Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
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अध्याय 131 / 232

Adhyaya 131

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अध्याय १३१

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे देवतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम त्रिंशदधिकशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १३१ श्रीमार्कण्डेय उवाच: नर्मदादक्षिणे कूले नागतीर्थमनुत्तमम् ।यत्र सिद्धा महानागा भये जाते ततो नृप

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe devatīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma triṃśadadhikaśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 131 śrīmārkaṇḍeya uvāca: narmadādakṣiṇe kūle nāgatīrthamanuttamam / yatra siddhā mahānāgā bhaye jāte tato nṛpa

हिन्दी अर्थ

कर्थ द्वितोयमुत्पन्ना भवानी प्राक्सती तु या। आसीहाक्षायणी पूर्वमुमा कथमजायत २ मेनायां पितृकन्यायां जनयामास शेलराट् । के चेते पितरश्चेव येषां मेना तु मानसी 0३ सेनाकश्चेव दौहित्रो दोहिन्री च तथा हामा। एकपर्णा तथा चेब तथा या चेकपाटला है

English

Prajapati has ordained: "(One may be) an atheist, an evil-doer, a person of mixed caste or a thief, (but) he cannot have redemption 2 ( Tdranam ) from anything else, except (by offering) a charitable gift unto those who have Yogic power.

अध्याय १३१

श्लोक 2

युधिष्ठिर उवाच: महाभयानां लोकस्य नागानां द्विजसत्तम ।कथं जातं भयं तीव्रं येन ते तपसि स्थिताः

yudhiṣṭhira uvāca: mahābhayānāṃ lokasya nāgānāṃ dvijasattama / kathaṃ jātaṃ bhayaṃ tīvraṃ yena te tapasi sthitāḥ

हिन्दी अर्थ

श्राद्ध की प्रक्रिया तेदनन्तर आत्मज्ञानी सूत की ये बातें सुन ब्राह्मणों ने (यूत) से पूछा” ?

English

His ancestors are delighted like the husbandmen by a good timely rain, even if his son or grandson feeds a (Yogic) meditator.

अध्याय १३१

श्लोक 3

भूतं भव्यं भविष्यच्च यत्सुरासुरमानवे ।तात ते विदितं सर्वं तेन मे कौतुकं महत्

bhūtaṃ bhavyaṃ bhaviṣyacca yatsurāsuramānave / tāta te viditaṃ sarvaṃ tena me kautukaṃ mahat

हिन्दी अर्थ

शाशपायन ने कहा-- सूतजी ! भव (महादेव) की प्रिया, जो पहले सती रूप में थीं, द्वितीय बार किस प्रकार उत्पन्न हुईं। पूरब जन्म में वे दक्ष प्रजापति की पुत्री थीं बाद में वे उमा रूप में कैसे उत्पन्न हुईं। शेलराज हिमवान् ने उन्हें पितरों की कन्या सेना में उत्पन्न किया--ऐसी प्रसिद्धि है। वे पितर गण कोन हैं, जिनकी मानसी कन्या मेना हैं? भेनाक उनका दौहित्र है, तपस्या के समय एक पर्ण पर

English

If meditating mendicants are not available, one should feed two Brahmacarins. When they too are not available, one should feed a householder not much engrossed in worldly affairs."

अध्याय १३१

श्लोक 4

मम संतापजं दुःखं दुर्योधनसमुद्भवम् ।तव वक्त्राम्बुजौघेन प्लावितं निर्वृतिं गतम्

mama saṃtāpajaṃ duḥkhaṃ duryodhanasamudbhavam / tava vaktrāmbujaughena plāvitaṃ nirvṛtiṃ gatam

हिन्दी अर्थ

जीवन रखनेवाली उमा उनकी दोहित्री है, सबों की पूर्वज समस्त सरिताओं में श्रेष्ठ सुरसरि उनकी सब से बड़ी सन्‍्तति है,-- इन सब बातों को तो हम लोग बहुत पहले ही से सुन चुके हैं । पर हमारी यह जिज्ञासा आप सुनिये कि ये पितरगण कौन हैं ? कहाँ निवास करते हैं? इनके श्रद्धादि की विधियाँ कया हैं--इन सब बातों को हम जानना चाहते हैं, आप का कल्याण हो ।३-६। ये किसके पुत्र है, और किस कारण वंश पितर नाम एतस्मात्यूवं सूत उवाचेति ख. पुस्तके ।

English

It is the injunction of Brahma that a meditating Yogin is greater than one. who (performs penance) for a hundred years standing on one leg and taking in nothing but air.

