Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
181
अध्याय 181 / 232

Adhyaya 181

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अध्याय १८१

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे दशाश्वमेधतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नामाशीत्युत्तरशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १८१ श्रीमार्कण्डेय उवाच: अतः परं प्रवक्ष्यामि भृगुतीर्थस्य विस्तरम् ।यं श्रुत्वा ब्रह्महा गोघ्नो मुच्यते सर्वपातकैः

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe daśāśvamedhatīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāmāśītyuttaraśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 181 śrīmārkaṇḍeya uvāca: ataḥ paraṃ pravakṣyāmi bhṛgutīrthasya vistaram / yaṃ śrutvā brahmahā goghno mucyate sarvapātakaiḥ

हिन्दी अर्थ

षष्ठो ह्याडीवकस्तेषां सप्तमस्त्रेपुरः स्मृतः: । अन्धका रोषष्टमस्तेषां ध्वजश्च नवमः स्मृतः ७५ वातंश्च दशमो ज्ञेयस्ततो हालाहलः स्पृतः । स्मृ॒तों हादशमस्तेषां घोरकोलहलो5प: हिरण्यकशिपुर्देत्यो नर्रासहिन सुदित:। वामनेन बलिबंड्धस्त्रलोक्याक्रमणे कृते ७७ हिरण्याक्षों हतो इन्हें प्रतिबादे तु देवतें:। महाबलो महासत्त्वः सड़ग्रामेष्वपराजित:ः ७८. दंष्ट्रायां तु बराहेण समुद्राद्भूयंदा कृता । प्राक्लादो निर्जितो युद्धे इश्द्रेणामृतमन्थने

English

Bhurlndrasena and Bhuri were the two sons of Gavesa. Yudhisthira's daughter Sutanu was well-known.

अध्याय १८१

श्लोक 2

तत्र तीर्थे तु विख्यातं वृषखातम् इति श्रुतम् ।भृगुणा तत्र राजेन्द्र तपस्तप्तं पुरा किल

tatra tīrthe tu vikhyātaṃ vṛṣakhātam iti śrutam / bhṛguṇā tatra rājendra tapastaptaṃ purā kila

हिन्दी अर्थ

विरोचनस्तु प्राल्लादिनित्यमिन्रवधोद्यतः । इन्द्रेणवे स विक्रम्य निहतस्तारकामये ८० भवादवध्यतां प्राप्प विशेषास्त्रादिभिस्तु यः । सडःग्रासे निहतः षष्ठ शक्राविष्टेन विष्णुना ८१ अशवनुवस्तो देवेषु पुरं गोष्त॑ त्रिदवतम् । निहता दानवाः स्व श्रिपुरस्त््यम्बकेण तु

English

The famous son of Asva named Vajra was born of her. Vajra's son was Pratibahu and Sucaru was his son.

अध्याय १८१

श्लोक 3

युधिष्ठिर उवाच: भृगुकच्छे स विप्रेन्द्रो निवसन् केन हेतुना ।तपस्तप्त्वा सुविपुलं परां सिद्धिम् उपागतः

yudhiṣṭhira uvāca: bhṛgukacche sa viprendro nivasan kena hetunā / tapastaptvā suvipulaṃ parāṃ siddhim upāgataḥ

हिन्दी अर्थ

अष्टमे त्वसुराश्यव राक्षसाश्चान्धकारकाः । जितदेवमनुष्येस्तु पितृभिश्चेव संगतान् ॥८रे तीसरा वाराह का, चौथा अमृतमंथन का, पाँचवाँ परम दारुण तारकामय नामक संग्राम था, छठवाँ युद्ध आाडीवक और सातवाँ त्रिपुर बहत का था। इन युद्धों में आठवाँ अन्धकार यद्ध एवं नवाँ ध्वज युद्ध कहा जाता है दसवाँ युद्ध वा्तें जानना चाहिए, ग्यारहवाँ हालाहल के नाम से विख्यात है, इसी प्रकार बारहवें युद्ध का नाम घोर कोलाहल है प्रथम युद्ध में दंत्यराज हिरण्यकश्िपु नरसह के द्वारा मृत्यु को प्राप्त हुआ द्वितीय

English

Kasma (Princess of Kasi—Bd.P.) gave birth to the son Suparsva and Samba to Tarasvin. The sons of the noble- soul ed Yadavas were three crores.

अध्याय १८१

श्लोक 4

को वा वृष इति प्रोक्तस् तत् खातं येन खानितम् ।एतत्सर्वं यथान्यायं कथयस्व ममानघ

ko vā vṛṣa iti proktas tat khātaṃ yena khānitam / etatsarvaṃ yathānyāyaṃ kathayasva mamānagha

हिन्दी अर्थ

युद्ध में तीनों लोकों पर आक्रमण करने पर हैत्यराज बलि को भगवान् वामन ने बाँधा । देवताओं के साथ संघर्ष उपस्थित होने पर उस युद्ध में हिरण्याक्ष का निधन हुआ वह महान् बलवान, महान पराक्रमी तथा संग्राम में कभी पराजित होनेवाला नहों था ।७१-७८। तीसरे अवतार में वाराह ने अपनी दाढ़ों से समुद्र में से निकाल कर पृथ्वी का उद्धार किया था। अमृतमंथन के अवसर पर देवराज इन्द्र के द्वारा देत्यराज

English

Six million of them were extremely valorous and very strong. All these men of great prowess were born of the parts of Devas.

अध्याय १८१

श्लोक 5

श्रीमार्कण्डेय उवाच: एष प्रश्नो महाराज यस्त्वया परिपृच्छितः ।तत्सर्वं कथयिष्यामि शृणुष्वैकमना नृप

śrīmārkaṇḍeya uvāca: eṣa praśno mahārāja yastvayā paripṛcchitaḥ / tatsarvaṃ kathayiṣyāmi śṛṇuṣvaikamanā nṛpa

हिन्दी अर्थ

प्रकह्लाद पराणशित हुए थे। इससे प्रहक्कलाद का पुत्र विरोचन नित्य ही इन्द्र के संहार के लिए प्रयत्नशील रहता था। अन्त में इन्द्र ने परम पराक्रम दिखलाकर तारकामय संग्राम में उसका संहार किया था। उस देत्य ने शंकर जी की अराधना कर अमरत्व का--विशेषतया अस्त्र दास्त्रादिकों सेन मारे जाने का-- वरदान प्राप्त किया था, अतः इन्द्र के शरीर में आविष्ट होकर संग्रामभूमि में भगवान् विष्णु ने उसका संहार किया था यह छठवाँ देवासुर संग्राम था ।७९-८१। असूरों के पास एक परम सुरक्षित दुर्ग था, उसकी रक्षा में तत्पर दानवगण देवताओं की प्रतिष्ठा को सहन नहीं करते थे, व्यम्बक शिवजी ने उस त्रिपुर का विध्वंस कर समस्त दानवों का संहार किया । अष्टम देवासर संग्राम में अंधकार स्वरूप असरगण एवं राक्षसों के साथ

English

They were born in the family of Yadavas in order to exterminate the Asuras of great penance who had been born among human beings in this world and were harassing them. These Asuras had been killed in the battles between Devas and Asuras.

अध्याय १८१

श्लोक 6

षष्ठस्तु ब्रह्मणः पुत्रो मानसो भृगुसत्तमः ।तपश्चचार विपुलं श्रीवृते क्षेत्र उत्तमे

ṣaṣṭhastu brahmaṇaḥ putro mānaso bhṛgusattamaḥ / tapaścacāra vipulaṃ śrīvṛte kṣetra uttame

हिन्दी अर्थ

: देत्यांश्च दानवांश्चेव संहतान्कृत्ल्नशश्च तान् । रजि: कोलाहले सर्वान्दिबेंः परिवृतोश्जयत्

English

There were eleven distinct families of the noble-souled Yadavas. But in the family of Visnu (i.e. Krsna) all of them merged as though into one family.

अध्याय १८१

श्लोक 7

दिव्यं वर्षसहस्रं तु संशुष्को मुनिसत्तमः ।निराहारो निरानन्दः काष्ठपाषाणवत्स्थितः

divyaṃ varṣasahasraṃ tu saṃśuṣko munisattamaḥ / nirāhāro nirānandaḥ kāṣṭhapāṣāṇavatsthitaḥ

हिन्दी अर्थ

यज्ञामतेन विजितो षण्डामर्कों तु देवते: एते देवा: पुरा वृत्ता: सडग्रामा द्वादशेव तु । देवासुरक्षयकराः प्रजानामशिवाय च

English

Visnu was their authority and the leader for them. All of them, all human beings*, obeyed his behests and aoided by his directions.

अध्याय १८१

श्लोक 8

ततः कदाचिद् देवेशो विमानवरमास्थितः ।उमया सहितः श्रीमांस्तेन मार्गेण चागतः

tataḥ kadācid deveśo vimānavaramāsthitaḥ / umayā sahitaḥ śrīmāṃstena mārgeṇa cāgataḥ

हिन्दी अर्थ

हिरण्यकशिपु राजा वर्षाणामबुंद बभौ तथा शतसहस्राणि ह्ाबिकानि हिसप्ततिः

English

Thus the progeny of Vrsnis has been glorified succinctly and in details. The glorification of these bestows fame and fulfilment of cherished desires.

