अध्याय ३६
श्लोक 1
इति श्रीवामनपुराणे पञ्चत्रिंशो ________________________________________________________________________ पुलस्त्य उवाच ।ततो मुरारिभवनं समभ्येत्य सुरास्ततः ।ऊचुर्देवं नमस्कृत्य जगत्संक्षुब्धिकारणम्
iti śrīvāmanapurāṇe pañcatriṃśo ________________________________________________________________________ pulastya uvāca / tato murāribhavanaṃ samabhyetya surāstataḥ / ūcurdevaṃ namaskṛtya jagatsaṃkṣubdhikāraṇam
हिन्दी अर्थ
इस स्तवको सुनकर मनुष्य सभी पापोंसे मुक्त हो जायगा। राजन्! इस कुरुक्षेत्र तथा इस सरोवरका माहात्म्य और मेरे लिङ्गकी उत्पत्तिका वर्णन सुननेसे मनुष्य पापसे बिलकुल छूट जाता है सनत्कुमारने कहा--इस प्रकार कहकर समस्त लोकोंद्वारा नमस्कृत भगवान् सभी लोगोंके देखते हुए वहीं अन्तर्हित हो गये। वह कुत्ता भी उसी समय पूर्वजन्मका स्मरण करके दिव्य शरीर धारणकर उस
English
There is one more holy place Dasasvamedhika and it renders the same fruit on bathing here as is rendered by