अध्याय ३८
श्लोक 1
॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे देवतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम सप्तविंशो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय ३८ श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेत राजेन्द्र गुहावासीति चोत्तमम् ।यत्र सिद्धो महादेवो गुहावासी समार्बुदम्
|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe devatīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma saptaviṃśo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 38 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gaccheta rājendra guhāvāsīti cottamam / yatra siddho mahādevo guhāvāsī samārbudam
हिन्दी अर्थ
सा का करें? ।५७-५९। विष्णु बोले -स्वरणवर्ण कमलयोनि ब्रह्मा ! अच्छा, आप मेरी बात सुनिये । पुत्राभि- लाषी होकर आपने जो महादेव से वरदान प्राप्त किया है, उसे सफल कीजिये और ऋगमुक्त होइये । आप खूरों प्रकार से जीवों की सृष्टि और उनका विनाश कीजिये! ।६०-६१। पद्मयोनि पितामह ब्रह्मा गोविन्द से ज्ञान प्राप्त कर प्रजा की सृष्टि करने के लिये अत्यन्त उग्र तप करने लगे । इस प्रकार दीघंकाल तक तपस्या
English
I shall now describe the valleys of the southern quarter, frequented by the Siddhas. Listen to them in due order.