Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
191
अध्याय 191 / 232

Adhyaya 191

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अध्याय १९१

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे चन्द्रहास्यतीर्थमहात्म्यवर्णनं नाम नवत्युत्तरशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १९१ श्रीमार्कण्डेय उवाच: सिद्धेश्वरं ततो गच्छेत् तस्यैव तु समीपतः ।अमृतस्रावि तल्लिङ्गमाद्यं स्वायम्भुवं तथा

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe candrahāsyatīrthamahātmyavarṇanaṃ nāma navatyuttaraśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 191 śrīmārkaṇḍeya uvāca: siddheśvaraṃ tato gacchet tasyaiva tu samīpataḥ / amṛtasrāvi talliṅgamādyaṃ svāyambhuvaṃ tathā

हिन्दी अर्थ

वत्स । इसी राजा वत्स के नामसे सुप्रसिद्ध परिवत्सरों का प्रचलन हुआ ॥१७०-१७३। रुचिराश्व का पुत्र महानू यशस्वी पृथुषेण था, प्रथृषेण का पुत्र पार था, पार से नीप का जन्म हुआ। हमने सुना है कि उस राजा नीप के एक सौ पुत्र थे । सब के सब राजा थे, उन सब की नीपगण नाम से ख्याति थी । उन समस्त नीपगणों में बंशोद्धारक परम यशस्वी समर नामक एक पुत्र था, उसने काम्पिलय के युद्ध में विजय प्राप्त की थी । उस समर के पर, वार ओर सत्वदश्ब--ये तीन पुत्र हुए, तीनों स्वगुणसम्पन्न थे । इनमें पार का पुत्र बृषु हुआ, वृषु का पुत्र सुकृति नामक हुआ, उसके शुभ कर्मों से स्वंगुण सम्पन्न विश्राज नामक एक पुत्र हुआ ।६७४-१७८। विम्राज का उत्तराधिकारी राजा अणुह हुआ । वह परम बश्चस्वी राजा अगुह शुक का जामाता एवं ऋची का पत्ति था। अणुह का उत्तराधिकारी महान् तपस्वी ब्रह्मदत्त हुआ । उस ब्रह्मदत्त

English

Those dark-skinned Gautamas (descendants of Gautama) are remembered as the sons of Kakslvan. Thus the association of DIrghatamas and Bali, the son of Virocana, has been narrated. So also the progeny of both. After the corona¬ tion of his five sinless sons, the contented Bali resorted to Yogic practice. The lord of Yogic soul bides his time roaming (on the earth) while remaining invisible to all living beings.

अध्याय १९१

श्लोक 2

दृष्टमात्रेण येनेह ह्यनृणो जायते नरः ।पुरा वर्षशतं साग्रमाराध्य परमेश्वरम्

dṛṣṭamātreṇa yeneha hyanṛṇo jāyate naraḥ / purā varṣaśataṃ sāgramārādhya parameśvaram

हिन्दी अर्थ

का पुत्र योगसूनु और योगसूनु का पुत्र विष्वक्सेव हुआ । विश्राज के वंश में होनेवाले ये नृपतिगण अपने सत्कर्मों

English

Some words missing herein the text are supplied here.

अध्याय १९१

श्लोक 3

प्राप्नुयुः परमां सिद्धिमादित्या द्वादशैव तु ।अतः सिद्धेश्वरः प्रोक्तः सिद्धिदः सिद्धिकाङ्क्षिणाम्

prāpnuyuḥ paramāṃ siddhimādityā dvādaśaiva tu / ataḥ siddheśvaraḥ proktaḥ siddhidaḥ siddhikāṅkṣiṇām

हिन्दी अर्थ

विश्राजपुत्रा राजानः सुकृतेनेह कर्मणा । विष्वक्सेनस्थ पुत्रस्तु उदक्सेनों ब॒भुव ह १८९१ भल्लाटस्तस्य दायादो येन राजा पुरा हुतः । भललाटस्य तु दायादो राजा55सीज्जनसेजय: ॥ उग्रापुधः कस्य सुतः कस्मिन्वंशे च कीत्यंते । किमर्थ चेव नोपास्ते तेन सर्वे प्रणाशिताः ॥ै१८रे

