Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
194
अध्याय 194 / 232

Adhyaya 194

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अध्याय १९४

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे श्रीपतिमाहात्म्यवर्णनं नाम त्रिनवत्युत्तरशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १९४ श्रीमार्कण्डेय उवाच: तच्छ्रुत्वानान्तदेवेन विश्वरूपमुदाहृतम् ।देवराजस्तथा देवाः परं विस्मयमागताः

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe śrīpatimāhātmyavarṇanaṃ nāma trinavatyuttaraśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 194 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tacchrutvānāntadevena viśvarūpamudāhṛtam / devarājastathā devāḥ paraṃ vismayamāgatāḥ

हिन्दी अर्थ

ऐल तथा इद्वाकुवंशीय ह्विजातियाँ ज्रेता में उत्पन्न होकर कलियुग के विनाश पर्य॑न्त युग का अनुवतंन तब तक करतो रहती हैं, जब तक मन्वन्तर का क्षय नहीं उपस्थित होता । जमदश्नि पुत्र परशुराम के प्रथ्वीपति राजाओं के साथ क्षत्रियों का सपुल संहार कर डालने के बाद चन्द्र और सूर्य दोनों वंज्ष के क्षत्रियों की पुनः उत्पत्ति हुई, मैं उन सब का वर्णन कर रहा हूँ, सुनिये ।४४७-४४६॥ उस महान् क्षत्रिय संहार के बाद इला और इक्वाकु के वंशज क्षत्रियों की सनन्‍्तानों का पुन विस्तार हुआ, धारावाहिक रूप में क्षत्रिय लोग पुनः राज्याधिकारी हुए, उनके साथ साथ अमन्यान्य क्षत्रिय भी राजा हुए। ऐल और ऐक्वाकु--ऐसे वंश थे, जिनमें पर विख्यात अभिषिक्त राजाओं के एक सौ कुल हुए। भोजवंशीय राजाओं के कुलों की संख्या. उमकी द्विगुणित कहों जाती है, इस प्रकार ऐश्रे क्षत्रिय कुलों

English

The rule of 'the Andhras will cover a period of four hundred, five and six (four hundred and eleven) years. There will be five families of the Andhras and all of them will be (are) equal (inpower).

अध्याय १९४

श्लोक 2

दृष्ट्वा चाप्सरसं पुण्याम् उर्वशीं कमलाननाम् ।संत्रस्तो विस्मितश्चाभूदिन्द्रो राजश्रिया वृतः

dṛṣṭvā cāpsarasaṃ puṇyām urvaśīṃ kamalānanām / saṃtrasto vismitaścābhūdindro rājaśriyā vṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

की संख्या तीन सो हो जाती है (?) उनमें समान नाम वाले राजा व्यतीत हो चके हैं, उन सब को बतला रहा हूँ, सुनिये ॥४५००४५२३। ऐसे राजाओं में प्रतिविन्ध्यों कीं संख्या एक सौ, नागों कौ एक सौ, हयों कौ एक सौ, घतराष्ट्रों की एक सौ, जनमेंजयों कौ अस्सी, ब्रह्मदत्तों की एक सौ, शीरी और- कीरियों की

English

There will be ten and seven Abhlra kings, seven Gardabhins (Gardabhillas), ten Sakas, eight Yavanas, fourteen Maunas, as kings. Andhras will enjoy the earth for two hundred and one hundred years. Sakas will enjoy the earth for three hundred and eighty years.

अध्याय १९४

श्लोक 3

न किंचिदुत्तरं वाक्यमुक्तवाञ्जोषमास्थितः ।इति वृत्तान्तभूतं हि नारायणविचेष्टितम्

na kiṃciduttaraṃ vākyamuktavāñjoṣamāsthitaḥ / iti vṛttāntabhūtaṃ hi nārāyaṇaviceṣṭitam

हिन्दी अर्थ

ततः शत तु पौलानां श्वेतकाशकुशादयः । ततोइबरे सहस्न वे येइतीता: शतबिन्दवः मनोर्बेवस्‍्वतस्यास्मिन्वतंमानेषन्तरे तु ये । तेषां निबोधतोत्पन्ना लोके संततयः स्मृता ४५७

English

Yavanas will enjoy the earth for eighty years. It is remembered (prophesied) that Tusaras will be in possession of the earth for five hundred years.

अध्याय १९४

श्लोक 4

भृगोः खात्यां समुत्पन्ना लक्ष्मीः श्रुत्वा तु वै नृप ।वैश्वरूपं परं रूपं विस्मिताचिन्तयत् तदा

bhṛgoḥ khātyāṃ samutpannā lakṣmīḥ śrutvā tu vai nṛpa / vaiśvarūpaṃ paraṃ rūpaṃ vismitācintayat tadā

हिन्दी अर्थ

एते ययातिपुत्राणां पर्श्चावशा विशां हिताः। कोतिता छामिता ये ये लेकान्वे धारयन्त्युत ॥४४६२ . लभते च वरान्पञुच दुलंभानिह लौोकिकान् । आपयुः कोति धन पुत्रानस्वर्ग चाउघनन्त्यमश्नुते

English

Thirteen Marunda families will rule for four hundred and fifty years along with (other) Sudras. There will be other Mleccha tribes as well.

अध्याय १९४

श्लोक 5

केनोपायेन स स्यान् मे भर्ता नारायणः प्रभुः ।व्रतेन तपसा वापि दानेन नियमेन च

kenopāyena sa syān me bhartā nārāyaṇaḥ prabhuḥ / vratena tapasā vāpi dānena niyamena ca

हिन्दी अर्थ

एक सौ, पौलीं की एक सौ, तथा कवेत काश कुशादिकों की एक सो की है। दातविन्दु नामक एक सहस्र राजा हो पके हैं ।/५३-४५५॥ ये सभी नृपतिगण करोड़ों की दक्षिणावाले अनेक अश्वमेघ यज्ञों से अनुष्ठान करनेवाले थे, सेकड़ों सह्नों की संख्या में ऐसे उदारचेता नपति व्यातीत हो गये हैं। इसी बतेमान बेवस्वत मन्वन्तर में, इन्हीं मनु के अधिकार काल में, जो राजा हो गये हैं, उन्हीं की बहुत बड़ी संख्या में संततियाँ उत्पन्न हुई हैं, उन सब को परम्परा का विस्तृत विवरण पहले और पीछे की सारी संख्याएं मिलाकर सौ बे में भी प्रस्तुत नहीं किया जा सकता ।॥४५६-४२८। वैवस्व॒त मन्क्‍वन्‍्तर का अट्ठाईसवाँ . युग समाध्तप्राय हो गया है, इस समय राजबियों के साथ जो सन्‍्ताने शेष हैं, उन्हें सुनिये । भविष्य में इसी युग में चालीस अन्य विशिष्ट राजा लोग राज्य करेंगे, वैवस्वत का सर्वाशतः अवसान .होगा

English

* Eleven of those Mlecchas will enjoy (the earth) for three hundred years. Then the Sudra tribes (Kilakila) Koli- kilas (?) will rule for an equal period (?)

अध्याय १९४

श्लोक 6

वृद्धानां सेवनेनाथ देवताराधनेन वा ।इति चिन्तापरां कन्यां सती ज्ञात्वा युधिष्ठिर

vṛddhānāṃ sevanenātha devatārādhanena vā / iti cintāparāṃ kanyāṃ satī jñātvā yudhiṣṭhira

हिन्दी अर्थ

प्रसंगत: संक्षेप और विस्तार में मैं ऑप लोगों को राजाओं का यह वृत्तान्त बतला चुका, प्रत्येक युगों में होनेबाले समस्त राजाओं का बत्तानत एवं वंशक्रम बहुत अधिक एवं पुनरुक्ति के कारण मैं नहीं बतला सकता । सम्नराद ययाति के पुत्रों से होने वाले, प्रजारक्षक पच्चीस राजबंशों का एवं उनके शासना- धोन देशों का वर्णन कर चुका, वे सब के सब अमित भ्रभावशाली एवं बलवान् थे, बड़े प्रेम से समस्त

English

Vindhyasakti will take over the administration from Kolikilas. Having supervised over the administration for ninetysix years, he will pass away.

अध्याय १९४

श्लोक 7

प्राह प्राप्तो मया भर्ता शङ्करस्तपसा किल ।प्रजापतिश्च गायत्र्या ह्यन्याभिरभिवाञ्छिताः

prāha prāpto mayā bhartā śaṅkarastapasā kila / prajāpatiśca gāyatryā hyanyābhirabhivāñchitāḥ

हिन्दी अर्थ

लोकीं का पालन करते थे। इस पवित्र वृत्तान्त को धारण करने से तथा सुनने से मनुष्य दीर्घायू, यश्षा, घन, पुत्र, और अनन्त काल व्यापी स्वर्ग निवास--इन पाँच वरदानों को प्राप्त करता है । इस लोक में गे वरदान परम दुलंभ हैं ।

English

Listen to and understand the future Sudra clans called Disakas (?) Svarapuranjaya will be the son of Sesa, the king of serpents (Vaidisaka—residents of Vidisa?).

अध्याय १९४

श्लोक 8

तपसैव हि ते प्राप्यस्तस्मात्तच्चर सुव्रते ।तपस्त्वं हि महच्चोग्रं सर्ववाञ्छितदायकम्

tapasaiva hi te prāpyastasmāttaccara suvrate / tapastvaṃ hi mahaccograṃ sarvavāñchitadāyakam

हिन्दी अर्थ

धारणाच्छवणाच्येव ते लोकान्धारयन्त्युत । इत्येष वो मया पादस्तुतोयः कथितो विजा॥.. विस्तरेणा5नृपूर्र्या च कि भूयों वर्तयास्यहम् ः ४६४

English

That king, born of the race of serpents, will be a king who will enjoy. The following kings: Sadacandra who will be a part of the moon, Nakhavan the second, Dhana-

अध्याय १९४

श्लोक 9

मार्कण्डेय उवाच: सागरान्तं समासाद्य लक्ष्मीः परपुरंजय ।चचार विपुलं कालं तपः परमदुश्चरम्

mārkaṇḍeya uvāca: sāgarāntaṃ samāsādya lakṣmīḥ parapuraṃjaya / cacāra vipulaṃ kālaṃ tapaḥ paramaduścaram

हिन्दी अर्थ

इति श्रीमहापुराणे वायुध्रोक्ते तुव॑स्वादिवंशवर्णनं नाम नवनवतितमोथ्ष्यायः ॥दंद॥ श्रुत्वा पादं तृतीय तु क्रान्तं सुतेन धीमता । ततश्रतुर्थ पप्रच्छुः पादं वे ऋषिसत्तमाः वह

English

At the close of the rule of Nandana of the Ahgas, Madhunandi will become the king. His younger brother will be Nandiyasas by name.

