Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
119
अध्याय 119 / 232

Adhyaya 119

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अध्याय ११९

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे इन्द्रतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नामाष्टादशोत्तरशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय ११९ श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेत्तु राजेन्द्र कह्लोडीतीर्थम् उत्तमम् ।रेवायाश्चोत्तरे कूले सर्वपापविनाशनम्

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe indratīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāmāṣṭādaśottaraśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 119 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gacchettu rājendra kahloḍītīrtham uttamam / revāyāścottare kūle sarvapāpavināśanam

हिन्दी अर्थ

उत्पादिता बलवता उदोर्णा यक्षराक्षसा: । केशिनीदुृहितुश्चेब नीलाया: क्षुद्रमानसाः

English

The Purana distinguishes between Bhutas and Pisacas. Bhutas are noble-souled sons of Bhuti, celibate yogins and devotees of God Siva. Pisacas arc the progeny of Kusmandl. The superstitions about Pisacas current at the time of this text are recorded in vv. 251-282.

अध्याय ११९

श्लोक 2

हितार्थं सर्वभूतानाम् ऋषिभिः स्थापितं पुरा ।तपसा तु समुद्धृत्य नर्मदायां महाम्भसि

hitārthaṃ sarvabhūtānām ṛṣibhiḥ sthāpitaṃ purā / tapasā tu samuddhṛtya narmadāyāṃ mahāmbhasi

हिन्दी अर्थ

आलम्बेयेन जनिता नेका: सुरसिकेन हि। नेला इति समाख्याता दुर्जया घोरविक़माः चरन्ति पृथिवों कछ्त्स्नां तत्न ते देवलोकिकाः । बहुत्वाच्चेब सर्गस्य तेषां वक्‍तुं न शकक्‍्यते १८० तस्यास्त्वपि च नीलाया विकचा नाम राक्षसी । दुहिता स्वभावबिकचा मन्दसत्त्वपराक़मा

English

These are the sixteen families born of Kusman- das: Ajamukhas, Vakramukhas, Purins, Skandins, Vipa- das, Angarikas, Kumbhapatras, Prakundakas, Upacarolukha- likas, Anarkas, Kukhandikas, Panipatras, Naitundas, Ornasas, Nipunas, and Sucimukhocchesanadas.

अध्याय ११९

श्लोक 3

स्नात्वा तु कपिलातीर्थे कपिलां यः प्रयच्छति ।श्रुत्वा चाख्यानकं दिव्यं ब्राह्मणाञ्छृणु यत्फलम्

snātvā tu kapilātīrthe kapilāṃ yaḥ prayacchati / śrutvā cākhyānakaṃ divyaṃ brāhmaṇāñchṛṇu yatphalam

हिन्दी अर्थ

दंष्ट्राक्षरा लविकृता महाकर्णा महोदरा: । हारका भीषकाश्चव तथेव क्वामकाः परे १८३ वेनकाश्न पिशाचाश्व वाहुकाः प्राशकाः परे । भुमिराक्षसका होते मन्दाः पुरुषविक्रमा: १८४ चरन्त्यदृष्टपरर्वाश्व नानाकारा ह्मनेकशः । उत्कृष्टबलसत्त्वा ये ते च वे खेचराः स्मृताः १८५ लक्षमात्रेण चा55काशं स्वल्पाः स्वल्पं चरन्ति बे । एतेव्यप्तिमिमं लोक शतशो5थ सहस्नरशः

English

Those who are born as Sukalpas 1 (?) should be known as Pisacas. There are infinite number of sons and grandsons of hideous nature and ignoble activities. Hence, understand the characteristics of Pisacas.