अध्याय १८१

श्लोक 9

दृष्ट्वा तत्र महाभागं भृगुं वल्मीकवत्स्थितम् ।उवाच देवी देवेशं किमिदं दृश्यते प्रभो

dṛṣṭvā tatra mahābhāgaṃ bhṛguṃ valmīkavatsthitam / uvāca devī deveśaṃ kimidaṃ dṛśyate prabho

हिन्दी अर्थ

अशीति च सहस्नाणि त्रलोक्यस्येश्वरोभवत् ८८ पर्याये तस्थ राजाइनु बलियंषर्बिदं पुनः षष्टिश्वेव सह्नाणि त्रिशच्च नियुतानि च बले राज्याधिफारस्तु यावत्कालं बभूव ह। प्रह्लादेन गृहीतोभूत्तावत्कालं तदा5सुरः ६०

English

Understand the Devas who had assumed human nature and born as they are being glorified.

अध्याय १८१

श्लोक 10

ईश्वर उवाच: भृगुर्नाम महादेवि तपस्तप्त्वा सुदारुणम् ।दिव्यं वर्षसहस्रं तु मम ध्यानपरायणः

īśvara uvāca: bhṛgurnāma mahādevi tapastaptvā sudāruṇam / divyaṃ varṣasahasraṃ tu mama dhyānaparāyaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

असपत्नं ततः सर्व राष्ट्र दशयुगं पुरा । श्ैलोक्यमव्ययमिदं महेन्द्रेण तु पाल्यते

English

Why did Visnu incarnate? How many incarnations are remembred? How many are the future manifestations of the great soul?

अध्याय १८१

श्लोक 11

जलबिन्दु कुशाग्रेण मासे मासे पिबेच्च सः ।संवत्सरशतं साग्रं तिष्ठते च वरानने

jalabindu kuśāgreṇa māse māse pibecca saḥ / saṃvatsaraśataṃ sāgraṃ tiṣṭhate ca varānane

हिन्दी अर्थ

कर रहे थे । भगवान् विष्णु की सहायता प्राप्तकर महादेव ने उन समस्त दानवों, असुरों एवं राक्षसों को समूल नष्ट किया । एक युद्ध महाबलशाली विप्रचित्ति के साथ हुआ था, उसमें वह मायारूप धारण कर युद्ध कर रहा था, महेन्द्र ने उसके रथ के ध्वज को लक्ष्यकर उसे काट दिया और उसके साथ युद्ध करनेवाले समस्त दानवों, असुरों एवं राक्षसों का संहार कर दिया देवताओं समेत रजि ने महानू कोलाहल नामक समर के बीच समस्त असूरों को पराजित किया भा। उसमें देवताओं ने यशीय अमृत द्वारा असुरों के पुरोहित षण्ड और अमक को पराजित किया था ।८५२-८६। देवताओं और असू्रों में ये ही बारह युद्ध प्राचीन काल में हुए थे; जिनमें देवताओं और असूरों का महान् विनाश हुआ था और प्रजावर्ग का भी पर्याप्त अमंगल हुअ. था । देत्यराज हिरण्यकशिपु एक अरब बहत्तर लाख अस्सी सहस्र वर्षों तक समस्त त्रैलोक्य के अधीश्वर पद पर सुशोभित था 5७-८५८। उसके

English

Why is he born in Brahmana and Ksatriya families at the closing periods of the Yugas? Why does he incarnate again and again among human beings? Please explain it to us who (being curious to know) enquire of you.

अध्याय १८१

श्लोक 12

तच्छ्रुत्वा वचनं गौरी क्रोधसंवर्तितेक्षणा ।उवाच देवी देवेशं शूलपाणिं महेश्वरम्

tacchrutvā vacanaṃ gaurī krodhasaṃvartitekṣaṇā / uvāca devī deveśaṃ śūlapāṇiṃ maheśvaram

हिन्दी अर्थ

बाद पर्यायक्रम से बलि देत्यों का राजा हुआ, वह एक अरब साठ सहन बीस नियुत) वर्ष तक राज्य पद का अधिकारी हुआ था। जितने वर्षों तक बलि राज्य पद का स्वामी था, उतने ही वर्षों तक उसके प्रह्लाद ने असमरों के साथ राज्य भार ग्रहण किया था। समस्त असुरगणों में महाबलशाली पितामह हिंरण्याक्ष, प्रह्लाद और बलि--ये तीन ही परम तेजस्वी, परम बलशाली एवं इन्द्र के समान प्रब्यात थे, ऐसी

English

We wish to hear completely and in detail all the acti¬ vities of the intelligent Krsna, the slayer of enemies in different bodies (incarnations).

अध्याय १८१

श्लोक 13

सत्यमुग्रो ऽसि लोके त्वं ख्यापितो वृषभध्वज ।निष्कारुण्यो दुराराध्यः सर्वभूतभयंकरः

satyamugro 'si loke tvaṃ khyāpito vṛṣabhadhvaja / niṣkāruṇyo durārādhyaḥ sarvabhūtabhayaṃkaraḥ

हिन्दी अर्थ

प्रसिद्धि है कि हैत्यों से यह समस्त जगत् दस -युगों तक आक्रान्त था, उसके बाद दस युगों तक समस्त राष्ट्र निष्कण्टक रहा, महेन्द्र इस अवधि में त्रैलोक्य की रक्षा करते थे ।८६-६२॥। प्रह्माद के अनन्तर यह बैलोक्य १. एक नियुत बराबर है दस लाख के ।

English

O Suta, O holy lord, it behoves you to narrate in the proper order his various activities, the different manifestations as well as his nature to us.

अध्याय १८१

श्लोक 14

दिव्यं वर्षसहस्रं तु ध्यायमानस्य शङ्करम् ।ब्राह्मणस्य वरं कस्मान् न प्रयच्छसि शंस मे

divyaṃ varṣasahasraṃ tu dhyāyamānasya śaṅkaram / brāhmaṇasya varaṃ kasmān na prayacchasi śaṃsa me

हिन्दी अर्थ

पर्दे वायुपुराणम्

English

How did that lord Visnu (well-renowned) among Suras as the slayer of their enemies, adopt the state of being the son of Vasudeva, in his family?

अध्याय १८१

श्लोक 15

एवमुक्तो ऽथ देवेशः प्रहस्य गिरिनन्दिनीम् ।उवाच नरशार्दूल मेघगम्भीरया गिरा

evamukto 'tha deveśaḥ prahasya girinandinīm / uvāca naraśārdūla meghagambhīrayā girā

हिन्दी अर्थ

प्रद्लादस्य ततश्चादस्त्रलोक्यं कालपर्ययात् । प्ययिण च संप्राप्ते त्लोक्ये पाकशासन: ॥६€३ ततो5सुरान्परित्यज्य यज्ञे देवा उपागमन् । यज्ञे देवानथ गते काव्य ते हसुराबवन् ६४ हतं नो मिषतां राष्ट्र त्यकत्वा यज्ञ पुनर्गंताः। स्थातुं न शक्‍नुमों हाद्य प्रविशामों रसातलमू ॥€९५ वृष्टि रोषधयश्चेव रसा बसु व यह यम् । कृत्स्ता सयि च तिष्ठस्तु पादस्तेषां सुरेषु व ॥।

English

O Suta, what (special) meritorious act was performed by the deathless Devas who invariably perform meritorious deeds, as a result of which (the lord) left the region of Devas and came over to the world of mortals?

अध्याय १८१

श्लोक 16

स्त्री विनश्यति गर्वेण तपः क्रोधेन नश्यति ।गावो दूरप्रचारेण शूद्रान्नेन द्विजोत्तमाः

strī vinaśyati garveṇa tapaḥ krodhena naśyati / gāvo dūrapracāreṇa śūdrānnena dvijottamāḥ

हिन्दी अर्थ

ततो देवासुरान्दष्ट्वा धृतान्काव्येन धीमता । अमन्त्रयंस्तदा ते वे संबिग्ना विजिगोषया ॥€८ एव काध्य इदं सर्व व्यवर्तंवति नो बलातू। साधु गच्छामहे तुर्ण क्षीणानाप्याययस्व तान ॥॥

English

This chapter corresponds to Bd. 3.72; the references are to the verse numbers of that chapter.

अध्याय १८१

श्लोक 17

क्रोधान्वितो द्विजो गौरी तेन सिद्धिर् न विद्यते ।वर्षायुतैस् तथा लक्षैर् न किंचित् कारणं प्रिये

krodhānvito dvijo gaurī tena siddhir na vidyate / varṣāyutais tathā lakṣair na kiṃcit kāraṇaṃ priye

हिन्दी अर्थ

ततो देवाः सुसंरब्धा दानवानभिसृत्य वे । जध्नुस्तेबंध्यमानास्ते काव्यमेवाभिदुद्रवः ११०७ ततः काथ्यस्तु तानदृष्टवा तूर्ण देवरभिद्रुतान् । समरेष्स्त्रक्षतातस्तानदेवेस्यस्तान्दितेः सुतान्

English

The list shows the influence of Pancaratra school in that period.