English

The elephant of Sakra was bom as his elephant

अध्याय १९१

श्लोक 4

युधिष्ठिर उवाच: कथं सिद्धेश्वरे प्राप्ताः सिद्धिं देवा द्विजोत्तम ।आदित्या इति यच्चोक्तं तन्मे विस्मापनं कृतम्

yudhiṣṭhira uvāca: kathaṃ siddheśvare prāptāḥ siddhiṃ devā dvijottama / ādityā iti yaccoktaṃ tanme vismāpanaṃ kṛtam

हिन्दी अर्थ

आसीत्सुवर्मणः पुत्र: सावंभोमः प्रतापवान् । सावभौस इति ख्यातः पृथिव्यासेकराड्बभौ

English

Haryanga's successor was the king Bhadraratha. Bhadraratha's son was Brhatkarma, the lord of subjects.

अध्याय १९१

श्लोक 5

तपस्युग्रे व्यवसिता आदित्याः केन हेतुना ।सम्प्राप्तास्तु द्विजश्रेष्ठ सिद्धिं चैवाभिलाषिकीम्

tapasyugre vyavasitā ādityāḥ kena hetunā / samprāptāstu dvijaśreṣṭha siddhiṃ caivābhilāṣikīm

हिन्दी अर्थ

तस्थान्वये च महति महत्पौरवननन्‍्दनः । महत्पौरवपुत्रस्तु राजा रुक्मरथः स्मृतः सुमतेरपि धर्मात्मा राजा संनतिमान्प्रभुः। तस्या४5सीत्संनतिर्नाम कृतस्तस्थ सुतोष्भवत्.

English

Bjhadratha was his son and Brhanmana was born of him. Brhanmana procreated the son Rajendra.

अध्याय १९१

श्लोक 6

संक्षिप्य तु मया पृष्टं विस्तराद्द्विज शंस मे

saṃkṣipya tu mayā pṛṣṭaṃ vistarāddvija śaṃsa me

हिन्दी अर्थ

से इस लोक में परम यश के भाजन हो गये हैं । उस राजा विष्कसेन का पुत्र उदक्सेने हुआ । उसका उत्तरा- धिकारी भल्लाट हुआ, जिसने राजा का संहार कर दिया । भल्लाट का उत्तराधिकारी राजा जनमेजय हुआ, इसी के वर के कारण उग्रायुध ने समस्त नीपवंशियों का विध्वंश कर डाला था

English

He was otherwise known as Jayadratha and from him was born king Drdharatha. The son of Drdharatha was Janamejaya, the conqueror of the universe.

अध्याय १९१

श्लोक 7

मार्कण्डेय उवाच: अदितेर् द्वादशादित्या जाताः शक्रपुरोगमाः ।इन्द्रो धाता भगस्त्वष्टा मित्रो ऽथ वरुणो ऽर्यमा

mārkaṇḍeya uvāca: aditer dvādaśādityā jātāḥ śakrapurogamāḥ / indro dhātā bhagastvaṣṭā mitro 'tha varuṇo 'ryamā

हिन्दी अर्थ

ऋषियों ने पूछा--सूत जो-! यह उग्रायुध किसका पुत्र था ? किस वंश में इसकी उत्पत्ति कही जाती है ” इसने किसलिए समस्त नौपवंशी राजाओं का विध्वंस किया था ? सूत बोले--ऋषिवृन्द ! ट्विमीढ़ का उत्तराधिकारी विद्वान राजा थवीनर हुआ। उसका पुत्र धृतिमान् था। घृतिमान् का पुत्र सत्यधृति था। सत्यधृति का पुत्र परम प्रतापशाली राजा वृढ़नेमि था। दृढ़नेमि का पुत्र राजा सुवर्मा था। सुवंसा का पुत्र सावंभौम परमप्रतापशाली राजा था, अपने समय का समस्त भूमण्डल का एकच्छन्र सम्राद् था ।१८४-१८६। उसकी ख्याति ही सार्वभौम नाम से थी। उस राजा सा्वभौम

English

His successor, the king of Ahgas, was Kama. Kama's son was Surasena and Dvija is remembered'as his son.

