Vamana Purana· Vāmana Purāṇa
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अध्याय 30 / 95

Adhyaya 30

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अध्याय ३०

श्लोक 1

इति श्रीवामनपुराणे एकोनत्रिंशोध्यायः ________________________________________________________________________ पुलस्त्य उवाच ।चण्डमुण्डौ च निहतौ सैन्यं च विद्रुतम् ।समादिदेशातिबलं रक्तबीजं महासुरम् ।अक्षौहिणीनां त्रिंशद्भिः कोटिभिः परिवारितम्

iti śrīvāmanapurāṇe ekonatriṃśodhyāyaḥ ________________________________________________________________________ pulastya uvāca / caṇḍamuṇḍau ca nihatau sainyaṃ ca vidrutam / samādideśātibalaṃ raktabījaṃ mahāsuram / akṣauhiṇīnāṃ triṃśadbhiḥ koṭibhiḥ parivāritam

हिन्दी अर्थ

प्राप्ते कलियुगे घोरे अधर्मे प्रत्युपस्थिते। अरुणासंगमे स्त्रात्वा मुक्तिमाप्नोति मानव: ततस्ते राक्षसाः सर्वे स्त्राताः पापविवर्जिताः। दिव्यमाल्याम्बरधराः स्वर्गस्थितिसमन्विताः

English

Eulogy of Vamana by Brahma

अध्याय ३०

श्लोक 2

तमापतन्तं दैत्यानां बलं दृष्ट्वैव चण्डिका ।मुमोच सिंहनादं वै ताभ्यां सह महेश्वरी

tamāpatantaṃ daityānāṃ balaṃ dṛṣṭvaiva caṇḍikā / mumoca siṃhanādaṃ vai tābhyāṃ saha maheśvarī

हिन्दी अर्थ

चसिष्ठापवाह नामक तीर्थका उत्पत्ति-प्रसङ्ग

English

Lomaharsana said- The king Bali bowed several times on the feet of the preceptor (Prahlada) in order to pacify him.

अध्याय ३०

श्लोक 3

निनदन्त्यास्ततो देव्या ब्रह्माणी मुखतो ऽभवत् ।हंसयुक्तविमानस्था साक्षसूत्रकमण्डलुः

ninadantyāstato devyā brahmāṇī mukhato 'bhavat / haṃsayuktavimānasthā sākṣasūtrakamaṇḍaluḥ

हिन्दी अर्थ

शोणित पवित्र जल हो गया) (पर) सरस्वतीके जलको (इस प्रकार शुद्ध हुआ) देखकर राक्षस बहुत दुःखित हो गये। वे दीनतापूर्वक उन सभी मुनियोंसे बार-बार कहने लगे कि हम सभी सदा भूखे एवं धर्मसे रहित रहते हैं। हम अपनी इच्छासे पापकर्म करनेवाले पापी नहीं बने हुए हैं, अपितु आपलोगोंकी अकृपा एवं अशोभन कर्मोसे ही हमारा पक्ष बढ़ता रहता है; क्योंकि हम सभी ब्रह्मराक्षस हैं

English

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अध्याय ३०

श्लोक 4

माहेश्वरी त्रिनेत्रा च वृषारूढा त्रिशूलिनी ।महाहिवलया रौद्रा जाता कुण्डलिनी क्षणात्

māheśvarī trinetrā ca vṛṣārūḍhā triśūlinī / mahāhivalayā raudrā jātā kuṇḍalinī kṣaṇāt

हिन्दी अर्थ

इसी प्रकार जो क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र ब्राह्मणोंसे द्वेष करते हैं, वे (ऐसे ही) विकर्म करनेके कारण राक्षस हो जाते हैं। पापिनी स्त्रियोंके योनिदोषसे हमारी यह संतति बढ़ती रहती है। यह हमारी प्राचीन

English

Bali requested- O grandfather! Please, be happy and do not curse me as I fell pray to affection. Such remarks were made by me having been proud of power the vested in me.

अध्याय ३०

श्लोक 5

कण्ठादथ च कौमारी बर्हिपत्रा च शक्तिनी ।समुद्भूता च देवर्षे मयूरवरवाहना

kaṇṭhādatha ca kaumārī barhipatrā ca śaktinī / samudbhūtā ca devarṣe mayūravaravāhanā

हिन्दी अर्थ

गति है। आपलोग सभी लोकोंका उद्धार करनेमें समर्थ हैं। (लोमहर्षणजी कहते हैं-) द्विजो! वे कृपालु मुनि उन सदाकी रीति ब्रह्मराक्षसोंके इन वचनोंको सुनकर बहुत दुःखी हुए और परस्पर परामर्शकर उनसे बोले - (ब्रह्मराक्षसो!) छींक तथा 'कीटके संसर्गसे दूषित, उच्छिष्ट भोजन, केशयुक्त, तिरस्कृत एवं श्वासवायुसे दूषित अन्न तुम राक्षसोंका

English

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अध्याय ३०

श्लोक 6

बाहुभ्यां गरुडारूढा शङ्खचक्रगदासिनी ।शार्ङ्गबाणधरा जाता वैष्णवी रूपशालिनी

bāhubhyāṃ garuḍārūḍhā śaṅkhacakragadāsinī / śārṅgabāṇadharā jātā vaiṣṇavī rūpaśālinī

हिन्दी अर्थ

(पुनः लोमहर्षणजी बोले) ऋषियो! इसको जानकर विद्वान् पुरुषको चाहिए कि इस प्रकारके अन्नोंको त्याग दे। इस प्रकार अन्न खानेवाला व्यक्ति राक्षसोंका भाग खाता है। उन तपोधन ऋषियोंने उस

English

O great demon! I am a sinner as I had lost discretion on account of affection gripped. I say good the curse you have inflicted on me.

अध्याय ३०

श्लोक 7

महोग्रमुशला रौद्रा दंष्ट्रोल्लिखितभूतला ।वाराही पृष्ठतो जाता शेषनागोपरि श्थिता

mahogramuśalā raudrā daṃṣṭrollikhitabhūtalā / vārāhī pṛṣṭhato jātā śeṣanāgopari śthitā

हिन्दी अर्थ

तीर्थको शुद्धकर उन राक्षसोंकी मुक्तिके लिये वहाँ एक सङ्गमकी रचना की। उसका फल इस प्रकार है लोक-प्रसिद्ध अरुणा और सरस्वतीके सङ्गममें तीन दिनोंतक व्रतपूर्वक स्नान करनेवाला (व्यक्ति) सभी पापोंसे मुक्त हो जाता है। (आगे भी) घोर कलियुग आनेपर तथा अधर्मका अधिक प्रसार हो जानेपर मनुष्य अरुणाके सङ्गममें स्नान करके मुक्ति प्राप्त कर लेंगे। इसको सुननेके बाद उन सभी राक्षसोंने उसमें स्नान

English

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अध्याय ३०

श्लोक 8

वज्राङ्कुशोद्यतकरा नानालङ्कारभूषिता ।जाता गजेन्द्रपष्ठस्था माहेन्द्री स्तनमण्डलात्

vajrāṅkuśodyatakarā nānālaṅkārabhūṣitā / jātā gajendrapaṣṭhasthā māhendrī stanamaṇḍalāt

हिन्दी अर्थ

किया और वे निष्पाप हो गये तथा दिव्य माला और वस्त्र धारणकर स्वर्गमें विराजने लगे

English

Erciruite fir mi am d^ite R ^ ptimi

अध्याय ३०

श्लोक 9

विक्षिपन्ती सटाक्षेपैर्ग्रहनक्षत्रतारकाः ।नखिनी हृदयाज्जाता नारसिंही सुदारुणा

vikṣipantī saṭākṣepairgrahanakṣatratārakāḥ / nakhinī hṛdayājjātā nārasiṃhī sudāruṇā

हिन्दी अर्थ

कुरुक्षेत्रके तीर्थो शतसाहरित्रिक, शतिक, रेणुका, ऋणमोचन, ओजस, संनिहति, प्राची सरस्वती, पञ्चवट, कुरुतीर्थ, अनरकतीर्थ, काम्यकवन आदिका वर्णन परिपूर्ण हि तत्सर्वमपि दुष्कृतकर्मणः

English

O grandfather! As you have been aggrieved due to my obstinacy, I therefore, accept decay of fame and dethroning.

