अध्याय १९४
श्लोक 1
॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे श्रीपतिमाहात्म्यवर्णनं नाम त्रिनवत्युत्तरशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १९४ श्रीमार्कण्डेय उवाच: तच्छ्रुत्वानान्तदेवेन विश्वरूपमुदाहृतम् ।देवराजस्तथा देवाः परं विस्मयमागताः
|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe śrīpatimāhātmyavarṇanaṃ nāma trinavatyuttaraśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 194 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tacchrutvānāntadevena viśvarūpamudāhṛtam / devarājastathā devāḥ paraṃ vismayamāgatāḥ
हिन्दी अर्थ
ऐल तथा इद्वाकुवंशीय ह्विजातियाँ ज्रेता में उत्पन्न होकर कलियुग के विनाश पर्य॑न्त युग का अनुवतंन तब तक करतो रहती हैं, जब तक मन्वन्तर का क्षय नहीं उपस्थित होता । जमदश्नि पुत्र परशुराम के प्रथ्वीपति राजाओं के साथ क्षत्रियों का सपुल संहार कर डालने के बाद चन्द्र और सूर्य दोनों वंज्ष के क्षत्रियों की पुनः उत्पत्ति हुई, मैं उन सब का वर्णन कर रहा हूँ, सुनिये ।४४७-४४६॥ उस महान् क्षत्रिय संहार के बाद इला और इक्वाकु के वंशज क्षत्रियों की सनन््तानों का पुन विस्तार हुआ, धारावाहिक रूप में क्षत्रिय लोग पुनः राज्याधिकारी हुए, उनके साथ साथ अमन्यान्य क्षत्रिय भी राजा हुए। ऐल और ऐक्वाकु--ऐसे वंश थे, जिनमें पर विख्यात अभिषिक्त राजाओं के एक सौ कुल हुए। भोजवंशीय राजाओं के कुलों की संख्या. उमकी द्विगुणित कहों जाती है, इस प्रकार ऐश्रे क्षत्रिय कुलों
English
The rule of 'the Andhras will cover a period of four hundred, five and six (four hundred and eleven) years. There will be five families of the Andhras and all of them will be (are) equal (inpower).