अध्याय १९४

श्लोक 10

स्थाणुवत्संस्थिता साभूद्दिव्यं वर्षसहस्रकम् ।तत इन्द्रादयो देवाः शङ्खचक्रगदाधराः

sthāṇuvatsaṃsthitā sābhūddivyaṃ varṣasahasrakam / tata indrādayo devāḥ śaṅkhacakragadādharāḥ

हिन्दी अर्थ

पादः क्लास्तस्तृतोीपोइयमनु बड्भेण यस्त्वया । चतुर्थ विस्तरात्पादं संहारं परिकोतय

English

There will be three kings in his family: Dohitra, Sisuka and Pravlra. SiSuka will rule over Purika. The powerful Pravira will be the son of VindhyaSakti, He will rule over the city Kahcanaka (along with the others) for sixty years.

अध्याय १९४

श्लोक 11

भूत्वा जग्मुस्तदर्थं ते सा तु पृष्टवती सुरान् ।विश्वरूपं वैष्णवं यत्तद्दर्शयत माचिरम्

bhūtvā jagmustadarthaṃ te sā tu pṛṣṭavatī surān / viśvarūpaṃ vaiṣṇavaṃ yattaddarśayata māciram

हिन्दी अर्थ

द्विजव॒न्द ! मैं आप लोगों को विस्तारपू्रक क्रमानुस।र. इस तृतीय पाद को सुना चका, अब इसके बाद क्या बतलाऊ, बतलाइये श्री वायुमद्रापुराण में तुर्बस्वादि बंशवर्णव नामक निन्‍्यानबेवाँ अध्याय समाप्त

English

When the family of Vindhyakas becomes extinct, three kings of Bahlikas. will enjoy the kingdom for thirty years. Supratlka and Nabhira (will be the prominent kings).

अध्याय १९४

श्लोक 12

विलक्षा व्रीडिता देवा गत्वा नारायणं तदा ।अब्रुवन् वैश्वरूपं नो शक्ता दर्शयितुं वयम्

vilakṣā vrīḍitā devā gatvā nārāyaṇaṃ tadā / abruvan vaiśvarūpaṃ no śaktā darśayituṃ vayam

हिन्दी अर्थ

मन्वन्तरों का वर्णन

English

The king named Sakyama will be the ruler of Mahisls. Puspamitras and Pattamitras will rule for thirteen years.

अध्याय १९४

श्लोक 13

ततो यथेष्टं ते जग्मुः स च विष्णुर् अचिन्तयत् ।उग्ररूपा स्थिता देवी देहं दहति भार्गवी

tato yatheṣṭaṃ te jagmuḥ sa ca viṣṇur acintayat / ugrarūpā sthitā devī dehaṃ dahati bhārgavī

हिन्दी अर्थ

परम बुद्धिमान सूत द्वारा तृतीय पाद का सुनते के उपरान्त श्रेष्ठ ऋषियों ते चतथे पाद के विषय में जिज्नासा प्रकट की ऋषिदुन्द बोल---यूत जी ! आप अनुषज् नामक तृतीय पाद को हम लोगों को सुना चके

English

Seven excellent kings will rule over Mckala (Amar- kantaka). The kings in Komala (Comilla, Bengal) will be very strong and powerful.

अध्याय १९४

श्लोक 14

तां तस्मात् तत्र गत्वाहं वरं दत्त्वा तु वाञ्छितम् ।पुनस् तपः करिष्यामि दर्शयिष्यामि वा पुनः ।वैष्णवं विश्वरूपं यद् दुर्दश्यं देवदानवैः

tāṃ tasmāt tatra gatvāhaṃ varaṃ dattvā tu vāñchitam / punas tapaḥ kariṣyāmi darśayiṣyāmi vā punaḥ / vaiṣṇavaṃ viśvarūpaṃ yad durdaśyaṃ devadānavaiḥ

हिन्दी अर्थ

भवता कथयिष्यामि सर्वभेतद्यथातथम् । पा त्विस ससंहारं चतुर्थ मुनिसत्तमाः

English

Nine kings of great intellect and well known as Meghas will become the kings of the Nisadha (Marwar, Dc 140) land. They will rule till the end of the Manvantara.

अध्याय १९४

श्लोक 15

मार्कण्डेय उवाच: ततो गत्वा हृषीकेशः सागरान्तस्थितां श्रियम् ।प्राह तुष्टो ऽस्मि ते देवि वरं वृणु यथेप्सितम्

mārkaṇḍeya uvāca: tato gatvā hṛṣīkeśaḥ sāgarāntasthitāṃ śriyam / prāha tuṣṭo 'smi te devi varaṃ vṛṇu yathepsitam

हिन्दी अर्थ

मन्वन्तराणां संक्षेप भविष्येः सह सप्तभिः । प्रलयं चेब लोकानां ब्रुवतो' मे निबोधत ७ एतान्युक्तानि वे सम्यक्‍्सप्तसप्तसु वे मया। मन्वन्तराणि संक्षेपाच्छुणुतानागतानि मे अनागताश्च सप्तैव स्मृतास्त्विह महंर्षयः । कौशिको गालवश्चेव जामदस्त्यश्च भागवः

English

Those strong and powerful kings wili be born in the race of Nala. Visvasphani, the powerful, will become the ruler of Magadhas.

अध्याय १९४

श्लोक 16

श्रीरुवाच: यदि तुष्टो ऽसि मे देव प्रपन्नाया जनार्दन ।तदा दर्शय यद्दृष्टमप्सरोभिस् तवानघ

śrīruvāca: yadi tuṣṭo 'si me deva prapannāyā janārdana / tadā darśaya yaddṛṣṭamapsarobhis tavānagha

हिन्दी अर्थ

हँपायनों वसिष्ठश्च कृप: शारहतस्तथा । आत्रेयो दीप्तिमांश्वेव ऋष्यशडगस्तु काश्यपः ३११

English

After exterminating all the other kings he will make Kaivartas, Pahcakas, Pulindas and Brahmanas as well as the other castes (rule over the kingdom).

अध्याय १९४

श्लोक 17

विश्वरूपमनन्तं च भूतभावन केशव ।गन्धमादनम् आसाद्य कृतं यच्च तपस्त्वया

viśvarūpamanantaṃ ca bhūtabhāvana keśava / gandhamādanam āsādya kṛtaṃ yacca tapastvayā

हिन्दी अर्थ

अब चतुर्थ उपसंहार नामक पाद का विस्तार पूर्वक वर्णन कीजिये । जो मन्वन्तर ग्यातीत हो चुके हैं, उनके अतिरिक्त अस्य मम्वन्तर हैं, तथा इस वर्तमान मस्वस्तर में जो सप्तर्षि हैं, उन सब का बृत्तान्त हमें बतलाइये । वर्तमान मह्दात्मा मनु की इस सृष्टि का. उद्धव एवं विस्तार किस प्रकार होता है, इन सब बातों को क्रमानुसार विस्तार पूर्वक हमें बतलाइये ।२-४॥ .ः ः क्‍ सूत बोले:--ऋषिवयंवन्द ' मैं आप लोगों को इन सब जिज्ञासाओं के बारे में यायातथ्य रूप से बतला रहा हूँ । चतुर्थ उपसंहार पाद का वर्णन सुनिये । द्विजवुन्द ! साथ ही वर्तमान महात्मा मनु के इस सृष्टि विस्तार का भी विस्त्वारपूर्वक क्रमानुसार वर्णन कर रहा हें ।५-६। व्यतीत सातों मन्यम्तरों

English

After propitiating Devas, times that strong king will reach the and cast off his body.

अध्याय १९४

श्लोक 18

तद्वदस्व विभो विष्णो न मिथ्या यदि केशव ।श्रद्दधामि न चैवाहं रूपस्यास्य कथंचन

tadvadasva vibho viṣṇo na mithyā yadi keśava / śraddadhāmi na caivāhaṃ rūpasyāsya kathaṃcana

हिन्दी अर्थ

होता है-यह भो बतला रहा हैँ, सुनिये । पूर्व प्रसंग में सातों अतीत एवं भविष्यकालीन मस्वन्तरों का विक्षद वर्णन मैं यद्यपि कर चुका हूँ, पर यहाँ प्रसंगवश भविष्यकालीन मन्वन्तरों का. संक्षेप में पुनः वर्णन कर रहा रहा हूँ ।७-८। सम्प्रति वर्तमान वैवस्वत मनु तथा भविष्यकालौन सावणर्ण मनु का वर्णन कर रहा हैं, संक्षेप में सुनिये। भावी भन्वस्तर में जो मुनिगण होंगे उनके नाम सुनिये । वे होंगे कुशिकनन्दन गावल,

English

After forsaking his body, he will go to Sakra's region. Thereafter, the nine Naka (Naga) kings will enjoy the city of Campavatl.

अध्याय १९४

श्लोक 19

बहुभिर्यक्षरक्षोभिर् मायाचारिप्रचारिभिः ।छन्दिता मम जानद्भिर्भावम् अन्तर्गतं हरौ

bahubhiryakṣarakṣobhir māyācāripracāribhiḥ / chanditā mama jānadbhirbhāvam antargataṃ harau

हिन्दी अर्थ

जमदग्नि पुत्र भागंव, वर्सिष्ठ भोत्रीय हैपायन, शारद्गवत वंशोत्पन्न कप, अत्रियंध्ोदूभव दीप्तिमान, काश्यपनोत्रीय ऋष्यभज्, एवं भरहाज गोत्रीय द्रोणपुश्र अध्वत्थामा ये परम प्रभावशाली महात्मा गण भावी मश्यम्तर में

English

The seven Nagas will enjoy the beautiful city 0 f Mathura.

अध्याय १९४

श्लोक 20

भूत्वा विष्णुस्वरूपास्ते चक्रिणश्च चतुर्भुजाः ।सुव्रीडिता गताः सर्वे विश्वरूपो सहायतः

bhūtvā viṣṇusvarūpāste cakriṇaśca caturbhujāḥ / suvrīḍitā gatāḥ sarve viśvarūpo sahāyataḥ

हिन्दी अर्थ

परम ऋषि के नाम से विस्वात होंगे । सुतपा, अमिताभ ओर सुख ये दीव भावी मस्वस्तर के देवसणों के

English

The descendants of Manidhanya will enjoy the terri¬ tories of Nisadha, Yaduka, Saislta and Kalatopaka.

अध्याय १९४

श्लोक 21

मार्कण्डेय उवाच: नारायणो ऽथ भगवाञ्छङ्खचक्रगदाभृतम् ।तया तथोक्तस् तद् रूपं मुक्त्वा वै सुरपूजितम्

mārkaṇḍeya uvāca: nārāyaṇo 'tha bhagavāñchaṅkhacakragadābhṛtam / tayā tathoktas tad rūpaṃ muktvā vai surapūjitam

हिन्दी अर्थ

दद८ ..... वायुपुराणम सुतापाश्चामिताभाश्च सुखाश्चव गणास्त्रय: । तेषां गणास्तु देवानामेकेको विशकः स्पृत: कह३

English

Devaraksitas (?) will enjoy the territories of Kosalas, Andhras, Paundras and Tamraliptas along with the oceans as well as the beautiful city of Campa.