अध्याय १३१

श्लोक 5

श्रुत्वा तव मुखोद्गीतां कथां पापप्रणाशनीम् ।भूयो भूयः स्मृतिर्जाता श्रवणे मम सुव्रत

śrutvā tava mukhodgītāṃ kathāṃ pāpapraṇāśanīm / bhūyo bhūyaḥ smṛtirjātā śravaṇe mama suvrata

हिन्दी अर्थ

पुत्राश्व ते स्मृताः केषां कर्थं च पितरस्तु ते । पितरः कथमुत्पन्नाः कस्य पुत्रा: किमात्मकाः ७ स्वगें तु पितरोडन्ये ये देवानामपि देवता: । एवं वे श्रोतुमिच्छामि पित्षां सर्वंमुत्तमम् ॥॥

English

The Siddhas roam over the Earth in the guise of Brahmanas. Hence one should approach the in-coming guest with palms joined in reverence. He should honour him with the vessel containing materials of worship. He shall offer him place of residence and food. The masters of Yoga assume diverse forms

अध्याय १३१

श्लोक 6

न क्लेशत्वं द्विजे युक्तं न चान्यो जानते फलम् ।विद्यादानस्य महतः श्रावितस्य सुतस्य च

na kleśatvaṃ dvije yuktaṃ na cānyo jānate phalam / vidyādānasya mahataḥ śrāvitasya sutasya ca

हिन्दी अर्थ

यदर्थ ते न दृश्यन्ते तत्र कि कारण स्मृतम् । स्वर्ग हि के तु वर्तन्ते पितरो नरके तु के ३६ कानि श्राद्धानि देयानि कथं गच्छन्ति वे पित॒न्। कथं च शक्तास्ते दातुं नरकस्था: फल पुनः

English

Karanam in the text is irrelevant and obscure. Hence Tarariam, the reading in Bd. P. ibid V. 71 is accepted.

अध्याय १३१

श्लोक 7

एवं ज्ञात्वा यथान्यायं यः प्रश्नः पृच्छितो मया ।कथा तु कथ्यतां विप्र दयां कृत्वा ममोपरि

evaṃ jñātvā yathānyāyaṃ yaḥ praśnaḥ pṛcchito mayā / kathā tu kathyatāṃ vipra dayāṃ kṛtvā mamopari

हिन्दी अर्थ

के चेह पितरों नाम कान्यजामों वयं पुनः । देवा अपि पित्नन्‍्स्वर्ग यजन्तीति हि नः श्रुतम् (१२

English

In heaven, there are seven excellent groups of highly intelligent Pitrs. Four of them have forms and three are formless (Amurta) A Understand as I shall recount their creative activity in the world.

अध्याय १३१

श्लोक 8

मार्कण्डेय उवाच: यथा यथा त्वं नृप भाषसे च तथा तथा मे सुखमेति भारती ।शैथिल्यभावाज्जरयान्वितस्य त्वत्सौहृदं नश्यति नैव तात

mārkaṇḍeya uvāca: yathā yathā tvaṃ nṛpa bhāṣase ca tathā tathā me sukhameti bhāratī / śaithilyabhāvājjarayānvitasya tvatsauhṛdaṃ naśyati naiva tāta

हिन्दी अर्थ

ऋषोणां तु बच: श्रुत्वा सुतस्तत्त्वार्थंडशिवान् । आचचक्षे यथाप्रश्नं ऋषोणां मानस ततः १४ अन्न वो वर्ण प्रिष्यामि यथाप्रज्न यथाश्रुतम् । मन्वस्तरेषु जायन्ते पितरों देवसूनवः १५

English

(I shall describe) those who are proclaimed (in Smrtis) as their daughters and daughters' sons. There are three excellent groups of those who assume Dharmic bodies and forms. I shall briefly recount their names and creative activity. The disembodied groups of Pitrs, the sons of Prajapati, abide in the shining worlds named Virajas. O Brahmanas, they belong to Virajas. Hence they are famous as excellent Vairajas. I have thus mentioned the first group of Vairajas.

अध्याय १३१

श्लोक 9

कथयामि यथावृत्तम् इतिहासं पुरातनम् ।कथितं पूर्वतो वृद्धैः पारम्पर्येण भारत

kathayāmi yathāvṛttam itihāsaṃ purātanam / kathitaṃ pūrvato vṛddhaiḥ pāramparyeṇa bhārata

हिन्दी अर्थ

से विख्यात हैं ? ये लोग कैसे उत्पन्न हुए ? किसके पुत्र हैं? कसा इनका स्वरूप है १ स्वर्ग में जोपितर निवास करते हैं, वे देवताओं के भी देवता ( पूज्य ) कहे जाते हैं, वे कौन हैं? इन सब पितरों की सृष्टि (उत्पत्ति) सम्बन्धी कल्याण दाथिनी उत्तम बातें हम लोग सुनना चाहते हैं। हम लोग श्रद्धा एवं विधि पूर्वक उन पितरों को जो कुछ अपित करते हैं, वह वस्तुएं उन्हें (पितरों) प्रसन्न एवं सन्तुष्ट रखती हैं। वे लोग दृष्टिगोचर नहीं

English

'Sanctifying the worlds'—Bd. P. V. 76.

