Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
169
अध्याय 169 / 232

Adhyaya 169

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अध्याय १६९

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे अङ्कूरेश्वरतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नामाष्टषष्ट्युत्तरशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १६९ श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेत्परं तीर्थं पुण्यं पापप्रणाशनम् ।माण्डव्यो यत्र संसिद्ध ऋषिर्नारायणस्तथा

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe aṅkūreśvaratīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāmāṣṭaṣaṣṭyuttaraśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 169 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gacchetparaṃ tīrthaṃ puṇyaṃ pāpapraṇāśanam / māṇḍavyo yatra saṃsiddha ṛṣirnārāyaṇastathā

हिन्दी अर्थ

कोशिकों के ही हैं ।६३-९७। पाथिव, देवरात, याज्ञवल्व्य, समर्षण, उदृम्बर, उदुम्लान, तारक, यममुच्चत, लोहिष्य, रेणव, कारीषु, बच्चु, पाणिन, ध्यानजप्य, शालावत्य, हिरण्याक्ष, स्पडकृत, गालव, देवल, यामदूत, सालद्भायन, बाष्कल, ददाति एवम् बादर नाम से प्रसिद्ध वंशों में उत्पन्न होनेवालों का परम बुद्धिमान् विश्वामित्र का गोत्र हैं। बहुतेरे कौशिक गोत्र में उत्पन्न होनेवालों का विवाह अन्य ऋषि के गोत्र में उत्पन्न होनेवालों के हदमधं नास्ति के. पुस्तक ।

English

Only three Devas survived. They are remembered by the name Tusitas. They sought shelter in Brahma, the primor¬ dial lord, the grandfather of the worlds.

अध्याय १६९

श्लोक 2

नारायणेन शुश्रूषा शूलस्थेन कृता पुरा ।तत्र स्नात्वा महाराज मुच्यते पापकञ्चुकात्

nārāyaṇena śuśrūṣā śūlasthena kṛtā purā / tatra snātvā mahārāja mucyate pāpakañcukāt

हिन्दी अर्थ

ह ८२० वायुपुराणम्

English

Then Pitamaha (Brahma) himself prevented Usanas and Rudra, the eldest (deity) Sankara, (from fighting) and handed over Tara to Ahgiras (Brhaspati).

अध्याय १६९

श्लोक 3

युधिष्ठिर उवाच: आश्चर्यमेतल्लोकेषु यत्त्वया कथितं मुने ।न दृष्टं न श्रुतं तात शूलस्थेन तपः कृतम्

yudhiṣṭhira uvāca: āścaryametallokeṣu yattvayā kathitaṃ mune / na dṛṣṭaṃ na śrutaṃ tāta śūlasthena tapaḥ kṛtam

हिन्दी अर्थ

कौशिक: सौश्रताश्चेव तथाउन्ये सेंघवायना: । पौरोरवस्य पुण्यस्य ब्रह्मषें: कोशिकस्य तु कि लक्षणेत धर्मेण तपसेह श्रुतेन वा । ब्राह्मण्यं समनृप्राप्तं विश्वामित्रादिभिन पेः ॥१ ०४

English

Sini and Kuhu are deities presiding over (i) the day preceding the new moon day on which the moon rises with scarcely visible crescent and (ii) the new moon day when the moon is invisible, respectively.

अध्याय १६९

श्लोक 4

एतत्सर्वं कथय मे ऋषिभिः सहितस्य वै ।अस्य तीर्थस्य माहात्म्यं माण्डव्यस्य कुतूहलात्

etatsarvaṃ kathaya me ṛṣibhiḥ sahitasya vai / asya tīrthasya māhātmyaṃ māṇḍavyasya kutūhalāt

हिन्दी अर्थ

धर्माभिकाइक्षी यजते न धर्मफलमश्नुते

English

Out of the twelve wars between Devas and Asuras this was the fifth one.

अध्याय १६९

श्लोक 5

श्रीमार्कण्डेय उवाच: शृणु राजन्यथावृत्तपुरा त्रेतायुगे क्षितौ ।लोकपालोपमो राजा देवपन्नो महामतिः

śrīmārkaṇḍeya uvāca: śṛṇu rājanyathāvṛttapurā tretāyuge kṣitau / lokapālopamo rājā devapanno mahāmatiḥ

हिन्दी अर्थ

धरम चेत॑ समाख्याय पापात्मा पुरुषाधमः । ददाति दान विप्रेभ्यो लोकानां दम्भभारणात् लेन दत्तानि दानानि अफलानि भवन्त्युत । तस्य धर्मेप्रवृत्तत्य हिसकस्य दुरात्मनः १०६ एवं लब्ध्बा धनं मोहाइदतो यजतश्र हु। संक्लिष्टकर्मंणों दाने न तिष्ठति दुरात्मनः ११०

English

On seeing that Tara, the lady with a moon-like face, was pregnant, the Brahmana Brhaspati said: "Don't you cast off the foetus?

