दी अर्थ

उसी समयसे गुरुसेवामें लग जाय। बीचमें अपने इष्टदेवका पूजन करे और उन्हें पुष्पाञ्ञलि देकर अग्नि, निर्क्री और वागीशका क्रमश: पूजन करे। जब मध्यमें भगवान् विष्णुका पूजन करे तो

English

should be read as

अध्याय ६८

श्लोक 14

मूर्द्धादिहृदयान्तं तु विन्यसेत्साधकोत्तमः ।डकारादिक्षकारान्तवर्णाद्यं पह्निमण्डलम्

mūrddhādihṛdayāntaṃ tu vinyasetsādhakottamaḥ / ḍakārādikṣakārāntavarṇādyaṃ pahnimaṇḍalam

हिन्दी अर्थ

उनके चारों ओर क्रमश: गणेश, सूर्य, देवी तथा शिवकी पूजा करे और जब मध्यमें भगवान् शद्भुरकी पूजा करे तो उनके पूर्वादि दिशाओंमें क्रमश: सूर्य, गणेश, देवी तथा विष्णुका पूजन

English

TO: TOT: should read as TOf: TOIT. and as TOWf.

अध्याय ६८

श्लोक 15

ङेंतं हृदादिपादान्तं विन्यसेत्सुसमाहितः ।अग्रीषोमात्मको न्यासः कथितः सर्वसिद्धिदः

ṅeṃtaṃ hṛdādipādāntaṃ vinyasetsusamāhitaḥ / agrīṣomātmako nyāsaḥ kathitaḥ sarvasiddhidaḥ

हिन्दी अर्थ

करे। जब मध्यमें देवीकी पूजा करे तो उनके चारों ओर शिव, गणेश, सूर्य और विष्णुकी पूजा करे। जब मध्यमें गणेशकी पूजा करे तो उनके चारों ओर क्रमश: शिव, देवी, सूर्य और विष्णुकी

English

wA ould read as azid fisvrtT fmiwvqfd.

अध्याय ६८

श्लोक 16

न्यसेत्सेंदून्मातृकार्णाञ्जयान्तपुरुषात्मने ।नमोन्ते व्यापकं मन्त्री हंस्नयासो ऽयमीरितः

nyasetseṃdūnmātṛkārṇāñjayāntapuruṣātmane / namonte vyāpakaṃ mantrī haṃsnayāso 'yamīritaḥ

हिन्दी अर्थ

पूजा करे और जब मध्यभागमें सूर्यकी पूजा करे तो पूर्वादि दिशाओंमें क्रमश: गणेश, विष्णु, देवी और शिवकी पूजा करे। इस प्रकार प्रतिदिन आदरपूर्वक पदञ्चदेवोंका पूजन करना चाहिए।

English

should read as The reading 4tTt|fTOPf

अध्याय ६८

श्लोक 17

अष्टावष्टौ स्वराञ्शेषान्पञ्चपञ्च मितान्पुनः ।उक्तादित्यमुखानेतान्विन्यसेञ्च नवग्रहान्

aṣṭāvaṣṭau svarāñśeṣānpañcapañca mitānpunaḥ / uktādityamukhānetānvinyaseñca navagrahān

हिन्दी अर्थ

विद्वान्ू पुरुषको चाहिए कि ब्राह्ममुहूर्तमें उठकर लघुशंका आदि आवश्यक कार्य कर ले और यदि लघुशंका आदि न लगी हो तो शब्यापर बैठे-बैठे ही अपने गुरुदेवको नमस्कार करे--

English

should read as

अध्याय ६८

श्लोक 18

आधारलिङ्गयोर्नाभौ हृदि कण्ठे मुखान्तरे ।भ्रूमध्ये च तथा भाले ब्रह्मरङ्घ्रे न्यसेत्क्रमात्

ādhāraliṅgayornābhau hṛdi kaṇṭhe mukhāntare / bhrūmadhye ca tathā bhāle brahmaraṅghre nyasetkramāt

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर पादुकामन्त्रका दस बार जप और समर्पण करके गुरुदेवको पुनः प्रणाम और उनका

English

There are three yogas vis. Vesi Visi and Ubhacarft when there

अध्याय ६८

श्लोक 19

हंसाख्यमग्नीषोमाख्यं मण्डलत्रयमेव च ।पुनर्न्यासत्रयं कुर्यान्मूलेन व्यापकं चरेत्

haṃsākhyamagnīṣomākhyaṃ maṇḍalatrayameva ca / punarnyāsatrayaṃ kuryānmūlena vyāpakaṃ caret

हिन्दी अर्थ

फिर मूलाधारसे ब्रह्मरन्श्रतक मूलविद्याका चिन्तन करे। मूलाधारसे निम्नभागमें गोलाकार वायुमण्डल है, उसमें वायुका बीज “या” कार स्थित है। उस बीजसे वायु प्रवाहित हो रही है।

English

Read as atTWWHfRtr. I

अध्याय ६८

श्लोक 20

एवं न्यासविधिं कृत्वा ध्यायेत्सूर्यं हृदबुजे ।दानाभयाब्जयुगलं धारयन्तं करै रविम्

evaṃ nyāsavidhiṃ kṛtvā dhyāyetsūryaṃ hṛdabuje / dānābhayābjayugalaṃ dhārayantaṃ karai ravim

हिन्दी अर्थ

उससे ऊपर अग्मिका त्रिकोणमण्डल है। उसमें जो अग्नरिका बीज 'र' कार है, उससे आग प्रकट हो रही है। उक्त वायु तथा अग्निके साथ मूलाधारमें स्थित शरीरवाली कुलकुण्डलिनीका ध्यान करे,

English

should read as ftdfijill

अध्याय ६८

श्लोक 21

कुण्डलां गदकेयूरहारिणं च त्रयीतनुम् ।ध्यात्वैवं प्रजपेन्मन्त्री वसुलक्षं दशांशतः

kuṇḍalāṃ gadakeyūrahāriṇaṃ ca trayītanum / dhyātvaivaṃ prajapenmantrī vasulakṣaṃ daśāṃśataḥ

हिन्दी अर्थ

जो सोये हुए सर्पके समान आकारवाली है। वह स्वयं भूलिड़को आवेष्टित करके सो रही है। देखनेमें वह कमलकी नालके समान जान पड़ती है। वह अत्यन्त पतली है और उसके अड्लोंसे

English

should read as and as

अध्याय ६८

श्लोक 22

रक्तांभोजैस्तिलैर्वापि जुहुयाद्विधिवद्वसौ ।प्रथमं पीठयजने धर्मादीनां स्थले यजेत्

raktāṃbhojaistilairvāpi juhuyādvidhivadvasau / prathamaṃ pīṭhayajane dharmādīnāṃ sthale yajet

हिन्दी अर्थ

करोड़ों विद्युतोंकी-सी प्रभा छिटक रही है। इस प्रकार कुलकुण्डलिनीका ध्यान करके भावनात्मक कूर्च (कूंची)-के द्वारा उसे जगाकर उठाये और सुषुम्णा नाड़ीके मार्गसे क्रमशः: छः: चक्रोंका

English

should be read as 94.

अध्याय ६८

श्लोक 23

प्रभूतं विमलं शारं समाराध्यमनन्तरम् ।परमादिमुखं मध्ये खबिंबान्तं प्रपूजयेत्

prabhūtaṃ vimalaṃ śāraṃ samārādhyamanantaram / paramādimukhaṃ madhye khabiṃbāntaṃ prapūjayet

हिन्दी अर्थ

भेदन करनेवाली उस कुण्डलिनीको गुरुकी बतायी हुई विधिके अनुसार विद्वान् पुरुष ब्रह्मरन्श्रतक ले

English

should read as 9:.

अध्याय ६८

श्लोक 24

सोमाग्निमण्डलं पूज्यरविमण्डलमर्चयेत् ।दीप्ता सूक्ष्मा जया भद्रा विभूतिर्विमला तथा

somāgnimaṇḍalaṃ pūjyaravimaṇḍalamarcayet / dīptā sūkṣmā jayā bhadrā vibhūtirvimalā tathā

हिन्दी अर्थ

जाय और वहाँके अमृतमें निमग्र करके आत्माका चिन्तन करे। मानो आत्मा उसके प्रभापुझसे व्याप्त है। वह निर्मल, चिन्मय तथा देह आदिसे परे है। फिर उस कुण्डलिनीको अपने स्थानपर पहुँचाकर

English

V should be read as

अध्याय ६८

श्लोक 25

अमोघा विद्युता सर्वतोमुखी पीठशक्तयः ।ह्रस्वत्रयोक्तिजाः क्लीबही ना वह्नीन्दुसंयुताः

amoghā vidyutā sarvatomukhī pīṭhaśaktayaḥ / hrasvatrayoktijāḥ klībahī nā vahnīndusaṃyutāḥ

हिन्दी अर्थ

हृदयमें इशष्टदेवका चिन्तन करे और मानसिक उपचारोंसे उनका पूजन करके निम्नाद्धित मन्त्रसे प्रार्थना करे--

English

should read as The expression is used «V«n:

अध्याय ६८

श्लोक 26

स्वरा बीजानि शक्तीनां तदाद्याः पूजयेत्तुः ताः ।ब्रह्मविष्णुशिवात्मा ते सृष्टिः शेषान्विताप्यसौ

svarā bījāni śaktīnāṃ tadādyāḥ pūjayettuḥ tāḥ / brahmaviṣṇuśivātmā te sṛṣṭiḥ śeṣānvitāpyasau

हिन्दी अर्थ

'आदिदेव! लक्ष्मीकान्त ! विष्णो! त्रिलोकीका चैतन्य आपका स्वरूप है। आपकी आज्ञासे ही प्रातःकाल उठकर आपका प्रिय कार्य करनेके लिये मैं संसारयात्राका अनुसरण करूँगा।'

English

should read as

अध्याय ६८

श्लोक 27

एवं चान्ते योग पीठात्मने हृदयमीरयेत् ।ताराद्यो ऽयं पीठमन्त्रस्त्वनेनासनमादिशेत्

evaṃ cānte yoga pīṭhātmane hṛdayamīrayet / tārādyo 'yaṃ pīṭhamantrastvanenāsanamādiśet

हिन्दी अर्थ

ब्रह्मन्! यदि इष्टदेव कोई दूसरा देवता हो तो पूर्वोक्त मन्त्रमें (विष्णो' आदिके स्थानमें ऊहाद्वारा उसके वाचक शब्द या नामका प्रयोग कर लेना चाहिए। तत्पश्चात् सम्पूर्ण सिद्धिक लिये अजपा

English

*9IW Mauwltl' must be wrong. It should be read as 9m

अध्याय ६८

श्लोक 28

ध्रुवो वियद्बिन्दुयुतं खं खखोल्काय दृन्मनुः ।नवार्णाय च मनवे मूर्तिं संकल्पयेत्सुधीः

dhruvo viyadbinduyutaṃ khaṃ khakholkāya dṛnmanuḥ / navārṇāya ca manave mūrtiṃ saṃkalpayetsudhīḥ

हिन्दी अर्थ

जप निवेदन करे। दिन-रातमें जीव “इक्कीस हजार छः: सौ” बार सदा अजपा नामक गायत्रीका जप करता है। इस अजपा मन्त्रके ऋषि हंस हैं, अव्यक्त गायत्री छन्‍द कहा गया है। परमहंस

English

This verse appears so be a repetition of verse 297. Here the

अध्याय ६८

श्लोक 29

साक्षिणं जगतां तस्यामावाह्य विधिवद्यजेत् ।ततः षडङ्गामाराध्य द्विक्ष्वष्टाङ्गं प्रपूजयेत्

sākṣiṇaṃ jagatāṃ tasyāmāvāhya vidhivadyajet / tataḥ ṣaḍaṅgāmārādhya dvikṣvaṣṭāṅgaṃ prapūjayet

हिन्दी अर्थ

शक्ति है, तत्पश्चात् षडड्भन्यास करे। सूर्य, सोम, निरञ्जन, निराभास, धर्म और ज्ञान-ये छः: अद्भ हैं। क्रमश: इनके पूर्वमें 'हंस:' और अन्तमें ' आत्मने' पद जोड़कर श्रेष्ठ साधक इनका छ: अड्ोंमें न्यास

English

should read as

अध्याय ६८

श्लोक 30

संपूज्य मध्ये वादित्यं रविं भानुं च भास्करम् ।सूर्यं दिशासु सद्यादिपञ्च ह्रस्वादिकानिमान्

saṃpūjya madhye vādityaṃ raviṃ bhānuṃ ca bhāskaram / sūryaṃ diśāsu sadyādipañca hrasvādikānimān

हिन्दी अर्थ

करे। हकार सूर्यके समान तेजस्वी होकर शरीरसे बाहर निकलता है और सकार वैसे ही तेजस्वी रूपसे प्रवेश करता है। इस प्रकार हकार और सकारका ध्यान कहा गया है, इस तरह ध्यान

English

The word for or

अध्याय ६८

श्लोक 31

स्वस्वनामादिवर्णाद्याः शक्तयोर्ऽच्या विदिक्षु च ।उषां प्रज्ञां प्रभां संध्यां ततो ब्रह्मादिकान्यजेत्

svasvanāmādivarṇādyāḥ śaktayor'cyā vidikṣu ca / uṣāṃ prajñāṃ prabhāṃ saṃdhyāṃ tato brahmādikānyajet

हिन्दी अर्थ

करके बुद्धिमान् पुरुष वहि और अर्कमण्डलमें

English

reminds us of the Brhajjataka expression.

