Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
190
अध्याय 190 / 232

Adhyaya 190

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अध्याय १९०

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे नर्मदामाहात्म्ये उदीर्णवराहतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नामैकोननवत्युत्तरशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १९० श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेन्महीपाल सोमतीर्थमनुत्तमम् ।चन्द्रहासेति विख्यातं सर्वदैवतपूजितम्

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe narmadāmāhātmye udīrṇavarāhatīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāmaikonanavatyuttaraśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 190 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gacchenmahīpāla somatīrthamanuttamam / candrahāseti vikhyātaṃ sarvadaivatapūjitam

हिन्दी अर्थ

पुरो: पुत्रो महाबाहुराजा5इसोज्जनमिेजयः । अविद्धस्तु सुतस्तस्य यः प्राचीसमजयदिशम् !!१२० अविद्धतः प्रवीरस्तु मनस्युरभवत्सुतः। राजाइथो जयदों नाम मनस्योरभवत्सुत:

English

o dear one, a strong one like you has not been met with by me anywhere, even though I had been bearing the three-eyed lord (everywhere), as a result of which I have come down to the earth.

अध्याय १९०

श्लोक 2

यत्र सिद्धिं परां प्राप्तः सोमो राजा सुरोत्तमः

yatra siddhiṃ parāṃ prāptaḥ somo rājā surottamaḥ

हिन्दी अर्थ

आत्रेयों वंशतस्तासां भर्ता नाम्ना प्रभाकर: । अनादुृष्टस्तु राजवों रिवेयुस्तस्थ चापत्मजः रिवेयोज्वलना नाम भार्या ये तक्षफात्मजा यसयां देव्यां स राजर्थी रस्ति नाम ह्ाजीजनत्

English

O most excellent one among strong persons, leave me off. I am pleased with you. Choose a boon". On being told thus, the sage told the bull: "Where will you go alive, away from me?

अध्याय १९०

श्लोक 3

युधिष्ठिर उवाच: कथं सिद्धिमनुप्राप्तः सोमो राजा जगत्पतिः ।तत्सर्वं श्रोतुमिच्छामि कथयस्व ममानघ

yudhiṣṭhira uvāca: kathaṃ siddhimanuprāptaḥ somo rājā jagatpatiḥ / tatsarvaṃ śrotumicchāmi kathayasva mamānagha

हिन्दी अर्थ

सूत बोले--ऋषिवन्द ! राजा पुरु का पुत्र महाबाहु जममेजय हुआ, उसका पुत्र अविद्ध था, जिसने पूर्व दिशा को जीता था । अविद्ध से प्रवीर नामक पुत्र उत्पन्न हुआ, जिसका पुत्र मनस्थु थां। उस मनस्थु का पुत्र राजा जयद हुआ । जयद का उत्तराधिकारी राजा धुन्धु था, धुन्धु का पुत्र वहुगवी था, जिसका पुत्र संजाति था सजाति का पुन्र॒रौद्राइव था, उसके पुत्रों का वणन सुनिये। उस रोद्राइव के घताची

English

Hence I will not release you, the quadruped that eats others' wealth". Then that bull replied to DIrghatamas:

अध्याय १९०

श्लोक 4

मार्कण्डेय उवाच: पुरा शप्तो मुनीन्द्रेण दक्षेण किल भारत ।असेवनाद्धि दाराणां क्षयरोगी भविष्यसि

mārkaṇḍeya uvāca: purā śapto munīndreṇa dakṣeṇa kila bhārata / asevanāddhi dārāṇāṃ kṣayarogī bhaviṣyasi

हिन्दी अर्थ

नामक अप्सरा में दस पुत्र उत्पन्न हुए, जिनके नाम रजेयु, इतेयु, कक्षेयु, स्थण्डिलेयु, घृतेयु, जलेयु, स्थले यू धर्मेयु, संनतेयु और वनेयु थे । इन पुत्रों के अतिरिक्त रौद्राब्व की दश पुन्रियाँ भी थीं, जिनके नाम थे, दुद्रा, कत्याओं का एक मात्र स्वामी अन्िवंश्ोत्पन्न प्रभाकर था राजषि अवादृष्ठ का पुत्र रिवेयु था । उस राजा रिवेयु कौ पत्नी ज्वलना तक्षक की पुत्री थी। राजधषि रिवेयु ने ज्वलना में रत्मि नामक पुत्र कों उत्पन्न किया । नरवति रन्ति ने सरस्वती नामक अपनी पत्नी में त्रसु, अप्रतिरथ, और क्रूव नामक परम धामिक कल्याण कामनावाले पुत्रों को उत्पन्न किया । उसकी एक मद्भुलदायिनी कन्या गौरी थीं, जो राजा मास्धाता की माता हुईं। राजा

English

"O dear one, to us nothing is sinful. There is no theft. We do not distinguish between what should be eaten or what should not be eaten or what should be drunk or should not be drunk.

