Vamana Purana· Vāmana Purāṇa
43
अध्याय 43 / 95

Adhyaya 43

162 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ162 श्लोक

श्लोक पर जाएं:

अध्याय ४३

श्लोक 1

इति श्रीवामनपुराणे द्विचत्वारिंशो ऽध्यायः ________________________________________________________________________ पुलस्त्य उवाच ।ततः स्वैसैन्यमालक्ष्य निहतं प्रमथैरथ ।अन्धको ऽभ्येत्य शुक्रं तु इदं वचनमब्रवीत्

iti śrīvāmanapurāṇe dvicatvāriṃśo 'dhyāyaḥ ________________________________________________________________________ pulastya uvāca / tataḥ svaisainyamālakṣya nihataṃ pramathairatha / andhako 'bhyetya śukraṃ tu idaṃ vacanamabravīt

हिन्दी अर्थ

किया था। इसलिये अग्निके मांस, हड्डी, रक्त, मेदा, आँत, रेतस्, त्वचा, रोम, दाढ़ी-मूँछ, नेत्र एवं केश आदि सभी सुवर्णमय बन गये। इसीसे संसारमें अग्निको “हिरण्यरेता' कहा जाने लगा

English

Pitrtirtha has specific magnificence. The heinous evils such as murder of father or mother or courtship with the teacher’s wife can be washed forever in the holy water of this place. So, a dip is enough in the water here. The Sarasvatl at its course facing east has entered through the divine route and emanated from the divine route also.

अध्याय ४३

श्लोक 2

भगवंस्त्वां माश्रित्य वयं बाधाम देवताः ।अथान्यानपि विप्रर्षे गन्धर्वसुरकिन्नरान्

bhagavaṃstvāṃ māśritya vayaṃ bādhāma devatāḥ / athānyānapi viprarṣe gandharvasurakinnarān

हिन्दी अर्थ

तब अग्निके समान उस गर्भको पाँच हजार वर्षोतक धारण करती हुई कुटिला ब्रह्माके स्थानपर गयी । कमलजन्मा ब्रह्माने उस महानदीको सन्तप्त होती देखकर पूछा-तुम्हारा यह गर्भ किसके द्वारा स्थापित है? उसने उत्तर दिया-सत्तम! अग्निने पिये हुए शङ्करके उस शुक्रको अपनेमें धारण करनेकी शक्ति न होनेके कारण मुझमें त्याग दिया। पितामह! गर्भ धारण किये हुए मेरा पाँच हजार वर्षका समय बीत गया; परंतु किसी

English

JJTcft TOWdt W 3Tftr §i^)dch4uiU{|

अध्याय ४३

श्लोक 3

तदियं पश्य भगवन् मया गुप्ता वरूथिनी ।अनाथेन यथा नारी प्रमथैरपि काल्यते

tadiyaṃ paśya bhagavan mayā guptā varūthinī / anāthena yathā nārī pramathairapi kālyate

हिन्दी अर्थ

प्रकार यह बाहर नहीं निकल रहा है

English

font cbRsifti tot wwl^ii ? o ii

अध्याय ४३

श्लोक 4

कुजम्भाद्याश्च निहता भ्रातरो मम भार्गव ।अक्षयाः प्रमथाश्चामी कुरुक्षेत्रफलं यथा

kujambhādyāśca nihatā bhrātaro mama bhārgava / akṣayāḥ pramathāścāmī kurukṣetraphalaṃ yathā

हिन्दी अर्थ

उसको सुनकर भगवान् ब्रह्मने कहा--तुम उदयाचलपर जाओ। बहाँपर सौ योजनमें फैला हुआ सरपतोंका विशाल घनघोर वन है। अयि सुन्दर कटिबाली! उस विस्तृत पर्वतकी ऊँची चोटीपर इसे छोड़ दो। यह दस हजार वर्षोके बाद बालक हो जायगा। ब्रह्माकी बात सुननेके बाद वह गिरिनन्दिनी सुन्दरी पर्वतपर गयी एवं मुखसे ही (उसने) गर्भका परित्याग कर दिया। वह उस (जन्म लेनेवाले) बालकको छोड़कर शीघ्र ही ब्रह्मके

English

WRiyuft ^ WT W TT WJl ^ \\\

अध्याय ४३

श्लोक 5

तस्मात् कुरुष्व श्रेयो नो न जीयेम यथा परैः ।जयेम च परान् युद्धे तथा त्वं कुर्तुमर्हसि

tasmāt kuruṣva śreyo no na jīyema yathā paraiḥ / jayema ca parān yuddhe tathā tvaṃ kurtumarhasi

हिन्दी अर्थ

समीप चली गयी। सती कुटिला मन्त्र (शाप)-के कारण जलरूपमें हो गयी

English

Hrat f^PT Pit)q*ri ^T: ■Hctmqri % g mg; chfrafi i u i xft t n l ^ nTRgT:iR?ii M q gcfcr f%f%r% to hi

अध्याय ४३

श्लोक 6

शुक्रो ऽन्धकवचः श्रुत्वा सान्त्वयन् परमाद्भुतम् ।वचनं प्राह देवर्षे ब्रह्मर्षिर्दानवेश्वरम् ।त्वद्धितार्थ यतिष्यामि करिष्यामि तव प्रियम्

śukro 'ndhakavacaḥ śrutvā sāntvayan paramādbhutam / vacanaṃ prāha devarṣe brahmarṣirdānaveśvaram / tvaddhitārtha yatiṣyāmi kariṣyāmi tava priyam

हिन्दी अर्थ

शङ्करके तेजसे वह विशाल सरपतोंका वन सुवर्णमय बन गया। उस वनमें रहनेवाले वृक्ष, मृग एवं पक्षी भी सुवर्णमय हो गये। उसके बाद दस हजार वर्षोके बीत जानेपर उगते हुए बाल सूर्यके सदृश दीप्तिमान् तथा कमलके समान आँखोंवाला बालक उत्पन्न हुआ। उस दिव्य सरपतके वनमें उतान सोये हुए भगवान् कुमार अपने मुखमें अपना अंगूठा डालकर बादलकी ध्वनिके समान अस्पष्ट ध्वनिमें रोने लगे। इसी बीच स्वेच्छासे जाती हुई

English

dWrKRtl WRTT H faWd:IR3ll

अध्याय ४३

श्लोक 7

इत्येवमुक्त्वा वचनं विद्यां संजीवनीं कविः ।आर्वतयामास तदा विधानेन शुचिव्रतः

ityevamuktvā vacanaṃ vidyāṃ saṃjīvanīṃ kaviḥ / ārvatayāmāsa tadā vidhānena śucivrataḥ

हिन्दी अर्थ

दिव्य तेजस्विनी छहों कृत्तिकाओंने सरपतके वनमें स्थित उस बालकको देखा

English

3?FTT Hit qfag STTTTSI

अध्याय ४३

श्लोक 8

तस्यामावर्त्यमानायां विद्यायामसुरेश्वराः ।ये हताः प्रथमं युद्धे दानवास्ते समुत्थिताः

tasyāmāvartyamānāyāṃ vidyāyāmasureśvarāḥ / ye hatāḥ prathamaṃ yuddhe dānavāste samutthitāḥ

हिन्दी अर्थ

अबीभरंश्च ताः सर्वाः शिशुं स्नेहाच्च कृत्तिका: कार्तिकेयेति विख्यातो जातः स बलिनां वरः

English

Sarasvatl with its course at east, gratifies even the evildoers also. The man who observes fast for three nights loses all evils in body. Both gods Nara and Narayana, Brahma, Sthanu, Sun and Indra including all gods always live in the east. The man doing sraddha in Sarasvatl is nothing left of rare thing in this world and in that world also. One should therefore, always and on the day of Pancam! (the fifth day of either fortnight) take a bath in Sarasvatl taking the flow towards east. The man who takes a bath here on Pancam!, obtains wealth in abundance. Ausavasa is a holy place rare in the three worlds. Sukracarya got here accompaniments in course of praying to Paramesvara. As a result of residing here the people gain so much intelligence as they are worshipped amid the

अध्याय ४३

श्लोक 9

कुजम्भादिषु दैत्येषु नन्दी शङ्करमब्रवीत् ।युद्धायाभ्यागतेष्वेव नन्दी शङ्करमब्रवीत्

kujambhādiṣu daityeṣu nandī śaṅkaramabravīt / yuddhāyābhyāgateṣveva nandī śaṅkaramabravīt

हिन्दी अर्थ

एतस्मिन्नन्तरे ब्रह्मन् पावकं प्राह पद्मजः। कियत्प्रमाणः पुत्रस्ते वर्त्तते साम्प्रतं गुहः

English

TTci -$3%TJT TjRrT itfgw dWgrTR^I

अध्याय ४३

श्लोक 10

महादेव वचो मह्यं शृणु त्वं परमाद्भुतम् ।अविचिन्त्यमसह्यं च मृतानां जीवनं पुनः

mahādeva vaco mahyaṃ śṛṇu tvaṃ paramādbhutam / avicintyamasahyaṃ ca mṛtānāṃ jīvanaṃ punaḥ

हिन्दी अर्थ

स तद्वचनमाकर्ण्य अजानंस्तं हरात्मजम्। प्रोवाच पुत्रं देवेश न वेद्मि कतमो गुहः तं प्राह भगवान् यत्तु तेजः पीतं पुरा त्वया। त्रैयम्बकं त्रिलोकेश जातः शरवणे शिशुः

English

The best holy place where austerity conducted by Sukra hermit was fulfilled ensures the supreme position in the heaven when a dip is taken in this place.

अध्याय ४३

श्लोक 11

ये हताः प्रमथैर्दैत्या यथाशक्त्या रणाजिरे ।ते समुज्जीविता भूयो भार्गावेणाथ विद्याया

ye hatāḥ pramathairdaityā yathāśaktyā raṇājire / te samujjīvitā bhūyo bhārgāveṇātha vidyāyā

हिन्दी अर्थ

ततः पप्रच्छ कुटिला शीघ्रं क्व व्रजसे कवे। सोऽब्रवीत् पुत्रदृष्ट्यर्थ जातं शरवणे शिशुम्

English

to mg qrt 'qroi Trftrotsf grfrofri

अध्याय ४३

श्लोक 12

तदिदं तैर्महादेव महत्कर्म कृतं रणे ।संजातं स्वल्पमेवेश शुक्रविद्याबलाक्षयम्

tadidaṃ tairmahādeva mahatkarma kṛtaṃ raṇe / saṃjātaṃ svalpameveśa śukravidyābalākṣayam

हिन्दी अर्थ

तावुवाच हरिर्देवो गच्छ तं त्रिपुरान्तकम्। स यद् वक्ष्यति देवेशस्तत्कुरुध्वमसंशयम् इत्युक्तौ वासुदेवेन कुटिलाग्नी हरान्तिकम्। समभ्येत्योचतुस्तथ्यं कस्य पुत्रेति नारद

English

facHWlRdKrN qfabqfo q WT.IR'all

अध्याय ४३

श्लोक 13

इत्येवमुक्ते वचने नन्दिना कुलनन्दिना ।प्रत्युवाच प्रभुः प्रीत्य स्वार्थसाधनमुत्तमम्

ityevamukte vacane nandinā kulanandinā / pratyuvāca prabhuḥ prītya svārthasādhanamuttamam

हिन्दी अर्थ

रुद्रस्तद्वाक्यमाकर्ण्यं हर्षनिर्भरमानसः। दिष्ट्या दिष्ट्येति गिरिजां प्रोद्धूतपुलकोऽब्रवीत्

English

A sraddha with sheer devotion undoubtedly uplifts his pitaras by the inner soul satisfied.

अध्याय ४३

श्लोक 14

गच्छ सुक्रं गणपते ममान्तिकमुपानय ।अहं तं संयमिष्यामि यथायोगं समेत्य हि

gaccha sukraṃ gaṇapate mamāntikamupānaya / ahaṃ taṃ saṃyamiṣyāmi yathāyogaṃ sametya hi

हिन्दी अर्थ

कार्तिकेयका जन्म, उनके छः मुख और चतुर्मूर्ति होनेका हेतु, उनका दण्डादिका पाना ये कृत्तिकाएँ दयापूर्वक वहाँ गयीं जहाँ कुमार स्कन्द थे। उन्हें दूध पिलानेके लिये वे आपसमें “हम पहले, हम पहले” (पिलायेंगी-) कहकर विवाद करने लगीं। उन्हें आपसमें विवाद करती हुई देखकर वह

English

3TTOT qifq fgjhrTMf.l

अध्याय ४३

श्लोक 15

इत्येवमुक्तो रुद्रेण नन्दी गणपतिस्ततः ।समाजगाम दैत्यानां चमुं शुक्रजिघृक्षया

ityevamukto rudreṇa nandī gaṇapatistataḥ / samājagāma daityānāṃ camuṃ śukrajighṛkṣayā

हिन्दी अर्थ

(छहों) कृत्तिकाओंने प्रेमपूर्वक बच्चेका पोषण किया। मुने! उनके द्वारा रक्षित होकर वह शिशु बड़ा हुआ। वह बलवानोंमें श्रेष्ठ कार्तिकेय नामसे प्रसिद्ध हुआ। ब्रह्मन्! इसी बीच ब्रह्माने अग्निसे प्रश्‍न किया कि

English

ft qt TOnroftft p:ll ? <? II

अध्याय ४३

श्लोक 16

तं ददर्शासुरश्रेष्ठो बलवान् हयकन्धरः ।संरुरोध तदा मार्गं सिहस्येव पशुर्वने

taṃ dadarśāsuraśreṣṭho balavān hayakandharaḥ / saṃrurodha tadā mārgaṃ sihasyeva paśurvane

हिन्दी अर्थ

अग्निदेव! तुम्हारा पुत्र गुह (कार्तिकेय) इस समय कितना बड़ा हुआ है? ब्रह्माके प्रश्‍नको सुनकर अग्निने शङ्करके उस पुत्रको न जाननेके कारण उत्तरमें कहा-देवेश! मैं पुत्रको नहीं जानता; कौन-सा गुह है? भगवानूने उनसे कहा--त्रिलोकेश! पूर्वकालमें तुमने शङ्करका जो तेज

English

O great Dvijas! A reservoir with four comers cylindrical shaped is called Brahm- tirtha. A bath here on the fourteenth day of eight fortnights and a bath on the eighth day of the dark fortnight with fast and half there at night enables a man to perceive the supreme essence (in its most micro form) and he thus becomes free from the swing of frequent birth

अध्याय ४३

श्लोक 17

समुपेत्याहनन्नन्दी वज्रेण शतपर्वणा ।स पपाताथ निःसंज्ञो ययौ नन्दी ततस्त्वरन्

samupetyāhanannandī vajreṇa śataparvaṇā / sa papātātha niḥsaṃjño yayau nandī tatastvaran

हिन्दी अर्थ

'पी लिया था, वह शरवण (सरपतके वन) -में शिशुरूपसे उत्पन्न हुआ है। पितामहका वचन सुननेके बाद अग्निदेव तीव्र गतिवाले बकरेपर चढ़कर शीघ्र (वहाँ) गये। कुटिलाने उन्हें जाते हुए देखा। तब कुटिलाने

English

m TOJJcTC ggT qgfr fesfiMhll 3o||

अध्याय ४३

श्लोक 18

ततः कुजम्भो जम्भश्च बलो वृत्रस्त्वयःशिराः ।पञ्च दानवशार्दुला नन्दिनं समुपाद्रवन्

tataḥ kujambho jambhaśca balo vṛtrastvayaḥśirāḥ / pañca dānavaśārdulā nandinaṃ samupādravan

हिन्दी अर्थ

उनसे पूछा-अग्निदेव! आप कहाँ जा रहे हैं? उन्होंने कहा-कुटिले! शरवणमें उत्पन्न हुए बालक पुत्रको उसने कहा कि “पुत्र मेरा है” और अग्निने कहा कि "मेरा है'। स्वेच्छासे विचरण कर रहे जनार्दनने उन दोनोंको परस्पर विवाद करते हुए देखा। उन्होंने उन दोनोंसे पूछा-तुम दोनों आपसमें किसलिये विवाद कर

English

One should then visit Sthanu-tlrtha looking magnificent with one thousand lirigas. A sight of Sthanu banyan makes the man free from

अध्याय ४३

श्लोक 19

तथान्ये दानवश्रेष्ठ मयह्लादपुरोगमाः ।नानाप्रहरणा युद्धे गणनाथमभिद्रवन्

tathānye dānavaśreṣṭha mayahlādapurogamāḥ / nānāpraharaṇā yuddhe gaṇanāthamabhidravan

हिन्दी अर्थ

रहे हो। (तो) उन दोनोंने कहा--रुद्रके शुक्रसे उत्पन्न हुए पुत्रके लिये। विष्णुने उन दोनोंसे कहा--तुमलोग त्रिपुरासुरका विनाश करनेवाले शिवके पास जाओ। वे देवेश जो कहें, उसे निस्सन्देह करो। (पुलस्त्यजी कहते

English

fgy^irr?ilsaira:ii'({^n

अध्याय ४३

श्लोक 20

ततो गणानामधिपं कुट्यमानं महाबलैः ।समपश्यन्त देवास्तं पितामहपुरोगमाः

tato gaṇānāmadhipaṃ kuṭyamānaṃ mahābalaiḥ / samapaśyanta devāstaṃ pitāmahapurogamāḥ

