Vamana Purana· Vāmana Purāṇa
23
अध्याय 23 / 95

Adhyaya 23

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अध्याय २३

श्लोक 1

________________________________________________________________________ देवदेव उवाच ।तस्यां तपत्यां नरसत्तमेन जातः सुतः पार्थिवलक्षणस्तु ।स जातकर्मादिभिरेव संस्कृतो विवर्द्धताज्येन हुतो यथाग्निः

________________________________________________________________________ devadeva uvāca / tasyāṃ tapatyāṃ narasattamena jātaḥ sutaḥ pārthivalakṣaṇastu / sa jātakarmādibhireva saṃskṛto vivarddhatājyena huto yathāgniḥ

हिन्दी अर्थ

(पुत्रके पुत्र) राजा बलिके इस प्रकार पूछनेपर हैत्योंमें प्रधान प्रह्मादने देरतक ध्यान करके तब असुर बलिसे कहा - प्रह्मादने कहा--दानवाधिप! इस समय पहाड़ डगमगा रहे हैं, पृथ्वी एकाएक अपनी (स्वाभाविक) धीरता छोड़ रही है, समुद्रमें जोरोंकी लहरें उठ रही हैं और हैत्य तेजसे रहित हो गये हैं। सूर्योदय होनेपर

English

O great Dvijas! Listen to the dimension of this reservoir as told by the great soul Vyasa during the middle period of Kali and Dvapara

अध्याय २३

श्लोक 2

कृतो ऽस्य चूडाकरणश्च देवा विप्रण मित्रावरुणात्मजेन ।नवाब्दिकस्य व्रतबन्धनं च वेदे च शास्त्रे विधिपारगो ऽबूत्

kṛto 'sya cūḍākaraṇaśca devā vipraṇa mitrāvaruṇātmajena / navābdikasya vratabandhanaṃ ca vede ca śāstre vidhipārago 'būt

हिन्दी अर्थ

अब पहलेके समान ग्रहोंकी चाल नहीं दीखती है। इन कारणों (लक्षणों)-से अनुमान होता है कि देवताओंका अभ्युदय होनेवाला है। महाबाहु! दानवेश्वर! यह कोई विशेष कारण अवश्य है। इस कारणको छोटा नहीँ मानना चाहिए और आपको इसका कोई प्रतियत्न (उपाय) करना चाहिए ॥ ५--७॥

English

This reservoir extends in the length from to Astipura and from Kanya Jaradgavl to

अध्याय २३

श्लोक 3

ततश्चतुःपड्भिरपीह वर्षैः सर्वज्ञतामभ्यगमत ततो ऽसौ ।ख्यातः पृथिव्यां पुरुषोत्तमो ऽसौ नाम्ना कुरुः संवरणस्य पुत्रः

tataścatuḥpaḍbhirapīha varṣaiḥ sarvajñatāmabhyagamata tato 'sau / khyātaḥ pṛthivyāṃ puruṣottamo 'sau nāmnā kuruḥ saṃvaraṇasya putraḥ

हिन्दी अर्थ

'लोमहर्षणने कहा-- असुरोंमें श्रेष्ठ महान् भक्त प्रह्मदने हैत्ययज बलिसे इस प्रकार कहकर मनसे श्रीहरिका ध्यान किया। असुर प्रह्मदने अपने मनको भगवान्के ध्यान-पथमें लगाकर चिन्तन किया-जैसा कि भगवानका स्वरूप है। उन्होंने उस समय (चिन्तन करते समय) अदितिकी कोखमें वामनके रूपमें भगवानको देखा। उनके भीतर वसुओं, रुद्रों, दोनों अश्विनीकुमार, मरुतों, साध्यो, विश्वेदेवों, आदित्यो, गन्धर्वो, नागों,

English

O great Dvijas! Listen to the authoritative dimension, as I heard from V3mana Purana.

अध्याय २३

श्लोक 4

ततो नरपतिर्दृष्ट्वा धर्मिकं तनयं शुभम् ।दारक्रियार्थमकरोद् यत्नं शुभकुले ततः

tato narapatirdṛṣṭvā dharmikaṃ tanayaṃ śubham / dārakriyārthamakarod yatnaṃ śubhakule tataḥ

हिन्दी अर्थ

जम्भ, कुजम्भ, नरक, बाण तथा इस प्रकारके दूसरे बहुत-से असुरों एवं अपनेको और पृथ्वी, आकाश, जीवों, समस्त लोकोंके स्रष्टा ब्रह्मा, शिव, ग्रहों, नकषतर, 'ताराओं तथा दक्ष आदि प्रजापतियोंको भी देखा । प्रहद इन्हें देखकर आश्चर्यमें पड़ गये, किंतु क्षणमात्रमें ही पुनः पूर्ववत् प्रकृतिस्थ हो गये और विरोचन-पुत्र हैतयोके

English

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अध्याय २३

श्लोक 5

सोदामिनीं सुदाम्नस्तु सुतां रूपाधिकां नपः ।कुरोरर्थाय वतवान् स प्रादात् कुरवे ऽपि ताम्

sodāminīṃ sudāmnastu sutāṃ rūpādhikāṃ napaḥ / kurorarthāya vatavān sa prādāt kurave 'pi tām

हिन्दी अर्थ

राजा बलिसे बोले-- देवदेवो जगद्योनिरयोनिर्जगदादिजः। अनादिरादिर्विश्वस्य वरेण्यो वरदो हरिः

English

This reservoir spread a yojana each from all sides should be considered in expanse from to Devavara and from Nrpavana to the Sarasvatl.