अध्याय १९४

श्लोक 22

रूपं परं यथोक्तं वै विश्वरूपम् अदर्शयत् ।दर्शयित्वा वचः प्राह पञ्चरात्रविधानतः

rūpaṃ paraṃ yathoktaṃ vai viśvarūpam adarśayat / darśayitvā vacaḥ prāha pañcarātravidhānataḥ

हिन्दी अर्थ

नामतस्तु प्रवक्ष्यामि निबो धध्वं समाहिता: । रितस्तपश्च शुक्रश्न यर॒तिज्योतिष्प्रभाकरो १४ प्रभासों भासकृद्धमंस्तेजो रश्मिऋतुविराद् । अचिष्मान्योतनों भानुयंशः कोतिुधों धृतिः ॥ विशतिः सुतपा होते नामभिः परिकीतिता . कहर

English

Guha will protect Kalihgas, Mahisas, Mahendra- nilaya and other territories.

अध्याय १९४

श्लोक 23

यो ऽर्चयिष्यति मां नित्यं स पूज्यः स च पूजितः ।धनधान्यसमायुक्तः सर्वभोगसमन्वितः

yo 'rcayiṣyati māṃ nityaṃ sa pūjyaḥ sa ca pūjitaḥ / dhanadhānyasamāyuktaḥ sarvabhogasamanvitaḥ

हिन्दी अर्थ

देहो मुनिर्नयों ज्येष्ठः समः सत्यश््य विश्वुतेः । इत्येते ह्ममिताभास्तु विशतिः परिकीर्तिता १७ दसोदाता विदः सोमो वित्तबद्यो यम्ो निधि: । होम॑ हब्यं हुतं दानं देयं दाता तप: शम: ... श्रुवं स्थान विधानं च नियमश्नेति विशतिः । मुख्या होते समासख्याताः सावण्े: प्रथमेष्त्रे

English

(The king) named Kanaka will enjoy Strirastra (the women's territory, Kamarupa) and Bhaksyakas. All these kings will be contemporaries.

अध्याय १९४

श्लोक 24

मूलं हि सर्वधर्माणां ब्रह्मचर्यं परं तपः ।तेनाहं तत्र स्थास्यामि मूलश्रीपतिसंज्ञितः

mūlaṃ hi sarvadharmāṇāṃ brahmacaryaṃ paraṃ tapaḥ / tenāhaṃ tatra sthāsyāmi mūlaśrīpatisaṃjñitaḥ

हिन्दी अर्थ

चरिष्णुराज्यो विष्णुश्व वाच: सुमतिरेव च । सावण्णस्थ मनो:ः पुत्रा भविष्यन्ति नवेब तु

English

Thereafter, 2 the untruthful and unrighteous Yavanas of great fury and of little grace will rule here spreading their religion, spending vast riches and giving vent to their lust.

अध्याय १९४

श्लोक 25

मूलश्रीः प्रोच्यते ब्राह्मी ब्रह्मचर्यस्वरूपिणी ।सर्वयोगमयी पुण्या सर्वपापहरी शुभा

mūlaśrīḥ procyate brāhmī brahmacaryasvarūpiṇī / sarvayogamayī puṇyā sarvapāpaharī śubhā

हिन्दी अर्थ

नव चास्येषु वध्यामि सावणेंश्रान्तरेषु वे। सावणंमनवश्चान्ये भविष्या ब्रह्मणः सुताः प्रमुख गण होंगे। इनमें एक एक में बोस बीस देवता विरजमान होंगे-॥६-१३॥ उन सब के नाम बतला रहा हैँ, सावधानतापूर्वक सुनिये । रित, तप, शुक्र, द्युति, ज्योति, प्रभाकर, प्रभास, भास्कृतू, धर्म, तेज, रश्मि, ऋतु, विराट, अचिष्मानू, द्योतन, भानु, यश, कीति, बुध, और धृति,--ये बीस देवगण सुतपा नामक गण में सम्मिलित हैं ।१४-१५। प्रभु, विभू, विभास, जेता, हन्ता, अरिहा, रितु, सुमनि, प्रमति, दीप्ति,

English

Those kings will not be duly crowned. They will have all the defects of the (Kali) Age. They will commit evil actions.

अध्याय १९४

श्लोक 26

पतिस् तस्याः प्रभुरहं वरदः प्राणिनां प्रिये ।रेवाजले नरः स्नात्वा यो ऽर्चयेन् मां यतव्रतः

patis tasyāḥ prabhurahaṃ varadaḥ prāṇināṃ priye / revājale naraḥ snātvā yo 'rcayen māṃ yatavrataḥ

हिन्दी अर्थ

समाख्यात (?) मह, महान, देह, मुनि, नय, ज्येष्ठ, सम, सत्य, और विश्वुत--ये बीस अमिताभ कहे जाते हैं। दम, दाता, विद, सोम, वित्त, बेद्य, यम, निधि, होम, हव्य, हुत, दान, देय, दाता, तप, हम, भव, स्थान, विधान, “और नियम--ये बीस सार्वाण मन्वस्तर की प्रथम अवस्था में बीस मुल्य (सुख) नामक देवगण कहे गये हैं ।१६-१६। ये समस्त देवगण महात्मा कश्यप के पुत्र हैं। वतमान बंवस्व॒त

English

During the remaining period of the Kali Age, the kings will enjoy the Earth, not even hesitating to kill women and children and to destroy one another.

अध्याय १९४

श्लोक 27

मूलश्रीपतिनामानं वाञ्छिते प्राप्नुयात् फलम् ।दानानि तत्र यो दद्यान्महादानानि च प्रिये

mūlaśrīpatināmānaṃ vāñchite prāpnuyāt phalam / dānāni tatra yo dadyānmahādānāni ca priye

हिन्दी अर्थ

मन्वन्तर के उपरान्त सावर्ण के मन्वन्तर में ये ही देवगणों के स्थान पर प्रतिष्ठित होंगे। उस सावर्णि वस्तर में विरोचन पुत्र बलि. इन देवगणों का स्वामी इन्द्र होगा। साथर्ण मनु के नव पुत्र होंगे, उनके म् होंगे, वीरवानू, अवरीयानू, निर्मोह, सत्यवाक्, कृत्ती, चरिष्णु, अज्य, विष्णु, वाच ओर सुमति । इनके अतिरिक्त अन्य साथर्ण मन्वन्तरीय नव मनुषुश्रों के सलाम से प्रसिद्ध होने ।२०-३२२। भविष्य में ओर भी अनेक ब्रह्मा के पुत्र सावर्ण मनु उत्पन्न होंगे, दिव्यदुष्टिसम्पन्न लोग उन सब को मेद् सावर्णि के नाम से

English

The races of those kings will gain continuous ascen¬ dancy (at some time or in some places) or flourish and perish in succession in due course.

अध्याय १९४

श्लोक 28

सहस्रगुणितं पुण्यमन्यस्थानादवाप्यते ।दृष्टं त्वया तत्र देशे सम्यक्चैवावधारितम् ।तदर्चित्वा परान् कामान् आप्स्यसि त्वं न संशयः

sahasraguṇitaṃ puṇyamanyasthānādavāpyate / dṛṣṭaṃ tvayā tatra deśe samyakcaivāvadhāritam / tadarcitvā parān kāmān āpsyasi tvaṃ na saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

+हूतः प्रभति श्लोकढ थे न विद्यते ध. पुस्तके ।

English

They will be devoid of piety, true love and real wealth. All the common people coming into close contact with them,

अध्याय १९४

श्लोक 29

वरं वृणीष्व देवेशि वाञ्छितं दुर्लभं सुरैः ।दुर्गसंसारकान्तारपतितैः परमेश्वरि

varaṃ vṛṇīṣva deveśi vāñchitaṃ durlabhaṃ suraiḥ / durgasaṃsārakāntārapatitaiḥ parameśvari

हिन्दी अर्थ

महृता तपसा युक्ता मेरुपृष्ठ महोजस: । ब्रह्मादिभिस्ते जनिता दक्षेणेव च धीमता ५२५ महलकिगता55वृत्य + भविष्या मेरमाश्िता: । महाभावास्तु ते पुर्व जज्ञिरे चाक्षुषेब्त्तरे दक्षेण जनिताः पुत्राः कन्यायामात्मनः कथम् । भवेन ब्रह्मणा चेव धर्मेण च महात्मनः २७

English

They will be acting contrary to accepted traditions.

अध्याय १९४

श्लोक 30

श्रीरुवाच: नारायण जगद्धातर् नारायण जगत्पते ।नारायण परब्रह्म नारायणपरायण

śrīruvāca: nārāyaṇa jagaddhātar nārāyaṇa jagatpate / nārāyaṇa parabrahma nārāyaṇaparāyaṇa

हिन्दी अर्थ

अतो भविष्यान्वक्ष्यामि सावर्णमनवस्तु ये। तेषां जन्म प्रभावं॑ च नमस्क्ृत्य प्रचेतसे २८ वेवस्वते ह्पस्पृष्ठे किचिच्छिष्टे च चाक्षुषे । जज्ञिरे मनवस्ते हि अविष्यानागतान्तरे

English

Bd. P. v. 195 reads Sapta for Gupta hereof.

अध्याय १९४

श्लोक 31

प्रसीद पाहि मां भक्त्या सम्यक्सर्गे नियोजय ।प्रियो ह्यसि प्रियाहं ते यथा स्यां तत्तथा कुरु

prasīda pāhi māṃ bhaktyā samyaksarge niyojaya / priyo hyasi priyāhaṃ te yathā syāṃ tattathā kuru

हिन्दी अर्थ

संज्ञापुत्रस्तु सावर्ण एको ववस्व॒तस्तथा । ज्येष्ठ: संज्ञामुतो नाम मनुर्वेबस्वतः प्रभु: १३१ वेवस्वते5स्तरे प्राप्ते समुत्पत्तिस्तयों: शुभा । चतुदंशेते मनवः कीतिता: कीतिवर्धनाः देखते हैं। वे मनुगण दक्ष के नाती एवं उनकी प्रियतमा पुत्री के पुत्र हैं, वे परम तेजस्वी, महान तथस्वी एबं सुमेरु के पृष्ठ पर निवास करनेवाले हैं, वे ब्रह्मदि देवगणों द्वारा तथा परम बुद्धिमान् दक्ष द्वारा उत्पन्न हुए हैं। वे महलोंक वासी हैं, वहाँ से आकर सुमेरु के पृष्ठ भाग पर आश्रय लेते है, पूर्व चाक्षष मन्वन्तर में उन महानुभाबों की उत्पत्ति हुई थी

English

When their turn is over, women will outnumber men in that Age. People will become more and more deficient in learning and stiength. Their span of life will grow less and less. When their decline reaches the limit the ruling kings overwhelmed by Kalawill be ruined.

