अध्याय १९८
श्लोक 1
॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे मूलस्थानतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम सप्तनवत्युत्तरशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १९८ मार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेन्महीपाल भद्रकालीतिसङ्गमम् ।शूलतीर्थमिति ख्यातं स्वयं देवेन निर्मितम्
|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe mūlasthānatīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma saptanavatyuttaraśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 198 mārkaṇḍeya uvāca: tato gacchenmahīpāla bhadrakālītisaṅgamam / śūlatīrthamiti khyātaṃ svayaṃ devena nirmitam
हिन्दी अर्थ
अनृपम॒तेज सबको अभिभूंत करनेवाले, महान् अंधकार रूप अज्ञान से परे, हिरण्पगर्भ भगवान् ब्रह्मा स्थित रहते हैं। महामहिमामय भगवान् उस समय जबकि एक सहल्ल बार चारों युग व्यतीत हो जाते हैं, समस्त जमस्मण्डल जलराष्षि में डूब जाता है, शासन करने की इच्छा से अपनी महारात्रि की कल्पना करते हैं, जो महान् अंधकार से पूर्ण रहती है ।१८६-१८८। जिस समय चारों प्रकार की प्रजाओं को उस विश्ञास अण्ह में परिणत करके ( सब का संह्ार करके ) महात्मा प्रजापति ब्रह्मा शयन करते हैं। उसः समय उनकों केवल सप्तषिगण देखते रहते हैं । वे भुगु आदि महात्मा ऋषिगण उस समय जनलोक में निवास करते हैं, परम
English
The Indras (or Devas) are Bhutapavadins, Hfstas, Medhyasthas, Bhutavadins, Bhutanuvadins. The three Vedas are competent in respect to Pravadins (arguers.)