Vamana Purana· Vāmana Purāṇa
29
अध्याय 29 / 95

Adhyaya 29

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अध्याय २९

श्लोक 1

इति श्रीवामनपुराणे अष्टाविंशो ऽध्यायः ________________________________________________________________________ पुलस्त्य उवाच ।कश्यपस्य दनुर्नाम भार्यासीद् द्विजसत्तम ।तस्याः पुत्रत्रयं चासीत् सहस्राक्षाद् बलाधिकम्

iti śrīvāmanapurāṇe aṣṭāviṃśo 'dhyāyaḥ ________________________________________________________________________ pulastya uvāca / kaśyapasya danurnāma bhāryāsīd dvijasattama / tasyāḥ putratrayaṃ cāsīt sahasrākṣād balādhikam

हिन्दी अर्थ

कथं यज्ञफलोऽस्माकं वर्ततां सत्पथे भवेत्। ततोऽब्रवीन्महाभागः प्रणम्य शिरसा ऋषीन् सरस्वती स्थिता यत्र तत्र यज्ञफलं महत्। एतच्छुत्वा तु मुनयो नानास्वाध्यायवेदिनः

English

Condemning and Imparting of Curse to Bali

अध्याय २९

श्लोक 2

ज्येष्ठः सुम्भ इति ख्यातो निशुम्भश्चापरो ऽसुरः ।तृतीयो नमुचिर्नाम महाबलसमन्वितः

jyeṣṭhaḥ sumbha iti khyāto niśumbhaścāparo 'suraḥ / tṛtīyo namucirnāma mahābalasamanvitaḥ

हिन्दी अर्थ

सा तु ध्याता ततस्तत्र ऋषिभिः सत्रयाजिभिः समागता प्लावनार्थं यज्ञे तेषां महात्मनाम्। नैमिषे काञ्चनाक्षी तु स्मृता मङ्कणकेन सा

English

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अध्याय २९

श्लोक 3

यो ऽसौ नमुचिरित्येवं ख्यातो दनुसुतो ऽसुरः ।तं हन्तुमिच्छति हरिः प्रगृह्य कुलिशं करे

yo 'sau namucirityevaṃ khyāto danusuto 'suraḥ / taṃ hantumicchati hariḥ pragṛhya kuliśaṃ kare

हिन्दी अर्थ

आहूता च सरिच्छ्रेष्ठा गययज्ञे सरस्वती। उत्तरे कोशलाभागे पुण्ये देवर्षिसेविते। उद्दालकेन मुनिना तत्र ध्याता सरस्वती

English

Lomaharsana said- When the demon king Bali saw all demons losing their splendour, he enquired of his grandfather Prahlada about the reason for this change.

अध्याय २९

श्लोक 4

त्रिदिवेशं समायान्तं नमुचिस्तद्भयादथ ।प्रविवेश रथं भानोस्ततो नाशकदच्युतः

tridiveśaṃ samāyāntaṃ namucistadbhayādatha / praviveśa rathaṃ bhānostato nāśakadacyutaḥ

हिन्दी अर्थ

होकर स्वर्गको प्राप्त कर लेता है। तीनों लोकोंमें दुर्लभ “सप्तसारस्वत'नामक एक तीर्थ है, जहाँ सुप्रभा, काञ्चनाक्षी, विशाला, मानसहदा, सरस्वती, ओघवती, विमलोदका एवं सुरेणु नामकी सातों सरस्वतियाँ (नदियाँ) एकत्र मिलकर प्रवाहित होती हैं

English

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अध्याय २९

श्लोक 5

शक्रस्तेनाथ समयं चक्रे सह महात्मना ।अवध्यत्वं वरं प्रादाच्छस्त्रैरस्त्रैश्च नारद

śakrastenātha samayaṃ cakre saha mahātmanā / avadhyatvaṃ varaṃ prādācchastrairastraiśca nārada

हिन्दी अर्थ

पुष्करतीर्थमें स्थित ब्रह्माजीके यज्ञके अनुष्ठानमें लग जानेपर सभी ऋषियोंने उनसे कहा आपका यह यज्ञ महाफलजनक नहीं होगा; क्योंकि यहाँ सरिताओंमें श्रेष्ठ सरस्वती (नदी) नहीं दिखलायी पड़ रही है। उसे सुनकर भगवानूने प्रसन्नतापूर्वक सरस्वतीका स्मरण किया। पुष्करमें यज्ञ कर रहे ब्रह्माजीद्वारा आहूत की गयी 'सुप्रभा' नामकी देवी वहाँ सरस्वती नामसे प्रसिद्ध हुईं। ब्रह्माजीका मान करनेवाली उस वेगवती सरस्वतीको

English

Bali said- O grandfather! The demons have lost their splendour and their physique is now appearing as singed by fire. Why have all these suddenly become as beaten by

अध्याय २९

श्लोक 6

ततो ऽवध्यत्वमाज्ञाय शस्त्रादास्त्राच्च नरद ।संत्यज्य भास्कररथं पातालमुपयादथ

tato 'vadhyatvamājñāya śastrādāstrācca narada / saṃtyajya bhāskararathaṃ pātālamupayādatha

हिन्दी अर्थ

देखकर मुनिजन प्रसन्न हो गये और उन सबोंने उनका अत्यधिक सम्मान किया इस प्रकार पुष्करतीर्थमें स्थित एवं नदियोंमें श्रेष्ठ इस सरस्वतीको महात्मा मङ्कण कुरुक्षेत्रमें लाये। एक समय नैमिषारण्यमें रहनेवाले तपस्याके धनी शौनक आदि मुनियोंने पुराणोंके ज्ञाता महात्मा लोमहर्षणसे

English

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अध्याय २९

श्लोक 7

स निमज्जन्नपि जले सामुद्रं फेनसुत्तमम् ।ददृशे दानवपतिस्तं प्रगृह्येदमब्रवीत्

sa nimajjannapi jale sāmudraṃ phenasuttamam / dadṛśe dānavapatistaṃ pragṛhyedamabravīt

हिन्दी अर्थ

पूछा -सत्पथगामी हमलोगोंको यज्ञका फल कैसे प्राप्त होगा? (-इसे कृपाकर समझाइये।) उसके बाद महानुभाव लोमहर्षणजीने ऋषियोंको सिरसे प्रणाम कर कहा कि ऋषियो ! जहाँ सरस्वती नदी अवस्थित है, वहाँ (रहनेसे) यज्ञका महान् फल प्राप्त होता है। इसको सुनकर विविध वेदोंका स्वाध्याय करनेवाले मुनियोंने एकत्र होकर सरस्वतीका स्मरण किया। दीर्घकालिक यज्ञ करनेवाले उन ऋषियोंके ध्यान (स्मरण) करनेपर वे

English

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अध्याय २९

श्लोक 8

यदुक्तं देवपतिना वासवेन वचो ऽस्तु तत् ।अयं स्पृशतु मां फेनः पराभ्यां गृह्य दानवः

yaduktaṃ devapatinā vāsavena vaco 'stu tat / ayaṃ spṛśatu māṃ phenaḥ parābhyāṃ gṛhya dānavaḥ

हिन्दी अर्थ

(सरस्वती) वहाँ नैमिषक्षेत्रमें उन महात्माओंके यज्ञमें प्लावन करनेके लिये काञ्चनाक्षी नामसे उपस्थित हो गयीं। वे ही प्रसिद्ध नदी मङ्कणके द्वारा स्मृत होनेपर पवित्र- सलिला सरस्वतीके रूपमें कुरुक्षेत्रमें (भी) आयीं और महान् व्रती ऋषियोंने गया-क्षेत्रमें महायज्ञका अनुष्ठान करनेवाले गयके यज्ञमें आहूत की गयी उन श्रेष्ठ सरस्वती नदीको विशाला'के नामसे स्मरण किया

English

Has anything wrong taken place for the demons? or any Krtya has been arisen for the destruction of the demons? Otherwise, tell me the reason for the fading of the monsters.

अध्याय २९

श्लोक 9

मुखनासाक्षिकार्णादीन् संममार्ज्ज यथेच्छया ।तस्मिञ्छक्रो ऽजद् वज्रमन्तर्हितमपीश्वरः

mukhanāsākṣikārṇādīn saṃmamārjja yathecchayā / tasmiñchakro 'jad vajramantarhitamapīśvaraḥ

हिन्दी अर्थ

महात्मा मङ्कण ऋषिद्वारा समाहूत की गयी वही नदी कुरुक्षत्रमें आकर प्रवेश कर गयी। (फिर) उद्दालक मुनिने देवर्षियोंके द्वारा सेवित परम पवित्र उत्तरकोसल

English

Lomaharsana said- O Brahmins! Prahlada peeped deep into matter for long when so enquired by Bali. He then replied.

अध्याय २९

श्लोक 10

तेनासौ भग्ननासास्यः पपात च ममार च ।समये च तथा नष्टे ब्रह्महत्यास्पृशद्धरिम्

tenāsau bhagnanāsāsyaḥ papāta ca mamāra ca / samaye ca tathā naṣṭe brahmahatyāspṛśaddharim

हिन्दी अर्थ

आजगाम सरिच्छेष्ठा तं देशं मुनिकारणात्। पूज्यमाना मुनिगणैर्वल्कलाजिनसंवृतै: मनोहरेति विख्याता सर्वपापक्षयावहा।

English

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अध्याय २९

श्लोक 11

स वै तीर्थं समासाद्य स्नातः पापादमुच्यत ।ततो ऽस्य भ्रातरौ वीरौ क्रुद्धौ सुम्भनिशुम्भकौ

sa vai tīrthaṃ samāsādya snātaḥ pāpādamucyata / tato 'sya bhrātarau vīrau kruddhau sumbhaniśumbhakau

हिन्दी अर्थ

सुवेणुरिति विख्याता केदारे या सरस्वती। सर्वपापक्षया ज्ञेया ऋषिसिद्धनिषेव्रिता सापि तेनेह मुनिना आराध्य परमेश्वरम्। ऋषीणामुपकारार्थं॑ कुरुक्षेत्रं प्रवेशिता

English

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अध्याय २९

श्लोक 12

उद्योगं सुमहत्कृत्वा सुरान् बाधितुमागतौ ।सुरास्ते ऽपि सहस्राक्षं पुरस्कृत्य विनिर्ययुः

udyogaṃ sumahatkṛtvā surān bādhitumāgatau / surāste 'pi sahasrākṣaṃ puraskṛtya viniryayuḥ

हिन्दी अर्थ

नृत्यमानश्च देवेन शंकरेण निवारितः मङ्कणक-प्रसङ्ग, मङ्कणकका शिवस्तवन और उनकी अनुकूलता प्राप्ति

English

Prahlada said- The mountains are trembling, the earth is losing her patience, the oceans are frequently rising with tides and the demons have lost splendour.

