अध्याय १८५
श्लोक 1
॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे धौतपापतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम चतुरशीत्युत्तरशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १८५ श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेन्महीपाल एरण्डीतीर्थमुत्तमम् ।स्नानमात्रेण तत्रैव ब्रह्महत्या प्रणश्यति
|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe dhautapāpatīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma caturaśītyuttaraśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 185 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gacchenmahīpāla eraṇḍītīrthamuttamam / snānamātreṇa tatraiva brahmahatyā praṇaśyati
हिन्दी अर्थ
तुषार, बबंर, पुलिन्द, दरद, खस, लम्पक, अन्ज्क, रुद्र, किरात प्रभूति सबको परम ऐश्वयंशाली, बलवान, स्लेच्छों को नष्ट करने वाले भगवान् नष्ट कर देंगे और समस्त जीवों से अद्रय रहकर पृथ्वी भर में विचरण करेंगे। १०४-१०६। जो भगवान् विष्ण पूर्वजन्म में परमबलशाली प्रमिति के रूप में वर्तमान रहते हैं, वे ही देवांश भूत होरर मनुष्य योति में जन्म धारण करते हैं। कलियुग के पूर्ण हो जाने पर चन्द्रमा के समान शरीर धारण कर वे ही उत्पन्न हुए थे । उन परम महिमामय भगवान् की ये दस सम्भूतियाँ (अवतार) कही गईं हैं। जो-जो समय, शरीर, और कारण भगवान् के अबतारों के लिये ऊपर कहे गये हैं, उनकी परिस्थिति के अनुसार अंधावतार भगवान विष्णु ते उन योनियों में जन्म धारण किया ।११०-११२। पच्चीसवों कल्प आते वर पच्चीस वर्ष जब व्यतीत हो जाता है, उस समय भगवान् समस्त जीवों का विनाश करते हुए मनुष्यों को
English
He stayed along with her for ten years. Being envelop¬ ed with Maya (illusive power), he was invisible to all living beings.