Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
180
अध्याय 180 / 232

Adhyaya 180

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अध्याय १८०

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे गौतमेश्वरतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम एकोनाशीत्यधिकशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १८० श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेन्महीपाल दशाश्वमेधिकं परम् ।तीर्थं सर्वगुणोपेतं महापातकनाशनम्

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe gautameśvaratīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma ekonāśītyadhikaśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 180 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gacchenmahīpāla daśāśvamedhikaṃ param / tīrthaṃ sarvaguṇopetaṃ mahāpātakanāśanam

हिन्दी अर्थ

ठंप० बायुंपुराणम तां श्रुत्वा व्यथितों वाणों तदा कंसो वधामतिः। निष्क्रम्य (ष्कृष्य ) खड्गं तां कन्यां हन्तुकामो5भवत्तदा

English

The sons were Dcvaka and Ugrasena. Both of them were brilliant as if born of divine womb. Heroic sons compar¬ able to Devas were born to Dcvaka.

अध्याय १८०

श्लोक 2

यत्र गत्वा महाराज स्नात्वा सम्पूज्य चेश्वरम् ।दशानामश्वमेधानां फलं प्राप्नोति मानवः

yatra gatvā mahārāja snātvā sampūjya ceśvaram / daśānāmaśvamedhānāṃ phalaṃ prāpnoti mānavaḥ

हिन्दी अर्थ

तमुबाच सहाबाहुवंस॒देव: प्रतापवान् । उग्रसेनात्मजं कंस सोहृदात्प्रणयेन च

English

They were Devanarhdeva, Sudeva and Devaranjita. Their sisters were seven whom he gave to Vasudeva.

अध्याय १८०

श्लोक 3

युधिष्ठिर उवाच: अश्वमेधो महायज्ञो बहुसम्भारदक्षिणः ।अशक्यः प्राकृतैः कर्तुं कथं तेषां फलं लभेत्

yudhiṣṭhira uvāca: aśvamedho mahāyajño bahusambhāradakṣiṇaḥ / aśakyaḥ prākṛtaiḥ kartuṃ kathaṃ teṣāṃ phalaṃ labhet

हिन्दी अर्थ

वसुदेवश्च ता भार्यासवाप्य मुदितो5भवत् । कसश्र्वास्यावधीत्पुत्रान्पापकर्मा बुथासतिः क एव वसुदेवश्य देवको च यशस्विनो । नन्‍्दगोपस्तु कस्त्वेष यशोदा व महायशा: ॥। यो विष्णु जनयामास या चन॑ चाम्यवर्धयत्

English

They (the sisters) were Vrkadeva, Upadeva, Devaraksita, Srldeva, Santideva, Mahadeva and DevakI who was the seventh. She was very beautiful to look at. Ugrasena had nine sons, the eldest of whom was Kamsa.

अध्याय १८०

श्लोक 4

अत्याश्चर्यमिदं तत्त्वं त्वयोक्तं वदता सता ।यथा मे जायते श्रद्धा दीर्घायुस्त्वं तथा वद

atyāścaryamidaṃ tattvaṃ tvayoktaṃ vadatā satā / yathā me jāyate śraddhā dīrghāyustvaṃ tathā vada

हिन्दी अर्थ

पुरुष: कश्यपस्पा55सचन्नादित्यास्तु स्त्रियस्तथा । अथ कामान्महाबाहुर्देवक्या: समवर्धयत् (२३०

English

The others were Nyagrodha, Sunama, Kadvasahku, Bhumaya, Sutanu, Rastrapala, Yuddhatusta and Supustiman.

अध्याय १८०

श्लोक 5

मार्कण्डेय उवाच: इदमाश्चर्यभूतं हि गौर्या पृष्टस्त्रियम्बकः ।तत्ते ऽहं सम्प्रवक्ष्यामि पृच्छते निपुणाय वै

mārkaṇḍeya uvāca: idamāścaryabhūtaṃ hi gauryā pṛṣṭastriyambakaḥ / tatte 'haṃ sampravakṣyāmi pṛcchate nipuṇāya vai

हिन्दी अर्थ

हो, उसी के सातवें गर्भ से तुम्हारी मृत्यु होगी ।३११७-२२१। इस देवी वाणी को सुनकर कंस को बहुत ही खेद हुआ और उस मूल ने तुरन्त म्यान से तलवार खींचकर देवकी को मारने की इच्छा प्रकट की। प्रताप- हाली महाबाहु वसुदेव ने ऐसी स्थिति देख उम्रसेन के पुत्र कंस से परम सोहाद तथा प्रेम पृ्व॑क इस प्रकार निवेदन किया, यादवनस्दन ! क्षत्रिय कभी किसी स्त्री का संहार नहीं करते, इस कार्य के लिये मैं एक उपाय देख रहा हूँ ! पृथ्वीपति कंस ! इस तुम्हारी बहिन देवकी के सातवें गर्भ से जो सन्तान उत्पन्न होगा, उसे मैं तुम्हें दे दूंगा, उस समय उसका चाहे जो करना है विपुल दान करनेवाले ! कंस ! तुम इस समय भी जो चाहे कर सकते हो । इसके सातवें गर्भ की बात क्या मैं इसके समस्त गर्भों को तुम्हें दे दूंगा-इसे सच सच समझो । है नर श्रेष्ठ ! मेरी यह बात कदापि मिथ्या न होगी ।! वसुदेव द्वारा इस प्रकार

English

Their sisters were live: Karmavati, Dharmavati, Sataiiku, Rastrapala and the comely lady Kahva.

अध्याय १८०

श्लोक 6

पुरा वृषस्थो देवेश ह्युमया सह शङ्करः ।कदाचित्पर्यटन्पृथिवीं नर्मदातटमाश्रितः

purā vṛṣastho deveśa hyumayā saha śaṅkaraḥ / kadācitparyaṭanpṛthivīṃ narmadātaṭamāśritaḥ

हिन्दी अर्थ

अनुनय विनय पृूवक कहे जाने पर कंस ने देवकी के समस्त पुत्रों को मारने की बात स्वीकार कर ली और देवकी को छोड़ दिया । वसुदेव अपनी पत्नी देवकी को जीती प्राप्त कर परम प्रसन्न हुए। इसी कारण से पापात्मा मूर्ख कंस देवकी के समस्त पुत्रों का संहार करता था ।३२२-२२८। द

English

Ugrasena, who was born of Kukura family and had a large number of children, was famous.

अध्याय १८०

श्लोक 7

दशाश्वमेधिकं तीर्थं दृष्ट्वा देवो महेश्वरः ।तीर्थं प्रत्यञ्जलिं बद्ध्वा नमश्चक्रे त्रिलोचनः

daśāśvamedhikaṃ tīrthaṃ dṛṣṭvā devo maheśvaraḥ / tīrthaṃ pratyañjaliṃ baddhvā namaścakre trilocanaḥ

हिन्दी अर्थ

ऋषितृु न्‍द् बोौले--सूत जी ये बसुदेव और ननन्‍द गोप कौंन थे ? जिन्होंने भगवान् विष्णु को जन्म दिया ? यक्षस्विनी देवक्ी कौन थीं ? ओर महान् यशस्विती यशोदा कौन थीं? जिन्होंने भगवात् का पालन- पोषण किया--इसे हम लोग सुनना चाहते हैं

English

Bhajamana's sons were Rathimukhya, Viduratha Rajyadhideva, Sura and Vidura.

अध्याय १८०

श्लोक 8

कृताञ्जलिपुटं देवं दृष्ट्वा देवीदमब्रवीत्

kṛtāñjalipuṭaṃ devaṃ dṛṣṭvā devīdamabravīt

हिन्दी अर्थ

सूत बोले--ऋषिव॒न्द ! ये नस्दादि पुरुष कश्यप के और यशोदा आदि स्त्ियाँ आदिति कौ

English

The sons of Sura were more powerful. They were Vata, Nivata, Sonita, Svetavahana, Sami, Gadavarma, Nidata, Sakra and Sakrajit. Sami's son was Pratjksipta and his son was Svayambhoja. Hrdika was born of Svayambhoja. Hpdika's ten sons were all of terrible exploits.

अध्याय १८०

श्लोक 9

देव्युवाच: किमेतद्देवदेवेश चराचरनमस्कृत ।प्रह्वनम्राञ्जलिं बद्ध्वा भक्त्या परमया युतः

devyuvāca: kimetaddevadeveśa carācaranamaskṛta / prahvanamrāñjaliṃ baddhvā bhaktyā paramayā yutaḥ

हिन्दी अर्थ

अचरत्स महीं देव: प्रविष्टो मानुषों तनुम् । मोहयन्सवंभूृतानि योगात्मा योगसायया नष्टे धर्में तदा जज्ञे विष्णुव धिणकुले स्वयम् । कतु धमंव्यवस्थानमसुराणां प्रणाशनम्

English

Krtavarma was the eldest and Satadhanva was the middle one. The other sons were Devarha (Dcvabahu in Bd. P.), Vanarha, Bhisak, Dvaitaratha, Sudanta, Dhiyanta, Nakavan and Kanakodbhava. A scholarly son Kamalabarhisa was born to Devarha.

अध्याय १८०

श्लोक 10

एतदाश्चर्यमतुलं सर्वं कथय मे प्रभो

etadāścaryamatulaṃ sarvaṃ kathaya me prabho

हिन्दी अर्थ

से (शे) व्या सुदेवी माद्री च सुशीला नाम चापरा। कालिन्दी भित्रविन्दा च लक्ष्मणा जालवासिनी ॥। एवमादीनि देवीनां सह्रनाणि च षोडश । चतुद्ंश तु ये प्रोक्ता गणाश्राप्सरसां दिबि॥

English

His sons were Asamauj in adoplion) to

अध्याय १८०

श्लोक 11

ईश्वर उवाच: प्रत्यक्षं पश्य तीर्थस्य फलं मा विस्मिता भव ।वियत्स्था मे भुविस्थस्य क्षणं देवि स्थिरा भव

īśvara uvāca: pratyakṣaṃ paśya tīrthasya phalaṃ mā vismitā bhava / viyatsthā me bhuvisthasya kṣaṇaṃ devi sthirā bhava

हिन्दी अर्थ

विचिन्त्य देव: शक्नण विशिष्टास्त्विह मेषिताः पत्म्पर्थ बासुदेवस्य उत्पन्ना राजवेश्मसु । एताः पत्न्यो महाभागा विष्वक्सेनस्य विश्लुताः

English

Ten m (• •, ura. The mighty-armed Vasudeva

अध्याय १८०

श्लोक 12

एवमुक्त्वा तु देवेशो गौरवर्णो द्विजो ऽभवत् ।क्षुत्क्षामकण्ठो जटिलः शुष्को धमनिसंततः

evamuktvā tu deveśo gauravarṇo dvijo 'bhavat / kṣutkṣāmakaṇṭho jaṭilaḥ śuṣko dhamanisaṃtataḥ

हिन्दी अर्थ

भानुभोमरिका चेव ताम्रपर्णो जरन्धमाः । सत्यभामासुतानेताअजाम्बवत्याः प्रजा: शूणु ३२४०

English

Prtha gave birth to three sons who were brilliant like fire. They were heroes with none to match them in the whole world. They were equal to Indra in exploit.