अध्याय २९

श्लोक 13

जितास्त्वाक्रम्य दैत्याभ्यां सबलाः सपदानुगाः ।शक्रस्याहृत्य च गजं याम्यं च महिषं बलात्

jitāstvākramya daityābhyāṃ sabalāḥ sapadānugāḥ / śakrasyāhṛtya ca gajaṃ yāmyaṃ ca mahiṣaṃ balāt

हिन्दी अर्थ

प्रदेशमें सरस्वतीका ध्यान किया! उन मुनिके कारण नदियोंमें श्रेष्ठ वह सरस्वती नदी उस देशमें आ गयी एवं वह वल्कल तथा मृगचर्मको धारण करनेवाले मुनियोंद्वारा पूजित हुई। तब सम्पूर्ण पापोंका विनाश करनेवाली वह “मनोहरा' नामसे विख्यात हुई। फिर वह महात्मा मङ्कणद्वारा आहूत होकर ऋषिको सम्मानित करनेके लिये कुरुक्षेत्रके उत्तम तीर्थमें प्रविष्ट हुई। केदारतीर्थमें जो सरस्वती 'सुवेणु' नामसे प्रसिद्ध है, वह ऋषियों

English

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अध्याय २९

श्लोक 14

वरुणस्य मणिच्छत्रं गदां वै मारुततस्य च ।निधनः पद्मशङ्खाद्या हृतास्त्वाक्रम्य दानवैः

varuṇasya maṇicchatraṃ gadāṃ vai mārutatasya ca / nidhanaḥ padmaśaṅkhādyā hṛtāstvākramya dānavaiḥ

हिन्दी अर्थ

और सिद्धोंके द्वारा सेवित तथा सर्वपापनाशक रूपसे जानी जाती है परमेश्वरकी आराधना कर उन मुनिने उसे (सुवेणुको) भी ऋषियोंका उपकार करनेके लिये इस कुरुक्षेत्रमें प्रवाहित कराया। गङ्गद्वारमें यज्ञ कर रहे दक्षने “विमलोदा' नामसे भगवती सरस्वतीको प्रकट किया।

English

The stars are not moving as before the sun rises. The peculiar of gods through reason is estimated.

अध्याय २९

श्लोक 15

त्रैलोक्यं वशगं चास्ते ताभ्यां नारद सर्वतः ।तदाजग्मुर्महीपृष्ठं ददृशुस्ते महासुरम्

trailokyaṃ vaśagaṃ cāste tābhyāṃ nārada sarvataḥ / tadājagmurmahīpṛṣṭhaṃ dadṛśuste mahāsuram

हिन्दी अर्थ

कुरुक्षतरमें कुरुद्वारा पूजित सरस्वती मङ्कणद्वारा बुलायी जानेपर वहाँ गयी। फिर बुद्धिमान् मार्कण्डेयजी उस पवित्र जलवाली महाभागा सरस्वतीकी स्तुति कर उसे सरोवरके मध्यमें ले गये। वहीं सप्तसारस्वततीर्थमें उपस्थित एवं नृत्य करते हुए सिद्ध मङ्कणकको नृत्य करनेसे शंकरजीने रोका था

English

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अध्याय २९

श्लोक 16

रक्तबीजमथोचुस्ते को भवानिति सो ऽब्रवीत् ।स चाह दैत्यो ऽस्मि विभो सचिवो महिषस्य तु

raktabījamathocuste ko bhavāniti so 'bravīt / sa cāha daityo 'smi vibho sacivo mahiṣasya tu

हिन्दी अर्थ

मङ्काणक-प्रसङ्ग, मङ्कणकका शिवस्तवन और उनकी अनुकूलता प्राप्ति नृत्यमानस्तु देवेन किमर्थं स निवारितः

English

O great arm! O king of demons! It is certainly a major cause. One should not deem it a simple matter and you should exercise any measure for it (In case, it is not done, the dire¬ consequences in future are not ruled out).

अध्याय २९

श्लोक 17

रक्तबीजेति विख्यातो महावीर्यो महाभुजः ।अमात्यौ रुचिरौ वीरौ चण्डमुण्डाविति श्रुतौ

raktabījeti vikhyāto mahāvīryo mahābhujaḥ / amātyau rucirau vīrau caṇḍamuṇḍāviti śrutau

हिन्दी अर्थ

कश्यपस्य सुतो जज्ञे मानसो मङ्कणो मुनिः। स्नानं कर्तु व्यवसितो गृहीत्वा वल्कलं द्विजः ऋषियोंने कहा- (प्रभो!) मङ्कणक किस प्रकार सिद्ध हुए? वे महान् ऋषि किससे उत्पन्न हुए थे ? नृत्य करते हुए उन मङ्कणकको महादेवने क्यों रोका ?

English

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अध्याय २९

श्लोक 18

तावारतां सलिले मग्नौ भयाद् देव्या महाभुजौ ।यस्त्वासीत् प्रभूरस्माकं महिषो नाम दानवः

tāvāratāṃ salile magnau bhayād devyā mahābhujau / yastvāsīt prabhūrasmākaṃ mahiṣo nāma dānavaḥ

हिन्दी अर्थ

लोमहर्षणने कहा--( ऋषियो!) मङ्कणकमुनि महर्षि कश्यपके मानसपुत्र थे। (एक समय) वे ब्राह्मण आदि सुन्दरी अप्सराएँ भी गयी थीं। अनिन्द्य, कोमल एवं

English

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अध्याय २९

श्लोक 19

निहतः स महादेव्या विन्ध्यशैले सुविस्तृते ।भवन्तौ कस्य तनयौ कौ वा नाम्ना पिरश्रुतौ ।किंवीर्यौ किंप्रभावौ च एतच्छंसितुमर्हथः

nihataḥ sa mahādevyā vindhyaśaile suvistṛte / bhavantau kasya tanayau kau vā nāmnā piraśrutau / kiṃvīryau kiṃprabhāvau ca etacchaṃsitumarhathaḥ

हिन्दी अर्थ

स्रायन्ति रुचिराः स्निग्धास्तेन सार्धमनिन्दिताः॥ ३ मनोहर (रूपवाली वे सभी) अप्सराएँ उनके साथ (ही) तत्रर्षय: सप्त जाता विदुर्यान् मरुतां गणान्

English

Lomaharsana said- The demon kin Prahlada then remembered the sacrosanct god Narayana and took his shelter.

अध्याय २९

श्लोक 20

शुम्भनिशुम्भावूचतुः ।अहं शुंभ इति ख्यातो दनोः पुत्रस्तथौरसः ।निशुम्भो ऽयं मम भ्राता कनीयान् शत्रुपूगहा

śumbhaniśumbhāvūcatuḥ / ahaṃ śuṃbha iti khyāto danoḥ putrastathaurasaḥ / niśumbho 'yaṃ mama bhrātā kanīyān śatrupūgahā

हिन्दी अर्थ

क्षतः किल करे विप्रास्तस्य शाकरसोऽस्त्रवत्। स वै शाकरसं दृष्टा हर्षाविष्टः प्रनृत्तवान् ब्रह्मादिभिः सुरैस्तत्र ऋषिभिश्च तपोधनैः। विज्ञप्तो वै महादेवो मुनेरर्थे द्विजोत्तमाः

English

Prahlada began to concentrate on god Janardana and his mind was engrossed in the

अध्याय २९

श्लोक 21

अनेन हगुशो देवाः सेन्द्ररुद्रदिवाकराः ।समेत्य निर्जिता वीरा ये ऽन्ये च बलवत्तराः

anena haguśo devāḥ sendrarudradivākarāḥ / sametya nirjitā vīrā ye 'nye ca balavattarāḥ

हिन्दी अर्थ

नायं नृत्येद् यथा देव तथा त्वं कर्तुमर्हसि। ततो देवो मुनिं दृष्टा हर्षाविष्टमतीब हि सुराणां हितकामार्थं महादेवोऽभ्यभाषत। हर्षस्थानं किमर्थं च तवेदं मुनिसत्तम। तपस्विनो धर्मपथे स्थितस्य द्विजसत्तम

English

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अध्याय २९

श्लोक 22

तदुच्यतां कया दैत्यो निहतो महिषासुरः ।यावत्तां घातयिष्यावः स्वसैन्यपरिवारितौ

taducyatāṃ kayā daityo nihato mahiṣāsuraḥ / yāvattāṃ ghātayiṣyāvaḥ svasainyaparivāritau

हिन्दी अर्थ

किं न पश्यसि मे ब्रह्मन् कराच्छाकरसं स्त्रुतम्। यं दृष्ट्राऽहं प्रनृत्तो वै हर्षेण महताऽन्वितः तं प्रहस्याब्रवीद् देवो मुनिं रागेण मोहितम्। अहं न विस्मयं विप्र गच्छामीह प्रपश्यताम्

English

TO*T fTOR TO5 ^MiRnWTS'fTTTI snttiRggf wt ^rfr gdiVRH.ii W n

अध्याय २९

श्लोक 23

इत्थं तोस्तु वदतोर्नर्मदायास्तटे मुने ।जलवासाद् विनिष्क्रान्तौ चण्डमुण्डौ च दानवौ

itthaṃ tostu vadatornarmadāyāstaṭe mune / jalavāsād viniṣkrāntau caṇḍamuṇḍau ca dānavau

हिन्दी अर्थ

एवमुक्त्वा मुनिश्रेष्ठं देवदेवो महाद्युतिः । अङ्गुल्यग्रेण विप्रेन्दाः स्वाङ्गुषठं ताडयद् भवः नान्यं देवादहं मन्ये शूलपाणेर्महात्मनः। चराचरस्य जगतो वरस्त्वमसि शूलधृक्

