Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
192
अध्याय 192 / 232

Adhyaya 192

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अध्याय १९२

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे द्वादशादित्यतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नामैकनवत्युत्तरशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १९२ मार्कण्डेय उवाच: तस्यैवानन्तरं तात देवतीर्थमनुत्तमम् ।दृष्ट्वा तु श्रीपतिं पापैर् मुच्यते मानवो भुवि

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe dvādaśādityatīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāmaikanavatyuttaraśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 192 mārkaṇḍeya uvāca: tasyaivānantaraṃ tāta devatīrthamanuttamam / dṛṣṭvā tu śrīpatiṃ pāpair mucyate mānavo bhuvi

हिन्दी अर्थ

के उत्तराधिकारी परम बुद्धिमान सुहोत्र थे १२१५-२१८५। सुहोत्र का पुत्र धर्मार्थवेत्ता राजा च्यवन् था, च्यवन का पुत्र कृत हुआ, यह कृत महान् तपसवी राजा था, इसने विविध यज्ञों का अनुष्ठान करके इन्द्र के मिन्र, प्रम विख्यात, आकाशचारी वसुनाम से विख्यात विद्योपरिचर नामक पुत्र को उत्पन्न किया । उस विद्योपरिचर से गिरिका ने सात पुत्र उत्पन्न किये। जिनमें एक महारथी मगधसम्नाट् राजा बृहद्रथ था ॥२१ ९-२२१। : ब्रत्यग्रहः कुशश्चेब यमाहुमंणिवाहनम्। प्रार्यल्यश्र ललित्थश्र मत्स्यकालस्य सप्तमः

English

That son Bharata was born of Sakuntala. It is from him that (the land) took its name Bharata. A disembodied (celestial) voice spoke to king Dusyanta.

अध्याय १९२

श्लोक 2

महर्षेस् तस्य जामाता भृगोर्देवो जनार्दनः

maharṣes tasya jāmātā bhṛgordevo janārdanaḥ

हिन्दी अर्थ

ऋषभस्यापि दायाद पुष्पवान्नाम धारमिकः । विक्रान्तस्तस्य दायादो राजा सत्यहितः स्मृत:

English

<c O Dusyanta, the mother is but a leathern pouch (or bellows). The son belongs to the father. He is identical with him by whom he is begotten. Sakuntala tells the truth. Maintain your son. O lord of men, he who discharges the semen virile redeems the son from the abode of Yama. You are the progenitor of this child in the womb. Do not dishonour Sakuntala'h

अध्याय १९२

श्लोक 3

युधिष्ठिर उवाच: को ऽयं श्रियः पतिर्देवो देवानामधिपो विभुः ।कथं जन्माभवत् तस्य देवेषु त्रिषु वा मुने

yudhiṣṭhira uvāca: ko 'yaṃ śriyaḥ patirdevo devānāmadhipo vibhuḥ / kathaṃ janmābhavat tasya deveṣu triṣu vā mune

हिन्दी अर्थ

शकले है स वे जातो जरया संधितस्तु सः जरासंधो महाबाहुजेरया संधितस्तु सः सर्वक्षत्रस्य जेताइसों जरासंधो महाबलः । जरासंधस्य पुत्रस्तु सहदेवः प्रतापन्

English

Bharata begot of his three wives nine sons. "These arc not befitting me". Saying this, the king did not approve of them. (Pie disowned them).

अध्याय १९२

श्लोक 4

सम्बन्धी च कथं जातो भृगुणा सह केशवः ।एतद्विस्तरतो ब्रह्मन् वक्तुम् अर्हसि भार्गव

sambandhī ca kathaṃ jāto bhṛguṇā saha keśavaḥ / etadvistarato brahman vaktum arhasi bhārgava

हिन्दी अर्थ

सहदेवात्मज: श्रीमास्सोमाधिः सुमहातपाः । श्रुतश्रवास्तु सोमाधेर्मागधः परिकोतितः

English

Then those infuriated mothers slew their sons. Thus the births of those sons to the king were futile.

अध्याय १९२

श्लोक 5

मार्कण्डेय उवाच: संक्षेपात् कथयिष्यामि साध्यस्य चरितं महत् ।न हि विस्तरतो वक्तुं शक्ताः सर्वे महर्षयः

mārkaṇḍeya uvāca: saṃkṣepāt kathayiṣyāmi sādhyasya caritaṃ mahat / na hi vistarato vaktuṃ śaktāḥ sarve maharṣayaḥ

हिन्दी अर्थ

स्रथस्य तु दायादो भोमसेनोइषपि नामतः द २२६ जह् नुस्त्वजनयत्पुत्न सुर्थ नाम भुसिपम् । सुरथस्थ तु दायादों बौरो राजा विद्रथः १२३०

English

Then the powerful son Bharadvaja, the son of Bfha- spati, was brought over there by the Maruts in the course of the sacrifices and handed over to him.

अध्याय १९२

श्लोक 6

नारायणस्य नाभ्यब्जाज्जातो देवश्चतुर्मुखः ।तस्य दक्षो ऽङ्गजो राजन् दक्षिणाङ्गुष्ठसम्भवः

nārāyaṇasya nābhyabjājjāto devaścaturmukhaḥ / tasya dakṣo 'ṅgajo rājan dakṣiṇāṅguṣṭhasambhavaḥ

हिन्दी अर्थ

उसके अतिरिक्त, प्रत्याग्रह, कुश, मणिवाहन, प्राथैल्य, ललित्य और मत्स्यकाल नामक अन्य छः पुत्र भी थे । बृहद्रथ का उत्तराधिकारी परम विख्यात राजा कुशाग्र हुआ। उस कुशाग्न का पुत्र परम बलवानू ऋषभ था । ऋषभ का उत्तराधिकारी परम धामिक पुष्पवान् था, जिसका योग्य उत्तराधिकारी विक्रमशाली राजा सत्यहित कहा जाता है ।२२२-२२४। उस राजा सत्यहित का पुत्र सुधन्वा था, उससे प्रतापशाली ऊर्ज का जन्म

English

In this connection, they cite this story of the intelli¬ gent Bharadvaja, his birth and the transfer unto Bharata by the Maruts.

अध्याय १९२

श्लोक 7

धर्मः स्तनान्तात्संजातस् तस्य पुत्रो ऽभवत्किल ।नारायणसहायो ऽसावजो ऽपि भरतर्षभ

dharmaḥ stanāntātsaṃjātas tasya putro 'bhavatkila / nārāyaṇasahāyo 'sāvajo 'pi bharatarṣabha

हिन्दी अर्थ

हुआ, ऊर्जे का पुत्र राजा नभस् था, उस नभस् से परमबलशाली उस राजा का जस्म हुआ, जिसके जन्म के पहिले दो टुकड़े उत्पन्न हुये थे, जरा ज्ञामक राक्षसी ने उन दोनों टुकड़ों को आपस में जोड़ दिया, अर्थात् वह परम बलश्ाली पृत्र महाबाहु जरासंघ था, जरा से संधित होने के कारण उसका यह नाम विख्यात था । महाबलशाली यह राजा जरासन्ध अपने समय के समस्त क्षत्रियों को पराजित करनेवाला था। उस जरासंध का पुत्र प्रतापशाली सहदेव था । सहदेव का पुत्र महान् तपस्वी श्रीमान राजा सोमाधि था, उस सोमाधि था, उस सोमाधि का पुत्र श्रतश्नवा हुआ-मगधवंशीय राजाओं का वर्णन कर चुका

English

When his wife was in the advanced state ofpreg- nancy, it is said that Asija died. Looking at his brother's wife, Bt-haspati said: "O auspicious lady, embellish your body with ornaments and give me (the pleasure of) sexual intercourse

अध्याय १९२

श्लोक 8

मरुत्वती वसुर्ज्ञाना लम्बा भानुमती सती ।संकल्पा च मुहूर्ता च साध्या विश्वावती ककुप्

marutvatī vasurjñānā lambā bhānumatī satī / saṃkalpā ca muhūrtā ca sādhyā viśvāvatī kakup

हिन्दी अर्थ

सूत बोले--ऋषिव॒न्द ! परीक्षित का उत्तराधिकारी राजा जनमेजय था। उस राजा जनमभेजय का पुत्र पृथ्वीपति सुरथ हुआ। सुरथ का पुत्र भी भोमसेत नाम से विश्यात हुआ ।२२६। जह. ने भी एक सुरथ नामक पूत्र को उत्पन्न किया था, जो अपने समय में प्रृथ्वीपति था। उस सुरथ का उत्तराधिकारी राजा विदूरथ जन्मा । विदूरथ का पूत्र भी सावंभौम नाम से विख्यात हुआ ।

English

You too are one whose semen virile never goes in

अध्याय १९२

श्लोक 9

धर्मपत्न्यो दशैवैता दाक्षायण्यो महाप्रभाः ।तासां साध्या महाभागा पुत्रानजनयन् नृप

dharmapatnyo daśaivaitā dākṣāyaṇyo mahāprabhāḥ / tāsāṃ sādhyā mahābhāgā putrānajanayan nṛpa

हिन्दी अर्थ

दुदमर्ध न विद्यते क. ख. घ. पुस्तके । . विद्रथसुतश्रापि सार्वभौस इति श्रुतिः। सावंभोमाज्जयत्सेन आराधिस्तस्थ चाघत्मज:ः.

English

''You need not at all instruct me in good behaviour". With great delight, he forcibly indulged in sexual intercourse with her.

अध्याय १९२

श्लोक 10

नरो नारायणश्चैव हरिः कृष्णस्तथैव च ।विष्णोरंशांशका ह्येते चत्वारो धर्मसूनवः

naro nārāyaṇaścaiva hariḥ kṛṣṇastathaiva ca / viṣṇoraṃśāṃśakā hyete catvāro dharmasūnavaḥ

हिन्दी अर्थ

देवातियेस्तु दायाद ऋक्ष एवं बभूव ह् । भोमसेनस्तथा ऋक्षाद्विलीपस्तस्य चाउःत्मजः

English

"O father (uncle) Brhaspati", said the foetus to Brhaspati who was in a state of exhilaration, "I am already embedded here, having come here before.

अध्याय १९२

श्लोक 11

तथा नारायणनरौ गन्धमादनपर्वते ।आत्मन्यात्मानमाधाय तेपतुः परमं तपः

tathā nārāyaṇanarau gandhamādanaparvate / ātmanyātmānamādhāya tepatuḥ paramaṃ tapaḥ

हिन्दी अर्थ

दिलीपसूनुः प्रतिपस्तस्य पुत्रास्त्रयः स्मृताः । देवापिः शंतनुश्चव बाह्लीकश्रेव ते त्रयः देवापिस्तु प्रवव्राजे वन धर्मपरीप्सया उपाध्यायस्तु देवानां देवापिरभवन्मुनिः ॥

English

You arc one whose semen virile never goes in vain. There is no space here for two (children)." On being told thus by the child in the womb, the infuriated Brhaspati said again:

अध्याय १९२

श्लोक 12

ध्यायमानावनौपम्यं स्वं कारणमकारणम् ।वासुदेवमनिर्देश्यमप्रतर्क्यमनन्तरम्

dhyāyamānāvanaupamyaṃ svaṃ kāraṇamakāraṇam / vāsudevamanirdeśyamapratarkyamanantaram

हिन्दी अर्थ

च्यवनोःस्य हि पुत्रस्तु इष्टकश्व महात्मन: । शंतनुस्त्वभवद्राजा बिद्वान्च स महाभिषः

English

"Since you prevent me at such a time as this, desired by all living beings, you will enter a long period of darkness".

अध्याय १९२

श्लोक 13

योगयुक्तौ महात्मानावास्थितावुरुतापसौ ।तयोस्तपःप्रभावेण न तताप दिवाकरः

yogayuktau mahātmānāvāsthitāvurutāpasau / tayostapaḥprabhāveṇa na tatāpa divākaraḥ

हिन्दी अर्थ

इस चोदाहरन्त्यत्र श्लोक प्रति महाभिषम् । य॑ यं राजा स्पृशशति वे जीर्ण समयतो नरमभ् स तुपयेमे धर्मात्मा शंतनुर्जाह्नवों नृपः द

English

The (vaginal) passage of his mother was covered with his feet by the child. Tiie semen virile of Brhaspati, being obstructed in between them became an infant.

