Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
42
अध्याय 42 / 232

Adhyaya 42

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अध्याय ४२

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे नर्मदामाहात्म्ये कुण्डलेश्वरतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नामैकचत्वारिंशो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय ४२ श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेत्तु राजेन्द्र पिप्पलेश्वरमुत्तमम् ।यत्र सिद्धो महायोगी पिप्पलादो महातपाः

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe narmadāmāhātmye kuṇḍaleśvaratīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāmaikacatvāriṃśo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 42 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gacchettu rājendra pippaleśvaramuttamam / yatra siddho mahāyogī pippalādo mahātapāḥ

हिन्दी अर्थ

बक्षी, सरीसुप और स्थावरादि पांचभौतिकों का जो पुष्पकाल है, वही आतंव कहलाता है। ऋतुत्व और

English

The celestial river of sacred waters springs from it (the reservoir or nectar). That river of clear transparent water flows through the sky through the seventh path of the wind. 1

अध्याय ४२

श्लोक 2

युधिष्ठिर उवाच: पिप्पलादस्य चरितं श्रोतुमिच्छाम्यहं विभो ।माहात्म्यं तस्य तीर्थस्य यत्र सिद्धो महातपाः

yudhiṣṭhira uvāca: pippalādasya caritaṃ śrotumicchāmyahaṃ vibho / māhātmyaṃ tasya tīrthasya yatra siddho mahātapāḥ

हिन्दी अर्थ

इदमर्ध नास्ति क. पुस्तके । ऋतुत्वमार्तवत्वं च पितृत्व॑ च॑ प्रकीतितम् । इत्येते पितरो ज्ञेया ऋतवश्चा5डर्तवाश्च ये २४ सर्व भुतानि तेम्यो3थ ऋतुकालाद्विजज्ञिरे । तस्मादेतेडपि पितर आतंबा इति नः श्रुतम् २५ वन्तरेषु सर्वेषु स्थिताः कालामिमानिनः । स्थानाभिमानिनो होते तिष्ठन्तीह प्रसंयमात् २६ अग्निष्वात्ता बहिषदः पितरो द्विविधाः स्पृताः। जज्ञाते च पितृम्पस्तु द्वे कन्ये लोकविश्युते

English

It turns back on reaching the mass of brilliance. It is resorted to by luminary bodies. It extends to the full length of the sky, with thousands of crores of stars.

अध्याय ४२

श्लोक 3

कस्य पुत्रो महाभाग किमर्थं कृतवांस्तपः ।एतद्विस्तरतः सर्वं कथयस्व ममानघ

kasya putro mahābhāga kimarthaṃ kṛtavāṃstapaḥ / etadvistarataḥ sarvaṃ kathayasva mamānagha

हिन्दी अर्थ

मेना च धारिणी चेवब याम्यां विश्वमिदं धृतम् । वितरस्ते निजे कन्ये धर्मार्थ प्रददुः शुभे ॥। ते उभे ब्रह्मवादिन्यों योगिन्यों चेव ते उभे र८ अग्निष्वात्तास्तु ये प्रोक्तास्तेषां मेना तु मानसो । धारणी मानसी चेब कन्या बहिषदां स्पृता

English

While the lordly elephant of lord Indra moves about in the firmament, he sportively agitates the water within it.

अध्याय ४२

श्लोक 4

मार्कण्डेय उवाच: मिथिलास्थो महाभागो वेदवेदाङ्गपारगः ।याज्ञवल्क्यः पुरा तात चचार विपुलं तपः

mārkaṇḍeya uvāca: mithilāstho mahābhāgo vedavedāṅgapāragaḥ / yājñavalkyaḥ purā tāta cacāra vipulaṃ tapaḥ

हिन्दी अर्थ

हफहफ््््््ज् ॒ औााा न्‍ वकीऑििणज--++++/+8+++पैहतै/ैपप आतंवत्व पितृत्व कहलाता है; इसलिये ऋतु और आतेंब पितर कहे गये हैं ।२३-२४। सुना है कि सकल भूत ऋतुकाल में ऋतु और आतंव से उत्पन्न हुये हैं; इसलिये आतंव भी पितर हैं। सभी मन्वन्तरों में ये स्थानाभिमानी और कालाभिमानी संयमपूर्वक वतंमान रहते हैं। अग्निष्वात्ता और बहिषदू नामक दो तरह के पितर हैं। इन पितरों ने लोकप्रसिद्ध दो कन्याओं को उत्पन्न किया ।२५-२७। उनका नाम था मेना और

English

WhenSiddhas pass through the sky in their aerial chariots (great many in number), they have a sip in the sacred and healing water of this river.

अध्याय ४२

श्लोक 5

तापसी तस्य भगिनी याज्ञवल्क्यस्य धीमतः ।सा सप्तमे ऽपि वर्षे च वैधव्यं प्राप दैवतः

tāpasī tasya bhaginī yājñavalkyasya dhīmataḥ / sā saptame 'pi varṣe ca vaidhavyaṃ prāpa daivataḥ

हिन्दी अर्थ

धारिणी। इन्हीं दोनों ने इस संसार को धारण किया है। ब्रह्मवादि नी और परमयोगिनी उन कन्माओं को पितरों ने धर्म के लिये दान कर दिया । अग्निष्वात्ता की मानस पूतन्री मेना थी और बहिषद् की मानस कन्या धारिणी थी । सोमपीथी वहिषद पितर ने सुन्दरी धारिणी को मेरु से ब्याह् दिया और अग्निष्वात्ता ने हिमालय से मेना का ब्याह कर दिया। अब उनके पोत्नरों की कथा सुनिये ।२५-२१॥ हिमालय की पत्नी मेला से मैनाक

English

Just as the sun revolves everyday, so this river urged by the wind, flows through various places.

अध्याय ४२

श्लोक 6

पूर्वकर्मविपाकेन हीनाभूत्पितृमातृतः ।नाभूत्तत्पतिपक्षे ऽपि कोऽपीत्येकाकिनी स्थिता

pūrvakarmavipākena hīnābhūtpitṛmātṛtaḥ / nābhūttatpatipakṣe 'pi ko'pītyekākinī sthitā

हिन्दी अर्थ

नामक पुत्र उत्पन्न किया। उसे नदियों में श्रेष्ठ एक गंगा नाम की बेटी भी हुई जो लवण-सागर की पत्नी है! मैनाक का एक छोटा भाई भी था, जिसका नाम क्रोंच था। इसी के नाम पर क्रॉंच द्वीप हुआ है मेरुपत्नी धारणी ने दिव्य औषधियों से युक्त मन्दार नामक पुंत्र को उत्पन्न किया एवं बेला, नियति और आयति नामक तीन पृत्रियों को भी जन्म दिया।३३। इनमें आयति से धाता ने और नियति से विधाता ने

English

It extends to eighty-four Yojanas allround. It circumam¬ bulates the Meru with great velocity.

अध्याय ४२

श्लोक 7

भूमौ भ्रमन्ती भ्रातुः सा समीपमगमच्छनैः ।चचार च तपः सो ऽपि परलोकसुखेप्सया

bhūmau bhramantī bhrātuḥ sā samīpamagamacchanaiḥ / cacāra ca tapaḥ so 'pi paralokasukhepsayā

हिन्दी अर्थ

+घनुश्चिह्वान्तगंतग्रन्थ: ड. पुस्तके नास्ति ।

English

The water currents are split by the fiery wind and the river falls upon the four northern peaks of Meru.

अध्याय ४२

श्लोक 8

चचार सापि तत्रस्था शुश्रूषन्ती महत्तपः ।कस्मिंश्चित् समये साथ स्नाताहनि रजस्वला

cacāra sāpi tatrasthā śuśrūṣantī mahattapaḥ / kasmiṃścit samaye sātha snātāhani rajasvalā

हिन्दी अर्थ

स्वायंभुवेषन्तरे पूर्व तयोर्बें फीतिताः प्रजा: । सुषुबे सागरादुबेला कन्यामेकामनिन्दिताम् इत्युक्तः कथयामास सुमो दक्षाश्ितां कथाम् ।. शांशपायनमामन्त्र्य ध्यम्बकाच्छापकारणम्

English

After emerging on the excellent sides of ridges of these peaks of Meru, the waters, divided into four, flow thus.

