Vamana Purana· Vāmana Purāṇa
53
अध्याय 53 / 95

Adhyaya 53

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पूर्ण अध्याय पाठ83 श्लोक

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अध्याय ५३

श्लोक 1

इति श्रीवामनपुराणे द्विपञ्चाशो ऽध्यायः ________________________________________________________________________ पुलस्त्य उवाच ।कालिन्दीसलिले स्नात्वा पूजयित्वा त्रिविक्रमम् ।उपोष्य रजनीमेकां लिङ्गभेदं गिरिं ययौ

iti śrīvāmanapurāṇe dvipañcāśo 'dhyāyaḥ ________________________________________________________________________ pulastya uvāca / kālindīsalile snātvā pūjayitvā trivikramam / upoṣya rajanīmekāṃ liṅgabhedaṃ giriṃ yayau

हिन्दी अर्थ

बाद वे राजा शीधघ्रतासे उठे। उन्होंने उन दोनों ब्राह्मणों तथा अपने भतीजेके लिये रथ दे दिये वे रथोंपर चढ़कर शीघ्रतासे क्रमशः पृथ्वीपर खोज करने लगे। (इस क्रममें) उन लोगोंने बदरिकाश्रमे जाकर तपस्या करनेसे दुबले और धूल-मिट्टीसे भरे, जटा धारण किये हुए, जोर-जोरसे साँस ले रहे एक

English

After worshipping them, the king mountain then bade farewell to those hermits by offering tasty fruits and roots.

अध्याय ५३

श्लोक 2

तत्र स्नात्वा च विमले भवं दृष्ट्वा च भक्तितः ।उपोष्य रजनीमेकां तीर्थं केदारमाव्रजत्

tatra snātvā ca vimale bhavaṃ dṛṣṭvā ca bhaktitaḥ / upoṣya rajanīmekāṃ tīrthaṃ kedāramāvrajat

हिन्दी अर्थ

तपोमूर्ति युवकको देखा। महाबाहु राजा इन्द्रद्युम्नने उसके पास जाकर कहा-तपस्विन्! यह बतलाओ कि युवा- अवस्थामें ही तुम अत्यन्त दुष्कर कठोर तप क्यों कर रहे हो? यह भी बतलाओ कि तुम्हारी अभिलाषा क्या

English

wms tHRp'lPl ^raR^II^II

अध्याय ५३

श्लोक 3

तत्र स्नात्वार्ऽच्य चेशानं माधवं चाप्यभेदतः ।उषित्वा वासरान् सप्त कुब्जाम्रं प्रजगाम ह

tatra snātvār'cya ceśānaṃ mādhavaṃ cāpyabhedataḥ / uṣitvā vāsarān sapta kubjāmraṃ prajagāma ha

हिन्दी अर्थ

है? उसने कहा--आप मुझसे यह बतलायें कि चिन्तासे ग्रस्त अत्यन्त दुःखी एवं तपश्चर्यासे युक्त मुझसे प्रेमपूर्वक पूछनेवाले आप कौन हैं? उसने कहा- तपस्विन्! विभो! मैं मनुका पुत्र एवं इक्ष्वाकुका प्रिय भाई शाकलपुरका राजा हूँ। मैंने अपना परिचय कह दिया। उस राजाने भी उनसे पहलेकी सारी कथा कह सुनायी

English

They came at Mandaragiri through sky route, saluted Sankara and said- "You are bridegroom and Girija is your bride from now. The creatures of three worlds including Brahma will see Ghanavahana (Siva).

अध्याय ५३

श्लोक 4

ततः सुतीर्थे स्नात्वा च सोपवासी जितेन्द्रियः।हृषीकेशं समभ्यर्च्य ययौ बदरिकाश्रमम्

tataḥ sutīrthe snātvā ca sopavāsī jitendriyaḥ. hṛṣīkeśaṃ samabhyarcya yayau badarikāśramam

हिन्दी अर्थ

प्रोवाच राजन्नेह्ोहि करिष्यामि तव प्रियम्

English

Sankara then happily provided entertainment and honour in orderly manner to Saptarsis including Arundhatl.

अध्याय ५३

श्लोक 5

तत्रोष्य नारायणमर्च्य भक्त्या स्नात्वाथ विद्वान् स सरस्वतीजले ।वराहतीर्थे गरुडासनं स दृष्ट्वाथ संपूज्य सुभक्तिमांश्च

tatroṣya nārāyaṇamarcya bhaktyā snātvātha vidvān sa sarasvatījale / varāhatīrthe garuḍāsanaṃ sa dṛṣṭvātha saṃpūjya subhaktimāṃśca

हिन्दी अर्थ

तदागच्छथ गच्छामः सौदेवस्यैव कारणात्। तत्रास्माकं समेष्यन्ति कन्यास्तिस्त्रस्तथापराः इत्येवमुक्त्वा स ऋषिः समाश्वास्य सुदेवजम्। शकुनिं पुरतः कृत्वा सेन्द्रद्युप्र: सपुत्रकः

English

tRT: *ptj: -gntni -er nnra h

अध्याय ५३

श्लोक 6

भद्रकर्णे ततो गत्वा जयेशं शशिशेखरम् ।दृष्ट्वा संपूज्य च शिवं विपाशामभितो ययौ

bhadrakarṇe tato gatvā jayeśaṃ śaśiśekharam / dṛṣṭvā saṃpūjya ca śivaṃ vipāśāmabhito yayau

हिन्दी अर्थ

सप्तगोदावरं तीर्थ यत्र ताः कन्यका गताः

English

They went to invited all gods after getting worship from Siva so decent. Brahma, Visnu, Indra and sun etc. gods to came to see Siva.

अध्याय ५३

श्लोक 7

तस्यां स्नात्वा समभ्यर्च्य देवदेवं द्विजप्रियम् ।उपवासी इरावत्यां ददर्श परमेश्वरम्

tasyāṃ snātvā samabhyarcya devadevaṃ dvijapriyam / upavāsī irāvatyāṃ dadarśa parameśvaram

हिन्दी अर्थ

तस्यास्तद् वचनं शरुत्वा स कपिः प्राह बालिकाम्। दृष्टा देववती नाम्ना मया न्यस्ता महाश्रमे

English

■^TRR nP(yy<siisj Traf-

अध्याय ५३

श्लोक 8

यमाराध्य द्विजश्रेष्ठ शाकले वै पुरूरवाः ।समवाप परं रूपमैश्वर्य च सुदुर्लभम्

yamārādhya dvijaśreṣṭha śākale vai purūravāḥ / samavāpa paraṃ rūpamaiśvarya ca sudurlabham

हिन्दी अर्थ

कालिन्द्या विमले तीर्थे मृगपक्षिसमन्विते। श्रीकण्ठायतनस्याग्रे मया सत्यं तवोदितम्

English

% eRT I? ftMuuil:ii^4il

अध्याय ५३

श्लोक 9

कुष्ठरोगाभिभूतश्च यं समाराघ्य वै भृगुः ।आरोग्यमतुलं प्राप संतानमपि चाक्षयम्

kuṣṭharogābhibhūtaśca yaṃ samārāghya vai bhṛguḥ / ārogyamatulaṃ prāpa saṃtānamapi cākṣayam

हिन्दी अर्थ

न हि देववती ख्याता तदागच्छ व्रजावहे पृष्ठतोऽस्याः समागच्छन्नदीमन्वेव कौशिकीम्

English

Having visited there, they all saluted Siva and entered into the home. Siva summoned Nandi etc. ganas. They came, saluted and then seated there.