अध्याय १९२

श्लोक 14

ववाह शङ्कितो वायुः सुखस्पर्शो ह्यशङ्कितः ।शिशिरो ऽभवद् अत्यर्थं ज्वलन्नपि विभावसुः

vavāha śaṅkito vāyuḥ sukhasparśo hyaśaṅkitaḥ / śiśiro 'bhavad atyarthaṃ jvalannapi vibhāvasuḥ

हिन्दी अर्थ

तस्यां देवब्तं भीष्म पुत्र सोउजनयत्प्रभु:। स च भीष्म इति ख्यातः पाण्डवानां पितामहः ४२४०

English

On seeing the son instantaneously born Mamata said, "O Brhaspati, I am going to my house. Bhara (Nurture), Dvaja (that which is born of two)."

अध्याय १९२

श्लोक 15

सिंहव्याघ्रादयः सौम्याश्चेरुः सह मृगैर्गिरौ ।तयोर् गौर् इव भारार्ता पृथिवी पृथिवीपते

siṃhavyāghrādayaḥ saumyāśceruḥ saha mṛgairgirau / tayor gaur iva bhārārtā pṛthivī pṛthivīpate

हिन्दी अर्थ

.॒ “ ््॒॒ ॒ ॒॒ २ खफा -तहैन..+ल्‍+++ॉल मो मस्‍िा्ं्॒ै््॒7ह्घभ/7+ै5+7:5 सावभोम से जयत्सेन की उत्पति हुई, जयत्सेन का पुत्र आराधि हुआ आराधि से महासत्तव को उत्पत्ति हुई, महासत्त्व से अयुतायु ने जन्म धारण किया । अयुतायु का पुत्र राजा अक्रोधन हुआ, उससे राजा देवा तिथि की उत्पत्ति सुनी जातो है ।२३०-२३२। देवातिथि का उत्तराधिकारी राजा ऋल्ष हुआ ऋक्ष से भीमसेत का जन्म हुआ, उस भीमसेन का पुत्र राजा दिलीप था। दिलीप का पुत्र प्रतिप था, उसके तीन पुत्र कहे

English

When she went away after saying this, he (too) for¬ sook the son instantaneously." "Bharasva (Nurture). Dadham (very well)". Since this was said, he came to be known as 'Bharadvaja'.

अध्याय १९२

श्लोक 16

चेरुश्च भूधराश्चैव चुक्षुभे च महोदधिः ।देवाश्च स्वेषु धिष्ण्येषु निष्प्रभेषु हतप्रभाः ।बभूवुरवनीपाल परमं क्षोभमागताः

ceruśca bhūdharāścaiva cukṣubhe ca mahodadhiḥ / devāśca sveṣu dhiṣṇyeṣu niṣprabheṣu hataprabhāḥ / babhūvuravanīpāla paramaṃ kṣobhamāgatāḥ

हिन्दी अर्थ

जाते हैं। उनके नाम हैं, देवापि, शन्तनु और वाह्लीक वाह्लीक का पुत्र राजा सप्तवाह्लीशर्वरः को जानना चाहिए; यह महान् यशस्वी सोमदत्त वाह्लीक का पुत्र था। सोमदत्त से भूरि, भूरिश्रवा और छाल नामक पुत्रों की उत्पत्ति हुई ।२३३-२३४। देवापि घ॒र्मतत्त्व के अनुसंधान के लिये वन को चला गया था वहाँ जाकर वह मुनिवेश धारण कर देवताओं का उपाध्याय हुआ महात्मा देवापि के च्यवन और इष्टक नामक पुत्र हुए, शन्तनु

English

On seeing the infant abandoned by both the mother and the father, the Maruts took away the child Bharadvaja out of mercy.

अध्याय १९२

श्लोक 17

देवराजस्तथा शक्रः संतप्तस्तपसा तयोः ।युयोजाप्सरसस्तत्र तयोर्विघ्नचिकीर्षया

devarājastathā śakraḥ saṃtaptastapasā tayoḥ / yuyojāpsarasastatra tayorvighnacikīrṣayā

हिन्दी अर्थ

परम विद्वान एवं महाभिष (बहुत बड़े वैद्य) थे, वही राजा हुए। भिषक् शन्तनु के सम्बन्ध में लोग एक इलोक कहा करते हैं, उसका आशय इस प्रकार है, कि जिस-जिस वृद्ध मनुष्य का वह राजा स्पशे करता था, वह पुनः युवा हो जाता था, इसी कारण से उसका नाम झन्तनु कहा जाता हैं। सर्वे साधारण प्रजा में वह शम्तनु नाम से ही विख्यात था उस परम धर्मात्मा राजा शत्तनु ने जाह्न वी के साथ विवाह किया था ।२३६-२३९। परम ऐश्वयेशाली द्ान्‍्तनु ने जाह्नवी में देवव्रत नामक पुत्र उत्पन्न किया, वह देवबन्नत भीष्म नाम से विख्यात हुए, समस्त पाण्डवों के वे पितामह थे । उसी समय राजा झन्‍्तनु की दूसरी पत्नी दासेयी ने

English

At that time Bharata had performed various Yajiias and other Iulmja and JVoimillilca (sacrifices) with the desire for obtaining a son. In spite of those Yajiias, the lord did not obtain any son. Thereafter he performed the A 'land- Soma Yajna for the sake of a son.

अध्याय १९२

श्लोक 18

इन्द्र उवाच: रम्भे तिलोत्तमे कुब्जे घृताचि ललिते शुभे ।प्रम्लोचे सुभ्रु सुम्लोचे सौरभेयि महोद्धते

indra uvāca: rambhe tilottame kubje ghṛtāci lalite śubhe / pramloce subhru sumloce saurabheyi mahoddhate

हिन्दी अर्थ

काले विचित्रवीर्य तु दासेय्यजनयत्सुतम् । शंतनोदंयित थुन्न॑ प्रजाहितकरं प्रभुम् ॥।

English

Being propitiated by that Marut-Soma sacrifice, the Maruts (gave) him Bharadvaja, the intelligent son of Bjrhaspati.

अध्याय १९२

श्लोक 19

अलम्बुषे मिश्रकेशि पुण्डरीके वरूथिनि ।विलोकनीयं बिभ्राणा वपुर्मन्मथबोधनम्

alambuṣe miśrakeśi puṇḍarīke varūthini / vilokanīyaṃ bibhrāṇā vapurmanmathabodhanam

हिन्दी अर्थ

कृष्णद् पायनश्रव क्षेत्रे बेचित्रवीर्यके २४१ देददत्ता: सुतास्ताभ्यां पाण्डोरथें विजज्ञिरे । धर्माग्धिष्ठिरो जज्ञे वायोजंजञे वृफोदर:ः २४४ इन्द्राद्धनंजयो जन्ने शक्रतुल्यपराक्तमः । अश्विभ्यां सहदेवश्व नकुलश्रापि माद्रिजों ..

English

On obtaining that son Bharadvaja, Bharata said: <f O lord, with you as my son, I am satisfied, since all my previous children had been killed".

अध्याय १९२

श्लोक 20

गन्धमादनमासाद्य कुरुध्वं वचनं मम ।नरनारायणौ तत्र तपोदीक्षान्वितौ द्विजौ

gandhamādanamāsādya kurudhvaṃ vacanaṃ mama / naranārāyaṇau tatra tapodīkṣānvitau dvijau

हिन्दी अर्थ

हिडम्बा भीमसेनात्तु जज्ञे पुत्रं घटोत्कचम् । काश्या पुनर्भोमसेनाज्जज्ञ स्बंवक सुतम् २४७ सुहोत्रं विजया माद्री सहदेवादजायत । कमेरत्यां तु वेद्यायां निरमित्रस्तु नाकुलिः २४८ सुभद्रायां रथी पार्थादर्भिमन्युरजायत । उत्तरायां तु वेरादबां परी क्षिदर्भिमन्युजः

English

The births of his (i.e, Bharata's) previous sons had

अध्याय १९२

श्लोक 21

तेपाते धर्मतनयौ तपः परमदुश्चरम् ।तावस्माकं वरारोहाः कुर्वाणौ परमं तपः

tepāte dharmatanayau tapaḥ paramaduścaram / tāvasmākaṃ varārohāḥ kurvāṇau paramaṃ tapaḥ

हिन्दी अर्थ

परीक्षितस्तु दायादो राजासीज्जनमेजय:ः । ब्राह्म णानस्थापयामास स वे वाजसनेयिकानू विचित्र वीये नामक पुत्र को उत्पन्न किया था, जो परम प्रभावशाली, प्रजा हितंषी एवं शस्तनु को परमप्रिय था। - राजा विचित्रवीय के क्षेत्र (पत्नी) में कृष्णद्व पायन ने धुतराष्ट्र, पाण्ड और विदुर नामक पुत्रों को उत्पन्न किया । इनमें धृतराष्ट्र के संयोग से ग्रान्धारी ने सौ पुत्रों को उत्पन्न किया ।२४०-२४२। उन सौ पुत्रों में सबसे ज्येष्ठ पृत्र दुर्योधन था, अपने समय का वह समस्त क्षत्रिय जाति का स्वामी था। पाण्डु की माद्री और पृथा नामक दो

English

Hence the Divine child Bharadvaja turned into a Ksatiiya from mahinana-hood. He is remembered by the names Dvimuhhydyana (having two important abodes) and Dvipitrka (having two fathers).

अध्याय १९२

श्लोक 22

कर्मातिशयदुःखार्तिप्रदावायतिनाशनौ ।तद्गच्छत न भीः कार्या भवतीभिर् इदं वचः

karmātiśayaduḥkhārtipradāvāyatināśanau / tadgacchata na bhīḥ kāryā bhavatībhir idaṃ vacaḥ

हिन्दी अर्थ

स्त्रियाँ थीं। पाण्ड के लिये विभिन्न देवताओं से दिये गये पुत्र उन दोनों रानियों में उत्पन्न हुए । धर्म से युधिष्ठिर का जन्म हुआ, वायु से वुकोदर भीम की उत्पत्ति हुई, इन्द्र से धनंजय का जन्म हुआ, जो इन्द्र के समान ही पराक्रमशाली था, दोनों अश्विनीकुमारों के संयोग से मांद्री के नकुल और सहदेव नामक दो पुत्र हुए ।२४३-२४५। पाँच पाण्डुओं के संयोग से द्रौपदी में भी पाँच ही पुत्र उत्पन्न हुए । द्रौपदी ने सबसे बड़े पुत्र

English

Four sons comparable to the Mahabhutas (great elements) were born to Bhuvamanyu. They were Brhatksatra, Mahavlrya, Naraand the powerful Gagra.

अध्याय १९२

श्लोक 23

स्मरः सहायो भविता वसन्तश्च वराङ्गनाः ।रूपं वयः समालोक्य मदनोद्दीपनं परम् ।कन्दर्पवशमभ्येति विवशः को न मानवः

smaraḥ sahāyo bhavitā vasantaśca varāṅganāḥ / rūpaṃ vayaḥ samālokya madanoddīpanaṃ param / kandarpavaśamabhyeti vivaśaḥ ko na mānavaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रतिविन्‍्ध्य को युधिष्ठिर के संयोग से उत्पन्न किया था। हिडम्बा ने भीमसेन के संयोग से घटोत्कव नामक पुत्र को उत्पन्न किया था। दूसरी पत्नी काश्या ने भीमसेत से सर्वेवक नामक पुत्र को उत्पन्न किया था। मद्र देश की राजकस्या विजया ने सुहोश्र नामक पुत्र को उत्पन्न किया था । चेदिदेश की राजपुत्री कर्मरती ने नकुल से नरमित्र नामक पुत्र उत्पन्न किया था ।२४६-२४८५। पार्थे के संयोग से सुभद्रा में महारथी अभिमस्यु ते जन्म धारण किया था। विराट पुत्री उत्तरा में अभिमन्यु से परीक्षित नामक पुत्र उत्पन्न हुआ था । परीक्षित का उत्तराधिकारी राजा जनमेजय था । राजा जनमेजय ने वाजसनेय यज्ञ की प्रतिष्ठा करनेवाले ब्राह्मणों की मर्यावा स्थिर की थी ।२४६-२५०। वंशम्पायन ने उनके इस कार्य को सहन नहीं किया, और अमर्ष में भरकर बोले, दुर्बद्ध !

English

ThesonofNara was Samkrti. His sons were very powerful. Guruvlrya and Trideva are remembered as the sons of Samkrti. There were none greater than they.

अध्याय १९२

श्लोक 24

मार्कण्डेय उवाच: इत्युक्त्वा देवराजेन मदनेन समं तदा ।जग्मुरप्सरसः सर्वा वसन्तश्च महीपते

mārkaṇḍeya uvāca: ityuktvā devarājena madanena samaṃ tadā / jagmurapsarasaḥ sarvā vasantaśca mahīpate

हिन्दी अर्थ

नवेनवतितमोश्याय। है४५

English

The successors of Gagra were born of Sinibaddha. Therefore the Gagryas (descendants of Gagra) are remembered as Brahmanas with the traits of Ksatriyas.