English

uwriUtttm srgrRi wfef ^i u^ddRia ^tratsr ipsn<#Hii \x n ■ q q V q RfWnfag ; jpftfror: $un<p:l tffR: ®rfH^Ttf^HrT:ll^mi

अध्याय २९

श्लोक 24

ततो ऽभ्येत्यासुरश्रेष्ठौ रक्तबीजं समाश्रितौ ।ऊचतुर्वचनं श्लक्ष्णं को ऽयं तव पुरस्सरः

tato 'bhyetyāsuraśreṣṭhau raktabījaṃ samāśritau / ūcaturvacanaṃ ślakṣṇaṃ ko 'yaṃ tava purassaraḥ

हिन्दी अर्थ

ख्रान करने लगीं। उसके बाद मुनिके मनमें विकृति हो गयी; फलतः उनका शुक्र जलमें स्खलित हो गया। उस रेतको उन महातपस्वीने उठाकर घड़ेमें रख लिया। वह 'कलशस्थ (रेत) सात भागोंमें विभक्त हो गया। उससे सात ऋषि उत्पन्न हुए, जिन्हें मरुद्गण कहा जाता है। (उनके नाम हैं-) वायुवेग, वायुबल, वायुहा, वायुमण्डल,

English

He saw dwarf-shaped lord in the womb of Aditi. Prahlada fell in the net of overwhelming surprise when he saw all Vasus, Rudras, both Asvinlkumaras, Marutas, Sadhyas, Visvedevas, Adityas, Gandharvas, serpents, monsters, his son Virocana, Bali, Jambha, Kujambha, Naraka, Bana, other monsters including himself and the earth, ether, air, water, fire, oceans, mountains, rivers, islands, reservoirs, animals, birds, all human beings, reptiles, Brahma (the creator), Siva, stars, constellations, galaxy and all Prajapatis including Daksa. However, he soon returned to conscious and said Bali, the son of demon king Virocana.

अध्याय २९

श्लोक 25

स चोभौ प्राह दैत्यो ऽसौ शुम्भो नाम सुरार्दनः ।कनीयानस्य च भ्राता द्वितीयो हि निशुम्भकः

sa cobhau prāha daityo 'sau śumbho nāma surārdanaḥ / kanīyānasya ca bhrātā dvitīyo hi niśumbhakaḥ

हिन्दी अर्थ

ऋषिके ये सात पुत्र चराचरको धारण करते हैं। ब्राह्मणो! मैंने यह सुना है कि प्राचीन कालमें सिद्ध मङ्कणकके हाथमें कुशके अग्रभागसे छिद जानेके कारण घाव हो गया था; उससे शाकरस निकलने लगा। वे (अपने हाथसे निकलते हुए उस) शाकरसको देखकर प्रसन्न

English

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अध्याय २९

श्लोक 26

एतावाश्रित्य तां दुष्टां महिषघ्नीं न संशयः ।अहं विवाहयिष्यामि रत्नभूतां जगत्त्रये

etāvāśritya tāṃ duṣṭāṃ mahiṣaghnīṃ na saṃśayaḥ / ahaṃ vivāhayiṣyāmi ratnabhūtāṃ jagattraye

हिन्दी अर्थ

इससे (उनके नृत्य करनेसे उनके साथ) सम्पूर्ण अचर-चर जगत् भी नाचने लगा। उनके तेजसे मोहित जगतूको नाचते देखकर ब्रह्मा आदि देव एवं तपस्वी ऋषियोंने मुनिके (हितके) लिये महादेवसे कहा -- देव! आप ऐसा (कार्य) करें, जिससे ये नृत्य न करें (उन्हें नृत्यसे विरत करनेका उपाय करें) । उसके बाद हर्षसे अधिक मग्न उन मुनिको देखकर एवं देवोंके हितकी इच्छासे महादेवने कहा मुनिसत्तम ! ब्राह्मणश्रेष्ठ!

English

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अध्याय २९

श्लोक 27

चण्ड उवाच ।न सम्यगुक्तां भवता रत्नार्हे ऽसि न साम्प्रतम् ।यः प्रभुः स्यात्स रत्नार्हस्तस्माच्छुम्भाय योज्यताम्

caṇḍa uvāca / na samyaguktāṃ bhavatā ratnārhe 'si na sāmpratam / yaḥ prabhuḥ syātsa ratnārhastasmācchumbhāya yojyatām

हिन्दी अर्थ

आप तो तपस्वी एवं धर्मपथमें स्थित रहनेवाले हैं। फिर आपके इस हर्षका कया कारण है? ऋषिने कहा-- ब्रह्मन्! क्या आप नहीं देखते कि मेरे हाथसे शाकका रस चू रहा है; जिसे देखकर मैं अत्यन्त आनन्दमग्न होकर नृत्य कर रहा हूँ। महादेवजीने हँसकर आसक्तिसे मोहित हुए उन मुनिसे कहा-

English

I have now fully known the cause for the loss of your splendour. Listen to it in detail.

अध्याय २९

श्लोक 28

तदाचचक्षे शुम्भाय निसुम्भाय च कौशिकीम् ।भूयो ऽपि तद्विधां जातां कौशिकीं रूपशालिनीम्

tadācacakṣe śumbhāya nisumbhāya ca kauśikīm / bhūyo 'pi tadvidhāṃ jātāṃ kauśikīṃ rūpaśālinīm

हिन्दी अर्थ

विप्रवर! मुझे आश्चर्य नहीं हो रहा है। (किंतु) आप इधर देखें । विप्रेन्द्रो! श्रेष्ठ मुनिसे ऐसा कहकर देदीप्यमान भगवान् देवाधिदेव महादेबने अपनी अंगुलिके अग्रभागसे अपने अंगूठेको ठीक किया। उसके बाद उस चोटसे हिमतुल्य (स्वच्छ) भस्म निकलने लगा। उसे देखनेके बाद ब्राह्मण लज्जित होकर (महादेवके) चरणोंमें गिर पड़े और बोले-

English

MtlcHRli XTT*T: mHHUdl 7lf?T:l 3PTRT Wm «HRl<*)J<Pjb:l feriw 3vrf sprara: mfar itw.-n ^sn

अध्याय २९

श्लोक 29

ततः शुम्भो निजं दूतं सुग्रीवं नाम दानवम् ।दैत्यं च प्रेषयामास सकाशं विन्ध्यवासिनीम्

tataḥ śumbho nijaṃ dūtaṃ sugrīvaṃ nāma dānavam / daityaṃ ca preṣayāmāsa sakāśaṃ vindhyavāsinīm

हिन्दी अर्थ

मैं महात्मा शूलपाणि महादेवके अतिरिक्त किसीको नहीं मानता। शूलपाणे! मेरी दृष्टिमें आप ही चराचर त्वदाश्रयाश्च दृश्यन्ते सुरा ब्रह्मादयोऽनघ। पूर्वस्त्वमसि देवानां कर्त्ता कारयिता महत्

English

Jagannatha, the god of gods, the yoni of the world, ayoni, the foremost bom in the world, unborn, Varenya, Varada, Hari, supreme in Paravars, the axiom of gentlemen in the material and metaphysical world, the authoritative dimension god, preceptor to the preceptors of all the seven lokas has come in the womb for re-establishing stability in this

अध्याय २९

श्लोक 30

स गत्वा तद्वचः श्रुत्वा देव्यागत्य महासुरः ।निशुम्भशुम्बावाहेदं मन्युनाबिपरिप्लुतः

sa gatvā tadvacaḥ śrutvā devyāgatya mahāsuraḥ / niśumbhaśumbāvāhedaṃ manyunābipariplutaḥ

हिन्दी अर्थ

एवं स्तुत्वा महादेवमृषिः स प्रणतोऽब्रवीत् ततो देवः प्रसन्नात्मा तमृषिं वाक्यमब्रवीत्

English

trg: jpj°Tt unr. wnr-

अध्याय २९

श्लोक 31

सुग्रीव उवाच ।युवयोर्वचनाद् देवीं प्रदेष्टुं दैत्यनायकौ ।गतवानहमद्यैव तामहं वाक्यमब्रुवम्

sugrīva uvāca / yuvayorvacanād devīṃ pradeṣṭuṃ daityanāyakau / gatavānahamadyaiva tāmahaṃ vākyamabruvam

हिन्दी अर्थ

न तस्य दुर्लभं किंचिदिह लोके परत्र च सारस्वतं च तं लोकं गमिष्यति न संशयः। शिवस्य च प्रसादेन प्राप्रोति परमं पदम्

English

The god of gods, greatest, beyond the creation of beginning, middle and the last (viz. unborn, unlived, undead), unending great soul god has incarnated in the form of son to Aditi for the welfare of this entire universe.

अध्याय २९

श्लोक 32

यथा शुम्भो ऽतिविख्यातः ककुद्मी दानवेष्वपि ।स त्वां प्राह महाभागे प्रभुरस्मि जगत्त्रये

yathā śumbho 'tivikhyātaḥ kakudmī dānaveṣvapi / sa tvāṃ prāha mahābhāge prabhurasmi jagattraye

हिन्दी अर्थ

कुरुक्षेत्रके तीर्थोका अनुक्रान्त वर्णन समस्त संसारमें सर्वश्रेष्ठ हैं। अनघ! ब्रह्मा आदि देवता आपके ही आश्रित देखे जाते हैं। आप ही देवताओंमें प्रथम हैं और आप (सब कुछ) करने एवं करानेवाले तथा महत्स्वरूप हैं। आपकी कृपासे सभी देवगण

English

O the king of demon! Vasudeva never seen even by Rudra, Brahma, Indra, Sun, Moon and Marlci etc. has been bom with one of his rays (Kala).

