Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
39
अध्याय 39 / 232

Adhyaya 39

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अध्याय ३९

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे नर्मदामाहात्म्ये नर्मदेश्वरतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नामाष्टत्रिंशो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय ३९ श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेच्च राजेन्द्र कपिलातीर्थमुत्तमम् ।स्नानमात्रान्नरो भक्त्या मुच्यते सर्वकिल्बिषैः

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe narmadāmāhātmye narmadeśvaratīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāmāṣṭatriṃśo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 39 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gacchecca rājendra kapilātīrthamuttamam / snānamātrānnaro bhaktyā mucyate sarvakilbiṣaiḥ

हिन्दी अर्थ

विवेश तं तदा वायुमीशानो वायुरुच्यते । तस्मादेन परिवदेदायतं बायुमोश्वरस् ॥ हि एवं युक्तमथेशानो नव देवो हिनस्ति तम् ' ततो5ब्रवीत्पुनबंह्या त॑ं देव धम्नलोहितम् । य्ते पशुपतीत्युक्त सया नामेह पश्चमम्॥ ।

English

Henceforth I shall tell you about the excellent abodes of Devas situated on different mountains.

अध्याय ३९

श्लोक 2

युधिष्ठिर उवाच: आश्चर्यभूतं लोकेषु कथितं द्विजसत्तम ।नर्मदेश्वरमाहात्म्यं कापिलं कथयस्व मे

yudhiṣṭhira uvāca: āścaryabhūtaṃ lokeṣu kathitaṃ dvijasattama / narmadeśvaramāhātmyaṃ kāpilaṃ kathayasva me

हिन्दी अर्थ

न हन्ति त॑ महादेव एवं बन्‍्देत त॑ प्रभुम् ३७ ' गोपायति दिवाइ5दित्यः प्रजा नक्‍त॑ तु चन्द्रमा: । एकरात्रे समेयातां सुर्याचन्द्रमसावुभो' ॥

English

The forest of sport of Mahendra is on the great mountain Sltanta. The forest is endowed with all desirable qualities. The mountain contains many belly-like caves, which are the abodes (of Devas). The mountain is very extensive with hundreds of variegated minerals and jewel mines. It is the abode of animals of good qualities. Its ridges and slopes are laden with flowers where the bees hum and buzz. It is decorated with the assemblage of gold pieces veriegated with valuable jewels. The slopes hum with the buzzing sound of bees. There are corals mixed with gold. The ridges are covered with flowers where the bees hum. There are hanging creepers of various colours. Hundreds of minerals are spread over the peaks and precipices. Gems of different colours along with flowers decorate the mountain. There are fountains and springs of pure and tasty water. It is embellished with many hedges abounding in flowers. It is beautified with streamlets wherein flowery rafts float. The inner crevasses of the mountain are frequented by Kinnaras. There are many caves and cavities frequented by Yaksas and Gandharvas. Some of them are comfortably resorted to and some are dense and impassable. Many animals frequent it. Good potable water is abundant. The mountain is embellished with trees bearing various fruits and flowers.

अध्याय ३९

श्लोक 3

यस्मिन् काले ऽथ सम्बन्धे उत्पन्नं तीर्थम् उत्तमम् ।सर्वपापहरं पुण्यं तीर्थं जातं कथं प्रभो

yasmin kāle 'tha sambandhe utpannaṃ tīrtham uttamam / sarvapāpaharaṃ puṇyaṃ tīrthaṃ jātaṃ kathaṃ prabho

हिन्दी अर्थ

अमावास्थानिशायां तु तस्‍यां युक्तः सदा बसेतू.. . द ३८ तीसरा नाम हमने दावे कहा है, उसका शरौर भूमि होगा । ऐसा कहने पर उनके शरीर का जो अस्थि नामक स्थिर पदार्थ था, उसस भूमि प्रवेश कर गयी। इसलिये भूमि शर्व कहलाती है ।२५-२६। इसलिये ज्ञानवान् क्‍ व्यक्ति छाया, सोपान अथवा स्वच्छ स्थान में मूत्र-मल आदि का त्याग न करे। पहले सिर नवा ले और : पृथ्वी पर तृण-घास रखकर मल-पमूत्र त्याग करे। पृथ्वी के सम्बन्ध में जो ऐसा आचरण करता है, उसकी

English

The great Parijata forest of the king ofDcvas is also there. It is well—known in the three worlds and is praised in song as can be ascertained from reports.

अध्याय ३९

श्लोक 4

मार्कण्डेय उवाच: शृणु वक्ष्येऽद्य ते राजन्कपिलातीर्थमुत्तमम् ।येन ते विस्मयः सर्वः श्रुत्वा गच्छति भारत

mārkaṇḍeya uvāca: śṛṇu vakṣye'dya te rājankapilātīrthamuttamam / yena te vismayaḥ sarvaḥ śrutvā gacchati bhārata

हिन्दी अर्थ

हिसा छार्व देवता नहीं करते हैं ।३०-३१। ब्रह्म ने फिर नीललोहित से कहा--आपका चोथा नाम हमने ईशान कहा है, उस चौथे शरीर की चौथी मूर्ति वायु होगी । ब्रह्मा के ऐसा कहते ही उनके शरीर में जो प्राणापानादि पंच वायु थे, उनमें सांसारिक वायु प्रवेश कर गयी; इसलिये ईशान वायु कहलाते हैं

English

By means of the excessively fragrant and charming flowers blazing like the midday sun, the excellent mountain is illuminated as it were all around.