अध्याय ३०

श्लोक 10

ताभिर्निपात्यमानं तु निरीक्ष्य बलमासुरम् ।ननाद भूयो नादान् वै चण्डिका निर्भया रिपून् ।तन्निनादं महच्छ्रुत्वा त्रैलोक्यप्रतिपूरकम्

tābhirnipātyamānaṃ tu nirīkṣya balamāsuram / nanāda bhūyo nādān vai caṇḍikā nirbhayā ripūn / tanninādaṃ mahacchrutvā trailokyapratipūrakam

हिन्दी अर्थ

रेणुकाश्रममासाद्य श्रद्दधानो जितेन्द्रियः। मातृभक्त्या च यत्पुण्यं तत्फलं प्राप्नुयान्नरः

English

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अध्याय ३०

श्लोक 11

समाजगाम देवेशः शूलपाणिस्त्रिलोचनः ।अभ्येत्य वन्द्य चैवैनां प्राह वाक्यं तदाम्बिकं

samājagāma deveśaḥ śūlapāṇistrilocanaḥ / abhyetya vandya caivaināṃ prāha vākyaṃ tadāmbikaṃ

हिन्दी अर्थ

ऋणमोचनमासाद्या तीर्थ ब्रह्मनिषेवितम्। ऋणैर्मुक्तो भवेन्नित्यं देवर्षिपितृसम्भवैः। कुमारस्याभिषेकं च ओजसं नाम विश्रुतम् चैत्रषष्ठयां सिते पक्षे यस्तु श्राद्धं करिष्यति। गयाश्राद्धे च यत्पुण्यं तत्पुण्यं प्राप्नुयान्नरः

English

O grandfather! It is not tough to gain ruling over three-world, the luxury or anything other but a preceptor like you are rarely found.

अध्याय ३०

श्लोक 12

समायातो ऽस्मि वै दुर्गे देह्याज्ञां किं करोमि ते ।तद्वाक्यसमकालं च देव्या देहोद्भवा शिवा

samāyāto 'smi vai durge dehyājñāṃ kiṃ karomi te / tadvākyasamakālaṃ ca devyā dehodbhavā śivā

हिन्दी अर्थ

संनिहत्यां यथा श्राद्धं राहुग्रस्ते दिवाकरे। तथा श्राद्धं तत्र कृतं नात्र कार्या विचारणा

English

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अध्याय ३०

श्लोक 13

जाता सा चाह देवेशं गच्छ दौत्येन शङ्कर ।ब्रूहि शुम्भं निशुम्भं च यदि जीवितुमिच्छथ

jātā sā cāha deveśaṃ gaccha dautyena śaṅkara / brūhi śumbhaṃ niśumbhaṃ ca yadi jīvitumicchatha

हिन्दी अर्थ

ओजसे ह्यक्षयं द्धं वायुना कथितं पुरा। तस्मात् सर्वप्रयल्लेन श्राद्धं तत्र समाचरेत् यस्तु स्त्रानं श्रद्धानश्रैत्रषष्ठयां करिष्यति। अक्षय्यमुदकं तस्य पितृणामुपजायते

English

O guardian of demons! Be happy and spit on the anger now. I am burning in the fire erupted through your anger.

अध्याय ३०

श्लोक 14

तद् गच्छध्वं दुराचाराः सप्तमं हि रसातलम् ।वासवो लभतां स्वर्गं देवाः सन्तु गतव्यथा

tad gacchadhvaṃ durācārāḥ saptamaṃ hi rasātalam / vāsavo labhatāṃ svargaṃ devāḥ santu gatavyathā

हिन्दी अर्थ

तत्र पञ्चवटं नाम तीर्थ त्रैलोक्यविश्रुतम्। महादेवः स्थितो यत्र योगमूर्तिधरः स्वयम्

English

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अध्याय ३०

श्लोक 15

यजन्तु ब्राह्मणाद्यामी वर्णा यज्ञांश्च साम्प्रतम् ।नोचेद् बलावलेपेन भवन्तो योद्धुमिच्छथ

yajantu brāhmaṇādyāmī varṇā yajñāṃśca sāmpratam / noced balāvalepena bhavanto yoddhumicchatha

हिन्दी अर्थ

'लोमहर्षणने कहा-- प्राचीन कालको बात है महर्षि दर्वि वहाँ चार समुद्रोंको ले आये थे। उनमेंसे प्रत्येक समुद्रमें स्नान करनेसे मनुष्योंको हजार गोदान करनेका फल प्राप्त होता है। द्विजोत्तमो ! उस तीर्थमें जो तपस्या की जाती है, वह पापीद्वारा की गयी होनेपर भी सिद्ध हो जाती है। द्विजो! वहाँ शतसाहस्त्रिक एवं शतिक नामके दो तीर्थ हैं। उन दोनों ही तीर्थॉमें स्नान करनेवाला मनुष्य हजार गौ- दान करनेका फल प्राप्त करता है। वहीं सरस्वतीके

English

Prahlada said- O grandson! I was gripped in affection and it had destroyed within moment my discretion. Hence, I cursed you.

अध्याय ३०

श्लोक 16

तदागच्छध्वमव्यग्रा एषाहं विनिषूदये ।यतस्तु सा शिवं दौत्ये न्ययोजयत् नारद

tadāgacchadhvamavyagrā eṣāhaṃ viniṣūdaye / yatastu sā śivaṃ dautye nyayojayat nārada

हिन्दी अर्थ

तटपर सोमतीर्थ भी स्थित है, जिसमें स्नान करनेसे पुरुष राजसूययज्ञका फल प्राप्त करता है॥ १--४॥

English

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अध्याय ३०

श्लोक 17

ततो नाम महादेव्याः शिवदूतीत्यजायत ।ते चापि शङ्करवचः श्रुत्वा गर्वसमन्वितम्।।हुङ्कृत्वाभ्यद्रवन् सर्वे यत्र कात्यायनी स्थिता

tato nāma mahādevyāḥ śivadūtītyajāyata / te cāpi śaṅkaravacaḥ śrutvā garvasamanvitam/ / huṅkṛtvābhyadravan sarve yatra kātyāyanī sthitā

हिन्दी अर्थ

माताकी सेवा करनेसे जो पुण्य प्राप्त होता है, उस पुण्य-फलको इन्द्रियोंपर विजय प्राप्त करनेवाला श्रद्धालु मनुष्य रेणुकातीर्थमें जाकर प्राप्त कर लेता है और ब्रह्मद्वारा सेवित ऋणमोचन नामके तीर्थमें जाकर देव- ऋण, ऋषि-ऋण और पितृ-ऋणसे छूट जाता है। कुमार (कार्तिकेय)-का अभिषेकस्थल ओजसनामसे विख्यात है; उस तीर्थमें स्नान करनेसे मनुष्य कीर्ति प्राप्त करता है और वहाँ श्राद्ध करनेसे उसे कार्तिकेयके लोककी प्राप्ति

English

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अध्याय ३०

श्लोक 18

ततः शरैः शक्तिभिरङ्कुर्वरैः परश्वधैः शूलभुशुण्डिपट्टिशैः ।प्रासैः सुनीक्ष्णैः परिघैश्च विस्तृतैर्ववर्षतुदैत्यवरौ सुरेश्वरीम्

tataḥ śaraiḥ śaktibhiraṅkurvaraiḥ paraśvadhaiḥ śūlabhuśuṇḍipaṭṭiśaiḥ / prāsaiḥ sunīkṣṇaiḥ parighaiśca vistṛtairvavarṣatudaityavarau sureśvarīm

हिन्दी अर्थ

होती है। चैत्रमासकी शुक्ला षष्ठी तिथिमें जो मनुष्य वहाँ श्रद्ध करेगा, वह गयामें श्राद्ध करनेसे जो पुण्य प्राप्त होता है, उस पुण्यको प्राप्त करता है॥ ५--८॥

English

O great demon! Had my discretion not vanished that moment, how then I would have cursed because god is omnipresent.

अध्याय ३०

श्लोक 19

सा चापि बाणैर्वरकामुकच्युतैश् चिच्छेद शस्त्राण्यथ बाहुभिः सह ।जघान चान्यात् रणचण्डविक्रमा महासुरान् बाणशतैर्महेश्वरी

sā cāpi bāṇairvarakāmukacyutaiś ciccheda śastrāṇyatha bāhubhiḥ saha / jaghāna cānyāt raṇacaṇḍavikramā mahāsurān bāṇaśatairmaheśvarī

हिन्दी अर्थ

राहुद्वारा सूर्यके ग्रस्त हो जानेपर (सूर्यग्रहण लगनेपर) सन्निहतितीर्थमें किये गये श्राद्धके समान वहाँका श्राद्ध पुण्यप्रद होता है; इसमें अन्यथा विचार नहीं करना चाहिए। पूर्वसमयमें वायुने कहा था कि ओजसतीर्थमें किये गये श्राद्धका क्षय नहीं होता है। इसलिये प्रयत्नपूर्वक वहाँ श्राद्ध करना चाहिए। चैत्रमासके शुक्लपक्षकी षष्टी तिथिके दिन जो उसमें श्रद्धापूर्वक स्नान करेगा, उसके पितरोंको अक्षय (कभी भी क्षय न होनेवाले) जलकी

English

O demon king! Don't be anxious any more as the curse will definitely act fully in the course of time.

