अध्याय २५
श्लोक 1
॥ इति श्रीनरसिंहपुराणे इक्ष्वाकुचरित्रं चतुर्विंशो ऽध्यायः ॥ नर्प् २४ ॥ कथं स्तुतो गणाध्यक्षस् तेन राज्ञा महात्मना यथा तेन तपस् तप्तं तन् मे वद महामते
|| iti śrīnarasiṃhapurāṇe ikṣvākucaritraṃ caturviṃśo 'dhyāyaḥ || narp 24 || kathaṃ stuto gaṇādhyakṣas tena rājñā mahātmanā yathā tena tapas taptaṃ tan me vada mahāmate
हिन्दी अर्थ
बगीचेमें ही बैठा रहा। अन्य दिनोंकी भाँति उस दिन भी वह पुरुष आया और फूल लेकर चला गया॥ १६--२०॥ “उसे देखकर मालाओंसे ही जीविका चलानेवाला वह माली उस उपवनमें बहुत ही दुःखी हुआ। तदनन्तर रातको नींद आनेपर उसने स्वप्नमें साक्षात् भगवान् नसिंहको देखा तथा उन नृसिंहदेवका यह वचन भी
English
Penance performed by Ik$vaku and attainment of Vi$nu's icon by Brahma