अध्याय १९०

श्लोक 5

उद्वाहितानां पत्नीनां ये न कुर्वन्ति सेवनम् ।या निष्ठा जायते तेषां तां शृणुष्व नरोत्तम

udvāhitānāṃ patnīnāṃ ye na kurvanti sevanam / yā niṣṭhā jāyate teṣāṃ tāṃ śṛṇuṣva narottama

हिन्दी अर्थ

अप्रतिरथ का पुत्र धुये हुआ, जिसका पुत्र कण्ठ हुआ ।१२७-१३०। उस कण्ठ का पुत्र मेधातिथि था, जिससे

English

We do not know what should be done or what should not be done, what should be approached or what should not be approached. O Brahmana, we are not sinners. This is remembered as the Dharmaofcows and bulls". 1 2

अध्याय १९०

श्लोक 6

ऋतुकाले तु नारीणां सेवनाज्जायते सुतः ।सुतात्स्वर्गश्च मोक्षश्च हीत्येवं श्रुतिनोदना

ṛtukāle tu nārīṇāṃ sevanājjāyate sutaḥ / sutātsvargaśca mokṣaśca hītyevaṃ śrutinodanā

हिन्दी अर्थ

+ एतर्श्चह्वान्तगंतग्रग्थः ख. पुस्तके नास्ति । भेधातिथि:ः सुतस्तस्प यस्मात्काण्ठायना द्विजा:। इतिनानुयम(? )स्था55सीत्कन्या साइजनयत्सुतान् ॥ त्रसो: सुदयित॑ पुत्र॑ मलिनं ब्रह्मवादिनम् । उपदातं ततो लेने चतुरस्त्विति सा3त्मजानु

English

On hearing the name of cows mentioned, he became confused and released him. Thanks to his devotion to the cows as ordained by the Vedas, he propitiated the bull.

अध्याय १९०

श्लोक 7

तत्कालोचितधर्मेण ये न सेवन्ति तां नराः ।तेषां ब्रह्मघ्नजं पापं जायते नात्र संशयः

tatkālocitadharmeṇa ye na sevanti tāṃ narāḥ / teṣāṃ brahmaghnajaṃ pāpaṃ jāyate nātra saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

शकुन्तलायां भरतो यस्य नाम्ना तु भारतम् । दुष्स (ष्य)न्तं राजाने प्रति वागुवाचाशरीरिणों

English

The sacrificial rite to be performed on the New Moon Day..

अध्याय १९०

श्लोक 8

तेन पापेन घोरेण वेष्टतो रौरवे पतेत् ।तस्य तद्रुधिरं पापाः पिबन्ते कालमीप्सितम्

tena pāpena ghoreṇa veṣṭato raurave patet / tasya tadrudhiraṃ pāpāḥ pibante kālamīpsitam

हिन्दी अर्थ

रेतोधा: पुत्र नयति नरदेव यमक्षयात् । त्वं चास्य धाता गर्भेस्य माउवमंस्थाः शकुन्तलामू भरतस्तिसषु स्त्रीषु नव पुश्रानजीजनत् । नाम्यनन्दच्च तानराजा नानुरूपान्मसेत्युत..

English

This practice of open and unconcealed sexual intercourse is men¬ tioned in the M.Bh. (MW 365A) and seems to have been followed by Dirghatamas. The Buddha mentions this Dharma in derision.

अध्याय १९०

श्लोक 9

ततो ऽवतीर्णकालेन यां यां योनिं प्रयास्यति ।तस्यां तस्यां स दुष्टात्मा दुर्भगो जायते सदा

tato 'vatīrṇakālena yāṃ yāṃ yoniṃ prayāsyati / tasyāṃ tasyāṃ sa duṣṭātmā durbhago jāyate sadā

हिन्दी अर्थ

काण्ठायन त!मक द्विजाति वर्ग की उत्पत्ति हुई। इस''(?)की एक कत्या थी, जिसने अनेक पुत्रों को उत्पन्न किया था। राजा रब्ति के प्रथम पुत्र त्रसु का परमत्रिय पुनत्रमलिन था, जो शच्छा ब्रह्मवेत्ता था। उससे उपदानबी ने चारपुत्रों की प्राप्ति की, जिनके नाम थे, सुष्मश्त, दृष्यन्त, प्रवीर और अमष इनमें दुष्यन्त का पूत्र नूपतियर्य भरत चक्रवर्ती सस्नाद हुआ, वहू राजा भरत शकुस्तला नामक पत्नी में उत्पन्न हुआ था, उसी

English

Considering it to be his arrogance, Saradvan did not brook it Using force and following Godharma (the practice of cattle), he had approached his daughter-in-law (the wife of younger brother).

