अध्याय ३२
श्लोक 1
इति श्रीवामनपुराणे एकत्रिंशो ऽध्यायः ________________________________________________________________________ पुलस्त्य उवाच ।सेनापत्ये ऽभिषिक्तस्तु कुमारो दैवतैरथ ।प्रणिपत्य भवं भक्त्या गिरिजां पावकं शुचिम्
iti śrīvāmanapurāṇe ekatriṃśo 'dhyāyaḥ ________________________________________________________________________ pulastya uvāca / senāpatye 'bhiṣiktastu kumāro daivatairatha / praṇipatya bhavaṃ bhaktyā girijāṃ pāvakaṃ śucim
हिन्दी अर्थ
'कहनेपर वे लोग उनके साथ श्रेष्ठ पर्वत कैलासपर चले गये और बहाँ उन लोगोंने उमा (पार्वती)-के साथ बैठे हुए शंकरका दर्शन किया। उसके बाद संसारके पितामह ब्रह्माने देवोंके इष्टदेब, तीनों लोकोंके स्वामी वरदानी भगवान् शंकरकी स्तुति करनी आरम्भ को--
English
Markandeya eulogises Sarasvatl