अध्याय १९४

श्लोक 32

गृहं धर्मार्थकामानां कारणं देव संमतम् ।तदास्थायाश्रमं पुण्यं मां श्रेयसि नियोजय

gṛhaṃ dharmārthakāmānāṃ kāraṇaṃ deva saṃmatam / tadāsthāyāśramaṃ puṇyaṃ māṃ śreyasi niyojaya

हिन्दी अर्थ

ऋषियों ने पूछाः--सूत जी ! दक्ष में अपनी कन्या में पुत्रों की उत्पत्ति किस प्रकार की ? और शांकर, ब्रह्मा एवं धर्में द्वारा इन भहात्मा मनुगणों की उत्पत्ति किस प्रकार हुई 7 २७

English

Struck down by Kalki, all the MIecchas will be destroyed. All the heretics and the unrighteous will be doomed.

अध्याय १९४

श्लोक 33

नारायण उवाच: नारायणगिरा देवि विज्ञप्तो ऽस्मि यतस्त्वया ।नारायणगिरिर्नाम तेन मेऽत्र भविष्यति

nārāyaṇa uvāca: nārāyaṇagirā devi vijñapto 'smi yatastvayā / nārāyaṇagirirnāma tena me'tra bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

सूत बोलेः--ऋषिवन्द ! प्रनेता को प्रणाम कर अब मैं भविष्य में उत्पन्न होनेवाले सावर्ण मनुगणों के जन्म वृत्तान्त, प्रभाव आदि का वर्णन कर रहा हूँ । चाक्षुष मन्वस्तर के कुछ शेष रह जाने पर जब वैवस्वत मन्वन्तर का प्रारम्भ हो जाता है, उसी समय उस भविष्यकालीन मनुगणों की उत्पत्ति होती है । उनमें पाँच सावर्ण मनुगण पशुष्ति दक्ष के नाती, चार मनुगण परम ऋषियों द्वारा समुत्यन्न तथा एक सावर्ण मनु विवस्वान् के संयोग से छाया संज्ञा के पुत्र हैं संज्ञा के ज्येष्ठ पुत्र परम ऐश्वयंशाली वैवस्वत सनु इन सावण्ण मनु से ज्येष्ठ हैं। बेवस्वत मन्वन्तर के आने पर इन दोनों मनुओं की कल्याणी उत्पत्ति होती है। परम यशस्वी इन मनुगणों की संख्या चौदह कही जाती है ।२८-३२। वेद, श्रुति, पुराण आदि में सर्वत्र ये मनुगण

English

The very name king will disappear when the Kali Age comes to the period of junction. Only very few people will survive and they will be helpless and destitute without any belonging, as Dharma would have been destroyed by that time. There will be none to console them. They will have no where¬ withals. They will be afflicted by diseases and sorrows. They will be overwhelmed and ruined by drought and mutual slaughter. They will have none to support them. Being distressed (and due to fear) they will forsake their avocations and professions. Deserting their own villages and towns they will resort to forest.

अध्याय १९४

श्लोक 34

नारायणस्मृतौ याति दुरितं जन्मकोटिजम् ।यस्माद् गिरति तस्माच्च गिरिरित्येव शब्दितम्

nārāyaṇasmṛtau yāti duritaṃ janmakoṭijam / yasmād girati tasmācca girirityeva śabditam

हिन्दी अर्थ

3० धांयुपुराणमें

English

When the kings are destroyed, the subjects will leave off their homesteads. All the feelings of friendliness and affection will be lost. In acute distress, even the closest of friends will become bereft of affection. The discipline of castes and stages of life will become distrubed. Terrible mixture and mingling of the castes will result. People will take shelter on mountains and riverbanks.

अध्याय १९४

श्लोक 35

तस्मात्सर्वाश्रयो देवि गिरिः पर्वतराङ् भवेत् ।सुरासुरमनुष्याणां यथाहमपि चाश्रयः

tasmātsarvāśrayo devi giriḥ parvatarāṅ bhavet / surāsuramanuṣyāṇāṃ yathāhamapi cāśrayaḥ

हिन्दी अर्थ

बेदे श्रुती पुराणे च सर्वे ते प्रभविष्णव:। प्रजानां पतयः सर्वे भूतानां पतयः स्थिताः ३३ तेरियं पृथिवी सर्वा सप्तह्वीपा सपर्वता । पूर्ण युगसहर््न॑ वे परिपाल्या नरेश्वर: मन्वन्तराधिकारेषु वर्तस्तेडत्र सकृत्सकृत् । विनिवृत्ताधिकारास्ते महलोंक समाश्चिताः ३६

English

They will resort to rivers, marshy foreshores of the seas and mountains. They will gather together in the terri¬ tories of Angas, Vangas, Kalingas, Kasmiras, KasI, Kosalas, the mountain ravines of Rsika and other places. Men will seek shelter on the ridges of Himavan and the coasts of the briny sea.

अध्याय १९४

श्लोक 36

य एतत् पूजयिष्यन्ति मण्डलस्थं परं मम ।नारायणगिरिर्नाम देवरूपं शुभेक्षणे

ya etat pūjayiṣyanti maṇḍalasthaṃ paraṃ mama / nārāyaṇagirirnāma devarūpaṃ śubhekṣaṇe

हिन्दी अर्थ

ये शिष्टास्तास्प्रवक्ष्यामि सह देवधिदानवेः । सह प्रजानिसगेंण सर्वास्त्वनागतान्दिजान्

English

The Aryas will flock to the forests with the Mleccha tribes. Men will sustain themselves with the meat of deer, fishes, birds and beasts of prey as well as with sugar-cane plants,

अध्याय १९४

श्लोक 37

ते दिव्यज्ञानसम्पन्ना दिव्यदेहविचेष्टिताः ।दिव्यं लोकमवाप्स्यन्ति दिव्यभोगसमन्विताः

te divyajñānasampannā divyadehaviceṣṭitāḥ / divyaṃ lokamavāpsyanti divyabhogasamanvitāḥ

हिन्दी अर्थ

दक्षस्य क्या धर्मिष्ठा सुब्रता नाम विश्वुता । सर्वकन्यावशिष्दा तु श्रेष्ठा धर्मपरा सुता ॥ गहोत्वा तां पिता कन्यां जगाम ब्रह्मणोन्तिके

English

Like the sages (of yore) they will wear different kinds

अध्याय १९४

श्लोक 38

मार्कण्डेय उवाच: तयोरेवं संवदतोर्देवा इन्द्रपुरोगमाः ।समागता वनोद्देशं सागरान्ते महर्षयः

mārkaṇḍeya uvāca: tayorevaṃ saṃvadatordevā indrapurogamāḥ / samāgatā vanoddeśaṃ sāgarānte maharṣayaḥ

हिन्दी अर्थ

परम प्रभावद्ञाली, प्रजापति सभी जोब निकायों के अधीदवर के रूप में वणित किये गये हैं । इन्हीं नरेद्वय मनुगणों द्वारा सातों द्वीपों एवं पर्बतों समेत यह वसुन्धरा सहृख्र युगों तक परिपालित होतो है। उन मन्वन्तरों में होनेवाली प्रजा, तपस्या एवं सुष्टि विस्तार का वर्णन कर रहा हूं। स्वायम्भुव मनु आदि को वह सृष्टि चौदह ही जाननी चाहिए ।३३-३५। मनुगण अपने-अपने मस्वन्तराधिकाश में एक-एक बाश वतमान

English

Desirous of growing foodstuffs (grains) through seeds, they will dig the earth deep with wooden pikes. They will strenuously rear goats and sheep, donkeys and camels.

अध्याय १९४

श्लोक 39

ततो भृगुं देवराजो नारायणविचिन्तितम् ।वव्रे ज्ञात्वा तु तत्कन्यां धर्मात्मा स ददौ च ताम्

tato bhṛguṃ devarājo nārāyaṇavicintitam / vavre jñātvā tu tatkanyāṃ dharmātmā sa dadau ca tām

हिन्दी अर्थ

रहते हैं। जब अधिकार से वे चिवृत्त हो जाते हैं, तब महलोँंक में अवस्थित होते हैं। उन चौदह मनुओं में आठ के अधिकार काल समाप्त हो गये हैं, छः मनुओं का अधिकार काल दोष है सप्त पूर्व मस्बल्तरों के समाप्त हो जाने पर सम्प्रति वैवस्वत मनु का अधिकार काल चल रहा है, अब जो शेष मनुगण हैं, उनके अधिकार काल का वर्णत, उस समय के देवताओं, ऋषियों, दानवों, एवं, ब्राह्मणादि द्विजातियों की सृष्ठि परम्परा के साथ बंतला रहा हूँ ।३६-३८। वर्तमान वैवस्वत मस्वन्तर की सृष्टि विस्तार के द्वारा हो अन्य मस्वन्तरों की सृष्टि का विस्तार जानना चाहिए वैवस्वत मम्वन्तर की सृष्टि से समान ही उनकी भी सृष्टि होती है, उनमें कुछ भी विशेषता वा च्यूनता नहीं रहती । भूतवभावी मन्वस्तरों में प्रत्येक वेशों में जो सृष्टि होती है, उसका पुनझक्ति और अधिकता के भय से विस्तार पूर्वक वर्णन बहीं कर रहा हूँ। केवल उनका विभाग

English

The men then will resort to the banks of rivers for the sake of water. By means of their activities they will harass one another as well as the rulers of the land.

अध्याय १९४

श्लोक 40

धर्मो ऽपि विधिवद्वत्स विवाहं समकारयत् ।देवदेवस्य राजर्षे देवतार्थे समाहितः

dharmo 'pi vidhivadvatsa vivāhaṃ samakārayat / devadevasya rājarṣe devatārthe samāhitaḥ

हिन्दी अर्थ

पूर्वक विस्तार एवं क्रम बतला रहा हूँ। दक्ष प्रजापति की एक सुब्रता नामक परम धामिक यशस्विनी कन्या थी। वह अन्य कन्याओं से छोटी होती हुई भी गुणों में श्रेष्ठ एवं घ्म परायण थी। पिता दक्ष एकबार अपनी उस कन्या को साथ लेकर श्रह्मा के समीप गये ।३६-४२। पितामह ब्रह्माजी उमर समय घर्मं और भव के

English

They will consider it honourable to be issueless. They

अध्याय १९४

श्लोक 41

युधिष्ठिर उवाच: धर्मो विवाहमकरोद्विधिवद्यत्त्वयोदितम् ।को विधिस्तत्र का दत्ता दक्षिणा भृगुणापि च

yudhiṣṭhira uvāca: dharmo vivāhamakarodvidhivadyattvayoditam / ko vidhistatra kā dattā dakṣiṇā bhṛguṇāpi ca

हिन्दी अर्थ

वेराजस्तमुपासीन धर्मण च भवेन च। भवधरभंसमीपस्थ दक्ष ब्रह्माउम्यभाषत दक्ष कन्या तवेयं वे जनयिष्यति सुन्नत । चतुरो वे मन्स्पुत्रांश्चातुर्वण्यंकराज्शुभान् ४४ ब्रह्मणो बचन भ्रुत्वा दक्षो धर्मो भवस्तदा । तां कन्यां मनसा जम्मुस्त्रयस्ते ब्रह्मणा सह ४४४ सत्याभिध्यायिनां तेषां सद्यः कन्या व्यजायत । सद्शानुरूपांस्तेषां चतुरो वे कुमारकान् ४६ संसिद्धा कार्यकरणे संभूतास्ते क्रियाइन्विताः। उपभोगसमर्थेश्न सद्योजाते: शरीरकः (४७

English

The subjects will follow the worst of religious obser¬ vances. No one will live beyond their twentythird year.