अध्याय १९१

श्लोक 8

विवस्वान्सविता पूषा ह्यंशुमान्विष्णुर् एव च ।त इमे द्वादशादित्या इच्छन्तो भास्करं पदम्

vivasvānsavitā pūṣā hyaṃśumānviṣṇur eva ca / ta ime dvādaśādityā icchanto bhāskaraṃ padam

हिन्दी अर्थ

के महान् वंश में महत्पोरवनन्दन नामक एक राजा हुआ, जिसका पुत्र रुक्‍्मरथ कहा जाता है। रुक्‍मरथ का पुत्न राजा सुपाइव हुआ, उस सुपाश्य का परम घाभिक पूत्र राजा सुमति था। सुमति का पुत्र धर्मात्मा राजा सन्नतिमान् परम ऐश्वयंशाली था। उसका संतति नामक एक पुत्र था, उस संनति का पुत्र क्रत था,

English

How was Karna known as the son of a charioteer and how did he become a member of the family of kings of Ahgas? This we wish to hear. Indeed you are very efficient (in narra¬ tion).

अध्याय १९१

श्लोक 9

नर्मदातटमाश्रित्य तपस्युग्रे व्यवस्थिताः ।सिद्धेश्वरे महाराज काश्यपेयैर्महात्मभिः

narmadātaṭamāśritya tapasyugre vyavasthitāḥ / siddheśvare mahārāja kāśyapeyairmahātmabhiḥ

हिन्दी अर्थ

स्पृतास्ते प्राच्यनामानः कार्ता साम्नां तु सामगाः। कारतिरुग्रायुध: सोड्थ वीरः पोरवनत्दनः मुद्गलः शूठजयश्चेव राजा बृहदिषुस्तथा। यवीयांभ्रापि विक्वान्तः काम्पिल्यश्वेव पत्चमः

English

They were Yasodevi and Satya. The race is bifurca¬ ted on account of these two wives. Jayadratha otherwise known as Rajendra was born of Yasodevi.

अध्याय १९१

श्लोक 10

परा सिद्धिरनुप्राप्ता द्वादशादित्यसंज्ञितैः ।स्थापितश्च जगद्धाता तस्मिंस्तीर्थे दिवाकरः

parā siddhiranuprāptā dvādaśādityasaṃjñitaiḥ / sthāpitaśca jagaddhātā tasmiṃstīrthe divākaraḥ

हिन्दी अर्थ

वह राजा कृत कौथुमीश्ाखाध्यायी महात्मा हिरण्यताभि का शिष्य था, यह चोबीस प्रकार को सामसंहिताओं का प्रवक्ता था ।7१८७-१६०। उनके द्वारा निर्मित संहिताओं की ख्याति सामग्रान करनेवाले प्राच्य नाम से करते हैं। उसी राजा कृत का पुत्र उग्रायुध था, यह पुरुवंशियों को आनन्दित करनेवाला राजा उप्रायुध परम वीर था। इसी राजा उम्रायुध ने अपने विक्रम की ख्याति करते हुए पण्चाल देशाधिपत्ति राजा पृषत् के

English

That noble-minded heroic son of Das'aratha, Caturanga, the pro¬ motor of his family, was born through the grace of Rsyasrriga.

अध्याय १९१

श्लोक 11

स्वकीयांशविभागेन द्वादशादित्यसंज्ञितैः ।तदाप्रभृति तत्तीर्थं राजन्ख्यातिं गतं भुवि

svakīyāṃśavibhāgena dvādaśādityasaṃjñitaiḥ / tadāprabhṛti tattīrthaṃ rājankhyātiṃ gataṃ bhuvi