अध्याय ३९

श्लोक 5

पुरा कृतयुगस्यादौ ब्रह्मा लोकपितामहः ।उत्पादयित्वा सकलं भूतग्रामं चतुर्विधम्

purā kṛtayugasyādau brahmā lokapitāmahaḥ / utpādayitvā sakalaṃ bhūtagrāmaṃ caturvidham

हिन्दी अर्थ

जो व्यक्ति इस विराट वायु की स्तुति करते हैं, ईशान देव उसकी हिंसा करते हैं ।३४। ब्रह्मा ने फिर धूम्र- लोहित देव से कहा--हमने आपका पाँचवाँ नाम पशुपति कहा है इसलिये उस पाँचवें शरीर की पाँचवीं .. मृति अग्ति होगी ३५। ऐसा कहते ही उनके शरीरस्थ उष्ण नामक तेज में अग्ति प्रवेश कर गबा । तब से द अग्नि. का नाम पद्मुपति हुआ। चरद्रमा सोम कहलाते हैं, उनकी आत्मा ओषधियाँ है। जो विद्वान इस तत्त्व ह ः को प्रत्येक पर्व में हृदयज्भम करता है, महादेव उसकी हिंसा नहीं करते । इसलिये महादेव को वन्दना श्रेयस्कर है ।३६-३७। आदित्य दिन में और चन्द्रमा रात में प्रजाओं की रक्षा करते हैं। सूर्य और चन्द्रमा जिस रात्रि

English

The wind blowing from that forest wafts the fragrance

अध्याय ३९

श्लोक 6

जपहोमपरो भक्त्या क्षणं ध्यात्वा च तिष्ठति ।ज्वलमानात् तु कपिला तावत् कुण्डात्समुत्थिता

japahomaparo bhaktyā kṣaṇaṃ dhyātvā ca tiṣṭhati / jvalamānāt tu kapilā tāvat kuṇḍātsamutthitā

हिन्दी अर्थ

तत्रा5विष्टं सर्वर्भिदं तनुभिर्नामभिः सह । एकाकी यश्ररत्येष सूर्योश्सो चन्द्र उच्यते

English

The tanks therein are adorned with blue lotuses resembling lapis lazuli with golden and diamond-like filaments, possessed of fragrance and resonant with the buzzing of bees." There are full-blown, hundred-pctallcd, charming, large-leafed red lotuses also.

अध्याय ३९

श्लोक 7

अग्निज्वालोज्ज्वलैः शृङ्गैस्त्रिनेत्रा सुपयस्विनी ।अग्निपूर्णा ह्यग्निमुखा अग्निघ्राणाग्निलोचना

agnijvālojjvalaiḥ śṛṅgaistrinetrā supayasvinī / agnipūrṇā hyagnimukhā agnighrāṇāgnilocanā

हिन्दी अर्थ

सूर्यस्य यत्प्रकाशेन वीक्ष्यन्ते चक्षुषा प्रजा:। शुक्लात्मा संस्थितो रुद्र पिबत्यम्भो गर्भस्तिभिः अद्ते पीयते चेवाप्यन्नपात्मकानि या । तनुरात्मभवा सा ब॑ देहेष्वेवोपचीयते ॥४ १

English

Thousands of fishes shine within the waters with un¬ winking eyes and decorated" with golden gems.

अध्याय ३९

श्लोक 8

अग्निखुरा ह्यग्निपृष्ठा अग्निसर्वाङ्गसंस्थितिः ।सर्वलक्षणसम्पूर्णा घण्टाललितनिःस्वना

agnikhurā hyagnipṛṣṭhā agnisarvāṅgasaṃsthitiḥ / sarvalakṣaṇasampūrṇā ghaṇṭālalitaniḥsvanā

हिन्दी अर्थ

यावत्स्थिता शरीरेषु भूतानां प्राणवृत्तिभि: । वायूवात्मिका तु ऐशानी सा प्राणा प्राणिता सह

English

With tortoises richly embellished with gold and occu¬ pying many positions, the water gets splashed all round and shines well.

अध्याय ३९

श्लोक 9

दृष्ट्वा तु तां महाभागां कपिलां कुण्डमध्यगाम् ।ब्रह्मा लोकगुरुस्तात प्रणम्येदम् उवाच ह

dṛṣṭvā tu tāṃ mahābhāgāṃ kapilāṃ kuṇḍamadhyagām / brahmā lokagurustāta praṇamyedam uvāca ha

हिन्दी अर्थ

पीताशितानि पचति भूतानां जठरेषु या। ततः पाशुपती तस्य पाचिका शक्तिरुच्यते . वैडेंड॑ यानीह सुषिराणि स्पुर्देहिष्वन्तर्गतानि वे । वायो: संचरणार्थाय सा भीमा चोच्यते तनु. बंतानदीक्षितानां तु या स्थितिब्रह्मवादिनाम् । तनुरुग्रात्मिकां सा तु तेनोग्रो दीक्षितः स्मृत:.