अध्याय ११९

श्लोक 4

सर्वेषामेव दानानां कपिलादानमुत्तमम् ।ब्राह्मणान्वेषितं पूर्वमृषिदेवसमागमे

sarveṣāmeva dānānāṃ kapilādānamuttamam / brāhmaṇānveṣitaṃ pūrvamṛṣidevasamāgame

हिन्दी अर्थ

भूमिराक्षसकः सर्वेरनेकः क्षुद्रराक्षसः। नानाप्रकारेराक्तानता नानादेशा: समन्‍्ततः १८७ नामक हैत्यों एवं राक्षसों को उत्पन्न किया, जो अपने पराक्रम से सचमुच महान् थे। बलवान कम्पन मामक यक्ष के द्वारा केशिनी के गर्भ से दूसरे महाबलवान यक्षों और राक्षसों की उत्पत्ति हुईं, जो महान् थे । केशिनी की कन्या नीला के संयोग से आलम्बेय गण के सुरसिक नामक राक्षस के द्वारा अनेक क्षुद्र चित्तवाले राक्षसों का जन्म हुआ, जो नेल नाम से विख्यात हुये ये नेल नामक राक्षसगण दुर्जेय और घोर पराक्रमी थे ।१७५०१७६। देविक

English

Pisacas have hair on all their limbs. Their eyes are round. They have claws and fangs. Their limbs are crooked. They are man-eaters and their faces are turned down.

अध्याय ११९

श्लोक 5

सद्यः प्रसूतां कपिलां शोभनां यः प्रयच्छति ।सोपवासो जितक्रोधस्तस्य पुण्यफलं शृणु

sadyaḥ prasūtāṃ kapilāṃ śobhanāṃ yaḥ prayacchati / sopavāso jitakrodhastasya puṇyaphalaṃ śṛṇu

हिन्दी अर्थ

एवं लौकिक--दोनों प्रकार को शक्तियों से सम्पन्न वे राक्षसगण सम्पूर्ण पृथ्वौ-मण्डल का भ्रमण करते थे । उनके वंश में उत्पन्न होनेवाली प्रज्ञाओं का बत्रिस्तार बहुत अधिक है, अतः कहा नहीं जा सकता ।ह८५०। उस नीला की भी एक पुत्री थी, जिसका नाम विकचा राक्षसी था, स्वभाव से वह परम ऋर और मध्यम पराक्रमवाली थी । उस विकचा के भी कुरूप निऋ त द्वारा अतिघोर स्वभाववाले सुरों (असुरों) की उत्पत्ति हुई, उनका क्रमानुसार

English

The Pisacas called Kusmandikas are devoid of hair on their heads or bodies. Skins and hides constitute their garments. They always eat gingelly seeds and flesh.

अध्याय ११९

श्लोक 6

ससमुद्रगुहा तेन सशैलवनकानना ।दत्ता चैव महाबाहो पृथिवी नात्र संशयः

sasamudraguhā tena saśailavanakānanā / dattā caiva mahābāho pṛthivī nātra saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

वर्णन सुनिये । वे घोर असुरगण विकराल दाढ़ोंवाले, कुरूप, लम्बे कानोंवाले, तथा विशाल पेटवाले थे, उनके इन राक्षसों का पराक्रम पुरुषों के समान था। ये विविध प्रकार के स्वरूप घारण कर इतने विकराल दिखलाई पड़ते हैं जितने भीषण स्वरूप को कोई नहीं देख सका था । इन भूमि राक्षसों में जो अधिक बलवामू. एवं पराक्रमी होते हैं वे भाकाशगामी कहे जाते हैं ।१५१-१८५। ये क्षुद्र राक्षषगण देखने में अति लघुकाय होने पर भी थोड़ी दूर तक आकाश प्रदेश में विचरण करते हैं। ये सेकड़ों, सहस्नों की संख्या में इस लोक को डेंके हुये है ।

English

Some Pis'acas have curved limbs, and feet. They walk in a zigzag manner. They should be known as Vakrapisacas. They are of crooked gait. They can assume any form as they please.