अध्याय २३

श्लोक 6

स तां नृपसुतां लब्ध्वा धर्मार्थावविरोधयन् ।रेमे तन्व्या सह तया पौलोम्या मघवानिव

sa tāṃ nṛpasutāṃ labdhvā dharmārthāvavirodhayan / reme tanvyā saha tayā paulomyā maghavāniva

हिन्दी अर्थ

प्रभुः प्रमाणं मानानां सप्तलोकगुरो्गुरुः। स्थितिं कर्तु जगन्नाथं सोऽचिन्त्यो गर्भतां गतः मनादिमध्यो भगवाननन्तः । त्रैलोक्यमंशेन सनाथमेकः

English

Kura and since then popularly known as

अध्याय २३

श्लोक 7

ततो नरपतिः पुत्रं राज्यभारक्षमं बली ।विदित्वा योवराज्याय विधानेनाभ्यषेचयत्

tato narapatiḥ putraṃ rājyabhārakṣamaṃ balī / viditvā yovarājyāya vidhānenābhyaṣecayat

हिन्दी अर्थ

कर्तु महात्माऽदितिजोऽवतीर्णः जानन्ति हैत्याधिप यत्स्वरूपं

English

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अध्याय २३

श्लोक 8

ततो राज्ये ऽभिषिक्तस्तु कुरुः पित्रा निजे पदे ।पालयामास स महीं पुत्रवच्च स्वयं प्रजाः

tato rājye 'bhiṣiktastu kuruḥ pitrā nije pade / pālayāmāsa sa mahīṃ putravacca svayaṃ prajāḥ

हिन्दी अर्थ

स वासुदेवः कलयावतीर्णः विशन्ति यं ज्ञानविधूतपापाः।

English

The portion between Tarantuka and Arantuka as also Ramahrada and Caturmukha is Samantapancaka Kuruksetra and this very place is called the north altar of Brahma.

अध्याय २३

श्लोक 9

स एव क्षेत्रपालो ऽभूत् पशुपालः स एव हि ।स सर्वपालकश्चासीत् प्रजापालो महाबलः

sa eva kṣetrapālo 'bhūt paśupālaḥ sa eva hi / sa sarvapālakaścāsīt prajāpālo mahābalaḥ

हिन्दी अर्थ

तं वासुदेवं प्रणमामि देवम् तं वासुदेवं प्रणतोऽस्म्यचिन्त्यम्

English

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अध्याय २३

श्लोक 10

ततो ऽस्य बुद्धिरुपन्ना कीर्तिर्लोके गरीयसी ।यावत्कीर्तिः सुसंस्था हि तावद्वासः सुरैः सह

tato 'sya buddhirupannā kīrtirloke garīyasī / yāvatkīrtiḥ susaṃsthā hi tāvadvāsaḥ suraiḥ saha

हिन्दी अर्थ

स्तं वासुदेवं प्रणमामि नित्यम् न 'घ्राणचक्षुः श्रवणादि तस्य

English

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अध्याय २३

श्लोक 11

स त्वेवं नृपतिश्रेष्ठो याथातथ्यमवेक्ष्य च ।विचचार महीं सर्वां कीर्त्यर्थं तु नराधिपः

sa tvevaṃ nṛpatiśreṣṭho yāthātathyamavekṣya ca / vicacāra mahīṃ sarvāṃ kīrtyarthaṃ tu narādhipaḥ

हिन्दी अर्थ

स्वयंप्रकाशः परमार्थतो यः शक्यं तमीड्यमनघं च देवं ग्राह्यं नतोऽहं हरिमीशितारम्

English

The gods and hermits resort to it and use the water of this reservoir with sole desire of emancipation and other people reside here with a desire to attain heaven after death.

अध्याय २३

श्लोक 12

ततो द्वैतवनं नाम पुण्यं लोकेश्वरो बली।।तदासाद्य सुसंतुष्टो विवेशाभ्यान्तरं ततः

tato dvaitavanaṃ nāma puṇyaṃ lokeśvaro balī/ / tadāsādya susaṃtuṣṭo viveśābhyāntaraṃ tataḥ

हिन्दी अर्थ

बलिका पितामह प्रह्वादसे प्रश्‍न, अदितिके गर्भमें वामनागमन (हैत्यो!) मैंने तुमलोगोंकी कान्तिहीनताके (वास्तविक) सब कारणको अच्छी तरहसे समझ लिया है। (अब) उसे तुमलोग भलीभाँति सुनो। देवोंके देव, जगद्योनि, (विश्वको उत्पन्न करनेवाले)

English

sHjPHT flfedfmj ^tfwi

अध्याय २३

श्लोक 13

तत्र देवीं ददर्शाथ पुण्यां पापविमोचनीम् ।प्लक्षजां ब्रह्मणः पुत्रीं हरिजिह्वां सरस्वतीम्

tatra devīṃ dadarśātha puṇyāṃ pāpavimocanīm / plakṣajāṃ brahmaṇaḥ putrīṃ harijihvāṃ sarasvatīm

