Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
159
अध्याय 159 / 232

Adhyaya 159

102 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ102 श्लोक

श्लोक पर जाएं:

अध्याय १५९

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे सङ्गमेश्वरतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नामाष्टपञ्चाशदधिकशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १५९ श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेन्महाराज तीर्थं परमपावनम् ।नर्मदायां सुदुष्प्रापं सिद्धं ह्यनरकेश्वरम्

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe saṅgameśvaratīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāmāṣṭapañcāśadadhikaśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 159 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gacchenmahārāja tīrthaṃ paramapāvanam / narmadāyāṃ suduṣprāpaṃ siddhaṃ hyanarakeśvaram

हिन्दी अर्थ

कुव॒लाइव अवश्यमेव धुन्धु का संहार करेगा। देवतागण चारों ओर से स्वर्गीय पुष्षों की वृष्टि उसके ऊपर करने लगे। इस प्रकार अपने पुत्रों समेत प्रस्थान कर परम बल शाली नरव्यात्र कुबलाशव ने उस बालुकामय समुद्र को जिसका विनाश असम्भव था, खतना प्रारम्भ किया उस समय वह राजधि भगवान् के तेज से समन्वित होकर महान् बलवान हो गये थे, फिर भी महर्षि उत्तद्भु के वश में वतंमान थे ।४९-५३॥ उस समय

English

Although I have referred to the section on Alankdras in Sangita Ratnakara (I.VI) only a few Alankaras like Sycna ( of S. R.) shed some light. Though S.R. is much later than Va.P or Bd.P., I consulted it m S.R. preserved some of the PurAuic traditions.

अध्याय १५९

श्लोक 2

तस्मिंस्तीर्थे नरः स्नात्वा पापकर्मापि भारत ।न पश्यति महाघोरं नरकद्वारसंज्ञिकम्

tasmiṃstīrthe naraḥ snātvā pāpakarmāpi bhārata / na paśyati mahāghoraṃ narakadvārasaṃjñikam

हिन्दी अर्थ

जब कि उनके पुत्र गण उस वालुकामय समुद्र को खन रहे थे धुन्धु इर पश्चिम दिशा की ओर दिखाई पड़ा। उस समय वह बहुत क्रोधित हो रद्दा था, मुख से अग्नि की विकराल ज्वालाएं इस प्रकार उगल रहा था मानों समस्त लोकों को विनष्ट कर देना चाहता है। फिर उसने योगबल का आश्रय लेकर इतना जल बरसाया कि चारों ओर जल का भीषण समुद्र उमड़ पड़ा । है सोमपान करनेवाले ऋषियों में सर्वोपरि ! उस समय वह जल राशि एवं तरंगे इस प्रकार ऊपर की ओर उमड़ने लगीं मानों चन्द्रमा का उवय हो गया हो। इस प्रकार राक्षसों ने राजा के समस्त पुत्रों को, केवल तीन पुत्रों को छोड़कर, भस्म कर दिया ।५४-५६। तब धुन्धु के परिवार वर्ग को नष्ट करने की चिन्ता से उस महाबलवान राजा ने धुन्धु की उस समस्त जल राशि को पान कर लिया, और योगबल द्वारा जल से इस अग्नि को भी शान्‍्त कर दिया । और उस प्रकार अपने अदम्य साहस से उस

English

(Names of Alankaras still continue as follows:) Visoara, Asfakala 2 3 which has an interval of one place (from its original place?). Avarta and Kramolpalti —these two should be effected according to their proportion.

अध्याय १५९

श्लोक 3

युधिष्ठिर उवाच: शुभाशुभफलैस्तात भुक्तभोगा नरास्त्विह ।जायन्ते लक्षणैर्यैस्तु तानि मे वद सत्तम

yudhiṣṭhira uvāca: śubhāśubhaphalaistāta bhuktabhogā narāstviha / jāyante lakṣaṇairyaistu tāni me vada sattama

हिन्दी अर्थ

महाबलवान् जलवासी राक्षस धुन्धु को निरस्त कर दिया ।५३-४5। अपने कार्य में सफलता प्राप्त कर राजा महषि उत्तद्भु के समीप उपस्थित हुए मह॒षि ने उस महात्मा राजा को उत्तम वरदान दिये। उसे कभी नष्ट न होने वाली अक्षय सम्पत्ति प्रदान की, शत्रुओं से उसे कभी पराजय न भिले, धर्म में प्रेम भावना की वृद्धि हो; स्वर्ग लोक में निरन्तर बास हो,--वहाँ से कभी पतन न हो-ऐसा वरदान दिया। इसके अतिरिक्त राक्षसों

English

Syena is originated as having one interval and situated in the midst of Matras of a Kala. In it there abides the increase in the order of the note different from it (e.g. Sa~ Pa, Ri—Dha, Ga—Ni).

अध्याय १५९

श्लोक 4

यथा निर्गच्छते जीवस्त्यक्त्वा देहं न पश्यति ।तथा गच्छन्पुनर्देहं पञ्चभूतसमन्वितः

yathā nirgacchate jīvastyaktvā dehaṃ na paśyati / tathā gacchanpunardehaṃ pañcabhūtasamanvitaḥ

हिन्दी अर्थ

तस्य पत्नी हैमवती सतां मतिदृषद्गवती । विख्याता त्रिषु लोकेषु पृत्रस्तस्याः प्रसेनजित् ६४ युवनाश्वः सुतस्तस्य त्रिषु लोकेष्वतिद्युतिः । अत्यन्तधामिकों गौरी तस्य पत्नी पतिब्रता ३६५ मांधाता यौवनाश्वो वे अलोक्यविजयी नृपः । अन्राप्युदाहरन्तोमो श्लोफो पोराणिका द्विजा:

English

The descent of the Syena AlankSra is called Uttara. The

अध्याय १५९

श्लोक 5

त्वगस्थिमांसमेदोऽसृक्केशस्नायुशतैः सह ।विण्मूत्ररेतःसङ्घाते का संज्ञा जायते नृणाम्

tvagasthimāṃsamedo'sṛkkeśasnāyuśataiḥ saha / viṇmūtraretaḥsaṅghāte kā saṃjñā jāyate nṛṇām

हिन्दी अर्थ

मांधाता तु तनुविष्णो: पुराणज्ञा: प्रचक्षेी। .. ६६

English

The Alankara called Prenkholita has the twelfth place of Kala having one interval. Thus it is endowed with Svaras (Notes).

अध्याय १५९

श्लोक 6

एवमुक्तः स मार्कण्डः कथयामास योगवित् ।ध्यात्वा सनातनं सर्वं देवदेवं महेश्वरम्

evamuktaḥ sa mārkaṇḍaḥ kathayāmāsa yogavit / dhyātvā sanātanaṃ sarvaṃ devadevaṃ maheśvaram

हिन्दी अर्थ

द्वारा उनके जिन पुत्रों का निधन हुआ था, उन्हें अक्षय स्वर्ग प्रदात किया ।५६-६०। उस राजा कुवलाश्व के जो तीन पुत्र शेष रह गये थे, उनमें सबसे बड़े का नाम दुढाश्व कहा जाता है, भद्गाइव ओर कपिलाइव--ये दो छोटे कहे जाते हैं । धुन्धुभार के ज्येष्ठ पृत्र दुढाइ्व का जो पुत्र हुआ उसका नाम हयंश्व था । हयेदव कौ पुत्र निकुम्भ हुआ, जो सवदा क्षत्रिय धर्म में निरत रहनेवाला था ।६१-६२। निकुम्भ का पुत्र सहताइ्व रणभूमि में परम निपुण सुना जाता है। उसके कृशाश्व और अक्षयाइव नामक दो पुत्र हुए। संहताइव की एक पत्नी का नाम हेमवती थी, जो सत्पुरुषों से सम्मानीय थी, उसका दूसरा नाम मतिदुषद्वती था, तीनों लोकों में वह परम विख्यात थी, उसका पुत्र प्रसेनजित हुआ ।६३-६४। प्रसेनजित का पुत्र युवनाश्व तीनों लोकों में परम कान्तिमान था, उसके विचार परम धाभिक थे, उसकी पतित्रता भार्या मौरी थी। पतिने एक बार उसे शाप दे दिया

English

Some verses after this must have been lost as neither our text nor Bd.P. explains these anywhere.

अध्याय १५९

श्लोक 7

मार्कण्डेय उवाच: शृणु पार्थ महाप्रश्नं कथयामि यथाश्रुतम् ।सकाशाद्ब्रह्मणः पूर्वमृषिदेवसमागमे

mārkaṇḍeya uvāca: śṛṇu pārtha mahāpraśnaṃ kathayāmi yathāśrutam / sakāśādbrahmaṇaḥ pūrvamṛṣidevasamāgame

हिन्दी अर्थ

जिसके फंल स्वरूप वह बाहुदा नामक नदी के रूप में परिणत हुई । उसका. पुत्र गौरिक अपने समय का चक्रवर्ती सम्राट् हुआ । युवनाइव का पुत्र मान्धाता त्रेलोक्य विजयी राजा था, उसके विषय में पुरानी कथाओं के जानने वाले विप्रगग ये दो श्लोक बतलाते हैं, जिनका तात्पयं यह है। “जहाँ से सूर्य उदित होते हैं ओर जहाँ पर जाकर अस्त होते हैं, वह सब मान्धाता का क्षेत्र (राज्य) कहा जाता है। इस प्रसंग में राजवंशों के जानने

English

Uffrakala in the text being obscure, is emended as per Bd. P.

अध्याय १५९

श्लोक 8

गुरुरात्मवतां शास्ता राजा शास्ता दुरात्मनाम् ।इह प्रच्छन्नपापानां शास्ता वैवस्वतो यमः

gururātmavatāṃ śāstā rājā śāstā durātmanām / iha pracchannapāpānāṃ śāstā vaivasvato yamaḥ

हिन्दी अर्थ

वाले लोग परम तेजस्वी, यज्ञ परायण महात्मा मान्धाता के विषय में यहाँ तक कहते हैं कि 'पुराणज्ञ लोग मान्धाता को भगवान विष्ण का स्वरूप बतलाते हैं ।६५-६६॥ उस राजा मान्धाता कौ स्त्री शशबविन्दू की पुत्री संभुतस्याउपत्मजः पुत्रों ह्वनरण्यः प्रतापवान् । रावणो निहतो येन त्रिलोकीविजये पुरा

English

The text is obscure both here and in the Bd. P.

अध्याय १५९

श्लोक 9

अचीर्णप्रायश्चित्तानां यमलोके ह्यनेकधा ।यातनाभिर्वियुक्तानामनेकां जीवसन्ततिम्

acīrṇaprāyaścittānāṃ yamaloke hyanekadhā / yātanābhirviyuktānāmanekāṃ jīvasantatim

हिन्दी अर्थ

तस्य पुत्रोभवद्राजा त्रिधन्‍्वा नाम धारमिकः । आसोत्त्रेधन्वनश्रापि विद्वांस्त्रय्यारुण: प्रभु:

English

Just as in the case of beautification (of one's person; it is extremely censured if it is used at the wrong place, similarly unfavourable (discordant) embellishment of the Varners also (is censurable) as it is produced by oneself.

अध्याय १५९

श्लोक 10

गत्वा मनुष्यभावे तु पापचिह्ना भवन्ति ते ।तत्ते ऽहं सम्प्रवक्ष्यामि शृणुष्वैकमना नृप

gatvā manuṣyabhāve tu pāpacihnā bhavanti te / tatte 'haṃ sampravakṣyāmi śṛṇuṣvaikamanā nṛpa

हिन्दी अर्थ

तस्य सत्यत्रतो नाम कुमासे5भुन्महाबलः। तेन भार्या विदर्भस्य हृता हत्वा दिवौकसानू. पाणिग्रहणमन्त्रेषु निष्ठां संप्रापितेष्विह । विष्णुवद्धः सुतस्तस्य विष्णवरद्धा यतः स्मृताः ॥॥

English

Just as with the use of various ornaments, a woman gets herself beautified, so are the (musical) embellishments to a Varna, (but) if discordantly used, it is bitterly denounced.

अध्याय १५९

श्लोक 11

सहित्वा यातनां सर्वां गत्वा वैवस्वतक्षयम् ।विस्तीर्णयातना ये तु लोकमायान्ति चिह्निताः

sahitvā yātanāṃ sarvāṃ gatvā vaivasvatakṣayam / vistīrṇayātanā ye tu lokamāyānti cihnitāḥ

हिन्दी अर्थ

कामाहइलाच्च मोहाच्च संकषंणबलेन च। भाविनोथंस्य च बलात्तत्कृतं तेन धोमता ८०

English

The ear-ring is not seen (worn) on the feet; nor a girdle round the neck. So also the embellishment (in music) if used in the wrong place, is reproached.

अध्याय १५९

श्लोक 12

गद्गदो ऽनृतवादी स्यान्मूकश्चैव गवानृते ।ब्रह्महा जायते कुष्ठी श्यावदन्तस्तु मद्यपः

gadgado 'nṛtavādī syānmūkaścaiva gavānṛte / brahmahā jāyate kuṣṭhī śyāvadantastu madyapaḥ

हिन्दी अर्थ

“--+++्+"५/)3२7स्‍8) -+-"-+-+-+-.न्‍॥ह/॥्््ननन्‍नन्‍बनछझ॥0202/हऑ.7रै है है हएऋ£ओआऑआऑ 9 उउः चेतरथी थी । वह समस्त पृथ्वी में अपने रूप में अनृपम थी उस परम पतित्नता का अन्य नाम विन्दुमतो भी था। अपने दस सहस्र भाइयों में वह सबसे ज्येष्ठ थी, उसका पतिब्रता धर्म प्रशंसनोय था । ऐश्वयंशाली मान्धाता ने उससे तीन पुत्र उत्पन्न किये, जिनके नाम पुरुकुत्स, अम्बरीष और मुचुकुन्द सुने जाते हैं। राजा अम्बरीष का उत्तराधिकारी दूसरा युवनादव हुआ, युवनाश्व के पुत्र हरित हुए, हरित के पुत्र शूरि नाम से विख्यात हुए ।

English

When the embellishment is effected, it should indicate the Raga (melody); just as the path intended to be undertaken is characterised.