अध्याय १९२

श्लोक 25

गन्धमादनमासाद्य पुंस्कोकिलकुलाकुलम् ।चचार माधवो रम्यं प्रोत्फुल्लवनपादपम्

gandhamādanamāsādya puṃskokilakulākulam / cacāra mādhavo ramyaṃ protphullavanapādapam

हिन्दी अर्थ

यावत्स्थास्याम्यहूं लोके तावन्नतत्प्रशस्यते । अभितः संस्थितश्राषि ततः स जनमेजय:ः पौणंमास्थेन हविषा देवमिष्द्वा प्रजापतिम्। घिन्नाय संस्थितो5पश्यत्तद्ठ धीष्टां (त्तदिष्ट) विभोम॑जे ॥।

English

Blilma was the son of Mahavlrya. From him was born Ubhaksaya. His wife Visala gave birth to three sons.

अध्याय १९२

श्लोक 26

प्रववौ दक्षिणाशायां मलयानुगतो ऽनिलः ।भृङ्गमालारुतरवै रमणीयमभूद्वनम्

pravavau dakṣiṇāśāyāṃ malayānugato 'nilaḥ / bhṛṅgamālārutaravai ramaṇīyamabhūdvanam

हिन्दी अर्थ

तस्य पुत्र: शतानोको बलवान्प्त्यविक्रमः ततः सुतं शतानीक॑ विप्रास्तमभ्यवंचयन्

English

She gave birth to Trayvaruni, Puskarin and the third son Kapi. Kapi's descendants were excellent Ksatriyas and those of the other two arc said to be great sages.

अध्याय १९२

श्लोक 27

गन्धश्च सुरभिः सद्यो वनराजिसमुद्भवः ।किन्नरोरगयक्षाणां बभूव घ्राणतर्पणः

gandhaśca surabhiḥ sadyo vanarājisamudbhavaḥ / kinnaroragayakṣāṇāṃ babhūva ghrāṇatarpaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

अधिसामकछृष्णो धर्मात्मा सांप्रतोष्य महायशाः । यस्मिन्प्रशासति महीं युष्भाभिरिदमाहुतम् तुम्हारी यह मर्यादा पृथ्वी पर स्थिर न रह सकेगी, जब तक मैं नीवित हूँ, तब तक तो उसकों प्रशंसा नहीं हो सकती । चारों ओर स्रे संकटापन्न होकर जनमेजय ने पोणमास नामक यज्ञ का अनुष्ठान किया, और उसमें प्रजापति देव को हृवि देकर सन्तुष्ट किया, मखर में सर्वव्वयंशाली प्रजापत्नि के निमित्त यज्ञ करने पर भी उनकी स्थिति वेसी ही रहौ । यह देखकर पुनः पुरुवंशी परोक्षितपुत्र राजा जनमेजय ने दो अद्यमेध यज्ञों का अनुष्ठान

English

Brhatksatra's successor was a pious one named Suhotra. Suhotra's successor was one named Hastin. Formerly this city named Hastinapura was built by him.

अध्याय १९२

श्लोक 28

वराङ्गनाश्च ताः सर्वा नरनारायणावृषी ।विलोभयितुम् आरब्धा वागङ्गललितस्मितैः

varāṅganāśca tāḥ sarvā naranārāyaṇāvṛṣī / vilobhayitum ārabdhā vāgaṅgalalitasmitaiḥ

हिन्दी अर्थ

किया, ओर उसमें अपने द्वारा प्रतिष्ठित वाजसेतय का प्रवर्तन किया, इसमें उन्हें तीन स्थानों पर पराजित होना पड़ा ।२५१५२४४। सर्वप्रथम अद्वक म्रुरुषों के यहाँ, फिर अद्भ देशवासियों के यहाँ फिर मध्यदेश निवासियों के यहाँ--इस प्रकार जनमेजय को तीन बार पराजित होना पड़ा । इससे उसे बड़ा विषांद हुआ फलस्वरूप ब्राह्मणों के साथ मिनन्‍दा का पात्र होकर वह विनाश को प्राप्त हुआ ।३५४। राजा जनमेजय का पुत्र शतानीक था,

English

II as tin's successor were three, viz. Ajamidha, Dvimldha and Purunildha. They were all extremely devout and pious. 1

अध्याय १९२

श्लोक 29

जगौ मनोहरं काचिन्ननर्त तत्र चाप्सराः ।अवादयत् तथैवान्या मनोहरतरं नृप

jagau manoharaṃ kācinnanarta tatra cāpsarāḥ / avādayat tathaivānyā manoharataraṃ nṛpa

हिन्दी अर्थ

जो परम बलशाली, सत्यवादी तथा विक्रमी था । ब्राह्मणों ने जनमेजय की यृत्यु के बाद उसके स्थान पर शतानीक का अभिषेक किया शतानौक का पुत्र परम बलशाली अश्वमेघदत्त हुआ अदइवमेदत्त से शत्रुओं के दुर्गो को जीतनेवाले अधिसामकष्ण नामक पुत्र की उत्पत्ति हुईै। ऋषिवुत्द ! यही परम धर्मात्मा राजा सम्प्रति राज्य कर रहा है । उसी के राज्यकाल में आप लोगों ने इस परम दुलंभ तीन वर्ष चलनेवाले दीघंसत्र का अनुष्ठान प्रारंभ किया है, इसके अतिरिक्त दुषढद्वती के तट प्रान्त पर कुरुश्नेत्र में भी दो वर्ष व्यपी एक दीघंसत्र चल रहा है

English

Ajamidha's sons were splendid. They perpetua¬ ted the auspicious line. They were very pious. They were

अध्याय १९२

श्लोक 30

हावैर्भावैः सृतैर्हास्यैस् तथान्या वल्गुभाषितैः ।तयोः क्षोभाय तन्वङ्ग्यश्चक्रुरुद्यममङ्गनाः

hāvairbhāvaiḥ sṛtairhāsyais tathānyā valgubhāṣitaiḥ / tayoḥ kṣobhāya tanvaṅgyaścakrurudyamamaṅganāḥ

हिन्दी अर्थ

एतच्चिन्वान्तगंतग्रन्थः लव पुस्तक नास्ति । ++ अन्नाध्यायसमाप्तिद इयतै क्ष पुस्तके ।

English

The following additional verse numbered 167 in A, is translated as follows:

अध्याय १९२

श्लोक 31

तथापि न तयोः कश्चिन्मनसः पृथिवीपते ।विकारो ऽभवदध्यात्मपारसम्प्राप्तचेतसोः

tathāpi na tayoḥ kaścinmanasaḥ pṛthivīpate / vikāro 'bhavadadhyātmapārasamprāptacetasoḥ

हिन्दी अर्थ

काल युगप्रमाणं च गुणदीषान्भविष्पतः । सुखदुःखे प्रजानां च धर्मंतः कामतोथंतः २६२ एतत्सवं प्रसंस्थाय पृच्छतां ब्र॒हि तत्वतः। स एवमुक्तो मुनिश्िः सुतो बुद्धिमतां बरः ॥ आचचक्षे यथावृत्तं यथादुष्टं यथाश्रुतम् यथा मे फोतितं सर्व व्यासेनादुभुतकर्ंणा । भाष्यं कलियुग चेच तथा मन्वन्तराणि तु २६४

English

Medhatithi was his son and from him were born the Brahmanas called Kanthayanas. King Brhadvasu was born to Ajamidha and (his second wife) Dhumini.

अध्याय १९२

श्लोक 32

निवातस्थौ यथा दीपावकम्पौ नृप तिष्ठतः ।वासुदेवार्पणस्वस्थे तथैव मनसी तयोः

nivātasthau yathā dīpāvakampau nṛpa tiṣṭhataḥ / vāsudevārpaṇasvasthe tathaiva manasī tayoḥ

हिन्दी अर्थ

तान्सर्वान्‍्कीतंयिष्पासि भविष्ये पठितान्नपान् । तेभ्यः परे च ये चाम्ये उत्पत्स्यन्ते महीक्षित:

English

Brhadvasu's son was Brhadvisnu who was very strong. His son was Brhatkarma whose son was Brhadratha.

अध्याय १९२

श्लोक 33

पूर्यमाणो ऽपि चाम्भोभिर्भुवमन्यां महोदधिः ।यथा न याति संक्षोभं तथा तन्मानसं क्वचित्

pūryamāṇo 'pi cāmbhobhirbhuvamanyāṃ mahodadhiḥ / yathā na yāti saṃkṣobhaṃ tathā tanmānasaṃ kvacit

हिन्दी अर्थ

क्षत्त्रा: पारशवाः शुद्रास्तथा ये व द्विजातयः । अन्ध्रा: शकाः पुलिन्दाश्र तुलिका पवनेः सह ऋषिगण बोले--महामति सूत जी! आप भूतकालीन राजाओं का वर्णन तो कर चुके, अब हम लोग भविष्य में उत्पन्न होनेवाले राजाओं के साथ उनकी प्रजाओं का वर्णन सुनना चाहते हैं। भविष्य में उत्पन्न होकर वे लोग जिन नवीन विधाओं का प्रवरतंन करेंगे, उनके जो नाम होंगे, उन्हें उनके हासन काल की मणना के साथ बतलाइये। उस समय से उत्पन्न होनेवाली प्रजाओं के सुख दुःख, गुण

English

His son was Visvajit, whose son was Senajit. The four sons of Senajit were well known in the world.

अध्याय १९२

श्लोक 34

सर्वभूतहितं ब्रह्म वासुदेवमयं परम् ।मन्यमानौ न रागस्य द्वेषस्य च वशंगतौ

sarvabhūtahitaṃ brahma vāsudevamayaṃ param / manyamānau na rāgasya dveṣasya ca vaśaṃgatau

हिन्दी अर्थ

दोष, युगप्रमाण उतके धर्माथ काम सम्बन्धी विचारों को हम लोग सुनना चाहते हैं, यथा्थंतः बतलाइये । मुनियों द्वास इस प्रकार पूछे जाने पर बुद्धिमानों में श्रेष्ठ सूत जी ने इन प्रश्नों के विषय में जेसा कुछ देखा था, जेसा सुना था, कहना प्रारम्भ किया

English

They were Rucirasva, Kavya, Rama of steady bow and Vatsa, the king of Avant! from whom the Parivatscira (era started).

अध्याय १९२

श्लोक 35

स्मरो ऽपि न शशाकाथ प्रवेष्टुं हृदयं तयोः ।विद्यामयं दीपयुतमन्धकार इवालयम्

smaro 'pi na śaśākātha praveṣṭuṃ hṛdayaṃ tayoḥ / vidyāmayaṃ dīpayutamandhakāra ivālayam

हिन्दी अर्थ

सूत बोले--ऋषिवृन्द ! अद्भुत कर्म शील व्यास जी ने इस विषय में मुझसे जो कुछ बतलावा है, उसे मैं बतला रहा हूँ भविष्य में जिस प्रकार कलियुग आयेगा, जितने मन्वन्तर होंगे, जितने राजा लोग उत्पन्न होंगे, मैं उन सब का वर्णन अब कर रहा हूं ।३६४-२६४५। उन्त ऐल वंशीय, इक््वाकु बंशीय तथा सौधुम्नवंशीय राजाओं का वर्णन करूँगा, जिसके वंशजों पर इन सर्वकल्याणकारी इश्ष्बाकुवंक्षियों का एक मात्र प्रभाव होगा भविष्य में कहे जानेवाले समस्त राजओं का वर्णन करूँगा, अन्य सामास्य राजा लोग भी उत्पन्न होंगे उन्हें भी बतलाऊंगा । उन सब के अतिरिक्त क्षत्र, पारशव, छुद्ठ, अस्यात्य द्विजातिवर्य, अन्न्र, शक, पुलिन्द, तूलिका यवन, कवर, जाभीर, शबर प्रभृति अभ्यान्य स्लेच्छ जातियों का वर्णव भी कडूंगा,

English

Paicirasva's successor was Prtlmscna of great fame. Para was the son of Pythusena and Nipa was born of Para.

अध्याय १९२

श्लोक 36

पुष्पोज्ज्वलांस् तरुवरान् वसन्तं दक्षिणानिलम् ।ताश्चैवाप्सरसः सर्वाः कन्दर्पं च महामुनी

puṣpojjvalāṃs taruvarān vasantaṃ dakṣiṇānilam / tāścaivāpsarasaḥ sarvāḥ kandarpaṃ ca mahāmunī

हिन्दी अर्थ

सुखोबलसुतश्रापि भाव्यो राजा परिष्लुतः । परिष्लुसुतभ्रापि भविता सुनयो नृपः

English

We have heard that a hundred sons were horn to Nipa. They are called 'Nlpas'. All of them were kings.