अध्याय ५३

श्लोक 10

नारद उवाच ।कथं पुरूरवा विष्णुमाराघ्य द्विजसत्तम ।विरूपत्वं समुत्सृज्य रूपं प्राप श्रिया सह

nārada uvāca / kathaṃ purūravā viṣṇumārāghya dvijasattama / virūpatvaṃ samutsṛjya rūpaṃ prāpa śriyā saha

हिन्दी अर्थ

(ऊपर कही बातोंको) सुनकर राजर्षिने कहा- तुम अपने शरीरका त्याग मत करो। तुम मेरे भतीजे हो। आओ, मैं उस सुन्दरीकी खोज करने जा रहा हूँ। इतना कहकर उन्होंने उभरी शिराओंसे भरे हुए राजाको गले

English

ytijjMH i s gr cHm faqfii *<? n

अध्याय ५३

श्लोक 11

पुलस्त्य उवाच ।श्रूयतां कथयिष्यामि कथां पापुप्रणाशिनीम् ।पूर्वं त्रेतायुगस्यादौ यथावृत्तं तपोधन

pulastya uvāca / śrūyatāṃ kathayiṣyāmi kathāṃ pāpupraṇāśinīm / pūrvaṃ tretāyugasyādau yathāvṛttaṃ tapodhana

हिन्दी अर्थ

लगाया और उन्हें रथपर चढ़ाकर शीघ्र उन दोनों तपस्वियोंके पास पहुँचा दिया। पुत्रके सहित ऋतध्वजने उन राजाको देखकर कहा--राजन्! आइये! आइये! मैं आपका प्रिय कार्य करूँगा। आपने नैमिषारण्यमें जिस चित्राङ्गदाको देखा था, उसे मैंने ही सप्तगोदाबर नामके तीर्थमें छोड़ दिया था

English

Sankara surrounded by gods and ganas with his opened matted hair was seen as banyan

अध्याय ५३

श्लोक 12

मद्रदेश इति ख्यातो देशो वै ब्रह्मणः सुत ।शाकलं नाम नगरं ख्यातं स्थानीयमुत्तमम्

madradeśa iti khyāto deśo vai brahmaṇaḥ suta / śākalaṃ nāma nagaraṃ khyātaṃ sthānīyamuttamam

हिन्दी अर्थ

तो आइये, हमलोग सुदेवके पुत्रके कार्यसे ही वहाँ चलें। वहाँपर हमलोगोंको अन्य तीन कन्याएँ भी मिलेंगी। इस प्रकार कहकर उन्होंने ऋषि सुदेवके पुत्रको सान्त्वना दे करके एवं शकुनिको आगे कर

English

Sarjja and Kadamba trees in the forest.

अध्याय ५३

श्लोक 13

तस्मिन् विपणिवृत्तिस्थः सुधर्माख्यो ऽभवद् वणिक् ।धनाढ्यो गुणवान् भोगी नानासास्त्रविशारदः

tasmin vipaṇivṛttisthaḥ sudharmākhyo 'bhavad vaṇik / dhanāḍhyo guṇavān bhogī nānāsāstraviśāradaḥ

हिन्दी अर्थ

इन्द्रद्युप्न और पुत्रके साथ घोड़े जुते रथसे सप्तगोदावर तीर्थमें जानेकी योजना बनायी-जहाँ वे कन्याएँ गयी थीं। इस बीच दुर्बलाङ्गी घृताची शोकसे चिन्तित होकर अपनी कन्याको ढूँढ़ती हुई उदयगिरिपर वहाँ घृताची अप्सराको वह बन्दर मिल गया। घृताची अप्सराने उससे पूछा--कपे! मुझसे सच कहो कि क्या तुमने लड़कीको नहीं देखा है? उसके वचनको सुनकर उस कपिने कहा-मैंने देववती नामकी बालिकाको

English

jftAfacUig f^'4ilVw4l5Kn^:ll ^’RII

अध्याय ५३

श्लोक 14

स त्वेकदा निजाद् राष्ट्रात् सुराष्ट्रं गन्तुमद्यतः ।सार्थेन महता युक्तो नानाविपणपण्यवान्

sa tvekadā nijād rāṣṭrāt surāṣṭraṃ gantumadyataḥ / sārthena mahatā yukto nānāvipaṇapaṇyavān

हिन्दी अर्थ

देखा है और उसे मृगों तथा पक्षियोंसे भरे कालिन्दीके विमलतीर्थमें श्रीकण्ठके मन्दिरके सामने स्थित महाश्रममें रख दिया है। मैंने तुमसे यह सत्य बात कही है। उस (घृताची)-ने कहा-कपिराज! वह वेदवती नामसे

English

Sankara with skull, gorocana tilaka on forehead, tiger’s hide on body, ear-ring of serpent blue (black) like bee, bangle of serpents gem, garland, keyura and nupura and long ascending matted hair then rode on bull.

अध्याय ५३

श्लोक 15

गच्छतः पथि तस्याथ मरुभूमौ कलिप्रिय ।अभवद् दस्युतो रात्रौ अवस्कन्दो ऽतिदुःसहः

gacchataḥ pathi tasyātha marubhūmau kalipriya / abhavad dasyuto rātrau avaskando 'tiduḥsahaḥ

हिन्दी अर्थ

विख्यात है, वह देववती नहीं है। तो आओ; हम दोनों वहाँ चलें घृताचीकी उस बातको सुनकर बन्दर शीघ्रतासे पग बढ़ाता हुआ उसके पीछे-पीछे कौशिकी नदीकी ओर चला।

English

dWPJdl T MT: Tt: •ETlf^T I

अध्याय ५३

श्लोक 16

ततः स हृतसर्वस्वो वणिग् गुःखसमन्वितः ।असहायो मरौ तस्मिंश् चचारोन्मत्तवद् वशी

tataḥ sa hṛtasarvasvo vaṇig guḥkhasamanvitaḥ / asahāyo marau tasmiṃś cacāronmattavad vaśī

हिन्दी अर्थ

ऋतध्वज)-के साथ बहुत तेज चलनेवाले रथोंपर चढ़कर कौशिकी नदीके समीप पहुँचे। वे लोग रथसे उतरकर स्नान करनेके लिये नदीके निकट आये। घृताची भी उस परम पवित्र नदीमें स्नान करने आयी। बन्दर भी उनके

English

His ganas were marching ahead on their respective carriages (v ah ana) with Agni as their leader and other gods followed him.

अध्याय ५३

श्लोक 17

चरता तदरण्यं वै दुःखाक्रान्तेन नारद ।आत्मा इव शमीवृक्षो मरावासादितः शुभः

caratā tadaraṇyaṃ vai duḥkhākrāntena nārada / ātmā iva śamīvṛkṣo marāvāsāditaḥ śubhaḥ

हिन्दी अर्थ

पीछे ही आ गया। जाबालिने उसे देखा। देखते ही उन्होंने पिता एवं महाबलशाली राजासे कहा- ॥ ८४--८७॥ ब्रह्मन् प्रदीयतां मह्यामाज्ञां तात वदस्व माम्। यावदेनं निहन्म्यद्य शरेणैकेन वानरम्॥

English

On both collateral’s of Siva, there were Visnu on eagle and Brahma on swan.

अध्याय ५३

श्लोक 18

तं मृगौः पिक्षिक्षिश्चैव हीनं दृष्ट्वा शमीतरुम् ।श्रान्तः क्षुत्तृट्परीतात्मा तस्याधः समुपाविशत्

taṃ mṛgauḥ pikṣikṣiścaiva hīnaṃ dṛṣṭvā śamītarum / śrāntaḥ kṣuttṛṭparītātmā tasyādhaḥ samupāviśat

हिन्दी अर्थ

न कश्चित्तात केनापि बध्यते हन्यतेऽपि वा। वधबन्धौ पूर्वकर्मवश्यौ नृपतिनन्दन

English

WITTO font FEETT F? *o ||

अध्याय ५३

श्लोक 19

सुप्तश्चापि सुविश्रान्तो मध्याह्ने पुनरुत्यितः ।समपश्यदथायान्तं प्रेतं प्रेतशतैर्वृतम्

suptaścāpi suviśrānto madhyāhne punarutyitaḥ / samapaśyadathāyāntaṃ pretaṃ pretaśatairvṛtam

हिन्दी अर्थ

एह्योेति वानरास्माकं साहाय्यं कर्तुमर्हसि इत्येवमुक्तो मुनिना बाले स कपिकुञ्जरः।

English

Indra, the thousand eyed god rode on elephant and held a wide umbrella of white

अध्याय ५३

श्लोक 20

उद्वाह्यन्तमथान्येन प्रेतेन प्रेतनायकम् ।पिण्डाशिभिश्च पुरतो धावद्भी रूक्षविग्रहैः

udvāhyantamathānyena pretena pretanāyakam / piṇḍāśibhiśca purato dhāvadbhī rūkṣavigrahaiḥ

हिन्दी अर्थ

ममाज्ञा दीयतां ब्रह्मञ् शाधि किं करवाण्यहम्

English

*npT irfert ^st stiH^H^-Hit^i

अध्याय ५३

श्लोक 21

अथाजगाम प्रेतो ऽसौ पर्यटित्वा वनानि च ।उपागम्य शमीमूले वणिक्पुत्रं ददर्श सः

athājagāma preto 'sau paryaṭitvā vanāni ca / upāgamya śamīmūle vaṇikputraṃ dadarśa saḥ

हिन्दी अर्थ

इत्युक्ते प्राह स मुनिस्तं वानरपतिं वचः। मम पुत्रस्त्वयोद्वद्धो जटासु वटपादपे शाखां वहति मत्सूनुः शिरसा तां विमोचय। 'दशवर्षशतान्यस्य शाखां वै वहतोऽगमन्