अध्याय १८१

श्लोक 18

एवम्भूतस्य तस्यापि क्रोधस्य चरितं महत् ।एवमुक्त्वा ततः शम्भुर्वृषं दध्यौ च तत्क्षणे

evambhūtasya tasyāpi krodhasya caritaṃ mahat / evamuktvā tataḥ śambhurvṛṣaṃ dadhyau ca tatkṣaṇe

हिन्दी अर्थ

कालक्रम से पाकशासन इन्द्र के हाथ में आया, उस समय यक्षमण असुरों को छोड़ कर देवताओं के पास आये, यक्षों के देवताओं के पास चले जाने पर असुरों नेशुक्राचार्य से जाकर कहा, आचाये जी! हम लोगों के देखते देखते हमारा समस्त राष्ट्र नष्ट हो गया, यज्ञादि शुभ कम हमें छोड़कर पुनः देवताओं के पास चले गये, ऐसी स्थिति में हम लोग यहाँ ठहर नहीं सकते, रसातल को

English

Why did the leader of Devas and human beings, Hari, the source of origin of the worlds Bhuh and Bhuvah, install his divine soul in a human womb?

अध्याय १८१

श्लोक 19

वृषो हि भगवन्ब्रह्मा वृषरूपी महेश्वरः ।ध्यानप्राप्तः क्षणाद् एव गर्जयन् वै मुहुर्मुहुः

vṛṣo hi bhagavanbrahmā vṛṣarūpī maheśvaraḥ / dhyānaprāptaḥ kṣaṇād eva garjayan vai muhurmuhuḥ

हिन्दी अर्थ

जा रहे हैं । भसुरों के ऐसा कहने पर शुक्राचायं को बड़ा विषाद हुआ और मीठे वचन से सानन्‍तवना देते हुए बोले, असुरवृस्द ! आप लोग भयभीत न हों, मैं अपने तेज से आप सबकी रक्षा करूँगा । वृष्टि ओषधियाँ, प्रथ्वी, अन्न एवं अन्यान्य रत्नादि जो कुछ भी वबस्तुएँ हैं बे सब मेरे अधीन हैं उनका केवल चतुर्थाश देवताओं के पास हैं । उन सब को मैंने आप ही लोगों के लिए धारण किया है 89-९७। और आप सब के कल्याणा््थ उसे भाज ही समर्पित भी कर दूंगा ।” इस प्रकार परम बुद्धिशाली शुक्राचायं द्वारा असुरों को सुरक्षित देखकर देवगण परम उद्विग्न हुए और विजय की इच्छा से सब ने आपत्त में मंत्रणा की कि यह असुरों का गुरु शुक्राचाय्यं अपने पराक्रम से हम लोगों के किये धरे को सब व्यर्थ कर देता है, अच्छा है, तब तक हम लोग शीघ्रतापूर्वक उनकक्षीण अधूरों के ऊपर आक्रमण करते हैं, जब तक कि वह

English

It is he who makes the mental cycles of human beings revolve and function. He is the foremost among the wielders of discus. Why did he decide to be born among human beings?

अध्याय १८१

श्लोक 20

किं करोमि सुरश्रेष्ठ ध्यातः केनैव हेतुना ।करोमि कस्य निधनमकाले परमेश्वर

kiṃ karomi suraśreṣṭha dhyātaḥ kenaiva hetunā / karomi kasya nidhanamakāle parameśvara

हिन्दी अर्थ

उन्हें सबल नहीं बना देते, खूब पराक्रम दिखलाकर हम पहले तो सब को मार डालना चाहेंगे, जो नहीं मर सकेंगे, बच जायेंगे, पाताल खदेड़कर छोड़ेंगे ।६८-६६। ऐसी सम्मति कर देवगणों ने अत्यन्त क्रद्व होकर दानवों पर आक्रमण किया और उनका खूब संहार किया, देवताओं द्वारा संत्रस्त होकर दानव गण शुक्राचाय॑ की शरण में भागे। शुक्राचायं ने इस प्रकार देवताओं द्वारा खदेड़े गये, समर में उनके घोर शस्त्रास्त्रों की मार से क्षत-

English

It is he who affords protection to all the worlds and the whole universe. Why did that lord Visnu descend to the earth and emulate (an ordinary) cowherd?

अध्याय १८१

श्लोक 21

ईश्वर उवाच: कोपयस्व द्विजश्रेष्ठं गत्वा त्वं भृगुसत्तमम् ।येन मे श्रद्दधत्येषा गौरी लोकैकसुन्दरी

īśvara uvāca: kopayasva dvijaśreṣṭhaṃ gatvā tvaṃ bhṛgusattamam / yena me śraddadhatyeṣā gaurī lokaikasundarī

हिन्दी अर्थ

काव्यो दृष्ट्वा स्थितान्देबांस्तत्र देवोडम्यचिन्तयत् । तानुवाच ततो ध्यात्वा पूर्वेवत्तमनुस्मरन श्रेलोक्यं विजितं सर्व वामनेन त्रिभिः क़में: । बलिबंडों हतो जस्भो निहतश्र विरोचनः १०३

English

He is the Atman of all living beings. He has created and sustained all the great Bhutas (elements). He is the Srigarbha (having glory and splendour, Sri, within him). How was he retained in the womb by a woman of the earth?

अध्याय १८१

श्लोक 22

एतच्छ्रुत्वा वृषो गत्वा धर्षणार्थं द्विजोत्तमम् ।नर्मदायास्तटे रम्ये समीपे चाश्रमे भृगुः

etacchrutvā vṛṣo gatvā dharṣaṇārthaṃ dvijottamam / narmadāyāstaṭe ramye samīpe cāśrame bhṛguḥ

हिन्दी अर्थ

किचिच्छिष्टास्तु वे यूय॑ युद्धेष्वन्त्येषु वे स्‍्वयम् । नीति वो हि विधास्यासि कालः कश्रित्प्रतीक्ष्यताम् ॥ पास्याभ्यहूँ महादेव यथाें विजयाय वः । अग्निमाप्याययेद्धोता मन्त्ररेव बृहस्पति: ११०६ ततो यास्यामहूं देवं मन्न्नार्थे नोललोहितम् । युष्माननुग्रहीष्यामि पुनः पश्चाविहा55गतः ११०७ यूयं तपश्चरध्व॑ वे संबृता वल्कलेवंने न वे देवा वधिष्यन्ति यावदागसन सम १०८

English

It was he who measured the three worlds in three paces at the request of Devas. It was by him that the three paths of the worlds consisting of the three Vargas (i.e. Dharma, Kama and Artha?) were laid down.

अध्याय १८१

श्लोक 23

ततः शृङ्गैर्गृहीत्वा तु प्रक्षिप्तो नर्मदाजले ।ततः क्रुद्धो भृगुस्तत्र दण्डहस्तो महामुनिः

tataḥ śṛṅgairgṛhītvā tu prakṣipto narmadājale / tataḥ kruddho bhṛgustatra daṇḍahasto mahāmuniḥ

हिन्दी अर्थ

अशतीपांस्ततो मन्त्रान्देवात्प्राप्य महेश्वरात् । योत्स्यामहे पुनर्देबांस्ततः प्राप्टयथ वे जयम् ततस्त कृतसंबादा देवानुचुस्ततो5सुरा: । स्यस्तवादा वयं सर्वे लोकास्यूयं क़मन्तु वे ११०

English

At the time of dissolution of the universe he assumed the form consisting of waters and drank up the whole universe. He made the whole world a vast sheet of water through the visible and invisible paths.

अध्याय १८१

श्लोक 24

पशुवत्ते वधिष्यामि दण्डघातेन मस्तके ।शिखायज्ञोपवीते च परिधानं वरासने

paśuvatte vadhiṣyāmi daṇḍaghātena mastake / śikhāyajñopavīte ca paridhānaṃ varāsane

हिन्दी अर्थ

विक्षत घरीरवाले, परम दीन दिति के प्रश्नों को शीघ्रता पूषक अपनी ओर दोड़े आते हुए देखा और वहीं समीप में खड़े हुए निठुर देवताओं को भी देखा। तदनन्तर ध्यान करके पूर्व घटित घटनाओं को स्मदण कर देत्यों ने शुक्राचायं से कहा--बामन ने अपने तीन पतमों से समस्त त्रेलोक्य को जीत लिया, बलवान् बलि बाधा गया, परम बलवान जम्भ एवं विरोचन का संहार हुआ, इत प्रकार पुबंकाल में होने वाले बारह घोर

English

In the Puranas he is (eulogised as) Puranalma (the ancient soul). He assumed the physical form of a Boar. He is the most excellent of Suras who redeemed the earth and gave it over to Suras.