अध्याय ११९

श्लोक 7

वाचिकं मानसं पापं कर्मणा यत्पुरा कृतम् ।नश्यते कपिलां दत्त्वा सप्तजन्मार्जितं नृप

vācikaṃ mānasaṃ pāpaṃ karmaṇā yatpurā kṛtam / naśyate kapilāṃ dattvā saptajanmārjitaṃ nṛpa

हिन्दी अर्थ

इन सब विविध प्रकार के भूमिराक्षसों ओर अन्याय क्षुद्र राक्षसों से मिलकर चारों ओर से प्रायः सभी देशों

English

Some Pisacas have protruding bellies. Their noses are like snouts. Their bodies are short. Their heads and arms are small. These are called Nitunflakas. Gingelly seeds form

अध्याय ११९

श्लोक 8

भूमिदानं धनं धान्यं हस्त्यश्वकनकादिकम् ।कपिलादानस्यैकस्य कलां नार्हन्ति षोडशीम्

bhūmidānaṃ dhanaṃ dhānyaṃ hastyaśvakanakādikam / kapilādānasyaikasya kalāṃ nārhanti ṣoḍaśīm

हिन्दी अर्थ

भद्रका निकराः केचिद्यज्ननिष्पत्तिहेतुका: (? ) । सहखशतसंख्याता मत्यंलोकविचाचरिणः पुृतना मातृसामान्यास्तथा भुतभयंकरा: । बालानां सानुषे लोके ग्रहा वमानहेतुकाः १६० स्कन्दग्रहादयश्चेव आपकास्त्रासकादय: । कौमारास्ते तु विज्ञेया बालानां ग्रहवत्तय: १६१ स्‍्कन्दग्रहविशेषाणां मायिकानां तथव च्। पृतनानामभुतानां ये च लोकविनायका:

English

Some Pisacas have dwarfish forms 3. They are garrulous. They go about galloping. They are Anarkamarka

अध्याय ११९

श्लोक 9

तत्र तीर्थे नरः स्नात्वा कपिलां यः प्रयच्छति ।मृतो विष्णुपुरं याति गीयमानो ऽप्सरोगणैः

tatra tīrthe naraḥ snātvā kapilāṃ yaḥ prayacchati / mṛto viṣṇupuraṃ yāti gīyamāno 'psarogaṇaiḥ

हिन्दी अर्थ

सहत्रशतसंख्यानां मत्यलोकविचारिणाम् । एवं गणशतान्येव चरन्ति प्रथिवीमिमाम् ॥१€९३ यक्षाः पुण्यजना नाम तथा गे के5पि गुह्मकाः । यक्षा देवजनाश्चेब तथा पुण्यजनाश्र ये १३१६४ गुह्मकानां च् सर्वेषासगस्त्या ये चर राक्षसा: । पौलस्त्या राक्षसा ये च विश्चामित्राश्व ये स्मृता:

English

Some Pisacas keep their hands lifted up (always).

अध्याय ११९

श्लोक 10

यावन्ति तस्या रोमाणि सवत्सायास्तु भारत ।तावद्वर्षसहस्राणि स स्वर्गे क्रीडते चिरम्

yāvanti tasyā romāṇi savatsāyāstu bhārata / tāvadvarṣasahasrāṇi sa svarge krīḍate ciram

हिन्दी अर्थ

यक्षाणां राक्षसानां च पौलस्त्यागस्तयश्नव ये । तेषां राजा महाराजः कुबेरो ह्मलकाधिप:.. स्बलक्षणसंपन्नाः समक्षेत्राश्व॒ देवते: । भात्वरा बलवस्तश्व ईश्वराः कामरूपिण:

English

Bd.P. V. 390 reads Vanardhtayah -having the form of monkeys'.