अध्याय १५९

श्लोक 13

कुनखी स्वर्णहरणाद् दुःश्चर्मा गुरुतल्पगः ।संयोगी हीनयोनिः स्याद् दरिद्रो ऽदत्तदानतः

kunakhī svarṇaharaṇād duḥścarmā gurutalpagaḥ / saṃyogī hīnayoniḥ syād daridro 'dattadānataḥ

हिन्दी अर्थ

ये महृषि अंगिरा के पुत्र क्षत्रिय धर्म परायण द्विजाति कहे जातें थे, राजा पुरुकृत्स के उत्तराधिकारी महान् यशस्वी त्रसदस्यु हुए, जिनका जन्म नमंदा में हुआ था, त्रसदन्यु के पुत्र सम्भूत हुए ।७००-७४। सम्भूत के पुत्र परम प्रताप शाली अनरण्य हुए । जिन्होने प्राचीव काल में त्रिलोकी विजय के प्रसद्भ में रावण का निधन किया था । उन राजा अनरण्य के पुत्र त्रसददव हुए, जिनके पुत्र का चाम हयेश्व था, उन राजा ह॒यंश्व से दुषद्ती में

English

If the reading from Bd.P. is referred to the name of this Alankara is Vdpa. But I am not sure of the correctness of the reading in the Bd.P.

अध्याय १५९

श्लोक 14

ग्रामशूकरतां याति ह्ययाज्ययाजको नृप ।खरो वै बहुयाजी स्याच्छ्वानिमन्त्रितभोजनात्

grāmaśūkaratāṃ yāti hyayājyayājako nṛpa / kharo vai bahuyājī syācchvānimantritabhojanāt

हिन्दी अर्थ

राजा वसुमत का जन्म हुआ । राजा वसुमत के पुत्र परम धमिक राजा त्रिधन्वा उत्पन्न हुए, राजा त्रिधन्वा के पुत्र परम विद्वान् एवं प्रभावशाली राजा त्रय्यारुण ६ए ।७५-३७। उसके महा बलवान पुत्र सत्यक्नत हुए उन्होंने विदर्भ राजा की स्त्नी को, विवाह के मंत्रों के उच्चारण करते समय, जब सारी क्रियाएँ समाप्त हो ग्रयी थीं, समस्त देवताओं को पराजित कर, हरण किया था। उस परम बलवान राजा के पुत्र विष्ण॒षृद्ध हुए, जिनसे उत्पन्न होनेवाले बंश के लोग विष्णुवृद्ध नाम से विर्यात हुए । अंगिरा के ये पुत्रगण भी क्षत्रिय मिश्रित द्विजाति बर्ण के हैं ।७८-७६। परम बुद्धिमान सत्यत्नत ने अपनी इच्छा से, बल से, अथवा बलवान भावी (नियति) के बश होकर बलपू्वंक उक्त दुराचरण किया था, उसके इस अधर्माचरण से असन्तुष्ट होकर पिता त्रय्पारुण ने

English

Vide Sangita-ratndkara I, 6.64 which enumerates Rakfilabha etc.

अध्याय १५९

श्लोक 15

अपरीक्षितभोजी स्याद्वानरो विजने वने ।वितर्जको ऽथ मार्जारः खद्योतः कक्षदाहतः

aparīkṣitabhojī syādvānaro vijane vane / vitarjako 'tha mārjāraḥ khadyotaḥ kakṣadāhataḥ

हिन्दी अर्थ

तमधमेंण सयुक्त पिता त्रय्यारुणोउत्यजत् । अपध्वंसेति बहुशो5वदत्कोधसमस्वितः

English

Obscure*..,..

अध्याय १५९

श्लोक 16

अविद्यां यः प्रयच्छेत बलीवर्दो भवेद्धि सः ।अन्नं पर्युषितं विप्रे ददानः क्लीबतां व्रजेत्

avidyāṃ yaḥ prayaccheta balīvardo bhaveddhi saḥ / annaṃ paryuṣitaṃ vipre dadānaḥ klībatāṃ vrajet

हिन्दी अर्थ

न चेन धारयामास वसिष्ठो भगवानृषिः स तु सत्यक्नतों धीमाञ्श्वपाकावसथान्तिकम् ॥ तस्मिस्तु विषये तस्य नावषंत्पाकशासन:। समा द्वादश संपूर्णास्तेनाधमेंण वे तदा .. ८५ दारांसतु तस्थ विषये विश्वामित्रों महातपा:। संन्यस्य सागरानपे चचार विपुलं तपः

English

The songs which have been mentioned with particular emphasis on the form should be effected with seven notes and the Kaifiki [-Aa] of the sevenfold form.

अध्याय १५९

श्लोक 17

मात्सर्यादथ जात्यन्धो जन्मान्धः पुस्तकं हरन् ।फलान्याहरतो ऽपत्यं म्रियते नात्र संशयः

mātsaryādatha jātyandho janmāndhaḥ pustakaṃ haran / phalānyāharato 'patyaṃ mriyate nātra saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

ते तु बढ्धं गले दृष्ट्वा विक्रीतं तं नरोत्तमः। महर्षिपुत्र धर्मात्मा मोक्षयामास सुब्रत: ८८ सत्यब्रतो महाबुद्धिभरणं तस्य चाकरोत् । विश्वामित्रस्य तुष्टयर्थमनुकम्पार्थमेव च

English

With one foot (Pada) in the Matra and with one foot

अध्याय १५९

श्लोक 18

मृतो वानरतां याति तन्मुक्तो ऽथ गलाडवान् ।अदत्त्वा भक्षयंस्तानि ह्यनपत्यो भवेन्नरः

mṛto vānaratāṃ yāti tanmukto 'tha galāḍavān / adattvā bhakṣayaṃstāni hyanapatyo bhavennaraḥ

हिन्दी अर्थ

सोडभवद्गालवो नाम गले बद्धो महातपाः महषि:ः कौशिकस्तातस्तेन वीयेंण मोक्षितः ६० उसका परित्याग कर दिया । और परम क्रद्ध होकर अनेक बार उससे कहा कि तुम हमारे घर से बाहर निकल जा ।! अपने पिता के एकमात्र पुत्र सत्यत्रत ने जब पिता से बारम्बार पूछा कि 'मैं कहाँ जाऊं ।! तब पिता ने कहा कि चाण्डालों के साथ जाकर निवास कर, है कुल में कलंक लगानेवाले ! तुम्हारे जैसे नालायक पुत्र से में पुत्रवान नहीं होना चाहता ।” है परम प्रतापशाली ! पिता के इस प्रकार निरादर पूर्ण वचन कहे

English

The second break in the foot is well, established with Graha (the starting point of the song) and in the Aparantika (songs). The first, the eighth, the third and second are esta- blished with Graha (!)

अध्याय १५९

श्लोक 19

हरन्वस्त्रं भवेद्गोधा गरदः पवनाशनः ।प्रव्राजी गमनाद् राजन् भवेन् मरुपिशाचकः

haranvastraṃ bhavedgodhā garadaḥ pavanāśanaḥ / pravrājī gamanād rājan bhaven marupiśācakaḥ

हिन्दी अर्थ

जाने पर सत्यत्रत नगर से बाहर निकल गये उस समय परम प्रभावशाली महृषि वसिष्ठ ने भी उन्हें घर रहने के लिये नहीं रोका । इधर, परम बुद्धिमान-एवं वीर सत्यव्रत पिता के परित्याग कर देने पर चाण्डालों की बस्ती के समीप जाकर बस गये और उधर उनके पिता बन को चले गये ॥5०-८४। इस अधमं से उस प्रास्त में इन्द्र ने बारह वर्षों तक वृष्टि नहीं की उसी प्रान्त में महातपस्वी विश्वामित्र अपने स्त्री पुत्रों को तिराधार छोड़कर

English

(Obscure) With half of the equivalent of a Pada and in the one-fifth portion of the Pada, the Pada-bhdga (one fourth of the Pada) also along with the one and a quarter (of a pada) (?) is established in the original form)

अध्याय १५९

श्लोक 20

वातको जलहर्ता च धान्यहर्ता च मूषकः ।अप्राप्तयौवनां गच्छन् भवेत् सर्प इति श्रुतिः

vātako jalahartā ca dhānyahartā ca mūṣakaḥ / aprāptayauvanāṃ gacchan bhavet sarpa iti śrutiḥ

हिन्दी अर्थ

सागर के तटवर्ती प्रान्त में घोर तप कर रहे थे, उनकी पत्नी ने अपने मँझले पुत्र को गले में बाँधकर शेष पुत्रों के भरण-पोषण के लिये सौ गौंओं के बदले बेंच दिया था व्रतपरायण, धर्मात्मा नरपति सत्यव्रत ने महषि- पुत्र विश्वा मित्र के मझले पुत्र को इस प्रकार गले में बंधा और विक्रीत देखकर उस संकट से छुड़ाया तदुपरान्त उस महाबुद्धिमान राजा ने महषि विश्वामित्र को सन्‍्तुष्ट और प्रसन्न करने के लिये उनके पुत्र का पालन-पोषण किया। गले में बंधने के कारण विद्वामित्र के उस महातपस्वी पुत्र का नाम गालव पड़ा। इस प्रकार महृषि विश्वामित का पुत्र उस बलवान् राजा के द्वारा बचाया गया । उसने अपनी ब्रत परायणता, भक्ति, कृपा सत्यप्रतिशा एवं विनय से महषि विश्वामित्र की रुन्नी का भी भरण-पोषण किया। विश्वामित्र के आश्रम

English

In the Uttara and Mandraka songs in their original form, the Kala exists as explained of the Daksina Marga (way of the Tala—procedure).*

अध्याय १५९

श्लोक 21

गुरुदाराभिलाषी च कृकलासो भवेच्चिरम् ।जलप्रस्रवणं यस्तु भिन्द्यान्मत्स्यो भवेन्नरः

gurudārābhilāṣī ca kṛkalāso bhavecciram / jalaprasravaṇaṃ yastu bhindyānmatsyo bhavennaraḥ

हिन्दी अर्थ

हत्वा सगान्वराहांश्व महिषांश्व वनेचरान् । विश्वासित्राक्षमाभ्यासे तम्मांसमपचत्ततः

English

When there is the use of one and the use of two, O best of Brahmanas, and when there is the combination of many Pataka 3 etc. are declared.

अध्याय १५९

श्लोक 22

अविक्रेयान् विक्रयन् वै विकटाक्षो भवेन्नरः ।अयोनिगो वृको हि स्याद् उलूकः क्रयवञ्चनात्

avikreyān vikrayan vai vikaṭākṣo bhavennaraḥ / ayonigo vṛko hi syād ulūkaḥ krayavañcanāt

हिन्दी अर्थ

उपांशुब्रतमास्थाय दीक्षां द्वादशवाधिकोम् । पितुनियोगादर्जन्नूपे तु बनमास्थिते . अयोध्याँ चेव राज्यं च तथवास्तःपुरं मुनि: । याज्योपाध्यायसंयोगाहशिष्ठः पर्यरक्षत १३६४ सत्यत्रतस्तु वाल्यात्तु भाविनोथंस्य वे बलातु । वशिष्ठेडम्यधिक मन्युं धारयामास सन्युना. ॥

English

Some lines are perhaps missing ( vide Bd. 3-62.40-41).

अध्याय १५९

श्लोक 23

मृतस्यैकादशाहे तु भुञ्जानः श्वोपजायते ।प्रतिश्रुत्य द्विजायार्थम् अददन् मधुको भवेत्

mṛtasyaikādaśāhe tu bhuñjānaḥ śvopajāyate / pratiśrutya dvijāyārtham adadan madhuko bhavet

हिन्दी अर्थ

पित्रा रुदंस्‍्तदा राष्ट्रात्परित्यक्तं स्वमात्मजम् । न वारयामास सुनिर्बसिष्ठः कारणेन वे ॥€ ६ पाणिग्रहणमन्त्राणां निष्ठा स्थात्सप्तमे पदे । एवं सत्यश्नतस्तान्वे हतवास्सप्तसे पदे

English

(Tentative translation): The two feet and their Ahara(ia(?) beyond this are not laid down.

अध्याय १५९

श्लोक 24

राज्ञीगमाद्भवेद्दुष्टतस्करो विड्वराहकः ।परिवादी द्विजातीनां लभते काच्छपीं तनुम्

rājñīgamādbhavedduṣṭataskaro viḍvarāhakaḥ / parivādī dvijātīnāṃ labhate kācchapīṃ tanum

हिन्दी अर्थ

जानन्धर्मान्वसिष्ठस्तु न च मन्त्रानिहेच्छुति । इति सत्यक्षते रोषं वसिष्ठो मनसाक रोत् गुरुबुद्धया तु भगवान्वसिष्ठः कृतवांस्तदा । न तु सत्यक्नतो्बुध्यदुपांशुन्रतमस्य 5 ६ €

English

Patdkd was one of eight mdtrds, which was indicated by moving the hand upwards. These mdtrds were to be employed in the mdrgas as specifically directed.

