Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
164
अध्याय 164 / 232

Adhyaya 164

13 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ13 श्लोक

श्लोक पर जाएं:

अध्याय १६४

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे नागतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम त्रिषष्ट्युत्तरशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १६४ श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेन्महाराज सांवौरं तीर्थमुत्तमम् ।यत्र संनिहितो भानुः पूज्यमानः सुरासुरैः

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe nāgatīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma triṣaṣṭyuttaraśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 164 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gacchenmahārāja sāṃvauraṃ tīrthamuttamam / yatra saṃnihito bhānuḥ pūjyamānaḥ surāsuraiḥ

हिन्दी अर्थ

कर्मणा मनसा वाचा शुभान्येव समाचरन् । काष्ठकुड्यूशिलाभूत ऊध्वेसाहुमहाद्युतिः २ त॑ गर्भ विधिना55दिष्टा' दश देव्यों द्धुस्तदा । समेत्य धारयामासुनेंच तास्तमशकतुवन् ६ स् ताम्यः सहसंवाथ दिग्म्यो गर्भ: प्रभान्वित:। यथाइवभासयल्लेॉकान्शोतांशुः सर्वभावनः ७

English

The king made all his sons to dig the whole area. Then ultimately, in the great ocean, they met with the primordial Being, Lord Visnu, Lord Hari, K r sna, the Lord of subjects, Lord Hamsa, Lord Narayana, in the form of Kapila.

अध्याय १६४

श्लोक 2

तत्र ये पङ्गुतां प्राप्ताः शीर्णघ्राणनखा नराः ।दद्रुमण्डलभिन्नाङ्गा मक्षिकाकृमिसंकुलाः

tatra ye paṅgutāṃ prāptāḥ śīrṇaghrāṇanakhā narāḥ / dadrumaṇḍalabhinnāṅgā makṣikākṛmisaṃkulāḥ

हिन्दी अर्थ

चन्द्रमा का जन्म वृतान्त

English

They came within the range of the vision of that brilliant being. Then all those sons (ofSagara) were burnt and four of them survived.

अध्याय १६४

श्लोक 3

मातापितृभ्यां रहिता भ्रातृभार्याविवर्जिताः ।अनाथा विकला व्यङ्गा मग्ना ये दुःखसागरे

mātāpitṛbhyāṃ rahitā bhrātṛbhāryāvivarjitāḥ / anāthā vikalā vyaṅgā magnā ye duḥkhasāgare

हिन्दी अर्थ

सूत बोले--' ऋषि व॒न्द ! चन्द्रमा के पिता परम तेजस्वी एवं ऐश्वर्यव्ाली अत्रि ऋषि थे । वे समस्त लोकों के कल्याणार्थ तपस्या में निरित रहते थे ।0' मनसा, वाचा, कमंणा स्वंदा शुभ कार्यों में ही वे तत्पर रहा करते ये। काष्ठ, भीत अथवा पत्थर की चट्टान की भाँति परम तेजस्वी वे महर्षि सबंदा ऊपर बाहु किये हुए ऐसी तपस्या में--जिसका नाम हौ दुश्चर था--निरत थे। ऐसा हम लोगों ने सुना है कि उस वठोर तपस्या में महर्षि अत्रि देवताओं के तीन सहस्न वर्ष तक लगे रहे ।२-३॥ परम ब्रह्मचारी ऊध्वरेता महर्षि अति ने इतनी लम्बी अवधि तक पलक मारने की इच्छा नहीं की, अर्थात् निर्निमेष तपस्या में लगे ही रहे । इस परम कठोर तप के प्रभाव से डिजबये महाबुद्धिमान् अत्रि का शरीर चन्द्रमा की भाँति निर्मेल हो गया । आत्मा को वश में करनेवाले उन भगवान अतन्रि के सोमत्व ने ऊध्वं देश पर आक्रमण किया, अर्थात् उनके

English

They were Barhiketu, Suketu, Dharmarata and the heroic Pancavana. All these continued the lineage of the lord (Sagara).

अध्याय १६४

श्लोक 4

तेषां नाथो जगद्योनिर्नर्मदातटमाश्रितः ।सांवौरनाथो लोकानामार्तिहा दुःखनाशनः

teṣāṃ nātho jagadyonirnarmadātaṭamāśritaḥ / sāṃvauranātho lokānāmārtihā duḥkhanāśanaḥ

हिन्दी अर्थ

शिरोभाग की अतीव कान्ति बढ़ गई, ठीक उसी समय दसों दिशाओं को प्रकाशित करते हुए, उनके दोनों नेत्रों से सोम नीचे चू पड़ा ।४-५! ब्रह्मा के आदेशानुसार उस गर्भ को दसों देवियों (दिशाओं) ने धारण कर लिया, किन्तु एक साथ मिलकर धारण करने पर भी वे उस गर्भ को धारण करने में असमर्थ हो गई । परम तेजोमय

English

Lord Hari, Narayana granted him boons such as the everlasting nature of his race, the benefit of a hundred horse-sacrifices, the all-pervading Samudra (ocean) as the son and perpetual residence in heaven.

