Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
198
अध्याय 198 / 232

Adhyaya 198

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अध्याय १९८

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे मूलस्थानतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम सप्तनवत्युत्तरशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १९८ मार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेन्महीपाल भद्रकालीतिसङ्गमम् ।शूलतीर्थमिति ख्यातं स्वयं देवेन निर्मितम्

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe mūlasthānatīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma saptanavatyuttaraśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 198 mārkaṇḍeya uvāca: tato gacchenmahīpāla bhadrakālītisaṅgamam / śūlatīrthamiti khyātaṃ svayaṃ devena nirmitam

हिन्दी अर्थ

अनृपम॒तेज सबको अभिभूंत करनेवाले, महान् अंधकार रूप अज्ञान से परे, हिरण्पगर्भ भगवान् ब्रह्मा स्थित रहते हैं। महामहिमामय भगवान् उस समय जबकि एक सहल्ल बार चारों युग व्यतीत हो जाते हैं, समस्त जमस्मण्डल जलराष्षि में डूब जाता है, शासन करने की इच्छा से अपनी महारात्रि की कल्पना करते हैं, जो महान् अंधकार से पूर्ण रहती है ।१८६-१८८। जिस समय चारों प्रकार की प्रजाओं को उस विश्ञास अण्ह में परिणत करके ( सब का संह्ार करके ) महात्मा प्रजापति ब्रह्मा शयन करते हैं। उसः समय उनकों केवल सप्तषिगण देखते रहते हैं । वे भुगु आदि महात्मा ऋषिगण उस समय जनलोक में निवास करते हैं, परम

English

The Indras (or Devas) are Bhutapavadins, Hfstas, Medhyasthas, Bhutavadins, Bhutanuvadins. The three Vedas are competent in respect to Pravadins (arguers.)

अध्याय १९८

श्लोक 2

पञ्चायतनमध्ये तु तिष्ठते परमेश्वरः ।शूलपाणिर्महादेवः सर्वदेवतपूजितः

pañcāyatanamadhye tu tiṣṭhate parameśvaraḥ / śūlapāṇirmahādevaḥ sarvadevatapūjitaḥ

हिन्दी अर्थ

तपसथा के फलस्वरूप उन्हें दिव्य चक्षु की श्राप्ति हुई रहती है । इनके विस्तृत लक्षणों की चर्चा पूर्व प्रसंग में कर चुका हूँ ।ये महात्मा गण अपने दिव्यनेत्रों से सत्यादि सातों लोकों को देखते रहते हैं । भगवान् बहा का दर्शन उन्हें महाबलशाली रात्रियों में होता है।१८६-६६३॥ अपनी रात्रि के आने पर ब्रह्म जिस समय सुदुप्तावस्था में स्थित रहते हैं, उस समय सातों ऋषि उन्हें देखते हैं। समस्त कल्पों के

English

Agnidhra, Kasyapa, Paulastya, Magadha, Bharga, Agnibahu, lud. Aigirasa, Ojaavm, and Snbala are the som of

अध्याय १९८

श्लोक 3

स सङ्गमो नृपश्रेष्ठ नित्यं देवैर्निषेवितः ।दर्शनात्तस्य तीर्थस्य स्नानदानाद्विशेषतः

sa saṅgamo nṛpaśreṣṭha nityaṃ devairniṣevitaḥ / darśanāttasya tīrthasya snānadānādviśeṣataḥ

हिन्दी अर्थ

अस्त में एक मात्र भगवान् ब्रह्मा हो शेष ( परमेष्ठी ) रहते हैं, अतः उन्हें भाथ्य ( सर्वप्रथम ) कहा जाता है। सब कुछ करने धरनेवाले महान् तेजस्वी भगवान् ब्रह्मा अपनी रात्रि में आत्मा में सबको समेट कर महातर॒ एकार्णव जबत् में; जब कि चारों ओर घोर अन्धकार विद्यमान रहता है, निवास करते हैं । तदनन्तर- जब रात्रि व्यतीत हो जाती है तब वें जाग्रत होते हैं, और सृष्टि करने कौ इच्छा से पुनः मन का संयोग करते हैं ।१६२-१६४५। इसी प्रकार ब्रह्मा के नेमित्तिक प्रलय में प्रजापति के हपशान्त एवं समस्त लोकों

English

Then, at the end of the Manvantara, the seven Devas of the Bhrgu family, the powerful sovereign rulers, who had enjoyed the three worlds for seventyone cycles of four Yugas by remaining within them, and who used to perform Yajfias along with the Pitrs, Manus and the Seven Sages will then aban¬ don the three worlds and go to Maharloka along with their devotees and those who perform Yajfias. When they proceed upwards, and when the Manvantara expires, all the three worlds will be rendered without any support.

अध्याय १९८

श्लोक 4

दौर्भाग्यं दुर्निमित्तं च ह्यभिशापो नृपग्रहः ।यदन्यद्दुष्कृतं कर्म नश्यते शङ्करो ऽब्रवीत्

daurbhāgyaṃ durnimittaṃ ca hyabhiśāpo nṛpagrahaḥ / yadanyadduṣkṛtaṃ karma naśyate śaṅkaro 'bravīt

हिन्दी अर्थ

है८प९ वायुपुराणम्

English

O Brahmanas! Thereafter, the abodes presided over by deities become vacant and fall down along with constella¬ tions, stars and planets getting hurled and destroyed.

अध्याय १९८

श्लोक 5

युधिष्ठिर उवाच: कथं शूलेश्वरी देवी कथं शूलेश्वरो हरः ।प्रथितो नर्मदातीरे एतद्विस्तरतो वद

yudhiṣṭhira uvāca: kathaṃ śūleśvarī devī kathaṃ śūleśvaro haraḥ / prathito narmadātīre etadvistarato vada

हिन्दी अर्थ

देहैवियोगः सत्त्वानां तस्मिन्व कृत्स्नशः स्मृतः । ततो दस्धेषु भृतेषु सर्वेष्वादित्यरश्मिभिः ॥ देवषिमनुवर्येषु तस्मिन्संकलने तदा

English

Thereafter, when the lords of the three worlds including the eight Indras pass away, the fourteen groups of Devas beginning with (A)jita and others and ending with Caksusas—the Devas who were very mighty and full of splen¬ dour in all the Manvantaras—will go to Maharloka where they will become identical with those Devas who stay there till the end of the Kalpa.

अध्याय १९८

श्लोक 6

मार्कण्डेय उवाच: बभूव ब्राह्मणः कश्चिन्माण्डव्य इति विश्रुतः ।वृत्तिमान्सर्वधर्मज्ञः सत्ये तपसि च स्थितः

mārkaṇḍeya uvāca: babhūva brāhmaṇaḥ kaścinmāṇḍavya iti viśrutaḥ / vṛttimānsarvadharmajñaḥ satye tapasi ca sthitaḥ

हिन्दी अर्थ

तियंग्योनीनि सत्त्वानि नारकेयाणि यान्यपि । तदा तान्यपि दग्धानि धृतपापानि सर्वेशः ॥॥

English

It is reported that when the time of Samhara (lit. heaping and collision— Sankalana) comes those fourteen groups of Devas will forsake Maharloka and go to Janaloka with (i.e. preserving) their physical bodies and accompanied by their followers.

अध्याय १९८

श्लोक 7

अशोकाश्रममध्यस्थो वृक्षमूले महातपाः ।ऊर्ध्वबाहुर्महातेजास्तस्थौ मौनव्रतान्वितः

aśokāśramamadhyastho vṛkṣamūle mahātapāḥ / ūrdhvabāhurmahātejāstasthau maunavratānvitaḥ

हिन्दी अर्थ

व्युष्टायां तु रजस्यां तु ब्रह्मणेड्व्यक्तयोनये । जायन्ते हि पुनस्तानि सर्वेभुतानि कृत्लशः २०० ऋषयो मनयो देवा: प्रजा: सर्वाश्वतुविधा: तेषामपीह सिद्धानां निधनोत्पत्तिरुच्यते २० १ यथा सुययस्य लोके5स्मिन्नुदयास्तमनं स्मृतम्। वया जन्म निरोधश्च भूतानामिह दृश्यते.. के घिनव्ट हो जाते पर सभी जीवविकाय अपने शरीरों से वियुक्त हो जाते हैं, सूर्य की किरणों से सभ्री जीव वहाँ तक कि देवता ऋषि एवं बड़े बड़े मुन्रि गण भी भस्म द्वो जते हैं १९६-१६८। इतना ही नहीं गन्धवं एवं . पिष्ताचादि यघोनियों में उत्पन्न भूत गण भी कल्पास्त में भस्म होकर जनलोक का आश्रय लेते हैं। उस समय जो तियंक योनि में उत्पन्न होनेवाले प्राणी रहते हैं, अथवा जिनका घोर नरकादि लोकों में निवास रहता है वे भी

English

Thus when the Devas have gone from Maharloka to Janaloka, when BhQtadi (Cosmic Ego— Ahamkara ) and other (prime causes of the universe) remain and (even) immobiles have come to an end, when the abodes of the worlds beginning with Bhuh and ending with Mahah have become void, when the Devas have gone upward and become united with the Kalp- avasins (those who stay till the end of the Kalpa),

अध्याय १९८

श्लोक 8

तस्य कालेन महता तीव्रे तपसि वर्ततः ।तमाश्रममनुप्राप्ता दस्यवो लोप्त्रहारिणः

tasya kālena mahatā tīvre tapasi vartataḥ / tamāśramamanuprāptā dasyavo loptrahāriṇaḥ

हिन्दी अर्थ

दरघ होकर निष्पाप हो जाते हैं, और जन लोक में विद्यमान होते हैं ((६८-१६६। अम्त में जब ब्रह्मा की इस पन्‍्रहारातरिका अवदसान द्वोता है, तब वे सब जीव पुतः उत्पन्न होते हैं । ऋषियण, मनुगभ देवगण एवं प्रजा, इन सब की यहो गति होती है उस समय उन सिद्धि प्राप्त करने वालों का भी विनाश एबं उत्पन्न होना बतलायां जाता है जिस प्रकार इस लोक में सूयें का उदय होना तथा अस्त होना निद्दियत कहा जाता

English

after withdrawing (annihilating) those Devas, Sages, Pitps and Danavas, god Brahma with his powerful vision sees that it is the end of the Yuga and puts an end to his creation.

अध्याय १९८

श्लोक 9

अनुसर्प्यमाणा बहुभिः पुरुषैर् भरतर्षभ ।ते तस्यावसथे लोप्त्रं न्यदधुः कुरुनन्दन

anusarpyamāṇā bahubhiḥ puruṣair bharatarṣabha / te tasyāvasathe loptraṃ nyadadhuḥ kurunandana

हिन्दी अर्थ

: है, उसी प्रकार समस्त जीवों का भी जम्म लेना और मृत्यु प्राप्त करना देखा जाता है ।२००-२०१। समस्त जीवों के इस महान् बिताश के बाद पुनः भव अर्थात् उत्पत्ति होती है, इसीलिए इस लोक का नाम संसार कहा जादा है। जिस प्रकार वर्षा ऋतु में वे वस्तुएं अपने आप उत्पन्न हो जाती हैं, उसी प्रकार प्रलय के प्रत्येक कस्पों में जिन चराचर जीवों का जो-जो स्वरूप रहता है, जंसा जैसा आकार-प्रकार रहता है, ब्राह्म रात्रि के अवसान के उपरान्त पुलः नये कल्प का आरम्भ द्वोने पर वे उसी प्रकार के स्वरुप आकार एवं प्रकार में उत्पन्न देखे जाते हैं। भराचर जीव व॒ग्द, प्रजाकर्ता, प्रजापति; महायोगी; एवं महान् ऐद्वर्यशाली भगवान् ब्रह्मा के

English

The knowers of day and night of god Brahma under¬ stand that the day of Brahma consists of a thousand cycles of four Yugas and similarly the night too consists of a thousand cycles of four Yugas.

अध्याय १९८

श्लोक 10

निधाय च तदा लीनास्तत्रैवाश्रममण्डले ।तेषु लीनेष्वथो शीघ्रं ततस् तद्रक्षिणां बलम्

nidhāya ca tadā līnāstatraivāśramamaṇḍale / teṣu līneṣvatho śīghraṃ tatas tadrakṣiṇāṃ balam

हिन्दी अर्थ

शततमोध्ण्याय: द है८७

English

This Pratisaficara (Dissolution & Reabsorption) of all

अध्याय १९८

श्लोक 11

आजगाम ततो ऽपश्यंस्तम् ऋषिं तस्करानुगाः ।तमपृच्छंस्तदा वृत्तं रक्षिणस्तं तपोधनम्

ājagāma tato 'paśyaṃstam ṛṣiṃ taskarānugāḥ / tamapṛcchaṃstadā vṛttaṃ rakṣiṇastaṃ tapodhanam

हिन्दी अर्थ

निष्कमस्ते विशस्ते व प्रजाकारं प्रजापतिम् । ब्रह्माणं सर्वभुतानि महायोग॑ महेश्वरम् सखष्टा सर्वमृतानां कल्पादिषु पुनः पुनः । व्यक्ताव्यक्तो महादेवस्तस्य सर्व्िदं जगत् १२०७ येनेव सृष्ठा प्रथम प्रयाता आपो हि मार्गण महीतलेइस्सिन । द

English

The Naimittika dissolution is the burning (of the Uni¬ verse) at the end of the Kalpa and complete withdrawal (of all beings) by god Brahma. The destruction of Karanas (instru¬ ments or means and causes) of living beings during Pratisarga (absorption) into Prakrti is called Prakrta type of dissolution.

अध्याय १९८

श्लोक 12

वद केन पथा याता दस्यवो द्विजसत्तम ।तेन गच्छामहे ब्रह्मन् यथा शीघ्रतरं वयम्

vada kena pathā yātā dasyavo dvijasattama / tena gacchāmahe brahman yathā śīghrataraṃ vayam

हिन्दी अर्थ

तद्भाविताख्यातिवशाच्च धर्म्या: पुननिसगेण भवन्ति सत्त्वा:+ २१० अत ऊचध्वे प्रवक््यामि कालमामूतसंप्लवम् । मन्वन्तराणि यानि स्पुर्व्याल्यातानि मया द्विजा: ॥ सह प्रजानिसगेंण सह देवंश्वतुदंश द

English

The dissolution due to dawning of spiritual knowledge is said to be the ultimate one ( Alyantika,) as it renders the seeds (causes) of Samsara, impossible.

अध्याय १९८

श्लोक 13

तथा तु वचनं तेषां ब्रुवतां स तपोधनः ।न किंचिद् वचनं राजन्नवदत्साध्वसाधु वा

tathā tu vacanaṃ teṣāṃ bruvatāṃ sa tapodhanaḥ / na kiṃcid vacanaṃ rājannavadatsādhvasādhu vā

हिन्दी अर्थ

स पुगाल्यासहख्त तु सर्वाण्येवास्तराणि वे । अस्या: सहले है पूर्ण निःशेषः कल्प उच्चते... काक्राआओपअणणशण/:/ईणई४८ई”/थ/भ/भलऋझलदवजजय--न्‍- “॒“

English

After dissolving all the Devas residing in the three worlds at the end of his day and when he feels the urge to sleep (?), Lord Brahma destroys all the subjects and dissolves all the creation.