हिन्दी अर्थ

हैं कि) नारदजी! वासुदेवके इस प्रकार कहनेपर कुटिला एवं अग्नि शङ्करके पास गये और उन्होंने (उनसे) यह गूढ रहस्य पूछा कि पुत्र किसका है? उनके वचनको सुनकर शङ्करका मन हर्षसे भर गया। उन्होंने हर्षगद्गद होकर गिरिजासे कहा--अहो

English

Description of Creation and Religion

अध्याय ४३

श्लोक 21

तं दृष्ट्वा भगवान् ब्रह्म प्राह शक्रपुरोगमान् ।साहाय्यं क्रियतां शंभोरेतदन्तरमुत्तमम्

taṃ dṛṣṭvā bhagavān brahma prāha śakrapurogamān / sāhāyyaṃ kriyatāṃ śaṃbhoretadantaramuttamam

हिन्दी अर्थ

ततोऽम्बिका प्राह हरं देव गच्छाम तं शिशुम्। प्रष्टुं समाश्रयेद् यं स तस्य पुत्रो भविष्यति

English

WlujdWSw ^(?ui cre^sr xl ■q?T^l Tri^TT Mill *11

अध्याय ४३

श्लोक 22

पितामहोक्तं वचनं श्रुत्वा देवाः सवासवाः ।समापतन्त वेगेन शिवसैन्यमथाम्बरात्

pitāmahoktaṃ vacanaṃ śrutvā devāḥ savāsavāḥ / samāpatanta vegena śivasainyamathāmbarāt

हिन्दी अर्थ

बाढमित्येव भगवान् समुत्तस्थौ वृषध्वजः। सहोमया कुटिलया पावकेन च धीमता सम्प्राप्तास्ते शरवणं हराग्निकुटिलाम्बिकाः। ददृशुः शिशुकं तं च कृत्तिकोत्सङ्गशायिनम्

English

fafini 'OTS^T ^ fl» WlHj

अध्याय ४३

श्लोक 23

तेषामापततां वेगः प्रमथानां बले बभौ ।आपगानां महावेगं पतन्तीनां महार्णवे

teṣāmāpatatāṃ vegaḥ pramathānāṃ bale babhau / āpagānāṃ mahāvegaṃ patantīnāṃ mahārṇave

हिन्दी अर्थ

कुमारः शङ्करमगाद् विशाखो गौरिमागमत्। कुटिलामगमच्छाखो महासेनोऽग्िमभ्ययात्

English

ureter wpBi ffg qe fayNd :ii*n

अध्याय ४३

श्लोक 24

ततो हलहलाशब्दः समजायत चोभयोः ।बलयोर्घोरसंकाशो सुरप्रमथयोरथ

tato halahalāśabdaḥ samajāyata cobhayoḥ / balayorghorasaṃkāśo surapramathayoratha

हिन्दी अर्थ

पावकश्चापि देवेशः परां मुदमवाप च ततोऽब्रुवन् कृत्तिकास्ताः षण्मुखः किं हरात्मजः। ता अब्रवीद्धरः प्रीत्या विधिवद् वचनं मुने

English

The hermits asked- 0 great hermit! Tell us in detail about the holy place Sthanuvata and the magnificence of the banyan tree there.

अध्याय ४३

श्लोक 25

तमन्तरमुपागम्य नन्दी संगृह्य वेगवान् ।रथाद् भार्गवमाक्रामत् सिंहः क्षुद्रमृगं यथा

tamantaramupāgamya nandī saṃgṛhya vegavān / rathād bhārgavamākrāmat siṃhaḥ kṣudramṛgaṃ yathā

हिन्दी अर्थ

नाम्ना तु कार्तिकेयो हि युष्माकं तनयस्त्वसौ। कुटिलायाः कुमारेति पुत्रोऽयं भविताऽव्ययः

English

How did die reservoir originate, how was it filled with dust? What are the blessings of a visit there to see the lingas and touching them and what magnificence does this reservoir

अध्याय ४३

श्लोक 26

तमादाय हराभ्याशमागमद् गणनायकः ।निपात्य रक्षिणः सर्वानथ शुक्रं न्यवेदयत्

tamādāya harābhyāśamāgamad gaṇanāyakaḥ / nipātya rakṣiṇaḥ sarvānatha śukraṃ nyavedayat

हिन्दी अर्थ

महासेन इति ख्यातो हुताशस्यास्तु पुत्रकः। सस्मार हैवतैः सार्द्ध तेऽयाजग्मुस्त्वरान्विताः

English

‘jaaFg "375: Traf: JTIR 3FR

अध्याय ४३

श्लोक 27

तमानीतं कविं शर्वः प्राक्षिपद् वदने प्रभुः ।भार्गवं त्वावृततनुं जठरे स न्यवेशयत्

tamānītaṃ kaviṃ śarvaḥ prākṣipad vadane prabhuḥ / bhārgavaṃ tvāvṛtatanuṃ jaṭhare sa nyaveśayat

हिन्दी अर्थ

प्रणिपत्य च कामारिमुमां च गिरिनन्दिनीम् दृष्ट्रा हुताशनं प्रीत्या कुटिलां कृत्तिकास्तथा

English

Lomaharsana said- O all sages! listen to the great Vamana Purana so magnificent as merely listening to this episode ensures emancipation for a man.

अध्याय ४३

श्लोक 28

स शंभुना कविश्र्ष्ठो ग्रस्तो जठरमास्थितः ।तुष्टाव भगवान्तं तं मुनिर्वाग्भिरथादरात्

sa śaṃbhunā kaviśrṣṭho grasto jaṭharamāsthitaḥ / tuṣṭāva bhagavāntaṃ taṃ munirvāgbhirathādarāt

हिन्दी अर्थ

मुष्णन्तमिव चक्षूंषि तेजसा स्वेन देवता: कौतुकाभिवृताः सर्वे एवमूचुः सुरोत्तमाः। देवकार्यं त्वया देव कृतं देव्याऽग्निना तथा

English

WcjtMHMltfM ^ IOT \<fc 3 nflqd :l

अध्याय ४३

श्लोक 29

शुक्र उवाच ।वरदाय नमस्तुभ्यं हराय गुणशालिने ।शङ्कराय महेशाय त्र्यम्बकाय नमो नमः

śukra uvāca / varadāya namastubhyaṃ harāya guṇaśāline / śaṅkarāya maheśāya tryambakāya namo namaḥ

हिन्दी अर्थ

भाग्य! अहो भाग्य!! तब अम्बिकाने शङ्करसे कहा- देव! हम सब उस शिशुसे ही पूछने चलें। वह जिसका आश्रय स्वीकार करेगा उसीका पुत्र होगा। ठीक है-एऐसा कहकर वृषध्वज भगवान् शङ्कर

English

Sanatkumara once was seated in the company of Balakhilya etc. hermits, the sons of Brahma. It was a site near Sthanu-vata

अध्याय ४३

श्लोक 30

जीवनाय नमस्तुभ्यं लोकनाथ वृषाकपे ।मदनाग्ने कालशत्रो वामदेवाय ते नमः

jīvanāya namastubhyaṃ lokanātha vṛṣākape / madanāgne kālaśatro vāmadevāya te namaḥ

हिन्दी अर्थ

पार्वती, कुटिला तथा बुद्धिमान् पावकके साथ चलनेके लिये उठ खड़े हुए। शङ्कर, पार्वती, कुटिला एवं पावक शरवणमें गये। इन लोगोंने कृत्तिकाकी गोदमें लेटे हुए उस बालकको देखा उसके बाद छः मुखोंबाला वह बालक उन लोगोंको चिन्तित जान करके उनमें आदर रखकर बच्चा होते हुए भी योगीके समान कुमार, विशाख, शाख, महासेन--(इन) चार मूर्तियोंबाला हो गया। कुमार

English

The hermit Markandeya went to him and asked humbly about the magnificence attached to the reservoir, its expanse and location etc. in detail.

अध्याय ४३

श्लोक 31

स्थाणवे विश्वरूपाय वामनाय सदागते ।महादेवाय शर्वाय ईश्वराय नमो नमः

sthāṇave viśvarūpāya vāmanāya sadāgate / mahādevāya śarvāya īśvarāya namo namaḥ

हिन्दी अर्थ

शङ्करके, विशाख गिरिजाके, शाख कुटिलाके और महासेन अग्निके समीप चले गये। फिर तो रुद्र, उमा, कुटिला तथा देवेश्वर अग्नि-ये चारों ही अत्यन्त हर्षित हो गये। उसके बाद उन कृत्तिकाओंने पूछा-

English

Markandeya said- O Sanatkumara! You are skilled in all the scriptures and are the son of revered Brahma. Please, tell us about the magnificence subsiding/effacing the force of

अध्याय ४३

श्लोक 32

त्रिनयन हर भव शङ्कर उमापते जीमूतकेतो शुहागृह श्मशाननिरत भूतिविलेपन सूलपाणे पशुपते गोपते तत्पुरुषसत्त्म नमो नमस्ते ।इत्थं स्तुतः कविवरेम हरो ऽथ भक्त्या प्रीतो वरं वरय दद्मि तवेत्युवाच ।स प्राह देववर देहि वरं ममाद्य यद्वै तवैव जठरात् प्रतिनिर्गमो ऽस्तु

trinayana hara bhava śaṅkara umāpate jīmūtaketo śuhāgṛha śmaśānanirata bhūtivilepana sūlapāṇe paśupate gopate tatpuruṣasattma namo namaste | itthaṃ stutaḥ kavivarema haro 'tha bhaktyā prīto varaṃ varaya dadmi tavetyuvāca / sa prāha devavara dehi varaṃ mamādya yadvai tavaiva jaṭharāt pratinirgamo 'stu

हिन्दी अर्थ

कया षड्वदन शङ्करके पुत्र हैं? मुने! शङ्करने उन सभीसे प्रेमपूर्वक विधिवत् (आगेका) वचन कहा-॥ ३९--४२॥ कृत्तिकाओ! 'कार्तिकेय' नामसे ये तुम्हारे पुत्र होंगे तथा ये अविनाशी “कुमार” नामसे कुटिलाके पुत्र होंगे। ये ही “स्कन्द' नामसे विख्यात गौरीके पुत्र होंगे तथा “गुह' नामसे मेरे पुत्र होंगे। 'महासेन' नामसे ये

English

g#r ‘dtoiPr ;j$iftr fgsrcipj

अध्याय ४३

श्लोक 33

ततो हरो ऽक्षीणि तदा निरुध्य प्राह द्विजेन्द्राद्य विनिर्गमस्व ।इत्युक्तमात्रो विभुना चचार देवोदरे भार्गवपुङ्गवस्तु

tato haro 'kṣīṇi tadā nirudhya prāha dvijendrādya vinirgamasva / ityuktamātro vibhunā cacāra devodare bhārgavapuṅgavastu

हिन्दी अर्थ

अग्निके प्रख्यात पुत्र होंगे तथा “शारद्वत'-इस नामसे विख्यात ये शरवणके पुत्र होंगे। इस प्रकार ये महायोगी भूमण्डलमें विख्यात होंगे। छः मुखवाले होनेके कारण ये महाबाहु षण्मुख नामसे प्रसिद्ध होंगे

English

IH#TH ^Ildyu^lH WllunqiH TORd:lB3ll

अध्याय ४३

श्लोक 34

परिभ्रमन् ददर्शाथ शंभोरेवोदरे कविः ।भुवनार्णवपातालान् वृतान् स्थावरजङ्मैः

paribhraman dadarśātha śaṃbhorevodare kaviḥ / bhuvanārṇavapātālān vṛtān sthāvarajaṅmaiḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार कहकर शूलपाणि शङ्करने देवताओंके साथ पितामह ब्रह्माका स्मरण किया। वे सभी सहसा वहाँ आ गये और कामरिपु शङ्कर तथा गिरिनन्दिनी पार्वतीको प्रणामकर एवं अग्निदेव, कुटिला और कृत्तिकाओंको स्त्नेहपूर्वक देखकर उन देवोंने अतिशय दीप्तिमान् सूर्यके सदृश एवं अपने तेजसे सभीके नेत्रोंको चकाचौंधमें डालनेवाले उस षडानन बालकको देखा। प्रसन्नतासे भरे उन श्रेष्ठ देवोंने कहा--देव!

English

^ft ^TOlsPlT gfrE WRtfd FRcLI

अध्याय ४३

श्लोक 35

आदित्यान् वसवो रुद्रान् विश्वेदेवान् गणांस्तथा ।यक्षान् किंपुरुषाद्यादीन् गन्धर्वाप्सरसां गणान्

ādityān vasavo rudrān viśvedevān gaṇāṃstathā / yakṣān kiṃpuruṣādyādīn gandharvāpsarasāṃ gaṇān

हिन्दी अर्थ

आपने, देवीने एवं अग्निने देवताओंका कार्य सम्पन कर दिया॥ ४७ --५०॥

English

TO i#T ggBHc| frll C II

अध्याय ४३

श्लोक 36

मुनीन् मनुजसाध्यांश्च पशुकीटपिपीलिकान् ।वृक्षगुल्मान् गिरीन् वल्ल्यः फलमूलौषधानि च

munīn manujasādhyāṃśca paśukīṭapipīlikān / vṛkṣagulmān girīn vallyaḥ phalamūlauṣadhāni ca

हिन्दी अर्थ

सेनायाः पतिरस्त्वेष देवगन्धर्वकिंनराः। महिषं घातयत्वेष तारकं च सुदारुणम् तत्रैव देवताः सेन्द्रा रुद्रब्रह्मजनार्दना:। यल्ममस्याभिषेकार्थं चक्कुर्मुनिगणैः सह

English

O great Dvija! Tell us further about the number of visible and invisible holy places and the number of lingas existed there. Do these provide one with emancipation? Tell

अध्याय ४३

श्लोक 37

स्थालस्थांश्च जलस्थांश्चानिमिषान्निमिषानपि ।चतुष्पदान् सद्विपदान् स्थावरान् जङ्गमानपि

sthālasthāṃśca jalasthāṃścānimiṣānnimiṣānapi / catuṣpadān sadvipadān sthāvarān jaṅgamānapi

हिन्दी अर्थ

अभिषिञ्चति सेनान्यां कुमारे दिव्यरूपिणि। जगुर्गन्धर्वपतयो ननृतुश्चाप्सरोगणाः

English

also about the fruit for seeing the banyan tree and its origin.

अध्याय ४३

श्लोक 38

अव्यक्तांश्चैव व्यक्तांश्च सगुणान्निर्गुणानपि ।स दृष्ट्वा कौतुकाविष्टः परिबभ्राम भार्गवः ।तत्रासतो भार्गवस्य दिव्यः संवत्सरो गतः

avyaktāṃścaiva vyaktāṃśca saguṇānnirguṇānapi / sa dṛṣṭvā kautukāviṣṭaḥ paribabhrāma bhārgavaḥ / tatrāsato bhārgavasya divyaḥ saṃvatsaro gataḥ

हिन्दी अर्थ

जिघ्रती कार्तिकेयस्य अभिषेकार्द्रमाननम्। भात्यद्रिजा यथेन्द्रस्य देवमाताऽदितिः पुरा पावकः कृत्तिकाश्चैव कुटिला च यशस्विनी

English

tl^uuqi qrgmi wfrfo - TF R qdl S HHj

अध्याय ४३

श्लोक 39

न चानमलभद् ब्रह्मंस्ततः श्रान्तो ऽभवत् कविः ।स श्रन्तं वीक्ष्य चात्मानं नालभन्निर्गमं वशी ।भिक्तिनम्रो महादेवं शरणं समुपागम्

na cānamalabhad brahmaṃstataḥ śrānto 'bhavat kaviḥ / sa śrantaṃ vīkṣya cātmānaṃ nālabhannirgamaṃ vaśī / bhiktinamro mahādevaṃ śaraṇaṃ samupāgam

हिन्दी अर्थ

ततोऽभिषिक्तस्य हरः सेनापत्ये गुहस्य तु। प्रमथांश्चतुरः प्रादाच्छक्रतुल्यपराक्रमान्

English

W FTPJJ: wmwi oEjgfwd:l

अध्याय ४३

श्लोक 40

शुक्र उवाच।।विश्वरूप महारूप विश्वरूपाक्षसूत्रधृक् ।सहस्राक्ष महादेव त्वामहं शरणं गतः

śukra uvāca/ / viśvarūpa mahārūpa viśvarūpākṣasūtradhṛk / sahasrākṣa mahādeva tvāmahaṃ śaraṇaṃ gataḥ

हिन्दी अर्थ

घण्टाकर्णं लोहिताक्षं नन्दिसेनं च दारुणम्। चतुर्थं बलिनां मुख्यं ख्यातं कुमुदमालिनम् हरदत्तान् गणान् दृष्टा देवाः स्कन्दस्य नारद। प्रददुः प्रमथान् स्वान् स्वान् सर्वे ब्रह्मपुरोगमाः

English

feisf R^ftT ijftdgT^: II II

अध्याय ४३

श्लोक 41

नमो ऽस्तु ते शङ्कर शर्व शंभो सहस्रनेत्राङ्घ्रिभुजङ्गभूषण ।दृष्ट्वैव सर्वान् भुवनांस्तवोदरे श्रान्तो भवन्तं शरणं प्रपन्नः

namo 'stu te śaṅkara śarva śaṃbho sahasranetrāṅghribhujaṅgabhūṣaṇa / dṛṣṭvaiva sarvān bhuvanāṃstavodare śrānto bhavantaṃ śaraṇaṃ prapannaḥ

हिन्दी अर्थ

स्थाणुं ब्रह्मा गणं प्रादाद् विष्णुः प्रादाद् गणत्रयम्। संक्रमं विक्रमं चैव तृतीयं च पराक्रमम्

English

vnujdlw FlilcRT xRRTSm 'MdhHH,!