अध्याय १९२

श्लोक 37

यच्चारब्धं तपस्ताभ्यामात्मानं गन्धमादनम् ।ददर्शाते ऽखिलं रूपं ब्रह्मणः पुरुषर्षभ

yaccārabdhaṃ tapastābhyāmātmānaṃ gandhamādanam / dadarśāte 'khilaṃ rūpaṃ brahmaṇaḥ puruṣarṣabha

हिन्दी अर्थ

दण्डपाणेनिरामित्रो निरामित्राच्च क्षेमकः । पश्चविशनपा होते भविष्याः पूर्ववंशनाः .. अन्नानुवंशश्ोकफो5यं गौतो विध्रे: पुराविद: । ब्रह्मक्षस्त्रस्यथ यो योनिवंशो देवषिसत्कृतः

English

The most glorious king among them who raised the fame of the race and stabilised the race was Samara with his capital in Kathpilya. He was fond of war.

अध्याय १९२

श्लोक 38

दाहाय नामलो वह्नेर्नापः क्लेदाय चाम्भसः ।तद्द्रव्यमेव तद्द्रव्यविकाराय न वै यतः

dāhāya nāmalo vahnernāpaḥ kledāya cāmbhasaḥ / taddravyameva taddravyavikārāya na vai yataḥ

हिन्दी अर्थ

तथा उस समय में जो राजा लोग होंगे, उनके नाम एवं शासनकाल का भी वर्णन करूँगा ।२६६-२६६। सम्श्रति अधिसामकृष्ण तामक राजा राज्य कर रहा है, उसकी उत्पत्ति विख्यात पौरव वंश से है, उसके वंश में उत्पन्न होनेवाले भविष्यत्कालीन राजाओं का वर्णन सर्वप्रथम कर रहा हूँ । इस राजा अधिसामक्ृष्ण का पुत्र) निबंक्त्र होना, गंगा द्वारा हस्तिनापुर (?) के डुबा देने पर वह उसे छोड़ कर अपनी राजघानी कौशाम्बी में बनायेमा,

English

Samara had three sons endowed with all good qualities. They were Para, Para and Sattvadasva. Para's son Vrsu shone well.

अध्याय १९२

श्लोक 39

ततो विज्ञाय विज्ञाय परं ब्रह्म स्वरूपतः ।मधुकन्दर्पयोषित्सु विकारो नाभवत्तयोः

tato vijñāya vijñāya paraṃ brahma svarūpataḥ / madhukandarpayoṣitsu vikāro nābhavattayoḥ

हिन्दी अर्थ

और वहीं पर निवास करेगा ।२७०-२७१। राजा निव॑क्त्र को उष्णनामक एक पुत्र होगा। उष्ण से चित्ररथ नामक पुत्र की उत्पत्ति होगी । चित्रर॒थ से शुचिद्रथ की उत्पत्ति होगी शुचिद्रथ से परम धंयंशाली, महान् यश्नस्वी एवं बलशाली सुषेण की उत्पत्ति होगी । उस राजा सुषेण से सुतीयं नामक राजा का जन्म होगा । सुतीर्थ से रुच होगा, रुच से त्रिचक्ष होगा, त्रिचक्ष का उत्तराधिकारी राजा सुखोबल होगा ।२७२-२७४। सुखीबल का पुत्र राजा परिष्लुत होगा, परिष्लुत का पुत्र राजा सुनय होगा । सुनय का पुत्र नरपति मेधावी होगा, मेधावी का पूत्र दण्डपाणि होगा । दण्डपाणि से निरामित्र और निरामित्र से क्षेमक होगा । ये पच्चीस नृपतिगण भविष्यत्काल में इस वंश में उत्पन्न होंगे (२७४-२७७। प्राचीन कथाओं के जाननेवाले ब्राह्मण लोग इस वंश के विषय में एक इलोक का गान करते हैं । उसका तत्पयं बतला रहा हूँ, जो वेश ब्राह्मणों एवं क्षत्रियों का उत्पत्ति-स्थान

English

A son named Sukrii endowed with all good qualities was born to Vrsu, thanks to his meritorious activities. Vibhraja was his son.

अध्याय १९२

श्लोक 40

ततो गुरुतरं यत्नं वसन्तमदनौ नृप ।चक्राते ताश्च तन्वङ्ग्यस्तत्क्षोभाय पुनःपुनः

tato gurutaraṃ yatnaṃ vasantamadanau nṛpa / cakrāte tāśca tanvaṅgyastatkṣobhāya punaḥpunaḥ

हिन्दी अर्थ

था, जिस वंद् का देवता तथा ऋषिगण सत्कार करते थे, वह फपौरववंश कलियुग में क्षेमक नामक राजा के बाद

English

Vibhraja's successor was the king named Anuha who was very famous. He was the husband ofRcI and so the son-in- law of $uka.

अध्याय १९२

श्लोक 41

अथ नारायणो धैर्यं संधायोदीर्णमानसः ।ऊरोरुत्पादयामास वराङ्गीमबलां तदा

atha nārāyaṇo dhairyaṃ saṃdhāyodīrṇamānasaḥ / ūrorutpādayāmāsa varāṅgīmabalāṃ tadā

हिन्दी अर्थ

१. मत्स्यपुराण में इनका नाम विवक्षु रखा गया है । हैश्ष बायुपुराणभ ह ॥॒

English

Anuha s successor was Brahmadatta of great penance. "Vogasunu was his son and his son Visvaksena became a king.

अध्याय १९२

श्लोक 42

त्रैलोक्यसुन्दरीरत्नम् अशेषम् अवनीपते ।गुणैर्लाघवमभ्येति यस्याः संदर्शनादनु

trailokyasundarīratnam aśeṣam avanīpate / guṇairlāghavamabhyeti yasyāḥ saṃdarśanādanu

हिन्दी अर्थ

क्षेमक प्राप्य राजान संस्थां प्राप्स्यति वे कलो । इत्येष पौरवो वंशों यथावदनुकीतितः

English

Vibhraja's sons became kings, thanks to their merito¬ rious activities. Visvaksena's son was Udaksena.

अध्याय १९२

श्लोक 43

तां विलोक्य महीपाल चकम्पे मनसानिलः ।वसन्तो विस्मयं यातः स्मरः सस्मार किंचन

tāṃ vilokya mahīpāla cakampe manasānilaḥ / vasanto vismayaṃ yātaḥ smaraḥ sasmāra kiṃcana

हिन्दी अर्थ

बहुद्रथस्य दायादो बीरो राजा बुह॒त्क्षयः । ततः क्षयः सुतस्तस्य वत्सव्यूहस्ततः क्षयात्ु.. ॥रघ१ वत्सव्यूहात्प्रतिव्यूहस्तस्य पुत्रों दिवाकरः । यश्न सांप्रतमध्यास्ते अयोध्यां नगरीं नृपः २८२ दिवाकरस्य भविता सहदेवों सहायशाः । सहदेवस्य दायादो बह॒दश्चो भविष्यति ॥रबरे सहदेवः सुतस्तस्य सुनक्षत्रश्च तत्सुतः

English

Whose son was Ugrayudha? In which family was he born and glorified? What for were all the Nipas destroyed by him?

अध्याय १९२

श्लोक 44

रम्भातिलोत्तमाद्याश्च वैलक्ष्यं देवयोषितः ।न रेजुरवनीपाल तल्लक्ष्यहृदयेक्षणाः

rambhātilottamādyāśca vailakṣyaṃ devayoṣitaḥ / na rejuravanīpāla tallakṣyahṛdayekṣaṇāḥ

हिन्दी अर्थ

अस्तरिक्षात्सुपर्णस्तु सुपर्णाच्चाप्यमित्रजित् । पुत्रस्तस्य भरद्वाणों धर्मी तस्य सुतः स्मृतः..

English

The scholarly Yavinara was the son and succes¬ sor of DvimJdha. Dhrtiman was his son. His son was Satya- dhrti. Satyadhrti's son was the valorous Drdhanemi. The king named Suvarma was Drclhanemi's son.

अध्याय १९२

श्लोक 45

ततः कामो वसन्तश्च पार्थिवाप्सरसश्च ताः ।प्रणम्य भगवन्तौ तौ तुष्टुवुर् मुनिसत्तमौ

tataḥ kāmo vasantaśca pārthivāpsarasaśca tāḥ / praṇamya bhagavantau tau tuṣṭuvur munisattamau

हिन्दी अर्थ

पुत्र: कृतंजयों नाम धर्मिण: स भविष्यति । कृतंजयसुतो ब्रातो तस्य पुष्रो रणंजयः भविता संजयश्चापि बोरो राजा रणंजयात् संजयस्य सुतः शाक्यः शाक्याच्छुद्धोदनो3भवत्

English

The valorous Sarvabhauma (lord of the entire earth) was Suvarma's son. He shone as the sole lord of the earth and he became famous as Sarvabhauma.

अध्याय १९२

श्लोक 46

वसन्तकामाप्सरस ऊचुः ।प्रसीदतु जगद्धाता यस्य देवस्य मायया ।मोहिताः स्म विजानीमो नान्तरं विद्यते द्वयोः

vasantakāmāpsarasa ūcuḥ / prasīdatu jagaddhātā yasya devasya māyayā / mohitāḥ sma vijānīmo nāntaraṃ vidyate dvayoḥ

हिन्दी अर्थ

शुद्धोदनस्प भविया शाक्यार्ें राहुल: स्मृतः । प्रसैनजित्ततो भाव्यः क्षुद्रकों भविता ततः

English

In his great family was born (a king named) Mahat- pauravanandana. King Rukmaratha is remembered as the son of Mahatpaurava.

अध्याय १९२

श्लोक 47

प्रसीदतु स वां देवो यस्य रूपमिदं द्विधा ।धामभूतस्य लोकानाम् अनादेर् अप्रतिष्ठतः

prasīdatu sa vāṃ devo yasya rūpamidaṃ dvidhā / dhāmabhūtasya lokānām anāder apratiṣṭhataḥ

हिन्दी अर्थ

समाप्त हो जायेगा । पौरवबंश का वत्तास्त, ज॑ंसा कुछ कहा जाता है आप लोगों को बतला चुका पाण्ड्पुत्र महान् बलशाली अर्जन का विख्यात पौरववबंश समाप्त हो गया अब इसके उपरान्त महानूबलशाली इध्ष्वाकुबंशी राजाओं का वर्णन कर रहा हूँ । बुहद्रथ का उत्तराधिकारी वीर राजा बुृह॒त्क्षय था। उसका पूत्र क्षय हुआ, क्षय से वत्सव्यूह नामक पुत्र की उत्पत्ति हुई, वत्सव्यूह से प्रतिव्यूह नामक पुश्र की उत्पत्ति. हुई, उसका पुन्र दिवाकर हुआ । यह राजा दिवाकर सम्प्रति अयोध्या नगरी का राजा है

English

Rukmaratha's son was the king named Suparsva. Suparsva's son named Sumati was very virtuous.

अध्याय १९२

श्लोक 48

नरनारायणौ देवौ शङ्खचक्रायुधावुभौ ।आस्तां प्रसादसुमुखावस्माकमपराधिनाम्

naranārāyaṇau devau śaṅkhacakrāyudhāvubhau / āstāṃ prasādasumukhāvasmākamaparādhinām

हिन्दी अर्थ

२८२। दिवाकर पुत्र महान यशस्वी सहदेव होगा, सहदेव का उत्तराधिकारी बुंहददव होगा। बहुददव का पुत्र भानुरथ होगा। उसका पुत्र प्रतीताश्व होगा। प्रतीताश्व का पुत्र सुप्रतीत होगा। सुप्रतीत का पुत्र सहदेव होगा, उसका पुत्र सुनक्षत्र होगा। सुनक्षत्र से परम तपस्वी किन्नर नामक पुत्र होगा। किन्नर का पुत्र अन्तरिक्ष अपने, समय का महान् राजा होगा ।२८३-२८५। अन्तरिक्ष से सुपर्ण और सुपर्ण

English

The son of Sumati was lord Sannatiman, the right- eous-souled king. His son was named Sanati and Krta was his

अध्याय १९२

श्लोक 49

निधानं सर्वविद्यानां सर्वपापवनानलः ।नारायणो ऽतो भगवान् सर्वपापं व्यपोहतु

nidhānaṃ sarvavidyānāṃ sarvapāpavanānalaḥ / nārāyaṇo 'to bhagavān sarvapāpaṃ vyapohatu

हिन्दी अर्थ

से अमित्रज्ञित नामक पुत्र होगा। अमित्रजित् का पुत्र भरहाज होगा, उसका पुत्र धर्मी नाम से स्मरण किया जायगा । धर्मी का पुत्र कृतञ्जय होगा, कृतञ्जय का पुत्र ब्रात और ब्रात का पुत्र रणज्जय होगा। रणञ्जय से परम वीर पुत्र सञ्जय की उत्पत्ति होगी । सञ्जय का पुत्र शाकय और शाकक्‍्य से शुद्धोदन नामक पुत्र उत्पन्न होगा ।२८६-२८०। श्वाक्यवंश - में !शुद्धोदतत का पुत्र राहुल होगा। राहुल से प्रसेनजित् और प्रसेनजित से क्षद्र नामक पत्र होगा । क्षद्रक के क्षलिक और क्षूलिक से सुरथ नामक पत्र उत्पन्न

English

He was a disciple of the noble-souled Hiranyanabhi of the Kauthuma branch (of Samavedic study). Twenty four Saman-Sariihitas were expounded by him.