अध्याय ३०

श्लोक 20

मारी त्रिशूलेन जघान चान्यान् खट्वाङ्गपातैरपरांश्च कौशिकी ।महाजलक्षेपहतप्रभावान् ब्राह्मी तथान्यानसुरांश्चकार

mārī triśūlena jaghāna cānyān khaṭvāṅgapātairaparāṃśca kauśikī / mahājalakṣepahataprabhāvān brāhmī tathānyānasurāṃścakāra

हिन्दी अर्थ

प्राप्ति होगी। तीनों लोकोंमें विख्यात एक 'पञ्चवट' नामका तीर्थ है, जहाँ स्वयं भगवान् महादेव योगसाधना करनेकी मुद्रामें विराजमान हैं

English

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अध्याय ३०

श्लोक 21

माहेश्वरी शूलविदारितोरसश् चकार दग्धानपरांश्च वैष्णवी ।शक्त्या कुमारी कुलिशेन चैन्द्री तुण्डेन चक्रेण वराहरूपिणी

māheśvarī śūlavidāritorasaś cakāra dagdhānaparāṃśca vaiṣṇavī / śaktyā kumārī kuliśena caindrī tuṇḍena cakreṇa varāharūpiṇī

हिन्दी अर्थ

तत्र स्त्रात्वाऽर्चयित्वा च देवदेवं महेश्वरम्। गाणपत्यमवाप्नोति हैवतैः सह मोदते तप्तं सुघोरं क्षेत्रस्य कर्षणार्थं द्विजोत्तमाः

English

I suggest you to become a devotee to that lord Acyuta from this day and he only can

अध्याय ३०

श्लोक 22

नखैर्विभिन्नानपि नालसिंही अट्टाट्टहासैपि रुद्रदुती ।रुद्रस्त्रिशूलेन तथैव चान्यान् विनायकश्चापि परश्वधेन

nakhairvibhinnānapi nālasiṃhī aṭṭāṭṭahāsaipi rudradutī / rudrastriśūlena tathaiva cānyān vināyakaścāpi paraśvadhena

हिन्दी अर्थ

तस्य घोरेण तपसा तुष्ट इन्द्रोऽब्रवीद् वचः। राजर्षे परितुष्टोऽस्मि तपसाऽनेन सुत्रत

English

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अध्याय ३०

श्लोक 23

एवं हि देव्या विविधैस्तु रूपैर्निपात्यमाना दनुपुगवास्ते ।पेतुः पृथिव्यां भुवि चापि भूतैस्ते भक्ष्यमाणाः प्रलयं प्रजग्मुः

evaṃ hi devyā vividhaistu rūpairnipātyamānā danupugavāste / petuḥ pṛthivyāṃ bhuvi cāpi bhūtaiste bhakṣyamāṇāḥ pralayaṃ prajagmuḥ

हिन्दी अर्थ

ज्ञं ये च कुरुक्षेत्रे करिष्यन्ति शतक्रतोः। ते गमिष्यन्ति सुकृताँल्लोकान् पापविवर्जितान् अवहस्य ततः शक्रो जगाम त्रिदिवं प्रभुः । आगम्यागम्य चैवेनं भूयो भूयो वहस्य च

English

mi mi gfi'yjifq *rani **n

अध्याय ३०

श्लोक 24

ते वध्यमानास्त्वथ देवताभिर्महासुरा मातृभिराकुलाश्च ।विमुक्तकेशास्तरलेक्षणा भयात् ते रक्तबीजं शरणं हि जग्मुः

te vadhyamānāstvatha devatābhirmahāsurā mātṛbhirākulāśca / vimuktakeśāstaralekṣaṇā bhayāt te raktabījaṃ śaraṇaṃ hi jagmuḥ

हिन्दी अर्थ

यदा तु तपसोग्रेण चकर्ष देहमात्मनः।

English

You have remembered that god of gods when I cursed you. Hence, I will say all which will good for you.

अध्याय ३०

श्लोक 25

स रक्तबीजः सहसाभ्युपेत्य वरास्त्रमादाय च मातृमण्डतम् ।विद्रावयन् भूतगणान् समन्ताद् विवेश कोपात् स्फुरिताधरश्च

sa raktabījaḥ sahasābhyupetya varāstramādāya ca mātṛmaṇḍatam / vidrāvayan bhūtagaṇān samantād viveśa kopāt sphuritādharaśca

हिन्दी अर्थ

ततः शक्रोऽब्रवीत् प्रीतया ब्रूहि यत्ते चिकीर्षितम् अन्यत्र कृतपापा ये पञ्चपातकदूषिताः। अस्मिस्तीर्थ नराः स्त्रात्वा मुक्ता यान्तु परां गतिम्

English

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अध्याय ३०

श्लोक 26

तमापतन्तं प्रसमीक्ष्य मातरः शस्त्रैः शिताग्रैर्दितजं ववर्षुः ।यो रक्तबिन्दुर्न्यपतत् पृथिव्यां स तत्प्रमाणस्त्वसुरो ऽपि जज्ञे

tamāpatantaṃ prasamīkṣya mātaraḥ śastraiḥ śitāgrairditajaṃ vavarṣuḥ / yo raktabindurnyapatat pṛthivyāṃ sa tatpramāṇastvasuro 'pi jajñe

हिन्दी अर्थ

तं दृष्टा पापमुक्तस्तु परं पदमवाप्रुयात्

English

When Aditi got all fructifying grace, the great illustrious god (Visnu) began to develop in her womb.

अध्याय ३०

श्लोक 27

ततस्तदाश्चर्यमयं निरीक्ष्य सा कौशिकी केशिनिमभ्युवाच ।पिबस्व चण्डे रुधिरं त्वरातेर्वितत्य वक्त्रं वडवानलाभम्

tatastadāścaryamayaṃ nirīkṣya sā kauśikī keśinimabhyuvāca / pibasva caṇḍe rudhiraṃ tvarātervitatya vaktraṃ vaḍavānalābham

हिन्दी अर्थ

तत्र स्त्रात्वा शिवद्वारे प्राप्नोति परमं पदम् ततो गच्छेदनरकं तीर्थं त्रैलोक्यविश्रुतम्। यत्र पूर्वे स्थितो ब्रह्मा दक्षिणे तु महेश्वरः

English

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अध्याय ३०

श्लोक 28

सा त्वेवमुक्ता वरदाम्बिका हि वितत्य वक्त्रं विकरालमुग्रम् ।ओष्ठं नभस्पृक् पृथिवीं स्पूशन्तं कृत्वाधरं तिष्ठति चर्ममुण्डा

sā tvevamuktā varadāmbikā hi vitatya vaktraṃ vikarālamugram / oṣṭhaṃ nabhaspṛk pṛthivīṃ spūśantaṃ kṛtvādharaṃ tiṣṭhati carmamuṇḍā

हिन्दी अर्थ

मध्ये अनरकं तीर्थ त्रैलोक्यस्यापि दुर्लभम्

English

That god Govinda later on with the initiation of the tenth month was bom in a dwarfs body.