English

In that splendid iorest oi Indra Devas, Danavas, Pannagas, \ aksas, Raksasas, Guhyakas, Gandharvas of un¬ measured splendour, Vidyadharas, Siddhas and Kinnaras are joyous. Groups of Apsaras-s too are engaged in sports.

अध्याय ३९

श्लोक 10

नमस्ते कपिले पुण्ये सर्वलोकनमस्कृते ।मङ्गल्ये मङ्गले देवि त्रिषु लोकेष्वनुपमे

namaste kapile puṇye sarvalokanamaskṛte / maṅgalye maṅgale devi triṣu lokeṣvanupame

हिन्दी अर्थ

नवो नवो भवति हि जायमानः पुनः पुनः नीयते यो यथाकाम विबुधः पित्ृभि: सह ॥

English

On the eastern side of that royal mountain is the lordly mountain of Kumunja with many streams and caves.

अध्याय ३९

श्लोक 11

त्वं लक्ष्मीस्त्वं स्मृतिर्मेधा त्वं धृतिस्त्वं वरानने ।उमादेवीति विख्याता त्वं सती नात्र संशयः

tvaṃ lakṣmīstvaṃ smṛtirmedhā tvaṃ dhṛtistvaṃ varānane / umādevīti vikhyātā tvaṃ satī nātra saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

महीदेवो5पृतात्माइसो ह्मम्मयश्चन्द्रमाः: स्पृतः . ड॑ंद तस्य वा प्रथमा नाम्ना तन् रौदी प्रकोतिता॥ पत्नी सुबर्धलो तस्य पुत्न॑स्तस्याः शर्नेश्वर: ॥ै४६ भवस्य या द्वितीया तु तनुरापः स्मृता तु वे । तस्योषाउच्र स्मृता पत्नी पुत्रश्चाप्युशना स्तृतः. में एकत्र तिवास करते हैं, उसे अमावास्या कहते हैं। इस अमावास्या तिथि में योग युक्त होकर रहने चाहिए क्योंकि ब्रह्म में नाम रूप के साथ सारा जगत् प्रविष्ट है। वही अकेले सूर्य और चरुद्र कंहलांतें हैं ।२५-३६। प्रजागण सूर्य के प्रकाश में चक्षु द्वारा देखते हैं और रुद्र देव शुक्लात्म रूप से सूर्य के मध्य में स्थित होकर किरण द्वारा जल का आकषंण करते हैं। जो अंन्नजल आदि भोजन द्वारा शरीर में जाते हैं वें उनका

English

On the summit abounding in variegated minerals, there are eight big cities of noble-souled Danavas.

अध्याय ३९

श्लोक 12

वैष्णवी त्वं महादेवी ब्रह्माणी त्वं वरानने ।कुमारी त्वं महाभागे भक्तिः श्रद्धा तथैव च

vaiṣṇavī tvaṃ mahādevī brahmāṇī tvaṃ varānane / kumārī tvaṃ mahābhāge bhaktiḥ śraddhā tathaiva ca

हिन्दी अर्थ

आत्मसम्भव शरीर होने के कारण प्रत्येक जीव शरीर में जाकर उसकों बढ़ाते हैं। भगधांन् स्थिर चित्त से - जिस शरीर द्वारा प्रजाओं को धारण करते हैं, वही उनकी शार्वी पार्थिव मूर्ति है। जो शरीर: प्राणे-बृत्ति के साथ भूतों के शरीर में निवास करता है, वही उनकी वायु रूप ऐशानी मूर्ति है और वहीँ प्राणियों का 'भ्रांणं है -४०-४९। जो शरीर जीवों के जठर में खाये पिये हुये को पचाता है, वहीं जठरॉग्नि उनकी शक्तिंशालिनी

English

The abode of Raksasas crowded with men and women is situated on the mountain Vajraka with many peaks and cves.

अध्याय ३९

श्लोक 13

कालरात्रिस्तु भूतानां कुमारी परमेश्वरी ।त्वं लवस्त्वं त्रुटिश्चैव मुहूर्तं लक्षमेव च

kālarātristu bhūtānāṃ kumārī parameśvarī / tvaṃ lavastvaṃ truṭiścaiva muhūrtaṃ lakṣameva ca

हिन्दी अर्थ

पशुपति मूर्ति हैं। वायु के संचरण के लिये देह के भीतर जितने रन्प्र हैं, वे ही उनकी भौमा मूर्ति हैं ।४४-४५। यज्ञ दीक्षित ब्रह्मवादियों की जो स्थित ( वृत्ति ) हैं, वही उनकी उम्रात्मिका मृति है एवं उनका वह उग्र शरीर यजमान है। देव-देव का जो संकल्प सभी प्रजाओं में समभावत से वर्तेमाँन है. वही संकल्प उनका प्राणिस्थित सोमरूपी मानस शरीर है। इनका यह शरीर बार बार होनेवाला और नित्य नवीन है एवं देव-पितृगण के साथ इच्छानुकल ले जाया जाता है। इसलिये भगवान् महादेव ही अमृतात्मा जलमय चन्द्रमा कहे जाते हैं ।४६-४८। उनका जो पहला शरीर रौद्र नाम से कहा गया है, उसकी पत्नी सुवर्चला हैं, जिसका पुत्र शनेशचर है। दूसरा भव शरीर जो जलात्मक है, उसकी पत्नी ऊषा है और पुत्र उशना

English

These terrible Raksasas known as Nilakas can assume forms as they please. They are endowed with great strength and exploit. They live there for ever.