हिन्दी अर्थ

पितामह महाबाहु नील का संद्वार किया था । उग्रायुध का उत्तराधिकारी महान् यशश्वी राजा क्षेम हुआ ॥ उस क्षेम से सुवीर नामक पुत्र का जन्म हुआ, सुवीर का पुत्र राजा नृपण्जय हुआ । नृपझजय से वीररुथ की उत्पत्ति हुई--यही सब पुरुवंशी राजा कहे गये हैं १!९१-१६३॥ अजमीढ़ की नीलिनी नामक पत्नी में राजा बील की उत्पत्ति हुईं, नील की विकट तपस्या के फलस्वरूप सुशान्ति नामक पुत्र का जन्म हुआ, सुशार्ति का पुत्र पुरुजानु हुआ, पुरुजानु का पुत्र रिक्ष था उस रिक्ष के अनेक उत्तराधिकारी पुत्र हुए, उनके नाम थे, मुद्गल, श्वज्जय, बृहदिषु, यवीयान् ओर काम्पिलल्‍्य ।१६४-१६६। पाँचों पुत्रों की सुरक्षा के लिये पिता ने इनसे बतलाया था कि तुम पाँचों के लिये ये पाँच सुन्दर एवं उपजाऊ जनपद हैं, इन्हें जान लो, उन पाँचों पुत्रों के भरण पोषण के लिये वे पाँच जनपद पर्याप्त थे। उन पाँचों जनपदों की कालान्तर में पञ्चाल नाम से ख्याति हुईं मुदूगल के वशज

English

It is reported that Prthulasva was Caturanga's son. The son of Prthulas'va was (?) of Campa. The (capital) city of Campa was beautiful. It became the beautiful Malini (real name of Campa).

अध्याय १९१

श्लोक 12

प्रलये समनुप्राप्ते ह्यादित्या द्वादशैव ते ।द्वादशादित्यतो राजन् सम्भवन्ति युगक्षये

pralaye samanuprāpte hyādityā dvādaśaiva te / dvādaśādityato rājan sambhavanti yugakṣaye

हिन्दी अर्थ

क्षत्रिय गुणधर्म समन्वित द्विज हुए । ये सब कण्ठ और मुद्गल के वंशज आंगिरस गोत्र में सम्मिलित हो गये । मुद्गल का ज्येष्ठ पुत्र महान् यशस्वी ब्रहष्ठ था ।१६७-१६६। उसके संयोग से इन्द्सेना ने वध्यशव नामक पुत्र

English

The city of Campavati (alias) Campa was inhabited by people of four Varnas (castes). They lived in Campavati for sixty thousand years. By Brahmanas, Ksattriyas, Vais'yas, by all, their own duty (Dharma) was followed. All were devoted to Visnu by performing penance and following the duties of their (respective) caste.

अध्याय १९१

श्लोक 13

इन्द्रस्तपति पूर्वेण धाता चैवाग्निगोचरे ।गभस्तिपतिर्वै याम्ये त्वष्टा नैरृतदिङ्मुखः

indrastapati pūrveṇa dhātā caivāgnigocare / gabhastipatirvai yāmye tvaṣṭā nairṛtadiṅmukhaḥ

हिन्दी अर्थ

नाय॑ श्लोको घ. पुस्तके । +घनुश्चिन्नान्तगंतग्रन्थो डः. पुस्तके नास्ति । टै२० वायुपुराणम्

English

(Defective verse) Satya gave birth to the famous Vijaya who was of mixed Brahmana-Ksatriya caste (?) Vijaya's son was Dlijli and his son was Dhrtavrata.

अध्याय १९१

श्लोक 14

वरुणः पश्चिमे भागे मित्रस्तु वायवे तथा ।विष्णुश्च सौम्यदिग्भागे विवस्वानीशगोचरे

varuṇaḥ paścime bhāge mitrastu vāyave tathā / viṣṇuśca saumyadigbhāge vivasvānīśagocare

हिन्दी अर्थ

इन्द्रसेना यतो गर्भ वध्यश्व प्रत्यपद्यत । वध्यश्वान्मिथुनं जज्ञे मेनका इति नः अ्तिः (२००

English

Dhrtavrata's son was Satyakarma of great fame. Satyakarma's son was Adhiratha, the charioteer.