अध्याय ४३

श्लोक 42

इत्येवमुक्ते वचने महात्मा शंभुर्वचः प्राह ततो विहस्य ।निर्गच्छ पुत्रो ऽसि ममाधुना त्वं शिश्नेन भो भार्गववंशचन्द्र

ityevamukte vacane mahātmā śaṃbhurvacaḥ prāha tato vihasya / nirgaccha putro 'si mamādhunā tvaṃ śiśnena bho bhārgavavaṃśacandra

हिन्दी अर्थ

उत्केशं पङ्कजं शक्रो रविर्दण्डकपिङ्गलौ। चन्द्रो मणिं वसुमणिमशञ्चिनौ वत्सनन्दिनौ कार्तिकेयका जन्म, उनके छः मुख और चतुर्मूर्ति होनेका हेतु, उनका दण्डादिका पाना

English

The fruits of Pradaksnia (round revolving) a visit, the visible and invisible holy places, their observation (a sight at them) and the circumstance in which lord Siva (Sthanu) appeared in the middle of the reservoir are the topics of our curiosity. Further, tell us how god Indra filled again completely this reservoir with dust, the magnificence of Sthanu-tlrtha, the fruit of Cakra-tlrtha, its magnificence with Surya-tlrtha and Soma

अध्याय ४३

श्लोक 43

नाम्ना तु शुक्रेति चराचरास्त्वां स्तोष्यन्ति नैवात्र विचारमन्यत् ।इत्येवमुक्त्वा भगवान् मुमोच शिश्नेन शुक्रं स च निर्जगाम

nāmnā tu śukreti carācarāstvāṃ stoṣyanti naivātra vicāramanyat / ityevamuktvā bhagavān mumoca śiśnena śukraṃ sa ca nirjagāma

हिन्दी अर्थ

तीर्थको चलें। कुरुक्षे्रमें चलकर सरस्वती (नदी)-में हमलोग षण्मुखका अभिषेक करें। देवो, गन्धर्वो और किन्नरो! ये हमारे सेनापति बनें और महिष तथा भयंकर तारकका संहार करें। शङ्करने कहा-बहुत अच्छा।

English

gWRTPT FSTOPT 4HfcJryi: W II

अध्याय ४३

श्लोक 44

विनिर्गतो भार्गाववंशचन्द्रः शुक्रत्वमापद्य महानुभावः ।प्रणम्य शंभुं स जगाम तूर्ण महासुराणां बलमुत्तमौजाः

vinirgato bhārgāvavaṃśacandraḥ śukratvamāpadya mahānubhāvaḥ / praṇamya śaṃbhuṃ sa jagāma tūrṇa mahāsurāṇāṃ balamuttamaujāḥ

हिन्दी अर्थ

उसके बाद सभी देवता उठे और कुमारके साथ महान् "फलदायी कुरुक्षेत्रमं चले गये। वहीं मुनियोंके साथ इन्द्र, रुद्र, प्रजापति ब्रह्मा, जनार्दन आदि समस्त देवताओंने उस कुमारके अभिषेकका उपाय किया॥ ५१--५४॥ उसके बाद अच्युत (विष्णु) आदि देवताओंने (सरस्वतीके तथा) सातों समुद्रोंमें मिलकर बहनेवाली नदियोंके महान् फलदायक जलसे एवं सहस्रों प्रकारकी उत्तमोत्तम ओषधियोंसे गुहका (सेनापतिके पदपर)

English

O learned sage! Tell us in detail about the secret places (spots) of god Sankara and Visnu located on the bank of

अध्याय ४३

श्लोक 45

भार्गवे पुनरायाते दानवा मुदिताभवन् ।पुनर्युद्धाय विदधुर्मतिं सह गणेश्वरैः

bhārgave punarāyāte dānavā muditābhavan / punaryuddhāya vidadhurmatiṃ saha gaṇeśvaraiḥ

हिन्दी अर्थ

अभिषेक किया। दिव्य रूप धारण करनेवाले सेनापति कुमारके अभिषिक्त हो जानेपर गन्धर्वराज गाने लगे एवं अप्सराएँ नृत्य करने लगीं। गिरिजाने कुमारको अभिषिक्त देखकर स्नेहसे गोदमें ले लिया और वे बार-बार उनके

English

Tirg tc ui ^cj <rr:i

अध्याय ४३

श्लोक 46

गणेश्वरास्तानसुरान् सहामरागणैरथ ।युयुधुः संकुलं युद्धं सर्व एव जयेप्सवः

gaṇeśvarāstānasurān sahāmarāgaṇairatha / yuyudhuḥ saṃkulaṃ yuddhaṃ sarva eva jayepsavaḥ

हिन्दी अर्थ

सिरको सूँघने लगीं। अभिषेकसे आर्द्र हुए कार्तिकेयके मुखको (आशीर्वाद देनेकी प्रक्रियामें) सूँघती हुई पार्वती पूर्वकालमें (आशीर्वाद देती हुई) इन्द्रके मुखको सूँघनेवाली देवमाता अदिति-जैसी सुशोभित हुई उस समय शङ्कर, पावक, कृत्तिकाएँ एवं यशस्विनी कुटिला (--ये सभी) अपने पुत्रको अभिषिक्त देखकर अत्यन्त हर्षित हुए। उसके बाद शङ्करने सेनापतिके पदपर अभिषिक्त किये गये गुहको इन्द्रके सदृश

English

f^nrPT farther an ??

अध्याय ४३

श्लोक 47

ततो ऽसुरगणानां च देवतानां च युध्यताम् ।द्वन्द्वयुद्धूं समभवद् घोररूपं तपोधन

tato 'suragaṇānāṃ ca devatānāṃ ca yudhyatām / dvandvayuddhūṃ samabhavad ghorarūpaṃ tapodhana

हिन्दी अर्थ

शक्तिवाले चार प्रमथों-घण्टाकर्ण, लोहिताक्ष, दारुण नन्दिसेन और चौथे बलवानोंमें श्रेष्ठ विख्यात कुमुदमालीको दिया। नारदजी! शङ्करद्वारा दिये गये गणोंको देखकर ब्रह्मा आदि सभी देवताओंने (सेनापति) स्कन्दके लिये

English

As you know everything by the grace of god Brahma, please tell about the magnificence of the god of gods very clearly.

अध्याय ४३

श्लोक 48

अन्धको नन्दिनं युद्धं शङ्कुकर्णं त्वयःशिराः ।कुम्भध्वजं बलिर्धीमान् नन्दिषेणं विरोचनः

andhako nandinaṃ yuddhaṃ śaṅkukarṇaṃ tvayaḥśirāḥ / kumbhadhvajaṃ balirdhīmān nandiṣeṇaṃ virocanaḥ

हिन्दी अर्थ

अपने-अपने प्रमथोंको (भी) दे दिया ब्रह्माने अपने गण स्थाणुको दिया और विष्णुने संक्रम, विक्रम और परक्रम नामके तीन गणोंको दिया । इन्द्रने उत्केश और पङ्कूजको, रविने दण्डक और पिङ्गलको, चन्द्रमाने मणि

English

3 afe iranflf«RRa:ii

अध्याय ४३

श्लोक 49

अश्वग्रीवो विशाखं च शाखो वृत्रमयोधयत् ।वाणस्तथा नैगमेयं बलं राक्षसपुङ्गवः

aśvagrīvo viśākhaṃ ca śākho vṛtramayodhayat / vāṇastathā naigameyaṃ balaṃ rākṣasapuṅgavaḥ

हिन्दी अर्थ

एवं वसुमणिको, अश्विनीकुमारोंने वत्स और नन्दीको दिया।

English

Lomaharsana said- The mind of hermit was impressed by the praise as made by Markandeya about the sheer devotion for the

अध्याय ४३

श्लोक 50

विनायको माहावीर्य परश्वधधरो रणे ।संक्रुद्धो राक्षसश्रेष्ठं तुहुण्डं समयोधयत् ।दुर्योधनश्च बलिनं घण्टाकर्णमयोधयत्

vināyako māhāvīrya paraśvadhadharo raṇe / saṃkruddho rākṣasaśreṣṭhaṃ tuhuṇḍaṃ samayodhayat / duryodhanaśca balinaṃ ghaṇṭākarṇamayodhayat

हिन्दी अर्थ

पाणित्यजं कालकञ्च प्रादात् पूषा महाबलौ प्रादादेवोच्छितो विन्ध्यस्त्वतिशृङ्गं च पार्षदम्

English

asaraTRTR Wt a?RT: WII Wl

अध्याय ४३

श्लोक 51

हस्ती च कुण्डजठरं ह्लादो वीरं घटोदरम् ।एते हि बलिनां श्रेष्ठा दानवाः प्रमथास्तथा ।संयोधयन्ति देवर्षे दिव्याब्दानां शतनि षट्

hastī ca kuṇḍajaṭharaṃ hlādo vīraṃ ghaṭodaram / ete hi balināṃ śreṣṭhā dānavāḥ pramathāstathā / saṃyodhayanti devarṣe divyābdānāṃ śatani ṣaṭ

हिन्दी अर्थ

उन्मादं शङ्कुकर्ण च पुष्पदन्तं तथाऽम्बिका। घसं चातिघसं वायुः प्रादादनुचरावुभौ

English

He first loosened his posture in which he was seated earlier, bowed his head to god Sankara and described all events pertaining to

अध्याय ४३

श्लोक 52

शतक्रतुमथायान्तं वज्रपाणिमभिस्थितम् ।वारयामास बलवान् जम्भो नाम महासुरः

śatakratumathāyāntaṃ vajrapāṇimabhisthitam / vārayāmāsa balavān jambho nāma mahāsuraḥ

हिन्दी अर्थ

यमः प्रमाथमुन्माथं कालसेनं महामुखम्। तालपत्रं नाडिजङ्कं षडेवानुचरान् ददौ सुप्रभं च सुकर्माणं ददौ धाता गणेश्वरौ। सुद्रतं सत्यसन्धं च मित्रः प्रादाद् द्विजोत्तम

English

O great Dvija! I have explained this knowledge in brief to you. You will definitely access to Brahma when you duly understand

अध्याय ४३

श्लोक 53

सम्भुनामासुरपतिः स ब्रह्मणमयोधयत् ।महौजसं कुजम्भश्च विष्णुं दैत्यान्तकारिणम्

sambhunāmāsurapatiḥ sa brahmaṇamayodhayat / mahaujasaṃ kujambhaśca viṣṇuṃ daityāntakāriṇam

हिन्दी अर्थ

एकाक्षः कुनटी चक्षुः किरीटी कलशोदर:

English

Now listen to the origin of Brahma, the supreme soul. The people reproduce the following hymn about Narayana.

अध्याय ४३

श्लोक 54

विवस्वन्तं रणे शाल्वो वरुणं त्रिशिरास्तथा ।द्विमूर्धा पवनं सोमं राहुर्मित्रं विरूपधृक्

vivasvantaṃ raṇe śālvo varuṇaṃ triśirāstathā / dvimūrdhā pavanaṃ somaṃ rāhurmitraṃ virūpadhṛk

हिन्दी अर्थ

सूचीवब्त्रः कोकनदः प्रहासः प्रियकोऽच्युतः। गणाः पञ्चदशैते हि सक्षैर्दत्ता गुहस्य तु कालिन्द्याः कालकन्दश्च नर्मदाया रणोत्कटः ।

English

3TTht RITT $ OT TO' ^f:l

अध्याय ४३

श्लोक 55

अष्टौ ये वसवः ख्याता धराद्यास्ते महासुरान् ।अष्टावेव महेष्वासान् वारयामासुराहवे

aṣṭau ye vasavaḥ khyātā dharādyāste mahāsurān / aṣṭāveva maheṣvāsān vārayāmāsurāhave

हिन्दी अर्थ

मन्दाकिन्यास्तथा नन्दो विपाशायाः प्रियङ्करः

English

dlf flft dTOd $R HKIdU l: ^T:IR<?II

अध्याय ४३

श्लोक 56

सरभः शलक्षः पाकः पुरो ऽथ विपृथुःपृथुः ।वातापि चेल्वलश्चैव नानाशस्त्रास्त्रयोधिनः

sarabhaḥ śalakṣaḥ pākaḥ puro 'tha vipṛthuḥpṛthuḥ / vātāpi celvalaścaiva nānāśastrāstrayodhinaḥ

हिन्दी अर्थ

मार्जारे कौशिकी प्रादात् क्रथक्रौञ्जौ च गौतमी अष्टबाहुं ददौ काशी सुबाहुमपि गण्डकी। महानदी चित्रदेवं चित्रा चित्ररथं ददौ

English

Apa viz. water is called Nara and (of supreme soul) Tanau. He sleeps on it hence, addressed as Narayana.

अध्याय ४३

श्लोक 57

विश्वेदेवगणान् सर्वान् विष्वक्सेनपुरोगमान् ।एक एव रणे रौद्रः कालनेमिर्महासुरः

viśvedevagaṇān sarvān viṣvaksenapurogamān / eka eva raṇe raudraḥ kālanemirmahāsuraḥ

हिन्दी अर्थ

कुहूः कुवलयं प्रादान्मधुवर्णं मधूदका। जम्बूकं धूतपापा च वेणा श्चेताननं ददौ

English

3PJ3 ^dcflWWIdlfard'dlddll3 o II

अध्याय ४३

श्लोक 58

एकादशैव ये रुद्रास्तानेको ऽपि रणोत्कटः ।योधयामास तेजस्वी विद्युन्माली महासुरः

ekādaśaiva ye rudrāstāneko 'pi raṇotkaṭaḥ / yodhayāmāsa tejasvī vidyunmālī mahāsuraḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभावार्थ सहं प्रादात् काञ्चना कनकेक्षणम् धूतपापा महारावं कर्णा विद्रुमसंनिभम्

English

As the god awakened, he understood that the world is shrunk in the egg and he thus, penetrated the egg. "Om" the syllable came out as a result of such penetration.

अध्याय ४३

श्लोक 59

द्वावश्विनौ च नरको भास्करानेव शम्बरः ।साध्यान् मरुद्गणांश्चैव निवातकवचादयः

dvāvaśvinau ca narako bhāskarāneva śambaraḥ / sādhyān marudgaṇāṃścaiva nivātakavacādayaḥ

हिन्दी अर्थ

अग्निने ज्योति तथा दूसरे ज्चलज्जिह्वको दिया। धाताने कुन्द, मुकुन्द तथा कुसुम नामके तीन अनुचरोंको दिया। त्वष्टाने चक्र और अनुचक्रको, वेधाने अतिस्थिर और सुस्थिरको एवं पूषाने महाबलशाली पाणित्यज तथा

English

Mt sjTMddWI^c) fTOT: HJW:l

अध्याय ४३

श्लोक 60

एवं द्वन्द्रवसहस्राणि प्रमथामरदानवैः ।कृतानि च सुराब्दानां दशतीः षट् महामुने

evaṃ dvandravasahasrāṇi pramathāmaradānavaiḥ / kṛtāni ca surābdānāṃ daśatīḥ ṣaṭ mahāmune

हिन्दी अर्थ

हिमालयने प्रमथोंमें श्रेष्ठ स्वर्णमाल और घनाहृको तथा ऊँचे विन्ध्याचलने अतिशृङ्ग नामक पार्षदको दिया। वरुणने सुवर्चा एवं अतिवर्चाको, समुद्रने संग्रह तथा विग्रहको एवं नागोंने जय तथा महाजयको दिया। अम्बिकाने उन्माद, शङ्कुकर्ण और पुष्पदन्तको तथा पवनने घस और अतिघस नामके दो अनुचरोंको दिया। अंशुमानूने षडाननको परिघ, चटक, भीम, दहति तथा दहन नामके पाँच प्रमथोंको दिया॥ ६७ --७०॥

English

Then it gave birth to Bhuh, Bhuvah and Svaha in an orderly manner. Completely they called

अध्याय ४३

श्लोक 61

यदा न शकिता योद्धुं दैवतैरमरारयः ।तदा मायं समाश्रित्य ग्रसन्तः क्रमशो ऽव्ययान्

yadā na śakitā yoddhuṃ daivatairamarārayaḥ / tadā māyaṃ samāśritya grasantaḥ kramaśo 'vyayān

हिन्दी अर्थ

यमराजने प्रमाथ, उन्माथ, कालसेन, महामुख, तालपत्र और नाडिजङ्घ नामके छः अनुचरोंको दिया। द्विजोत्तम! धाताने सुप्रभ और सुकर्मा नामके दो गणेश्वरोंको तथा मित्रने सुब्रत तथा सत्यसन्ध नामके दो

English

The splendour that shows with sun was than originated from it. This splendour so come out of the egg dried the water up.