अध्याय ३९

श्लोक 14

संवत्सरस्त्वं मासस्त्वं कालस्त्वं च क्षणस्तथा ।नास्ति किंचित् त्वया हीनं त्रैलोक्ये सचराचरे

saṃvatsarastvaṃ māsastvaṃ kālastvaṃ ca kṣaṇastathā / nāsti kiṃcit tvayā hīnaṃ trailokye sacarācare

हिन्दी अर्थ

है वायुपुराणम्र्

English

On the great mountain Mahanlla, there arc fifteen famous cities of the horse-faced Kinnaras.

अध्याय ३९

श्लोक 15

एवं स्तुता तु मानेन कपिला परमेष्ठिना ।तमुवाच महाभागं प्रहृष्य पद्मसम्भवम्

evaṃ stutā tu mānena kapilā parameṣṭhinā / tamuvāca mahābhāgaṃ prahṛṣya padmasambhavam

हिन्दी अर्थ

शर्वेस्थ या तुतोया तु नाम भामस्तनुः स्घपृता । पत्नी तस्य विकेशीति पुत्रश्चाड्रारकः स्घपुत: ईशानस्य चतुर्थस्य स्वर्ग तस्प च या तनु: । तस्य पत्नी शिवा नाम पुत्नश्चास्य सनोजवः

English

Devasena, strong as Indra, is a powerful ruler. There the fifteen Kinnara lungs are very haughty.

अध्याय ३९

श्लोक 16

प्रसन्ना तव वाक्येन देवदेव जगद्गुरो ।किं करोमि प्रियं ते ऽद्य ब्रूहि सर्वं पितामह

prasannā tava vākyena devadeva jagadguro / kiṃ karomi priyaṃ te 'dya brūhi sarvaṃ pitāmaha

हिन्दी अर्थ

तासना षष्ठस्य या भीमा तनुराकाश उच्यते ।) दिशः पत्न्य: स्मृतास्तस्य स्वगंश्रास्य सुतः स्मृतः

English

The great mountain is decorated with the enclosed settlements which have golden flanks mostly and which possess people of different races.

अध्याय ३९

श्लोक 17

ब्रह्मोवाच: जगद्धिताय जनिता मया त्वं परमेश्वरि ।स्वर्गान्मर्त्यं ततो याहि लोकानां हितकाम्यया

brahmovāca: jagaddhitāya janitā mayā tvaṃ parameśvari / svargānmartyaṃ tato yāhi lokānāṃ hitakāmyayā

हिन्दी अर्थ

इत्येतास्तनवस्तस्थ नामभिः परिकीर्तिता: । तास्तु वन्द्या नमस्याश्न प्रतिनाम तनुषु वे ५७ एतत्प्रोक्त॑ निदान वस्तननां नामभिः सह। महादेवस्य देवस्य भृगोस्तु शुणुत प्रजा: १६०

English

Hundreds of great Uragas (serpents) live there under the control of Garudas. They are terrible, fiery and inacce>sible and of venomous sight.

अध्याय ३९

श्लोक 18

सर्वदेवमयी त्वं तु सर्वलोकमयी तथा ।विधिना ये प्रदास्यन्ति तेषां वासस्त्रिविष्टपे

sarvadevamayī tvaṃ tu sarvalokamayī tathā / vidhinā ye pradāsyanti teṣāṃ vāsastriviṣṭape

हिन्दी अर्थ

डति महापुराणे वायुप्रोक्ते महादेवतनुव्ण नं नाम सप्तविशो5ष्याय: ।

English

In the great mountain Sunaga, there arc thousands of abodes of Daityas. These consist of mansions and palaces with huge ramparts and archways.