अध्याय १६९

श्लोक 6

धर्मज्ञश्च कृतज्ञश्च यज्वा दानरतः सदा ।प्रजा ररक्ष यत्नेन पिता पुत्रान् इवौरसान्

dharmajñaśca kṛtajñaśca yajvā dānarataḥ sadā / prajā rarakṣa yatnena pitā putrān ivaurasān

हिन्दी अर्थ

साथ कहा जाता है कौशिक, सौश्रुत एवं सैंधवायन नाम से प्रसिद्ध वंश में उत्पन्न होनेवाले, पुरूरवा के बंश में उत्पन्न पुण्यद्वाली ब्रह्म कौशिक के गोत्र में कहे जाते हैं। विश्वामित्र से दुषद्वती में उत्पन्न होनेवाले एक पुत्र का नाम अष्टक था, अष्टक के पुत्र जह नुगण हुए, जिसका वर्णन ऊपर किया जा चुका ।६८-१० हे।

English

In (your) body belonging to me another foetus shall by no means be held in the womb." Still she did not cast off the child • Dasyu-hantama * (the slayer of robbers).

अध्याय १६९

श्लोक 7

दात्यायनी प्रिया भार्या तस्य राज्ञो वशानुगा ।हारनूपुरघोषेण झङ्काररवनादिता

dātyāyanī priyā bhāryā tasya rājño vaśānugā / hāranūpuraghoṣeṇa jhaṅkāraravanāditā

हिन्दी अर्थ

ऋषिधृन्द् बोले--सृत जी ! इस लोक में उत्पन्न होकर विश्वामित्र प्रभृति क्षत्रिय राजाओं ने किस प्रकार के कम, तपस्या अथवा ज्ञान द्वारा ब्राह्मणत्व की प्राप्ति की, जिन-जिन सत्कर्मों अथवा दान या तपस्या द्वारा क्षत्रिय लोग ब्राह्मण हुए, उन उनको विशेष रूप से हम लोग जानना चाहते हैं।' ऋषियों के इस प्रकार पूछने पर सूत जी तात्पर्य से भरी हुई यह वाणी बोले--ऋषिवृन्द ! अन्याय से उपाजित किये गये द्रव्य द्वारा धर्म की आकांक्षा से अच्छे-अच्छे विद्वान ब्राह्मणों को बुलाकर जो यज्ञादिक सत्कर्म करते हैं, वे धर्म का फल नहीं प्राप्त करते १०४-१०६। जो पापात्मा नीच पुरुष दम्भवश 'मैं यह धर्मकायं कर रहा हूँ! इस प्रकार का प्रचार कर के, लोक में अपनी ख्याति प्राप्त करने के उद्देश्य से, ब्राह्मणों को दान देता है, अथवा जो निरंकुश व्यक्ति धन के लोभ से कठोर जप करता है, या राग मोहबश पहले पाप करके अस्त में पवित्र होने

English

Like the fire that blazes after catching the I§ika grass, the son surpassed the beautiful bodies of Devas at the very instant he was born.

अध्याय १६९

श्लोक 8

परस्परं तयोः प्रीतिर् वर्धते ऽनुदिनं नृप ।वंशस्तम्बे स्थितो राजा संशास्ति पृथिवीमिमाम्

parasparaṃ tayoḥ prītir vardhate 'nudinaṃ nṛpa / vaṃśastambe sthito rājā saṃśāsti pṛthivīmimām

हिन्दी अर्थ

के उद्देश से दान करता है, उन सब के दानादि सज््कर्म निष्फल होते हैं। दुरात्मा वास्तव में हिस्र भावना से धर्म में प्रवत्त होते हैं।१०७-१०९। इस प्रकार के अन्याय द्वारा धन प्राप्श कर मोहबश जो दुरात्मा, ऋ्ररकर्मा दान करता है अथवा यज्ञ करता है, वह नष्ट हो जाता है, टिकता नहीं । इसलिये न्यायतः प्राप्त धन को उपयुक्त तीथे (पात्र) में जो दान करते हैं, अपने मनोरथों के लिए किसी प्रकार को अभिसंधि (षडयंत्र) नहीं

English

Their suspicion having been aroused, Suras spoke to Tara: "Tell us the truth, whose son is he, Soma's or Brhas- pati's r

अध्याय १६९

श्लोक 9

हस्त्यश्वरथसम्पूर्णां धनवाहनसंयुताम् ।अलंकृतो गुणैः सर्वैर् अनपत्यो महीपतिः

hastyaśvarathasampūrṇāṃ dhanavāhanasaṃyutām / alaṃkṛto guṇaiḥ sarvair anapatyo mahīpatiḥ

हिन्दी अर्थ

स्यायागतानां द्रव्याणां तोथें संप्रतिपादनम्। कामाननभिसंधाय यजते च ददानि च तपसा तु सुगुप्तेन लोकान्विष्टम्य तिष्ठति। विष्टम्य स तु तेजस्वी लोकेष्वानन्त्यमश्नुते

English

When she, out of bashfulness, did not tell Devas, 'yes' or 'no*, the boy Dasyuhantaraa was about to curse her.

