Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
222
अध्याय 222 / 232

Adhyaya 222

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पूर्ण अध्याय पाठ16 श्लोक

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अध्याय २२२

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे हंसेश्वरतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नामैकविंशदधिकद्विशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय २२२ श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततः क्रोशान्तरे गच्छेत्तिलादं तीर्थमुत्तमम् ।तिलप्राशनकृद्यत्र जाबालिः शुद्धिमाप्तवान्

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe haṃseśvaratīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāmaikaviṃśadadhikadviśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 222 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tataḥ krośāntare gacchettilādaṃ tīrthamuttamam / tilaprāśanakṛdyatra jābāliḥ śuddhimāptavān

हिन्दी अर्थ

उस मंगलमय स्तम्भ को ब्रह्मा के उत्तम सरोवर में बिमज्जित कर उसी में प्रतिष्ठित भी किया । यज्ञभूमि के चलायमान होने पर ब्रह्मा जी चकित होकर धर्मराज से बोले, यमराज तुम्हारे घर एक शिला है, उसे बिना किसी वितर्क के यहाँ लाओ और देत्य के शिर पर शीघ्र स्थापित करो-ऐसी मेरी आज्ञा है। असुरराज गय के शरीर को निशचल करने को अत्यावश्यक समझ कर यमराज ने शिला लाकर उसके मस्तक पर रखा,

English

My birth has become fruitful today. My penance has

अध्याय २२२

श्लोक 2

पितृमातृपरित्यागी भ्रातुर्भार्याभिलाषकृत् ।पुत्रविक्रयकृत्पापश्छलकृद्गुरुणा सह

pitṛmātṛparityāgī bhrāturbhāryābhilāṣakṛt / putravikrayakṛtpāpaśchalakṛdguruṇā saha

हिन्दी अर्थ

किन्तु उस शिला के रखने पर भी असुरराज शिला समेत विचलित हो गया । तब ब्रह्मा ने रुद्रादि देवताओं से इदमर्ध॑ नारित ख. पुस्तके । + अभय इलोको न विद्यते ख- पुस्तके ।

English

O Yogin, O knovver of all the ancillaries of Yoga, O master of all the worlds, O father, O preceptor, O Brahma, I shall carry out the work for which you have come.

अध्याय २२२

श्लोक 3

एवं दोषसमाविष्टो यत्र यत्रापि गच्छति ।तत्र तत्रापि धिक्कारं लभते सत्सु भारत ।न कोऽपि संगतिं धत्ते तेन सार्द्धं सभास्वपि

evaṃ doṣasamāviṣṭo yatra yatrāpi gacchati / tatra tatrāpi dhikkāraṃ labhate satsu bhārata / na ko'pi saṃgatiṃ dhatte tena sārddhaṃ sabhāsvapi

हिन्दी अर्थ

देवानचे5थ रुद्रादीडि्शिलायां निश्चलाः किल 4 तिष्ठन्तु देवा: सकलास्तथेत्युक्त्वा च॒ ते स्थिताः

English

All the holy centres of the earth seen by me while wandering over it, are not as pure as your body, for the purpose of Yajna.

अध्याय २२२

श्लोक 4

इति लज्जान्वितो विप्रः काले न महता नृप ।चिन्तामवाप महतीम् अगतिज्ञो हि पावने

iti lajjānvito vipraḥ kāle na mahatā nṛpa / cintāmavāpa mahatīm agatijño hi pāvane

हिन्दी अर्थ

देवाः पादलेक्षयित्वा तथाइपि कलितो5सुर:ः । ब्रह्माइथ व्याकुलो विष्णुं गतः क्षीराब्धिशायिनम् ॥। ब्रह्मणण्डस्य पते नाथ नमामि जगतां पतिम् । गति कौतिमतां न॒णां भुक्तिमुक्तिप्रदायकम्

English

Holiness of the body has been attained by you, thanks to the grace of Visnu. Hence, O Asura, give unto me your pure body for the purpose of Yajna.

अध्याय २२२

श्लोक 5

चकार सर्वतीर्थानि रेवां चाप्यवगाहयत्

cakāra sarvatīrthāni revāṃ cāpyavagāhayat

हिन्दी अर्थ

विष्वक्सेनो5ब्रवीद्विष्णुं देव त्वां स्तौति पद्मजः । हरिराहा;नय स्वं ते विष्णृक्तः स तमानयत् ॥ अजमूचे हरि: कस्मादागतोइसि वदस्व तत् ५०

English

O lordofDevas, I am blessed since my body is being asked for by you. If you perform Yaga (sacrifice) over my body the Pitrs in my family shall be contented.