अध्याय १९४

श्लोक 42

विवाहयज्ञे समभूत्स्रुक्स्रुवग्रहणे च कः ।ऋत्विजः के सदस्याश्च तस्यासन् द्विजसत्तम

vivāhayajñe samabhūtsruksruvagrahaṇe ca kaḥ / ṛtvijaḥ ke sadasyāśca tasyāsan dvijasattama

हिन्दी अर्थ

ते दुष्ट्वा तान्स्वयं बुद्ध्या ब्रह्म व्याहारिणस्तदा । संरब्धा बे व्यकर्षन्त मम पुत्रो ममेत्युत

English

They will be weak. They will be debilitated and fatigued due to sensuality. They will be overcome by (prema lure) old age. Their diet will consist of leaves, roots and fruits. Bark garments and deer skins will constitute their clothings. In search of livelihood they will be roaming over the earth. Towards the end of Kaliyuga, the people will come to such a plight.

अध्याय १९४

श्लोक 43

किं तस्यावभृथं त्वासीत् तत्सर्वं वद विस्तरात् ।त्वद्वाक्यामृतपानेन तृप्तिर्मम न विद्यते

kiṃ tasyāvabhṛthaṃ tvāsīt tatsarvaṃ vada vistarāt / tvadvākyāmṛtapānena tṛptirmama na vidyate

हिन्दी अर्थ

एवं ते समय कृत्या सुवर्णा जगृहुः सुतान्। यस्मात्सवर्णास्तिषां बे बह्मादीनां कुमारकाः ५२ साथ वैराज नामक लोक में विराजमान ये । दक्ष को भव और धर्म के समीप खड़ा देखकर ब्रह्म ने कहा, सदृब्रतपरायण दक्ष ! तुम्हारी यह कल्याणी कन्या चार पुत्रों को उत्पन्न करेगी, वे चारों भावी काल में चारों वर्षों के संस्थापक कल्याणकारी मनु के रूप में विख्यात होंगे। ब्रह्मा की ऐसी वाणी सुनकर दक्ष, धर्म भौर भव ब्रह्मा के साथ हो मन ही मन उस कर्या के साथ संगमन किया । सत्य का ध्यान करनेवाले

English

When the Kali Age, the duration of which is a thousand divine years, comes to a close, the subjects will be annihilated along with the Kaliyuga. When it expires along with the period of junction, the Krta Age will come in.

अध्याय १९४

श्लोक 44

मार्कण्डेय उवाच: नारायणविवाहस्य यज्ञस्य च युधिष्ठिर ।तपसस्तस्य देवस्य सम्यग् आचरणस्य च

mārkaṇḍeya uvāca: nārāyaṇavivāhasya yajñasya ca yudhiṣṭhira / tapasastasya devasya samyag ācaraṇasya ca

हिन्दी अर्थ

इन महान् तपस्वियों के मानसिक संकल्प के अनुसार उस कन्या ने उन्हीं चारों के अनुसार चार सुन्दर कुमारों को उसी क्षण उत्पन्न किया ।४३-४६। वे कुमार समस्त कार्यों के पूर्ण करनेवाले, परम बुद्धिमान्, भ्रीमान्, एवं अपने उसी सद्योजात शरीर से विविध भोगों के उपभोग में सामथ्यं रखने वाले थे इन चारों कुमारों को देखकर इन समस्त ब्रह्मवेता, देवताओं में 'यह मेरा पुत्र हैं, यह मेरा पुत्र, इस प्रकार की बातें

English

When the moon, the sun, Tisya and Jupiter come together in a single sign of zodiac, the Krta Age will set in.

अध्याय १९४

श्लोक 45

वक्तुं समर्थो न गुणान्ब्रह्मापि परमेश्वरः ।तथाप्युद्देशतो वच्मि शृणु भूत्वा समाहितः

vaktuṃ samartho na guṇānbrahmāpi parameśvaraḥ / tathāpyuddeśato vacmi śṛṇu bhūtvā samāhitaḥ

हिन्दी अर्थ

कह कह कर छीना झपटी होने लगी ओर क्रोध का प्रदर्शन होने लगा । वे चारों पुत्र उन चारों महान प्रभावशाली देवताओं के मानसिक अभिष्यान से उत्पन्न हुए थे, अतः उन सब ने परस्पर यह तथ किया कि इन सब में जो दरीर में जिसके समान हो, वह उसी को अपना पुत्र माने ॥४७-४६९। स्वरूप, पराक्रम नाम और वर्ण में जो पुत्र जिसके समान हो वह उस पुत्र को ग्रहण करे पुत्र सबंदा पिता के स्वरूप का अनुकरण करता है, पराक्रम में भी पुत्र माता और पिता के समान होता है, यह निश्चित है कि पुत्र अपने ही समान होता है, अतः जो जिसके समान हो वह उसी का पुत्र है।' ब्रह्मा आदि देवताओं ने परस्पर इस प्रकार की सम्मति करके अपने अपने समान आकृति, वर्ण और पराक्रम वाले पुत्रों को ग्रहण किया ।५०-५२। वे

English

Thus the past, present and the future races have been enumerated in due order.

अध्याय १९४

श्लोक 46

ब्रह्मा सप्तर्षयस्तत्र स्रुक्स्रुवग्रहणे रताः ।अग्नीञ्जुहुविरे राजन्वेदिर्धात्री ससागरा

brahmā saptarṣayastatra sruksruvagrahaṇe ratāḥ / agnīñjuhuvire rājanvedirdhātrī sasāgarā

हिन्दी अर्थ

क॑ इतःप्रभति मतवः स्मृता इत्यन्तग्रन्थी ग. पुस्तके नास्ति ।

English

From the time of the coronation of Mahadeva* (Mahapadma?) to the birth of Parlksit the duration was a thousand and fifty years. The period between Mahapadma and the future kings ending with Andhras whom I have narrated, has been calculated as eight hundred and thirtysix years by the learned sages, the knowers of Puranas.

अध्याय १९४

श्लोक 47

ददुः समुद्रा रत्नानि ब्रह्मर्षिभ्यो नृपोत्तम ।धनदो ऽपि ददौ वित्तं सर्वब्राह्मणवाञ्छितम्

daduḥ samudrā ratnāni brahmarṣibhyo nṛpottama / dhanado 'pi dadau vittaṃ sarvabrāhmaṇavāñchitam

हिन्दी अर्थ

थै3२ बायुपुराणम् भृत्यामुत्पादितो यस्तु भौत्यों नामाभवत्सुतः । वेवस्‍्व॒तेउन्तरे राजा हो मन् तु बिवस्वतः ५५

English

The stellar mansions are altogerher twentyseven. The Seven Sages stay in each of these, for hundred years in succession. This is remembered as the Yugaof the Seven Sages. The years are calculated according to those of the Devas.

अध्याय १९४

श्लोक 48

विश्वकर्मा ऽपि देवानां ब्रह्मर्षीणां परंतप ।वेश्मानि सुविचित्राणि सर्वरत्नमयानि च

viśvakarmā 'pi devānāṃ brahmarṣīṇāṃ paraṃtapa / veśmāni suvicitrāṇi sarvaratnamayāni ca

हिन्दी अर्थ

तपसा संभृतात्मानः त्वेषु मन्वन्तरेषु वे । भविष्येषु भविष्यन्ति सर्वेकार्यार्थंसाधकाः (५८

English

(Defective verse) The hundred years of the Seven Sages are equal to sixty divine years and seven (divine) days.

अध्याय १९४

श्लोक 49

कृत्वा प्रदर्शयामास देवेन्द्राय यशस्विने ।शतक्रतुस्ततो विप्रान्कापिष्ठलपुरोगमान्

kṛtvā pradarśayāmāsa devendrāya yaśasvine / śatakratustato viprānkāpiṣṭhalapurogamān

हिन्दी अर्थ

दक्षपुत्रस्य पुत्रास्ते रोहितस्य प्रजापतेः । भविष्यस्य भविष्यस्तु एकको द्वादशों गणः चारों कुमार ब्रह्मा, कर्म, दक्ष और भव के सावण्ण ( समान वर्णवाले ) थे अतः उनका सावण नाम पड़ा । मानसिक मनन ( समागस की भावना ) के कारण उनकी उत्पत्ति हुई थी, अतः मनु नाम से विख्यात हुए । चाक्षुष मन्वन्तर के व्यतीत हो जाने पर जब वेवस्वत मन्वन्तर का प्रारम्भ हुआ, तब प्रजापति रुचि के रौच्य नामक एक पुत्र हुआ ।५३-५४। भूति नामक जननी में जो पुत्र उत्पन्न किया गया, वह भोत्य नाम से

English

(?) The Seven Sages are seen in the east at first and then in the north of the zone of the constellations. Thereafter they arc seen parallel to those constellations seen in the middle of the firmament.

अध्याय १९४

श्लोक 50

शौनकादींश्च पप्रच्छ बष्कलाञ्छागलानपि ।आत्रेयानपि राजेन्द्र वृणुध्वमभिवाञ्छितम्

śaunakādīṃśca papraccha baṣkalāñchāgalānapi / ātreyānapi rājendra vṛṇudhvamabhivāñchitam

हिन्दी अर्थ

विख्यात हुआ । वेवस्वत मन्वन्तर में विवस्वान के मनु नामक दो पुत्र राजा हुए, जिनमें एक वेवस्वत मनु और दूसरे सावर्ण मनु के नाम से बिख्यात हुए । इनमें एक परम ऐद्वर्यशाली विद्वान् वेवस्वत मनु ज्येष्ठ संज्ञा पुत्र और दूसरे वेववस्व॒त्ष मनु सवर्ण (छाया रूप धारिणी संज्ञा) के पुत्र कहे जाते हैं। सवर्ण जो चार मनु गण हुए वे महर्षियों से उत्पन्न हुए ये ।१५-५७ ये सभी मनुगण परम तपोनिष्ठ थे। ये भविष्यत् कालौन

English

It should be known that the Seven Sages are united with it (the zone of the constellations) in the sky for a hundred years. This is the evidence of the union of the Sages and the constellations.