अध्याय १९२

श्लोक 50

शार्ङ्गचिह्नायुधः श्रीमानात्मज्ञानमयो ऽनघः ।नरः समस्तपापानि हतात्मा सर्वदेहिनाम्

śārṅgacihnāyudhaḥ śrīmānātmajñānamayo 'naghaḥ / naraḥ samastapāpāni hatātmā sarvadehinām

हिन्दी अर्थ

नवनवतितमोधष्ण्याय। द हैएट॑

English

The sons of Krta, the singers of Saman hymns, are re¬ membered by the name 'Pracyas' (Easterners). The heroic Ugrayudha was one of the sons of Krta. He was the scion of the family of Puru..

अध्याय १९२

श्लोक 51

जटाकलापबद्धो ऽयमनयोर् नः क्षमावतोः ।सौम्यास्यदृष्टिः पापानि हन्तुं जन्मार्जितानि वै

jaṭākalāpabaddho 'yamanayor naḥ kṣamāvatoḥ / saumyāsyadṛṣṭiḥ pāpāni hantuṃ janmārjitāni vai

हिन्दी अर्थ

क्षुद्रकात्कुलिको भाग्य: क्षुलिकात्सुरथः स्पृतः । सुमिन्रः सुरथस्थापि अन्त्यश्न भवति नपः एत ऐक्ष्वाकवा: प्रोक्ता भवितारः कलो युगे । बृहद्बलान्वये जाता भवितारः कलो युगे ॥

English

The mighty-armed lord of Paiicalas named Nila, who was the grandfather of Prsata, was killed by him (Ugrayudha) (and thereby) he exhibited his valour.

अध्याय १९२

श्लोक 52

तथात्मविद्यादोषेण यो ऽपराधः कृतो महान् ।त्रैलोक्यवन्द्यौ यौ नाथौ विलोभयितुम् आगताः

tathātmavidyādoṣeṇa yo 'parādhaḥ kṛto mahān / trailokyavandyau yau nāthau vilobhayitum āgatāḥ

हिन्दी अर्थ

अन्नानुवंशश्लोकोयं भविष्यज्ञेरदाहुतः । इक्ष्वाकृणामयं वंशः सुमित्रान्तो भविष्यति (२९२ सुमित्रं प्राप्य राजानं संस्थां प्राप्स्यति वे कलौ इत्येतन्मानवं क्षत्रमैलं च समुवाहतम्

English

Ugrayudha's son (successor) was a very famous king named Ksema. Suvira was born of Ksema. Suvira's son was Nrpanjaya. Viraratha was born of Nrpanjaya. Thus these are remembered as Pauravas (descendants of Puru).

अध्याय १९२

श्लोक 53

प्रसीद देव विज्ञानधन मूढदृशामिव ।भवन्ति सन्तः सततं स्वधर्मपरिपालकाः

prasīda deva vijñānadhana mūḍhadṛśāmiva / bhavanti santaḥ satataṃ svadharmaparipālakāḥ

हिन्दी अर्थ

अत ऊध्वें प्रवक््यासि सागधेयान्वृह॒द्रथान् । जरासंधस्य ये बंशे सहदेवान्वये नृपाः २६४ पश्चाशत तथा5ष्टो व समा राज्यमकारयत्। श्रुतश्रवाश्यतुःषष्टिसमास्तस्थ सुतो5भवत्

English

Purujanu was the son of Susanti. Riksa was born of Purujanu. The following were the sons and successors of Riksa.

अध्याय १९२

श्लोक 54

दृष्ट्वैतन्नः समुत्पन्नं यथा स्त्रीरत्नमुत्तमम् ।त्वयि नारायणोत्पन्ना श्रेष्ठा पारवती मतिः

dṛṣṭvaitannaḥ samutpannaṃ yathā strīratnamuttamam / tvayi nārāyaṇotpannā śreṣṭhā pāravatī matiḥ

हिन्दी अर्थ

अयुतायुस्तु षड्विशं राज्मं वर्षाण्यकारयत् । समाः शत निरामित्रों महीं भुक्तवा दिवं गतः ॥२€८ पञ्चाशतं समा: षद् थ॒ सुकृत्तः प्राप्तवान्महीम् । त्रयोविशं बुहत्कर्मा राज्य वर्षाण्यकारयत्

English

They were: Mudgala, Srrljaya, the king Brhadisu, Vikranta who was younger to him and Karnpilya, the fifth.

अध्याय १९२

श्लोक 55

तेन सत्येन सत्यात्मन्परमात्मन्सनातन ।नारायण प्रसीदेश सर्वलोकपरायण

tena satyena satyātmanparamātmansanātana / nārāyaṇa prasīdeśa sarvalokaparāyaṇa

हिन्दी अर्थ

होगा । सुरथ का पुत्र सुमिन्र इस वंश का अन्तिम राजा होगा। कलियुग में ये उपयक्त इत्वाकुवंशीय राजा लोग कहे गये हैं, बृहद्ल के बंश में कलियुग में इतने ही राजा उत्पन्न होंगे, ये सब शूरवीर, विद्वान सत्यप्रतिज्ञ और जितेख्रिय राजा होंगे ।२८९-२९१। भविष्य की कथाओं के जाननेबाले विद्वानूगण इस इक्ष्वाकुन वंश के विषय में एक इलोक गाते हैं, इसका तात्परय इस प्रकार है, इृक्ष्वाकुबंशीय राजाओं की परम्परा राजा सुमित्र तक चलेगी, कलियुग में सुमित्र राजा के अनन्तर इस बंध की समाप्ति हो जायगी भनृपुत्र राजा इला के वंश्न में उत्पन्न होनेवाले क्षत्रिय राजाओं का वर्णन कर चुका ।२९२-२६१॥ अब इसके अन्तर मगधदेशीय बृहद्रथ के वंश में उत्पन्न होनेवाले राजाओं का वर्णव कर रहा हूँ । जरासंघ एवं सहदेव के वंश में भूतकालौन, वर्तमानकालीन एवं भविष्यकालीन जो राजा गण उत्पन्न हो गये हैं, वर्तमान हैं, एवं

English

For the sustenance and the upkeep of all the five the father spoke to them thus: "Know that there are five flouri¬ shing territories for all the five of you." Since the five were sufficient, all the territories were together well known as Paiica- las.* Maudgalyas, the descendants of Mudgala,were Brahmanas endowed with Ksatriya traits.

अध्याय १९२

श्लोक 56

प्रसन्नबुद्धे शान्तात्मन्प्रसन्नवदनेक्षण ।प्रसीद योगिनामीश नर सर्वगताच्युत

prasannabuddhe śāntātmanprasannavadanekṣaṇa / prasīda yogināmīśa nara sarvagatācyuta

हिन्दी अर्थ

उत्पन्न हंगि, मुख्यतः उत सबों का वर्णन आप लोगों से कर रहा हूँ, सुनिये । उस विस्यात महाभारत में सहदेव का संहार हो गया था, उसका पुत्र राज सोमाधि था, बह भिरिव्रज का शासक था ।२६४-२६९६। उसने अठावन चर्षों तक राज्य किया उसका पुत्र श्रुतशक्षवा था, जिसने चौंसठ वर्षो तक राज्य किया । तदनन्तर अयुतायु नामक राजा हुआ, जिसने छब्बीस वर्षों तक राज्य किया। उसके बाद राजा निरामित्र हुआ, जो सौ

English

These were known ns Kanthamudgalas and they mer¬ ged into the Atigirasa Gotra. Mudgala's eldest son was very famous. He was engrossed in the meditation of Brahman.

अध्याय १९२

श्लोक 57

नमस्यामो नरं देवं तथा नारायणं हरिम् ।नमो नराय नम्याय नमो नारायणाय च

namasyāmo naraṃ devaṃ tathā nārāyaṇaṃ harim / namo narāya namyāya namo nārāyaṇāya ca

हिन्दी अर्थ

वर्षों तक पृथ्वी पर शासन करने के उपरान्त स्वर्गंगामी हुआ ।२६७-२९८। तदननन्‍्तर सुकृत्त ने छप्पन वर्षो तक पृथ्वी पर राज्य किया, फिर बृह॒त्कर्मा नामक राजा हुआ, उसने तेईस वर्षों तक प्रृथ्वी पर राज्य है ० वायुप्राणम्

English

From him Indrasena conceived Badhyasva. We have heard that Mcnaka bore to Badhyasva twins.

अध्याय १९२

श्लोक 58

प्रसन्नानामनाथानां तथा नाथवतां प्रभो ।शं करोतु नरो ऽस्माकं शं नारायण देहि नः

prasannānāmanāthānāṃ tathā nāthavatāṃ prabho / śaṃ karotu naro 'smākaṃ śaṃ nārāyaṇa dehi naḥ

हिन्दी अर्थ

सेनाजित्सांप्रतं चापि एता वे भोक्ष्यते समाः । श्रुतंजयस्तु वर्षाणि चत्वा रिशज्भधू विध्यति १३००

English

They were Divodasa the saintly king and Ahalya of great fame. Ahalya bore Satananda the excellent sage to Saradvata. His son was Satyadhrti of great fame. He was a master of the science of archery.

अध्याय १९२

श्लोक 59

मार्कण्डेय उवाच: एवमभ्यर्चितः स्तुत्या रागद्वेषादिवर्जितः ।प्राहेशः सर्वभूतानां मध्ये नारायणो नृप

mārkaṇḍeya uvāca: evamabhyarcitaḥ stutyā rāgadveṣādivarjitaḥ / prāheśaḥ sarvabhūtānāṃ madhye nārāyaṇo nṛpa

हिन्दी अर्थ

अष्टपर्चाशतं चाब्दान्राज्ये स्थास्यति वे शुचिः । अष्टाविशत्ससाः पूर्णा: क्षेभो राजा भ्विष्यति ३६ भुवतस्तु चतुःषष्टी राज्यं प्राप्स्यति वीयंवान्। पड्चवर्षाणि पूर्णानि धर्मनेत्रो भविष्यति ४३०३ भोक्ष्यते नृपतिश्चेव अष्टपठ्चाशतं समाः। अष्ठत्रित्समा राज्य सुब्रतस्य भविष्यति

English

On seeing an Apsaras (celestial damsel) in front, the semen virile of Satyadhrti was emitted in the bush of Sara-grass and twins were born.

अध्याय १९२

श्लोक 60

नारायण उवाच: स्वागतं माधवे कामे भवत्वप्सरसामपि ।यत्कार्यम् आगतानां च इहास्माभिस्तदुच्यताम्

nārāyaṇa uvāca: svāgataṃ mādhave kāme bhavatvapsarasāmapi / yatkāryam āgatānāṃ ca ihāsmābhistaducyatām

हिन्दी अर्थ

चत्वारिशदशाष्टो च दृढसेनो भविष्यति।। त्रयस्त्रिशत्तु वर्षाणि सुमतिः प्राप्य्यले ततः

English

Santanu who had come that way ahunting took them out of mercy (Krpa). The boy is remembered as Krpa and the girl Krpi. She was also known as Gautaml. Thus the race of Gautama, known as Saradvatas and Rtathyas, has been recounted.