अध्याय ४३

श्लोक 62

ततो ऽभवच्छैलपृष्ठं प्रावृडभ्रसमप्रभैः ।आवृतं वर्जितं सर्वैः प्रमथैरमरैरपि

tato 'bhavacchailapṛṣṭhaṃ prāvṛḍabhrasamaprabhaiḥ / āvṛtaṃ varjitaṃ sarvaiḥ pramathairamarairapi

हिन्दी अर्थ

अनुचरोंको दिया। यक्षोंने अनन्त, शङ्कुपीठ, निकुम्भ, कुमुद, अम्बुज, एकाक्ष, कुनटी, चक्षु, किरीटी, कलशोदर, सूचीवक्त्र, कोकनद, प्रहास, प्रियक एवं अJच्युत-इन पंद्रह गणोंको कार्तिकेयको दे दिया ॥७१--७४॥ कालिन्दीने कालकन्दको, नर्मदाने रणोत्कटको, गोदावरीने सिद्धयात्रको एवं तमसाने अद्रिकम्पकको दिया। सीताने सहस्रबाहुको, वञ्जुलाने सितोदरको, मन्दाकिनीने नन्दको एवं विपाशाने प्रियङ्करको दिया। ऐरावतीने

English

rT5TOT *H<drdyMHIdHJ

अध्याय ४३

श्लोक 63

दृष्ट्वा शून्यं गिरिप्रस्थं ग्रस्तांश् च प्रमथामरान् ।क्रोधादुत्पादयामास रुद्रो जृम्भायिकां वशी

dṛṣṭvā śūnyaṃ giriprasthaṃ grastāṃś ca pramathāmarān / krodhādutpādayāmāsa rudro jṛmbhāyikāṃ vaśī

हिन्दी अर्थ

चतुर्दष्टको, वितस्ताने षोडशाक्षको, कौशिकीने मार्जारको एवं गौतमीने क्रथ और क्रौञ्चको दिया। बाहुदाने शतशीर्षको, वाहाने गोनन्द और नन्दिकको, भीमरथीने भीमको और सरयूने वेगारिको दिया

English

cRRRlgg^ dd: chlfd^Td'l TOfll ? ^ II

अध्याय ४३

श्लोक 64

तया स्पृष्टा दनुसुता अलसा मन्दभाषिणः ।वदनं विकृतं कृत्वा मुक्तशस्त्रं विजृम्भिरे

tayā spṛṣṭā danusutā alasā mandabhāṣiṇaḥ / vadanaṃ vikṛtaṃ kṛtvā muktaśastraṃ vijṛmbhire

हिन्दी अर्थ

काशीने अष्टबाहुको, गण्डकीने सुबाहुको, महानदीने चित्रदेवको तथा चित्राने चित्ररथको दिया। कुहूने कुवलयको, मधूदकाने मधुवर्णको, धूतपापाने जम्बूकको और वेणाने श्वेताननको समर्पित किया। पर्णासाने श्रुतवर्णको, रेवाने सागरवेगीको, प्रभावाने अर्थ और सहको एवं काझनाने कनकेक्षणको दिया। विमलाने गृभ्रपत्रको, मनोहराने चारुवक्त्रको, धूतपापाने महारावको एवं कर्णाने विद्रुमसंनिभको दिया

English

In course when the water was being absorbed, the Sesa converted it in the form of gastrula (kalala); it originated Buda-buda (marrow) and then it was solidified.

अध्याय ४३

श्लोक 65

जृम्भमाणेषु च तदाच दानवेषु गणेश्वराः ।सुराश्च निर्ययुस्तूर्णं दैत्यदेहेभ्य आकुला

jṛmbhamāṇeṣu ca tadāca dānaveṣu gaṇeśvarāḥ / surāśca niryayustūrṇaṃ daityadehebhya ākulā

हिन्दी अर्थ

यज्ञबाहुं विशाला च सरस्वत्यो ददुर्गणान्॥

English

ftdT *TdHt «nfM % TTTI

अध्याय ४३

श्लोक 66

मेघप्रभेभ्यो दैत्येभ्यो निर्गच्छन्तो ऽमरोत्तमाः ।शोभन्ते पद्मपत्राक्षा मेघेभ्य इव विद्युतः

meghaprabhebhyo daityebhyo nirgacchanto 'marottamāḥ / śobhante padmapatrākṣā meghebhya iva vidyutaḥ

हिन्दी अर्थ

करालं सितकेशं च कृष्णकेशं जटाधरम्॥ सोमाप्यायनमेवोग्रं देवयाजिनमेव च॥

English

dfoRdft glut m: n 3 *

अध्याय ४३

श्लोक 67

गणामरेषु च समं निर्गतेषु तपोधन ।अयुध्यन्त महात्मानो भूय एवातिकोपिताः

gaṇāmareṣu ca samaṃ nirgateṣu tapodhana / ayudhyanta mahātmāno bhūya evātikopitāḥ

हिन्दी अर्थ

कूर्मग्रीवं च पञ्जैतान् ददुः पुत्राय कृत्तिकाः ॥

English

This crystallisation gave birth to the earth and it holds all beings on its breasts. Sarhhita

अध्याय ४३

श्लोक 68

ततस्तु देवैः सगणैः दानवाः शर्वपालितैः ।पराजीयन्त संग्रामे भूयो भूयस्त्वहर्निशम्

tatastu devaiḥ sagaṇaiḥ dānavāḥ śarvapālitaiḥ / parājīyanta saṃgrāme bhūyo bhūyastvaharniśam

हिन्दी अर्थ

पिण्डाकारं च पञ्चैतान् ददुः स्कन्दाय चर्षयः॥ चक्रतीर्थं सुचक्राक्षं मकराक्षं गयाशिरः।

English

reservoir is located where that egg was originated and observed by Brahma.

अध्याय ४३

श्लोक 69

ततस्त्रिनेत्रः स्वैं संध्यां सप्ताब्धशतिके गते ।काले ऽभ्युपासत तदा सो ऽष्टादशभुजो ऽव्ययः

tatastrinetraḥ svaiṃ saṃdhyāṃ saptābdhaśatike gate / kāle 'bhyupāsata tadā so 'ṣṭādaśabhujo 'vyayaḥ

हिन्दी अर्थ

बन्धुदत्तं वाजिशिरो बाहुशालं च पुष्करम्।

English

As the splendour originated very first (Adi), the sun was called Aditya. Lokapitamaha Brahma was originated from the middle portion of that egg.

अध्याय ४३

श्लोक 70

संस्पृश्यापः सरस्वत्यां स्नात्वा च विधिना हरः ।कृतार्थो भक्तिमान् मूर्ध्ना पुष्पाञ्जलिमुपाक्षिपत्

saṃspṛśyāpaḥ sarasvatyāṃ snātvā ca vidhinā haraḥ / kṛtārtho bhaktimān mūrdhnā puṣpāñjalimupākṣipat

हिन्दी अर्थ

इन्द्रतीर्थं विशोकां च उदपानो घनस्वनाम्। ब्रह्मयोनिश्चण्डशिलां भद्रकाली त्रिविष्टपः। चौण्डीं भैण्डीं योगभैण्डीं प्रादाच्चरणपावनः

English

cl <fg; McJnl: ^JcfTrl

अध्याय ४३

श्लोक 71

ततो ननाम शिरसा ततश्चक्रे प्रदक्षिणम् ।हिरण्यगर्भेत्यादित्यमुपतस्थे जजाप ह

tato nanāma śirasā tataścakre pradakṣiṇam / hiraṇyagarbhetyādityamupatasthe jajāpa ha

हिन्दी अर्थ

सोपानीयां मही प्रादाच्छालिकां मनसो हृदः। शतघण्टां शतानन्दां तथोलूखलमेखलाम्

English

HifatyA >y<^cb ^roTt fatfci dgrfi

अध्याय ४३

श्लोक 72

त्वष्ट्रे नमो नमस्ते ऽस्तु सम्यगुच्चार्य शूलधृक् ।ननर्त भावगम्भीरं दोर्दण्डं भ्रामयन् बलात्

tvaṣṭre namo namaste 'stu samyaguccārya śūladhṛk / nanarta bhāvagambhīraṃ dordaṇḍaṃ bhrāmayan balāt

हिन्दी अर्थ

पद्मावतीं माधवीं च ददौ बदरिकाश्रमः। सुषमामेकचूडां च देवीं धमधमां तथा उत्क्राथनीं वेदमित्रां केदारो मातरो ददौ। सुनक्षत्रां कब्रूलां च सुप्रभातां सुमङ्गलाम्

English

The outer shell of the egg is the Meru mountain and other mountains are considered the Jarayu (internal crust) of that egg. Ocean and several thousand rivers and the garbhodaka the clean water at the navel zone of Brahma, had filled the reservoir with that magnificent water.

अध्याय ४३

श्लोक 73

परिनृत्यति देवेशे गणाश्चैवामरास्तथा ।नृत्यन्ते भावसंयुक्ता हरस्यानुविलासिनः

parinṛtyati deveśe gaṇāścaivāmarāstathā / nṛtyante bhāvasaṃyuktā harasyānuvilāsinaḥ

हिन्दी अर्थ

देवमित्रां चित्रसेनां ददौ रूद्रमहालयः। कोटरामूर्ध्वबेणीं च श्रीमतीं बहुपुत्रिकाम्

English

tiCTfeEnidf dutf m&m : $rfaRrrfdyr:ii3<in dfHIgdld T: ^JdTsf fSdTOd{l dd(y*dild: IgnJltScildj'vjl'tR: I

अध्याय ४३

श्लोक 74

सन्ध्यामुपास्य देवेशः परिनृत्य यथेच्छया ।युद्धाय दानवैः सर्वैस्त्रिनेत्रभुजपालितैः

sandhyāmupāsya deveśaḥ parinṛtya yathecchayā / yuddhāya dānavaiḥ sarvaistrinetrabhujapālitaiḥ

हिन्दी अर्थ

प्रादात् खटकटां चान्यां सर्वपापविमोचनः। संतानिकां विकलिकां क्रमश्चत्वरवासिनीम् कार्तिकेयका जन्म, उनके छः मुख और चतुर्मूर्ति होनेका हेतु, उनका दण्डादिका पाना

English

dTO TOOT ^IdT: TOdTTirT TOfa:ll^ll

अध्याय ४३

श्लोक 75

ततो ऽमरगणाः सर्वैस्त्रिनेत्रभुजपालितैः ।दानवा निर्जिताः सर्वे बलिभिर्भयवर्जितैः

tato 'maragaṇāḥ sarvaistrinetrabhujapālitaiḥ / dānavā nirjitāḥ sarve balibhirbhayavarjitaiḥ

हिन्दी अर्थ

सुवेणुने सुप्रसादको और ओधघवतीने जिष्णुको प्रदान किया। विशालाने यज्ञबाहुको दिया! इस प्रकार इन सरस्वती आदि नदियोंने अनेक गणोंको दिया। कुटिलाने अपने पुत्र (उन)-को कराल, सितकेश,

English

The banyan tree with its vast trunk has existed just at the middle of it. Brahmin, Ksatriya and Vais'ya varnas came out from that tree and Sudras originated for the service of Dvijas. Then the great hermits Sanaka etc. originated from the mind of inexpressible and unborn Brahma.

अध्याय ४३

श्लोक 76

स्वबलं निर्जितं दृष्ट्वा मत्वाजेयं च शङ्कम् ।अन्धकः सुन्दमाहूय इदं वचनमब्रीत्

svabalaṃ nirjitaṃ dṛṣṭvā matvājeyaṃ ca śaṅkam / andhakaḥ sundamāhūya idaṃ vacanamabrīt

हिन्दी अर्थ

कृष्णकेश, जटाधर, मेघनाद, चतुर्दष्ट, विद्युज्जिह् दशानन, सोमाप्यायन एवं उग्र देवयाजी नामके दस गणोंको दिया। कृत्तिकाओंने अपने पुत्रको हंसास्य, अनुचरोंको प्रदान किया

English

TJdfljTOdTOd VdldilM'fd dtdd:l stot to % M^iuddls^ra^ii^oii

अध्याय ४३

श्लोक 77

सुन्द भ्रातासि मे वीर विश्वस्यः सर्ववस्तुषु ।तद्वदाम्यद्य यद्वाक्यं तच्छ्रुत्वा यत्क्षमं कुरु

sunda bhrātāsi me vīra viśvasyaḥ sarvavastuṣu / tadvadāmyadya yadvākyaṃ tacchrutvā yatkṣamaṃ kuru

हिन्दी अर्थ

ऋषियोंने स्कन्दको स्थाणुजङ्घ, कुम्भवक्त्र, लोहजङ्घ, महानन और पिण्डाकार-इन पाँच अनुचरोंको दिया।

English

The seven hermits were originated from Brahma so doing efforts for creation. The all became Prajapati.

अध्याय ४३

श्लोक 78

दुर्जयो ऽसौ रणपटुर्धर्मात्मा कारणान्तरैः ।समासते हि हृदये पद्माक्षी शैलनन्दिनी

durjayo 'sau raṇapaṭurdharmātmā kāraṇāntaraiḥ / samāsate hi hṛdaye padmākṣī śailanandinī

हिन्दी अर्थ

चाषवक्त्र तथा जम्बूक नामके अनुचरोंको दिया। गयाशिरने चक्रतीर्थ, सुचक्राक्ष तथा मकराक्षको और कनखलने पञ्चशिख नामके अपने गणोंको दिया। वाजिशिरने बन्धुदत्त, पुष्कर और बाहुशालको तथा मानसने सर्वौजस, माहिषक और पिङ्गलको दिया

English

When Brahma under the influence of doing creation again thought for it, Balkhilyas the hermits having great perseverance originated.

अध्याय ४३

श्लोक 79

तदुत्तिष्ठस्व गच्छामो यत्रास्ते चारुहासिनी ।तत्रैनां मोहयिष्यामि हररूपेण दानव

taduttiṣṭhasva gacchāmo yatrāste cāruhāsinī / tatraināṃ mohayiṣyāmi hararūpeṇa dānava

हिन्दी अर्थ

औशनसने रुद्रको प्रदान किया तथा अन्योंने मातृकाओंको दिया। सोमतीर्थने वसुदामाको और प्रभासने नन्दिनीको तथा उदपानने इन्द्रतीर्थ, विशोका और घनस्वनाको अर्पित किया। सप्तसारस्वतने गीतप्रिया,

English

gqgn^j^t : ^rfcraf% sj&ppiii^ii

अध्याय ४३

श्लोक 80

भवान् भवस्यानुचरो भव नन्दी गणेश्वरः ।ततो गत्वाथ भुक्त्वा तां जेष्यामि प्रमथान् सुरान्

bhavān bhavasyānucaro bhava nandī gaṇeśvaraḥ / tato gatvātha bhuktvā tāṃ jeṣyāmi pramathān surān

हिन्दी अर्थ

माधवी, तीर्थनेमि एवं स्मितानना नामकी चार अद्भुत मातृकाओंको प्रदान किया। नागतीर्थने एकचूडा, कुरुक्षेत्र और पलासदाको दिया। ब्रह्मयोनिने चण्डशिलाको, त्रिविष्टपने भद्रकालीको तथा चरणपाबनने चौण्डी, भैण्डी तथा योगभैण्डीको दिया

English

They always do bath daily, worship gods, observe several fasts and put command on their body through penance.

अध्याय ४३

श्लोक 81

इत्वेवमुक्ते वचने बाढं सुन्दो ऽम्भयभाषत ।समजायत शैलादिरन्धकः शङ्करो ऽप्यभूत्

itvevamukte vacane bāḍhaṃ sundo 'mbhayabhāṣata / samajāyata śailādirandhakaḥ śaṅkaro 'pyabhūt

हिन्दी अर्थ

महीने सोपानीयाको, मानसहदने शालिकाको एवं बदरिकाश्रमने शतघण्टा, शतानन्दा, उलूखलमेखला, पद्मावती और माधवीको प्रदान किया। केदारतीर्थने सुषमा, एकचूडा, धमधमादेवी, उत्क्राथनी तथा वेदमित्रा

English

c*RJHV!M farfiRT 3ifH$hraMpl<ll:i

अध्याय ४३

श्लोक 82

नन्दिरुद्रौ ततो भूत्वा महासुरचमूपती ।संप्राप्तौ मन्दरगिरिं प्रहारैः क्षतविग्रहौ

nandirudrau tato bhūtvā mahāsuracamūpatī / saṃprāptau mandaragiriṃ prahāraiḥ kṣatavigrahau

हिन्दी अर्थ

नामक मातृकाओंको दिया। रुद्रमहालयने सुनक्षत्रा, कद्रूला, सुप्रभाता, सुमङ्गला, देवमित्रा और चित्रसेनाको दिया। प्रयागने कोटरा, ऊर्ध्ववेणी, श्रीमती, बहुपुत्रिका, पलिता तथा कमलाक्षी नामकी मातृकाओंको अर्पित किया। सर्वपापविमोचनने सूपला, मधुकुम्भा, ख्याति, दहदहा, परा और खटकटाको समर्पित किया। क्रमने सन्तानिका, विकलिका और चत्वरवासिनीको प्रदान किया

English

They exploit their body for arranging Agnihotra, follow Vanaprastha rite and do strict penance.