हिन्दी अर्थ

किंतु स्वयं अयोनि, विश्वके प्रारम्भमें विद्यमान पर स्वयं अनादि, फिर भी विश्वके आदि, वर देनेवाले वरणीय हरि, सर्वश्रेष्ठोंमे भी परम (श्रेष्ठ), बड़े-छोटे सज्जनोंकी गति, मानोंके भी प्रमाणभूत प्रभु, सातों लोकोंके गुरुओंके भी गुरु एवं चिन्तनमें न आने योग्य विश्वके स्वामी मर्यादा (धर्महेतु)-की स्थापना करनेके लिये (अदितिके) गर्भमें आ गये हैं। प्रभुओंके प्रभु, श्रेष्ठोंमें श्रेष्ठ, आदि-मध्यसे रहित, अनन्त भगवान् तीनों लोकोंको

English

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अध्याय २३

श्लोक 14

सुदर्शनस्य जननीं ह्वन्दं कृत्वा सुविस्तरम् ।स्थितां भगवतीं कूले तीर्थकोटिभिराप्लुताम्

sudarśanasya jananīṃ hvandaṃ kṛtvā suvistaram / sthitāṃ bhagavatīṃ kūle tīrthakoṭibhirāplutām

हिन्दी अर्थ

सनाथ करनेके लिये अदितिके पुत्रके रूपमें अंशावतारस्वरूपसे अवतीर्ण हुए हैं हैत्यपते! जिन वासुदेव भगवानूके वास्तविक स्वरूपको रुद्र, ब्रह्मा, इन्द्र, सूर्य, चन्द्र एवं मरीचि आदि श्रेष्ठ पुरुष नहीं जानते, वे ही वासुदेव भगवान् अपनी एक कलासे अवतीर्ण हुए हैं। वेदके जाननेवाले जिन्हें

English

Yogi Brahma had used this water for creation and Visnu as Hari sipped it for the proper maintenance of the world.

अध्याय २३

श्लोक 15

तस्यास्तज्जलमीक्ष्यैव स्नात्वा प्रीतो ऽभवन्नृपः ।समाजगाम च पुनः ब्रह्मणो वेदिमुत्तराम्

tasyāstajjalamīkṣyaiva snātvā prīto 'bhavannṛpaḥ / samājagāma ca punaḥ brahmaṇo vedimuttarām

हिन्दी अर्थ

अक्षर कहते हैं तथा ब्रहमज्ञानके होनेसे जिनके पाप नष्ट हो गये हैं --ऐसे निष्पाप शुद्ध प्राणी जिनमें प्रवेश पाते हैं और जिनके भीतर प्रविष्ट हुए लोग पुनः जन्म नहीं लेते --ऐसे उन वासुदेव भगवानको मैं प्रणाम करता हूँ। समुद्रकी लहरोंके समान जिनसे समस्त जीव निरन्तर उत्पन्न होते रहते हैं तथा प्रलयकालमें जिनके भीतर विलीन हो जाते हैं, उन अचिन्त्य वासुदेवको मैं प्रणाम करता हूँ। ब्रह्मा आदि जिन परम पुरुषके रूप, बल,

English

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अध्याय २३

श्लोक 16

समन्तपञ्चकं नाम धर्मस्थानमनुत्तमम् ।आकमन्ताद् योजनानि पञ्च च सर्वतः

samantapañcakaṃ nāma dharmasthānamanuttamam / ākamantād yojanāni pañca ca sarvataḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभाव और प्रतापको नहीं जान पाते उन वासुदेवको मैं नित्य प्रणाम करता हूँ जिन परमेश्वरने रूप देखनेके लिये आँखोंको, स्पर्शज्ञाके लिये त्वचाको, खट्टे-मीठे स्वाद लेनेके लिये जीभको और सुगन्ध-दुर्गन्ध सूँघनेके लिये नाकको नियत किया है; पर स्वयं उनके नाक, आँख और कान

English

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अध्याय २३

श्लोक 17

देवा ऊचुः ।कियन्त्यो वेदयः सन्ति ब्रह्मणः पुरुषोत्तम ।येनोत्तरतया वेदिर्गादिता सर्वपञ्चका

devā ūcuḥ / kiyantyo vedayaḥ santi brahmaṇaḥ puruṣottama / yenottaratayā vedirgāditā sarvapañcakā

हिन्दी अर्थ

आदि नहीं हैं। जो वस्तुतः स्वयं प्रकाशस्वरूप हैं, वे सर्वेश्वर युक्तिके द्वारा (कुछ-कुछ) जाने जा सकते हैं; उन सर्वसमर्थ, स्तुतिके योग्य, किसी भी प्रकारके मलसे रहित, (भक्तिसे) ग्राह्य, ईश हरिदेवको मैं प्रणाम करता हूँ। स्तमीड्यमीशं प्रणतोऽस्मि विष्णुम्

English

The great soul Rudra entered at its middle portion and sipped the holy water. He thus attained the essence of being Sthanu.