अध्याय १३१

श्लोक 10

द्वे भार्ये कश्यपस्यास्तां सर्वलोकेष्वनुत्तमे ।गरुत्मतो वै विनता सर्पाणां कद्रुरेव च

dve bhārye kaśyapasyāstāṃ sarvalokeṣvanuttame / garutmato vai vinatā sarpāṇāṃ kadrureva ca

हिन्दी अर्थ

होते --इसका क्या कारण प्रसिद्ध है ।७-८५४औ। कौन से पितर गण स्वर्ग में निवास करने वाले हैं और कौन से नरक में ॥ पिता को, पिता के पिता को, पिता के पितामह को तीनों पिण्डदानों में नामोच्चारण पूवंक विधिसमेत कौन-कौन से श्राद्ध देने चाहिए, अर्थात् किन-किन श्राद्धों में णितामह तथा प्रपितामह का नाम लेकर तीन पिण्ड दान किये जाते हैं। ये श्रद्धादि में दी गई वस्तुएँ पितरों को किस प्रकार प्राप्त होती हैं। और जो स्वयमेव नरक में निवास करते हैं, वे किस प्रकार फलप्रदान में समर्थ हो सकते हैं ? ये पितर नामधारी कोन हैं? किन की हम पूजा करें। हम ऐसा सुना है कि स्वर्ग लोग में देवगण भी पितरों की पूजा तथा श्राद्वादि किया करते हैं। है बहुश्गुत ! इस विषय को हम विस्तारपूर्वक सुनना चाहते हैं ? इन सबों का स्पष्ट अभिप्राय आप बतलाइये । ऋषियों की ऐसी बातें सुन तत्त्वाथंदर्शी सून ऋषियों के प्रश्नगत एवं मनोगत जिज्ञासाओं को

English

This chapter is textually similar to Bd. 3,10. Reference are given to verses in that chapter.

अध्याय १३१

श्लोक 11

अश्वसंदर्शनात् ताभ्यां कलिरूपं व्यवस्थितम् ।प्रभातकाले राजेन्द्र भास्कराकारवर्चसम्

aśvasaṃdarśanāt tābhyāṃ kalirūpaṃ vyavasthitam / prabhātakāle rājendra bhāskarākāravarcasam

हिन्दी अर्थ

शान्ति करते हुए बोले

English

For similar seven divisions of Pitrs vide Pd. P. V.9.2-3, Bd. P. V-l,

अध्याय १३१

श्लोक 12

तं दृष्ट्वा विनता रूपम् अश्वं सर्वत्र पाण्डुरम् ।अथ तां कद्रूमवोचत्सा पश्य पश्य वरानने

taṃ dṛṣṭvā vinatā rūpam aśvaṃ sarvatra pāṇḍuram / atha tāṃ kadrūmavocatsā paśya paśya varānane

हिन्दी अर्थ

सूत ने कहाः--ऋषिव॒न्द ! आप लोगों की पूछी हुई बातों का उत्तर अपनी बुद्धि एवं श्रृति के आधार पर दे रहा हूँ । प्रत्येक मन्वस्तरों में ये क्रशः ज्येष्ठ और कनिष्ठ रूप में प्रादुभू त होते हैं । व्यतीत भाद्धं चषां मनुष्याणां श्राद्धमेव प्रवतंते । देवानसजत ब्रह्मा नायक्षन्निति वे पुनः ॥

English

Their fair-complexioned mental daughter Mena is the wife of the great mountain Himavan. From her the son Mainaka was born.

अध्याय १३१

श्लोक 13

उच्चैःश्रवसः सादृश्यं पश्य सर्वत्र पाण्डुरम् ।धावमानम् अविश्रान्तं जवेन पवनोपमम्

uccaiḥśravasaḥ sādṛśyaṃ paśya sarvatra pāṇḍuram / dhāvamānam aviśrāntaṃ javena pavanopamam

हिन्दी अर्थ

ते शप्ता ब्रह्मणा मुृढा नष्टसंज्ञा भविष्यथ । न सम किचिद्विजानन्ति ततो लोको हामुहात.

English

The mountain Mainaka, the holder of all medicinal herbs, the mine of all gems, the holy leader of mountains, was born of her. Kraunca was his son.

अध्याय १३१

श्लोक 14

तं दृष्ट्वा सहसा यान्तम् ईर्ष्याभावेन मोहिता ।कृष्णं मत्वा तथाजल्पत्तया सह नृपोत्तम

taṃ dṛṣṭvā sahasā yāntam īrṣyābhāvena mohitā / kṛṣṇaṃ matvā tathājalpattayā saha nṛpottama

हिन्दी अर्थ

ते मूयः प्रणताः सर्वे याचन्ति स्स पितामहम् । अनुग्रहाय लोकानां पुनस्तानब्रवीत्प्रभुः तेम्यस्ते नियतात्मानः प्रशशंसुरनेकधा । प्रायश्वित्तानि धर्मज्ञा वाइमनः:कमंजानि तु

English

The king of mountains procreated three daughters of Mena, viz. Aparna, Ekaparna and the third Ekapatala.

