अध्याय २०
श्लोक 1
इति श्रीवामनपुराणे एकोनविंशो ऽध्यायः ________________________________________________________________________ पुलस्त्य उवाच ।ततस्तु तां तत्र तदा वसन्तीं कात्यायनीं शैलवरस्य शृङ्गे ।अपश्यतां दानवसत्तमौ द्वौ चण्डश् च मुण्डश्च तपस्विनीं ताम्
iti śrīvāmanapurāṇe ekonaviṃśo 'dhyāyaḥ ________________________________________________________________________ pulastya uvāca / tatastu tāṃ tatra tadā vasantīṃ kātyāyanīṃ śailavarasya śṛṅge / apaśyatāṃ dānavasattamau dvau caṇḍaś ca muṇḍaśca tapasvinīṃ tām
हिन्दी अर्थ
स्नान, दान, जप, हवन, यज्ञ आदि तथा अन्य शुभ या अशुभ कर्म भी इस श्रेष्ठ क्षेत्रमें आपकी कृपासे अक्षय एवं महान् फल देनेवाले हों तथा है पुण्डरीकाक्ष। हे अच्युत! मेरे नामके व्यक (प्रकाशक) इस कुरुक्षेत्रमें आप सभी देवताओं एवं शिवजीके साथ निवास करें। राजाके ऐसा कहनेपर मैंने उनसे कहा -बहुत
English
Killing of Mahi$5sura