अध्याय ६८

श्लोक 32

पुरतो ऽरुणमभ्यर्च्य सोमं ज्ञं च गुरुं भृगुम् ।दिक्ष्वर्यमादिकानिष्ट्वा भूमिजं च शनैश्चरम्

purato 'ruṇamabhyarcya somaṃ jñaṃ ca guruṃ bhṛgum / dikṣvaryamādikāniṣṭvā bhūmijaṃ ca śanaiścaram

हिन्दी अर्थ

हंस: सूर्यात्मने हृदयाय नमः । हंस सोमात्मने शिरसे स्वाहा। हंसो निरञ्ञनात्मने शिखायै वषट्। हंसो निराभासात्मने कवचाय हुम् । हंसो धर्मात्मने नेत्राभ्यां वौषट्। हंसो ज्ञानात्मने अस्त्राय फट्।

English

fsnftsnA: should read as

अध्याय ६८

श्लोक 33

राहुं केतुं च कोणेषु पूर्ववत्परिपूजयेत् ।इन्द्राद्यानपि वज्राद्यान्पूजयेत्पूर्ववत्सुधीः

rāhuṃ ketuṃ ca koṇeṣu pūrvavatparipūjayet / indrādyānapi vajrādyānpūjayetpūrvavatsudhīḥ

हिन्दी अर्थ

विभागपूर्वक जप अर्पण करे। मूलाधारचक्रमें चार दलका कमल है, जो बन्धूकपुष्पके समान लाल है। उसके चारों दलोंमें क्रमश: “व श ष स'-ये अक्षर अट्टित हैं।

English

artniT shoidd read as

अध्याय ६८

श्लोक 34

इत्थं संपूज्य विधिवद्भास्करं भक्तवत्सलम् ।समाहितो दिनेशाय दद्यादर्ध्यं दिने दिने

itthaṃ saṃpūjya vidhivadbhāskaraṃ bhaktavatsalam / samāhito dineśāya dadyādardhyaṃ dine dine

हिन्दी अर्थ

उसमें अपनी शक्तिके साथ गणेशजी विराजमान हैं। वे अपने चारों हाथोंमें क्रमश: पाश, अंकुश, सुधापात्र तथा मोदक लेकर उल्लसित हैं। ऐसे वाकूपति गणेशजीको छः: सौ जप अर्पण करे।

English

should read as

अध्याय ६८

श्लोक 35

प्राणानायम्य सद्भूमौ न्यासान्कृत्वा पुरोदितान् ।विधाय मण्डलं भानोः पीठं पूर्ववदर्चयेत्

prāṇānāyamya sadbhūmau nyāsānkṛtvā puroditān / vidhāya maṇḍalaṃ bhānoḥ pīṭhaṃ pūrvavadarcayet

हिन्दी अर्थ

स्वाधिष्ठान-चक्रमें छः: दलोंका कमल है। वह चक्र मूँगेके समान रंगका है। उसके छ: दलोंमें क्रमशः 'ब भम य र ल' ये अक्षर अड्टित हैं। उसमें कमलजन्मा ब्रह्माजी हंसारूढ़ होकर विराजमान

English

should be emended as and

अध्याय ६८

श्लोक 36

ध्यात्वार्कं प्रयजेद्द्विव्यैर्मानसैरुपचारकैः ।पात्रं ताम्रमयं प्रस्थतोयग्राहि सुशोभनम्

dhyātvārkaṃ prayajeddvivyairmānasairupacārakaiḥ / pātraṃ tāmramayaṃ prasthatoyagrāhi suśobhanam

हिन्दी अर्थ

हैं। उनके वामाड़-भागमें उनकी ब्राह्मीशक्ति सुशोभित हैं। वे विद्याके अधिपति हैं। स्रुवा और अक्षमाला उनके हाथोंकी शोभा बढ़ाती हैं। ऐसे ब्रह्माजीको छ: हजार जप निवेदन करे। मणिपूर चक्रमें

English

Th should be read as

अध्याय ६८

श्लोक 37

निधाय मण्डले रक्तचन्दनादिविनिर्मिते ।विलोममातृकामूलमुञ्चरन्पूरयेज्जलैः

nidhāya maṇḍale raktacandanādivinirmite / vilomamātṛkāmūlamuñcaranpūrayejjalaiḥ

हिन्दी अर्थ

दशदल कमल विद्यमान है। उसके प्रत्येक दलपर

English

should read 9mvi4l4; and as Rfipr. The

अध्याय ६८

श्लोक 38

सूर्यबिंबविनिर्गच्छत्सुधांबुधिविभावितैः ।कुङ्कुमं रोजनां राजीं चन्दनं रक्तचन्दनम्

sūryabiṃbavinirgacchatsudhāṃbudhivibhāvitaiḥ / kuṅkumaṃ rojanāṃ rājīṃ candanaṃ raktacandanam

हिन्दी अर्थ

अड्डित हैं। उसकी प्रभा विद्युद्बिलसित मेघके समान है। उसमें शट्ढू, चक्र, गदा और पद्म धारण करनेवाले भगवान् विष्णु लक्ष्मीसहित विराजमान हैं। उन्हें छः: हजार जप अर्पण करे। अनाहत

English

ihould be read as and as

अध्याय ६८

श्लोक 39

करवीरं जपाशालिकुशश्यामाकतण्डुलान् ।तिलवेणुयवांश्चैव निक्षिपेत्सलिले शुभे

karavīraṃ japāśālikuśaśyāmākataṇḍulān / tilaveṇuyavāṃścaiva nikṣipetsalile śubhe

हिन्दी अर्थ

चक्रमें द्वादशदल कमल विद्यमान है। इसके प्रत्येक

English

RT: should be read as OTfkWTO:.

अध्याय ६८

श्लोक 40

सांगं सावरणं तत्रावाह्यार्कं पूर्ववद्यजेत् ।गन्धपुष्पधूपदीपनैवेद्याद्यै र्विधानतः

sāṃgaṃ sāvaraṇaṃ tatrāvāhyārkaṃ pūrvavadyajet / gandhapuṣpadhūpadīpanaivedyādyai rvidhānataḥ

हिन्दी अर्थ

ट ठ' ये अक्षर अ्धित हैं। उसका वर्ण शुक्ल है। उसमें शूल, अभय, वर और अमृतकलश धारण करनेवाले वृषभारूढ भगवान् रुद्र विराज रहे हैं। उनके वामाड़र-भागमें उनकी शक्ति पार्वतीदेवी

English

should be read as

अध्याय ६८

श्लोक 41

प्राणायामत्रयं कृत्वा कुर्यादङ्गानि पूर्ववत् ।सुधाबीजं चन्दनेन दक्षे करतले लिखेत्

prāṇāyāmatrayaṃ kṛtvā kuryādaṅgāni pūrvavat / sudhābījaṃ candanena dakṣe karatale likhet

हिन्दी अर्थ

विद्यमान हैं। वे विद्यांके अधिपति हैं। विद्वान् पुरुष उन रुद्रदेवको छ: हजार जप निवेदन करे। विशुद्ध चक्र घोडशदल कमलसे युक्त है। उसके

English

should be read as as If

अध्याय ६८

श्लोक 42

तेनाच्छाद्यार्ध्यपात्रं च जपेन्मनुमनन्यधीः ।अष्टोत्तरशतावृत्त्या पुनः संपूज्य भास्करम्

tenācchādyārdhyapātraṃ ca japenmanumananyadhīḥ / aṣṭottaraśatāvṛttyā punaḥ saṃpūjya bhāskaram

हिन्दी अर्थ

हैं। वह चक्र शुक्ल वर्णका है। उसमें महाज्योतिसे प्रकाशित होनेवाले इन्द्रियाधिपति ईश्वर विराजमान हैं, जो प्राणशक्तिसे युक्त हैं। उन्हें एक सहसत्न जप अर्पण करे। आज्ञाचक्रमें दो दलोंवाला कमल है,

English

should read as Vt.

अध्याय ६८

श्लोक 43

हस्ताभ्यां पात्रमादाय जानुभ्यामवनीं गतः ।आमूर्ध्नि पात्रमुद्धृत्यांबरेण वरणे रवेः

hastābhyāṃ pātramādāya jānubhyāmavanīṃ gataḥ / āmūrdhni pātramuddhṛtyāṃbareṇa varaṇe raveḥ

हिन्दी अर्थ

उसके दलोंमें क्रमश: 'ह' और “क्ष' अद्धित हैं; उसमें पराशक्तिसे युक्त जगदगुरु सदाशिव विराजमान हैं; उन्हें एक सहरस्न जप अर्पण करे। सहस्नार- चक्रमें सहस््र दलोंसे युक्त महाकमल विद्यमान है,

English

? should read as

अध्याय ६८

श्लोक 44

दृष्टिं चाधाय मनसा पूजयित्वा रविं पुनः ।साधकेन स्वकैक्येन मूलमन्त्रं धिया जपन्

dṛṣṭiṃ cādhāya manasā pūjayitvā raviṃ punaḥ / sādhakena svakaikyena mūlamantraṃ dhiyā japan

हिन्दी अर्थ

उसमें नाद-बिन्दुसहित समस्त मातृकावर्ण विराजमान हैं। उसमें स्थित वर और अभययुक्त हाथोंवाले परम आदिगुरुको एक सहस््र जप निवेदन करे। फिर चुल्लूमें जल लेकर इस प्रकार कहे--

English

should read as fT.

अध्याय ६८

श्लोक 45

अर्ध्यं दद्याद्रविं ध्यायव्रक्तचन्दनमण्डले ।दत्त्वा पुष्पाञ्जलिं भूयो जपेदष्टोत्तरं शतम्

ardhyaṃ dadyādraviṃ dhyāyavraktacandanamaṇḍale / dattvā puṣpāñjaliṃ bhūyo japedaṣṭottaraṃ śatam

हिन्दी अर्थ

'स्वभावतः होते रहनेवाले इक्कीस हजार छ: सौ अजपा जपका पूर्वोक्तरूपसे विभागपूर्वक संकल्प करनेके कारण मोक्षदाता भगवान् विष्णु मुझपर प्रसन्न हों।! इस अजपा गायत्रीके संकल्पमात्रसे

English

The reading Is unintelligible. It may have to

अध्याय ६८

श्लोक 46

नित्यं वा तद्विने ऽप्येवमर्ध्यं दद्याद्विवस्वते ।तेन तुष्टो दिनेशो ऽस्मै दद्याद्वित्तं यशः सुखम्

nityaṃ vā tadvine 'pyevamardhyaṃ dadyādvivasvate / tena tuṣṭo dineśo 'smai dadyādvittaṃ yaśaḥ sukham

हिन्दी अर्थ

मनुष्य बड़े-बड़े पापोंसे मुक्त हो जाता है। “मैं ब्रह्म ही हूँ, संसारी जीव नहीं हूँ। नित्यमुक्त हूँ, शोक मेरा स्पर्श नहीं कर सकता। मैं सच्चिदानन्द- स्वरूप हूँ।” इस प्रकार अपने-आपके विषयमें

English

"f!TWir*' is to be read as must be

अध्याय ६८

श्लोक 47

पुत्रान्पौत्रानभीष्टं च यद्यत्सर्वं प्रयच्छति ।अर्ध्यदानमिदं प्रोक्तमायुरारोग्यवर्द्धनम्

putrānpautrānabhīṣṭaṃ ca yadyatsarvaṃ prayacchati / ardhyadānamidaṃ proktamāyurārogyavarddhanam

हिन्दी अर्थ

चिन्तन करे। तदनन्तर हैहिक कृत्य और देवार्चन करे। उसका विधान और सदाचारका लक्षण मैं

English

VWntRT: should be read as nrf:.