अध्याय १३१

श्लोक 15

विनते त्वं मृषा लोके नृशंसे कुलपांसनि ।कृष्णं चैनं वद श्वेतं नरकं यास्यसे परम्

vinate tvaṃ mṛṣā loke nṛśaṃse kulapāṃsani / kṛṣṇaṃ cainaṃ vada śvetaṃ narakaṃ yāsyase param

हिन्दी अर्थ

धर्मज्ञानं च कामश्व को वरो वः प्रदीयताम् २३ पुनस्तानब्रवीद्ब्रह्मायुयं वे सत्यवादिनः । तस्माचथुक्‍तं युष्माभिस्तत्तथा न तदन्यथा

English

Two of them had support (They had their permanent abodes). But Aparna performed penance without an abode. Ekaparna had a Nyagrodha tree as her abode and Ekapatala had Pa tala (trumpet flower) tree as her abode. For a hundred thousand years, they performed such a penance as was difficult to be performed even by Devas and Danavas.

अध्याय १३१

श्लोक 16

विनतोवाच: सत्यानृते तु वचने पणो ऽयं ते ममैव तु ।सहस्रं वत्सरान्दासी भवेयं तव वेश्मनि

vinatovāca: satyānṛte tu vacane paṇo 'yaṃ te mamaiva tu / sahasraṃ vatsarāndāsī bhaveyaṃ tava veśmani

हिन्दी अर्थ

मन्वन्तरों के नो पितरगण, देवताओं के साथ उत्पन्न हुए थे और अतीत ही चुके, उन्हें तथा सम्प्रति जो पितरगण विद्यमान हैं, उन दोनों को निश्चय पूर्वक बतला रहा हैँ। मनुष्यों द्वारा श्रद्धापूवंक दी गई बस्तुएँ ही श्राद्ध कही जाती हैं। पूवंकाल में ब्रह्म ने देवताओं की सृष्टि की तो उन लोगों ने पूजा आदि कुछ भो नहीं किया और उनको छोड़कर स्वार्थ में लिप्त हो अपने ही सृष्टि विस्तार में लग गये । तब ब्रह्मा ने उन्हें शाप दिया कि मूढ़ों ! तुम्हारो चेतना नष्ट हो जायगी, तुम लोग कुछ भी नहीं जानते। ब्रह्मा के ऐसे शाप दे देने के उपरान्त समस्त लोक मोहबश हो गया । वे सब पुनः विनम्र हुए और पितामह से याचना करने लगे । प्रभु ब्रह्मा ने लोक पर अनुग्रह करने की, भावना से उन देवताओं से पुनः कहा ।॥१४-१८। तुम लोगों ने महान् पाप एवं अत्याचार किया है, उसका प्रायश्चित्त करो और उसका विधान अपने-अपने पुत्रों से पूछों तब तुम

English

A single leaf was the diet of Ekaparna and a single Patala flower (trumpet flower) was the diet of Ekapatala.

अध्याय १३१

श्लोक 17

तथेति ते प्रतिज्ञाय रात्रौ गत्वा स्वकं गृहम् ।परित्यज्य उभे ते तु क्रोधमूर्छितमूर्छिते

tatheti te pratijñāya rātrau gatvā svakaṃ gṛham / parityajya ubhe te tu krodhamūrchitamūrchite

हिन्दी अर्थ

लोगों को ज्ञान-प्राप्ति होगी। तब प्रायश्चित्त करने को इच्छुक उन देवताओं ने आत्मा को स्ववश रख अपने पुत्रों से प्रायश्चित्त की विधियाँ बारम्बार पूछीं। घर्मज्ञ एवं जितेन्द्रिय देवपुत्रों ने उन देवताओं को मनसा, वाचा, करमेणा सम्पन्न होनेवाले अनेक प्रकार के प्रायरिचत्तों का विधान बतलाया। पुत्रों द्वारा प्रायब्चित्तों की शिक्षा श्राप्त कर उन देवताओं को पुनः चेतना प्राप्त हुई और उन्होंने अपने पुत्रों से निवेदन किया कि

English

Both of them took their food once, (when) a thousand years had been completed. One of the daughters (viz. Aparna) remained without taking food. Their mother spoke to her thus.

अध्याय १३१

श्लोक 18

बन्धुगर्वस्य गत्वा तु कथयामास तं पणम् ।कद्रूर्विनतया सार्द्धं यद्वृत्तं प्रमदालये

bandhugarvasya gatvā tu kathayāmāsa taṃ paṇam / kadrūrvinatayā sārddhaṃ yadvṛttaṃ pramadālaye

हिन्दी अर्थ

तुम लोग ही हम सबों के पिद्ा हो, क्योंकि तुम्हीं द्वारा हमें ज्ञान एवं चेतना की प्राप्ति हुई । तुम लोगों को घमं, ज्ञान एवं काम-किस वस्तु का वरदान हम लोग दें, बतलाओं ।२०-२३। देवताओं के ऐसे मनोभावों को देखकर ब्रह्म ने पुनः उनसे कहा, तुम लोग सत्यवादी ही अतः: जो कुछ तुम्हारे मुख उक्त च पितरोउस्माकमिति वे तनया स्वकाः पितरस्ते भविष्यन्ति तेभ्योड्यं दोयतां वर:

