Narasimha Purana· Nṛsiṁha Purāṇa
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अध्याय 8 / 68

Adhyaya 8

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पूर्ण अध्याय पाठ46 श्लोक

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अध्याय ८

श्लोक 1

॥ इति श्रीनरसिंहपुराणे मार्कण्डेयमृत्युंजयो नाम सप्तमो ऽध्यायः ॥ नर्प् ७ ॥ मृत्युश् च किंकराश् चैव विष्णुदूतैः प्रपीडिताः स्वराज्ञस् ते ऽनु निर्वेशं गत्वा ते चुक्रुशुर् भृशम्

|| iti śrīnarasiṃhapurāṇe mārkaṇḍeyamṛtyuṃjayo nāma saptamo 'dhyāyaḥ || narp 7 || mṛtyuś ca kiṃkarāś caiva viṣṇudūtaiḥ prapīḍitāḥ svarājñas te 'nu nirveśaṃ gatvā te cukruśur bhṛśam

हिन्दी अर्थ

यमाष्टक--यमराजका अपने दूतके प्रति उपदेश ३७ स्वयं ही प्रणाम करता हूँ। भगवद्भक्तोंके चिन्तन एवं स्मरणमें अपना मन लगाकर मैं भी भगवान् वासुदेवसे अपनी सुगति चाहता हूँ। मैं मधुसूदनके वशमें हूँ, स्वतन्त्र नहीं हूँ। भगवान् विष्णु मेरा भी नियन्त्रण करनेमें समर्थ

English

Yama prevents death and his Dutas to visit the devotees of Lord Vi$nu, departure of the hellish organism to the abode of Lord Visnu.

अध्याय ८

श्लोक 2

शृणु राजन् वचो ऽस्माकं तवाग्रे यद् ब्रवीमहे त्वदादेशाद् वयं गत्वा मृत्युं संस्थाप्य दूरतः

śṛṇu rājan vaco 'smākaṃ tavāgre yad bravīmahe tvadādeśād vayaṃ gatvā mṛtyuṃ saṃsthāpya dūrataḥ

हिन्दी अर्थ

हैं। जो भगवानूसे विमुख है, उसे कभी सिद्धि (मुक्ति) नहीं प्रात हो सकती; विष अमृत हो जाय, ऐसा कभी सम्भव नहीं है; लोहा सैकड़ों वर्षोतक आगमें तपाया जाय, तो भी कभी सोना नहीं हो सकता; चन्द्रमाको कलङ्कित कान्ति कभी निष्कलङ्क नहीं हो सकती; वह कभी सूर्यके समान प्रकाशमान नहीं हो सकता; परंतु जो अनन्यचित्त होकर भगवान् विष्णुके चिन्तनमें लगा है, वह मनुष्य अपने शरीरसे अत्यन्त मलिन होनेपर भी

English

Vyasa said- The god of death as also the Yamaduta started wailing and crying with pains severely inflicted by Visnudutas, on their return to the palace of Yama.

अध्याय ८

श्लोक 3

ब्राह्मणस्य समीपं च भृगोः पौत्रस्य सत्तम तं ध्यायमानं कमपि देवम् एकाग्रमानसम्

brāhmaṇasya samīpaṃ ca bhṛgoḥ pautrasya sattama taṃ dhyāyamānaṃ kamapi devam ekāgramānasam

हिन्दी अर्थ

बड़ी शोभा पाता है। महान् लोकतत्त्वका अच्छी तरह विचार करनेपर भी यही निश्चित होता है कि भगवानूकी उपासनाके बिना सिद्धि नहीं प्राप्त हो सकती; इसलिये देवगुरु बृहस्पतिके ऊपर सुदृढ़ अनुकम्पा करनेवाले भगवच्चरणोंका तुमलोग मोक्षके लिये स्मरण करते रहो। जो लोग सैकड़ों पुण्योंके फलस्वरूप इस सुन्दर मनुष्य- शरीरको पाकर भी व्यर्थ विषयसुखोंमें रमण करते हैं, मोक्षपथका अनुसरण नहीं करते, वे मानो राखके लिये

English

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अध्याय ८

श्लोक 4

गन्तुं न शक्तास् तत्पार्श्वं वयं सर्वे महामते यावत् तावन् महाकायैः पुरुषैर् मुशलैर् हताः

gantuṃ na śaktās tatpārśvaṃ vayaṃ sarve mahāmate yāvat tāvan mahākāyaiḥ puruṣair muśalair hatāḥ

हिन्दी अर्थ

जल्दी-जल्दी चन्दनकी लकड़ीको फूँक रहे हैं। बड़े- बड़े देवेश्वर हाथ जोड़कर मुकुलित करपङ्कज-कोषद्वारा जिन भगवानूके चरणारविन्दोंको प्रणाम करते हैं तथा जिनकी गति कभी और कहीं भी प्रतिहत नहीं होती, उन भवजन्मनाशक एवं सबके अग्रज सनातन पुरुष भगवान् विष्णुको नमस्कार है''॥ १--८॥

English

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अध्याय ८

श्लोक 5

वयं निवृत्तास् तद् वीक्ष्य मृत्युस् तत्र गतः पुनः अस्मान् निर्भर्त्स्य तत्रायं तैर् नरैर् मुशलैर् हतः

vayaṃ nivṛttās tad vīkṣya mṛtyus tatra gataḥ punaḥ asmān nirbhartsya tatrāyaṃ tair narair muśalair hataḥ

हिन्दी अर्थ

श्रीव्यासजी कहते हैं--इस पवित्र यमाष्टकको जो पढ़ता अथवा सुनता है, वह सब पापोंसे मुक्त हो विष्णुलोकको चला जाता है। भगवान् विष्णुको भक्तिको बढ़ानेवाला यमराजका यह उत्तम वचन मैंने इस समय तुमसे कहा है; अब पुनः उसी पुरानी कथाको अर्थात् भृगुके पौत्र मार्कण्डेयजीने पूर्वकालमें जो कुछ किया