अध्याय २३

श्लोक 18

देवदेव उवाच।।वेदयो लोकनाथस्य पञ्च धर्मस्य सेतवः ।यासु यष्टं सुरेशेन लोकनाथेन शंभुना

devadeva uvāca/ / vedayo lokanāthasya pañca dharmasya setavaḥ / yāsu yaṣṭaṃ sureśena lokanāthena śaṃbhunā

हिन्दी अर्थ

नमामि तं देवमनन्तमीश- देवो जगद्योनिरयं महात्मा

English

3TTOTT HPJTt TPT|R: ^tT:l

अध्याय २३

श्लोक 19

प्रयागो मध्यमा वेदिः पूर्वा वेदिर्गयाशिरः ।विरजा दक्षिणा वेदिरनन्तफलदायिनी

prayāgo madhyamā vediḥ pūrvā vedirgayāśiraḥ / virajā dakṣiṇā vediranantaphaladāyinī

हिन्दी अर्थ

तात कोऽयं हरिर्नाम यतो नो भयमागतम्। सन्ति मे शतशो हैत्या वासुदेवबलाधिकाः हयशिरा अश्वशिरा भङ्गकारो महाहनुः

English

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अध्याय २३

श्लोक 20

प्रतीची पुष्करा वेदिस्त्रिभिः कुण्डैरलङ्कृता ।समन्तपञ्चका चोक्ता वेदिरेवोत्तराव्यया

pratīcī puṣkarā vedistribhiḥ kuṇḍairalaṅkṛtā / samantapañcakā coktā vedirevottarāvyayā

हिन्दी अर्थ

एते चान्ये च मे सन्ति हैतेया दानवास्तथा पौत्रस्यैतद् वच: श्रुत्वा प्रह्नादो हैत्यसत्तमः। सक्रोधश्च बलिं प्राह वैकुण्ठाक्षेपषवादिनम्

English

It was initially an altar of Brahma but subsequently, it was addressed as "Ramahrada". Later on it was ploughed by

अध्याय २३

श्लोक 21

तममन्यत राजर्षिरिदं क्षेत्रं महाफलम् ।करिष्यामि कृषिष्यामि सर्वान् कामान् यथेप्सितान्

tamamanyata rājarṣiridaṃ kṣetraṃ mahāphalam / kariṣyāmi kṛṣiṣyāmi sarvān kāmān yathepsitān

हिन्दी अर्थ

विनाशमुपयास्यन्ति हैत्या ये चापि दानवाः। येषां त्वमीदूशो राजा दुर्बुद्धिरविवेकवान् देवदेवं महाभागं वासुदेवमजं विभुम्। त्वामृते पापसंकल्प कोऽन्य एवं वदिष्यति

English

Description of Bali’s Coronation as the King

अध्याय २३

श्लोक 22

इति संचिन्त्य मनसा त्यक्त्वा स्यन्तनमुत्तमम् ।चक्रे कीर्त्यर्थमतुलं संस्थानं पार्थिवर्षभः कृत्वा सीरं स सौवर्णं गह्य रुद्रवृषं प्रभुः ।पौण्ड्रकं याम्यमहिषं स्वयं कर्षितुमुद्यतः

iti saṃcintya manasā tyaktvā syantanamuttamam / cakre kīrtyarthamatulaṃ saṃsthānaṃ pārthivarṣabhaḥ kṛtvā sīraṃ sa sauvarṇaṃ gahya rudravṛṣaṃ prabhuḥ / pauṇḍrakaṃ yāmyamahiṣaṃ svayaṃ karṣitumudyataḥ

हिन्दी अर्थ

'य एते भवता प्रोक्ताः समस्ता हैत्यदानवाः। सब्रह्मकास्तथा देवाः स्थावरान्ता विभूतयः ससमुद्रद्वीपलोकोऽयं यश्चेदं सचराचरम्

English

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अध्याय २३

श्लोक 23

तं कर्षन्तं नरवरं समभ्येत्य तक्रतुः ।प्रोवाच राजन् किमिदं भवान् कर्तुमिहोद्यतः

taṃ karṣantaṃ naravaraṃ samabhyetya takratuḥ / provāca rājan kimidaṃ bhavān kartumihodyataḥ

हिन्दी अर्थ

एकांशांशकलाजन्म कस्तमेवं प्रवक्ष्यति जिनके द्वारा एक मोटे तथा बड़े दाँतसे निकाली गयी चिरस्थायिनी पृथ्वी सभी कुछ धारण करनेमें समर्थ है तथा जो समस्त संसारको अपनेमें स्थान देकर सोनेका स्वाँग धारण करते हैं, उन स्तुत्य ईश विष्णुको मैं प्रणाम

English

The hermits said- "Describe particularly the magnificence of Vamana and his origin and please explain how lord Vamana had bridled Bali and returned the heaven to Indra which was conquered by him."

अध्याय २३

श्लोक 24

तं कर्षन्तं नरवरं समभ्येत्य शतक्रतुः ।प्रोवाच राजन् किमिदं भवान् कर्तुमिहोद्यतः

taṃ karṣantaṃ naravaraṃ samabhyetya śatakratuḥ / provāca rājan kimidaṃ bhavān kartumihodyataḥ

हिन्दी अर्थ

करता हूँ। जिन्होंने अपने अंशसे अदितिके गर्भमें आकर महासुरोंके तेजका अपहरण कर लिया, उन समस्त संसाररूपी वृक्षके लिये कुठाररूप धारण करनेवाले अनन्त देवाधीश्वरको मैं प्रणाम करता हूँ। है महासुरो! जगतूकी उत्पत्तिके स्थान वे ही महात्मा देव अपने सोलहवें अंशकी कलासे इन्द्रकी माताके गर्भमें प्रविष्ट हुए हैं और उन्होंने ही तुमलोगोंके शारीरिक बलको अपहृत कर लिया है