अध्याय २२२

श्लोक 6

अणिवापान्तम् आसाद्य दक्षिणे नर्मदातटे ।तस्थौ यत्र व्रती पार्थ जाबालिः प्राशयंस्तिलान्

aṇivāpāntam āsādya dakṣiṇe narmadātaṭe / tasthau yatra vratī pārtha jābāliḥ prāśayaṃstilān

हिन्दी अर्थ

देवदेव कृते यागे प्रचचाल गयासुरः । शिलायां देवरूपिण्यां न्यस्तायां तस्य मस्तके ५१ रद्रादिषु च॒ देवषु संस्थितेष्वसु रोइ्चलत् । इदानीं निश्चलार्थ हि प्रसाद कुरु माधव ब्रह्मणो वचन श्रुत्वा ह्याकृष्य स्वशरीरतः । घुतिं ददो निश्चलार्थ ब्रह्मणे भगवान्हरिः

English

After saying thus, during the Sveta Kalpa, the demon Gaya fell on the ground in a south-western direction on the mountain Kolahala. 1

अध्याय २२२

श्लोक 7

तिलैरेकाशनं कुर्वंस् तथैवैकान्तराशनम् ।त्र्यहषड्द्वादशाहाशी पक्षमासाशनस्तथा

tilairekāśanaṃ kurvaṃs tathaivaikāntarāśanam / tryahaṣaḍdvādaśāhāśī pakṣamāsāśanastathā

हिन्दी अर्थ

कहा कि आप लोग इस शिला को निदचल करने के लिये इस पर अवस्थित हो जायें। देवगण ने 'बहुत अच्छा” कहकर उसी दिला पर अवस्थित हो गये । देवताओं के पैरों से आक्रान्त होने पर भी वह महा असुर चंचल ही बना रहा । तब व्याकुल होकर ब्रह्मा क्षीरसागरशायी भगवान् विष्णु के पास गये ओर वहाँ बिनस्रभाव से आदर पूर्वक प्रभु की इस प्रकार प्राथंना की

English

Keeping his head in the north and the feet in the south, the Daitya (lay there). After collecting together all the requisi¬ tes, Brahma mentally created the Rtviks.

अध्याय २२२

श्लोक 8

कृच्छ्रचान्द्रायणादीनि व्रतानि च तिलैरपि ।तिलादत्वमनुप्राप्तो ह्यब्दद्वासप्ततिं क्रमात्

kṛcchracāndrāyaṇādīni vratāni ca tilairapi / tilādatvamanuprāpto hyabdadvāsaptatiṃ kramāt

हिन्दी अर्थ

ब्रह्मा बोले--हे निशखिल ब्रह्माण्ड के स्वामिन् ! जगदीश्वर आप को हमारा नमस्कार है, आप मनुष्यों फो यश देने वाले, उनकी भुक्ति एवं मुक्ति के प्रदाता आप हो हैं । ब्रह्मा की प्रार्थना सुनकर विष्वकसेन ने भगवान् विष्णु के समीप जाकर कहा, देव ! पद्म सम्भव भगवान् ब्रह्मा आप की स्वुृति कर रहे हैं। हरि ने कहा जाओ, उन्हें लिवा लाओ । भगवान् विष्णु के आदेशानुसार विष्कसेन ने ब्रह्मा को भगवान् के सम्मुख उपस्थित किया । हरि ने अजन्मा ब्रह्मासे कहा, देव किस कारण वश आपका यहाँ पदापंण हुआ है, बतलाइये

English

They were: Agnis'arman, Ampta, Saunaka, Yan- jali, Mrdu, Kumuthi, VedakaundBya, Harita, Kasyapa, Krpa, Garga, Kausika, Vasistha, the unchanging sage Bhargava, Vrddha Parasara, Kanva, Mandavya, Srutikevala, Sveta, Sutala, Damana, Suhotra, Kanka, Laukaksi of huge mighty arms, Jaiglsavya, the Brahmana Dadhipaficamukha, Rsabha, Karka, Katyayana, Go- bhila the sage of great fierce rites, Supalaka, Gautama, Vedasi- rovrata, Jatamalin, Avyagra, Catuhasa the terrible, Atreya,