अध्याय ३०

श्लोक 29

ततो ऽम्बिका केशविकर्षणाकुलं कृत्वा रिपुं प्राक्षिपत स्ववक्त्रे ।बिभेद शूलेन तथाप्युरस्तः क्षतोद्भवान्ये न्यपतंश्च वक्त्रे

tato 'mbikā keśavikarṣaṇākulaṃ kṛtvā ripuṃ prākṣipata svavaktre / bibheda śūlena tathāpyurastaḥ kṣatodbhavānye nyapataṃśca vaktre

हिन्दी अर्थ

कुरुक्षेत्रके तीर्थोका वर्णन उस (पञ्चवट) स्थानपर स्त्रान करके देवाधिदेव महादेवकी पूजा करनेवाला मनुष्य गणपतिका पद और

English

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अध्याय ३०

श्लोक 30

ततस्तु शोषं प्रजगाम रक्तं रक्तक्षये हीनबलो बभूव ।तं हीनवीर्यं शतधा चकार चक्रेण चामीकरभूषितेन

tatastu śoṣaṃ prajagāma raktaṃ raktakṣaye hīnabalo babhūva / taṃ hīnavīryaṃ śatadhā cakāra cakreṇa cāmīkarabhūṣitena

हिन्दी अर्थ

है। श्रेष्ठ द्विजो! 'कुरुतीर्थ' विख्यात तीर्थ है, जिसमें कुरुने कीर्तिकी प्राप्तिके लिये धर्मकी खेती करनेके लिये तपस्या की थी। उनकी घोर तपस्यासे प्रसन्न होकर इन्द्रने कहा-सुन्दर ब्रतोंके करनेवाले राजर्षि!

English

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अध्याय ३०

श्लोक 31

तस्मिन् विशस्ते दनुसैन्यनाते ते दानवा दीनतरं विनेदुः ।हा तात ह भ्रातरिति ब्रुवन्तः क्त यासि तिष्ठस्व मुहूर्त्तमेहि

tasmin viśaste danusainyanāte te dānavā dīnataraṃ vineduḥ / hā tāta ha bhrātariti bruvantaḥ kta yāsi tiṣṭhasva muhūrttamehi

हिन्दी अर्थ

तुम्हारी इस तपस्यासे मैं संतुष्ट हूँ। (सुनो) इस कुरुकषेत्रमें जो लोग इन्द्रका यज्ञ करेंगे, वे लोग पापरहित हो जायँगे और पवित्र लोकोंको प्राप्त होंगे। इतना कहकर इन्द्रदेव मुस्कराकर स्वर्ग चले गये। बिना खिन्न हुए इन्द्र बारंबार आये और उपहासपूर्वक उनसे (उनकी योजनाके सम्बन्धमें कुछ) पूछ-पूछकर चले गये। कुरुने जब उग्र तपस्याद्वारा अपनी देहका कर्षण किया तो इन्द्रने प्रेमपूर्वक उनसे कहा --'कुरु! तुम्हें जो

English

The gods and their mother Aditi freed themselves from the tough grip of sorrow with the birth of that Jagannatha who was god of

अध्याय ३०

श्लोक 32

तथापरे विलुलितकेशपाशा विशीर्णवर्माभरणा दिगम्बराः ।निपातिता धरणितले मृडान्या प्रदुद्रुवुर्गिरिवरमुह्य दैत्याः

tathāpare vilulitakeśapāśā viśīrṇavarmābharaṇā digambarāḥ / nipātitā dharaṇitale mṛḍānyā pradudruvurgirivaramuhya daityāḥ

हिन्दी अर्थ

कुछ करनेकी इच्छा हो उसे कहो'

English

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अध्याय ३०

श्लोक 33

विशीर्णवर्मायुधभूषणं तत् बलं निरीक्ष्यैव हि दानवेन्द्रः ।विशीर्मचक्राक्षरथो निशुम्भः क्रोधान्मृडानीं समुपाजगाम

viśīrṇavarmāyudhabhūṣaṇaṃ tat balaṃ nirīkṣyaiva hi dānavendraḥ / viśīrmacakrākṣaratho niśumbhaḥ krodhānmṛḍānīṃ samupājagāma

हिन्दी अर्थ

कुरुने कहा- इन्द्रदेव! जो श्रद्धालु मानव इस तीर्थमें निवास करते हैं, वे परमात्मरूप परब्रह्मके लोकको प्राप्त करते हैं। इस स्थानसे अन्यत्र पाप करनेवालों एवं पञ्चपातकोंसे दूषित मनुष्य भी इस तीर्थमें स्नान करनेसे मुक्त होकर परमगतिको प्राप्त करता है। (लोमहर्षणने कहा --) श्रेष्ठ ब्राह्मणो ! कुरु्षेत्रमें कुरुतीर्थ सर्वाधिक पवित्र है। उसका दर्शन कर पापात्मा मनुष्य (भी) मोक्ष प्राप्त कर लेता है तथा कुरुतीर्थमें

English

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अध्याय ३०

श्लोक 34

खड्गं समादाय च चर्म भास्वरं धुन्वन् शिरः प्रेक्ष्य च रूपमस्याः ।संस्तम्भमोहज्वरपीडिते ऽथ चित्रे यथासौ लिखितो बभूव

khaḍgaṃ samādāya ca carma bhāsvaraṃ dhunvan śiraḥ prekṣya ca rūpamasyāḥ / saṃstambhamohajvarapīḍite 'tha citre yathāsau likhito babhūva

हिन्दी अर्थ

्रानकर पापोंसे छूट जाता है एवं कुरुकी आज्ञासे परमपद (मोक्ष)-को प्राप्त करता है

English

Pleasant breeze started blowing, the sky looked clear and all organisms are inspired towards welfare activities.

अध्याय ३०

श्लोक 35

तं स्तम्भितं वीक्ष्य सुरामग्रे प्रोवाच देवी वचनं विहस्य ।अनेन वीर्येण सुरास्त्वया जिता अनेन मां प्रार्थयसे बलेन

taṃ stambhitaṃ vīkṣya surāmagre provāca devī vacanaṃ vihasya / anena vīryeṇa surāstvayā jitā anena māṃ prārthayase balena

हिन्दी अर्थ

फिर (कुरुतीर्थमें त्रान करनेके बाद) शिवद्वारमें स्थित स्वर्गद्दाको जाय (और स्नान करे); क्योंकि वहाँ (शिवद्वारमें) स्नान करनेसे मनुष्य परमपदको प्राप्त करता है। शिवद्वार जानेके पश्चात् तीनों लोकोंमें विख्यात अनरक नामके तीर्थमें जाय। उस अनरकके पूर्वमें ब्रह्मा, दक्षिणमें महेश्वर, पश्चिममें रुद्रपत्री एवं पद्मनाभ और इन सबके मध्यमें अनरक नामका तीर्थ स्थित है; वह तीनों लोकोंके लिये भी

English

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अध्याय ३०

श्लोक 36

श्रुत्वा तु वाक्यं कौशिक्या दानवः सुचिरादिव ।प्रोवाच चिन्तयित्वाथ वचनं वदतां वरः

śrutvā tu vākyaṃ kauśikyā dānavaḥ sucirādiva / provāca cintayitvātha vacanaṃ vadatāṃ varaḥ

हिन्दी अर्थ

यः प्रयच्छेत करकांश्चतुरो भक्ष्यसंयुतान्

English

O best Dvijas! The human beings lost anxiety and their mind tended to execute noble deeds.

अध्याय ३०

श्लोक 37

सुकुमाररीरो ऽथं मच्छस्त्रपतनादपि ।शतधा यास्यते भीरु आमपात्रमिवाम्भसि

sukumārarīro 'thaṃ macchastrapatanādapi / śatadhā yāsyate bhīru āmapātramivāmbhasi

हिन्दी अर्थ

सर्वदेवैरनुज्ञातः परं पदमवाप्रुयात्। काम्यकं च बनं पुण्यं सर्वपातकनाशनम् जिस (अनरकतीर्थ)-में स्नान करनेवाला मनुष्य छोटे-बड़े सभी पापोंसे छूट जाता है। जब वैशाखमासकी षष्ठी तिथिको मङ्गल दिन हो तब वहाँ स्नान करनेसे मनुष्य पापोंसे छूट जाता है। (उस दिन) खाद्य पदार्थसे

English

Mi R Pi m tf)<fifiwm?:i SHdtoto t tot 55T5 XT

अध्याय ३०

श्लोक 38

एतद् विचिन्तयन्नर्थ त्वां प्रहर्त्तु न सुन्दरि ।करोमि बुद्धि तस्मात् त्वं मां भजस्वायतेक्षणे

etad vicintayannartha tvāṃ praharttu na sundari / karomi buddhi tasmāt tvaṃ māṃ bhajasvāyatekṣaṇe

हिन्दी अर्थ

संयुक्त चार करक (करवे या कमण्डलु) एवं मालपुओं आदिसे सुशोभित कलशका दान करे। पहले अननसे युक्त करवोंसे देवताकी पूजा करे, फिर सम्पूर्ण पापोंके नाश करनेवाले कलशका दान करें। जो मानव इस

English

Lord Brahma appeared just when god Vamana was bom and performed the rituals like Jatakarma etc. He then chanted the