अध्याय ४३

श्लोक 83

हस्तमालम्ब्य सुन्दस्य अन्धको हरमन्दिरम् ।विवेश निर्विशङ्केन चित्तेनासुरसत्तमः

hastamālambya sundasya andhako haramandiram / viveśa nirviśaṅkena cittenāsurasattamaḥ

हिन्दी अर्थ

जलेश्वरीं कुक्कुटिकां सुदामां लोहमेखलाम्। 'वपुष्मत्युल्मुकाक्षी च कोकनामा महाशनी । रौद्रा कर्कटिका तुण्डा श्रेततीर्थो ददौ त्विमाः

English

%ZT spfqpi f^TT gpr fTffd tn: I

अध्याय ४३

श्लोक 84

ततो गिरिसुता दूरादायान्तं वीक्ष्य चान्धकम् ।महेश्वरवपुश्छ्न्नं प्रहारैर्जर्जरच्छविम्

tato girisutā dūrādāyāntaṃ vīkṣya cāndhakam / maheśvaravapuśchnnaṃ prahārairjarjaracchavim

हिन्दी अर्थ

मालां हरिः शूलधरः पताकां कण्ठे च हारं मघवानुरस्तः श्वेततीर्थने तो जलेश्वरी, कुवकुटिका, सुदामा, लोहमेखला, वपुष्मती, उल्मुकाक्षी, कोकनामा, महाशनी, रौद्रा, कर्कटिका और तुण्डा-इन अनुचरिंयोंको दिया। इन भूतों, गणों और मातृकाओंको देखकर विनता-

English

smwwfi l 3 *r gcqfw yreft:ti**ti

अध्याय ४३

श्लोक 85

सुन्दं शैलादिरूपस्थमवष्टम्याविशत् ततः ।तं दृष्ट्वा मालिनीं प्राह सुयशां विजयां जयाम्

sundaṃ śailādirūpasthamavaṣṭamyāviśat tataḥ / taṃ dṛṣṭvā mālinīṃ prāha suyaśāṃ vijayāṃ jayām

हिन्दी अर्थ

पुत्र महात्मा गरुड्ने अपने पुत्र महाबेगशाली मयूरको समर्पित किया और अरुणने अपने पुत्र ताम्रचूडको प्रदान कर दिया। अग्निने शक्ति, पार्वतीने वस्त्र, बृहस्पतिने दण्ड, उस कुटिलाने कमण्डलु, विष्णुने

English

They sat on penance for several thousand divine years and became weakest in body and mere breathing was remained with them but god Sankara took no notice of them. He did

अध्याय ४३

श्लोक 86

जये पश्यस्व देवस्य मदर्थे विग्रहं कृतम् ।शत्रुभिर्दानववरैस्तदुत्तिष्ठस्व सत्वरम्

jaye paśyasva devasya madarthe vigrahaṃ kṛtam / śatrubhirdānavavaraistaduttiṣṭhasva satvaram

हिन्दी अर्थ

माला, शङ्करने पताका तथा इन्द्रने अपने हृदयका हार कार्तिकेयके कण्ठमें अर्पित कर दिया। गणोंसे युक्त, मातृकाओंसे अनुसरित, मयूरपर बैठे एवं श्रेष्ठ शक्तिको हाथमें लिये हुए महाशरीरधारी वे कुमार (कार्तिकेय) शङ्करके द्वारा सैन्याधिपतिके पदपर अभिषिक्त होकर (और उपहार पाकर) सूर्यके समान प्रकाशित

English

rRT: *|<rH RfffiT 3TO 7T? yfaiT: I

अध्याय ४३

श्लोक 87

घृतमानय पौराणं बीजिकां लवणं दधि ।व्रणभङ्गं करिष्यामि स्वयमेव पिनाकिनः

ghṛtamānaya paurāṇaṃ bījikāṃ lavaṇaṃ dadhi / vraṇabhaṅgaṃ kariṣyāmi svayameva pinākinaḥ

हिन्दी अर्थ

सेनापतिपदपर नियुक्त कार्तिकेयके लिये ऋषियोंद्वारा स्वस्त्ययन, तारक-विजयके लिये प्रस्थान, पातालकेतुका वृत्तान्त, तारक महिषासुर-वध तथा सुचक्राक्षको वर

English

a iranypipfar ^fenriumi

अध्याय ४३

श्लोक 88

कुरुष्व शीघ्रं सुयशे स्वभर्तुर्व्रणनाशनम् ।इत्येवमुक्त्वा वचनं समत्थाय वरासनात्

kuruṣva śīghraṃ suyaśe svabharturvraṇanāśanam / ityevamuktvā vacanaṃ samatthāya varāsanāt

हिन्दी अर्थ

सेनापत्येऽभिषिक्तस्तु कुमारो हैवतैरथ। प्रणिपत्य भवं भक्त्या गिरिजां पावकं शुचिम् षट् कृत्तिकाश्च शिरसा प्रणम्य कुटिलामपि। ब्रह्माणं च नमस्कृत्य इदं वचनमब्रवीत्

English

irara tret nn Rriy^Kt qfrnm %d<ibcHHnqi :ii , *5ii <FFtyr$ra ^sr firaft fra ^ ^rr^i f% ^i4%RnPRT

अध्याय ४३

श्लोक 89

अभ्युद्ययौ तदा भक्त्वा मन्यमाना वृषध्वजम् ।शूलपाणेस्ततः स्थित्वा रूपं चिह्नानि यत्नतः

abhyudyayau tadā bhaktvā manyamānā vṛṣadhvajam / śūlapāṇestataḥ sthitvā rūpaṃ cihnāni yatnataḥ

हिन्दी अर्थ

नमोऽस्तु भवतां देवा ओं नमोऽस्तु तपोधनाः।

English

^mnftr ^ran^fwfftrrrT:i

अध्याय ४३

श्लोक 90

अन्वियेष ततो ब्रह्मन्नोभौ पार्श्वस्थितौ वृषौ ।सा ज्ञात्वा दानवं रौद्रं मायाच्छादितविग्रह्म्

anviyeṣa tato brahmannobhau pārśvasthitau vṛṣau / sā jñātvā dānavaṃ raudraṃ māyācchāditavigrahm

हिन्दी अर्थ

पुलस्त्यजी बोले जब शङ्कर एवं देवताओंने भक्तिपूर्वक शङ्कर, पार्वती और पवित्र अग्निको प्रणाम किया। उसके बाद छः कृत्तिकाओं एवं कुरिलाको भी सिर झुकाकर प्रणाम करके ब्रह्माको नमस्कार कर यह वचन कहा

English

dTtpti grri ^ojit: Hwi<6l ml?raT«ith:i

अध्याय ४३

श्लोक 91

अपयानं तदा चक्रे गिरिराजसुता मुने ।देव्याश्चिन्तितमाज्ञाय सुन्दं त्यक्त्वान्धको ऽसुरः

apayānaṃ tadā cakre girirājasutā mune / devyāścintitamājñāya sundaṃ tyaktvāndhako 'suraḥ

हिन्दी अर्थ

कुमारने कहा-- देवताओ! आपलोगोंको नमस्कार है। तपोधनो! आपलोगोंको ओंकारके साथ नमस्कार (' ॐ नमः”) है। आपलोगोंकी अनुकम्पासे मैं महिष एवं तारक दोनों शत्रुओपर विजय प्राप्त करूँगा।

English

After a long lapse of period, god Sankara was on his tour with Uma through the ether. The goddess with great resolutions saw them and said to Sankara- "These hermits are bearing great pains in this forest of Devadara tree. 0 god! be graceful to me and remove their pains. 0 god! I ask you if the evils committed by them are so large in account that they could not attain purity even when they exploited their body to the extent that mere bones and some flesh has been left with them." God Sankara laughed at it and said

अध्याय ४३

श्लोक 92

समाद्रवत वेगेन हरकान्तां विभावरीम् ।समाद्रवत दैतेयो येन मार्गेण सागमत्

samādravata vegena harakāntāṃ vibhāvarīm / samādravata daiteyo yena mārgeṇa sāgamat

हिन्दी अर्थ

शिशुरस्मि न जानामि वक्तुं किंचन देवता: । दीयतां ब्रह्मणा सार्द्धमनुज्ञा मम साम्प्रतम् शङ्करोऽपि सुतस्त्रेहात् समुत्थाय प्रजापतिम्। आदाय दक्षिणे पाणौ स्कन्दान्तिकमुपागतम्

English

Rt'JtHp) et>m^etf3ldl:ll'*J<?ll

अध्याय ४३

श्लोक 93

अपस्कारान्तरं भञ्जन् पादप्लुतिभिराकुलः ।तमापतन्तं दृष्ट्वैव गिरिजा प्राद्रवद् भयात्

apaskārāntaraṃ bhañjan pādaplutibhirākulaḥ / tamāpatantaṃ dṛṣṭvaiva girijā prādravad bhayāt

हिन्दी अर्थ

वन्दस्व चरणौ दिव्यौ विष्णोर्लोकनमस्कृतौ

English

Sri Mahadeva said- O goddess! The position of religion is deepest and you are still alien to it. These people neither know the essence of religion nor are they free from Kama (acts or appeal for sex).

अध्याय ४३

श्लोक 94

गृहं त्यक्त्वा हयुपवनं सखीभिः सहिता तदा ।तत्राप्यनुजगामासौ मदान्धो मुनिपुङ्गव

gṛhaṃ tyaktvā hayupavanaṃ sakhībhiḥ sahitā tadā / tatrāpyanujagāmāsau madāndho munipuṅgava

हिन्दी अर्थ

ततो विहस्याह गुहः कोऽयं मातर्वदस्व माम्। यस्यादरात् प्रणामोऽयं क्रियते मद्विधेर्जनैः तं माता प्राह वचनं कृते कर्मणि पदाभूः। वक्ष्यते तब योऽयं हि महात्मा गरुडध्वजः

English

3 ri ftfflJi: Iran ij5f3FT:i

अध्याय ४३

श्लोक 95

तथापि न शशषैनं तपसो गोपनाय तु ।तद्भयादाविशद् गौरी श्वेतार्ककुसुमं शुचि

tathāpi na śaśaṣainaṃ tapaso gopanāya tu / tadbhayādāviśad gaurī śvetārkakusumaṃ śuci

हिन्दी अर्थ

केवलं त्विह मां देवस्त्वत्पिता प्राह शङ्करः। नान्यः परतरोऽस्माद्धि वयमन्ये च देहिनः

English

Ij.dt^ I SflcflVfi T=rr fret yifwdPf imoii

अध्याय ४३

श्लोक 96

विजडयाद्या महागुल्मे संप्रयाता लयं मुने ।नष्टायामाथ पार्वत्यां भूयो हैरण्यलोचनिः

vijaḍayādyā mahāgulme saṃprayātā layaṃ mune / naṣṭāyāmātha pārvatyāṃ bhūyo hairaṇyalocaniḥ

हिन्दी अर्थ

कृताञ्जलिपुटं स्कन्दं भगवान् भूतभावनः । कृत्वा स्वस्त्ययनं देवो ह्यनुज्ञां प्रददौ ततः शृणु स्वस्त्ययनं पुण्यं यत्प्राह भगवान् हरिः। स्कन्दस्य विजयार्थाय महिषस्य वधाय च

English

¥ ffffR 39^? ^ fadW limqil

अध्याय ४३

श्लोक 97

सुन्दं हस्ते समादाय स्वसैन्यं पुनरागमत् ।अन्धके पुरायाते स्वबलं मुनिसत्तम

sundaṃ haste samādāya svasainyaṃ punarāgamat / andhake purāyāte svabalaṃ munisattama

हिन्दी अर्थ

स्वस्ति ते कुरुतां ब्रह्मा पद्मयोनी रजोगुणः। स्वस्ति चक्राङ्कितकरो विष्णुस्ते विदधात्वजः

English

Anger is also affiliated with them. These are merely stupid. The goddess said- "Don't say these words specially for these people who are seated on long penance. O god! Please make your appearance before them. I am in surprise at your statement used for them. Sankara laughed at this and said

अध्याय ४३

श्लोक 98

प्रावर्तत महायुद्धं प्रमथासुरयोरथ ।ततो ऽमरगणश्रेष्ठो विष्णुश्चक्रगदाधरः

prāvartata mahāyuddhaṃ pramathāsurayoratha / tato 'maragaṇaśreṣṭho viṣṇuścakragadādharaḥ

हिन्दी अर्थ

स्वस्ति ते शङ्करो भवत्या सपत्नीको वृषध्वजः। पावकः स्वस्ति तुभ्यं च करोतु शिखिवाहन दिवाकरः स्वस्ति करोतु तुभ्यं

English

% 4jiwifa -zdfo TfftjrraT:i

अध्याय ४३

श्लोक 99

निजघानासुरबलं शङ्करप्रियकाम्यया ।शार्ङ्गचापच्युतैर्बाणैः संस्यूता दानवर्षभाः

nijaghānāsurabalaṃ śaṅkarapriyakāmyayā / śārṅgacāpacyutairbāṇaiḥ saṃsyūtā dānavarṣabhāḥ

हिन्दी अर्थ

काव्यः सदा स्वस्ति करोतु तुभ्यं शनैश्चरः स्वस्त्ययनं करोतु

English

Stop here. I play some art where these hermits are seated in gross penance.

अध्याय ४३

श्लोक 100

पञ्च षट् सप्त चाष्टौ वा व्रघ्नपादैर्घना इव ।गदया कांश्चिदवधीत् चक्रेणान्यान् जनार्दनः

pañca ṣaṭ sapta cāṣṭau vā vraghnapādairghanā iva / gadayā kāṃścidavadhīt cakreṇānyān janārdanaḥ

हिन्दी अर्थ

सेनापतिपदपर नियुक्त कार्तिकेयके लिये ऋषियोंद्वारा स्वस्त्ययन, महिषासुर-वध ब्रह्माके सहित आपलोग इस समय मुझे अनुमति दें। महात्मा कुमारके इस प्रकार कहनेपर सभी देवता निडर होकर उनका मुख देखने लगे। भगवान् शङ्कर पुत्रके स्नेहवश उठे और ब्रह्माको अपने दाहिने हाथसे पकड़कर

English

^ ^ 'jra: ^ diiacHla^HI: fwr:l

अध्याय ४३

श्लोक 101

खङ्गेन च चकर्तान्यान् दृष्ट्यान्यान् भस्मासाद्व्यधात् ।हलेनाकृष्य चैवान्यान् मु सलेन व्यचूर्णयत्

khaṅgena ca cakartānyān dṛṣṭyānyān bhasmāsādvyadhāt / halenākṛṣya caivānyān mu salena vyacūrṇayat

हिन्दी अर्थ

स्कन्दके समीप ले आये। उसके बाद उमाने पुत्रसे कहा शत्रुको मारनेवाले! आओ! आओ! संसारसे वन्दित विष्णुके दिव्य चरणोंको प्रणाम करो॥ ३--७॥

English

The goddess felt happiness and said- "You should go surely to the place where those living hermits well known to Agnihotra, perseverance and who are this time looking as wood and lump of clay.

अध्याय ४३

श्लोक 102

गरुडः पक्षपाताभ्यां तुण्डेनाप्युरसाहनत् ।स चादिपुरुषो धाता पुराणाः प्रपितामहः

garuḍaḥ pakṣapātābhyāṃ tuṇḍenāpyurasāhanat / sa cādipuruṣo dhātā purāṇāḥ prapitāmahaḥ

हिन्दी अर्थ

उसके बाद कार्तिकेयने हँसकर कहा -हे माता! मुझे स्पष्ट बतलाओ कि ये कौन हैं, जिन्हें हमारे-जैसे (अन्य) व्यक्ति भी प्रेमपूर्वक प्रणाम करते हैं? माताने उनसे कहा --ये महात्मा गरुडध्वज कौन हैं, यह तुम्हें कार्य कर लेनेपर ब्रह्मा ही बतलायेंगे। तुम्हारे पिता शङ्करदेवने मुझसे केवल यही बतलाया कि इनसे बढ़कर हमलोग या अन्य कोई शरीरधारी नहीं है। पार्वतीके स्पष्टतः कहनेपर कार्तिकेयने जनार्दनको प्रणाम

English

3TT5P^ TRfeira^lt TfTfaT TTfwi

अध्याय ४३

श्लोक 103

भ्रामयन् विपुलं पद्ममभ्यषिञ्चत वारिणा ।संस्पृष्टा ब्रह्मतोयेन सर्वतीर्थमयेन हि

bhrāmayan vipulaṃ padmamabhyaṣiñcata vāriṇā / saṃspṛṣṭā brahmatoyena sarvatīrthamayena hi

हिन्दी अर्थ

किया एवं दोनों हाथोंको जोड़कर वे खड़े हो गये और भगवान् अच्युतसे आज्ञा माँगने लगे। लोकस्नष्टा भगवान् विष्णुने हाथ जोड़े हुए स्कन्दका स्वस्त्ययन कर उन्हें आज्ञा दी

English

f*K$lt dctshcKcJI (pESrRTSFSPT TTafhm^ll

अध्याय ४३

श्लोक 104

गणामरगणाश्चासन् नवनागशताधिकाः ।दानवास्तेन तोयेन संस्पृष्टाश्चाघहारिणा

gaṇāmaragaṇāścāsan navanāgaśatādhikāḥ / dānavāstena toyena saṃspṛṣṭāścāghahāriṇā

हिन्दी अर्थ

नारदने कहा विप्रर्षे! गरुडध्वज विष्णुने मयूरध्वज कार्तिकेयके लिये जिस पवित्र स्वस्त्ययनका पाठ किया, उसे आप मुझसे कहें पुलस्त्यजी बोले (नारदजी!) स्कन्दकी विजय एवं महिषके वधके लिये भगवान् विष्णुद्वारा कहे गये मङ्गलमय स्वस्तिवाचन -स्वस्त्ययनको सुनिये। (विष्णुने जो स्वस्त्ययन-पाठ किया, वह इस प्रकार है)

English

God Sankara converted his body into an ascetic naked fully in body and young. He started asking for alms serially from one asrama to another.