English

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अध्याय ८

श्लोक 6

एवम् अत्र तम् आनेतुं ब्राह्मणं तपसि स्थितम् अशक्ता वयम् एवात्र मृत्युना सह वै प्रभो

evam atra tam ānetuṃ brāhmaṇaṃ tapasi sthitam aśaktā vayam evātra mṛtyunā saha vai prabho

हिन्दी अर्थ

भृगोस्तु पौत्रेण च या पुरा कृता॥ १० था, उसको कहुँगा मार्कण्डेयका विवाह कर वेदशिराको उत्पन्न करके प्रयागमें अक्षयवटके नीचे तप एवं भगवानकी स्तुति करना; फिर आकाशवाणीके अनुसार स्तुति करनेपर भगवान्का उन्हें आशीर्वाद एवं वरदान देना तथा मार्कण्डेयजीका क्षीरसागरमें जाकर पुनः उनका दर्शन करना

English

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अध्याय ८

श्लोक 7

तद् ब्रवीहि महाभाग यद् ब्रह्म ब्राह्मणस्य तु देवं कं ध्यायते विप्रः के वा ते यैर् हता वयम्

tad bravīhi mahābhāga yad brahma brāhmaṇasya tu devaṃ kaṃ dhyāyate vipraḥ ke vā te yair hatā vayam

हिन्दी अर्थ

स जगाम पितुर्गेहं मार्कण्डेयो महामतिः ॥ कृत्वा विवाहं धर्मेण भृगोर्वाक्यविशेषतः। इष्ट्वा यज्ञैस्तु देवेशं नारायणमनामयम्

English

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अध्याय ८

श्लोक 8

इत्युक्तः किंकरैः सर्वैर् मृत्युना च महामते ध्यात्वा क्षणं महाबुद्धिः प्राह वैवस्वतो यमः

ityuktaḥ kiṃkaraiḥ sarvair mṛtyunā ca mahāmate dhyātvā kṣaṇaṃ mahābuddhiḥ prāha vaivasvato yamaḥ

हिन्दी अर्थ

मार्कण्डेयो महातेजास्तेपे वटतले तपः॥ तं देवं द्रष्ठुमिच्छन् यः स॒ तेपे परमं तपः॥ वायुभक्षश्चिरं कालं तपसा शोषयंस्तनुम्। एकदा तु महातेजा मार्कण्डेयो महामतिः॥

English

The death and Yamadutas said- O king, listen to what we are going to report to you. We went near Markandeya, the grand- son of Bhrgu, leaving behind the death according to your orders given. However, he has in meditation on any god that time, O Satpurusa. We had yet to reach him when suddenly the giant Purusas appeared and started blowing musalas on us. Frightened of the sudden blows, we turned back immediately and the god of death then visited there. The Purusas did not take the least care of him also and same treatment was made. Thus, we including the god of death could not bring that Brahmana here. O master, please, tell us the penance on which he was doing meditation, the name of god in his imagination and further, the reference of the people who badly hurt us.

अध्याय ८

श्लोक 9

शृण्वन्तु किंकराः सर्वे मृत्युश् चान्ये च मे वचः सत्यम् एतत् प्रवक्ष्यामि ज्ञानं यद् योगमार्गतः

śṛṇvantu kiṃkarāḥ sarve mṛtyuś cānye ca me vacaḥ satyam etat pravakṣyāmi jñānaṃ yad yogamārgataḥ

हिन्दी अर्थ

आराध्य माधवं देवं गन्धपुष्पादिभिः शुभैः। नमामि विष्णुं पुरुषं पुरातनम्॥

English

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अध्याय ८

श्लोक 10

भृगोः पौत्रो महाभागो मार्कण्डेयो महामतिः स ज्ञात्वाद्यात्मनः कालं गतो मृत्युजिगीषया

bhṛgoḥ pautro mahābhāgo mārkaṇḍeyo mahāmatiḥ sa jñātvādyātmanaḥ kālaṃ gato mṛtyujigīṣayā

हिन्दी अर्थ

तं शार्ङ्गपाणिं मुनिवृन्दवन्दितम्। श्रीव्यासजी कहते हैं--शुकदेव ! इस प्रकार तपस्याद्वारा अपनी मृत्युको जीतकर प्रशंसित व्रतवाले महाबुद्धिमान् मार्कण्डेयजी पिताके घर गये। वहाँ भूगुजीके विशेष आग्रहसे धर्मपूर्वक विवाह करके उन्होंने विधिके अनुसार

English

Vyasa said- O learned son, hearing this from the death and all other dutas, Yama, the learned son of the sun jerked on his mind for a little while and said

अध्याय ८

श्लोक 11

भृगुणोक्तेन मार्गेण स तेपे परमं तपः हरिम् आराध्य मेधावी जपन् वै द्वादशाक्षरम्

bhṛguṇoktena mārgeṇa sa tepe paramaṃ tapaḥ harim ārādhya medhāvī japan vai dvādaśākṣaram

हिन्दी अर्थ

निरामय (निर्विकार) देवेश्वर भगवान् नारायणका यज्ञोंद्वारा यजन करते हुए उन्होंने श्राद्धसे पितरोंका और अन्नदानसे अतिथियोंका पूजन किया। इसके बाद पुनः प्रयागमें जाकर वहाँके श्रेष्ठतम तीर्थ त्रिवेणीमें स्नान करके महातेजस्वी मार्कण्डेयजी अक्षयवटके नीचे तप करने लगे। जिनके कृपाप्रसादसे उन्होंने पूर्वकालमें मृत्युपर विजय प्राप्त की थी, उन्हीं देवाधिदेवके दर्शनकी इच्छासे उन्होंने उत्कृष्ट तपस्या आरम्भ की। दीर्घकालतक केवल वायु पीकर

English

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अध्याय ८

श्लोक 12

एकाग्रेणैव मनसा ध्यायते हृदि केशवम् सततं योगयुक्तस् तु स मुनिस् तत्र किंकराः

ekāgreṇaiva manasā dhyāyate hṛdi keśavam satataṃ yogayuktas tu sa munis tatra kiṃkarāḥ