अध्याय ३९

श्लोक 19

एवमुक्त्वा ततो देवी ब्रह्माणं परमेश्वरी ।वन्द्यमाना सुरैः सिद्धैर् आजगाम धरातलम्

evamuktvā tato devī brahmāṇaṃ parameśvarī / vandyamānā suraiḥ siddhair ājagāma dharātalam

हिन्दी अर्थ

महादेव के शर्वें नाम की मूर्ति भूमि है, उसकी पत्नी विकेशी है और पुत्र अंगारक उनके चौथे स्वग्रेंगत ईशान दारीर कौ पत्नी शिवा है और पुत्र मनोजव है ।५१-५२। पाशुपत रूप अग्नि शरीर की पत्नी स्वाहा है और पुत्र स्कलद छडे आकाश रूप भीम शरीर की पत्नी दिदशाएँ हैं और स्वर्ग पुत्र है।१३-५४। ब्राह्मणों द्वारा पुजित जो उनका सातवाँ उम्र नामक शरीर है, उसकी पत्ली दीक्षा है ओर पुत्र सम्तान है। चन्द्रमा रूप महान् आठवें शरीर की पत्नी रोहिणी है और पुत्र बुध है ।१५-५६। महादेव के ये शरोर हैं, जिनका नामोल्लेखपूर्वंक वर्णन किया गया है। ये सब शरीर अपने नामों के साथ वन्दनीय और नमस्करणीय हैं। जो मनुष्य सूबं, जल, प्रृथ्वी, वायु, अग्नि, व्योम, दीक्षित और चद्द्रमा रूपी महादंव के शरीर के प्रति भक्ति प्रदरशित करता है, वह निश्चय ही प्रजावान् होता है और शिवसायुज्य प्राप्त करता है।५७-५६५। मैंने

English

On the great mountain Venumanta, there arc three

अध्याय ३९

श्लोक 20

युधिष्ठिर उवाच: यदायातेह सा तात ब्राह्मणो वचनाच्छुभा ।तदा देवाश्च लोकाश्च कथमङ्गेषु संस्थिताः

yudhiṣṭhira uvāca: yadāyāteha sā tāta brāhmaṇo vacanācchubhā / tadā devāśca lokāśca kathamaṅgeṣu saṃsthitāḥ

हिन्दी अर्थ

आप लोगों के निकट इस गुह्य और यशदायक शिवतत्त्व को कहा । इसके फल से मनुष्यों और चतुध्पदों का मंगल हो । इस प्रकार आप लोगों को नामों के साथ महादेव के शरीर वर्णन को सुना दिय। । अब इसके बाद भृगुवंश का वर्णन सुनिये

English

The rulers of the Vidyadharas, there, as valorous as Indra, are Uluka, Romasa and Mahanetra.

अध्याय ३९

श्लोक 21

कथं वा संस्थितागत्य कपिला सा द्विजोत्तम ।तीर्थे वा ह्यूषरे क्षेत्र एतन्मे कथय द्विज

kathaṃ vā saṃsthitāgatya kapilā sā dvijottama / tīrthe vā hyūṣare kṣetra etanme kathaya dvija

हिन्दी अर्थ

धनुश्नि हान्तर्गतग्रन्थ: ७. पुस्तके नास्ति । ऋटष्पिजं छा च्तु व्की स्ते वक्त

English

On the top of the great peak Vaikanka with caves and rivulets within, there lives Sugrlva, the fierce and power¬ ful, the unthwartable enemy of serpents and the son of Garuda with the great speed of the wind. This peak is of variegated colours due to jewels and minerals.

अध्याय ३९

श्लोक 22

मार्कण्डेय उवाच: सा तदा ब्रह्मणा चोक्ता धात्रा लोकस्य भारत ।ब्रह्मलोकाद्गता पुण्यां नर्मदां लोकपावनीम्

mārkaṇḍeya uvāca: sā tadā brahmaṇā coktā dhātrā lokasya bhārata / brahmalokādgatā puṇyāṃ narmadāṃ lokapāvanīm

हिन्दी अर्थ

देवों धाताषिधातारो मन्वन्तरविचारिणो द

English

The whole ofthat mountain is teeming with birds which destroy serpents. They are of huge size, valorous and powerful.

अध्याय ३९

श्लोक 23

तपः कृत्वा सुविपुलं नर्मदातटम् आश्रिता ।चचार पृथिवीं सर्वां सशैलवनकाननाम्

tapaḥ kṛtvā suvipulaṃ narmadātaṭam āśritā / cacāra pṛthivīṃ sarvāṃ saśailavanakānanām

हिन्दी अर्थ

तयो ज्येंष्ठा तु भगिनी बेधी श्रीलोकभाविनी । सा तु नारायण देवं पतिमासाथझ शोभनम् ॥. नारायणात्मजों साध्वी बलोत्साहो व्यजायत तस्यास्तु मानसाः पुत्रा ये चान्ये दिव्यचारिण: । ये बहन्ति विमानानि देवानों पुण्यकर्मणामू

English

Siva, the Lord of Yogins and Bhutas, whose emblem is the Bull, lives on the mountain Karanja.

अध्याय ३९

श्लोक 24

तदाप्रभृति राजेन्द्र कपिलातीर्थम् उत्तमम् ।सर्वपापहरं ख्यातमृषिसङ्घैर् निषेवितम्

tadāprabhṛti rājendra kapilātīrtham uttamam / sarvapāpaharaṃ khyātamṛṣisaṅghair niṣevitam

हिन्दी अर्थ

पाण्डुश्चव मुकण्डुश्व अह्यकोशों सनातनौं सनस्विन्‍्यां मुकण्डोशभ्व सार्फेण्डेयो बभूष ह

English

All round the ridges and slopes arc scattered the Bhutas, the unassailable Pramathas, with diverse dresses and features.

