अध्याय १२
श्लोक 1
॥ इति श्रीनरसिंहपुराणे मार्कण्डेयचरितं नाम एकादशो ऽध्याय ॥ नर्प् ११ ॥ श्रुत्वेमाम् अमृतां पुण्यां सर्वपापप्रणाशिनीम् अवितृप्तः स धर्मात्मा शुको व्यासम् अभाषत
|| iti śrīnarasiṃhapurāṇe mārkaṇḍeyacaritaṃ nāma ekādaśo 'dhyāya || narp 11 || śrutvemām amṛtāṃ puṇyāṃ sarvapāpapraṇāśinīm avitṛptaḥ sa dharmātmā śuko vyāsam abhāṣata
हिन्दी अर्थ
उड़ चले। तब उन्हें इस प्रकार करते देख देवशर्मा ब्राह्मणने डाँट बतायी। उसकी डाँट सुनकर वे पक्षी उस वरन्रपर बीट करके उसे वहीं छोड़कर चले गये। तब ब्राह्मणने आकाशमें जाते हुए उन पक्षियोंकी ओर क्रोधपूर्वक देखा। वे पक्षी उसकी क्रोधाग्निसे भस्म होकर पृथ्वीपर गिर पड़े। उन्हें पृथ्वीपर गिरा देख ब्रह्मचारी बहुत ही विस्मित हुआ। फिर वह यह समझकर कि इस पृथ्वीपर तपस्यामें मेरी बराबरी करनेवाला कोई नहीं है, अनायास
English
A dialogue between Yama and Yam!