अध्याय १६९

श्लोक 10

दुःखेन महताविष्टः संतप्तः सन्ततिं विना ।स्नानहोमरतो नित्यं द्वादशाब्दानि भारत

duḥkhena mahatāviṣṭaḥ saṃtaptaḥ santatiṃ vinā / snānahomarato nityaṃ dvādaśābdāni bhārata

हिन्दी अर्थ

दानाच्छ यस्तथा यज्ञो यज्ञाच्छे यस्तथा तपः। संन्यास्तपसः श्रेयांस्तस्साजज्ञानं गुरु स्‍्पुतम्ु

English

Preventing him, Brahma said to Tara, "(We have) suspicion that it is Candra's (Moon's), O Tara; therefore, speak the truth. Whose son is this?"

अध्याय १६९

श्लोक 11

व्रतोपवासनियमैः पत्नीभिः सह तस्थिवान् ।आराधयद्भगवतीं चामुण्डां मुण्डमर्दिनीम्

vratopavāsaniyamaiḥ patnībhiḥ saha tasthivān / ārādhayadbhagavatīṃ cāmuṇḍāṃ muṇḍamardinīm

हिन्दी अर्थ

क्षात्रोपेता: स्पृता होते तपसा ऋषितां गताः। एते राजषंयः सर्वे सिद्धि सुमहतीं गताः ।। क्‍ इति महापुराणे वायुप्रोक्ते अमावसुवंशानुकीत॑नम् नामकतवतितमोध्ध्याय:

English

With palms joined in reverence, she said this to lord Brahma, the granter of boons, that the noble-souled boy Das- yuhantama was Soma's.

अध्याय १६९

श्लोक 12

स्तोत्रैर् अनेकैर् भक्त्या च पूजाविधिसमाधिना ।जय वाराहि चामुण्डे जय देवि त्रिलोचने

stotrair anekair bhaktyā ca pūjāvidhisamādhinā / jaya vārāhi cāmuṇḍe jaya devi trilocane

हिन्दी अर्थ

करते, अथवा बिता किसी कामना के यज्ञ दान करते हैं, वही दान के वास्तविक फल को प्राप्त करते हैं, और वही दान सुख शान्ति एवं समृद्धि देने वाला है।११०-१११३। दान द्वारा मनुष्य विविध प्रकार के भोगों की प्राप्ति करता है, सत्य द्वारा स्वर्ग लोक की प्राप्ति करता है, तथा परम गोपनीय ढंग से की गई तपस्या द्वारा समस्त लोक का अतिक्रमण कर स्थित होता है, बर्थात् गुप्त तपस्या द्वारा

English

Thereafter, sniffing at the head of his son, Lord Soma, the Prajapati, named his intelligent son as Budha.

अध्याय १६९

श्लोक 13

ब्राह्मि रौद्रि च कौमारि कात्यायनि नमो ऽस्तु ते ।प्रचण्डे भैरवे रौद्रि योगिन्याकाशगामिनि

brāhmi raudri ca kaumāri kātyāyani namo 'stu te / pracaṇḍe bhairave raudri yoginyākāśagāmini

हिन्दी अर्थ

समस्त लोक से ऊपर होता है इस प्रकार समस्त लोक का अतिक्रमण क्रनेवाला परम तेजस्वी तपस्वी सभी लोकों में अनन्त अक्षय सुख की प्राप्ति करता है । दान की अपेक्षा यज्ञ कल्याणकारी है, यज्ञ से बढ़कर कल्याणकारी तपस्या है, तपस्या से भी बढ़कर संन्यास की महत्ता है, और संस्यास से भी बढ़कर कल्याण दायी एवं महात् ज्ञान कहा गया है ।११२-११४। ऐसा सुना जाता है कि क्षत्रिय-गुण-कर्मे-स्वभाव वाले बनेक द्विजातियों ने तपस्या द्वारा सिद्धि प्राप्त की। नरपति विद्वामित्र, मान्धाता, संकृति, कपि, पुरुकुत्स,

English

(Defective verse) While rising up to go towards the east*, Budha begot a son of the princess (Ila).

अध्याय १६९

श्लोक 14

नास्ति किंचित्त्वया हीनं त्रैलोक्ये सचराचरे ।राज्ञा स्तुता च संतुष्टा देवी वचनमब्रवीत्

nāsti kiṃcittvayā hīnaṃ trailokye sacarācare / rājñā stutā ca saṃtuṣṭā devī vacanamabravīt

हिन्दी अर्थ

रथीतर, रुनद, विष्णुवृद्धादि राजाओं ने क्षत्रिय जाति में उत्पन्न हौकर अपनी तपस्या द्वारा ऋषि-पदवी प्राप्त की । इन सभी राजपियों ते अपनी महान् तपस्या द्वारा परम सिद्धि की प्राप्ति की । अब इसके उपरान्त महाव् पराक्रमी राजा (अयु) (आ4)के वंश का वर्णन कर रहा हूँ !१५-११८।

English

Pururavas, his son of great brilliance, was born of Ila. In UrvasI, six sons of great prowess were born (to Pururavas).