अध्याय १९०

श्लोक 10

नारीणां तु सदा कामो ह्यधिकः परिवर्तते ।विशेषेण ऋतोः काले भिद्यते कामसायकैः

nārīṇāṃ tu sadā kāmo hyadhikaḥ parivartate / viśeṣeṇa ṛtoḥ kāle bhidyate kāmasāyakaiḥ

हिन्दी अर्थ

के नाम से भारतवर्ष की प्रसिद्धि है ।१३१-१३३१। ऐसी प्रसिद्धि है कि राजा दुष्यल्त को अशरोरिणी वाणी (आकाछझ् वाणी) हुई थी --दुष्यस्त ! पुत्र की माता उसकी केवल रक्षा करनेवाली है, पुत्र पिता का प्रतिनिधि है, पिता ही उसका सब कुछ है, जिससे उसकी उत्पत्ति होती है, बही सब कुछ है, तुम इस बालक के वही पिता द्वो । यह तुम्हारा ही पुत्र है, इसका पालन पोषण करो, शकुन्तला ने तुमसे सत्य बात कही है। नरदेव ! पिता अपने पुत्र की मृत्यु भय आदि आपत्तियों से रक्षा करता है, तुम्ही इस गर्भ का आधान करनेवाले हो, शकुन्तला का अपमान मत करो ।१३४-१३६। सम्राट् भरत ने अपनी तीनों पत्नियों में नव पुत्रों को उश्पन्न किया था; किन्तु उसने अपने उन समस्त पुत्रों का यह कहकर के अभिननन्‍्दन नहीं किया कि ये सब हमारी प्रतिष्ठा के अनुकूल नहीं है ।१३७। भरत की ऐसी बातों से पुत्रों की माताओं को बड़ा क्रोध हुआ और आवेश

English

On seeing this trespass, Saradvan reflected. The noble- souled (Saradvan) knew what was destined to happen. So he did not confer death on him (Dlrghatamas).

अध्याय १९०

श्लोक 11

परिभूता हि सा भर्त्रा ध्यायते ऽन्यं पतिं ततः ।तस्याः पुत्रः समुत्पन्नो ह्यटते कुलमुत्तमम्

paribhūtā hi sā bhartrā dhyāyate 'nyaṃ patiṃ tataḥ / tasyāḥ putraḥ samutpanno hyaṭate kulamuttamam

हिन्दी अर्थ

में आकर उन सबों को उन्होंने मार डाला, इस प्रकार राजाधिराज भरत की पूत्रोत्पत्ति निष्फल हो मई । तदनन्तर मरुतों ने बृहस्पति के पुत्र भरद्वाज को लाकर राजा भरत को वे दिया। परम सामथ्यंशाली भरद्वाज इस प्रकार यज्ञाधिपति मरुतों द्वारा सम्राट् भरत के वंश में संक्रामित हुए ।8३८-३३१६। इसी वार्ता के प्रसजु में लोग परम बुद्धिशाली भरद्वाज के जस्म वृत्तास्त की चर्चा करते हैं कि इस प्रकार उनकी (उत्तत्ति में

English

With eyes turned red due to anger, he shouted to Dlrghatamas: You do not distinguish between whom to approach and whom not to. Following Godharma you have solicited your daughter-in-law.

अध्याय १९०

श्लोक 12

स्वर्गस्थास्तेन पितरः पूर्वं जाता महीपते ।पतन्ति जातमात्रेण कुलटस् तेन चोच्यते

svargasthāstena pitaraḥ pūrvaṃ jātā mahīpate / patanti jātamātreṇa kulaṭas tena cocyate

हिन्दी अर्थ

दरे० वायुपुराणम् एवमुक्ताश्रवादे नमन्तवंत्नी ह्यहं विभो। गर्भ: परिणतश्ाय ब्रह्म व्याहरते गिरा

English

You are a man of despicable conduct. I am casting you o(T. Go away along with your evil action. In spite of being blind, old and dependent on others for maintenance you have committed a deplorable, sinful action. Therefore, you are for¬ saken. I am convinced that you are a person of evil conduct".

अध्याय १९०

श्लोक 13

तेन कर्मविपाकेन क्षयरोगी शशी ह्यभूत् ।त्यक्त्वा लोकं सुरेन्द्राणां मर्त्यलोकम् उपागतः

tena karmavipākena kṣayarogī śaśī hyabhūt / tyaktvā lokaṃ surendrāṇāṃ martyalokam upāgataḥ

हिन्दी अर्थ

अमोधरेतास्त्वं चापि धर्मश्नेव विगहितः । एवसुक्तो5ब्रवीदेनां स्मयसानों बृहस्पतिः ॥१४रे बिनयो नोपदेष्टव्यस्त्या मम कर्थ चन । हषसाण: प्रसहोनां मैथुनायोपच क़मे १४४

English

Thereafter he thought of a ruthless action. After rebuking Dlrghatamas many times, he caught hold of him by his arms, put him in a sealed casket and hurled it into the waters of Gariga.