अध्याय २९

श्लोक 33

यानि स्वर्गे महीष्टष्ठे पाताले चापि सुन्दरि ।रत्नानि सन्ति तावन्ति मम वेश्मनि नित्यशः

yāni svarge mahīṣṭaṣṭhe pātāle cāpi sundari / ratnāni santi tāvanti mama veśmani nityaśaḥ

हिन्दी अर्थ

निर्भय होकर मोदमग्न होते रहते हैं। ऋषिने इस प्रकार महादेवजीकी स्तुति करनेके बाद उन्हें प्रणामकर कहा भगवन्! आपकी कृपासे मेरे तपका क्षय न हो। तब महादेवजीने प्रसन्न होकर उन ऋषिसे यह वचन कहा --॥ १७--२०॥

English

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अध्याय २९

श्लोक 34

त्वमुक्ता चण्डमुण्डाभ्यां रत्नभूता कृशोदरि ।तस्माद् भजस्वमां वा त्वं नुशुम्भंवा ममानुजम्

tvamuktā caṇḍamuṇḍābhyāṃ ratnabhūtā kṛśodari / tasmād bhajasvamāṃ vā tvaṃ nuśumbhaṃvā mamānujam

हिन्दी अर्थ

(सदाशिव ) ईश्वरने कहा--विप्र! मेरी कृपासे तुम्हारी तपस्या सहस्रों प्रकारसे बढ़े। मैं तुम्हारे साथ इस आश्रममें सदा निवास करूँगा। जो मनुष्य इस सप्तसारस्वततीर्थमें स्नान करके मेरी पूजा करेगा, उसे इस लोक और परलोकमें कुछ भी दुर्लभ नहीं होगा। वह निःसंदेह उस सारस्वतलोकको जायगा एवं (मुझ) शिवके अनुग्रहसे परम पदको प्राप्त करेगा

English

He is addressed as syllable by the people learned in the Vedas, the innocent people by virtue of their knowledge merge with him and never again fall in the cycle of bom and death. I salute Vasudeva of such characteristics.

अध्याय २९

श्लोक 35

सा चाह मां विहसती शृणु सुग्रीव मद्वचः ।सत्यमुक्तं त्रिलोकेशः शुम्भो रत्नार्ह एव च

sā cāha māṃ vihasatī śṛṇu sugrīva madvacaḥ / satyamuktaṃ trilokeśaḥ śumbho ratnārha eva ca

हिन्दी अर्थ

कुरुक्षेत्रके तीर्थोका अनुक्रान्त वर्णन ततो याति परं ब्रह्म यस्मान्नावर्तते पुनः

English

pRT rT ilfiiWIHil wfm

अध्याय २९

श्लोक 36

किं त्वस्ति दुर्विनीताया हृदये मे मनोरथः ।यो मां विजयते युद्धे स भता स्यान्महासुर

kiṃ tvasti durvinītāyā hṛdaye me manorathaḥ / yo māṃ vijayate yuddhe sa bhatā syānmahāsura

हिन्दी अर्थ

रहोदरो नाम मुनिर्यत्र मुक्तो बभूव ह। महता शिरसा ग्रस्तस्तीर्थमाहात्म्यदर्शनात् कथं रहोदरो ग्रस्तः कथं मोक्षमवाप्तवान्। तीर्थस्य तस्य माहात्म्यमिच्छामः श्रोतुमादरात्

English

tr di^cj 3 nmrrs^Krf%Fc^rqji 9911

अध्याय २९

श्लोक 37

मया चोक्तावलिप्तासि यो जयेत् ससुरासुरान् ।स त्वां कथं न जयते सा त्वमुत्तिष्ठ भामिनी

mayā coktāvaliptāsi yo jayet sasurāsurān / sa tvāṃ kathaṃ na jayate sā tvamuttiṣṭha bhāminī

हिन्दी अर्थ

'लोमहर्षणने कहा-- (ऋषियो!) सप्तसारस्वतके बाद श्रद्धासे युक्त होकर 'औशनस'तीर्थमें जाना चाहिए, जहाँ शुक्र सिद्धि प्राप्तकर ग्रहत्वको प्राप्त हो गये। उस तीर्थमें स्नानकर मनुष्य अनेक जन्मोंमें किये हुए पातकोंसे छूटकर परब्रह्मको प्राप्त करता है, जहाँसे पुनः (जन्म-मरणके चक्करमें) लौटना नहीं पड़ता। (वह तीर्थ ऐसा है) जहाँ तीर्थ-दर्शनकी महिमासे भारी सिरसे जकडे हुए रहोदर नामके एक मुनि उससे मुक्त

English

I salute Vasudeva who originates all creatures ceaselessly like the sea waves and calls back to them all within him at the time of great devastation

अध्याय २९

श्लोक 38

साथ मां प्राह किं कुर्मि यदनालोचितः कृतः ।मनोरथस्तु तद् गच्छ सुम्भाय त्वं निवेदय

sātha māṃ prāha kiṃ kurmi yadanālocitaḥ kṛtaḥ / manorathastu tad gaccha sumbhāya tvaṃ nivedaya

हिन्दी अर्थ

ऋषियोंने कहा ( पूछा )-- रहोदर मुनि सिरसे ग्रस्त कैसे हो गये थे? और वे उससे मुक्त कैसे हुए? हमलोग उस तीर्थके माहात्म्यको आदरके साथ सुनना चाहते हैं (जिसकी महिमासे ऐसा हुआ।) पुरा बै दण्डकारण्ये राघवेण महात्मना। 'चसता द्विजशार्दूला राक्षसास्तत्र हिंसिता:

English

dltjdd yumTft ftr^lR^II

अध्याय २९

श्लोक 39

तयैवमुक्तस्त्वभ्यागां त्वत्सकाशं महासुर ।सा चाग्निकोटिसदृशी मत्वैवं कुरु यत्क्षमम्

tayaivamuktastvabhyāgāṃ tvatsakāśaṃ mahāsura / sā cāgnikoṭisadṛśī matvaivaṃ kuru yatkṣamam

हिन्दी अर्थ

स पूतिना विस्त्रवता वेदनार्तो महामुनिः। जगाम सर्वतीर्थानि पृथिव्यां यानि कानि च ततस्त्वौशनसे तीर्थे तस्योपस्पृशतस्तदा

English

I salute daily Vasudeva whose complexion, power, influence and magnificence is even unknown to Brahma etc. gods.

अध्याय २९

श्लोक 40

पुलस्त्य उवाच।।इति सुग्रीववचनं निशम्य स महासुरः ।प्राह दूरस्थितं सुम्भो दानवं धूम्रलोचनम्

pulastya uvāca/ / iti sugrīvavacanaṃ niśamya sa mahāsuraḥ / prāha dūrasthitaṃ sumbho dānavaṃ dhūmralocanam

हिन्दी अर्थ

ब्राह्मण्यं लब्धवान् यत्र विश्वामित्रो महामुनिः तत्र सिद्धस्तु ब्रह्मर्षी रुषदुर्नाम नामतः

English

(It is true that) he has provided all creatures with eyes to see, skin to touch, tongue to enjoy taste and nose to smell but he himself is without these sensory organs.

अध्याय २९

श्लोक 41

शुम्भ उवाच ।धूम्राक्ष गच्छ तां दुष्टां केशाकर्षणविह्वलाम् ।सापराधां यता दासीं कृत्वा शीघ्रमिहानय

śumbha uvāca / dhūmrākṣa gaccha tāṃ duṣṭāṃ keśākarṣaṇavihvalām / sāparādhāṃ yatā dāsīṃ kṛtvā śīghramihānaya

हिन्दी अर्थ

अन्तकालं ततो दृष्टा पुत्रान् वचनमब्रवीत्। इह श्रेयो न पश्यामि नयध्वं मां पृथूदकम् 'लोमहर्षणजी बोले-- द्विजश्रेष्ठो! प्राचीन कालमें दण्डकारण्यमें रहते हुए रघुवंशी महात्मा रामचन्द्रने बहुत-से राक्षसोंको मारा था। वहाँ एक दुष्टात्मा राक्षसका सिर तीक्ष्णधारवाले क्षुर नामक बाणसे कटकर उस

English

W qtrrsi ifoftfyrarPijRvii

अध्याय २९

श्लोक 42

यश्चास्याः पक्षकृत् कश्चिद् भविष्यति महाबलः ।स हन्तव्यो ऽविचार्यैव यदि हि स्यात् पितामहः

yaścāsyāḥ pakṣakṛt kaścid bhaviṣyati mahābalaḥ / sa hantavyo 'vicāryaiva yadi hi syāt pitāmahaḥ

हिन्दी अर्थ

महावनमें गिरा। (फिर वह) संयोगवश वनमें विचरण करते हुए रहोदर मुनिकी जंघामें उनकी हड्डीको तोड़कर उससे चिपट गया। महाप्राज्ञ वे ब्राह्मणदेव (जंघेकी टूटी हड्डीमें) उस मस्तकके लग जानेके कारण तीर्थो और देवालयोंमें नहीं जा पाते थे॥ ५--८॥

English

The god of all (Sarvesvara) who himself is light, can be realised through the application of mind. I salute that powerful, adorable, innocent, omnipresent, Isa, Hari.

अध्याय २९

श्लोक 43

स एवमुक्तः शुम्भेन धूम्राक्षो ऽक्षौहिणीशतैः ।वृतः षड्भिर्महातेजा विन्ध्यं किरिमुपाद्रवत्

sa evamuktaḥ śumbhena dhūmrākṣo 'kṣauhiṇīśataiḥ / vṛtaḥ ṣaḍbhirmahātejā vindhyaṃ kirimupādravat

हिन्दी अर्थ

वे महामुनि दुर्गन्धपूर्ण पीब आदि बहनेके कारण तथा वेदनासे अत्यन्त दुःखी रहते थे। पृथ्वीके जिन-जिन तीर्थोमें वे गये, वहाँ-बहाँ उन्होंने पवित्रात्मा ऋषियोंसे (अपना दुःख) कहा। ऋषियोंने उन विप्रसे कहा ब्राह्मणदेव! आप औशनस (तीर्थ) -में जाइये। (लोमहर्षणने कहा--) द्विजो! उनका यह वचन सुनकर रहोदर मुनि बहाँसे औशनसतीर्थमें गये। वहाँ उन्होंने तीर्थ-जलका स्पर्श किया। उनके द्वारा (जलका) स्पर्श होते ही वह

English

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अध्याय २९

श्लोक 44

स तत्र दृष्ट्वा तां दुर्गां भ्रान्तदृष्टिरुवाच ह ।एह्येहि मूढे भर्तारं शुम्भमिच्छस्व कौशिकी ।न चेद् बलान्नयिष्यामि केशाकर्षणविह्वलाम्

sa tatra dṛṣṭvā tāṃ durgāṃ bhrāntadṛṣṭiruvāca ha / ehyehi mūḍhe bhartāraṃ śumbhamicchasva kauśikī / na ced balānnayiṣyāmi keśākarṣaṇavihvalām

