Narasimha Purana· Nṛsiṁha Purāṇa
59
अध्याय 59 / 68

Adhyaya 59

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अध्याय ५९

श्लोक 1

॥ इति श्रीनरसिंहपुराणे गृहस्थधर्मो नामाष्टपञ्चाशो ऽध्यायः ॥ नर्प् ५८ ॥ अतः परं प्रवक्ष्यामि वानप्रस्थस्य लक्षणम् धर्मम् अग्र्यं महाभागाः कथ्यमानं निबोधत

|| iti śrīnarasiṃhapurāṇe gṛhasthadharmo nāmāṣṭapañcāśo 'dhyāyaḥ || narp 58 || ataḥ paraṃ pravakṣyāmi vānaprasthasya lakṣaṇam dharmam agryaṃ mahābhāgāḥ kathyamānaṃ nibodhata

हिन्दी अर्थ

इति श्रीनरसिंहयुराणे विष्णोरर्चाविधिर्नाम द्विषडितमोउ ध्याय: अष्टाक्षर-मन्त्रके प्रभावसे इन्द्रका स्त्रीयोनिसे उद्धार

English

About the duties of Vanaprastha.

अध्याय ५९

श्लोक 2

गृहस्थः पुत्रपौत्रादीन् दृष्ट्वा पलितम् आत्मनः स्वभार्यां तनये स्थाप्ये स्वशिष्यैः प्रविशेद् वनम्

gṛhasthaḥ putrapautrādīn dṛṣṭvā palitam ātmanaḥ svabhāryāṃ tanaye sthāpye svaśiṣyaiḥ praviśed vanam

हिन्दी अर्थ

सह्रानीक उवाच सहस्त्रानीक बोले--ब्रह्मन्। इस समय आपने सत्यमुक्तं त्वया ब्रह्मन् वैदिकः परमो विधिः। देवदेवेश्वर भगवान् विष्णुके पूजनकी यह उत्तम वैदिक

English

Sri Harita, the hermit said- O learned persons, I will now tell you the characteristics of Vanaprastha and the best method to observe it. Please listen to that religion being told by me now.

अध्याय ५९

श्लोक 3

जटाकलापचीराणि नखगात्ररुहाणि वा धारयञ् जुहुयाद् अग्नौ वैतानविधिना स्थितः

jaṭākalāpacīrāṇi nakhagātraruhāṇi vā dhārayañ juhuyād agnau vaitānavidhinā sthitaḥ

हिन्दी अर्थ

विष्णोर्देवातिदेवस्य पूजनं प्रति मेऽधुना॥ १ विधि बतायी, वह बिलकुल ठीक है; परंतु ब्रह्मन्! इस पूजन चुन विधिसे तो केवल वेदज्ञ पुरुष ही मधुसूदनकी पूजा कर अनेन विधिना ब्रह्मन् पूज्यते मधुसूदन: सकते हैं, दूसरे लोग नहीं; इसलिये आप ऐसी कोई वेदसैरेव नान्यैस्तु तस्मात्सर्वहितं वद॥ २ विधि बताइये, जो सबके लिये उपयोगी हो अध्याय ६३ अष्टाक्षर-मन्त्रके प्रभावसे इन्द्रका स्त्रीयोनिसे उद्धार २७१ मार्कण्डेय उवाच ्रीमार्कण्डेयजी बोले--मनुष्यको चाहिए कि वह

English

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अध्याय ५९

श्लोक 4

भृतपर्णैर् मृत्संभूतैर् नीवाराद्यैर् अतन्द्रितः कन्दमूलफलैर् वापि कुर्यान् नित्यक्रियां बुधः

bhṛtaparṇair mṛtsaṃbhūtair nīvārādyair atandritaḥ kandamūlaphalair vāpi kuryān nityakriyāṃ budhaḥ

हिन्दी अर्थ

अष्टाक्षरेण देवेशं नरसिंहमनामयम्। अष्टाक्षर मन्त्रसे निरामय देवेश्वर भगवान् नरसिंहका गन्धपुष्पादिभि्ित्यमर्चयेदच्युतं जरः॥ ३ गभ पुष्प आदि उपचारोद्वारा प्रतिदिन पूजन करे। राजन्!