अध्याय ३९

श्लोक 25

तत्तीर्थे विधिवत् स्नात्वा कपिलायाः प्रयच्छति ।पृथ्वी तेन भवेद्दत्ता सशैलवनकानना

tattīrthe vidhivat snātvā kapilāyāḥ prayacchati / pṛthvī tena bhaveddattā saśailavanakānanā

हिन्दी अर्थ

सुतो वेदशिरास्तस्य सुर्धन्यायामजायत । पीवर्या वेदशिरसः पुत्रा बंशकराः स्मृताः ॥ मार्कण्डेया हति रूवाता ऋषयो वेदपारगाः सघूत जी घोले--भूगु से ख्याति के गर्भ में सुख दुःख के प्रभु, निखिल प्राणियों को शुभाशुभ देनेवाले, भन्वन्तर विहारी धाता और विधाता नामक दो पुत्र उत्पन्न हुये ।१। लोकभाविनी श्री देवी उनकी ज्येष्ठा भगिनी थीं, जिन्होंने नारायण को पति रूप में वरण किया। उस साध्वी के गर्भ से नारायण को बल और उत्साह नामक दो पुत्र उत्पन्न हुये ।२। ये ही क्‍यों इस साध्वी श्री देवी के वे सभी मानस पुत्र हैं, जो विव्यचारी

English

They say that the eight illustrious abodes of the eight Vasus, the noble souls of unmeasured power, are situated on the mountain Vasudhara.

अध्याय ३९

श्लोक 26

तां तु पश्यति यो भक्त्या दीयमानां द्विजोत्तमे ।तस्य वर्षशतं पापं नश्यते नात्र संशयः

tāṃ tu paśyati yo bhaktyā dīyamānāṃ dvijottame / tasya varṣaśataṃ pāpaṃ naśyate nātra saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

हैं और पुण्य कम करनेवाले देवों के विमानों का संचालन करते हैं । आयति और नियति नामक दो प्रसिद्ध कम्यकायें धाता और बविधाता की भार्या थीं, उन्हें पाण्ड और मृकण्डु नामक सनातन ब्रद्मकोश स्वरूप दो दृढ़ब्नत पुत्र उत्पन्न हुये ।३-४। मृकण्ड से मनस्विनी के गर्भ में मार्कण्डेय का जन्म हुआ मार्केण्डेय को मूर्धन्या से वेदशिरा नामक पुत्र हुआ। फिर पीवरी के गर्भ से वेदशिरा को बहुत से वंश बढ़ानेवाले पुत्र हुये ।

English

The seven holy hermitages of the seven sages and the abodes of the Siddhas are on the mountain Ratnadhatu.

अध्याय ३९

श्लोक 27

भूर्भुवः स्वर्महश्चैव जनः सत्यं तपस्तथा ।ते तत्पृष्ठं समाश्रित्य स्थिता लोका नृपोत्तम

bhūrbhuvaḥ svarmahaścaiva janaḥ satyaṃ tapastathā / te tatpṛṣṭhaṃ samāśritya sthitā lokā nṛpottama

हिन्दी अर्थ

वे सभी मार्कण्डेय नाम से प्रसिद्ध हैं और सभी वेदपारग ऋषि हैं ।५-६। पाण्डु को पुण्डरीका के गर्भ से ३०० द वायुपुराणम्

English

The abode of the four-faced lord, the great Prajapati (Brahma) is on the excellent mountain Hemasrriga. It is rever¬ ed by all living beings.

अध्याय ३९

श्लोक 28

मुखे ह्यग्निः स्थितो देवो दन्तेषु च भुजङ्गमाः ।धाता विधाता ह्योष्ठौ च जिह्वायां तु सरस्वती

mukhe hyagniḥ sthito devo danteṣu ca bhujaṅgamāḥ / dhātā vidhātā hyoṣṭhau ca jihvāyāṃ tu sarasvatī

हिन्दी अर्थ

पाण्डोश्र पुण्डरीकायां ग्ुतिमानात्मजो5भवत् । उत्पन्नौ द्युतिमन्तश्र सृजवानश्र तावुभो ७

English

On mountain Gajasaila, holy lord Rudras rejoice for ever along with (the groups of) Bhutas. They are respected by all living beings.

अध्याय ३९

श्लोक 29

सहस्रकिरणौ देवौ चन्द्रादित्यौ सुलोचनौ ।नासिकामध्यगश्चैव मारुतो नृपसत्तम

sahasrakiraṇau devau candrādityau sulocanau / nāsikāmadhyagaścaiva māruto nṛpasattama

हिन्दी अर्थ

पूर्णणास: सरस्वत्यां हो पुत्रावुदपादयत् । विरजं, चेव धर्मिष्ठं पव॑ंसं चेव तावुभो .. लोकपाल: सुधर्मात्मा गौरीपुत्र: प्रतापवान् पर्बंसः सर्वंगणानां प्रविष्ट:ः स महायशा:

English

The constructedabodesof Adityas, Vasus andRudras of unlimited splendour are on the great mountain Sumegha which resembles a cloud and is richly endowed with minerals. The mountain is beautified with many caves, bunds and hedges. The charming mansions of the Asvin gods too are there.