अध्याय ४२

श्लोक 9

अन्तर्वासो धृतवती दृष्ट्वा कर्पटकं रहः ।याज्ञवल्क्यो ऽपि तद्रात्रौ सुप्तो यत्र सुसंवृतः

antarvāso dhṛtavatī dṛṣṭvā karpaṭakaṃ rahaḥ / yājñavalkyo 'pi tadrātrau supto yatra susaṃvṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

ततस्त्वभ्यचिता: सर्वा न्यवसंस्ता पितुग है द द ४०

English

After flowing through the supportless firmament for sixty thousand Yojanas, the glorious river falls through the four sides of Meru. 2

अध्याय ४२

श्लोक 10

स्वप्नं दृष्ट्वात्यजच्छुक्रं कौपीने रक्तबिन्दुवत् ।विराजितेन तपसा सिद्धं तदनलप्रभम्

svapnaṃ dṛṣṭvātyajacchukraṃ kaupīne raktabinduvat / virājitena tapasā siddhaṃ tadanalaprabham

हिन्दी अर्थ

अकरोत्स नति दक्षे न कदाचिन्महेश्वरः । जामाता श्वशुरे तस्मिन्स्वभावोत्तजसि स्थितः ४२ ब्याह किया ।३४। स्वायम्भुव मन्वन्तर के समंय इनकी सन्‍्तत्तियों की चर्चा की गयी है। वेला ने सागर को पत्नी होकर एक अपूर्व सुन्दरी कन्या को उत्पन्न किथा। सावर्भि ने उस सामुद्री नाम की कन्या को प्राचीन वहिष् के हाथ में सौंपा । अपने पति से उस सामुद्री ते दस पुत्रों को प्राप्त किया वे सभी प्रचेतस् धनुववेद के पारगामी विद्वान थे। चाक्षष मनु के अधिकार काल में भगवान् ध्यम्बक के अभिशाप से स्वायम्भुव दक्ष

English

This splendid, sacred river flowing through the four bases (feet) of Meru, falls again on the eastern Mandara.

अध्याय ४२

श्लोक 11

यावत्प्रबुद्धो विप्रो ऽसौ वीक्ष्योच्छिष्टं तद् अंशुकम् ।चिक्षेप दूरतो ऽस्पृश्यं शौचं कृत्वा विधानतः

yāvatprabuddho vipro 'sau vīkṣyocchiṣṭaṃ tad aṃśukam / cikṣepa dūrato 'spṛśyaṃ śaucaṃ kṛtvā vidhānataḥ

हिन्दी अर्थ

उनके पृत्र रूप में उत्पन्न हुये थे ।३५-३७। शांशपायन ने यह कथा सुत कर सूत से पूछा--चाक्षुष मन्वच्तर में महादेव के शाप से दक्ष किस प्रकार उत्पन्न हुआ इसको कृपाकर केहिये। सूतजी शांशपायन को सम्बोधन करके महादेव जी ने जिस कारण दक्ष को शाप दिया, वह कथा कहने लगे। पहले कहा जा चुका है कि दक्ष को आठ कन्यायें थीं, उन्हें अपने घर में लाकर दक्ष ने उनका अच्छा सत्कार किया। इस प्रकार सत्कृत होकर

English

The eastern branch of the river flows over the Mandara which is the abode of Devas and all the groups of •Siddhas, which has many rivulets, caves, golden and variegated lands, ridges. It flows with the crystal clear water that subdues the arrogance and valour of the side-bunds. It flows round the beautiful Caitraratha overflowing the path. This river of the firmament then enters the excellent lake Arunoda (Kara Kul, NE Pamirs).

अध्याय ४२

श्लोक 12

निषिद्धं तु निशि स्नानमिति सुष्वाप स द्विजः ।निशीथे सापि तद्वस्त्रं भगस्यावरणं व्यधात्

niṣiddhaṃ tu niśi snānamiti suṣvāpa sa dvijaḥ / niśīthe sāpi tadvastraṃ bhagasyāvaraṇaṃ vyadhāt

हिन्दी अर्थ

वे कन्यायें पिता के घर में रहने लगीं ।३८-४०। लेकिन दक्ष ने अपनी सबसे बड़ी लड़की सती को, जो कि महादेव से ब्याही हुई थी, नहीं बुलाया; क्योंकि दक्ष का महादेव से कुछ मनसुटाव था। बात यह थी कि किसी दिन महादेव ने दक्ष को प्रणाम नहीं किया था । यह दक्ष को बहुत बुरा लगा कि, जामाता होकर भी ये ससुर के सामने अभिमान करते हैं ।४१-४२। सती को जब यह मालूम हुआ कि हमारी सब बहने मायके » इदमर्ध नास्ति क. पुस्तके ॥

English

Verses 3-11: This poetic synthesis of the heavenly Gariga (Galaxy) as the source of glaciers and rivers of Asia is repeated in other Puranas like

अध्याय ४२

श्लोक 13

प्रातर् अन्वेषयामास मुनिर्वस्त्रमितस्ततः ।ततः सा ब्राह्मणी प्राह किं अन्वेषयसे प्रभो ।केन कार्यं तव तथा वदस्व मम तत्त्वतः

prātar anveṣayāmāsa munirvastramitastataḥ / tataḥ sā brāhmaṇī prāha kiṃ anveṣayase prabho / kena kāryaṃ tava tathā vadasva mama tattvataḥ

हिन्दी अर्थ

तंतोडब्रवीत्सा पितरं देवो क्रोभादमर्धिता यवीयसीश्यो ज्यायसीं कितु पूजामिमां प्रभो ॥

English

Though the river system described in the remaining part of the

अध्याय ४२

श्लोक 14

याज्ञवल्क्य उवाच: अपवित्रो मया भद्रे स्वप्नो दृष्टो ऽद्य वै निशि ।सक्लेदं तत्र मे वस्त्रं निक्षिप्तं तन्न दृश्यते

yājñavalkya uvāca: apavitro mayā bhadre svapno dṛṣṭo 'dya vai niśi / sakledaṃ tatra me vastraṃ nikṣiptaṃ tanna dṛśyate

हिन्दी अर्थ

ब्रहिष्ठाभ्य तपिष्ठाश्व महायोगाः सुधामिकाः । गुण श्ववाधिकाः शझाध्याः सर्वे ते श्यम्वकात्सति तथोक्ता पितरं सा ये क्द्धा देवीदमब्रवीत् । वाइमसनः कर्म भिर्यस्माददुष्टां मां विगहेसे ॥ तस्मात्त्यजाम्यहूं देहमिदं तात तवा55ससजम् है ५१ ततस्तेनावमानेन सती दुःखादमर्षिता । अब्रवीद्गचन देवी नमस्क्ृत्वा (त्य) महेश्वरम् ५२ यत्राहमुपपत्स्येहहूं पुनर्देहिन भात्वता । तत्राप्यहमसंसूढा संसूता धामिकी पुनः ॥।

English

After coming out from Arunoda, the gently-flowing river falls on the mountain Sltanta (Kashghar rang C )aboundiii

अध्याय ४२

श्लोक 15

तच्छ्रुत्वा ब्राह्मणी वाक्यं भीतभीतावदन् नृप ।तद्वस्त्रं तु मया विप्र स्नात्वा ह्यन्तः कृतं महत्

tacchrutvā brāhmaṇī vākyaṃ bhītabhītāvadan nṛpa / tadvastraṃ tu mayā vipra snātvā hyantaḥ kṛtaṃ mahat

हिन्दी अर्थ

गच्छेयं धर्मपत्नीत्व॑ ध्यम्बकस्येव धर्मतः ५३

English

The sacred and excellent river is called Slta. Beino- held within the various groves and bushes, it is further divided into several branches.

अध्याय ४२

श्लोक 16

तस्यास्तद्वचनं श्रुत्वा हाहेत्युक्त्वा महामुनिः ।निपपात तदा भूमौ छिन्नमूल इव द्रुमः

tasyāstadvacanaṃ śrutvā hāhetyuktvā mahāmuniḥ / nipapāta tadā bhūmau chinnamūla iva drumaḥ

हिन्दी अर्थ

पहुँची हुई हैं, तो वह भी बिता बुलावे के ही वहाँ पहुंच गयी । सती वहाँ पहुंची तो सही; लेकिन पिता ने उनका वैसा सत्कार नहीं किया, जेसा कि उनकी और बहनों का किया था। क्रोध से तमक कर सती ने पिता से कहा --तात ! आप छोटी बहनों का तो बड़ा सत्कार कर रहे हैं; किन्तु मेरा निरादर कर रहे हैं ।४३-४४। मैं सब बहनों से बड़ी हे. इसलिये निरादर के योग्य नहीं हो सकती। यह सुनते ही लाल-लाल आँखें करके दक्ष ने सती से कहा - यह सत्य है कि तू मेरी ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और आदरणीय पुत्री हो; किन्तु मैं अपनी और लड़कियों के पतियों को बहुत अच्छा समझता है । इसलिये कि वे सब के सब महादेव से ज्यादा गुणी; प्रशंसनीय; घारमिक, महायोगी. तपस्वी और ब्रह्मकर्म को जानने वाले हैं। वसिष्ठ, पुलस्त्य, अज्िरा, पुलह, ऋतु, भूगु और मरीचि आदि मेरे अच्छे जामाता हैं ॥४५-४८। महादेव मेरे विरुद्ध हैं और तू उन्हीं

