अध्याय ३९
श्लोक 1
इति श्रीवामनपुराणे अष्टात्रिंशो ऽध्यायः ________________________________________________________________________ दण्डक उवाच ।एतस्मिन्नन्तरे बाले यक्षासुरसुते शुभे ।समागते हरं द्रष्टुं श्रीकण्ठं योगिनां वरम्
iti śrīvāmanapurāṇe aṣṭātriṃśo 'dhyāyaḥ ________________________________________________________________________ daṇḍaka uvāca / etasminnantare bāle yakṣāsurasute śubhe / samāgate haraṃ draṣṭuṃ śrīkaṇṭhaṃ yogināṃ varam
हिन्दी अर्थ
देवोंने (इस कन्याको) मुझे इसीलिये दिया था कि भूतपति (शिव)-द्वारा इससे जो पुत्र उत्पन्न होगा, वह हैत्येन्द्र महिष एवं तारकका वध करेगा मेना तथा पर्वतोंके इस प्रकार कहनेपर हिमवानूने अपनी कन्यासे कहा--पुत्रि! अब मैंने तुझे शङ्करको दे दिया। फिर उन्होंने ऋषियोंसे कहा-हे तपोधनो! यह मेरी पुत्री तथा शङ्करकी वधू काली भक्तिसहित विनम्र-
English
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