अध्याय १९२

श्लोक 61

यूयं संसिद्धये नूनमस्माकं बलशत्रुणा ।संप्रेषितास्ततो ऽस्माकं नृत्ययोगादिदर्शनम्

yūyaṃ saṃsiddhaye nūnamasmākaṃ balaśatruṇā / saṃpreṣitāstato 'smākaṃ nṛtyayogādidarśanam

हिन्दी अर्थ

दाविशतिसमा राज्यं सुचलो भोक्ष्यते ततः । चत्वारिशत्समा राजा सनेत्रों भोग्यते ततः आरिजयस्तु वर्षाणि पञ्चाशत्प्राप्स्यते महोम् । द्वात्रिशच्च नृपा होते भवितारों बहहंथात्

English

The intelligent Sudasa was born of Cyavann was born as the son of Sudasa. Somalia was his son

अध्याय १९२

श्लोक 62

न वयं गीतनृत्येन नाङ्गचेष्टादिभाषितैः ।लुब्धा वै विषयैर् मन्ये विषया दारुणात्मकाः

na vayaṃ gītanṛtyena nāṅgaceṣṭādibhāṣitaiḥ / lubdhā vai viṣayair manye viṣayā dāruṇātmakāḥ

हिन्दी अर्थ

मुनिकः स्वासिनं ह॒त्वा पुत्रं सम्िषेक्ष्यति । सिषतां क्षत्रियाणां हि प्रद्योतो सुनिकों बलातू

English

When the race was about to be extinct, Ajamidha was born again. That was Somalia. Somalia's son was Tanm When he was killed hundred other sons were born to the noble- soulcd lord Ajamidha in his birth as Somaka. The youngest of them, Prsata was Drupada's father. } ° 1

अध्याय १९२

श्लोक 63

शब्दादिसङ्गदुष्टानि यदा नाक्षाणि नः शुभाः ।तदा नृत्यादयो भावाः कथं लोभप्रदायिनः

śabdādisaṅgaduṣṭāni yadā nākṣāṇi naḥ śubhāḥ / tadā nṛtyādayo bhāvāḥ kathaṃ lobhapradāyinaḥ

हिन्दी अर्थ

बन + जल ओ+ नल व तीन आए ४ 3 प्रन्‍माताज अजीत 6५ ॥ ५ डडगा- पति की गत पहल 7 ०५ ३ जप न वा न जे सनीतजयलपार पा स्णाड पका ए- ५ ५ जन्‍म अप 3 अन्ना उन वा अआ- 4 8७७. +++पाआा अब +५ मम :3» “ने मेन जनाप गाकण०+ कम ३५-अा+-फ- किया । हस समय रुस वंश का सेनजित् वामक राजा राज्य कर रहा है, उसका पुत्र श्रुव्॑जय चालीस वर्षों तक राज्य करेगा। तदनम्तर महाव् बलशाली, परम बुद्धिमान् पराक्रमशील समहाबल नामक राजा होगा जो तैंतीस वर्षों तक पृथ्वी पर शासन करेगा ।२९६-३० १। उसके उपरान्त शुचि नामक एक राजा अद्ठावन वर्षों तक राज्य पद पर प्रतिष्ठित होबा। फिर क्षेम नामक राजा अट्ठाईस वर्षों तक राजा होगा ।

English

His son was Dhystadyumna and Dhrstaketu was his son. Dhuminl, the queen of Ajamidha, was desirous of a son In her rebirth she performed a very difficult penance for a hun¬ dred years. She performed Homas in the fire. She kept awake She ate but little and that too only the holy food. She perform¬ ed great holy rites. Day and night she stayed on the Kusa mattress alone. By these rigorous activities, she became smoke- coloured. The powerful Ajamidha begot of her Rksa, asmoke- coloured son, who was elder brother of Sita (one of white colour). Sam vara na was born of Rksa. Kuru was bom of Sam- varana.

अध्याय १९२

श्लोक 64

ते सिद्धाः स्म न वै साध्या भवतीनां स्मरस्य च ।माधवस्य च शाक्रो ऽपि स्वास्थ्यं यात्वविशङ्किताः

te siddhāḥ sma na vai sādhyā bhavatīnāṃ smarasya ca / mādhavasya ca śākro 'pi svāsthyaṃ yātvaviśaṅkitāḥ

हिन्दी अर्थ

तदनस्तर बलशाली भुवत नामक राजा चोंसठ वर्षों के लिए राजा होगा। फिर राजा धर्मक्षेत्र पाँच वर्षों के लिए होगा। तदुपरास्त धपति अद्ठावन वर्ष के लिए पृथ्वी का उपभोग करेगा। फिर राजा सुत्रत का अड़तीस वर्ष के लिये राज्य होगा ।३०२-३०४। तदनन्तर राजा दृढ़सेन अदृठावन वर्षों तक राजा होगा । उसके बाद सुमति त़ैंतीस वर्ष के लिये राज्य पंद प्राप्त करेगा। फिर सुचल नामक

English

After treading on (conquering) Prayaga, he built Kuruksctra. The cxcessive-splendoured king ploughed it for many years.

अध्याय १९२

श्लोक 65

यो ऽसौ परश्च परमः पुरुषः परमेश्वरः ।परमात्मा समस्तस्य स्थावरस्य चरस्य च

yo 'sau paraśca paramaḥ puruṣaḥ parameśvaraḥ / paramātmā samastasya sthāvarasya carasya ca

हिन्दी अर्थ

राजा बाईस वर्षों तक पृथ्वी का उपभोग करेगा । उसके उपरान्त राजा सुनेत्र चालीस वर्षों तक राज्य करैगा । तदनन्तर सत्यजित तिरासी वर्षों तक पृथ्वी पर राज्य करेगा। फिर राजा वोरजित् इस पृथ्वी पर आकर पैतीस वर्षों तक राज्य करेगा ।३०५-३०७। तदुपरास्त राजा अरिज्जय पचास वर्षों तक राज्य करेगा। बहद्रथ के उपरान्त ये बाईस राजा लोग पृथ्वी पर राज्य करेंगे। उनका शासनकाल प्रे एक सहस्न वर्ष का होंगा । बृहद्रथ वंशीय राजाओं के राज्यकाल के उपरान्त वीतिहोत्र बंशीय राजाओं का राज्य जिस समय रहेगा, उस समय समस्त क्षत्रिय जाति के देखते देखते मुनिक नामक एक राज्य-कमंचारी प्रधोत नामक अपने स्वामी का अपने पराक्रम से संहार कर पुत्र का राज्याभिषेक फरेगा। वहू.नवीन राजा

English

While it was being ploughed, Sakra shone there and granted this boon: Your (Kuruksetra) shall be beautiful, holy and resorted to by meritorious persons.

अध्याय १९२

श्लोक 66

उत्पत्तिहेतुरेते च यस्मिन्सर्वं प्रलीयते ।सर्वावासीति देवत्वाद् वासुदेवेत्य् उदाहृतः

utpattiheturete ca yasminsarvaṃ pralīyate / sarvāvāsīti devatvād vāsudevety udāhṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

स॒ वे प्रणतसामन्तो भविष्येषबनयर्वाजितः । त्रयोविशत्समा राजा भविता स नरोत्तमः

English

Persons born in his family were excellent kings famous as Kurus. Kuru's beloved sons were Sudhanvan, Jahnu, Pariksita the great king, Putraka and Arimardana. It is remem¬ bered that the intelligent Suhotra was the successor of Sudhan¬ van.

अध्याय १९२

श्लोक 67

वयमंशांशकास्तस्य चतुर्व्यूहस्य मानिनः ।तदादेशितवार्त्मानौ जगद्बोधाय देहिनाम्

vayamaṃśāṃśakāstasya caturvyūhasya māninaḥ / tadādeśitavārtmānau jagadbodhāya dehinām

हिन्दी अर्थ

चतुविशत्समा राजा पालकों भविता ततः विशाखयूपो भविता नृपः पञचाशतों समाः अष्टत्रिशच्छत भाव्या: प्राद्योताः पञ्च ते सृताः । ह॒त्वा तेषां यशः कृत्स्ने शिशुनाको भविष्यति ॥ वाराणस्यां सुतस्तस्य संप्राप्स्यति गरिरिन्षजम् । शिशुनाकस्य वर्षाणि चत्वारिशख्धूविष्पति

English

Cyavana was his son. The king was an expert in religious affairs. Krta was the son of Cyavana. He performed great penance and many Yajnas. The king procreated his famous son Vidyoparicara who claimed friendship of Indra. He was a great hero who could traverse the sky and was known as Vasu too.

अध्याय १९२

श्लोक 68

तत्सर्वभूतं सर्वेशं सर्वत्र समदर्शिनम् ।कुतः पश्यन्तौ रागादीन्करिष्यामो विभेदिनः

tatsarvabhūtaṃ sarveśaṃ sarvatra samadarśinam / kutaḥ paśyantau rāgādīnkariṣyāmo vibhedinaḥ

हिन्दी अर्थ

शकवर्ण: सुतस्तस्य षद्त्रिशच्च भविष्यति । ततस्तु विर्शात राजा क्षेमवर्मा भविष्यति ३१६

English

Girika bore seven sons to Vidyoparicara—Brhad- ratha, a great warrior, who became famous as the king of Magadha, Pratyagjrha, Kusa, one whom they call Manivahana Mathailya, Lalittha and Matsyakala the seventh.

अध्याय १९२

श्लोक 69

वसन्ते मयि चेन्द्रे च भवतीषु तथा स्मरे ।यदा स एव भूतात्मा तदा द्वेषादयः कथम्

vasante mayi cendre ca bhavatīṣu tathā smare / yadā sa eva bhūtātmā tadā dveṣādayaḥ katham

हिन्दी अर्थ

अध्टाविशत्समा राजा विधिसारों भविष्यति । पश््चावशत्समा राजा दर्शकस्तु भविष्वति उदायी भविता यस्मात्त्रयस्त्रिशत्समा नृपः। वे स पुरवरं राजा पृथिव्यां कुसुमाद्दयम् ।।

English

Bfhadratha's successor was famous by the name of Kusagra. Kusagra's son was a powerful king named Rsabha.

अध्याय १९२

श्लोक 70

तन्मयान्यविभक्तानि यदा सर्वेषु जन्तुषु ।सर्वेश्वरेश्वरो विष्णुः कुतो रागादयस्ततः

tanmayānyavibhaktāni yadā sarveṣu jantuṣu / sarveśvareśvaro viṣṇuḥ kuto rāgādayastataḥ

हिन्दी अर्थ

गड्भाया दक्षिणे कले चतुर्थेब्दे करिष्यति (३१६ हांचत्वारिशत्समा भाव्यों राजा वे नन्दिवर्धन: । चत्वारिशत्त्रयं चेब महानन्दी भविष्यति ४३२०

English

Rsabha's successor was a virtuous king named Puspa- van. King Satyahita is remembered as his valoious successor.

अध्याय १९२

श्लोक 71

ब्रह्माणम् इन्द्रम् ईशानम् आदित्यमरुतो ऽखिलान् ।विश्वेदेवान् ऋषीन् साध्यान्वसून्पितृगणांस् तथा

brahmāṇam indram īśānam ādityamaruto 'khilān / viśvedevān ṛṣīn sādhyānvasūnpitṛgaṇāṃs tathā

हिन्दी अर्थ

किसी प्रकार का अनेतिक कार्य नहीं करेगा। सभी सामन्त लोग उसके सम्मुख प्रणत होंगे । इस प्रकार वहु नरश्रेष्ठ तेईस वर्षों तक राज्य करेगा ।३१०८-३११॥ उसके बाद पालक नामक राजा चौबोस वर्षों तक राज्य करेंगा । फिरं विशासयूप नामक राजा होगा, वह पचास वर्षों तक राज्य करेगा। फिर अजक नामक राजा का इकतीस वर्षों तक राज्य होगा। तदनन्तर उसका पुत्र वर्तिबधंन बीस वर्षों तक राज्य करेगा । प्रयोत के उपर्युक्त पाँच वंश्ञज राजा लोग इस प्रकार एक सो अड़्तीस (१३८) वर्षों तक राज्य करेंगे । तदतस्तर उन सब के यद को समूलत: नष्ट करके शिशुनाक नामक राजा होगा ।३१२९०३ १४। सब प्रथम यह भिरिब्रज प्रदेश का राजा होगा, तत्पश्चात् इसका पुत्र वाराणसी का राजा होगा । शिशुनाक बासींस वर्षों तक राज्य करेंगा । उसका पुत्र शकवर्ण छत्तीस वर्ष तक राज्य करेगा। उसके उपरान्त

English

His son was Sudhanvan. From him the valorous Drja was born. Orja's son was Nabhasa and from him was born that powerful king Jarasandha. He was born in two pieces and he was joined by Jara. Jarasandha was mighty-armed because he was joined by Jara.