English

From the peek of Sltanta, 1 it falls on the mountain Sukunja. 1 From that mountain, it falls on the the mountain Sumanjasa. 1

अध्याय ४२

श्लोक 17

किमेतदिति सेत्युक्त्वा ह्याकाशमिव निर्मला ।आश्वासयन्ती तं विप्रं प्रोवाच वचनं तदा

kimetaditi setyuktvā hyākāśamiva nirmalā / āśvāsayantī taṃ vipraṃ provāca vacanaṃ tadā

हिन्दी अर्थ

की आत्मा हो, एवं उनकी ही सेवा करती हो; इसलिये मैं तेरा सत्कार नहीं कर सकता। मूढ़चित्त दक्ष ने शाप पाने की इच्छा से सती से इस प्रकार कहा। परमर्षिगण भी ऐसा ही समझते हैं ।४६-५०। यह् सुनते ही सती ने क्रुढ होकर पिता से कहा-मन, वचन और कम से मैं पवित्र हे, फिर भी आप मेरा तिरस्कार करते हैं। इसलिये आपके द्वारा जो यह मेरा शरीर उत्पन्न हुआ है, उसे ही मैं छोड़ देती हैं। उस अपमान

English

Therefrom it falls on the mount Malyavan 2 and comes to Vaikanka and from Vaikanka it passes to Maniparvata and then falls on the mountain Rsabha full of caves.

अध्याय ४२

श्लोक 18

वदस्व कारणं तात गुह्याद् गुह्यतरं यदि ।प्रतीकारो ऽस्य येनैव विमृश्य क्रियते त्वरा

vadasva kāraṇaṃ tāta guhyād guhyataraṃ yadi / pratīkāro 'sya yenaiva vimṛśya kriyate tvarā

हिन्दी अर्थ

से सती को बड़ा दुःख हुआ। उसने मन ही मन महादेव को प्रणाम करके कहा--५१-१२। मैं जहाँ कहीं अपने इस तेजस्वी शरीर से जन्म ग्रहण करूँगी, वहाँ बिना किसी मोह-माया में फंसे ऐसा धर्माचरण करूँगी, २१४ द . वायुपुराणम्

English

Piercing through thousands of mountains thus, the river falls on the mountain Jathara resorted to by Siddhas*

अध्याय ४२

श्लोक 19

ततः स सुचिरं ध्यात्वा लब्धवाग्वै ततः क्षणम् ।प्रोवाच साध्वसमना यत्तच्छृणु नरेश्वर

tataḥ sa suciraṃ dhyātvā labdhavāgvai tataḥ kṣaṇam / provāca sādhvasamanā yattacchṛṇu nareśvara

हिन्दी अर्थ

तत आग्नेपीसमुत्येन वायुना समुदीरितः । सब'ड्ड भ्यो विनिःसृत्य वह्लिभेस्म चकार तामू

English

From there the river again falls on the Devakuta mountain, the lower part of which extends upto the sea. In this way, the river gradually reaches the plains.

अध्याय ४२

श्लोक 20

नात्र दोषो ऽस्ति ते कश्चिन्मम चैव शुभव्रते ।तवोदरे तु गर्भो यस्तत्र दैवं परायणम्

nātra doṣo 'sti te kaścinmama caiva śubhavrate / tavodare tu garbho yastatra daivaṃ parāyaṇam

हिन्दी अर्थ

तदुपश्रुत्य निधन सत्या देवो5थ शुलभूत् । संवाद च तयोर्बुद्धृवा याथातथ्येन शंकरः ॥ दक्षस्याथ ऋषीणां च चुकोप भगवान्प्रभुः पशद

English

Thus flooding through thousands of valleys, hundreds

अध्याय ४२

श्लोक 21

तस्य तत्त्वेन रक्षा च त्वया कार्या सदैव हि ।विनाशी नैव कर्तव्यो यावत्कालस्य पर्ययः

tasya tattvena rakṣā ca tvayā kāryā sadaiva hi / vināśī naiva kartavyo yāvatkālasya paryayaḥ

हिन्दी अर्थ

तस्माहृवस्वतं प्राप्य पुनरेव मह्॒षयः । उत्पत्स्यन्ते द्वितीये बे समर यज्ञे ह्ययोनिजाः .. हद हुते वे ब्रह्मणा शक्के चाक्षुषस्यात्तरे मनोः । अभिव्याह॒त्य च॑ ऋषीन्दक्षमभ्यगसत्पुनः ५ € भविता चाक्षुषो राजा चाक्षुपस्थ समस्वये । प्राचीनवर्हिषः पोन्रः पुत्रश्चव प्रचेतसः १६० दक्ष इत्येव नाम्ना त्वं मार्षायां जनयिष्यसि । कन्यायां शाखिनां चंव प्रांप्ते वे चाक्षुयेपन्तरे

English

Modern Mfagh Ate" m ° Untains - Ute Hwan ® H° o. Ellina was believed to be the

अध्याय ४२

श्लोक 22

तथेति व्रीडिता साध्वी दूयमानेन चेतसा ।अपालयच्च तं गर्भं यावत्पुत्रो ह्यजायत

tatheti vrīḍitā sādhvī dūyamānena cetasā / apālayacca taṃ garbhaṃ yāvatputro hyajāyata

हिन्दी अर्थ

अहं तत्रापि ते विष्नमाचरिष्यासि दुमंते । धर्मर्थकामयुक्तेषु कमंस्विह पुनः पुनः .. दर ह॒त्वा5ःहुति ततः क्लूर अपस्त्यक्ष्यन्ति कमंसु । इहैव वत्स्यसि तथा दिव॑ हित्वाइध्युगक्षयात्ु.

English

Falling from the peak of Kalinga, it flows on to the mountain Rucaka. From there it flows to Ni§adha and then to Tamrabha. Falling from the peak of Tamrabha, it flows to mount Svetodara, thence to the lordly mountain Sumula and then to the mountain Vasudhara.

अध्याय ४२

श्लोक 23

जातमात्रं च तं गर्भं गृहीत्वा ब्राह्मणी च सा ।अश्वत्थच्छायाम् आश्रित्य तम् उत्सृज्य वचो ऽब्रवीत्

jātamātraṃ ca taṃ garbhaṃ gṛhītvā brāhmaṇī ca sā / aśvatthacchāyām āśritya tam utsṛjya vaco 'bravīt

हिन्दी अर्थ

जिससे कि मैं फिर महादेव की ही पत्नी होऊ। इस तरह कह कर सती वहीं पर धोगासन लगा कर बैंठ गयीं। मन ही मन उन्होंने अग्नि की धारणा की ।५३-५४॥ उस धारणा से आग्नेयी वाथु उत्पन्न हुई, जिसने समूची देह में आग भड़का कर उसे राख कर दिया । शूलधारी महादेव ने जब यह सुना और उस समाचार की सत्यता पर भी विश्वास हो गया, तब वे ऋषियों भौर दक्ष पर बहुत क्रुद्ध हुये ।१५-५६॥। उन्होंने

English

From there it flows to Hemakuta and thence to Deva- srnga, thereafter it flows to Mahfisaila and then to Pisacaka mountain.

अध्याय ४२

श्लोक 24

यानि सत्त्वानि लोकेषु स्थावराणि चराणि च ।तानि सर्वाणि रक्षन्तु त्यक्तं वै बालकं मया

yāni sattvāni lokeṣu sthāvarāṇi carāṇi ca / tāni sarvāṇi rakṣantu tyaktaṃ vai bālakaṃ mayā

हिन्दी अर्थ

कहा-दक्ष ! तुमने जिस कारण मेरे लिये सती का तिरस्कार किया और अपनी दूसरी सब बेटियों का पतियों के साथ सत्कार किया; इसलिये तुम्हारे पक्षपाती ऋषिगण मृत्यु मुख में प्राप्त होंगे एवं वेवस्वत मन्वन्तर में मेरे द्वितीय यज्ञ से उत्पन्न होकर वे अयोनिज कहलायेंगे ।५७-५८। चाक्षुष मनु के अधिकार काल में ब्रह्मा इन्द्र का यज्ञ करा रहे थे कि, ऋषियों को वैसा कहते हुये महादेव दक्ष के समीप पहुंचे ओर कहा--चाक्षुष न्वन्तर में ही चाक्षुप नाम का एक राजा होगा, जो प्राचीनबहिष् का और प्रचेता का पुत्र होगा। वही राजा तुम्हें वृक्षकत्या मार्षा के गर्भ से उत्पन्न करेगा और तुम्हारा नाम दक्ष ही रखेगा ।५९-६!१ दक्ष बोले--हे दुमंति ! मैं तुम्हारे धर्मार्थयुक्त कर्म में उस जन्म में भी बार-बार विधघ्न उपस्थित करूँगा । जिस लिये तुमने मेरे कारण ऋषियों के प्रति क्रूरता का व्यवहार किया है; इसलिये ह्विजगण यज्ञ

English

From the excellent mountain Pisacaka, it flows to Pahcakuta and from Paiicakuta to Kailasa, the mountain residence of Devas.