अध्याय १५९

श्लोक 25

व्रजेद्देवलको राजन्योनिं चाण्डालसंज्ञिताम् ।दुर्भगः फलविक्रेता वृश्चिको वृषलीपतिः

vrajeddevalako rājanyoniṃ cāṇḍālasaṃjñitām / durbhagaḥ phalavikretā vṛściko vṛṣalīpatiḥ

हिन्दी अर्थ

ततो बसिष्ठो भगवान्पित्रा त्यक्त न्‍्यवारयत् । अभिषेक्ष्याम्यहूं राज्ये पश्चादेनसिति प्रभु:

English

The Vjrttis are the styles of rendering songs. They were three in number viz. Citrd, Vftti and Dakfipa. They were associated with the three

अध्याय १५९

श्लोक 26

मार्जारो ऽग्निं पदा स्पृष्ट्वा रोगवान्परमांसभुक् ।सोदर्यागमनात्षण्ढो दुर्गन्धश्च सुगन्धहृत्

mārjāro 'gniṃ padā spṛṣṭvā rogavānparamāṃsabhuk / sodaryāgamanātṣaṇḍho durgandhaśca sugandhahṛt

हिन्दी अर्थ

के समीप म्गों, शूकरों, महिषों एवं अन्यान्य वन्य जन्तुओं को मारकर उनके मांस को वह पकाता था और मौनव्त धारण कर पिता कौ आज्ञा से बारह वर्ष तक वन में चाण्डालों के समीप तिवास करने की दीक्षा ग्रहण कर निवास करता रहा । इधर पिता पुत्र दोनों की अनृपस्थिति में महषि वसिष्ठ बुरोहितों एवं उपाध्यायों के सहयोग से राजधानी अयोध्या, राज्य, एवं अन्तःपुर की रक्षा करते रहे। कुमार सत्यत्रत अपने बाल्य स्वभाव के कारण तथा भावीवश मह॑षि वसिष्ठ के ऊपर बहुत अधिक क्रृद्ध थे। क्योंकि पिता द्वारा घर से

English

When Raivata, otherwise known as Kakudmin, went to that world (of Brahma) the entire Kusasthall was over-run and destroyed by Punyajanas and Raksasas.

अध्याय १५९

श्लोक 27

ग्रामभट्टो दिवाकीर्तिर् दैवज्ञो गर्दभो भवेत् ।कुपण्डितः स्यान्मार्जारो भषणो व्यास एव च

grāmabhaṭṭo divākīrtir daivajño gardabho bhavet / kupaṇḍitaḥ syānmārjāro bhaṣaṇo vyāsa eva ca

हिन्दी अर्थ

निकाले जाते समय जब वे रोते हुए राष्ट्र से बाहर निकल रहे थे तब मह॒धि वसिष्ठ ने किसी कारण से उन्हें निवारित नहीं किया ।8३-६६। पाणिग्रहण अर्थात् विवाह संस्कार के मंत्रों की समाप्ति सातवें चरण में होती है (सब्त पदी के होने के बाद विवाह संस्कार सम्पन्न होता है) किन्तु उसी सप्तपदी के समाप्त होने के अवसर पर उस विदर्भ राज की स्त्री को बलपूर्वक छीन लिया था। महर्षि वसिष्ठ धर्म की मर्यादा को जानने वाले थे

English

The hundred brothers of that noble-soulcd virtuous king, on being harassed by the Raksasas, fled away in great terror.

अध्याय १५९

श्लोक 28

स एव दृश्यते राजन्प्रकाशात् परमर्मणाम् ।यद्वा तद्वापि पारक्यं स्वल्पं वा यदि वा बहु

sa eva dṛśyate rājanprakāśāt paramarmaṇām / yadvā tadvāpi pārakyaṃ svalpaṃ vā yadi vā bahu

हिन्दी अर्थ

अतः उन्होंने सत्यक्नत के उक्त कार्य का अनुमोदन नहीं किया, और मंत्रों की मर्यादा भ्रष्ट होने के भय से कुमार सत्यवक्षत के ऊपर उन्होंने मन से क्रोध किया ।६७-६८। महथि वसिष्ठ ने गुरु की मर्यादा रक्षा के ध्यान से सत्यत्रत के ऊपर वह कोप किया था, उधर कुमार सत्यव्रत उनके इस मौनावलम्बन का जो नगर से निकालते समय उन्होंने अपनाया था, तात्पर्य नहीं जान सके महा मनस्बी वसिष्ठ जी ने सोचा कि पिता की मृत्यु हो जाने के बाद इन्द्र ने बारह वर्षों तक अराजकता से अधरम बढ़ जाने के कारण वृष्टि नहीं की. इधर सत्यक्षत भी पिता की आज्ञा से बारह वर्ष तक बन में दीक्षा ग्रहण कर निवास कर रहा है पृथ्वी पर लोगों की जीविका कष्ट साध्य हो गई है, सत्यत्नत के आ जाने से उसके वंद्य का तिस्तार तो हो ही जायगा ।६६-१०१। ऐसा विचार कर

English

Fleeing in terror, those Ksatriyas established their families in different places. 2 3 O excellent Brahmanas, these families were very great.

अध्याय १५९

श्लोक 29

कृत्वा वै योनिमाप्नोति तैरश्चीं नात्र संशयः ।एवमादीनि चान्यानि चिह्नानि नृपसत्तम

kṛtvā vai yonimāpnoti tairaścīṃ nātra saṃśayaḥ / evamādīni cānyāni cihnāni nṛpasattama

हिन्दी अर्थ

हथि वसिष्ठ ने उस समय पिता द्वारा निष्कासित किये गये सत्यत्रत्त को निवारित किप्रा, और कहा कि तुम्हें

English

As they were virtuous, they were famous in all the quarters as '■'Prayalas" 2 (the pure ones). The family of Dhpsta, the Ksatriyas named Dharstakas, became quite invinci¬ ble in war. Thus there were three thousand groups of noble-

अध्याय १५९

श्लोक 30

स्वकर्मविहितान्येव दृश्यन्ते यैस्तु मानवाः ।ततो जन्म ततो मृत्युः सर्वजन्तुषु भारत

svakarmavihitānyeva dṛśyante yaistu mānavāḥ / tato janma tato mṛtyuḥ sarvajantuṣu bhārata

हिन्दी अर्थ

स तु द्वादश वर्षाणि दीक्षां तामुद्रहन्बली । अविद्यमाने मांसे तु वसिष्ठस्थ महात्मनः ३१०३ सर्वक्ामदुधां धेनूं स ददर्श नृपात्मज: । तां वे क्रोधाच्च मोहाच्च श्रमाच्चव क्षुधान्चित:. दस्युधर्म गतो दृष्दृ्वा जघान बलिनां वरः। स तु मांस स्वयं चेब विश्वामित्रस्य चा5घत्समजान्

English

This chapter corresponds to Bd. -3-63. The references are to the verses in this chapter.

अध्याय १५९

श्लोक 31

जायते नात्र सन्देहः समीभूते शुभाशुभे ।स्त्रीपुंसोः सम्प्रयोगेण विषुद्धे शुक्रशोणिते

jāyate nātra sandehaḥ samībhūte śubhāśubhe / strīpuṃsoḥ samprayogeṇa viṣuddhe śukraśoṇite

हिन्दी अर्थ

भोजयामास तच्छ त्वा वसिष्ठरतं तदाउत्यजत् । प्रोवाच चेव भगवान्वसिष्ठस्तं नृपात्मजभ्

English

Though the chapter is mainly concerned with the Iksvaku dynasty, w. 3-7 mention a dynasty of the pre-Yayati period, before circa 3000 B.C. (The Vedic Age, , BVB's The History and Culture of the Indian People Vol. 1.)

अध्याय १५९

श्लोक 32

पञ्चभूतसमोपेतः सषष्ठः परमेश्वरः ।इन्द्रियाणि मनः प्राणा ज्ञानमायुः सुखं धृतिः

pañcabhūtasamopetaḥ saṣaṣṭhaḥ parameśvaraḥ / indriyāṇi manaḥ prāṇā jñānamāyuḥ sukhaṃ dhṛtiḥ

हिन्दी अर्थ

पातये क्र है कर तब शडकुमयोमयम् । यदि ते त्रीणि शड्कूनि न स्युहि पुरुषाधम १०७ पितुश्चापरितोबेण गुरोदोग्श्रीवधेन च् अप्रोक्षितोपयोगाच्च त्रिधिधस्ते व्यतिक्रमः उन्हामानों वरेणाथ गुर बच्चे नृपात्मजः । अनावृष्टिभये तस्मिन्गते हादशवाधिके ॥ै१११

English

Saryata in Bd. P. ibid v. 5

अध्याय १५९

श्लोक 33

धारणं प्रेरणं दुःखमिच्छाहङ्कार एव च ।प्रयत्न आकृतिर्वर्णः स्वरद्वेषौ भवाभवौ

dhāraṇaṃ preraṇaṃ duḥkhamicchāhaṅkāra eva ca / prayatna ākṛtirvarṇaḥ svaradveṣau bhavābhavau

हिन्दी अर्थ

अभिषिच्य तदा राज्ये याजयामास त॑ मुनिः। मिषता देवतानां व वशिष्ठस्थ घथ कोशिकः

English

Arhbarisa was the son of Nabhaga. His son was Virupa. Virupa s son was Prsadasva and his son was Rathltara.

अध्याय १५९

श्लोक 34

तस्येदमात्मनः सर्वमनादेरादिमिच्छतः ।प्रथमे मासि स क्लेदभूतो धातुविमूर्छितः

tasyedamātmanaḥ sarvamanāderādimicchataḥ / prathame māsi sa kledabhūto dhātuvimūrchitaḥ

हिन्दी अर्थ

राज्य पद पर अभिषिक्त कर रहा हूँ ।! उधर बलवान राजकुमार सत्यव्रत पिता की आज्ञा से बारह ब्षका श्षत लेकर जिस समय वन में निवास कर रहा था, उस समय एक दिन मांस का अभाव हों गया, तब उसने भहांत्मा वसिष्ठ की सभी मनोरथों को पूर्ण करनेवाली कामधेनु को देखा ।!०२-१०३२। क्रोध, मोह, श्रुधा एवं. अत्यन्त थके माँदे होने के कारण, उसने विचार किया कि मै इस चांण्डालों के समीप लिवास करता हूँ, उन्हीं के. समान आचरण भी मुझे करता चाहिए, क्यों त इसी को मारकर क्षुधा शान्‍्त करूँ।” यह सोचकर उसने द वसिष्ठ की उसे कामधेनु को मार डाला । महाबलवान् राजकुमार सत्यत्नत ने इस प्रकार उस" कामधेनु के मांस को स्वयं खाया और महर्षि के पुत्रादिकों को भी खिलाया। इस दारुण वृत्तान्त को सुनकर परमतेजस्वी महधि वसिष्ठ भे कुमार सत्यत्रत को छोड़ दिया और उसने कहा, है क्र कर्मा अब हम तुम्हें गिरा रहे हैं

English

These (Rathitaras), though born as Ksatriyas, were known as Angiras-s. The prominent members (descendants) of Rathltara were Brahmanas with Ksatriya-like (heroic) prowess. 1

अध्याय १५९

श्लोक 35

मास्यर्बुदं द्वितीये तु तृतीये चेन्द्रियैर्युतः ।आकाशाल्लाघवं सौक्ष्म्यं शब्दं श्रोत्रबलादिकम् ।वायोस्तु स्पर्शनं चेष्टां दहनं रौक्ष्यमेव च

māsyarbudaṃ dvitīye tu tṛtīye cendriyairyutaḥ / ākāśāllāghavaṃ saukṣmyaṃ śabdaṃ śrotrabalādikam / vāyostu sparśanaṃ ceṣṭāṃ dahanaṃ raukṣyameva ca

हिन्दी अर्थ

हे पुरुषाधम ! यदि तुम्हारे ये तीर्न शंकु (महापाप रूप कील) न होते तो तुम्हारे ऊपर लोंह का शेंकु गिरता

English

Formerly when Manu sneezed, Iksavaku was bom. 2 Iksvaku had hundred sons. All of them were liberal-minded (distributing enormous wealth as Daksina).

अध्याय १५९

श्लोक 36

पित्तात्तु दर्शनं पक्तिमौष्ण्यं रूपं प्रकाशनम् ।सलिलाद्रसनां शैत्यं स्नेहं क्लेदं समार्दवम्

pittāttu darśanaṃ paktimauṣṇyaṃ rūpaṃ prakāśanam / salilādrasanāṃ śaityaṃ snehaṃ kledaṃ samārdavam

हिन्दी अर्थ

विता के असन्तुष्ट करने के कारण, गुरु की कामधेनु की हत्या करने के कारण, विना संस्कार आदि किये माँस भक्षण करने के कारण तुमने तीन धारमिक अपराध किये हैं ९ ०४-१०५। महातपस्वी महर्षि वसिष्ठ ने सत्यव्त के हन तीन हांकु संदश महान् अपराधों का विचार कर उसका त्रिशंकु नाम रख दिया, इसी कारण उसका त्रिशंकु नाम भी पड़ गया इधर राजधि विश्वामिन्र जब तपस्या से निवत्त होकर आश्रम को लौटे और स्त्री पुत्रादिकों के सत्यत्रत द्वारा भरण पोषण किये जाने वा वृत्तान्त सुना तो परम प्रसन्न होकर' त्रिशंकु को वरदान दिया । विश्वामित्र के वर दान देते समय राजकुमार सत्यव्रत ने सारा शाप वृत्तान्त निवेदन किया । कौशिक ने उस बारह वर्ष के अनावष्टि जनित दुष्काल के बीत जाने पर सत्यव्रत को राज्यपद पर अभिषिक्त किया, और उसके द्वारा यशादि शुभ का सम्पन्न कराया, सभी देवगण तथा महर्षि वसिष्ठ देखते ही रह

English

The eldest son was Vikuksi. His younger brothers, Nemi and Danda (two were famous). He had five hundred sons, the chief of them being Sakuni.

अध्याय १५९

श्लोक 37

भूमेर्गन्धं तथा घ्राणं गौरवं मूर्तिमेव च ।आत्मा गृह्णात्यजः पूर्वं तृतीये स्पन्दते च सः

bhūmergandhaṃ tathā ghrāṇaṃ gauravaṃ mūrtimeva ca / ātmā gṛhṇātyajaḥ pūrvaṃ tṛtīye spandate ca saḥ

हिन्दी अर्थ

उहै० वायुपुराणम्

English

They were the kings and protectors of the land of Uttarapatha (northern region). Forty-eight of them ruled in the southern region.