अध्याय ३९

श्लोक 30

ललाटे तु महादेवो ह्यश्विनौ कर्णसंस्थितौ ।नरनारायणौ शृङ्गे शृङ्गमध्ये पितामहः

lalāṭe tu mahādevo hyaśvinau karṇasaṃsthitau / naranārāyaṇau śṛṅge śṛṅgamadhye pitāmahaḥ

हिन्दी अर्थ

पर्वंसः पर्बसायां तु जनयामास बे सुतौ। यज्ञवासं च श्रीमन्तं सुतं काश्यपसेव च् ॥॥

English

The abodes of Devas have been established by Siddhas on the excellent mountain. Yaksas, Gandharvas and Kinnaras, are engaged in worship there for ever.

अध्याय ३९

श्लोक 31

कम्बलो ऽधिगतस् तात पाशधृग् वरुणस् तथा ।यमश्च भगवान्देव आश्रित्य चोदरं श्रितः

kambalo 'dhigatas tāta pāśadhṛg varuṇas tathā / yamaśca bhagavāndeva āśritya codaraṃ śritaḥ

हिन्दी अर्थ

तयोगत्रक रो पुत्रों तो जातो धर्मनिश्चितों १३ स्मृतिश्चाज़िरसः पत्नी जज्ञे तावात्मसंभवों । पुत्रो कन्याश्वतस्नश्च पुण्यास्ता लोकविश्वताः सिनीवाली कुछृश्चेब राका चानुमतिस्तथा। तथेव भरताग्नि च कीतिमन्तं च तावुभो

English

There is the city of noble Sunabha, son of Garuda on the mountain Svetodara, embellished with great mansions!

अध्याय ३९

श्लोक 32

खुरेषु पन्नगाश्चैवं पुच्छाग्रे सूर्यरश्मयः ।एवम्भूतां हि कपिलां सर्वदेवमयीं नृप

khureṣu pannagāścaivaṃ pucchāgre sūryaraśmayaḥ / evambhūtāṃ hi kapilāṃ sarvadevamayīṃ nṛpa

हिन्दी अर्थ

आभुतसंप्लवस्थायी लोकपालः स वे स्मृतः १६ जज्ञे कीतिमतश्चापि धेनुका तावकल्मषों । वरिष्ठ धृतिसनन्‍्त॑ चाप्युभावड्रिरसां बरो ३१७

English

There is a mansion embellished with palaces on the excellent mountain Pis'acaUa. That is the great abode ofKubera frequented by Yaksas and Gandharvas. '

अध्याय ३९

श्लोक 33

ये धारयन्ति च गृहे धन्यास्ते नात्र संशयः ।प्रातर् उत्थाय यस्तस्याः कुरुते तु प्रदक्षिणाम्

ye dhārayanti ca gṛhe dhanyāste nātra saṃśayaḥ / prātar utthāya yastasyāḥ kurute tu pradakṣiṇām

हिन्दी अर्थ

शतिमानू, धुतिमन्‍्त और सूृजवान् नामक तीन पुत्र हुये । उनके बीच द्यूतिमन्‍्त और सृजवान् के पृत्र-पोत्रों ने भागों से परस्पर सम्बन्ध स्थापित किया । इस प्रकार स्वायम्भुव मनु के बीत जाने पर मरीचि का वंश विस्तार सुनिये ७-८। मरीचि की पत्नी सम्भूति ने पूर्णमास नामक पुत्र और कुष्टि, पृष्टि, त्विषा और अपचिति नामक कन्याओं को उत्पन्न किया ॥६। पूर्णमास ने सरस्वती के ग भ से विरणज और पर्वंस नामक दो पुत्रों को उत्पन्न किया । विरज को सुधामा नामक विद्वान् पुत्र हुआ। सूधामसुत वराज ने प्राच्यदेवा का आश्रय लिया । गौरीपुत्र पर्स सुधासिक, प्रतापवान् और महायशस्वी हुये । लोकपाल होकर ये स्वंगण में प्रविष्ट हुये ।१० १२ पर्वस ने पर्वसा के गर्भ के यज्ञवास और कश्यप नामक धर्मनिर्णायक और वंश वृद्धि करने वाले दो पुत्रों को उत्पन्न किया। अज्िरा ने स्मृति के गर्भ से भरताग्नि और कीतिमान् नामक दो पुत्र और

English

On the oeautifully peaked Pandura, with ramparts and archways the city of Vidyadharas is situated. It has a series of big houses.