अध्याय १९८

श्लोक 14

ततस्ते राजपुरुषा विचिन्वन्तस्तमाश्रमम् ।संयम्यैनं ततो राज्ञे सर्वान् दस्यून् न्यवेदयन्

tataste rājapuruṣā vicinvantastamāśramam / saṃyamyainaṃ tato rājñe sarvān dasyūn nyavedayan

हिन्दी अर्थ

झरोर में प्रवेश करते हैं और उसी से पुनः बाहर निकलते हैं ।२०२५२०६। प्रत्येक कल्प के आदिमकाल में व्यक्त एबं अव्यक्त उभय विद उपाधिधारी देवाधिदेव भगवान् ब्रह्मा ही समस्त जीव समूह की सृष्टि करते हैं इस चरा- चर जगत में जो कुछ भी है, वह उन्हीं का बनाया हुआ इस महोतल में प्रथम प्रवलित जल राशि जिस मार्ग का आश्रय लेकर प्रयाण करतो है, अन्यान्य जल राशियाँ भी उसी पूर्व प्रथित पथ पर प्रयाण करतो हैं ।

English

Then at the end of a thousand cycles of Caturjiugas, when the period of annihilation of Yuga arrives, Prajapati (Lord of subjects, viz. Brahma) begins to make the subjects abide in him (i.e. absorb in himself).

अध्याय १९८

श्लोक 15

तं राजा सहितैश् चोरैर् अन्वशाद् वध्यताम् इति ।सम्बध्य तं च तैर् राजञ्छूले प्रोतो महातपाः

taṃ rājā sahitaiś corair anvaśād vadhyatām iti / sambadhya taṃ ca tair rājañchūle proto mahātapāḥ

हिन्दी अर्थ

मनुष्य यणज, दूसरे दरीर की भवितव्यता ( आवद्यक प्राच्ति ) के कारण एवं रविरद्ियों के वशीभूत होकर, अपने-अपने शुभाशुभ कार्यकलापों के अधीन उसी कम के निदिध्ट पथ पर विच्रण करते हुए ऊध्य अथवा निम्न लोकों में गमन करते हैं। जो देवगण मनुगण, प्रजापति एवं अन्याय स्वस्थ सिद्धिप्राप्त पुरुष हैं, वे भी भवितव्यता वद्य अपने अपने धर्म को मर्यादा के अनुरूप स्वभावत: जरम धारण करते हैं ।१०७-२१०। ऋषिवृन्द ! अब इसके उपरान्त मैं प्रलय काल के विषय में बतला रहा हैं) जो चोदहू मस्वस्तर होते हैं, उनको बतला चुका । साथ में हो उनमें होनेवाली प्रजाओं की सृष्टि भी देवताओं के साथ बतला चुका हूँ । वे सभी मन्वन्तर एक सहस्न युगों के होते हैं । इसी प्रकार दो सहस्न युगों के व्यतीत होने पद एक कल्प की

English

Then a drought sets in lasting for a hundred years. Those living beings on the surface of the Earth, (still left) being deficient in strength become dissolved and are merg¬ ed into the Earth. The Sun then rises up with seven rays consti¬ tuting his chariot.

अध्याय १९८

श्लोक 16

ततस्ते शूलमारोप्य तं मुनिं रक्षिणस्तदा ।प्रतिजग्मुर् महीपाल धनान्यादाय तान्यथ

tataste śūlamāropya taṃ muniṃ rakṣiṇastadā / pratijagmur mahīpāla dhanānyādāya tānyatha

हिन्दी अर्थ

समाप्ति होती कही जाती है ।२११-२१२। इस अवधि को ब्रह्मा का एक दिन समझना चाहिए । उसकी संख्या

English

Lord Sun of unbearable rays begins to suck up water through his rays. Those seven rays will be green in colour and

अध्याय १९८

श्लोक 17

शूलस्थः स तु धर्मात्मा कालेन महता तदा ।ध्यायन्देवं त्रिलोकेशं शङ्करं तमुमापतिम्

śūlasthaḥ sa tu dharmātmā kālena mahatā tadā / dhyāyandevaṃ trilokeśaṃ śaṅkaraṃ tamumāpatim

हिन्दी अर्थ

अन्राध्यायसग्राप्ति: ख. पुस्तके । अनन्तरं सूत उवाचेति भ् । सानुषाध्षिनिमेषास्तु काष्ठा पत्चवश स्पृता । लवः क्षणास्तु पडठ्चेव. विशत्काष्ठा तु ते त्रयः

English

Spreading over the forest ('the sky'-Bd.P.) gradually they get transformed again. The wood over the earth, wealth and refulgence begin to blaze with water (?)

अध्याय १९८

श्लोक 18

बहुकालं महेशानं मनसाध्याय संस्थितः ।निराहारो ऽपि विप्रर्षिर्मरणं नाभ्यपद्यत

bahukālaṃ maheśānaṃ manasādhyāya saṃsthitaḥ / nirāhāro 'pi viprarṣirmaraṇaṃ nābhyapadyata

हिन्दी अर्थ

प्रस्थः सप्तोदकाश्चेवे साधिकास्तु लवः स्मृतः। लबास्त्रिशत्कला ज्ेया मुहृतंस्त्रिशतः कलाः ४२१५ मुहूर्तास्तु पुर्नास्त्रशवहो रात्रमिति स्थिति: । अहोराज कालानां तु हधधिकांनि शतानि घद ॥२१६ - ताश्चेब संख्यया शेय चरद्रादित्यगतियंथा । निमेषा दश पर्चेव काष्ठास्ताध्च्रिशतः कला

English

Hence it is water that is said to be the cause of the blazing of the Sun. With drought the Sun does not blaze. With drought the Sun has no halo(?)

अध्याय १९८

श्लोक 19

धारयामास विप्राणाम् ऋषभः स हृदा हरिम् ।शूलाग्रे तप्यमानेन तपस्तेन कृतं तदा

dhārayāmāsa viprāṇām ṛṣabhaḥ sa hṛdā harim / śūlāgre tapyamānena tapastena kṛtaṃ tadā

हिन्दी अर्थ

मागधेनेव मानेन जलप्रस्थो विधीयते । एते वाप्युदकप्रस्थाश्वत्वारों नालिको घटः १२२० . हेममाषेः कृतच्छिदेश्वतुभिश्वतुरहगुले: । समाहनि च रात्रौ ज सुहूर्ता वे हिनालिकाः:... ४२११ रवेगंतिविशेषेण सर्बेप्वुतुषु नित्यशः अधिक षद्शतं पश्च कलानां प्रविधीयते तंवहूर्मानुषं शेय नाक्षत्रं तु दशाधिकम् ।-सावनेन तु मासेन अब्दोषयं मानुषः स्मृतः और२३१

English

Then those seven rays assuming the forms of seven Suns, burn the four quarters and the four worlds like fires.

अध्याय १९८

श्लोक 20

सन्तापं परमं जग्मुः श्रुत्वैतन् मुनयो ऽखिलाः ।ते रात्रौ शकुना भूत्वा संन्यवर्तन्त भारत

santāpaṃ paramaṃ jagmuḥ śrutvaitan munayo 'khilāḥ / te rātrau śakunā bhūtvā saṃnyavartanta bhārata

हिन्दी अर्थ

. एतह्व्यमहो रात्रमिति शास्त्रविनिश्चयः अह्लाइनेन तु या संख्या मासत्व॑ंयनवाधिकी

English

The fiery rays reach the top and bottom (of the worlds). Seven Suns and the blazing fires of dissolution shine fiercely.

अध्याय १९८

श्लोक 21

दर्शयन्तो मुनेः शक्तिं तमपृच्छन् द्विजोत्तमम् ।श्रोतुम् इच्छाम ते ब्रह्मन् किं पापं कृतवानसि

darśayanto muneḥ śaktiṃ tamapṛcchan dvijottamam / śrotum icchāma te brahman kiṃ pāpaṃ kṛtavānasi

हिन्दी अर्थ

के बारे में विस्तार पूर्वक बतला रहा हूँ, सुनिये । एक लघु अक्षर के उच्चारण में जो समय लगता है उसे निमेष आँख की झपकी में जो समय लगता है, उसे भी निमेष कहते हैं। ऐसे पर्ह निमेषों की! एक काष्ठा कही जाती है। पाँच क्षण का एक लव होता है, बींस काष्ठा का तीन लव होता है।२१३-२१४। मतास्तर के साढ़े सात प्रस्थ का एक लव होता है, तीस लव की एक कला होती है, तीस कला का एक मुहूर्त होता है, तीस मुहूर्त का एक दिन रात होता है--एक दिन रात में छ सौ दो कलाएँ होती

English

Ignited and illuminated by means of the water, thous¬ ands of rays envelop the sky and scorch the Earth.

अध्याय १९८

श्लोक 22

श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततः स मुनिशार्दूलस् तान् उवाच तपोधनान् ।दोषतः किं गमिष्यामि न हि मे ऽन्यो पराध्यति

śrīmārkaṇḍeya uvāca: tataḥ sa muniśārdūlas tān uvāca tapodhanān / doṣataḥ kiṃ gamiṣyāmi na hi me 'nyo parādhyati

हिन्दी अर्थ

, हैं।२१५-२१६॥ इन्हीं संख्याओं से चन्द्रमा और सूर्य की गति जाननी चाहिए, पत्रह निमेष की एक काष्ठा और "तौस काष्ठा कौ एक कला, तीस कला का एक मुहतं होता है, किन्‍्हीं किरहीं के मत से चालीस कलाओं का ऐक मुह॒ते होता है । जाननेवालों ने इन सब के यही प्रमाण निश्चित किये हैं । जल द्वारा भी एक प्रकार से परिमाण का निदचय होता है, मागधमान के अनुसार तेरह पश्च-जल का एक प्रस्थ होता है, ऐसे चार प्रस्थों

English

Being burnt by their blazing heat, the Earth inclusive of the oceans and the mountains becomes bereft of moisture and viscidity.

अध्याय १९८

श्लोक 23

एवमुक्त्वा ततः सर्वान् आचचक्षे ततो मुनिः ।मुनयश्च ततो राज्ञे द्वितीये ऽह्नि न्यवेदयन्

evamuktvā tataḥ sarvān ācacakṣe tato muniḥ / munayaśca tato rājñe dvitīye 'hni nyavedayan

हिन्दी अर्थ

का एक नालिक घट होता है ।२१७-२२०। एक कलश में चार अंगुलों पर चार सुवर्णमाष के समान छिद्रों द्वारा दिन और रात भर में प्रतिमुहृतं दो नालिक जल का क्षरण होता है। सूर्य की गति की न्यूनता के रहते हुए भी सभी ऋतुओं में एक दिन रात छ सौसे कुछ अधिक कलाओं वाला होता है। यह दिन मनुष्यों का है, नाक्षत्रिक दिन राति का परिणाम छ सौ दस कलाओं का होता है। यही एक. सावत का भी मान है। इस मान से "बारह मास का एक मानव वर्ष कहा जाता है ।२२१-२२३। उतना ही एक दिव्य वर्ष का मान

English

The nether regions, the upper regions and the sides are restrained by the illuminated rays of the Sun of various colours and spreading everywhere.

अध्याय १९८

श्लोक 24

राजा तु तमृषिं श्रुत्वा निष्क्रान्तः सह बन्धुभिः ।प्रसादयामास तदा शूलस्थम् ऋषिसत्तमम्

rājā tu tamṛṣiṃ śrutvā niṣkrāntaḥ saha bandhubhiḥ / prasādayāmāsa tadā śūlastham ṛṣisattamam

हिन्दी अर्थ

कहते हैं, मनुष्य कौ

English

The scorching rays of the Sun and the leaping flames of the fires mingling with one another appear to be a single unit with a single flame.

अध्याय १९८

श्लोक 25

राजोवाच: यन्मया ऽपकृतं तात तवाज्ञानवशाद्बहु ।प्रसादये त्वां तत्राहं न मे त्वं क्रोद्धुम् अर्हसि

rājovāca: yanmayā 'pakṛtaṃ tāta tavājñānavaśādbahu / prasādaye tvāṃ tatrāhaṃ na me tvaṃ kroddhum arhasi

हिन्दी अर्थ

शततमोष्ध्याय) ला 'हैपदी तदा बद्धमिदं शान संशा या हापलक्यताम् । कलानां सुपरीमाणात्काल इत्यभिषोयतले

English

That fire becomes a mass of fiery zone creating the destruction of all the worlds. With its brilliance it scorches all the four worlds.

अध्याय १९८

श्लोक 26

एवमुक्तस् ततो राज्ञा प्रसादम् अकरोन् मुनिः ।कृतप्रसादं राजा तं ततः समवतारयत्

evamuktas tato rājñā prasādam akaron muniḥ / kṛtaprasādaṃ rājā taṃ tataḥ samavatārayat

हिन्दी अर्थ

यवहुब्रंह्मणः प्रोक्तं दिव्या कोटी तु सा स्मृता । शतानां च सह्राणि दश द्विगुणितानि च ॥

English

All the mobile and the immobile beings get dissolved. The Earth, devoid of trees and even grass, appears like the back of a tortoise shell.

अध्याय १९८

श्लोक 27

अवतीर्यमाणस्तु मुनिः शूले मांसत्वम् आगते ।अतिसंपीडितो विप्रः शङ्करं मनसागमत्

avatīryamāṇastu muniḥ śūle māṃsatvam āgate / atisaṃpīḍito vipraḥ śaṅkaraṃ manasāgamat

हिन्दी अर्थ

तेयां श्रुत्वा स देवस्तु वायुलोंकहिते रतः । संक्षेपाहिष्यचक्षुष्मान्प्ोवाच भगवास्तरभुः एले राश्यहनो पूर्व कीतिते त्विह लोकिके । तासा संख्याय वर्षाप्रं ब्राह स्‍्यं व्याम्यहः क्षये

English

The entire universe destroyed and affected by misfor¬ tune appears like a frying pan. The whole of the sky, filled with the burning rays, blazes fiercely.

अध्याय १९८

श्लोक 28

संध्यातः शङ्करस् तेन बहुकालोपवासतः ।प्रादुर्भूतो महादेवः शूलं तस्य तथाछिनत्

saṃdhyātaḥ śaṅkaras tena bahukālopavāsataḥ / prādurbhūto mahādevaḥ śūlaṃ tasya tathāchinat

हिन्दी अर्थ

कोटोशतानि चत्वारि वर्षाणि मानुषाणि तु। द्वात्रिशच्च तथा फोटश्ः संख्याताः संख्यया द्विजेः ॥

English

All the living beings in the nether worlds and in the great ocean become dissolved and one with the Earth.

अध्याय १९८

श्लोक 29

शूलमूलस्थितः शम्भुस्तुष्टः प्राह पुनःपुनः ।ब्रूहि किं क्रियतां विप्र सत्त्वस्थानपरायण

śūlamūlasthitaḥ śambhustuṣṭaḥ prāha punaḥpunaḥ / brūhi kiṃ kriyatāṃ vipra sattvasthānaparāyaṇa

हिन्दी अर्थ

तथा शतसहल्ञाणि एकोननवतिः पुनः । अशीतिश्न सहल्नाणि एव कालः प्लवस्य सु मानुषाल्येण संहयातः कालो झ्यामूतसंप्लवः । सप्त सुर्ास्तदा5ग्रेषु तदा लोकेषु तेषु ये ॥२३ रे भहासूतेषु लीयस्ते प्रजा: सर्वाश्वतुविधाः । सलिलेनापप्लुते लोके नष्टे स्थावरजड्डसे

English

The continents, mountains, sub-continents, the great oceans all these will be reduced to ashes by that cosmic fire, the soul of everything.