अध्याय १८१

श्लोक 25

सुसंवृतं कृतं तेन धावन्वै पृष्ठतो ब्रवीत्

susaṃvṛtaṃ kṛtaṃ tena dhāvanvai pṛṣṭhato bravīt

हिन्दी अर्थ

संग्रामों में देवताओं ने अपने सफल उपायों से प्रमुख-प्रमुख दंत्यों का संहार किया है ।(००-१०४। आप लोग थोड़ी संख्या में शेष रह गये हैं, अब इन अन्तिम युद्धों मे आप सब भी विनष्ट हो रहे हैं, मैं स्वयं अब आप लोगों की विजय प्राप्ति के लिये एक नीति (चाल) बतला रहा हूं कि आप लोग कुछ समय को प्रतीक्षा करें । आप लोगों को विजय के लिए मैं किसी मंत्र प्राप्ति के उद्देश्य से महादेव जी के पास जा रहां हूं । उधर देवपक्ष में उनके गुरु बृहस्पति मंत्रों .द्वारा अग्नि को सन्तुष्ट कर रहे हैं, अर्थात् हवन कर रहे हैं ।(०२-१०६। इसलिए हम भी मंत्र प्राप्ति के लिए भगवान् नीललोहित के पास जा रहे हैं, थोड़े दिन बाद जब मैं यहाँ भा जाऊँगा तब आप सब प९ अनुग्रह करूँगा । आप लोग वन में वल्कल धारणकर तपस्या करें, इस प्रकार जब तक हम यहाँ न आ जाये तब तक आप लोग तपसस्‍्था में ही लगे रहें, इससे देवगण आप सब का संहार

English

Hiranyakasipu, a demon of yore, who possessed great prowess, had been killed by him assuming a leonine body divided into two (as half man, half lion).

अध्याय १८१

श्लोक 26

भृगुरुवाच: पापकर्मन्दुराचार कथं यास्यसि मे वृष ।अवमानं समुत्पाद्य कृत्वा गर्तं खुरैस्तथा

bhṛguruvāca: pāpakarmandurācāra kathaṃ yāsyasi me vṛṣa / avamānaṃ samutpādya kṛtvā gartaṃ khuraistathā

हिन्दी अर्थ

नहीं कर सकेंगे । महामहिमामय भगवान् महेश्वर से अनुकूल फल देने वाले मंत्रों को प्राप्त कर जब हम आजायेंगे तब देवताओं के साथ युद्ध छेड़ देंगे, और तभी हम सबों को विजयप्राप्ति भी होगी।” शुक्राचाय॑ के दिये मये उपदेश का असुरों ने पालन किया, देवताओं के युद्ध के लिए आह्वान करने पर उन्होंने कहा, 'हुम सब लोग अब संसार को झंझटों से मुख्यतया विवाद आदि से मुक्त हो गये हैं, आप लोग जा जाकर

English

Formerly, the omnipresent lord became the Aurva fire (also called) the Samvartaka fire (fire of dissolution), and stationed himself in the nether worlds within the ocean. He drank Havis (sacrificial offerings) in the form of water.

अध्याय १८१

श्लोक 27

गर्जयित्वा महानादं ततो विप्रमपातयत् ।आत्मानं पातितं ज्ञात्वा वृषेण परमेष्ठिना

garjayitvā mahānādaṃ tato vipramapātayat / ātmānaṃ pātitaṃ jñātvā vṛṣeṇa parameṣṭhinā

हिन्दी अर्थ

समस्त लोकों पर अपना अधिकार जमाइये । हम लोग तो वन में वलहकल धारण कर तपस्या करेंगे ।! प्रज्लाद धनुश्रिन्नान्तगंतग्रन्थ: ख. पुस्तके नास्ति ।

English

It is he whom they (the sages) call in every Yuga as the lord with a thousand feet, thousand rays, the lord having thousands (of forms), and thousand heads.

अध्याय १८१

श्लोक 28

भृगुः क्रोधेन जज्वाल हुताहुतिरिवानलः ।करे गृह्य महादण्डं ब्रह्मदण्डम् इवापरम्

bhṛguḥ krodhena jajvāla hutāhutirivānalaḥ / kare gṛhya mahādaṇḍaṃ brahmadaṇḍam ivāparam

हिन्दी अर्थ

पद्द५ वायुपुराणम्

English

When the whole world was a vast sheet of water, the abode of god Brahma (Pitamaha) came out of his navel even as fire comes out of Arani. It (the abode) was a Pankaja(a lotus,

अध्याय १८१

श्लोक 29

हन्तुकामो वृषं विप्रो ऽभ्यधावत युधिष्ठिर ।धावमानं ततो दृष्ट्वा स वृषः पूर्वसागरे

hantukāmo vṛṣaṃ vipro 'bhyadhāvata yudhiṣṭhira / dhāvamānaṃ tato dṛṣṭvā sa vṛṣaḥ pūrvasāgare

हिन्दी अर्थ

ततो देवा निवत्ता व विज्वरा मुदिताश्च ह्। न्यस्तशस्श्रषु देत्येषु स्वान्बे जम्मुयंधाउउ्गतानू ततस्तानब्रवीत्काव्य: कंचित्कालमुपास्यता म् । निरत्सुकेस्तपोयुक्ते: काल कार्यार्थसाधके: पितुममा55श्रमस्था वे सर्वे देवा: सबासवाः

English

The haughty Kalanemi was defeated and struck down by him (the lord) seated on the back of Garuda.

अध्याय १८१

श्लोक 30

जम्बूद्वीपं कुशां क्रौञ्चं शाल्मलिं शाकमेव च ।गोमेदं पुष्करं प्राप्तः पूर्वतो दक्षिणापथम्

jambūdvīpaṃ kuśāṃ krauñcaṃ śālmaliṃ śākameva ca / gomedaṃ puṣkaraṃ prāptaḥ pūrvato dakṣiṇāpatham

हिन्दी अर्थ

स संदिश्यासुरान्काव्यों महादेव प्रपद्य च। प्रणम्येनधुवाचाथ जगत्प्रभवमीश्वरम्

English

(Defective verse) Thanks to the intensity of her penance, formerly Aditi ratained him in her womb like Arani (holding fire within it). When Indra was surrounded by the hosts of Daityas, it was he who saved him by contemptuously warding them off from the womb?

अध्याय १८१

श्लोक 31

उत्तरं पश्चिमं चैव द्वीपाद्द्वीपं नरेश्वर ।पातालं सुतलं पश्चाद्वितलं च तलातलम्

uttaraṃ paścimaṃ caiva dvīpāddvīpaṃ nareśvara / pātālaṃ sutalaṃ paścādvitalaṃ ca talātalam

हिन्दी अर्थ

एवमुक्तो5ब्रवीहेबों मन्त्रानिच्छसि वे द्विज । ब्रतं चर मयोद्दिष्टं ब्रह्मचारी समाहित: तथोक्तो देवदेवेन स शुक्रस्तु महातपा: । पादौ संस्पृश्य देवस्प बाढमित्यभ्यभाषत ११८ ब्रत॑ चराम्यहूँ शेष यथोद्दिष्टोउस्मि वे प्रभो । ततो नियुक्तों देबेन कुण्डधारोधस्य धमकृत्ू.

English

When the Wind-god 2 (?) deprived (Daityas) of their hold (from all positions) in the world and made Daityas remain sub-merged in waters, the primordial Lord made Devas the resident of heaven and made Indra (Puru- huta) the Lord of Devas.

अध्याय १८१

श्लोक 32

तामिस्रमन्धतामिस्रं पातालं सप्तमं ययौ ।ततो जगाम भूर्लोकं प्राणार्थी स वृषोत्तमः

tāmisramandhatāmisraṃ pātālaṃ saptamaṃ yayau / tato jagāma bhūrlokaṃ prāṇārthī sa vṛṣottamaḥ

हिन्दी अर्थ

असुराणां हितार्थाय तस्मिकशुक्ते गते तदा। सन्‍्त्रार्थ तत्र वसति ब्रह्मचर्य महेश्वरे

English

It was the same Adideva 3 who laid down the process of preparing the Ahavanlya fire by means of Garhapatya and Anvaharya rites. He created the altar, the Kusa grass, the proksaniyaSruva (the sacrificial ladle with which the offering is taken or holy water sprinkled) and the materials for Aval hr! ha (the final ablution). He laid down the rules of selecting the three persons 4 (?) entitled to offer Havya in a sacrifice.