English

Out of affection, the distressed mother forbade her with the words "U" <c Ma " (O daughter! do not). Since she was addressed thus by her mother, the blessed gentle lady per¬ forming the difficult task (penance) became famous as "Umd". The auspicious lady got the name derived from her action. 1

अध्याय १३१

श्लोक 19

तच्छ्रुत्वा बान्धवाः सर्वे कद्रूपुत्रास्तथैव च ।न मन्यन्ते हितं कार्यं कृतं मात्रा विगर्हितम्

tacchrutvā bāndhavāḥ sarve kadrūputrāstathaiva ca / na manyante hitaṃ kāryaṃ kṛtaṃ mātrā vigarhitam

हिन्दी अर्थ

तेनेव बचसा पूत्रा ब्रह्मणः परमेष्ठिन: । पुत्रा: पितृत्वमाजग्मुः पुत्र॒त्व॑ पितरः पुनः २६

English

The world of (supported by?) these three ladies will survive for ever. It will be proud of (drptam) their penance, while the earth lasts.

अध्याय १३१

श्लोक 20

अकृष्णः कृष्णताम् अम्ब कथं गच्छेद्धयोत्तमः ।दासत्वं प्राप्स्यसे त्वं हि पणेनानेन सुव्रते

akṛṣṇaḥ kṛṣṇatām amba kathaṃ gaccheddhayottamaḥ / dāsatvaṃ prāpsyase tvaṃ hi paṇenānena suvrate

हिन्दी अर्थ

यो हानिष्ट्वा पितउश्राद्धे क्रियां कांचित्करिष्यति। राक्षसा दानवाश्चव फल प्राप्स्यन्ति तस्य तत् ॥ श्राद्ध राप्पायिताश्चेब पितर: सोमसध्ययम् । आप्यायमाना युस्माभिवंधेयिष्यन्ति नित्यशः श्राद्ध राप्यायित: सोमो लोकानाप्याययिष्यति । कृत्स्त॑ सपर्वतवन जड्भमाजडूगमेव् तम्

English

All the three, endowed with Yogic power, sustained their bodies by means of their penance. All those blessed gentle ladies possessed permanent youth.

अध्याय १३१

श्लोक 21

कद्रूरुवाच: भवेयं न यथादासी तत्कुरुध्वं हि सत्वरम् ।विशध्वं रोमकूपेषु तस्याश्वस्य मतिर्मम

kadrūruvāca: bhaveyaṃ na yathādāsī tatkurudhvaṃ hi satvaram / viśadhvaṃ romakūpeṣu tasyāśvasya matirmama

हिन्दी अर्थ

श्राद्धानि पुष्टिकामाश्व ये करिष्यन्ति सानवाः। तेम्यः पुष्ठि प्रजाश्चेव दास्यन्ति पितरः सदा

English

All of them were expounders of Brahman. All of them were celibate. Uma was the greatest (eldest), the most excellent (girl) of the fairest complexion.

अध्याय १३१

श्लोक 22

क्षणमात्रं कृते कार्ये सा दासी च भवेन्मम ।ततः स्वस्थोरगाः सर्वे भविष्यथ यथासुखम्

kṣaṇamātraṃ kṛte kārye sā dāsī ca bhavenmama / tataḥ svasthoragāḥ sarve bhaviṣyatha yathāsukham

हिन्दी अर्थ

एवमाज्ञा कृता पूर्व ब्रह्मणा षरमेष्ठिना । तेनेतत्सबंथा सिद्ध दानमध्ययनं तपः ते तु ज्ञानप्रदातारः पितरो बो न संशयः । इत्येते पितरो देवा देवाश्व पितरः पुनः ॥।

English

Ekaparna was the wife of Asita. She was chaste and firm m her holy vows. She was given to that intelligent master of Yoga by Himavan. She gave birth to the mental son Devala who was engrossed in meditation on Brahman.

अध्याय १३१

श्लोक 23

सर्पा ऊचुः ।यथा त्वं जननी देवि पन्नगानां मता भुवि ।तथापि सा विशेषेण वञ्चितव्या न कर्हिचित्

sarpā ūcuḥ / yathā tvaṃ jananī devi pannagānāṃ matā bhuvi / tathāpi sā viśeṣeṇa vañcitavyā na karhicit

हिन्दी अर्थ

अन्पोन्यपितरो छेते देवाश्व पितरश्रच ह ॥ रे४

English

Ekapatala, the third of these daughters, wooed Jaigi- savya, the son of Satasilaka, as her husband.

