अध्याय ६४
श्लोक 1
॥ इति श्रीनरसिंहपुराणे सहस्रानीकचरिते ऽष्टाक्षरमन्त्रकथनं नाम त्रिषष्टितमो ऽध्यायः ॥ नर्प् ६३ ॥ सत्यं केचित् प्रशंसन्ति तपः शौचं तथापरे सांख्यं केचित् प्रशंसन्ति योगम् अन्ये प्रचक्षते
|| iti śrīnarasiṃhapurāṇe sahasrānīkacarite 'ṣṭākṣaramantrakathanaṃ nāma triṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ || narp 63 || satyaṃ kecit praśaṃsanti tapaḥ śaucaṃ tathāpare sāṃkhyaṃ kecit praśaṃsanti yogam anye pracakṣate
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर उस क्षेत्रके प्रभावसे और वहाँके तीर्थोके तेजसे उन महात्माका चित्त वहाँ बहुत ही शुद्ध एवं प्रसन्न हो गया इस प्रकार शुद्धचित्त एवं ध्यानयोगमें तत्पर हो, वहाँ ही सिद्धिकी इच्छासे परमभक्तियुक्त हो, वे शास्त्रोक्त विधिसे
English
Sahastranlka. Now, tell me what more I can