अध्याय १५०
श्लोक 1
॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे लिङ्गवाराहतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नामैकोनपञ्चाशदधिकशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १५० श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेन्महाराज कुसुमेश्वरमुत्तमम् ।दक्षिणे नर्मदाकूले उपपातकनाशनम्
|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe liṅgavārāhatīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāmaikonapañcāśadadhikaśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 150 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gacchenmahārāja kusumeśvaramuttamam / dakṣiṇe narmadākūle upapātakanāśanam
हिन्दी अर्थ
अनध्त काल तक स्व में निवास करता है। राजाओं द्वारा वह पूजित होता है, उसके धन धाश्यादि की वृद्धि होती है ।३०-३३॥ ऊती, रेह्ममी वस्त्र, श्रेष्ठ, कम्बल, चरम, सुबर्ण सिमित पट्ठट और मृगलोम इन सब वस्तुओं को विधिपूवंक ब्राह्मणों को देना चाहिए इन दानों पर श्रद्धा रखनेवाले सो वाजपेय यज्ञों का फल प्राप्त करते हैं ।३४-३४५। इस लोक में बहुतेरी सुन्दरी स्थ्रियाँ, पुत्र, पुत्र, एवं सेवक गण उसके वश में रहते- हैं, बहुत से लोग उसके अधीन रहते हैं, और वह सबंदा नीरोग रहता है। जो व्यक्ति नवीन रेशमी वस्त्र, सूक्ष्म सुती वस्त्र, सुन्दर साड़ियों को श्राद्धों के अवसर पर दान करता है, वह अपने समस्त मनोरथों को प्राप्त करता हैे। उसकी सारी विपत्तियाँ इस प्रकार दूर हो जाती हैं, जंसे सूयोंदय होने पर अन्धकार । नक्षत्रों में चन्द्रमा के समान देवविमानों में वह अग्रसर होकर सुक्षोभित होता है ।३६-३८। वस्त्र सभी देवताओं द्वारा प्रशंसित तथा सर्वे देवमय है, उस
English
Those whose wives eagerly await the nights and those who run after other men's wives, as well as those who are mad after wealth and love should not be invited to a Sraddha.