Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
157
अध्याय 157 / 232

Adhyaya 157

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अध्याय १५७

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे शुक्लतीर्थमहात्म्यवर्णनं नाम षट्पञ्चाशदधिकशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १५७ श्रीमार्कण्डेय उवाच: तस्यैवानन्तरं राजञ्छुक्लतीर्थसमीपतः ।वासुदेवस्य तीर्थं तु सर्वलोकेषु पूजितम्

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe śuklatīrthamahātmyavarṇanaṃ nāma ṣaṭpañcāśadadhikaśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 157 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tasyaivānantaraṃ rājañchuklatīrthasamīpataḥ / vāsudevasya tīrthaṃ tu sarvalokeṣu pūjitam

हिन्दी अर्थ

ककुद्चिनस्तु तं लोक रबतस्यथ गतस्य हू । हता पुण्यजनेः सर्वा राक्षस: सा कुशस्थली

English

Accidentally Einstein is anticipated by the imaginative Purana-

अध्याय १५७

श्लोक 2

तद्धि पुण्यं सुविख्यातं नर्मदायां पुरातनम् ।यत्र हुङ्कारमात्रेण रेवा क्रोशं जगाम सा

taddhi puṇyaṃ suvikhyātaṃ narmadāyāṃ purātanam / yatra huṅkāramātreṇa revā krośaṃ jagāma sā

हिन्दी अर्थ

हैं। जो सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति इम सात मूल स्वरों का भली भाँति अध्ययन करता है, उस धामिक महात्मा की विश्रशाखा सुत के समान कीति फंलती है वेवस्वत मनु के बंश का वर्णन

English

To a person who goes to the world of god Brahma, there is neither hunger nor thirst. He has neither old age nor fear of death. No ailment affects him.

अध्याय १५७

श्लोक 3

यदा प्रभृति राजेन्द्र हुङ्कारेण गता सरित् ।तदाप्रभृति स स्वामी हुङ्कारः शब्दितो बुधैः

yadā prabhṛti rājendra huṅkāreṇa gatā sarit / tadāprabhṛti sa svāmī huṅkāraḥ śabdito budhaiḥ

हिन्दी अर्थ

सूत बोले--ऋषिवृन्द ! उपर्यक्त महाराज रेबत के, जिनका दूसरा नाम क्षकुक्मो भी था, मेरु शिखर पर चले जाने के उपरान्त यक्षों और राक्षसों ने मिलकर सारी कुशस्यथली को विध्वस्त कर दिया। परम धामिक एवं महात्मा उस राजा ककुझी के अन्य सौ भाई लोग उन राक्षसों से अतिशय पीडित एवं भयभीत॑ होकर इधर उधर भाग गये !१-२। और इस प्रकार उन राक्षसों से भयभीत क्षत्रियों के समुह इधर उधर तितर-

English

O excellent sages, as to the question put to me on Gandharva (science of music), I shall explain it precisely, O good sages of holy rites.

अध्याय १५७

श्लोक 4

हुङ्कारतीर्थे यः स्नात्वा पश्यत्यव्ययमच्युतम् ।स मुच्यते नरः पापैः सप्तजन्म कृतैरपि

huṅkāratīrthe yaḥ snātvā paśyatyavyayamacyutam / sa mucyate naraḥ pāpaiḥ saptajanma kṛtairapi

हिन्दी अर्थ

बितर हो गये । वहाँ पर भी कुछ वंशज गये जहाँ महान् प्रवापी राजा स्वयं निवास करता था। उस राजा इदमर्ध॑ नास्ति क, पुस्तके । अस्याधंस्यथ न पूर्वापरसंगति: ।

English

The Svara Manila 1 (the whole group pertaining to musical notes) is comprised by seven Svaras (notes), three Gramas- (basic scales), twentyone Murcchanas? (the modes of

अध्याय १५७

श्लोक 5

संसारार्णवमग्नानां नराणां पापकर्मिणाम् ।नैवोद्धर्ता जगन्नाथं विना नारायणं परः

saṃsārārṇavamagnānāṃ narāṇāṃ pāpakarmiṇām / naivoddhartā jagannāthaṃ vinā nārāyaṇaṃ paraḥ

हिन्दी अर्थ

प्रयता इति विख्याता दिक्षु सर्वासु धाभिका:। धुष्टस्थ धाष्टंक क्षत्रं रणधुष्टं बभूव ह ४

English

It suggests the ascent and descent of seven notes, known as Svara- sap taka. Sec v. 37.