अध्याय १६९

श्लोक 15

वरयस्व यथाकामं यस्ते मनसि वर्तते ।आराधिता त्वया भक्त्या तुष्टा दास्यामि ते वरम्

varayasva yathākāmaṃ yaste manasi vartate / ārādhitā tvayā bhaktyā tuṣṭā dāsyāmi te varam

हिन्दी अर्थ

८२२ वायुपुराणम् क्‍ चन्‍्ट्रर्व्यंच्याकठी से ्वम्त

English

Then, being violently attacked by pulmonary con¬ sumption Soma became exhausted and helpless. Overwhelmed by consumption, the Moon's disc became pale and weak. He, therefore, sought refuge in his own father Atri.

अध्याय १६९

श्लोक 16

देवपन्न उवाच: यदि तुष्टासि देवेशि वरार्हो यदि वाप्यहम् ।पुत्रसन्तानरहितं संतप्तं मां समुद्धर

devapanna uvāca: yadi tuṣṭāsi deveśi varārho yadi vāpyaham / putrasantānarahitaṃ saṃtaptaṃ māṃ samuddhara

हिन्दी अर्थ

एते पुत्रा महात्मानः पशथ्चेवाइसल्महाबलाः । स्वर्भानुतनया विप्राः प्रभायां जज्ञिरे नपाः नहुषः प्रथमस्तेषां पत्रथर्मा ततः स्मृतः । धर्मंवद्धात्मजश्चेव सुतहोत्रों महायशाः सुतहोत्रस्य दायादास्त्रयः परमधासिकाः । काशः कालश्र द्वावेतो तथा गृत्समदः प्रभुः पुत्रों गृत्समदस्थापि शुनकों यस्य शौनकः । ब्राह्मणा: क्षत्रियाश्चेव वेश्या: शुद्रास्तथेव च

English

Atri, of great fame, quelled his sin (disease). He was cured of the pulmonary consumption and so he shone with bri¬ lliance all round.

अध्याय १६९

श्लोक 17

सन्तानं नय मे वृद्धिं गोत्ररक्षां कुरुष्व मे ।अपुत्रिणां गृहाणीह श्मशानसदृशानि हि

santānaṃ naya me vṛddhiṃ gotrarakṣāṃ kuruṣva me / aputriṇāṃ gṛhāṇīha śmaśānasadṛśāni hi

हिन्दी अर्थ

शोनकाश्चा55थ्टिषेणाश्च क्षाओोपेता द्ििजातयः काशस्य काशयो राष्टः पुत्रो दीर्घतपास्तथा खूत बोले--विप्रव॒न्द ! पाँच महात््॒ पराक्रमी तथा परम बलवान स्वर्भानु के पुत्र प्रभा नामक परनी में उत्पन्त हुए, जो सब राजा थे उन सबों में प्रथम गणनीय राजा नहुष थे । उनके बाद पुृत्रधर्मा कहे जाते हैं । तदनन्तर घमवद्ध हुए, धर्मंवृद्ध के पुत्र परम यशस्वी राजा सुतहोत्र हुए ।(-२। राजा सुतहोन्न के उत्तराधिकारी तीन परम धामिक पुत्र हुए, जिनके नाम काश, शल एवं गृत्समद थे । परम प्रभाव शाली राजा गृत्समद के पुत्र

English

O excellent Brahmanas, thus the origin of Soma has been recounted by me. Listen to and understand his race that is being recounted to you, O excellent Brahmanas.

अध्याय १६९

श्लोक 18

पितरस्तस्य नाश्नन्ति देवता ऋषिभिः सह ।क्रियमाणे ऽप्यहरहः श्राद्धे मत्पितरः सदा

pitarastasya nāśnanti devatā ṛṣibhiḥ saha / kriyamāṇe 'pyaharahaḥ śrāddhe matpitaraḥ sadā

हिन्दी अर्थ

. शुनक थे, जिनके पृत्र शौनक हुए द्िजब॒न्द ! इस वंश में उत्पन्न होनेवाली संततियाँ ब्राह्मण, क्षत्रिय, यंश्य शुद्र--चा रो बर्णों में भपने विचित्र कर्मों द्वारा विभक्त हुईं। शल के पुत्र राजा आष्टिषेण हुए, जिनके पुत्र चरन्त हुये ।३-४॥ शौनक ओर आए्टिषेण के वंश में उत्पश्त होनेवाली सन्ततियाँ क्षत्रिय एवं ब्राह्मण दोनों वर्णों में हैं । काश के काशय, राष्ट और दीघेतपा नामक पुत्र हुए। दीघंतपा के पुत्र राजा धर्म हुए, धर्म से परम विद्वान्

English

He was an expounder of Brahman (Vedas), destro¬ yer of foes and invincible in battle. He regularly performed Agnihotra and granted gifts of lands to sacrificial priests.

अध्याय १६९

श्लोक 19

दर्शयन्ति सदात्मानं स्वप्ने क्षुत्पीडितं मम ।इति राज्ञो वचः श्रुत्वा देवी ध्यानमुपागता

darśayanti sadātmānaṃ svapne kṣutpīḍitaṃ mama / iti rājño vacaḥ śrutvā devī dhyānamupāgatā

हिन्दी अर्थ

राजा घत्वन्तरि का जन्म हुआ ।। परम बुद्धिमान् राजा धर्म की वृद्धावस्था में उनकी तपस्या के कारण महान् तैजस्वी धब्वन्तरि का जन्म हुआ था। इस बात को सुनकर ऋषियों ने सूस से यह बात पूछी ।

English

He was truthful in speech and intelligently engaged in holy rites. Handsome in features, he indulged in sexual inter¬ course in great privacy. He was an extraordinarily dutiful son, and in beauty of form was unequalled in all the worlds.