अध्याय १९८

श्लोक 30

अदेयमपि दास्यामि तुष्टो ऽस्म्यद्योमया सह ।किं तु सत्यवतां लोके सिद्धिर्न स्याच्च भूयसी

adeyamapi dāsyāmi tuṣṭo 'smyadyomayā saha / kiṃ tu satyavatāṃ loke siddhirna syācca bhūyasī

हिन्दी अर्थ

है--ऐसा शास्त्रों का निरचय है । इसी दिन मान से मास, अयन एवं वर्ष भादि की गणना होती है, ये संज्ञाएँ ब्रह्म के एक दिन की उपलक्षण मात्र हैं । कलाओं द्वारा परिगणित होने के कारण समय काल नाम से पुकारा जाता है। एक ब्राह्न दिवस एक करोड़ बीस लाख नव सहस्त से अधिक दिव्य बर्षों का होता है। इस कथन से ऋषिवुन्द परम विस्मित हो उठे यह परम अद्भुत बात मालूस पड़ी, काल

English

Then the big Samvartaka fire (the fire of dissolution) transcends the mountains and destroys all the worlds. It becomes a terribly kindled fire.

अध्याय १९८

श्लोक 31

स्वकर्मणो ऽनुरूपं हि फलं भुञ्जन्ति जन्तवः ।शुभेन कर्मणा भूतिर्दुःखं स्यात् पातकेन तु

svakarmaṇo 'nurūpaṃ hi phalaṃ bhuñjanti jantavaḥ / śubhena karmaṇā bhūtirduḥkhaṃ syāt pātakena tu

हिन्दी अर्थ

संख्या विषयक जिज्ञासा की शान्ति के लिए पुनः उस स्बो ने पूछा।२ २४-२२७। ऋषिगंण बोले- हम लोग संक्षेप में मानव मान से --सम्मत संख्या द्वारा प्रलय का परिमाण

English

It then pierces through the Earth and dries up Rasa-

अध्याय १९८

श्लोक 32

बहुभेदप्रभिन्नं तु मनुष्येषु विपच्यते ।केषां दरिद्रभावेन केषां धनविपत्तिजम्

bahubhedaprabhinnaṃ tu manuṣyeṣu vipacyate / keṣāṃ daridrabhāvena keṣāṃ dhanavipattijam

हिन्दी अर्थ

हितेषी परम ऐश्वयंशाली भगवान् वायु, जिन्हें दिव्य नैत्र प्राप्त थे, संक्षेप में कथा का प्रारम्भ करते हुए बोले ।२२८-२२९। लोकिक दिन रात का प्रमाण मैं आप लोगों को बतला चुका हूँ, उन्ही के माध्यम से ब्राह्म वर्ष कं उनके दिवस का परिमाण बतला रहा हूँ! मानव के चार सो बत्तीस करोड़ उनन्‍्यासी लाख अस्सी सह वहुँ में प्रलय होता है, मानव मान से इतने ही वर्षों बाद प्रलय की अवधि कही गई है । प्रलय

English

After burning the Earth from below, it burns the firmament above spreading through thousands, lakhs and tril- lions of Yojanas.

अध्याय १९८

श्लोक 33

सन्तत्यभावजं केषां केषांचित् तद्विपर्ययः ।तथा दुर्वृत्तितस्तेषां फलमाविर्भवेन् नृणाम्

santatyabhāvajaṃ keṣāṃ keṣāṃcit tadviparyayaḥ / tathā durvṛttitasteṣāṃ phalamāvirbhaven nṛṇām

हिन्दी अर्थ

के अवर्सर पर सात सूर्य उदित होते हैं, सभी लोंकों में चार्रो.प्रकार की प्रजाएँ महाभूतों में विलीन हो जाती हैं, सारा लोक जल मग्न हो जाता है स्थावर, जंगम, जीव निकाय नष्ट हो जाते हैं ।२३०-२३४। संहार काये + इतः प्रभृति सार्धष्लोको नास्ति ख. पुस्तके ।

English

Many flames leap out from that Samvartaka fire. Glowing fiercely the Samvartaka fire consumes Gandharvas, Pisacas, the great serpents and Raksasas. Everything is reduced to a huge globular mass (of ashes).

अध्याय १९८

श्लोक 34

केषांचित्पुत्रमरणे वियोगात् प्रियमित्रयोः ।राजचौराग्नितः केषां दुःखं स्याद्दैवनिर्मितम्

keṣāṃcitputramaraṇe viyogāt priyamitrayoḥ / rājacaurāgnitaḥ keṣāṃ duḥkhaṃ syāddaivanirmitam

हिन्दी अर्थ

हैहै० बायुपुराणम्

English

The deadly fire thus burns all the four worlds, viz. Bhurloka, Bhuvarloka, Svarloka and Maharloka in a terrible manner.

अध्याय १९८

श्लोक 35

तच्छरीरे तु केषांचित्कर्मणा सम्प्रदृश्यते ।जराश्च विविधाः केषां दृश्यन्ते व्याधयस् तथा

taccharīre tu keṣāṃcitkarmaṇā sampradṛśyate / jarāśca vividhāḥ keṣāṃ dṛśyante vyādhayas tathā

हिन्दी अर्थ

विनिवृत्ते थ सहारे उपशान्ते प्रजापतो । निरालोके प्रदग्धे तु नेशेन तमसा5ब॒ते ।। डे ईश्वराधिष्ठिते हास्मिस्तवा होकार्णवे किल क्‍ तावबेकाजवो शेयो यावदासीदहः प्रभो: । रात्रिस्तु सलिलावस्था निवृत्तो चाप्यहः स्मृतम्॒

English

When all the worlds arc enveloped with fire on all sides and above, the entire universe is slowly permeated with brilliance and shines like a (redhot) ball of iron.

अध्याय १९८

श्लोक 36

दृश्यन्ते चाभिशापाश्च पूर्वकर्मानुसंचिताः ।कष्टाः कष्टतरावस्था गताः केचिद् अनागसः

dṛśyante cābhiśāpāśca pūrvakarmānusaṃcitāḥ / kaṣṭāḥ kaṣṭatarāvasthā gatāḥ kecid anāgasaḥ

हिन्दी अर्थ

जेलोक्ये यानि सत्वानि गतिमन्ति भ्रवाणि च। आतमुर्तेस्यः प्रलोयन्ते तस्मादासृतसंप्लल:

English

Thereafter the terrible Sariivartaka clouds begin to rise in the sky. They assume the shapes of the herds of huge ele¬ phants and are embellished with lightning streaks,

अध्याय १९८

श्लोक 37

पूर्वकर्मविपाकेन धर्मेण तपसि स्थिताः ।दान्ताः स्वदारनिरता भूरिदाः परिपूजकाः

pūrvakarmavipākena dharmeṇa tapasi sthitāḥ / dāntāḥ svadāraniratā bhūridāḥ paripūjakāḥ

हिन्दी अर्थ

पराधंदिगु्ण चापि परमायु: प्रकीतितम । एतावान्स्थितिकालस्तु अजस्थेह प्रजापतेः ॥ द स्थित्यन्ते प्रतिसगस्य ब्रह्मण: परसेंष्ठिन:

English

Some are dark-coloured like the blue lotus. Some are like the white lilies, some resemble lapis lazuli and others are like emerald and sapphire.

अध्याय १९८

श्लोक 38

ह्रीमन्तो नयसंयुक्ता अन्ये बहुगुणैर् युताः ।दुर्गमामापदं प्राप्य निजकर्मसमुद्भवाम्

hrīmanto nayasaṃyuktā anye bahuguṇair yutāḥ / durgamāmāpadaṃ prāpya nijakarmasamudbhavām

हिन्दी अर्थ

' यथा वायुप्रवेगेन दीपाचिरपशास्यति । तथव प्रतिसगेंण ब्रह्मा समुपशाम्यति

English

Others are (white) like the conch shell and the kunda flowers. Some are (black) like the natural collyrium. Some clouds are smoke-coloured and some clouds are yellow.

अध्याय १९८

श्लोक 39

न संज्वरन्ति ये मर्त्या धर्मनिन्दां न कुर्वते ।इदमेव तपो मत्वा क्षिपन्ति सुविचेतसः

na saṃjvaranti ye martyā dharmanindāṃ na kurvate / idameva tapo matvā kṣipanti suvicetasaḥ

हिन्दी अर्थ

कर प्रजापति शांत हो जाते हैं, दाघ लोक समूहों में आलोक ( प्रकाश ) का सबंधा अभाव हो जाता है. घोर नेश अंधकार में संसार सभी ओर से आवत हो जाता है। ईइवर में अधिष्ठित गृह समस्त जगत एक महासमुद्र रूप में परिणत हो जाता है । तब तक भगवान् का एक दिन रहता है तब तक एकार्णव रुप जगत् की स्थिति जाननी चाहिए, उसके बाद उनकी रात्रि केवल जलावस्था तक रहती है इसके उपरान्त दिन कहा जांता है । ये दिव और रात क्रम से परिवर्तित होते हैं । इस प्रकार उन परम ऐश्वर्यशाली का एक दिन रात निश्चिल प्राणि समूहों के प्रलय अवधि तक कहा' जाता है ।२३५-०२३८। इस समस्त त्रैलोक्य में जितने भी चराचर भूत ( जीव ) समूह हैं, वे सव के सब विनष्ट हो जाते हैं, इसीलिये प्रलय का नाम आभूत- संप्लव कहा जाता है। प्रजाओं में सब में प्रथम भूत ( उत्पन्न ) हुए थे, अतः प्रजापति भूत हैं, उन्हों से तब

English

Some clouds have the (grey) colour of a donkey, some resemble the red lac, others have the lustre of the red arsenic and there are dove-coloured clouds.

अध्याय १९८

श्लोक 40

हा भ्रातर्मातः पुत्रेति कष्टेषु न वदन्ति ये ।स्मरन्ति मां महेशानमथवा पुष्करेक्षणम्

hā bhrātarmātaḥ putreti kaṣṭeṣu na vadanti ye / smaranti māṃ maheśānamathavā puṣkarekṣaṇam

हिन्दी अर्थ

चराचर जगत् भूत ( विनाश ) होता है, इसलिये भी प्रलय को आशभूृतसंप्लव कहते हैं । शाश्वत एवं अमृतत्व शब्द भी इस आशभुतसंप्लव शब्द के अथ में प्रयुक्त होते हैं। अतीत, भविष्य एवं वर्तमान ब्रजाओं का त्रकालिक आयु परिमाण दिव्य संख्या से अपराद्धं कहा जाता है ।२३९-२४०। प्रजापति ब्रह्मा कौ परम आयु दो पराद्ध काल हैं। इतने ही समय तक उनकी स्थिति कही जाती है। इसके उपरान्त परमेष्ठी ब्रह्मा का

English

Some glow-worm-coloured clouds rise up in the sky; some arc as vast as the expansive cities and the Earth and some are as huge as herds of elephants.

अध्याय १९८

श्लोक 41

दुष्कृतं पूर्वजं भोक्तुं ध्रुवं तदुपशाम्यति

duṣkṛtaṃ pūrvajaṃ bhoktuṃ dhruvaṃ tadupaśāmyati

हिन्दी अर्थ

प्रति सम॑ होता है। जिस श्रकार वायु के झोंके में दीप की ज्योति ज्ञान्तं हो जाती है, उसी प्रकार प्रतिसर्ग तास्त्ययं श्लोंको घ. पुस्तके।

English

Some clouds are like mountains and some are like rocky regions. Some resemble large basins and some huge shoals of fish.

अध्याय १९८

श्लोक 42

दिनानि यावन्ति वसेत्स कष्टे यथाकृतं चिन्तयद् देवमीशम् ।तावन्ति सौम्यानि कृतानि तेन भवन्ति विप्र श्रुतिनोदनैषा

dināni yāvanti vasetsa kaṣṭe yathākṛtaṃ cintayad devamīśam / tāvanti saumyāni kṛtāni tena bhavanti vipra śrutinodanaiṣā

हिन्दी अर्थ

इत्येष थ समाख्यातो मया झ्यामृतसंप्लवः । ब्रह्मनेमित्तिको होष संप्रक्षालनसंयमः

English

Terrific in appearance and multi-formed, all those clouds thundering terribly, fill the entire firmament at that time (of dissolution).

अध्याय १९८

श्लोक 43

यस्मात्त्वया कष्टगतेन नित्यं स्मृतश्चाहं मनसा पूजितश्च ।गौरीसहायस्तेन इहागतो ऽस्मि ब्रूह्यद्य कृत्यं क्रियतां किं नु विप्र

yasmāttvayā kaṣṭagatena nityaṃ smṛtaścāhaṃ manasā pūjitaśca / gaurīsahāyastena ihāgato 'smi brūhyadya kṛtyaṃ kriyatāṃ kiṃ nu vipra

हिन्दी अर्थ

समासेन समाल्यातों भुयः कि वर्तयासि वः । +य इद धारयेन्नित्यं शणुयाद्वाषप्यभीक्षणश: ॥। कोतेंनाच्छवणाज्चापि मह॒तों सिद्धिमासुयात् इति श्रीमहापुराणे वायुप्रोक्ते मन्‍्वन्तरनिसर्गादिकथन नाम शततमो्ध्याय: ।

English

Then the terrific fresh clouds identifying themselves with the Suns, organise themselves in seven groups and extin¬ guish the fire.

अध्याय १९८

श्लोक 44

माण्डव्य उवाच: तुष्टो यद्युमया सार्धं वरदो यदि शङ्कर ।तदा मे शूलसंस्थस्य संशयं परमं वद

māṇḍavya uvāca: tuṣṭo yadyumayā sārdhaṃ varado yadi śaṅkara / tadā me śūlasaṃsthasya saṃśayaṃ paramaṃ vada

हिन्दी अर्थ

हारा ब्रह्मा शान्त हो जाते हैं! उस समय जब अव्यक्त में महत् विलीन हो जाता है और महृदादि सब महेश्वर में तद॒प हो जाते हैं, तब गुण साम्य हो जाता है। प्रलय का वृत्तान्त मैं आप लोगों को सुना चुका, यहो ब्रह्मा का नेभित्तिक प्रलय कहा जाता है, इसका वर्जन मैंने संक्षेप ही में किया है। अब बतलाइये आप लोगों को पुनः क्या बतलाऊँ ? जो व्यक्ति इस वृत्तान्‍्त को धारण करता है, अथवा नित्य

English

The clouds then shower energetically and quell the entire inauspicous and terrible fire.

अध्याय १९८

श्लोक 45

न रुजा मम कापि स्याच्छूलसंप्रोतिते ऽगके ।अमृतस्रावि तच्छूलं प्रभावात् कस्य शंस मे

na rujā mama kāpi syācchūlasaṃprotite 'gake / amṛtasrāvi tacchūlaṃ prabhāvāt kasya śaṃsa me

हिन्दी अर्थ

श्रवण फरता है, वह मद्दान सिद्धि प्राप्त करता है, क्योंकि इसके श्रवण एयं कीतेतन से भी महान् फल कौ प्राप्ति होती है। इसके माहात्म्य से ब्राह्मण को विद्या प्राप्ति होती है, क्षत्रिय विजयी होता है, बंध्य धन प्राप्त करता है, शुद्र सुख लाभ करता है +एतदर्धस्थाने य इदं ध्यायते नित्यं धारयेद्वः समाहित इति घ. पुस्तके । ( अब इलोको न विद्यते क. ग, घ. ड. पुस्तकेषु ।

English

The universe is filled with waters of the heavy down¬ pour. The brilliance of the burning fire is overcome by the wateis and the fire enters (i.e. merges) into water.