अध्याय १९२

श्लोक 72

यक्षराक्षसभूतादीन्नागान्सर्पान्सरीसृपान् ।मनुष्यपक्षिगोरूपगजसिंहजलेचरान्

yakṣarākṣasabhūtādīnnāgānsarpānsarīsṛpān / manuṣyapakṣigorūpagajasiṃhajalecarān

हिन्दी अर्थ

राजा क्षेमवर्मा बीस वर्षों तक राज्य करेगा । उसके बाद राजा अजातशत्रु पण्चीस वर्षों तक राज्य करेगा तदन्दर क्षतौजा नामक राजा चालीस वर्षों के लिये राज्य पद प्राप्त करैगा। उसके बाद रागा विविसार अठाईस वर्षों तक राब्य करेगा । फिर दद्ंन नामक राजा पच्चीस वर्ष तक राज्य करेगा ३१५-३१५। तदुप्राम्त उदायो तामक राजा लैंतीस वर्षा तक राज्य करेगा। वह राजा उदायी पृथ्वी माण्डल में कुसुम

English

This Jarasandha of great strength was the conqueror of all Ksatriya kings. Jarasandha's son was the valorous Saha- deva.

अध्याय १९२

श्लोक 73

मक्षिकामशकान्दंशाञ्छलभाञ्जलजान् कृमीन् ।गुल्मवृक्षलतावल्लीत्वक्सारतृणजातिषु

makṣikāmaśakāndaṃśāñchalabhāñjalajān kṛmīn / gulmavṛkṣalatāvallītvaksāratṛṇajātiṣu

हिन्दी अर्थ

नॉम से विस्यात, परम रमणीय मगर में गंगा के दाहिने तट पर अपने शासन काल के चतुर्थ वर्ष में अपना निवास-स्थान निर्मित करेगा । उसके बाद राजा नन्दिवर्धन बयालीस वर्षों तक राज्य पद का उपभोग करेगा । फिर महानन्दी नामक राजा पेंतालीस वर्षों तक राज्य करेगा ।३१६-३२०। ये उपर्युक्त दस राजा दृत आरध्य पत्यविशत्समा नृप इत्यल्त: पाठो ह. पुस्तके नास्ति ।

English

Sahadeva's son was the glorious Somadhi of very great penance. Srutasruva was the son of Somadhi and is glorified as Magadha.

अध्याय १९२

श्लोक 74

यच्च किंचिददृश्यं वा दृश्यं वा त्रिदशाङ्गनाः ।मन्यध्वं जातमेकस्य तत्सर्वं परमात्मनः

yacca kiṃcidadṛśyaṃ vā dṛśyaṃ vā tridaśāṅganāḥ / manyadhvaṃ jātamekasya tatsarvaṃ paramātmanaḥ

हिन्दी अर्थ

इत्येते भवितारों वे शेशुनाका नूपा दश । शतानि त्रीणि वर्षाणि द्विषष्टयरभ्यधिकानि तु

English

Janamejaya was the successor of Parlksita. Sruta- sena's successor was named Bhlmasena. (lines missing).

अध्याय १९२

श्लोक 75

जायमानः कथं विष्णुमात्मानं परमं च यत् ।रागद्वेषौ तथा लोभं कः कुर्याद् अमराङ्गनाः

jāyamānaḥ kathaṃ viṣṇumātmānaṃ paramaṃ ca yat / rāgadveṣau tathā lobhaṃ kaḥ kuryād amarāṅganāḥ

हिन्दी अर्थ

शेशुनाका भविष्यन्ति राजानः क्षत्रबान्धवा: । एते: सार्थ भविष्यन्ति तावत्कालं नृपाः परे ऐक्षाकवाश्रतुविशत्पञठचालाः पञचरविशति: । कालकास्तु चतुविशच्चतुविशत्तु हैहया: ४३२३ द्वात्रिशद् कलिज्भास्तु पञर्चावशत्तथा शकाः। (+कुरवश्चापि षर्दटान्निशदष्टाविशतिमेथिला:

English

Jahnu begot a son named Suratha who became a king. Suratha's successor was the heroic king Viduratha.

अध्याय १९२

श्लोक 76

सर्वभूतमये विष्णौ सर्वगे सर्वधातरि ।निपात्य तं पृथग्भूते कुतो रागादिको गुणः

sarvabhūtamaye viṣṇau sarvage sarvadhātari / nipātya taṃ pṛthagbhūte kuto rāgādiko guṇaḥ

हिन्दी अर्थ

श्रसेनास्त्रयोविशद्वीतिहोन्राश्न विशति: । तुल्यकाल भविष्यन्ति सर्व एवं महीक्षितः) 3२२५ महानन्दिसुतश्रापि शुूद्रायां कालसंबृतः । उत्पत्स्यते महापद्मः सर्वक्षत्रान्तरे नृपः

English

It is well known that Viduratha's son too was Sarva- bhauma. Jayatsena was bom of Sarvabhauma and Aradhi was his son.

अध्याय १९२

श्लोक 77

एवमस्मासु युष्मासु सर्वभूतेषु चाबलाः ।तन्मथैकत्वभूतेषु रागाद्यवसरः कुतः

evamasmāsu yuṣmāsu sarvabhūteṣu cābalāḥ / tanmathaikatvabhūteṣu rāgādyavasaraḥ kutaḥ

हिन्दी अर्थ

ततः प्रभ्नुति राजानो भविष्याः शुद्रयोनयः । एकराट स महापशद्म एकच्छन्नो भविष्यति ३२७ उद्धरिष्यति ताम्सबॉन्कोटिल्यो बे द्विरष्टभिः । भुक्तृवा महीं वर्षश्त नन्‍देन्दुःस भविष्यति

English

Mahasattva was born of Aradhi and Ayutayu came thereafter. Akrodhana was the son of Ayutayu. It is remember¬ ed that Devatithi was born of him.

अध्याय १९२

श्लोक 78

सम्यग् दृष्टिर् इयं प्रोक्ता समस्तैक्यावलोकिनी ।पृथग्विज्ञानमात्रैव लोकसंव्यवहारवत्

samyag dṛṣṭir iyaṃ proktā samastaikyāvalokinī / pṛthagvijñānamātraiva lokasaṃvyavahāravat

हिन्दी अर्थ

चन्द्रगुप्तं नृप॑ राज्ये कोटिल्य: स्थापयिष्यति । चतुधिशत्समा राजा चन्द्रगुप्तो भविष्यति

English

It was Rksa who became the successor of Devatithi. Bhlmasena was born of Rksa and Dilipa was his son.

अध्याय १९२

श्लोक 79

भूतेन्द्रियान्तः करणप्रधानपुरुषात्मकम् ।जगद्वै ह्येतद् अखिलं तदा भेदः किमात्मकः

bhūtendriyāntaḥ karaṇapradhānapuruṣātmakam / jagadvai hyetad akhilaṃ tadā bhedaḥ kimātmakaḥ

हिन्दी अर्थ

न ननिकाएए टली 7 पान कब ह ० ताणणए कण ता शिटए ल्‍काए कटा अत 7 । ता तन पहनने ना पलिनित-का कन+ “ना (2 न नया फेक कफ, ननगा "4५ -+ ५० ५3 रत हा जान "काम शिशुनाक वंश में उत्पन्न होंगे--ये सब कुल मिलाकर तीन सौ बासठ वर्षों तक राज्य करेंगे। इन शिशुनाकवंशी राजाओं के राजत्वकाल में अस्यान्य क्षत्रिय जाति के राला लोग भी होंगे । जिनमें इक्ष्वाकुवंशीय चोबीस, पंचान्रबंशीय पच्चीस, कालक चौबीस, हैहय चौबीस, कलिर्ः देशीय बत्तीस, शक पच्चीस, कुरुदेशीय छत्तीस, मिथिलादेशीय अट्ठाईस, शूरसेम के तेईस, वीतिहोत्र के बीस उल्लेखनीय हैं। इन

English

Pratlpa was the son of Dilipa. It is remembered that. three sons were born to him. Those three were Devapi, Santanu and Bah lika.

अध्याय १९२

श्लोक 80

भवन्ति लयमायान्ति समुद्रसलिलोर्मयः ।न वारिभेदतो भिन्नास्तथैवैक्यादिदं जगत्

bhavanti layamāyānti samudrasalilormayaḥ / na vāribhedato bhinnāstathaivaikyādidaṃ jagat

हिन्दी अर्थ

सबका शासनकाल एक ही समय में होगा ।३२१-३२५। समस्त क्षत्रियवंशीय राजाओं के बाद महापत्म से शुद्रयोनि में उत्पन्न कन्या से उत्पन्न महाप्म नामक एक पुत्र होगा । उसो के राजत्वकाल में प्रायः सभी राजा लोग शुद्ध योनि में उत्पन्न होनैवाले होंगे । वह महाप्म अपने समय का एकच्छत्र सम्राट् होगा । वह अट्ठाईस वर्षों तक पृथ्वी का पालन करेगा। भवितव्यता की बलवत्ता से वह महापग्म

English

King Saptabahlisvara should be known as (the son) of Bahllka. Somadatla too, of great fame, was the son of Bahllka.

अध्याय १९२

श्लोक 81

यथाग्नेर् अर्चिषः पीताः पिङ्गलारुणधूसराः ।तथापि नाग्नितो भिन्नास् तथैतद् ब्रह्मणो जगत्

yathāgner arciṣaḥ pītāḥ piṅgalāruṇadhūsarāḥ / tathāpi nāgnito bhinnās tathaitad brahmaṇo jagat

हिन्दी अर्थ

समस्त क्षत्रिय राजाओं का गवंहरण करने वाला होगा ।३२६-३२८! उसके एक सहृख्र पृत्र होंगे, जिनमें बारह राजा होंगे, उन सब का राजत्वकाल केवल आठ वर्षो का होगा । महापद्य के बाद वे सब क्रम क्रम से शासनाधिरृढ़ होंगे। उन सब को कौटिल्य निर्मूल कर देंगे । महापद्मवंश का अच्तिम राजा सौ वर्षों तक पृथ्वी का शासन करेगा ।२२६-३३०। कोटिल्य उच्चे अवदस्थ कर चर्वगुप्त को पिहासन पर प्रतिष्ठित करेंगे । वह चद्धगुप्त चौबीस वर्षों के लिये राजा होगा । उसके बाद भद्रसाद पच्चीस वर्ष तक राजा

English

Bhuri, Bhurisravas and Sala were born of Somadatta. With a desire to accumulate virtue Devapi (renounced every¬ thing and) went to the forest.

अध्याय १९२

श्लोक 82

भवतीभिश्च यत् क्षोभम् अस्माकं स पुरंदरः ।कारयत्यसद् एतच् च विवेकाचारचेतसाम्

bhavatībhiśca yat kṣobham asmākaṃ sa puraṃdaraḥ / kārayatyasad etac ca vivekācāracetasām

हिन्दी अर्थ

+ धनुश्चिह्वान्तर्गतग्रल्थो ग. पुस्तके नास्ति

English

Sage Devapi became the preceptor of Dcvas. To this noble-souled sage, two sons Cyavana and Istaka were born.

अध्याय १९२

श्लोक 83

भवन्त्यः स च देवेन्द्रो लोकाश्च ससुरासुराः ।समुद्राद्रिवनोपेता मद्देहान्तरगोचराः

bhavantyaḥ sa ca devendro lokāśca sasurāsurāḥ / samudrādrivanopetā maddehāntaragocarāḥ

हिन्दी अर्थ

भविता भद्गसारस्तु पञ्चॉविशत्समा नृप:। षड्विशत्तु समा राजा अशोको भविता नृघु ३३२ बन्धुपालितदायादो दशमानोद्धपालित: । भविता सप्त वर्षाणि देववर्मा नराधिपः

English

Santanu became king. He was a scholar and a great physician ( MahabhUa ). About this Mahabhisa they cite this verse.

अध्याय १९२

श्लोक 84

यथेयं चारुसर्वाङ्गी भवतीनां मयाग्रतः ।दर्शिता दर्शयिष्यामि तथा चैवाखिलं जगत्

yatheyaṃ cārusarvāṅgī bhavatīnāṃ mayāgrataḥ / darśitā darśayiṣyāmi tathā caivākhilaṃ jagat

हिन्दी अर्थ

राजा शतधरश्नाष्टो तस्य पुत्रो भविष्यति । बृहदश्श्न वर्षाणि सप्त वे भविता नृपः ३३४५ इत्येते नव भूपा ये भोक्ष्यन्ति च बस धरासम् । सप्तत्रिशच्छतं पूर्ण तेभ्यः शुद्धान्य भिष्पति

English

"Whomsoever docs the king touch, be he very old due to the efflux of time, becomes a youth again. Therefore they know him as Samtanu (Sam —happiness, Tanu —body)/' Therefore the quality of his being Sarhtanu was well known among the subjects. That righteous king Samtanu married Jahnavx (Ganga).