अध्याय १६९

श्लोक 20

दिव्येन चक्षुषा दृष्टं त्रैलोक्यं सचराचरम् ।प्रसन्नवदना देवी राजानमिदमब्रवीत्

divyena cakṣuṣā dṛṣṭaṃ trailokyaṃ sacarācaram / prasannavadanā devī rājānamidamabravīt

हिन्दी अर्थ

कर्थ धन्वन्तरिदेवों मानुषेष्विह जज्ञिवान् । एतद्वेदितुमिच्छामस्ततो बूहि प्रियं तथा ८

English

Eschewing her pride in personal prestige, the renowned UrvaSi wedded that righteous, truthful (king), conversant with Dharmas and expounder of Brahman (Veda)

अध्याय १६९

श्लोक 21

सन्तानं नास्ति ते राजंस्त्रैलोक्ये सचराचरे ।यजस्व यज्ञपुरुषमपत्यं नास्ति ते ऽन्यथा

santānaṃ nāsti te rājaṃstrailokye sacarācare / yajasva yajñapuruṣamapatyaṃ nāsti te 'nyathā

हिन्दी अर्थ

उत्पन्नः सकलात्पूर्व स्वंतश्य थ्रिया वृतः । सर्वसंसिद्धकाय॑ त॑ दृष्ट्वा विष्टम्भितः स्थित: ॥॥ अजः प्रोबाच विष्णुं तं तनयोउस्मि तव प्रभो। विधत्स्व भाग स्थान च सम लोके सुरोत्तत

English

The vigorous king stayed with her (in all for sixty- four years) spending ten, eight, seven, six, seven, eight, ten and eight years in the beautiful Caitraratha park, on the banks of Gariga, in the excellent forest Nandana, in the extensive Alaka, at the foot of the Gandhamadana mountain* on the peak of the excellent mountain Meru, in the northern Kurus, and in the village Kalapagrama respectively. With great

अध्याय १६९

श्लोक 22

मया दृष्टं महीपाल त्रैलोक्यं दिव्यचक्षुषा ।एवमुक्त्वा गता देवी राजा स्वगृहमागमत्

mayā dṛṣṭaṃ mahīpāla trailokyaṃ divyacakṣuṣā / evamuktvā gatā devī rājā svagṛhamāgamat

हिन्दी अर्थ

एयसुक्तः स दृष्द्वा तु तथ्य प्रोवाच स प्रश्चुः। कृतो यज्ञविभागस्तु यज्ञियहि सुरेस्तथा

English

The present chapter which corresponds to Bd. 3.66, opens with the episode of Pururavas, the founder of the Lunar race and Urvasi, the celestial nymph. This episode gives the background of the famous "Dialogue" sukta in the RV. This romantic story inspired Kalidasa to write his immortal play Vikramorvattya.

अध्याय १६९

श्लोक 23

इयाज यज्ञपुरुषं संजाता कन्यका ततः ।तेजस्विनी रूपवती सर्वलोकमनोहरा

iyāja yajñapuruṣaṃ saṃjātā kanyakā tataḥ / tejasvinī rūpavatī sarvalokamanoharā

हिन्दी अर्थ

अर्वाक्सुतो5सि है देव नाममन्‍्त्रोईसि वे प्रभो । द्वितीयायां तु संभुत्यां लोके रुपाति गभसिष्यसि ॥ ऋषियों ने पूछा--सूत जी ! देव धन्वन्तरि किस प्रकार मनुष्य लोक में उत्पन्न हुए, इस बात को हम लोग जानना चाहते हैं, हमारे इस प्रिय विषय को बतलाइये

English

UrvasI was a Gandharva lady. Forsaking Devas, how did she attain the king, a mere human being? O (sage)' of extensive learning, please explain it to us.

अध्याय १६९

श्लोक 24

देवगन्धर्वलोके ऽपि तादृशी नास्ति कामिनी ।तस्या नाम कृतं पित्रा हर्षात् कामप्रमोदिनी

devagandharvaloke 'pi tādṛśī nāsti kāminī / tasyā nāma kṛtaṃ pitrā harṣāt kāmapramodinī

हिन्दी अर्थ

सूत थोले--ह्विजव॒न्द ! धन्वन्तरि का जन्म-वत्तान्त मैं बतला रहा हूँ, सुनिये । श्राचीनकाल में समुद्र मन्थन के अवसर पर देव धन्वश्तरि का आविर्भाव हुआ था। वे सब से पहले और सभी प्रकार की कान्तियों से समन्वित उत्पन्न हुए थे, इस प्रकार सब प्रकार के ग्रुणों एवं कान्तियों से विभूषित उनके शरीर को देखकर देवगण भौचकक्‍्के रह गयेट“ओर बोल उठे कि “तुम अज हो ।” इसी कारण वश वे अज नाम से

English

She was overwhelmed by the curse of Brahma and therefore had to approach a human being. The beautiful lady (became the wife of) Aila Pururavas under certain stipulated conditions.