English

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अध्याय २३

श्लोक 25

राजाब्रवीत् सुरवरं तपः सत्यं क्षमां दयाम् ।कृषामि शौचं दानं च योगं च ब्रह्मचारिताम्

rājābravīt suravaraṃ tapaḥ satyaṃ kṣamāṃ dayām / kṛṣāmi śaucaṃ dānaṃ ca yogaṃ ca brahmacāritām

हिन्दी अर्थ

बलिने कहा-- तात! जिनसे हम सबको डर है वे हरि कौन हैं? हमारे पास वासुदेवसे अधिक शक्तिशाली सैकड़ों हैत्य हैं; जैसे-विप्रचित्ति, शिबि, करनेवाला) भङ्गकार, महाहनु, प्रतापी, प्रघश, शम्भु कुक्कुराक्ष एवं दुर्जय। ये तथा अन्य भी ऐसे अनेक हैत्य एवं दानव हैं। ये सभी महाबलवान् तथा महापराक्रमी एवं पृथ्वीके भारको धारण करनेमें समर्थ हैं। कृष्ण तो

English

Lomaharsana said- O sages! listen with pleasure to the origin, magnificence and his dwelling in

अध्याय २३

श्लोक 26

तस्योवाच हरिर्देवः कस्माद्बीजो नरेश्वर ।लब्धो ऽष्टाङ्गेति सहसा अवहस्य गतस्ततः

tasyovāca harirdevaḥ kasmādbījo nareśvara / labdho 'ṣṭāṅgeti sahasā avahasya gatastataḥ

हिन्दी अर्थ

हमारे इन बलवान् हैत्योमेंसे पृथक्-पृथक् एक-एकके आधे बलके समान भी नहीं हैं 'लोमहर्षणने कहा-- अपने पौत्रकी इस उक्तिको सुनकर हैत्यश्रेष्ठ प्रह्माद क्रुद्ध हो गये और भगवान्की निन्दा करनेवाले बलिसे बोले --बलि! तेरे-जैसे विवेकहीन एवं दुर्बुद्धि राजाके साथ ये सारे हैत्य एवं दानव मारे

English

cf?T ^fqTqt ff3TWn:l

अध्याय २३

श्लोक 27

गते ऽपि शक्र राजर्षिरहन्यहनि सीरधृक् ।कृषते ऽन्यान् समन्ताच्च सप्तक्रोशान् महीपतिः

gate 'pi śakra rājarṣirahanyahani sīradhṛk / kṛṣate 'nyān samantācca saptakrośān mahīpatiḥ

हिन्दी अर्थ

जायँगे। है पापको ही सोचनेवाले पापबुद्धि! तुम्हारे सिवा ऐसा कौन है, जो देवाधिदेव महाभाग अज एवं सर्वव्यापी वासुदेवको इस तरह कहेगा॥ ३३--३५॥ तुमने जिन-जिनका नाम लिया है, वे सभी हैत्य एवं दानव तथा ब्रह्माके साथ सभी देवता एवं चराचरकी

English

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अध्याय २३

श्लोक 28

ततो ऽहमब्रुवं गत्वा कुरो किमिदमित्यथ ।तदाष्टाङ्गं महाधर्मं समाख्यातं नृपेण हि

tato 'hamabruvaṃ gatvā kuro kimidamityatha / tadāṣṭāṅgaṃ mahādharmaṃ samākhyātaṃ nṛpeṇa hi

हिन्दी अर्थ

और वनसे युक्त सारा जगत् तथा समुद्र एवं द्वीपोंसे युक्त सम्पूर्ण लोक तथा चर और अचर जिन सर्ववन्द्य श्रेष्ठ सर्वव्यापी परमात्माके एक अंशकी अंशकलासे उत्पन यस्य त्वमीदृशः पुत्रो देवदेवावमानकः

English

O great Dvijas! Further, listen about the demon dynasty in which Bali, the son of Virocana bom in the distant past.

अध्याय २३

श्लोक 29

ततो मयास्य गदितं नृप बीजं क्व तिष्ठति ।स चाह मम देहस्थं बीजं तमहमब्रुवम् ।देह्यहं वापयिष्यामि सीरं कृषतु वै भवान्

tato mayāsya gaditaṃ nṛpa bījaṃ kva tiṣṭhati / sa cāha mama dehasthaṃ bījaṃ tamahamabruvam / dehyahaṃ vāpayiṣyāmi sīraṃ kṛṣatu vai bhavān

हिन्दी अर्थ

इति जानात्ययं लोको भवांश्च दितिनन्दन निन्दां करोषि तस्य त्वमकुर्वन् गौरवं मम

English

Long ago, Hiranyakasipu was the king of demons. Prahlada, the valorous demon, was his son. Prahlada was the father of Virocana and Virocana was blessed with Bali as son. On the death of Hiranyakasipu, Bali ruled properly over the three-world as he had defeated the gods from their respective places and positions. The gods however, did tremendous effort to defend but could not stay before the demon army led by Bali, resulting to which three-world was subjugated by

अध्याय २३

श्लोक 30

ततो नृपतिना बाहुर्दक्षिणः प्रसृतः कतः ।प्रसृतं तं भुजं दृष्ट्वा मया चक्रेण वेगतः

tato nṛpatinā bāhurdakṣiṇaḥ prasṛtaḥ kataḥ / prasṛtaṃ taṃ bhujaṃ dṛṣṭvā mayā cakreṇa vegataḥ

हिन्दी अर्थ

विरोचनस्तव गुरर्गुरुस्तस्याप्यहं बले। ममापि सर्वजगतां गुरुर्नारायणो हरिः निन्दां करोषि तस्िस्त्वं कृष्णे गुरुगुरोर्गुरौ। यस्मात् तस्मादिहैव त्वमैश्वर्याद् भ्रंशमेष्यसि

English

The mighty Maya and Sambara conquered. Everywhere spread the religious acts and the directions got purity.