हिन्दी अर्थ

मस्तक उनसे (जाँघ)-को छोड़कर जलमें गिर गया। उसके बाद वे मुनि पापसे रहित निर्मल रजोगुणसे रहित अतएव पवित्रात्मा होकर प्रसन्नतापूर्वक (अपने) आश्रममें गये और उन्होंने (ऋषियोंसे) सारी आपबीती कह सुनायी। फिर तो उन आये हुए सभी ऋषियोंने औशनसतीर्थके इस उत्तम माहात्म्यको सुनकर उसका नाम "कपालमोचन' रख दिया

English

The ever stable earth lifted up by him on a single tooth (viz. when god Visnu incarnated as Varaha) is so powerful as all creatures live

अध्याय २९

श्लोक 45

श्रीदेव्युवाच ।प्रेषितो ऽसीह शुम्भेन बलान्नेतुं हि मां किल ।तत्र किं ह्यबला कुर्याद् यथेच्छसि तथा कुरु

śrīdevyuvāca / preṣito 'sīha śumbhena balānnetuṃ hi māṃ kila / tatra kiṃ hyabalā kuryād yathecchasi tathā kuru

हिन्दी अर्थ

वहीं (कपालमोचन तीर्थमें ही) महामुनि विश्वामित्रका बहुत बड़ा तीर्थ है, जहाँ विश्वामित्रने ब्राह्मणत्वको प्राप्त किया था। उस श्रेष्ठ तीर्थमें स्नान करनेसे मनुष्यको निश्चय रूपसे ब्राह्मणत्वकी प्राप्ति होती है और वह ब्राह्मण विशुद्धात्मा होकर ब्रह्मके परम पदको प्राप्त करता है। 'कपालमोचनके बाद पृथूदक नामके तीर्थमें जाय और नियमपूर्वक नियत मात्रामें आहार करे। वहाँ रुषङ्गु नामके ब्रह्मर्षिने सिद्धि पायी थी। सदा गङ्गाद्वारमें स्थित

English

He sleeps after merging the entire world within him. I salute such magnificent god

अध्याय २९

श्लोक 46

पुलस्त्य उवाच।।एवमुक्तो विभावर्या बलावान् धूम्रलोचनः ।सम्भ्यधावत् त्वरितो गदामादाय वीर्यवान्

pulastya uvāca/ / evamukto vibhāvaryā balāvān dhūmralocanaḥ / sambhyadhāvat tvarito gadāmādāya vīryavān

हिन्दी अर्थ

रहते हुए पूर्वजन्मके वृत्तान्तको स्मरण रखनेवाले रुषडुने (अपना) अन्तकाल आया देखकर (अपने) पुत्रोंसे कहा कि यहाँ (मैं) अपना कल्याण नहीं देख रहा हूँ। मुझे पृथूदक पृथूदके जप्यपरो नूनं चामरतां व्रजेत्

English

aiyiidd'lufd *r Tnr*f

अध्याय २९

श्लोक 47

तमापतन्तं सगदं हुङ्कारेणैव कौशिकी ।सबलं भस्मसाच्चक्रे शुष्कमग्निरिवेन्धनम्

tamāpatantaṃ sagadaṃ huṅkāreṇaiva kauśikī / sabalaṃ bhasmasāccakre śuṣkamagnirivendhanam

हिन्दी अर्थ

तत्रैव ब्रह्मयोन्यस्ति ब्रह्मणा यत्र निर्मिता। पृथूदकं समाश्रित्य सरस्वत्यास्तटे स्थितः तस्याभिध्यायतः सृष्टिं ब्रह्मणो व्यक्तजन्मनः

English

Sflifa rldifu tluilH.'

अध्याय २९

श्लोक 48

ततो हाहाकृतमभूज्जगत्यस्मिश्चराचरे ।सबलं भस्मसान्नीतं कौशिक्या वीक्ष्य दानवम्

tato hāhākṛtamabhūjjagatyasmiścarācare / sabalaṃ bhasmasānnītaṃ kauśikyā vīkṣya dānavam

हिन्दी अर्थ

मुखतो ब्राह्मणा जाता बाहुभ्यां क्षत्रियास्तथा। ऊरुभ्यां वैश्यजातीयाः पदभ्यां शूद्रास्ततोऽभवन् एवं प्रतिष्ठितं तीर्थ ब्रह्मयोनीति संज्ञितम्

English

I salute the god who is like an axe to the world tree (viz. at the time of destruction) ad who had pull out the splendour of mighty demons even when he was in the womb.

अध्याय २९

श्लोक 49

तच्च शुम्भो ऽपि शुश्राव महच्छब्दमुदीरितम् ।अथादिदेश बलिनौ चण्डमुण्डौ महासुरौ

tacca śumbho 'pi śuśrāva mahacchabdamudīritam / athādideśa balinau caṇḍamuṇḍau mahāsurau

हिन्दी अर्थ

तत्र स्त्रात्वा मुक्तिकामः पुनर्योनिं न पश्यति। तत्रैव तीर्थ विख्यातमवकीर्णेति नामतः यस्मिस्तीर्थे वको दाल्भ्यो धृतराष्ट्रममर्षणम्। जुहाव वाहनैः सार्ध तत्राबुध्यत् ततो नृप:

English

O great demons! That great soul god in the form of world-yoni has introduced himself into the womb of Indra's mother having sixteenth fraction of his art (Kala) or rays. He has pull all your physical powers now.

अध्याय २९

श्लोक 50

रुरुं च बलिनां श्रेष्ठं तथा जग्मुर्मुदान्विताः ।तेषां च सैन्यमतुलं गजाश्वरथसंकुलम्

ruruṃ ca balināṃ śreṣṭhaṃ tathā jagmurmudānvitāḥ / teṣāṃ ca sainyamatulaṃ gajāśvarathasaṃkulam

हिन्दी अर्थ

कथं प्रतिष्ठितं तीर्थमवकीर्णेति नामतः। धृतराष्ट्रेण राज्ञा च स किमर्थ प्रसादितः तत्रैव च वको दाल्भ्यो धृतराष्ट्रमयाचत

English

5 am sfcrfa *mr ^ wmrd^i

अध्याय २९

श्लोक 51

समाजगाम सहसा यत्रास्ते कोशसंभवा ।तदायान्तं रिपुबलं दृष्ट्वा कोटिशतावरम्

samājagāma sahasā yatrāste kośasaṃbhavā / tadāyāntaṃ ripubalaṃ dṛṣṭvā koṭiśatāvaram

हिन्दी अर्थ

पृथूदके महातीर्थे अवकीर्णेति नामतः। जुहाव धुतराष्ट्रस्य राष्ट्र नरपतेस्ततः हूयमाने तदा राष्ट्रे प्रवृत्ते यज्ञकर्मणि। अक्षीयत ततो राष्ट्रं नृपतेर्दुष्कृतेन वै

English

Bali enquired- O grandfather! Who is such Hari now become cause for our fright? Here are several thousand demons with us who are more mighty than Vasudeva.

अध्याय २९

श्लोक 52

सिंहो ऽद्रवद् धुतसटः पाटयन् दानवान् रणे ।कांश्चित् करप्रहारेण कांश्चिदास्येन लीलया

siṃho 'dravad dhutasaṭaḥ pāṭayan dānavān raṇe / kāṃścit karaprahāreṇa kāṃścidāsyena līlayā

हिन्दी अर्थ

कुरुक्षेत्रके तीर्थोका अनुक्रान्त वर्णन (तीर्थ)-में ले चलो । रुषङ्गुके उस भावको जानकर वे तपोधन (पुत्र) उन तपके धनीको सरस्वतीके तीर्थमें

English

faufafn: fyifw: ?i<jR3r:¥i$wvic( xn

अध्याय २९

श्लोक 53

नखरैः कांश्चिदाक्रम्य उरसा प्रममाथ च ।ते वध्यमानाः सिंहेन गिरिकन्दरवासिना

nakharaiḥ kāṃścidākramya urasā pramamātha ca / te vadhyamānāḥ siṃhena girikandaravāsinā

हिन्दी अर्थ

उन पुत्रोंद्वारा लाये गये उन ऋषिश्रेष्ठने सरस्वतीमें स्नान करनेके पश्चात् उस तीर्थके सब गुणोंका स्मरण कर यह कहा था--'सरस्वतीके उत्तरकी ओर स्थित पृथूदक नामके तीर्थमें अपने शरीरका त्याग करनेवाला जपपरायण मनुष्य निश्चय ही देवत्वको प्राप्त होता है।' वहीं ब्रह्माद्वारा निर्मित 'ब्रह्मयोनितीर्थ' है, जहाँ सरस्वतीके किनारे अवस्थित पृथूदकमें स्थित होकर ब्रह्मा चारों वर्णोकी सृष्टिके लिये आत्म्ञानमें लीन हुए थे। सृष्टिके

English

Among these demons, some are Vipracitti, Sibi, Sanku, Ayahsanku, Hayas'ira, Asvasira, Bharikara, Mahahanu, Pratapi, Praghas'a, Sambhu, Durjaya and

अध्याय २९

श्लोक 54

भूतैश् च देव्यनुचरैश्चण्डमुण्डौ समाश्रयन् ।तावार्त्तं स्वबलं दृष्ट्वा कोपप्रस्फुरिताधरौ

bhūtaiś ca devyanucaraiścaṇḍamuṇḍau samāśrayan / tāvārttaṃ svabalaṃ dṛṣṭvā kopaprasphuritādharau

हिन्दी अर्थ

मुखसे ब्राह्मण, भुजाओंसे क्षत्रिय, दोनों ऊरुओंसे वैश्य और दोनों पैरोंसे शूद्र उत्पन्न हुए उसके बाद उन्होंने चारों वर्णोको विभिन्न आश्रमोंमें स्थित हुआ देखा। इस प्रकार ब्रह्मयोनि नामक तीर्थकी प्रतिष्ठा हुई थी। मुक्तिकी कामना करनेवाला व्यक्ति वहाँ स्नान करनेसे पुनर्जन्म नहीं

