अध्याय २७
श्लोक 1
इति श्रीवामनपुराणे षड्विंशो ऽध्यायः ________________________________________________________________________ पुलस्त्य उवाच ।समागतान् सुरान् दृष्ट्वा नन्दिराख्यातवान् विभोः ।अथोत्थाय हरिं भक्त्या परिष्वज्य न्यपीडयत्
iti śrīvāmanapurāṇe ṣaḍviṃśo 'dhyāyaḥ ________________________________________________________________________ pulastya uvāca / samāgatān surān dṛṣṭvā nandirākhyātavān vibhoḥ / athotthāya hariṃ bhaktyā pariṣvajya nyapīḍayat
हिन्दी अर्थ
उसके पश्चात् तीनों लोकोंमें विख्यात पारिप्लव नामक तीर्थमें जाय। वहाँ स्नान करनेके पश्चात् वेदों- सहित ब्रह्माका दर्शन करनेसे अथर्ववेदका ज्ञान प्राप्त कर निर्मल स्वर्गको प्राप्त करता है। कौशिकी-संगम तीर्थमें जाकर स्त्रान कर मनुष्य परम पदको प्राप्त करता है। समस्त पापोंसे मुक्त करनेवाले धरणीके तीर्थमें जाकर स्नान करनेसे क्षमाशील मनुष्य परम पदकी प्राप्ति करता है। वहाँ स्नान करनेमात्रसे पृथ्वीपर मनुष्यद्वारा किये गये
English
Grant of boon to Aditi by lord