अध्याय २३

श्लोक 31

सहस्रधा ततश्छिद्य दत्तो युष्माकमेव हि ।ततः सव्यो भुजो राज्ञा दत्तश् छिन्नो ऽप्यसौ मया

sahasradhā tataśchidya datto yuṣmākameva hi / tataḥ savyo bhujo rājñā dattaś chinno 'pyasau mayā

हिन्दी अर्थ

स देवो जगतां नाथो बले प्रभुर्जनार्दनः। नन्वहं प्रत्यवेक्ष्यस्ते भक्तिमानत्र मे गुरुः बलिका पितामह प्रह्लादसे प्रश्‍न, अदितिके गर्भमें वामनागमन

English

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अध्याय २३

श्लोक 32

तथैवोरुयुगं प्रादान्मया छिन्नौ च तावुभौ ।ततः स मे शिरः प्रादात् तेन प्रीते ऽस्मि तस्य च ।वरदो ऽस्मीत्यथेत्युक्ते कुरुर्वरमयाचत

tathaivoruyugaṃ prādānmayā chinnau ca tāvubhau / tataḥ sa me śiraḥ prādāt tena prīte 'smi tasya ca / varado 'smītyathetyukte kururvaramayācata

हिन्दी अर्थ

हुए है, उनके विषयमें विनाशकी ओर चलनेवाले विवेकहीन, मूर्ख, इन्द्रियोंके गुलाम, वृद्धोके आदेशोंका उल्लङ्घन करनेवाले तुम्हारी अपेक्षा कौन ऐसा (कृत्या नामसे) कह सकेगा?॥ ३६--३९॥ मैं (ही सचमुच) शोचनीय हूँ, जिसके घरमें तुम्हारा अधम पिता उत्पन्न हुआ, जिसका तुम्हारे-जैसा देवदेव (विष्णु)-का तिरस्कार करनेवाला पुत्र है। जो अनेक संसारके समूहोंके प्रवाहका विनाश करनेवाले

English

God sun too shifted to daksinayana (i.e. favourable to the demons). Prahlada, Sambara, Maya and Anuhrada etc. demons began to defend the state from all directions. The sky too was subjugated by the demons. The gods began to see the yajna then hosted in

अध्याय २३

श्लोक 33

यावदेतन्मया कृष्टं धर्मक्षेत्रं तदस्तु च ।स्नातानां च मृतानां च महापुण्यफलं त्विह

yāvadetanmayā kṛṣṭaṃ dharmakṣetraṃ tadastu ca / snātānāṃ ca mṛtānāṃ ca mahāpuṇyaphalaṃ tviha

हिन्दी अर्थ

हैं, ऐसे कृष्णमें भक्तिके लिये तुम्हें क्या मेरा भी ध्यान नहीं रहा। दितिनन्दन! मेरे विषयमें समस्त संसार एवं तुम भी यह जानते हो कि मुझे यह मेरी देह भी कृष्णसे अधिक प्रिय नहीं है। फिर यह समझते हुए भी कि भगवान् कृष्ण मुझे प्राणोंसे भी अधिक प्रिय हैं, फिर भी तुम मेरी मर्यादापर ध्यान न देकर ठेस पहुँचाते हुए उनकी निन्दा कर रहे हो। बलि! तुम्हारा गुरु (पिता) विरोचन है, उसका गुरु (पिता) मैं हूँ

English

sr#ffR& cRTl xf gtt^ri

अध्याय २३

श्लोक 34

उपवासं च दानं च स्नानं जप्यं च माधव ।होमयज्ञादिकं चान्यच्छुभं वाप्यशुभं विभो

upavāsaṃ ca dānaṃ ca snānaṃ japyaṃ ca mādhava / homayajñādikaṃ cānyacchubhaṃ vāpyaśubhaṃ vibho

हिन्दी अर्थ

तथा मेरे भी गुरु सम्पूर्ण जगत्के स्वामी भगवान् नारायण श्रीहरि हैं ॥ ४०--४४॥ जिस कारण तुम अपने गुरु (पिता विरोचन)- के गुरु (पिता मैं प्रह्मद)-के भी गुरु विष्णुकी निन्दा कर रहे हो, इस कारण तुम यहीं ऐश्वर्यसे भ्रष्ट हो जाओगे। बलि! वे प्रभु जनार्दनदेव जगतूके स्वामी हैं।

English

The entire world stood rigid in nature and began compliance of the religion. As evils ceased, the spiritual conscience rooted

अध्याय २३

श्लोक 35

त्वत्प्रसाद्धृषीकेश शङ्खचक्रगदाधर ।अक्षयं प्रवरे क्षेत्रे भवत्वत्र महाफलम्

tvatprasāddhṛṣīkeśa śaṅkhacakragadādhara / akṣayaṃ pravare kṣetre bhavatvatra mahāphalam