अध्याय ४२

श्लोक 25

एवमुक्त्वा गता सा तु ब्राह्मणी नृपसत्तम ।तथागतः स तु शिशुस् तत्र स्थित्वा मुहूर्तकम्

evamuktvā gatā sā tu brāhmaṇī nṛpasattama / tathāgataḥ sa tu śiśus tatra sthitvā muhūrtakam

हिन्दी अर्थ

में देवों के साथ तुम्हारी पूजा नहीं करेंगे । वे भाहुति देने के बाद कम में यानी यज्ञकुण्ड में जल छोड़ दिया करेंगे और तुम स्वर्ग छोड़ कर इसी भूलोक में युगक्षय पर्यन्‍्त निवास करोगे ।६२-६४ . ता

English

Whirling about in its bowels of caves and ridges, it falls on the excellent mountain Himavat.

अध्याय ४२

श्लोक 26

पाणिपादौ विनिक्षिप्य निकुञ्च्य नयने शुभे ।आस्यं तु विकृतं कृत्वा रुरोद विकृतैः स्वरैः

pāṇipādau vinikṣipya nikuñcya nayane śubhe / āsyaṃ tu vikṛtaṃ kṛtvā ruroda vikṛtaiḥ svaraiḥ

हिन्दी अर्थ

सर्वेषासेव लोकानां भूर्जोकस्त्वादिसच्यते । तमहूं धारयिष्यासि निदेशात्परमेष्ठिनः . ६५ अस्यां क्षितौ बृता लोका: सर्वे तिष्ठन्ति भास्कराः-। तानहं धारयामीह सतत न तवा5ज्षया ६६ चातुर्व््य हि देवानां ते चाप्येकत्र भुझ्जते। नाहं तेः सह भोक्ष्यामि ततो दास्यन्ति ते पृथक् ॥ ततो देवे: स ते: सार्ध नेज्यते पृथमिज्यते

English

Piercing through thousands of mountains thus, it flows quickly irrigating hundreds of land surfaces. Then it flows through thousands of forests and hundreds of caves and falls into the southern sea.

अध्याय ४२

श्लोक 27

तेन शब्देन वित्रस्ताः स्थावरा जङ्गमाश्च ये ।आकम्पिता महोत्पातैः सशैलवनकानना

tena śabdena vitrastāḥ sthāvarā jaṅgamāśca ye / ākampitā mahotpātaiḥ saśailavanakānanā

हिन्दी अर्थ

कृत्वा गृहपति दक्ष ज्ञानानामीश्वरं प्रभुम् । दक्षो नाम महायज्ञ:ः सो5पयजदवतेः सह॒.. ऐई६ अथ देवी सती या तु प्राप्ते बेजस्वतेडत्तरे मेनायां तामु्मां देवों जनयामास शलराद् (७० या तु देवी सती पुर्व॑ ततः पश्चादुमाइभवत् । सहक़्ता भवस्थैषा न तथा मुच्यते भवः ॥। हि

English

This river is one Yojana in breadth; it is hidden in the bowels of the peaks of mountain. It is held on head by noble-souled Sankara, lord of Devas. It is sanctifying,Oleading Brahmana. It quells even terrible sins. By virtue of the contact with the body of lord Sankara, the great river has its waters rendered doubly sanctimonious in all the worlds.

अध्याय ४२

श्लोक 28

ततो ज्ञात्वा महद्भूतं क्षुधाविष्टं द्विजर्षभम् ।न जहाति नगश्छायां पानार्थाय ततः परम् ।अपिबच्च सुतं तस्मादभृतं चैव भारत

tato jñātvā mahadbhūtaṃ kṣudhāviṣṭaṃ dvijarṣabham / na jahāti nagaśchāyāṃ pānārthāya tataḥ param / apibacca sutaṃ tasmādabhṛtaṃ caiva bhārata

हिन्दी अर्थ

मरीच॑ कश्यपं देवी यथाउदितिरनुत्रता । साध्यं नारायणं श्रीस्तु मघबन्तं श्री यथा 0 .. विष्णुं कीर्ती रुचिः सुर्य दसिष्ठं चाप्यरुन्धती । नेतास्तु विजह॒त्येतान्भत॒ न्देव्यः कर्थंचन ॥ द

English

From all round that mountain Himavat, through its many openings, thousands of rivers spring forth. They are known by other names. The river Ganga is resorted to by Siddhas and its waters are drunk by Rudras, Sadhyas, Anilas and Adityas. Blessed are the lands through which this great and reputed river flows.

अध्याय ४२

श्लोक 29

एवं स वर्धितस् तत्र कुमारो निजचेतसि ।चिन्तयामास विश्रब्धः किं मम ग्रहगोचरम्

evaṃ sa vardhitas tatra kumāro nijacetasi / cintayāmāsa viśrabdhaḥ kiṃ mama grahagocaram

हिन्दी अर्थ

रुठ़ बोले-- सब लोकों में यह भूलोक ही श्रेष्ठ कहा गया है। इसका धारण मैं परमरेष्ठी की आज्ञा से ही कर रहा हूँ इस क्षितितल में भास्क्रोपम लोक विराजमान हैं। उन्हें मैं सदा धारण किये रहता हूँ, वह कुछ तुम्हारी आज्ञा से नहीं ।६५-६६। देवों के बीच भी चतुर्व्ण व्यवस्था है; पर वे सभी एक साथ ही बैठ कर खान-पान कर लिया करते हैं और मैं उनके साथ नहीं खाता; इश्नलिये मुझे पृथक किया जाता है।

English

Now I shall describe the western side of Meru mountain which is holy and contains several mines of precious stones and

अध्याय ४२

श्लोक 30

ततः क्रूरसभाचारः क्रूरं दृष्ट्वा निरीक्षितः ।पपात सहसा भूमौ शनैश्चारी शनैश्चरः

tataḥ krūrasabhācāraḥ krūraṃ dṛṣṭvā nirīkṣitaḥ / papāta sahasā bhūmau śanaiścārī śanaiścaraḥ

हिन्दी अर्थ

इसीलिये वे लोग देवों के साथ मेरी पूजा न कर पृथक पूजा करते हैं (६७। इस तरह अत्यन्त तेजस्वी रुद्र से शप्त होकर स्वायम्भुव मन्वन्तर के बाद मनुष्यलोक में दक्ष प्रजापति ने जन्म ग्रहण किया । अपने को ज्ञानवान् समर्थ और गृहपति जानकर दक्ष ने देवों के साथ मिल कर एक महायज्ञ आरम्भ किया। इधर वेवस्वत मन्वस्तर के आने पर दौलाधिराज हिमालय ने मेना के गर्भ से देवी सती को उमा के रूप में उत्पन्न किया ।६८-७०। वही देवी जो पहले सती थी, पीछे उमा 'हुई। मह॒देव के साथ रहना ही उसका ब्रत है। वह कभी भी मन्वन्तर में महादेव को उसी प्रकार नहीं छोड़तीं, जैसे अनुन्नता भदिति देवी मरीच कश्यप को, लक्ष्मी नारायण को, शी इन्द्र को, रुचि सूर्य को, अरुन्धती वरिष्ठ को किसी भी तरह नहीं छोड़ती हैं । टसरे कल्पों के लौटने पर भी ये देवियाँ उन्हीं के साथ उत्पन्न होती हैं ।७१-७३। इधर दक्ष प्रजापति भी

English

Meru, the lord of mountains, is very massive witn large bowels and caves. Its central region is embellished with table-lands, ridges and bushy growths. The water of this river is used by Devas and the river is held by the three-eyed deity. Urged by the wind, it flows far and wide, and whirls again like a creeper. It falls from the peak of Meru. Its water is used by many living beings. It is pure like the spotless silk and is

अध्याय ४२

श्लोक 31

उवाच च भयत्रस्तः कृताञ्जलिपुटस्तदा ।किं मयापकृतं विप्र पिप्पलाद महामुने

uvāca ca bhayatrastaḥ kṛtāñjalipuṭastadā / kiṃ mayāpakṛtaṃ vipra pippalāda mahāmune

हिन्दी अर्थ

देवस्य महतो यज्ञे वारुणों बिश्नतस्तनुम्

English

This blessed river of many flowers and fruits irri

अध्याय ४२

श्लोक 32

चरन्वै गगनाद् येन पातितो धरणीतले ।सौरिणा ह्येवमुक्तस्तु पिप्पलादो महामुनिः

caranvai gaganād yena pātito dharaṇītale / sauriṇā hyevamuktastu pippalādo mahāmuniḥ