अध्याय १८०

श्लोक 13

उपविश्य भुवः पृष्ठे सुस्वरं मन्त्रमुच्चरन् ।क्रमप्रियो महादेवो माधुर्येण प्रमोदयन्

upaviśya bhuvaḥ pṛṣṭhe susvaraṃ mantramuccaran / kramapriyo mahādevo mādhuryeṇa pramodayan

हिन्दी अर्थ

अंदभूत थीं। महाबाहु भगवान् ऋंष्ण ने देवको के मनोरथों को पूर्ण किया था। ये देवाधिदेव यगात्मा भगवान् विष्णु अपनी योगमाया से संसार के समस्त जीवों को मोहित कर धर्म के नष्ट हो जाने पर स्वयमेव वृष्णि कुल में प्रादुर्भूत हुए थे । मनुष्य शरीर धारण कर पृथ्वी पर धर्म की व्यवस्था एवं असूुरों के विनाश के लिये अवतरित हुए थे । उत्पन्न होकर उन्होंने रकम की कन्या रुक्मिणी का हरण किया। नग्नजितु की कन्या सत्या, सत्राजित की कन्या सात्राजिती सत्यभामा, जाम्बवान् की पुत्री जाम्बवन्ती, रोहिणी, संव्या, सुदेवी, माद्री, सुशीला, कालिन्दी, मित्रविन्दा, लक्ष्मणा जालवासिनी आदि सोलह सहस्र देवियाँ उनकी स्त्री थीं। स्वगें में परम सुन्दरी अप्सराओं के जो चौदह गण कहे गये हैं, उन्हें देवताओं के साथ सम्मति कर इन्द्र ने मत्यंलोक में भेज दिया था ।१२३०-२३५। वासुदेव की पत्नी होने के लिए वे राजाओं के घर में उत्पन्न हुईं । विष्वकसेन की ये

English

Sucandra and Vasurupa according to Bd.P. v. 143.

अध्याय १८०

श्लोक 14

श्रुत्वा तां मधुरां वाणीं स्वयं देवेन निर्मिताम् ।संभ्रान्ता ब्राह्मणाः सर्वे स्नातुं ये तत्र चागताः

śrutvā tāṃ madhurāṃ vāṇīṃ svayaṃ devena nirmitām / saṃbhrāntā brāhmaṇāḥ sarve snātuṃ ye tatra cāgatāḥ

हिन्दी अर्थ

महाभाग्यशालिनी पत्नियाँ परम प्रख्यात थीं। रुक्मिणी में प्रदुम्त, चारुदेष्ण, सुदेष्ण, शरभ, चार, चारुभद्र,

English

Vasudeva's unparallcded handsomeness is recorded in Jaina works also. According to Jaina records Vasudeva was banished by his father, as complaints were lodged to him by citizens of Mathura about the seductive effect of his beauty on their women. A Prakrit work called Vasitdeva-Hi$d 1 {circa A.D. 600) makes Vasudeva a hero whose wanderings were a marriage campaign. The work, however, is a Prakrit version of Gunadhya's Paisaci Brhat-Katha, though here the hero is Vasudeva instead of Naravahanadalta.

अध्याय १८०

श्लोक 15

नित्यक्रिया च सर्वेषां विस्मृता श्रुतिविभ्रमात् ।तं दृष्ट्वा पठमानं तु क्षुत्पिपासाभिपीडितम्

nityakriyā ca sarveṣāṃ vismṛtā śrutivibhramāt / taṃ dṛṣṭvā paṭhamānaṃ tu kṣutpipāsābhipīḍitam

हिन्दी अर्थ

जरान्धक, ताम्रवक्षा, भौमरिं, जरन्धम ये पुत्र तथा भानु, भोभरिका, ताम्रपर्णी और जरन्धमा नामक चार कन्याएँ गरुड़ष्वज भगवान् के संयोग से सत्यभामा में उत्पन्न हुईं । अब जाम्बवती की सन्‍्ततियों का विवरण सुनिये भद्र, भद्रगुप्त, भद्वविन्दु, भट्रबाहु ये पुत्र तथा भद्गावती नामक एक क्या जो संबोधनी नाम से

English

Prtha gave birth to Yudhisthira from Dharma, to Ultima (Vrkodara) from Maruta and to Arjuna (Dhanahjaya) from Indra.

अध्याय १८०

श्लोक 16

द्विजो ऽन्यमन्त्रयत् कश्चिद् भक्त्या तं भोजनाय वै ।प्रसादः क्रियतां ब्रह्मन्भोजनाय गृहे मम

dvijo 'nyamantrayat kaścid bhaktyā taṃ bhojanāya vai / prasādaḥ kriyatāṃ brahmanbhojanāya gṛhe mama

हिन्दी अर्थ

कमरे वायुपुराणम्

English

It is well-known that Nakula and Sahadeva were bom of Madravatl. Both of them were endowed with hand¬ some features and inherent strength and good qualities.

अध्याय १८०

श्लोक 17

अद्य मे सफलं जन्म ह्यद्य मे सफलाः क्रियाः ।सर्वान्कामान्प्रदास्यन्ति प्रीता मे ऽद्य पितामहाः

adya me saphalaṃ janma hyadya me saphalāḥ kriyāḥ / sarvānkāmānpradāsyanti prītā me 'dya pitāmahāḥ

हिन्दी अर्थ

सड्ग्रामजिच्च शतनित्तथेव च सहस्नजित् । एते पुत्राः सुदेब्याश्य विष्वक्सेतस्थ कीतिताः.. ४२४२ बुकों वृकश्वो वुकजिद्वजिनो च सुराड्धना। मित्रबाहुः सुनोथश्व नाग्तजित्या: प्रजास्त्विहू एबमादीनि पुन्नाणां सहख्ाणि निबोधत। प्रयुतं तु समाख्यातं वासुदेवस्य ये सुताः ३२४४ अथधुतानि तथा5ष्टो वर शुरा रणविशारदाः। जनाद॑नस्य बंशो वः कोतितोडयं यथातथम्ू. १३२४५ बृहतो नतंकोन्नेयो सुनये सडुगता तथा। कन्या स बृहृदुक्थस्य शौनेयस्य महात्मभः ४७२४६

English

The powerful and heroic lord of Karusa named Dantavaktra was born of Srutadevaas the son of Vrddhasarman.

अध्याय १८०

श्लोक 18

त्वयि भुक्ते द्विजश्रेष्ठ प्रसीद त्वं ध्रुवं मम ।एवमुक्तो महादेवो द्विजरूपधरस्तदा

tvayi bhukte dvijaśreṣṭha prasīda tvaṃ dhruvaṃ mama / evamukto mahādevo dvijarūpadharastadā

हिन्दी अर्थ

अवगाहश्न चित्रश्न॒ श्रश्रित्रवरश्य यः। चित्रसेन: सुतभ्रास्य कन्या चित्रवती तथा २४८ तुम्बश्न तुम्बबाणश्र जनस्तम्बस्थ तावुभौ । उपाजस्य स्मृतो दो तु वजच्नारः क्षिप्र एबच..

English

Santardana was born of Srutaklrti, the wife of the prince of Kekaya. Cekitana and Brhatksatra were the other two mighty (sons). Brothers Vinda and Anuvinda who were very powerful, were born of the king of Avanti (?) as sons of Rajadhidevl.

अध्याय १८०

श्लोक 19

प्रहस्य प्रत्युवाचेदं ब्राह्मणं श्लक्ष्णया गिरा ।मया वर्षसहस्रं तु निराहारं तपः कृतम्

prahasya pratyuvācedaṃ brāhmaṇaṃ ślakṣṇayā girā / mayā varṣasahasraṃ tu nirāhāraṃ tapaḥ kṛtam

हिन्दी अर्थ

“म्रीन्द्रसेनो भूरिश्व गवेषस्थ सुतावुभो । युधिष्ठिरस्थ कन्या तु सुतनुर्नाम विश्वुता २५० काश्मा सुपाश्व तनय॑ जज्ञे साम्बा तरस्विनम् । तिस्नः कोटघस्तु पुत्राणां यादवानां महात्मनाम् २५२

English

Yadusrava and Rujakanya were his younger brothers. Vasudeva had thirteen excellent ladies as wives. Of them Pauravi, RohinI, Madira, Apara, Bhadra, Vaisakhi and DevakI the seventh (were the chief queens). Two lady attendants Sugandhi and Vanaraji and two others (also were married to him). Rbhinl and Pauravi were the daughters of Valmlka. 2

अध्याय १८०

श्लोक 20

इदानीं तु गृहे तस्य करिष्ये द्विजसत्तम ।दशभिर्वाजिमेधैश्च येनेष्टं पारणं तथा

idānīṃ tu gṛhe tasya kariṣye dvijasattama / daśabhirvājimedhaiśca yeneṣṭaṃ pāraṇaṃ tathā

हिन्दी अर्थ

विश्यात थी, इन्हें जाम्बवती की सन्ततियाँ जानना चाहिए ।२३६-२४१। संग्रामजित्, शतजितू और सहृद्नजितू --ये सुदेवी के पुत्र विष्वकूसेव के संयोग से उत्पन्न कहे जाते हैं। बक, बृकश्व, बृकजित्, वुजिनो, सुराज्भना, मित्रबाहु ओर सूनीय ये नग्लजित् की पुत्री सत्या की सस्तानें हैं । इसी प्रकार भगवान् वासुदेव की पुत्रों की संख्या सहलों तक समझिये, कुछ लोग उनकी संख्या लाक्षों तक कहते हैं। इनमें दस सहन और आठ

English

The blessed lady, the eldest wife of Anakadundu- bhi, RohinI gave birth to eight children. The eldest son was Rama. The others were Sarana, Nisava, Durdama, Damana, Subhra, Pindaraka and Kusltaka. She had a daughter named Citra.

अध्याय १८०

श्लोक 21

इत्युक्तो देवदेवेन ब्राह्मणो विस्मयान्वितः ।उत्तमाङ्गं विधुन्वन्वै जगाम स्वगृहं प्रति

ityukto devadevena brāhmaṇo vismayānvitaḥ / uttamāṅgaṃ vidhunvanvai jagāma svagṛhaṃ prati

हिन्दी अर्थ

भहान शूरवीर तथा रणविशारद थे। भगवान् जनादंन के वंश का विवरण जंसा मुझे ज्ञाव था, आप लोगों से बतला चुका । २४२-२४५॥ महान् पराक्रमी शिनिवंशोय राजा बृहदुकूथ की कन्या बृहती, जिसका नतेंकोन्नेयी दूसरा नाम है, सुनय के साथ विवाह सूत्र में सम्बद्ध हुई। उसके तोन पुत्र युद्धस्थल में परम प्रख्यात हुए, उनके नाम थे, अंगद, कुमुद और इवेत । इवेता नामकी एक कव्या भी थी मवगाहू, चित्र, ओर शूर चित्रवर नामक जो वृष्णि वंशी थे, उनमें चित्रवर के पुत्र चित्रसेन हुए और उनकी कन्या चित्रवती हुई । तुम्ब और तुम्बवान् ये दो जनस्तम्ब के पुत्र थे। उपाज़ के वज्जार ओर क्षिप्र नामक दो पुत्र कहे जाते हैं। गवेष के भूरीद्धसेन और भूरि नामक दो पुत्र हुए। युधिष्ठिर की परम यक्षस्विनी सृतनु नामक जो कन्या थी, उसमें महान् यशस्वी अदवसुतवज्ञ की उत्पत्ति हुई। बज के पुत्र प्रतिबाहु हुए, प्रतिबाहु के पुत्र सुचार हुए ॥२४६-

English

His grandsons born to Rama were famous as Nisila and Utsuka. Rama had other sons as well: Parsvl, Parsvanandl, Sisu, Satyadhrti, Mandabahya, Ramana, Girika, Gira, Suklagulma, Gulma and Daridrantaka.