अध्याय ३९

श्लोक 34

प्रदक्षिणा कृता तेन सशैलवनकानना ।कपिलापञ्चगव्येन यः स्नापयति शङ्करम्

pradakṣiṇā kṛtā tena saśailavanakānanā / kapilāpañcagavyena yaḥ snāpayati śaṅkaram

हिन्दी अर्थ

सिनीबाली, कुह, राका एवं अनुमति नामक चार पृत्रियों को उत्पन्न किया ।१३-१४। अग्नि को संहती से प्ज॑न्य नामक पुत्र हुआ । फिर हिरण्यरोमा पर्जन्य ने मारीची के गर्भ से एक पुत्र उत्पन्न किया, जो महाप्रलय तक रहने वाला लोकपाल हुआ ।१६। कीतिमान् ने धेतुका से वरिष्ठ मौर धृतिमानू नामक दो पुत्रों को उत्पन्न, किया, जो दोनों ही आंगिरस श्रेष्ठ थे।१७। इस दोनों को हजारों पृत्र-पौत्र हुये। अनसूया ने अन्ि

English

On the mountain Sahasra-sikhara, there are thousand cities ofDaityas oflierce activities, wearing gold necklaces.

अध्याय ३९

श्लोक 35

उपवासपरो यस्तु तस्मिंस्तीर्थे नराधिप ।स्नात्वा ह्युक्तविधानेन तर्पयेत् पितृदेवताः

upavāsaparo yastu tasmiṃstīrthe narādhipa / snātvā hyuktavidhānena tarpayet pitṛdevatāḥ

हिन्दी अर्थ

कन्यां चेव श्रत नाम साता शद्भूपदस्य या। कर्दंसस्य तु या पत्नी पुलहस्य प्रजापतेः १६ यामेइतीते सहाततीताः पच्आउत्रेया प्रकीतिताः.. ३२०.

English

here are residences'of Pannagas (serpents) on the Mukuta mountain and multitudes of sages always live happily on Puspaka mount,

अध्याय ३९

श्लोक 36

तस्य ते वंशजाः सर्वे दश पूर्वे दशापरे ।तृप्ता रोहन्ति वै स्वर्गे ध्यायन्तो ऽस्य मनोरथान्

tasya te vaṃśajāḥ sarve daśa pūrve daśāpare / tṛptā rohanti vai svarge dhyāyanto 'sya manorathān

हिन्दी अर्थ

क्षमा तु सुषुवे पुत्रान्युलहस्य प्रजापते: ते चार्निवर्चस सर्वे येषां कीति: प्रतिष्ठिता

English

On the excellent mountain Supaksa, there are four mansions of Vaivasvata (Yama), Soma, Vayu and the king of serpents.

अध्याय ३९

श्लोक 37

एष ते विधिरुद्दिष्टः सम्भवो नृपसत्तम ।तीर्थस्य च फलं पुण्यं किमन्यत् परिपृच्छसि

eṣa te vidhiruddiṣṭaḥ sambhavo nṛpasattama / tīrthasya ca phalaṃ puṇyaṃ kimanyat paripṛcchasi

हिन्दी अर्थ

कर्दमभ्राम्वरीषश्च सहिष्णुश्चेति ते ञ्यः ऋषिधंनकपीवांश्च शुभा कन्या च पीवरी २६ कर्दमस्य श्रुतिः पत्नी आत्रेय्यजनयत्सुतान् । पुत्र शद्भूपदं चेव कस्यां काम्यां तथेव च २७ से पाँच निष्पाप पुत्र और एक कन्या को उत्पन्न किया। इस कन्या का नाम श्रुति था, जो शब्लपादकी माता और प्रजातति कदम ऋषि की पत्नी थी। सत्यनेत्र, हृव्य, आपोमूर्ति, शनीर्वर और सोम वामक जिन पाँचों पुत्रों को अनसूया ने उत्पन्न किया था, वे स्वायम्भुव मनु के अधिकार काल में विद्यमान् थे। याम ( नामक देवगण ) के अतीत होने पर ये पाँचों अत्रिवंद्याधर भी विलुप्त हो गये ।7५-२०। स्वायम्भुव मनु के अधिकार

English

In their respective places, their respective gods are highly worshipped by Gandharvas, Kinnaras, Yaksas, Nagas (serpents) and excellent Vidyadharas and Siddhas.

अध्याय ३९

श्लोक 38

धन्यं यशस्यमायुष्यं सर्वदुःखघ्नमुत्तमम् ।यच्छ्रुत्वा सर्वपापेभ्यो मुच्यते नात्र संशयः

dhanyaṃ yaśasyamāyuṣyaṃ sarvaduḥkhaghnamuttamam / yacchrutvā sarvapāpebhyo mucyate nātra saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

काल में उनके सैकड़ों हजारों पृत्र-पोत्रगणण महात्मा अनत्रि के साथ विद्यमान् थे। प्रीति के गर्भ के पुलस्त्य को दत्तालि नामक पुत्र हुआ। ये ही स्वायम्भुव मनु के समय पूर्व जन्म में अगस्त्य थे । उन्हें देवबाहु ओर बिनीत नामक दो भाई और हुये । इनकी छोटी बहन का नाम सद्गती था, जो अग्नि से ब्याही गयी थी और पर्जन्य की माता थी पुलस्त्य ऋषि के ज्येष्ठ पुत्र धीमान् दत्तालि ने अपनी पत्नी में सुजंघ प्रभृत्रि बहुतेरे पुत्रों को

English

In their respective places, their respective gods are highly worshipped by Gandharvas, Kinnaras, Yaksas, Nagas (serpents) and excellent Vidyadharas and Siddhas.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 39
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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