अध्याय १३१

श्लोक 24

कद्रूरुवाच: मम वाक्यमकुर्वाणा ये केचिद्भुवि पन्नगाः ।हव्यवाहमुखं सर्वे ते यास्यन्त्यविचारिताः

kadrūruvāca: mama vākyamakurvāṇā ye kecidbhuvi pannagāḥ / havyavāhamukhaṃ sarve te yāsyantyavicāritāḥ

हिन्दी अर्थ

से निकला है वह सब कुछ घटित होगा, कुछ भी अस्यथा न होगा। यतः तुम लोगों ने स्वयं अपने पुत्रों को अपना पिता कहा है, अतः वे तुम्हारे पिता हों-यही बर उन्हें दो ।२४-२५। प रमेष्ठी पितामह की उसीं बात से वे देवपुत्र गण पितृकोटि में आ गये और उनके पितृगण पुत्र कोदि में आ गये। इसी कारण वश वे पितरगण पुत्र (देवपुत्र) कहे जाते हैं, ओर उनमें पुत्र होने पर भी पितृत्व कहा जाता है। इस प्रकार पितरों को पूत्र रूप में और पुत्रों को-पितररूप में स्मरण कर पितामह ब्रह्मा ने अपने बंश की वृद्धि के लिये पुनः पितरों से कहा ।२६-२७। श्राद्ध कर्म में जो पितरों की पूजा बिना किये ही किसी अन्य क्रिया का अनुष्ठान करता है, उसकी उस क्रिया का फल राक्षस तथा दानवों को प्राप्त होता है। श्राद्धों द्वारा सन्तुष्ट किये गये पितरगण

English

Rudrani was the best among them. She excelled others by her good attributes. Between Uma and Sankara the mutual love (was ideal).

अध्याय १३१

श्लोक 25

एतच्छ्रुत्वा तु वचनं घोरं मातृमुखोद्भवम् ।केचित्प्रविष्टा रोमाणि तथान्ये गिरिसंस्थिताः

etacchrutvā tu vacanaṃ ghoraṃ mātṛmukhodbhavam / kecitpraviṣṭā romāṇi tathānye girisaṃsthitāḥ

हिन्दी अर्थ

अव्यय सोम को सस्तुष्ट करते हैं तुम लोगों से सन्तुष्ट प्राप्त कर वे सबंदा तुम्हें बढ़ायेंगे । श्राद्धादि कर्मों में इस प्रकार पितरों द्वारा संतुष्ट किया गया सोम समस्त, पव॑त, वन, व चराचर जगत् सब को सस्तुष्ट करेगा। जो मनुष्य लोक के पोषण की दृष्टि से श्रद्धादि करेंगे, उन्हें पितरगण सर्वदा पुष्टि एवं सन्तति देंगे। श्राद्धकर्म में अपने प्रपितामह तक नाम एवं गोत्र का उच्चारण कर जिन पितरों को कुछ दे दिया जायगा वे पितरगण उस

English

On realising that they were in close embrace, the slayer <5f Vrtra (i.e. Indra) became apprehensive. (Fire-god) was sent near them by Indra who was afraid of the birth of a child from them engaged in sexual intercourse.

अध्याय १३१

श्लोक 26

केचित्प्रविष्टा जाह्नव्यामन्ये च तपसि स्थिताः

kecitpraviṣṭā jāhnavyāmanye ca tapasi sthitāḥ

हिन्दी अर्थ

श्राद्धदान से अति सन्‍्तुष्ट होकर देनेवाले की सन्‍्ततियों को सन्तुष्ट रखेंगे ।८-३२। परमेष्टी ब्रह्मा ने इस प्रकार की आज्ञा पूर्वकाल में दी है उन्हीं पितरों की कृपा से दान, अध्ययन, तपस्या--सबसे सिद्धि प्राप्त होती है। इसमें तनिक भी सन्देह नहीं हैं कि वे पितरगण ही हम सब को ज्ञान प्रदान करनेवाले हैं। इस प्रकार के कियन्तो वे पितृगणाः कस्मिन्काले च ते गणाः । वर्तन्ते देवप्रवरा देवानां सोमवर्धनाः

English

(He said to Agni) "O Fire-god, create an impediment in their sexual intercourse. You are present everywhere. So there cannot be any blame (on you in your going there)".

अध्याय १३१

श्लोक 27

ततो वर्षसहस्रान्ते तुतोष परमेश्वरः ।महादेवो जगद्धाता ह्युवाच परया गिरा

tato varṣasahasrānte tutoṣa parameśvaraḥ / mahādevo jagaddhātā hyuvāca parayā girā

हिन्दी अर्थ

बृहस्पतिमुपासोन सर्वेज्ञानाथंकोविदम् । पुनः शंयुरिम प्रश्नं पश्रच्छ विनयान्वितः ३८ क एते पितरो नाम कियन्तः के च नामतः समुद्भूताः कथं चते पितृत्व॑ं समुपागताः (३६ कस्माच्च पितरं पूर्व यज्ञेथश्युज्यन्त नित्यशः। क्रियाश्व सर्वा वर्तन्‍्ते श्राद्धपर्वा महात्मनाम् ४० कस्मै श्राद्धानि देयानि कि च दत्त महाफलम् । केषु वाष्प्यक्षयं श्राद्ध तीर्थेषु च नदीषु च ॥४ १

English

When he was told thus, Fire-god acted accordingly. Forsaking (i.e. aside from) the body of Uma, the semen virile was discharged on the ground (by Siva).

