अध्याय २३
श्लोक 1
________________________________________________________________________ देवदेव उवाच ।तस्यां तपत्यां नरसत्तमेन जातः सुतः पार्थिवलक्षणस्तु ।स जातकर्मादिभिरेव संस्कृतो विवर्द्धताज्येन हुतो यथाग्निः
________________________________________________________________________ devadeva uvāca / tasyāṃ tapatyāṃ narasattamena jātaḥ sutaḥ pārthivalakṣaṇastu / sa jātakarmādibhireva saṃskṛto vivarddhatājyena huto yathāgniḥ
हिन्दी अर्थ
(पुत्रके पुत्र) राजा बलिके इस प्रकार पूछनेपर हैत्योंमें प्रधान प्रह्मादने देरतक ध्यान करके तब असुर बलिसे कहा - प्रह्मादने कहा--दानवाधिप! इस समय पहाड़ डगमगा रहे हैं, पृथ्वी एकाएक अपनी (स्वाभाविक) धीरता छोड़ रही है, समुद्रमें जोरोंकी लहरें उठ रही हैं और हैत्य तेजसे रहित हो गये हैं। सूर्योदय होनेपर
English
O great Dvijas! Listen to the dimension of this reservoir as told by the great soul Vyasa during the middle period of Kali and Dvapara