अध्याय १९०

श्लोक 14

तत्र तीर्थान्यनेकानि पुण्यान्यायतनानि च ।भ्रमित्वा नर्मदां प्राप्तः सर्वपापप्रणाशिनीम्

tatra tīrthānyanekāni puṇyānyāyatanāni ca / bhramitvā narmadāṃ prāptaḥ sarvapāpapraṇāśinīm

हिन्दी अर्थ

अमोधरेताह्न भवान्नावकाशो5स्ति च हयो: । एबमुक्तः स गर्भेण कुपितः प्रत्युवाच ह १४६ यस्मान्मामीदशे काले सर्वभूतेप्सिते सति । प्रतिषेधसि तत्तस्मात्तमो दीर्घ प्रवेक्ष्सि.. पादाभ्यां तेन तच्छन्न॑ मातुर्हारं ब्रहस्पतेः । तद्रेतस्तुमध्येषनिवार्य: शिशुकोभवत्

English

For seven days the sealed casket was wafted by the current. King Bali, the knower of the principles of Dharma, who was in the company of his wife, saw the sinking casket borne towards him by the current.

अध्याय १९०

श्लोक 15

उपवासस्तु दानानि व्रतानि नियमाश्च ये ।चचार द्वादशाब्दानि ततो मुक्तः स किल्बिषैः

upavāsastu dānāni vratāni niyamāśca ye / cacāra dvādaśābdāni tato muktaḥ sa kilbiṣaiḥ

हिन्दी अर्थ

संधि हुई) और इस प्रकार वे मरुतों द्वारा लाकर भरत को समपित किये गये यह प्रसिद्ध बात है कि प्राचीन

English

Bali, the righteous-souled son of Virocana, saved him and took him to his harem where he propitiated him with different kinds of food and drinks, and looked after him.

अध्याय १९०

श्लोक 16

स्थापयित्वा महादेवं सर्वपातकनाशनम् ।जगाम प्रभया पूर्णः सोमलोकमनुत्तमम्

sthāpayitvā mahādevaṃ sarvapātakanāśanam / jagāma prabhayā pūrṇaḥ somalokamanuttamam

हिन्दी अर्थ

काल में ऋषिवर अशिज की पत्नी ममता जब आसस्नगर्भा हुई तब वे तपस्या में मिरत हो गये। एकास्त में अपने भाई की भार्या को देखकर ब्रहस्पति ने कहा--'मंगले ! अपने शरीर कौ विधिवत अलंकॉरादि से अलंकृत करके मुझे मैथुन का दान कंरो १४०-१४१। बृहस्पति के इस प्रकार कहने पर देवी ममता ने कहा, समर्थ ! मैं सम्प्रति गर्भवती हूं, यह गर्भ भी अब पूर्ण हो चुका है, ब्रह्म (वेद) का उच्चारण करता है, तुम्हारा वीर्य भी निष्फल हो जाने वाला नहीं है, और प्रकार व्यभिचार करने पर धर्म की विगहंणा होगी। ममता के ऐसे कहने पर बृहस्पति हंसते हुए बोले, सुन्दरि ! मुझे तुम किसी प्रकार भी आचार की शिक्षा नही दे सकतीं, मैं सब कुछ जानता हैँ । ऐसा कहकर बड़े आनन्द के साथ बृहस्पति ने साहस पूर्वक ममता के साथ मैथन करने का उपक्रम किया ।१४२-१४४। रति कर्म में

English

The delighted sage asked Bali to choose a boon accord¬ ing to his desire. The leading Danava chose the boon for (blessing him with) a son.

अध्याय १९०

श्लोक 17

येनैव स्थापितो देवः पूज्यते वर्षसंख्यया ।तावद् युगसहस्राणि तस्य लोकं समश्नुते

yenaiva sthāpito devaḥ pūjyate varṣasaṃkhyayā / tāvad yugasahasrāṇi tasya lokaṃ samaśnute

हिन्दी अर्थ

आनन्दविभोर बृहस्पति से गरभस्थ शिशु ने कहा, तात ! बृहस्पते ! मैं यहाँ पहिले ही से सन्निविष्ट हूं, आपका बीय॑ कदापि निष्फल होने वाला नहीं है, इस संकीर्ण स्थली में दो व्यक्तियों के निवास की सम्भावना नहीं है। गर्भस्थ शिशु के ऐसा कहने पर बृहस्पति को बड़ा क्रोध हो गया। वे बोले, सभी प्राणियों के अभीष्टतम इस सुन्दर अवसर पर तुम मुझे निषेध कर रहे हो, इस कारण तुम महान् घोर

English

The righteous-souled sage ot good sell-control begot of that Sudra woman two sons of great prowess, Kakslva and Caksus. They studied the Vedas duly and be¬ came masters and expounders of Vedas, great enlightened Siddhasand excellent ones with direct vision of Dharma. On seeing them, Kakslva and Cak§us, the king, Bali, the son of Virocana, asked the sage, "Are these my sons?" The sage said, "O excellent Asura, no, that is not the case. They ai e mine. Due to your deception, these god-like children are born of Sudra womb.