हिन्दी अर्थ

तपस्याद्वारा अपने शरीरको सुखाते हुए वे महातेजस्वी महाबुद्धिमान् मार्कण्डेयजी एक दिन गन्ध-पुष्प आदि शुभ उपकरणोंसे भगवान् वेणीमाधवकी आराधना करके उनके सम्मुख स्वस्थचित्तसे खड़े हो गये और हृदयमें उन्हीं शङ्ख-चक्र-गदाधारी गरुडध्वज भगवान् विष्णुका ध्यान करते हुए उनकी स्तुति करने लगे॥ १--७॥

English

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अध्याय ८

श्लोक 13

हरिध्यानमहादीक्षाबलं तस्य महामुनेः नान्यद् वै प्राप्तकालस्य बलं पश्यामि किंकराः

haridhyānamahādīkṣābalaṃ tasya mahāmuneḥ nānyad vai prāptakālasya balaṃ paśyāmi kiṃkarāḥ

हिन्दी अर्थ

मार्कण्डेयजी बोले--जो भगवान् श्रेष्ठ नर, नृसिंह और नरनाथ (मनुष्योंके स्वामी) हैं, जिनकी भुजाएँ लम्बी हैं, नेत्र प्रफुल्ल कमलके समान विशाल हैं तथा चरणारविन्द असंख्य भूपतियोंद्वारा पूजित हैं, उन पुरातन पुरुष भगवान् विष्णुको मैं नमस्कार करता हूँ। जो संसारके पालक हैं, क्षीरसमुद्र जिनका निवास-स्थान है, जो हाथमें शार्ङ्गधनुष धारण किये रहते हैं, मुनिवृन्द जिनकी वन्दना करते हैं, जो लक्ष्मीके पति हैं और

English

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अध्याय ८

श्लोक 14

हृदिस्थे पुण्डरीकाक्षे सततं भक्तवत्सले पश्यन् तं विष्णुभूतं नु को हि स्यात् केशवाश्रयम्

hṛdisthe puṇḍarīkākṣe satataṃ bhaktavatsale paśyan taṃ viṣṇubhūtaṃ nu ko hi syāt keśavāśrayam

हिन्दी अर्थ

लक्ष्मीको निरन्तर अपने हृदयमें धारण करते हैं, उन सर्वसमर्थ, सर्वेश्वर, अनन्त तेजोमय, भगवान् गोविन्दको आक १० ङ्ह तिवा कर विशी प कार पय न अध्याय १० 1 माका विवाह ऊत सी तही काबा म

English

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अध्याय ८

श्लोक 15

ते ऽपि वै पुरुषा विष्णोर् यैर् यूयं ताडिता भृशम् अत ऊर्ध्वं न गन्तव्यं यत्र वै वैष्णवाः स्थिताः

te 'pi vai puruṣā viṣṇor yair yūyaṃ tāḍitā bhṛśam ata ūrdhvaṃ na gantavyaṃ yatra vai vaiṣṇavāḥ sthitāḥ

हिन्दी अर्थ

गुरुं पुराणं पुरुषोत्तमं प्रभुम्। क्षितीश्वरं लोकपतिं प्रजापतिम्। परं पराणामपि कारणं हरिं

English

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अध्याय ८

श्लोक 16

न चित्रं ताडनं तत्र अहं मन्ये महात्मभिः भवतां जीवनं चित्रं यक्षैर् दत्तं कृपालुभिः

na citraṃ tāḍanaṃ tatra ahaṃ manye mahātmabhiḥ bhavatāṃ jīvanaṃ citraṃ yakṣair dattaṃ kṛpālubhiḥ

हिन्दी अर्थ

नमामि लोकत्रयकर्मसाक्षिणम् पुरा हि शेते भगवाननादिकृत्। क्षीरोदवीचीकणिकाम्बुनोक्षितं

English

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अध्याय ८

श्लोक 17

नारायणपरं विप्रं कस् तं वीक्षितुम् उत्सहेत् युष्माभिश् च महापापैर् मार्कण्डेयं हरिप्रियम् समानेतुं कृतो यत्नः समीचीनं न तत् कृतम्

nārāyaṇaparaṃ vipraṃ kas taṃ vīkṣitum utsahet yuṣmābhiś ca mahāpāpair mārkaṇḍeyaṃ haripriyam samānetuṃ kṛto yatnaḥ samīcīnaṃ na tat kṛtam

हिन्दी अर्थ

तं श्रीनिवासं प्रणतोऽस्मि केशवम् समस्तलोकार्तिहरं हिरण्यकं

English

Yama said- Listen to the matter I am going to refer, O the death and my all other servants. Whatever had come to my cognisance by virtue of meditation (yogamarga), is that the wisest Markandeya was known to his death today earlier and he had visited the tapovana with the sole desire to conquer the death. He has under guidance Bhrgu, worshipped lord Visnu and made severe penance with recital of the twelve letter hymn. Dear representatives, that Muni is concentrating on lord Kes'ava with keen attention and imagination of lord in his heart. Servants, he has thus, attained the force of Mahadaksa for the concentration on lord Visnu. Otherwise no other force than that can protect the man whose time of death has come. Who can even gaze at the man who had enshrined lord Visnu undeviatingly in his heart?