अध्याय ६८

श्लोक 48

धनधान्यपशुक्षेमक्षेत्रमित्रकलत्रदम् ।तेजोवीर्ययशःकीर्तिविद्याविभवभोगदम्

dhanadhānyapaśukṣemakṣetramitrakalatradam / tejovīryayaśaḥkīrtividyāvibhavabhogadam

हिन्दी अर्थ

शौचाचार, स््रान, संध्या-तर्पण, पूजागृहमें देवताओंका पूजन, केशव-कीर्यांदि मातृकान्यास, श्रीकण्ठमातृका, गणेशमातृका, कलामातृका आदि न्यासोंका वर्णन कहते हैं--तदनन्तर बायीं या और इस प्रकार प्रार्थना करे--

English

arer should read as JTreRRn ITT; awffl as;

अध्याय ६८

श्लोक 49

गायत्र्याराधनासक्तः संध्यावन्दनतत्परः ।एवं मनुं जपन्विप्रो दुःखं नैवाप्नुयात्क्वचित्

gāyatryārādhanāsaktaḥ saṃdhyāvandanatatparaḥ / evaṃ manuṃ japanvipro duḥkhaṃ naivāpnuyātkvacit

हिन्दी अर्थ

दाहिनी जिस ओरकी साँस चलती हो, उसी समुद्रमेखले देवि पर्वतस्तनमण्डले। ओरका बायाँ अथवा दाहिना पैर पृथ्वीपर उतारे विष्णुपत्रि नमस्तुभ्यं पादस्पर्श क्षमस्व मे॥६६। १-२

English

is to be read as ftTOlWT.

अध्याय ६८

श्लोक 50

विकर्तनाय निर्माल्यमेवं संपूज्य दापयेत् ।वियद्वह्निमरुत्साद्यान्तार्वीसेंदुसमन्वितम्

vikartanāya nirmālyamevaṃ saṃpūjya dāpayet / viyadvahnimarutsādyāntārvīseṃdusamanvitam

हिन्दी अर्थ

पृथ्वी देवि! समुद्र तुम्हारी मेखला (कटिबन्ध) और पर्वत स्तनमण्डल हैं। विष्णुपत्रि! तुम्हें नमस्कार है, मैंने जो तुम्हें चरणोंसे स्पर्श किया है, मेरे इस अपराधको क्षमा करो।'

English

The second half which reads thus i

अध्याय ६८

श्लोक 51

मार्तण्डभैरवाख्यं हि बीजं त्रैलोक्यमोहनम् ।बिंबबीजेन पुटितं सर्वकामफलप्रदम्

mārtaṇḍabhairavākhyaṃ hi bījaṃ trailokyamohanam / biṃbabījena puṭitaṃ sarvakāmaphalapradam

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार भूदेवीसे क्षमा-प्रार्थना करके विधिपूर्वक विचरण करे। तदनन्तर गाँवसे नैर््रत्य कोणमें जाकर इस मन्त्रका उच्चारण करे-- गच्छन्तु ऋषयो देवा: पिशाचा ये च गुहाका: ।

English

In verse 346 'wHWTT' may be MHahqqr The reading

अध्याय ६८

श्लोक 52

पूर्ववत्सकलं चान्यदत्र ज्ञेयं मनीषिभिः ।भृगुर्जलेन्दुमन्वाढ्यः सोमाय हृदयान्तिमः

pūrvavatsakalaṃ cānyadatra jñeyaṃ manīṣibhiḥ / bhṛgurjalendumanvāḍhyaḥ somāya hṛdayāntimaḥ

हिन्दी अर्थ

पितृभूतगणा: सर्वे करिष्ये मलमोचनम्॥ ३-४

English

WWq 8iHfll should read as 4imv'lfdfll. In the folbwing verses, from 349 to 365, the characteristics of the 36 decanates are described.

अध्याय ६८

श्लोक 53

षडक्षरो मन्त्रराजो मुनिरस्य भृगुर्मतः ।छन्दः पङ्क्तिस्तु सोमो ऽस्य देवता परिकीर्तिता

ṣaḍakṣaro mantrarājo munirasya bhṛgurmataḥ / chandaḥ paṅktistu somo 'sya devatā parikīrtitā

हिन्दी अर्थ

'यहाँ जो ऋषि, देवता, पिशाच, गुह्मक, पितर तथा भूतगण हों, वे चले जाये, मैं यहाँ मल-त्याग करूँगा।'

English

may be or ifiwqTT which would

अध्याय ६८

श्लोक 54

आद्यं बीजं नमः शक्तिर्विनियोगो ऽखिलाप्तये ।षड्दीर्घेण स्वबीजेन षडङ्गानि समाचरेत्

ādyaṃ bījaṃ namaḥ śaktirviniyogo 'khilāptaye / ṣaḍdīrgheṇa svabījena ṣaḍaṅgāni samācaret

हिन्दी अर्थ

ऐसा कहकर तीन बार ताली बजावे और सिरको वस्त्रसे आच्छादित करके मल-त्याग करे। रात हो तो दक्षिणनी ओर मुँह करके बैठे और दिनमें उत्तरकी ओर मुँह करके मलत्याग करे।

English

ould be read as and <.qqi8 as HTTO:.

अध्याय ६८

श्लोक 55

पूर्णेद्वास्यं स्फटिकभं नीलालकलसन्मुखम् ।विभ्राणमिष्टं कुमुदं ध्यायेन्मुक्तास्रजं विधुम्

pūrṇedvāsyaṃ sphaṭikabhaṃ nīlālakalasanmukham / vibhrāṇamiṣṭaṃ kumudaṃ dhyāyenmuktāsrajaṃ vidhum

हिन्दी अर्थ

तत्पश्चात् मिट्टी और जलसे शुद्धि करे। लिडमें एक बार, गुदामें तीन बार, बायें हाथमें दस बार, फिर दोनों हाथोंमें सात बार तथा पैरोंमें तीन बार मिट्टी लगावे। इस प्रकार शौच-सम्पादन करके

English

ITTrTf: may be read as HTTTfiRT: or HWf; 31Rf as and wmft as

अध्याय ६८

श्लोक 56

ऋतुलक्षं जपेन्मन्त्रं पायसेन ससर्पिषा ।जुहुयात्तद्दशांशेन पीठे सोमान्तपूजिते

ṛtulakṣaṃ japenmantraṃ pāyasena sasarpiṣā / juhuyāttaddaśāṃśena pīṭhe somāntapūjite

हिन्दी अर्थ

बारह बार जलसे कुल्ला करे। उसके बाद दाँतुनके लिये निम्नाड्डित मन्त्रसे वनस्पतिकी प्रार्थना करे--

English

iqr may be qpfA or as it is; as fqgqrvff

अध्याय ६८

श्लोक 57

मूर्तिमूलेन संकल्प्य पूजयेद्विधिवद्विधुम् ।केसरेष्वङ्गपूजा स्यात्पत्रेष्वेताश्च शक्तयः

mūrtimūlena saṃkalpya pūjayedvidhivadvidhum / kesareṣvaṅgapūjā syātpatreṣvetāśca śaktayaḥ

हिन्दी अर्थ

“वनस्पते! तुम हमें आयु, बल, यश, तेज,

English

ftr# should read as as Wi; as?nt-

अध्याय ६८

श्लोक 58

रोहिणी कृत्तिका चैव रेवती भरणी पुरः ।रात्रिरार्द्रा ततो ज्येत्स्ना कला हारसमप्रभा

rohiṇī kṛttikā caiva revatī bharaṇī puraḥ / rātrirārdrā tato jyetsnā kalā hārasamaprabhā

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार प्रार्थना करके मन्त्रका साधक बारह अंगुलकी दाँतुन लेकर एकाग्रचित्त हो उससे दाँत और मुखकी शुद्धि करे। तत्पश्चात् नदी आदियें नहानेके लिये जाय, उस समय देवताके गुणोंका

English

fWW: may be9T. VrHT: or

अध्याय ६८

श्लोक 59

सुशुक्लमाल्यवसनामुक्ताहारविभूषिताः ।सर्वाःस्तनभराक्रान्ता रचिताञ्जलयः शुभाः

suśuklamālyavasanāmuktāhāravibhūṣitāḥ / sarvāḥstanabharākrāntā racitāñjalayaḥ śubhāḥ

हिन्दी अर्थ

कीर्तन करता रहे। जलाशयमें जाकर उसको नमस्कार करके खस्रानोपयोगी वस्तु वस्त्र आदिको तटपर रखकर मूल (इष्ट) मन्त्रसे अभिमन्त्रित मिट्टी

English

«URWI may br or (wUh burnt cloihrs) or

अध्याय ६८

श्लोक 60

स्वप्रियासक्तमनसो मदविभ्रममन्थराः ।समभ्यर्च्याः सरोजाक्ष्यः पूर्णेन्दुसदृशाननाः

svapriyāsaktamanaso madavibhramamantharāḥ / samabhyarcyāḥ sarojākṣyaḥ pūrṇendusadṛśānanāḥ

हिन्दी अर्थ

लेकर उसे कटिसे पैरतकके अज्ज्ोंमें लगावे और फिर जलाशयके जलसे उसे धो डाले। तदनन्तर पाँच बार जलसे पैरोंको धोकर जलके भीतर प्रवेश करे और नाभितकके जलमें पहुँचकर खड़ा

English

rtlw may be CTIfl*{; tdlVTt fiwt WT: should be read as i??TT*

अध्याय ६८

श्लोक 61

दलाग्रेषु समभ्यर्च्यास्त्वष्टौ सूर्यादिका ग्रहाः ।आदित्यभूसुतबुधमन्ददेवेज्यराहवः

dalāgreṣu samabhyarcyāstvaṣṭau sūryādikā grahāḥ / ādityabhūsutabudhamandadevejyarāhavaḥ

हिन्दी अर्थ

हो जाय। उसके बाद जलाशयकी मिट्टी लेकर बायें हाथकी कलाई, हथेली और उसके अग्रभागमें लगावे और अंगुलीसे जलाशयकी मिट्टी लेकर

English

Significance of snnspots. Spots on the Sun of the shapes of a rod, corpse, crow and pillar, respectively, portend, (to the king), disease, turbulance, (trouble from) thieves and loss of wealth.

अध्याय ६८

श्लोक 62

शुक्रकेतुयुता ह्येते पूज्याः पत्रग्रगाग्रहाः ।रक्तारुणश्वेतनीलपीतधूम्रसितासिताः

śukraketuyutā hyete pūjyāḥ patragragāgrahāḥ / raktāruṇaśvetanīlapītadhūmrasitāsitāḥ

हिन्दी अर्थ

अपने ऊपर घुमाकर छोड़ दे। फिर हथेलीकी मिट्टीको छः अड्जोंमें उनके मन्त्रोंद्वारा लगावे। तदनन्तर डुबकी लगाकर भलीभाँति उन अड्रोंको धो डाले। यह जल-स््नान बताया गया है। इसके

English

(Sun-spots of the shape of) the umbrella, chaurie, banner, rain-cloud, smoke and sparks, portend the destruction of the land.

अध्याय ६८

श्लोक 63

वामोरुन्यस्ततद्धस्ता दक्षिणेन धृताभयाः ।सोकपालांस्तदस्त्राणि तद्वाह्ये पूजयेत्सुधीः

vāmorunyastataddhastā dakṣiṇena dhṛtābhayāḥ / sokapālāṃstadastrāṇi tadvāhye pūjayetsudhīḥ

हिन्दी अर्थ

बाद सम्पूर्ण जगत्को अपने इष्टदेवका स्वरूप मानकर आन्तरिक स्नान करे। अनन्त सूर्यके समान तेजस्वी तथा अपने आभूषण और आयुधधोंसे सम्पन्न

English

Osage: If these spots arc, respectively, white, red, yellow or black in colour they will afflict the four castes Brak mins, Katriyas, Vaityas and Sodras. If they appear in two or three of these colours, they will afflict the royalty.

अध्याय ६८

श्लोक 64

एव संसाधितो मन्त्रः प्रयच्छेदिष्टमात्मनः ।पौर्णमास्यां जिताहारो दद्यादर्ध्यं विधूदये

eva saṃsādhito mantraḥ prayacchediṣṭamātmanaḥ / paurṇamāsyāṃ jitāhāro dadyādardhyaṃ vidhūdaye

हिन्दी अर्थ

करे कि उनके चरणोदकसे प्रकट हुई दिव्य धारा ब्रह्मरन्ध्रसे मेरे शरीरमें प्रवेश कर रही है। फिर . उस धारासे शरीरके भीतरका सारा मल भावनाद्वारा ही धो डाले। ऐसा करनेसे मन्त्रका साधक तत्काल

English

Significance (f the Sun's beams. If the (upward) beams emanating from the top of the Sun*s dbc are reddish, the com¬ mander of the army will die, if the beams be yellow, the prince, if white, the chief priest, and if variegated the people.