अध्याय ३०

श्लोक 39

मम खङ्गनिपातं हि नेन्द्रो धारयितुं क्षमः ।निवर्त्तय मतिं युद्धाद् भार्या मे भव साम्प्रतम्

mama khaṅganipātaṃ hi nendro dhārayituṃ kṣamaḥ / nivarttaya matiṃ yuddhād bhāryā me bhava sāmpratam

हिन्दी अर्थ

विधानसे स्त्रान करता है, वह सम्पूर्ण पापोंसे छूट जायगा और परमपदको प्राप्त करेगा। इसके अतिरिक्त (वैशाखके सिवा) अन्य समयमें भी मङ्गलके दिन षष्ठी तिथि होनेपर उस तीर्थमें की हुई पूर्वोक्त क्रिया मुक्ति देनेवाली श्रेष्ठ द्विजो ! वहीं समस्त पापोंका विनाश करनेवाला तीर्थ-शिरोमणि काम्यकवन नामका एक तीर्थ है। जो मनुष्य उसमें स्नान करता है, वह सभी देवोंकी अनुमतिसे परमपदको प्राप्त करता है। इस वनमें प्रवेश

English

orator srato wt tojfr ^i

अध्याय ३०

श्लोक 40

इत्थं निशुम्भवचनं श्रुत्वा योगीश्वरी मुने ।विहस्य भावगम्भीरं निशुम्भं वाक्यमब्रवीत्

itthaṃ niśumbhavacanaṃ śrutvā yogīśvarī mune / vihasya bhāvagambhīraṃ niśumbhaṃ vākyamabravīt

हिन्दी अर्थ

करनेसे ही मनुष्य अपने समस्त पापोंसे छूट जाता है। इस पवित्र वनमें पूषा नामके सूर्यभगवान् प्रत्यक्ष रूपसे स्थित हैं। द्विजश्रेष्ठो! उन सूर्यभगवान्के दर्शनसे मुक्ति प्राप्त होती है । रविवारको उस तीर्थमें स्नान करनेवाला

English

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अध्याय ३०

श्लोक 41

नाजिताहं रणे वीर भवे भार्या हि कस्यचित् ।भवान् यदिह भार्यार्थो ततो मां जय संयुगे

nājitāhaṃ raṇe vīra bhave bhāryā hi kasyacit / bhavān yadiha bhāryārtho tato māṃ jaya saṃyuge

हिन्दी अर्थ

मनुष्य विशुद्ध-देह हो जाता है और अपने मनोरथको प्राप्त करता है ॥ ३१--३४॥ 'काम्यकवन-तीर्थका प्रसङ्ग, सरस्वती नदीकी महिमा और तत्सम्बद्ध तीर्थोका वर्णन

English

Brahma said- O god of gods! Victory to you. O undefeated! Victory to you. O preceptor to world, O Hari! Victory to you. O

अध्याय ३०

श्लोक 42

इत्येवमुक्ते वचने खङ्गमुद्यम्य दानवः ।प्रचिक्षेप तदा वेगात् कौशिकीं प्रति नारद

ityevamukte vacane khaṅgamudyamya dānavaḥ / pracikṣepa tadā vegāt kauśikīṃ prati nārada

हिन्दी अर्थ

'काम्यकस्य तु पूर्वेण कुञ्जं देवैर्निषेवितम्।

English

O unending god! Victory to you. O Acyuta! Victory to you.

अध्याय ३०

श्लोक 43

तमापतन्तं निस्त्रिंशं षड्भिर्बर्हिणराजितैः ।चिच्छेद चर्मणा सार्द्ध तदद्भुतमिवाभवत्

tamāpatantaṃ nistriṃśaṃ ṣaḍbhirbarhiṇarājitaiḥ / ciccheda carmaṇā sārddha tadadbhutamivābhavat

हिन्दी अर्थ

ऋषियोंने पूछा-- (लोमहर्षणजी !) काम्यकवनके पूर्वमें स्थित कुञ्जका आश्रयण देवताओंने किया था, पर उस काम्यकवन-तीर्थकी उत्पत्ति कैसे हुई, इसे आप तस्य तीर्थस्य सम्भूतिं विस्तरेण ब्रवीहि नः॥ १ हमें विस्तारसे बतलाइये

English

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अध्याय ३०

श्लोक 44

खड्गे सचर्मणि छिन्ने गदां गृह्य महासुरः ।समाद्रवत् कोशभवां वायुवेगसमो जवे

khaḍge sacarmaṇi chinne gadāṃ gṛhya mahāsuraḥ / samādravat kośabhavāṃ vāyuvegasamo jave

हिन्दी अर्थ

'लोमहर्षणजी बोले (उत्तर दिया) -- मुनियो! आप सभी लोग इस तीर्थके श्रेष्ठ माहात्म्यको सुनें। ऋषियोंके

English

O unconquered! Victory to you. O Asesa! Victory to you. O inexpressible! Victory to you. O the supreme essence! O omniscient! You have originated the knowledge and its perceivable meaning! Victory to you.

अध्याय ३०

श्लोक 45

तस्यापतत एवाशु करौ श्लिष्टौ समौ दृढौ ।गदया सह चिच्छेद क्षुरेप्रेण रणे ऽम्बिका

tasyāpatata evāśu karau śliṣṭau samau dṛḍhau / gadayā saha ciccheda kṣurepreṇa raṇe 'mbikā

हिन्दी अर्थ

ऋषीणां चरितं श्रुत्वा मुक्तो भवति किल्बिषैः ॥ २ चरित्रको सुननेसे मनुष्य पापोंसे मुक्त हो जाता है। ततस्ते कल्पयामासुस्तीर्थं यज्ञोपवीतिकम्। शेषास्तु मुनयस्तत्र न प्रवेशं हि लेभिरे

English

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अध्याय ३०

श्लोक 46

तस्मिन्नपतिते रौद्रे सुरशत्रौ भयङ्करे ।चण्डाद्य मातरो हृष्टाश्चक्रुः किलकिलाध्वनिम्

tasminnapatite raudre suraśatrau bhayaṅkare / caṇḍādya mātaro hṛṣṭāścakruḥ kilakilādhvanim

हिन्दी अर्थ

ब्राह्मणैः परिपूर्णं तु दृष्टा देवी सरस्वती

English

O Asesa! O witness of world! O creator! O preceptor of world! Victory to you. O creator, nourisher and destroyer by movable and immovable! victory to you.

अध्याय ३०

श्लोक 47

गगनस्थास्ततो देवाः शतक्रतुपुरोगमाः ।जयस्व विजयेत्यूचुर्हृष्टाः शत्रौ निपातिते

gaganasthāstato devāḥ śatakratupurogamāḥ / jayasva vijayetyūcurhṛṣṭāḥ śatrau nipātite

हिन्दी अर्थ

तीर्थ त्रैलोक्यविख्यातं विहारं नाम नामतः यत्र देवाः समागम्य शिवदर्शनकाङ्क्षिणः। समागता न चापश्यन् देवं देव्या समन्वितम्

English

O absolute! Victory to you. O Asesa! Victory to you. O dweller in all hearts! Victory to you. O the beginning, middle and end of everything. O omniscient! O greatest! Victory to you.

अध्याय ३०

श्लोक 48

ततस्तूर्याण्यवाद्यन्त भूतसंघैः समन्ततः ।पुष्पवृष्टिं च मुमुचुः सुराः कात्यायनीं प्रति

tatastūryāṇyavādyanta bhūtasaṃghaiḥ samantataḥ / puṣpavṛṣṭiṃ ca mumucuḥ surāḥ kātyāyanīṃ prati

हिन्दी अर्थ

ते स्तुवन्तो महादेवं नन्दिनं गणनायकम्।

English

O beyond conscience of the people desirous of emancipation, O ever seeing god! O Isvara! Victory to you. O Yogis aim and O god! with Dama etc. virtues! Victory to you.

अध्याय ३०

श्लोक 49

निशुम्भं पतितं दृष्ट्वा शुम्भः क्रोधान्महामुने ।वृन्दारकं समारुह्य पाशपाणिः समभ्यगात्

niśumbhaṃ patitaṃ dṛṣṭvā śumbhaḥ krodhānmahāmune / vṛndārakaṃ samāruhya pāśapāṇiḥ samabhyagāt

हिन्दी अर्थ

तच्छुत्वा देवतास्तत्र पल्लीराहूय क्रीडिताः तेषां क्रीडाविनोदेन तुष्टः प्रोवाच शंकरः। योऽस्मिस्तीर्थे नरः स्त्राति विहारे श्रद्धयान्वित:

English

O most micro-form god! O rare to knowledge! Victory to you. O formidable! O world form god! Victory to you. O minutest to the micro! Victory to you. O with and without sensory organs! Victory to you.