अध्याय ८

श्लोक 18

नरसिंहं महादेवं ये नराः पर्युपासते तेषां पार्श्वे न गन्तव्यं युष्माभिर् मम शासनात्

narasiṃhaṃ mahādevaṃ ye narāḥ paryupāsate teṣāṃ pārśve na gantavyaṃ yuṣmābhir mama śāsanāt

हिन्दी अर्थ

नमामि विष्णुं सततं नमामि तम् प्रणाम करता हूँ। जो अजन्मा, सबके वरणीय, जन- समुदायके दुःखोंका नाश करनेवाले, गुरु, पुराण- पुरुषोत्तम एवं सबके स्वामी हैं, सहस्रं सूर्योके समान जिनकी कान्ति है तथा जो अच्युतस्वरूप हैं, उन

English

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अध्याय ८

श्लोक 19

स एवं किंकरान् उक्त्वा मृत्युं च पुरतः स्थितम् यमो निरीक्ष्य च जनं नरकस्थं प्रपीडितम्

sa evaṃ kiṃkarān uktvā mṛtyuṃ ca purataḥ sthitam yamo nirīkṣya ca janaṃ narakasthaṃ prapīḍitam

हिन्दी अर्थ

आदिमाधव भगवान् विष्णुको मैं भक्तिभावसे प्रणाम करता हूँ। जो पुण्यात्मा भक्तोंके ही समक्ष सगुण- साकार रूपसे प्रकट होते हँ, सबकी परमगति हैं, भूमि, लोक और प्रजाओंके पति हैं, “पर” अर्थात् कारणोंके भी परम कारण हैं तथा तीनों लोकोंके कर्मोके साक्षी हैं, उन भगवान् विष्णुको मैं नमस्कार करता हूँ। जो अनादि विधाता भगवान् पूर्वकालमें क्षीरसमुद्रके भीतर ' अनन्त’ नामक शेषनागके शरीररूपी शय्यापर सोये थे,

English

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अध्याय ८

श्लोक 20

कृपया परया युक्तो विष्णुभक्त्या विशेषतः जनस्यानुग्रहार्थाय तेनोक्ताश् च गिरः शृणु

kṛpayā parayā yukto viṣṇubhaktyā viśeṣataḥ janasyānugrahārthāya tenoktāś ca giraḥ śṛṇu

हिन्दी अर्थ

क्षीरसिन्धुकी तरज्ञोंक जलकणोंसे अभिषिक्त होनेवाले उन लक्ष्मीनिवास भगवान् केशवको मैं प्रणाम करता हूँ। जिन्होंने नरसिंहस्वरूप धारण किया है, जो महान् देवता हैं, मुर हैत्यके शत्रु हैं, मधु तथा कैटभ नामक हैत्योंका अन्त करनेवाले हैं और समस्त लोकोंकी पीड़ा दूर करनेवाले एवं हिरण्यगर्भ हैं, उन भगवान् विष्णुको मैं सदा नमस्कार करता हूँ। जो अनन्त, अव्यक्त, इन्द्रियातीत, सर्वव्यापी और अपने विभिन्न रूपोंमें स्वयं ही प्रतिष्ठित

English

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अध्याय ८

श्लोक 21

नरके पच्यमानस्य यमेन परिभाषितम् किं त्वया नार्चितो देवः केशवः क्लेशनाशनः

narake pacyamānasya yamena paribhāṣitam kiṃ tvayā nārcito devaḥ keśavaḥ kleśanāśanaḥ

हिन्दी अर्थ

हैं तथा योगेश्वरगण जिनके चरणोंमें सदा ही मस्तक झुकाते हैं, उन भगवान् जनार्दनको मैं भक्तिपूर्वक निरन्तर प्रणाम करता हूँ। जो आनन्दमय, एक (अद्वितीय), रजोगुणसे रहित, ज्ञानस्वरूप, वृन्दा (लक्ष्मी)-के धाम और योगियोंद्वारा पूजित हैं; जो अणुसे भी अत्यन्त अणु और वृद्धि तथा क्षयसे शून्य हैं, उन भक्तप्रिय भगवान् विष्णुको मैं प्रणाम करता हूँ॥ ८--१५॥

English

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अध्याय ८

श्लोक 22

उदकेनाप्य् अलाभे तु द्रव्याणां पूजितः प्रभुः यो ददाति स्वकं लोकं स त्वया किं न पूजितः

udakenāpy alābhe tu dravyāṇāṃ pūjitaḥ prabhuḥ yo dadāti svakaṃ lokaṃ sa tvayā kiṃ na pūjitaḥ

हिन्दी अर्थ

अणोरणीयांसमवृद्धिमक्षयं श्रीव्यासजी कहते हैं--वत्स! इस प्रकार स्तुति रं नमामि भक्तप्रियमीश्वरं हरिम्॥ १५ ९ होनेपर उस तीर्थमें तपस्या करनेवाले उन महाभाग pss मार्कण्डेयजीसे आकाशवाणीने कहा-- ब्रह्मन्! क्यों क्लेश उठा रहे हो, तुम्हें जो भगवान् माधवका दर्शन नहीं हो रहा है, वह तभीतक जबतक तुम समस्त तीर्थोमें स्नान नहीं कर लेते' उसके यों कहनेपर महामति मार्कण्डेयजीने समस्त तीर्थामें त्रान किया (परंतु जब फिर भी दर्शन

English

The people are also the messengers from lord Visnu who have inflicted pain on you all. See that you will leave the place where devotees of Visnu existed. It is not a matter

अध्याय ८

श्लोक 23

नरसिंहो हृषीकेशः पुण्डरीकनिभेक्षणः स्मरणान् मुक्तिदो नृणां स त्वया किं न पूजितः

narasiṃho hṛṣīkeśaḥ puṇḍarīkanibhekṣaṇaḥ smaraṇān muktido nṛṇāṃ sa tvayā kiṃ na pūjitaḥ

हिन्दी अर्थ

नहीं हुआ, तब उन्होंने आकाशवाणीको लक्ष्य करके कहा--) “जो कार्य करनेसे समस्त तीर्थोमें स्नान करना सफल होता है, अथवा समस्त तीर्थामे सानका फल मिल जाता है, वह कार्य मुझे प्रसन्न होकर आप बतलाइये। आप जो भी हों, आपको नमस्कार है'॥ १६--१८॥

English

Do you get surprised that they have not slain you. Who can even dare to see the Brahmin so busy in his devotion to lord Narayana? You, the evil-doer have not good anyway in the form of effort for bringing him here. Put ear to my order that you will not go to the sacred souls who keep them engaged in the service of Lord

अध्याय ८

श्लोक 24

इत्य् उक्त्वा नारकान् सर्वान् पुनर् आह स किंकरान् वैवस्वतो यमः साक्षाद् विष्णुभक्तिसमन्वितः

ity uktvā nārakān sarvān punar āha sa kiṃkarān vaivasvato yamaḥ sākṣād viṣṇubhaktisamanvitaḥ