अध्याय ६८

श्लोक 65

मण्डलत्रितर्यं कुर्यात्प्राक्प्रत्यगायतं भुवि ।पश्चिमे मण्डले स्थित्वा पूजाद्रव्यं च मध्यमे

maṇḍalatritaryaṃ kuryātprākpratyagāyataṃ bhuvi / paścime maṇḍale sthitvā pūjādravyaṃ ca madhyame

हिन्दी अर्थ

रजोगुणसे रहित हो स्वच्छ स्फटिकके समान शुद्ध हो जाता है। तत्पश्चात् मन्त्रसाधक शास्त्रोक्तविधिसे स्नान करके एकाग्रचित्त हो मन्त्र-स्नान करे। उसका विधान बताया जाता है। पहले देश-कालका नाम

English

He should make three circles on the ground, extending east-west. Standing in the western circle, with the worship materials in the middle,

अध्याय ६८

श्लोक 66

संस्थाप्य सोममन्यस्मिन्मण्डले ऽब्जसमन्विते ।समभ्यर्च्यं विधानेन पीठपूजनपूर्वकम्

saṃsthāpya somamanyasminmaṇḍale 'bjasamanvite / samabhyarcyaṃ vidhānena pīṭhapūjanapūrvakam

हिन्दी अर्थ

लेकर संकल्प करे, फिर प्राणायाम और षडद्गभ- न्यास करके दोनों हाथोंसे मुष्टिकी मुद्रा बनाकर सूर्यमण्डलसे आते हुए तीर्थोका आवाहन करे-- ब्रह्माण्डोदरतीर्थानि करै: स्पृष्टानि ते रवे।

English

and placing the Moon in another circle with a lotus, he should worship it properly by rule, preceded by worship of the seat.

अध्याय ६८

श्लोक 67

स्थापयेद्राजतं पात्रं पुरतस्तत्र मन्त्रवित् ।सुरभीपयसापूर्य्य तं स्पृशन्प्रजपेन्मनुम्

sthāpayedrājataṃ pātraṃ puratastatra mantravit / surabhīpayasāpūryya taṃ spṛśanprajapenmanum

हिन्दी अर्थ

तेन सत्येन मे देव देहि तीर्थ दिवाकर॥

English

The mantra-knower should place a silver vessel in front, fill it with cow's milk, and touching it chant the mantra

अध्याय ६८

श्लोक 68

अष्टोत्तरशतं पश्चाद्विद्या मन्त्रेण मन्त्रवित् ।दद्यान्निशाकरायार्ध्यं सर्वाभीष्टार्थसिद्धये

aṣṭottaraśataṃ paścādvidyā mantreṇa mantravit / dadyānniśākarāyārdhyaṃ sarvābhīṣṭārthasiddhaye

हिन्दी अर्थ

नर्मदे सिन्धुकावेरि जलेउस्मिन् संनिधिं कुरु॥

English

a hundred and eight times; then with the vidya-mantra he should offer arghya to the Moon, for success of all desired aims.

अध्याय ६८

श्लोक 69

कुर्यादनेन विधिना प्रतिमासमतन्द्रितः ।वषान्तरेण सवष्टं प्राप्नोति भुविमानवः

kuryādanena vidhinā pratimāsamatandritaḥ / vaṣāntareṇa savaṣṭaṃ prāpnoti bhuvimānavaḥ

हिन्दी अर्थ

'सूर्यदेव! ब्रह्माण्डके भीतर जितने तीर्थ हैं, उन सबका आपकी किरणें स्पर्श करती हैं। दिवाकर !

English

Doing this by this rule each month, unwearied, a man on earth obtains his desire within a year.

अध्याय ६८

श्लोक 70

विद्ये विद्यामालिनि स्यादन्त चन्द्रिणि कतवदेत् ।चन्द्रमुखि द्विठान्तो ऽयं विद्यामन्त्र उदाहृतः

vidye vidyāmālini syādanta candriṇi katavadet / candramukhi dviṭhānto 'yaṃ vidyāmantra udāhṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

अपने इष्टदेवके अभीष्ट मन्त्रको ही यहाँ मूलमन्त्र कहा है।

English

"O Vidya, Vidya-malini, ... Chandrini, ... Chandramukhi" — this is declared the Vidya mantra.

अध्याय ६८

श्लोक 71

एवं कुमुदिनीनाथमन्त्रं यो जपति ध्रुवम् ।धनं धान्यं सुतान्पौत्रान्सौभाग्यं लभते ऽचिरात्

evaṃ kumudinīnāthamantraṃ yo japati dhruvam / dhanaṃ dhānyaṃ sutānpautrānsaubhāgyaṃ labhate 'cirāt

हिन्दी अर्थ

इस सत्यके अनुसार मेरे लिये यहीं सब तीर्थ प्रदान कीजिये। गड़े, यमुने, गोदावरि, सरस्वति, नर्मदे, सिन्धु, कावेरि! आप इस जलमें निवास करें।' इस प्रकार जलमें सब तीर्थोका आवाहन करके

English

One who chants thus the mantra of the lord of the night-lotus (Moon) with constancy soon obtains wealth, grain, sons, grandsons and good fortune.

अध्याय ६८

श्लोक 72

अथाङ्गारकमन्त्रं तु वक्ष्ये धनसुतप्रदम् ।तारो दीर्घेन्दुयुग्व्योम तदेवेन्दुयुतः पुनः

athāṅgārakamantraṃ tu vakṣye dhanasutapradam / tāro dīrghenduyugvyoma tadevenduyutaḥ punaḥ

हिन्दी अर्थ

उन्हें सुधाबीज (वं)-से युक्त करे। फिर गोमुद्रासे उनका अमृतीकरण करके उन्हें कवचसे अवगुण्ठित करे। फिर अस्त्रमुद्राद्वारा संरक्षण करके चक्रमुद्राका प्रदर्शन करे। तत्पश्चात् उस जलमें विद्वान् पुरुष

English

Now I shall tell the Angaraka (Mars) mantra, granting wealth and sons: Om, with long vowel, "indu", "yuga", "vyoma", again with "indu"...

अध्याय ६८

श्लोक 73

षान्तः सर्गी च चण्डीशौ क्रमार्दिदुविसर्गिणै ।षडर्णो ऽयं महामन्त्रो मङ्गलस्याखिलेष्टदः

ṣāntaḥ sargī ca caṇḍīśau kramārdiduvisargiṇai / ṣaḍarṇo 'yaṃ mahāmantro maṅgalasyākhileṣṭadaḥ

हिन्दी अर्थ

अग्नि, सूर्य और चन्द्रमाके मण्डलोंका चिन्तन करे। फिर सूर्यमन्त्र और अमृतबीजके द्वारा उस जलको अभिमन्त्रित करे। तदनन्तर मूल-मन्त्रसे ग्यारह बार अभिमन्त्रित करके उसके मध्यभागमें

English

(coded syllables) — a six-syllable great mantra, giving Mars's grant of all desires.

अध्याय ६८

श्लोक 74

विरूपाक्षो मुनिश्छन्दोगायत्रं देवता कुजः ।मन्त्रार्णैः षड्भिरङ्गानि क्रुर्वन्ध्यायेद्धरात्मजम्

virūpākṣo muniśchandogāyatraṃ devatā kujaḥ / mantrārṇaiḥ ṣaḍbhiraṅgāni krurvandhyāyeddharātmajam

हिन्दी अर्थ

पूजा-यन्त्रकी भावना करे और हृदयसे देवताका आवाहन करके स्नान कराकर मानसिक उपचारसे उनकी पूजा करे। इष्टदेव सिंहासनपर विराजमान हैं, इस भावनासे उन्हें नमस्कार करके विद्वान्

English

Its sage is Virupaksha, metre Gayatri, deity Kuja (Mars). With the six mantra-syllables he should make the limbs and meditate on the son of the Earth.

अध्याय ६८

श्लोक 75

मेषस्थं रक्तवस्राङ्गं शूलशक्तिगदावरान् ।करैर्बिभ्राणमीशानस्वेदजं भूंसुतं स्मरेत्

meṣasthaṃ raktavasrāṅgaṃ śūlaśaktigadāvarān / karairbibhrāṇamīśānasvedajaṃ bhūṃsutaṃ smaret

हिन्दी अर्थ

तद्गरूपाएच ततो जाता आपस्ता: प्रणमाम्यहम्॥

English

He should remember the earth's son, born of Ishana's sweat, riding a ram, red-clothed and red-limbed, holding trident, spear, mace and boon in his hands.

अध्याय ६८

श्लोक 76

रसलक्षं जपेन्मन्त्रं दशांशं खदिरोद्भवैः ।समिद्भिर्जुहुयादग्नौ शैवे पीठे यजेत्कुजम्

rasalakṣaṃ japenmantraṃ daśāṃśaṃ khadirodbhavaiḥ / samidbhirjuhuyādagnau śaive pīṭhe yajetkujam

हिन्दी अर्थ

“जल सम्पूर्ण भूतोंका और अतुल तेजस्वी भगवान् विष्णुका आधार है। अत: वह विष्णुस्वरूप है; इसलिये मैं उसे प्रणाम करता हूँ।' इस प्रकार नमस्कार करके साधक अपने

English

He should chant the mantra a hundred thousand times, offer a tenth part with khadira fuel-sticks in the fire, and worship Kuja on the Shaiva seat.

अध्याय ६८

श्लोक 77

प्रागङ्गानि समाराध्य ह्येकविंशतिकोष्टकम् ।मङ्गलोभूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः

prāgaṅgāni samārādhya hyekaviṃśatikoṣṭakam / maṅgalobhūmiputraśca ṛṇahartā dhanapradaḥ

हिन्दी अर्थ

शरीरके सात छिद्रोंको बंद करके जलमें डुबकी लगावे और उसमें मूलमन्त्रका इष्टदेवके स्वरूपमें ध्यान करे। तीन बार डुबकी लगावे और ऊपर आवे। तत्पश्चात् दोनों हाथोंको घड़ेकी मुद्रामें

English

Having first worshipped the limbs in a twenty-one-cell diagram: Mangala, Bhumiputra, Rinahartri (debt-remover), Dhanaprada (wealth-giver),

अध्याय ६८

श्लोक 78

स्थिरासनो महाकायः सर्वकर्मावरोधकः ।लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां कृपाकरः

sthirāsano mahākāyaḥ sarvakarmāvarodhakaḥ / lohito lohitākṣaśca sāmagānāṃ kṛpākaraḥ

हिन्दी अर्थ

रखकर उसके द्वारा सिरको सींचे। फिर श्रीशालग्रामशिलाका जल ( भगवच्चरणामृत) पान करे। कभी इसके विरुद्ध आचरण न करे। यह शास्त्रका नियत विधान है। तदनन्तर मन्त्रका

English

Sthirasana, Mahakaya, Sarvakarmavarodhaka, Lohita, Lohitaksha, Samaganam Kripakara,

अध्याय ६८

श्लोक 79

धरात्मजः कुजो भौमो भूमिदो भूमिनन्दनः ।अङ्गारको महीसूनुः सर्वरोगापहारकः

dharātmajaḥ kujo bhaumo bhūmido bhūminandanaḥ / aṅgārako mahīsūnuḥ sarvarogāpahārakaḥ

हिन्दी अर्थ

साधक अपने इष्टदेवका सूर्यमण्डलमें विसर्जन करके तटपर आवे और यत्रपूर्वक वस्त्र धोकर दो शुद्ध वस्त्र (धोती और अँगोछा) धारण करके विद्वान्

English

Dharatmaja, Kuja, Bhauma, Bhumida, Bhuminandana, Angaraka, Mahisuna, Sarvarogapaharaka,

अध्याय ६८

श्लोक 80

वृष्टिकर्ता वृष्टिहर्ता सर्वकार्यार्थसिद्धिदः ।इत्येक र्विशतिः प्रोक्ता मूर्तयो भूसुतस्य वै

vṛṣṭikartā vṛṣṭihartā sarvakāryārthasiddhidaḥ / ityeka rviśatiḥ proktā mūrtayo bhūsutasya vai

हिन्दी अर्थ

पुरुष संध्या आदि करे। रोगादिके कारण स््रानादिमें असमर्थ हो, वह वहाँ जलसे स्नान न करके अधघमर्षण करे अथवा अशक्त मनुष्य भस्म या धूलसे स््रान करे। तदनन्तर शुभ आसनपर बैठकर संध्यादि

English

Vrishtikartri, Vrishtihartri, Sarvakaryarthasiddhida — thus twenty-one forms of the Earth's son are declared.

अध्याय ६८

श्लोक 81

मङ्गलादीन्यजेन्मन्त्री स्वस्वस्थानस्थितान्क्रमात् ।इन्द्राद्यानपि वज्रादीनेवं सिद्धो भवेन्मनुः

maṅgalādīnyajenmantrī svasvasthānasthitānkramāt / indrādyānapi vajrādīnevaṃ siddho bhavenmanuḥ

हिन्दी अर्थ

कर्म करे। ' ३» केशवाय नम: ', ' ३७ नारायणाय नमः ', ' 3» माधवाय नमः ' इन मन्त्रोंसे तीन बार जलका आचमन करके '“3३» गोविन्दाय नमः ', ' 5७ विष्णवे नम: '--इन मन्त्रोंका उच्चारण करके

English

The mantra-knower should worship Mangala and the rest, placed in their own positions in order, and also Indra and the rest and Vajra and the rest; thus the mantra is perfected.