English

ng i dri i ^ muM Tqi {( PTr:i

अध्याय २९

श्लोक 55

समाद्रवेतां दुर्गां वै पतङ्गविव पावकम् ।तावापतन्तौ रौद्रौ वै दृष्ट्वा क्रोधपरिप्लुता

samādravetāṃ durgāṃ vai pataṅgaviva pāvakam / tāvāpatantau raudrau vai dṛṣṭvā krodhapariplutā

हिन्दी अर्थ

देखता। वहीं अवकीर्ण नामक एक विख्यात तीर्थ भी है, जहाँपर दाल्भ्य (दल्भ या दल्भि गोत्रमें उत्पन्न) वक नामक ऋषिने क्रोधी धृतराष्ट्रको उसके वाहनोंके साथ हवन कर दिया था, तब कहीं राजाको (अपने किये कर्मका) ज्ञान हुआ था

English

All these are great warriors, valorous and even capable to hold the burden of the entire

अध्याय २९

श्लोक 56

त्रिसाखां भ्रुकुटीं वक्त्रे चकार परमेश्वरी ।भ्रुकुटीकुटुलाद् देव्या ललाटफलकाद् द्रुतम् ।काली करालवदना निःसृता योगिनी शुबा

trisākhāṃ bhrukuṭīṃ vaktre cakāra parameśvarī / bhrukuṭīkuṭulād devyā lalāṭaphalakād drutam / kālī karālavadanā niḥsṛtā yoginī śubā

हिन्दी अर्थ

ऋषियोंने पूछा- अवकीर्ण नामक तीर्थ कैसे प्रतिष्ठित हुआ एवं राजा धृतराष्ट्रने उन (वक दाल्भ्य मुनि)-को क्यों प्रसन्न किया था? 'लोमहर्षणने कहा--प्राचीन कालमें नैमिषारण्य- निवासी जो ऋषि दक्षिणा पानेके लिये (राजा धृतराष्ट्रे यहाँ) गये थे, उनमेंसे दल्भिवंशीय वक ऋषिने धृतराष्ट्रसे (धनकी) याचना की। उन्होंने (धृतराष्ट्रने) भी निन्दापूर्ण

English

earth. Kr$na is not even comparable ,to half power which each of these demons holds.

अध्याय २९

श्लोक 57

खट्वाङ्गमादाय करेण रौद्रमसिञ्च कालाञ्जनकोशमुग्रम् ।संशुष्कगात्रा रुधिराप्लुताङ्गीनरेन्द्रमूर्ध्ना स्रजमुद्वहन्ती

khaṭvāṅgamādāya kareṇa raudramasiñca kālāñjanakośamugram / saṃśuṣkagātrā rudhirāplutāṅgīnarendramūrdhnā srajamudvahantī

हिन्दी अर्थ

ग्राम्य और असत्य बात कही। उसके बाद वे (वक दाल्भ्य) अत्यन्त क्रुद्ध होकर पृथूदकमें स्थित अवकीर्ण नामक तीर्थमें जा करके मांस काट-काटकर धृतराष्ट्रके राष्ट्के नाम हवन करने लगे। तब यज्ञमें राष्ट्रका हवन प्रारम्भ होनेपर राजाके दुष्कर्मके कारण राष्ट्रका क्षय होने लगा

English

Prahlada got angry at listening to such a statement derogating the power of god Visnu from his grandson. He said to Bali.

अध्याय २९

श्लोक 58

कांश्चित् खड्गेन चिच्छेद खट्वाङ्गेन परान् रणे ।न्यषूदयद् भृशं क्रुद्धा सरताश्वगजान् रिपून्

kāṃścit khaḍgena ciccheda khaṭvāṅgena parān raṇe / nyaṣūdayad bhṛśaṃ kruddhā saratāśvagajān ripūn

हिन्दी अर्थ

प्रसादनार्थं विप्रस्य ह्ावकीर्ण ययौ तदा। फलं प्राप्नोति यज्ञस्य अश्वमेधस्य मानवः

English

fadl¥l{fWPPlPl ^RcTT: I

अध्याय २९

श्लोक 59

चर्माङ्कुशं मुद्गरं च सधनुष्कं सघण्टिकम् ।कुञ्जरं सह यन्त्रेण प्रतिक्षेप मुके ऽम्बिका

carmāṅkuśaṃ mudgaraṃ ca sadhanuṣkaṃ saghaṇṭikam / kuñjaraṃ saha yantreṇa pratikṣepa muke 'mbikā

हिन्दी अर्थ

तत्र सत्रातो भक्तियुक्तो वासिष्ठं लोकमाप्नुयात् (राष्ट्रको क्षीण होते देख) उसने विचार किया और वह इसे ब्राह्मणका विकर्म जानकर (उस ब्राह्मणको) प्रसन्न करनेके लिये समस्त रल्रोंको लेकर पुरोहितके साथ अवकीर्णतीर्थमें गया (और उस) राजाने उन्हें

English

All these monsters and demons shall be killed under the rule of such a foolish and malafide king as you are.

अध्याय २९

श्लोक 60

सचक्रकूबररथं ससारथितुरङ्गमम् ।समं योधेन वदने क्षिप्य चर्वयते ऽम्बिका

sacakrakūbararathaṃ sasārathituraṅgamam / samaṃ yodhena vadane kṣipya carvayate 'mbikā

हिन्दी अर्थ

प्रसन्न कर लिया। प्रसन्न होकर उन्होंने राजासे कहा -- (राजन्!) विद्वान् मनुष्यको ब्राह्मणका अपमान नहीं करना चाहिए। अपमानित हुआ ब्राह्मण मनुष्यके कुलके तीन पुरुषों (पीढ़ियों)-का विनाश कर देता है। ऐसा कहकर उन्होंने पुन: राजाको राज्य एवं यशके साथ सम्पन्न कर दिया और वे उस राजाके हितकारी हो गये॥ ३२--३५॥

English

O evil mind! Who except you shall make such derogatory comments on the god of gods, sovereign Vasudeva and

अध्याय २९

श्लोक 61

एकं जग्राह केशेषु ग्रीवायमपरं तथा ।पादेनाक्रम्य चैवान्यं प्रेषयामास मृत्यवे

ekaṃ jagrāha keśeṣu grīvāyamaparaṃ tathā / pādenākramya caivānyaṃ preṣayāmāsa mṛtyave

हिन्दी अर्थ

उस (अवकीर्ण) तीर्थमें जो जितेन्द्रिय मनुष्य श्रद्धापूर्वक स्नान करता है, वह नित्य मनोऽभिलषित 'फल प्राप्त करता है वहाँ “यायात' (ययातिका तीर्थ) नामसे सुविख्यात तीर्थ है, जहाँ यज्ञ करनेवालेके लिये नदीने मधु बहाया था। उसमें भक्तिपूर्वक स्नान करनेसे मनुष्य समस्त पापोंसे मुक्त हो जाता है एवं उसे अश्वमेधयज्ञका फल प्राप्त होता है। द्विजो! वहाँ “मधुस्रव' नामक पवित्र तीर्थ है। उसमें मनुष्यको

English

^ Tjjfr *ra?TT ^rfiT: TTWT tri|<W«(l:l

अध्याय २९

श्लोक 62

ततस्तु तद् बलं देव्या भक्षितं सबलाधिपम् ।रुरुर्दृष्ट्वा प्रदुद्राव तं चण्डि ददृशे स्वयम्

tatastu tad balaṃ devyā bhakṣitaṃ sabalādhipam / rururdṛṣṭvā pradudrāva taṃ caṇḍi dadṛśe svayam

हिन्दी अर्थ

भक्तिपूर्वक स्नान कर मधुसे पितरोंका तर्पण करना चाहिए। वहींपर “वसिष्ठोद्वाह' नामक सुन्दर महान् तीर्थ है, वहाँ भक्तिपूर्वक स्नान करनेवाला व्यक्ति महर्षि वसिष्ठके लोकको प्राप्त करता है वसिष्ठापवाह नामक तीर्थका उत्पत्ति-प्रसङ्ग

English

W^raTOISIT^T: WUUM1 fog<FI:ll^ll

अध्याय २९

श्लोक 63

आजघानाथ शिरसि खट्वाङ्गेन महासुरम् ।स पपात हतो भूम्यां छिन्नमूल इव द्रुमः

ājaghānātha śirasi khaṭvāṅgena mahāsuram / sa papāta hato bhūmyāṃ chinnamūla iva drumaḥ

हिन्दी अर्थ

ऋषियोंने कहा (पूछा )-- महाराज! वह वसिष्ठापवाह कैसे उत्पन्न हुआ? उस श्रेष्ठ सरिताने उन ऋषिको अपने प्रवाहमें क्यों बहा दिया था? लोमहर्षण बोले (ऋषियो !) राजर्षि विश्वामित्र एवं महात्मा वसिष्ठमें तपस्याके विषयमें परस्पर चुनौती होनेके कारण बड़ी भारी शत्रुता हो गयी।

English

Ijcfi T Vl' r^r ch^<M TFl 4 TT d^ rf rl II ^ 6 II

अध्याय २९

श्लोक 64

ततस्तं पतितं दृष्ट्वा पशोरिव विभावरी ।कोशमुत्कर्तयामास कर्णादिचरणान्तिकम्

tatastaṃ patitaṃ dṛṣṭvā paśoriva vibhāvarī / kośamutkartayāmāsa karṇādicaraṇāntikam

हिन्दी अर्थ

यत्रेष्ठा भगवान् स्थाणुः पूजयित्वा सरस्वतीम्। स्थापयामास देवेशो लिङ्गाकारां सरस्वतीम् चसिष्ठं मुनिशार्दूलं स्वेन वेगेन आनय

English

<3«&ni w^Hifrprqn^ii

अध्याय २९

श्लोक 65

सा च कोशं समादाय वबन्ध विमला जटाः ।एका न बन्धमगमत् तामुत्पाट्याक्षिपद् भुवि

sā ca kośaṃ samādāya vabandha vimalā jaṭāḥ / ekā na bandhamagamat tāmutpāṭyākṣipad bhuvi

हिन्दी अर्थ

ततो गत्वा सरिच्छ्रेष्ठा वसिष्ठं मुनिसत्तमम्। कथयामास रुदतो विश्वामित्रस्य तद् वचः उवाच स सरिच्छेष्ठां विश्वामित्राय मां वह

English

Who except you, destruction, fool, evil- minded, ignorant to soul (Ajitatma), violator of elder's advice; will put such derogatory remarks about the revered god who has originated all these demons and monsters told by you including gods, the movable and immovable properties, you yourself, me, these mountains, trees, rivers and forest found in this world with all oceans and islands by one mere friction of his art.