हिन्दी अर्थ

मार्कण्डेयं महाभागं तीर्थेऽनु तपसि स्थितम् किमर्थ क्लिश्यते ब्रह्मंस्त्वया यो नैव दृश्यते। माधवः सर्वतीर्थेषु यावन्न स्रानमाचरेः

English

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अध्याय ८

श्लोक 25

नारदाय स विश्वात्मा प्राहैवं विष्णुर् अव्ययः अन्येभ्यो वैष्णवेभ्यश् च सिद्धेभ्यः सततं श्रुतम्

nāradāya sa viśvātmā prāhaivaṃ viṣṇur avyayaḥ anyebhyo vaiṣṇavebhyaś ca siddhebhyaḥ satataṃ śrutam

हिन्दी अर्थ

स्तोत्रेणानेन विप्रेन्द्र स्तुहि नारायणं प्रभुम्। नान्यथा सर्वतीर्थानां फलं प्राप्स्यसि सुव्रत मार्कण्डेय उवाच तदेवाख्याहि भगवन् स्तोत्रं तीर्थफलप्रदम्। येन जप्तेन सकलं तीर्थसत्रानफलं लभेत्

English

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अध्याय ८

श्लोक 26

तद् वः प्रीत्या प्रवक्ष्यामि हरिवाक्यम् अनुत्तमम् शिक्षार्थं किंकराः सर्वे शृणुत प्रणता हरेः

tad vaḥ prītyā pravakṣyāmi harivākyam anuttamam śikṣārthaṃ kiṃkarāḥ sarve śṛṇuta praṇatā hareḥ

हिन्दी अर्थ

जय जय देवदेव जय माधव केशव। जय पदापलाशाक्ष जय गोविन्द गोपते जय पद्य हृषीकेश जय दामोदराच्युत

English

Vyasa said- Sukadeva, having ordered the god of death and the messengers present there, Yama started at the troubled people of the hell. Whatever he had said to them in vagary of mercy under influence of devotion to lord Visnu, listen that very carefully. Yama said to those suffering organism - O consumer of fruit for vices committed, why had you not worshipped lord Visnu, in you life-time? Why had you not worshipped such a god who pleases with the worship made by only water even in the absence of other ritual materials and endow the devotee even his abode also? Why had you not worshipped Nrsimha form and lotus-eyed lord who provides with emancipation merely thinking of him?

अध्याय ८

श्लोक 27

हे कृष्ण कृष्ण कृष्णेति यो मां स्मरति नित्यशः जलं भित्त्वा यथा पद्मं नरकाद् उद्धराम्य् अहम्

he kṛṣṇa kṛṣṇa kṛṣṇeti yo māṃ smarati nityaśaḥ jalaṃ bhittvā yathā padmaṃ narakād uddharāmy aham

हिन्दी अर्थ

जय पदोश्वरानत जय लोकगुरो जय। जय शङ्खगदापाणे जय भूधरसूकर जय यज्ञेश वाराह जय भूधर भूमिप। जय योगेश योगज जय योगप्रवर्त्तक

English

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अध्याय ८

श्लोक 28

पुण्डरीकाक्ष देवेश नरसिंह त्रिविक्रम त्वाम् अहं शरणं प्राप्त इति यस् तं समुद्धरे

puṇḍarīkākṣa deveśa narasiṃha trivikrama tvām ahaṃ śaraṇaṃ prāpta iti yas taṃ samuddhare

हिन्दी अर्थ

जय योगप्रवरत्तंक जय धर्मप्रवर्त्तक। कृतप्रिय जय जय यज्ञेश यज्ञाङ्ग जय जय जय चतुर्भुज ( श्री ) जयदेव जय हैत्यभयावह। जय सर्वज्ञ सर्वात्मन् जय शंकर शाश्वत

English

Yama, the son of sun and devotee to Vis nu then turned to his servants and suggested -O servants, the words of god (Bhagavadvakya) as said by lord himself to Narada ad oftenly heard from other devotees to Visnu and siddhas; is being said by me to educate you. Listen all you people with keen devotion for lord Visnu.

अध्याय ८

श्लोक 29

त्वां प्रपन्नो ऽस्मि शरणं देवदेव जनार्दन इति यः शरणं प्राप्तस् तं क्लेशाद् उद्धराम्य् अहम्

tvāṃ prapanno 'smi śaraṇaṃ devadeva janārdana iti yaḥ śaraṇaṃ prāptas taṃ kleśād uddharāmy aham

हिन्दी अर्थ

जय विष्णो महादेव जय नित्यमधोक्षज। प्रसादं कुरु देवेश दर्शयाद्य स्वकां तनुम् इत्येवं कीर्तिते तेन मार्कण्डेयेन धीमता। प्रादुर्बभूव भगवान् पीतवासा जनार्दन:

English

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अध्याय ८

श्लोक 30

इत्य् उदीरितम् आकर्ण्य हरिवाक्यं यमेन च नारकाः कृष्ण कृष्णेति नारसिंहेति चुक्रुशुः

ity udīritam ākarṇya harivākyaṃ yamena ca nārakāḥ kṛṣṇa kṛṣṇeti nārasiṃheti cukruśuḥ

हिन्दी अर्थ

तेजसा द्योतयन् सर्वा दिशो विष्णुः सनातनः प्रबद्धसम्पुटकरो गोविन्दं पुरतः स्तुवन्

English

T 3 T Snt-ilsfRT Vital -animal

अध्याय ८

श्लोक 31

यथा यथा हरेर् नाम कीर्तयन्त्य् अत्र नारकाः तथा तथा हरेर् भक्तिम् उद्वहन्तो ऽब्रुवन्न् इदम्

yathā yathā harer nāma kīrtayanty atra nārakāḥ tathā tathā harer bhaktim udvahanto 'bruvann idam

हिन्दी अर्थ

आकाशवाणीने कहा-विप्रनदर ! सुव्रत ! इस स्तोत्रसे प्रभुवर नारायणका स्तवन करो; और किसी उपायसे तुम्हें समस्त तीथाँका फल नहीं प्रास होगा मार्कण्डेयजी बोले-भगवन्! जिसका जप करनेसे तीर्थख्रानका सम्पूर्ण फल प्राप्त हो जाता है, वह तीर्थफल- दायक स्तोत्र कौन-सा है? उसे ही मुझे बताइये

English

II The god said- I pick up the person from the hell fire the same way as the lotus come above the level of water who recites "He Krsna, Krsna, Krsna,. I immediately provide support (Uddhara) to the man who calls me Deves'vara, Nrsimha, Trivikrama, I am sheltered by you." I remove all pains of a devotee who takes shelter under me with expressive word - "Devadhideva, Janardana, I have come in for shelter under you."