अध्याय १५९

श्लोक 38

दौर्हृदस्याप्रदानेन गर्भो दोषमवाप्नुयात् ।वैरूप्यं मरणं वापि तस्मात्कार्यं प्रियं स्त्रियाः

daurhṛdasyāpradānena garbho doṣamavāpnuyāt / vairūpyaṃ maraṇaṃ vāpi tasmātkāryaṃ priyaṃ striyāḥ

हिन्दी अर्थ

+ विन्ध्यपाश्वें महापुण्या निम्नगा गिरिकानने तस्य स्नासमेन संभुता कर्मनाशा शुभा नदी ॥ मिषतस्तु वसिष्ठस्य तदद्भुतमिवाभवत् । अन्राप्युदाहरन्तीमो श्लोको पौराणिका जनाः

English

Twenty of them were very important. They protected the whole of the southern region.

अध्याय १५९

श्लोक 39

स्थैर्यं चतुर्थे त्वङ्गानां पञ्चमे शोणितोद्भवः ।षष्ठे बलं च वर्णश्च नखरोम्णां च सम्भवः

sthairyaṃ caturthe tvaṅgānāṃ pañcame śoṇitodbhavaḥ / ṣaṣṭhe balaṃ ca varṇaśca nakharomṇāṃ ca sambhavaḥ

हिन्दी अर्थ

विश्वामित्रप्रसादेन त्रिशडकुदिवि राजते। देवेः साथ महातेजा«्नुग्रहात्तस्य धमितः

English

The king said: O powerful one, kill deer and bring the meat worthy of the Sraddha. Undoubtedly the A?fakd Sraddha has to be performed today.

अध्याय १५९

श्लोक 40

मनसा चेतनायुक्तो नखरोमशतावृतः ।सप्तमे चाष्टमे चैव त्वचावान् स्मृतिवान् अपि

manasā cetanāyukto nakharomaśatāvṛtaḥ / saptame cāṣṭame caiva tvacāvān smṛtivān api

हिन्दी अर्थ

तस्य सत्यरता नाम भार्या केकयबवंशजा । कुमारं जनयामास हरिश्रन्क्रमकल्मषम् स॒तु राजा हरिश्रद्धस्त्रशड्ूव इति श्रुतः । आहर्ता राजसुयस्य सम्राडिति परिश्रुतः

English

Vikuksi who went a-hunting at the instance of the intelligent (king) killed thousands of deer. Though very powerful, he became very tired. He then (killed and) ate a hare.

अध्याय १५९

श्लोक 41

पुनर्गर्भं पुनर् धात्रीम् एनस्तस्य प्रधावति ।अष्टमे मास्यतो गर्भो जातः प्राणैर्वियुज्यते

punargarbhaṃ punar dhātrīm enastasya pradhāvati / aṣṭame māsyato garbho jātaḥ prāṇairviyujyate

हिन्दी अर्थ

विजयश्र सुदेवश्य चच्च॒पुत्रो बभूवतु:। जैता सर्वस्य क्षत्रस्थ विजयस्तेन प्र स्मृतः

English

When Vikuksi returned with the meat along with the army, the king urged Vasi$tha, "May the meat be sprinkled with the holy water".

अध्याय १५९

श्लोक 42

नवमे दशमे वापि प्रबलैः सूतिमारुतैः ।निर्गच्छते बाण इव यन्त्रच्छिद्रेण सज्वरः

navame daśame vāpi prabalaiḥ sūtimārutaiḥ / nirgacchate bāṇa iva yantracchidreṇa sajvaraḥ

हिन्दी अर्थ

रुचकस्तनयस्तत्र राजा धर्मर्थिकोविदः । रुरुकाद्भधतकः पुत्रस्तस्मादृबाहुश्र जजिवान् गये ।१०९-११२। यज्ञावसान में उस त्रिशंकु के स्नान करने से. कमंताशा नामक नदी अवतीर्ण हुई जो विल््याचल पंत के सभीष जंगलों और पहाड़ियों में से बहती है। वह कर्मनाशा नदी महापुण्य- दायिनों तथा मंगलकारी है। इस प्रकार महान ऐश्वयेशाली विश्वामित्र ने सत्यव्रत को स्वयं में प्रतिष्ठित किया । महषि वसिष्ठ उनके इस अद्भुत कार्य को देखकर रह गये । पौराशिक लोग इस विषय में इन दो इलोकों

English

This indicates the fluidity of the caste-system in ancient India.

अध्याय १५९

श्लोक 43

शरीरावयवैर्युक्तो ह्यङ्गप्रत्यङ्गसंयुतः ।अष्टोत्तरं मर्मशतं तत्रास्था तु शतत्रयम्

śarīrāvayavairyukto hyaṅgapratyaṅgasaṃyutaḥ / aṣṭottaraṃ marmaśataṃ tatrāsthā tu śatatrayam

हिन्दी अर्थ

को उपस्थित करते हैं। जिनका आशय इस प्रकार है।?१३-११४। 'महामुनि विश्वामित्र की पा से, जिशंकु स्वयं में विराजमान है, उस परम बुद्धिमान की कृपा से वह तेजस्वी होक्र देवताओं के साथ शोभा पता है, त्रिद्वंकु रूप ग्रह के आकर्षण से विभूषित होकर, तीन प्रकार के भावों से अलंकृत हेमन्त में चन्द्रमा के समान सुस्दरो एक मनोहर रमणी उसके पास धीरेधीरे जाती है।” उस राजा त्रिश्वुकु की पत्नी केकयवंश में उत्पन्न

English

From v. 8, the Purana describes the Iksvaku dynasty. His three sons—Vikuksi, Nemi and Dan<Ja—founded separate dynasties at Ayodhya (U.P.), Videha (Bihar) and Dantfaka (North Deccan) respectively. Nemi is mentioned as 'Nimi* in Buddhist Jatakas.

अध्याय १५९

श्लोक 44

सप्त शिरःकपालानि विहितानि स्वयम्भुवा ।तिस्रः कोट्यो ऽर्धकोटी च रोम्णामङ्गेषु भारत

sapta śiraḥkapālāni vihitāni svayambhuvā / tisraḥ koṭyo 'rdhakoṭī ca romṇāmaṅgeṣu bhārata

हिन्दी अर्थ

सत्यत्रता वाम की थी ।११५-११६२। उसने हरिश्चन्द्र नामक परम धामिक पुत्र को उत्पन्न किया, वह राजा हरिश्चन्द्र त्रिशंकु के पुत्र रूप में परम विख्यात था उसने अपने समय में राजसूय यज्ञ सम्पन्न किया था, समस्त पृथ्वी मण्डल का वह एकच्छुत्र सम्राट था, ऐसा सुना जाता है। हरिश्चन्द्र का पुत्र परम बलवान रोहित का पुत्र हरित हुआ, हरित का पुत्र चंचू नाम से प्रसिद्ध हुआ ।११७-११६। उस चंचु के विजय और सुदेव नामक दो पुत्र हुए । विजय सभी क्षत्रियों का विजेता था, इसी कारण से उसका नाम भी विजय था । बिजय का पुत्र रुक हुआ, जो अपने समय का परम धर्मथिवेत्ता राजा था रुछुक का पुत्र हृतक हुआ, और उसका बाहु उत्पन्न हुआ। हैहय ओर तालजंध के वंशों में उत्पन्न होने वालों ने परम व्यसनी राजा वाहु को परास्त कर दिया ।

English

The Sraddha performed on the 7th, 8th and 9th days after the Full Moon in the three months of Pausa, Magha and Ph&lguna.

अध्याय १५९

श्लोक 45

द्वासप्ततिसहस्राणि हृदयाद् अभिनिसृताः ।हितानाम हि ता नाड्यस् तासां मध्ये शशिप्रभा

dvāsaptatisahasrāṇi hṛdayād abhinisṛtāḥ / hitānāma hi tā nāḍyas tāsāṃ madhye śaśiprabhā

हिन्दी अर्थ

+ नास्त्ययं श्लोक: क. ग॒. घ. ड. पुस्तकेषु ।

English

The infuriated Iksvaku then spoke thus to Vikuksi: "Commanded by me for the purpose of the rites of Pitrs, you went for hunting the deer. In the forest you mercdessly ate the flesh of a hare before the Sraddha. Hence I banish you. Go away along with your fate (as a result of your own action)." Thus at the instance of Vasistha the son was abandoned by Iksvaku.

अध्याय १५९

श्लोक 46

एवं प्रवर्तते चक्रं भूतग्रामे चतुर्विधे ।उत्पत्तिश्च विनाशश्च भवतः सर्वदेहिनाम्

evaṃ pravartate cakraṃ bhūtagrāme caturvidhe / utpattiśca vināśaśca bhavataḥ sarvadehinām

हिन्दी अर्थ

हैहयेस्तालजड्घश्च निरस्तो व्यसनी नृप: शकयेवनकाम्बोज: पारदेः पल्हवेस्तथा नात्यर्थ धामिको5भुत्स ध्य सत्ययुगे तथा। सगरस्तु सुतो बाहोज॑ज्ञे सह गरेण बे ॥

English

When Iksvaku passed away, the hare-eater attained this earth. He was a very virtuous-souled king of Ayodhya. Urged and guided by Vasistha, he ruled over the kingdom. Thereafter, being full of that sin, the king, ruling over the king¬ dom declined in power as time elapsed. 1 After understanding (the import of) this story, no one shall eat (meat) outside the injunction. Learned men explain the etymology of Mdriisa (Meat) thus—'In the other world that will eat me, Marti Sa (Bhaksayita) the flesh of which I eat here now'. 2

अध्याय १५९

श्लोक 47

गतिरूर्ध्वा च धर्मेण ह्यधर्मेण त्वधोगतिः ।जायते सर्ववर्णानां स्वधर्मचलनान् नृप

gatirūrdhvā ca dharmeṇa hyadharmeṇa tvadhogatiḥ / jāyate sarvavarṇānāṃ svadharmacalanān nṛpa

हिन्दी अर्थ

आस्नेग्रमस्इ लब्ध्वा तु भागवात्सगरो नृप:। जघान प्रृथिवीं गत्वा तालजडइघान्सहैहयानू..

English

Sasada's successor was Kakutstha, the powerful. Formerly he had sat on the hump of Indra who had assumed the form of a bull, in the course of the war named Adibaka. 3

अध्याय १५९

श्लोक 48

देवत्वे मानवत्वे च दानभोगादिकाः क्रियाः ।दृश्यन्ते या महाराज तत्सर्वं कर्मजं फलम्

devatve mānavatve ca dānabhogādikāḥ kriyāḥ / dṛśyante yā mahārāja tatsarvaṃ karmajaṃ phalam

हिन्दी अर्थ

शकतां पहुचानां च धर्मान्नचिरसदच्युतः । क्षत्रियाणां तथा तेषां पारदानां च धर्मंचित् कर्थ प्त सगरी राजा गरेण सह जज्ञिवान् । किमर्थं च शकादोनां क्षत्रियाणां महौजसाम् ।।

English

or went to an inferior world (hell) after death.

अध्याय १५९

श्लोक 49

स्वकर्म विहिते घोरे कामक्सोधार्जिते शुभे ।निमज्जेन्नरके घोरे यस्योत्तारो न विद्यते

svakarma vihite ghore kāmaksodhārjite śubhe / nimajjennarake ghore yasyottāro na vidyate

हिन्दी अर्थ

धंमम्कुम्नोचितान्कुदो राजा निरसदच्युतः

English

Quoted from Manu V. 55.

अध्याय १५९

श्लोक 50

उत्तारणाय जन्तूनां नर्मदातटसंस्थितम् ।एवमेतन्महातीर्थं नरकेश्वरमुत्तमम्

uttāraṇāya jantūnāṃ narmadātaṭasaṃsthitam / evametanmahātīrthaṃ narakeśvaramuttamam

हिन्दी अर्थ

बाहोव्येंसनिनस्तस्य हृतं राज्य पुरा किल हैहयेस्तालजड्घेश्व शकः साथ समागतेः १२७ यथना:ः पारदाश्वव कास्बोजाः १ल्‍हवास्तथा । हैहयार्थ पराक्रानता एते पञच गणास्तदा १२८

English

Kalidasa, however, explains the epithet Kakutstha as 'one who

अध्याय १५९

श्लोक 51

नरकापहं महापुण्यं महापातकनाशनम् ।तत्तीर्थं सर्वतीर्थानामुत्तमं भुवि दुर्लभम्

narakāpahaṃ mahāpuṇyaṃ mahāpātakanāśanam / tattīrthaṃ sarvatīrthānāmuttamaṃ bhuvi durlabham

हिन्दी अर्थ

उनके साथ शक, यवन काम्बोज पारद और पल्हवों के वंश में उत्पन्न होनेवाले भी थे। सत्ययुग का समय होने पर भी वह राजा वाहु परम धार्मिक नहीं था, उस राजा वाहु का पुत्र विष के साथ गर्भ.से उत्पन्न हुआ, उसका नाम सगर पड़ा पिता के छात्रओं द्वारा की गई दुरवस्था में भूगु के आश्रम में उसकी रक्षा तुबं ने की थी ।१२०-१२३। भागंव से आरनेय अस्त्र प्राप्त कर राजा सगर ने समस्त पृथ्वी पर घृम घूम कर हैहय

English

Vfsadasva was Prthu's son. From him was born the powerful Andhra. YavanaSva was Andhra's son. Sravasta was his son.

अध्याय १५९

श्लोक 52

तत्र तीर्थे तु यः स्नात्वा पूजयेत महेश्वरम् ।महापातकयुक्तो ऽपि नरकं नैव पश्यति

tatra tīrthe tu yaḥ snātvā pūjayeta maheśvaram / mahāpātakayukto 'pi narakaṃ naiva paśyati

हिन्दी अर्थ

और तालजंष के वंद्व में उत्पन्न होने वालों में सब का संहार कर डाला। उस महाबलवान् राजा सगर ने शककों, पल्हवों, पारदों एवं अन्य क्षत्रियों को भी अपने पृव॑ंजों के अधिकार एवं धर्म से बंचित कर ऋषियों ने कहा--सुत जी ! वे राजा सगर किस प्रकार विष के साथ उत्पन्न हुए, और किस लिये उस अच्युत ने महान तेजस्वी छाकों, एवं क्षत्रियों के कुलोचित धर्मों को क्रद्ध होकर निरत कर

English

Sravasta was the king by whom SravastI * 1 was built. Sravasta's successor was BfhadaSva of great fame.