अध्याय १८१

श्लोक 33

भुवः स्वश्चैव च महस्तपः सत्यं जनस्तथा ।अनुगम्यमानो विप्रेण न शर्म लभते क्वचित्

bhuvaḥ svaścaiva ca mahastapaḥ satyaṃ janastathā / anugamyamāno vipreṇa na śarma labhate kvacit

हिन्दी अर्थ

के इस प्रकार सत्य को तरह कहे गये वचन को सुनकर देवगणों ने युद्ध करना बन्द कर दिया, उन्हे परम प्रसन्नता एवं शान्ति मिली । दंत्यों के हथियार डाल देने पर देवगण जहाँ थे जेसे आये ये, वहाँ से उसी प्रकार लौट गये ॥! ०७-११ २। तदनन्तर शुक्राचाय॑ ने असुरों से कहा कि इसी प्रकार तुम लोग शान्तिपृ्वंक कुछ समय बिताओ, उस अवधि तक बिना किसी उत्सुकता के तपस्या में लीन रहो जब तक कार्य॑सिद्धि नहीं हो जातीं, क्योंकि इन्द्र समेत समस्त सुर गण हमारे बिताजी के आश्रम में विद्यमान हैं। इस प्रकार असुरों को सन्देश देकर शुक्राचा्यं महादेव जी के पास आये और प्रणाम कर जगत् के उत्पन्नकर्न्ना महेश्वर से इस प्रकार निवेदन किया-देव ! मैं ऐसे मंत्रों को प्राप्त करना चाहता हूँ, जो बृहस्पति को नहीं ज्ञात हैं, देवताओं को पराजित करने के लिए और असुरों को भय रहित करने के लिए यह हमारा प्रयास है।” शुक्राकार्य के इस

English

He made Suras the partakers of Havyas and Pitfs the partakers of Kavyas. In order to enjoy (him-

अध्याय १८१

श्लोक 34

पापं कृत्वैव पुरुषः कामक्रोधबलार्दितः ।ततो जगाम शरणं ब्रह्माणं विष्णुमेव च

pāpaṃ kṛtvaiva puruṣaḥ kāmakrodhabalārditaḥ / tato jagāma śaraṇaṃ brahmāṇaṃ viṣṇumeva ca

हिन्दी अर्थ

प्रकार कहने पर महादेव जी बोले, द्विज ! जिन मंत्रों को प्राप्त करने को तुम्हारी इच्छा है, उनके लिए मेरे आदेशानुसार सावधानता पूबक ब्रह्मचयं व्रत का एक सहस्र व्ध तक पालन करो, और शिर को नीचे करके कुण्ड के धूम का पान करो; यदि ऐसा नियम पालन करोगे तो मुझसे बसे मंत्रों की प्राप्ति होगी ।९ १३-११७। देवदेव महादेव के ऐसा कहने पर महान् तपस्वी शुक्राचाय॑ ने उनके चरणों का स्पर्श किया, और कहा कि बहुत

English

The battle that ensued after the abduction of Tara by Soma.

अध्याय १८१

श्लोक 35

इन्द्रं चन्द्रं तथादित्यैर् याम्यवारुणमारुतैः ।यदा सर्वैः परित्यक्तो लोकालोकैः सुरेश्वरैः

indraṃ candraṃ tathādityair yāmyavāruṇamārutaiḥ / yadā sarvaiḥ parityakto lokālokaiḥ sureśvaraiḥ

हिन्दी अर्थ

अच्छा, आपकी आज्ञा हमें स्वीकार है। प्रभो! आप जैसा बतला रहे हैं, मैं बैसा ही नियम पृव॑क ब्रत पालन करूँगा ।” इस प्रकार महादेव जी की आज्ञा से शुक्राचायं ने असुरों के कल्याणार्थ क्षुण्ड के धृम्न का पान करना प्रारम्भ किया। इधर शुक के देत्यों के पास से जाकर मंत्र के लिये शिवजी के कथनानुसार बरह्मचयं पालन का भेद देवताओं को लग गया। ओर हैत्यों के इस तपस्याचरण एवं राज्य त्याग को एक दृष्ट्वासुरगणा देवान्प्रगृहीतायुधान्पुनः । उत्पेतुः सहसा से संत्रस्तास्ते ततोभवन् १२२ भ्यस्तशस्त्रे जये दत्ते आचायें ब्रतमास्थिते । संत्यज्य समय देवास्ते सपत्नरजिधांसव:

English

Puranas do not attribute this feat to the Wind-god. Bd. -3.72.23 reads padaniyo for yada'nilo hereof. Bd. P. reading means 'He made the regions of world as the abodes of the people'.

अध्याय १८१

श्लोक 36

तदा देवं नमस्कृत्वा रक्ष रक्षस्व चाब्रवीत् ।वध्यमानं महादेवो भृगुणा परमेष्ठिना

tadā devaṃ namaskṛtvā rakṣa rakṣasva cābravīt / vadhyamānaṃ mahādevo bhṛguṇā parameṣṭhinā

हिन्दी अर्थ

अनाचार्यास्तु भद् वो विश्वस्तास्तपसि स्थिताः। चीरवल्काजिनधरा निष्क्रिया निष्परिग्रहाः

English

Verses 25-29 give to Visnu the credit of founding the institution of sacrifice.

अध्याय १८१

श्लोक 37

सर्वलोकैः परित्यक्तमनाथमिव तं प्रभो ।दृष्ट्वा श्रान्तं वृषं देवः पतितं चरणाग्रतः

sarvalokaiḥ parityaktamanāthamiva taṃ prabho / dṛṣṭvā śrāntaṃ vṛṣaṃ devaḥ patitaṃ caraṇāgrataḥ

हिन्दी अर्थ

रणे विजेतुं देवान्वे न शक्यामः कथंचन । अशुद्धेत (? ) प्रपद्यासः शरण काव्यमातरम् १२५ ज्ञापयामः कृत्स्नमिदं यावदागमनं गुरोः विनिवुत्ते ततः काव्ये योत्स्यामो युधि तान्सुरानू एवसुकत्वाइसुरास्पोन्यं शरण काव्यमातरम् । प्रापच्चन्त ततो भीतास्तदा चेव तदा5भयम् ११२७ दत्त तेषां तु भीतानां देत्यानामभयाथिनाम् । न भेतब्यं न भेतव्यं भयं त्यजत दानवाः

English

The reading 'alha trxn iha yakakre (translated here as 'selecting three persons') is wrong. Bd. 3.72.26 reads atharsin Scaivayafcakre 'then he created sages' (for participation in sacrifices).

अध्याय १८१

श्लोक 38

ततः प्रोवाच भगवान् स्मितपूर्वम् इदं वचः

tataḥ provāca bhagavān smitapūrvam idaṃ vacaḥ

हिन्दी अर्थ

मत्संनिधो वर्ततां वो न भीभ॑वितुमहंति । भयाच्चाप्यभिपत्नांस्तानदुष्ट्वाइदेवासुरास्तदा

English

By dint of his supreme power, he created and made resplendent the requisite material for sacrifices such as Yupas (sacrificial posts), Samits (holy twigs), Sruva (sacred ladles), Soma (the creeper or its juice called soma), Pavitra (the special holy ring of Kusa grass), Paridhi (the holy twigs of Palasa etc. laid round the sacrificial fire), the sacrificial fires, sadasyas (members of the sacrificial assembly), Yajamana (the performers of sacrifices) and excellent sacrifices like horse sacrifice and others.

अध्याय १८१

श्लोक 39

ईश्वर उवाच: पश्य देवि महाभागे शमं विप्रस्य सुन्दरि

īśvara uvāca: paśya devi mahābhāge śamaṃ viprasya sundari

हिन्दी अर्थ

चाल समझकर, देवताओं को बड़ा अमर हुआ और वे सब के सब तीक्षण शस्त्रास्त्र धारण कर बृहस्पति को आगे कर दत्यों पर टूट पड़े ।१८-१२१। असुरगण इस प्रकार पुनर्वार देवताओं को शस्त्रास्त्र से सुसज्जित देखकर परम भयभीत हो उठे और तुरन्त भाग पड़े । उन सबों ने सोचा कि ऐसी स्थिति में जब कि हम लोगों ने रण में हथियार डाल दिया है, अपने मुख से ही उनको विजय दे दी है, हमारे आचार्य ब्रत के अनुष्ठान में तत्पर हैं, देवगण युद्ध की प्रथा तोड़कर अपने सौतेले भाइयों (हम सबों को) को मारने के लिए तत्पर हैं, इस समय हमारे आचाय॑ भी नहीं हैं, उनका कल्याण हो, हम लोग तो विश्वस्त होकर तपस्या में निरत हैं, इसीलिए चीर और वल्कल धारण किया है, कुछ काये आदि भी नहीं करते धरते, स्त्री एवं भृत्य भादि भी साथ में नहीं हैं। रण में किसी प्रंकार भी देबताओं को हम जीत नहीं सकते--ऐसी संकट की स्थिति

English

After creating the three worlds in order in accor¬ dance with the Yugas, he made all- the following things: (Measures of Time such as) Ksanas (moments), Nimesas, Kdsfhas, Kalds, and all the three periods of time (past, present, and future), periods of time such as Muhurtas (periods of 48 minutes each), Tithis (days of the.lunar fortnight), months, days, years, seasons, various specific yogas of time, the three kinds of Prarnanas (means of valid knowledge) etc.