हिन्दी अर्थ

तस्मान्नातुशयः कार्यो वेरिष्विह् कदाचन । जात्यन्तरगतस्यापि भोवितस्य शुभाशु्भः ॥ जन्तुं न मुश्चति रुयातिस्तन्न कार्य विजानता देव्या मृत्युं कृतं मत्वा कुद्ध सर्वात्मक प्रभुम् । कथं प्रासादयद्ृक्षः स यज्ञ:साधितः कथम् ॥

English

From Sitoda is goes to mount Supaksa. Again this river of holy clear water which is used by divine sages, falls

अध्याय ४२

श्लोक 33

क्रोधरूपो ऽब्रवीद्वाक्यं तच्छृणुष्व नराधिप ।पितृमातृविहीनस्य मम बालस्य दुर्मते ।पीडां करोषि कस्मात् त्वं सौरे ब्रूहि ह्यशेषतः

krodharūpo 'bravīdvākyaṃ tacchṛṇuṣva narādhipa / pitṛmātṛvihīnasya mama bālasya durmate / pīḍāṃ karoṣi kasmāt tvaṃ saure brūhi hyaśeṣataḥ

हिन्दी अर्थ

पुरा मेरोह्िजश्रेष्ठाःशुड्र' त्रेलोक्यविश्ुतम् । ज्योतिष्क नाम सावित्न॑ सर्वरत्नविभूषितम्

English

(The river flows from one mountain to another:) Thereafter the river flows from mountain Sikhi to mount

अध्याय ४२

श्लोक 34

शनैश्चर उवाच: क्रूरस्वभावः सहजो मम दृष्टिस्तथेदृशी ।मुञ्चस्व मां तथा कर्ता यद्ब्रवीषि न संशयः

śanaiścara uvāca: krūrasvabhāvaḥ sahajo mama dṛṣṭistathedṛśī / muñcasva māṃ tathā kartā yadbravīṣi na saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

रुद्र के शाप से चाक्षुष मन्वन्तर में प्राचीनबहिष् के पौनत्र होकर दश प्रचेता से मार्षा के गर्भ से फिर उत्पन्न हुये यह. हम लोगों ने सुना है। भृगु आदि जो महषि थे, वे भी बंवस्वत मनु के पूर्व भेतायुग के आदि में वरुण-सद्श शरीर को धारण कर महान् देवता के यज्ञ में उत्पन्न हुये ।७४-७६। दक्ष प्रजापति और धोमान् महादेव का विद्वेष इस प्रकार जन्मान्तर में भी चलने लगा। इसलिये बंरियों के प्रति कभी भी विद्वेष नहीं करना चाहिए। शुभाशुभ कंम से परिचालित जन्तु के आन्तरिक भाव दूसरे जन्म में भी नहीं उठते हैं।

English

Then it drops from the ridges of the peaks resorted to by Devas and sages, with its waters scattered by flowery rafts. The blessed river irrigates and circumambulates the forest of the Sun-god which is the sylvan place of origin of variegated jewels. It then falls into the sacred lake Mahabhadra resorted to by blessed people. The beneficent white river is called Bhadrasoma. It flows rapidly and its shores arc far apart. The great and holy river Mahabhadra flows thereafter.

अध्याय ४२

श्लोक 35

पिप्पलाद उवाच: अद्यप्रभृति बालानां वर्षाद् आ षोडशाद्ग्रह ।पीडा त्वया न कर्तव्या एष ते समयः कृतः

pippalāda uvāca: adyaprabhṛti bālānāṃ varṣād ā ṣoḍaśādgraha / pīḍā tvayā na kartavyā eṣa te samayaḥ kṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

इसी लिये यह जानकर विद्वेष नहीं करना चाहिए

English

Flowing rapidly with many rivulets flowing into it, and dashing against many bunds, the river falls on the ridges ofSankhakuta.

अध्याय ४२

श्लोक 36

एवमस्त्विति चोक्त्वा स जगाम पुनरागतः ।देवमार्गं शनैश्चारी प्रणम्य ऋषिसत्तमम्

evamastviti coktvā sa jagāma punarāgataḥ / devamārgaṃ śanaiścārī praṇamya ṛṣisattamam

हिन्दी अर्थ

ऋषिगण बोले--सूत ! वैवस्वत मन्वन्तर में प्राचेतस दक्षप्रजापति का अश्यमेध किस प्रकार नंष्ट हुआ ? दक्ष ने सती की मृत्यु से कुंद्ध सर्वात्मक महादेव को किस प्रकार प्रसन्न किया और अपने यज्ञ को किस प्रकार सम्पन्न किया ? यह हम जानना चाहते हैं कृपा कर कहिये

English

Falling down the ridges of Sankhakuta, it proceeds to Vfsa Parvata. From Vrsa Parvata, it flows then to Vatsagiri and then to Nagasaila.

अध्याय ४२

श्लोक 37

गते चादर्शनं तत्र सो ऽपि बालो महाग्रहः ।विचिन्तयन्वै पितरं क्रोधेन कलुषीकृतः

gate cādarśanaṃ tatra so 'pi bālo mahāgrahaḥ / vicintayanvai pitaraṃ krodhena kaluṣīkṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

सूत जी बोले--द्विजगण ! पूर्व काल में मेर के विश्व-विश्वुत स्रत्नों से विभूषित ज्योतिष नामंक

English

From Nagasaila, it reaches the excellent mountain Nila, the Varsa mountain. From Nila, it flows to Kapinjala, and then the river flows to Indranlla, thereafter it flows to Mahanlla, and Hemasrnga. From Hemasrnga it flows to Sveta, and from Sveta to Sunaga. From Sunaga, it flows to Satasrnga. Then the great river flows from Satasrhga to the flower-carpet¬ ed Puskara. From Puskara to Dviraja, the great mountain of great strength ( Sumahabala ). From there, it flows to Varaha Parvata and the mountain Mayura. From the mountain Mayura the rapid river flows to Ekasikhara bedecked with caves and crevasses, and then to the peak of the Jarudhi mountain.

अध्याय ४२

श्लोक 38

आग्नेयीं धारणां ध्यात्वा जनयामास पावकम् ।कृत्यामन्त्रैर्जुहावाग्नौ कृत्या वै संभवत्विति

āgneyīṃ dhāraṇāṃ dhyātvā janayāmāsa pāvakam / kṛtyāmantrairjuhāvāgnau kṛtyā vai saṃbhavatviti

हिन्दी अर्थ

हूद तास्ति ख्. भ. ढ. पुस्तकेषु अप्रमेयमनाधृष्यं स्वबलोकनसस्कृतम् । तस्मिन्देवों गिरिश्रेष्ठ सर्वंधातुविभुषिते ॥

English

After piercing (forcing its way) through thousands of mountains thus, the great river reaches Trisrnga, the boundary mountain with many peaks.

अध्याय ४२

श्लोक 39

तावज्झटिति सा कन्या ज्वालामालाविभूषिता ।हुतभुक्सदृशाकारा किं करोमीति चाब्रवीत्

tāvajjhaṭiti sā kanyā jvālāmālāvibhūṣitā / hutabhuksadṛśākārā kiṃ karomīti cābravīt

हिन्दी अर्थ

तथव च महात्मानावश्विनो भिषजां वरो । तथा बेश्रवणो राजा गुह्कंः परिवारितः ॥ै८४ यक्षाणामब्विर: श्रीमान्केलासनिय: प्रभुः । उंपासते महात्मानमुशना च सहामुनिः ॥

English

Falling from the ridges of Tris'rhga inhabited by blessed people this river of pure water falls off the ridges of Meru, and urged by the wind flows to the excellent mountain Viruddha. After irrigating the mountain the river flows into the western ocean.

अध्याय ४२

श्लोक 40

शोषयामि समुद्रान् किं चूर्णयामि च पर्वतान् ।अवनिं वेष्टयामीति पातये किं नभस्तलम्

śoṣayāmi samudrān kiṃ cūrṇayāmi ca parvatān / avaniṃ veṣṭayāmīti pātaye kiṃ nabhastalam

हिन्दी अर्थ

अप्सरोगणसंघाश्र समाजस्मुरनेफकशः । ववो शिव: सुखो वायुर्नानागन्धवहः शुचिः भहादेव॑ पशुर्पात प्यु पासन्ति तत्र बे। भुतानि च तथाइन्यानि नानारूपधरान्यथ ८६

English

On the wonderful great foot of Meru inhabited by living beings, on the northern mountain Suparsva whose sides are the sources of gold, the river falls into the bowels of caves,

अध्याय ४२

श्लोक 41

कस्य मूर्ध्नि पतिष्यामि घातयामि च कं द्विज ।शीघ्रमादिश्यतां कार्यं मा मे कालात्ययो भवेत्

kasya mūrdhni patiṣyāmi ghātayāmi ca kaṃ dvija / śīghramādiśyatāṃ kāryaṃ mā me kālātyayo bhavet

हिन्दी अर्थ

देवस्थानुचरास्तत्र तस्थुवेश्वानरोपमाः । नन्‍दीश्वरश्व भगवान्देबस्थानुमते स्थित: ॥६ १

English

In this way the four great rivers of pure waters, falling down the ridges of great mountains, flow into the four directions.