अध्याय १८०

श्लोक 22

एवं ते बहवो विप्राः प्रत्याख्याते निमन्त्रणे ।पुराणार्थमजानन्तो नास्तिका बहवो गताः

evaṃ te bahavo viprāḥ pratyākhyāte nimantraṇe / purāṇārthamajānanto nāstikā bahavo gatāḥ

हिन्दी अर्थ

२५१। काइमा ने सुपाश्व नामक पुत्र को उत्पन्न किया और साम्बा ने तरस्वी नाभक पुत्र को उत्पन्न किया' इस

English

Sarana had five daughters who were bom prior to these. They were Arcismati, Sunanda, Surasa, Suvaca and Satabala. The following are remembered as the sons and grandsons of RohinI: Bhadrasva, Bhadragupti, Bhadra-

अध्याय १८०

श्लोक 23

अथ कश्चिद्द्विजो विद्वान्पुराणार्थस्य तत्त्ववित् ।देवं निमन्त्रयामास द्विजरूपधरं शिवम्

atha kaściddvijo vidvānpurāṇārthasya tattvavit / devaṃ nimantrayāmāsa dvijarūpadharaṃ śivam

हिन्दी अर्थ

इदमर्घ नास्ति ग. पुस्तके । षष्टिशतसहस्राणि वीयंबन्तो महाबलाः । देवांशाः सब एवेह उत्पन्नास्ते महौजसः

English

Bundelkhan<Ja and the adjacent territory from former Central Pro¬ vinces (now the whole of Cedi is included in new Madhya Pra es

अध्याय १८०

श्लोक 24

तथैव सो ऽपि देवेन प्रोक्तः स प्राह तं पुनः ।मनसा चिन्तयित्वा तु पुराणोक्तं द्विजोत्तमः

tathaiva so 'pi devena proktaḥ sa prāha taṃ punaḥ / manasā cintayitvā tu purāṇoktaṃ dvijottamaḥ

हिन्दी अर्थ

देवासुरे हता ये च असुरा वे महातपाः । इहोत्पन्ना मनुष्येषु बाधन्ते सर्वेमानवान् ॥।

English

'Younger sisters of Bahlika* as per Bd. P.V.163.

अध्याय १८०

श्लोक 25

स्मृतिवेदपुराणेषु यदुक्तं तत्तथा भवेत् ।इति निश्चित्य तं विप्रमुवाच प्रहसन्निव

smṛtivedapurāṇeṣu yaduktaṃ tattathā bhavet / iti niścitya taṃ vipramuvāca prahasanniva

हिन्दी अर्थ

इति प्रसुतिब ष्णीनां समासव्यासयोगतः । कीतिता कीतेनाच्चव कोतिसिद्धिमभोप्सितामू इति श्रीमहापुराणे वायुप्रोक्‍्ते विष्णुवंशानुकीत॑नं नाम षण्णवतितमोः्ष्यायः

English

Sauri (i.e. Vasudeva) begot the excellent son KauSika ofVai&khi. He begot six sons of Devaki. They were: Susena, Klrtiman, Tadaya (Udars! in Bd.P.), fhadrasena Yajudaya the fifth, and Bhadravit the sixth. Kamsa killed all of

अध्याय १८०

श्लोक 26

भोभो विप्र प्रतीक्षस्व यावदागमनं पुनः ।इत्युक्त्वा तु द्विजो गत्वा दशाश्वमेधिकं परम्

bhobho vipra pratīkṣasva yāvadāgamanaṃ punaḥ / ityuktvā tu dvijo gatvā daśāśvamedhikaṃ param

हिन्दी अर्थ

प्रकार महाबलज्ञाली यदुवंशियों के कुल में तीन करोड़ सस्तानें उत्पन्न हुईं जिनमें साठ लाख परम बलशाली एवं पशक्रमी थे। दे सब के सब परम तेजस्वी यदुवंशी देवताओं के अंशभूत होकर इस मत्येलोक में उत्पन्न हुए थे। पूर्व देवासर संग्राम में जो असुरगण मारे गये थे, वे ही महान् तपस्था करके पुनः मनुष्य योनि में उत्पन्न हो होकर सब को पीड़ित कर रहे थे उन्हीं सब के विनाश के लिये ये लोग यादव कुल में उत्पन्न

English

Under these circumstances Visnu, the lord of the worlds, lord of the subjects, was born as the long-lived Krsna.

अध्याय १८०

श्लोक 27

स्नानं महालम्भनादि कृतं तेन द्विजन्मना ।जपं श्राद्धं तथा दानं कृत्वा धर्मानुसारतः

snānaṃ mahālambhanādi kṛtaṃ tena dvijanmanā / japaṃ śrāddhaṃ tathā dānaṃ kṛtvā dharmānusārataḥ

हिन्दी अर्थ

हुए । इन परम बलवान् यदुवंधियों के ग्यारह कुल कहे जाते हैं, किस्तु जिस कुल में भगवान् विष्णु प्रादुर्मत दुए, उसी एक वंश का अनुवर्सन शेष सभी वंशों वाले करते रहे । उन सभी वंझों में उत्पन्न होने वाले यदुवंशियों के एक मात्र प्रमाण स्वरूप एवं सर्वेसर्वां भगवान् विष्णु (कृष्ण) हीं थे। उनकी आज्ञा में निरत रहकर इन सब यदुवशियों ने उन समस्त पापामा मनुष्यों का, जो मानव समाज को उत्पीड़ित कर रहे थे, संहार किया । वृष्णिवंशियों की सन्‍्तानों का यह विवरण कहीं संक्षेप में और कहीं विस्तार में मैं आप लोगों से बतला चुका। इसके संकीतंन करने से अभीष्ट कीति एवं सिद्धि की प्राप्ति होती है । जो परम बुद्धिशाली भगवान् कृष्ण के वंश का यह श्रेष्ठ विवरण, जो स्वर्गापवर्ग प्रदान करने वाला तथा महान् पातकों का विनाशक है, पढ़ता है, वह यदि

English

After him was born Subhadra who used to speak pleasantly. She was otherwise known as Kr§na. This girl of the family of Vrsnis named Subhadra became famous as Krsna.

अध्याय १८०

श्लोक 28

संकल्प्य कपिलां तत्र पुराणोक्तविधानतः ।समायात्त्वरितं तत्र यत्रासौ तिष्ठते द्विजः

saṃkalpya kapilāṃ tatra purāṇoktavidhānataḥ / samāyāttvaritaṃ tatra yatrāsau tiṣṭhate dvijaḥ

हिन्दी अर्थ

अपुत्र है तो पुत्र प्राप्त करता है और यदि धन हीन है तो उत्तम सम्पत्ति लाभ करता है

English

The heroic Abhimanyu was born of Subhadra and Partha (Arjuna). Listen and understand the names of the other heroic sons born of Vasudeva and his seven highly for¬ tunate wives.

अध्याय १८०

श्लोक 29

अथागत्य द्विजं प्राह वाजिमेधः कृतो मया ।उत्तिष्ठ मे गृहं रम्यं भोजनार्थं हि गम्यताम्

athāgatya dvijaṃ prāha vājimedhaḥ kṛto mayā / uttiṣṭha me gṛhaṃ ramyaṃ bhojanārthaṃ hi gamyatām

हिन्दी अर्थ

+ अय॑ साधंइलोको5घिक:ः ख. पुस्तके । ल्लिष्एपुल्ना हड॒ पल्‍्म्य्पव्कील्त ल्नस्‍्प

English

The heroic son Bhayasakha was born of Sahadeva. Sarhgadeva gave birth to Tambu. Sauri (thus) begot a son who made the family flourish. Four more sons of his, viz, Upasanga, Vasu, Deva and Raksita were killed by Kamsa. Thus he had ten sons. Kamsa killed all of them.

अध्याय १८०

श्लोक 30

इत्युक्तः शङ्करस्तेन ब्राह्मणेनातिविस्मितः ।उवाच ब्राह्मणं देव इदानीं त्वमितो गतः

ityuktaḥ śaṅkarastena brāhmaṇenātivismitaḥ / uvāca brāhmaṇaṃ deva idānīṃ tvamito gataḥ

हिन्दी अर्थ

मनुष्यप्रकृतीन्देवास्कीत्य मानाज्चिबोधत । संकर्षणो वासुदेवः प्रश्यस्तः साम्ब एवं व

English

Upadeva gave birth to all these blessed sons: Vijaya, Rocana and Vardhamana. (Bd. P adds: Devala.)

अध्याय १८०

श्लोक 31

द्विजवर्य कथं चेष्टा दश यज्ञा महाधनाः

dvijavarya kathaṃ ceṣṭā daśa yajñā mahādhanāḥ

हिन्दी अर्थ

अनिर्द्धभश्र पड्चेते वंशदीराः प्रकीतिताः। सप्तर्षयः कुबेरश्र यक्षो मणिवरस्तथा २ शालकी बदरश्चेव विद्वान्धन्वस्तरिस्तथा । नन्दिनश्व महादेवः शालड्ुगयन उच्यते ॥ आदिदेवस्तदा जिष्णरेभिश्व सह देवतः द ३ ब्रह्मक्षेत्रे युगान्तेषु किमर्थमिह जायते । पुनः पुनर्मनुष्येषु तन्नः प्रत्रहि पृच्छताम् ४ विस्तरेणव सर्वाणि कर्माणि रिपुघातिनः । श्रोतुमिच्छामहे सम्यग्देहैः कृष्ण्य धीमतः .. ४६

English

Vrkadevi gave birth to noble-souled Svagahava. (This lady was known by these names as well) Agahl, Svasa, Sisirayini and Surupa.

अध्याय १८०

श्लोक 32

द्विज उवाच: न विचारस्त्वया कार्यः कृता यज्ञा न संशयः ।यदि वेदाः प्रमाणं तं भुवि देवा द्विजास्तथा

dvija uvāca: na vicārastvayā kāryaḥ kṛtā yajñā na saṃśayaḥ / yadi vedāḥ pramāṇaṃ taṃ bhuvi devā dvijāstathā

हिन्दी अर्थ

सूत बोले-- ऋषिवन्द ! मुनुष्य योनि में जन्म लेने वाले देवताओं का वर्णन कर रहा हूं, सुनिये। सद्भूंण, वासुदेव, प्रश्युम्त, साम्ब एवं अनिरुद्ध ये पाँच यदुवंदा के प्रमुख बीर कहें गये हैं। सातों ऋषि, कुबेर, यक्ष, मणिवर. शालकी, बदर, प्रमविद्वान् घस्वन्तरि, नन्दिन प्रभूति महादेव के अनुचर (१) शालड्रायन आदि देवताओं के साथ आदि देव जिष्णु ये सब देवात्मा हैं

English

Devaki of beautiful nose gave birth to Bhu (Srl- krsna?) as her seventh son. (Afterwards) she gave birth to the blessed Gavcsana, who could fight in battle in wonderfully diverse ways.