अध्याय १९४

श्लोक 51

दृष्ट्वा ते चित्ररत्नानि प्राहुः सर्वेश्वरेश्वरम् ।देवानां च ऋषीणां च सङ्गमो ऽयं सुपुण्यकृत्

dṛṣṭvā te citraratnāni prāhuḥ sarveśvareśvaram / devānāṃ ca ṛṣīṇāṃ ca saṅgamo 'yaṃ supuṇyakṛt

हिन्दी अर्थ

अपने अपने भन्वन्तरों में समस्त कार्यों में समर्थ होकर विराजमान होंगे। प्रथम मनु दक्षपुत्र मेरु सावरणि थे, उनका दूसरा नाम प्रजापति रोहित था । ये भविष्य मन्वन्तर के भावी मनु होंगे। इनके वेवस्वत मन्वन्तर में अनेक महात्मा पुत्र हुए, जिनके गणों के नाम मरीचिगर्भा, सुशर्मा और पार हुए। इनमें से एक एक गण बारह भागों में विभक्त है ।५५-६०। ऐश्वयं संग्रह, राह, बाहुबंध आदि को पारगण के अन्तगंत जानना चहिये । अन्यान्य गणों का विवरण सुनिये। वाजिय, वाजिजित, प्रभूति, ककुद्यया, द्षिक्राव, अयपकव, प्रणीत, विजय, मधु, तेजस्वान् और अथर्वद्वय--ये बारह मरीचिग्रण के अधीन थे। सुशर्मागण का बिवरण

English

In my opinion the Seven Sages were stationed in the Magha (tenth) constellation at the time of Parlksit. At the time of Andhras they will be in the twentyfourth constellation (i.e. Satabhisak).*

अध्याय १९४

श्लोक 52

अस्मिन्पुण्ये सुरेशान वस्तुं वाञ्छामहे सदा ।शतक्रतुः प्राह पुनर्वासो वात्र भविष्यति ।सत्यधर्मरता यूयं यावत्कालं भविष्यथ

asminpuṇye sureśāna vastuṃ vāñchāmahe sadā / śatakratuḥ prāha punarvāso vātra bhaviṣyati / satyadharmaratā yūyaṃ yāvatkālaṃ bhaviṣyatha

हिन्दी अर्थ

शततमोधष्ध्याय: हैऊरे

English

At that time the subjects will be afflicted very much. They will be doomed through their mendacious nature in the affairs of virtue, wealth and love.

अध्याय १९४

श्लोक 53

मार्कण्डेय उवाच: पृष्टं यद्राजशार्दूल के मखे होत्रिणो ऽभवन् ।तत्प्रोच्यमानमधुना शृणु भूत्वा समाहितः

mārkaṇḍeya uvāca: pṛṣṭaṃ yadrājaśārdūla ke makhe hotriṇo 'bhavan / tatprocyamānamadhunā śṛṇu bhūtvā samāhitaḥ

हिन्दी अर्थ

वर्णस्तथा5प्यड्रा विश्वो मुरण्यो क्षजनों मतः । अमितो द्रवकेतुश्न जम्भोस्थाजलशक्रकाः सुनेभिद्युतपाश्नव सुशर्माणः प्रकोतिताः । तेषामिन्द्रस्तदा भाव्यों ह्यदूभुतो नाम नामतः ६५ स्कम्द; सोमप्रतीकाशः कारतिकेयस्तु पावकः । मेघातिथिश्न पोलस्त्यों बसु: काश्यप एवं च.

English

When the Vedic and Smarta (pertaining to the Smrtis) rituals (Dharma) become lax and the rigorous discip¬ line of the castes and the stages of life becomes very loose, the deluded subjects will be weak in their soul-power and undergo a mixing and mingling of the castes.

अध्याय १९४

श्लोक 54

सनत्कुमारप्रमुखाः सदस्यास्तस्य चाभवन् ।औद्गात्रमत्र्यङ्गिरसौ मरीचिश्च चकार ह

sanatkumārapramukhāḥ sadasyāstasya cābhavan / audgātramatryaṅgirasau marīciśca cakāra ha

हिन्दी अर्थ

सुतपा: पौलवश्चेव सप्तंते रोहितान्तरे । ध्रतिकेतुदीप्तिकेतुशापहस्ता निरामयः ६८ पृथुश्रवास्तथाउ्नीकों भूरिश्ुम्नो बृहद्रथः प्रथमस्य तु सावणंनंब पुत्राः प्रकीतिताः ३६९

English

Desirous of securing means of livelihood, Brah¬ manas will approach them reverentially. Declining gradually and bit by bit, all the subjects will be destroyed and when the Yuga expires, they will be completely destroyed.

अध्याय १९४

श्लोक 55

हौत्रं धर्मवसिष्ठौ च ब्रह्मत्वं सनको मुनिः ।षट्त्रिंशद्ग्रामसाहस्रं प्रादात्तेभ्यः शतक्रतुः

hautraṃ dharmavasiṣṭhau ca brahmatvaṃ sanako muniḥ / ṣaṭtriṃśadgrāmasāhasraṃ prādāttebhyaḥ śatakratuḥ

हिन्दी अर्थ

प्राणानायच्छतः प्रोक्ता ऋषिभिः पुरुषेषु वे । देवास्ते वे भविष्यन्ति धर्मपुत्रस्य वे मनोः तेषामिद्धस्तथा विद्वान्मविष्यः शान्तिरुच्यते । हविष्मास्पौलहः क्रीमान्सुकीतिश्वापि भागवः:

English

According to divine calculation it is one thousand years. The Sandhyamsa (the period of junction) is also men¬ tioned. (That period is extra.) When it has expired completely Krta Age comes in.

अध्याय १९४

श्लोक 56

लक्ष्मीर्भर्त्रा च संयुक्ताभवत्तत्कृतवान्प्रभुः ।ब्रह्मणो जुह्वतो वह्निं यावद्देशस्थितैः सुरैः

lakṣmīrbhartrā ca saṃyuktābhavattatkṛtavānprabhuḥ / brahmaṇo juhvato vahniṃ yāvaddeśasthitaiḥ suraiḥ

हिन्दी अर्थ

आपोसूर्तिस्तथा5त्रेयो वष्सिठश्चापि यः स्मृतः पोलस्त्यः प्रतिपश्चापि नाभागश्चव काश्यपः ॥।

English

The races of Aila and Iksvaku are said to become extinct with Sumitra.

अध्याय १९४

श्लोक 57

दृष्टं ललाटं देशो ऽसौ ललाट इति संज्ञितः ।स देशः श्रीपतेः क्षेत्रपुण्यं देवर्षिसेवितम्

dṛṣṭaṃ lalāṭaṃ deśo 'sau lalāṭa iti saṃjñitaḥ / sa deśaḥ śrīpateḥ kṣetrapuṇyaṃ devarṣisevitam

हिन्दी अर्थ

बतला रहा हूं, सुनिये ।६१-६३। वर्ण, अज्भ, विश्व, भुरण्य, त्रजन, अमित, द्रवकेतु घम्भोस्थ, अजस््र, शक्रक, सुनेमि, थतपा ये बारह सुशर्मा नाम से कहे जाते हैं । भविष्यत्काल में अदभुत नामक देव इन सब का इन्द्र होगा । अस्निपुत्र चन्द्रमा के समान सुन्दर आकृति वाले स्वामि कातिकेय, जिनका दूसरा नाम स्कन्द भी है, गोत्रोत्पन्न वसित, अत्रिकुलभूषण हृव्यवाहन पौलववबंशीय सुतपा-ये सात रोहित मन्वन्तर के ऋषि कहे गये हैं। उस प्रथम सावर्णि मनु के घूर्तिकेतु, दीप्तिकेतु शाप, हस्त, निरामय, पृृथुश्रव, अनीक, भूरियुम्त और--बु हद्रथ, ये नव पुत्र कहे जाते हैं ।६४-६६। दशम पर्याय में धर्म के पुत्र द्वितीय मनु का नाम भाव्य होगा । इन भाव्य मनु के अधिकार काल में सुखमना और विरुद्ध नामक दो देवताओं के गण कहे जाते हैं ।

English

Those who know about the Lunar race know that the Ksatriya race of Aila will become extinct with Ksemaka. The sons and descendants of the Sun of the past, present and future have been glorified. They were and will be the heighte- ners of their fame. In that race there were Brahmanas, Ksatriyas, Vaisyas and Sudras.

अध्याय १९४

श्लोक 58

सर्वाश्चर्यमयं दिव्यं दिव्यसिद्धिसमन्वितम् ।ब्राह्मणानां ततः पङ्क्तिं निवेशयितुम् उद्यता

sarvāścaryamayaṃ divyaṃ divyasiddhisamanvitam / brāhmaṇānāṃ tataḥ paṅktiṃ niveśayitum udyatā

हिन्दी अर्थ

ये समस्त देवगण परमकान्तिशाली, संख्या में सौ और समान धर्म वाले हैं। ऋषियों ने इन देवगणों को पुरुषों का प्राणायाम बतलाया है, घममेपुत्र द्वितीय मनु के अधिकार काल में ये देवताओं के पद पर प्रतिष्ठित होंगे । इन सब देवताओं के स्वामी इन्द्र परम विद्वान् शान्ति होंगे--ऐसा कहा जाता है

English

Many noblc-souled kings are born and have pass¬ ed away in every Yuga. Their names are legion. When the members of every family are calculated, many names are re¬ peated. Hence they have not been mentioned by me. The race of Nimi comes to an end in the Vaivasvata Manvantara itself.

अध्याय १९४

श्लोक 59

लक्ष्मीः श्रीपतिनामानमाह देवं वचस्तदा ।श्रीरुवाच: य एते ब्राह्मणाः शिष्या भृग्वादीनां यतव्रताः

lakṣmīḥ śrīpatināmānamāha devaṃ vacastadā / śrīruvāca: ya ete brāhmaṇāḥ śiṣyā bhṛgvādīnāṃ yatavratāḥ

हिन्दी अर्थ

प्रलह गोत्रीय हविष्मान्, भृगुगोत्रोत्पप्त परम शोभासम्पन्न सुकीति, अन्रिवंशोद्भव आपोमूर्ति, वसिष्ठ मे सात उस मन्वन्तर के परम ऋषि होंगे ।७३-७४। सुक्षेत्र, उत्तमौजा, भूरिषेण वीयंवान्ू, शतानीक, निरमिन्न,

English

I will recount how the Ksatriya race originates in this Yuga. Even as I recount listen and understand.