अध्याय १६४

श्लोक 5

तत्र तीर्थे तु यः स्नात्वा मासमेकं निरन्तरम् ।पूजयेद् भास्करं देवं तस्य पुण्यफलं शृणु

tatra tīrthe tu yaḥ snātvā māsamekaṃ nirantaram / pūjayed bhāskaraṃ devaṃ tasya puṇyaphalaṃ śṛṇu

हिन्दी अर्थ

पतन्‍्तं सो ममालोक्य ब्रह्मा लोकपितामहः । रथमारोपयामास लोकानां हितकाम्यया ३६ स॒ हि देवमयो विप्रा धर्मारथों सत्यसंगरः । युक्तो वाजिसहस्नेण सितेनेति हि नः श्रुतम् १० तस्मिन्निपतिते देवा: पुत्रेउत्रे: परमात्मनि। तुष्दुवुब्नंह्मणः पुत्रा मानसाः सप्त विश्वुताः ११ ततः संस्तृयमानस्य तेज: सोमस्य भास्वतः । आप्यायसान लोकांस्त्रीन्‍्भावयासास सर्वशः

English

Taking the horse with him, the ocean, the lord of rivers, came there and bowed to him. On account of that action he earned the title of "Sagara" (born ofSagara).

अध्याय १६४

श्लोक 6

यत्फलं चोत्तरे पार्थ तथा वै पूर्वसागरे ।दक्षिणे पश्चिमे स्नात्वा तत्र तीर्थे तु तत् फलम्

yatphalaṃ cottare pārtha tathā vai pūrvasāgare / dakṣiṇe paścime snātvā tatra tīrthe tu tat phalam

हिन्दी अर्थ

स तेन रथमुख्येन सागरान्‍्तां वसुंधराम्। त्रिःसप्तकृत्वो विपुलशभ्रकाराभिप्रदक्षिणम् १४

English

After regaining the horse from the ocean the king performed horse-sacrifices again and again making up the total of one hundred.

अध्याय १६४

श्लोक 7

कौमारे यौवने पापं वार्द्धके यच्च संचितम् ।तत् प्रणश्यति सांवौरे स्नानमात्रान्न संशयः

kaumāre yauvane pāpaṃ vārddhake yacca saṃcitam / tat praṇaśyati sāṃvaure snānamātrānna saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

ताभिर्धायत्ययं लोकान्प्रजाश्रापि चतुविधाः पोष्टा हि भगवान्सोमो जगतो हि द्विजोत्तमाः स लब्धतेजास्तपसा संस्तवेस्तेश्व कर्मभिः । तपस्तेपे महाभागः पद्चानां दशतोदंश ६१७

English

We have heard (it reported) that there were sixty thousand sons. Those sixty thousand sons were burnt. Those noble-souled sixty thousand sons entered (merged in) the divine brilliance of Narayana.

अध्याय १६४

श्लोक 8

न व्याधिर्नैव दारिद्र्यं न चैवेष्टवियोजनम् ।सप्तजन्मानि राजेन्द्र सांवौरपरिसेवनात्

na vyādhirnaiva dāridryaṃ na caiveṣṭaviyojanam / saptajanmāni rājendra sāṃvauraparisevanāt

हिन्दी अर्थ

वह गर्भ चब थोड़ी देर के लिए भी दिशाओं द्वारा घारण नहीं किया जा सका, और वे सब स्त्रियाँ अशक्त हो गईं, तब समस्त लोकों का मनोभावन, शीतल किरणोंवाला वह गर्भ उनके उदर से निकलकर सभस्‍्त लोकों को प्रकाशमय करता हुआ प्रृथ्वी पर गिर पड़ा । लोक पितामह बहा जी ने इस प्रकार गिरते हुए सोम को लोक फल्याणाथ अपने रथ पर बिठा लिया ।६-६। विप्रगण ! धह चन्द्रमा दिव्यगुण सम्पन्न हैं, धर्माथ में निरत रहने

English

By what means did the sixty thousand sons of Sagara become powerful and valorous? Please narrate.