अध्याय १८०

श्लोक 33

दशाश्वमेधिकं तीर्थं तथा सत्यं द्विजोत्तम ।यदि वेदपुराणोक्तं वाक्यं निःसंशयं भवेत्

daśāśvamedhikaṃ tīrthaṃ tathā satyaṃ dvijottama / yadi vedapurāṇoktaṃ vākyaṃ niḥsaṃśayaṃ bhavet

हिन्दी अर्थ

ऋ पयो ने कहा--सूत जी ! भगवान् विष्णु किस लिये पृथ्वी पर प्रादुर्भूत होते हैं ? उनके कितने अवतार कहे जाते हैं ? भविष्य में अन्य कितने अवतार होगे ? युगान्त के अवसर पर ब्राह्मण एवं क्षत्रिय जाति में वे किस लिये उत्पन्न होते हैं? वे इस प्रकार बारम्बार मानव योनि में किस लिए. जन्म घारण करते हैं? इसे हम लोग जानना चाहते हैं कृपया कहिये । उन परम बुद्धिमान शत्रुसंहारकारी » सृत उवाचेति नास्ति क. ग. घ. पुस्तकेषु ।

English

Sauri (Vasudeva) begot of Saibya the immutable (economical?) son (Kausika alias Sraddhadeva) who formerly

अध्याय १८०

श्लोक 34

तदा प्राप्तं मया सर्वं नात्र कार्या विचारणा ।एवमुक्तस्तु देवेश आस्तिक्यं तस्य चेतसः

tadā prāptaṃ mayā sarvaṃ nātra kāryā vicāraṇā / evamuktastu deveśa āstikyaṃ tasya cetasaḥ

हिन्दी अर्थ

कर्म णामानृपुव्य च प्राहुर्ावाश्च ये प्रभोः । या चास्य प्रकृति: सूत तां चास्मास्वक्तुमहेँसि

English

Sugandhi and Vanarajl (the servant-maids mentioned before) were also the wives of Sauri. Pundra and Kapila were Vasudeva's sons bom of Sugandhi (Bd.P.v. 186). Of themPundra became a king and Kapila went to the forest.

अध्याय १८०

श्लोक 35

विमृश्य बहुभिः किंचिदुत्तरं न प्रपद्यत ।जगाम तद्गृहं रम्यं पठन्ब्रह्म सनातनम्

vimṛśya bahubhiḥ kiṃciduttaraṃ na prapadyata / jagāma tadgṛhaṃ ramyaṃ paṭhanbrahma sanātanam

हिन्दी अर्थ

कर स भगवास्विष्णुः सुरेष्वरिनिषदनः । वसुदेवकुले धीमान्वासुदेवत्वमागतः ८ अमरेः सूत कि पुण्य पुण्यक्ज्द्ू रले झृतम् । देवलोक॑ समुत्सुज्य मत्येलोकमिहाड्ड्गतः देवमानुषयोतेता सूर्भुवः प्रसवो हरिः । किमर्थ दिव्यमात्मानं मानुषे समवेशयत् १० यश्चक्क॑ वर्तयत्येको मनुष्याणां सनोसयम् । सनुष्ये स कर्थ बुद्धि चक्रे चक्रभूतां बरः (११ गोपायन यः कुरुते जगतां सावंलौकिकम् । स कथ गां गतो विष्णुर्गोपत्वमकरोट्प्रभुः १२ महाभुतानि भूतात्मा यो दधार चकार ह। श्रीगर्भ: स कर्थ गर्भे स्त्रिया भूचरया धृत: ३१३

English

Of the other lady (Vanarajl) Vasudeva had another powerful son who was a foremost wielder of bow. He was a king called Nisada.

अध्याय १८०

श्लोक 36

सम्प्राप्तं तं द्विजं भक्त्या पाद्यार्घ्येण तमर्चयत् ।षड्रसं भोजनं तेन दत्तं पश्चाद्यथाविधि

samprāptaṃ taṃ dvijaṃ bhaktyā pādyārghyeṇa tamarcayat / ṣaḍrasaṃ bhojanaṃ tena dattaṃ paścādyathāvidhi

हिन्दी अर्थ

पेन लोकान्क्रमेजित्वा त्रिभिस्त्रीस्त्रिदशेप्सया । स्थापिता जगतो सार्गास्त्रिवर्गप्रवरास्त्रयः १४ योइस्तकाले जगत्पीत्वा कृत्वा तोयमर्य वपुः । लोकमेकार्ण वे चक्र दृश्यादृश्येन वत्मेना १५

English

Mahabhaga was the famous son of Devarata. They call the son born of Devasravas as one honoured by scholars.

अध्याय १८०

श्लोक 37

ततो भुक्ते महादेवे सर्वदेवमये शिवे ।पुष्पवृष्टिः पपाताशु गगनात्तस्य मूर्धनि ।तस्यास्तिक्यं तु संलक्ष्य तुष्टः प्रोवाच शङ्करः

tato bhukte mahādeve sarvadevamaye śive / puṣpavṛṣṭiḥ papātāśu gaganāttasya mūrdhani / tasyāstikyaṃ tu saṃlakṣya tuṣṭaḥ provāca śaṅkaraḥ

हिन्दी अर्थ

भगवान् के शरीरों से जो-जो कर्म सम्पन्न होते हैं-उत सब को हम भलोी भाँति सनता चाहते हैं । उनके ऐसे कार्यों को क्रमपुर्वंक हमें बतलाइये, उसी तरह उनके अवतारों के विषय में भी क्रमानुसार वर्णन कौजिये, उन स्वेब्यापी भगवान् की प्रवृत्ति के बारे में भी हमें जिज्ञासा है। कपया हमसे बतलाइये महा- महिमामय परम बुद्धिमान् शत्र्संहारकारी वे भगवान् विष्णु किस प्रयोजन कौ सिद्धि के लिये वसुदेव के कुल में उत्पन्न होकर वासुदेव (वसुदेव के पुत्र) की पदवी प्राप्त करते हैं ।४-८॥ है सूत जी ! इस बात को जानने की भी हमें उत्कष्ठा हो रही है कि सर्वदा पुण्यक्र्मों में निरत रहतेवाले देवताओं ने ऐसा कौन-सा पुण्य कर्म किया, जिससे देव लोक को छोड़कर इस मध्यलोक में उन्हें आना पड़ा !९। देवताओं और मनुष्यों को उचित मार्ग पर लगानेवाले, भूर्भूवः आदि लोकों के उत्पत्तिकर्ता भगवान् हरि किस लिये दिव्यग्रुण सम्पन्न

English

Nivarta begot of Asmaki the sons Anadrsti of great fame, Sraddhadeva of great strength and Sakrasatrughna.

अध्याय १८०

श्लोक 38

ईश्वर उवाच: किं ते ऽद्य क्रियतां ब्रूहि वरदो ऽहं द्विजोत्तम ।अदेयमपि दास्यामि एकचित्तस्य ते ध्रुवम्

īśvara uvāca: kiṃ te 'dya kriyatāṃ brūhi varado 'haṃ dvijottama / adeyamapi dāsyāmi ekacittasya te dhruvam

हिन्दी अर्थ

अपनी आत्मा को मानवयोनि में सम्भविष्ट करते हैं ।१०। चक्र घारण क रनेवालों में श्रेष्ठ जो भगवान् अकेले ही संसार के मानवमांत्र के मनरूपी चक्र को सर्वदा परिचालित करते रहते हैं, उन्हें मानव योनि में उसन्न होने की इच्छा क्‍यों हुई ? सर्वत्र व्याप्त रहनैवाले जो भगवान् विष्ण इस समस्त चराचर जगत् की सब प्रकार द से सर्वत्र रक्षा करनेवाले हैं, वे किमलिए इस पृथ्वी पर अवतीर्ण होते हैं? और किस लिए गौओं का

English

(Defective verse) 2 Sradhadeva was well known as the founder of Nisadha (Nisada) (?) kingdom. Ekalavya of great prowess was nurtured and brought up by Nisadas (hunting tribes).

अध्याय १८०

श्लोक 39

ब्राह्मण उवाच: यदि प्रीतो ऽसि मे देव यदि देयो वरो मम ।अस्मिंस्तीर्थे महादेव स्थातव्यं सर्वदैव हि

brāhmaṇa uvāca: yadi prīto 'si me deva yadi deyo varo mama / asmiṃstīrthe mahādeva sthātavyaṃ sarvadaiva hi

हिन्दी अर्थ

वालन फरते हैं? जो भूतात्मा भगवान संसार के समस्त महाभू्तो (पृथ्वी, जल, आकाश, अश्नि एवं वायु) को धारण करनेवाले तथा बनानेवाले हैं, जो लक्ष्मी द्वारा धारण किये जानेवाले हैं, वे एक मत्यलोक- निवासिनी सामान्य गृहिणी के गर्भ में किस लिये आते हैं? जो देवताओं की इच्छा से अपने तीन पर्गों में तीनोँ लोकों को जीत कर जगत् में उत्तम तीनों वर्गों धर्म अर्थ एवं काम अथवा सत्तव, रजस्, तमों गुणों की मर्यादा स्थिर करते हैं, जो अन्त काल में दृश्य और अदृश्य सागों से अपने जलमय शरीर द्वारा समस्त जगत् का पान कर लेने के उपरान्त समस्त लोकों को एक महासमुद्र के रूप में बदल देते हैं।११-१४॥ जो

English

With pleasure Krsna gave his sons Carude§na and Samba who had all praiseworthy characteristics and who had learned the use of miraculous weapons, to Gantjusa who was childless.

अध्याय १८०

श्लोक 40

उपकाराय देवेश एष मे वर उत्तमः ।एवमुक्तस्तु देवेन आरुरोह द्विजोत्तमः

upakārāya deveśa eṣa me vara uttamaḥ / evamuktastu devena āruroha dvijottamaḥ

हिन्दी अर्थ

यथरई् वायुपुराणनु

English

Tantija and Tantimala were Kanaka's own sons. Vasudeva of great exploit gave them to Vastavani who had no child. Sauti gave his heroic sons Sauri and Kausika to him.

अध्याय १८०

श्लोक 41

गन्धर्वाप्सरःसम्बाधं विमानं सार्वकामिकम् ।पूज्यमानो गतस्तत्र यत्र लोका निरामयाः

gandharvāpsaraḥsambādhaṃ vimānaṃ sārvakāmikam / pūjyamāno gatastatra yatra lokā nirāmayāḥ

हिन्दी अर्थ

यः पुराण पुराणात्मा वाराह वपुरास्थितः ददो जित्वा वसुमतीं सुराणां सुरसत्तमः १६ येन सेंह वपुः कृत्वा द्विधा कृत्वा च यत्युनः । पुर्वेदेत्यो महावीयों हिरण्यकशिपुहत: १७ यः पुरा ह्यनलो भुत्वा ओर: संवर्तको विभूः । पातालस्थो5णंवगतः पपौ तोयमयं हविः १८ सहस्नचरणं देवं सहस्नांश सहस्नश: सहस्नशिरसं देवं यमाहुवें युगे युगे १६ नाभ्यरण्यां समुद्भूत यस्य पेतामहं गृहम् । एकार्णबगते लोके तत्पड़/जमपडूजम् ।

English

(Other members of this family were) Tapas, Krod- hanu, Virajas, Syama and Srnjima. Syama was childless and he went to the forest. He contemptuously treated his status as a member of the Bhoja clan. He secured the status of a Rajarsi (a royal sage).