अध्याय १९०

श्लोक 18

तेन देवान् विधानोक्तान् स्थापयन्ति नरा भुवि ।अक्षयं चाव्ययं यस्मात्फलं भवति नान्यथा

tena devān vidhānoktān sthāpayanti narā bhuvi / akṣayaṃ cāvyayaṃ yasmātphalaṃ bhavati nānyathā

हिन्दी अर्थ

अन्धकार में प्रवेश करोगे ।१४५-१४७। बृहस्पति के इस कथन के उपरान्त गर्भस्थ शिशु ने अपने दोंनों पैरों से माता के योनिद्वार को आबृत कर दिया, किन्तु तिस पर भी बृहस्पति का बीरय॑ उपके दोतों पैरों के मध्यभाग से अनिवाय होकर उदर के भीतर चला गया, और एक छोटे शिक्षु के रूप में उत्पन्न होकर बाहरं॑ निकल घनुचिह्नान्तगंतप्रन्थः ख. पुस्तके न ।

English

Considering me blind and old, Sudesna, your queen, sent the Sudra servant-maid unto me and disrespected me.

अध्याय १९०

श्लोक 19

सोमतीर्थे तु यः स्नात्वा पूजयेद् देवमीश्वरम् ।जायते स नरो भूत्वा सोमवित्प्रियदर्शनः

somatīrthe tu yaḥ snātvā pūjayed devamīśvaram / jāyate sa naro bhūtvā somavitpriyadarśanaḥ

हिन्दी अर्थ

तस्मिन॒काले तु भरतो मदद्धि: क्रतुभिः क्रमात् )) कास्पनेमित्तिकयेज्षेयंजते पुत्नलिप्तया

English

Bali, thereupon propitiated the excellent sage again. The lord rebuked his wife Sudesna.

अध्याय १९०

श्लोक 20

चन्द्रप्रभासे यो गत्वा स्नानं विधिवद् आचरेत् ।व्याधिना नाभिभूतः स्यात् क्षयरोगेण वा युतः

candraprabhāse yo gatvā snānaṃ vidhivad ācaret / vyādhinā nābhibhūtaḥ syāt kṣayarogeṇa vā yutaḥ

हिन्दी अर्थ

यदा स यजमानो वै पुत्रान्ना5औसादयत्प्रभुः । यज्ञ ततो मरुत्सोम॑ पुत्रार्थ पुनराहरत् १४३ पड़ा । इस सद्योजात कुमार को देखकर देवी ममता ने कहा, बृहस्पते ! मैं तो अपने मिवास को जा रहो हूँ इस द्वाज (जारज) पुत्र की पालना तुम्हें करनी होगी । ऐसा कहकर ममता के चले जाने पर बृहस्पति ने भी उसी क्षण उस पुत्र को छोड़ दिया । भर द्वाजम्! (इस जारज शिशु की रक्षा करो) इस कथन के अनुसार वह झिशु भरद्वाज नाम से प्रसिद्ध हुआ । १४८-१४०। माता ओर पिता द्वारा छोड़े गये इस छोंठे शिक्षु भरदाज को

English

He bedecked her in ornaments and gave her unto the sage. The sage DIrghatamas spoke thus to the queen: "O splendid lady, if, without showing aversion, you lick from head to foot my naked body smeared well with curds mixed with salt, you will obtain those sons mentally desired by you". The queen, thereupon, carried out all his instructions.

अध्याय १९०

श्लोक 21

चन्द्रहास्ये नरः स्नात्वा द्वादश्यां तु नरेश्वर ।चतुर्दश्याम् उपोष्यैव क्षीरस्य जुहुयाच्चरुम्

candrahāsye naraḥ snātvā dvādaśyāṃ tu nareśvara / caturdaśyām upoṣyaiva kṣīrasya juhuyāccarum

हिन्दी अर्थ

जब मरुद्गणों ने देखा, तो उन्हें बड़ो दया आई, वे उसे अपने साथ उठा ले गये। ठीक उसी समय पुत्रप्राप्ति की अभिलाषा से सम्नाद् भरत नैभित्तिक एवं काम्य विविध यज्ञों का अनुष्ठान कर रहे थे, सर्वेबवर्यंशाली सम्राट् भरत को जब उन यज्ञों से भी पुत्र प्राप्ति नहीं हुई तो उन्होंने पुत्रप्राब्ति की कामना से पुनः मरुद् गणों का एवं सोम का यज्ञ प्रारम्भ किया १५१-१५३। उस मरुत्सोमात्मक यज्ञ से मरद॒गण परम प्रसन्न हुए, और

English

When she reached the anus, her aversion was so great that she avoided it. Thereupon that sage said to her: <c O auspicous lady, since you avoided the anus, the eldest son you will give birth to will be without anus".