English

&T FJH FfWTT q^ll **ll

अध्याय ५३

श्लोक 22

स्वागतेनाभिवाद्यैनं समाभाष्य परस्परम् ।सुखोपविष्टश्छायायां पृष्ट्वा कुशलमाप्तवान्

svāgatenābhivādyainaṃ samābhāṣya parasparam / sukhopaviṣṭaśchāyāyāṃ pṛṣṭvā kuśalamāptavān

हिन्दी अर्थ

स ऋषेर्वाक्यमाकर्ण्य कपिर्जाबालिनो जटाः

English

Yamuna, the best river rode on tortoise and began to walk with white fan (camvara) in her

अध्याय ५३

श्लोक 23

ततः प्रेताधिपतिना पृष्टः स तु वणिक्सखः ।कुत आगम्यते ब्रूहि क्व साधो वा गमिष्यसि

tataḥ pretādhipatinā pṛṣṭaḥ sa tu vaṇiksakhaḥ / kuta āgamyate brūhi kva sādho vā gamiṣyasi

हिन्दी अर्थ

ततः प्रीतो मुनिश्रेष्ठो वरदोऽभूदूतध्वजः कपिं प्राह वृणीष्व त्वं वरं यन्मनसेप्सितम्।

English

^H gS ^PfTF WtST5R3rPtH,l

अध्याय ५३

श्लोक 24

कथं चेदं महारण्यं मृगपक्षिविवर्जितम् ।समापन्नो ऽसि भद्रं ते सर्वमाख्यातुमर्हसि

kathaṃ cedaṃ mahāraṇyaṃ mṛgapakṣivivarjitam / samāpanno 'si bhadraṃ te sarvamākhyātumarhasi

हिन्दी अर्थ

विश्वकर्मा महातेजाः कपित्वे प्रतिसंस्थितः। ब्रह्मन् भवान् वरं महं यदि दातुमिहेच्छति

English

UMl FJTR53T W^ll *? II

अध्याय ५३

श्लोक 25

एवं प्रेताधिपतिना वणिक् पृष्टः समासतः ।सर्वमाख्यातवान् ब्रह्मन् स्वदेशधनविच्युतिम्

evaṃ pretādhipatinā vaṇik pṛṣṭaḥ samāsataḥ / sarvamākhyātavān brahman svadeśadhanavicyutim

हिन्दी अर्थ

गालब-प्रसङ्क, चित्राङ्गदा-वेदवती-वृत्तान्त, कन्याओंकी खोज, घृताची-वृत्तान्त तात! यह बही बन्दर फिर तेजीसे (यहाँ) आ रहा है, जिसने पहले मुझे जबरदस्ती जटाजालसे बड़के पेड़में बाँध दिया था। जाबालिके उस वचनको सुनकर अत्यन्त कुपित हुए शकुनिने बाणसहित धनुषको लेकर यह वचन

English

The holiest river Sarasvatl too rode on elephant with fan (camvara) analogous to Hamsa, Kunda and Indu.

अध्याय ५३

श्लोक 26

तस्य श्रुत्वा स वृत्तान्तं तस्य दुःखेन दुःखितः ।वमिक्पुत्रं ततः प्राह प्रेतपालः स्वबन्धुवत्

tasya śrutvā sa vṛttāntaṃ tasya duḥkhena duḥkhitaḥ / vamikputraṃ tataḥ prāha pretapālaḥ svabandhuvat

हिन्दी अर्थ

कहा -ब्रह्मन्! मुझे आज्ञा दीजिये; तात! मुझसे कहिये; क्या मैं एक बाणसे ही इस बन्दरको मार डालूँ? ऐसा कहनेपर समस्त प्राणियोंकी भलाईमें लगे रहनेवाले महर्षिने शकुनिसे अत्यन्त युक्तियुक्त वचन कहा-

English

WFJ? VfRTH tjptpfr <fimmf< F.II *3 II

अध्याय ५३

श्लोक 27

एवं गते ऽपि मा शोकं कर्तुमर्हसि सुव्रत ।भूयो ऽप्यर्थाः भविष्यन्ति यदि भाग्यबलं तव

evaṃ gate 'pi mā śokaṃ kartumarhasi suvrata / bhūyo 'pyarthāḥ bhaviṣyanti yadi bhāgyabalaṃ tava

हिन्दी अर्थ

तात! (वस्तुतः) न तो किसीको कोई बाँधता है और न मारता ही है। नृपतिनन्दन! वध और बन्धन पूर्वजन्ममें किये गये कर्मोके फलाधीन होते हैं। शकुनिसे इस प्रकार कहकर मुनिने बन्दरसे कहा-बन्दर! आओ, आओ! तुम्हें हमलोगोंकी सहायता करनी चाहिए बाले! मुनिके ऐसा कहनेपर उस श्रेष्ठ कपिने करबद्ध प्रणाम करते हुए यह कहा--ब्रह्मन्! मुझे आज्ञा दीजिये; मुझे निर्देश दीजिये कि मैं क्या करूँ? उसके ऐसा कहनेपर मुनिने

English

The six seasons began to walk with procession with five-coloured fragrant

अध्याय ५३

श्लोक 28

भाग्यक्षयेर्ऽथाः क्षीयन्ते भवन्त्यभ्युदये पुनः ।क्षीणस्यास्य शरीरस्य चिन्तया नोदयो भवेत्

bhāgyakṣayer'thāḥ kṣīyante bhavantyabhyudaye punaḥ / kṣīṇasyāsya śarīrasya cintayā nodayo bhavet

हिन्दी अर्थ

उस कपिपतिसे यह वचन कहा--तुमने मेरे पुत्रको बड़के पेड़में जटाओंसे बाँध रखा था

English

ShfrUHHKW Efqft rTsT ^T^:ll Vi

अध्याय ५३

श्लोक 29

इत्युच्चार्य समाहूय स्वान् भृत्यान् वाक्यमब्रवीत् ।अद्यातिथिरयं पूज्यः सदैव स्वजनो मम

ityuccārya samāhūya svān bhṛtyān vākyamabravīt / adyātithirayaṃ pūjyaḥ sadaiva svajano mama

हिन्दी अर्थ

विशेष यत्न करनेपर भी हमलोग उस पेड्से इसको उन्मुक्त (अलग) नहीं कर सके। इसलिये इस राजाने उस वृक्षके तीन टुकड़े कर दिये। मेरा पुत्र आजतक सिरपर उसकी डालीको ढो रहा है। अब तुम उसे उन्मुक्त कर दो। इस डालीको ढोते हुए उसको एक हजार वर्ष बीत गये हैं। ऐसा कोई पुरुष नहीं है जो इसे छुड़ानेमें समर्थ हो। उस बन्दरने ऋषिकी बात सुनकर जाबालिकी जटाओंको धीरे-धीरे खोल दिया। वे जटाएँ

English

Prthudaka rode on elephant intoxicant as Airavata and began walking with smearing items

अध्याय ५३

श्लोक 30

अस्मिन् समागते प्रेताः प्रीतिर्जाता ममातुला

asmin samāgate pretāḥ prītirjātā mamātulā

हिन्दी अर्थ

क्षणभरमें ही खुल गयीं। उसके बाद प्रसन्न होकर मुनिश्रेष्ठ ऋतध्वज वर देनेके लिये तैयार हो गये

English

Gandharvas including Tumbaru moved with singing melodious songs and Kinnara with plying on musical instruments. They were at the back side of Siva.

अध्याय ५३

श्लोक 31

एवं हि वदतस्तस्य मृत्पात्रं सुदृढं नवम् ।दध्योदनेन संपूर्णमाजगाम यथेप्सितम्

evaṃ hi vadatastasya mṛtpātraṃ sudṛḍhaṃ navam / dadhyodanena saṃpūrṇamājagāma yathepsitam

हिन्दी अर्थ

(फिर) उन्होंने बन्दरसे कहा-तुम अपना मनोऽभिलघित वर माँगो। ऋतध्वजकी बात सुनकर कपि- योनिमें स्थित महातेजस्वी विश्वकर्माने यह वर माँगा- ब्रह्मन्! यदि आप मुझे वर देनेके लिये इच्छा कर रहे हैं तो मुझे दिये गये अपने महाघोर शापका निवारण कर दें। तपोधन! चित्राङ्गदाके पिता मुझ त्वष्टाको आप पहचान लें।

English

TOcrf ^F VJHMl(UHH.II ^ II

अध्याय ५३

श्लोक 32

तथा नवा च सुदृढा संपूर्णा परमाम्भसा ।वारिधानी च संप्राप्ता प्रेतानामग्रतः स्थिता

tathā navā ca sudṛḍhā saṃpūrṇā paramāmbhasā / vāridhānī ca saṃprāptā pretānāmagrataḥ sthitā

हिन्दी अर्थ

सुबहूनि च पापानि मया यानि कृतानि हि

English

The nymphs moved dancing and sages and Gandharva moved with chanting psalms on Sulapani Trilocana.