अध्याय १८०

श्लोक 42

मार्कण्डेय उवाच: एतदाश्चर्यमतुलं दृष्ट्वा देवी सुविस्मिता ।विस्मयोत्फुल्लनयना पुनः पप्रच्छ शङ्करम्

mārkaṇḍeya uvāca: etadāścaryamatulaṃ dṛṣṭvā devī suvismitā / vismayotphullanayanā punaḥ papraccha śaṅkaram

हिन्दी अर्थ

येन ते निहता देत्याः सहग्रामे तारकामये । सर्वंदेवमय कृत्वा सर्वायुधधरं वुः

English

He who reads this story ofKrsna's birth after regu¬ larly observing rites, and also narrates it to Brahmanas shall attain great happiness.

अध्याय १८०

श्लोक 43

पार्वत्युवाच: कथम् एतद् भवेत् सत्यं यत्रेदम् असमञ्जसम् ।स्नानं कुर्वन्ति बहवो लोका ह्यत्र महेश्वर

pārvatyuvāca: katham etad bhavet satyaṃ yatredam asamañjasam / snānaṃ kurvanti bahavo lokā hyatra maheśvara

हिन्दी अर्थ

गराडस्थेन चोत्सिक्त: कालनेमिनिषातितः । उत्तरांशे समुद्रस्य क्षीरोदस्यामृतोद्धे: ॥॥ पुरारणी गर्भभधत्त दिव्यं तपःप्रकर्षाददिति: पुरा यम् । शक च यो दत्यगणावरुद्ध गर्भावमानेन भुशं चकार

English

Lord Narayana of great splendour, lord of Dcvas, the lord of subjects (Prajapati) was formerly born among men out of sportfulness.

अध्याय १८०

श्लोक 44

तेषां तु स्वर्गगमनं यथैष स्वर्गतिं गतः ।कथम् एतत् समाचक्ष्व विस्मयः परमो मम

teṣāṃ tu svargagamanaṃ yathaiṣa svargatiṃ gataḥ / katham etat samācakṣva vismayaḥ paramo mama

हिन्दी अर्थ

यदाइनिलो लोकपदानि हृत्वा चकार देत्यान्सलिलेशयांस्तान् । कृत्वा5:दिदेवस्त्रिदिवस्य देवांश्वके सुरेश पुरहतमेव २४

English

Reading in A adopted.

अध्याय १८०

श्लोक 45

एतच्छ्रुत्वा तु देवेशः प्रहसन्प्रत्युवाच ताम् ।वेदवाक्ये पुराणार्थे स्मृत्यर्थे द्विजभाषिते

etacchrutvā tu deveśaḥ prahasanpratyuvāca tām / vedavākye purāṇārthe smṛtyarthe dvijabhāṣite

हिन्दी अर्थ

ब्नननन्‍म+-+- ०" ५ वन तक. ४ कण - पापा अत तीन नी +पधीननणीयनभ न 4+ऊ तीन सी नननननीनन निनिनिनन+“-िननना-+पनन-ननननगभगतगनना+ ना ....ल०.ल24ल4ल2ल 4 ++ + की जज जै+/-के्तहहत्-त्+++त+ै+तण+त+क्‍+++कव.-त।त०+तनत+ने०े०-++नलननत- नल ककननननअनननगक॒५ ४० १ +न- ०५३० +“+७+ कल पता कागज. (० +मइनत 8पननपत पक +क -॑पनन अानगइ--+ ० काल, देवपत्तम भगवान् पुराणों में पुराणात्मा के नाम से प्रशंसित हैं, जो सूकर का द्ारीर धारण कर इस पृथ्वी का उद्घार कर उसे देवताओं को समर्पित करते हैं, जो प्रभु सिह का द्वरीर धारण कर और शरीर के दो भाग कर महाबलझ्ञाली देत्यराज हिरण्यकशिपु का संहार करते हैं, जिन प्रभ ने प्राचीनकाल में ऊर्ब ऋषि के क्रोध से समुत्पक्ष होकर भोव॑ संवर्तक नामक अग्नि का स्वरूप धारण कर पाताल में स्थिर होकर जलमय हथि का

English

Bd.P.v. 190 gives a better reading and means; 'Ekalavya, the highly lucky son was born to Sraddhadeva. He was brought up by Nisadas (a forest tribe) and so he was well known as Nai§adi.

अध्याय १८०

श्लोक 46

विस्मयो हि न कर्तव्यो ह्यनुमानं हि तत् तथा ।असंभाव्यं हि लोकानां पुराणे यत्प्रगीयते

vismayo hi na kartavyo hyanumānaṃ hi tat tathā / asaṃbhāvyaṃ hi lokānāṃ purāṇe yatpragīyate

हिन्दी अर्थ

पान किया, जिन भगवान् का वर्णन प्रत्येक युगों में सहन चरणोवाला, सहस्र नेश्रॉवाला, सहस्न शिरोंवाला एवं दिव्यगुंण सम्पन्न कहा गया है ।१६-१६। सृष्टि के आादिमकाल में, जब कि समस्त लोक एक महासमुद्र के रूप में परिणत हो गये थे, जिस परमात्मा की नाभि रूप अरणी में पितामह ब्रह्मा जी का निवास स्थान भूत पंकज (कमल) उद्भूत हुआ, जो वास्तव में पंक से जायमान नहीं था। तारकामय संग्राम में जिन भगवान् ने

English

While Janardana was being born, the oceans tiernbl- ed, the mountains shook and the sacrificial fires blazed.

अध्याय १८०

श्लोक 47

यदि पक्षं पुरस्कृत्य लोकाः कुर्वन्ति पार्वति ।तस्मान्न सिद्धिर् एतेषां भवत्येको न विस्मयः

yadi pakṣaṃ puraskṛtya lokāḥ kurvanti pārvati / tasmānna siddhir eteṣāṃ bhavatyeko na vismayaḥ

हिन्दी अर्थ

सबंदेवनय शरीर घारण कर समस्त शास्त्रास्त्रों से सुसज्जित होकर उन अत्याचारी दानवों का संहार किया जो प्राणिमात्र को संकट में डाले हुए थे, जिन्होंने गरड़ पर सवार होकर परम गवीले कालनेमि का संहार किया जो शाइबत योग का अवलम्बन कर अमृत के समुद्र क्षीर सागर के उत्तरी छोर पर शयन करते हैं, जो महान अज्जानास्ध॒कार के विनाशक हैं ।२०-२२। प्राचीनकाल में जिन दिव्यगुण सम्पन्न भगवान् को अपनी कठोर तपस्या के बल पर देवताओं की माता अदिति ने गर्भ में धारण किया. हैत्यों के समूहों के चारों ओर घिरे हुए अत्यन्त परेशान इन्द्र की जिन्होंने बड़ी रक्षा की। जिस समय पवम ने अत्यन्त उग्र रूप धारण कर समस्त लोकों को अपने वश में कर उन उद्धत दानवों को जलशायी कर दिया था, उस समय जो आदिदेव भगवान् विष्णु स्वर्ग

English

The astcrism on ihc day when Janardana was boin was Abhijit by name. The night was called Jayanti (the 8th of the dark half of Sravana with the constellation Rohini rising at midnight). And the Muhurta (the specific period at the lime of his birth) was Vijaya by name.

अध्याय १८०

श्लोक 48

नास्तिका भिन्नमर्यादा ये निश्चयबहिष्कृताः ।तेषां सिद्धिर् न विद्येत आस्तिक्याद् भवते ध्रुवम्

nāstikā bhinnamaryādā ye niścayabahiṣkṛtāḥ / teṣāṃ siddhir na vidyeta āstikyād bhavate dhruvam

हिन्दी अर्थ

हव्यादांश्र सुरांभ्रक़े काव्यादांश्व पितुनपि । भोगार्थ यज्विधिना यो यज्ञों यज्ञकभंणि ५२७ यूपान्समित्लुच॑ सोम॑ पवित्र परिधीनपि। यज्ञियानि च द्रव्याणि यज्ञियाँश्व तथाइनलान २८ सदस्पास्यजमानांश्व अश्वमेधान्क्रत्त्तमान् । विबश्जञाज पुरा यश्च पारमेष्ठेन करमंणा

English

The unmanifest, eternal Lord Hari, Narayana, Krsna fascinated the people with his eyes as lie was born.

अध्याय १८०

श्लोक 49

श्रुत्वाख्यानम् इदं देवी ववन्दे तीर्थमुत्तमम् ।सर्वपापहरं पुण्यं नर्मदायां व्यवस्थितम्

śrutvākhyānam idaṃ devī vavande tīrthamuttamam / sarvapāpaharaṃ puṇyaṃ narmadāyāṃ vyavasthitam

हिन्दी अर्थ

युगानुरूप यः कृत्वा त्रॉौल्लोकान्हि यथाक्रमम् । क्षणा निमेषाः काष्ठाश्च कलास्त्रकालमेव च भूहर्तास्तिययों मासा दिनसंवत्सरं तथा। ऋतव: कालयोगाश्च प्रमाणं त्रिविध नथु 0३ १

English

The lord of Dcvas (Indra) showered flowers from the firmament. Eulogising Madhusudana (Krsna) with auspi¬ cious words thousands of great sages and Gandharvas offered prayer unto him.

अध्याय १८०

श्लोक 50

मार्कण्डेय उवाच: दशाश्वमेधं राजेन्द्र सर्वतीर्थोत्तमोत्तमम् ।तीर्थं सर्वगुणोपेतं महापातकनाशनम्

mārkaṇḍeya uvāca: daśāśvamedhaṃ rājendra sarvatīrthottamottamam / tīrthaṃ sarvaguṇopetaṃ mahāpātakanāśanam

हिन्दी अर्थ

अ्रयो वर्णास्त्रयो लोकास्त्रेवि्य पावकास्त्रय: । तैकाल्यं त्रीणि कर्माणि तिख्रो मायास्त्रयो गुणाः ॥३ २ सृष्टा लोकाः सुराश्चेव येनाउ४नन्त्येन कमंणा । सर्वभुतगणाः सुष्ठाः सर्वमुतगणात्मता हैंड

English

Vasudeva saw lord Adhoksaja (whose form is beyond the ken of the physical sense-organs) born at night as his son endowed with the characteristic curl of hair called Srivatsa and accompanied by various divine signs in heaven.

अध्याय १८०

श्लोक 51

तत्रागता महाभागा स्नातुकामा सरस्वती ।पुण्यानां परमा पुण्या नदीनाम् उत्तमा नदी

tatrāgatā mahābhāgā snātukāmā sarasvatī / puṇyānāṃ paramā puṇyā nadīnām uttamā nadī

हिन्दी अर्थ

के आधिपत्य पर पुरुहत इन्द्र को प्रतिष्ठित करते हैं ।२२-२४। जो आदिदेव गाहंपत्य विधि से, अस्वाह्ार्य कर्म से आहवनीय अग्नि को, वेदी को, कुश आओ को, लुच को प्रोक्षणीपात्र को, लुवा को, अवभूथ स्तान के लिये मेंगाई गई समस्त वस्तुओं को बनानेवाले हैं, जो यज्ञादि कार्यों में हव्य भाग देने के लिये तीन अधिकारियों को व्यवस्था करते हैं, जिन्होंने देवताओं को यज्ञभोक्ता, एंवं पितरों को श्राद्धभोक्ता बनाया, जो स्वयं यज्ञादि शुभकार्यों में विधि के अनुसार भोग के लिये यज्ञ रूप में प्रतिष्ठित होते हैं, जिन्होंने पूर्वकाल में अपने परम स्वरूप भें अवस्थित रह कर भी यज्ञस्तभ्भों, समिधा, खुच, सोमरस, पवित्र, परिधि, यज्ञोपयोगी अन्यान्य सामभ्रियों, यज्ञाग्नि, यज्ञ काय के सदस्य, यजमान, अश्वमेधादि प्रमुख उत्त म यज्ञों को सुशोभित किया

English

I say this, O dear one, as I am very much afraid of Kaiiisa. My sons, your elder brothers, were very wonderful in appearance but were killed by him".