अध्याय २२२

श्लोक 9

कालेन गच्छता तस्य प्रसन्नो ऽभवदीश्वरः ।प्रादाद् इहामुत्रिकीं तु शुद्धिं सालोक्यमात्मकम्

kālena gacchatā tasya prasanno 'bhavadīśvaraḥ / prādād ihāmutrikīṃ tu śuddhiṃ sālokyamātmakam

हिन्दी अर्थ

ब्रह्चा ने कहा- भगवन् ! आप के निर्दशानुसार यज्ञ सम्पन्न तो हो गया पर गयासुर अभी तक चर्चल बना हुआ है। हम सबों ने उसके मस्तक पर यद्यपि देवरूपिणी घिला लाकर रखी है, फिर भी वह चलायमान है। यही नहीं रुद्र प्रभति देवगणों के पैरों से आक्रास्त होने पर भी वह महान् असुर निशचल नहीं हुआ । माधव ! अब वह जिस प्रकार विश्चल हो, आप उसके लिये कृपा करें। ब्रह्मा की भात॑ वाणी

English

The Brahmayoni hill in Gaya, including the hill called Mup<?apr?tha which contains the impressions of Gadadhara's feet De 20 i.

अध्याय २२२

श्लोक 10

तेन स स्थापितो देवः स्वनाम्ना भरतर्षभ ।तिलादेश्वरसंज्ञां च प्राप लोकादपि प्रभुः

tena sa sthāpito devaḥ svanāmnā bharatarṣabha / tilādeśvarasaṃjñāṃ ca prāpa lokādapi prabhuḥ

हिन्दी अर्थ

१७८० वायुपुराणम् अनीय मुर्ति ब्रह्माईपि शिलायां समधारयत् । तथा5पि चलित॑ वीक्ष्य पुनर्देबमथा55छ्व यत्

English

After creating these and other leading Brahmanas, god Brahma, the grandfather of the worlds, performed the Yaga on the body of Gayasura.

अध्याय २२२

श्लोक 11

तदा प्रभृति विख्यातं तीर्थं पापप्रणाशनम् ।तत्र तीर्थे नरः स्नात्वा चतुर्दश्यष्टमीषु च

tadā prabhṛti vikhyātaṃ tīrthaṃ pāpapraṇāśanam / tatra tīrthe naraḥ snātvā caturdaśyaṣṭamīṣu ca

हिन्दी अर्थ

आगत्य विष्णु: क्षीराब्धे: शिलायां संस्थितोह्भवत् । जनादंनाभिधानेन पुण्डरीकेतिनामतः ।॥

English

AgniSarma, without wasting his penance, created these five fires from his mouth: Daksinagni, Garhapatya, Ahavanlya, Satya and Avasathya. O celestial sage, the Yajnas are founded on these. To stabilise the Yajna, he gave Daksina to the Brahmanas.

अध्याय २२२

श्लोक 12

उपवासपरः पार्थ तथैव हरिवासरे ।तिलहोमी तिलोद्वर्ती तिलस्नायी तिलोदकी

upavāsaparaḥ pārtha tathaiva harivāsare / tilahomī tilodvartī tilasnāyī tilodakī

हिन्दी अर्थ

निश्चयार्थ पत्चधा5पसीच्छिलायां प्रपितामहः । फितामहो5थ फल्ग्वीशः कैदारः कनकेश्वरः ब्रह्मा स्थित: स्वयं तत्र गजरूपी विनायकः । गयादित्यश्रोत्तराकों दक्षिणाकंस्त्रिधा रविः ५७ लक्ष्मी: सीताभिधानेन गौरी च मड्भलाह्या । गायत्री चेव सावित्री त्रिसंध्या च सरस्वती.

English

After performing the Purnahuti and taking the ablution of Avabhrtha, Brahma caused the sacrificial post to be brought along with the Suras and fixed it.

अध्याय २२२

श्लोक 13

तिलदाता च भोक्ता च नानापापैः प्रमुच्यते ।तिलैरापूरयेल्लिङ्गं तिलतैलेन दीपदः ।रुद्रलोकम् अवाप्नोति पुनात्य् आ सप्तमं कुलम्

tiladātā ca bhoktā ca nānāpāpaiḥ pramucyate / tilairāpūrayelliṅgaṃ tilatailena dīpadaḥ / rudralokam avāpnoti punāty ā saptamaṃ kulam

हिन्दी अर्थ

इन्द्रो ब्रहस्पतिः पुषा वसवो5ष्टो महाबलाः। विश्व देवाश्रा5श्विनेयो मारुतो विश्वतायकः ॥