अध्याय ६८

श्लोक 82

सुतकामा कुरङ्गाक्षी भौमव्रतमुपाचरेत् ।मार्गशीर्षे ऽथ वैशाखे व्रतारंभः प्रशस्यते

sutakāmā kuraṅgākṣī bhaumavratamupācaret / mārgaśīrṣe 'tha vaiśākhe vratāraṃbhaḥ praśasyate

हिन्दी अर्थ

“३७ त्रिविक्रमाय नमः ' से दोनों ओषछ्ठटोंका मार्जन करे। तत्पश्चात् ' ३७ बामनाय नमः ', ' ३» श्रीधराय नमः ' से मुख और दोनों हाथोंका स्पर्श करे। ' ३» हषीकेशाय नमः ', ' ३७ पद्नाभाय नमः ' से दोनों

English

A doe-eyed woman wishing for a son should keep the Mars vow. The vow's start is praised in Margashirsha or Vaishakha.

अध्याय ६८

श्लोक 83

अरुणोदयवेलायामुत्थायावश्यकं पुनः ।विनिर्वर्त्य रदान्धावेदपामार्गेण वाग्यता

aruṇodayavelāyāmutthāyāvaśyakaṃ punaḥ / vinirvartya radāndhāvedapāmārgeṇa vāgyatā

हिन्दी अर्थ

चरणोंका स्पर्श करे। '३» दामोदराय नमः ' से मूर्धा (मस्तक) का, '३» संकर्षणाय नमः ' से मुखका, ' ३७ वासुदेवाय नमः ', ' 3७ प्रद्मुस्नाय नम: ' से क्रमश: दायीं-बायीं नासिकाका स्पर्श करे।

English

Rising at the time of dawn, finishing the necessary duties, cleaning her teeth with apamarga, silent,

अध्याय ६८

श्लोक 84

स्नात्वा रक्तांबरधरा रक्तमाल्यविलेपना ।नैवेद्यादींश्च संभारान्रक्तान्सर्वान्प्रकल्पयेत्

snātvā raktāṃbaradharā raktamālyavilepanā / naivedyādīṃśca saṃbhārānraktānsarvānprakalpayet

हिन्दी अर्थ

से पूर्ववत् दोनों नेत्रोंका तथा '३» अधोक्षजाय नमः ', ' ३० नुसिंहाय नमः ' से दोनों कानोंका स्पर्श करे।' ३» अच्युताय नमः 'से नाभिका, ' ३» जनार्दनाय नमः ' से वक्ष:स्थलका तथा ' 3७ हरये नमः ', ' 3»

English

bathed, wearing red clothes, red garlands and ointments, she should prepare all offerings and materials red.

अध्याय ६८

श्लोक 85

योग्यं विप्रं समाहूय कुजमर्चेत्तदाज्ञया ।रक्तगोगोमयालिप्तभूमौ रक्तासने विशेत्

yogyaṃ vipraṃ samāhūya kujamarcettadājñayā / raktagogomayāliptabhūmau raktāsane viśet

हिन्दी अर्थ

विष्णवे नम: ' से दोनों कंधोंका स्पर्श करे। यह वैष्णव आचमनकी विधि है। आदिमें प्रणव और अन्तमें चतुर्थीका एकवचन तथा नम: पद जोड़कर पूर्वोक्त केशव आदि नामोंद्वारा मुख आदिका स्पर्श

English

Having invited a fit Brahmin, she should worship Mars at his command, sitting on a red seat on ground plastered with red cow-dung.

अध्याय ६८

श्लोक 86

आचम्य देशकालौ च स्मृत्वा काम्य समुच्चरन् ।मङ्गलादीनि नामानि स्वकीयाङ्गेषु विन्यसेत्

ācamya deśakālau ca smṛtvā kāmya samuccaran / maṅgalādīni nāmāni svakīyāṅgeṣu vinyaset

हिन्दी अर्थ

करना चाहिए। मुख और नासिकाका स्पर्श तर्जनी अंगुलिसे करे। नेत्रों तथा कानोंका स्पर्श अनामिकाद्वारा करे तथा नाभिदेशका स्पर्श कनिष्ठा अंगुलिसे करे। अज्जुष्ठका स्पर्श सभी अज्जोंमें करना चाहिए।'स्वाहा'

English

Having sipped water, remembered place and time, and pronounced her desire, she should place the names Mangala and the rest on her own limbs:

अध्याय ६८

श्लोक 87

मुखे प्रविन्यसेत्साध्वी सामगानां कृपाकरम् ।धरात्मजं नसोरक्ष्णोः कुजं भौमं ललाटके

mukhe pravinyasetsādhvī sāmagānāṃ kṛpākaram / dharātmajaṃ nasorakṣṇoḥ kujaṃ bhaumaṃ lalāṭake

हिन्दी अर्थ

पद अन्तमें जोड़कर चतुर्थ्यन्त आत्मतत्त्व, विद्यातत्त्व और शिवतत्त्वका उच्चारण करके जो आचमन किया जाता है, उसे शैव आचमन कहा गया है। आदियमें क्रमश: दीर्घत्रय, अनुस्वार और ह अर्थात्-

English

on the face the benefactor of Sama-singers; on the nose and eyes Dharatmaja; Kuja (Bhauma) on the forehead;

अध्याय ६८

श्लोक 88

भूमिदं तु भ्रुवोर्मध्ये मस्तके भूमिनन्दनम् ।अङ्गारकं शिखायां च सर्वाङ्गे च महीसुतम्

bhūmidaṃ tu bhruvormadhye mastake bhūminandanam / aṅgārakaṃ śikhāyāṃ ca sarvāṅge ca mahīsutam

हिन्दी अर्थ

हां हीं हूं जोड़कर स्वाहान्त आत्मतत्त्व विद्यातत्त्व

English

Bhumida between the eyebrows; Bhuminandana on the head; Angaraka on the top-knot; Mahisuta on the whole body;

अध्याय ६८

श्लोक 89

बाहुद्वये न्यसेत्पश्चात्सर्वरोगापहारकम् ।मूर्द्धादि वृष्टिकर्तारमापादान्तं न्यसेत्सुधीः

bāhudvaye nyasetpaścātsarvarogāpahārakam / mūrddhādi vṛṣṭikartāramāpādāntaṃ nyasetsudhīḥ

हिन्दी अर्थ

. शिवतत्त्व शब्दोंके उच्चारणपूर्वक किये हुए बीजमन्त्रोंद्वारा' उसे अभिमन्त्रित करके तत्त्वमुद्रापूर्वक आचमनको तो शैव' कहंते हैं और आदिमें क्रमश: हाथसे चूते हुए जलविन्दुओंद्वारा मूलमन्त्रसे अपने 'ऐं, हीं, श्री' इस बीजके साथ स्वाहान्त उक्त मस्तकको सात बार सींचे, फिर शेष जलको नामोंका उच्चारण करके किये हुए आचमनको मन्त्रका साधक बीजाक्षरोंसे अभिमन्त्रित करके

English

the remover of all disease on both arms; the maker of rain from the head to the feet — the wise one should place;

अध्याय ६८

श्लोक 90

विन्यसेद्रृष्टिहर्तारं मूर्द्धान्तं चरणादितः ।न्यसेदन्ते ततो दिक्षु सर्वकार्यार्थसिद्धिदम्

vinyasedrṛṣṭihartāraṃ mūrddhāntaṃ caraṇāditaḥ / nyasedante tato dikṣu sarvakāryārthasiddhidam

हिन्दी अर्थ

शाक्त'' आचमन कहा गया है। ब्रह्मन्! वाग्बीज नासिकाके समीप ले आवे। उस तेजोमय जलको (ऐं), लज्जाबीज (हीं) और श्रीबीज (श्रीं)-का भावनाद्वारा इडा नाडीसे भीतर खींचकर उसके प्रारम्भमें प्रयोग करनेसे वह आचमन अभीष्ट अन्तरके सारे मलोंको धो डाले, फिर कृष्णवर्णमें अर्थको देनेवाला होता है। परिणत हुए उस जलको पिड़ला नाड़ीसे बाहर

English

the remover of rain from the feet to the head; and at the end in the directions the giver of success in all affairs;

अध्याय ६८

श्लोक 91

नाभौ हृदि शिरस्यारं वक्रे भूमिजमेव च ।विन्यस्यैवं निजे देहे ध्यायेत्प्राग्वद्धरात्मजम्

nābhau hṛdi śirasyāraṃ vakre bhūmijameva ca / vinyasyaivaṃ nije dehe dhyāyetprāgvaddharātmajam

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर ललाटमें सुन्दर गदाकी-सी निकाले और अपने आगे वज्रमय प्रस्तरकी आकृतिवाला तिलक लगावे। हृदयमें नन्‍्दक कल्पना करके अस्त्रमन्त्र (फट) का उच्चारण नामक खड़्गकी और दोनों बाँहोंपर क्रमश: करते हुए उस जलको उसीपर दे मारे। वह शड्ख और चक्रकी आकृति बनावे। उत्तम सम्पूर्ण पापोंका नाश करनेवाला अघमर्षण कहा

English

on the navel, heart and head Ara (Mars); on the face the Earth-born. Having so placed in her body, she should meditate on the Earth's son as before.

अध्याय ६८

श्लोक 92

मानसैरुपचारैश्च संपूज्यार्ध्यं निधापयेत् ।एकविंशतिकोष्ठाढ्ये त्रिकोणे ताम्रपत्रगे

mānasairupacāraiśca saṃpūjyārdhyaṃ nidhāpayet / ekaviṃśatikoṣṭhāḍhye trikoṇe tāmrapatrage

हिन्दी अर्थ

बुद्धिवाला वैष्णव पुरुष क्रमश: मस्तक, कर्णमूल, गया है। फिर मन्त्रवेत्ता पुरुष हाथ-पैर धोकर पार्थभाग, पीठ, नाभि तथा ककुदमें भी शार्ड्र पूर्ववत् आचमन करके खड़ा हो ताँबेके पात्रमें नामक धनुष तथा बाणका न्यास करे। इस प्रकार पुष्प-चन्दन आदि डालकर मूलान्त मन्त्रका उच्चारण वैष्णव पुरुष तीर्थजनित मृत्तिका (गोपीचन्दन) करते हुए सूर्यमण्डलमें विराजमान इष्टदेवको

English

With mental offerings, having worshipped, she should place the arghya in a twenty-one-celled triangle on a copper plate.

अध्याय ६८

श्लोक 93

आवाह्याङ्गारकं तत्र रक्तपुष्पादिभिर्यजेत् ।अङ्गानि पूर्वमाराध्य मङ्गलादीन्प्रपूजयेत्

āvāhyāṅgārakaṃ tatra raktapuṣpādibhiryajet / aṅgāni pūrvamārādhya maṅgalādīnprapūjayet

हिन्दी अर्थ

आदिसे तिलक करे। अथवा शैवजन त्र्यम्बकमन्त्रसे अर््ध दे। इस प्रकार तीन बार अर्घध्य देकर अग्रिहोत्रका भस्म लेकर “अग्रिरिति भस्म' इत्यादि रविमण्डलमें स्थित आराध्यदेवका ध्यान करे।

English

Invoking Angaraka there, she should worship with red flowers and the like. Having first worshipped the limbs, she should worship Mangala and the rest.

अध्याय ६८

श्लोक 94

एकविंशतिकोष्ठेषु चक्रमारं च भूमिजम् ।त्रिकोणेषु च सम्पूज्य बहिरष्टौ च मातृकाः

ekaviṃśatikoṣṭheṣu cakramāraṃ ca bhūmijam / trikoṇeṣu ca sampūjya bahiraṣṭau ca mātṛkāḥ

हिन्दी अर्थ

वामदेव और ईशान--इन नामोंद्वारा क्रमश: ललाट, एक सौ आठ या अट्टाईस बार जप करे। जपके कंधे, उदर, भुजा और हृदयमें पाँच जगह त्रिपुण्ड़ू अन्तमें 'गुह्मातिगुह्मगोप्त्री त्वं' इत्यादि मन्त्रसे वह लगावे। शक्तिके उपासकको त्रिकोणकी आकृतिका जप समर्पित करे, तदनन्तर गायत्रीका ध्यान करे। अथवा स्त्रियाँ जैसे बेंदी लगाती हैं, उस तरहका फिर विधिज्ञ पुरुष देवताओं, ऋषियों तथा

English

In the twenty-one cells, the wheel of Mars and the Earth-born; having worshipped in the triangles, outside the eight Mothers,

अध्याय ६८

श्लोक 95

इन्द्रादीनथ वज्रादीन्बाह्ये संपूजयेत्पुनः ।धूपदीपौ समर्प्याथ गोधूमान्नं निवेदयेत्

indrādīnatha vajrādīnbāhye saṃpūjayetpunaḥ / dhūpadīpau samarpyātha godhūmānnaṃ nivedayet

हिन्दी अर्थ

तिलक करना चाहिए। वैदिकी संध्या करनेके अपने पितरोंका तर्पण करके कल्पोक्त पद्धतिसे बाद मन्त्रका साधक विधिवत् आचमन करके अपने इष्टदेवका भी तर्पण करे। तत्पश्चात् गुरुपड्क्तिका तान्त्रिकी संध्या करे। पूर्ववत् जलमें तीर्थोंका तर्पण करके अज्ञों, आयुधों और आवरणोंसहित आवाहन कर ले। तत्पश्चात् कुशासे तीन बार विनतानन्दन गरुड़का 'साड्रं सावरणं सायुध॑ बैनतेयं

English

then Indra and the rest and Vajra and the rest outside. Offering incense and lamps, she should offer wheat food.