अध्याय ५३

श्लोक 33

तमागतं ससलिलमन्नं वीक्ष्य महामतिः ।प्राहोत्तिष्ठ वणिक्पुत्र त्वमाह्निकमुपाचर

tamāgataṃ sasalilamannaṃ vīkṣya mahāmatiḥ / prāhottiṣṭha vaṇikputra tvamāhnikamupācara

हिन्दी अर्थ

ततस्तु सर्वे क्रमशः स्त्रात्वाऽर्च्य पितृदेवता: ज्ञात्वाऽथ विश्वकर्माणं कामयामास कामिनी। ततोऽनृपर्वतश्रेष्ठे ख्याते कोलाहले कपिः

English

WT c tiicvh ^iuif ^ ^:l

अध्याय ५३

श्लोक 34

ततस्तु वारिधान्यास्तौ सलिलेन विधानतः ।कृताह्निकावुभौ जातौ वणिक् प्रेतपतिस्तथा

tatastu vāridhānyāstau salilena vidhānataḥ / kṛtāhnikāvubhau jātau vaṇik pretapatistathā

हिन्दी अर्थ

तेषां सारथयश्चाश्चन् ्नात्वा पीतोदकाप्लुतान्

English

T IHMfefrWH FC i l H Pj fiW TI

अध्याय ५३

श्लोक 35

ततो वणिक्सुतायादौ दध्योदनमथेच्छया ।दत्त्वा तेभ्यश्च सर्वेभ्यः प्रेतेभ्यो व्यददात् ततः

tato vaṇiksutāyādau dadhyodanamathecchayā / dattvā tebhyaśca sarvebhyaḥ pretebhyo vyadadāt tataḥ

हिन्दी अर्थ

शाड्वलाळ्योषु देशेषु मुहूर्तादेव वाजिनः तृप्ताः समाद्रवन् सर्वे देवायतनमुत्तमम्। तुरङ्गखुरनिर्घोषं श्रुत्वा ता योषितां वराः

English

O great sages! Thus, eleven crore Rudras, twelve crore Adityas, eight crore Vasus, Sixty seven crore ganas and twenty four crore Udhrvareta hermit took departure from there.

अध्याय ५३

श्लोक 36

भुक्तवत्सु च सर्वेषु कामतो ऽम्भसि सेविते ।अनन्तरं सबुभुजे प्रेतपालो बराशनम्

bhuktavatsu ca sarveṣu kāmato 'mbhasi sevite / anantaraṃ sabubhuje pretapālo barāśanam

हिन्दी अर्थ

किमेतदिति चोक्त्वैव प्रजग्मुहाटकेश्वरम्। आरुह्य बलभीं तास्तु समुहैक्षन्त सर्वशः

English

Yaksa, Kinnara and monsters were in uncountable groups and all were moved impatiently for the marriage of Siva. They were following god Sankara.

अध्याय ५३

श्लोक 37

प्रकामतृप्ते प्रेत च वारिधान्योदनं तथा ।अन्तर्धानमगाद् ब्रह्मन् वणिक्पुत्रस्य पश्यतः

prakāmatṛpte preta ca vāridhānyodanaṃ tathā / antardhānamagād brahman vaṇikputrasya paśyataḥ

हिन्दी अर्थ

सुरथं हसती प्राह संरोहत्पुलका सखीम् योऽसौ युवा नीलघनप्रकाशः

English

The god of gods reached on Himalaya within second. The mountains rode on elephants had surrounded him from four sides.

अध्याय ५३

श्लोक 38

ततस्तदद्भुततमं दृष्ट्वा स मतिमान् वणिक् ।पप्रच्छ तं प्रेतपालं कौतूहलमना वशी

tatastadadbhutatamaṃ dṛṣṭvā sa matimān vaṇik / papraccha taṃ pretapālaṃ kautūhalamanā vaśī

हिन्दी अर्थ

आपके शापसे (ही) मैं बन्दर हो गया हूँ। कपिकीं (स्वाभाविक) चञ्चलतारूपी दोषसे मैंने जिन बहुत-से पापोंको किया है, वे सभी नष्ट हो जायँ। उसके बाद ऋतध्वजने कहा --जब तुम घृताचीसे महाबलवान् पुत्र

English

rRt qqm KFratfenfe: ^ r cKiR ro ^ i

अध्याय ५३

श्लोक 39

अरण्ये निर्जने साधो कुतो ऽन्नस्य समुद्भवः ।कुतश्च वारिधानीयं संपूर्णा परमाम्भसा

araṇye nirjane sādho kuto 'nnasya samudbhavaḥ / kutaśca vāridhānīyaṃ saṃpūrṇā paramāmbhasā

हिन्दी अर्थ

उत्पन्न करोगे तब शापका अन्त होगा। तब ऐसा कहनेपर वह कपिश्रेष्ठ अत्यन्त हर्षित हो गया कृशोदरि! वह शीघ्र ही महानदीमें स्नान करनेके लिये उतरा। उसके बाद वे सब क्रमशः ख्रानकर पितरों और देवोंके तर्पण-अर्चन कर रथसे चले गये एवं घृताची स्वर्गमें उड़ गयी। महावेगशाली श्रेष्ठ कपिने भी

English

God Sankara saluted the king mountain and other mountains saluted Siva. He was filled

अध्याय ५३

श्लोक 40

तथामी तव ये भृत्यास्त्वत्तस्ते वर्मतः कृशाः ।भवानपि च तेजस्वी किञ्चित्पुष्टवपुः शुभः

tathāmī tava ye bhṛtyāstvattaste varmataḥ kṛśāḥ / bhavānapi ca tejasvī kiñcitpuṣṭavapuḥ śubhaḥ

हिन्दी अर्थ

उसका अनुसरण किया। उस बन्दरने रूपसे सम्पन्न घृताचीको देखा। उस कामिनी (घृताची)-ने भी बलवानोंमें श्रेष्ठ उत्तम कपिको देखकर एवं उसे विश्वकर्मा जानकर उसकी कामना की। उसके बाद कोलाहल नामसे

English

God Sankara on bull entered in the grand palace of king mountain with gods and counsellors following Nandi the guide.

अध्याय ५३

श्लोक 41

शुक्लवस्त्रपरीधानो बहूनां परिपालकः ।सर्वमेतन्ममाचक्ष्व को भवान् का शमी त्वियम्

śuklavastraparīdhāno bahūnāṃ paripālakaḥ / sarvametanmamācakṣva ko bhavān kā śamī tviyam

हिन्दी अर्थ

विख्यात श्रेष्ठ पर्वतपर उस बन्दरने घृताचीके साथ एवं घृताचीने उस श्रेष्ठ बन्दरके साथ आनन्द-क्रीड़ा की। इस प्रकार बहुत दिनोंतक क्रीड़ा करते हुए वे दोनों विन्ध्यपर्वतपर पहुँचे वे पाँचों श्रेष्ट व्यक्ति भी उल्लसित होकर रथद्वारा दोपहरके समय सप्तगोदावर जलवाले उस तीर्थमें पहुँचे। वहाँ जाकर वे विश्राम करनेके लिये शीघ्रतासे नीचे उतरे। उनके सारथियोंने भी स्त्रान किया एवं

English

ftSf «b4 MRcMmU ^’Rieeii’jciFHci'lJI ^ ^ |

अध्याय ५३

श्लोक 42

इत्थं वणिक्सुतवचः श्रुत्वासौ प्रेतनायकः ।शशंस सर्वमस्याद्यं यथावृत्तं पुरातनम्

itthaṃ vaṇiksutavacaḥ śrutvāsau pretanāyakaḥ / śaśaṃsa sarvamasyādyaṃ yathāvṛttaṃ purātanam

हिन्दी अर्थ

घोड़ोंको जल पिलाकर तथा नहला-धुलाकर (उन्हें) सुन्दर वन-प्रदेशमें विचरण करनेके लिये छोड़ दिया। मुहूर्तभरमें ही हरियालीसे हरे-भरे स्थानमें वे घोड़े तृप्त हो गये। उसके बाद वे सभी (घोड़े) उत्तम देव-

English

The women living in city left their respective works and engrossed in seeing Jlmutaketu Sankara when the heard commotion of his arrival.