अध्याय ४२

श्लोक 42

तस्यास्तद्वचनं श्रुत्वा पिप्पलादो महातपाः ।क्रोधसंरक्तनयन इदं वचनम् अब्रवीत्

tasyāstadvacanaṃ śrutvā pippalādo mahātapāḥ / krodhasaṃraktanayana idaṃ vacanam abravīt

हिन्दी अर्थ

पर्युपासत त॑ देवरूषिणी द्विजसत्तमा: ज---+++ जाएगा कल -। हल प्रकाशक तन - “नीम चक पल + ८२ २०प्परनणन बे जे ५-००, जनम बन -34 ० अल 30 पउप. हजाृ(“+ज०४-+-०२०3+-००4त.+-+- सम के न-नन++ पा ० + मम आक-+ ५ +पम0५.3..

English

Thus the earth of vast expanse I have almost explained to you. It is surrounded on all sides by Meru and other mountains.

अध्याय ४२

श्लोक 43

महता क्रोधवेगेन मया त्वं चिन्तिता शुभे ।पिता मे याज्ञवल्क्यश्च तस्य त्वं पत माचिरम्

mahatā krodhavegena mayā tvaṃ cintitā śubhe / pitā me yājñavalkyaśca tasya tvaṃ pata māciram

हिन्दी अर्थ

पवित्र शिखर पर महादेब जी इस प्रकार बैठे थे, मानो कोई पलंग पर बैठा हो ।६१-८२। गिरि हिमालय का वह शाज्ज सत्र का पूज्य, अत्यन्त विस्तृत और किसी प्रकार भ्रे उल्लंघन के योग्य न था। पावंती भी उनकी बगल में बंठी हुई थीं। उस समय आदित्यगण, अत्यन्त पराक्रमी बसुगण, दोनों भाई वैद्यराज अश्विनी- कुमार, गुह्मकों को साथ लेकर राजा वेश्रत्रण, सनत्कुमार आदि परम, अज़्िरा भादि देवधि विश्वावसु

English

The earth has four great continents, four forests of sports, four great trees as the four land-marks and lour excellent lakes.

अध्याय ४२

श्लोक 44

एवमुक्त्वागमच्छीघ्रं स्फोटयन्ती नभस्तलम् ।मिथिलास्थो महाप्राज्ञस्तपस्तेपे महामनाः

evamuktvāgamacchīghraṃ sphoṭayantī nabhastalam / mithilāstho mahāprājñastapastepe mahāmanāḥ

हिन्दी अर्थ

गन्धर्व, नारद पव॑त कैलास निवासी यक्षराज महामुनि उशना और अप्सरायें बार-बार आकर उनकी पूजा- उपासना करने लगीं 5३-८४ उस समय कल्याणकरारक, सुखद, सुगन्धित शीतल बायु चल रही थी, सब ऋतुओं के फूलों से युक्त होकर विटप सुशोभित हो रहे थे और सिद्ध, विद्याधर तथा तपस्वी आदि महादेव पशुपति की उपासना कर रहे थे। विविध स्वरूपों को ध।रण करने वाले नाना प्रकार के भूत, महाभयदूर राक्षत, महाबली पिशाच आदि बहुविध रूपों को धारण करके और नाना प्रकार के अस्त्रों से सज्जित होकर अभ्नि के समान दीप्ति को धारण कर सेवा कार्य करने लगे ।८५-६०)। भगवान् नन्‍्दीश्वर चमकते हुये प्रज्वलित त्रिशुल को लेकर उनके निकट आदेश पालन करने जा बैठे । द्विजगण ! उस समय सब तीथों के

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 45

यावत्पश्यति दिग्भागं ज्वलनार्कसमप्रभम् ।याज्ञवल्क्यो महातेजा महद्भूतमुपस्थितम्

yāvatpaśyati digbhāgaṃ jvalanārkasamaprabham / yājñavalkyo mahātejā mahadbhūtamupasthitam

हिन्दी अर्थ

एवं स भगवांस्तन्न दीप्यमान:ः सुरधिभिः । देखेश्व सुमहाभागे महादेवो व्यवस्थितः

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 46

तद् दृष्ट्वा सहसायान्तं भीतभीतो महामुनिः ।अनुयुक्तो ऽथ भूतेन जनकं नृपतिं ययौ

tad dṛṣṭvā sahasāyāntaṃ bhītabhīto mahāmuniḥ / anuyukto 'tha bhūtena janakaṃ nṛpatiṃ yayau

हिन्दी अर्थ

पुरा हिमवतः पृष्ठ दक्षो वे यज्ममारभत् । गदगाद्वारे शुभे देश ऋषिसिद्धनि्ेबिते ६४ ततस्तस्य मजे देवः शतक्रतुपुरोगभा: । गसनाय समागम्य बुद्धिमापेदिरे तदा ६५ स्वविमाने मं हात्मानो ज्वलसण्दिज्वेलनप्रभा: । देवस्यानुमते5गच्छन्गइगाद्वार इति श्रुति: १६६ गन्धर्वाप्सरसाकीर्ण नानादुमलतावुतम् । ऋषिसंधे: परिवृत॑ दक्ष धर्मभ्ृतां वरम् ३६७ आदि्त्या बसवो रुद्रा: साथ्या: सह मरुदगणः । जिष्णुना सहिताः सर्वे आगता यज्ञभागिनः

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 47

शरण्यं माम् अनुप्राप्तं विद्धि त्वं नृपसत्तम ।महद्भूतभयाद्रक्ष यदि शक्नोषि पार्थिव

śaraṇyaṃ mām anuprāptaṃ viddhi tvaṃ nṛpasattama / mahadbhūtabhayādrakṣa yadi śaknoṣi pārthiva

हिन्दी अर्थ

उष्मपा: सोसपाश्चेव आज्यया धमपास्तथा ' अश्चिनों पितरश्चेब आगता ब्रह्मणा सह १०० एते चान्ये च बहवो भुतग्रामास्तर्थव च। जरायुजाण्डजाश्चव स्वेदजोज्ि ज्ञकास्तथा ३१०१

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 48

ब्रह्मतेजोभवं भूतमनिवार्यं दुरासदम् ।न च शक्नोम्यहं त्रातुं राजा वचनम् अब्रवीत्

brahmatejobhavaṃ bhūtamanivāryaṃ durāsadam / na ca śaknomyahaṃ trātuṃ rājā vacanam abravīt

हिन्दी अर्थ

आहूता मंत्रतः सर्वे देवाश्व सह पत्निभि: ( । विराजन्ते विपानस्था दीप्यमाना इबाग्तयः नरः पापसवाप्नोति सहद्े नाञ् संशयः ३१०३

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 49

ततश्चान्यं नृपश्रेष्ठं शरणार्थी महातपाः ।जगाम तेन मुक्तो ऽसौ चेन्द्रस्य सदनं भयात्

tataścānyaṃ nṛpaśreṣṭhaṃ śaraṇārthī mahātapāḥ / jagāma tena mukto 'sau cendrasya sadanaṃ bhayāt

हिन्दी अर्थ

जल को उत्पन्न करनेबाली नदीश्रेष्ठ और देवस्वरूप को धारण करनेवाली गंगा भी उनकी सेवा करने लगीं । इस प्रकार देव्धथियों और महाभ ग्यशाली देवताओं से घिरे हुये भगवान् महादेव वहाँ बैठे थे ।६१-६३। उसी समय दक्ष ने हिमालय के पृष्ठ देश में यज्ञ आरम्भ किया । यज्ञस्थान सिद्ध-ऋषियों से सेवित, मंगलकारक गंगाद्वार में बनाया गया। ऐसा सुना जाता है कि अग्नि के तुल्य तेजस्वी इन्द्र प्रमुख देवगण उस यज्ञ में जाने

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 50

देवराज नमस्ते ऽस्तु महाभूतभयान्नृप ।कम्पमानो ऽब्रवीद् विप्रो रक्षस्वेति पुनःपुनः

devarāja namaste 'stu mahābhūtabhayānnṛpa / kampamāno 'bravīd vipro rakṣasveti punaḥpunaḥ