अध्याय ६८

श्लोक 96

ताम्रपात्रे शुद्धतोयपूरिते रक्तचन्दनम् ।रक्तपुष्पाक्षतफलान्याक्षिप्यार्ध्यं समर्पयेत् ।मङ्गलाय ततो मन्त्री इदं मन्त्रद्वयं पठेत्

tāmrapātre śuddhatoyapūrite raktacandanam / raktapuṣpākṣataphalānyākṣipyārdhyaṃ samarpayet / maṅgalāya tato mantrī idaṃ mantradvayaṃ paṭhet

हिन्दी अर्थ

पृथ्वीपर जल छिड़के। फिर उसी जलसे सात तर्पयामि' ऐसा कहकर तर्पण करे। इसके बाद बार अपने मस्तकपर अभिषेक करे। फिर प्राणायाम नारद, पर्वत, जिष्णु, निशठ, उद्धव, दारुक, विष्वक्सेन और पषडड्न्यास करके बायें हाथमें जल लेकर तथा शैलेयका वैष्णव पुरुष तर्पण करे। विप्रेन्द्र उसे दाहिने हाथसे ढक ले। और मन्त्रज्ञ पुरुष इस प्रकार तर्पण करके विवस्वान् सूर्यको अर्घ्य

English

In a copper vessel filled with pure water, putting red sandal, red flowers, rice grains and fruits, she should offer the arghya to Mangala; the mantra-knower should then read these two verses:

अध्याय ६८

श्लोक 97

भूमिपुत्र महातेजः स्वेदोद्भवपिनाकिनः ।सुतार्थिनी प्रपन्ना त्वां गृहाणार्ध्यं नमो ऽस्तु ते

bhūmiputra mahātejaḥ svedodbhavapinākinaḥ / sutārthinī prapannā tvāṃ gṛhāṇārdhyaṃ namo 'stu te

हिन्दी अर्थ

आकाश, वायु, अग्रि, जल तथा पृथ्वीके दे पूृजाघरमें आकर हाथ-पैर धोकर आचमन १. हां आत्मतत्त्वाय स्वाहा। हीं विद्यातत्त्वाय स्वाहा। हूं शिवतत्त्वाय स्वाहा। ये शैव आचमन-मन्त्र हैं।

English

"O son of the Earth, of great splendour, born of sweat of the Pinaka-bearer, I, wishing for a son, have come to you for refuge; accept the arghya, homage to you.

अध्याय ६८

श्लोक 98

रक्तप्रवालसंकाश जपाकुसुमसन्निभ ।महीसुत महाभाग गृहाणार्ध्यं नमो ऽस्तु ते

raktapravālasaṃkāśa japākusumasannibha / mahīsuta mahābhāga gṛhāṇārdhyaṃ namo 'stu te

हिन्दी अर्थ

२. ऐं आत्मतत्त्वाय स्वाहा। हीं विद्यातत्त्वाय स्वाहा। श्री शिवतत्त्वाय स्वाहा। ये शाक्त आचमन-मन्त्र हैं। ३. हं यं रं वं॑ लं--ये क्रमश: आकाश आदि तत्त्वोंके बीज हैं।

English

O one like red coral, like the hibiscus flower, O son of the Earth, of great fortune, accept the arghya, homage to you."

अध्याय ६८

श्लोक 99

एकविंशतिपूर्वोक्तैर्ङेनमोन्तैंश्च नामभिः ।ताराद्यैः प्रणमेत्पश्चात्तावत्यश्च प्रदक्षिणाः

ekaviṃśatipūrvoktairṅenamontaiṃśca nāmabhiḥ / tārādyaiḥ praṇametpaścāttāvatyaśca pradakṣiṇāḥ

हिन्दी अर्थ

. । फिर अग्रनिहोत्रमें स्थित गार्हपत्य आदि अग्रियोंकी तृप्तिके लिये हवन करके यलत्रपूर्वक उनकी उपासना करके पूजाके स्थानमें आकर द्वारपूजा प्रारम्भ करे। द्वारकी ऊपरी शाखामें गणेशजीकी, दक्षिण

English

With the twenty-one names stated before, ending in "namah", preceded by Om, she should bow, and circumambulate as many times.

अध्याय ६८

श्लोक 100

धरणीगर्भसंभूतं विद्युत्तेजः समप्रभम् ।कुमारं शक्तिहस्तं च मङ्गलं प्रणमाम्यहम्

dharaṇīgarbhasaṃbhūtaṃ vidyuttejaḥ samaprabham / kumāraṃ śaktihastaṃ ca maṅgalaṃ praṇamāmyaham

हिन्दी अर्थ

भागमें महालक्ष्मीकी, वाम भागमें सरस्वतीकी, दक्षिणमें पुन: विघध्नराज गणेशकी, वाम भागमें क्षेत्रपालकी, दक्षिणमें गड़ाकी, वाम भागमें यमुनाकी, दक्षिणमें धाताकी, वाम भागमें विधाताकी, दक्षिणमें

English

"I bow to Mangala, born from the Earth's womb, bright as lightning, the youth with the spear in hand."

अध्याय ६८

श्लोक 101

ततो रेखात्रयं कुर्यात्खदिराङ्गारकेण च ।मार्जयेद्वामपादेन मन्त्राभ्यां च समाहिता

tato rekhātrayaṃ kuryātkhadirāṅgārakeṇa ca / mārjayedvāmapādena mantrābhyāṃ ca samāhitā

हिन्दी अर्थ

शड्खनिधिकी तथा वामभागमें पद्मनिधिकी पूजा करे। तत्पश्चात् विद्वान पुरुष तत्तत्कल्पोक्त, द्वारपालोंकी पूजा करे। नन्द, सुनन्द, चण्ड, प्रचण्ड, प्रचल, बल, भद्र तथा सुभद्र ये वैष्णव द्वारपाल हैं।

English

Then she should make three lines with khadira charcoal and, attentive, wipe them out with the left foot with these two mantras:

अध्याय ६८

श्लोक 102

दुःखदौर्भाग्यनाशाय पुत्रसंतानहेतवे ।कृतरेखात्रयं वामपादेनैतत्प्रमार्ज्म्यहम्

duḥkhadaurbhāgyanāśāya putrasaṃtānahetave / kṛtarekhātrayaṃ vāmapādenaitatpramārjmyaham

हिन्दी अर्थ

नन्दीवृषभ तथा महाकाल--ये शैव द्वारपाल हैं।

English

"For the destruction of sorrow and misfortune and for the cause of a line of sons, I wipe out with my left foot these three lines I have made.

अध्याय ६८

श्लोक 103

ऋणदुः खविनाशाय मनोभीष्टार्थसिद्धिये ।मार्जयाम्यसिता रेखास्तिस्रो जन्मत्रयोद्भवाः

ṛṇaduḥ khavināśāya manobhīṣṭārthasiddhiye / mārjayāmyasitā rekhāstisro janmatrayodbhavāḥ

हिन्दी अर्थ

मातृका शक्तियाँ हैं, वे स्वयं ही द्वारपालिका हैं। इन सबके नामके आदि-अक्षरमें अनुस्वार लगाकर उसे नामके पहले बोलना चाहिए। नामके चतुर्थी विभक्त्यन्त रूपके बाद नम: लगाना चाहिए।

English

For the destruction of debt and sorrow, for the success of the mind's desired aims, I wipe out the three black lines born of three births."

अध्याय ६८

श्लोक 104

स्तुवीत धरणीपुत्रं पुष्पाञ्जलिकरा ततः ।ध्यायन्ती तत्पदांभोजं पूजासांगत्वसिद्धये

stuvīta dharaṇīputraṃ puṣpāñjalikarā tataḥ / dhyāyantī tatpadāṃbhojaṃ pūjāsāṃgatvasiddhaye

हिन्दी अर्थ

यथा--'नं नन्दाय नमः ' इत्यादि। इन्हीं नाममन्त्रोंसे इन सबकी पूजा करनी चाहिए। वैष्णव-मातृका-न्यास इसके बाद बुद्धिमान् पुरुष पवित्र हो मन

English

Then, with a handful of flowers, she should praise the Earth's son, meditating on his lotus feet for the completeness of the worship:

अध्याय ६८

श्लोक 105

ऋणहर्त्रे नमस्तुभ्यं दुःखदारिद्रयनाशिने ।सौभाग्यसुखदो नित्यं भव मे धरणीसुत

ṛṇahartre namastubhyaṃ duḥkhadāridrayanāśine / saubhāgyasukhado nityaṃ bhava me dharaṇīsuta

हिन्दी अर्थ

और इन्द्रियोंक संयमपूर्वक आसनपर बैठकर आचमन करे और यत्रपूर्वक स्वर्ग, अन्तरिक्ष तथा पृथ्वीके विप्लोंका निवारण करनेके अनन्तर श्रेष्ठ वैष्णव पुरुष केशव-कीत्यादि मातृका-न्यास करे।

English

"Homage to you, remover of debt, destroyer of sorrow and poverty; O son of the Earth, be always the giver of good fortune and happiness to me.

अध्याय ६८

श्लोक 106

तप्तकाञ्चनसंकाश तरुणार्कसमप्रभ ।सुखसौभाग्यधनद ऋणदारिद्षनाशक

taptakāñcanasaṃkāśa taruṇārkasamaprabha / sukhasaubhāgyadhanada ṛṇadāridṣanāśaka

हिन्दी अर्थ

कीर्तिसहित केशव, कान्तिसहित नारायण, तुष्टिके साथ माधव, पृष्टिके साथ गोविन्द, धृतिके साथ विष्णु, शान्तिके साथ मधुसूदन, क्रियाके साथ त्रिविक्रम, दयाके साथ वामन, मेधाके साथ श्रीधर, नाम बोलकर अन्तमें “नमः” पद जोड़कर बोले।

English

Bright as heated gold, with a splendour like the young sun, giver of happiness, good fortune and wealth, destroyer of debt and poverty,

अध्याय ६८

श्लोक 107

ग्रहराज नमस्ते ऽस्तु सर्वकल्याणकारक ।प्रसादं कुरु देवेश सर्वकल्याणभाजन

graharāja namaste 'stu sarvakalyāṇakāraka / prasādaṃ kuru deveśa sarvakalyāṇabhājana

हिन्दी अर्थ

हर्षाके साथ हषीकेश, पद्मनाभके साथ श्रद्धा । एक अक्षर 'अ' का ललाटमें, फिर एक उदाहरणके लिये एक वाक्ययोजना दी जाती है--'३» हों श्रीं क्लीं अं क्लीं श्रीं हीं केशवकीर्तिभ्यां नम: (ललाटे) ' ऐसा कहकर ललाटका स्पर्श करे। इसी प्रकार '3» हीं श्रीं क्‍्लीं आं क्लीं श्रीं हीं नारायणकान्तिभ्यां नम: (मुखे)' ऐसा कहकर मुखका स्पर्श करे। ललाट, मुख आदि जिन-जिन अश्जोंमें मातृका वर्णोंका न्यास करना है,

English

king of planets, homage to you, maker of all auspiciousness; show favour, lord of gods, vessel of all welfare.

अध्याय ६८

श्लोक 108

देवदानवगन्धर्वयक्षराक्षसपन्नगाः ।आप्नुवन्ति शिवं सर्वे सदा पूर्णमनोरथाः

devadānavagandharvayakṣarākṣasapannagāḥ / āpnuvanti śivaṃ sarve sadā pūrṇamanorathāḥ

हिन्दी अर्थ

दामोदरके साथ लज्जा, लक्ष्मीसहित वासुदेव, सरस्वतीसहित संकर्षण, प्रीतिके साथ प्रद्युम्न, रतिके साथ अनिरुद्ध, जयाके साथ चक्री, दुगकि साथ गदी, प्रभाके साथ शार्ड्री, सत्याके साथ खड़ी,

English

Gods, demons, Gandharvas, Yakshas, demons and serpents all obtain welfare with desires always fulfilled;

अध्याय ६८

श्लोक 109

आचिरादेव लोके ऽस्मिन्यस्याराधनतो जनाः ।प्राप्नुवन्ति सुखं तस्मै नमो धरणिसूनवे

ācirādeva loke 'sminyasyārādhanato janāḥ / prāpnuvanti sukhaṃ tasmai namo dharaṇisūnave

हिन्दी अर्थ

चण्डाके साथ शड्खी, वाणीके साथ हली, विलासिनीके साथ मुसली, विजयाके साथ शूली, विरजाके साथ पाशी, विश्वाके साथ अंकुशी, विनदाके साथ मुकुन्द, सुनन्दाके साथ नन्दज, स्मृतिके साथ

English

by worshipping whom people in this world soon obtain happiness, homage to the son of the Earth.