अध्याय १९१

श्लोक 15

ऊर्ध्वतश्चैव सविता ह्यधः पूषा विशोषयन् ।अंशुमांस् तु तथा विष्णुर् मुखतो निर्गतं जगत्

ūrdhvataścaiva savitā hyadhaḥ pūṣā viśoṣayan / aṃśumāṃs tu tathā viṣṇur mukhato nirgataṃ jagat

हिन्दी अर्थ

दिवोदासस्य दायादो ब्रह्मिष्ठो मित्रयुन पः। मेत्रेयस्तु ततो जज्ञे स्घुता एतेषपि संश्िताः १२०६ एते5पि संश्षिताः पक्ष क्षात्त्रोपेतास्तु भागंवाः । राजाइपि च्यवनों विद्वांस्ततो5प्रतिरथोडइभवत् अथ थे च्यवनाद्धीमान्सुदासः समपद्यत । सौदासः सहदेवश्व सोमकस्तस्य चाउधत्मजः २०४

English

He adopted and looked after Karna. Hence Karna was known as the son of a charioteer. Thus everything that had been asked about Karna has been mentioned to you.

अध्याय १९१

श्लोक 16

प्रदहन्वै नरश्रेष्ठ बभ्रमुश्च इतस्ततः ।यथैव ते महाराज दहन्ति सकलं जगत्

pradahanvai naraśreṣṭha babhramuśca itastataḥ / yathaiva te mahārāja dahanti sakalaṃ jagat

हिन्दी अर्थ

को जन्म दिया । हमने ऐसा सुना है कि मेनका ने इसी राजा वध्यश्व के समागम से एक जुड़वाँ सस्‍्तानें उत्पन्न की थीं । जिसमें एक राजधि दिवोदास थे, दूसरी परम वशस्विनतों अहल्या थीं। अहल्या ने शारद्गबत के संयोग से ऋषिवर बझताननन्‍द को पुत्ररूप में प्राप्त किया । दतानन्द के महान् यशस्वी सत्यधृति नामक पुत्र हुआ, जो धनुवेद में परम पारज़्त था ।२००-२०२। एक बार सम्मुख आती हुई किसी अप्सरा को देखकर सत्यधृति का

English

Thus all the kings in the family of Ariga have been recounted by me. Now listen to the progeny of Puru in detail and in the proper order.

अध्याय १९१

श्लोक 17

तथैव द्वादशादित्या भक्तानां भावसाधनाः ।प्रातरुत्थाय यः स्नात्वा द्वादशादित्यसंज्ञितम्

tathaiva dvādaśādityā bhaktānāṃ bhāvasādhanāḥ / prātarutthāya yaḥ snātvā dvādaśādityasaṃjñitam

हिन्दी अर्थ

शुक्र सरपतों के गुल्म में गिए पड़ा, जिससे एक जुड़वाँ सन्तानें उत्पन्न हुईं। संयोगवश राजा शन्तनु मृगया खेलते हुए वहाँ पहुँचे और उन्होंने कृपा करके उन बच्चों को उठा लिया और अपने घर लाकर उनका पालन पोषण किया! इसी कारण उन दोनों के नाम कृपा और कृपी रखे गये, उसी क्ृपी का दूसरा नाम गौतमी भी था ।२०३-२०४। दारद्त कहे जाने वाले गौतमबंशीय ऋतथ्यों का यह वंशवर्णन कर चुका । अब इसके उपरान्त दिवोदास की सनन्‍्ततियों का वणन कर रहा हूँ दिवोदास का उत्तराधिकारी ब्रह्म- परायण राजा मित्रयु था। उससे मैत्रेय की उत्पत्ति हुई--मैत्रेय के वंश में उत्पन्न होनेवाले भी क्षत्रियगुण धर्म समन्वित द्विजाति कहलाये--और उन सबों का गोत्र भागव रहा तदल्तर उसी वंश में विद्वान् राजा च्यवन का जन्म हुआ, जिसके रथ की समानता कोई अन्य राजा नहीं कर सकता था ।२०५-२०७। च्यवन से

English

The mighty-armed son of Puru, Janamejaya became a king. His son was Aviddha who conquered the eastern region.