अध्याय ८

श्लोक 32

ॐ नमो भगवते तस्मै केशवाय महात्मने यन्नामकीर्तनात् सद्यो नरकाग्निः प्रशाम्यति

oṃ namo bhagavate tasmai keśavāya mahātmane yannāmakīrtanāt sadyo narakāgniḥ praśāmyati

हिन्दी अर्थ

आकाशवाणीने कहा--देवदेव! माधव! केशव! आपकी जय हो, जय हो। आपके नेत्र प्रफुल्ल कमलदलके समान शोभा पाते हैं। गोविन्द! गोपते! आपकी जय हो, जय हो। पद्मनाभ! वैकुण्ठ ! वामन! आपकी जय हो, जय हो, जय हो। पदस्वरूप हृषीकेश! आपकी जय हो। दामोदर! अच्युत! आपको जय हो । लक्ष्मीपते! अनन्त! आपकी जय हो। लोकगुरो! आपकी जय हो, जय हो। शङ्ख और गदा धारण करनेवाले तथा पृथ्वीको उठानेवाले भगवान् वाराह!

English

$rq<)Rdhre si K i gRd i cKi -qfrr *n HK=hi: ^ror efAulfri dHpReifrl :ll?o

अध्याय ८

श्लोक 33

भक्तप्रियाय देवाय रक्षाय हरये नमः लोकनाथाय शान्ताय यज्ञेशायादिमूर्तये

bhaktapriyāya devāya rakṣāya haraye namaḥ lokanāthāya śāntāya yajñeśāyādimūrtaye

हिन्दी अर्थ

आपकी जय हो, जय हो। यज्ञेश्वर! पृथ्वीका धारण तथा पोषण करनेवाले वाराह! आपकी जय हो, जय हो। योगके ईश्वर, ज्ञाता और प्रवर्तक! आपकी जय हो, जय हो। योग और धर्मके प्रवर्तक! आपकी जय हो, जय हो। कर्मप्रिय! यज्ञेश्वर! यज्ञाङ्ग! आपकी जय हो, जय हो, जय हो। उत्तम ब्राह्मणोंकी वन्दना करने-उन्हें सम्मान देनेवाले देवता! आपकी जय हो और नारदजीको सिद्धि देनेवाले परमेश्वर! आपकी जय हो। पुण्यवानोंके आश्रय, वैदिक वाणीके

English

Vyasa said- O son, The organism suffering from the hell fire started reciting loudly the names of god as 'Krsna, Krsna, Nrsimha etc., when they heard the declaration of god himself from the mouth of Yama. It was a phenomenon that in proportion to the recital of the lord's names, the hellish organism tended to be filled with the devotion for lord Visnu. So filled with the devotion, they started saying

अध्याय ८

श्लोक 34

अनन्तायाप्रमेयाय नरसिंहाय ते नमः नारायणाय गुरवे शङ्खचक्रगदाभृते

anantāyāprameyāya narasiṃhāya te namaḥ nārāyaṇāya gurave śaṅkhacakragadābhṛte

हिन्दी अर्थ

चरम तात्पर्यभूत एवं वेदोक्त कर्मोके परम आश्रय नारायण! आपकी जय हो, जय हो। चतुर्भुज! आपकी जय हो। हैत्योंको भय देनेवाले श्रीजयदेव! आपकी जय हो, जय हो। सर्व !सर्वात्मन्।आपकी जय हो ।सनातनदेव कल्याणकारी भगवन्! आपकी जय हो, जय हो। महादेव! विष्णो! अधोक्षज! देवेश्वर! आप मुझपर प्रसन्न होइये और आज मुझे अपने स्वरूपका प्रत्यक्ष दर्शन कराइये॥ २१--२८॥

English

derailiy y^ft fyyprra T<ft

अध्याय ८

श्लोक 35

वेदप्रियाय महते विक्रमाय नमो नमः वाराहायाप्रतर्क्याय वेदाङ्गाय महीभृते

vedapriyāya mahate vikramāya namo namaḥ vārāhāyāpratarkyāya vedāṅgāya mahībhṛte

हिन्दी अर्थ

श्रीव्यासजी कहते हैं-शुकदेव! आकाशवाणीके 'कथनानुसार जब बुद्धिमान् मार्कण्डेयजीने इस प्रकार भगवन्नामोंका कीर्तन किया, तब पीताम्बरधारी भगवान् जनार्दन वहाँ प्रकट हो गये। वे सनातन भगवान् विष्णु हाथोंमें शङ्ख, चक्र और गदा लिये, समस्त आभूषणोंसे भूषित हो अपने तेजसे सम्पूर्ण दिशाओंको प्रकाशित कर रहे थे। भृगुवंशको आनन्दित करनेवाले मार्कण्डेयजीने भगवानको, जिनका दर्शन चिरकालसे प्रार्थित था,

English

w igf?raft wnra to:i cptRiy ypm y^ijpjiRuin^ii

अध्याय ८

श्लोक 36

नमो द्युतिमते नित्यं ब्राह्मणाय नमो नमः वामनाय बहुज्ञाय वेदवेदाङ्गधारिणे

namo dyutimate nityaṃ brāhmaṇāya namo namaḥ vāmanāya bahujñāya vedavedāṅgadhāriṇe