अध्याय १६९

श्लोक 25

ततः कालेन ववृधे रूपेणास्तम्भयज्जगत् ।हंसलीलागतिः सुभ्रूः स्तनभारावनामिता

tataḥ kālena vavṛdhe rūpeṇāstambhayajjagat / haṃsalīlāgatiḥ subhrūḥ stanabhārāvanāmitā

हिन्दी अर्थ

विख्यात हुए । तदनन्तर अज ने विष्णु से कहा, प्रभो ! मैं आप का पुत्र हूं, सुरोत्तम ! लोक में हमारे लिये स्थान एवं यज्ञादि में हमारे लिये अंश की व्यवस्था कोजिये! ।९-११। अज के ऐसा कहने पर प्रभु विष्णु ने अज की ओर देखकर ये तथ्यपूर्ण बातें कहीं, है देव ! यज्ञ के विधान बनानेवाले देवताओं ने यज्ञादि में अंधों के विभाग आदि की व्यवस्था पहले ही से बना दी है, महर्षियों द्वारा वेदों में उतके लिये विधान युक्त हवन करने की प्रक्रिया जादि भी निर्धारित हो चुकी है, तुम बाद में उत्पन्न होनेवाले पुत्र हो, अतः हवनादि में उन देवताओं के साथ, जिनके लिये अंश प्राप्त करने की व्यवस्था बंध च॒की है, तुम्हें समानता नहीं प्राप्त करा सकता । हे समर्थ ! तुम केवल नाम से ही मंत्र रूप हो । दूसरे जन्म में तुम लोक में ख्याति प्राप्त करोगे। गर्भ में हो तुम्हें अणिमा आदि सिद्धियों की प्राप्ति होगी । परम प्रभावशालिन् ! उसी शरीर से तुम्हें देवषण की भी प्राप्ति होगी।

English

In order to redeem herself from the evil effects of the curse, she stipulated that she should not see him naked except at the time of sexual intercourse or when swayed with passionate love.

अध्याय १६९

श्लोक 26

रक्तमाल्याम्बरधरा कुण्डलाभरणोज्ज्वला ।दिव्यानुलेपनवती सखीभिः सा सुरक्षिता

raktamālyāmbaradharā kuṇḍalābharaṇojjvalā / divyānulepanavatī sakhībhiḥ sā surakṣitā

हिन्दी अर्थ

उस समय द्विजाति गण चरु, घृत, गन्ध भादि द्रब्यों से मंत्रोच्चारण पूर्वक तुम्हारी पूजा करेंगे ।! २-१५। उसके

English

(She said further) "O King, two rams will always be kept near our bed. 1 My sole diet will be ghee which I shall take only once a day.

अध्याय १६९

श्लोक 27

कुचमध्यगतो हारो विद्युन्मालेव राजते ।भ्रमराञ्चितकेशी सा बिम्बोष्ठी चारुहासिनी

kucamadhyagato hāro vidyunmāleva rājate / bhramarāñcitakeśī sā bimboṣṭhī cāruhāsinī

हिन्दी अर्थ

द्वितीये द्वापरे प्राप्ते शौनहोत्रः प्रकाशिराद् । पुत्रकामस्तपस्तेपे न॒पो दीघंतपास्तथा - ॥श्द अजं देव॑ तु पुत्रार्थ ह्यारिराधयिषुनु पः । वरेण चछन्दयामास प्रीतो धन्वन्तरिन पम् तस्प गेहे समुत्पन्नो देवो धन्वन्तरिस्तदा काशिराजों महाराज: सर्बरोगप्रणाशनः

English

If these conditions are fulfilled, O king, as long as you strictly adhere to these stipulations, I shall stay with you. This is our mutual agreement".

अध्याय १६९

श्लोक 28

कर्णान्तप्राप्तनेत्राभ्यां पिबन्तीवाथ कामिनः ।चन्द्रताम्बूलसौरभ्यैराकर्षन्तीव मन्मथम्

karṇāntaprāptanetrābhyāṃ pibantīvātha kāminaḥ / candratāmbūlasaurabhyairākarṣantīva manmatham

हिन्दी अर्थ

आयुर्वेद भरद्वाजश्रकार सभिषविक्षयम् । तमष्टधा पुनव्यंस्थ शिष्येस्यः प्रत्यपादयत्

English

The king scrupulously adhere to her conditions. Thus that beautiful lady stayed with Pururavas.

अध्याय १६९

श्लोक 29

कम्बुग्रीवा चारुमध्या ताम्रपादाङ्गुलीनखा ।निम्ननाभिः सुजघना रम्भोरू सुदती शुभा

kambugrīvā cārumadhyā tāmrapādāṅgulīnakhā / nimnanābhiḥ sujaghanā rambhorū sudatī śubhā

हिन्दी अर्थ

धन्वन्तरिसुतश्रापि केतुमानिति विश्वुतः अथ केतुमतः पुत्रो विप्रो भीमरथो नृपः ॥ का एतस्मिन्नेव काले तु पुरी वाराणसी पुरा। शुन्यां विवेशवामास क्षेमको नाम राक्षस: . २४

English

Deluded by her curse, UrvasI became a human lady and stayed with him devotedly for sixty-four years. The Gand- harvas became worried due to this.