अध्याय १९४

श्लोक 60

तान्निवेशयितुमिच्छामि त्वत्प्रसादादधोक्षज ।मरीच्यादयः सुरेन्द्रेण स्थापिता गरुडध्वज

tānniveśayitumicchāmi tvatprasādādadhokṣaja / marīcyādayaḥ surendreṇa sthāpitā garuḍadhvaja

हिन्दी अर्थ

थै७ए ह . वायुपुराणम्

English

Devapi will be born in the Kalapa village. He will be a king of Puru's family and considered (greater) than Iksvaku. He will be endowed with great Yogic power.*

अध्याय १९४

श्लोक 61

नैष्ठिकव्रतिनो विप्रा बहवो ऽत्र यतव्रताः ।प्राजापत्ये व्रते ब्राह्मे केचिदत्र व्यवस्थिताः ।तान् अहं स्थापयिष्यामि त्वत्प्रसादादधोक्षज

naiṣṭhikavratino viprā bahavo 'tra yatavratāḥ / prājāpatye vrate brāhme kecidatra vyavasthitāḥ / tān ahaṃ sthāpayiṣyāmi tvatprasādādadhokṣaja

हिन्दी अर्थ

सक्षेत्र श्वोत्तमोजाश्च भूरिषेणश्य वीयंवान् । शतानौको निरमित्रो वृषस्तेनो जयद्रथः भूरिश्यम्नः सुवर्चाश्व दशते मानवाः स्मृताः । एकादशे तु पर्याये सावणें वे तृतीयके

English

In the twentieth Yuga (? cycle of four Yugas?) there will not be any founder of the Lunar race. Devapi being un¬ rivalled, will be the first king in the family of Aila.

अध्याय १९४

श्लोक 62

मार्कण्डेय उवाच: ततः कौतूहलधरो भगवान्वृषभध्वजः ।पप्रच्छ व्रतिनः सर्वान्वृत्तिभेदे व्यवस्थितान्

mārkaṇḍeya uvāca: tataḥ kautūhaladharo bhagavānvṛṣabhadhvajaḥ / papraccha vratinaḥ sarvānvṛttibhede vyavasthitān

हिन्दी अर्थ

निर्माणरतयों देवा: कामजा वे मनोजवाः । गणास्त्वेते श्रयः रुपाता देवतानां महात्मनाम्

English

In the four Yugas these two will be the founders of Ksatriya race. Everywhere this should be known as the characteristic feature, for the sake of progeny (the perpetuation of the line).

अध्याय १९४

श्लोक 63

नारदो ऽपि महादेवमुपेत्य च सतीपतिम् ।प्राह कृष्णाजिनधरो नैष्ठिका ब्राह्मणा ह्यमी

nārado 'pi mahādevamupetya ca satīpatim / prāha kṛṣṇājinadharo naiṣṭhikā brāhmaṇā hyamī

हिन्दी अर्थ

निर्माणरतयो देवा राध्रयस्तु विहंगमाः । गणास्ते वे त्रयः प्रोक्ता देवतानां भविष्यति ७९ मनोजवा मुहूर्तास्तु इति देवा: प्रकोतिता: । एते हि ब्रह्मणः पुशन्रा भविष्या मनवः स्पृताः ४८० तेषामिय्रो वृषों नाम भविष्यः सुरराइततः । तेषां सप्तर्षयश्यापि कीत्यंमानाझिबोधत 'द१ हृविष्मास्काश्यपश्यापि वपुष्मास्यश्थ भार्षष: वारणिश्येव चाउञत्रेयो वासिष्ठो भग एव च (८२ पुष्टिश्वाडिगरसो शेयः पोलस्त्यो निश्चरस्तथा। पौलहो ह्वग्नितेजाश्च देवा झोकादशेहम्तरे.

English

When Kali Yuga declines and Krta Yuga sets in and again in the first Tretayuga they will be the acti- visors of the Ksatriya lines along with the Seven Sages. In the Dvapara period, Ksatriyas do not stay along with the sages.

अध्याय १९४

श्लोक 64

अमी कार्याः सुवस्त्रेण छन्नगुह्या द्विजोत्तमाः ।प्राजापत्याश् चतुर्विंशसहस्राणि नरेश्वर

amī kāryāḥ suvastreṇa channaguhyā dvijottamāḥ / prājāpatyāś caturviṃśasahasrāṇi nareśvara

हिन्दी अर्थ

सर्वेवेगः सुधर्मा घ देवानीकः पुरोवहः । क्षेमधर्मा गृहेषुश्च आदर्श: पौण्डको मतः ८४ सावण्णस्म तु ते पुत्राः प्राजापत्यस्य वे मनोः । द्वादश त्वथ पर्याये रुद्रपृत्रस्थ वे सनोः

English

When Krtayuga and Tretayuga decline, the Seven Sages and the kings will take birth for the sake of seed of the Brahmana and Ksatriya races. For the sake of progeny, they (the Seven Sages) abide by the kings in all the Manvantaras in every Yuga.

अध्याय १९४

श्लोक 65

ब्रह्मचर्यव्रतस्थानां व्रतब्रह्मविचारिणाम् ।द्वादशैषां सहस्राणि सन्ति वै वृषभध्वज

brahmacaryavratasthānāṃ vratabrahmavicāriṇām / dvādaśaiṣāṃ sahasrāṇi santi vai vṛṣabhadhvaja

हिन्दी अर्थ

हरिता रोहिताश्वेव + देवाः सुमनसस्तथा सुकर्माणः सुपाराश्य पठच देवगणाः स्मृताः वृषसेन, जबद्रथ, भूरिद्यम्त और सुवचा--ये दस भाव्य मनु के पुत्र होंगे । ग्यारहवें पर्याय में तृतीय सार्वाण मनु का जब अधिकार काल होगा, तब परम महिमाशाली देवगणों के तीन विश्वेष गण विख्यात होंगे

English

The annihilation of Ksatriyas leads to their contact with Brahmanas again (?) In all the seven Manvantaras all the progeny have been heard of (?)

अध्याय १९४

श्लोक 66

नारदस्य वचः श्रुत्वा देवा देवर्षयो ऽपि च ।साधु साध्वित्यमन्यन्त नोचुः केचन किंचन

nāradasya vacaḥ śrutvā devā devarṣayo 'pi ca / sādhu sādhvityamanyanta nocuḥ kecana kiṃcana

हिन्दी अर्थ

उनके नाम होंगे निर्माणरति, कामज और मनोंजव । उत स्वर्ग निवासी देवताओं के इन एक एक गर्णों में तीस-तौस देवता होंगे। पण्डित लोग मास में जिन तीस दिनों की गणना करते हैं, वे ही निर्माण रति देवगण है। रात्रि और विहड्भम्रात्मक देवगण कामज और मुहतंगण मनोजव देवगण के नाम से विख्यात हैं । भविष्यत्काल में देवताओं के ये तीन गण कहे जाते हैं । उन देवताओं के स्वामी बुष नामक सुरराज

English

In view of their long life the Seven Sages know the series of Yugas, the origin, activities and the decline of those active persons belonging to Brahmana and Ksatriya races. The birth of the Brahmanas in the families of Aila and Ik$vaku is in this manner (?) Born in the Treta Age and extinct in the Kali Age, they will follow the Age till the end of the Manvan- tara.

अध्याय १९४

श्लोक 67

समाह्वयत् ततो लक्ष्मीस् तान् विप्रान् भक्तिसंयुता ।उवाच चरणान्गृह्य प्रसादः क्रियतां मयि

samāhvayat tato lakṣmīs tān viprān bhaktisaṃyutā / uvāca caraṇāngṛhya prasādaḥ kriyatāṃ mayi

हिन्दी अर्थ

होंगे । उम मस्वस्तर के सप्तर्षियों का नाम बतला रहा हूँ, सुनिये ।9७-८१। फद्यपनश्दन हृविष्मान, भृगुगोत्रीय पुलह गोत्रीय अग्नितेजा--ये सात्त ग्यारहवें पयायें के देवगण कहे जाते हैं । सर्ववेग, सुधर्मा, देवानीक, पुरोवह, क्षेमर्मा, गृहेषु, आदर्श और पौण्डक-ये ग्यारहवें मन्वन्तर के सावर्ण मनु के पुत्र कहे जाते हैं

English

When all the Ksatriyas were eliminated by Rama, the son of Jamadagni, the Ksatriyas of the two families were born again. I shall recount them. Listen and understand.

अध्याय १९४

श्लोक 68

षट्त्रिंशच्च सहस्राणि वेश्मनामत्र संस्थितिः ।विश्वकर्मकृतानां तु तेषु तिष्ठन्तु वो ऽखिलाः

ṣaṭtriṃśacca sahasrāṇi veśmanāmatra saṃsthitiḥ / viśvakarmakṛtānāṃ tu teṣu tiṣṭhantu vo 'khilāḥ

हिन्दी अर्थ

बारहब मन्वन्तर में रुद्रपुश्न ऋत सावर्णि का का्यंकाल होगा उस अवधि में बतंमान देवगणों के पाँच विशेष गण कह्दे जाते हैं ।:५-८६। उनके नाम हैं हरित, रोहित, सुमना, सुकर्मा और सुपार-ये पाँच नाम उनके

English

The families of Aila and Iksvaku spread once again. A series of other kings of the Ksatriya race became rulers.

अध्याय १९४

श्लोक 69

ते तथेति प्रतिज्ञाय स्थिताः संप्रीतमानसाः ।धनधान्यसमृद्धाश्च वाञ्छितप्राप्तिलक्षणाः ।सर्वकामसमृद्धाश्च ह्यनारम्भेषु कर्मणाम्

te tatheti pratijñāya sthitāḥ saṃprītamānasāḥ / dhanadhānyasamṛddhāśca vāñchitaprāptilakṣaṇāḥ / sarvakāmasamṛddhāśca hyanārambheṣu karmaṇām

हिन्दी अर्थ

+ धनुदिचल्नस्तग्ंतग्रत्थों ग. पुस्तके नास्ति । ब्रह्यणो मानसा होत एकंको दशकों गण । अरुन्तिजो हुविश्चेव विद्वान्यश्व सहस्नशः ८८

English

A hundred families undergoing coronation became famous among each of the races of Aila and Iksvaku.

अध्याय १९४

श्लोक 70

इति संस्थाप्य तान् विप्रान् सा स्थिता पर्यपालयत् ।चतुर्धा तु स्थितो विष्णुः श्रिया देव्याः प्रिये रतः

iti saṃsthāpya tān viprān sā sthitā paryapālayat / caturdhā tu sthito viṣṇuḥ śriyā devyāḥ priye rataḥ

हिन्दी अर्थ

व्युष्टिविधिश्न वे देवो दशते रोहिताः स्मृता:। उषिताद्यास्तु ये देवास्नयस्त्रिशत्प्रकोतिताः

English

The extent of Bhojas is up to twice of that (i.e. two hundred). Thus there were three hundred Ksatriya

अध्याय १९४

श्लोक 71

एवं वैवाहिकमखे निवृत्ते ऋषयस्तु तम् ।ऊचुश्चावभृथस्नानं कुत्र कुर्मो जनार्दन

evaṃ vaivāhikamakhe nivṛtte ṛṣayastu tam / ūcuścāvabhṛthasnānaṃ kutra kurmo janārdana

हिन्दी अर्थ

देवान्सुमनसो विद्धि सुकर्माणो निबोधत। सुपर्वा वृषभ: पृष्ठः कृषिय्युस्नो विपश्चितः ६२ विक्रमश्व फ़मश्रेवे निभुतः कानत एवं च्। एते सुकर्मणो देवा सुतांश्चेषां निबोधत ६ ३ सुपारा मानता(श्व गणा)स्त्वेते देवा वे संप्रकीतिताः । तेषामिन्द्रस्तु विज्ञेय ऋतधामा महायशाः ॥६ ५

English

Listen and understand even as I recount the past and the present kings among them. Prativindhyas were a hundred; Nagas were a hundred; Hayas were a hundred; Dhrtarastras were a hundred and one; Janamejayas were eighty; Brahmadattas were a hundred; Sirins and Virins were a hundred (each); then Pulomans were a hundred; Svetas, Kagas, Kusas etc. were a hundred; the other Sasabindus who passed away were a thousand. All of them performed horse-sacrifices with lakhs and lakhs in Daksina. Thus hundreds and thousands of saintly kings have passed away.