हिन्दी अर्थ

का विचार करने लगे और अग्नि के समान अपने चमक्रीले विमानों पर चढ़ कर वे सब भहात्मा गंगाद्वार पहुँचे ।8४-६६। भिन्न-भिन्न प्रकार की द्वुम-लताओं से आवृत, गन्धवं-अप्सराओं से व्याप्त, ऋषि समूहों से घिरे हुये: धर्मध्वज दक्ष प्रजापति की पृथ्वी, अन्तरिक्ष और स्वर्गलोक के निवासी हाथ जोड़ कर स्तुति और प्रशंसा करने लगे ।६७-६८। आदित्य, वसु, रुद्र, साध्य, मरुदगण और विष्णु आदि यज्ञ में भाग पाने वाले वहाँ पहुंचे । उष्म, सोम, आज्य और धूम पीने वाले अध्विनीकुमार, पितर और ब्रह्मा आदि देवगण भी आये ।६९ ६-१००। इनके अतिरिक्त बहुतेरे जरायुज, अण्डज, स्वेदज और उद्भिज्ज आदि प्राणी, सभी देव

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 51

तस्य तद्वचनं श्रुत्वा देवराजो ऽब्रवीद् इदम् ।न शक्नोमि परित्रातुं ब्रह्मकोपादहं मुने

tasya tadvacanaṃ śrutvā devarājo 'bravīd idam / na śaknomi paritrātuṃ brahmakopādahaṃ mune

हिन्दी अर्थ

उन सब को देख कर सुखपूर्वक बंठ हुये दधीचि ने दक्ष से कहा--अपूज्यों को पूजने और पृज्यों को न पूजने

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 52

ततः स ब्रह्मभवनं ब्राह्मणो ब्रह्मवित्तमः ।जगाम विष्णुलोकं च तेनापीत्युक्त एव सः

tataḥ sa brahmabhavanaṃ brāhmaṇo brahmavittamaḥ / jagāma viṣṇulokaṃ ca tenāpītyukta eva saḥ

हिन्दी अर्थ

एचमुक्त्वा तु विप्रषिः पुनर्देक्षमभाषत । पूज्य तु पशुभर्तारं कस्मान्ना55छयसे प्रभुम॒ सन्ति मे बहवो रुद्रा: शुलहस्ता: कपिल: । एकादशावस्थगता नान्‍्य॑ वेद्ि महेश्वरम

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 53

ततः स मुनिरुद्विग्नो निराशो जीविते नृप ।अनुगम्यमानो भूतेन अगच्छच्छङ्करालयम्

tataḥ sa munirudvigno nirāśo jīvite nṛpa / anugamyamāno bhūtena agacchacchaṅkarālayam

हिन्दी अर्थ

सर्वेषामेकमन्त्रो5य॑ येनेशो न निमस्त्रित:। यथाहहं शंकरादुध्ब नान्यत्पश्यामि देवतस् ।। तथा दक्षस्य विपुलो यज्ञोइयं न भविष्यति

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 54

तस्य योगबलोपेतो महादेवस्य पाण्डव ।नखमांसान्तरे गुप्तो यथा देवो न पश्यति

tasya yogabalopeto mahādevasya pāṇḍava / nakhamāṃsāntare gupto yathā devo na paśyati

हिन्दी अर्थ

गतास्तु वेबता ज्ञात्वा शलराजसुता तदा । उबाच वचन साध्यी देवं पशुर्पात तदा १०८ भगवन्क्ब गता होते देवा: शक्रपु रोगमा: । ब्रहि तत्त्वेन तत्त्वज्ञ संशयो मे महानयम

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 55

तदन्ते चागमद्भूतं ज्वलनार्कसमप्रभम् ।मुञ्च मुञ्चेति पुरुषं देवदेवं महेश्वरम्

tadante cāgamadbhūtaṃ jvalanārkasamaprabham / muñca muñceti puruṣaṃ devadevaṃ maheśvaram

हिन्दी अर्थ

) मनुष्य घोर पाप का भागी होता है, इसमें कुछ भी सन्देह नहीं है । यह कह कर विप्ि ने फिर दक्ष कद्दा - पूजनीय प्रभु महादेव को आप क्यों नहीं बुला रहे हैं ?

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 56

एवमुक्तो महादेवस् तेन भूतेन भारत ।योगीन्द्रं दर्शयामास नखमांसान्तरे तदा

evamukto mahādevas tena bhūtena bhārata / yogīndraṃ darśayāmāsa nakhamāṃsāntare tadā

हिन्दी अर्थ

दक्ष बोलें-ग्यारह प्रकार के कितने ही शूलधार कपरन्दी रुद्र मेरे यज्ञ में उपस्थित हैं । यहाँ हम दूसरे ॥हादेव को नहीं जानते दधीचि बोलें--सब से बड़ी बात यह है कि, महादेव निमन्त्रित नहीं हुये हैं। इनसे भी बड़े कोई बता हैं, ऐसा हम नहीं समझते । इसलिये दक्ष का यह विपुल आयोजन बाला यज्ञ सम्पन्न हो सकेगा ?

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 57

संस्थाप्य भूतं भूतेशः परमापद्गतं मुनिम् ।उवाच मा भैस्त्वं विप्र निर्गच्छस्व महामुने

saṃsthāpya bhūtaṃ bhūteśaḥ paramāpadgataṃ munim / uvāca mā bhaistvaṃ vipra nirgacchasva mahāmune

हिन्दी अर्थ

दक्ष बोल--इस यज्ञ में हम विधि विधान से मन्त्रपुत समस्त हथि को स्वणंपात्र में रख कर विष्णु " समर्पण करेंगे। विष्णु ही नित्य हवनीय, प्रभु, विभू और अप्रतिम हैं। इधर नगेन्‍्द्र-मन्दिनी पावंती ने 'भी देवताओं को कहीं जाते हुये देख कर महादेव से कहा

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 58

ततः सुसूक्ष्मदेहस्थं भूतं दृष्ट्वाब्रवीदिदम् ।किमस्य त्वं महाभूत करिष्यसि वदस्व मे

tataḥ susūkṣmadehasthaṃ bhūtaṃ dṛṣṭvābravīdidam / kimasya tvaṃ mahābhūta kariṣyasi vadasva me

हिन्दी अर्थ

उमा बोली--भगवन् ! तत्त्वज्ञ ! हमारे मन में कुतूहन हो रहा है कि, ये इन्द्र आदि देवता कहाँ ये हैं? आप सब समझा कर कहें यज्ञमेतं महाभाग किमर्थ न गतो5सि वे। केन वा प्रतिषेधेन गमन॑ प्रतिषिध्यते

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 59

कृत्योवाच: क्रोधाविष्टेन देवेश पिप्पलादेन चिन्तिता ।अस्य देहं हनिष्यामि हिंसार्थं विद्धि मां प्रभो

kṛtyovāca: krodhāviṣṭena deveśa pippalādena cintitā / asya dehaṃ haniṣyāmi hiṃsārthaṃ viddhi māṃ prabho

हिन्दी अर्थ

सुररेव महाभागे सर्वमेतदनुष्ठितम् । यज्ञेषु सम सर्वेषु न भाग उपकल्पितः पुर्वोषायोपपश्नेन मार्गेण बरवणिनि । न मे सुराः प्रयच्छन्ति भाग यज्ञस्थ धीमतः

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 60

एतच्छ्रुत्वा महादेवो भूतस्य वदनाच्च्युतम् ।कटिस्थं याज्ञवल्क्यं च मन्त्रयामास मन्त्रवित्

etacchrutvā mahādevo bhūtasya vadanāccyutam / kaṭisthaṃ yājñavalkyaṃ ca mantrayāmāsa mantravit

हिन्दी अर्थ

भगवन्सवंदेवेषु प्रभावाभ्यधिंकों गुण: अजेयश्राप्यधष्पश्न तेजसा यशसा श्षिया लमेत भागं भगवानचिन्त्यो यज्ञस्य चार्षधमथ वा तृतीयम्

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 61

योगीश्वरेति विप्रस्य कृत्वा नाम युधिष्ठिर ।विसर्जयित्वा देवेशस्तत्रैवान्तरधीयत

yogīśvareti viprasya kṛtvā nāma yudhiṣṭhira / visarjayitvā deveśastatraivāntaradhīyata

हिन्दी अर्थ

महादेव बोले--महाभागे ! दक्ष नामक एक उत्तम प्रजापति हैं, वे ही अश्वमेध यज्ञ कर रहे हैं ।

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 62

प्रेषयित्वा तु तं भूतं पिप्पलादो ऽपि दुर्मनाः ।पितृमातृसमुद्विग्नो नर्मदातटमाश्रितः

preṣayitvā tu taṃ bhūtaṃ pippalādo 'pi durmanāḥ / pitṛmātṛsamudvigno narmadātaṭamāśritaḥ

हिन्दी अर्थ

बहाँ ये देवगण जा रहे हैं देवी बोली -महाभाग ! इस यज्ञ में आप क्यों नहीं गये ? किसलिये आप को वहाँ नहीं बुलाया

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 63

एकाङ्गुष्ठो निराहारो वर्षाद् आ षोडशान् नृप ।तोषयामास देवेशमुमया सह शङ्करम्

ekāṅguṣṭho nirāhāro varṣād ā ṣoḍaśān nṛpa / toṣayāmāsa deveśamumayā saha śaṅkaram