अध्याय १९१

श्लोक 18

पश्यते देवदेवेशं शृणु तस्यैव यत्फलम् ।वाचिकं मानसं पापं कर्मजं यत्पुराकृतम्

paśyate devadeveśaṃ śṛṇu tasyaiva yatphalam / vācikaṃ mānasaṃ pāpaṃ karmajaṃ yatpurākṛtam

हिन्दी अर्थ

परम बुद्धिमान् राजा सुदासु की उत्पत्ति हुई, सुदासु का पुत्र सहदेव हुआ, सहदेव का पुत्र सोमक था। वंश के विनाश समुपस्थित होने पर राजा अजमीढ़ ही सोमक के रूप में उत्पन्न हुये थे। सोमक का पुत्र जन्तु था, उसके मारे जाने पर उस महान् पराक्रमशाली एवं धर्मात्मा सोमक रूपधारी राजा अजमीढ़ के अन्य सो पुत्र उत्पन्न हुए, जिनमें सबसे छोठा पृषत् था, यह पृषत् राजा द्वुपद का पिता था। अर्थात्

English

From Aviddha was born as son the great hero Manasyu. King Jayada was the son of Manasyu.

अध्याय १९१

श्लोक 19

नश्यते तत्क्षणादेव द्वादशादित्यदर्शनात् ।प्रदक्षिणं तु यः कुर्यात् तस्य देवस्य भारत

naśyate tatkṣaṇādeva dvādaśādityadarśanāt / pradakṣiṇaṃ tu yaḥ kuryāt tasya devasya bhārata

हिन्दी अर्थ

नवनवतितमो ध्याय। है४१ धुष्टशुम्नः सुतस्तस्य धुष्टकेतुश्व॒ सत्सुतः:। महिषा चाजमीठस्य धूमिनी पुन्रगधिनी

English

His successor was the king named Dhundhu. Bahu- gavl was the son of Dhundhu. Sanjati was his son.

अध्याय १९१

श्लोक 20

प्रदक्षिणीकृता तेन पृथिवी नात्र संशयः ।तत्र तीर्थे तु सप्तम्यामुपवासेन यत्फलम्

pradakṣiṇīkṛtā tena pṛthivī nātra saṃśayaḥ / tatra tīrthe tu saptamyāmupavāsena yatphalam

हिन्दी अर्थ

यः प्रयागं पदा55क्रम्य कुरुक्षेत्र चकार ह। कृष्ट्वन सुमहातेजा वर्षाणि सुबहुन्यथ

English

Sanjati's son was Raudrasva. Understand his sons. Raudrasva begot ten sons of the celestial damsel GhrtacT.

अध्याय १९१

श्लोक 21

अन्यत्र सप्तसप्तम्यां लभन्ति न लभन्ति च ।षष्ठ्यां वारे दैनकरे द्वादशादित्यदर्शनात्

anyatra saptasaptamyāṃ labhanti na labhanti ca / ṣaṣṭhyāṃ vāre dainakare dvādaśādityadarśanāt

हिन्दी अर्थ

च्यवनस्तस्य पुत्रस्तु राजा धर्मार्थकोविदः च्यवनस्य कृतः पुत्र इष्ट्वा यज्ञमंहातपाः २१६९६ विश्वुतं जनयामास पुत्रसिन्द्रसख॑ नृपः विद्योपरिचरं बोर वसूं नामान्‍्तरिक्षगम् .. विद्योपरिच राज्जज्ञे गिरिका सप्त सूुनवः । महारथो मगधराइविश्वुतों यो बहद्रथः

English

They were Rajeyu, Krteyu, Vakseyu, Sthandileyu, Ghrtcyu, Jaleyu, Sthaleyu the seventh, Dharmeyu, Sannatcyu and the tenth son Vaneyu. He had ten daughters also, viz. Rudra, Sudra, Madra, Subha, Jamalaja, Tala, Khala (these seven and then), the daughter who is remembered as Gopajala, then, Tamrarasa and Ratnakutl. The husband of all of them was Prabhakara by name. He belonged to the Atreya line (Gotra).