अध्याय ३०

श्लोक 50

तमापतन्तं दृष्ट्वाथ सगजं दानवेश्वरम् ।जग्रा ह चतुरो वाणांश्चन्द्रार्धाकरवर्चसः

tamāpatantaṃ dṛṣṭvātha sagajaṃ dānaveśvaram / jagrā ha caturo vāṇāṃścandrārdhākaravarcasaḥ

हिन्दी अर्थ

दुर्गातीर्थं ततो गच्छेद् दुर्गया सेवितं महत्

English

O meditator on Maya (illusion)! Victory to you. O syllable on the bed of Sesa! Victory to you. O uplifter of the earth on a single tooth (Varaha)! Victory to you.

अध्याय ३०

श्लोक 51

क्षुरप्राभ्यां समं पादौ द्वौ चिच्छेद द्विपस्य सा ।द्वाभ्यां कुम्भे जघानाथ हसन्ती लीलयाम्बिका

kṣuraprābhyāṃ samaṃ pādau dvau ciccheda dvipasya sā / dvābhyāṃ kumbhe jaghānātha hasantī līlayāmbikā

हिन्दी अर्थ

तत्रापि च सरस्वत्याः कूपं त्रैलोक्यविश्रुतम् काम्यकवन-तीर्थका प्रसङ्ग, सरस्वती नदीकी महिमा और तत्सम्बद्ध तीर्थोका वर्णन

English

O Nrsimha! O dissector of the hearts of gods' enemies, O Vis'vatman! O Maya Vamana! O Kesava! Victory to you.

अध्याय ३०

श्लोक 52

निकृत्ताभ्यां गजः पद्म्यां निपपात तथेच्छया ।शक्रवज्रसमाक्रान्तं शैलराजशिरो यथा

nikṛttābhyāṃ gajaḥ padmyāṃ nipapāta tathecchayā / śakravajrasamākrāntaṃ śailarājaśiro yathā

हिन्दी अर्थ

(एक बारकी बात है--) नैमिषारण्यके निवासी ऋषि सरस्वती नदीमें स्नान करनेके लिये कुरुक्षेत्र आये। परंतु वे सरस्वतीमें स्नान करनेके लिये प्रवेश न पा सके। तब उन्होंने यज्ञोपवीतिक नामके एक तीर्थकी कल्पना कर

English

O god you are beyond the reach of illusion (Maya)! O the ruler of world! O Janardana! Victory to you. 0 god you are beyond imagination and are in countless forms. 0 absolute outstanding god! Victory to you.

अध्याय ३०

श्लोक 53

तस्यावर्जितनागस्य शुम्भस्याप्युत्पतिष्यतः ।शिरश्चिच्छेद बाणेन कुण्डलालङ्कृतं शिवा

tasyāvarjitanāgasya śumbhasyāpyutpatiṣyataḥ / śiraściccheda bāṇena kuṇḍalālaṅkṛtaṃ śivā

हिन्दी अर्थ

ली। (पर फिर भी) शेष मुनिलोग उसमें भी प्रवेश न 'पा सके। सरस्वतीने देखा कि रन्तुक आश्रमसे सचक्रकतक जितने भी तीर्थस्थल हैं, वे सब-के-सब ब्राह्मणोंसे भर गये हैं। इसलिये सभी ब्राह्मणोंके कल्याणके लिये उस सरस्वती नदीने कुञ्ज बना दिया और सभी प्राणियोंकी भलाईमें तत्पर होकर वह पश्चिम मार्गको (पश्चिमवाहिनी बनकर) चल पड़ी

English

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अध्याय ३०

श्लोक 54

छिन्ने शिरसि दैत्येन्द्रो निपपात सकुञ्जरः ।यथा समहिषः क्रोञ्चो महासेनसमाहतः

chinne śirasi daityendro nipapāta sakuñjaraḥ / yathā samahiṣaḥ kroñco mahāsenasamāhataḥ

हिन्दी अर्थ

जो मनुष्य सरस्वतीके पूर्वी प्रवाहमें स्नान करता है, उसे गङ्गामें स्नान करनेका फल प्राप्त होता है। उसके दक्षिणी प्रवाहमें सरिताओंमें श्रेष्ठ नर्मदा एवं पश्चिम दिशाकी ओर यमुना नदी संश्रित है। किंतु जब वह उत्तर

English

O god you have increased numerous defects by way of Prakrti (nature). Such magnificent Hari! May you grow fast. The system of Teligion exists on you god.

अध्याय ३०

श्लोक 55

श्रुत्वा सुराः सुररिपु निहतौ मृडान्या सेन्द्राः ससूर्यमरुदश्विवसुप्रधानाः ।आगत्य तं गिरिवरं विनयावनम्रा देव्यास्तदा स्तुतिपदं त्विदमीरयन्तः

śrutvā surāḥ suraripu nihatau mṛḍānyā sendrāḥ sasūryamarudaśvivasupradhānāḥ / āgatya taṃ girivaraṃ vinayāvanamrā devyāstadā stutipadaṃ tvidamīrayantaḥ

हिन्दी अर्थ

दिशाकी ओर बहने लगती है तो वह सिन्धु हो जाती है। इस प्रकार विभिन्न दिशाओंमें वह पवित्र सरस्वती नदी (भिन्न-भिन्न रूपोंमें) प्रवाहित होती है। उस सरस्वती नदीमें स्नान करनेवाला मनुष्य मानो सभी तीर्थोमें स्नान कर लेता है। द्विजश्रेष्ठो! सरस्वती नदीमें स्नान करनेके बाद तीर्थसेवीको तीनों लोकोंमें प्रसिद्ध महात्मा मदनके 'विहार' नामक तीर्थमें जाना चाहिए

English

O Hari! Sankara, Indra gods including I myself, Sanaka etc. sages or Yogis are not capable to recognise you.

अध्याय ३०

श्लोक 56

देवा ऊचुः।।नमो ऽस्तु ते भगवति पापनाशिनि नमो ऽस्तु ते सुररिपुदर्पशातनि ।नमो ऽस्तु ते हरिहरराज्यदायिनि नमो ऽस्तु ते मखभुजकार्यकारिणि

devā ūcuḥ/ / namo 'stu te bhagavati pāpanāśini namo 'stu te suraripudarpaśātani / namo 'stu te harihararājyadāyini namo 'stu te makhabhujakāryakāriṇi

हिन्दी अर्थ

जहाँपर भगवान् शिवके दर्शनाभिलाषी देवता आये, पर वे उमासहित शिवका दर्शन न कर पाये। वे लोग गणनायक महादेव नन्दीकी स्तुति करने लगे। इससे नन्दीश्वर प्रसन्न हो गये और (उन्होंने) उमाके

English

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अध्याय ३०

श्लोक 57

नमो ऽस्तु ते त्रिदशरिपुक्षयङ्करि नमो ऽस्तु ते शतमखपादपूजिते ।नमो ऽस्तु ते महिषविनासकारिणि नमो ऽस्तु ते हरिहरभास्करस्तुते

namo 'stu te tridaśaripukṣayaṅkari namo 'stu te śatamakhapādapūjite / namo 'stu te mahiṣavināsakāriṇi namo 'stu te hariharabhāskarastute

हिन्दी अर्थ

साथ की जा रही शिवकी महती विहार-क्रीडाका वर्णन किया। यह सुनकर देवताओंने भी अपनी पत्नियोंको बुलाया और उनके साथ (उन लोगोंने भी) क्रीडा की। उनके क्रीडा-विनोदसे शंकर प्रसन्न हो गये और बोले-इस विहार-तीर्थमें जो श्रद्धाके साथ स्नान करेगा, वह निःसंदेह धन-धान्य एवं प्रिय सम्बन्थियोंसे सम्पन्न होगा। उमा-शिवके विहार-स्थलकी यात्राके बाद दुर्गासे प्रतिष्ठित उस महान् दुर्गातीर्थमें जाना चाहिए ॥ ११--१५॥

English

O master of universe! You are covered by an apparel of illusion in this world. O god of all gods! Who ean recognise you without your

अध्याय ३०

श्लोक 58

नमो ऽस्तु ते ऽष्टादशबाहुशालिनि नमो ऽस्तु ते शुम्भनिशुम्भघातिनि ।नमो ऽस्तु लोकार्त्तिहरे त्रिशूलिनि नमो ऽस्तु नारायणि चक्रधारिणि

namo 'stu te 'ṣṭādaśabāhuśālini namo 'stu te śumbhaniśumbhaghātini / namo 'stu lokārttihare triśūlini namo 'stu nārāyaṇi cakradhāriṇi

हिन्दी अर्थ

जहाँ ख्रानकर पितरोंकी पूजा करनेसे मनुष्यको दुर्गतिकी प्राप्ति नहीं होती। उसी स्थानपर तीनों लोकॉमें

English

O sovereign! Only the devotee graced by you knows you and nobody else.