हिन्दी अर्थ

सहसा सामने प्रकट हुआ देख, भक्तिविवश हो, भूमिपर मस्तक रखकर प्रणाम किया। भूमिपर गिर-गिरकर बारंबार साष्टांग प्रणाम करके खड़े हो, महामना मार्कण्डेय दोनों हाथ जोड़ सामने उपस्थित हुए भगवानूकी इस प्रकार स्तुति करने लगे

English

The hellish organism said- We salute the great soul lord Kesava, by the recital of whose name the hellish fire is immediately extinguished. Salute lord Visnu, the Isvara by offering Adimurti, always in peace and master of the world. Salutation to Sri Narayana who is everlasting, incomparable in the form of Nrsimha, who holds a conch- shell, discus, gada and teachers the lokas. The god, favourite to the Vedas, great and dynamic in particular. Salutation is conveyed to lord Varaha who is beyond the scope of logic, in the form of the Vedas, holder of earth. Salutation to lord Brahma, born in Brahmin clan, learned in the Vedas and their segments (angas) and well-versed

अध्याय ८

श्लोक 37

बलिबन्धनदक्षाय वेदपालाय ते नमः विष्णवे सुरनाथाय व्यापिने परमात्मने

balibandhanadakṣāya vedapālāya te namaḥ viṣṇave suranāthāya vyāpine paramātmane

हिन्दी अर्थ

अध्याय ६७) केक विवाह कर न V8 अध्याय १० 1 मा्कणडेयका विवाह कर वेदशिराको उत्क्रांत एवं भनसा सिका ध नमोऽस्तु ते देवदेव महाचित्त महाकाय महाप्राज्ञ महादेव महाकीर्त्ते ब्रहोन्द्रचन्द्र- रूद्राचितपादयुगल श्रीपदाहस्त सम्मर्दितहैत्य-

English

Lord Visnu in the form of Vamana is saluted.

अध्याय ८

श्लोक 38

चतुर्भुजाय शुद्धाय शुद्धद्रव्याय ते नमः जामदग्न्याय रामाय दुष्टक्षत्रान्तकारिणे

caturbhujāya śuddhāya śuddhadravyāya te namaḥ jāmadagnyāya rāmāya duṣṭakṣatrāntakāriṇe

हिन्दी अर्थ

रनवरतमभिचिन्तितमोक्षतत्त्व । गन्धर्व- यश: ॥ ३४॥ नृसिंह नारायण पदानाभ गोविन्द गोवर्द्धनगुहानिवास योगीश्वर देवेश्वर जलेश्वर

English

He had tied Bali under promissory- estoppel, implemented and protected the Vedas. He is master of all gods, omnipresent and the supreme soul. Lord Caturbhuja is saluted. He is in the form of purity and pure metal. God Parasurama is saluted as he had destroyed the wicked Ks atriyas. Salutation is conveyed to the great soul 3rl Rama who had killed Ravana. Govinda, we salute you frequently. Please, pick us from this hell, full of odour.

अध्याय ८

श्लोक 39

रामाय रावणान्ताय नमस् तुभ्यं महात्मने अस्मान् उद्धर गोविन्द पूतिगन्धान् नमो ऽस्तु ते

rāmāya rāvaṇāntāya namas tubhyaṃ mahātmane asmān uddhara govinda pūtigandhān namo 'stu te

हिन्दी अर्थ

यशोधर कीर्तिधर त्रिगुणनिवास त्रितत्त्वधर त्रेताग्रिधर ॥ ३६॥ त्रिवेदभाक् त्रिनिकेत त्रिसुपर्ण केयूरहारमणिरत्नांशुदीसिविद्योतितसर्वदिश

English

cT^T TTT TTW TfteT W M MstW-Uqu^oii TRifhy Rmi-nj gRyw: i

अध्याय ८

श्लोक 40

इति संकीर्तिते विष्णौ नारकैर् भक्तिपूर्वकम् तदा सा नारकी पीडा गता तेषां महात्मनाम्

iti saṃkīrtite viṣṇau nārakair bhaktipūrvakam tadā sā nārakī pīḍā gatā teṣāṃ mahātmanām

हिन्दी अर्थ

विश्वमूर्ते ॥ ३९ ॥ लोकनाथ यज्ञेश्वर यज्ञप्रिय तेजोमय भक्तिप्रिय वासुदेव दुरितापहाराराध्य पुरुषोत्तम नमोऽस्तु ते इत्युदीरितमाकर्ण्यं भगवांस्तु जनार्दनः। देवदेवः प्रसन्नात्मा मार्कण्डेयमुवाच ह

English

ywiiPf %tnft ivicjid'y^iiu^n

अध्याय ८

श्लोक 41

कृष्णरूपधराः सर्वे दिव्यवस्त्रविभूषिताः दिव्यगन्धानुलिप्ताङ्गा दिव्याभरणभूषिताः

kṛṣṇarūpadharāḥ sarve divyavastravibhūṣitāḥ divyagandhānuliptāṅgā divyābharaṇabhūṣitāḥ

हिन्दी अर्थ

स्तोत्रैरपि महाबुद्धे नष्टपापोऽसि साम्प्रतम् नातसतपसा ब्रह्मन् द्रष्ट साध्योऽहमञ्जसा॥

English

Ttftf Ttftf ?frpft:i fftwicllch wr fftr ?RTfll^?ll

अध्याय ८

श्लोक 42

तान् आरोप्य विमानेषु दिव्येषु हरिपूरुषाः तर्जयित्वा यमभटान् नीतास् ते केशवालयम्

tān āropya vimāneṣu divyeṣu haripūruṣāḥ tarjayitvā yamabhaṭān nītās te keśavālayam