अध्याय १९४

श्लोक 72

इति श्रुत्वा तु वचनं श्रीपतिः पादपङ्कजात् ।मुमोच जाह्नवीतोयं रेवामध्यगमं शुचि

iti śrutvā tu vacanaṃ śrīpatiḥ pādapaṅkajāt / mumoca jāhnavītoyaṃ revāmadhyagamaṃ śuci

हिन्दी अर्थ

एते सप्तर्षयः सिद्धा अन्ये सावणिकेह्तरे । देववानृपदेवश् देवश्रेष्ठो विवूरध:ः ६८ मित्रवान्मित्रबिल्कुश्व मित्रसेनो ह्यमित्रहा मित्रवाहुः सुतर्चाक्ष द्ादशते मनोः सुताः १६ ६

English

Know that the descendants in this world of the present Vaivasvata Manu cannot be mentioned in detail and in full even in hundreds of years.

अध्याय १९४

श्लोक 73

हरेः पादोदकं दृष्ट्वा निःसृतं मुनयस्तु ते ।विस्मिताः समपद्यन्त जानन्तस्तस्य गौरवम्

hareḥ pādodakaṃ dṛṣṭvā niḥsṛtaṃ munayastu te / vismitāḥ samapadyanta jānantastasya gauravam

हिन्दी अर्थ

फफ७््् स३ीीटूघ ट पफपपपपापभत/पपपभहपमपप/फ”!।टै 7 कहे जाते हैं । ये सब देवगण ब्रह्मा के मानस पुत्र हैं, इब॒ एक-एक मणों में दस दस देवता रहते हैं। उनमें

English

In the Vaivasvata Manvantara already twentyeight cycles of four Yugas have passed along with their saintly kings. Listen and understand those who yet remain. Forty excellent kings will be born in the future. Then the Vaivasvata Manvantara will come to a close. Inciden¬ tally I have mentioned everything in detail and in brief. Many are repeated. As they are too many they could not be mention¬ ed in full. The twentyfive families of Yayati's sons were highly beneficent to the people. They have been glorified. They even now sustain the worlds.

अध्याय १९४

श्लोक 74

रुद्रेण सहिताः सर्वे देवता ऋषयस् तथा ।संकथा विस्मिताश्चक्रुर् विधुन्वन्तः शिरांसि च

rudreṇa sahitāḥ sarve devatā ṛṣayas tathā / saṃkathā vismitāścakrur vidhunvantaḥ śirāṃsi ca

हिन्दी अर्थ

गण के अन्तगंत कहे जाते हैं। तप, जानि, भूति, वाचा, बन्धु, रण, राज, स्वर्णपाद, व्युष्टि और विषि--ये दस रोहित गण में हैं ।5७-५६। तैंतीस को संख्या में उषित था दि जो देवगण कहे जाते हैं, उन्हें ही सुमना नामक देवगणों के अस्तमंत जानिये, सुकर्मा नामक गण का विधरण सुनिये। सुपर्वा, वृषभ, (ष्ठ, कपि, युस्‍्त विपद्दिचत, विक्रम, क्रम, निभृत, भर क्रान्त-ये दस सुकर्मा देवगष के अधीन हैं । इनके सुतों को

English

After hearing the third section completed (narrated in full) by the intelligent Suta, the excellent sages asked him about the fourth Section.

अध्याय १९४

श्लोक 75

ऋषय ऊचुः ।ब्रूहि शम्भो किमत्रायं अकस्माद् वारिसम्भवः ।विष्णोः पादाम्बुजोत्थश्च सम्मोहकरणः परः

ṛṣaya ūcuḥ / brūhi śambho kimatrāyaṃ akasmād vārisambhavaḥ / viṣṇoḥ pādāmbujotthaśca sammohakaraṇaḥ paraḥ

हिन्दी अर्थ

सुनिये १९०-९३। ( सुपार मामक गण को सुनिये ) वर्षोदित ( वर्योदित ) जिष्ठ, वर्चेस्वी, द्युतिमान्, हृवि, शुभ, हुविष्कृत, प्राप्ति, व्यापृथ ओर दशम-ये सुपारा वामक गण में रहने वाले देवताओं के नाम कहे गये हैं । इन देव ताओं के इस्द्र महान यशस्वो ऋतघामा होंगे। वसिष्ठ पुत्र कृति, अन्रिनन्दन सुतपा, अज़िरागोत्रीय तपोमूर्ति ऋषि उक्त मन्वस्तर के जानने चाहिए ।६४-६७ट। इस सावणिक मस्वस्तर में देववान्, उपदेव, देवश्रेष्ठ, विदूरथ, मित्रवान्, मिन्रविन्दु, मित्रसेन, अमित्रहा, और सुबर्चा-ये बारह ( ? ) मनु के पुत्र होंगे । तेरहवें रोच्य तामक मध्वस्तर में देवताओं के तीन ही गणों के होने की बात स्वयम्भू ब्रह्माजी ने बतलाई है। वे सब परम महात्मा

English

The third section called Anusahga Pada has been com¬ pletely narrated out of affection by you. Now narrate to us in details the fourth Pada called Samhdra (annihilation or con¬ clusion). Please recount all the Manvantaras, the ones that had elapsed along with the others (the future ones), theSeven Sages who exist now in the current Manvantara and the details of the creation and expansion of the noble-souled Manu.. Narrate everything in detail and in the proper order.

अध्याय १९४

श्लोक 76

ईश्वर उवाच: पादोदकम् इदं विष्णोरहं जानामि वै सुराः ।दशाश्वमेधावभृथैः स्नानमत्रातिरिच्यते

īśvara uvāca: pādodakam idaṃ viṣṇorahaṃ jānāmi vai surāḥ / daśāśvamedhāvabhṛthaiḥ snānamatrātiricyate

हिन्दी अर्थ

है ७६ वायुपुराणम्

English

O excellent sages I shall narrate everything to you precisely; the fourth and the concluding section, along with the (description of) annihilation.

अध्याय १९४

श्लोक 77

युष्माभिः श्रीपतिः पूज्यः स्नानं चावभृथं कुतः ।भविष्यतीति तेनाशु इदं वो ऽर्थे विनिर्मितम्

yuṣmābhiḥ śrīpatiḥ pūjyaḥ snānaṃ cāvabhṛthaṃ kutaḥ / bhaviṣyatīti tenāśu idaṃ vo 'rthe vinirmitam

हिन्दी अर्थ

त्रयोदशे तु पर्याये भाव्या रोच्यान्तरे पुनः । त्रय एवं गणाः प्रोक्ता देवानां तु स्वयंभुवा ब्रह्मणो मानसाः पुत्रास्ते हि सबवें महात्मनः । सुन्नामाण: सुधर्माण: सुकर्माणश्न ते त्रयः

English

O Brahmanas, listen to the creative activity of the current noble-souled Vaivasvata Manu in detail as well as in proper order. Even as I recount, listen and understand the gist of the (past) Manvantaras along with the seven future ones as well as the dissolution of the worlds.

अध्याय १९४

श्लोक 78

स्नात्वात्र त्रिदशेशाना यत् फलं सम्प्रपद्यते ।वक्तुं न केनचिद्याति ततः किमुत्तरं वचः

snātvātra tridaśeśānā yat phalaṃ samprapadyate / vaktuṃ na kenacidyāti tataḥ kimuttaraṃ vacaḥ

हिन्दी अर्थ

त्रिदशानां गणाः भोक्ता भविष्या: सोमपाधिन: । त्रयस्त्रिशहेवताया: प्राभविष्यन्त याज्ञिकें:

English

There will be three groups of Devas, viz. Sutapas, Amitabhas and Sukhas (? Mukhyas). Each of these groups consists of twenty Devas.

अध्याय १९४

श्लोक 79

मार्कण्डेय उवाच: एवमुक्त्वा तु ते सर्वे स्नानं कृत्वा यथागतम् ।जग्मुर्देवा महेशानपुरोगा भरतर्षभ

mārkaṇḍeya uvāca: evamuktvā tu te sarve snānaṃ kṛtvā yathāgatam / jagmurdevā maheśānapurogā bharatarṣabha

हिन्दी अर्थ

आज्येन पृषदाज्येन ग्रहश्रेष्ठेन चव हि। देवदेंवास्त्रयस्त्रिशत्पृथक्त्वेन निबोधत १०३ सुत्रामाण: प्रयाज्यास्तु आज्यपा नास सांप्रतम् सुकमंणोनुयाज्यास्तु पृषदाज्याशिनस्तु ये. उपयाज्याः सुधर्माण इति देवाः प्रकीतिताः । दिवस्पतिमंहासत्त्वस्तेषामिन्द्रो भविष्पति

English

I shall enumerate them. Listen and understand attentively. Rita, Tapas, Sukra, Dyuti, Jyotis, Prabhakara, Prabhasa, Bhasakrt, Dharma, Tejas, Rasmi, Rtu, Virat, Arcisman, Dyotana, Bhanu, Yas'as, Kirti, Budha and Dhjrti— these twenty Devas constituting the group Sutapas, are glorified by their names. Prabhu, Vibhu, Vibhasa, Jeta, Hanta, Ariha, Ritu, Sumati, Pramati, DIpti, Samakhyata, Mahas, Mahan, Deha, Muni, Naya, Jyestha, Sama, Satya and Visruta these are the twenty Devas mentioned as Amitabhas.

अध्याय १९४

श्लोक 80

ब्राह्मणाश्च ततः सर्वे स्ववेश्मान्येव भेजिरे ।देवतीर्थे महाराज सर्वपापप्रणाशने

brāhmaṇāśca tataḥ sarve svaveśmānyeva bhejire / devatīrthe mahārāja sarvapāpapraṇāśane

हिन्दी अर्थ

स्वरूपश्वेव वासिष्ठः सप्तंते तु त्रयोदशे । चित्रसेनो विचित्रश्व तपोधमंधुतो भवः १०८

English

Dama, Data, Vida, Soma, Vitta, Vaidya, Yama, Nidhi, Homa, Havya, Huta, Dana, Deya, Data, Tapas, Sama, Dhruva, Sthana, Vidhana and Niyama—these twenty are mentioned as constituting the Mukhya (Sukha) group of Devas in the first Savarna Manvantara.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 194
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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