अध्याय १८१

श्लोक 40

पार्वत्युवाच: यावद्विप्रो न चास्माकं कुप्यते परमेश्वर ।तावद्वरं प्रयच्छाशु यदि चेच्छसि मत्प्रियम्

pārvatyuvāca: yāvadvipro na cāsmākaṃ kupyate parameśvara / tāvadvaraṃ prayacchāśu yadi cecchasi matpriyam

हिन्दी अर्थ

में शुक्राचायं की माता की शरण में हम सब चल। जब गुरूजी आ जाय॑गे तो उनसे यह सब वृत्तान्त बतलायेंगे, अपने आचाये शुक्र के ब्रतादि से निवृत्त होकर लौट आने पर इन देवताओं से हम फिर युद्ध करेंगे और तब इनसे पूछेंगे ।! २२-१२६। असुरों ने इस प्रकार आपस में सम्मति कर शुक्राचाय की माता की दरण लीं, उस समय वे परम आतंकित हो रहे थे, शरण में जाने पर भय दूर हो गया ।१२७। अभय को प्रार्थना

English

He created the span of life, Ksetras (?fields), increase, characteristics, beauty of form, intellect, wealth, heroism, the ability to comprehend the sacred lore, the three castes, the three Vidyds (Lores), the three fires, the three periods of time, the* three rites, the three Mayas* and the three Gunas (Sattva, Rajas and Tamas). It was by his infinite power (of creation) that he created the worlds, gods. All the Bhutas and Ganas were created by him who is the Atman (soul) of them all (living beings and Bhuta Ganas).

अध्याय १८१

श्लोक 41

ततो भस्मी जटी शूली चन्द्रार्धकृतशेखरः ।उमार्द्धदेहो भगवान्भूत्वा विप्रमुवाच ह

tato bhasmī jaṭī śūlī candrārdhakṛtaśekharaḥ / umārddhadeho bhagavānbhūtvā vipramuvāca ha

हिन्दी अर्थ

करने वाले परम भयभीत असुरों को इस प्रकार शरण में आया देख शुक्राचायं की माता ने सान्त्वना देते हुए कहां, दानवगण ! मत डरो, डरने की आवश्यकता नहीं है, भय छोड़ दीजिये । मेरे समीप में रहते जाइये, पर्दय ... बायुपुराणम्

English

He sports in the sense-organs of men by means of his Yogic power. He is the lord of diverse things. He is present everywhere. He is the leader of arrivals and departures {Gala and Agata) i.e. all sorts of movements.

अध्याय १८१

श्लोक 42

भोभो द्विजवरश्रेष्ठ क्रोधस्ते न शमं गतः ।यस्मात् तस्माद् इदं तात क्रोधस्थानं भविष्यति

bhobho dvijavaraśreṣṭha krodhaste na śamaṃ gataḥ / yasmāt tasmād idaṃ tāta krodhasthānaṃ bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

अभिजच्नुः प्रसहातानविचार्य बलाबलम् । तांस्त्रस्तान्वध्यमानांश्व देवद् ष्ट्बाउसुरांस्तदा.

English

He is the goal unto those endowed with piety and virtue and is inaccessible to those of sinful deeds. He is the source of origin of the system of four castes and protector of the

अध्याय १८१

श्लोक 43

ततो दृष्ट्वा च तं शम्भुं भृगुः श्रेष्ठं त्रिलोचनम् ।जानुभ्याम् अवनिं गत्वा इदं स्तोत्रम् उदैरयत्

tato dṛṣṭvā ca taṃ śambhuṃ bhṛguḥ śreṣṭhaṃ trilocanam / jānubhyām avaniṃ gatvā idaṃ stotram udairayat

हिन्दी अर्थ

देवी क़द्धाभ्रवीदेनाननिद्रत्वं करोम्यहम् । संस्तभ्य शीघ्र संरम्भादिन्द्रं साउस्यचरत्ततः ततः संस्तंभितं दृष्ट्वा शक्कर देवास्तु यूपवत् । व्यद्रबन्त ततो भीता दृष्द्वा शक्न॑ वशीकृतम्

English

He is the Vedya (one who should be known) for the Vedic scholars; he is the lord of all powerful persons. He is the Soma to all living beings; he is the Agni (Fire-god) for those of fiery splendour.

अध्याय १८१

श्लोक 44

भृगुरुवाच: प्रणिपत्य भूतनाथं भवोद्भवं भूतिदं भयातीतम् ।भवभीतो भुवनपते विज्ञप्तुं किंचिदिच्छामि

bhṛguruvāca: praṇipatya bhūtanāthaṃ bhavodbhavaṃ bhūtidaṃ bhayātītam / bhavabhīto bhuvanapate vijñaptuṃ kiṃcidicchāmi

हिन्दी अर्थ

गतेषु सुरसंघेषु विष्णुरिन्द्रमभाषत । मां त्वं प्रविश भद्र ते नेष्पासि त्वां सुरेश्वर १३३ एवमुक्तस्ततो विष्णु प्रविवेश पुरंदरः। विष्णुना रक्षितं दृष्ट्वा देवी छुद्धा वचो5बदत्

English

He is the mind of men; he is the penance of the asce¬ tics; he is the modesty of those satisfied with good policy and he is the splendour of the refulgent.

अध्याय १८१

श्लोक 45

त्वद्गुणनिकरान्वक्तुं का शक्तिर्मानुषस्यास्य ।वासुकिरपि न तावद्वक्तुं वदनसहस्रं भवेद्यस्य

tvadguṇanikarānvaktuṃ kā śaktirmānuṣasyāsya / vāsukirapi na tāvadvaktuṃ vadanasahasraṃ bhavedyasya

हिन्दी अर्थ

एषा त्वां विष्णुना सार्थ दहासि मघवानिव(? )। मिषतां स्वभुतानां दृश्यतां से तपोबलम् ॥ तथाभिभृतौ तौ देवाविन्द्राविष्ण जजल्पतुः । कथं मुच्येव सहितो विष्णुरिन्द्रमभभाषत १३६

English

He is the Vigraha (body) 'of all embodied beings. He is the goal of those who achieve their goal 1.

अध्याय १८१

श्लोक 46

भक्त्या तथापि शङ्कर शशिधर करजालधवलिताशेष ।स्तुतिमुखरस्य महेश्वर प्रसीद तव चरणनिरतस्य

bhaktyā tathāpi śaṅkara śaśidhara karajāladhavalitāśeṣa / stutimukharasya maheśvara prasīda tava caraṇaniratasya

हिन्दी अर्थ

ततः समीक्ष्य तां विष्णु: स्त्रीवर्ध कतुंमास्थितः । अभिध्याय ततश्रक्कलमापन्नः सत्वरं प्रभु:

English

From flesh fat is produced and bone is developed from fat. Pith and marrow are developed from bone and semen virile is generated from marrow; foetus is developed from semen through the assimilative activity of Rasa —bodily fluid (or through the activity rooted in sexual pleasure). At

अध्याय १८१

श्लोक 47

सत्त्वं रजस्तमस्त्वं स्थित्युत्पत्तिविनाशनं देव ।भवभीतो भुवनपते भुवनेश शरणनिरतस्य

sattvaṃ rajastamastvaṃ sthityutpattivināśanaṃ deva / bhavabhīto bhuvanapate bhuvaneśa śaraṇaniratasya

हिन्दी अर्थ

यहाँ पर भय करने को आवश्यकता नहीं है । वहाँ पर भय से रहित उन असुरों को देखकर देवताओं ने पराक्रम दिल्ललाकर बल अबल का कुछ भी विचार न करके उनका खूब संहार किया । देवताओं द्वारा मारे जाते हुए उन अथुरों को देखकर देवी शुक्राचायं की माता परम कुंद्ध हुई और देवताओं से बोली कि मैं तुम सब को इन्द्र से विहीन कर रही हूँ, इस प्रकार कहकर बड़े क्रोध से देवी ने इन्द्र को स्तम्भित कर दिया और स्वयं इधर उधर घूमने लगीं । इन्द्र को यज्ञ के खम्गे की तरह स्तम्भित दशा में खड़ा देखकर और उन्हें परवश जानकर देवगण परम भयभीत हुए और भागने लग्मे । देवताओं के भाग जाने पर विष्णु ने इन्द्र से कहा 'सुरेश्वर ! तुम मेरे शरीर में प्रविष्ट हो जाओ, मैं तुझे यहाँ से अन्यत्र ले चलूँ ।१२५- १३३।' विष्ण के ऐसा कहने पर इन्द्र ने उनके शरीर में प्रवेश कर लिया इन्द्र को विष्णु द्वारा इस प्रकार

English

Or: He is the velocity of those which are in motion.

अध्याय १८१

श्लोक 48

यमनियमयज्ञदानं वेदाभ्यासश्च धारणायोगः ।त्वद्भक्तेः सर्वमिदं नार्हन्ति वै कलासहस्रांशम्

yamaniyamayajñadānaṃ vedābhyāsaśca dhāraṇāyogaḥ / tvadbhakteḥ sarvamidaṃ nārhanti vai kalāsahasrāṃśam

हिन्दी अर्थ

सुरक्षित देखकर देवी पुनः परम कुपित हुईं और बोलीं, “मघवन् ! मैं अब तुमको यहीं पर सभी लोगों को देखते- देखते विष्णु के साथ जला रही हूँ, मेरे तपोबल को देखो ।' इस प्रकार शुक्राचायं कौ माता द्वारा पराजित होकर उन दोनों देवताओं ने आपस में सम्मति की, विष्णु ने इन्द्र से कह्दा कि अब हम दोनों किस प्रकार बच सकते हैं। इन्द्र ने कहा, प्रभो! जब तक यह हम दोनों को जलाने जा रही है तब पक इसी का

English

Verses 44b-57 deal with embryology with special emphasis on Visnu's power.