अध्याय ११९

श्लोक 11

ततो ऽवकीर्णकालेन त्विह मानुष्यतां गतः ।धनधान्यसमोपेतो जायते विपुले कुले

tato 'vakīrṇakālena tviha mānuṣyatāṃ gataḥ / dhanadhānyasamopeto jāyate vipule kule

हिन्दी अर्थ

को आक़ान्त कर लिया है। संक्षेप में इन सब क्षुद्रराक्षसों की आठ माताएँ हैं, और उसी के अनुरूप इनके आठ विभाग कहे जाते हैं, जिन्हें ऋरमानुतार कहा गया है।१८६-१८५। इनमें से एक का नाम भद्रका और गण का नाम निकर है, जिनमें कुछ ज्ञानोत्पत्ति के कारण हैं (?) मत्यंतोक में विचरण करनेवाले इस गण में सकड़ों, सहसख्रों की संख्या में राक्षमगण विद्यमान हैं । दूसरी माता पूतना है, और गण का नाम मातृ सामान्य है,

English

The Pisacas called Upaviras are very considerate about their veins*. Their bodies are dry. They have plenty of moustache. They wear bark garments. Cremation ground is their abode.

अध्याय ११९

श्लोक 12

वेदविद्या व्रतस्नातः सर्वशास्त्रविशारदः ।व्याधिशोकविनिर्मुक्तो जीवेच्च शरदां शतम्

vedavidyā vratasnātaḥ sarvaśāstraviśāradaḥ / vyādhiśokavinirmukto jīvecca śaradāṃ śatam

हिन्दी अर्थ

जो भयंकर भूत हैं। यह पूतना मानवलोक में बच्चों को पकड़नेवाली एवं कष्ट देकर बहुत परेशान करनेवाली है । स्कन्धग्रह आदि आपक, त्रासक आदि और कौमारंगण इन सब को. बालकों को ग्रहों के समान कष्ट देने वाले जानने चाहिए । माया करने वाले मायिक नामक ग्रहों स्कनद नामक ग्रहों, तथा पूतना नामक अभूत (१) ग्रह विशेष में से जो लोक में विविध विघ्नों के करने वाले हैं, वे लाखों की संख्या में मत्यंलोक में विचरण करते हैं। इसी प्रकार अन्याय भूतों एवं ग्रहों के संकड़ों गण इस प्रृथ्वी पर विचरण किया करते हैं ।१८५९-१६३। पुण्यजन नामक यक्ष, गुह्मक नाम से प्रसिद्ध यक्ष एवं देवजत नामक यक्ष--ये सभी गुह्मकों के अन्तगंत हैं। अगस्त्य नामक जो राक्षसगण हैं, पौलस्त्य नामक जो राक्षस गण हैं विश्वामित्र के गोत्र में जो राक्षसगण उत्पन्न हुए हैं, यक्षों एवं राक्षव्रों के वश में

English

The Udukhala (Ulukhala) types of Pisacas have stable motionless eyes and long tongues with which they lick their lips. Their heads are as large as those of elephants and camels. They move about severally or jointly. Those Pisacas are called Kumbhapatras, who take cooked food without seeing it (invisibly?). They are small and yellow-complcxioned with hairy bodies. They move about visibly and invisibly.

अध्याय ११९

श्लोक 13

एतत्ते सर्वमाख्यातं कल्होडीतीर्थम् उत्तमम् ।यत्कृत्वा सर्वपापेभ्यो मुच्यते नात्र संशयः

etatte sarvamākhyātaṃ kalhoḍītīrtham uttamam / yatkṛtvā sarvapāpebhyo mucyate nātra saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

उत्पन्न होनेवाले पौलस्त्य एवं अगस्त्य नामक जो यक्ष राक्षस हैं, उन सबों के राजा महाराज कृबेर हैं, जो अल्का नामक नगरी के अघीदवर हैं ये यक्ष गण केवल आँखों से देखकर मनुष्य के रक्त मांस एवं चर्बी को पी जते हैं, राक्षत गण शरीर के भीतर प्रवेश कर के पी जाते हैं और पिशाच गण बुरी तरह पीड़ित कर के पी जाते हैं। जो सभी प्रकार के लक्षणों से सम्पन्न एवं देवताओं के समान अधिकारी, तेजस्वी, बलवान, ऐश्वयं मय

English

The Pisacas called Nipunas enter and infest those persons who go alone. Their mouths extend upto their ears. The eye-brows are long and the noses are thick.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 119
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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