अध्याय १९८

श्लोक 46

श्रीशूलपाणिर् उवाच: शूलस्थेन त्वया विप्र मनसा चिन्तितो ऽस्मि यत् ।अनयानां निहन्ताहं दुःखानां विनिबर्हणः

śrīśūlapāṇir uvāca: śūlasthena tvayā vipra manasā cintito 'smi yat / anayānāṃ nihantāhaṃ duḥkhānāṃ vinibarhaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

हैहैर क्‍ ...... ैमुपुरारणय

English

Urged by the self-bom deity (Brahma), they fill the universe with their showers. Others assail the sea-shore with large quantities of water. The entire Earth with its continents and mountains is covered with water.

अध्याय १९८

श्लोक 47

ध्यातमात्रो ह्यहं विप्र पाताले वापि संस्थितः ।शूलमूले त्वहं शम्भुरग्रे देवी स्वयं स्थिता ।जगन्माताम्बिका देवी त्वामृतेनान्वपूरयत्

dhyātamātro hyahaṃ vipra pātāle vāpi saṃsthitaḥ / śūlamūle tvahaṃ śambhuragre devī svayaṃ sthitā / jaganmātāmbikā devī tvāmṛtenānvapūrayat

हिन्दी अर्थ

असाधारणवबुत्तत्तु हुतशेषादिभिद्विजे: । धर्मा वेशेषिकाश्येव आचीर्णाः सुक्ष्मदशिलिः ते देवें: सह तिष्ठन्ति महलोकिनिवासिनः । चतुदंशते सनवः कीतिताः फीतिवर्धनाः अतीता वतंमानाश्रव तथेवानागताश्व ये । ऋषिभिरदेंवतेश्रव सह गन्धवंराक्षसे: मम्बस्तराधिका रेषु जयन्तीह पुनः पुनः । देवा: सप्तर्षयश्चेव सनवः पितरस्तथा तेस्तथ्यकारिभियुक्तः भ्रद्ावज्ू रर्दापत: । वर्णाश्षमाणां धर्मेषु श्ौतस्मातेंषु संस्थिते: ॥

English

O Brahmanas, the entire quantity of water showered by the clouds enters the ocean. There it is sucked up by the rays of the Sun.

अध्याय १९८

श्लोक 48

माण्डव्य उवाच: पूर्वमेव स्थितो यस्माच्छूलं व्याप्योमया सह ।प्रसादप्रवणो मह्यमिदानीं चानया सह

māṇḍavya uvāca: pūrvameva sthito yasmācchūlaṃ vyāpyomayā saha / prasādapravaṇo mahyamidānīṃ cānayā saha

हिन्दी अर्थ

विनिवृत्ताधिकारास्ते यावन्मन्वन्तरक्षय

English

The water sucked up by the rays of the Sun clings to the clouds. It falls again on to the Earth whereby the oceans are filled up.

अध्याय १९८

श्लोक 49

यस्याः संस्मरणाद् एव दौर्भाग्यं प्रलयं व्रजेत् ।न दौर्भाग्यात् परं लोके दुःखाद्दुःखतरं किल

yasyāḥ saṃsmaraṇād eva daurbhāgyaṃ pralayaṃ vrajet / na daurbhāgyāt paraṃ loke duḥkhādduḥkhataraṃ kila

हिन्दी अर्थ

महलकिति यत्प्रोक्त मातरिभ्वस्त्वथा विभो । प्रतिलोके च कतंव्यमनेकं: समधिष्ठिता भूलोकादि की व्यवस्था

English

Then the oceans overflow their shores all round. Mountains crumble down and the Earth sinks into the water.

अध्याय १९८

श्लोक 50

किलैवं श्रूयते गाथा पुराणेषु सुरोत्तम ।त्रैलोक्यं दहतस् तुभ्यं सौभाग्यमेकतां गतम्

kilaivaṃ śrūyate gāthā purāṇeṣu surottama / trailokyaṃ dahatas tubhyaṃ saubhāgyamekatāṃ gatam

हिन्दी अर्थ

वायु बंले---ऋषिगण जो सूक्ष्म दर्शी असामान्य चरित्रवल सम्पन्न द्विजाति बन्द, यज्ञादि का सुन्दर अनुष्ठान कर शास्त्र सम्मत विशेष-विशेष धर्मों का पालन करते हैं, वे सब देवताओं के साथ महलोंक में निवास करते हैं। मैंने पूर्व प्रसंग में जिन अतीत, भविष्य एवं वतंमान कालीन परम यश्वस्वों योदह मलुओं का वर्णन किया है, वे ऋषियों, देवताओं ग्न्धवों एवं राक्षसों के साथ प्रत्येक मन्वस्तरों

English

Whirling up suddenly, a violent wind of terrible nature envelops all those clouds in the sky.

अध्याय १९८

श्लोक 51

विष्णोर्वक्षःस्थलं प्राप्य तत्स्थितं चेति नः श्रुतम् ।पीतं तद्वक्षसस्त्रस्तदक्षेण परमेष्ठिना

viṣṇorvakṣaḥsthalaṃ prāpya tatsthitaṃ ceti naḥ śrutam / pītaṃ tadvakṣasastrastadakṣeṇa parameṣṭhinā

हिन्दी अर्थ

में पुनः पुनः जन्म धारण करते हैं ।!-३२। देवगण सप्तधि, मनुगण एवं पितर गण ये सभो धामिक विचारों द वाले ब्राह्मण, क्षत्रिय, बेश्यादि के साथ क्रमशः: अतीत होकर महलोंक में आश्रय ग्रहण करते हैं । अभिमान द

English

In that Ekdrnava (a single vast sheet of water) all the mobile and the immobile beings get dissolved. When a thousand cycles of four Yugas pass away, it is called a complete Kalpa.

अध्याय १९८

श्लोक 52

तस्मात् सतीति संजज्ञ इयमिन्दीवरेक्षणा ।यजतस्तस्य देवेश तव मानावखण्डनात्

tasmāt satīti saṃjajña iyamindīvarekṣaṇā / yajatastasya deveśa tava mānāvakhaṇḍanāt

हिन्दी अर्थ

रहित, सत्यवादी, योगपरायण, श्रोतस्माते कर्मो में श्रद्धा रखनेवाले, वर्णाश्रमाचार में निष्ठावान् ब्राह्मणादि प्रजाओं के साथ वे लोग मन्वन्तर के समप्त हो जाने पर विधि निर्दिष्ट काल के बाद अपने अपने अधिकारों

English

Learned men call this vast sheet of water whereby the entire world is enveloped, Ekdrnava. All separate entities are lost sight of. Neither the surface of the Earth, nor the atmosphere, neither the wind nor the firmament is visible distinctly.

अध्याय १९८

श्लोक 53

जुहावाग्नौ तु सा देवी ह्यात्मानं प्राणसंज्ञिकम् ।आत्मानं भस्मसात्कृत्वा प्रालेयाद्रेस्ततः सुता

juhāvāgnau tu sā devī hyātmānaṃ prāṇasaṃjñikam / ātmānaṃ bhasmasātkṛtvā prāleyādrestataḥ sutā

हिन्दी अर्थ

से विनिबत्त होकर महलोंक में आश्रित होते हैं ।४-६। । ऋषियों ने पूछा--परम समर्थ मातरिश्वन् ! आप जिस मंहलोंक की चर्चा कर रहे हैं,

English

Objects of Parthiva (Earthly) nature, waters of the ocean and all Haima (i.e. of the elements of fire, Gold standing for Tejas) objects form one unit termed Salila (water).

अध्याय १९८

श्लोक 54

मेनकायां प्रभो जाता साम्प्रतं या ह्युमाभिधा ।अनादिनिधना देवी ह्यप्रतर्क्या सुरेश्वर

menakāyāṃ prabho jātā sāmprataṃ yā hyumābhidhā / anādinidhanā devī hyapratarkyā sureśvara

हिन्दी अर्थ

यावन्तश्चेव ते लोका दह्न्ते येन ते अ्रभो । एतन्नः कथय प्रीत्या त्वं हि बेत्थ पधातथम्. “पद एवमुक्तस्ततो वायुमुंनिभिविनयात्मभि: । प्रोवाच मधुरं वाक्यं यथातत्तवेन तत्त्ववित् आ

English

When only water is seen flowing hither and thither it is called Salila. When it stands covering the whole Earth, that (mass of) water is called Arnava (an ocean).

अध्याय १९८

श्लोक 55

यदि तुष्टो ऽसि देवेश ह्युमा मे वरदा यदि ।उभावप्यत्र वै स्थाने स्थितौ शूलाग्रमूलयोः

yadi tuṣṭo 'si deveśa hyumā me varadā yadi / ubhāvapyatra vai sthāne sthitau śūlāgramūlayoḥ

हिन्दी अर्थ

चतुर्दशव स्थानानि वणितानि महपिभिः । लोकाख्यानि तु यानि स्युयंषु तिष्ठन्ति सानवाः. सप्त तेषु कृतान्याहुरकृतानि तु सप्त वे । भ्रादयास्तु संख्याता: सप्त लोकाः कृतास्त्विह

English

At the end of that period of a thousand sets of four Yugas, one day of Brahma passes off. During the whole of that period the entire universe becomes sub-merged in the Ekamava. All the activities of Prajapati (Brahma) cease (to exist).

अध्याय १९८

श्लोक 56

अवतारो यत्र तत्र संस्थितिं वै ततः कुरु

avatāro yatra tatra saṃsthitiṃ vai tataḥ kuru

हिन्दी अर्थ

पृथिवी चान्तरिक्षं च दिव्यं यच्च महः स्मृतम् । स्थानास्येतानि चत्वारि स्पृतान्याणंवकानि च

English

When in that Ekamava the mobile and the im¬ mobile beings become annihilated, Brahma assumes this form— with thousand eyes, thousand feet, thousand heads, beautiful mind, thousand legs, thousand eyes and faces, thousand speeches (tongues), thousand arms and the lustre of the Sun. He is called the first Prajapati and the Purusa in the path of Trayl (three Vedas).

अध्याय १९८

श्लोक 57

श्रीमार्कण्डेय उवाच: तेनैवमुक्ते सहसा कृत्वा भूमण्डलं द्विधा ।निःसृतौ शूलमूलाग्राल्लिङ्गार्चाप्रतिरूपिणौ

śrīmārkaṇḍeya uvāca: tenaivamukte sahasā kṛtvā bhūmaṇḍalaṃ dvidhā / niḥsṛtau śūlamūlāgrālliṅgārcāpratirūpiṇau

हिन्दी अर्थ

क्षयातिशययुक्तानि तथा युक्तानि बक्ष्यते च्म्यहम् । यानि नेमित्तिकानि स्थुस्तिष्ठन्त्याभृतसंप्लवम् है जनस्तपत्र सत्य च स्थानान्येतानि त्रीणि तु । ऐकान्तिकानि सत्त्वानि तिष्ठन्तीहाइडप्रसंगयभात् स्वस्तृतीयस्तु विज्ञेयश्रतुर्थों व॑ महः स्मृत: । जनस्तु पञचमो लोकस्तपः षष्ठो विभाव्यते

English

He has brilliant complexion like the Sun. He is the protector of the worlds. He is single and the first Turdsdf (fore- staller of the enemies). He becomes Hiranyagarbha, the great Purusa. He goes beyond the darkness (of ignorance).

अध्याय १९८

श्लोक 58

प्रद्योतयद्दिशः सर्वा लिङ्गं मूले प्रदृश्यते ।वामतः प्रतिमा देवी तदा शूलेश्वरी स्थिता

pradyotayaddiśaḥ sarvā liṅgaṃ mūle pradṛśyate / vāmataḥ pratimā devī tadā śūleśvarī sthitā

हिन्दी अर्थ

वह किस प्रकार का है, हम समझते हैं, प्रत्येक लोकों में बहुसंख्यक पुण्यात्मा जब निवास करते होंगे, अतः उन महात्माओं के निवास के जितने लोक हैं और वे जिस प्रकार जलाये जाते हैं, उन्हें आप बतलावें, क्योंकि आप हम सबों पर प्रसन्न हैं, और इन सब बातों को यथार्थ रूप में जानते हैं। विनत मुनियों के इस प्रकार कहने पर तत्ववेत्ा वायु ने मधुर बाणी में कहा ।७-६। क्‍ ्ि

English

At the end of the period of a thousand cycles of four Yugas when everything around is flooded with water, the lord becomes desirous of sleep and creates a dark night without light.

अध्याय १९८

श्लोक 59

विलोभयन्ती च जगद्भाति पूरयती दिशः ।दृष्ट्वा कृताञ्जलिपुटः स्तुतिं चक्रे द्विजोत्तमः

vilobhayantī ca jagadbhāti pūrayatī diśaḥ / dṛṣṭvā kṛtāñjalipuṭaḥ stutiṃ cakre dvijottamaḥ

हिन्दी अर्थ

द वायु बले--ऋषिवन्द ! महृतियों ने ऐसे चौदह लोकों को बतलाया है, जिनमें पृष्यात्मा मानवगण निवास करते हैं, उनमें स्रात को कृत और सात को अक्ृत लोक कहते हैं । भू आदि सार लोक कृत हैं (१०-११। सात प्राकृब लोक अकृत कहे जाते हैं। स्थानाभिमानी देवताओं के साथ कृत लोकों की स्थिति है। पृथ्वी, भन्तरिक्ष, दिव्य और मह--ये चारों लोक आण्णंविक नाम से प्रसिद्ध हैं। ये क्षय, और वृद्धिवाले लोक कहे जाते हैं।जो लोक क्षय वृद्धि रहित हैं उनके विषय में बतला रहा हूं । नेमित्तिक लोक जितने हैं, वे प्रलय पर्यन्त स्थिर रहने वाले हैं। जन, तप, और सत्य--ग्रे तीन लोक एकान्तिक और सत्वगरुण सम्पन्न हैं, इनकी स्थिति कल्प पयेन्‍्त रहती है। १९-१५ सात व्यक्त कहे जाने वाले... लोकों का व्णंव कर रहा हुं, उन सब में प्रथम भूलोक है, दूसरा भुव, तंसरा स्वर, चौथा मह, पाँचवाँ

English

When Brahma lies down with the four types of creation withdrawn in the Ania (Cosmic Egg), the Seven Great Sages see that noble-souled Kala (god of Time or Death).

अध्याय १९८

श्लोक 60

माण्डव्य उवाच: त्वमस्य जगतो माता जगत्सौभाग्यदेवता ।न त्वया रहितं किंचिद् ब्रह्माण्डे ऽस्ति वरानने

māṇḍavya uvāca: tvamasya jagato mātā jagatsaubhāgyadevatā / na tvayā rahitaṃ kiṃcid brahmāṇḍe 'sti varānane

हिन्दी अर्थ

जन, छठ तप और सातवाँ सत्य है । इनके बाद निरालोक ( घोर अन्धकार है )। ब्रह्मा ने भूः--ऐसा

English

At that time they move about in Janaloka. By means of penance they have gained (divine) vision. They are the noble souls—Bhrgu and others. Their characteristics have already been recounted by me.