अध्याय ३०

श्लोक 59

नमो ऽस्तु वाराहि सदा धराधरे त्वां नारसिंहि प्रणता नमो ऽसुत ते ।नमो ऽस्तु नारसिंहि प्रणता नमो ऽस्तु ते ।नमो ऽस्तु ते वज्रधरे गजध्वजे नमो ऽसुत कौमारि मयूरवाहिनि

namo 'stu vārāhi sadā dharādhare tvāṃ nārasiṃhi praṇatā namo 'suta te / namo 'stu nārasiṃhi praṇatā namo 'stu te / namo 'stu te vajradhare gajadhvaje namo 'suta kaumāri mayūravāhini

हिन्दी अर्थ

यस्तत्र तर्पयेद् देवान् पितृंश्च श्रद्धयान्वितः मातृहा पितृहा यश्च ब्रह्महा गुरुतल्पगः

English

O god of gods! O Isvara, O sovereign! O Bhavana! O the soul of the world! O Prthulocana! may you access growth for the origin of this world?

अध्याय ३०

श्लोक 60

नमो ऽस्तु पैतामहहंसवाहने नमो ऽस्तु मालाविकटे सुकेशिनि ।नमऽस्तु मालाविकटे सुकेशिनि ।नमो ऽस्तु ते रासभपृष्ठवाहिनि नमो ऽस्तु सर्वार्त्तिहरे जगन्मये

namo 'stu paitāmahahaṃsavāhane namo 'stu mālāvikaṭe sukeśini / nama'stu mālāvikaṭe sukeśini / namo 'stu te rāsabhapṛṣṭhavāhini namo 'stu sarvārttihare jaganmaye

हिन्दी अर्थ

देवमार्गप्रविष्टा च देवमार्गेण निःसृता

English

Lomaharsana said- The dwarf Hrslkesa then smiled and said in an impressive and elegant manner.

अध्याय ३०

श्लोक 61

नमो ऽस्तु विश्वेश्वरि पाहि विश्वं निषूदयारीन् द्विजदेवतानाम् ।नमो ऽस्तु ते सर्वमयि त्रिनेत्रे नमो नमस्ते वरदे प्रसीद

namo 'stu viśveśvari pāhi viśvaṃ niṣūdayārīn dvijadevatānām / namo 'stu te sarvamayi trinetre namo namaste varade prasīda

हिन्दी अर्थ

प्राची सरस्वती पुण्या अपि दुष्कृतकर्मणाम्। त्रिरात्रं ये करिष्यन्ति प्राचीं प्राप्य सरस्वतीम् नरनारायणौ देवौ ब्रह्मा स्थाणुस्तथा रविः

English

You yourself, Indra etc. gods and Kasyapa had prayed to me during ancient period. I had also promised to return the empire of heaven to Indra amid your presence.

अध्याय ३०

श्लोक 62

ब्रह्माणी त्वं मृडानी वरशिखिगमना शक्तिहस्ता कुमारी वाराही त्वं सुवक्त्रा खगपतिगमना वैष्णवी त्वं सशार्ङ्गो ।दुर्दृश्या नारसिंही घुरघुरितरवा त्वं तथैन्द्री सवज्रा त्वं मारी चर्ममुण्डाशवगमनरता योगिनी योगसिद्धा

brahmāṇī tvaṃ mṛḍānī varaśikhigamanā śaktihastā kumārī vārāhī tvaṃ suvaktrā khagapatigamanā vaiṣṇavī tvaṃ saśārṅgo / durdṛśyā nārasiṃhī ghuraghuritaravā tvaṃ tathaindrī savajrā tvaṃ mārī carmamuṇḍāśavagamanaratā yoginī yogasiddhā

हिन्दी अर्थ

प्राची दिशं निषेवन्ते सदा देवाः सवासवाः। ये तु श्राद्धं करिष्यन्ति प्राचीमाश्रित्य मानवाः

English

Aditi had then worshipped me and I again promised her that I would give Indra an empire consisting of the three-world absolutely free from

अध्याय ३०

श्लोक 63

नमस्ते त्रिनेत्रे भगवति तवचरणानुषिता ये अहरहर्विनतशिरसो ऽवनताः ।नहि नहि परिभवमस्त्यशुभं च स्तुतिबलिकुसुमकराः सततं ये

namaste trinetre bhagavati tavacaraṇānuṣitā ye aharaharvinataśiraso 'vanatāḥ / nahi nahi paribhavamastyaśubhaṃ ca stutibalikusumakarāḥ satataṃ ye

हिन्दी अर्थ

तेषां न दुर्लभं किंचिदिह लोके परत्र च। तस्मात् प्राची सदा सेव्या पञ्चम्यां च विशेषतः पञ्चम्यां सेवमानस्तु लक्ष्मीवाञ्जायते नरः। तत्र तीर्थमौशनसं त्रैलोक्यस्यापि दुर्लभम्

English

^5? cCTT 'cfcRtSnfa ^FTcT: xrf^r; |

अध्याय ३०

श्लोक 64

एवं स्तुता सुरवरैः सुरशत्रुनाशिनी प्राह प्रहस्य सुरसिद्धमहर्षिवर्यान् ।प्राप्तो मयाद् भुततमो भवतां प्रसादात् संग्राममूर्ध्वि सुरशत्रुजयः प्रमर्दात्

evaṃ stutā suravaraiḥ suraśatrunāśinī prāha prahasya surasiddhamaharṣivaryān / prāpto mayād bhutatamo bhavatāṃ prasādāt saṃgrāmamūrdhvi suraśatrujayaḥ pramardāt

हिन्दी अर्थ

ग्रहमध्येषु पूज्यते तस्य तीर्थस्य सेवनात्

English

nfycifa war^r: chii^ii

अध्याय ३०

श्लोक 65

इमां स्तुतिं भक्तिपरा नरोत्तमा भवद्भिरुक्तामनुकीर्त्तयन्ति ।दुःस्वप्ननाशो भविता न संशयो वरस्तथान्यो व्रियतामभीप्सितः

imāṃ stutiṃ bhaktiparā narottamā bhavadbhiruktāmanukīrttayanti / duḥsvapnanāśo bhavitā na saṃśayo varastathānyo vriyatāmabhīpsitaḥ

हिन्दी अर्थ

एवं शुक्रेण मुनिना सेवितं तीर्थमुत्तमम्। ये सेवन्ते श्रद्दधानास्ते यान्ति परमां गतिम् यस्तु श्राद्धं नरो भक्त्या तस्मिस्तीर्थे करिष्यति। पितरस्तारितास्तेन भविष्यन्ति न संशयः

English

I shall chalk out a plan there to enthrone the thousand-eyed Indra on the empire of three- worlds. I am giving a true statement to all of you present here.