अध्याय १५७

श्लोक 6

सा जिह्वा या हरिं स्तौति तच्चित्तं यत्तदर्पितम् ।तावेव केवलौ श्लाघ्यौ यौ तत्पूजाकरौ करौ

sā jihvā yā hariṃ stauti taccittaṃ yattadarpitam / tāveva kevalau ślāghyau yau tatpūjākarau karau

हिन्दी अर्थ

क्षुवतस्तु मनोः पुर्व॑सिक्वाकुरभिनि:सुतः । तस्य पुत्रशतं त्वासीदिक्षवाको भूरिदक्षिणम् ८ विशतिप्रमुखास्ते तु दक्षिणापथरक्षिण:। इक्ष्वाकुस्तु विकुक्षि वे अष्टाकायामथा55दिशत् ११

English

Grama: Grama means the group of seven notes. The three Gramas mentioned in Puranas are (1) §adja-grama, (ii) Madhyama-grama and (iii) Gandhara-grama. These three were the basic scales—the Sdsca\c, the Ma-s cale and the Ga-scale. These had the notes Sd, Ma and Ga as the starting points. TIius the order of notes in these scales will be as follows:

अध्याय १५७

श्लोक 7

सर्वदा सर्वकार्येषु नास्ति तेषाममङ्गलम् ।येषां हृदिस्थो भगवान्मङ्गलायतनो हरिः

sarvadā sarvakāryeṣu nāsti teṣāmamaṅgalam / yeṣāṃ hṛdistho bhagavānmaṅgalāyatano hariḥ

हिन्दी अर्थ

मांसमानय भआ्धेयं मृगान्हत्वा महाबल । क्षाद्धमद्य नु कतंव्यमष्टकायां न संशयः

English

Murcchand:

अध्याय १५७

श्लोक 8

यद् अन्यद् देवतार्चायाः फलं प्राप्नोति मानवः ।साष्टाङ्गप्रणिपातेन तत्फलं लभते हरेः

yad anyad devatārcāyāḥ phalaṃ prāpnoti mānavaḥ / sāṣṭāṅgapraṇipātena tatphalaṃ labhate hareḥ

हिन्दी अर्थ

के वे वंशज क्षत्रिय गण सभी दिद्ञाओं में धामिक विचारोंवाले तथा इन्द्रियों को वश में रखनेवाले विश्यात थे । इसी वंश में उत्पन्न होनेवाले धृष्ट के धाष्टक, क्षत्र, रणधृष्ट नामक पुत्र हुए ।३-४॥ जो परम बलवान् तीन सहल्न क्षत्रियों के समृह में प्रमुख थे । दूसरे उसी वंश्व में उत्पन्न होनेवाले नभग के उत्तराधिकारी परम बलवान नाभाग नाम से प्रसिद्ध हुए। नाभाग के पुत्र अम्बरीष हुए, उन अम्बरीष के पुत्र विरूप हुए। विरूप के प्रषदव्व हु', जिनके पुत्र का नाम रथीतर हुआ । ये उपर्युक्त राजा गण क्षत्रिय वंश में उत्पन्न हुए और अंगिरा॥ के गोत्रज रूप में विख्यात हुए । रथीतर के वंश में उत्पन्न होनेवालों के प्रवर क्षत्रिय एवं ब्राह्मण दोनों के हैं। प्राचीनकाल में मनु के छींकते समय इक्ष्वाकु नामक पुत्र निकल पड़े थे। वे परम दातशील थे, उनके एक सौ पुत्र हुए ।५-८। उन सभी पुत्रों में सबसे ज्येष्ठ विकुक्षि नाम से विरुयात थे, उनके अतिरिक्त नेमि और