अध्याय १९८

श्लोक 61

प्रसादं कुरु धर्मज्ञे मम त्वाज्ञप्तुम् अर्हसि ।ईदृशेनैव रूपेण केषु स्थानेषु तिष्ठसि ।प्रसादप्रवणा भूत्वा वद तानि महेश्वरि

prasādaṃ kuru dharmajñe mama tvājñaptum arhasi / īdṛśenaiva rūpeṇa keṣu sthāneṣu tiṣṭhasi / prasādapravaṇā bhūtvā vada tāni maheśvari

हिन्दी अर्थ

अय॑ साथइलोको नाष्ति ग. पुस्तके । सत्यस्तु सप्तमो लोकों निरालोकस्ततः परम् । भूरिति व्याहते पूर्व भूलेकिश्व॒ ततोइमवतू.

English

With their divine vision only they see the seven worlds—Satya and others. They visualize Brahma during the great nights of Brahma.

अध्याय १९८

श्लोक 62

श्रीदेव्युवाच: सर्वगा सर्वभूतेषु द्रष्टव्या सर्वतो भुवि ।सर्वलोकेषु यत्किंचिद्विहितं न मया विना

śrīdevyuvāca: sarvagā sarvabhūteṣu draṣṭavyā sarvato bhuvi / sarvalokeṣu yatkiṃcidvihitaṃ na mayā vinā

हिन्दी अर्थ

स्याहारेस्त्रिभिरेतंस्तु ब्रह्मा लोकमकल्पयत् ततो भूः पाथिवो लोकोह्मन्तरिक्षं भुचः स्पृतम्॒

English

The Seven Sages see him at the time of his sleep. He is cited to be the first Paramesthin, because he stays beyond ail Kalpas.

अध्याय १९८

श्लोक 63

तथापि येषु स्थानेषु द्रष्टव्या सिद्धिम् ईप्सुभिः ।स्मर्तव्या भूतिकामेन तानि वक्ष्यामि तत्त्वतः

tathāpi yeṣu sthāneṣu draṣṭavyā siddhim īpsubhiḥ / smartavyā bhūtikāmena tāni vakṣyāmi tattvataḥ

हिन्दी अर्थ

सस्‍्वर्लोको वे दिवं होतत्पुराणे निश्चय गतम् । भुतस्याधिपतिश्चाग्नितसस्‍्तो भुतपतिः स्घुत:.. वायुर्भुवस्थाधिपतिस्तेन वायुर्भुवस्पतिः भव्यस्थ सुर्योड्घिपतिस्तेन सुर्यो दिवस्पतिः धर२२ महेतिव्याहतेनेव महलोंकस्ततोइभवत् । विनिवत्ताधिकाराणां देवानां तत्न वे क्षयः ॥२२रे

English

In the beginning of every Kalpa, he becomes the creator of all living beings again and again. After withdrawing all creations within himself Prajapati (creates them again).

अध्याय १९८

श्लोक 64

वाराणस्यां विशालाक्षी नैमिषे लिङ्गधारिणी ।प्रयागे ललिता देवी कामुका गन्धमादने

vārāṇasyāṃ viśālākṣī naimiṣe liṅgadhāriṇī / prayāge lalitā devī kāmukā gandhamādane

हिन्दी अर्थ

जनस्तु पथ्चमो लोकस्तस्माज्जायन्ति वे जनाः । तासां स्वायंभुवाद्यानां प्रजानां जननाज्जनः

English

The excessively brilliant one, the creator of every¬ thing takes (withdraws) everything into himself and thereafter stays within the single vast sheet of water for the whole of that night.

अध्याय १९८

श्लोक 65

मानसे कुमुदा नाम विश्वकाया तथा ऽपरे ।गोमन्ते गोमती नाम मन्दरे कामचारिणी

mānase kumudā nāma viśvakāyā tathā 'pare / gomante gomatī nāma mandare kāmacāriṇī

हिन्दी अर्थ

यास्‍्ता: स्वायंभुवाद्या हि पुरस्तत्परिकीतिताः । कल्पदस्धे तदा लोके प्रतिष्ठति + तदा तप: उच्चारण कर भूलोक की, भुवः-ऐसा उच्चारण कर भुव्लोक की, स्वः ऐसा उच्चारण कय स्वर लोक की सृष्टि की। भूर्भूवः स्वः- इन्हीं तीतों महाव्यादृतियों से उक्त तीनों की उत्पत्ति हुई है।भू की दाधिव लोक नाम से, भूव की अन्तरिक्ष लोक नाम से, और स्वर की स्वर्ग लोक नाम से प्रसिद्ध हैं-: ढेसा पुराणों में निश्चित किया गया है । अग्नि भूतों का अर्थात् पृथ्वीस्थ समस्त पदार्थों का

English

Then, when the night passes off, Prajapati wakes U p. He is induced (in his mind) with the desire for creation once again.

अध्याय १९८

श्लोक 66

मदोत्कटा चैत्ररथे हयन्ती हास्तिने पुरे ।कान्यकुब्जे स्थिता गौरी रम्भा ह्यमलपर्वते

madotkaṭā caitrarathe hayantī hāstine pure / kānyakubje sthitā gaurī rambhā hyamalaparvate

हिन्दी अर्थ

अधिपति है, इसी कारण उसे भूतपति के नाम से लोग जानते हैं ।१६-२१। अन्तरिक्ष का अधिपति वायु है, इसी कारण से वायु भुवस्वति के नाम से प्रसिद्ध हैं। भव्य अर्थात् स्वर लोक का अधिपति सूर्य है, इसी कारण वह दिवस्पति नाम से विख्यात है। ब्रह्मा के महा' ( महान् )-ऐसा उच्चारण करने पर महलोंक की सृष्टि हुई थो, देवषण अपने अधिकार काल से विनिव॒त्त होकर महलोंक में जाकर अवस्थान करते हैं ।

English

At the time of the Naimiltika (periodic) dissolution (by Brahma), when Prajapati grows calm, inthecoursc of with¬ drawal effected all the living beings get separated from their bodies. All the Bhutas become burnt by the rays of the Sun; even gods, sages and the excellent Manus (are affected by it in that water of flood.). In that collision all the living beings beginning with Gandharvas and ending with Pisacas who have not been scorched in the beginning of the Kalpa resort to Jana- loka.

अध्याय १९८

श्लोक 67

एकाम्रके कीर्तिमती विश्वां विश्वेश्वरे विदुः ।पुष्करे पुरुहूता च केदारे मार्गदायिनी

ekāmrake kīrtimatī viśvāṃ viśveśvare viduḥ / puṣkare puruhūtā ca kedāre mārgadāyinī

हिन्दी अर्थ

अनग लोक उक्त लोंकों में पाँचवाँ है, इसी लोक से स्वायम्भुब मनु भा दि की प्रजाओं का जनन ( उत्पत्ति ) झोता है, अतः उसको जनलौक नाम से प्रसिद्धि है। पूर्व प्रसंग में स्वायम्भुव मनु आंदि की जिन प्रजाओं का बिस्तार पूर्वकएाक वर्णन किया जा चुका है वे सब कल्प के अवसान काल में, जबकि समस्त लोक दः्ध हो जाते हैं, तपोलोक में आश्रय भ्राप्त करते हैं, क्योंकि यह उस समय भी विद्यमान रहता है ।२३-२१५। ऋषभ पर्थ सनत्कुमारादि देवगण जो परम ब्रह्मचा सै एवं ऊध्वेरेता हो गये हैं, कठोर तपस्या ढवारा आत्मा को जिम्होंने वष् में कर लिया है, वे जिस लौक में अवस्थित रहते हैं उसको तपोलोक कहते हैं-यह भी तपोलोक का एक लक्षण है, सत्य--यद्द ब्रह्मा का एक दाब्द हैं, इसका प्रयोग सत्ता ( अस्तित्व ) मात्र में होता

English

The living beings of the lower strata of animals and those that have fallen into hell—all those become burnt up and get absolved from sins. As long as the universe is submerged in water, they abide in Janaloka.

अध्याय १९८

श्लोक 68

नन्दा हिमवतः प्रस्थे गोकर्णे भद्रकर्णिका ।स्थानेश्वरे भवानी तु बिल्वके बिल्वपत्त्रिका

nandā himavataḥ prasthe gokarṇe bhadrakarṇikā / sthāneśvare bhavānī tu bilvake bilvapattrikā

हिन्दी अर्थ

+ धनुस्चिह्लास्तर्गतग्रन्थो ह पुस्तके। . +अत्र परस्मपदमार्षैम् ।

English

When the night of Brahma whose source of origin is the Unmanifest, dawns again all those - living beings are born again.

अध्याय १९८

श्लोक 69

श्रीशैले माधवी नाम भद्रे भद्रेश्वरीति च ।जया वराहशैले तु कमला कमलालये

śrīśaile mādhavī nāma bhadre bhadreśvarīti ca / jayā varāhaśaile tu kamalā kamalālaye

हिन्दी अर्थ

गन्धवर्पाप्सरसो यक्षा गुहाकास्तु सराक्षसा: । सर्वभूतपिशाचाश्न नागाश्न सह सानुषे: ॥ स्वलॉकिवासिनः सर्वे देवा भुवि निवासिनः

English

The sages, Manus, Devas and all the four kinds of living beings (are alike in this respect). Those Siddhas too die and are born.

अध्याय १९८

श्लोक 70

रुद्रकोट्यां तु कल्याणी काली कालञ्जरे तथा ।महालिङ्गे तु कपिला माकोटे मुकुटेश्वरी

rudrakoṭyāṃ tu kalyāṇī kālī kālañjare tathā / mahāliṅge tu kapilā mākoṭe mukuṭeśvarī

हिन्दी अर्थ

मरातो मातरिश्वानों रुद्रा देवास्तथाश्विनों। अनिकेतान्तरिक्षास्ते भुवर्लोॉक्या दिवौफसः ३२६ आदित्या ऋभवो विश्वे साध्याश्र पितरस्तथा । ऋषयो5ड्रिरसश्वेव भुवलोंकं समाक्चिता:..

English

Just as die Sun is rising and setting in this world (it happens regularly), so also the living beings are seen to have birth and destruction.

अध्याय १९८

श्लोक 71

शालिग्रामे महादेवी शिवलिङ्गे जलप्रिया ।मायापुर्यां कुमारी तु संताने ललिता तथा

śāligrāme mahādevī śivaliṅge jalapriyā / māyāpuryāṃ kumārī tu saṃtāne lalitā tathā

हिन्दी अर्थ

एते वेमानिका वेवास्ताराग्रहनिवासिन: । इत्येते क्रमशः प्रोक्ता ब्रह्मग्याहारसंभवाः भूलॉकप्रथमा लोका महदन्ताश्र ते स्मृताः। आरभ्यन्ते तु तन्मान्रे: शुद्धास्तेषां परस्परम् ३२ शुक्राद्याश्राक्षुषान्ताश्र ये व्यतीता भुवं शिता: । महलोकिश्चतुर्थस्तु तस्मिस्ते कल्पवासिन: ॥

English

All the living beings come out and re-enter the creator of subjects, Brahma, the great lord, Prajapati of great Yogic power.

अध्याय १९८

श्लोक 72

उत्पलाक्षी सहस्राक्षे हिरण्याक्षे महोत्पला ।गयायां विमला नाम मङ्गला पुरुषोत्तमे

utpalākṣī sahasrākṣe hiraṇyākṣe mahotpalā / gayāyāṃ vimalā nāma maṅgalā puruṣottame

हिन्दी अर्थ

हत्येते क्रमशः प्रोक्ता ब्रह्मव्याहारसंभवा:.. द

English

The great Deva who is both manifest and unmanifest

अध्याय १९८

श्लोक 73

विपाशायाममोघाक्षी पाटला पुण्ड्रवर्धने ।नारायणी सुपार्श्वे तु त्रिकूटे भद्रसुन्दरी

vipāśāyāmamoghākṣī pāṭalā puṇḍravardhane / nārāyaṇī supārśve tu trikūṭe bhadrasundarī

हिन्दी अर्थ

मुलोकप्रथमा लोका मह॒दसश्ताश्च ये स्मृता:। तास्सवस्सप्त सुर्यास्ते अचिभिनिर्दहन्ति वे रेड है, इसी कारण ब्रह्मलोक सत्यलोक के नाम से प्रसिद्ध है, यह परम प्रकाद्भय लोक उक्त सातों लोकों में अन्तिम अर्थात् सातवाँ है। समस्त देवगण गष्धवोँ, अप्सराओं, यक्षों, और गुह्मकों के साथ स्वलॉक में निवास करते हैं। सर्प, भूत, पिशाच, नाग एवं मनुष्यगण पृथ्वी लोक के निवासी हैं ।२६-२८। मरुद्गण, वायुगण, रुद्रगण कुछ देवगण, दोनों अध्विनीकुमार ये यथ्पि किसी निकेतन में निवास करने वाले नहीं हैं; पर इनका प्रमुख

English

It is he by whom the waters are created at first the waters that reach the surface of the earth along the path taken before.

अध्याय १९८

श्लोक 74

विपुले विपुला नाम कल्याणी मलयाचले ।कोटवी कोटितीर्थेषु सुगन्धा गन्धमादने

vipule vipulā nāma kalyāṇī malayācale / koṭavī koṭitīrtheṣu sugandhā gandhamādane

हिन्दी अर्थ

निवास स्थल भूवलोक है। स्वर्ग लोक में निवास करने वाले आदित्य गण, ऋभगण, विश्वेदेव गण, साध्यनगण पितर गण, एवं अंगिरा गोत्रोय ऋषिगण, भी, भुवर्लोक में आश्रय प्राप्त करते हैं। ये सभी देवादियण विमानों में चढ़ कर तराओं एवं ग्रहपिण्डों का.आश्रय ग्रहण कर भुवर्लोक में निवास करते हैं । ब्रह्मा के भभुवस्स्वरादि शब्दों के उच्चारणों द्वारा निर्मित लोकों की चर्चा आप लोगों से कर चुका । भुलोंकादि महलों-

English

Just as mortal beings revolve through those ( Tonis or births) due to their auspicious and inauspicious activities, so they move upwards and downwards due to the (pull of) the Sun, as transfer from one body to another is inevitable.

अध्याय १९८

श्लोक 75

गोदाश्रमे त्रिसन्ध्या तु गङ्गाद्वारे रतिप्रिया ।शिवचण्डे सभानन्दा नन्दिनी देविकातटे

godāśrame trisandhyā tu gaṅgādvāre ratipriyā / śivacaṇḍe sabhānandā nandinī devikātaṭe

हिन्दी अर्थ

कास्त ( भूलोक से लेकर महलोंक तक ) जिन लोकों कौ चर्चा ऊपर की गई है, वे सब तस्मात्राओं से आरम्भ किये गये हैं ये परस्पर शुद्ध हैं, एक दूसरे से मिले हुये नहीं हैं। शुक्र से लेकर चाक्षुष मनु पर्य॑स्त, जो प्रृथ्वी लोक में आश्रम प्राप्त करनेवाले व्यतीत हो चके हैं, वे भी कल्पान्त के अवसर पर इस चतुर्थ महलोंक में जाकर अवस्थान करते हैं । ब्रह्मा की महा व्याहृतियों से उत्पन्न समध््त लोकों का विवरण क्रम पूर्वक कह चुका ।२६९-३३। प्रलय में भू से लेकर महलोंक तक जब सभी लोक सात सूर्य की रद्िमयों द्वारा दग्ध हो जाते हैं, तब मरीचि, कश्यप, दक्ष, स्वायम्भुव, अज़्िरा, भृगु, पुलस्त्य, पुलह ऋतु आदि प्रजापति गण एक साथ जन लोक में निवास करते हैं। कऋभ एवं सनत्कुमारादि नि;सत्त्म, निर्मम ऊध्वेरेता संसार

English

J So also Devas, Manus, Prajesas and other Siddhas who have attained heaven naturally assume the forms of righteous living beings on being subjected to the inevitable future.