अध्याय १८१

श्लोक 49

उत्कृष्टरसरसायनखड्गां जनविवरपादुकासिद्धिः ।चिह्नं हि तव नतानां दृश्यत इह जन्मनि प्रकटम्

utkṛṣṭarasarasāyanakhaḍgāṃ janavivarapādukāsiddhiḥ / cihnaṃ hi tava natānāṃ dṛśyata iha janmani prakaṭam

हिन्दी अर्थ

काम तमाम कर दीजिये। मैं तो इस समय बहुत ही असमर्थ और पराजित हो गया हूं, अतः तुम्हीं इसको मारो, तनिक भी देश न करो ।१३४-६३७ १” विष्णु उस देवी को इस प्रकार जलाने के लिए उद्यत देखकर स्त्री-बध करने के लिए उद्यत हुए। प्रभु ने इस आपत्तिपूर्ण दशा में अपने सुदर्शनचक्र का ध्यान किया, जिससे असुरों का संहारक, परम शीघ्रता से लक्ष्य को नष्ट करने वाला वह॒ चक्र इन्द्र और विष्णु को जलाने में शीघ्रता करने वाली शुक्राचाय को माता के सम्मुख उपस्थित हो गया। भगवान् विष्णु

English

These two secretions (evolutes) follow Rasa (lympha¬ tic juice). In semen (the mixture of semen and menstrual blood) there are Soma (Moon) and fire. Semen comes under the category of Kapha (phlegmatic humour) and menstrual blood comes under the category of Pitta (bilious humour).

अध्याय १८१

श्लोक 50

शाठ्येन यदि प्रणमति वितरसि तस्यापि भूतिमिच्छया देव ।भवति भवच्छेदकरी भक्तिर्मोक्षाय निर्मिता नाथ

śāṭhyena yadi praṇamati vitarasi tasyāpi bhūtimicchayā deva / bhavati bhavacchedakarī bhaktirmokṣāya nirmitā nātha

हिन्दी अर्थ

तस्याः सत्वरमाणायाः शीघ्रकारों सुरारिहा । स्त्रिया विष्णुस्ततो देव्या: क्लूरं बुदध्वा चिकीषितम्॥

English

The receptacle of Kapha is heart. Pitta is held in navel. Heart in the centre of body is the place of mind.

अध्याय १८१

श्लोक 51

परदारपरस्वरतं परपरिभवदुःखशोकसंतप्तम् ।परवदनवीक्षणपरं परमेश्वर मां परित्राहि

paradāraparasvarataṃ paraparibhavaduḥkhaśokasaṃtaptam / paravadanavīkṣaṇaparaṃ parameśvara māṃ paritrāhi

हिन्दी अर्थ

त॑ दृष्ट्वा स्त्रीव्ध घोरं चुकोप भूगुरीश्वरः । ततोइभिशप्तो भृगुणा विष्णुर्भायवधे तदा. यस्मात्ते जानता धर्मानवध्या स्त्री निष्दिता । तस्मात्त्वं सप्तकृत्वो वे मानुषेषु प्रवत्स्यथसि

English

Lord Hutasana (Fire) is stationed in the umbilical cavity. Mind should be known as Prajapati (Brahma) and Kapha is considered as Soma (Moon).

अध्याय १८१

श्लोक 52

अधिकाभिमानमुदितं क्षणभङ्गुरविभवविलसन्तम् ।क्रूरं कुपथाभिमुखं शङ्कर शरणागतं परित्राहि

adhikābhimānamuditaṃ kṣaṇabhaṅguravibhavavilasantam / krūraṃ kupathābhimukhaṃ śaṅkara śaraṇāgataṃ paritrāhi

हिन्दी अर्थ

ततस्तेनाभिशापेन नष्टे धर्मे पुनः पुनः । लोके सर्बहितार्थाय जायते मानुषेष्विह १४२ अनुग्याहृत्य विष्णु स तदादाय शिरः स्वयम् । सामानीय ततः काये अपो गृह्येदमब्रवीतू

English

Pitta is considered as fire. Hence the universe consists of Agni and Soma. The foetus thus originating stays there like a patch of cloud.

अध्याय १८१

श्लोक 53

दीनं द्विजं वरार्थे बन्धुजने नैव पूरिता ह्याशा ।छिन्द्धि महेश्वर तृष्णां किं मूढं मां विडम्बयसि

dīnaṃ dvijaṃ varārthe bandhujane naiva pūritā hyāśā / chinddhi maheśvara tṛṣṇāṃ kiṃ mūḍhaṃ māṃ viḍambayasi

हिन्दी अर्थ

एष त्वां विष्णना सत्ये हतां संजीवयास्हम् । यदि फृत्स्नों गया धर्मश्वारितो ज्ञायतेडषपि वा ॥ तेन सत्येन जीवस्व यदि सत्य ब्रवीम्यहम्

English

Vayu enters and becomes united with the great soul. It is divided into five within the body and develops (the foetus).

अध्याय १८१

श्लोक 54

तृष्णां हरस्व शीघ्रं लक्ष्मीं दद हृदयवासिनीं नित्यम् ।छिन्द्धि मदमोहपाशं मामुत्तारय भवाच्च देवेश

tṛṣṇāṃ harasva śīghraṃ lakṣmīṃ dada hṛdayavāsinīṃ nityam / chinddhi madamohapāśaṃ māmuttāraya bhavācca deveśa

हिन्दी अर्थ

सत्याभिव्याहता तस्य देवी संजीविता तदा तदा तां प्रोक्ष्य शोताभिरखज्दिजीविति सो5ब्रवीत्

English

The five divisions are Prana, Apana, Samdna, Udana and Vyana, Among them Prana moves round and develops the great soul.

अध्याय १८१

श्लोक 55

करुणाभ्युदयं नाम स्तोत्रम् इदं सर्वसिद्धिदं दिव्यम् ।यः पठति भृगुं स्मरति च शिवलोकम् असौ प्रयाति देहान्ते

karuṇābhyudayaṃ nāma stotram idaṃ sarvasiddhidaṃ divyam / yaḥ paṭhati bhṛguṃ smarati ca śivalokam asau prayāti dehānte

हिन्दी अर्थ

दृष्ट्वा संजीवितामेवं देवी तां भूगुणा तदा । भिषतां सर्वभुतानां तदद्भतमिवाभवत् ११४७ असंअान्तेन भृगुणा पत्नीं संजीवितां ततः। दृष्ट्वा शक्नों न लेभेष्य शर्म काव्यभयात्ततः उस देवी को परम मुझंस कार्य करने के लिए समुग्रत जानकर परम क्रूढ हो गये थे अतः लक्ष्मीपति होकर भी उन्होंने स्त्री के शिर को अपने चक्र से काट डाला ।१३५-१३६। इस कठोर स्त्री वध को देखकर परम ऐद्वर्यंशाली महषि भगु अत्यम्त ऋुद हुए, और उस समय उन्होंने अपनी स्त्री का निधन हो जाने पर विष्णु को इस प्रकार का शाप दिया-यतः धर्म की महत्ता को भली भाँति जानते हुए भी तुमने एक अबला की ह॒त्या की,

English

Apana m is situated in the lower half of the body. Udana circulates in the upper half of the body. Vyana is called so because it pervades the whole body. Samdna is present in all the joints.

अध्याय १८१

श्लोक 56

एतच्छ्रुत्वा महादेवः स्तोत्रं च भृगुभाषितम् ।उवाच वरदो ऽस्मीति देव्या सह वरोत्तमम्

etacchrutvā mahādevaḥ stotraṃ ca bhṛgubhāṣitam / uvāca varado 'smīti devyā saha varottamam

हिन्दी अर्थ

अत: तुम सात बार मनुष्य लोक में जन्म धारण कर निवास करोगे ” भृगु के इस शाप के वश होकर भगवान् विष्णु धर्म के नष्ट हो जाने पर सब प्रजावर्म के कल्याण के लिए बारम्बार जन्म धारण करते हैं । तदनन्तर भृगु ते भगवान् विष्ण को इस प्रकार शाप देकर स्वयमेव देवी का शिर लेकर उसे शरीर से संयुक्त कर और जल लेकरु यह बचन बोले--हे सत्ये ! विष्णु के ढारा मारी गई तुझको मैं यह पुनः जीवित कर रहा हूँ, यदि मैंने

English

Thereafter, the five elements, viz. Earth, Wind, Ether, Water and Fire the fifth one, are attained by the foetus. Then it becomes perceivable by the sense-organs.