अध्याय २९

श्लोक 66

सा जाता सुतरां रौद्री तैलाभ्यक्तशिरोरुहा ।कुष्णार्धमर्धशुक्लं च धारयन्ती स्वकं वपुः

sā jātā sutarāṃ raudrī tailābhyaktaśiroruhā / kuṣṇārdhamardhaśuklaṃ ca dhārayantī svakaṃ vapuḥ

हिन्दी अर्थ

उह्यमानश्च तुष्टाव तदा देवीं सरस्वतीम् त्वमेवाकाशगा देवी मेघेषु सृजसे पयः। सर्वास्त्वापस्त्वमेवेति त्वत्तो वयमधीमहे

English

TTtettat ^ ^ snererej ftraTS«PT:i <5P?)f¥i: gat ^etrgijHc*>:ii'tfoii

अध्याय २९

श्लोक 67

साब्रवीदं वरमेकं तु मारयामि महासुरम् ।तस्या नाम तदा चक्रे चण्डमारीति विश्रुतम्

sābravīdaṃ varamekaṃ tu mārayāmi mahāsuram / tasyā nāma tadā cakre caṇḍamārīti viśrutam

हिन्दी अर्थ

पष्टि्ृतिस्तथा कीर्तिः सिद्धिः कान्तिः क्षमा तथा। स्वधा स्वाहा तथा वाणी तवायत्तमिदं जगत् न्यवेदयत्तदा खिन्ना विश्वामित्राय तं मुनिम्

English

It is a matter of anxiety to me that the cunning son I am blessed with who could reproduce a son speaking insults to the god of

अध्याय २९

श्लोक 68

प्राह गच्छस्व सुभगे चण्डमुण्डाविहानय ।स्वयं हि मारयिष्यामि तावानेतुं त्वमर्हसि

prāha gacchasva subhage caṇḍamuṇḍāvihānaya / svayaṃ hi mārayiṣyāmi tāvānetuṃ tvamarhasi

हिन्दी अर्थ

'बसिष्ठापवाह नामक तीर्थका उत्पत्ति-प्रसङ्ग वसिष्ठका आश्रम स्थाणुतीर्थमें था और उसके पश्चिम दिशामें बुद्धिमान् विश्वामित्र महर्षिका आश्रम था; जहाँ देवाधिदेव भगवान् शिवने यज्ञ करनेके बाद सरस्वतीकी पूजा कर मूर्तिके रूपमें सरस्वतीकी स्थापना की थी।

English

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अध्याय २९

श्लोक 69

श्रुत्वैवं वचनं देव्याः साभ्यद्रवत् तावुभौ ।प्रदुद्रुवतुर्भयार्त्तौ दिशमाश्रित्य दक्षिणाम्

śrutvaivaṃ vacanaṃ devyāḥ sābhyadravat tāvubhau / pradudruvaturbhayārttau diśamāśritya dakṣiṇām

हिन्दी अर्थ

वसिष्ठजी वहीं घोर तपस्यामें संलग्न थे । उनकी तपस्यासे विश्वामित्र (प्रभावत:) हीन-से होने लगे॥ २--५॥ (एक बार) विश्वामित्रने सरस्वतीको बुलाकर यह वचन कहा--सरस्वति! तुम मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठको अपने वेगसे बहा लाओ । मैं उन द्विजश्रेष्ठ वसिष्ठको यहाँ मारुंगा -- इसमें संदेहकी बात नहीं है। इस (अवाज्छनीय बात)-

English

For to say your devotion for Krsna, the destroyer of the entire world with its creatures, had you not at least take a care of my honour, (who is your grandfather).

अध्याय २९

श्लोक 70

ततस्तावपि वेगेन प्राधावत् त्यक्तवाससौ ।साधिरुह्य महावेगं रासभं गरुडोपमम्

tatastāvapi vegena prādhāvat tyaktavāsasau / sādhiruhya mahāvegaṃ rāsabhaṃ garuḍopamam

हिन्दी अर्थ

'को सुनकर वह महानदी दुःखित हो गयी । (पर) विश्वामित्रने उस प्रकार दुःखित एवं काँपती हुई उस महानदीको देखकर क्रोधमें भरकर कहा कि वसिष्ठको शीघ्र लाओ। उसके बाद उस श्रेष्ठ नदीने मुनिश्रेष्ठके पास जाकर उनसे रोते हुए विश्वामित्रकी उस बातको कहा॥ ६--९॥

English

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अध्याय २९

श्लोक 71

यतो गतौ च तौ दौत्यौ तत्रैवानुययौ शिवा ।सा ददर्श तदा पौण्ड्रं महिषं वै मस्य च

yato gatau ca tau dautyau tatraivānuyayau śivā / sā dadarśa tadā pauṇḍraṃ mahiṣaṃ vai masya ca

हिन्दी अर्थ

उन वसिष्ठजीने तपश्चर्यासे दुर्बल एवं अतिशय शोक-समन्वित उस श्रेष्ठ सरिता (सरस्वती)-से कहा -- (तुम) विश्वामित्रके पास मुझे बहा ले चलो। उन दयालुके उस वचनको सुनकर उस सरस्वती सरिताने जलके (तेज) प्रवाहद्वारा उन्हें उस स्थानसे बहाना प्रारम्भ किया। किनारेसे ले जाये जानेके कारण बहते हुए मित्रावरुणके पुत्र वसिष्ठ-ऋषि प्रसन्‍न होकर देवी सरस्वतीकी स्तुति करने लगे --सरस्वति! आप ब्रह्माके

English

O son of Diti! You yourself including this whole world also knows the fact that I love Krsna beyond my own life. (viz. no value of my life without Krsna).

अध्याय २९

श्लोक 72

सा तस्योत्पाटयामास विषाणं भुजगाकृतिम् ।तं प्रगृह्य करेणैव दानवावन्वगाज्जवात्

sā tasyotpāṭayāmāsa viṣāṇaṃ bhujagākṛtim / taṃ pragṛhya kareṇaiva dānavāvanvagājjavāt

हिन्दी अर्थ

सरोवरसे निकली हैं । आपने अपने उत्तम जलसे समस्त जगत्को व्याप्त कर दिया है॥ १०--१३॥ “आप ही आकाशगामिनी देवी हैं और मेघोंमें जलको उत्पन्न करती हैं। आप ही सभी जलोंके रूपमें वर्तमान हैं। आपकी ही शक्तिसे हमलोग अध्ययन करते हैं। आप ही पुष्टि, धृति, कीर्ति, सिद्धि,

English

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अध्याय २९

श्लोक 73

तौ चापि भूमिं संत्यज्य जग्मतुर्गगनं तदा ।वेगेनाबिसृता सा च रासभेन महेश्वरी

tau cāpi bhūmiṃ saṃtyajya jagmaturgaganaṃ tadā / vegenābisṛtā sā ca rāsabhena maheśvarī

हिन्दी अर्थ

कान्ति, क्षमा, स्वधा, स्वाहा तथा सरस्वती हैं। यह पूरा विश्व आपके ही अधीन है। आप ही समस्त प्राणियोंमें वाणीरूपसे स्थित हैं।' बसिष्ठजीने भगवती सरस्वतीकी इस प्रकार स्तुति की और सरस्वती नदीने उन विप्रदेवको विश्वामित्रके आश्रममें सुखपूर्वक पहुँचा दिया और खिन्न होकर उन मुनिको विश्वामित्रके लिये निवेदित कर दिया

English

In spite of duly known to the fact that I love Krsna more than my life, you shown disrespect me condemning that god in my

अध्याय २९

श्लोक 74

ततो ददर्श गरुडं पन्नगेन्द्रं चिषादिषुम ।कर्कोटकं स दृष्ट्वा ऊर्ध्वरोमा व्यजायत

tato dadarśa garuḍaṃ pannagendraṃ ciṣādiṣuma / karkoṭakaṃ sa dṛṣṭvā ūrdhvaromā vyajāyata

हिन्दी अर्थ

तमानीतं सरस्वत्या दृष्टा कोपसमन्वित: । अथान्विषत् प्रहरणं वसिष्ठान्तकरं तदा तं तु क्रुद्धमभिप्रेक्ष्य ब्रह्महत्याभयान्नदी।

English

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अध्याय २९

श्लोक 75

भयान्मार्यश्च गरुडो मांसपिण्डोपमो बभौ ।न्यपतंस्तस्य पत्राणि रौद्राणि हि पतत्त्रिणः

bhayānmāryaśca garuḍo māṃsapiṇḍopamo babhau / nyapataṃstasya patrāṇi raudrāṇi hi patattriṇaḥ

हिन्दी अर्थ

शोणितं वह कल्याणि रक्षोग्रामणिसंयुता अवहच्छोणितोन्मिश्रं तोयं संवत्सरं तदा

English

O Bali! Your preceptor (father) is Virocana, I am his preceptor (father) and my preceptor (father) is Narayana Hari.

अध्याय २९

श्लोक 76

खगेन्द्रपत्राण्यादाय नागं कर्कोटकं तथा ।वेगेनानुसरद् देवी चण्डमुण्डौ भयातुरौ

khagendrapatrāṇyādāya nāgaṃ karkoṭakaṃ tathā / vegenānusarad devī caṇḍamuṇḍau bhayāturau

हिन्दी अर्थ

अथर्षयश्च देवाश्च गन्धर्वाप्सरस्तदा। सरस्वतीं तदा दृष्टा बभूवुर्भशदुःखिताः तस्मिस्तीर्थवरे पुण्ये शोणितं समुपावहत्। ततो भूतपिशाचाश्च राक्षसाश्च समागताः

English

(When this is the position) you are condemning your preceptor (Virocana), his preceptor (Prahlada) and my preceptor Sri Krsna. Hence, your prosperity shall lick the dust as a result of such gross humiliation.