अध्याय १९८

श्लोक 76

रुक्मिणी द्वारवत्यां तु राधा वृन्दावने वने ।देवकी मथुरायां तु पाताले परमेश्वरी

rukmiṇī dvāravatyāṃ tu rādhā vṛndāvane vane / devakī mathurāyāṃ tu pātāle parameśvarī

हिन्दी अर्थ

+एतदर्ध क. पुस्तके नास्ति ।

English

Henceforth, I shall recount the period of dissolution of all living beings (Abhutasamplava). O Brahamanas, the Manvantaras have already been explained by me along with Prajnanisarga 1 2 (creation through intellect.) and the fourteen Marius.

अध्याय १९८

श्लोक 77

चित्रकूटे तथा सीता विन्ध्ये विन्ध्यनिवासिनी ।सह्याद्रावेकवीरा तु हरिश्चन्द्रे तु चण्डिका

citrakūṭe tathā sītā vindhye vindhyanivāsinī / sahyādrāvekavīrā tu hariścandre tu caṇḍikā

हिन्दी अर्थ

“हैहै९ .. जायुपुराणम् घोगं तपश्च सत्यं च समाधाय तदा55त्मनि । घष्ठे काले निवतंन्ते तत्तदाह (?) विपयेये

English

All the Manvantaras consist of a thousand cycles of four Yugas. When two thousand cycles of four Yugas are com¬ pleted it is said that a Kalpa is finished entirely.

अध्याय १९८

श्लोक 78

रमणा रामतीर्थे तु यमुनायां मृगावती ।करवीरे महालक्ष्मी रूपादेवी विनायके

ramaṇā rāmatīrthe tu yamunāyāṃ mṛgāvatī / karavīre mahālakṣmī rūpādevī vināyake

हिन्दी अर्थ

सत्यस्तु सप्तमो लोकों ह्ापुनर्मागंगासिणाम् । ब्रह्मलोकः समाख्यातों ह्मप्रतीघातलक्षण: ३३६

English

This should be known as one day of Brahma. Under¬ stand its calculation. The time taken to utter a short syllable or to wink once is called Nimesa. It is equal to a Matra.

अध्याय १९८

श्लोक 79

आरोग्या वैद्यनाथे तु महाकाले महेश्वरी ।अभयेत्युष्णतीर्थे तु मृगी वा विन्ध्यकन्दरे

ārogyā vaidyanāthe tu mahākāle maheśvarī / abhayetyuṣṇatīrthe tu mṛgī vā vindhyakandare

हिन्दी अर्थ

सुर्यक्षवान्तरं यच्च स्वर्गलोको दिवः स्मृतः । प्रुवाज्जनान्तरं यच्च महलीकः स उच्यते . ४१ विख्याताः सप्त लोकार्तु तेषां वक्ष्यासि सिद्धयः । भू्लोकवासिनः सर्वे अन्नादास्तु रसात्मकाः भुवे स्वगें च ये से सोमपा आज्यपाश्च ते । चतुर्थे येषपि वर्तन्ते महलोंक समाथ्षिताः ४३ विज्ञेया मानसी तेषां सिद्धिवें पश्चसक्षणा । सद्यश्चोत्पद्यते तेषां मनसा सर्वबसोप्सितम्

English

According to another calculation seven and a half measures (Praslhas) of water constitute a Lava. 3 Thirty Lavas should be known as a Kala and thirty Kalas, one Muhurta.

अध्याय १९८

श्लोक 80

माण्डव्ये माण्डुकी नाम स्वाहा माहेश्वरे पुरे ।छागलिङ्गे प्रचण्डा तु चण्डिकामरकण्टके

māṇḍavye māṇḍukī nāma svāhā māheśvare pure / chāgaliṅge pracaṇḍā tu caṇḍikāmarakaṇṭake

हिन्दी अर्थ

एते देवा यजस्ते वे यज्ञः सबें: परस्परम् । अतोतास्वर्तमानांश्व वतेमानाननागतान् ४४५

English

Thirty such Muhurtas make one day and one night or nine hundred Kalas make one day and one night. 4

अध्याय १९८

श्लोक 81

सोमेश्वरे वरारोहा प्रभासे पुष्करावती ।वेदमाता सरस्वत्यां पारा पारातटे मुने

someśvare varārohā prabhāse puṣkarāvatī / vedamātā sarasvatyāṃ pārā pārātaṭe mune

हिन्दी अर्थ

विरागी ऋषिगण तपो लोक में निवास करते हैं। सावर्णादि चौदह मनु गणों के अधिकार काल की पुन- रावृत्ति इसी तपोलोक से कही जाती है। उस महान लोक विनाश काल के अवसर पर जन लोकादि निम्न प्ैणी के लोकों में निवास करनेवाले प्राणिवुन्द अपने अपने योग, तप, सत्य आदि का आत्मा में समाधान करके उस तपोलोक में आश्रय ग्रहण करते हैं ३४-३८। सत्य सातवाँ लोक है, वहाँ जाकर पुनरावत्ति नहीं होती इस सत्य लोक का कभी विनाश जलहीं होता-“इसी का दूसरा नाम तह लोक भी है, परिमाणों के अनुसार भूलोक मध्यवर्ती माना जाता है, भूमि तल से लेकर सूर्य पर्यन्त भुवलाँक को स्थिति कही जाती है, सुर्य॑ से लेकर भ्र्व पर्येन्‍्त स्वर्ग लोक की स्थिति है, इसे दिव लोक भी करते हैं। भव से लेकर जनलोक पयेन्‍त महलोंक है, इसी प्रकार अन्यान्य लोकों की भी स्थिति है। अब उन परम विख्यात सातों लोकों की

English

Obscure. So is the corresponding text in Bd. 41.207.

अध्याय १९८

श्लोक 82

महालये महाभागा पयोष्ण्यां पिङ्गलेश्वरी ।सिंहिका कृतशौचे तु कर्तिके चैव शांकरी

mahālaye mahābhāgā payoṣṇyāṃ piṅgaleśvarī / siṃhikā kṛtaśauce tu kartike caiva śāṃkarī

हिन्दी अर्थ

सिंद्धियों की चर्चा कर रहा हूँ। भूलोक में वास करनेवाले सब अन्नभक्षी रसास्वादी हैं, भुवर्लोक में निवास करनेवाले सोमपायी हैं. अर्थात् वे सोम का पान करते हैं, स्वर्ग लोक निवासियों का आहार आज्य पान है। जो चतुर्थ महलोंक से निवास करते हैं, उनकी पाँच मानसिक सिद्धियाँ कही जाती हैं, मन में सद्धुल्प मात्र करने से उन्हें समस्त मनौजञांछित सिद्धियाँ प्राप्त हो जाती है ।३६-४४। समस्त देवगण सभी प्रकार यज्ञों का

English

Prajdniiarga 'creation of subjects' in Bd.P.v.209.

अध्याय १९८

श्लोक 83

उत्पलावर्तके लोला सुभद्रा शोणसङ्गमे ।मता सिद्धवटे लक्ष्मीस् तरंगा भारताश्रमे

utpalāvartake lolā subhadrā śoṇasaṅgame / matā siddhavaṭe lakṣmīs taraṃgā bhāratāśrame

हिन्दी अर्थ

अनुष्ठान करके परस्पर सन्तुष्टि लाभ करते हैं । वर्तमान देव अतोतकालीन देवताओं के लिए भविष्य एकशततमो5्याय! . हैथे७

English

Perhaps it indicates that the time taken by so much of water to drip through the hole in the mechanical device used to calculate time, is one Lava.

अध्याय १९८

श्लोक 84

जालन्धरे विश्वमुखी तारा किष्किन्धपर्वते ।देवदारुवने पुष्टिर्मेधा काश्मीरमण्डले

jālandhare viśvamukhī tārā kiṣkindhaparvate / devadāruvane puṣṭirmedhā kāśmīramaṇḍale

हिन्दी अर्थ

प्रथमानस्तरैरिष्ट्वा अस्तराः सांप्रतेः पुनः । निवर्तंतीत्यासंबन्धोइतीते देवगणे ततः (? )

English

The reading here of vyadhikdni Satdni sat should be emended as iryadhikdni etc. meaning 'six (hundred) increased by three hundred.

अध्याय १९८

श्लोक 85

भीमादेवी हिमाद्रौ तु पुष्टिर्वस्त्रेश्वरे तथा ।कपालमोचने शुद्धिर्माता कायावरोहणे

bhīmādevī himādrau tu puṣṭirvastreśvare tathā / kapālamocane śuddhirmātā kāyāvarohaṇe

हिन्दी अर्थ

विनिवृत्ताधिकाराणां सिद्धिस्तेषां तु मानसी । तेषां तु मानसोक्ञेया शुद्धा सिद्धिपरम्परा (४७ उक्ता लोकाश्व चत्वारो जनस्थानुविधिस्तथा । समासेन मया विध्रा भूयर्तं वर्तयामि वः ४८ पर्व ते संप्रसुयन्ते ब्रह्मणो सनसा इह । ततः प्रजा: प्रतिष्ठाप्प जनमेदा55श्रयन्ति ते) ४० कहपदाहप्रदोप्तेषु तदा कालेषु तेषु वे । भ्रादिषु महान्तेषु भशं व्याप्तेष्वथारिनिना ५१ शिखा संवर्तेका ज्ञेया प्राप्नुवन्ति सदा जनाः यामादयों गणाः सर्वे महलोॉकिनिवासिन:ः ३४५२ महलकिषु दीप्तेषु जनमेवा55श्र यस्ति ते । सर्वे सुक्ष्मशरीरास्ते तत्रस्थास्तु भविस्त ते ..

English

The movement of the Moon and the Sun should be known by counting these: Fifteen Nimesas make one Kastha. Thirty Kasthas make one Kala.

अध्याय १९८

श्लोक 86

शङ्खोद्धारे ध्वनिर्नाम धृतिः पिण्डारके तथा ।काला तु चन्द्रभागायामच्छोदे शक्तिधारिणी

śaṅkhoddhāre dhvanirnāma dhṛtiḥ piṇḍārake tathā / kālā tu candrabhāgāyāmacchode śaktidhāriṇī

हिन्दी अर्थ

तेषां ते तुल्यसामर्थ्यास्तुल्यभूतिधरास्तथा । जनलोके विंवतेन्ते यावत्संप्लवते जगत् ५४ ब्युष्टायां तु रजस्यां वे ब्रहाणोउव्यक्तयोनिनः । अहरादौ प्रसूयन्ते पूर्वव॒तक्तमशस्टिवह 8

English

Thirty Kalas make one Muhurta. Some say that Kala is a tenth part of a Muhurta. Forty Kalas arc termed (by others) one Muhurta.

अध्याय १९८

श्लोक 87

वेणायाममृता नाम बदर्यामुर्वशी तथा ।ओषधी चोत्तरकुरौ कुशद्वीपे कुशोदका

veṇāyāmamṛtā nāma badaryāmurvaśī tathā / oṣadhī cottarakurau kuśadvīpe kuśodakā

हिन्दी अर्थ

स्कालीन देव वर्तमान देवताओं के लिए। इस प्रकार परवर्ती काल में उत्पन्न होनेवाले अपने पूव॑ वर्ती की सन्तुष्टि के लिये इन यज्ञादिकों का अनुष्ठान करते हैं। देवगणों के व्यातीत होने पर उनका सम्बन्ध निवृत्त दो जाता है। उन महरलोंक निवासियों का अधिकार काल जब समाप्त हो जाता है, उस समय भी उनकी परम विशुद्ध मानसी सिद्धियों की परम्परा उनमें विद्यमान जाननी चाहिए । विप्रवन्द ! आप लोगों को जनलोक तथा उससे निम्नवर्ती चारों लोकों की चर्चा संक्षेप में सुना चुका पुनः उसी का विस्तौर पवेक वर्णन कर रहा हैं ।४५-४८५। द

English

Muhurtas and Lavas arc determined (thus) by those who know the measure. (Instead of the above) through water also time is measured. Thirteen Palas of water make a Prastha according to the calculation current in Magadha. Four Prasthas of water make one Nalika Ghata (a jar with a tube fitted in).

अध्याय १९८

श्लोक 88

मन्मथा हेमकूटे तु कुमुदे सत्यवादिनी ।अश्वत्थे वन्दिनीका तु निधिर्वैश्रवणालये

manmathā hemakūṭe tu kumude satyavādinī / aśvatthe vandinīkā tu nidhirvaiśravaṇālaye

हिन्दी अर्थ

वायु ने कहा--ऋषिगण मरीचि, कश्यप, दक्ष, वसिष्ठ, अज्िरा भूगु, पुलस्त्य पुलहह और ऋतु आदि ऋषिगण सर्व प्रथम ब्रह्मा के मानस पुत्रों के रूप में उत्पन्न होते हैं, और अपनी-अपनी प्रजाओं का विस्तार करके पुनः जनलोक का आश्रय लेते हैं ।४६-५०। कल्प के अवसान में संवतेक नामक अग्नि की प्रचण्ड ज्वाला से जब भू भुव स्वर मह-ये चारो लोक प्रज्वलित हो उठते हैं, इनमें सब ओर से अग्नि फैल जाती है,

English

The bottom plate of the device is four Angulas square. There are four holes in it, each of the size of a golden masa (the pulse, black gram). Two Nalika Ghatas of water flow through those holes in the period of a Muhurta. It is the same both in the day and in the night.

अध्याय १९८

श्लोक 89

गायत्री वेदवदने पार्वती शिवसन्निधौ ।देवलोके तथेन्द्राणी ब्रह्मास्ये तु सरस्वती

gāyatrī vedavadane pārvatī śivasannidhau / devaloke tathendrāṇī brahmāsye tu sarasvatī

हिन्दी अर्थ

तब महलोक निवासी यमांदि देवगण सूक्ष्म शरीर धारण कर जनलोक का आश्रय ग्रहण करते हैं, ओर तदुपरास्त वहीं पर निवास करने लगते हैं ।५१-५३। वहाँ पहुँच कर वे जनलोक निवाध्तियों के समान सामथ्यंशौल स्वहूपवान् एवं ऐश्वयंशाली हो जाते हैं और उसी रूप में जगत के महान विनाशकाल तक स्थिति रहते हैं। अव्यक्त योनि भगवान् ब्रह्म की महारजनी के व्यतीत होने पर जब पुनः उनके दिन का प्रारम्भ होता है न धनुश्चित्वान्तर्गतग्रन्थों ड. पुस्तके नास्ति ॥

English

Thanks to the special movement of the Sun, the maximum number of Kalas is six hundred and five in all the Rtus always. This is to be known as one human day. The Stellar day contains ten more. A human year is calculated through Savana months.

अध्याय १९८

श्लोक 90

सूर्यबिम्बे प्रभा नाम मात्ःणां वैष्णवी मता ।अरुन्धती सतीनां तु रामासु च तिलोत्तमा

sūryabimbe prabhā nāma mātḥṇāṃ vaiṣṇavī matā / arundhatī satīnāṃ tu rāmāsu ca tilottamā

हिन्दी अर्थ

पैदद वायुपुराणम्

English

It is decided in the scripture that a human year is one day and one night for the Devas. Through this day, the months, Ayanas and years should be calculated.