हिन्दी अर्थ

इस विषयमें मेरा गुरु (अर्थात् मैं) भक्तिमान् हूँ, यह विचारकर तुझे मेरी अवहेलना नहीं करनी चाहिए। जिस कारणसे जगद्गुरुकी निन्दा करनेवाले तुमने मेरी इतनी भी अपेक्षा नहीं की, इस कारण मैं तुम्हें शाप देता हूँ; क्योंकि बलि! तुम्हारे द्वारा अच्युतके प्रति अपमानजनित ये वचन मेरे लिये सिर कट जानेसे भी अधिक कष्टदायी हैं, अतः तुम राज्यसे भ्रष्ट होकर गिर जाओ। भवसागरमें भगवान् विष्णुको छोड़कर दूसरा

English

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अध्याय २३

श्लोक 36

तथा भवान् सुरैः सार्धं समं देवेन शलिना ।वस त्वं पुण्डरीकाक्ष मन्नामव्यञ्जके ऽच्युत ।इत्येवमुक्तस्तेनाहं राज्ञा बाढमुवाच तम्

tathā bhavān suraiḥ sārdhaṃ samaṃ devena śalinā / vasa tvaṃ puṇḍarīkākṣa mannāmavyañjake 'cyuta / ityevamuktastenāhaṃ rājñā bāḍhamuvāca tam

हिन्दी अर्थ

कोई रक्षक नहीं है, अतः शीघ्र ही मैं तुम्हें राज्यसे भ्रष्ट हुआ देखूँगा बलिका प्रह्मादको संतुष्ट करना, अदितिके गर्भसे वामनका प्राकट्य; ब्रह्माद्वारा स्तुति, वामनका बलिके यज्ञमें जाना

English

The religion was duly established in its four segments. The evil reduced to stand on a single segment. All kings took care of their subjects and people from all asramas began to follow the acts prescribed for them as per their respective religion.

अध्याय २३

श्लोक 37

तथा च त्वं दिव्यवपुर्भव भूयो महीपते ।तथान्तकाले मामेव लयटमेष्यसि सुव्रत

tathā ca tvaṃ divyavapurbhava bhūyo mahīpate / tathāntakāle māmeva layaṭameṣyasi suvrata

हिन्दी अर्थ

इति हैत्यपतिः श्रुत्वा वचनं रौद्रमप्रियम्। प्रसादयामास गुरुं प्रणिपत्य पुनः पुनः प्रसीद तात मा कोपं कुरू मोहहते मयि। बलावलेपमूढेन मयैतद्वाक्यमीरितम्

English

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अध्याय २३

श्लोक 38

कीर्तिश्च शाश्वती तुभ्यं भविष्यति न संशयः ।तत्रैव याजका यज्ञान् यजिष्यन्ति सहस्रशः

kīrtiśca śāśvatī tubhyaṃ bhaviṣyati na saṃśayaḥ / tatraiva yājakā yajñān yajiṣyanti sahasraśaḥ

हिन्दी अर्थ

मोहापहतविज्ञानः पापोऽहं दितिजोत्तम। 'यच्छप्तोऽस्मि दुराचारस्तत्साधु भवता कृतम् राज्यभ्रंशं यशोभ्रंशं प्राप्स्यामीति ततस्त्वहम् विषण्णोऽसि यथा तात तथैवाविनये कृते

English

The demons at this peaceful phase of time, enthroned Bali and the community of demons as a whole celebrated festivities at that auspicious moment.

अध्याय २३

श्लोक 39

तस्य क्षेत्रस्य रक्षार्थं ददौ स पुरुषोत्तमः ।यक्षं च चन्द्रनामानं वासुकिं चापि पन्नगम्

tasya kṣetrasya rakṣārthaṃ dadau sa puruṣottamaḥ / yakṣaṃ ca candranāmānaṃ vāsukiṃ cāpi pannagam

हिन्दी अर्थ

त्रैलोक्यराज्यमैश्वर्यमन्यद्वा नातिदुर्लभम्। प्रसीद तात मा कोपं कर्तुमर्हसि हैत्यप।

English

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अध्याय २३

श्लोक 40

विद्याधरं शङ्कुकर्णं सुकेशिं राक्षसेश्वरम् ।अजावनं च नृपतिं महोदेवं च पावकम्

vidyādharaṃ śaṅkukarṇaṃ sukeśiṃ rākṣaseśvaram / ajāvanaṃ ca nṛpatiṃ mahodevaṃ ca pāvakam

हिन्दी अर्थ

त्वत्कोपपरिदग्धोऽहं परितप्ये दिवानिशम् वत्स कोपेन मे मोहो जनितस्तेन ते मया।

English

the goddess having radiance of lotus petal, who blessed with wealth came to Bali. A lotus flower was in her hand.