अध्याय २९

श्लोक 77

संप्राप्तौ च तदा देव्या चण्डमुण्डौ महासुरौ ।बद्धौ कर्कोटकेनैव बद्ध्वा विन्ध्यमुपागमत्

saṃprāptau ca tadā devyā caṇḍamuṇḍau mahāsurau / baddhau karkoṭakenaiva baddhvā vindhyamupāgamat

हिन्दी अर्थ

कस्यचित्त्वथ कालस्य ऋषयः सतपोधनाः। तीर्थयात्रां समाजग्मुः सरस्वत्यां तपोधनाः किं कारणं सरिच्छ्रेष्ठे शोणितेन हृदो ह्यहम्। एवमाकुलतां यातः श्रुत्वा वेत्स्यामहे वयम्

English

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अध्याय २९

श्लोक 78

निवेदयित्वा कौशिक्यै कोशमादाय भेरवम् ।शिरोभिर्दानवेन्द्राणां तार्क्ष्यपत्रैश्च शोभनैः

nivedayitvā kauśikyai kośamādāya bheravam / śirobhirdānavendrāṇāṃ tārkṣyapatraiśca śobhanaiḥ

हिन्दी अर्थ

उसके बाद सरस्वतीद्वारा बहाकर लाये गये वसिष्ठको देखकर विश्वामित्र क्रोधसे भर गये और चसिष्ठका अन्त करनेवाला शस्त्र ढूँढ़ने लगे। उन्हें क्रोधसे भरा हुआ देखकर ब्रह्महत्याके भयसे डरती हुई वह सरस्वती नदी गाधिपुत्र विश्वामित्रको वञ्चित कर दोनोंकी बातोंका पालन करती हुई उन वसिष्ठको जलमें (पुनः) बहा ले गयी। उसके बाद ऋषिप्रवर वसिष्ठको अपवाहित होते देखकर महातपस्वी विश्वामित्रके नेत्र क्रोधसे लाल

English

O Bali! That supreme Janardana is the master of this whole universe. Considering me devoted to my preceptor (viz. I myself) you should have not criticised me.

अध्याय २९

श्लोक 79

कृत्वा स्रजमनौपम्यां चण्डिकायै न्यवेदयत् ।घर्घरां च मृगेन्द्रस्य चर्मणः सा समार्पयत्

kṛtvā srajamanaupamyāṃ caṇḍikāyai nyavedayat / ghargharāṃ ca mṛgendrasya carmaṇaḥ sā samārpayat

हिन्दी अर्थ

हो गये। फिर विश्वामित्रने कहा --ओ श्रेष्ठ नदी! यतः तुम मुझे वश्चितकर चली गयी हो, कल्याणि! अत: श्रेष्ठ राक्षसोंसे संयुक्त होकर तुम शोणितका वहन करो -- तुम्हारा जल रक्तसे युक्त हो जाय उसके बाद बुद्धिमान् विश्वामित्रसे इस प्रकार शाप प्राप्तकर सरस्वतीने एक वर्षतक रक्तसे मिले हुए जलको बहाया। उसके पश्चात् सरस्वती नदीको रक्तसे मिश्रित जलवाली देखकर ऋषि, देवता, गन्धर्व और अप्सराएँ

English

O accused of criticising the preceptor of this whole universe! as you have not taken the least care of me, I curse you.

अध्याय २९

श्लोक 80

स्रजमन्यैः खगेन्द्रस्य पत्रैर्मूर्घ्नि निबध्य च ।आत्मना सा पपौ पानं रुधिरं दानवेष्वपि

srajamanyaiḥ khagendrasya patrairmūrghni nibadhya ca / ātmanā sā papau pānaṃ rudhiraṃ dānaveṣvapi

हिन्दी अर्थ

तीर्थमें रुधिर ही बहने लगा। अतः वहाँ भूत, पिशाच, राक्षस एकत्र होने लगे। वे सभी रक्तका पान करते हुए वहाँ आनन्दपूर्वक रहने लगे। वे उससे अत्यन्त तृप्त, सुखी एवं निश्चिन्त होकर इस प्रकार नाचने एवं हँसने लगे, मानो उन्होंने स्वर्गको जीत लिया हो

English

O Bali! the derogatory remark you made on Acyuta is more cruel than my murder. Hence, dethroned soon and live a pauper's life.

अध्याय २९

श्लोक 81

चण्डा त्वादाय चण्डं च मुण्डं चासुरनायकम् ।चकार कुपिता दुर्गा विशिरस्कौ महासुरौ

caṇḍā tvādāya caṇḍaṃ ca muṇḍaṃ cāsuranāyakam / cakāra kupitā durgā viśiraskau mahāsurau

हिन्दी अर्थ

कुछ समय बीतनेपर तपस्याके धनी ऋषिलोग तीर्थयात्रा करते-करते सरस्वतीके तटपर पहुँचे। (वहाँ) भयानक राक्षसोंके द्वारा पीती जाती हुई महानदी सरस्वतीको देखकर वे उसकी रक्षाके लिये महान् प्रयत्न करने लगे। और महान् ब्रतोंका अनुष्ठान करनेवाले उन महाभागोंने श्रेष्ठ नदीको (पास) बुलाकर उससे यह वचन फिर कहा--श्रष्ठ सरिते! हम सब आपसे यह जानना चाहते हैं कि यह जलाशय रक्तसे

English

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अध्याय २९

श्लोक 82

तयोरेवाहिना देवी शेखरं सुष्करेवती ।कृत्वा जगाम कौशिक्याः सकाशं मार्यया सह

tayorevāhinā devī śekharaṃ suṣkarevatī / kṛtvā jagāma kauśikyāḥ sakāśaṃ māryayā saha

हिन्दी अर्थ

भरकर ऐसा क्षुब्ध कैसे हुआ है? तब उसने विश्वामित्रके समस्त विकर्मोंका (उनके सामने ही) वर्णन किया। उसके पश्चात् प्रसन्न हुए मुनिजन सरस्वती तथा समस्त पापोंका विनाश करनेवाली

English

As there is no other saviour except lord Kjsna from the ocean of worldly living, may I see you soon

अध्याय २९

श्लोक 83

समेत्य साब्रवीद् देवि गृह्यतां शेखरोत्तमः ।ग्रथितो दैत्यशीर्षाभ्यां नागराजेन वेष्टितः

sametya sābravīd devi gṛhyatāṃ śekharottamaḥ / grathito daityaśīrṣābhyāṃ nāgarājena veṣṭitaḥ

हिन्दी अर्थ

अरुणा नदीको ले आये। (जिससे सरस्वती-हृदका ऊचुस्तान् वै मुनीन् सर्वान् हैन्ययुक्ताः पुनः पुन:

English

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अध्याय २९

श्लोक 84

तं शेखरं शिवा गृह्य चण्डाया मूर्ध्नि विस्तृतम् ।बबन्ध प्राह चैवैनां कृतं कर्म सुदारुणम्

taṃ śekharaṃ śivā gṛhya caṇḍāyā mūrdhni vistṛtam / babandha prāha caivaināṃ kṛtaṃ karma sudāruṇam

हिन्दी अर्थ

चयं हि क्षुधिताः सर्वे धर्महीनाश्च शाश्वताः। न च नः कामकारोऽयं यद् वयं पापकारिणः युष्माकं चाप्रसादेन दुष्कृतेन च कर्मणा। पक्षोऽयं वर्धतेऽस्माकं यतः स्मो ब्रह्मराक्षसाः

English

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अध्याय २९

श्लोक 85

शेखरं चण्डमुण्डाभ्यां यस्माद् धारयसे शुभम् ।तस्माल्लोके तव ख्यातिश्चामुण्डेति भविष्यति

śekharaṃ caṇḍamuṇḍābhyāṃ yasmād dhārayase śubham / tasmālloke tava khyātiścāmuṇḍeti bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

एवं वैश्याश्च शूद्राश्च क्षत्रियाश्च विकर्मभिः। ये ब्राह्मणान् प्रद्विषन्ति ते भवन्तीह राक्षसाः योषितां चैव पापानां योनिदोषेण वर्द्धते। इयं संततिरस्माकं गतिरेषा सनातनी

English

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अध्याय २९

श्लोक 86

इत्येवमुक्त्वा वचनं त्रिनेत्रा मा चण्डमुण्डस्रजधारिणीं वै ।दिग्वाससं चाभ्यवदत् प्रतीता निषूदय खारिबलान्यमूनि

ityevamuktvā vacanaṃ trinetrā mā caṇḍamuṇḍasrajadhāriṇīṃ vai / digvāsasaṃ cābhyavadat pratītā niṣūdaya khāribalānyamūni

हिन्दी अर्थ

शक्ता भवन्तः सर्वेषां लोकानामपि तारणे। क्षुतकीटावपन्नं च यच्चोच्छिष्टाशितं भवेत्

English

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अध्याय २९

श्लोक 87

सा त्वेवमुक्ताथ विषाणकोट्या सुवेगयुक्तेन च रासभेन ।निषूदयन्ती रिपुसैन्यमुग्रं चचार चान्यानसुरांश्चखाद

sā tvevamuktātha viṣāṇakoṭyā suvegayuktena ca rāsabhena / niṣūdayantī ripusainyamugraṃ cacāra cānyānasurāṃścakhāda

हिन्दी अर्थ

केशावपन्नमाधूतं मारुतश्चासदूषितम्। एभिः संसृष्टमन्नं च भागं वै रक्षसां भवेत् राक्षसानामसौ भुङ्के यो भुङ्केऽन्नमीदृशम्

English

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अध्याय २९

श्लोक 88

ततो ऽम्बिकायास्त्वथ चर्ममुण्डया मार्या च सिंहेन च भूतसंघैः ।निपात्यमाना दनुपुङ्गवास्ते ककुद्मिनं शुम्भमुपाश्रयन्त

tato 'mbikāyāstvatha carmamuṇḍayā māryā ca siṃhena ca bhūtasaṃghaiḥ / nipātyamānā danupuṅgavāste kakudminaṃ śumbhamupāśrayanta

हिन्दी अर्थ

मोक्षार्थं रक्षसां तेषां संगमं तत्र कल्पयन् अरुणायाः सरस्वत्याः संगमे लोकविश्रुते।

English

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स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/1_sanskr/3_purana/vamp__u.htm | https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_vAmanapurANasaromAhAtmya.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vamana Purana — Chapter 29
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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