Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
185
अध्याय 185 / 232

Adhyaya 185

3 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ3 श्लोक

अध्याय १८५

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे धौतपापतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम चतुरशीत्युत्तरशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १८५ श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेन्महीपाल एरण्डीतीर्थमुत्तमम् ।स्नानमात्रेण तत्रैव ब्रह्महत्या प्रणश्यति

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe dhautapāpatīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma caturaśītyuttaraśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 185 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gacchenmahīpāla eraṇḍītīrthamuttamam / snānamātreṇa tatraiva brahmahatyā praṇaśyati

हिन्दी अर्थ

तुषार, बबंर, पुलिन्द, दरद, खस, लम्पक, अन्ज्क, रुद्र, किरात प्रभूति सबको परम ऐश्वयंशाली, बलवान, स्लेच्छों को नष्ट करने वाले भगवान् नष्ट कर देंगे और समस्त जीवों से अद्रय रहकर पृथ्वी भर में विचरण करेंगे। १०४-१०६। जो भगवान् विष्ण पूर्वजन्म में परमबलशाली प्रमिति के रूप में वर्तमान रहते हैं, वे ही देवांश भूत होरर मनुष्य योति में जन्म धारण करते हैं। कलियुग के पूर्ण हो जाने पर चन्द्रमा के समान शरीर धारण कर वे ही उत्पन्न हुए थे । उन परम महिमामय भगवान् की ये दस सम्भूतियाँ (अवतार) कही गईं हैं। जो-जो समय, शरीर, और कारण भगवान् के अबतारों के लिये ऊपर कहे गये हैं, उनकी परिस्थिति के अनुसार अंधावतार भगवान विष्णु ते उन योनियों में जन्म धारण किया ।११०-११२। पच्चीसवों कल्प आते वर पच्चीस वर्ष जब व्यतीत हो जाता है, उस समय भगवान् समस्त जीवों का विनाश करते हुए मनुष्यों को

English

He stayed along with her for ten years. Being envelop¬ ed with Maya (illusive power), he was invisible to all living beings.

अध्याय १८५

श्लोक 2

मासि चाश्वयुजे तत्र शुक्लपक्षे चतुर्दशीम् ।उपोष्य प्रयतः स्नातस्तर्पयेत् पितृदेवताः

māsi cāśvayuje tatra śuklapakṣe caturdaśīm / upoṣya prayataḥ snātastarpayet pitṛdevatāḥ

हिन्दी अर्थ

सर्वाधतः नष्ट करते हुए, अपने ऋर कर्म द्वारा प्रृथ्वी को बीजावशेष कर देते हैं, अपर कहे गये उन परम अधामिक बुषलों का संहार कर सेनाओं के समेत अपने अवतार धारण को वे चरितार्थ (सफल) कर देते हैं। उस समय की प्रजाएँ अपने कर्मों द्वारा यद्यपि नाश को प्राप्त हो जाती हैं, फिर भी उन्हें पुनः स्वयमेव सिद्धि प्राप्त होती है । तदनन्तर अकस्मात् वे आपस में ही एक दूसरे के ऊपर मोहबरश कृषित हो जाँयगी, भावीवश

English

On seeing (learning) that Kavya had returned after realising his desires, all Daityas delightedly came to his house desirous of seeing him.

अध्याय १८५

श्लोक 3

पुत्रर्द्धिरूपसम्पन्नो जीवेच्च शरदां शतम् ।शिवलोकं मृतो याति नात्र कार्या विचारणा

putrarddhirūpasampanno jīvecca śaradāṃ śatam / śivalokaṃ mṛto yāti nātra kāryā vicāraṇā

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार के गृह कलह में निरत उन सारी प्रजा ओ का विनाश कर अपने अनुचरों समेत वे भगवान् गज़ा यमुना के संगम पर अस्ने इस घोर कमे की समाप्ति करेंगे (१ १३-११६१। तदन्तर कल्कि रूपधारी भगवान् के अवसान हो जाने पर, साधारण सैनिकों के साथ राजाओं के नष्ट हो जाने पर प्रजाएँ आशभ्रय-विहीन हो

English

Sukra said: "O gentle lady, let us go to see your disciples, O lady of sweet smiles and of tremulous eyes, O chaste lady, O lady of large eyes of three colours".

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 185
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.