अध्याय १९१

श्लोक 22

प्रदक्षिणं तु यः कुर्यात् तस्य पापं तु नश्यति ।अरोगी सप्तजन्मानि भवेद्वै नात्र संशयः

pradakṣiṇaṃ tu yaḥ kuryāt tasya pāpaṃ tu naśyati / arogī saptajanmāni bhavedvai nātra saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

ााा..-3०.-"“--.. आना मा ० ५-१नमनना नाना वीमामानणथनना/प बन 3 बनआमन-आननााा वि पिगएएएएए टीका

English

Riveyu's wife named Jvalana was the daughter of Taksaka. That saintly king begot of that gentle lady a son named Ranti.

अध्याय १९१

श्लोक 23

यस्तु प्रदक्षिणशतं दद्याद्भक्त्या दिने दिने ।दद्रूपिटककुष्ठानि मण्डलानि विचर्चिकाः

yastu pradakṣiṇaśataṃ dadyādbhaktyā dine dine / dadrūpiṭakakuṣṭhāni maṇḍalāni vicarcikāḥ

हिन्दी अर्थ

प्षत् का पुत्र द्रपद था ।२०८ २१०। द्रुपद का पुत्र धृष्ट्युम्न हुआ, धृष्ट्युप्न का उतर घष्टकेतु था। राजा अजमीढ़ की तीसरी रानी धमिनी को पहले कोई सन्‍्तान नहीं थी, सन्तान की उहकट आकांक्षा से उसने इस पुनर्जन्म में सौ वर्षों तक परम कठोर तपस्या की, हवत किया, रात भर जागरण किया, पवित्र कर्मों में निरत रह कर स्वल्पाहार किया; रात दिन कुशासन पर बेठती रही--उसी पर सोती रही -- इस प्रकार उसने महान् तपस्या की । तपस्या करते करते वह काली पड़ गई, उसमें परम वोयंशाली राजा अजमीढ़ ने गर्भाधान किया, जिससे ऋक्ष नामक पुत्र का जन्म हुआ, यह ऋक्ष देखने में धूएँ के समान कृष्णवर्ण का था, इसका एक छोटा भाईसित भी था ऋक्ष से सम्वरण की उत्पत्ति हुई, सम्वरण से कुरु उत्पन्न हुआ ।२११-२१४। महान् तेजस्वी इस कुरु ने अपने चरणों से प्रयांग को आक्रान्त कर नवीन तोथ॑

English

Ranti, the king, begot splendid sons of his wife Sarasvati. They were Trasu, Praliratha and Dhruva, who was exceedingly righteous. His daughter Gaurl is famous as the splendid mother of Mandhata. Dhurya was Pratiratha's son and his son was Kantha. (Defective verse) His son was Mcdhatithi from whom the Brahinanas Kanthayanas originated. Itina (?) was the daughter of Anuyama (?). She gave birth to sons.

अध्याय १९१

श्लोक 24

नश्यन्ति व्याधयः सर्वे गरुडेनेव पन्नगाः ।पुत्रप्राप्तिर् भवेत् तस्य षष्ट्या वासरसेवनात्

naśyanti vyādhayaḥ sarve garuḍeneva pannagāḥ / putraprāptir bhavet tasya ṣaṣṭyā vāsarasevanāt

हिन्दी अर्थ

कुरुक्षेत्र का निर्माण किया था बहुत बर्षों तक उसने कुरुक्षेत्र को जोता था। कुरुक्षेत्र के जोतते समय इन्द्र ने वरदान दिया था कि तुम्हारा यह क्षेत्र परम रमणीय, पुषण्यप्रद एवं धर्मात्माओं के निवास करने योग्य है। उस राजा कुर के वंश में उत्पन्न होनेवाले कुरुणणों के नाम से ख्यात हुए, वे सब अपने समय के यशस्वी राजा थे । कुरु के परम प्रिय पुत्र सुधव्वा, जह्न,, परीक्षित, पुत्रक और अरिमदंन थे । इनमें सुधन्वा

English

Trasu obtained his favourite son Malina who was an expounder of Brahman. Thereafter he obtained Upadata and the (following) four sons of Itina (?): Susmanta, Du?yanta, Pravlra and Anagha. The son born to Dusyanta was an excellent king and he became an emperor.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 191
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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