English

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अध्याय ५९

श्लोक 5

त्रिकालं स्नानयुक्तस् तु कुर्यात् तीव्रं तपः सदा पक्षे गते वा अश्नीयान् मासान्ते वा पराककृत्

trikālaṃ snānayuktas tu kuryāt tīvraṃ tapaḥ sadā pakṣe gate vā aśnīyān māsānte vā parākakṛt

हिन्दी अर्थ

राजन्नष्टाक्षो मन्त्रः सर्वपापहरः परः। समस्तयञ्चफलदः सर्वशान्तिकरः शुभः अनेनाभ्यचितो देवः प्रीतो भवति ततक्षणात्

English

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अध्याय ५९

श्लोक 6

चतुःकाले ऽपि चाश्नीयात् काले ऽप्य् उत तथाष्टमे षष्ठाह्नकाले ह्य् अथवा अथवा वायुभक्षकः

catuḥkāle 'pi cāśnīyāt kāle 'py uta tathāṣṭame ṣaṣṭhāhnakāle hy athavā athavā vāyubhakṣakaḥ

हिन्दी अर्थ

ॐ नमो नारायणायेति मन्त्रः सर्वार्थसाधकः

English

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अध्याय ५९

श्लोक 7

घर्मे पञ्चाग्निमध्यस्थो धारावर्षासु वै नयेत् हैमन्तिके जले स्थित्वा नयेत् कालं तपश् चरन्

gharme pañcāgnimadhyastho dhārāvarṣāsu vai nayet haimantike jale sthitvā nayet kālaṃ tapaś caran

हिन्दी अर्थ

सर्वपापविनि्मुक्तो विष्णुसायुज्यमाप्नुयात् एवं कृते नृपश्रेष्ठ नरसिंहप्रसादतः। पराप्नोति वैष्णवं तेजो यत्काङ्क्षन्ति मुमुक्षवः

English

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अध्याय ५९

श्लोक 8

एवं स्वकर्मभोगेन कृत्वा शुद्धिम् अथात्मनः अग्निं चात्मनि वै कृत्वा व्रजेद् वाथोत्तरां दिशम्

evaṃ svakarmabhogena kṛtvā śuddhim athātmanaḥ agniṃ cātmani vai kṛtvā vrajed vāthottarāṃ diśam

हिन्दी अर्थ

पुरा पुरंदरो राजन् स्त्रीत्वं प्रा्तोऽपधर्मतः। तृणबिन्दुमुनेः शापान्मुक्तो ह्याष्टाक्षराज्जपात्

English

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अध्याय ५९

श्लोक 9

आदेहपाताद् वनगो मौनम् आस्थाय तापसः स्मरन्न् अतीन्द्रियं ब्रह्म ब्रह्मलोके महीयते

ādehapātād vanago maunam āsthāya tāpasaḥ smarann atīndriyaṃ brahma brahmaloke mahīyate

हिन्दी अर्थ

एतत्कथय भूदेव देवेन्द्रस्याघमोचनम्। 'कोऽपधर्मः कथं स्त्रीत्वं प्राप्तो मे वद कारणम् श्रीमार्कण्डेय उवाच

English

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अध्याय ५९

श्लोक 10

तपो हि यः सेवति काननस्थो वसेन् महत्सत्त्वसमाधियुक्तः विमुक्तपापो हि मनःप्रशान्तः प्रयाति विष्णोः सदनं द्विजेन्द्रः

tapo hi yaḥ sevati kānanastho vasen mahatsattvasamādhiyuktaḥ vimuktapāpo hi manaḥpraśāntaḥ prayāti viṣṇoḥ sadanaṃ dvijendraḥ

हिन्दी अर्थ

विष्णुभक्तिप्रजननं शृण्वतां पठतामिदम्

English

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स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_narasiMhapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Narasimha Purana — Chapter 59
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.