अध्याय ४३

श्लोक 105

सवाहनाः क्षयं जग्मुः कुलिशेनेव पर्वताः ।दृष्ट्वा ब्रह्महरी युद्धे घातयन्तौ महासुरान्

savāhanāḥ kṣayaṃ jagmuḥ kuliśeneva parvatāḥ / dṛṣṭvā brahmaharī yuddhe ghātayantau mahāsurān

हिन्दी अर्थ

रजोगुणसे सम्पन्न कमलयोनि ब्रह्मा तुम्हारा कल्याण करें। हाथमें चक्र धारण करनेवाले अजन्मा विष्णु तुम्हारा मङ्गल करें। पत्रीसहित वृषध्वज शङ्कर प्रेमपूर्वक तुम्हारा मङ्गल करें। मयूरवाहन! अग्निदेव तुम्हारा

English

g fa#cwwmg g #fogt n^gnf^HiH t ■gg%g>*g*n%g g*g wtoT #f|gT:imgii #f: gTW? g# #t wnr fo§jgrq;i twtfafa yickyi -gn -ijctoh ^|im<iii ijpn ft^nj^wrw gPre t fbH :i

अध्याय ४३

श्लोक 106

शतक्रतुश्च दुद्राव प्रगृह्य कुलिशं बली ।तमापतन्तं संप्रेक्ष्य बलो दानवसत्तमः

śatakratuśca dudrāva pragṛhya kuliśaṃ balī / tamāpatantaṃ saṃprekṣya balo dānavasattamaḥ

हिन्दी अर्थ

कल्याण करें। सूर्य तुम्हारा मङ्गल करें, भौमसहित सोम तथा बुधसहित बृहस्पति तुम्हारा मङ्गल करें। शुक्र सहैव तुम्हारा मङ्गल करें तथा शनैश्वर तुम्हारा मङ्गल करें॥ १४--१७॥ दिवाकराः शूलधरा महेश्वरा: ।

English

The wives of those Brahma followers attracted towards him, were surprised and with a curiosity to see him more closely they said to each other- "Come with us. We should see this beggar." They collected the fruits and roots, went to the beggar and said- "receive alms." He also stretched the alms pot (kapala) in honour before them.

अध्याय ४३

श्लोक 107

मुक्त्वा देवं गदापाणिं विमानस्थं च पद्मजम् ।शक्रमेवाद्रवद् योद्धुं मुष्टिमुद्याम्य नारद ।बलवान् दानवपतिरजेयो देवदानवै

muktvā devaṃ gadāpāṇiṃ vimānasthaṃ ca padmajam / śakramevādravad yoddhuṃ muṣṭimudyāmya nārada / balavān dānavapatirajeyo devadānavai

हिन्दी अर्थ

स्वस्ति द्विपादिकेभ्यस्ते चतुष्पादेभ्य एव च। स्वस्ति ते बहुपादेभ्यस्त्वपादेभ्योऽप्यनामयम्

English

g# ^rcicj gf fa# MUripHI: ^Hip :ll^o||

अध्याय ४३

श्लोक 108

तमापतन्तं त्रिदशेश्वरस्तु दोष्णां सहस्रेण यताबलेन ।वज्रं परिभ्राम्य बलस्य मूर्ध्नि चिक्षेप हे मूढ हतो ऽस्युदीर्य

tamāpatantaṃ tridaśeśvarastu doṣṇāṃ sahasreṇa yatābalena / vajraṃ paribhrāmya balasya mūrdhni cikṣepa he mūḍha hato 'syudīrya

हिन्दी अर्थ

प्रतीचीमुत्तरां वायुः शिवः पूर्वोत्तरामपि वाराहोऽम्लुनिधौ पातु दुर्गे पातु नृकेसरी।

English

Parvatl was seeing lord Sankara saying O native of this place of penance! give alms. May all you see welfare. He was laughing with words. Some of the ladies asked him as they were incited for

अध्याय ४३

श्लोक 109

स तस्य मूर्ध्नि प्रवरो ऽपि वज्रो जगाम तूर्णं हि सहस्रधा मुने ।बलो ऽद्रवद् देवपतिश्च भीतः पराङ्मुखो ऽभृत् समरान्महर्षे

sa tasya mūrdhni pravaro 'pi vajro jagāma tūrṇaṃ hi sahasradhā mune / balo 'dravad devapatiśca bhītaḥ parāṅmukho 'bhṛt samarānmaharṣe

हिन्दी अर्थ

अनुजग्मुः कुमारं ते कामरूपा विहङ्गमाः

English

gits# gig ggfafagggr giro #z#i gg g#g faifg gqMiRifg#ga:i ggi# gig# ^at #t gfa tRrfai 3. gi

अध्याय ४३

श्लोक 110

तं चापि जम्भो विमुखं निरीक्ष्य भूत्वाग्रतः प्राह न युक्तमेतत् ।तिष्ठस्व राजासि चराचरस्य न राजधर्मे गदितं पलायनम्

taṃ cāpi jambho vimukhaṃ nirīkṣya bhūtvāgrataḥ prāha na yuktametat / tiṣṭhasva rājāsi carācarasya na rājadharme gaditaṃ palāyanam

हिन्दी अर्थ

समं स्कन्देन बलिना हन्तुकामा महासुरान् मरीचि, अत्रि, पुलह, पुलस्त्य, क्रतु, वसिष्ठ, भृगु, अङ्गिरा, मार्कण्डेय -ये ऋषि तुम्हारा मङ्गल करें। सप्तर्षिगण तुम्हारा सदा मङ्गल करें। विश्वेदेव,

English

The ladies said- O ascetic! tell us the purpose for observing so hard penance at the youth and that too with a naked body. If you sanction, we can offer ourselves for

अध्याय ४३

श्लोक 111

सहस्राक्षो जम्भवाक्यं निखम्य भीतस्तूर्णं विष्णुमागान्महर्षे ।उपेत्याह श्रूयतां वाक्यमीश त्वं मे नाथो भूतभव्येश विष्णो

sahasrākṣo jambhavākyaṃ nikhamya bhītastūrṇaṃ viṣṇumāgānmaharṣe / upetyāha śrūyatāṃ vākyamīśa tvaṃ me nātho bhūtabhavyeśa viṣṇo

हिन्दी अर्थ

तत्परतासे सदा तुम्हारा मङ्गल करें। नाग, पक्षी, नदियाँ, सरोबर, तीर्थ, पवित्र देवस्थान, समुद्र, महाबलशाली भूतगण तथा विनायकगण सदा तत्पर होकर तुम्हारा मङ्गल करें। दो पैरवालों एवं चार पैरवालोंसे तुम्हारा

English

^ggfcj^grg Pdifas Tpg ggji#n^ii

अध्याय ४३

श्लोक 112

जम्भस्तर्जयते ऽत्यर्थं मां निरायुधमीक्ष्य हि ।आयुधं देहि भगवान् त्वामहं शरणं गतः

jambhastarjayate 'tyarthaṃ māṃ nirāyudhamīkṣya hi / āyudhaṃ dehi bhagavān tvāmahaṃ śaraṇaṃ gataḥ

हिन्दी अर्थ

बिना पैरवालोंसे तुम्हारी स्वस्थता बनी रहे-तुम नीरोग बने रहो वज्र धारण करनेवाले (इन्द्र) पूर्व दिशाकी, दण्डनायक (यम) दक्षिण दिशाकी, पाशधारी (वरुण) पश्चिम दिशाकी तथा चन्द्रमा उत्तर दिशाकी रक्षा करें। अग्नि अग्नि (पूर्व-दक्षिण)-कोणकी, कुबेर नेर्क्रत्य

English

Sankara laughed again and said- "The purpose of this penance cannot be told as it is mysterious enough."

अध्याय ४३

श्लोक 113

तमुवाच हरिः शक्रं त्यक्त्वा दर्प व्रजाधुना ।प्रार्थयस्वायुधं वह्निं स ते दास्यत्यसंशयम्

tamuvāca hariḥ śakraṃ tyaktvā darpa vrajādhunā / prārthayasvāyudhaṃ vahniṃ sa te dāsyatyasaṃśayam

हिन्दी अर्थ

(दक्षिण-पश्चिम)-कोणकी, वायुदेव वायव्य (पश्चिम उत्तर)-कोणकी और शिव ईशान (उत्तर-पूर्व)-कोणकी (रक्षा करें) ऊपरकी ओर धुव, नीचेकी ओर पृथ्वीको धारण करनेवाले शेषनाग एवं बीचके स्थानोंमें मुसल,

English

««setl gg gg oitssisit g faa# agg gggr gw ?fg gigr gfasjsru 5311

अध्याय ४३

श्लोक 114

जनार्दनवचः श्रुत्वा शक्रस्त्वरितविक्रमः ।शरणं पावकमगादिदं चोवाच नारद

janārdanavacaḥ śrutvā śakrastvaritavikramaḥ / śaraṇaṃ pāvakamagādidaṃ covāca nārada

हिन्दी अर्थ

हल, चक्र तथा धनुष धारण करनेवाले भगवान् विष्णु रक्षा करें। समुद्रमें वाराह, दुर्गम स्थानमें नरसिंह तथा सभी ओरसे सामवेदके ध्वनि-रूप श्रीमान् श्रीलक्ष्मीकान्त माधव तुम्हारी रक्षा करें॥ २२--२५॥ पुलस्त्यजी बोले-- इस प्रकार स्वस्त्ययन सम्पन्न हो जानेपर शक्ति धारण करनेवाले सेनापति कार्तिकेयजी सभी देवताओंको प्रणामकर भूतलसे आकाशकी ओर उड़ चले। प्रसन्न होकर देवताओंने जिन गणोंको गुहके

English

O lucky woman! This mystery cannot be explained in the presence of several people. Take this thing as explanation and go on your way to home.

अध्याय ४३

श्लोक 115

शक्र उवाच ।निघ्ननो मेबलं वज्रं कृशानो शतधा गतम् ।एष चाहूयते जम्भस्तस्माद्देह्यायुधं मम

śakra uvāca / nighnano mebalaṃ vajraṃ kṛśāno śatadhā gatam / eṣa cāhūyate jambhastasmāddehyāyudhaṃ mama

हिन्दी अर्थ

लिये दिया था, उन इच्छानुकूल रूप धारण करनेवाले सभी गणोंने पक्षीका रूप धारण कर कुमारका अनुगमन किया। सभी माताएँ भी पराक्रमी स्कन्दके साथ महान् असुरोंके वधके लिये आकाशमें उड़ चलीं। उसके बाद

English

ijetjffiHaqi gT: n*fg<gg i -gfggi

अध्याय ४३

श्लोक 116

पुलस्त्य उवाच ।तमाह भगवान् वह्निः प्रीतो ऽसि तव वासव ।यत्त्वं दर्प परित्यज्य मामेव शरणं गतः

pulastya uvāca / tamāha bhagavān vahniḥ prīto 'si tava vāsava / yattvaṃ darpa parityajya māmeva śaraṇaṃ gataḥ

हिन्दी अर्थ

बहुत दूर जानेपर स्कन्दने गणोंसे कहा-महापराक्रमियो! तुमलोग शीघ्र ही पृथ्वीपर उतर जाओ आरात् पतन्तस्तद्देशं नादं चक्रुर्भयंकरम्

English

grfa % gfauiiul g: gfcjg* gfnii^-Kii

अध्याय ४३

श्लोक 117

इत्युच्चार्य स्वशक्त्यास्तु शक्तिं निष्क्राम्य भावतः ।प्रादादिन्द्राय भगवान् रोचमानो दिवं गतः

ityuccārya svaśaktyāstu śaktiṃ niṣkrāmya bhāvataḥ / prādādindrāya bhagavān rocamāno divaṃ gataḥ

हिन्दी अर्थ

श्रुतः स महिषेणाथ तारकेण च धीमता। विरोचनेन जम्भेन कुजम्भेनासुरेण च

English

They replied immediately- O sage! As we are curious enough to know, we shall go at solitude with you.

अध्याय ४३

श्लोक 118

तामादाय तदा शक्तिं शतघण्टां सुदारुणाम् ।प्रत्युद्ययौ तदा जम्भं हन्तुकामो ऽरिमर्दनः

tāmādāya tadā śaktiṃ śataghaṇṭāṃ sudāruṇām / pratyudyayau tadā jambhaṃ hantukāmo 'rimardanaḥ

हिन्दी अर्थ

ते समेत्यान्धकेनैव समं दानवपुङ्गवाः। मन्त्रयामासुरुद्विग्ास्तं शब्दं प्रति नारद पातालकेतुर्दत्येन्द्रः सम्प्राप्तोऽथ रसातलम्

English

gjifegst# gg^ggf «d§*giH>giw«iiii^mi

अध्याय ४३

श्लोक 119

तेनातियशसा दैत्यः सहसैवाभिसंद्रुतः ।क्रोधं चक्रे तदा जम्भ निजघान गजाधिपम्

tenātiyaśasā daityaḥ sahasaivābhisaṃdrutaḥ / krodhaṃ cakre tadā jambha nijaghāna gajādhipam

हिन्दी अर्थ

अब्रवीद् वचनं दीनं समभ्येत्यान्धकासुरम्

English

3iwg g#r% snm ggfaufan ^ u

अध्याय ४३

श्लोक 120

जम्भमुष्टिनिपातेन भग्नकुम्भकटो गजः ।निपपात यथा शैलः शक्रवज्रहतः पुरा

jambhamuṣṭinipātena bhagnakumbhakaṭo gajaḥ / nipapāta yathā śailaḥ śakravajrahataḥ purā

हिन्दी अर्थ

गतोऽहमासं हैत्येन्द्र गालवस्याश्रमं प्रति। तं विध्वंसयितुं यत्नं समारब्धं बलान्मया यावत्सूकररूपेण प्रविशामि तमाश्रमम्। न जाने तं नरं राजन् येन मे प्रहितः शरः

English

With these words they all simultaneously gripped his body through arms, some were hung on to his neck, some others gripped him in arms, some gripped his pubic, some began pulling his hair, some wrapped with his loin and certain others caught his feet.

अध्याय ४३

श्लोक 121

पतमानाद् द्विपेन्द्रात् तु शक्रश्चाप्लुत्य वेगवान् ।त्यक्त्वैव मन्दरगिरिं पपात वसुधातले

patamānād dvipendrāt tu śakraścāplutya vegavān / tyaktvaiva mandaragiriṃ papāta vasudhātale

हिन्दी अर्थ

केचिद् गर्जन्ति घनवत् प्रतिगर्जन्ति चापरे

English

#g farilcw ggg grsfaj wglftwiHj

अध्याय ४३

श्लोक 122

पतमान हरिं शिद्धाश्चारणाश्च तदाब्रुवन् ।मा मा शक्र पतस्वाद्य भूतले तिष्ठ वासव

patamāna hariṃ śiddhāścāraṇāśca tadābruvan / mā mā śakra patasvādya bhūtale tiṣṭha vāsava

हिन्दी अर्थ

सेनापतिपदपर नियुक्त कार्तिकेयके लिये ऋषियोंद्वारा स्वस्त्ययन, महिषासुर-वध गुहकी बात सुनकर सभी गण पृथ्वीपर उतर आये। उतरकर उस स्थानपर उन गणोंने एकाएक भयंकर नाद किया। वह भयंकर नाद सारी पृथ्वी एवं गगनमण्डलमें गूँज गया। फिर तो वह समुद्री छिद्रसे दानवोंके निवासस्थान

English

^ggrfafg gggg «w8mgiq i M ' iu i ^ :ii^\9ii

अध्याय ४३

श्लोक 123

स तेषां वचनं श्रुत्वा योगी तस्थौ क्षणं तदा ।प्राह चैतान् कथं योत्स्ये अपत्रः शत्रुभिः सहः

sa teṣāṃ vacanaṃ śrutvā yogī tasthau kṣaṇaṃ tadā / prāha caitān kathaṃ yotsye apatraḥ śatrubhiḥ sahaḥ

हिन्दी अर्थ

पाताललोक (-तक)-में पहुँच गया। उसके बाद मतिमान्

English

wgfg w ^gg fRf$#g ghrngi

अध्याय ४३

श्लोक 124

तमूचुर्देवगन्धर्वा मा विषादं व्रजेश्वर ।युध्यस्व त्वं समारुह्यप्रेषयिष्याम यदा रथम्

tamūcurdevagandharvā mā viṣādaṃ vrajeśvara / yudhyasva tvaṃ samāruhyapreṣayiṣyāma yadā ratham

हिन्दी अर्थ

उस ध्वनिको सुना। एकाएक वञ्रपातके समान उस भयंकर ध्वनिको सुनकर यह क्या है-यह सोचकर वे सभी शीघ्रतासे अन्धकके पास चले गये नारदजी ! वे सभी असुरशरेष्ठ व्याकुल होकर अन्धकके साथ ही एकत्र होकर उस शब्दके विषयमें परस्पर विचार-विमर्श करने लगे। उन हैत्योंके विचार करते समय सूकर-जैसे मुखबाला हैत्यश्रेष्ठ पातालकेतु धरातलसे

English

gif# g gat g#sggfggfa?:ii s c n

अध्याय ४३

श्लोक 125

इत्येवमुक्त्वा विपुलं रथं स्वस्तिकलक्षणम् ।वानरध्वजसंयुक्तं हरिभिर्हरिभिर्युतम्

ityevamuktvā vipulaṃ rathaṃ svastikalakṣaṇam / vānaradhvajasaṃyuktaṃ haribhirharibhiryutam

हिन्दी अर्थ

रसातलमें आया। बाणसे विद्ध होनेके कारण व्यथित होकर वह बारम्बार काँपता हुआ अन्धकासुरके पास आकर हैन्य वचन बोला-

English

When the sages saw and smelt commotion, they rushed there with stones and logs, made hard blows on his penis and it fell down on the ground and with the falling of linga (penis) god vanished.