अध्याय १९०

श्लोक 22

मन्त्रैः पञ्चभिर् ईशानं पुरुषस्त्र्यम्बकं यजेत् ।हविःशेषं स्वयं प्राश्य चन्द्रहास्येशमीक्षयेत्

mantraiḥ pañcabhir īśānaṃ puruṣastryambakaṃ yajet / haviḥśeṣaṃ svayaṃ prāśya candrahāsyeśamīkṣayet

हिन्दी अर्थ

बृहस्पति के वीय॑ से समुत्पन्न परम मनोषी उस भरद्वाज नामक पुत्र को उन्होंने भरत को दे दिया। भरद्वाज को पुत्र रूप में प्राप्त कर सम्राद् भरत विनतस्वर में बोले, 'विभो, इस अवसर पर जब कि मेरी सारी सश्ततियाँ मृत्यु को प्राप्त हो गयी थीं, आपने पुत्रदान कर मुझे कृतार्थ कर दिया १५४-१५५॥ सन्नाद् भरत की पहली सन्ततियों का जन्म वितथ (असफल) हो चुका था अतः भरद्ाज वितथ नाम से भी प्रसिद्धि हुए। सम्राद भरत के पालन पोषण के कारण दिव्य विभूति सम्पन्न भरद्वाज ब्राह्मणत्व से क्षत्रियत्व को प्राप्त हुए। वे द्विमुस्यायन एवं द्विपितर नाम से भी प्रसिद्ध हुए। इस प्रकार उत्तराधिकारी रूप में वितथ को प्राप्त कर सम्राद् भरत स्वगंगामी हुए। वितथ के उत्तराधिकारी राजा भुवमन्यु हुए, उन भुवमन्यु के महाभूतों के समान महान् पराक्रम-

English

This Purana has mixed up two different Balis—Bali or Mahabali, the rival of Indra, who donated three feet of land to Vamana, was not childless. Bana, Usa*s father, was his son. This Bali is another East Indian King who being childless requested thus to Dirghatamas.

अध्याय १९०

श्लोक 23

अनेन विधिना राजंस्तुष्टो देवो महेश्वरः ।विधिना तीर्थयोगेन क्षयरोगाद् विमुच्यते

anena vidhinā rājaṃstuṣṭo devo maheśvaraḥ / vidhinā tīrthayogena kṣayarogād vimucyate

हिन्दी अर्थ

+ घधनुश्चिह्नान्तबंतग्रन्थो न घ. पुस्तके ।

English

Then the queen replied to the sage Dirghatamas, "O blessed one, it does not behove you to give me a son like that".

अध्याय १९०

श्लोक 24

सप्तभिः सोमवारैर् यः स्नानं तत्र समाचरेत् ।स वै कर्णकृताद्रोगान्मुच्यते पूजयञ्छिवम्

saptabhiḥ somavārair yaḥ snānaṃ tatra samācaret / sa vai karṇakṛtādrogānmucyate pūjayañchivam

हिन्दी अर्थ

नरस्य सांक्ृतिः पुत्रस्तस्य पुत्री महोजसो । ग्रुरुवीयंस्त्रिदेवश्व सांकृत्वाबबरो स्मृतौ ६१६० त्र्यारुणि पुष्करिणं तृतोय॑ सुषुबे कपिम्। कपेः क्षत्रवरा होते तयोः प्रोक्ता महर्षयः ११६३

English

The sage said: "O gentle lady, this is your own fault. It will not be otherwise. O queen of good rites, I shall bestow a son unto you. Even without anus, he will perform all bodily functions". Touching her belly, the sage Dirghatamas continued—

अध्याय १९०

श्लोक 25

अक्षिरोगस् तथा राजंश्चन्द्रहास्ये विनश्यति ।चन्द्रहास्ये तु यो गत्वा ग्रहणे चन्द्रसूर्ययोः ।स्नानं समाचरेद् भक्त्या मुच्यते सर्वपातकैः

akṣirogas tathā rājaṃścandrahāsye vinaśyati / candrahāsye tu yo gatvā grahaṇe candrasūryayoḥ / snānaṃ samācared bhaktyā mucyate sarvapātakaiḥ

हिन्दी अर्थ

हस्तिनश्रापि दायादास्त्रयः परमधासिकाः । अजमीढो द्विजामौढ़ः पुरुमीढस्तथेव च १६६ अजमोढस्य पत्यस्तु शुभाः कुरुकुलोह्हाः । नीलिनी केशिनी चेव धूमिनी च बराइगना १६७ अजमीढस्य पुत्रास्तु तासु जाता कुलोहहाः । तपसो5न्ते सुमहतों राज्ञो बद्धस्थ धामिका: १६८ भरद्वाजप्रसादेन शणध्वं तस्य विस्तरम । अजमीढस्य केशिन्यां कषण्ठः समभवत्किल ३१६६९

English

"O lady of sweet smiles, since' you have licked up the curds from my body, your womb is filled like the ocean on the Full Moon Day. Five splendid sons comparable to the sons of Devas will be born to you. They will be refulgent, valiant and righteous and performer of sacrifices."