अध्याय १५९

श्लोक 53

तत्र तीर्थे तु यो दद्याद् धेनुं वैतरणीं शुभाम् ।स मुच्यते सुखेनैव वैतरण्यां न संशयः

tatra tīrthe tu yo dadyād dhenuṃ vaitaraṇīṃ śubhām / sa mucyate sukhenaiva vaitaraṇyāṃ na saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

सूत बोले-- ऋषिगण ! ऐसी प्रसिद्धि है कि पू्काल में राजा बाहु के व्यसनी होने के कारण उनका राज्य हैहय, तालजंघ एवं हकों के साथ यवन, पारद, कम्बोज और पल्हवों ने आक्रमण करके सारा राज्य छीन लिया । उस समय इन पाँचों गणों ने हैहुय के लिये यह आक्रमण किया। इन क्षत्रिय पुड़ब बलवान् शत्रुओं द्वारा राज्य छीन लिए जाने पर धर्मात्मा राजा बाहु घर द्वार छोड़ कर पत्नी के साथ

English

It is heard that Kuvalasva was the son of BrhadaSva. By killing Dhundhu that king became known as Dhundhu- mara.

अध्याय १५९

श्लोक 54

युधिष्ठिर उवाच: यमद्वारे महाघोरे या सा वैतरणी नदी ।किंरूपा किंप्रमाणा सा कथं सा वहति द्विज

yudhiṣṭhira uvāca: yamadvāre mahāghore yā sā vaitaraṇī nadī / kiṃrūpā kiṃpramāṇā sā kathaṃ sā vahati dvija

हिन्दी अर्थ

: ७४२ वायुपुराणभ बने प्रविश्य धर्मात्मा सह पत्न्या तपो5चरत् क्र कस्यचित्त्वव कालस्य तोयार्थ प्रस्थितो नृपः । बृद्धात्वादृदुबंलत्वाच्च अन्तरा स समार च

English

O highly intelligent one, we wish to hear how Dhundhu was slain, whereby Kuvalasva attained the title of Dhundhumara.

अध्याय १५९

श्लोक 55

कथं तस्याः प्रमुच्यन्ते केषां वासस्तु संततम् ।केषां तु सानुकूला सा ह्येतद्विस्तरतो वद

kathaṃ tasyāḥ pramucyante keṣāṃ vāsastu saṃtatam / keṣāṃ tu sānukūlā sā hyetadvistarato vada

हिन्दी अर्थ

सा तु भरतुभ्रितां कृत्वा बल्चि तं समरोहयत् । औव॑स्तां भागंवो दृष्ट्वा कारण्याहिन्यवरतंयत्.

English

Bfhadasva had twentyone thousand sons. All of them were experts in Vidyas. They were powerful and invin¬ cible. All of them were righteous. All of them were performers of Yajnas with profuse Dak§ina. Bfhadasva, the king, crowned. Kuvalasva who was very powerful, heroic, excellent and virtuous, in that kingdom. After transferring the royal position and glory to his son, the king went to the forest.

अध्याय १५९

श्लोक 56

श्रीमार्कण्डेय उवाच: धर्मपुत्र महाबाहो शृणु सर्वं मयोदितम् ।या सा वैतरणी नाम यमद्वारे महासरित्

śrīmārkaṇḍeya uvāca: dharmaputra mahābāho śṛṇu sarvaṃ mayoditam / yā sā vaitaraṇī nāma yamadvāre mahāsarit

हिन्दी अर्थ

ओवंस्तु जातकर्मादीन्कृत्वा तस्थ महात्मनः । अध्याप्य बेदशालाणि ततोषइस्त्रं प्रत्यपादयत् जघान हैहयान्कुद्धों रद्रः पशुगणानिव

English

Uttahka, the Brahmana sage, prevented the great heroic king Bfhadasva who was excellent and virtuous and who was proceeding to the forest (for penance).

अध्याय १५९

श्लोक 57

अगाधा पाररहिता दृष्टमात्रा भयावहा ।पूयशोणिततोया सा मांसकर्दमनिर्मिता

agādhā pārarahitā dṛṣṭamātrā bhayāvahā / pūyaśoṇitatoyā sā māṃsakardamanirmitā

हिन्दी अर्थ

ततः शकान्सयवनान्कास्बोजान्पारदांस्तथा । पहुवांश्येव निःशेषान्दर्तु व्यवसितों नृप:ः .

English

"O King, protection must be offered by you. It be¬ hoves you to do it. I am unable to perform penance un¬ disturbed.

अध्याय १५९

श्लोक 58

तत्तोयं भ्रमते तूर्णं तापीमध्ये घृतं यथा ।कृमिभिः सङ्कुलं पूयं वज्रतुण्डैरयोमुखैः

tattoyaṃ bhramate tūrṇaṃ tāpīmadhye ghṛtaṃ yathā / kṛmibhiḥ saṅkulaṃ pūyaṃ vajratuṇḍairayomukhaiḥ

हिन्दी अर्थ

. बन को चले गये ओर वहाँ तपस्या करना प्रारंभ किया १7२७-१२९। कुछ समय बाद एक दिन राजा जल लेने के लिये गये, ओर अत्यन्त वुद्ध तथा दुबंस होने के कारण बीच मार्ग में ही उनकी मृत्यु हो गयी । उनकी यादवी नामक पत्नी, जो उस समय गरभवती थी, अनुगमन के लिये प्रस्तुत हुई, उसके .यरभं को मारने की नीयत से सपत्नी ने उसे विष दे दिया था यादवी को पति की चिता. बनाकर उसने -बैठा दिया . और आग भी लगा दी, उसी बीच भागंव भओव॑ मुनि वहाँ आये और करुणावदश उसे जलने से निवारित किया 7३०-१३२। उन्हों ओऔब ऋषि के आश्रम में यादवी ने सपत्नी के दिये गए. विष के साथ महाबाहू समर नामक परम धार्मिक पुत्र उत्पन्न किया मुनिवर ओब ने उस महा तेजस्वी सगर का जातकर्मादि संस्कार सम्पन्न किया और वेद शास्त्रों का सम्पूर्ण अध्ययन कराकर अस्त्र विद्या भी दी। उसी समय जमदस्ति के पृत्र औव॑

English

Modern Sahet-Mahet on the Rapti (ancient Airavatl or Aciravau)

अध्याय १५९

श्लोक 59

शिशुमारैश्च मकरैर् वज्रकर्तरिसंयुतैः ।अन्यैश्च जलजीवैः सा सुहिंस्रैर्मर्मभेदिभिः

śiśumāraiśca makarair vajrakartarisaṃyutaiḥ / anyaiśca jalajīvaiḥ sā suhiṃsrairmarmabhedibhiḥ

हिन्दी अर्थ

मुनि से सगर ने उस आगश्नेयास्त्र को प्राप्त किया, जिसे बड़े बड़े राक्षस भी सहन करने में असमर्थ थे । उसी अस्त्र बल से तथा अपने शारीरिक बल से उस परम प्रतापी राजा सगर ने अत्यन्त ऋद्ध होकर हैहयों का वध इस प्रकार कर डाला, जंसे रूद्र सृष्टि के अवसान में जीव समूहों का संहार करते हैं ।?३३-१३५। हैहयों को मारने के उपरान्त राजा सगर ने शक, यवन, कम्बोज पारद, एवं पह्कुवों को भी निर्जीव कर देने का इरादा किया ।

English

In the wild desert region near my hermitage, there is

अध्याय १५९

श्लोक 60

तपन्ति द्वादशादित्याः प्रलयान्त इवोल्बणाः ।पतन्ति तत्र वै मर्त्याः क्रन्दन्तो भृशदारुणम्

tapanti dvādaśādityāḥ pralayānta ivolbaṇāḥ / patanti tatra vai martyāḥ krandanto bhṛśadāruṇam

हिन्दी अर्थ

महाबलवान् एवं पराक्रमी सगर ने अत्यन्त पीड़ित एवं भयभीत होकर वे सब शरण खोजते हुए जब मह॒षि वसिष्ठ के पास पहुँचे तब महामुनि ने वचन देकर उनको अभय दान दिया और राजा सगर को इस सहार कार्य से निवारित किया। राजा सगर ने इधर अपनी प्रतिज्ञा पूर्ण करते का, उधर गुर के आदेश का विचार सगर: स्वां प्रतिज्ञां च गुरोर्वाक्यं निशस्य च। धर्म जघान तेषां वे वेषान्यत्वं चकार हू.

English

He breathes out (once) at the end of a year. But when he exhales the whole earth along with forests quakes and

अध्याय १५९

श्लोक 61

हा भ्रातः पुत्र हा मातः प्रलपन्ति मुहुर्मुहुः ।असिपत्त्रवने घोरे पतन्तं यो ऽभिरक्षति

hā bhrātaḥ putra hā mātaḥ pralapanti muhurmuhuḥ / asipattravane ghore patantaṃ yo 'bhirakṣati

हिन्दी अर्थ

अर्ध शकानां शिरसो मुण्डयित्वा व्यसर्जयत् । यवनानां शिरः सर्व काम्वोजानां तथेव च

English

A great column of dust is raised by the air exhaled by him. It covers up the path of the sun and the earth — quake continues for a week.

अध्याय १५९

श्लोक 62

प्रतरन्ति निमज्जन्ति ग्लानिं गच्छन्ति जन्तवः ।चतुर्विधैः प्राणिगणैर्द्रष्टव्या सा महानदी

prataranti nimajjanti glāniṃ gacchanti jantavaḥ / caturvidhaiḥ prāṇigaṇairdraṣṭavyā sā mahānadī

हिन्दी अर्थ

पारदा मक्तकेशाश्र पल्हवाः श्मश्ुधारिण: । निःस्वाध्यायवषट्काराः कृतास्तेन महात्मना शका यवनकाम्बोजाः पल्हवाः पारदेः सह । कलिस्पर्शा माहिषिका दार्वाश्वोला: खसास्तथा

English

It is accompanied by very terrible flames of fire, sparks and smoke. O King, I am not therefore able to stay in my own hermitage.

अध्याय १५९

श्लोक 63

तरन्ति तस्यां सद्दानैरन्यथा तु पतन्ति ते ।मातरं ये न मन्यन्ते ह्याचार्यं गुरुमेव च

taranti tasyāṃ saddānairanyathā tu patanti te / mātaraṃ ye na manyante hyācāryaṃ gurumeva ca

हिन्दी अर्थ

सर्वे ते क्षत्रियगणा धर्मस्तेषां निराकृतः । वसिष्ठवचनात्पूर्वें सगरेण महात्मना ३१४ ३ स धमंविजयो राजा विजित्वेमां वसुंधराम् । अश्वं विचारयासास वाजिमेधाय दीक्षितः ॥ १४४.

English

O brawny-armed king, restrain him with a desire for the welfare of the worlds. The great deity Vi$nu will further develop your prowess by means of his own splendour.

अध्याय १५९

श्लोक 64

अवजानन्ति मूढा ये तेषां वासस्तु संततम् ।पतिव्रतां साधुशीलामूढां धर्मेषु निश्चलाम्

avajānanti mūḍhā ye teṣāṃ vāsastu saṃtatam / pativratāṃ sādhuśīlāmūḍhāṃ dharmeṣu niścalām

हिन्दी अर्थ

स॒तंदेशं सुतेः सर्वे: खानयामास पार्थिवः । आसेदुश्य ततस्तस्मिस्तदन्तस्ते महार्णवे ३१४६ तमादिपुरुष देवं हरि क्रृष्णं प्रजापतिम् । विष्णुं कपिलरूपेण हंस॑ नारायण प्रभुम् १४७ बहिकेतु: सकेतुश्व॒ तथा बर्मरतश्व वः । श्रः पत्चवनश्चव तस्य वंशकरा: प्रभो:

English

The worlds will be happy and relieved today when the Asura is killed. O King, you are hence competent to kill him.

अध्याय १५९

श्लोक 65

परित्यजन्ति ये पापाः संततं तु वसन्ति ते ।विश्वासप्रतिपन्नानां स्वामिमित्रतपस्विनाम्

parityajanti ye pāpāḥ saṃtataṃ tu vasanti te / viśvāsapratipannānāṃ svāmimitratapasvinām

हिन्दी अर्थ

कं ननर--»+५ ०५४ कानपग-म

English

O Sinless one, a boon has been granted to me (that you would help me by killing him) formerly by Visnu. Hence Dhundhu of great virility cannot be slain by anyone of less splendour even in hundreds of years. His virility is so great that it cannot be brooked even by the Devas."

अध्याय १५९

श्लोक 66

स्त्रीबालवृद्धदीनानां छिद्रम् अन्वेषयन्ति ये ।पच्यन्ते तत्र मध्ये वै क्रन्दमानाः सुपापिनः

strībālavṛddhadīnānāṃ chidram anveṣayanti ye / pacyante tatra madhye vai krandamānāḥ supāpinaḥ

हिन्दी अर्थ

करके उन सबों के धर्मों को नष्ट कर दिया तथा वेष भूषा आदि भी बदल दी ।१३६-१३:६। शूकों का उसने आधा शिर मुण्डित करा कर छोड़ दिया, यवनों के पूरे शिर को मूंडित करा के छोड़ दिया, कम्बोजी को भी पूरा शिर मंडित करा के छोड़ दिया, पारदों के केवल केश छोड़ दिये मूंछ दाढ़ी सब मुण्डित करा दिये, पल्हवों की केवल दाढ़ी रखवा कर छोड़ दिया । उस महान बलशाली ने इन सप्र को वेदाध्ययन, यज्ञ हृवनादि से संर्वेथा वंचित कर दिया । ये शक, यवन, काम्बोज, पह्मव, पारद, कलिस्पर्श, माहिषिक, दार्य, चोल एवं खस जाति वाले सभो पहले क्षत्रिय वर्ण के थे, इनके धर्म को उस महाबलवान् राजा ने वसिष्ठ का वचत मानकर निराक्षत कर दिया ।(४०-१४३। इस प्रकार उस घमंविजयी राजा ने सारी पृथ्वी जीतकर अश्बमेध यज्ञ की दीक्षा ग्रहण कर अश्व को भूमण्डल भर घुमाया घमाते समय उसका अश्वमेध्ष यज्ञ का वह अइ्व पू+-दद्षिण समुद्र के तटवर्ती

English

Thus requested by the noble-souled Uttanka, that saintly king entrusted his son Kuvalasva with the job of restrain¬ ing Dhundhu.