अध्याय ४३

श्लोक 126

शुद्धजाम्भूनदमयं किङ्किणीजालमण्डितम् ।शक्राय प्रेषयामासुर्विश्वावसुपुरोगमाः

śuddhajāmbhūnadamayaṃ kiṅkiṇījālamaṇḍitam / śakrāya preṣayāmāsurviśvāvasupurogamāḥ

हिन्दी अर्थ

'पातालकेतुने कहा-- हैत्येश्वर! मैं गालवके आश्रममें गया था और उसको बलपूर्वक नष्ट करनेका उद्योग करने लगा। राजन्! मैंने सूकरके रूपमें जैसे ही उस आश्रममें प्रवेश किया, वैसे ही पता नहीं, किस मानवने मेरे ऊपर बाण छोड़ दिया। बाणसे हँसलीके टूट जानेपर मैं उसके भयके कारण आश्रमसे तुरंत भागा।

English

^gTggngig^: 3^ifa ggg i fa g:i

अध्याय ४३

श्लोक 127

तमागतमुदीक्ष्याथ हीनं सारथिना हरिः ।प्राह योत्स्ये कथं युद्धे संयमिष्ये कथं हयान्

tamāgatamudīkṣyātha hīnaṃ sārathinā hariḥ / prāha yotsye kathaṃ yuddhe saṃyamiṣye kathaṃ hayān

हिन्दी अर्थ

रहे 'रुको-रुको' कहनेवाले उस वीरके घोड़ेकी टापका महान् शब्द सुनायी पड़ रहा था। उसके भयसे मैं जलनिधि दक्षिण समुद्रमें आ गया

English

##agrag#fa *gi$Htf«fa\9oii gg## ■gfggrgig gfiggai mu gggfag: gs#gmgviggirqg:ii\9?n fgftfsl wi gra: g % *n#a %fgg^i Tjerpa: g^t^gfgg*. gi%gr

अध्याय ४३

श्लोक 128

यदि कश्चिद्धि सारथ्यं करिष्यति ममाधुना ।ततो ऽहं घातये शत्रून् नान्यथेति कथञ्चन

yadi kaściddhi sārathyaṃ kariṣyati mamādhunā / tato 'haṃ ghātaye śatrūn nānyatheti kathañcana

हिन्दी अर्थ

वहाँ मैंने अनेक प्रकारके पहनावे तथा आकृतिवाले मनुष्योको देखा। उनमें कुछ तो बादलकी भाँति गर्जन कर रहे थे और कुछ दूसरे उसी प्रकारकी प्रतिध्वनि कर रहे थे। दूसरे कह रहे थे कि हम महिषासुरको निश्चय थे कि आज हम तारकको मारेंगे। असुरेश्वर! उसे सुनकर मुझे बहुत डर हो गया और मैं विशाल समुद्रको छोड़कर भयभीत हो पृथ्वीके नीचे विस्तृत गड्ढे (सुरंग)-के रूपमें बने हुए गुप्त मार्गसे भागा। तब भी उस बलशालीने मेरा

English

God Sankara then returned to Kailasa with goddess Uma then. The entire movable and immovable properties of this nature began to meet destruction on account of the fall of the linga. The innocent hermits were aggrieved at seeing this. One of worst hermits said- "Me do not know the existence of that ascetic. We

अध्याय ४३

श्लोक 129

ततो ऽब्रुवंस्ते गन्धर्वा नास्माकं सारथिर्विभो ।विद्यते स्वयमेवाश्वांस्त्वं संयन्तुमिहार्हसि

tato 'bruvaṃste gandharvā nāsmākaṃ sārathirvibho / vidyate svayamevāśvāṃstvaṃ saṃyantumihārhasi

हिन्दी अर्थ

पीछा किया। उसके डरसे मैं अपना हिरण्यपुर त्यागकर

English

Brahma to come to a clear position. He only can tell the mystery of this event.” All hermits were ashamed to hear this.

अध्याय ४३

श्लोक 130

इत्येवमुक्ते गवांस्त्यक्त्वा स्यन्दनमुत्तमम् ।क्षमातलं निपपातैव परिभ्रष्टस्रगम्बरः

ityevamukte gavāṃstyaktvā syandanamuttamam / kṣamātalaṃ nipapātaiva paribhraṣṭasragambaraḥ

हिन्दी अर्थ

तवान्तिकमनृप्राप्तः प्रसादं कर्तुमईसि। तच्छुत्वा चान्धको वाक्यं प्राह मेघस्वनं वचः

English

They reached the abode of Brahma duly filled with gods, saluted him and stood hesitating before him.

अध्याय ४३

श्लोक 131

चलन्मौलिर्मुक्तकचः परिभ्रष्टायुधाङ्गदः ।पतमानं सहस्राक्षं दृष्ट्वा भूः समकम्पत

calanmaulirmuktakacaḥ paribhraṣṭāyudhāṅgadaḥ / patamānaṃ sahasrākṣaṃ dṛṣṭvā bhūḥ samakampata

हिन्दी अर्थ

यत्र ते दारुणाकारा गणाश्रक्रुर्महास्वनम्। तत्र हैत्याः समाजग्मुः सायुधाः सबला मुने

English

3W cTF§:fislcJR[gT Wr OTWt^l

अध्याय ४३

श्लोक 132

पृथिव्यां कम्पमानायां शमीकर्षेस्तपस्विनी ।भार्याब्रवीत् प्रभो बालं बहिः कुरु यथासुखम्

pṛthivyāṃ kampamānāyāṃ śamīkarṣestapasvinī / bhāryābravīt prabho bālaṃ bahiḥ kuru yathāsukham

हिन्दी अर्थ

हैत्यानापततो दृष्टा कार्तिकेयगणास्ततः। अभ्यद्रवन्त सहसा स चोग्रो मातृमण्डलः तं निघ्नन्तं महादेवं निरीक्ष्य कलशोदरः। कुठारं पाणिनादाय हन्ति सर्वान् महासुरान्

English

rflTOT: ^fgd lllPami

अध्याय ४३

श्लोक 133

स तु शीलावचः श्रुत्वा किमर्थमिति चाव्रवीत् ।सा चाह श्रूयतां नाथ दैवज्ञपरिभाषितम्

sa tu śīlāvacaḥ śrutvā kimarthamiti cāvravīt / sā cāha śrūyatāṃ nātha daivajñaparibhāṣitam

हिन्दी अर्थ

ज्वालामुखो भयकरः करेणादाय चासुरम्। सरथं सगजं साश्चं विस्तृते वदनेऽक्षिपत्

English

^ ifgi'wing »iR^Rri:i

अध्याय ४३

श्लोक 134

यदेयं कम्पते भूमिस्तदा प्रक्षिप्यते बहिः ।यद्बाह्यतो मुनिश्रेष्ठ तद् भवेद् द्विगुणं मुने

yadeyaṃ kampate bhūmistadā prakṣipyate bahiḥ / yadbāhyato muniśreṣṭha tad bhaved dviguṇaṃ mune

हिन्दी अर्थ

शङ्कुकर्णश्च मुसली हलेनाकृष्य दानवान्। संचूर्णयति मन्त्रीव राजानं प्रासभृद् वशी द्विधा त्रिधा च बहुधा चक्रे हैतेयदानवान्

English

<f* 4 i dS^IrMlSfb 1 TTO 1 firT:l

अध्याय ४३

श्लोक 135

एतद्वाक्यं तदा श्रुत्वा बालमादाय पुत्रकम् ।निराशङ्को बहिः शीघ्रं प्राक्षिपत् क्ष्मातले द्विजः

etadvākyaṃ tadā śrutvā bālamādāya putrakam / nirāśaṅko bahiḥ śīghraṃ prākṣipat kṣmātale dvijaḥ

हिन्दी अर्थ

आपके पास आ गया हूँ। आप मेरे ऊपर अनुग्रह कीजिये। यह बात सुनकर अन्धकने बादलकी गर्जनध्वनिमें यह वचन कहा-॥ ४१--४५॥

English

Brahma consoled them by saying- "Oh! you all are stupid because your hearts filled with impurity of anger. O idiots! you don’t know the procedure of religion. O cruel ascetics! listen to the mystery of religion that pours immediately with the fruits. The immortal sovereign in our body is unborn and Mahasthanu, It appears more different than the body. As the gem of white colour gets the colour of the metal in which it is studded, the soul too joins with the mind, resorts to the discrimination of mind and exhibited through deed/acts. Then he endures the vicissitudes of life according to his activeness. The wise man should do purification of mind by the applications of knowledge and yoga etc.

अध्याय ४३

श्लोक 136

भूयो गोयुगलार्थाय प्रविष्टो भार्यया द्विजः ।निवारितो गता वेला अर्द्धूहानिर्भविष्यति

bhūyo goyugalārthāya praviṣṭo bhāryayā dvijaḥ / nivārito gatā velā arddhūhānirbhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

दानव! तुम्हें उससे डरना नहीं चाहिए। मैं तुम्हारा सच्चा रक्षक हूँ। उसके बाद महिष और तारक --ये दोनों तथा बलवानोंमें श्रेष्ठ बाण--ये सभी अन्धकसे बिना पूछे ही अपने अनुगामियोंके साथ युद्ध करनेके लिये पृथ्वीपर निकल आये। मुने! जिस स्थानपर भयंकर आकारवाले गण गर्जन कर रहे थे, उसी स्थानपर हथियारोंसे सजे-धजे दल-बलके साथ हैत्य भी आ गये। इसके बाद हैत्योंको आक्रमण करते हुए देखकर

English

?R wifoj UcMUlW II 6 ?\\

अध्याय ४३

श्लोक 137

इत्येवमुक्ते देवर्षे बहिर्निर्गम्य वेगवान् ।ददर्श बालद्वितयं समरूपमवस्थितम्

ityevamukte devarṣe bahirnirgamya vegavān / dadarśa bāladvitayaṃ samarūpamavasthitam

हिन्दी अर्थ

कार्तिकेयके गण तथा उग्र मातृकाएँ (उनपर) सहसा टूट पड़ीं

English

On being that mind purified the inner soul automatically becomes Nirakula (free from anxiety). The man not purified in mind never becomes pure from the pains exploiting the body. The rituals have been provided for avoiding the evils. The impure soul doesn't become pure shortly. Hence, this true way of loka has been enforced.

अध्याय ४३

श्लोक 138

तं दृष्ट्वा देवताः पूज्य भार्यां चाद्भुतदर्शनाम् ।प्राह तत्त्वं न विन्दामि यत् पृच्छामि वदस्व तत्

taṃ dṛṣṭvā devatāḥ pūjya bhāryāṃ cādbhutadarśanām / prāha tattvaṃ na vindāmi yat pṛcchāmi vadasva tat

हिन्दी अर्थ

उन सबमें सबसे आगे बलशाली स्थाणु भगवान् लोहेकी बनी गदा लेकर क्रोधसे भरकर पशुओंके तुल्य शत्रुओंके सैन्य-बलका संहार करने लगे। असुरोंको मारते हुए महादेवजीको देखकर कलशोदर (भी) हाथमें कुल्हाड़ा लेकर सभी बड़े असुरोंका विनाश करने लगा। भय उत्पन्न कर देनेवाला ज्चालामुख रथ, हाथी और घोड़ोंके साथ असुरोंको हाथसे पकड़- पकड़कर अपने फैलाये हुए मुखमें झॉंकने लगा। हाथमें

English

fafatT 4K<*WlpHPq M63ll

अध्याय ४३

श्लोक 139

बालस्यास्य द्वितीयस्य के भविष्यद्गुणा वद ।भाग्यानि चास्य यच्चोक्तं कर्मतत् कथयाधुना

bālasyāsya dvitīyasya ke bhaviṣyadguṇā vada / bhāgyāni cāsya yaccoktaṃ karmatat kathayādhunā

हिन्दी अर्थ

बर्छी लिये हुए दण्डक भी क्रुद्ध होकर महासुरोंको उनके वाहनोंसहित उठाकर समुद्रमें फेंकने लगा

English

Any chairperson (promoter) of loka (world) has made this provision of classification in Varnasrama as a symbol of magnificence of

अध्याय ४३

श्लोक 140

साब्रवीन्नाद्य ते वक्ष्ये वदिष्यामि पुनः प्रभो ।सो ऽब्रवीद् वद मे ऽद्यैव नोचेन्नाश्नामि भोजनम्

sābravīnnādya te vakṣye vadiṣyāmi punaḥ prabho / so 'bravīd vada me 'dyaiva nocennāśnāmi bhojanam

हिन्दी अर्थ

मुसल एवं प्रास लिये हुए जितेन्द्रिय शङ्कुकर्ण दानवोंको हलसे खींच-खींचकर इस प्रकार मटियामेट करने लगा, जैसे मन्त्री (अनाचारी-अविचारी) राजाको नष्ट करता जाता है। तलवार और ढाल धारण करनेवाला गणोंका स्वामी वीर पुष्पदन्त भी हैत्यों एवं दानवोंमें किसीको दो-दो, किसीको तीन-तीन टुकड़ोंमें काट डालता तथा किसी-किसीको तो अनेक खण्डोंमें कर डालता था। पिङ्गल दण्डको उठाकर जहाँ-जहाँ दौड्ता,

English

You are filled with anger and sex in spite of living in asrama. The home is like an asrama for scholars and it is not an asrama for the

अध्याय ४३

श्लोक 141

सा प्राह श्रूयतां ब्रह्मन् वदिष्ये वचनं हितम् ।कातरेणाद्य यत्पृष्टं भाव्यः कारुरयं कि

sā prāha śrūyatāṃ brahman vadiṣye vacanaṃ hitam / kātareṇādya yatpṛṣṭaṃ bhāvyaḥ kārurayaṃ ki

हिन्दी अर्थ

वहाँ-वहाँ हैत्योंके शवका ढेर दिखलायी पड़ने लगता। गणोंमें श्रेष्ठ वीर सहस्रनयन शूल घुमाते हुए घोड़े, रथ और हाथियोंसहित असुरोंको मार रहा था

English

This illusion of yours in feminine matter ipso facto shows that you are deeply immersed in the well of temptation while a thorough detachment is necessary. Your anger has made you blind to identity with your soul.

अध्याय ४३

श्लोक 142

इत्युक्तावति वाक्ये तु बाल एव त्वेचेतनः ।जगाम साह्यं शक्रस्य कर्तुं सौत्यविशारदः

ityuktāvati vākye tu bāla eva tvecetanaḥ / jagāma sāhyaṃ śakrasya kartuṃ sautyaviśāradaḥ

हिन्दी अर्थ

भीम भयङ्कर शिलाओंकी वर्षासे सामने आ रहे असुरोंको इस भाँति मार रहा था, जिस प्रकार इन्द्र वज्रकी वृष्टिसे उत्तम पर्वतोंको ध्वस्त करते हैं।

English

^ m mnmrfh jmi T TRI mqrffl tRR %

अध्याय ४३

श्लोक 143

तं व्रजन्तं हि गन्धर्वा विश्वावसुपुरोगमाः ।ज्ञात्वेन्द्रस्यैव साहाय्ये तेजसा समवर्धयन्

taṃ vrajantaṃ hi gandharvā viśvāvasupurogamāḥ / jñātvendrasyaiva sāhāyye tejasā samavardhayan

हिन्दी अर्थ

कीलाभिर्वज्रतुल्याभिर्जघान बलवान् मुने

English

TtTfq-TSR sraff! ifiteHTOIIdSII

अध्याय ४३

श्लोक 144

गन्धर्वतेजसा युक्तः शिशुः शक्रं समेत्य हि ।प्रोवाचैह्येहि देवेश प्रियो यन्ता भवामि ते

gandharvatejasā yuktaḥ śiśuḥ śakraṃ sametya hi / provācaihyehi deveśa priyo yantā bhavāmi te

हिन्दी अर्थ

लुण्ठनेन तथा हैत्यान् निजघान सवाहनान् श्रुतायुधस्तु गदया विशोको मुसलेन तु। बन्धुदत्तस्तु शूलेन मूर्ध्नि हैत्यमताडयत्

English

The yajna arranged, the donation made or the penance or havana whatever is made gives no fruit to him. All fruits go for waste when the man is of loose temperament.