अध्याय १९२

श्लोक 85

प्रयातु शक्रो मा गर्वमिन्द्रत्वं कस्य सुस्थिरम् ।यूयं च मा स्मयं यात सन्ति रूपान्विताः स्त्रियः

prayātu śakro mā garvamindratvaṃ kasya susthiram / yūyaṃ ca mā smayaṃ yāta santi rūpānvitāḥ striyaḥ

हिन्दी अर्थ

पुष्पमित्रस्तु सेनानो रुद्धत्य वे बहुद्रथम् । कारयिष्यति वे राज्यं समाः षष्टि सदव तु बसुमित्रः सुतो भाव्यो दश वर्षाणि पाथिवः । ततोइन्क्रकः समा है तु भविष्यति सुतश्र वे.

English

The lord begot a son of her, named Devavrata (who later became) Bhlsma. That Bhlsma became famous as the grandfather of the Pantfavas.

अध्याय १९२

श्लोक 86

किं सुरूपं कुरूपं वा यदा भेदो न दृश्यते ।तारतम्यं सुरूपत्वे सततं भिन्नदर्शनात्

kiṃ surūpaṃ kurūpaṃ vā yadā bhedo na dṛśyate / tāratamyaṃ surūpatve satataṃ bhinnadarśanāt

हिन्दी अर्थ

भविष्यन्ति समास्तस्मात्तित्र एवं पुलिन्दका:। राजा घोषसुताश्रापि वर्षाणि भविता त्रयः(? ) ॥

English

After some time Samtanu begot his most favourite son Vicitravlrya who as king did much for the welfare of the subjects. Krsnadvaipayana begot of Vicitravlrya's wife (< ksetra ), Dhrtarastra, Pandu and Vidura. Gandharl bore to Dhrtarastra a hundred sons. Duryodhana was the eldest among them. He became the lord of all Ksatriyas. Madri and the queen Prtha became the wives of Pandu.

अध्याय १९२

श्लोक 87

भवतीनां स्मयं मत्वा रूपौदार्यगुणोद्भवम् ।मयेयं दर्शिता तन्वी ततस्तु शममेष्यथ

bhavatīnāṃ smayaṃ matvā rūpaudāryaguṇodbhavam / mayeyaṃ darśitā tanvī tatastu śamameṣyatha

हिन्दी अर्थ

ततो व विक्रमितश्रस्तु समा राजा ततः पुनः । द्वान्रिशद्धूविता चापि समा भागवतो नृपः ॥३४ १ भविष्यति सुतस्तस्य क्षेममुमिः समा दश । दशते शुदगराजानो भोक्ष्यन्तीमां वसंधरामू शर्त पूर्ण दश ह्वे च तेम्यः कि वा गसिष्यति । अपा्िवसुदेव तु बाल्यादुष्यसनिनं नृपमू

English

Sons bestowed by gods were born of them on behalf of Pandu. Yudhisthira was born, thanks to the grace of Dharma; Vrkodara was born of Vayu; Dhananjaya whose valour was equal to that of Sakra was born of Indra. Sahadcva and Nakula were born to Madri, thanks to the grace of Asvins.

अध्याय १९२

श्लोक 88

यस्मान् मदूरोर्निष्पन्ना त्वियमिन्दीवरेक्षणा ।उर्वशी नाम कल्याणी भविष्यति वराप्सराः

yasmān madūrorniṣpannā tviyamindīvarekṣaṇā / urvaśī nāma kalyāṇī bhaviṣyati varāpsarāḥ

हिन्दी अर्थ

होगा । फिर अशोक नामक राजा मनुष्यों में छब्वीस वर्षों तक राज्य करेगा ।३३१-३३२। उसका पुत्र कुनाल आठ वर्ष राज्य करेगा। इन्द्रपालित कुनाल का पुत्र बन्धुपालित आठ वर्षों तक राज्यपद पर समासीन होगा । बन्धुपालित का उत्तराधिकारी दस वर्ष के लिये राजा होगा । फिर नराधिपति देववर्मा सात वर्ष के लिये राजा होगा । तददु- परान्त उसका पुत्र राजा शतधर आठ वर्ष राज्य करेगा । पश्चात् राजा वृहदश्व सात वर्ष राज्य करेगा ।३३३-

English

Five sons were born to DraupadI from the (five) Pandavas. DraupadI bore Srutividdha, the eldest of them, to Yudhisthira. Hidarhba bore her son Ghatotkaca to Bhlmasena. Kasya too bore her son Sarvavrka to Bhlmasena.

अध्याय १९२

श्लोक 89

तदियं देवराजस्य नीयतां वरवर्णिनी ।भवत्यस्तेन चास्माकं प्रेषिताः प्रीतिमिच्छता

tadiyaṃ devarājasya nīyatāṃ varavarṇinī / bhavatyastena cāsmākaṃ preṣitāḥ prītimicchatā

हिन्दी अर्थ

३३४५॥ ये तन्दबंश के नव राजा पृथ्वी का भोग करेंगे, उन-सब का राजत्व-काल कुल मिलाकर एक सौ सैंतीस (?) वर्षों का होगा इन नन्दवंशीय राजाओं के हाथ से शासन शुद्धों के हाथ में चला जायगा। अन्तिम राजा बृहदश्व का सेनापति पुष्पमित्न उसको मारकर स्वयं साठ वर्षों राज्य करेगा पुथ्पमित्र आठ पुत्र होंगे, जो सब के सब राजा होंगे। सब से बड़ा पुत्र सात वर्षों तक राज्य पद पर प्रतिष्ठित होगा ।३३६“३२५। फिर वसुमित्र नामक पुत्र दस वर्ष के लिये राजा होगा। फिर अस्ध्रक नामक पुत्र दो वर्ष के लिये राजा होगा । फिर पुलिभ्दक तीन वर्ष के लिये ओर घोषसुत भी तीन वर्ष के लिये राजा बनेंगा । उसके बाद राजा बिक्रमित्र भी तीन वर्ष के लिये राजा होगा । तदनन्तर भागवत नामक राजा होगा, जो बत्तीस बर्षों

English

The heroic Abhimanyu was born of Subhadra as the son of Partha. Parlksit was born of Uttara, the princess of Virata, as the son of Abhimanyu.

अध्याय १९२

श्लोक 90

वक्तव्यश्च सहस्राक्षो नास्माकं भोगकारणात् ।तपश्चर्या न वाप्राप्यफलं प्राप्तुम् अभीप्सता

vaktavyaśca sahasrākṣo nāsmākaṃ bhogakāraṇāt / tapaścaryā na vāprāpyaphalaṃ prāptum abhīpsatā

हिन्दी अर्थ

तक राज्य करेगा। फिर उप्तका पुत्र क्षेमभूमि दस वर्ष तक राजा होगा । उपर्युक्त शुद्भधवंशीय दस राजा इस पृथ्वी का उपभोग करेंगे । उन सब का राजत्वकाल एक श्री बारह (?) वर्षों (?) का होगा ।३३६-३४२ह। फिंश बाल्यकाल से ही व्यसन में निरत रहनेवाले सुदेव राजा के हाथ में दासनशक्ति आयेगी। श्यूजुवंधियों में एक

English

King Janamejaya was the successor of Parlksit. H e established Vajcsaneyika Brahmanas. The infuriated Vaisariipayana (said to him), «q evil-minded one, your directions (rule) will not remain long here in this world without an enemy (without being protested against). As long as I am alive in this world, this (act of yours) cannot be praised." Thereupon, Janamejaya was faced with difficulties all round.

अध्याय १९२

श्लोक 91

सन्मार्गमस्य जगतो दर्शयिष्ये करोम्यहम् ।तथा नरेण सहितो जगतः पालनोद्यतः

sanmārgamasya jagato darśayiṣye karomyaham / tathā nareṇa sahito jagataḥ pālanodyataḥ

हिन्दी अर्थ

देरए वायुपुराणस् देवमुमिस्ततोउन्यश्र शड्गेषु भविता नृपः । भविष्यति समा राजा द नवकण्ठायनस्तु सः-

English

He worshipped lord Prajapati by offering Havis in the Paurnamasa Yajfia. He saw that the different materials were offered in the sacrifice of the lord. Still he was in difficulties?

अध्याय १९२

श्लोक 92

यदि कश्चित्तवाबाधां करोति त्रिदशेश्वर ।तमहं वारयिष्यामि निवृत्तो भव वासव

yadi kaścittavābādhāṃ karoti tridaśeśvara / tamahaṃ vārayiṣyāmi nivṛtto bhava vāsava

हिन्दी अर्थ

भाग्या: प्रणतसामन्ता भ््वत्वा रिशच्च पत्च च । तेषां पर्यायकाले तु तरन्धा तु भविष्यति

English

Janamejaya, the son of Parlksit, the descendant of Puru, then performed Asvamedha twice. Thereafter, he made those Vajasaneyaka Brahmanas function. Janamejaya was crippled (defeated) three times. Crippled at the hands of As'vakomukhyas, crippled at the hands of the residents of Angas, and crippled at the hands of the people of MadhyadeSa (Middle Lands)! Janame¬ jaya became Trikharvi (crippled three times). He was distres¬ sed. Being cursed along with those Brahmanas, he suffered ruin.

अध्याय १९२

श्लोक 93

कर्तासि चेत् त्वम् आबाधां न दुष्टस्येह कस्यचित् ।तं चापि शास्ता तदहं प्रवर्तिष्याम्य् असंशयम्

kartāsi cet tvam ābādhāṃ na duṣṭasyeha kasyacit / taṃ cāpi śāstā tadahaṃ pravartiṣyāmy asaṃśayam

हिन्दी अर्थ

सिन्धुको ह्यन्धजातीय: प्राप्स्पतीमां बसुंधराम् ... ३४८ . श्रयोविशत्सभा राजा सिन्धुको भविता त्वथ। अष्टों भातश्र वर्षाणि तस्माहश भविधष्यति(? ) श्रीशातकरणिभंविता तस्य पुत्रस्तु वे महान् । पश्चाशतं समाः घटू च शातकरणिभंविष्यतिर

English

Satanlka of truthful exploit and strength was his son. After him (Janamejaya), the Brahmanas crowned his son Satanlka.

अध्याय १९२

श्लोक 94

एतज्ज्ञात्वा न सन्तापस्त्वया कार्यो हि मां प्रति ।उपकाराय जगताम् अवतीर्णो ऽस्मि वासव

etajjñātvā na santāpastvayā kāryo hi māṃ prati / upakārāya jagatām avatīrṇo 'smi vāsava

हिन्दी अर्थ

भविता नेसिकृष्णस्तु वर्षाणां'पञचॉविशतिम् । ततः संवत्सरं पूर्ण हालो राजा भविष्यति..

English

The powerful As'vamedhadatta was the son of Satanlka. Adhisamakrsna was born as the son of Asvamedha- datta. He conquered the cities of his enemies. He is the present ruler, of righteous soul and great fame. It is under his rule that you have been able to perform this Dirghasatra (sacri¬ fice of long duration) for three years. It is very difficult to be • performed. O excellent Brahmanas, (besides) there is another a ra lasting for two years, which is being performed in Kuru- ksetra on the banks of the river Drsadvati. We wish to hear all these—the activities that will be undertaken by them, and their names, the kings who will be born, their time calculated in years, the extent of theYugas, their good points and their defects, their happiness and misery and those of the subjects, their religious activities and their passionate pursuits as well as their monetary dealings. Enu¬ merate all these to us who ask you.

अध्याय १९२

श्लोक 95

या चेयमुर्वशी मत्तः समुद्भूता पुरंदर त्रेताग्निहेतुभूतेयं एवं प्राप्य भविष्यति

yā ceyamurvaśī mattaḥ samudbhūtā puraṃdara tretāgnihetubhūteyaṃ evaṃ prāpya bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

पञचसप्तकराजानो भविष्यन्ति महाबलाः । भाव्यः पुत्रिकषेणस्तु समा: सोउप्येकविशशिन्च देवभूमि नामक अन्य राजा भी होगा, कण्ठायन नाम से लव वर्षों तक राज्य करेगा। उसका पुत्र भूतिमित्र चौबीस वर्षों तक राज्य पद अधिकारी होगा। उसके बाद राजा तारायण बारह वर्षों के लिये राजा होगा ।६४३-३४०। फिर उसका पुत्र सुशर्मा दस वर्ष तक राजा होगा । द्विजबृन्द ! ये उपयु क्त कठोर कम करने- : वाले चार राजा कष्ठायन नाम से प्रसिद्ध होंगे, इन कण्ठायन नाम से विश्यात राजाओं के राज्यकाल में सामन्त-

English

Even as I recount listen and understand the future events, 1 the Kaliyuga and the Manvantaras in the manner they had been described to me by Vyasa of wonderful activities. Henceforth, I shall mention the kings who will be born in future.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 192
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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