अध्याय १६४

श्लोक 9

सप्तम्यामुपवासेन तद्दिने चाप्युपोषिते ।स तत्फलमवाप्नोति तत्र स्नात्वा न संशयः

saptamyāmupavāsena taddine cāpyupoṣite / sa tatphalamavāpnoti tatra snātvā na saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

वाले एवं सत्यप्रतिज्ञ हैं, हमने ऐसा सुना है कि वे एक सहल इवेत घोड़ों के रथ पर विराजमान रहते हैं। अत्रि के पुत्र, परम तेजोमय चन्द्रमा के इस प्रकार पृथ्वी पर गिरने पर देवताओं एवं ब्रह्मा के परम विख्यात सातों मानस पत्रों ने उनकी स्तुति की । अंगिरा एवं भृगु के पुत्रों ने ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथवेवेद एवं आंगिरस के मंत्रों से उनकी विधिवत स्त॒ति की ।१०-१२। इन सबों से स्तुति किये जाते हुए परम तेजस्वी चन्द्रमा के तैज ने तीनों लोकों को सन्तृष्ट कर दिया, सब को अपने शान्त स्निग्ध प्रकाश से सुप्रसन्न कर दिया। महान् चरद्रमा ने उस समय ब्रह्मा जी के उस रथ पर विराजमान होकर सागर पयेन्‍्त विस्तृत पृथ्वी की इक्कीस बार प्रदक्षिणा की ।१३-१४। चर्द्रमा का जो तेज प्रथ्वी पर गिर पडा था, वह ओषधियों के रूप में परिगत हो गया, आज भी वे ओषधियाँ चद्ध मा के तेज से जाज्वल्यमान रहती हैं। चन्द्रमा उन्हों ओषधियों द्वारा समस्त लोकों एवं चार

English

Sagara had two wives. By means of penance they had burnt all their sins. The elder of them named Ke$Ini was the daughter of Vidarbha.

अध्याय १६४

श्लोक 10

रक्तचन्दनमिश्रेण यदर्घ्येण फलं स्मृतम् ।तत्र तीर्थे नृपश्रेष्ठ स्नात्वा तत्फलमाप्नुयात्

raktacandanamiśreṇa yadarghyeṇa phalaṃ smṛtam / tatra tīrthe nṛpaśreṣṭha snātvā tatphalamāpnuyāt

हिन्दी अर्थ

प्रकार की प्रजाओं का पालन करता है, द्विजवर्यंगण ! इस समस्त चराचर जगत् के पुष्टि देनेवाले परम ऐश्वर्य - शाली भगवान् चन्द्रमा ही एकमात्र हैं। अत्रि के उस परम तपोबल से, देवताओं और ऋषियों की स्तुतियों से तथा अपने शुभ कर्मों द्वारा परम तेजोबल प्राप्त कर महाभाग्यशाली चन्द्रमा दद पद्म वर्षों तक घोर तपस्या में लगे रहे ।१४-१७। सुवर्ण के समान शुभ्र वर्णोवाली जो देवियाँ अपने में इस समस्त चराचर जगतु को धारण करती

English

Sumati, the sister of Suparna, accepted the boon of sixty thousand sons from the noble-souled sage, in accordance

अध्याय १६४

श्लोक 11

नर्मदासलिलं रम्यं सर्वपातकनाशनम् ।निरीक्षितं विशेषेण सांवौरेण महात्मना

narmadāsalilaṃ ramyaṃ sarvapātakanāśanam / nirīkṣitaṃ viśeṣeṇa sāṃvaureṇa mahātmanā

हिन्दी अर्थ

हिरण्यवर्मा या देव्यों धारयन्त्यात्मना। जगत् । विभुस्तासां भवेत्सोमः प्रख्यात: स्वेन कर्मणा ततस्तस्म ददो राज्य ब्रह्मा ब्रह्मविदां वर: । बीजौषधिषु विप्राणामपां च द्विजसत्तसा: १६ सो5भिषिक्तो महातेजा महाराज्येब राजराद् लोकानां भावयामास स्वभावाश्रपतां बरः.

English

After some time the elder wife gave birth to the

अध्याय १६४

श्लोक 12

ते धन्यास्ते महात्मानस् तेषां जन्म सुजीवितम् ।स्नात्वा पश्यन्ति देवेशं सांवौरेश्वरमुत्तमम्

te dhanyāste mahātmānas teṣāṃ janma sujīvitam / snātvā paśyanti deveśaṃ sāṃvaureśvaramuttamam

हिन्दी अर्थ

हिरण्यगर्भश्वोद्गाता बहा ब्रह्मत्वमेयिवान् । सदस्यस्तत्र भगवान्हरिनाॉरायणः प्रभुः ॥

English

Sumati, the famous lady, gave birth to a gourd-like foetus. From the gourd-like foetus all the sixty thousand sons came out. The king caused (pieces of) the foetus to be depo¬ sited in (sixty thousand) jars of ghee and engaged as many nurses to look after them individually.

अध्याय १६४

श्लोक 13

सूर्यलोके वसेत् तावद् यावद् आभूतसम्प्लवम्

sūryaloke vaset tāvad yāvad ābhūtasamplavam

हिन्दी अर्थ

सनत्कुमारप्रमुख राह्ब्रह्म पिभिव तः दक्षिणामददात्सोमस्त्रील्लॉकानिति नः श्रुतम् । तेम्यो ब्रह्मधिमुख्येम्यः सदस्येस्पस्तु वे द्विजा:

English

Then, In the course of nine months, they grew well and came out of them (jars) hale and hearty; those blessed sons heightened the pleasure of Sagara.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 164
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.