हिन्दी अर्थ

महादेव बोले- महाभागे ! देवों ने ही यह सब किया है कि, किसी भी यज्ञ में हमारे लिये भाग मेहीं रखा जाय वरव्णिनि ! उसी पूर्व व्यवस्था के अनुसार विद्धान् देवगण हमें यज्ञ मे भाग नहीं देते

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 64

ततस्तत्तपसा तुष्टः शङ्करो वाक्यमब्रवीत्

tatastattapasā tuṣṭaḥ śaṅkaro vākyamabravīt

हिन्दी अर्थ

देवी बोली--अधघ ! भगवन् ! सभी देवों में आपका अधिक प्रभाव है, आप अधिक गुणवान् भी हैं। यही क्‍यों, तेज यश और शौभा की अधिकता से आप अजेय और अधृष्य हैं। अतः महाभाग / आप का जो यह तिरस्कार हुआ है, इससे मुझे बहुंत दुःख हुआ है, मेरा शरीर काँप रहा है (११४-११५। मैं कौन सा दान, नियम यां तप करूँ, जिससे मेरे अचिन्तनीय भाग्यवान् पति यज्ञ में आधा अथवा तृतीय भाग एवं बुवाणां भगवानचिन्त्यः पत्नों प्रहृष्ठ: क्षभमितामुवाच ।

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 65

ईश्वर उवाच: परितुष्टो ऽस्मि ते विप्र तपसानेन सुव्रत ।वरं वृणीष्व ते दद्मि मनसा चेप्सितं शुभम्

īśvara uvāca: parituṣṭo 'smi te vipra tapasānena suvrata / varaṃ vṛṇīṣva te dadmi manasā cepsitaṃ śubham

हिन्दी अर्थ

न् वेत्सि देवेशि कुशोदराडिग कि नाम युक्त वचन तवेदमू... ११७

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 66

पिप्पलाद उवाच: यदि मे भगवांस् तुष्टो यदि देयो वरो मम ।अत्र संनिहितो देव तीर्थे भव महेश्वर

pippalāda uvāca: yadi me bhagavāṃs tuṣṭo yadi deyo varo mama / atra saṃnihito deva tīrthe bhava maheśvara

हिन्दी अर्थ

तवाद्य मोहेन महेन्द्रदेवों लोकत्रयं सर्वथा संप्रमुढम्॒ द ३११८ मां बराहणा ब्रह्मसत्रे पजन्ते मसाध्वयंवः कल्पयन्ते च भागम्

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 67

एवमुक्तस्तथेत्युक्त्वा पिप्पलादं महामुनिम् ।जगामादर्शनं देवो भूतसङ्घसमन्वितः

evamuktastathetyuktvā pippalādaṃ mahāmunim / jagāmādarśanaṃ devo bhūtasaṅghasamanvitaḥ

हिन्दी अर्थ

देव्युवाच क्‍ क्‍ सुप्राकृतोपि भगवान्सबंस्त्रीजनसंसदि । स्तौति गोपायते वा5पि स्वमात्मानं न संशयः

English

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अध्याय ४२

श्लोक 68

पिप्पलादो गते देवे स्नात्वा तत्र महाम्भसि ।स्थापयित्वा महादेवं जगामोत्तरपर्वतम्

pippalādo gate deve snātvā tatra mahāmbhasi / sthāpayitvā mahādevaṃ jagāmottaraparvatam

हिन्दी अर्थ

नाउत्मानं स्तौमि देवेशि पश्य त्वमुपगच्छ च। य॑ स्रक्ष्यामि वरारोहे भागार्थ बर्वणिनि. एवमुक्त्वा तु भगवान्पत्नों प्राणेरपि प्रियाम् । सोउसृजख्भ गवान्कत्रादुसूत क्रोधार्निसंनिभभमू

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 69

तत्र तीर्थे नरो भक्त्या स्नात्वा मन्त्रयुतं नृप ।तर्पयित्वा पित्ःन् देवान् पूजयेच्च महेश्वरम्

tatra tīrthe naro bhaktyā snātvā mantrayutaṃ nṛpa / tarpayitvā pitḥn devān pūjayecca maheśvaram

हिन्दी अर्थ

सहस्नशीर्ष देवं ज सहस्न वरणे ज्षणम् । सहस्रमुद्गरधर सहस्रशरपाणिनम् १२३

English

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अध्याय ४२

श्लोक 70

अश्वमेधस्य यज्ञस्य फलं प्राप्नोत्यनुत्तमम् ।मृतो रुद्रपुरं याति नात्र कार्या विचारणा

aśvamedhasya yajñasya phalaṃ prāpnotyanuttamam / mṛto rudrapuraṃ yāti nātra kāryā vicāraṇā

हिन्दी अर्थ

प्राप्त करें (!१६। इस प्रकार बोलने वाली अपनी दुःखी पत्नी पर प्रसन्न होकर महादेव जी ने कहां-7 कृशोदराज़ि ! तुम जो कह रही हो कि, मैं नहीं जानती, यह क्‍या ठीक कह रही हो 2 हम इस बात को जानते हैं कि साधु पुरुष ध्यान योग से सब बातों को जान जाते हैं। महेन्द्र प्रमुख देवों को कौन कहे, तीनों लोक तुम्हारी माया से मोहित हो गया है। देखो, प्रस्तोता यज्ञ में हमारा ही स्‍्तवन कर. रहे हैं, रथन्तर साम गान हो रहा है। ब्राह्मण लोग ब्रह्मयज्ञ में हमारी ही इजा कर रहे हैं और अध्वर्युगण हमारे लिये भाग कल्पित कर रहे हैं ।११७-११६। द

English

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अध्याय ४२

श्लोक 71

अथ यो भोजयेद् विप्रान् पित्ःन् उद्दिश्य भारत ।तस्य ते द्वादशाब्दानि मोदन्ते दिवि तर्पिताः

atha yo bhojayed viprān pitḥn uddiśya bhārata / tasya te dvādaśābdāni modante divi tarpitāḥ

हिन्दी अर्थ

देवी बोलौ--स्त्रियों के बीच तो मामूली आदमी भी अधिक ५ शंसा कर दिया करता है और अपनी कमजोरी छिपा लिया करता है। यह पक्की बात है । क्‍या आप भी वही कर रहे हैं? १२०।

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 72

संन्यासेन तु यः कश्चित् तत्र तीर्थे तनुं त्यजेत् ।अनिवर्तिका गतिस्तस्य रुद्रलोकात् कदाचन

saṃnyāsena tu yaḥ kaścit tatra tīrthe tanuṃ tyajet / anivartikā gatistasya rudralokāt kadācana

हिन्दी अर्थ

भगवान बोले--देवेशि ! हम झूठमूठ अपनी प्रशंसा नहीं कर रहे हैं। वरारोहे ! वरबणिनि ! तुम आकर देखो कि, अपने भाग के लिये हम किसकी सृष्टि कर रहे हैं। प्राण से भी प्रिय पत्नी को भगवान् ने ऐसा कह कर अपने मुंह से जाज्वल्यमान अग्नि की तरह एक भूत को उत्पन्न किया, जिसे हजार सिर, हजार पर और हजार आँखें थीं। वह हजारों मुद्गर और हजारों बाणों को हाथों में रखे हुये था, शइलचक़गदापाणि दीप्तकामुंकधारिणम् । परश्वसिधरं देवं महारौद्व भयावहम्

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 73

एतत्सर्वं समाख्यातं यत्पृष्ठे हि त्वयानघ ।माहात्म्यं पिप्पलादस्य तीर्थस्योत्पत्तिरेव च

etatsarvaṃ samākhyātaṃ yatpṛṣṭhe hi tvayānagha / māhātmyaṃ pippalādasya tīrthasyotpattireva ca

हिन्दी अर्थ

दंष्ट्राकरालं विश्रान्तं महावकत्र महोदरम् । विश्युज्जिल्ल प्रलम्बोष्ठं लम्बकर्ण दुरासदम॒

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

अध्याय ४२

श्लोक 74

एतत्पुण्यं पापहरं धन्यं दुःस्वप्ननाशनम् ।पठतां शृण्वतां चैव सर्वपापक्षयो भवेत्

etatpuṇyaṃ pāpaharaṃ dhanyaṃ duḥsvapnanāśanam / paṭhatāṃ śṛṇvatāṃ caiva sarvapāpakṣayo bhavet

हिन्दी अर्थ

कुलिशोद्योतितकरं भाभिज्वलितमुर्धंजम् । ज्वालामालापरिक्षिप्तं मुक्तादामविभूषितम् तेजसा चेव दीप्यन्तं युगान्‍्तमिथ पावक्म् । आकर्णदारितास्यान्त चतुदंष्टें भयानकम्

English

It has four great mountains and has four serpents for support, eight superior mountains and eight inferior.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 42
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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