अध्याय ३५
श्लोक 1
॥ इति श्रीनरसिंहपुराणे सहस्रानीकचरिते श्रीविष्णोः पूजाविधिर् नाम चतुस्त्रिंशो ऽध्यायः ॥ नर्प् ३४ ॥ अहो महत् त्वया प्रोक्तं विष्ण्वाराधनजं फलम् सुप्तास् ते मुनिशार्दूल ये विष्णुं नार्चयन्ति वै
|| iti śrīnarasiṃhapurāṇe sahasrānīkacarite śrīviṣṇoḥ pūjāvidhir nāma catustriṃśo 'dhyāyaḥ || narp 34 || aho mahat tvayā proktaṃ viṣṇvārādhanajaṃ phalam suptās te muniśārdūla ye viṣṇuṃ nārcayanti vai
हिन्दी अर्थ
बृहस्पतिजीसे विनयपूर्वक पूछा- मुनिश्रेष्ठ! त्रिलोकीका राज्य छीननेवाले इस हिरण्यकशिपुके विनाशका समय और उसका उपाय हमें शीघ्र बताइये'॥ १६-२२/,॥ बृहस्पतिजी बोले--देवताओ! तुम लोग अपने स्थानकी प्राप्तिके लिये मेरे ये वाक्य सुनो--' इस महान् असुर हिरण्यकशिपुके पुण्यका अंश प्रायः क्षीण हो चुका है। इसे अपने भाई हिरण्याक्षकी मृत्युसे. बहुत शोक
English
Method of performing a lakh and crore Homas and their rewards