अध्याय ५३

श्लोक 43

अहमासं पुरा विप्रः शाकले नगरोत्तमे ।सोमशर्मेति विख्यातो बहुलागर्भसंभवः

ahamāsaṃ purā vipraḥ śākale nagarottame / somaśarmeti vikhyāto bahulāgarbhasaṃbhavaḥ

हिन्दी अर्थ

मन्दिरके पास दौड़ने लगे। घोड़ोंके टापका शब्द सुनकर श्रेष्ठ स्त्रियाँ "यह क्या है' ऐसा कहकर हाटकेश्वर (-के मन्दिरमे) गयीं एवं छतपर चढ़कर सभी ओर देखने लगीं उन कन्याओंने तीर्थे जलमें स्नान करते हुए उन श्रेष्ठ पुरुषोंको देखा। फिर चित्राङ्गदाने जया-मण्डल धारण करनेवाले नृपति सुरथको देखा। रोमाञ्चित होकर उसने हँसती हुई सखीसे कहा--नीले मेघके समान

English

■RMo&HH ilKId dRtf&q Vlfa*ftl

अध्याय ५३

श्लोक 44

ममास्ति च वणिक् श्रीमान् प्राति वेश्यो महाधनः ।स तु सोमश्रवा नाम विष्णुभक्तो महायशाः

mamāsti ca vaṇik śrīmān prāti veśyo mahādhanaḥ / sa tu somaśravā nāma viṣṇubhakto mahāyaśāḥ

हिन्दी अर्थ

वर्ण तथा लम्बी भुजाओंवाला वह जो सुन्दर युवा पुरुष

English

A woman with half made garland in one hand and scattered hair on other, rushed towards Sankara.

अध्याय ५३

श्लोक 45

सो ऽहं कदर्यो मूढात्मा धने ऽपि सति दुर्मतिः ।न ददामि द्विजातिभ्यो न चाश्नाम्यन्नमुत्तमम्

so 'haṃ kadaryo mūḍhātmā dhane 'pi sati durmatiḥ / na dadāmi dvijātibhyo na cāśnāmyannamuttamam

हिन्दी अर्थ

स एव नूनं नरदेवसूनु- र्वृतो मया पूर्वतरं पतिर्य: समासताग्रतः शम्भोर्गायन्त्यो गीतिकां शुभाम्

English

Another woman was smearing mahavara on her feet but when she heard the commotion, forgot that she had smeared mahavara on a single foot.

अध्याय ५३

श्लोक 46

प्रमादाद् यदि भुञ्जामि दधिक्षीरघृतान्वितम् ।ततो रात्रौ नृभिर् घोरैस्ताड्यते मम विग्रहः

pramādād yadi bhuñjāmi dadhikṣīraghṛtānvitam / tato rātrau nṛbhir ghoraistāḍyate mama vigrahaḥ

हिन्दी अर्थ

नमोऽस्तु शर्व शम्भो त्रिनेत्र चारुगात्र त्रैलोक्यनाथ उमापते दक्षयज्ञविध्वंसकर कामाङ्गनाशन घोर पापप्रणाशन महापुरुष महोग्मूर्ते सर्वसत्त्वक्षयंकर शुभङ्कर महेश्वर त्रिशूलधारिन् स्मरारे गुहावासिन्

English

One more woman rushed towards Siva with Anjana on a eye and the pouch and splint for

अध्याय ५३

श्लोक 47

प्रातर्भवति मे घोरा मृत्युतुल्या विषूचिका ।न च कश्चिन्माभ्यासे तत्र तिष्ठति बान्धवः

prātarbhavati me ghorā mṛtyutulyā viṣūcikā / na ca kaścinmābhyāse tatra tiṣṭhati bāndhavaḥ

हिन्दी अर्थ

विभूषितशरीर वामचक्षुः वामदेवप्रजाध्यक्ष भगाक्ष्णोः क्षयङ्कर भीमसेन महासेननाथ पशुपते कामाङ्गदहन चत्वरवासिन् शिव महादेव ईशान शङ्कर भीम भव कालिन्दीप्रिय श्रीकण्ठ नीलकण्ठ अपराजित रिपुभयङ्कर सन्तोषपते वामदेव अघोर तत्पुरुष महाघोर अधोरमूर्ते शान्त सरस्वतीकान्त कीनाट सहस्त्रमूर्त महोद्भव विभो कालाग्निरुद्र रुद्र हर महीधरप्रिय

English

frMrlcIHWdRI ^V^MR-M IIR^II

अध्याय ५३

श्लोक 48

कथं कथमपि प्राणा मया संप्रतिधारिताः ।एवमेतादृशः पापी निवसाम्यतिनिर्घृणः

kathaṃ kathamapi prāṇā mayā saṃpratidhāritāḥ / evametādṛśaḥ pāpī nivasāmyatinirghṛṇaḥ

हिन्दी अर्थ

सर्वतीर्थाधिवास हंस कामेश्वर केदाराधिपते परिपूर्ण मुचुकुन्द मधुनिवासिन् कृपाणपाणे भयङ्कर विद्याराज

English

In a passion to see Sankara, another woman had forgotten that she was changing apparels. She rushed naked with clothes on her hand.

अध्याय ५३

श्लोक 49

सौवीरतिलपिण्याकसक्तुशाकादिभोनैः ।क्षपयामि कदन्नाद्यैरात्मानं कालयापनैः

sauvīratilapiṇyākasaktuśākādibhonaiḥ / kṣapayāmi kadannādyairātmānaṃ kālayāpanaiḥ

हिन्दी अर्थ

गालव-प्रसङ्ग, चित्राङ्गदा-वेदवती-वृत्तान्त, कन्याओंकी खोज, घृताची-वृत्तान्त दिखलायी पड़ रहा है, निश्चय ही पहले (जन्ममें) मैंने उसी राजपुत्रको पतिरूपसे वरण किया था। इसमें कुछ विचारनेकी आवश्यकता नहीं है। स्वर्णके समान वर्णवाले जो व्यक्ति श्वेत जटाभारको धारण किये हुए

English

^-diilddu-dMl^lM *u*rHueiui I aifr^I W WIT Td

अध्याय ५३

श्लोक 50

एवं तत्रासतो मह्यं महान् कालो ऽभ्यगादथ ।श्रवणद्वादशी नाम मासि भाद्रपदे ऽभवत्

evaṃ tatrāsato mahyaṃ mahān kālo 'bhyagādatha / śravaṇadvādaśī nāma māsi bhādrapade 'bhavat

हिन्दी अर्थ

हैं वे निश्चय ही तपस्वियोंमें श्रेष्ठ ऋतध्वज ही हैं (इसमें शङ्का नहीं है)। उसके बाद नन्दयन्तीने सखियोंसे हर्षित होकर कहा --वह दूसरा व्यक्ति निःसन्देह इन्हीं ऋतध्वजके पुत्र जाबालि हैं। इस प्रकार

English

On thin loin virgin with heavy breasts felt uneasiness due to mature youth while running and began to condemn her youth for such disturbance in seeing Sankara.

अध्याय ५३

श्लोक 51

ततो नागरिको लोको गतः स्नातुं हि संगमम् ।इरावत्या नड्वलाया ब्रह्मक्षत्रपुरस्सरः

tato nāgariko loko gataḥ snātuṃ hi saṃgamam / irāvatyā naḍvalāyā brahmakṣatrapurassaraḥ

हिन्दी अर्थ

कहकर वे सभी छतसे उतरीं एवं शङ्करके सामने बैठकर कल्याण करनेवाले गीतका गान करने (स्तुति करने) लगी -- हे शर्व! है शम्भो! है तीन नेत्रवाले! है सुन्दर गात्रवाले! है तीनों लोकोंके स्वामिन्! है उमापते! है दक्ष यज्ञको विध्वस्त करनेवाले ! है कामदेवके नाश करनेवाले! हे घोर! है पापके नष्ट करनेवाले! है महापुरुष! हे

English

ggir tff viHKSfluri ft: I

अध्याय ५३

श्लोक 52

प्रातिवेश्यप्रसंगेन तत्राप्यनुगतो ऽस्म्यहम् ।कृतोपवासः शुचिमानेकादश्यां यतव्रतः

prātiveśyaprasaṃgena tatrāpyanugato 'smyaham / kṛtopavāsaḥ śucimānekādaśyāṃ yatavrataḥ

हिन्दी अर्थ

भयङ्कर मूर्तिवाले! है सम्पूर्ण प्राणियोंके क्षय करनेवाले! हे शुभ करनेवाले! है महेश्वर! है त्रिशूलधारिन्! हे कामशत्रो! है गुफामें रहनेवाले है दिगम्बर! है महाशङ्कके शिरोभूषणवाले! है जटाधर! है कपालमालासे विभूषित

English

II Sankara on bull thus, entered in the divine palace of his father-in-law by arousing passions in the heart of the women living in