अध्याय ४३

श्लोक 145

तच्छ्रत्वास्य हरिः प्राह कस्य पुत्रो ऽसि बालक ।संयन्तासि कथं चाश्वान् संशयः प्रतिभाति मे

tacchratvāsya hariḥ prāha kasya putro 'si bālaka / saṃyantāsi kathaṃ cāśvān saṃśayaḥ pratibhāti me

हिन्दी अर्थ

तथान्यैः पार्षहै्युद्धे शूलशव्त्यूष्टिपद्िशै: । नाकम्पत् ताड्यमानोऽपि मैनाक इव पर्वतः

English

The yajna arranged, the donation made or the penance or havana whatever is made gives no fruit to him. All fruits go for waste when the man is of loose temperament.

अध्याय ४३

श्लोक 146

सो ऽब्रवीदृषितेजोत्थं क्ष्माभवनं विद्धि वासव ।गन्धर्वतेजसा युक्तं वाजियानवनिशारदम्

so 'bravīdṛṣitejotthaṃ kṣmābhavanaṃ viddhi vāsava / gandharvatejasā yuktaṃ vājiyānavaniśāradam

हिन्दी अर्थ

तारको भद्रकाल्या च तथोलूखलया रणे। वध्यते चैकचूडाया दार्यते परमायुधैः गदाचक्राङ्कितकरौ गणासुरमहारथौ। अयुध्येतां तदा ब्रह्मन् लघु चित्रं च सुष्ठु च

English

The yajna arranged, the donation made or the penance or havana whatever is made gives no fruit to him. All fruits go for waste when the man is of loose temperament.

अध्याय ४३

श्लोक 147

तत्छ्रवा भगवाञ्छक्रः खं भेजे योगिनां वरः ।स चापि विप्रतनयो मातलिर्नामविश्रुतः

tatchravā bhagavāñchakraḥ khaṃ bheje yogināṃ varaḥ / sa cāpi vipratanayo mātalirnāmaviśrutaḥ

हिन्दी अर्थ

सेनापतिपदपर नियुक्त कार्तिकेयके लिये ऋषियोंद्वारा स्वस्त्ययन, महिषासुर-वध

English

The yajna arranged, the donation made or the penance or havana whatever is made gives no fruit to him. All fruits go for waste when the man is of loose temperament.

अध्याय ४३

श्लोक 148

ततो ऽधिरूढस्तु रथं शक्रस्त्रिदशपुङ्गवः ।रश्मीन् शमीकतनयो मातलिः प्रगृहीतवान्

tato 'dhirūḍhastu rathaṃ śakrastridaśapuṅgavaḥ / raśmīn śamīkatanayo mātaliḥ pragṛhītavān

हिन्दी अर्थ

भयङ्कर शकटचक्राक्ष और बलवान् पञ्चशिख नामक गण तेजीसे मुद्गर घुमाते हुए बलपूर्वक शत्रुओंका संहार कर रहे थे। प्रबल वेगवान् गिरिभेदी युद्धमें थप्पड़ोंके भीषण आघातसे ही सवारके साथ हाथीको एवं रथीके सहित रथको चूर्ण-विचूर्ण करने लगा। मुने! बलवान् नाडीजङ्क पैरों, मुक्कों, घुटनों एवं वज्रके समान कोहनियोंके प्रहारसे असुरोंको मारने लगा

English

The yajna arranged, the donation made or the penance or havana whatever is made gives no fruit to him. All fruits go for waste when the man is of loose temperament.

अध्याय ४३

श्लोक 149

ततो मन्दरमागम्य विवेश रिपुवाहिनीम् ।प्रविशन् ददृशे श्रीमान् पतितं कार्सुकं महत्

tato mandaramāgamya viveśa ripuvāhinīm / praviśan dadṛśe śrīmān patitaṃ kārsukaṃ mahat

हिन्दी अर्थ

कूर्मग्रीव ग्रीवा, सिर एवं पैरोंके प्रहारोंसे तथा धक्का देकर वाहनोंके साथ हैत्योंको मारने लगा । नारदजी ! पिण्डारक अपने मुख तथा दोनों सींगोंसे गर्वीले दानवोंको छिन्न-भिन्न करने लगा। इसके बाद गणेश्चरोंद्वारा उस

English

The yajna arranged, the donation made or the penance or havana whatever is made gives no fruit to him. All fruits go for waste when the man is of loose temperament.

अध्याय ४३

श्लोक 150

सशरं पञ्चवर्णाभं सितरक्तासितारुणम् ।पाण्डुच्छायं सुरश्रेष्ठस्तं जग्राह समार्गणम्

saśaraṃ pañcavarṇābhaṃ sitaraktāsitāruṇam / pāṇḍucchāyaṃ suraśreṣṭhastaṃ jagrāha samārgaṇam

हिन्दी अर्थ

असौम सेनाके दलोंको मारा जाता देख गणनायक महिष एवं तारक दौड़े। उन दोनों दानवोंद्वारा उत्तम-से-उत्तम आयुधोंसे संहारे जा रहे वे सभी प्रमथगण अधिक क्रुद्ध होकर चारों ओरसे घेरकर युद्ध करने लगे हंसास्य पट्टिशसे, षोडशाक्ष त्रिशूलसे और शतशीर्ष श्रेष्ठ तलवारसे महिषासुरको मारने लगा। श्रुतायुधने गदासे, विशोकने मुसलसे तथा बन्धुदत्तने शूलसे उस हैत्यके मस्तकपर मारा। वैसे ही अन्य पार्षदोंद्वारा शूल,

English

The yajna arranged, the donation made or the penance or havana whatever is made gives no fruit to him. All fruits go for waste when the man is of loose temperament.

अध्याय ४३

श्लोक 151

ततस् मनसा देवान् रजःसत्त्वतमोमयान् ।नमस्कृत्य शरं चापे साधिज्ये विनियोजयत्

tatas manasā devān rajaḥsattvatamomayān / namaskṛtya śaraṃ cāpe sādhijye viniyojayat

हिन्दी अर्थ

शक्ति, ऋष्टि एवं पट्टिशोंसे मार खाते रहनेपर भी वह मैनाकपर्वतके समान तनिक भी विकम्पित नहीं हुआ। रणमें भद्रकाली, उलूखला एवं एकचूडाने श्रेष्ठ आयुधोंसे तारकके ऊपर प्रहार किया

English

The yajna arranged, the donation made or the penance or havana whatever is made gives no fruit to him. All fruits go for waste when the man is of loose temperament.

अध्याय ४३

श्लोक 152

ततो निश्चेरुरत्युग्राः शरा बर्हिणवाससः ।ब्रह्मेशथविष्णुनामाङ्काः सूदयन्तो ऽसुरान् रणे

tato niśceruratyugrāḥ śarā barhiṇavāsasaḥ / brahmeśathaviṣṇunāmāṅkāḥ sūdayanto 'surān raṇe

हिन्दी अर्थ

वे दोनों महान् असुर प्रमथों और मातृशक्तियोंसे मारे जाते हुए होनेपर भी (स्वयं) अक्षुब्ध रहकर गणोंको क्षुब्ध कर रहे थे। उसके बाद आयुधसहित महिषासुर गदाकी बार-बार मारसे प्रमथोंको शीघ्र पराजितकर कुमारकी ओर झपटा। उस महिषको झपटते देखकर अत्यन्त क्रुद्ध हुए सुचक्राक्षने चक्र उठाकर (उस) दनुनन्दनको (बीचमें ही) रोक दिया। ब्रह्मन्! हाथोंमें गदा और चक्र धारण किये हुए असुर और गण दोनों महारथी उस समय

English

The yajna arranged, the donation made or the penance or havana whatever is made gives no fruit to him. All fruits go for waste when the man is of loose temperament.

अध्याय ४३

श्लोक 153

आकाशं विदिशः पृथ्वीं दिशश्च स शरोत्करैः ।सहस्राक्षो ऽतिपटुभिश्छादयामास नारद

ākāśaṃ vidiśaḥ pṛthvīṃ diśaśca sa śarotkaraiḥ / sahasrākṣo 'tipaṭubhiśchādayāmāsa nārada

हिन्दी अर्थ

आपसमें कभी तेज, कभी अद्भुत, कभी निपुण (इस प्रकार विविध प्रकारकी) लड़ाई करने लगे ॥ ७०--७३॥

English

The yajna arranged, the donation made or the penance or havana whatever is made gives no fruit to him. All fruits go for waste when the man is of loose temperament.

अध्याय ४३

श्लोक 154

गजो विद्धो हयो भिन्नः पृथिव्यां पतितो रथः ।महामात्रो धरां प्राप्तः सद्यः सीदञ्छरातुरः

gajo viddho hayo bhinnaḥ pṛthivyāṃ patito rathaḥ / mahāmātro dharāṃ prāptaḥ sadyaḥ sīdañcharāturaḥ

हिन्दी अर्थ

महिषने गदा घुमाकर सुचक्राक्षके ऊपर मारा और सुचक्राक्षने अपने चक्रको उस असुरकी ओर चलाया। तत उच्चुक्रुशुर्हैत्या हा हतो महिषस्त्विति

English

The yajna arranged, the donation made or the penance or havana whatever is made gives no fruit to him. All fruits go for waste when the man is of loose temperament.

अध्याय ४३

श्लोक 155

पदाति पतितो भूम्यां शक्रमार्गणताडितः ।हतप्रधानभूयिष्ठं बलं तदभवद् रिपोः

padāti patito bhūmyāṃ śakramārgaṇatāḍitaḥ / hatapradhānabhūyiṣṭhaṃ balaṃ tadabhavad ripoḥ

हिन्दी अर्थ

दृष्टराद्रवदगदापाणिर्मकराक्षो महाबलः

English

The yajna arranged, the donation made or the penance or havana whatever is made gives no fruit to him. All fruits go for waste when the man is of loose temperament.

अध्याय ४३

श्लोक 156

तं शक्रबाणभिहतं दुरासदं सैन्यं समालक्ष्य तदा कुजम्भः ।जम्भासुरश्चापि सुरेशमव्ययं प्रजगमतुर्गृह्य गदे सुघोरे

taṃ śakrabāṇabhihataṃ durāsadaṃ sainyaṃ samālakṣya tadā kujambhaḥ / jambhāsuraścāpi sureśamavyayaṃ prajagamaturgṛhya gade sughore

हिन्दी अर्थ

बाणोऽपि मकराक्षेण ताडितोऽभूत्पराङ्मुखः प्रभज्यत बलं सर्व हैत्यानां सुरतापस। ततः स्वबलमीक्ष्यैव प्रभग्नं तारको बली। खड्गोद्यतकरो हैत्यः प्रदुद्राव गणेश्वरान्

English

The yajna arranged, the donation made or the penance or havana whatever is made gives no fruit to him. All fruits go for waste when the man is of loose temperament.

अध्याय ४३

श्लोक 157

तावापतन्तौ भगवान् निरीक्ष्य सुदर्शनेनारिविनाशनेन ।विष्णुः कुजम्भं निजघान वेगात् स स्यन्दनाद् गामगमद् गतासुः

tāvāpatantau bhagavān nirīkṣya sudarśanenārivināśanena / viṣṇuḥ kujambhaṃ nijaghāna vegāt sa syandanād gāmagamad gatāsuḥ

हिन्दी अर्थ

बाणेऽपि वीरे निहतेऽथ तारके

English

The yajna arranged, the donation made or the penance or havana whatever is made gives no fruit to him. All fruits go for waste when the man is of loose temperament.

अध्याय ४३

श्लोक 158

तस्मिन् हते भ्रातरि माधवेन जम्भस्ततः क्रोधवशं जगाम ।क्रोधान्वितः शक्रमुपाद्रवद् रणे सिंहं यतैणो ऽतिविपन्नबुद्धिः

tasmin hate bhrātari mādhavena jambhastataḥ krodhavaśaṃ jagāma / krodhānvitaḥ śakramupādravad raṇe siṃhaṃ yataiṇo 'tivipannabuddhiḥ

हिन्दी अर्थ

अत्यन्त तीक्ष्ण अरोंसे युक्त वह चक्र गदाको टूक-टूक काट कर महिषके ऊपर चल पड़ा। उसके बाद हैत्यलोग यह कहते हुए जोरसे चिल्ला उठे कि हाय! महिष मारा गया। उसे सुननेके बाद लाल-लाल आँखोंबाला बाणासुर प्रास लेकर वेगपूर्वक दौड़ा और पाँच सौ मुष्टियोंसे चक्रपर प्रहार किया तथा पाँच सौ बाहुओंसे सुचक्राक्षको बाँध लिया। बलवान् होते हुए भी सुचक्राक्ष बाणासुरके द्वारा प्रयत्रशून्य कर दिया गया॥ ७४ --७७॥

English

The yajna arranged, the donation made or the penance or havana whatever is made gives no fruit to him. All fruits go for waste when the man is of loose temperament.

अध्याय ४३

श्लोक 159

तमापतन्तं प्रसमीक्ष्य शक्रस्त्यक्त्वैव चापं सशरं महात्मा ।जग्राह शक्तिं यमदण्डकल्पां तामग्निदत्तां रिपवे ससर्ज

tamāpatantaṃ prasamīkṣya śakrastyaktvaiva cāpaṃ saśaraṃ mahātmā / jagrāha śaktiṃ yamadaṇḍakalpāṃ tāmagnidattāṃ ripave sasarja

हिन्दी अर्थ

फिर, बाणासुरके द्वारा सुचक्राक्षको चक्रसहित बँधा हुआ देखकर महाबली मकराक्ष हाथमें गदा लेकर दौड़ा। महाबली मकराक्षने गदासे बाणके मस्तकपर प्रहार किया। उसके बाद कष्टसे दुःखी बाणने सुचक्राक्षको छोड़ दिया

English

The yajna arranged, the donation made or the penance or havana whatever is made gives no fruit to him. All fruits go for waste when the man is of loose temperament.

अध्याय ४३

श्लोक 160

शक्तिं सघण्टां कृतनिःस्वनां वै दृष्ट्वा पतन्तीं गदया जघान ।गदां च कृत्वा सहसैव भस्मसाद् बिभेद जम्भं हृदये च तूर्णम्

śaktiṃ saghaṇṭāṃ kṛtaniḥsvanāṃ vai dṛṣṭvā patantīṃ gadayā jaghāna / gadāṃ ca kṛtvā sahasaiva bhasmasād bibheda jambhaṃ hṛdaye ca tūrṇam

हिन्दी अर्थ

और वह मनस्वी उससे छूटकर लज्जित होता हुआ युद्ध छोड़कर सालिग्रामके समीप चला गया। बाण भी मकराक्षसे चोट खाकर युद्धसे मुख मोड़ लिया। नारदजी ! हैत्योंकी सारी सेना छिन्न-भिन्न हो गयी। उसके बाद अपनी सेनाको नष्ट हुआ देख बलवान् हैत्य तारक हाथमे तलवार लेकर गणेश्वरोंकी ओर दौड़ा

English

The yajna arranged, the donation made or the penance or havana whatever is made gives no fruit to him. All fruits go for waste when the man is of loose temperament.

अध्याय ४३

श्लोक 161

शक्त्या स भिन्नो हृदये सुरारिः पपात भूम्यां विगतासुरेव ।तं वीक्ष्य भूमौ पतितं विसंज्ञं दैत्यास्तु भीता विमुखा बभूवुः

śaktyā sa bhinno hṛdaye surāriḥ papāta bhūmyāṃ vigatāsureva / taṃ vīkṣya bhūmau patitaṃ visaṃjñaṃ daityāstu bhītā vimukhā babhūvuḥ

हिन्दी अर्थ

उसके बाद खड्ग धारण करनेवाले उस बेजोड़ वीरने उन मातृकाओंसहित हंसवक्त्र आदि गणेश्वरोंको हरा दिया। वे सभी डरकर स्कन्दकी शरणमें गये। महेश्वरके पुत्र कुमारने अपने गणोंको निरुत्साह तथा

English

The yajna arranged, the donation made or the penance or havana whatever is made gives no fruit to him. All fruits go for waste when the man is of loose temperament.

अध्याय ४३

श्लोक 162

जम्भे हते दैत्यबले च भग्ने गणास्तु हृष्टा हरिमर्चयन्तः ।वीर्यं प्रशंसन्ति शतक्रतोश्च स गोत्रभिच्छर्वमुपेत्य तस्थौ

jambhe hate daityabale ca bhagne gaṇāstu hṛṣṭā harimarcayantaḥ / vīryaṃ praśaṃsanti śatakratośca sa gotrabhiccharvamupetya tasthau

हिन्दी अर्थ

खड्गधारी तारकासुरको आते हुए देखकर शक्तिके प्रहारसे उसका हृदय विदीर्ण कर डाला। हृदय फट जानेके कारण वह पृथ्वीपर गिर पड़ा। महर्षे! उस भाईके मर जानेपर महिषासुरका अभिमान चूर हो गया। वह दुष्टात्मा डरसे व्याकुल होकर युद्धभूमिसे भागकर हिमालय पर्वतपर चला गया। वीर तारकके मारे जाने, डरकर महिषके हिमालयपर भाग जाने एवं गणोंद्वार अपराधी सेनाका संहार किये जानेपर बाण भी डरके

English

The yajna arranged, the donation made or the penance or havana whatever is made gives no fruit to him. All fruits go for waste when the man is of loose temperament.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/1_sanskr/3_purana/vamp__u.htm | https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_vAmanapurANasaromAhAtmya.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vamana Purana — Chapter 43
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.