अध्याय ५३
श्लोक 1
॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे शूलभेदमाहात्म्ये ऋक्षशृङ्गचरित्रे दीर्घतपोमुन्याख्यानवर्णनं नाम द्विपञ्चाशत्तमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय ५३ उत्तानपाद उवाच: आश्रमे वसतस् तस्य स दीर्घतपसो मुनेः ।कनीयांस् तनयो देव कथं मृत्युमुपागतः
|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe śūlabhedamāhātmye ṛkṣaśṛṅgacaritre dīrghatapomunyākhyānavarṇanaṃ nāma dvipañcāśattamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 53 uttānapāda uvāca: āśrame vasatas tasya sa dīrghatapaso muneḥ / kanīyāṃs tanayo deva kathaṃ mṛtyumupāgataḥ
हिन्दी अर्थ
इति श्रीमहापुराणे वायुप्रोक्ते भुवनविन्यासों नामकोनचत्वारिशोध्ध्याय: रे८।॥ शतश्यृंग पर्वत पर अत्यन्त बली यक्षों के सौ पुर हैं और ताम्राभ पब॑तपर कद्रुनन्दन तक्षक की उत्तम पुरी है ।५३-५४। अनेक परिखा और कन्दराओं से युक्त विशाख पर्वत पर गुहा में रहने वाले युह (कार्तिकेयजी) का एक विशाल निवास स्थान है। व्वेतोदर महाशलपर गरुड़पुत्र महात्मा सुनाभ का पुर है, जिसमें अनेक भवन बने हुये हैं। पिशाच नामक गिरिवर पर कुबेर का विशाल भवन है, जिसमें कोठे और छत भी हैं एवं
English
Hearing this the sages became doubtful. They asked Lomaharsana again for its clarification. Sir, you have mentioned the famous abodes of Devas. How are these abodes? How are these luminaries? Please describe.