अध्याय ६८

श्लोक 110

यो वक्रगतिमापन्नो नृणां दुःखं प्रयच्छति ।पूजितः सुखसौभाग्यं तस्मै क्ष्मासूनवे नमः

yo vakragatimāpanno nṛṇāṃ duḥkhaṃ prayacchati / pūjitaḥ sukhasaubhāgyaṃ tasmai kṣmāsūnave namaḥ

हिन्दी अर्थ

नन्दी, वृद्धिके साथ नर, समृद्धिके साथ नरकजित्, शुद्धिके साथ हरि, बुद्धिके साथ कृष्ण, भुक्तिके साथ सत्य, मुक्तिके साथ सात्वत, क्षमासहित सौरि,

English

He who, when moving crookedly, gives men sorrow, and when worshipped gives happiness and good fortune, homage to the Earth's son.

अध्याय ६८

श्लोक 111

नभसि द्योतमानाय सर्वकल्याणहेतवे ।मङ्गलाय नमस्तुभ्यं धनसंतानहेतवे

nabhasi dyotamānāya sarvakalyāṇahetave / maṅgalāya namastubhyaṃ dhanasaṃtānahetave

हिन्दी अर्थ

क्लेदिनीसहित भूधर, क्लिन्नाके साथ विश्वमूर्ति, वसुधाके साथ वैकुण्ठ, वसुदाके साथ पुरुषोत्तम, पराके साथ बली, परायणाके साथ बलानुज, सूक्ष्माके साथ बाल, संध्याके साथ वृषहन्ता, प्रज्ञाके साथ

English

Homage to Mangala, shining in the sky, the cause of all welfare, the cause of wealth and progeny.

अध्याय ६८

श्लोक 112

प्रसादं कुरु मे भौममङ्गलप्रद मङ्गल ।मेषवाहन रुद्रात्मन्देहि पुत्रान्धनं यशः

prasādaṃ kuru me bhaumamaṅgalaprada maṅgala / meṣavāhana rudrātmandehi putrāndhanaṃ yaśaḥ

हिन्दी अर्थ

वृष, प्रभाके साथ हंस, निशाके साथ वराह, धाराके साथ विमल तथा विद्युतके साथ नृसिंहका न्यास करे। इस केशवादि मातृका-न्यासके नारायण ऋषि, अमृताद्या गायत्री छन्‍्द और विष्णु देवता हैं। भगवान्

English

Show favour to me, O Bhauma, Mangala, giver of auspiciousness; O ram-rider, Rudra-natured, give me sons, wealth and fame."

अध्याय ६८

श्लोक 113

एवं स्तुत्वा प्रणम्याथ विसृज्य धरणीसुतम् ।यथाशक्त्या प्रदाय स्वं गृह्णीयाद्ब्रणाशिषः

evaṃ stutvā praṇamyātha visṛjya dharaṇīsutam / yathāśaktyā pradāya svaṃ gṛhṇīyādbraṇāśiṣaḥ

हिन्दी अर्थ

विष्णु चक्र आदि आयुधोंसे सुशोभित हैं, उन्होंने हाथोंमें कलश और दर्पण ले रखा है, वे श्रीहरि श्रीलक्ष्मीजीके साथ शोभा पा रहे हैं, उनकी अड्भकान्ति विद्युतूकं समान प्रकाशमान है और वे अनेक

English

Having thus praised, bowed and dismissed the Earth's son, she should give her own as she can and receive blessings.

अध्याय ६८

श्लोक 114

गुरवे दक्षिणां दत्त्वा भुञ्जीयात्तन्निवेदितम्

gurave dakṣiṇāṃ dattvā bhuñjīyāttanniveditam

हिन्दी अर्थ

प्रकारके दिव्य आभूषणोंसे विभूषित हैं; ऐसे भगवान् विष्णुका मैं भजन करता हूँ। इस प्रकार ध्यान करके शक्ति (हीं), श्री (श्रीं) तथा काम (क्लीं) बीजसे सम्पुटित 'अ' आदि एक-एक अक्षरका

English

Having given the fee to the teacher, she should eat what was offered to him.

अध्याय ६८

श्लोक 115

एवमावत्सरं कुर्यात्प्रतिमङ्गलवासरम् ।तिलैर्हेमं विधायाथ शतार्द्धं भोजयोद्द्विजान्

evamāvatsaraṃ kuryātpratimaṅgalavāsaram / tilairhemaṃ vidhāyātha śatārddhaṃ bhojayoddvijān

हिन्दी अर्थ

ललाट आदियमें न्यास करे। उसके साथ आदिमें प्रणव लगाकर श्रीविष्णु और उनकी शक्तिके चतुर्थ्यन्त

English

Thus for a year on every Tuesday, then having made a golden (image) with sesame she should feed fifty Brahmins.

अध्याय ६८

श्लोक 116

भौममूर्तिं स्वर्णमयीमाचार्याय समर्पयेत् ।मण्डलस्थे घटे ऽभ्यर्च्येत्सुतसौभाग्यसिद्धये

bhaumamūrtiṃ svarṇamayīmācāryāya samarpayet / maṇḍalasthe ghaṭe 'bhyarcyetsutasaubhāgyasiddhaye

हिन्दी अर्थ

... अनुग्रहेशका, आस्थाके साथ अक्रूरका, विद्याके साथ महासेनका, महाकालीके साथ क्रोधीशका, सरस्वतीके साथ चण्डेशका, सिद्धगौरीके साथ पञ्ञान्तकेशका, त्रैलोक्यविद्याके साथ शिवोत्तमेशका,

English

She should give a golden image of Mars to the teacher, having worshipped it in the pot in the diagram for success in having a son and good fortune.

अध्याय ६८

श्लोक 117

एवं व्रतपरा नारी प्राप्नुयात्सुभगान्सुतान् ।ऋणनाशाय वित्तार्थं व्रतं कुर्यात्पुमानपि

evaṃ vrataparā nārī prāpnuyātsubhagānsutān / ṛṇanāśāya vittārthaṃ vrataṃ kuryātpumānapi

हिन्दी अर्थ

कूर्मेशका, भूतमाताके साथ एकनेत्रेशका, लम्बोदरीके साथ चतुर्वक्त्रेशका, द्राविणीके साथ अजेशका, नागरीके साथ सर्वेशका, खेचरीके साथ सोमेशका, मर्यादाकं साथ लाजड्नलीशका, दारुकेशके साथ

English

Thus a woman devoted to the vow obtains fortunate sons; a man too should keep the vow for the destruction of debt and for wealth.

अध्याय ६८

श्लोक 118

ब्राह्मणः प्रजपेन्मन्त्रंमग्निर्मूर्द्धेति वैदिकम् ।अङ्गारकस्य गायत्रीं वक्ष्ये यजनसिद्धये

brāhmaṇaḥ prajapenmantraṃmagnirmūrddheti vaidikam / aṅgārakasya gāyatrīṃ vakṣye yajanasiddhaye

हिन्दी अर्थ

रूपिणीका तथा वीरिणीके साथ अर्धनारीशका न्यास करना चाहिए। काकोदरीके साथ उमाकान्त (उमेश)-का और पूतनाके साथ आषाढीशका न्यास करे। भद्रकालीके साथ दण्डीशका, योगिनीके

English

A Brahmin should chant the Vedic mantra "Agnir murdha..." Now I shall tell the Gayatri of Angaraka for the success of worship.

अध्याय ६८

श्लोक 119

अङ्गारकाय शब्दान्ते विद्महे पदमीरयेत् ।शक्तिहस्ताय वर्णान्ते धीमहीति समुञ्चरेत्

aṅgārakāya śabdānte vidmahe padamīrayet / śaktihastāya varṇānte dhīmahīti samuñcaret

हिन्दी अर्थ

साथ अत्रीशका, शड्खिनीके साथ मीनेशका, तर्जजीके साथ मेषेशका, कालरात्रिके साथ लोहितेशका, कुब्जनीके साथ शिखीशका, कपर्दिनीके साथ छलगण्डेशका, वज्राके साथ टद्विरण्डेशका,

English

"Angarakaya" at the end of the word, he should say "vidmahe"; "Shaktihastaya", at the end of the letters "dhimahi";

अध्याय ६८

श्लोक 120

तन्नो भौमः प्रचोवर्णान्दयान्दिति च संवदेत् ।भौमस्यैषा तु गायत्री जप्तुः सर्वेष्टसिद्धिदा

tanno bhaumaḥ pracovarṇāndayānditi ca saṃvadet / bhaumasyaiṣā tu gāyatrī japtuḥ sarveṣṭasiddhidā

हिन्दी अर्थ

अक्षर “आ' का मुखमें, दो अक्षर 'इ” और “ई' का क्रमश: दाहिने और बाँयें नेत्रमें और दो अक्षर 'उ', “ऊ' का क्रमश: दाहिने-बायें कानमें न्यास करे। दो अक्षर 'ऋ', 'ऋ ' का दार्यी-बारयीं नासिकामें,

English

"Tan no Bhaumah prachodayat" — this is the Gayatri of Mars; for the chanter it grants success in all desires.

अध्याय ६८

श्लोक 121

भौमोपासनमेतद्धि बुधमन्त्रमथोच्यते ।फआन्तः कर्णेन्दुसंयुक्तो बुधो ङेंते हदन्तिमः

bhaumopāsanametaddhi budhamantramathocyate / phaāntaḥ karṇendusaṃyukto budho ṅeṃte hadantimaḥ

हिन्दी अर्थ

दो अक्षर 'लृ', 'लृ” का दायें-बायें कपोलमें, दो अक्षर 'ए!', 'ऐ” का ऊपर-नीचेके ओपषछ्टमें, दो अक्षर 'ओ', 'औ' का ऊपर-नीचेकी दन्तफपंक्तिमें, एक अक्षर 'अं' का जिह्मामूलमें तथा एक अक्षर

English

This is the worship of Mars; now the Mercury mantra is told: ending in "pha", with ear and moon, Budha in the dative, ending in "ha"...

अध्याय ६८

श्लोक 122

रसाण्ॐ बुधमन्त्रो ऽयं मुनिब्रह्मास्य कीर्तितः ।पङ्क्तिश्छैदो देवता तु बुधः सर्वेष्टदो नृणाम्

rasāṇoṃ budhamantro 'yaṃ munibrahmāsya kīrtitaḥ / paṅktiśchaido devatā tu budhaḥ sarveṣṭado nṛṇām

हिन्दी अर्थ

अ: ' का ग्रीवामें न्यास करे। दाहिनी बाँहमें कवर्गका और बायीं बाँहमें चवर्गका न्यास करे। टवर्ग और तवर्गका दोनों पैरोंमें तथा 'प” और 'फ'” का दोनों कुक्षियोंमें न्यास करे। पृष्ठवंशमें 'ब' का, नाभिमें

English

a six-syllable Mercury mantra; Brahma is declared its sage; metre Pankti; the deity is Mercury, giver of all desires to men.

अध्याय ६८

श्लोक 123

आद्यं बीजं नमः शक्तिर्विनियोगो ऽखिलाप्तये ।वन्दे बुधं सदा भक्त्या पीताम्बरविभूषणम्

ādyaṃ bījaṃ namaḥ śaktirviniyogo 'khilāptaye / vande budhaṃ sadā bhaktyā pītāmbaravibhūṣaṇam

हिन्दी अर्थ

'भ' का और हृदयमें “म” का न्यास करे। 'य! आदि सात अक्षरोंका शरीरकी सात धातुओंमें, 'ह” का प्राणमें तथा “व्ठ” का आत्मामें न्यास करे। 'क्ष' का क्रोधमें न्यास करना चाहिए। इस

English

The first seed, "namah" the power, application for obtaining all: "I always praise with devotion Budha, adorned with yellow garments,

अध्याय ६८

श्लोक 124

जानुस्थवामहस्ताढ्यं साभयेतरपाणिकम् ।ध्यात्वेवं प्रजपेसहस्रं विजितेन्द्रियः

jānusthavāmahastāḍhyaṃ sābhayetarapāṇikam / dhyātvevaṃ prajapesahasraṃ vijitendriyaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रकार क्रमसे मातृका वर्णोंका न्यास करके मनुष्य

English

his left hand on his knee, the other showing protection." Having meditated thus, the master of his senses should chant a thousand.

अध्याय ६८

श्लोक 125

दशांशं जुहुयादाज्यैः पीठे पूर्वोदितेर्ऽचयेत् ।अङ्गमातृदिशापालहेतिभिर्बुधमर्चयेत्

daśāṃśaṃ juhuyādājyaiḥ pīṭhe pūrvoditer'cayet / aṅgamātṛdiśāpālahetibhirbudhamarcayet

हिन्दी अर्थ

भगवान् विष्णुकी पूजामें समर्थ होता है। जयाके साथ महाबलेशका, सुमुखेश्वरीके साथ शैव-मातृका-न्यास बलीशका, रेवतीके साथ भुजड्रेशका, माध्वीके भगवान् शिवके उपासकको केशव-कीरत्यादि साथ पिनाकौशका, वारुणीके साथ खड्ढीशका,

English

He should offer a tenth part with ghee and worship on the seat stated before; he should worship Budha with limbs, Mothers, directional guardians and weapons.