अध्याय ३०

श्लोक 66

देवा ऊचुः ।यदि वरदा भवती त्रिदशानां द्विजशिशुगोषु यतस्व हिताय ।पुनरपि देवरिपूनपरांस्त्वं प्रदह हुताशनतुल्यशरीरे

devā ūcuḥ / yadi varadā bhavatī tridaśānāṃ dvijaśiśugoṣu yatasva hitāya / punarapi devaripūnaparāṃstvaṃ pradaha hutāśanatulyaśarīre

हिन्दी अर्थ

चतुर्मुखं ब्रह्मतीर्थं सरो मर्यादया स्थितम्। ये सेवन्ते चतुर्दश्यां सोपवासा वसन्ति च

English

rtrT: tfibUllRH sRpT 'JtT^FTI

अध्याय ३०

श्लोक 67

देव्युवाच।।भूयो भविष्याम्यसृगुक्षितानना हराननस्वेदजलोद्भवा सुराः ।अन्धासुरस्याप्रतिपोषणे रता नाम्ना प्रसिद्धा भुवनेषु चर्चिका

devyuvāca/ / bhūyo bhaviṣyāmyasṛgukṣitānanā harānanasvedajalodbhavā surāḥ / andhāsurasyāpratipoṣaṇe ratā nāmnā prasiddhā bhuvaneṣu carcikā

हिन्दी अर्थ

प्रसिद्ध सरस्वतीका एक कूप है। उसका दर्शन करनेमात्रसे ही मनुष्य सभी पापोंसे रहित हो जाता है और मुक्ति प्राप्त करता है। जो वहाँ श्रद्धापूर्वक देवता और पितरोंका तर्पण करता है, वह व्यक्ति समस्त अक्षय्य (कभी भी नष्ट न होनेवाले) पदार्थोको प्राप्त करता है । पितृतीर्थकी विशेष महत्ता है। उस तीर्थमें माता, पिता और ब्राह्मणका घातक तथा गुरुपत्रीगामी भी स्नान करनेसे (ही) शुद्ध हो जाता है। वहाँ पूर्व दिशाकी ओर बहनेवाली सरस्वती देवमार्गमें

English

Lord Brahma then gave the hide of a black stag to Hrslkesa and lord Jupiter gave a sacrificial thread

अध्याय ३०

श्लोक 68

भूयो वधिष्यामि सुरारिमुत्तमं संभूय नन्दस्य गृहे यशोदया ।तं विप्रचित्तिं लवणं तथापरौ शुम्भं निशुम्भं दशनप्रहारिमी

bhūyo vadhiṣyāmi surārimuttamaṃ saṃbhūya nandasya gṛhe yaśodayā / taṃ vipracittiṃ lavaṇaṃ tathāparau śumbhaṃ niśumbhaṃ daśanaprahārimī

हिन्दी अर्थ

प्रविष्ट होकर देवमार्गसे ही निकली हुई है ॥ १६--१९॥

English

*WS<d gRtSSJ T=jitqvai^<i:i

अध्याय ३०

श्लोक 69

भूयः सुरास्तिष्ययुगे निराशिनी निरीक्ष्य मारी च गृहे शतक्रतोः ।संभूय देव्यामितसत्यधामया सुरा भरिष्यामि च शाकम्भरी वै

bhūyaḥ surāstiṣyayuge nirāśinī nirīkṣya mārī ca gṛhe śatakratoḥ / saṃbhūya devyāmitasatyadhāmayā surā bhariṣyāmi ca śākambharī vai

हिन्दी अर्थ

पूर्ववाहिनी सरस्वती दुष्कर्मियोंके लिये भी पुण्य देनेवाली है। जो प्राची सरस्वतीके निकट जाकर त्रिरात्रत्रत करता है, उसके शरीरमें कोई पाप नहीं रह जाता। नर और नारायण-ये दोनों देव, ब्रह्मा, स्थाणु तथा सूर्य एवं इन्द्रसहित सभी देवता प्राची दिशाका सेवन करते हैं। जो मानव प्राची सरस्वतीमें श्राद्ध करेंगे, उन्हें इस लोक तथा परलोकमें कुछ भी दुर्लभ नहीं होगा। अतः प्राची सरस्वतीका सर्वदा सेवन करना चाहिए-विशेषतः

English

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अध्याय ३०

श्लोक 70

भूयो विपक्षक्षपणाय देवा विन्ध्ये भविष्यम्यृषिरक्षणार्थम् ।दुर्वृत्तचेष्टान् विनिहत्य दैत्यान् भूयः समेष्यामि सुरालयं हि

bhūyo vipakṣakṣapaṇāya devā vindhye bhaviṣyamyṛṣirakṣaṇārtham / durvṛttaceṣṭān vinihatya daityān bhūyaḥ sameṣyāmi surālayaṃ hi

हिन्दी अर्थ

पञ्चमीके दिन। पञ्चमी तिथिको प्राची सरस्वतीका सेवन करनेवाला मनुष्य लक्ष्मीवान् होता है। वहीं तीनों लोकोंमें दुर्लभ औशनस नामका तीर्थ है, जहाँ परमेश्वरकी आराधना कर शुक्राचार्य सिद्ध हो गये थे। उस तीर्थका सेवन

English

Marlci, the son of Brahma, gave him a stick of Palasa. Vasistha gave a kamandalu and Arigira gave a silk cloth. Pulaha gave an asana and Pulastya gave two yellow tint clothes.

अध्याय ३०

श्लोक 71

यदारुणाक्षो भविता महासुरः तदा भविष्यामि हिताय देवाताः ।महालिरूपेण विनष्टजीवितं कृत्वा समष्यामि पुनस्त्रिविष्टपम्

yadāruṇākṣo bhavitā mahāsuraḥ tadā bhaviṣyāmi hitāya devātāḥ / mahālirūpeṇa vinaṣṭajīvitaṃ kṛtvā samaṣyāmi punastriviṣṭapam

हिन्दी अर्थ

करनेसे ग्रहोंके मध्य उनकी पूजा होती है इस प्रकार शुक्रमुनिके द्वारा सेवित उत्तमतीर्थका जो श्रद्धापूर्वक (स्वयं) सेवन करते हैं, वे परम गतिको ग्राप्त होते हैं। उस तीर्थमें भक्तिपूर्वक जो व्यक्ति श्राद्ध करेगा, उसके द्वारा उसके पितर निःसन्देह तर जायँगे।

English

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अध्याय ३०

श्लोक 72

पुलस्त्य उवाच ।इत्येवमुक्त्वा वरदा सुराणां कृत्वा प्रणामं दिवजपुङ्गवानाम् ।विसृज्य भूतानि जगाम देवी खं सिद्धसंघैरनुगम्यमाना

pulastya uvāca / ityevamuktvā varadā surāṇāṃ kṛtvā praṇāmaṃ divajapuṅgavānām / visṛjya bhūtāni jagāma devī khaṃ siddhasaṃghairanugamyamānā

हिन्दी अर्थ

द्विजोत्तमो! जो सरोवरकी मर्यादासे स्थित चतुर्मुख ब्रहमतीर्थमें चतुर्दशीके दिन उपवासत्रत करते हैं तथा

English

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अध्याय ३०

श्लोक 73

इदं पुराणं परमं पवित्रं देव्या जयं मङ्गलदायि पुंसाम् ।श्रोतव्यमेतन्नियतैः सदैव रक्षोघ्नमेतद्भगवानुवाच

idaṃ purāṇaṃ paramaṃ pavitraṃ devyā jayaṃ maṅgaladāyi puṃsām / śrotavyametanniyataiḥ sadaiva rakṣoghnametadbhagavānuvāca

हिन्दी अर्थ

सेवन करते हैं, उन्हें परम सूक्ष्म (तत्त्)-का दर्शन ग्राप्त होता है; जिससे वे पुनः संसारमें नहीं आते। ब्रह्मतीर्थे नियम पालन करनेके बाद सहस्रलिङ्गसे शोभित स्थाणुतीर्थमें जाय। वहाँ स्थाणुवटका दर्शन प्राप्त कर मनुष्य पापोंसे विमुक्त हो जाता है

English

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अध्याय ३०

श्लोक 103

अभिजानीहि भवतः शापाद्वारतां गत्म् ।सुबहूनि च पापानि मया यानि कृतानि हि

abhijānīhi bhavataḥ śāpādvāratāṃ gatm / subahūni ca pāpāni mayā yāni kṛtāni hi

हिन्दी अर्थ

स्थाणुतीर्थ, स्थाणुवट और सांनिहत्य सरोवरके सम्बन्धमें प्रश्‍न और लोमहर्षणका उत्तर

English

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अध्याय ३०

श्लोक 108

ददृशे रूपसंपन्नां घृताचीं स प्लवङ्गमः ।सापि तं बलिनां श्रेष्ठं दृष्ट्वैव कपिकुञ्जरम्

dadṛśe rūpasaṃpannāṃ ghṛtācīṃ sa plavaṅgamaḥ / sāpi taṃ balināṃ śreṣṭhaṃ dṛṣṭvaiva kapikuñjaram

हिन्दी अर्थ

स्थाणुतीर्थ, स्थाणुवट और सांनिहत्य सरोवरके सम्बन्थमें प्रश्‍न और ब्रह्माके हवालेसे लोमहर्षणका उत्तर शृण्वन्तु मुनयः सर्वे पुराणं वामनं महत्। यच्छुत्वा मुक्तिमाप्नोति प्रसादाद् वामनस्य तु

English

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स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/1_sanskr/3_purana/vamp__u.htm | https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_vAmanapurANasaromAhAtmya.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vamana Purana — Chapter 30
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.