अध्याय १३१

श्लोक 28

भो भोः सर्पा निवर्तध्वं तपसो ऽस्य महत्फलम् ।यमिच्छथ ददाम्यद्य नात्र कार्या विचारणा

bho bhoḥ sarpā nivartadhvaṃ tapaso 'sya mahatphalam / yamicchatha dadāmyadya nātra kāryā vicāraṇā

हिन्दी अर्थ

केषु वे सर्वमाप्नोति श्राद्ध कृत्वा द्विजोत्तम: कश्न कालो भवेच्छाड़े विधिः कश्चानुवर्तंते पितरगण देवता हैं, और देवगण पितर हैं, और परस्पर एक दूसरे के पितर और देवता--दोनों हैं। आत्मज्ञानी सूत की ऐसी बाते सुनने के उपरान्त मुत्रियों ने उनसे शेष प्रश्न के बारे में पुनः पूछा

English

O Samsapayana, then Fire-god was cursed by the infuriated goddess. With words choked with anger, she spoke to Fire-god thus:

अध्याय १३१

श्लोक 29

सर्पा ऊचुः ।कद्रूशापभयाद्भीता देवदेव महेश्वर ।तव पार्श्वे वसिष्यामो यावदाभूतसम्प्लवम्

sarpā ūcuḥ / kadrūśāpabhayādbhītā devadeva maheśvara / tava pārśve vasiṣyāmo yāvadābhūtasamplavam

हिन्दी अर्थ

ऋषियों ने पूछाः--सृत जी ! पितरों के समूह कितने हैं ? देवताओं के परमपूज्य, एवं चन्द्रमा के पुष्टिकर्ता वे पितरगण किस समय वर्तमान रहते हैं

English

"O Fire, since you have caused an impediment in sexual intercourse even before I had been satisfied, therefore you have committed an action which you should nothave committed, you evil-minded one!

अध्याय १३१

श्लोक 30

देवदेव उवाच: एकश्चायं महाबाहुर्वासुकिर्भुजगोत्तमः ।मम पार्श्वे वसेन्नित्यं सर्वेषां भयरक्षकः

devadeva uvāca: ekaścāyaṃ mahābāhurvāsukirbhujagottamaḥ / mama pārśve vasennityaṃ sarveṣāṃ bhayarakṣakaḥ

हिन्दी अर्थ

सखूत ने कहा+--ऋषिवृुन्द ! “मैं आप लोगों से पितरों के उस श्रेष्ठ बंश के विवरण को बता रहा हूँ, जिसको पूवकाल में शयु ने अपने पिता बृहस्पति से पूछा था। एकबार समीप में बैठे हुए तत्त्वज्ञान विशारद, स्वेशञ बृहस्पति से उनके पुत्र शंयु ने यह प्रइन विनयपू्वक पूछा था किये पितरगण कौन है? कितने हैं ? इनके नाम क्या हैं ? ये किस प्रकार उत्पन्न हुए और पितृत्व इन्हें किस प्रकार प्राप्त हुआ ? क्‍या कारण है जो यज्ञों में नित्य स्व प्रथम पितरों की पूजा की जाती है ? और महात्मा पुरुषों की सभी क्रियाएँ पितरों के श्राद्धादि के उपरान्त सम्पन्न होतो हैं ।३७-४०। ये श्राद्धादि क्रियाएँ किसके उद्देश्य से करनी चाहिए, ओर क्या देने से प्रचुर फल की प्राप्ति होती है, किन तीथों अथवा नदियों में करने से श्राद्"ों का फल अक्षय हो जाता है। श्रेष्ठ ब्राह्मण किन-किन पव॑त क्षेत्रों में श्राद्ध का विधान सम्पन्न कर अपने सभी मनोरथों को

English

Since the lustrous semen virile of Rudra has not been retained (in my womb), you should hold the foetus yourself by way of punishment (for this act)".

अध्याय १३१

श्लोक 31

अन्येषां चैव सर्पाणां भयं नास्ति ममाज्ञया ।आप्लुत्य नर्मदातोये भुजगास्ते च रक्षिताः

anyeṣāṃ caiva sarpāṇāṃ bhayaṃ nāsti mamājñayā / āplutya narmadātoye bhujagāste ca rakṣitāḥ

हिन्दी अर्थ

प्राप्त करता है, श्राद्ध के लिये कोन सा समय उपयुक्त है, श्राद्ध की विधि क्‍या है ? है भगवान् इस सब वातों को हम यथाथ रूप में विस्तारपूर्वक जानना चाहते हैं जिन-जिन बातों को मैंने निवेदित किया है, उन्हें-उन्हें

English

The reading danla-kanvoiana is obscure. Bd. 3.10.18 reads dattakaSco- Sanas etc. is clear and is supported by Puraijas. Hence its acceptance here.