अध्याय १८०

श्लोक 52

नाममात्रेण यस्यास्तु सर्वपापैः प्रमुच्यते ।स्नातास्तत्र दिवं यान्ति ये मृतास्ते ऽपुनर्भवाः

nāmamātreṇa yasyāstu sarvapāpaiḥ pramucyate / snātāstatra divaṃ yānti ye mṛtāste 'punarbhavāḥ

हिन्दी अर्थ

जिसने युग के अनुरूप तीनों लोकों की क्रमानुसार रचनाकर क्षण, निमेष, काष्ठा, कला, भूत, भविध्यत्, वर्तमान--ये तीन काल, मुहृतं, तिथि, मास, संवत्सर, ऋतु, काल, योग मनुष्यों में प्रचलित तीन श्रकार के प्रमाण आयु, क्षेत्र, वृद्धि, लक्षण, रूप, सौन्दयं, बुद्धि, वित्त, शुरता, शास्त्रों के पाठ, तीन वर्ण, श्ीनों लोक, तीनों विधाएँ तीनों अग्नि, तीनों काल, तीनों कम, तीनों माया, तीनों गुण, समस्त लोक एवं समस्त सुरगणों को

English

Yasoda and Dcvaki had been pregnant simultane¬ ously. Yasoda was the wife of Nandagopa, the Lord of (herd of) cows.

अध्याय १८०

श्लोक 53

दशाश्वमेधे सा राजन्नियता ब्रह्मचारिणी ।आराधयित्वा देवेशं परं निर्वाणमागतीः

daśāśvamedhe sā rājanniyatā brahmacāriṇī / ārādhayitvā deveśaṃ paraṃ nirvāṇamāgatīḥ

हिन्दी अर्थ

अपने अनन्त कर्मो द्वारा रचना की है, जिसने सवंजीवसमूहों में व्याप्त रह कर सब जीवों की सृष्टि की है, जो मानव की इसरिद्रियों भें योग ढवारा रमण करता है, जो गत आगत--सब के नेता हैं, जो सर्वत्र विराजमान एबं जगत में विस्तृत विविध विधानों के अधीश्वर हैं, जो धर्मात्मा लोगों की एक मात्र गति हैं, जो पापात्माओं के लिये के लिये दुगंति स्वरूप हैं, जो चारों वर्णों के उत्पत्तिकर्ता एवं चारों वर्णों के रक्षक हैं; जो चारों प्रकार को यो गतिधरमंयुक्तानामगतिः पापकर्संणाम् । चातुर्वण्यंस्य प्रभवश्रातुर्वण्येस्थ रक्षिता

English

Yasoda had given birth to a daughter in the same night as Krsna was born as the lord of the race of Vj-sni.

अध्याय १८०

श्लोक 54

कालुष्यं ब्रह्मसम्भूता संवत्सरसमुद्भवम् ।प्रक्षालयितुम् आयाति दशम्यामाश्विनस्य च

kāluṣyaṃ brahmasambhūtā saṃvatsarasamudbhavam / prakṣālayitum āyāti daśamyāmāśvinasya ca

हिन्दी अर्थ

चातुरविद्यस्य यो वेत्ता चातुराश्रम्यसंश्रयः । दिगनतरं नभो भुमिरापों वायुविभावसु: ३७ चन्द्रसुयंहयं ज्योतिर्युगेशः क्षणवाचर: । यः पर: श्रूयते देवो यः पर॑ श्रूयते तपः ३८ यः परं तपस:ः प्राहुयः परंपरमात्मवान् । आदित्यादिस्तु यो देवो यश्च देत्यान्तको विभुः ११३६ युगान्तेष्वन्तको यश्व यश्व लोकान्तकान्तकः । सेतुर्यो लोकसेतुनां मेध्यो यो मेध्यकर्म णाम्

English

Protecting the son born to him, Vasudeva of great fame, handed him over to Yasoda and took the daughter with him.

अध्याय १८०

श्लोक 55

उपोष्य रजनीं तां तु सम्पूज्य त्रिपुरान्तकम् ।राजन्निष्कल्मषा यान्ति श्वोभूते शाश्वतं पदम्

upoṣya rajanīṃ tāṃ tu sampūjya tripurāntakam / rājanniṣkalmaṣā yānti śvobhūte śāśvataṃ padam

हिन्दी अर्थ

विग्रहो विग्रहाणां यो गतिगंतिमतामपि । आकाशप्रभवों वायुर्बाधुप्राणो हुताशनः ॥४ ३ देवा हुताशनप्राणाः प्राणोड्नेमं घुसुदनः । रसाच्छोणितसंभुतिः शोणितान्मांसम्रुच्यते ४४ मांसात्त मेदसों जन्म सेदसो5स्थि निरूप्यते । अस्थ्नो मज्जा समभवन्मज्जातः शुक्रसंभवः ४४५ विधाओं के जाननेवाले, चारों आशभ्रभों के आश्रयभूत, एवं दिक् दिगन्‍्तर, आकाश, पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, चन्द्र मा, सूयं, अन्यास्य ज्योतिष्पिण्ड, युयपति, निशाचर--सब के स्वरूप हैं, जो देव सब से श्रेष्ठ एवं परम तपःस्वरूप सुने जाते हैं, जो तपस्या से भी श्रेष्ठ ध्ुने जाते हैं, जो परम परमात्मविशिष्ट कहे जाते हैं, जो देव आदित्यों में आदि हैं. और जो महामहिमामय देत्यों के विनाशकारी हैं ।३०-३९। जो प्रभु थुगान्त के

English

Handing him over to Nandagopa, (Vasudeva) spoke, "Save me. This (adopted) son of your shall be the bestower of ali happiness to Yadavas. This is that (long expected) child of Dcvaki. He shall put an end to all our pain and misery."

अध्याय १८०

श्लोक 56

युधिष्ठिर उवाच: सरस्वती महापुण्या नदीनामुत्तमा नदी ।श्रीमार्कण्डेय उवाच: राजन्नाश्वयुजे मासि दशम्यां तद्विशिष्यते ।पार्थिवेषु च तीर्थे तु सर्वेष्वेव न संशयः

yudhiṣṭhira uvāca: sarasvatī mahāpuṇyā nadīnāmuttamā nadī / śrīmārkaṇḍeya uvāca: rājannāśvayuje māsi daśamyāṃ tadviśiṣyate / pārthiveṣu ca tīrthe tu sarveṣveva na saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

अवसरों पर अन्तक स्वरूप हो जाते हैं, जो लोकों के विनाश करनेवाले यमराज के भी अन्तक हैं, जो लोकसेतु समूह के भी सेतु स्वरूप हैं, जो समस्त पविन्न कर्म समूहों से भी अधिक पवित्र हैं, बेद के जानने वालों के लिये जो एक मात्र ज्ञातव॑य हैं, परम ऐश्वर्यशालियों के भी जो प्रभु हैं, भूतगणों के मध्य में जो सोम स्वरूप हैं, अग्नि के समान तेजस्वियों में जो अग्तिस्वरूप हैं, मनुष्यों के जो मन स्वरूप हैं, तथस्या में

English

Anakadundubhi took that girl to the son of Ugrascna (i.c. Kaihsa) and informed him: ''This is the girl of auspicious characteristics".

अध्याय १८०

श्लोक 57

दशाश्वमेधिके राजन्नित्यं हि दशमी शुभा ।विशेषादाश्विने शुक्ला महापातकनाशिनी

daśāśvamedhike rājannityaṃ hi daśamī śubhā / viśeṣādāśvine śuklā mahāpātakanāśinī

हिन्दी अर्थ

निरत रहनेवाले तपस्बियों के तपःस्वरूप हैं, नीतिनिधुण प्राणियों के जो विनय स्वरूप हैं, तेजस्वियों के तेज स्वरूप हैं, तिग्रह (शरीर) धारण करनेवालों के जो विग्रहस्वरूप हैं, गतिमान् प्राणियों के जो गतिरूप हैं। वायु का उत्पत्ति स्थान आकाश है, अग्नि का प्राणस्वरूप वायु है, देवगणों का प्राणस्वरूप अग्नि है, भौर अग्नि के प्राणस्वरूप मधुसूदत भगवान् विष्णू हैं। अर्थात् जगत के सब के प्राणस्वरूप भगवान् मधुश्ृदन हैं। रस से रक्त की उत्पत्ति होती है, रक्त से माँस की उत्पत्ति कही जाती है, मांस से मेदा की उत्पत्ति होती है, मेदा से

English

The foolish one muttered within himself: "If it is a girl she is already slain 1" That daughter grew up well respected in thcabodc ofVrstds.

अध्याय १८०

श्लोक 58

तस्यास्नात्वार्चयेद् देवानुपवासपरायणः ।श्राद्धं कृत्वा विधानेन पश्चात् सम्पूजयेच्छिवम्

tasyāsnātvārcayed devānupavāsaparāyaṇaḥ / śrāddhaṃ kṛtvā vidhānena paścāt sampūjayecchivam

हिन्दी अर्थ

हुड्डियों का निर्माण होता है, हड्डियों से मज्जा बनती है और मज्जा से बीय॑ बनता है ।४०-४४। शुक्र से काम

English

*iigrasena-mate 1 in the text is confusing.

अध्याय १८०

श्लोक 59

तत्रस्थां पूजयेद् देवीं स्नातुकामां सरस्वतीम् ।नमो नमस्ते देवेशि ब्रह्मदेहसमुद्भवे

tatrasthāṃ pūjayed devīṃ snātukāmāṃ sarasvatīm / namo namaste deveśi brahmadehasamudbhave

हिन्दी अर्थ

शुक्राद्गर्भ: समभवद्गसमुलेन कर्ंणा । तथापि प्रथमं चा55पस्ता: सौम्यराशिरुच्यते ४६ + गर्भोष्मसंभवो ज्ञेयो हितीयो राशिरुच्यते । शुक्र सोमात्मक विद्यादातंवं पावकात्मकमू भावों रसानुगावेतों वीयें च शशिपावकों । कफवर्गेभवच्छुक्क पित्तवर्गं च शोणितम्

English

Why did Kamsa, the king of the Bhoja family, kill the sons of Vasudeva even when they were (mere) infants? It be¬ hoves you to explain this to us.

अध्याय १८०

श्लोक 60

कुरु पापक्षयं देवि संसारान्मां समुद्धर ।गन्धधूपैश्च सम्पूज्य ह्यर्चयित्वा पुनःपुनः

kuru pāpakṣayaṃ devi saṃsārānmāṃ samuddhara / gandhadhūpaiśca sampūjya hyarcayitvā punaḥpunaḥ

हिन्दी अर्थ

नाभीकोष्ठान्तरं यत्तु तत्र देवो हुताशनः । सनः प्रजापतिज्ञेयः कफः सोमो विभाव्यते ५०

English

Listen why the foolish Kamsa killed the infant sons of Anakadundubhi (Vasudeva) immediately after their birth. (I shall explain) how, out of fear, the mighty-armed Krsna was taken elsewhere immediately after birth and how Govinda, (though) the supreme person was brought up among the cows.