अध्याय २३

श्लोक 41

एतानि सर्वतो ऽभ्येत्य रक्षन्ति कुरुजाङ्गलम् ।अमीषां बलिनो ऽन्ये च भृत्याश्चैवानुयायिनः

etāni sarvato 'bhyetya rakṣanti kurujāṅgalam / amīṣāṃ balino 'nye ca bhṛtyāścaivānuyāyinaḥ

हिन्दी अर्थ

तत्कथं सर्वगं जानन् हरिं कच्चिच्छपाम्यहम् अद्यप्रभृति देवेशे भगवत्यच्युते हरौ। भ्रवेथा भक्तिमानीशे स ते त्राता भविष्यति

English

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अध्याय २३

श्लोक 42

अष्टौ सहस्राणि धरनुर्धराणां ये वारयन्तीह सुदुष्कृतान् वै ।स्नातुं न यच्छन्ति महोग्ररूपास्तवन्यस्य भूताः सचराचराणाम्

aṣṭau sahasrāṇi dharanurdharāṇāṃ ye vārayantīha suduṣkṛtān vai / snātuṃ na yacchanti mahograrūpāstavanyasya bhūtāḥ sacarācarāṇām

हिन्दी अर्थ

शापं प्राप्य च मे वीर देवेश: संस्मृतस्त्वया। तथा तथा बदिष्यामि श्रेयस्त्वं प्राप्स्यसे यथा लोमहर्षणने कहा-- हैत्यपति बलि प्रह्मदकी इस प्रकार कठोर एवं अप्रिय उक्तिको सुनकर उनके चरणोंमें बार-बार सिर झुकाकर प्रणाम करते हुए मनाने लगा

English

said- O great victorious king! O valorous demon king! I am graceful to you for the defeat that you gave to Indra. I bless you with all good things.

अध्याय २३

श्लोक 43

तस्यैव मध्ये बहुपुण्य उक्तः पृथूदकः पापहरः शिवश्च ।पुण्या नदी प्राङ्मुखतां प्रयाता यत्रौघयुक्तस्य शुभा जताढ्या

tasyaiva madhye bahupuṇya uktaḥ pṛthūdakaḥ pāpaharaḥ śivaśca / puṇyā nadī prāṅmukhatāṃ prayātā yatraughayuktasya śubhā jatāḍhyā

हिन्दी अर्थ

बलिने कहा-- तात! आप मेरे ऊपर प्रसन्न हों, मैं मूढ़ हो गया था, मेरे ऊपर क्रोध न करें। बलके घमण्डसे विवेकहीन होनेके कारण मैंने यह वचन कहा था। हैत्यशरेष्ठ ! मोहके कारण मेरी बुद्धि नष्ट हो गयी थी, मैं अधम हूँ। मैने सदाचारका पालन नहीँ किया, जिससे मुझ पापाचारीको आपने जो शाप दिया, वह बहुत ठीक 'किया। तात! आप (यतः) मेरी उद्दण्डताके कारण बहुत दुःखी हैं, अतः मैं राज्यसे च्युत और अपनी कीर्तिसे रहित

English

Since you have conquered the divine state by virtue of the valour you showed in the battle-field, I have therefore, came to see you.

अध्याय २३

श्लोक 44

पूर्वं प्रजेयं प्रपितामहेन सृष्टा समं भूतगणैः समस्तैः ।मही जलं वह्निसमीरमेव खं त्वेवमादौ विबभौ पृथूदकः

pūrvaṃ prajeyaṃ prapitāmahena sṛṣṭā samaṃ bhūtagaṇaiḥ samastaiḥ / mahī jalaṃ vahnisamīrameva khaṃ tvevamādau vibabhau pṛthūdakaḥ

हिन्दी अर्थ

हो जाऊँगा। तात! संसारमें तीनों लोकोंका राज्य, ऐश्वर्य अथवा अन्य किसी (वस्तु)-का मिलना बहुत कठिन नहीं है, परंतु आप-जैसे जो गुरुजन हैं, बे संसारमें दुर्लभ हैं। हैत्योंकी रक्षा करनेवाले तात! आप प्रसन्न हों, क्रोध न करें। आपका क्रोध मुझे जला रहा है, इसलिये मैं दिन-रात (आठों प्रहर) संतप्त हो रहा हूँ

English

TO 4 VIH .il WII O great demon! It's not so surprising a matter as you were bom in the family of the demon king

अध्याय २३

श्लोक 45

तथा च सर्वाणा महार्णवानि तीर्थानि नद्यः स्त्रवणाः सरांसि ।संनिर्मितानीह महाभुजेन तच्चैक्यमागात् सलिलं महीषु

tathā ca sarvāṇā mahārṇavāni tīrthāni nadyaḥ stravaṇāḥ sarāṃsi / saṃnirmitānīha mahābhujena taccaikyamāgāt salilaṃ mahīṣu

हिन्दी अर्थ

प्रह्लाद बोले--वत्स! क्रोधके कारण हमें मोह उत्पन्न हो गया था और उसीने मेरी विचार करनेवाली बुद्धि भी नष्ट कर दी थी, इसीसे मैंने तुम्हें शाप दे दिया। महासुर! यदि मोहवश मेरा ज्ञान दूर नहीं हुआ होता तो मैं भगवानको सब जगह विद्यमान जानता हुआ भी तुम्हे शाप कैसे देता। असुरश्रेष्ठ! मैंने तुम्हें जो क्रोधवश शाप दिया है, वह तो तुम्हारे लिये होगा, किंतु तुम दुःखी मत हो; बल्कि आजसे तुम उन देवोंके भी ईश्वर

English

O king! You are more peculiar them your great grandfather Hiranyakasipu because you are ruling over the three-world entirely.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/1_sanskr/3_purana/vamp__u.htm | https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_vAmanapurANasaromAhAtmya.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vamana Purana — Chapter 23
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.