अध्याय १५९

श्लोक 67

श्रान्तं बुभुक्षितं विप्रं यो विघ्नयति दुर्मतिः ।कृमिभिर् भक्ष्यते तत्र यावत्कल्पशतत्रयम्

śrāntaṃ bubhukṣitaṃ vipraṃ yo vighnayati durmatiḥ / kṛmibhir bhakṣyate tatra yāvatkalpaśatatrayam

हिन्दी अर्थ

प्रान्त में अपहत कर लिया गया और प्रथ्वी के भीतर छिपा दिया गया ।१४४-१४५॥ तदनन्तर राजा समर ने अपने सभी पुत्रों से समृद्र के तटबर्ती समस्त प्रान्‍्तों को खनवा डाला, खनते समय उसके पृत्रगण उस महासमुद्र के अन्तिम छोर पर पहुँच गये और वहाँ पर आदि पुरुष, हरि, कृष्ण, प्रजापति, नारायण, प्रभु, हंस आदि अनेक नामों एवं रूपों स प्रकाशित होनेवाले भगणान् विषण को महाँ। कपिल के वेश

English

The King said, "I have already laid aside iny weapons. Here is my son. O Excellent Brahmana, he will undoubtedly become the slayer of Dhundhu."

अध्याय १५९

श्लोक 68

ब्राह्मणाय प्रतिश्रुत्य यो दानं न प्रयच्छति ।आहूय नास्ति यो ब्रूते तस्य वासस्तु संततम्

brāhmaṇāya pratiśrutya yo dānaṃ na prayacchati / āhūya nāsti yo brūte tasya vāsastu saṃtatam

हिन्दी अर्थ

(में उपस्थित देखा ।) चोर जानकर उनके पास, ज्योंदी उनकी आँख के सामने पहुंचे त्योंह्दी परथ तेज को न सहव कर भस्म हो गये, केवल चार पुत्र शेष रह गये ।१४६-१४५। उनके नाम वहिकेतु, सुकेतु, धर्मरत और पंचवन थे, उस महान् ऐश्वयंशाली राजा सार के वंश को बढ़ाने वाले ये चार पुत्र कहे जाते हैं। भगवान् नारायण ने प्रादाच्च तस्ब भगवान्हुरिनाॉरायणो वरान् । अक्षतत्वं स्ववंशस्य वाजिमेधशतं तथा ॥

English

After ordering his son who was ready to slay Dhundhu, the king of praise-worthy holy observances retired to the mountains for performing penance.

अध्याय १५९

श्लोक 69

अग्निदो गरदश्चैव राजगामी च पैशुनी ।कथाभङ्गकरश्चैव कूटसाक्षी च मद्यपः

agnido garadaścaiva rājagāmī ca paiśunī / kathābhaṅgakaraścaiva kūṭasākṣī ca madyapaḥ

हिन्दी अर्थ

स समुद्रो5श्वमादाय ववन्दे सरिता पति:। सागरत्वं च लेभे स करमंणा तेन तस्य वे (१५१

English

The righteous-souled king Kuvalasva, obeying the behest of his father, went ahead to Dhundhu's haunt, accom¬ panied by his twentyone thousand sons and Uttanka, in order to restrain Dhundhu.

अध्याय १५९

श्लोक 70

वज्रविध्वंसकश्चैव स्वयंदत्तापहारकः ।सुक्षेत्रसेतुभेदी च परदारप्रधर्षकः

vajravidhvaṃsakaścaiva svayaṃdattāpahārakaḥ / sukṣetrasetubhedī ca paradārapradharṣakaḥ

हिन्दी अर्थ

सगरस्या55त्मजा राज्ञः कथ्थ जाता महाबला: । विक्रान्ता: पष्टिसाहल्ना विधिना केन वा बद हे पत्न्यो सगरस्या55स्तां तपसा दग्धकिल्बिषे। ज्येष्ठा विदर्भदुहिता केशिनी नाम नामतः

English

Due to the imploring entreaty of Uttanka, and with a desire for the welfare of the worlds, lord Visnu entered him with his own brilliance.

अध्याय १५९

श्लोक 71

ब्राह्मणो रसविक्रेता वृषलीपतिरेव च ।गोकुलस्य तृषार्तस्य पालीभेदं करोति यः

brāhmaṇo rasavikretā vṛṣalīpatireva ca / gokulasya tṛṣārtasya pālībhedaṃ karoti yaḥ

हिन्दी अर्थ

कनीयसी तु या तस्य पत्नो परमधर्मिणी । अरिष्टनेमिदुहिता रूपेणाप्रतिमा भुवि

English

When that invincible (king) started, a loud voice arose in heaven—"This king shall be the slayer of Dhundhu (Dhundhumara) with effect from today."

अध्याय १५९

श्लोक 72

कन्याभिदूषकश्चैव दानं दत्त्वा तु तापकः ।शूद्रस्तु कपिलापानी ब्राह्मणो मांसभोजनी

kanyābhidūṣakaścaiva dānaṃ dattvā tu tāpakaḥ / śūdrastu kapilāpānī brāhmaṇo māṃsabhojanī

हिन्दी अर्थ

ओवस्ताभ्यां बर॑ प्रादात्तपसा55राधित:प्रभुः । एका जनिष्यते पुत्र वंशकर्तारमीप्सितम् ॥ राजा को सुन्दर वरदान दिये । जिनसे उनको अपने वंश का अक्षयत्व, सौ अश्वमेध यज्ञों के सम्पन्न करने का सुअवसर, परम ऐश्वर्य सम्पन्न समुद्र का पूत्रत्व, एवं स्वर्ग लोक में अनन्त काल पर्यन्त निवास प्राप्त हुए ।(४६-११५०।॥ समस्त सरिताओं का स्वामी समुद्र उस समय उनके समीप अश्व लेकर उपस्थित हुआ ओर नमस्कार किया । राजा के उसी महान् कर्म से उसे सागरत्व (सागर के पुत्रत्व) को उपाधि प्राप्त हुई। इस

English

The Devas honoured him with divine flowers. It was a wonderful thing. That tiger-like man (the king) of great prowess went to that vast sea of sand accompanied by his sons and dug it up without any waste (of time). That saintly king had already been developed (empowered) extra-ordinarily by the splendour of Narayana.

अध्याय १५९

श्लोक 73

एते वसन्ति सततं मा विचारं कृथा नृप ।सानुकूला भवेद्येन तच् छृणुष्व नराधिप

ete vasanti satataṃ mā vicāraṃ kṛthā nṛpa / sānukūlā bhavedyena tac chṛṇuṣva narādhipa

हिन्दी अर्थ

प्रकार समुद्र से उस अश्वमेधयज्ञ के अश्व को प्राप्त कर राजा सगर ने अन्य सौ अश्वमेध यज्ञों को निविध्न सम्वन्न किया । उसके उस प्रथम यज्ञ के पीछे पीछे चलने वाले जो साठ सहन पुत्र भस्म हुए थे वे सब के सब महा बलवान् पृत्रगण नारायण के तेज में तद्बप होकर प्रविष्ट हो गये--ऐसा हमने सुना है।?५१-१५३॥।

English

He became still more powerful by staying under the control of Uttanka. Dhundhu was found out by his sons who were digging. He had been lying hidden beneath the sand on the western side. He seemed to be furiously covering the worlds by means of the fire coming out of his mouth.

अध्याय १५९

श्लोक 74

अयने विषुवे चैव व्यतीपाते दिनक्षये ।अन्येषु पुण्यकालेषु दीयते दानमुत्तमम्

ayane viṣuve caiva vyatīpāte dinakṣaye / anyeṣu puṇyakāleṣu dīyate dānamuttamam

हिन्दी अर्थ

ऋषियों ने पूछा--सूत्त जी । राजा सगर के वे साठ सहस्न पुत्र गण, जो सब के सब परम बलवान् एवं विजयी थे, किस प्रकार से अथवा किस विधि से उत्पन्न हुए-+यह बतलाइये सूत जी बोले--उस राजा सगर की दो स्त्रियाँ थीं, जिन्होंने अपनी घोर तपस्या द्वारा समस्त पापों को भस्म कर दिया था, बड़ी स्त्री विदर्भराज की कन्या केशिनी नाम से विख्यात थीं, उनकी छोटी परम धर्मिष्ठ पत्नी जो थीं, वे राजा अरिष्टनेमि की कन्या थीं, अपने रूप में सारे भूमण्डल में वे अकेली थीं।१५१-१५६। (उनका नाम सुमति था) तपस्या द्वारा सन्तुष्ट किये गये महामुनि और ने उन्हें वरदान दिया,

English

O excellent one among the imbibers of Soma, by means of his Yogic power, he exuded water like the great ocean at the time of Moon-rise. It was a vast sheet of water with currents and waves.

अध्याय १५९

श्लोक 75

कृष्णां वा पाटलां वापि कुर्याद्वैतरणीं शुभाम् ।स्वर्णशृङ्गीं रूप्यखुरां कांस्यपात्रस्य दोहिनीम्

kṛṣṇāṃ vā pāṭalāṃ vāpi kuryādvaitaraṇīṃ śubhām / svarṇaśṛṅgīṃ rūpyakhurāṃ kāṃsyapātrasya dohinīm

हिन्दी अर्थ

मुनेस्तु बचन श्रुत्वा केशिनी पुत्रमेककम् । वंशस्य कारण श्रेष्ठा जग्राह नृपसंसदि १५८ षष्टिपुन्नसहल्नाणि सुपर्ण भगिनी तथा । महात्मनस्तु जग्राह सुमतिः स्वमतियंथा

English

His sons excepting three were burnt by the Raksasa. Then the king of great strength destroyed all the attendants and kinsmen of Dhundhu.

अध्याय १५९

श्लोक 76

कृष्णवस्त्रयुगाच्छन्नां सप्तधान्यसमन्विताम् ।कुर्यात्सद्रोणशिखर आसीनां ताम्रभाजने

kṛṣṇavastrayugācchannāṃ saptadhānyasamanvitām / kuryātsadroṇaśikhara āsīnāṃ tāmrabhājane

हिन्दी अर्थ

अथ काले गते ज्येष्ठा ज्येष्ठ पुत्र व्यजायत । असमड्ज इति ख्यातं काकुत्स्थं सगरात्मजम् घ॒तपुर्णेषु कुम्मेषु तान्गर्भाव्यदधत्ततः । धात्रीश्चेकेकशः प्रादात्तावतीः पोषणे नृपः

English

The king who was a Yogin, drank up his behemence in the form of water-flood (let loose by him) by means of his Yogic power and extinguished the fire by means of water.

अध्याय १५९

श्लोक 77

यमं हैमं प्रकुर्वीत लोहदण्डसमन्वितम् ।इक्षुदण्डमयं बद्ध्वा ह्युडुपं पट्टबन्धनैः

yamaṃ haimaṃ prakurvīta lohadaṇḍasamanvitam / ikṣudaṇḍamayaṃ baddhvā hyuḍupaṃ paṭṭabandhanaiḥ

हिन्दी अर्थ

ततो नवसु मासेषु समुत्तस्थुयंथासुखम् । कुमारास्ते महाभागाः सगरप्रीतिवर्धना:

English

Then he overpowered the huge-bodied aquatic

अध्याय १५९

श्लोक 78

उडुपोपरि तां धेनुं सूर्यदेहसमुद्भवाम् ।कृत्वा प्रकल्पयेद् विद्वाञ् छत्त्रोपानद्युगान्विताम्

uḍupopari tāṃ dhenuṃ sūryadehasamudbhavām / kṛtvā prakalpayed vidvāñ chattropānadyugānvitām

हिन्दी अर्थ

कालेन महता चेच यौवन प्रतिपेदिरे । षष्टिपुत्रसहल्लाणि तेषासंश्वानुसारिणाम् १६४ स॒ तु ज्येष्ठो नरव्याध्रः सगरस्या5घत्मसंभवः । असमञ्ज इति ख्यातो बहिकेतुर्महाबल: तस्य पुत्रस्तु धर्मात्मा दिलोप इति विश्वुतः दिलीपात्तु महातेजा बीरो जातो भगीरथः १६७

English

DrdhaSva was the eldest ofhis three sons who survived. BhadraSva and Kapilaiva were the younger ones..

अध्याय १५९

श्लोक 79

अङ्गुलीयकवासांसि ब्राह्मणाय निवेदयेत् ।इममुच्चारयेन्मन्त्रं संगृह्यास्याश्च पुच्छकम्

aṅgulīyakavāsāṃsi brāhmaṇāya nivedayet / imamuccārayenmantraṃ saṃgṛhyāsyāśca pucchakam

हिन्दी अर्थ

कि इनमें से एक वंश कर्ता पुत्र को उत्पन्न करेगी और दूसरी साठ सहख्र पुन्न उत्पन्न करेगी। राज सभा में मुनि के इन दोनों वरदानों में से केशिनी ने वंशकर्त्ता एक पुत्र की प्राप्ति का वरदान माँगा, सुपर्णभगिनी दूसरी रानी सुमति ने अपने मन के अनुकूल महाघुनि से साठ सहस्र पुत्रों को प्राप्त करने का वरदान माँगा तदनुसार समय आने पर बड़ी रानी केशिनी ने ज्येष्ठ पुत्र असमञ्ज को उत्पन्न किया बाद में चलकर वह सगर पुत्र राजा असमंज

English

DrdhaSva was known as Dhaundhumari (son of Dhundhumara). Haryasva was his son. His son was Nikumbha who was always engaged in Ksatra Dharma (military Pro- fession).