English

Tala or Tana:

अध्याय १५७

श्लोक 9

रेणुगुण्ठितगात्रस्य यावन्तो ऽस्य रजःकणाः ।तावद्वर्षसहस्राणि विष्णुलोके महीयते

reṇuguṇṭhitagātrasya yāvanto 'sya rajaḥkaṇāḥ / tāvadvarṣasahasrāṇi viṣṇuloke mahīyate

हिन्दी अर्थ

दण्ड--को मिलाकर तीन पुत्र विख्यात थे, विकुक्षि के शकुनि प्रभृति पाँच सौ पुत्र हुए । वे सभी उत्तराखण्ड के देशों के स्वामी हुए अड़तालीस दक्षिण में हुए जिनमें बीघध्र प्रमुख थे, वे दक्षिण दिशा पथ के समस्त प्रदेशों की रक्षा में तत्पर रहनेवाले थे । एक बार अष्टकातिथि के अवसर पर इक्ष्वाकु ने विकुक्षि को आदेश

English

The Murcchanas of the Mas calc ( Maclhyama-gramika ) are known as Saublr! (Sauvlra in Bd. P.) of the Madhyama- grama, Harinasya, Kalopabalopeta (also known as Kalopanata) the fourth Suddha-madhyama, Sarngi, Pavanl and Dpstaka in the serial order. Murcchanas of Madhyama-grama are ex¬ plained. Now understand (the Murcchanas of) the Sascale (Safia-grama ).

अध्याय १५७

श्लोक 10

सम्मार्जनाभ्युक्षणलेपनेन तदालये नश्यति सर्वपापम् ।नारी नराणां परया तु भक्त्या दृष्ट्वा तु रेवां नरसत्तमस्य

sammārjanābhyukṣaṇalepanena tadālaye naśyati sarvapāpam / nārī narāṇāṃ parayā tu bhaktyā dṛṣṭvā tu revāṃ narasattamasya

हिन्दी अर्थ

राजा ने कहा--हे महाबलवान् ! भूगों को मारकर श्राद्ध करने योग्य मांस लाओ। आज अष्टका तिथि है, आज श्राद्ध करने का मेरा निरचय है। परम बुद्धिमान राजा इक्ष्वाकु की आज्ञा से विकुक्षि मृग्रों का वध करने के लिये वन को गये । वहाँ सहस्नों मृगों का वध करने के कारण विकुक्षि परम बल- ७८० वायुपुराणम्र्

English

The text omitted the names Abhirudgata, Matsarikrta and Asvakranta.

अध्याय १५७

श्लोक 11

येनार्चितो भगवान्वासुदेवो जन्मार्जितं नश्यति तस्य पापम् ।स याति लोकं गरुडध्वजस्य विधूतपापः सुरसङ्घपूज्यताम्

yenārcito bhagavānvāsudevo janmārjitaṃ naśyati tasya pāpam / sa yāti lokaṃ garuḍadhvajasya vidhūtapāpaḥ surasaṅghapūjyatām

हिन्दी अर्थ

आगते स विकुक्षो तु समांसे सहसेनिके। बसिष्ठ चोदयासास मांस प्रोक्षय सन्त्रतः

English

Strangely enough neither our text nor Bd. P. gives the Murcchanas of the Ga-scale.