अध्याय १९०

श्लोक 26

तत्र स्नानं च दानं च चन्द्रहास्ये शुभशुभम् ।कृतं नृपवरश्रेष्ठ सर्वं भवति चाक्षयम्

tatra snānaṃ ca dānaṃ ca candrahāsye śubhaśubham / kṛtaṃ nṛpavaraśreṣṭha sarvaṃ bhavati cākṣayam

हिन्दी अर्थ

शाली चार पुत्र उत्पन्न हुए । जिनके नाम थे, बृहत्क्षत्र, महाबीयं, नर और गाग्र (गा) ।१५६-३५९। इनमें नर के सांकृति नामक पुत्र हुए, जिनके गुरुवीयं और त्रिदेव नामक महान् तेजस्वी पुत्र हुए--ये दोनों पुत्र सांकृत्य के नाम से विश्यात हैं। शिनिवद्ध'''''? गाग्र के उत्तराधिकारी गाग्रय के नाम से विश्यात हुए-- ये सब क्षत्रियोचित गुण धर्मं समन्वित ब्राह्मण कहे जाते हैं। महावीये के पुत्र भीम थे, उनसे उपक्षय तामक पुत्र की उत्पत्ति हुई, उपक्षय की पुत्री विद्याला थी, उसने त्रय्यारुणि, पुष्करी और कपि नामक तीन पुत्रों को उत्पन्न किया, कपि के कंशज केवल उत्तम क्षत्रिय हुए और उन दोनों के महषि हुए । गाग्र्य और सांकृति के वंशज परम बलशालो क्षत्रिय थे; वे सब आद्लिरिस बृहस्पति के वंश में मिल ग्रये, अब ब्रृहत्क्षत्र के वंश का वर्णन कर रहा हुं !६०-१६४। बृहत्क्षत्र का उत्तराधिकारी पुत्र परम घाभिक सुहोत्र था, सुहोत्र का उत्तरा-

English

Then Anga, the eldest son of Sudesna, was born. The other sons born to her thereafter were Vanga, Kalinga, Punclra and Brahma (Suhma in Bd. P. v. 87).

अध्याय १९०

श्लोक 27

ते धन्यास्ते महात्मानस् तेषां जन्म सुजीवितम् ।चन्द्रहास्ये तु ये स्नात्वा पश्यन्ति ग्रहणं नराः

te dhanyāste mahātmānas teṣāṃ janma sujīvitam / candrahāsye tu ye snātvā paśyanti grahaṇaṃ narāḥ

हिन्दी अर्थ

धिकारी हस्ती नाम से प्रसिद्ध था। उसी ने प्राचीनकाल में हस्तिनापुर का निर्माण किया था। राजा हस्ती के तीन परम धारमिक उत्तराधिकारी पुत्र हुए, उनके नाम थे अजमीढ़ द्विजामीढ़ और पुरुमीढ़ ।१६५-१६ ६! अजमीढ़ की कुरुवंश का उद्धार करने वाली परम सुन्दरी नीलिनी, केशिती और धूमिती तामक पत्नियाँ थीं, उन सबों से अजमीढ़ के वंशोद्धारक कई पुत्र उत्पन्न हुए। महान तपस्या के उपरान्त राजा अजमीढ़ को

English

For certain reasons, his (Bali's) progeny had been prevented by Brahma, saying, "Let there not be any off¬ spring of this nobie-soulcd (king) by his own wives"* That was why he begot children of human wombs. Then the delighted bull, the son of Kamadhenu, spoke these words to Dirghatamas:

अध्याय १९०

श्लोक 28

वाचिकं मानसं पापं कर्मजं यत्पुरा कृतम् ।स्नानमात्रात् तु राजेन्द्र तत्र तीर्थे प्रणश्यति

vācikaṃ mānasaṃ pāpaṃ karmajaṃ yatpurā kṛtam / snānamātrāt tu rājendra tatra tīrthe praṇaśyati

हिन्दी अर्थ

व॒द्धावस्था में भरद्वाज की अनुकम्पा से इन पुत्रों की प्राप्ति हुई थौ। उनके बंश का विस्तारपूर्वक वर्णन सुनिये । ऐसी प्रसिद्धि है कि केशिनी में राजा अजमीढ़ के कण्ठ मामक पुत्र की उत्पत्ति हुईैं। १६७-१६९। कण्ठ का पुत्र न विद्यतेथ्यं इलोक: क, पुस्तके ।

English

"Since you have done this after pondering over Godharma, I am pleased with you. I shall release you (from the curse).