अध्याय १३१

श्लोक 32

नास्ति मृत्युभयं तेषां वसध्वं यत्र चेप्सितम् ।कद्रूशापभयं नास्ति ह्येष मे विस्तरः परः

nāsti mṛtyubhayaṃ teṣāṃ vasadhvaṃ yatra cepsitam / kadrūśāpabhayaṃ nāsti hyeṣa me vistaraḥ paraḥ

हिन्दी अर्थ

कथपयिष्यामि ते तात यनन्‍्मां त्वं परिप्रच्छसे । विनयेन यथास्याय॑ गम्भीर प्रश्नमुत्तमम् थौरन्तरीक्ष॑ पुथिवी नक्षत्राणि दिशस्तथा। सुर्याचन्द्रमसों 'बब तथा5होरात्रसेव च

English

Smrti works are attributed to them, though the antiquity of those works is doubtful.

अध्याय १३१

श्लोक 33

एवं दत्त्वा वरं तेषां देवदेवो महेश्वरः ।जगामाकाशमाविश्य कैलासं धरणीधरम्

evaṃ dattvā varaṃ teṣāṃ devadevo maheśvaraḥ / jagāmākāśamāviśya kailāsaṃ dharaṇīdharam

हिन्दी अर्थ

न बभुव॒स्तदा तात तमोभृतमिदं जगत्। ब्रह्मको दुश्चरं तत्र चचार परम तपः ३४७ शंयुस्तमब्रवीद्भुयः पितरं ब्रह्मवित्तमम् । सर्वदेव ब्रतस्नातं सर्वेज्ञानविदां वरम् ४८ कीद्शं स्बंभुतेशस्तपस्तेपे प्रजापतिः । एवमुक्तो बृहत्तेजा बृहस्पतिरुवाच तम् ॥४ € सर्वेबां तपसां युक्तिस्तपोयोगमनुत्तमम् । ध्यायंस्तदा त:ड्ूगवांस्तेन लोकानवासूजत् ३५०

English

Approaching (the river) Ganga, he said—"O excellent river, may this be heard. Excessive distress is caused to me by the retention of the foetus. O river, for my relief and welfare, please carry this foetus. Due to my gracious favour, your trouble will be less".

अध्याय १३१

श्लोक 34

गते चादर्शनं देवे वासुकिप्रमुखा नृप ।स्थापयित्वा तथा जग्मुर्देवदेवं महेश्वरम्

gate cādarśanaṃ deve vāsukipramukhā nṛpa / sthāpayitvā tathā jagmurdevadevaṃ maheśvaram

हिन्दी अर्थ

भूतभव्यानि ज्ञानानि लोकास्वेदांभ्व कृत्स्नशः । योगमाविश्य तत्सृष्टं ब्रह्मणा योगचक्षुषा लोका: सांतानिका नाम यत्र तिष्ठन्ति भास्वरा: । ते बेराजा इति ख्याता देवानां दिबि देवताः

English

Saying "So be it", the highly delighted great river held the foetus (although) with a mind burning (as there was burn¬ ing sensation within her).

अध्याय १३१

श्लोक 35

तत्र तीर्थे तु यः कश्चित् पञ्चम्यामर्चयेच्छिवम् ।तस्य नागकुलान्यष्टौ न हिंसन्ति कदाचन

tatra tīrthe tu yaḥ kaścit pañcamyāmarcayecchivam / tasya nāgakulānyaṣṭau na hiṃsanti kadācana

हिन्दी अर्थ

योगेन तपसा युक्तः पूर्वमेव तदा प्रभुः। देवानसुजत ब्रह्मा योग युक्‍त्वा सनातनम्

English

Distressed by the great pain though she was, she retain¬ ed the foetus for a long time. The foetus was dropped into an auspicious crevasse of Himavan by her. There is an auspicious forest named Saravana where diverse trees were in bloom. It was there that she depo¬ sited the foetus that was blazing like fire.

अध्याय १३१

श्लोक 36

मृतः कालेन महता तत्र तीर्थे नरेश्वर ।शिवस्यानुचरो भूत्वा वसते कालमीप्सितम्

mṛtaḥ kālena mahatā tatra tīrthe nareśvara / śivasyānucaro bhūtvā vasate kālamīpsitam

हिन्दी अर्थ

क्रमशः मुझे बतलाइये । शंयु के इस प्रकार अच्छी तरह पूछने पर प्रश्न के तत्वों को जाननेवालों में श्रेष्ठ महामति बृहस्पति थे क्रमश: उन प्रइनों का उत्तर देना प्रारम्भ किया ब्हरुपति ने कहाः--प्रियवर ! जो बातें तुमने मुझसे पूछी हैं, उन्हें बतला रहा हू ! तुम्हारा यह प्रइन विनय, न्याय, गम्भीरता, एवं शरेष्ठता आदि सदुगुणों से पूर्ण है। है प्रिय ! जिस समय यह आकाश अन्तरिक्ष, पृथ्वी, नक्षत्र, दिशाएँ, सूर्य, चन्द्रमा, दिन, रात--ये कुछ भी नहीं थे और सारे जगत् में अत्छ- कार ही अन्धकार छाया हुआ था, उस समय अकेले ब्रह्मा कठोर तप में भ्रवृत्त थे ।! पिता बृहपति की ऐसी

English

It was there that the son of Rudra, Agni and Ganga was born. He had rosy lustre. He was valorous and brilliant like hundreds of suns.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 131
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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