अध्याय १५७

श्लोक 12

शाठ्येनापि नमस्कारं प्रयुञ्जंश् चक्रपाणिनः ।सप्तजन्मार्जितं पापं गच्छत्याशु न संशयः

śāṭhyenāpi namaskāraṃ prayuñjaṃś cakrapāṇinaḥ / saptajanmārjitaṃ pāpaṃ gacchatyāśu na saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

तथेति चोदितो राज्ञा विधिवत्सम्रुपस्थितः स॒ दृष्ट्वोपह॒तं मांस क़ुद्धो राजानमन्रवीत् शशं भक्षयसे5रण्ये निघ णः पृर्व॑ंचद्य नु १८

English

The Murcchana Karopanita-vitala was sung by Maruts in Svara-Mandala. That is Kalofianitd. Hence its presiding deity is Maruta. 7

अध्याय १५७

श्लोक 13

पूजायां प्रीयते रुद्रो जपहोमैर् दिवाकरः ।शङ्खचक्रगदापाणिः प्रणिपातेन तुष्यति

pūjāyāṃ prīyate rudro japahomair divākaraḥ / śaṅkhacakragadāpāṇiḥ praṇipātena tuṣyati

हिन्दी अर्थ

इक्ष्वाको संस्थिते तल्मिझ्शशास पृथिवीसिमाम्। प्राप्त: परमधर्मात्मा स चायोध्याधिपो5भवत्

English

The Murcchana Suddha-madhyama originated in the Manu (ru?) desa.

अध्याय १५७

श्लोक 14

भवजलधिगतानां द्वन्द्ववाताहतानां सुतदुहितृकलत्रत्राणभारार्दितानाम् ।विषमविषयतोये मज्जतामप्लवानां भवति शरणमेको विष्णुपोतो नराणाम्

bhavajaladhigatānāṃ dvandvavātāhatānāṃ sutaduhitṛkalatratrāṇabhārārditānām / viṣamaviṣayatoye majjatāmaplavānāṃ bhavati śaraṇameko viṣṇupoto narāṇām

हिन्दी अर्थ

वान् होने पर भी बहुत थक से गये । और मृगया करते समय उत्होंने थकावट दूर करने के लिये वहीं पर एक खरगोश खा लिया ।१२-१३। सेनिकों के साथ मांस लेकर जब विकुक्षि राजधानी को वापिस लौटे तब राजा ने महषि वसिष्ठ से “मांस का मंत्रोच्चारण पूर्वक सिंचन संस्कार कर दीजिये'--ऐसा कहा । राजा के ऐसा कहने पर वसिष्ठ थ्ले “बहुत अच्छा” कहकर विधि पूर्वक सिचन संस्कार करने के लिये जब वहाँ उपस्थित हुए । तब उस समस्त मांस राशि को अपवित्र देखकर परम कुद्ध होकर राजा से बोले

English

Since it moves along with the deer for the guidance of As the Murcchana is associated with hermitages and also with the various (human) voices of citizens, it is called Rajani due to its association with rajas (dust/atmosphere).

अध्याय १५७

श्लोक 15

हुङ्कारतीर्थे राजेन्द्र शुभं वा यदि वाशुभम् ।यत्कृतं पुरुषव्याघ्र तन्नश्यति न कर्हिचित्

huṅkāratīrthe rājendra śubhaṃ vā yadi vāśubham / yatkṛtaṃ puruṣavyāghra tannaśyati na karhicit

हिन्दी अर्थ

राजन् ! तुम्हारे इस नीच स्वभाव वाले पुत्र विकुक्षि ने यह्व सब मांस अपवित्र कर दिया है । इसने पूर्व में ही खरगोश्न का मांस खा लिया है, अतः उसी के कारण यह सारा मांस अखाद्य हो गया है । है निष्पाप इस तुम्हारे दुरात्मा पुत्र ने वन में श्राद्ध के पूर्व ही एक खरगोश खा लिया है, है तृपतिवर ! इसी कारण से यह सारा मांस दूषित हो गया, अब यह पितरों के योग्य नहीं रह गया है ।१६-९७॥।

English

The Tala (beating time) is known as having Satjlja as its deity. Hence Uttara-t&la is known first as well extended.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 157
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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