अध्याय १८१

श्लोक 57

भृगुरुवाच: प्रसन्नो देवदेवेश यदि देयो वरो मम ।सिद्धिक्षेत्रम् इदं सर्वं भविता मम नामतः

bhṛguruvāca: prasanno devadeveśa yadi deyo varo mama / siddhikṣetram idaṃ sarvaṃ bhavitā mama nāmataḥ

हिन्दी अर्थ

धर्म के समस्त तत्त्वों की पूरी जानकारी प्राप्त की है तथा सर्वाशत) पालन किया है, तो हमारे उस सत्य से तुम के इस प्रकार सत्य वचन बोलने पर जब देवी जीवित हो उठीं, तब उन्होंने शीवल जल से प्रोक्षित कर पुनः कहा, 'जी उठो ।” तदनन्‍्तरः समस्त जीवों ने देवी को सोकर उठी हुई की तरह देखा, दसों दिशाओं से 'साधु- साधु” की अदृश्य ध्वनि सुनाई पड़ने लगी । सभी लोगों के सामने महर्षि भृगु द्वारा देवी की इस प्रकार जीवित हो जाना एक अद्भूत घटना की तरह हुआ । परम सावधान चित्त वाले मह॒ृषि भूगु द्वारा पत्नी को जीवित

English

All the sense-organs enter into that (foetus) and per¬ form their respective functions. They call it then the earthly (physical) body and the wind is called Pranatman (having the characteristic form of Prana, the vital air).

अध्याय १८१

श्लोक 58

भवद्भिः सन्निधानेन स्थातव्यं हि सहोमया ।देवक्षेत्रमिदं पुण्यं येन सर्वं भविष्यति

bhavadbhiḥ sannidhānena sthātavyaṃ hi sahomayā / devakṣetramidaṃ puṇyaṃ yena sarvaṃ bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

देखकर इन्द्र शुक्राचायं के भय से परम भीत हो उठे, उनके मन में तनिक भी शान्ति न ट्री रही । रात भर नींद

English

The pores of the body have Ether as the source of their origin. It is from the element water that the liquid form- O highly intelligent one, please tell us the story of the wonderful nativity of Visnu. May the wonderful and pleasing narrative be recounted.

अध्याय १८१

श्लोक 59

अत्र स्थाने महास्थानं करोमि जगदीश्वर ।तव प्रसादाद्देवेश पूर्यन्तां मे मनोरथाः

atra sthāne mahāsthānaṃ karomi jagadīśvara / tava prasādāddeveśa pūryantāṃ me manorathāḥ

हिन्दी अर्थ

है०० वायुपुराणम् एष काध्यो ह्ान्द्रिय चरते दारुणं तपः । तेनाहूं व्याकुलः पुत्रि कृतो धृतिमता दृढम )

English

The manifestations of the noble soul of reputed strength and prowess are wonderful. The inherent power of Visnu who has become miraculous on account of his wonderful deeds be please narrated.

अध्याय १८१

श्लोक 60

ईश्वर उवाच: श्रिया कृतमिदं पूर्वं किं न ज्ञातं त्वया द्विज ।अनुमान्य श्रियं देवीं यदीयं मन्यते भवान्

īśvara uvāca: śriyā kṛtamidaṃ pūrvaṃ kiṃ na jñātaṃ tvayā dvija / anumānya śriyaṃ devīṃ yadīyaṃ manyate bhavān

हिन्दी अर्थ

देवी सा हीखबुहिता जयस्ती शुभचारिणी। युक्तध्यानं च शाम्यन्तं दुबंलं धतिमास्थितमू

English

I shall glorify the manifestation of the noble soul, how that lord of great penance was born among human beings. His incarnations in the human world as a result of Bhrgu's curse were seventyseven in number*. He incarnates at the closing periods of the Yugas for realising the purpose of Devas.

अध्याय १८१

श्लोक 61

कुरुष्व यदभिप्रेतं त्वत्कृतं नः तदन्यथा ।एवमुक्त्वा गते देवे स्नात्वा गत्वा भृगुः श्रियम्

kuruṣva yadabhipretaṃ tvatkṛtaṃ naḥ tadanyathā / evamuktvā gate deve snātvā gatvā bhṛguḥ śriyam

हिन्दी अर्थ

पित्रा यथोक्तं काव्य स काव्ये कृतव॒ती तदा । गीभिश्रवानुकलाभिः स्तुबती वल्गुभाषिणी गान्रसंवाहने: काले सेव्यमाना सुखावहैः । शुश्रषन्त्यनुकुला च उवास बहुलाः समा:

English

Listen and understand (the details of) the divine personality of Visnu, as I recount it. When the Yuga-Dharma (practice of Dharma —virtue—peculiar to a Yuga) gets rever¬ sed and declined and the time becomes slack and inactive, the Lord incarnates in order to stabilise righteousness (Dharma) in human beings. (These incarnations are) due to the curse of

अध्याय १८१

श्लोक 62

कृत्वा च पारणं तत्र वसन्विप्रस्तया सह ।श्रिया च सहितः काल इदं वचनम् अब्रवीत्

kṛtvā ca pāraṇaṃ tatra vasanviprastayā saha / śriyā ca sahitaḥ kāla idaṃ vacanam abravīt

हिन्दी अर्थ

पुर्णे धम्नव्नते चापि घोरे वर्षसहल्रिके । वरेणच्छन्दयामास काव्य॑ प्रीतो5भवत्तदा

English

How can he incarnate as a result of the mutual struggle between Devas and Asuras? We wish to know this, How did the mutual clash between Devas and Asuras take place? Thereafter the suzerainty over the three worlds was hereditarily established by Bali. There was great friendship between Devas and Asuras.

अध्याय १८१

श्लोक 63

भृगुरुवाच: यदि ते रोचते भद्रे दुःखासीनं च ते यदि ।त्वया वृते महाक्षेत्रे स्वीयं स्थानं करोम्यहम्

bhṛguruvāca: yadi te rocate bhadre duḥkhāsīnaṃ ca te yadi / tvayā vṛte mahākṣetre svīyaṃ sthānaṃ karomyaham

हिन्दी अर्थ

एवं ब्र॒व॑स्त्वयेकेन चीर्ण नान्येन केनचित् । तस्मात्त्वं तपसा बुद्धथा भुतेन च बलेन च तेजसा चापि विद्युधान्सर्वानभिभविष्यसि । यच्च किचिन्सम ब्रह्मन्विद्यते भगुनन्दन

English

For ten Yugas all the inhabitants of the universe mixed together without any interruption. Both Devas and Asuras abided by the directions of those two (Daityas).

अध्याय १८१

श्लोक 64

श्रीरुवाच: मम नाम्ना तु विप्रर्षे तव नाम्ना तु शोभनम् ।स्थानं कुरुष्वाभिप्रेतमविरोधेन मे मतिः

śrīruvāca: mama nāmnā tu viprarṣe tava nāmnā tu śobhanam / sthānaṃ kuruṣvābhipretamavirodhena me matiḥ

हिन्दी अर्थ

साज्र च सरहस्यं च यज्ञोपनिषदां तथा। प्रतिभास्यति ते सर्व तच्चा55चन्तं (? )न कस्यचित्

English

(Later on) a terrible, violent dispute arose between Devas and Asuras. It caused horrible devastation to both of them. Many battles were fought between them for their respective share in the patrimony. 2 It is remembered that in this Varaha Kalpa twelve battles ending with the participation of Sanqlamarka (took place).

अध्याय १८१

श्लोक 65

भृगुरुवाच: कच्छपाधिष्ठितं ह्येतत्तस्य पृष्ठिगतं रमे ।संमन्त्र्य सहितं तेन शोभनं भवती कुरु

bhṛguruvāca: kacchapādhiṣṭhitaṃ hyetattasya pṛṣṭhigataṃ rame / saṃmantrya sahitaṃ tena śobhanaṃ bhavatī kuru

हिन्दी अर्थ

नहीं आयी ।९४५-१४८। इस प्रकाश अत्यन्त व्याकुल होकर परम बुद्धिमान पाकशासन इन्द्र ने अपनी पुत्री जयन्ती से कहा, बेटी ! देत्यों के गुरु शुक्राचार्य मेरे विनाश के लिए परम कठोर तपस्या कर रहे हैं, वे परम धर्यशाली हैं, इस कार्य के लिए उन्होंने दुढ़ निश्चय भी कर लिया है, उनके इस कम से मैं बहुत व्याकुल हूँ । तृ" जा और उनके कष्टों एवं कठिनाइयों को दूर करने घाले अपने श्रेष्ठ एवं मद्भलदायी कार्यों से उन्हें प्रसन्न कर, उनके मन के अनुकल रहकर विविध सेवाओं द्वारा उन्हें सावधानतापुर्वंक प्रसन्न करने की चेष्टा कर शुभ कम करने वाली इन्द्र की पुत्री जयन्ती स्वभाव से देवी थी, उसने जाकर देखा तो शुक्राचार्य उस समय

English

Listen to them even as I am recounting them succinctly by their names. The first war is called Narasimha (that caused by the Man-Lion). The second was Vamana the act of the Dwarf (incarnation of Visnu.)

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 181
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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