अध्याय ५३

श्लोक 53

ततः संगमतोयेन वारिधानीं दृढां नवाम् ।संपूर्णां वस्तुसंवीतां छत्रोपानहसंयुताम्

tataḥ saṃgamatoyena vāridhānīṃ dṛḍhāṃ navām / saṃpūrṇāṃ vastusaṃvītāṃ chatropānahasaṃyutām

हिन्दी अर्थ

शरीरवाले! है वामचक्षु! है वामदेव! है प्रजाध्यक्ष! हे भगाक्षिके क्षयकारिन्! है भीमसेन! है महासेननाथ! हे पशुपते! है कामदेवके जलानेवाले! है चत्वरवासिन् (चबूतरेपर वास करनेवाले)! है शिव! है महादेव! हे ईशान! है शङ्कर! है भीम! है भव! है वृषभध्वज! हे जटिल! है प्रौढ! है महानाट्येश्वर! है भूरिरत्र (रत्रराशि)! है अविमुक्त! है रुद्र! है रुद्रेश्वर! हे स्थाणो! है एकलिङ्ग! है कालिन्दीप्रिय! है श्रीकण्ठ! हे

English

cFT: JlfeE ITCPTtejsr ?T»j tTUT 5SJ<hfiq4)l<4l-

अध्याय ५३

श्लोक 54

सृत्पात्रमपि मिष्टस्य पूर्णं दध्योदनस्य ह ।प्रदत्तं ब्राह्मणेन्द्राय शुचये ज्ञानधर्मिणे

sṛtpātramapi miṣṭasya pūrṇaṃ dadhyodanasya ha / pradattaṃ brāhmaṇendrāya śucaye jñānadharmiṇe

हिन्दी अर्थ

नीलकण्ठ! है अपराजित! है रिपुभयङ्कर! है सन्तोषपते! हे वामदेव! है अघोर! है तत्पुरुष! है महाघोर! हे अघोरमूर्ते! है शान्त! है सरस्वतीकान्त! है कीनाट! हे सहस्तमूर्ते ! है महोद्धव! है विभो! है कालाग्निरुद्र! हे

English

The women present in the palace said king mountain that the penance has been rightly observed as Sankara is indeed, a great god. "ft

अध्याय ५३

श्लोक 55

तदेव जीवता दत्तं मया दानं वणिक्सुत ।वर्षाणां सप्ततीनां वै नान्यद् दत्तं हि किञ्चन

tadeva jīvatā dattaṃ mayā dānaṃ vaṇiksuta / varṣāṇāṃ saptatīnāṃ vai nānyad dattaṃ hi kiñcana

हिन्दी अर्थ

रुद्र! है हर! है महीधरप्रिय ! है सर्वतीर्थाधिवास! है हंस! हे कामेश्वर! है केदाराधिपते! है परिपूर्ण! है मुचुकुन्द! हे मधुनिवासिन्! है कपालपाणे! है भयङ्कर! है विद्याराज! सोमराज कामराज रञ्जक अञ्जनराजकन्याहृदचल-

English

55^: {JJFift ^lfeqT?rairlf

अध्याय ५३

श्लोक 56

मृतः प्रेतत्वमापन्नो दत्त्वा प्रेतान्नमेव हि ।अमी चादत्तदानास्तु मदन्नेनोपजीविनः

mṛtaḥ pretatvamāpanno dattvā pretānnameva hi / amī cādattadānāstu madannenopajīvinaḥ

हिन्दी अर्थ

वसते समुद्रशायिन् गजमुख घण्टेश्चर गोकर्ण ब्रह्मयोने

English

This Sankara had once set in fire Kandarpa (god of sex). He is Kratuksayl, Dak$a destroyer, Bhagaksi hanta, Suladhara and

अध्याय ५३

श्लोक 57

एतते कारणं प्रोक्तं यत्तदन्नं मयाम्भसा ।दत्तं तदिदमायाति मध्याह्ने ऽपि दिने दिने

etate kāraṇaṃ proktaṃ yattadannaṃ mayāmbhasā / dattaṃ tadidamāyāti madhyāhne 'pi dine dine

हिन्दी अर्थ

'सहस्त्रवक्त्राक्षिचरण हाटकेश्वर नमोऽस्तु ते॥ द्रष्टुं त्रैलोक्यकर्तारं त्र्यम्बकं हाटकेश्वरम्

English

O Sankara, the holder of trident, the wearer of the tiger’s skin, the subduer of Kala, the god of death, the wearer of the necklace and Kundala of great serpents, lover of Parvatl! “Frequent salute to you.”

अध्याय ५३

श्लोक 58

यावन्नाहं च भुञ्जामि न तावत् क्षयमेति वै ।मयि भुक्ते च पीते च सर्वमन्तर्हितं भवेत्

yāvannāhaṃ ca bhuñjāmi na tāvat kṣayameti vai / mayi bhukte ca pīte ca sarvamantarhitaṃ bhavet

हिन्दी अर्थ

ततः सुदेवतनयो विश्वकर्मसुता प्रियाम्। दृष्टा हषितचित्तस्तु संरोहत्पुलको बभौ

English

4.4-41: ft^UfjS^ddMdl «IKW44)MfriH:l MjJtHI<£ili gd 9 ?q^diqibTl^Pa t^ll

अध्याय ५३

श्लोक 59

यच्चातपत्रमददं सो ऽयं जातः शमीतरुः ।उवानद्युगले दत्ते प्रेतो मे वाहनो ऽभवत्

yaccātapatramadadaṃ so 'yaṃ jātaḥ śamītaruḥ / uvānadyugale datte preto me vāhano 'bhavat

हिन्दी अर्थ

ततस्तु सहसाऽभ्येत्य देवेशं हाटकेश्वरम्। स्त्रात्वा गोदावरीतीर्थे दिदृक्षुहाटकेश्वरम्

English

So propitiated and shadowed by umbrella held by Indra, adorable to Siddhas and Yaksas, with the bracelet of a snake, ash- smeared body, with Brahma delighted at heart before him, followed by Visnu, Siva went at the marital altar where sacred fire was blazing.

अध्याय ५३

श्लोक 60

इयं तोवक्ता धर्मज्ञ मया कीनाशतात्मनः ।श्रवणद्वादशीपुण्यं तवोक्यं पुणयवर्धरम्

iyaṃ tovaktā dharmajña mayā kīnāśatātmanaḥ / śravaṇadvādaśīpuṇyaṃ tavokyaṃ puṇayavardharam

हिन्दी अर्थ

हे सोमराज! है कामराज! है रञ्जक! है अञ्जनराजकन्या (काली)-के हृदयमें सदा रहनेवाले! है समुद्रशायिन्! हे गजमुख! है घण्टेश्वर! है गोकर्ण! है ब्रह्मयोने! हे हजार मुख, आँख एवं चरणवाले! है हाटकेश्वर!

English

'JR: cwrdl: ^Hici^ull ^JTgiRt Ril'd: ^jiiRRii STdt cdi^lwn d*^ii(dcii^fg<*i:ii

अध्याय ५३

श्लोक 61

इत्येवमुक्ते वचने वणिक्पुत्रो ऽब्रवीद् वचः ।यन्मया तात कर्त्तव्यं तदनुज्ञातुमर्हसि

ityevamukte vacane vaṇikputro 'bravīd vacaḥ / yanmayā tāta karttavyaṃ tadanujñātumarhasi

हिन्दी अर्थ

आपको नमस्कार है। इसी बीच समस्त ऋषि एवं राजालोग तीनों 'लोकोंके कर्ता भगवान् त्र्यम्बक हारकेश्वरका दर्शन करने वहाँ पहुँच गये और भलीभाँति स्नान करनेके बाद ऊपर चढ़कर उन लोगोंने देवताके अभिमुख

English

The citizen and inhabitants of palace were busy with making-up Kali, giving proper entertainment to gods when Siva visited there with his attendants and Sap tar sis. The gentlemen usually keep them busy with serving the guests so came.