English

The auspicious post was fixed in the Brahmasaras which is the most excellent of all lakes. Shaken and surprised, Brahma spoke to Dharmaraja:

अध्याय २२२

श्लोक 14

तिलपिण्डप्रदानेन श्राद्धे नृपतिसत्तम ।विकर्मस्थाश्च गच्छन्ति गतिमिष्टां हि पूर्वजाः

tilapiṇḍapradānena śrāddhe nṛpatisattama / vikarmasthāśca gacchanti gatimiṣṭāṃ hi pūrvajāḥ

हिन्दी अर्थ

ऊचे गयासुरो देवान्किमर्थ वच्चितो छ्ाहम् । यज्ञार्थ ब्रह्मणे दत्त शरीरसलयं मया ॥ सुनकर भगवान् हरि ने अपने शरीर से खींचकर एक मूर्ति ब्रह्मा को गयाधुर के शरीर को निदचल करने के लिए दिया ब्रह्मा ने उक्त मूवि को लाकर गयाधुर के मस्तक पद स्थापित शिला के ऊपर स्थापित किया । किस्तु उस पर भी जब शिला को चलायमान देखा तो पुनः हरि का आवाहन किया। ब्रह्मा के आवाहन करने पर भगवान् क्षीरतागर से आकर छशिला के ऊपर स्वयमेव अवस्थित हुए ।५१-५५। स्वयम् भगवान् जनादंन

English

"There is a slab of stone in your house. Without hesita¬ tion bring it here at my behest and fix it on the head of the Daitya."

अध्याय २२२

श्लोक 15

स्वर्गलोकस्थिताः श्राद्धैर् ब्राह्मणानां च भोजनैः ।अक्षयां तृप्तिमासाद्य मोदन्ते शाश्वतीः समाः

svargalokasthitāḥ śrāddhair brāhmaṇānāṃ ca bhojanaiḥ / akṣayāṃ tṛptimāsādya modante śāśvatīḥ samāḥ

हिन्दी अर्थ

पुण्डरोकाक्ष ने गदा धारण कर उक्त शिला को नि३ंचल करने के लिए उस पर अपना अवस्थान किया। उसी छिला को अधिकाधिक निहचल करने के लिये अ्रपितामह मे अपने को पांच भागों विभक्त कर अवस्थान किया वे पाँचों वहाँ प्रपितामह, पितामह फल्गवीश, केदार ओर कनकेश्वर के नाम से विख्यात थे । उसी शिलापर गज रूपधारी विनायक भी स्थित हुए । यूय॑ गयादित्य, उत्तराक॑ और दक्षिणाक॑ इन तीन नामों से

English

On hearing it, Yama placed the slab on the head of the demon to keep him steady. Even when the slab was placed, the demon shook along with the slab. He spoke to Rudra and other Devas, "O Devas, you all stand steady on the slab". They said "Yes" and stood there (on it).

अध्याय २२२

श्लोक 16

पितुः कुलं मातृकुलं तथा भार्याकुलं नृप ।कुलत्रयं समुद्धृत्य स्वर्गं नयति वै नरः

pituḥ kulaṃ mātṛkulaṃ tathā bhāryākulaṃ nṛpa / kulatrayaṃ samuddhṛtya svargaṃ nayati vai naraḥ

हिन्दी अर्थ

अवस्थित हुए लक्ष्मी सीता के नाम से तथा गोरी मज्जुला के नाम से उस शिलाखण्ड पर अवस्थित हुई। सरस्वती गायत्री, सावित्रो और त्रिसन्ध्या इन तीनों स्वरूपों में स्थित हुई । इनके अतिरिक्त इन्द्र, बृहस्पति पृषा महाबलशाली आठों वसुगण, विश्वेदेवगण, दोनों अश्विनी कुमार विश्व नामक मात यज्ञ गन्धवं, उरगा- दिकों के साथ अपनी अपनी शक्तियों समेत उस शिलाखण्ड पर विराजमान हुए ।२६-५९। यतः भगवान् हरि की आदि गदा से वह असुरराज गय स्थिर किया गया था, अतः भगवान् आदि गदाधर के नाम से बिख्यात हुए । उक्त अवसर पर गयासुर ने उपस्थित देवगणों से कहा, सुरवुन्द आप लोगों ने किस कारण से हमें वंचित

English

The Devas pressed the slab with their feet (?) and noted that still the demon quaked. Then the distressed Brahma went to Visnu who was lying down in the ocean of milk. Bowing down and honouring the lord, he eulogised him.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 222
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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