अध्याय १८०

श्लोक 61

दश प्रदक्षिणा दत्त्वा सूत्रेण परिवेष्टयेत् ।कपिलां तु ततो विप्रे दद्याद् विगतमत्सरः

daśa pradakṣiṇā dattvā sūtreṇa pariveṣṭayet / kapilāṃ tu tato vipre dadyād vigatamatsaraḥ

हिन्दी अर्थ

वायु: प्रवेशनं चक्रे सद्भतः परमात्मना । स पठचधा शरीरस्थो विद्यते वर्धयेत्पुनः .. प्राणापानों समानभ्र उदानो व्यान एवं च्। प्राणोइस्थ परमात्मानं वर्धयन्परिवतंते ३५३ अपानः पश्चिम कायमुदानोध्वंशरीरगः । व्यानों ध्यानस्यते येन समानः सर्वेसंधिषु १५४ भूतावाप्तिस्ततस्तस्य जायते ८निद्रयगोचरा । पृथिवी वायुराकाशमापो ज्योतिश्नव पत्चसम्ू

English

It is reported that Kamsa, then the crown prince, acted as a charioteer of the self-possessed Vasudeva along with Devaki (in their marriage).

अध्याय १८०

श्लोक 62

सर्वलक्षणसम्पन्नां सर्वोपस्करसंयुताम् ।दत्त्वा विप्राय कपिलां न शोचति कृताकृते

sarvalakṣaṇasampannāṃ sarvopaskarasaṃyutām / dattvā viprāya kapilāṃ na śocati kṛtākṛte

हिन्दी अर्थ

मूलक कम द्वारा गर्भ की उत्पत्ति होती है। इस गर्भ क्रिया में रस अथवा जल को सोम्यराशि तथा ग्रभंगत उष्णता से उत्पन्न होनेवाले ऋतुशोणित को द्वितीय राशि जानना चाहिए वीयं को सोमात्मक और आतंव को पावकात्मक जानना चाहिए । ये दोनों भाव रस के अनुगत होते हैं, शुक्र 4 शोणितात्मक आत्तंव को चन्द्रमा और सूर्य कहा जाता है। कफवर्श में शुक्र और पित्तवर्ग में शोणित की स्थिति रहती है। कफ का स्थान

English

Then there arose in the sky a divine voice of some incomprehensible person. It was distinctly loud and clear and was witnessed by all people. Thereby Kamsa remained panicky perpetually (throughout his life).

अध्याय १८०

श्लोक 63

पश्चाज्जागरणं कुर्याद् घृतेनाज्वाल्य दीपकम् ।पुराणपठनेनैव नृत्यगीतविवादनैः

paścājjāgaraṇaṃ kuryād ghṛtenājvālya dīpakam / purāṇapaṭhanenaiva nṛtyagītavivādanaiḥ

हिन्दी अर्थ

हृदय है, पित्त नाभि में स्थित रहता है शरीर के मध्य भाग में अवस्थित हृदय मन का स्थान कहा जाता है । नाभिकोष्ठ के भीतरी प्रान्त में हुताशन देव का निवास है। मन को प्रजापति जानना चाहिए, कफ को चन्द्रमा और पित्त को अग्नि कहा जाता है--अग्नि और चन्द्रमा से समस्त चराचर जगत् व्याप्त है।इस प्रकार से मेघ के आकार में प्रवरतित गर्भ स्थित रहता है ।४६-५१। वायु इस गर्भ में प्रविष्ट होकर परमात्मसत्ता से संगत होती है, और पाँच भागों में विभक्त होकर दारीर में स्थित रहते हुए गर्भ की बुद्धि करती है। प्राण, अपान, समान उदान और व्यान-ये पाँच वायु हैं । इनमें से प्राणवायु परमात्मसत्ता को वृद्धि करते हुए परिवर्तित होता है। अपान वायु शरीर के निम्नभाग में और उदान वायु शरीर के उध्व भाग में विद्यमान रहती हैं। व्यान वायु--सर्वेशरीर व्यापो एवं समान-शरीर की समस्त सन्धियों में समानभाव से गतिशील रहनेवाली

English

"O Kamsa, the seventh (?) child of this lady whom you drive in your chariot out of affection, will be the cause of your death."

अध्याय १८०

श्लोक 64

वेदोक्तैश्चैव पूजयेच् छशिशेखरम् ।प्रभाते विमले पश्चात्स्नात्वा वै नर्मदाजले

vedoktaiścaiva pūjayec chaśiśekharam / prabhāte vimale paścātsnātvā vai narmadājale

हिन्दी अर्थ

है। इस प्रकार वद्धि को प्राप्त हुए गर्भ को पंच महाभूृतों की प्राप्ति होती है, जो इन्द्रियगोचर होता है। पृथ्वी, वायु, आकाश, जल और ज्योति (अग्नि) ये पाँच महाभूत हैं ।(२-५५। गर्भ की उस अवस्था में इन्द्रियाँ एतदध्ध॑स्थाने तत्रापां प्रथभा चाप: स सौम्यो राशिरुच्यत इति घ॒पुस्तके ख. ग. ड. पुस्तकेष्वेतत्सद्श

English

On hearing that (aerial) voice, the foolish Kariisa became distressed. Unsheathing his sword, he evinced his desire to kill her.

अध्याय १८०

श्लोक 65

ब्राह्मणान् भोजयेद् भक्त्या शिवभक्तांश्च योगिनः ।एवं कृते ततो राजन् सम्यक् तीर्थफलं लभेत्

brāhmaṇān bhojayed bhaktyā śivabhaktāṃśca yoginaḥ / evaṃ kṛte tato rājan samyak tīrthaphalaṃ labhet

हिन्दी अर्थ

एब पाठ वत्ंन्‍्ते तेइस्पष्टा इति नोल्लिखिता; । अतन्र संधिराषं:। »अतन्न संधिरा्ष: । पद ० वायुपुराणम्

English

The mighty-armed and valorous Vasudeva spoke to Kamsa, the son of Ugrasena, out of friendliness and affection.

अध्याय १८०

श्लोक 66

तत्र तीर्थे तु यः स्नात्वा पूजयेच्छङ्करं नरः ।दशाश्वमेधावभृथं लभते पुण्यमुत्तमम्

tatra tīrthe tu yaḥ snātvā pūjayecchaṅkaraṃ naraḥ / daśāśvamedhāvabhṛthaṃ labhate puṇyamuttamam

हिन्दी अर्थ

छिद्राण्याकाशयोनोनि जलाभ्रावं प्रवतंते । तेजश्रक्षष्बिता ज्योत्स्ना तेषां यज्ञामतः स्घृतम् ॥॥ सडग्रामा विषयाश्चेब यस्य वीर्यरत्प्रवतिता:

English

Who is this Vasudeva who begot Visnu? Who is this Devaki, the lady of fame, who gave birth to Vi§nu? Who is this Nandagopa and who is this famous lady Yasoda whobrought him up?

अध्याय १८०

श्लोक 67

पूतात्मा तेन पुण्येन रुद्रलोकं स गच्छति ।आरूढः परमं यानं कामगं च सुशोभनम्

pūtātmā tena puṇyena rudralokaṃ sa gacchati / ārūḍhaḥ paramaṃ yānaṃ kāmagaṃ ca suśobhanam

हिन्दी अर्थ

इत्येतान्पुरुष: सर्वान्सुजेंल्लोकान्सनातन: । नेधने5स्मिन्‍्कर्थ लोके नरत्वं विष्णुरागतः ४५८ एष नः संशयों धीमझ्नेष वे विस्मयो महान् । क्थं गतिगंतिमतामापन्नो सानु्षी तनुम् श्रोतुमिच्छामहे विष्णो: कर्माणि च यथाक्षमम् । आश्रवर्याणि पर॑ विष्णुवेंददेवेश्च कथ्यते ३६० . किष्णोरुत्यत्तिमाश्चर्य कथयस्व महामते । एतदाश्चर्यंमाव्यानं कथ्यतां वे सुखावहम् ॥६ १ प्रस्यातबलवीयंस्य प्रादुर्भावा महात्मनः । कर्मणा55शचयं भुतस्य विष्णो: सत्त्वमिहोच्यताम्

English

All the men (of the Yadu race) were the incarnations of Kasyapa and all the women of Aditi 2. The mighty-armed lord (thus) fulfilled the desires of Devaki.

अध्याय १८०

श्लोक 68

तत्र दिव्याप्सरोभिस्तु वीज्यमानो ऽथ चामरैः ।क्रीडते सुचिरं कालं जयशब्दादिमङ्गलैः

tatra divyāpsarobhistu vījyamāno 'tha cāmaraiḥ / krīḍate suciraṃ kālaṃ jayaśabdādimaṅgalaiḥ

हिन्दी अर्थ

अहुं व: कीतंयिष्यासि प्रादुर्भाव महात्मनः । यथा स भगवाजुजातो मानुषेषु महातपाः

English

The lord entered a human body and moved about on the earth. By means of his Yogic Maya the Yogic-souled lord infatuated all living beings.

अध्याय १८०

श्लोक 69

ततो ऽवतीर्णः कालेन इह राजा भवेद् ध्रुवम् ।हस्त्यश्वरथसम्पन्नो महाभोगी परंतपः

tato 'vatīrṇaḥ kālena iha rājā bhaved dhruvam / hastyaśvarathasampanno mahābhogī paraṃtapaḥ

हिन्दी अर्थ

सप्तसप्ततयः प्रोक्ता भूगुशापेन मानुषे । जायते च युगान्तेषु देवकार्यार्थसिद्धये उसमें निविष्ट होती हैं ओर अपनो-भपनी शक्तियाँ प्राप्त करती हैं। उस इन्द्रियग्राम (समूह) समन्वित प्रागात्मक पाथिव शरीर थी उत्पत्ति इस प्रकार पण्डित लोग बतलाते हैं । प्राण को वायु कहते हैं। शरीरस्थ छिद्र समूह आकाझ से उत्पन्न होते हैं, उनसे जल का स्राव होता है। ज्योत्स्ना आँख की तेजस्विनी ज्योति है, उन इन्द्रिय समूहों के जो नाम स्मरण किये जाते हैं। जिस परम शक्ति के प्रभाव से उन इन्द्रियों के संग्रामादि

English

When Dharma declined, Visnu himself incarnated in the race of Vrsnis in order to reestablish Dharma and to annihi¬ late Asuras.

अध्याय १८०

श्लोक 70

दशाश्वमेधे यद्दानं दीयते शिवयोगिनाम् ।दशाश्वमेधसदृशं भवेत् तन्नात्र संशयः

daśāśvamedhe yaddānaṃ dīyate śivayoginām / daśāśvamedhasadṛśaṃ bhavet tannātra saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

कठोर विषय प्रवर्धित होते हैं।५६-५७। इन समस्त लोकों की सृष्टि करता हुआ जो सनातन पुरुष प्रतिष्ठित है बह इस मत्यंलोक में किस लिए मानव शरीर धारण करता है ? परम बुद्धिमान सूत जी ! इस बात का हमें बड़ा ही सन्देह है और महान विस्मय तो यह है कि जो स्वयमेव सदूगति प्राप्त करनेवालों की गति है वह भनुष्य शरीर क्‍यों धारण करता है? भगवान् विष्णु के इन आदचय में डालने वाले कर्मों के विषय में हम लोग

English

He married the girl RukminI, Satya the daughter ofNagnajit, Satyabhama the daughter of Satrajit, Jambavatl, Rohini, Saibya, SudevI, Madri, Suslla, Kalindl, Mitravinda, Lak§mana, JalavasinI and others.