अध्याय ५३

श्लोक 62

तत् तस्य वचनं श्रुत्वा वणिक्पुत्रस्य नारद ।प्रेतपालो वचः प्राह स्वार्थसिद्धिकरं ततः

tat tasya vacanaṃ śrutvā vaṇikputrasya nārada / pretapālo vacaḥ prāha svārthasiddhikaraṃ tataḥ

हिन्दी अर्थ

बैठकर गीत गाती हुई (स्तुति करती हुई) स्त्रयोंको देखा। उसके बाद वसुदेवके पुत्र अपनी प्रिया विश्वकर्माकी पुत्रीको देखकर हर्षसे गद्दद हो गये। योगी ऋतध्वज भी तन्वङ्गी चित्राङ्गदाको वहाँ स्थित देख एवं

English

The women decorated Parvati with white silk garments and her brother took her to Sankara for marital rituals to be

अध्याय ५३

श्लोक 63

यत् त्वया तात कर्त्तव्यं मद्धितार्थं महामते ।कथयिष्यामि तत् सम्यक् तव श्रेयस्करं मम

yat tvayā tāta karttavyaṃ maddhitārthaṃ mahāmate / kathayiṣyāmi tat samyak tava śreyaskaraṃ mama

हिन्दी अर्थ

पहचानकर महान् हर्षमें भर गये। उसके बाद सभी व्यक्ति शीघ्र ही देवाधिदेव हाटकेश्वर भगवानके निकट गये एवं त्रिलोचनकी पूजाकर क्रमशः खड़े होकर स्तुति करने लगे चित्राङ्गदाने भी उन ऋतध्वज आदिको देखकर उन तन्वङ्गी (कन्याओं)-के साथ उठकर प्रणाम किया।

English

ferai: tjtt: ?ichT^51cTH^i

अध्याय ५३

श्लोक 64

गयायां तीर्थजुष्टायां स्नात्वा शौचसमन्वितः ।मम नाम समुद्दिश्य पिण्डनिर्वपणं कुरु

gayāyāṃ tīrthajuṣṭāyāṃ snātvā śaucasamanvitaḥ / mama nāma samuddiśya piṇḍanirvapaṇaṃ kuru

हिन्दी अर्थ

प्रसन्नतासे राजाओंके साथ सुखपूर्वक बैठ गये। सुन्दरि! उसके बाद गोदावरीतीर्थमें त्रानकर हारकेश्वर भगवानका दर्शन करनेकी इच्छावाला वह श्रेष्ठ बन्दर भी घृताचीके साथ वहाँ पहुँचा। फिर घृताचीने अपनी शोभाशालिनी

English

The gods seated in gold studded palace began to see the marital rituals of Sankara and Parvati. Mahadeva too seated at the sacred place with thin body Parvati.

अध्याय ५३

श्लोक 65

तत्र पिण्डप्रदानेन प्रेतभावादहं सखे ।मुक्तस्तु सर्वदातृणां यास्यामि सहलोकताम्

tatra piṇḍapradānena pretabhāvādahaṃ sakhe / muktastu sarvadātṛṇāṃ yāsyāmi sahalokatām

हिन्दी अर्थ

कृशाङ्गी पुत्रीको देखा। वह सुन्दरी भी अपनी उस माताको देखकर हर्षित हो गयी उसके बाद घृताचीने अपनी पुत्रीको भलीभाँति गले लगाया। स्रेहसे आँखोंमें आँसू भरकर वह (अपनी) पुत्रीको बार-बार सूँघने लगी --आशीर्वादात्मक शुभ भावना करने लगी। उसके बाद श्रीमान् ऋतध्वजने

English

iraiPT 5 <RlRd-l<u sFlUltf dcflSW^

अध्याय ५३

श्लोक 66

यथेयं द्वादशी पुण्या मासि प्रौष्ठपदे सिता ।बुधश्रवणसंयुक्ता सातिश्रेयस्करी स्मृता

yatheyaṃ dvādaśī puṇyā māsi prauṣṭhapade sitā / budhaśravaṇasaṃyuktā sātiśreyaskarī smṛtā

हिन्दी अर्थ

कपिसे कहा-तुम महाजन नामके गुह्यमकको ले आनेके

English

In a circled land duly decorated by beautiful flowers, Sankara and Parvati sprinkled water and fragrant scents on each other. They hit each other by Muktadama and then made the earth red by pouring vermilion.

अध्याय ५३

श्लोक 67

इत्येवमुक्त्वा वणिजं प्रेतराजो ऽनुगैः सह ।स्वनामानि यथान्यायं सम्यगाख्यातवाञ्छुचिः

ityevamuktvā vaṇijaṃ pretarājo 'nugaiḥ saha / svanāmāni yathānyāyaṃ samyagākhyātavāñchuciḥ

हिन्दी अर्थ

पातालादपि हैत्येशं वीरं कन्दरमालिनम्। स्वर्गाद् गन्धर्वराजानं पर्जन्यं शीघ्रमानय इत्येवमुक्ते मुनिना प्राह देववती कपिम्। गालवं वानरश्रेष्ठ इहानेतुं त्वमहसि

English

3IR^I^nht Pfert ^Pfll 3<SII

अध्याय ५३

श्लोक 68

प्रेतस्कन्धे समारोप्य त्याजितो मरुमण्डलम् ।रम्ये ऽथ शूरसेनाख्ये देशे प्राप्तः स वै वणिक्

pretaskandhe samāropya tyājito marumaṇḍalam / ramye 'tha śūrasenākhye deśe prāptaḥ sa vai vaṇik

हिन्दी अर्थ

तत्र स्त्रात्वा विधानेन सम्प्राप्तो हाटकेश्वरम्। ददृशे नन्दयन्ती च स्थितां देववतीमपि

English

Thus, Sankara with the daughter of Himalaya came at the south altar surrounded by Rsis when such playing was over. Then Himavan came there with white madhuparka. He had put Pavitrl and white garments on body.

अध्याय ५३

श्लोक 69

स्वकर्मधर्मयोगेन धनमुच्चावचं बहु ।उवार्जयित्वा प्रययौ गयाशीर्षमनुत्तमम्

svakarmadharmayogena dhanamuccāvacaṃ bahu / uvārjayitvā prayayau gayāśīrṣamanuttamam

हिन्दी अर्थ

स चार्चिष्यन्महादेवं महर्षीनभ्यवादयत्। ते चापि नृपत्िश्रेष्ठास्तं सम्पूज्य तपोधनम् नन्दयन्त्यादिका दृष्टा सपितृका वरानना

English

PH^iar ^[dyis^Hl^u-fiuoii

अध्याय ५३

श्लोक 70

पिण्डनिर्वपणं तत्र प्रेतानामनुपूर्वशः ।चकार स्वपितॄणां च दायादानामनन्तरम्

piṇḍanirvapaṇaṃ tatra pretānāmanupūrvaśaḥ / cakāra svapitṝṇāṃ ca dāyādānāmanantaram

हिन्दी अर्थ

सवाष्यनयना जाता विश्वकर्मसुता तदा। अथ तामाह स मुनिः सत्यं सत्यध्वजो वचः

English

Sankara was looking at east direction while seated and the king mountain took seat properly facing

अध्याय ५३

श्लोक 71

आत्मनश्च महाबुद्धिर्महाबोध्यं तिलैर्विना ।पिण्डनिर्वपणं चक्रे तथान्यानपि गोत्रजान्

ātmanaśca mahābuddhirmahābodhyaṃ tilairvinā / piṇḍanirvapaṇaṃ cakre tathānyānapi gotrajān

हिन्दी अर्थ

सा तद्वचनमाकर्ण्य ब्रीडोपहतचेतना कथं तु विश्वकर्माऽसौ वानरत्वं गतोऽधुना। दुष्पुत्र्या मयि जातायां तस्मात् त्यक्ष्ये कलेवरम्

English

The mountain (Himalaya) with folded hands spoke words leading to virtue and merit

अध्याय ५३

श्लोक 72

एवं प्रदत्तेष्वथ वै पिण्डेषु प्रेतभावतः ।विमुक्तास्ते द्विज प्रेता ब्रह्मलोकं ततो गताः

evaṃ pradatteṣvatha vai piṇḍeṣu pretabhāvataḥ / vimuktāste dvija pretā brahmalokaṃ tato gatāḥ

हिन्दी अर्थ

गालव-प्रसङ्ग, चित्राङ्गदा-वेदवती-वृत्तान्त, कन्याओंकी खोज, घृताची-वृत्तान्त

English

Himavan said- O god! Please, accept the grand daughter of Pulahagraja, Pitara's daughter's daughter and my daughter being so given to you.