अध्याय १५९

श्लोक 80

ॐ यमद्वारे महाघोरे या सा वैतरणी नदी ।तर्तुकामो ददाम्येनां तुभ्यं वैतरणि नमः ।इत्यधिवासनमन्त्रः

oṃ yamadvāre mahāghore yā sā vaitaraṇī nadī / tartukāmo dadāmyenāṃ tubhyaṃ vaitaraṇi namaḥ / ityadhivāsanamantraḥ

हिन्दी अर्थ

काकुत्स्थ नाम से विख्यात हुआ १ ५७-१६०। यशस्विनी' रानी सुमति ने अपने गर्भ से एक तुम्ब' उत्पन्न किया जिसके बीच से साठ सहस्न पुत्र निकले उतान्न होने के बाद वे गर्भ घृत से भरे हुए पात्रों में रखे गये, राजा ने उन पात्रों को साठ सहस्न धायो को पालने के लिये सौंपा । नव महीने बीत जाने पर उन पात्रों से सुखपूर्वक वे स'ठ सहस्न महाभाग्यशाली राजकुमार बाहर निकले, जिन्हें देखकर राजा सगर को परम सुख प्राप्त हुआ । बहुत दिन व्यतीत हो जाने पर वे सब राजकुमार युवावस्था को प्राप्त हुए प्रथम अश्वमेध यज्ञ के अहृव के पीछे वे साठ सहस्र पुत्र गये थे ।!(६१-१६४। राजा सगर के सब से बड़े औरस पुत्र नर ब्याप्न असमंज महा- बलवान् थे, उनका दूसरा नाम वहिकेतु भी प्रसिद्ध था। पहले वे तगर निवासियों के अहितकर कार्यों में लगे रहते थे, इससे पिता ने उन्हें निर्वासित कर दिया था असमज्ज के परम बलवान् अंशुमान नामक पुत्र हुए।

English

Samhatasva was the son of Nikumbha. He is reputed as an expert in warfare. Krsasva and Aksayasva were the sons of Samhatasva.

अध्याय १५९

श्लोक 81

गावो मे चाग्रतः सन्तु गावो मे सन्तु पृष्ठतः ।गावो मे हृदये सन्तु गवां मध्ये वसाम्यहम्

gāvo me cāgrataḥ santu gāvo me santu pṛṣṭhataḥ / gāvo me hṛdaye santu gavāṃ madhye vasāmyaham

हिन्दी अर्थ

अंञुमान् के परम धर्मात्मा दिलीप नाम से विख्यात पुत्र हुए। दिलीप से महान् तेजस्वी भगीरथ नामक वीर पुत्र उत्पन्न हुआ ।१६९५-१६७। इसी भगीरथ ने अपनी पूजा एवं क्रिया के बल से विमानों से सुशोभित, समस्त

English

His wife was Haimavati who was like the river DfSadvati to the minds of the good. She was famous in the three worlds. Her son was Prasenajit.

अध्याय १५९

श्लोक 82

ॐ विष्णुरूप द्विजश्रेष्ठ भूदेव पङ्क्तिपावन ।सदक्षिणा मया दत्ता तुभ्यं वैतरणि नमः ।इति दानमन्त्रः

oṃ viṣṇurūpa dvijaśreṣṭha bhūdeva paṅktipāvana / sadakṣiṇā mayā dattā tubhyaṃ vaitaraṇi namaḥ / iti dānamantraḥ

हिन्दी अर्थ

एतदर्धेस्थाने इदमर्ध 'महात्मा त् समहतो जग्राह समतीं तथा' इति ख. ग. घ. पुस्तकेषु । अन्नाप्युदाहरन्तीमं श्लोक॑ पोराणिका जनाः

English

Yuvanasva was his son. He was very brilliant and famous in the three worlds as highly virtuous. The chaste lady Gauri was his wife.

अध्याय १५९

श्लोक 83

ब्राह्मणं धर्मराजं च धेनुं वैतरणीं शिवाम् ।सर्वं प्रदक्षिणीकृत्य ब्राह्मणाय निवेदयेत्

brāhmaṇaṃ dharmarājaṃ ca dhenuṃ vaitaraṇīṃ śivām / sarvaṃ pradakṣiṇīkṛtya brāhmaṇāya nivedayet

हिन्दी अर्थ

भगीरथसुतश्रापि श्रुतो नाम बभूव ह। नाभागस्तस्य दायादो नित्यं धर्मपरायणः ३१७० अम्बरीषः सुतस्तस्य सिन्धुद्दीपस्ततो5भवत् । एवं वंशपुराणज्ञा गायन्तीति परिश्रुतम् १७१ नाभागेरम्ब्रीषस्य भुजाभ्यां परिपालिता । बभव वसुधाउत्यर्थ तापन्नयविरबवजिता

English

She was cursed by her husband and turned into the river Bahuda. 1 Her son Gaurika became an emperor.

अध्याय १५९

श्लोक 84

पुच्छं संगृह्य सुरभेरग्रे कृत्वा द्विजं ततः

pucchaṃ saṃgṛhya surabheragre kṛtvā dvijaṃ tataḥ

हिन्दी अर्थ

दिष्याक्षहृदयज्ञोईसो राजा नलसखो बली। नलो द्वाविति विख्यातों पुराणंषु दृढब़तो वीरसेनात्मजश्रेव यश्चेक्ष्वाकुकुलोहह: ऋतुपणंस्य पुत्रो5भुत्सवेकामो जनेश्वरः

English

Mandhata, the son of Yuvanasva, became a king con¬ quering the three worlds. In this connection, Brahmanas well versed in Puranas, cite these two verses.

अध्याय १५९

श्लोक 85

धेनुके त्वं प्रतीक्षस्व यमद्वारे महाभये ।उत्तितीर्षुरहं धेनो वैतरण्यै नमो ऽस्तु ते ।इत्यनुव्रजमन्त्रः

dhenuke tvaṃ pratīkṣasva yamadvāre mahābhaye / uttitīrṣurahaṃ dheno vaitaraṇyai namo 'stu te / ityanuvrajamantraḥ

हिन्दी अर्थ

सुबासस्तस्य तनयो राजा हंसमुखो5भवत् । सुदासस्य सुतः प्रोक्त: सोदासो नाम पाथिवः

English

"The entire region from the place where the Sun rises up to (the place) where he sets, the whole of it, is called the territory of Mandhata, son of Yuvanasva".

अध्याय १५९

श्लोक 86

अनुव्रजेत गच्छन्तं सर्वं तस्य गृहं नयेत् ।एवं कृते महीपाल सरित्स्यात्सुखवाहिनी

anuvrajeta gacchantaṃ sarvaṃ tasya gṛhaṃ nayet / evaṃ kṛte mahīpāla saritsyātsukhavāhinī

हिन्दी अर्थ

र्यात: कल्माषपादो वे नाम्ता मिन्रसहश्य सः । वसिष्ठस्तु महातेजाः क्षेत्र कल्माषपादके ।। सरिताओं में श्रेष्ठ गंगा को पुत्री रूप में प्राप्त किया और समुद्र पर्यन्त उसकी पावती धारा से पृथ्वी को सुशोभित किया । पुराणों के जाननेवाले आज भी इस इलोक (यशोगाथा) का गान करते हैं कि “राजा भगीरथ ने अपने कर्मों द्वारा गंगा जी को प्रृथ्वी पर उतारा था, राजवंशों के वत्तान्त को जाननेवाले अर्थात् ऐतिहाप्रिक लोग इसीलिये गंगा को भागी रथी कहते हैं । उस राजा भगीरथ का पुत्र श्रत नाम से विर्यात हुआ उसका उत्तरा-

English

People who know the (details of) different races also quote this verse. "Those who know Puranas call the son of Yuvanasva, noble-souled, a performer of sacrifices and (a king) of unmeasured splendour. Mandhata is the embodied form of Visnu."

अध्याय १५९

श्लोक 87

तारयते तया धेन्वा सा सरिज्जलवाहिनी ।सर्वान्कामानवाप्नोति ये दिव्या ये च मानुषाः

tārayate tayā dhenvā sā sarijjalavāhinī / sarvānkāmānavāpnoti ye divyā ye ca mānuṣāḥ

हिन्दी अर्थ

घिकारी नाभाग हुआ, जो सर्वदा अपने धर्म में तत्वर रहने वाला था ।१६५-१३०। नाभाग का पुत्र अम्बरीष था, और उसका पुत्र राजा सिन्धुद्रीप हुआ पुरानी कथाओं के जातनेवाले लोग इस वंश का इतिहास इसी प्रकार सुनाते हैं-ऐसा हमने भी सुता है। ऐसी प्रसिद्धि है कि राजा नाभाग के पुत्र अम्बरीष की भूजाओं से पाली गई प्रथ्वी तीनों तापों से सवंदा के लिये विहीन हो गई थी, अर्थात् उसके समय में प्रजाओं को किसी प्रकार का

English

His wife CaitrarathI was Sasabindu's daughter. She was known by the name ofBindumati also. She was a chaste lady and had no equal in beauty all over the earth.

अध्याय १५९

श्लोक 88

रोगी रोगाद्विमुक्तः स्याच्छाम्यन्ति परमापदः ।स्वस्थे सहस्रगुणितमातुरे शतसंमितम्

rogī rogādvimuktaḥ syācchāmyanti paramāpadaḥ / svasthe sahasraguṇitamāture śatasaṃmitam

हिन्दी अर्थ

कष्ट नहीं था । अम््ररीष के पृत्र सिन्धुद्वीप का पुत्र आयुतायु हुआ, वह भी परम बलशाली राजा था। उस आयुतायु का उत्तराधिकारी महान् यशस्वी राजा ऋतुपर्ण हुआ ।१७१-१७३। यह ऋतुपर्ण राजा नल का परम सहद एवं बलवान राजा था, दिव्य अक्ष विद्या में वह परम निपुण था। पुराणों में दो नल विख्यात हैं, वे दोनो ही परम साहसी एवं बीर हैं, उनमें एक नल राजा वीरसेन के पुत्र थे, दूसरे इक्ष्वाकु वंश में उत्पन्न हुए थे । राजा ऋतुपणं के पुत्र राजा संकाम थे, उनके पुत्र का नाम सुदास था, इस सुदास का दूसरा नाम हंसमुख भी था। (अथवा उसका मुख हंस की तरह था) उस युदास के पुत्र राजा सौदास के नाम से कहदे जाते हैं। इनके दूसरे नाम कल्माषपाद तथा मित्रस॒ह भी विख्यात है ।!७४-१७६३१। महान् तेजस्वी मह॒षि वस्तिष्ठ ने राजा

English

She was the eldest sister often thousand brothers. She was devotedly attached to her husband. Mandhata begot three sons of her.

अध्याय १५९

श्लोक 89

मृतस्यैव तु यद्दानं परोक्षे तत्समं स्मृतम् ।स्वहस्तेन ततो देयं मृते कः कस्य दास्यति ।इति मत्वा महाराज स्वदत्तं स्यान्महाफलम्

mṛtasyaiva tu yaddānaṃ parokṣe tatsamaṃ smṛtam / svahastena tato deyaṃ mṛte kaḥ kasya dāsyati / iti matvā mahārāja svadattaṃ syānmahāphalam

हिन्दी अर्थ

अश्सफस्योरकामस्तु मुलकस्तत्सुतोभवत् । अन्नाप्युदाहरन्तीम॑ मुलक बे नृपं प्रति

English

They were Purukutsa, Ambarisa and Mucukunda. Ambarlsa's successor was another Yuvanasva.

अध्याय १५९

श्लोक 90

इत्येवमुक्तं तव धर्मसूनो दानं मया वैतरणीसमुत्थम् ।शृणोति भक्त्या पठतीह सम्यक्स याति विष्णोः पदमप्रमेयम्

ityevamuktaṃ tava dharmasūno dānaṃ mayā vaitaraṇīsamuttham / śṛṇoti bhaktyā paṭhatīha samyaksa yāti viṣṇoḥ padamaprameyam

हिन्दी अर्थ

स॒ हि रामभयाद्राजा स्नीमिः परिवृतो्वसत् । विघस्त्रस्त्राणमिच्छन्वे नारीकवचमीश्वरः मूलकस्यापि धर्मात्मा राजा शतरथः स्मृतः । तस्माच्छ १रथाज्जज्ञे राजा चेडिविडो बली

English

Harita was Yuvanasva's son. Descendants of Harita are remembered by the name Suris. They were the (adopted) sons of Ahgiras (spiritual lineage). They were Brahmanas endowed with martial qualities.

अध्याय १५९

श्लोक 91

श्रीमार्कण्डेय उवाच: प्राप्ते चाश्वयुजे मासि तस्मिन्कृष्णा चतुर्दशी ।स्नात्वा कृत्वा ततः श्राद्धं सम्पूज्य च महेश्वरम्

śrīmārkaṇḍeya uvāca: prāpte cāśvayuje māsi tasminkṛṣṇā caturdaśī / snātvā kṛtvā tataḥ śrāddhaṃ sampūjya ca maheśvaram

हिन्दी अर्थ

श्रयो5भिसंहिता लोका बुध्चया सत्येन चेव हि १८२

English

Purukutsa's successor was Trasaddasyu of great fame. He was born of Narmada. His son was Sambhuta. Sambhuta's son was the valorous Anaranya. He was killed by Ravana formerly while he was conquering the three

अध्याय १५९

श्लोक 92

पितृभ्यो दीयते दानं भक्तिश्रद्धासमन्वितैः ।पश्चाज्जागरणं कुर्यात् सत्कथाश्रवणादिभिः

pitṛbhyo dīyate dānaṃ bhaktiśraddhāsamanvitaiḥ / paścājjāgaraṇaṃ kuryāt satkathāśravaṇādibhiḥ

हिन्दी अर्थ

राजा दशरथो नाम इक्ष्वाकुकुलनन्दन: १८३ रामो दाशरथिवोरो धर्मज्ञो लोकविश्रुतः भरतो लक्ष्मणश्चेव शत्रुध्नश्व महाबल:ः १८४ सुबाहु: श्रसेनश्व शत्रुघ्नसहितावुभी । पालयामासतुः सुतो बदेह्ों मथुरां पुरीम्

English

Trasadasva was the son of Anaranya. His son was Haryasva. From Haryasva Drsadvatl gave birth to king Vasumata.