अध्याय १८०

श्लोक 71

सर्वेषामेव यज्ञानाम् अश्वमेधो विशिष्यते ।दुर्लभः स्वल्पवित्तानां भूरिशः पापकर्मणाम्

sarveṣāmeva yajñānām aśvamedho viśiṣyate / durlabhaḥ svalpavittānāṃ bhūriśaḥ pāpakarmaṇām

हिन्दी अर्थ

क्रमानुसार सुनना चाहते हैं, वेद एवं देवगण उन भगवान विष्णु को परम आइंचयेमय बतलाते हैं। है महामते ! भगवान् विष्णु की उस आधचर्यमयों सम्भूति को आप बतलाइये उनका यह आखुयान आइचयों से भरा हुआ एवं कहनेवालों को परम सुख देनेवाला है । उनके बल एवं पराक्रम की विशेष ख्याति है। वे परम ऐश्वयं शाली एवं महान् हैं। उनके कर्म आश्चर्य से भरे हैं, उनके पराक्रम के सम्बन्ध में भी हम लोगों को बतलाइये सूत बोले--ऋषिवृन्द ! मैं उन महात्मा भगवान् विष्णु के प्रादुर्भाव का वर्णन अर्थात् जिस प्रकार वे परम तपोनिष्ठ भगवान् मानव योवि में अवतीर्ण हुए उसे आप लोगों से कह रहा हूँ । भृगु के शाप वश

English

Thus he had sixteen thousand wives. After consult¬ ing Devas, Sakra had sent down to the earth the most The words tvam tvidanim in the text are absurd as they would mean free pei mission to Kariisa to kill Devaki. They need emendation as natvidamm, as in Bd.P. ibid v. 233. It means "Do not behave now in the way you wish". Vasudeva wanted to save DevakPs life and hence requested Kariisa not to kill her.

अध्याय १८०

श्लोक 72

तत्र तीर्थे तु राजेन्द्र दुर्लभो ऽपि सुरासुरैः ।प्राप्यते स्नानदानेन इत्येवं शङ्करो ऽब्रवीत्

tatra tīrthe tu rājendra durlabho 'pi surāsuraiḥ / prāpyate snānadānena ityevaṃ śaṅkaro 'bravīt

हिन्दी अर्थ

अतन्र स्थल ऋषय ऊचुरित्यधिक ख. पुस्तके ।

English

This is a strange statement. Bd.P. v. 238 states that Vasudeva and Devaki were Kasyapa and Aditi in their former life. Our text oes not answer who was Nandagopa and Yasoda but Bd.P.v. 239 informs t at Nanda was a Vasu called Drona and Yasoda, his wife Dhara. Bh. P. X.8.48.51 confirm it.

अध्याय १८०

श्लोक 73

अकामो वा सकामो वा मृतस्तत्र नरेश्वर ।देवत्वं प्राप्नुयात् सो ऽपि नात्र कार्या विचारणा

akāmo vā sakāmo vā mṛtastatra nareśvara / devatvaṃ prāpnuyāt so 'pi nātra kāryā vicāraṇā

हिन्दी अर्थ

तस्य दिव्यतन् विष्णोगंदता मे निबोधत । युगधर्मे परावृत्ते काले चर शिथिले प्रभुः कर्तु' धमंव्यवस्थानं जायते मानुषेष्विह । भूगो: शापनिमित्तेन देवासुरकृतेन च

English

Pradyumna, Carudcsna, Sudcsna, Sarabha, Ca.ru, Carubhadra, Bhadracaru, and Caruvindhya were the sons ot Rukmini. She had a daughter Carumall. Bhadra, Bhadragupta, Bhadravindra and the famous

अध्याय १८०

श्लोक 74

अग्निप्रवेशं यः कुर्यात् तत्र तीर्थे नरोत्तम ।अग्निलोके वसेत् तावद् यावद् आभूतसम्प्लवम्

agnipraveśaṃ yaḥ kuryāt tatra tīrthe narottama / agniloke vaset tāvad yāvad ābhūtasamplavam

हिन्दी अर्थ

कथं वेवासुरकृते अध्याहारमवाप्नुयात् । एतद्देदितुमिच्छामो वृत्तं देवासुरं कथम्

English

Sangramajit, Satajit, and Sahasrajit are glorified as the sons of Sudcvi and Visvakscna (i.c. Kr?na).

अध्याय १८०

श्लोक 75

जलप्रवेशं यः कुर्यात् तत्र तीर्थे नराधिप ।ध्यायमानो महादेवं वारुणं लोकमाप्नुयात्

jalapraveśaṃ yaḥ kuryāt tatra tīrthe narādhipa / dhyāyamāno mahādevaṃ vāruṇaṃ lokamāpnuyāt

हिन्दी अर्थ

देवासुरं यथा वृत्तं ब्रुवतस्तन्निबोधत । हिरण्यकशिपुर्देत्यस्त्रेलोक्यं प्रावप्रशासति ६८ बलिना5धिष्ठितं राष्ट्र पुन्लोकन्रये क्रमात् । सस्यमासीत्पर॑ तेषां देवानामसुरः सह १६६ युग वे दशसंकोर्णमासीदब्याहत॑ जगत् । निदेशस्थायिनश्चेव तयोदेंबासुरा + 5भवन् ७० बलवास्वे विवादोधयं संप्रवृत्त: सुदारण: देवासुराणां च तदा घोरक्षयकरों महान् ७१ तेषा दायनिमित्त वे सडःग्रामा बहबोभवन् । वराहेस्मिन्दश हो बण्डामर्कान्तगाः स्पृता:ः

English

' Vrka, Vrkasva, Vfkajit, Mitrabahu and Sunltha were the sons. Vrjinl and Surangana 1 were the daughters. These are the children of the daughter of Nagnajit (i.e. Satya). Thus know that he had thousands of sons. (Some say) that Vasudeva had hundred thousands of sons.

अध्याय १८०

श्लोक 76

दशाश्वमेधे यः कश्चिच्छूरवृत्त्या तनुं त्यजेत् ।अक्षया नु गतिस्तस्य इत्येवं श्रुतिनोदना

daśāśvamedhe yaḥ kaścicchūravṛttyā tanuṃ tyajet / akṣayā nu gatistasya ityevaṃ śrutinodanā

हिन्दी अर्थ

.ःःःफऊ़्फ्फ्फखऊखऑफऊफऊख्ऋऑसख औआऑउआघच॒ाछआ ७ टी“: ि: ५ पिखपप:पिप पपपभणफण/७शणजफशहहैमहए/।ण/ण/

English

Ten thousand and eight of them (or eighty thousand of them) were heroic and experts in battle. The family of Janardana has been recounted to you factually.

अध्याय १८०

श्लोक 77

न तां गतिं यान्ति भृगुप्रपातिनो न दण्डिनो नैव च सांख्ययोगिनः ।ध्वजाकुले दुन्दुभिशङ्खनादिते क्षणेन यां यान्ति महाहवे मृताः

na tāṃ gatiṃ yānti bhṛguprapātino na daṇḍino naiva ca sāṃkhyayoginaḥ / dhvajākule dundubhiśaṅkhanādite kṣaṇena yāṃ yānti mahāhave mṛtāḥ

हिन्दी अर्थ

भगवान् के सप्त सप्तति (७७) अवतार कहे जाते हैं। युगान्त के अवसर पर देवताओं के कार्यों को पूर्ण करने के लिये वे उत्पन्न होते हैं। भगवान् की उस दिव्य देह का मैं वर्णन कर रहा हूँ, सुनिये । जब युगधर्म का हास हो जाता है ओर उसके प्रभाव शिथिल हो जाते हैं, उस समय वे महामहिमामय भगवान् भूयृ के शाप वह्य देवासुरों के संघर्ष की शान्ति के लिये एवं धर्म की व्यवस्था के लिए इस मत्यलोक में उत्पन्न ऋषियों ने पूछा--सूत जी ! उस देवासुर संग्राम में भगवान् विष्णु ने किस प्रकार अवतार ग्रहण किया था और वह देवासुर संग्राम किस प्रकार संगठित हुआ था, इसे हम लोग जानना चाहते हैं ?

English

Brhatl (known also as) Nartakonncyl was united (in wedlock) with Sunaya. She was the daughter of Brhaduklha (he rioble-soulcd scion of the family of Suni (Sauneya). Her sons were three in number. They were well known as shining splendidly in war, viz. Augada, Kumuda and Sveta. She had a daughter too named Sveta.

अध्याय १८०

श्लोक 78

यत्र तत्र हतः शूरः शत्रुभिः परिवेष्टितः ।अक्षयांल् लभते लोकान्यदि क्लीबं न भाषते

yatra tatra hataḥ śūraḥ śatrubhiḥ pariveṣṭitaḥ / akṣayāṃl labhate lokānyadi klībaṃ na bhāṣate

हिन्दी अर्थ

सूत बोले--ऋषिवृस्द ! जिस प्रकार वह देवासुर संग्राम घटित हुआ था, उसे मैं बतला रहा हूँ, सुनिये । प्राचीनकाल में देत्यराज हिरण्यकशिपु त्रैलोक्य का शासक था। उसके उपराल्त पुनः देत्यराज बलि के हाथ त्रैलोक्य का भार आया। उस समय देवताओं और असुरों में परम मित्रता थी। इस प्रकार दस युगों तक यह जगत बिता किसी के उपद्रव रहा उसकी आज्ञा में उस समय देवता ओर

English

Avagaha 2, Citra and the heroic Citravara (were

अध्याय १८०

श्लोक 79

दशाश्वमेधे संन्यासं यः करोति विधानतः ।अनिवर्तिका गतिस् तस्य रुद्रलोकात्कदाचन

daśāśvamedhe saṃnyāsaṃ yaḥ karoti vidhānataḥ / anivartikā gatis tasya rudralokātkadācana

हिन्दी अर्थ

असुर दोनों ही थे ।६८-७०। तदनस्तर उन देवताओं और असुरों में घोर विनाशकारी दारुण विवाद उपस्थित हो गया, वाराहकल्प में बारह युद्ध हुए जिनमें षण्ड और अमर्क सभी युद्धों में सम्मिलित कहे जाते हैं। उन युद्धों का नामपूर्वक वर्णन मैं संक्षेप में कर रहा हूँ, सुनिये । इनमें प्रथम युद्ध नरसिंह का था, दूसरा वामन का, नामतस्तु समासेन शुणुध्व॑ तान्विवक्षतः। प्रथमो नारसिहस्तु द्वितीयश्चापि वामनः

English

The reading varaiit'ana in Bd.P. v. 252 implies that excellently beautiful Vrjini was the only daughter of Satya. Bd. P.v. 237 reads Avagahasya and implies Citra, Sura and Citravara as his sons.

अध्याय १८०

श्लोक 80

दशाश्वमेधे यत्पुण्यं संक्षेपेण युधिष्ठिर ।कथितं परया भक्त्या सर्वपापप्रणाशनम्

daśāśvamedhe yatpuṇyaṃ saṃkṣepeṇa yudhiṣṭhira / kathitaṃ parayā bhaktyā sarvapāpapraṇāśanam

हिन्दी अर्थ

तृतीयः स॒ तु वाराहुश्चतुर्थोब्मुतमन्थनः । सडग्रामः पञचमश्चेव सुधोरस्तारकामय:

English

Tumba and Tumbabana were the two sons of Janas- tamba. Vajrara and Ksipra are remembered to be the sons of Upanga.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 180
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.