अध्याय १९०

श्लोक 29

बहवस्तन्न जानन्ति महामोहसमन्विताः ।देहस्थ इव सर्वेषां परमात्मेव संस्थितम्

bahavastanna jānanti mahāmohasamanvitāḥ / dehastha iva sarveṣāṃ paramātmeva saṃsthitam

हिन्दी अर्थ

बृहद्सोबू हद्विष्णुः पुत्रस्तस्य महाबलः । बृह॒त्कर्मा सुतस्तस्य पुत्रस्तस्य बृहद्रथः ११७१ विश्वजित्तनयस्तस्य सेनजित्तस्य चाउ5त्मजः । अथ सेनजितः पुत्राश्व॒त्वारों लोकविश्वुताः

English

Hence, look, I shall remove your long period of dark¬ ness and gloom, as well as the curse of Brhaspati along with the other sins that may be lingering, sticking to your body.

अध्याय १९०

श्लोक 30

पश्चिमे सागरे गत्वा सोमतीर्थे तु यत्फलम् ।तत्समग्रमवाप्नोति चन्द्रहास्ये न संशयः

paścime sāgare gatvā somatīrthe tu yatphalam / tatsamagramavāpnoti candrahāsye na saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

रुचिराश्वश्च काव्यश्न रामो दृढ्धनुस्तथा । वत्सभ्रावन्‍न्तको राजा यस्य ते परिवत्सराः यस्य चेकशत्ं चा55सोत्पुत्रनाणासिति नः श्रुतम् । नीपा इति सामासख्याता राजानः सर्व एवं ते

English

After sniffing at you, I shall remove your fear of death and old age." As soon as he was sniffed at, the darkness was destroyed and he began to see. He regained his eye-sight. He became a young man

अध्याय १९०

श्लोक 31

संक्रान्तौ च व्यतीपाते विषुवे चायने तथा ।चन्द्रहास्ये नरः स्नात्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते

saṃkrāntau ca vyatīpāte viṣuve cāyane tathā / candrahāsye naraḥ snātvā sarvapāpaiḥ pramucyate

हिन्दी अर्थ

तेषां बंशकर: श्रीमानराजा55सो त्की तिवर्धनः । काम्पिल्थे समरो नाम स चेष्टसमरोइभवत्

English

Thereafter Kakslvan went to Giripraja (Girivraja_Bd.

अध्याय १९०

श्लोक 32

ते मूढास्ते दुराचारास् तेषां जन्म निरर्थकम् ।चन्द्रहास्यं न जानन्ति नर्मदायां व्यवस्थितम्

te mūḍhāste durācārās teṣāṃ janma nirarthakam / candrahāsyaṃ na jānanti narmadāyāṃ vyavasthitam

हिन्दी अर्थ

वर्ोस्तु सुकृतिर्नाम सुकृतेनेह करमंणा । जज्ञे सर्वंगुणोपेतों विश्वजस्तस्य चाउप्त्मजः ११७८ अणुहस्य तु दायादो ब्रह्मदत्तो महातपाः । योगसुनुः सुतस्तस्य विष्वक्सेनो5भवन्नृपः ३१८०

English

After a long period, he became purified through his penance. After shaking off his defects, the lord (sage) attained Brahmanahood along with his younger brother. Then spoke his father: "O Lord, now I am (really) one blessed with a son. By having a famous and good son (like you), 1 have achieved my objective (and am happy and con¬ tented) in life."

अध्याय १९०

श्लोक 33

चन्द्रहास्ये तु यः कश्चित् संन्यासं कुरुते नृप ।अनिवर्तिका गतिस्तस्य सोमलोकात्कदाचन

candrahāsye tu yaḥ kaścit saṃnyāsaṃ kurute nṛpa / anivartikā gatistasya somalokātkadācana

हिन्दी अर्थ

मेधातिथि था, उसके वंशज कण्ठायन नामक द्विज कहे जाते हैं। अजमीढ़ की दूसरी पत्नी धूमिनी में राजा बृहदूबसु का जन्म हुआ, बृंहद्वसु का पृत्र बृहद्विष्णु हुआ, उप्तका पुत्र महाबल था, महाबल का पुत्र बृहत्कर्मा था, बृह॒त्कर्मा का पुत्र राजा बृंहद्रथ हुआ उसका पुत्र विश्वजित् था, विश्वजितू का पुत्र सेनजित् हुआ । सेनजित् के चार लोकबिख्यात पुत्र हुए । उनके नाम थे, रुधिराइव काव्य, ढढ़ धनुर्धारी राम और अवन्‍्तिदेशाधिपति

English

With his soul united in Yogic practice, he attained Brahman-hood and extinction of (worldly bondage). After obtaining Brahmana-hood Kakslvan procreated a thousand sons.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 190
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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