अध्याय १९८

श्लोक 91

चित्रे ब्रह्मकला नाम शक्तिः सर्वशरीरिणाम् ।शूलेश्वरी भृगुक्षेत्रे भृगौ सौभाग्यसुन्दरी

citre brahmakalā nāma śaktiḥ sarvaśarīriṇām / śūleśvarī bhṛgukṣetre bhṛgau saubhāgyasundarī

हिन्दी अर्थ

स्वायंभुवादयः सर्वे मरोच्यन्तास्तु साधका: । देवास्ते वे पुनस्तेषां जायन्ते निधनेष्चिह ४५६ देवान्वये देवता हि सप्त संभृतयः स्मृताः । व्यतीताः: कल्पजास्तेषां तिस्र: शिष्टास्तथा परे

English

Knowledge of this is arrived at by this method. The terms given are only indicative. Since Kala constitutes the basic unit dme is mentioned as Kala.

अध्याय १९८

श्लोक 92

एतदुद्देशतः प्रोक्तं नामाष्टशतमुत्तमम् ।अष्टोत्तरं च तीर्थानां शतमेतद् उदाहृतम्

etaduddeśataḥ proktaṃ nāmāṣṭaśatamuttamam / aṣṭottaraṃ ca tīrthānāṃ śatametad udāhṛtam

हिन्दी अर्थ

आवतंमाना देवास्ते क्रमेणेतेन स्वंशः । गत्वा जबं जबीभावं दशक्ृत्वः पुनः पुनः ५६ ततस्ते वे गणाः सर्वे दृष्ट्वा भावेष्वनित्यताम् । भाविनोर्थस्य च बलात्पुण्यास्यातिबलेन च

English

One day of Brahma is constituted by ten million two hundred and ninety thousand divine years.

अध्याय १९८

श्लोक 93

इदमेव परं विप्र सर्वेषां तु भविष्यति ।पठत्यष्टोत्तरशतं नाम्नां यः शिवसन्निधौ

idameva paraṃ vipra sarveṣāṃ tu bhaviṣyati / paṭhatyaṣṭottaraśataṃ nāmnāṃ yaḥ śivasannidhau

हिन्दी अर्थ

निवृत्तवृत्तयः सर्वे स्वस्था: सुमनसस्तथा । वेराजे तुपपद्चन्ते लोकमुत्सूज्य तज्जनम् . ततोहयेनव कालेन नित्ययुक्तास्तपस्विनः । कथनाच्चव धर्मंस्थ तेषां ते जज्ञिरेबन्चये

English

On hearing this, the sages were very much surprised. They asked Suta thereafter to make their knowledge clearer numerically.

अध्याय १९८

श्लोक 94

स मुच्यते नरः पापैः प्राप्नोति स्त्रियमीप्सिताम् ।स्नात्वा नारी तृतीयायां मां समभ्यर्च्य भक्तितः

sa mucyate naraḥ pāpaiḥ prāpnoti striyamīpsitām / snātvā nārī tṛtīyāyāṃ māṃ samabhyarcya bhaktitaḥ

हिन्दी अर्थ

इहोत्पन्नास्ततस्ते वे स्थानान्यापुरयन्त्युत । देवत्वे च ऋषित्वे च मनुष्यत्वे च सर्वशः 0७४६३ एवं देवगणाः सर्वे दशकृत्यों निवत्य वे । वेराजेष॒पपन्नास्ते दश तिष्ठन्ट्युपप्लवान् ६४ पूर्णे पुर्णे ततः कल्पे स्थित्वा वेराजके पुनः । ब्रह्म लोके विवतंन्ते पुर्पुर्वक़मेण तु

English

We wish to hear the magnitude of the period of dissolution on the basis of human calculation, briefly, consisting of small words and syllables.

अध्याय १९८

श्लोक 95

न सा स्याद्दुःखिनी जातु मत्प्रभावान्नरोत्तम ।नित्यं मद्दर्शने नारी नियताया भविष्यति

na sā syādduḥkhinī jātu matprabhāvānnarottama / nityaṃ maddarśane nārī niyatāyā bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

एस्मिस्म्रह्मलोके तु कल्पे वराजके गते । वेराज॑ पुरनप्येके कल्पस्थानमकल्पयन् . तब वे स्वायम्भुव आदि मनु, मरीचि आदि साधक ऋषिगण अपने-अपने पूृवंवर्ती पु्षों की मृत्यु के उपरान्त पूवक्रम से पुनर्जेन्म ग्रहण करते हैं ।५४-५६। तदनन्तर यमादि देवगण पूर्षकथित ज्येष्ठ कनिष्ठादि क्रम से जस्म ग्रहणं करते हैं । देववंद् में देवताओं की सात विभूतियों का स्मरण किया जाता है । उनमें से चारा कल्पज देवता व्यतीत हो चुके हैं, तीन शेष हैं। देवता भी उक्त क्रम से दस बार पुनः पुनः जन्म मरण को प्राप्त होकर

English

On hearing their words, lord Vayu endowed with d.vme attributes and celestial vision and engaged in the welfare ol the worlds spoke in brief.

अध्याय १९८

श्लोक 96

पतिपुत्रकृतं दुःखं न सा प्राप्स्यति कर्हिचित् ।मदालये तु या नारी तुलापुरुषसंज्ञितम्

patiputrakṛtaṃ duḥkhaṃ na sā prāpsyati karhicit / madālaye tu yā nārī tulāpuruṣasaṃjñitam

हिन्दी अर्थ

संसार के सभी पदार्थों एवं भावों में अनित्यता का दह्यंन करते हैं, तदनन्तर भावी की बलवत्ता से एवं अपने किये गए पुण्य कर्मों के प्रभाव से वे प्रशांत चित्त हो जाते हैं, और सभी कार्यों से विवत्त होकर स्वस्थ मन से इस जन लोक का परित्याग कर बैराज लोक को प्राप्त होते हैं ।१७-६१। तत्पश्चात् बहुत काल के उपरान्त नित्य योगाभ्यास परायण तपोनिष्ठ वे लोग धर्म कीतेन के प्रभाव से उन परम धा्िकों के वंश में जन्म ग्रहण

English

"The day and the night of Brahma have already been

अध्याय १९८

श्लोक 97

सम्पूज्य मण्डयेद् देवांल्लोकपालांश्च साग्निकान् ।सपत्नीकान्द्विजान्पूज्य वासोभिर् भूषणैस् तथा

sampūjya maṇḍayed devāṃllokapālāṃśca sāgnikān / sapatnīkāndvijānpūjya vāsobhir bhūṣaṇais tathā

हिन्दी अर्थ

करते हैं। और इस प्रकार उत्पन्न होकर देवत्व, ऋषित्व एवं मनुष्यत्व को प्राप्त कर उन उन स्थानों की पूर्ति करते हैं। सभी देवगण इस प्रकार दस बार जन्म ग्रहण करने के बाद वैराज नामक लोकों में आश्रय प्राप्त कर दस कल्प पयेन्त निवास करते हैं ।६२-६४॥। एक एक कल्प के पूर्ण होने पर वराज नामक लोकों में स्थित हो कर वे देवगण पूर्व पूर्व क्रम से ब्रह्म लोक स्थित होते हैं। वेराज के कल्पो के व्यतीत हो जाने पर वे . इस ब्रह्मलोक में निवास करते हैं । कुछ लोग वैराज लोक को कल्प पयंन्त स्थायी मानते हैं, इसी पूर्व कथित क्रमानुसार वे लोग अपने-अपने तप के प्रभाव से बराज लोक में जा जाकर वहाँ दस कल्प पयेश्त निवास कर ब्रह्मलोक को प्राप्त होते हैं । इस प्रकार वैराज लोक में जो लोग प्राप्त होते हैं. वे दस बार जन्म

English

The night and day of Brahma succeed each other. This successive period of night and day of the lord is what is called Abhulasainplava.

अध्याय १९८

श्लोक 98

भूतेभ्यस् तु बलिं दद्यादृत्विग्भिः सह देशिकः ।ततः प्रदक्षिणीकृत्य तुलामित्यभिमन्त्रयेत्

bhūtebhyas tu baliṃ dadyādṛtvigbhiḥ saha deśikaḥ / tataḥ pradakṣiṇīkṛtya tulāmityabhimantrayet

हिन्दी अर्थ

एवं पूर्वानृपुर्वेण ब्रह्मलोकगतेन व । एवं तेषु व्यतीतेषु तपसा परिकल्पिते ॥

English

It is called Abhutosamplava because whatever living beings there be whether mobile or immobile in the entire range of three worlds upto the elements ( bhiitas ) become merged.

अध्याय १९८

श्लोक 99

शुचिरक्ताम्बरो वा स्याद् गृहीत्वा कुसुमाञ्जलिम् ।नमस्ते सर्वदेवानां शक्तिस्त्वं परमा स्थिता

śuciraktāmbaro vā syād gṛhītvā kusumāñjalim / namaste sarvadevānāṃ śaktistvaṃ paramā sthitā

हिन्दी अर्थ

एवं देवयुगानोह व्यतीतानि सह्रशः । निधन ब्रह्मलोके तु गतानामृषिभिः सह ६८ न शक्‍्यमानृपृव्येण तेषां वक्तुं प्रविस्तरम् । अनादित्वाच्च कालस्य असंख्यानाच्च सर्वशः ॥

English

(Another explanation) Prajapati is called Bhuta because he exists at the very outset before all the subjects and creations. Everything floats and merges in Bliuta. Therefore the the final dissolution is called Abhutasamplava.

अध्याय १९८

श्लोक 100

साक्षिभूता जगद्धात्री निर्मिता विश्वयोनिना ।त्वं तुले सर्वभूतानां प्रमाणमिह कीर्तिता

sākṣibhūtā jagaddhātrī nirmitā viśvayoninā / tvaṃ tule sarvabhūtānāṃ pramāṇamiha kīrtitā

हिन्दी अर्थ

तवुपश्चुत्य वाक्यारथमरृषयः संशयान्विता: । सुतमाहुः पुराणज्ञ व्यासशिष्य॑ महामतिम् ७०

English

The word Abhutasariiplava is also used in the sense of permanency and deathlessness (?) The past, present and future subjects are calculated up to Aparardha* (infinite number) by means of divine number.

अध्याय १९८

श्लोक 101

कराभ्यां बद्धमुष्टिभ्यामास्ते पश्यन्नुमामुखम् ।ततो ऽपरे तुलाभागेन्यसेयुर् द्विजपुंगवाः

karābhyāṃ baddhamuṣṭibhyāmāste paśyannumāmukham / tato 'pare tulābhāgenyaseyur dvijapuṃgavāḥ

हिन्दी अर्थ

बैराजास्ते यदाहारा यत्सत्त्वाश्व यदाश्रया: । तिष्ठन्ति चेब यत्कालं तन्नो बृहि यधातथम्॒. तदुक्तमृषिभिर्वाक्यं श्रुत्वा लोकार्थतत्त्ववित् । सुतः पौराणिको वाक्य विनयेनेदमनब्नवीत् (७२

English

The maximum longevity (of Brahma) is mentioned as twice Parardha. This much is the period of stay of Aja (the

अध्याय १९८

श्लोक 102

द्रव्यमष्टविधं तत्र ह्यात्मवित्तानुसारतः ।मन्दशभूते विप्रेन्द्र पृथिव्यां यदधिष्ठितम्

dravyamaṣṭavidhaṃ tatra hyātmavittānusārataḥ / mandaśabhūte viprendra pṛthivyāṃ yadadhiṣṭhitam

हिन्दी अर्थ

ज० तबलनक-१- पक -स्‍मममनकथ का नीति य पल 4 -- पाशनकनननकाधीकिा : त»-ाऑआ «४०० "हा पान किक कप्तान जास्य मनबह मत ऑि्कलन-ॉतता ऑन हज

English

Just as the flame of a lump is blown out by the gust of wind, so also Brahma becomes quiescent as a result of the Pratisarga.

अध्याय १९८

श्लोक 103

सुवर्णं चैव निष्पावांस्तथा राजिकुसुम्भकम् ।तृणराजेन्दुलवणं कुङ्कुमं तु तथाष्टमम्

suvarṇaṃ caiva niṣpāvāṃstathā rājikusumbhakam / tṛṇarājendulavaṇaṃ kuṅkumaṃ tu tathāṣṭamam

हिन्दी अर्थ

भारण का निवत्त होते हैं (!) इसी प्रकार देवताओं के सहम्नों युग समाप्त हो गये हैं। ऋषियों के साथ मृत्यु प्राप्त कर वे देवगण बराज लोकों में निवास करने के उपरान्त ब्रह्मलोक की प्राप्ति करते हैं ... खूत बोले--ऋषिव॒न्द ! देवताओं की एवं लय सृष्टि के विस्तार को क्रमानुसार नहीं बतलाया जा सकता, काल का कोई आदि नहीं है। संख्याओं की भी कोई इयत्ता नहीं है। ज॑ंसा मैं आप लोगों को अभी बतला चुका हूँ, उसमें सन्देह मत मानिये, वह सब वेसा ही हुआ है ।६६। सूत की इन बातों को सुनकर ऋषियों को बहुत सन्देह हो गया, तब के वेदव्यास के परम बुद्धिमान शिष्य यूत से, जो पुराणों के मा्िक स्थलों

English

(Defective) The principles beginning with Mahat become withdrawn in the great Isvara; Mahat merges into the Unmanifest and all the three Gunas attain equilibrium.

अध्याय १९८

श्लोक 104

एषामेकतमं कुर्याद् यथा वित्तानुसारतः ।साम्यादभ्यधिकं यावत् काञ्चनादि भवेद्द्विज

eṣāmekatamaṃ kuryād yathā vittānusārataḥ / sāmyādabhyadhikaṃ yāvat kāñcanādi bhaveddvija

हिन्दी अर्थ

को जानने वाले थे, बोले ।७०। क्‍ द

English

Thus Abhulasariiplava lias been recounted by me briefly. This withdrawal by complete merging in water is a periodic ( jVaimittika ) reabsorption in relation to Brahma. What more shall I tell you? Those Brahmanas of acute discernment, who are of extra-ordinary good behaviour, who subsist on the residue of what is consigned to sacred fire in Homa, and who maintain special piety, become die residents of Maharloka along with Devas.

अध्याय १९८

श्लोक 105

तावत्तिष्ठेन्नरो नारी पश्चादिदमुदीरयेत् ।नमो नमस्ते ललिते तुलापुरुषसंज्ञिते

tāvattiṣṭhennaro nārī paścādidamudīrayet / namo namaste lalite tulāpuruṣasaṃjñite

हिन्दी अर्थ

ऋषियों ने पूछा-सूत जी ! उस बेराज नामक लोकों में निवास करने वाले जो आहार करते हैं, उनका जो पराक्रम है, जिन पदार्थों या वस्तुओं का उन्हें आश्रय प्राप्त है, जितने समय तक वे बहाँ स्थित रहते हैं-इन सब बातों को हम यथार्थतः सुनना चाहते हैं, बतलाइए' ।७१। ऋषियों की इस जिज्ञासा को घुनकर लोकार्थ तत्ववेत्ता, पौराणिक सूत जी विनयपूर्ण स्वर में बोले। ऋषिवृन्द ! धर्माचरण के कारण जो परम शुद्ध एवं निविक्रार हो जाते हैं वे लोग उस वैराज नामक लोक में दस कल्प घक निबास करते हैं ।७३२-७३। ने सब परम ज्ञानो, सूक्ष्म एवं स्वच्छ शरीर समन्वित होते हैं। अनन्त काल तक

English

This chapter corresponds to Bd. 4.2. Only verse numbers from it are mentioned for reference. The chapter is an epitome of Dhuvana Kola.