अध्याय १६९

श्लोक 30

मातापितृसुहृद्वर्गे क्रीडानन्दविवर्धिनी ।एकस्मिन्दिवसे बाला सखीवृन्दसमन्विता

mātāpitṛsuhṛdvarge krīḍānandavivardhinī / ekasmindivase bālā sakhīvṛndasamanvitā

हिन्दी अर्थ

बाद तुम आयुर्वेद का उद्धार करोगे, यह सब बातें अवदय घटित होंगी । इन्हीं के लिये पद्ययोनि ब्रह्माजी ने तुम्हारी सृष्टि पृवंकाल में को है। द्वितीय द्वापर युग में तुम आविर्भूत होगे--इसमें कोई सन्देह नहीं है।' उस समय ऐसा वरदान देकर भगवान् विष्णु अन्तहित हो गये ।8६-१७। द्वितीय द्वापर युग में काशिराज सुनहोन्न (सुतहोत्र) के वंश में उत्पन्त होनेवाले राजा दीघंतपा ने पुत्र प्राप्ति की कामना से तपस्या को थी। उस तपस्या में राजा ने

English

Urvasi, as her name indicates, seems to have hailed from the ancient central Asian town Ur. It appears that fashionable ladies from Ur had a fascination for rams in the fourth millennium B.G. In his excavation at Ur, Sir Leonard Wooley discovered in a queen's tomb of 3300 B.G. a pair of rams, "beautifully and intricately made. Their bodies were covered with fleece of shell....their heads and legs were of gold" (quoted on in A. J. Karandikar's introduction to his Marathi book Background of the Mahabharata —Mahabhdratdci PdrSvabhdmi 9 Poona, 1980. This fascination for rams may be the cause of the inclusion and importance attached to this term in the marriage-contract between Pururavas and UrvaSi.

अध्याय १६९

श्लोक 31

चन्दनागरुतांबूलधूपसौमनसाञ्चिता ।गृहीत्वा पुष्पधूपादि गता देवीप्रपूजने

candanāgarutāṃbūladhūpasaumanasāñcitā / gṛhītvā puṣpadhūpādi gatā devīprapūjane

हिन्दी अर्थ

पुत्र के लिये उन्हीं अज देव की आराधना की थी प्रयत्न होकर घन्वन्तरि ने राजा दीर्घतपा को वरदान देने की राजा बोले--भगवन् ! यादि आप मेरे ऊपर प्रसन्न हैं, तो आप ही मेरे धर्मंशाली पुत्र के रूप में उत्पन्त हों ।' देव धन्वन्तरि राजा की प्राथंना स्वीकार कर बहीं अन्तंधान हो गये । तत्पश्चात् वरदान के अनुसार द्वितीय द्वापर युग में देव धन्वन्तरि राजा दीघंतपा के पुत्र रूप में उत्पन्न हुए बाद में चलकर वे महाराजाधिराज, काशिराज सभी रोगों के विनाश करनेवाले हुए।२०-२१। भरद्वाज ऋषि ने ओषधियों की.

English

Then the foremost of the eloquent ones (Gnndhar.

अध्याय १६९

श्लोक 32

तडागतट उत्सृज्य भूषणान्यङ्गवेष्टकान् ।चक्रुः सरसिताः क्रीडां जलमध्यगतास्तदा

taḍāgataṭa utsṛjya bhūṣaṇānyaṅgaveṣṭakān / cakruḥ sarasitāḥ krīḍāṃ jalamadhyagatāstadā

हिन्दी अर्थ

समस्त प्रक्रियाओं के साथ आयुर्वेद का प्रणयन किया था राजा ने उसी को पुनः आठ भागों में विभक्तकर अपने शिष्यों को उसकी शिक्षा दी थी। धन्वन्तरि के पुत्र केतुमान् नाम से विख्यात हुए, केतुमान् के पुत्र परम प्रताप शाली राजा भोमरथ हुए । वही राजा भीमरथ वाराणसी के परम प्रसिद्ध राजा दिवोदास के नाम से विख्यात हुए । प्राचीन काल में इसी राजा के राज्य काल में वाराणसी पुरी सूनी हो गई थी और उसमें क्षेमक नामक

English

Then the Gandharvas took away the second ram as well. When the second ram was taken away, the queen spoke

अध्याय १६९

श्लोक 33

क्रीडन्तीं तामवेक्ष्याथ ससखीं विमले जले ।राक्षसः शम्बरो नाम श्येनरूपेण चागमत्

krīḍantīṃ tāmavekṣyātha sasakhīṃ vimale jale / rākṣasaḥ śambaro nāma śyenarūpeṇa cāgamat

हिन्दी अर्थ

राक्षस घुस आया था ।३२२-२४। प्राचीत काल में महाव पराक्रमशाली निकुम्भ ने वाराणसी पूरी को यह शाप वाराणसी किमथ॑ तां निकुम्भः शप्तवान्पुरा । निकुम्भश्वापि धर्मात्मा सिद्धक्षेत्र शशाप यः

English

"O Lord, O king, my sons are taken away as though they are the sons of a helpless woman". Thus taunted the king got up and rushed out (though he was) naked.