अध्याय ६८

श्लोक 126

एवं सिद्धे मनौ मन्त्री साधयेत्स्वमनोरथान् ।सहस्रं प्रजपेन्मन्त्रं नित्यं दशदिनावधि

evaṃ siddhe manau mantrī sādhayetsvamanorathān / sahasraṃ prajapenmantraṃ nityaṃ daśadināvadhi

हिन्दी अर्थ

वायवीके साथ वकेशका, विदारणीके साथ शैतोरस्केशका, सहजाके साथ भृग्वीशका, लक्ष्मीके साथ लकुलीशका, व्यापिनीके साथ शिवेशका तथा महामायाके साथ संवर्तकेशका न्यास करे।

English

When the mantra is perfected, the mantra-knower should accomplish his own desires; he should chant it a thousand times daily for ten days,

अध्याय ६८

श्लोक 127

तस्याशु ग्रहजा पीडा नश्यत्येव न संशयः ।बुधस्याराधनं प्रोक्तं गुरोराराधनं शृणु

tasyāśu grahajā pīḍā naśyatyeva na saṃśayaḥ / budhasyārādhanaṃ proktaṃ gurorārādhanaṃ śṛṇu

हिन्दी अर्थ

यह श्रीकण्ठमातृका कही गयी है। जहाँ 'ईश' पद न कहा गया हो, वहाँ सर्वत्र उसकी योजना कर लेनी चाहिए। इस श्रीकण्ठमातृका-न्यासके दक्षिणामूर्ति ऋषि और गायत्री छन्‍द कहा गया

English

and the affliction from planets is quickly destroyed, without doubt. The worship of Mercury is told; hear the worship of Jupiter.

अध्याय ६८

श्लोक 128

बृंहस्पतिपदं ङेंतं सेंद्वाद्यर्णाघमण्डितम् ।नमोन्तो वसुवर्णो ऽयं मुनिर्ब्रह्मास्य संमतः

bṛṃhaspatipadaṃ ṅeṃtaṃ seṃdvādyarṇāghamaṇḍitam / namonto vasuvarṇo 'yaṃ munirbrahmāsya saṃmataḥ

हिन्दी अर्थ

साथ झिण्टीशका, विकृतास्याके साथ भौतिकेशका, है। अर्धनारीश्वर देवता है और सम्पूर्ण मनोरथोंकी ज्वालामुखीके साथ सद्योजातेशका, उल्कामुखीके प्राप्तिक लिये इसका विनियोग कहा गया है।

English

The word Brihaspati in the dative, adorned with moon and other letters, ending in "namah"; it has eight syllables; Brahma is its sage;

अध्याय ६८

श्लोक 129

छन्दो ऽनुष्टुप्सुराचार्यो देवता बीजमादिमम् ।हृच्छक्तिर्दीर्घवह्नीन्दुयुगलेनाङ्गकल्पना

chando 'nuṣṭupsurācāryo devatā bījamādimam / hṛcchaktirdīrghavahnīnduyugalenāṅgakalpanā

हिन्दी अर्थ

उनका निर्देश मूलमें किया जा रहा है। उन सबके लिये उपर्युक्त रीतिसे वाक्ययोजना करनी चाहिए। तन्त्रमें द्विवचन-विभक्ति तथा शक्तियोंका अन्तमें प्रयोग देखा जानेके कारण द्वन्द्सममास करके भी स्त्री-लिड्रका पूर्वनिपात नहीं किया गया।

English

the metre is Anushtubh, the deity is the teacher of the gods; the first is the seed, the heart is power; the limbs are made with long vowels, fire and moon.

अध्याय ६८

श्लोक 130

न्यस्तवामकरं राशौ रत्नानां दक्षिणात्करात् ।किरन्तं पीतपुष्पालङ्कारालेपांशुकार्चितम्

nyastavāmakaraṃ rāśau ratnānāṃ dakṣiṇātkarāt / kirantaṃ pītapuṣpālaṅkārālepāṃśukārcitam

हिन्दी अर्थ

उदाहरणके लिये वाक्यप्रयोग इस प्रकार है--ह् सौ अं श्रीकण्ठेशपूर्णोदरीभ्यां नमः (ललाटे)। हू सौं आं

English

Placing the left hand on a heap of jewels and scattering with the right, worshipped with yellow flowers, ornaments, ointments and garments,

अध्याय ६८

श्लोक 131

सर्वविद्यानिधिं देवगुरुं स्वर्णद्युतिं स्मरेत् ।लक्षं जपो दशांशेन घृतेनान्नेन वा हुनेत्

sarvavidyānidhiṃ devaguruṃ svarṇadyutiṃ smaret / lakṣaṃ japo daśāṃśena ghṛtenānnena vā hunet

हिन्दी अर्थ

मातृका-न्यासकी भाँति श्रीकण्ठेशादि मातृका- न्यास करना चाहिए। पूर्णोदरीकि साथ श्रीकण्ठेशका, विरजाके साथ अनन्तेशका, शाल्मलीके साथ सूक्ष्मेशका, लोलाक्षीके साथ त्रिमूर्तीशका, वर्तुलाक्षीके

English

he should remember the teacher of the gods, treasury of all learning, golden in lustre. He should chant a hundred thousand; a tenth with ghee or food should be offered.

अध्याय ६८

श्लोक 132

धर्मादिपीठे प्रयजेदङ्गदिक्पालहेतिभिः ।एवं सिद्धे मनौ मन्त्री साधयेदिष्टमात्मनः

dharmādipīṭhe prayajedaṅgadikpālahetibhiḥ / evaṃ siddhe manau mantrī sādhayediṣṭamātmanaḥ

हिन्दी अर्थ

साथ महेशका और दीर्घघोणाके साथ अर्घीशका न्यास करे। दीर्घमुखीके साथ भारभूतीशका, गोमुखीके साथ तिथीशका, दीर्घजिह्ाके साथ स्थाण्वीशका, कुण्डोदरीके साथ हरेशका, ऊर्ध्वकेशीके

English

He should worship on the Dharma-seat with limbs, directional guardians and weapons. When the mantra is perfected, he should accomplish his own desire.

अध्याय ६८

श्लोक 133

विपरोगादिपीडासु कलहे स्वजनोद्भवे ।पिप्पलोत्थसमिद्भिश्च जुहुयात्तन्निवृत्तये

viparogādipīḍāsu kalahe svajanodbhave / pippalotthasamidbhiśca juhuyāttannivṛttaye

हिन्दी अर्थ

इसके हल् बीज और स्वर शक्तियाँ हैं। भृगु (स)-में स्थित आकाश (ह)-की छ: दीघ्घोसे युक्त करके उसके द्वारा अड्भन्यास करें।। इसके बाद भगवान् शद्भूरका इस प्रकार ध्यान करे।

English

In afflictions such as disease, in quarrels arising among kin, he should offer fuel-sticks of the peepal for their removal;

अध्याय ६८

श्लोक 134

हुत्वा दिनत्रयं मन्त्री निशापुष्पैर्घृतप्लुतैः ।स विंशतिशतं शीघ्रं वासांसि लभते महीम्

hutvā dinatrayaṃ mantrī niśāpuṣpairghṛtaplutaiḥ / sa viṃśatiśataṃ śīghraṃ vāsāṃsi labhate mahīm

हिन्दी अर्थ

उनका श्रीविग्रह बन्धूक पुष्प एवं सुवर्णके समान है। वे अपने हाथोंमें वर, अक्षमाला, अंकुश और पाश धारण करते हैं। उनके मस्तकपर अर्धचन्द्रका मुकुट सुशोभित है। उनके तीन नेत्र हैं तथा

English

having offered for three days with night-flowers soaked in ghee, he soon gets two thousand garments and the earth.

अध्याय ६८

श्लोक 135

गुरोराराधनं प्रोक्तं शृणु शुक्रस्य सांप्रतम् ।वस्रं मे देहि शुक्राय ठद्वयान्तो ध्रुवादिकः

gurorārādhanaṃ proktaṃ śṛṇu śukrasya sāṃpratam / vasraṃ me dehi śukrāya ṭhadvayānto dhruvādikaḥ

हिन्दी अर्थ

सम्पूर्ण देवता उनके चरणोंकी वन्दना करते हैं। गाणपत्य-मातृका-न्यास इस प्रकार शिवशक्तिका ध्यान करके अन्तमें चतुर्थी विभक्ति और नम: पद जोड़कर तथा

English

The worship of the teacher is told; now hear that of Venus: "Give me cloth, to Shukra" — ending in two "tha", beginning with the fixed...

अध्याय ६८

श्लोक 136

रुद्रार्णो ऽयं मनुर्ब्रह्मा मुनिश्छन्दो विराहुत ।दैत्येज्यो देवता बीजं ध्रुवः शक्तिर्वसुप्रिया

rudrārṇo 'yaṃ manurbrahmā muniśchando virāhuta / daityejyo devatā bījaṃ dhruvaḥ śaktirvasupriyā

हिन्दी अर्थ

आदिमें गणेशजीका अपना बीज लगाकर मातृकास्थलमें एक-एक मातृका वर्णके साथ शक्तिसहित गणेशजीका न्यास करे। हीके साथ विध्लेश तथा श्रीके साथ विघ्नराजका न्यास करे'।

English

(coded) an eleven-syllable mantra; Brahma is its sage; the deity is the teacher of the demons; the seed is "dhruva", the power is Vasupriya.

अध्याय ६८

श्लोक 137

भूनेत्र चन्द्रनेत्राग्निनेत्रार्णैः स्यात्षडङ्गकम् ।शुक्लांबरालेपभूषं करेण ददतं धनम्

bhūnetra candranetrāgninetrārṇaiḥ syātṣaḍaṅgakam / śuklāṃbarālepabhūṣaṃ kareṇa dadataṃ dhanam

हिन्दी अर्थ

पुष्टिके साथ विनायक, शान्तिके साथ शिवोत्तम,

English

With the earth-, moon-, fire-eyed syllables, the six limbs are made. He should remember Shukra, clad in white and anointed, giving wealth with one hand,

अध्याय ६८

श्लोक 138

वामेन शुक्रं व्याख्यानमुद्रादोषं स्मरेत्सुधीः ।अयुतं प्रजपेन्मन्त्रं दशांशं जुहुयाद् घृतैः

vāmena śukraṃ vyākhyānamudrādoṣaṃ smaretsudhīḥ / ayutaṃ prajapenmantraṃ daśāṃśaṃ juhuyād ghṛtaiḥ

हिन्दी अर्थ

कान्तिसहित द्विदन्त, कामिनीसहित गजमुख,

English

and with the left the posture of teaching. He should chant ten thousand and offer a tenth with ghee.

अध्याय ६८

श्लोक 139

धर्मादिपीठे प्रयजेदङ्गेन्द्रादितदायुधैः ।श्वेतपुष्पैः सुगन्धैश्च जुहुयाद् भृगुवासरे

dharmādipīṭhe prayajedaṅgendrāditadāyudhaiḥ / śvetapuṣpaiḥ sugandhaiśca juhuyād bhṛguvāsare

हिन्दी अर्थ

दीर्घजिहृय, ज्वालिनीसहित शड्डूकर्ण, नन्दासहित वृषध्वज, सुरेशीसहित गणनायक, कामरूपिणीके साथ गजेन्द्र, उमाके साथ शूर्पकर्ण, तेजोवतीके साथ विरोचन, सतीके साथ लम्बोदर, विप्नेशीके

English

He should worship on the Dharma-seat with the limbs, Indra and the rest and their weapons; on Friday he should offer white sweet-smelling flowers.

अध्याय ६८

श्लोक 140

एकविंशतिवारं यो लभतेस्ॐऽशुकं मणीन् ।मनवो ऽमो सदा गोप्या न देया यस्य कस्यचित्

ekaviṃśativāraṃ yo labhatesoṃ'śukaṃ maṇīn / manavo 'mo sadā gopyā na deyā yasya kasyacit

हिन्दी अर्थ

साथ महानन्द, सुरूपिणीसहित चतुर्मूर्ति कामदासहित

English

The one who thus gets a garment and jewels twenty-one times... these mantras are always to be kept secret and not given to just anyone.

अध्याय ६८

श्लोक 141

भक्तियुक्ताय शिष्याय देया वा निजसूनवे

bhaktiyuktāya śiṣyāya deyā vā nijasūnave

हिन्दी अर्थ

भौतिकीके साथ सुमुख, सिताके साथ प्रमोद, रमाके साथ एकपाद, महिषीके साथ द्विजिह, जम्भिनीके साथ शूर, विकर्णके साथ वीर, भ्रुकुटीसहित षण्मुख, लज्जाके साथ वरद, दीर्घधघोणाके

English

They should be given to a devoted disciple or to one's own son.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_nAradapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Narada Purana — Chapter 68
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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