हिन्दी अर्थ

मार्कण्डेयजी बोले--महामना! महाकाय! महामते! महादेव! महायशस्वी! देवाधिदेव! आपको नमस्कार है। ब्रह्मा, इन्द्र, चन्द्रमा तथा रुद्र निरन्तर आपके युगल- चरणारविन्दोंकी अर्चना करते हैं। आपके हाथमें शोभाशाली कमल सुशोभित होता है; आपने हैत्योंके शरीरोंको मसल डाला है, आपको नमस्कार है। आप “अनन्त' नामसे विख्यात शेषनागके शरीरकी शय्याको अपने सम्पूर्ण अङ्ग समर्पित कर देते हैँ-उसीपर शयन करते हैं। सनक,

English

wr: ^vwivmRi t wfiT w ftft

अध्याय ८

श्लोक 43

नारकेषु च सर्वेषु नीतेषु हरिपूरुषैः विष्णुलोकं यमो भूयो नमश् चक्रे तदा हरिम्

nārakeṣu ca sarveṣu nīteṣu haripūruṣaiḥ viṣṇulokaṃ yamo bhūyo namaś cakre tadā harim

हिन्दी अर्थ

सनन्दन और सनत्कुमार आदि योगीजन अपने नेत्रोंकी दृष्टिको नासिकाके अग्रभागपर सुस्थिर करके नित्य- निरन्तर जिस मोक्षतत्त्वका चिन्तन करते हैं, वह आप ही हैं। गन्धर्व, विद्याधर, यक्ष, किंनर और किम्पुरुष प्रतिदिन आपके ही दिव्य सुयशका गान करते रहते हैं। नृसिंह! नारायण! पद्मनाभ! गोविन्द! गिरिराज गोवर्धनकी कन्दरामें क्रीड़ा-विश्रामादिके लिये निवास करनेवाले! योगीश्वर! देवेश्वर! जलेश्वर और महेश्वर! आपको जमस्कार है।

English

Wpy t fyniTRfimft^T:l Plrt ftsfa ft«fts% ^RATTMIumi

अध्याय ८

श्लोक 44

यन्नामकीर्तनाद् याता नारकाः केशवालयम् तं नमामि सदा देवं नरसिंहम् अहं गुरुम्

yannāmakīrtanād yātā nārakāḥ keśavālayam taṃ namāmi sadā devaṃ narasiṃham ahaṃ gurum

हिन्दी अर्थ

योगधर! महामायाधर! विद्याधर! यशोधर! कीर्तिधर! सत्त्वादि तीनों गुणोंके आश्रय! त्रितत्त्वधारी तथा गार्हपत्यादि तीनों अग्नियोंको धारण करनेवाले देव! आपको प्रणाम है। आप ऋक्, साम और यजुष्-इन तीनों वेदोंके परम प्रतिपाद्य, त्रिनिकेत (तीनों लोकोंके आश्रय), त्रिसुपर्ण,

English

Vyasa said- Sukadeva, the organisms suffering from the hell-fire got immediate relaxation when they recited the pious

अध्याय ८

श्लोक 45

तस्य वै नरसिंहस्य विष्णोर् अमिततेजसः प्रणामं ये ऽपि कुर्वन्ति तेभ्यो ऽपीह नमो नमः

tasya vai narasiṃhasya viṣṇor amitatejasaḥ praṇāmaṃ ye 'pi kurvanti tebhyo 'pīha namo namaḥ

हिन्दी अर्थ

स्निग्ध मेघकी आभाके सदृश सुन्दर श्यामकान्तिसे सुशोभित, पीताम्बरधारी, किरीट, वलय, केयूर और हारोंमें जटित मणिरत्नोंकी किरणोंसे समस्त दिशाओंको प्रकाशित करनेवाले नारायणदेव आपको नमस्कार है । सुवर्ण और मणियोंसे बने हुए कुण्डलोंद्वारा अलंकृत कपोलोंवाले मधुसूदन ! विश्वमूर्ते! आपको प्रणाम है। लोकनाथ ! यज्ञेथर! यज्ञप्रिय! तेजोमय! भक्तिप्रिय वासुदेव! पापहारिन्। आराध्यदेव पुरुषोत्तम! आपको नमस्कार है॥ ३३--४०॥

English

Visnu with keen devotion. They turned in the form of Sri Krsna with divine fragrance smeared on their parts of bodies, divine clothes and adorned with the ornaments. Then the servants of lord Vishnu appeared there and took them to the abode of lord Visnu by aircraft (vimana). They condemned the servants of Yama. Lord Yama again bowed his head before lord Visnu for picking up the sufferer of hell-fire to the abode of Visnu. I always salute lord Visnu in the form of Nrsimha, the recital of whose name is so mighty as it took the hellish organisms to Visnu-dhama. I also salute the people frequently who salute lord Visnu in the form of Nrsimha. Having seen the hell-fire fully extinguished and all devices in the contrary position, Yamaraja himself had determined to educate his messengers again to outright

अध्याय ८

श्लोक 46

दृष्ट्वा प्रशान्तं नरकाग्निम् उग्रं यन्त्रादि सर्वं विपरीतम् अत्र पुनः स शिक्षार्थम् अथात्मदूतान् यमो हि वक्तुं कृतवान् मनः स्वयम्

dṛṣṭvā praśāntaṃ narakāgnim ugraṃ yantrādi sarvaṃ viparītam atra punaḥ sa śikṣārtham athātmadūtān yamo hi vaktuṃ kṛtavān manaḥ svayam

हिन्दी अर्थ

श्रीव्यासजी बोले--इस प्रकार स्तवन सुनकर देवदेव भगवान् जनार्दने प्रसन्नचित्त होकर मार्कण्डेयजीसे कहा श्रीभगवान् बोले-वत्स! मैं तुम्हारे महान् तप और फिर स्तोत्रपाठसे तुमपर बहुत प्रसन्न हूँ। महाबुद्धे! इस समय तुम्हारा सारा पाप नष्ट हो चुका है। विप्रेन्द्र! मैं तुम्हारे सम्मुख वर देनेके लिये उपस्थित हूँ; वर माँगो।

English

Thus, the eight chapter on 'Yama's preaching to his messengers' in Sri Nrsimha Purana approaches the end.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_narasiMhapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Narasimha Purana — Chapter 8
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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