अध्याय १६९

श्लोक 34

गृहीता जलमध्यस्था तेन सा काममोदिनी ।खमुत्पपात दुष्टात्मा गृहीत्वाभरणान्यपि

gṛhītā jalamadhyasthā tena sā kāmamodinī / khamutpapāta duṣṭātmā gṛhītvābharaṇānyapi

हिन्दी अर्थ

एतस्मिन्नेव काले तु कृतदारों महेश्वरः । देव्याः स प्रियकामस्तु बसानः श्वशुरान्तिके २९ देवाज्ञया पारिषदा विश्वरूपास्तपोधना: । पूर्वोक्ते रूपविशेषस्तोषयन्ति महेश्वरीमू ३० हृष्यति तैमंहादेवों मेना नेव तु हृष्यति । जुगुप्सते सा नित्य॑ च देव॑ देवों तथव च ३१

English

The king rushed out seeking the sheep taken away by the Gandharvas, whereupon a great Maya (i lusion) was produced by them. The great palace became illuminated sud denly and she saw the naked king. On seeing the king naked, the Apsara lady (Urvasi) who could assume any form she wished, vanished (from there). On realising that she had vanished, the Gandharvas abandoned the rams there and disappeared themselves.

अध्याय १६९

श्लोक 35

वायुमार्गं गतः सो ऽथ कामिन्या सह भारत ।अपतन्कुण्डलादीनि यत्र तोये महामुनिः

vāyumārgaṃ gataḥ so 'tha kāminyā saha bhārata / apatankuṇḍalādīni yatra toye mahāmuniḥ

हिन्दी अर्थ

के कर .ॉन्‍मण-न«भ-- दिया था कि यह वाराणसी एक सहस्र वर्ष तक सूनी रहेगी ऐसी बात उसने बार-बार कही थी उसके इस प्रकार के शाष देने पर नरफपति दिवोदास ने इस वाराणसी पुरी को छोड़कर अपनी मनोहर राजधानी गोमती नदी के तट पर बसाई थी ।२५-२६। ु

English

On seeing the abandoned rams, the king, the lord, took them with him and returned. Unable to see her there, the king became extremely dejected and lamented.

अध्याय १६९

श्लोक 36

माण्डव्यो नर्मदातीरे काष्ठवत्संजितेन्द्रियः ।लीनो माहेश्वरे स्थाने नारायणपदे परे

māṇḍavyo narmadātīre kāṣṭhavatsaṃjitendriyaḥ / līno māheśvare sthāne nārāyaṇapade pare

हिन्दी अर्थ

ऋषियों ने पूछाः-- सूत जो ! प्रचीनकाल में निकुंभ ने वाराणसी को क्‍यों शाप दिया था। परम धर्मात्मा होकर भी उसने सिद्ध क्षेत्र वाराणसी को भला क्‍यों शाप दिया ?

English

Seeking her here and there, the king roamed over The lady of splendid evebrows saw the king not very far. Urvasi then spoke to her friends: "Here is that excellent man with whom I lived." She pointed out che king to them. Then those ladies, the Apsaras (with five braids of hair) appeared in front (of him).

अध्याय १६९

श्लोक 37

तस्य चानुचरो भ्राता भ्रातुः शुश्रूषणे रतः ।तपोजपकृशीभूतो दध्यौ देवं जनार्दनम्

tasya cānucaro bhrātā bhrātuḥ śuśrūṣaṇe rataḥ / tapojapakṛśībhūto dadhyau devaṃ janārdanam

हिन्दी अर्थ

सतत बोलेः--राजधि दिवोदास वाराणसी नगरी में निवास करता था, उस मनोहर नगरी में वह अपने समय का एक मद्दान् शासक एवं परमतेजस्वी राजा था ।२८५। इसी अवधि में महेश्वर शिव ने पावती के साथ पत्नी सम्बन्ध स्थापित किया था और देवी को प्रसन्‍न करने की नीयत से वे दवशुर हिंमवान् के ही घर में निवास करते थे ।२९। महादेव की आज्ञा से उनके पाषंदगण, जो अनेक स्त्ररूप धारण करनेवाले, किन्तु महान् तेजस्वी थे, पूर्व में कहे गये विचित्र विचित्र रूपों को धारण कर महेश्वरी को प्रसन्‍न किया करते थे। उनके इस व्यापार से महादेव जी प्रसन्‍न होते थे किन्तु मेना को इससे प्रसन्नता नहीं होती थी । महादेव ओर पावंती दोनों कौ वह मन में सदा भर्त्सना किया करती थीं ।३०-३१।॥ एक बार उन्होंने पावती से कहा भी, निष्पापे ! तुम्हारे पति महेश्वर हमारे यहाँ नित्य प्रति अनाचार किया करते हैं ।' मेरी समझ में तो वे एक परम अकिचन

English

On seeing her (Urvasi) the king was delighted. He began to lament in diverse ways, "o cruel lady, come (unto me). Stay willingly, stand by your words."

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 169
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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