अध्याय १९८

श्लोक 106

त्वमुमे तारयस्वास्मानस्मात्संसारकर्दमात् ।ततो ऽवतीर्य मुरवे पूर्वमर्द्धं निवेदयेत्

tvamume tārayasvāsmānasmātsaṃsārakardamāt / tato 'vatīrya murave pūrvamarddhaṃ nivedayet

हिन्दी अर्थ

अन्न सूत उवाचेति ख. पुस्तके ।

English

O Powerful Maiarisvan (Wind-god), of what nature is that world which has been called Maharloka by you? In every world many (meritorious souls) will be presiding. Hence, O Lord, recount to us with pleasure, how many are those worlds and how they are burnt (if at all). You alone know this precisely. On being requested thus by those disciplined-souled sages, Vayu, the knower of reality, spoke these sweet and truth¬ ful words.

अध्याय १९८

श्लोक 107

ऋत्विग्भ्यो ऽपरमर्द्धं च दद्यादुदकपूर्वकम् ।तेभ्यो लब्धा ततो ऽनुज्ञां दद्याद् अन्येषु चार्थिषु

ṛtvigbhyo 'paramarddhaṃ ca dadyādudakapūrvakam / tebhyo labdhā tato 'nujñāṃ dadyād anyeṣu cārthiṣu

हिन्दी अर्थ

१००० द वायुपुराणम् सर्वे सुक्ष्मशरी रास्ते विद्वांसो घनमृतंयः । स्थितलोकस्थितत्वाच्च तेषां भूतं न विद्यते . छह ऊचुः सनत्कुमाराद्या: सिद्धास्ते योगर्धामिण: । ख्याति नेमित्तिकीं तेषां पर्याये समुपस्थिते ७४ स्थानत्यागे मनश्रापि युगपत्संप्रवतंते । ऊचुः सर्वे तदाइन्योन्यं वेराजा: शुद्धबुद्धयः ७६ एबमेव महाभागाः प्रणव संप्रविश्य ह। ब्रह्मलोके प्रवर्तामस्तन्नः श्रेयो भविष्यति ७७

English

There are only fourteen abodes called Lokas 1 (worlds) described by great sages and (meritorious men) stay therein.

अध्याय १९८

श्लोक 108

सपत्नीकं गुरुं रक्तवाससी परिधापयेत् ।अन्यांश्च ऋत्विजः शक्त्या गुरुं केयूरकङ्कणैः

sapatnīkaṃ guruṃ raktavāsasī paridhāpayet / anyāṃśca ṛtvijaḥ śaktyā guruṃ keyūrakaṅkaṇaiḥ

हिन्दी अर्थ

एबमुक्त्वा तदा सर्वे ब्रह्मान्ते व्यवसायिनः योजयित्वा तदा5तसानं बर्तन्ते योगधर्मिण: ७८ तन्नेव संप्रलीयन्ते शान्ता दीपाचिषो यथा। ब्रह्मकायमवर्तन्त पुनराव॒त्तिदुर्ल भम् ७६ लोक त॑ समनृप्राप्य सर्वे ते भावनामयस् । आननदं ब्रह्मणः प्राप्य अश्वतत्वाय ते गताः पद० बराजेम्यस्तयषोध्व॑मन्तरे षड्गुण सतः। ब्रह्मतोकः समाख्यातो यत्र ब्रह्मा पुरोहितः

English

They call seven of them Krtas and the other seven Akrlas. The seven worlds, enumerated as Bhuh etc. are the Krtas. The seven Akrtas are the Prakfta ones (created by Verses 10-48 describe the seven Lokas (worlds), viz. (1) Bhur,

अध्याय १९८

श्लोक 109

शुक्लां गां क्षीरिणीं दद्याल्ललिता प्रीयतामिति ।अनेन विधिना या तु कुर्यान्नारी ममालये

śuklāṃ gāṃ kṣīriṇīṃ dadyāllalitā prīyatāmiti / anena vidhinā yā tu kuryānnārī mamālaye

हिन्दी अर्थ

ते सर्वे प्रणवात्मानों बुद्धशुद्धतपास्तथा । आनन्द ब्रह्मण: प्राप्यामृतत्व॑ं च भजन्त्युत पर हंदेस्ते नाभिभुयन्ते भावत्रयविर्वाजता: । आधिपत्यं बिना तुल्या ब्राह्मणस्ते महौजसः प्रभावविजयेश्वयंस्थितिवेराग्यदर्शने: । ते ब्रह्मलोकिका: सर्वे गति प्राप्प विवतेनीमू.. ऐद४

English

The Earth, the firmament, the heaven and what is remembered as Mahah —these four abodes are remembered as Arnavakas.

अध्याय १९८

श्लोक 110

मत्तुल्या सा भवेद्राज्ञां तेजसा श्रीरिवामला ।सावित्रीव च सौन्दर्ये जन्मानि दश पञ्च च

mattulyā sā bhavedrājñāṃ tejasā śrīrivāmalā / sāvitrīva ca saundarye janmāni daśa pañca ca

हिन्दी अर्थ

स्थित रहने के कारण उनके शरीर में भूतों का सम्पर्क नहीं रहता ।७४। दस कल्प के उपरान्त धैराज लोक से विवर्तंन का अवसर जब उपस्थित होता है तब वेराज लोक में निवास करने वाले, शुद्धिबुद्धि योगाम्यास परायण सनत्कुमारादि, सिद्धशजण उस लोक को त्यागने के लिए एक साथ ही समुत्सुक होकर परस्पर इस प्रकार का वार्तालाप करते हैं, है महाभाग्यशालियों ! अब हम लोग प्रणव का आश्रय प्राप्त कर ब्रह्म लोक

English

These abodes are having decline and increase. Those not endowed so will be mentioned (later). Those that are Jfaimiltikas (periodical ones) last till the final dissolution. Jana, Tapa and Saiya— these three abodes are exclusive ones. They last till the (final) Prasarhyama (dissolution).

अध्याय १९८

श्लोक 111

श्रीमार्कण्डेय उवाच: एवं निशम्य वचनं गौर्या द्विजवरोत्तमः ।नमस्कृत्य जगामाशु धर्मराज निवेशनम्

śrīmārkaṇḍeya uvāca: evaṃ niśamya vacanaṃ gauryā dvijavarottamaḥ / namaskṛtya jagāmāśu dharmarāja niveśanam

हिन्दी अर्थ

में निवास करेंगे, उससे हम सबों को विशेष कल्याण की प्राप्ति होगी ।७५-७७। इस प्रकार परस्पर सम्भाषण करने के उपराश्त वे योगधर्मा महात्मागण योगाभ्यास द्वारा आत्मा को परमात्मा ब्रह्म में सन्नियोजित कर शास्ते दीप शिखा की भाँति पुनरावृत्ति विरहित ब्रह्म पद की प्राप्ति करते हैं, और उसी स्थान पर विलीन हो जाते हैं। उञ्र परम सुखदायिनी कल्पनाओं से परिपूर्ण अनामय ब्रह्मलोक को प्राप्त कर ब्रह्मनन्द में निमग्त होर वे अमृतत्व की सम्प्राप्ति करते हैं। यह ब्रह्मतोक वराज नामक लोकों से छ गुना अधिक ऊपर विद्यमान है। उसकी ख्याति ब्रह्म लोक नाम से हैं, वहाँ ब्रह्म पुरोहित हैं ।७८-८१। वहाँ के सभी निवासी परम शुद्ध बुद्ध एवं तपोनिष्ठ होते हैं, प्रणव ही उनकी आत्मा होती है। ब्रह्मानन्द में मिमग्न होकर वे अमृतत्व का उपभोग करते हैं । उनमें सुख दुःखादि द्वल्दों का उदय नहीं होता, तीनों भावों का उनमें सवंथा अभाव

English

I shall mention the Vyakta (manifest) ones. They are the seven abodes. Bhurloka is the first among them. The second one is remembered as Bhuvah.

अध्याय १९८

श्लोक 112

तदा प्रभृति तत्तीर्थं ख्यातं शूलेश्वरीति च ।तस्मिंस्तीर्थे तु यः स्नात्वा तर्पयेत्पितृदेवताः

tadā prabhṛti tattīrthaṃ khyātaṃ śūleśvarīti ca / tasmiṃstīrthe tu yaḥ snātvā tarpayetpitṛdevatāḥ

हिन्दी अर्थ

रहता है, वे सब के सब परम तेजस्वी एवं आधिपत्य को छोड़कर सभी बातों में ब्रह्मा के समान प्रभावशाली होते हैं। प्रभाव, विजय ऐब्वर्ये, स्थिति, बेराग्य, ज्ञानादि में श्रह्मा ही के समान होते हैं । वे परमणुद्ध, बुद्ध

English

The third one should be known as Svah\ the fourth is remembeted as Mahah. Jana is the fifth world and Tapah is. considered as the sixth. Saiya is the seventh world. Beyond that there is dark¬ ness. When (Brahma) said " Bhuh" Bhurloka originated.

अध्याय १९८

श्लोक 113

ब्राह्मणान् अन्नवासोभिः पिण्डैः पितृपितामहान् ।भक्तोपहारैर्देवेशमुमया सह शङ्करं

brāhmaṇān annavāsobhiḥ piṇḍaiḥ pitṛpitāmahān / bhaktopahārairdeveśamumayā saha śaṅkaraṃ

हिन्दी अर्थ

हत आरभ्य 'भजर्त्यत' इत्यन्तग्रन्थो घ. पुस्तके नास्ति । ब्रह्मणा सह वेवेश्र संप्राप्ते प्रतिसंचरे । तपसो३्ते क्रियात्मानों बुद्धावस्था सनीधिण: ॥

English

Second time when he said " Bhuvah ", firmament ori¬ ginated. For the third time when he said " Svah ", heaven appeared.

अध्याय १९८

श्लोक 114

धूपगुग्गुलदानैश्च दीपदानैः सुबोधितैः ।सर्वपापविनिर्मुक्तः स गच्छेच्छिवसन्निधिम्

dhūpagugguladānaiśca dīpadānaiḥ subodhitaiḥ / sarvapāpavinirmuktaḥ sa gacchecchivasannidhim

हिन्दी अर्थ

इत्येतदसृतं शुक नित्यमक्षयमव्ययम् । देवर्षयों ब्रह्मसत्नं सनातनसुपासते १८६ अपुनर्मागंगादीनां तेषां चेवोध्वेरेतसामू । कर्माम्थासकृता शुद्धिवंदान्तेषपलक्ष्यत ८७ तत्न तेडभ्यासिनो युक्ताः परां काष्ठाघुपासते । हित्वा शरौर॑ं पाप्मानममृतत्वाय ते गताः ८

English

By means of these three Vyaharas (utterances) Brahma created the worlds. Hence Bhuh is remembered as Parthiva Loka (Earth) and firmament is remembered as Bhuvah. Svarloka is heaven. This is the conclusion in the Puranas. Agni (Fire-god) is the lord of Bhutas. Hence he is remembered as Bhutapati. Vayu is the lord of Bhuvah. Hence he is Bhuvaspati. The Sun is the lord of Bhavya i.e. Svah, hence is Divaspati.

अध्याय १९८

श्लोक 115

तस्मिंस्तीर्थे तु यः कश्चिद् अभियुक्तो नरेश्वर ।अम्भिशापि तथा स्नातस्त्रिदिनं मुच्यते नरः

tasmiṃstīrthe tu yaḥ kaścid abhiyukto nareśvara / ambhiśāpi tathā snātastridinaṃ mucyate naraḥ

हिन्दी अर्थ

निःसज्भा: शुच्यश्चव ब्रह्मसायों (यु) ज्यगाः स्मृताः । अकामयुक्तेयें वीरास्तपोभिदेग्धकिल्विषा: ॥॥ तेषाम अंशिनो लोका अप्रमेयसुखाः स्मृताः १९० एतद्ब्रह्मपदं दिव्यं परम व्योम्नि भास्वरम् । यत्र गत्वा न शोचन्ति हमरा ब्रह्मणा सह ३६१

English

When he uttered "Mahah", Maharloka originated. The residence of the Devas who retire from their offices is there.

अध्याय १९८

श्लोक 116

कृष्णपक्षे चतुर्दश्यां रात्रौ जागर्ति यो नरः ।उपवासपरः शुद्धः शिवं सम्पूजयेन्नरः ।प्रमुच्य पापसंमोहं रुद्रलोकं स गच्छति

kṛṣṇapakṣe caturdaśyāṃ rātrau jāgarti yo naraḥ / upavāsaparaḥ śuddhaḥ śivaṃ sampūjayennaraḥ / pramucya pāpasaṃmohaṃ rudralokaṃ sa gacchati

हिन्दी अर्थ

ज्ञानी, क्रियाशील ब्रह्म लोक में निवास करने वाले महात्मागण पुतर्जन्म मरणादि विरहित शुभ गति को प्राप्त कर महा प्रलय में अपनी तपस्याओं के पूर्ण हो जाने पर अक्ला ही के साथ अब्यक्त प्रकृति में विलीन हो जाते हैं ।॥८२-८५। यही नित्य, अक्षय, अव्यय, परम छुद्धि अमृत पद हैं । इसी आवृत्ति विरहित सनातन परम पद की प्राप्ति के लिए ऊध्वरेता देवता एवं ऋषिगण वेदान्तादि में निर्णीत मज्जलमय कर्मों के अनुष्ठान

English

Jana is the fifth Loka. Janas (people) are born there. It is called Janaloka because the subjects of Svayambhuva Manu and others were born there. Those subjects of Svayambhuva Manu and others, who have already been glorified, set out for Tapoloka when all the worlds are consumed by the fire at the end of the Kalpa.

अध्याय १९८

श्लोक 117

त्रिनेत्रश्च चतुर्बाहुः साक्षाद्रुद्रो ऽपरः ।क्रीडते देवकन्याभिर्यावच्चन्द्रार्कतारकम्

trinetraśca caturbāhuḥ sākṣādrudro 'paraḥ / krīḍate devakanyābhiryāvaccandrārkatārakam

हिन्दी अर्थ

में निरत रहकर-शुद्धि प्राप्त करते हैं, ओर सतत योगाभ्यास में दत्त चित्त रहकर उसकी अन्तिम सीमा तक उपासना ( साधना ) करते हैं और अन्त में अपने पापमय शरीर को त्याग कर अमृतत्व की प्राप्ति करते हैं ।५६-८५८। वीघराग, जित क्रोध; निर्मोह, सत्यवादी, आत्मा को वंश में रखने वाले, जितेन्द्रिय, दयावान्, संगविरहित, पवित्रात्मा, जन ही उस ब्रह्म लोक की प्राप्ति करते सुने जाते हैं। जो वीरात्मा कामना विहीन, योग परायण एवं तपस्या द्वारा समस्त पापों को नष्ट करमे घाले हैं, उन्हीं के ऐसे अविनश्वर लोकों की कल्पना कौ गई है, जहाँ पर प्राप्त होने वाले कल्याण एवं सुख की कोई इयत्ता नहीं है यह ब्रह्म पद परम दिव्यगुण सम्पन्न एवं परम आकाश जाज्वल्यमान है, वहाँ जाकर वे अमर गण ब्रह्मा के साथ--निवास सुख का अनुभव करते हुए शोक रहित हो जाते हैं

English

That world is called Tapoloka because Rbhu, Sanat- kumara and other holy personages of souls purified by Tapas (penance) and of sublimated sexuality stay in that world.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 198
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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