अध्याय १६७
श्लोक 1
॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे सिद्धेश्वरतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम षट्षष्ट्युत्तरशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १६७ युधिष्ठिर उवाच: नर्मदादक्षिणे कूले त्वच्चिह्नेनोपलक्षितम् ।तीर्थम् एतन् ममाख्याहि सम्भवं च महामुने
|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe siddheśvaratīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma ṣaṭṣaṣṭyuttaraśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 167 yudhiṣṭhira uvāca: narmadādakṣiṇe kūle tvaccihnenopalakṣitam / tīrtham etan mamākhyāhi sambhavaṃ ca mahāmune
हिन्दी अर्थ
एतत्सोमस्य वे जन्म कीतितं द्विजसत्तमाः । वंश तस्य द्विजश्रेष्ठा: कीत्यंमान॑ निबोधत ४८ ही उस परम ऐद्वयेशाली ने देवताओं को हतश्री कर दिया देवता लोग इससे सन्देह में पड़ गये और तारा से कहने लगे, सच सच बतलाओ, यह पुत्र किसका है, चद्धमा अथवा बृहस्पति का ।३२-३६। देवताओं के इस प्रकार बारम्बार कहने पर भी जब तारा साधु असाधु कुछ नहीं बोल सकी, तब दस्युहस्तम कुमार उसे शाप देने को उतारू हो गया। ब्रह्मा ने कुमार को निवारित करण पुनः तारा से पूछा--तारे ! बतलाओ, इस
English
After killing Lavana, the son of Madhu, Satrughna entered his Madhuvana and founded die city of Mathura there.