अध्याय ५३

श्लोक 73

स चापि हि वणिक्पुत्रो निजमालयमाव्रजत् ।श्रवणद्वादशीं कृत्वा कालधर्ममुपेयिवान्

sa cāpi hi vaṇikputro nijamālayamāvrajat / śravaṇadvādaśīṃ kṛtvā kāladharmamupeyivān

हिन्दी अर्थ

लिये अञ्जन नामक पर्वतपर चले जाओ। फिर पातालसे वीर हैत्येश्वर कन्दरमालीको और स्वर्गसे गन्धर्वराज पर्जन्यको यहाँ शीघ्र बुला लाओ। मुनिके इस प्रकार 'कहनेपर देववतीने बन्दरसे कहा-कपिश्रष्ठ! गालवको भी आप यहाँ बुला लावें

English

urara; irate? «pra^n5^fera;ii'«3ii

अध्याय ५३

श्लोक 74

गन्धर्वलोके सुचिरं भोगान् भुक्त्वा सुदुर्लभान् ।मानुष्यं जन्ममासाद्य स बभौ शाकले विराट्

gandharvaloke suciraṃ bhogān bhuktvā sudurlabhān / mānuṣyaṃ janmamāsādya sa babhau śākale virāṭ

हिन्दी अर्थ

ऐसा कहनेपर वायुके समान पराक्रमवाला कपि अझ्जनपर्वतपर पहुँच गया और (गुह्मकको) आमन्त्रित कर पुनः सुमेरुपर्वतपर प्रविष्ट हो गया। वहाँ उसने पर्जन्यको आमन्त्रित किया और सप्तगोदावरतीर्थमें

English

Pulastya said- "With these words the king mountain joined the hand of Parvati with that of Sankara and pronounced loudly- O god! Accept her." i

अध्याय ५३

श्लोक 75

स्वधर्मकर्मवृत्तिस्थः श्रवणद्वादशीरतः ।कालधर्ममवाप्यासौ गुह्यकावासमाश्रयत्

svadharmakarmavṛttisthaḥ śravaṇadvādaśīrataḥ / kāladharmamavāpyāsau guhyakāvāsamāśrayat

हिन्दी अर्थ

स्थित महाश्रममें उन्हें भेजनेके बाद वह फिर पाताललोकमें प्रविष्ट हो गया। वहाँ (जाकर उसने) महापराक्रमी कन्दरमालीको आमन्त्रित किया। वेगशाली बन्दर फिर पातालसे निकलकर पृथ्वीपर घूमने-फिरने लगा। तपोनिधि गालवको माहिष्मतीके निकट देखकर उसने छलाँग भरी और उन्हें शीघ्र सप्तगोदावरके जलके निकट ला दिया। वहाँ विधानसे स्नान करनेके बाद वह हाटकेश्वरके समीप पहुँचा और उसने वहाँ बैठी हुई नन्दयन्ती तथा

English

* prater grsftr ^ gFrarai:i

अध्याय ५३

श्लोक 76

तत्रोष्य सुचिरं कालं भोगान् भुक्त्वाथ कामतः ।मर्त्यलोकमनुप्राप्य राजन्यतनयो ऽभवत्

tatroṣya suciraṃ kālaṃ bhogān bhuktvātha kāmataḥ / martyalokamanuprāpya rājanyatanayo 'bhavat

हिन्दी अर्थ

देववतीको भी देखा

English

Sankara said- O king mountain! I am without father, mother, coparceners or siblings. I live on the peak of a mountain lonely. I accept your daughter.

अध्याय ५३

श्लोक 77

तत्रापि क्षत्रवृत्तिस्थो दानभोगरतो वशी ।गोग्रहे ऽरिगणाञ्जित्वा कालधर्ममुपेयिवान् ।शक्रलोकं स संप्राप्य देवैः सर्वैः सुपूजितः

tatrāpi kṣatravṛttistho dānabhogarato vaśī / gograhe 'rigaṇāñjitvā kāladharmamupeyivān / śakralokaṃ sa saṃprāpya devaiḥ sarvaiḥ supūjitaḥ

हिन्दी अर्थ

उन सभीने गालवको देखकर उठकर उनको प्रणाम किया। उन्होंने भी महादेवकी पूजा कर महर्षियोंको प्रणाम किया। उन श्रेष्ठ राजाओंने भी उन तपस्वीकी पूजा की तथा वे अत्यन्त हर्षित होकर सुखपूर्वक बैठ गये। उनके बैठ जानेपर कपिद्वारा आमन्त्रित किये गये यक्ष, महानुभाव गन्धर्व एवं दानव वहाँ आ गये। उन्हें आया हुआ देखते ही उन विशालनयना पुत्रियोंके नेत्रॉमें ख्रेहसे आँसू भर आये। वे सभी अपने-अपने पिताके

English

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अध्याय ५३

श्लोक 78

पुण्यक्षयात् परिभ्रष्टः शाकले सो ऽभवद् द्विजः ।ततो विकटरूपो ऽसौ सर्वशास्त्रार्थपारगः

puṇyakṣayāt paribhraṣṭaḥ śākale so 'bhavad dvijaḥ / tato vikaṭarūpo 'sau sarvaśāstrārthapāragaḥ

हिन्दी अर्थ

गले लग गयी । नन्दयन्ती आदिको पिताके साथ उपस्थित हुई देखकर विश्वकर्माकी सुन्दरी पुत्रीके नेत्रॉमें (पिताकी स्मृतिमें) आँसू छलक आये। उसके बाद ऋतध्वज मुनिने उससे सच्ची बात कह दी-

English

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अध्याय ५३

श्लोक 79

विवाहयद् द्विजसुतां रूपेणानुपमां द्विज ।सावमेने च भर्त्तारं सुशीलमपि भामिनी

vivāhayad dvijasutāṃ rūpeṇānupamāṃ dvija / sāvamene ca bharttāraṃ suśīlamapi bhāminī

हिन्दी अर्थ

पुत्रि! तुम उदास मत होओ। यह बन्दर ही तुम्हारा पिता है। उस वचनको सुनकर वह लजा गयी; क्योंकि मुझ कुपुत्रीके जन्म लेनेके कारण ये विश्वकर्मा इस समय बन्दर हो गये हैँ; अतः (उसने सोचा-) मैं अपने शरीरका त्याग करूँगी। मनमें इस प्रकार

English

Sankara went Kautukagara (isolated place) when marriage was fully solemnised. He enjoyed courtship with Parvatl at night and got up early in the next morning.

अध्याय ५३

श्लोक 80

विरूपमिति मन्वाना ततस्सोभूत् सुदुःखितः ।ततो निर्वेदसंयुक्तो गत्वाश्रमपदं महत्

virūpamiti manvānā tatassobhūt suduḥkhitaḥ / tato nirvedasaṃyukto gatvāśramapadaṃ mahat

हिन्दी अर्थ

परित्रायस्व मां ब्रह्मन् पापोपहतचेतनाम्

English

fl'frsH’pflr -HHcnui tpj: ■p vilyyiMdimi $ *11

अध्याय ५३

श्लोक 81

इरावत्यास्तटे श्रीमान् रूपधारिणमासदत् ।तमाराध्य जगन्नाथं नक्षत्रपुरुषेण हि

irāvatyāstaṭe śrīmān rūpadhāriṇamāsadat / tamārādhya jagannāthaṃ nakṣatrapuruṣeṇa hi

हिन्दी अर्थ

अथोवाच मुनिस्तन्वीं मा विषादं कृथाधुना जातेऽपत्ये घृताच्यां तु नात्र कार्या विचारणा। इत्येवमुक्ते वचने मुनिना भावितात्मना

English

Sankara was happy to receive Parvatl as his bride and came back at Mandaracala immediately when king mountain had duly entertained him with all gods and

अध्याय ५३

श्लोक 82

सुरूपतामवाप्याग्र्यां तस्मिन्नेव च जन्मनि ।ततः प्रियो ऽभूद् भार्याया भोगवांश्चाभवद् वशी ।श्रवणद्वादशीभक्तः पूर्वाभ्यासादजायत

surūpatāmavāpyāgryāṃ tasminneva ca janmani / tataḥ priyo 'bhūd bhāryāyā bhogavāṃścābhavad vaśī / śravaṇadvādaśībhaktaḥ pūrvābhyāsādajāyata

हिन्दी अर्थ

भविष्यति पितुस्तुभ्यं मत्सकाशान्न संशय: । इत्येवमुक्ता संहृष्टा बभौ चित्राङ्गदा तदा

English

Astamurti Sankara then honoured and provided entertainment to Brahma, Visnu, Indra etc. gods, saluted them and bade farewell. He then began to live on Mandara mountain with his

अध्याय ५३

श्लोक 83

एवं पुरासौ द्विजपुङ्गवस्तु कुरूपरूपो भगवत्प्रसादात् ।अनङ्गरूपप्रतिमो बभूव मृश्च राजा स पुरूरवाभूत्

evaṃ purāsau dvijapuṅgavastu kurūparūpo bhagavatprasādāt / anaṅgarūpapratimo babhūva mṛśca rājā sa purūravābhūt

हिन्दी अर्थ

सर्वास्ता अपि तावन्तं कालं सुतनुकन्यकाः ततो दशसु मासेषु समतीतेष्वथाप्सराः

English

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स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/1_sanskr/3_purana/vamp__u.htm | https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_vAmanapurANasaromAhAtmya.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vamana Purana — Chapter 53
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.