अध्याय १५९

श्लोक 93

ततः प्रभातसमये स्नात्वा वै नर्मदाजले ।तर्पणं विधिवत्कृत्वा पित्ःणां देवपूर्वकम्

tataḥ prabhātasamaye snātvā vai narmadājale / tarpaṇaṃ vidhivatkṛtvā pitḥṇāṃ devapūrvakam

हिन्दी अर्थ

कल्माषपाद के क्षेत्र में (स्त्री में) इक्ष्वाकु के वंश की वृद्धि के लिए अश्मक नामक पुत्र को उत्पन्न किया । अश्मक का पुत्र उरकाम हुआ, उसका पुत्र मूलक था। उस राजा मूलक के विषय में आज भी लोग यह कहते हैं कि वह राजा मूलक राम (परशुराम) के भय से स्त्रियों के बीच में निवास करता था; समर्थ होते हुये भी वह वस्त्र विहीन होकर अपनी रक्षा के लिये स्त्रियों को कवच बनाये हुए था । अथवा पुरुषों का वेश छोड़कर स्त्रियों

English

His son was the virtuous king Tridhanva by name. The scholarly king Trayyaruna was the son of Tridhanvan. He had a powerful son named Satyavrata. Vidarbha's wife was abducted by him after killing (i.e. defeat¬ ing) the heaven-dwellers, when all the sacred mantras of marriage ceremony had been chanted and the ceremonies con¬ cluded. Visnuvfddha was his son whence his descendants are remembered as Visnuvrddhas. They were also the (adopted) sons of Ahgiras endowed with martial qualities.

अध्याय १५९

श्लोक 94

सौवर्णे घृतसंयुक्तं दीपं दद्याद् द्विजातये ।पश्चात् संभोजयेद् विप्रान् स्वयं चैव विमत्सरः

sauvarṇe ghṛtasaṃyuktaṃ dīpaṃ dadyād dvijātaye / paścāt saṃbhojayed viprān svayaṃ caiva vimatsaraḥ

हिन्दी अर्थ

का वेश धारण किये हुए था ।१७७-१७६। उस राजा मूलक के पुत्र परम घर्मात्मा राजा शतरथ कहे जाते हैं । उस राजा शतरथ से परम बलवान राजा ऐडिविड उत्पन्न हुए । वे राजा ऐडिविड परम कान्तिशाली थे । उनके पुत्र प्रतापशाली कृतशर्मा हुए, कृतद्ार्मा के विध्वमहत् नामक पुत्र उत्पन्न हुए ।ह5०-१५१। उनके पूत्र दिलीप हुए, जो खटट्वागिद नाम से भी प्रसिद्ध थे। वे राजा दिलीप स्वर्गलोक से प्रथ्वी लोक पर आकर दो घड़ी तक जीवित रहे । अपने सत्य, बुद्धि एवं बल से उन्होंने तीनों लोकों को पराजित कर दिया था। उन राजा खट्वाँगद कै पुत्र दीघंवाहु हुए, उनसे राजा रघ् हुए । रघ् के परम बलवान् अज उत्पन्न हुए । उन्हीं अज से इंक्ष्वाकु के कुल को आनन्दित करनेवाले परम बलद्याली राजा दशरथ हुए ।१८२-१८३। दशरथ के पुत्र रामचन््र व॒रत धर्ंज्न थे, समस्त लोक में उनड्ी घमंज्ञता विख्यात थी । राम के अतिरिक्त भरत, लक्ष्मण और महाबलवानु शत्रुघ्न नामक

English

That (sin) was committed by him out of lust, or (pride) due to his strength, or to the powerful force exerted by the inevitable destiny, though he was intelligent.

अध्याय १५९

श्लोक 95

एवं कृते नरश्रेष्ठ न जन्तुर्नरकं व्रजेत् ।अवश्यमेव मनुजैर्द्रष्टव्या नारकी स्थितिः

evaṃ kṛte naraśreṣṭha na janturnarakaṃ vrajet / avaśyameva manujairdraṣṭavyā nārakī sthitiḥ

हिन्दी अर्थ

उनके तीन पुत्र और थे । मधु के पुत्र लवणासुर का संहार कर, और मधुवन में प्रवेशकर शन्नुष्न ने वहीं पर मथुरा नामक पुरी की प्रतिष्ठापना को थी । विदेह की राजकुमारी से उत्पन्न होनेवाले सुबाहु और शूरसेन नामक दोनों पुत्रों ने अपने पिता शत्रुघ्न के साथ मथुरा पुरी का शासन एवं वहाँ की प्रजाओं का पालन पोषण किया

English

His father Trayyaruna banished him as he was sinful. Being infuriated with him, he repeated many times, "Be He spoke to his father again and again,

अध्याय १५९

श्लोक 96

अनेन विधिना कृत्वा न पश्येन्नरकान्नरः ।तत्र तीर्थे मृतानां तु नराणां विधिना नृप

anena vidhinā kṛtvā na paśyennarakānnaraḥ / tatra tīrthe mṛtānāṃ tu narāṇāṃ vidhinā nṛpa

हिन्दी अर्थ

७द्है८ बायुपुराणमस् अज्जभदश्चन्द्रकेतुश्न॒ लक्ष्यणस्पाउपत्मजावुभो । हिमवत्पवृ॑ताभ्यासे स्फीतो जनपदौ तयो:

English

Visvamitra of great penance left his wife in that land and performed a severe penance in the marshy land near the

अध्याय १५९

श्लोक 97

मन्वन्तरं शिवे लोके वासो भवति दुर्लभे ।विमानेनार्कवर्णेन किंकिणीशतशोभिना

manvantaraṃ śive loke vāso bhavati durlabhe / vimānenārkavarṇena kiṃkiṇīśataśobhinā

हिन्दी अर्थ

अज्भदस्यद्भदीया तु देशे कारपथे पुरी । चन्द्रकेतोस्तु मल्‍लस्य चन्द्रवक्‍त्रा पुरी शुभा १८८ भरतस्पाउःत्मजो वीरो तक्षः पुष्कर एवं च। गान्धारबिषये सिद्धे तथोः पुर्यों महात्मनोः

English

His wife tied her own bosom-born middle son (with; a rope) round his neck and offered him for sale in exchange for a hundred cows for maintaining (the remaining ones). On seeing the son of the sage tied round the neck, the excellent man of good rites, the virtuous-souled Satyavrata of great intellect, got him released by being sold. He nurtured him in order to propitiate Visvamitra and gain his sympathy.

अध्याय १५९

श्लोक 98

स गच्छति महाभाग सेव्यमानो ऽप्सरोगणैः ।भुनक्ति विविधान्भोगानुक्तकालं न संशयः

sa gacchati mahābhāga sevyamāno 'psarogaṇaiḥ / bhunakti vividhānbhogānuktakālaṃ na saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

तक्षस्य दिक्षु बिख्याता रम्या तक्षशिला पुरी । पुष्करस्थापि वीरस्य विख्याता पुष्कराबती गाथां चंवात्र गायन्ति ये पुराणविदों जना: । रामे निबद्ध/स्तत्त्वार्था माहात्म्यात्तस्य धीमतः

English

The boy came to be known as Galava because he had been tied round the neck {Gala ). That descendant of Kusika, a great sage of severe penance had been redeemed by that powerful (King).

अध्याय १५९

श्लोक 99

पूर्णे चैव ततः काल इह मानुष्यतां गतः ।सर्वव्याधिविनिर्मुक्तो जीवेच्च शरदां शतम्

pūrṇe caiva tataḥ kāla iha mānuṣyatāṃ gataḥ / sarvavyādhivinirmukto jīvecca śaradāṃ śatam

हिन्दी अर्थ

दश वर्षसहुल्लाणि रामो राज्यमकारयत् ऋक्सामयजुर्षा घोषो ज्याघोषश्य महास्वनः १६३ अविच्छिन्नोइभवद्राष्ट्रे दीयतां भुज्यतामिति । जनस्थाने बसन्कार्य त्रिदशानां चक्वार सः

English

On account of his (?) sacred vow, devotion, mercy and solemn declaration, the king who adhered to the rules of discipline, sustained Visvamitra's wife also. After killing deer, boars, buffaloes and other forest animals, he cooked that flesh near the hermitage of ViSvamitra.

अध्याय १५९

श्लोक 100

प्राप्य चाश्वयुजे मासि कृष्णपक्षे चतुर्दशीम् ।अहोरात्रोषितो भूत्वा पूजयित्वा महेश्वरम् ।महापातकयुक्तो ऽपि मुच्यते नात्र संशयः

prāpya cāśvayuje māsi kṛṣṇapakṣe caturdaśīm / ahorātroṣito bhūtvā pūjayitvā maheśvaram / mahāpātakayukto 'pi mucyate nātra saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

तमागस्कारिणं पुत्र पोलस्त्यं मनुजर्षभः ! सीताया: पदन्विच्छन्निजधान महायशाः था। लक्ष्मण के अज्भव और चन्द्रकेतु नामक दो पूत्र थे, उन दोनों के राज्य हिमवान् पर्वत के सीमावर्ती प्रान्तों में विस्तृत थे ।१८४-१८७। बड़े पुत्र अद्भुद की राजधानी कारपथ देश में अंगदीया नाम से विख्यात पुरी थी मलल (बलवान) चन्द्रकेतु की चन्द्रवक्‍त्रा नामक परम शोभायमातर पुरी थी । भरत के पुत्र तक्ष और पुष्कर दोबों बड़े वीर थे। उन दोनों महान बलशालियों की राजधानी गान्वार नामक सिद्ध देश में थी। तक्ष की परम

English

At the behest of the father, he adopted a secret vow (UpdrhSu Vrata) and for that purpose took initiation ex¬ tending to twelve years. As the king (Satyavrata's father) had gone to the forest, the sage Vasistha, in the capacity of the king s priest, protected Ayodhya, the kingdom and the harem.

अध्याय १५९

श्लोक 101

अष्टाविंशतिकोट्यो वै नरकाणां युधिष्ठिर ।विमुक्ता नरकैर्दुःखैः शिवलोकं व्रजन्ति ते

aṣṭāviṃśatikoṭyo vai narakāṇāṃ yudhiṣṭhira / vimuktā narakairduḥkhaiḥ śivalokaṃ vrajanti te

हिन्दी अर्थ

विख्यात परम रमणीय तक्षशिला नामक पुरी थी। दीरवर पुष्कर की भी पुष्करावती नाम से विख्यात पुरी राजधानी थी । जो पुराणों के जाननेवाले लोग हैं, वे परम बुद्धिमान राम के विषय में उनके माहात्म्य को प्रकट करनेवाली तत्त्वपूर्ण यज्ञोगाथाएँ गाते हैं ।१८८० १६१। वे ऐसा कहते हैं कि राम दयामलवर्ण के, लाल नेत्रोंव.ले तेज से देदीप्यमान मुखमण्डलवाले एवं मितभाषी युवा थे । उनका मुख परम सुन्दर था, उनकी दोनों बाहुएं

English

Out of childishness, or due to the force of the inevit¬ able destiny, Satyavrata nursed a great grudge against Vasistha. While he was crying on being exiled by his father and banished from the kingdom, the sage Vasistha had not restrain-

अध्याय १५९

श्लोक 102

तत्र भुक्त्वा महाभोगान्दिव्यैश्वर्यसमन्वितान् ।लभन्ते मानुषं जन्म दुर्लभं भुवि मानवाः

tatra bhuktvā mahābhogāndivyaiśvaryasamanvitān / labhante mānuṣaṃ janma durlabhaṃ bhuvi mānavāḥ

हिन्दी अर्थ

घुटमों को छुनेवाली थीं सिह के समान उनका विशाल कन्धा था, उनके भुजदण्ड विशाल थे । राम मे दस सहस्न वर्षों तक राज्य किया था । उनके राज्य में चारों ओर ऋग्वेद, यजुर्वेद एवं सामवेद की सुन्दर मनोहारिणी ध्वनि सुनाई पड़ती थी। उनके धनुष की प्रत्यंचा की ध्वनि परम कठोर थी ।१६२-१६३/ उनके राष्ट्र में किसी को भी किसी प्रकार का कष्ट नहीं था, लोगों में खूब दाव करो, खूब खाओ, पीओ, की धूममची थी। उस राम ने जन स्थान में निवास कर देवताओं का एक परम आवद्यक कार्य सम्पन्न किया था। उन मनुज शिरोमणि महान् यशस्वी राम ने पुलस्त्य मुनि के वंश में उत्पन्न होनेवाले, पापात्मा रावण का संहार सीता को खोौजते समय किया था। वे दशरथ पुत्र राम परम बलशाली, सर्व गुण सम्पन्न, एवं अपने अनृपम तेज से देदीप्यमान थे। सूर्थ एवं अनि को भी उन्होने अपने तेज से अतिक्रान्त कर दिया था। परम प्रभावशाली महाबाहु इक्ष्वाकु

English

The Mantras chanted during the celebration of a marriage are concluded at the seventhstep (of the Saptafiadi rite) but Satyavrata abducted her (the bride ofVidarbha) at the seventh step.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 159
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.