अध्याय ५५
श्लोक 1
॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चमावन्त्यखण्डे रेवाखण्डे दीर्घतपसः स्वर्गारोहणवर्णनं नाम चतुःपञ्चाशत्तमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय ५५ उत्तानपाद उवाच: माहात्म्यं तीर्थजं दृष्ट्वा चित्रसेनो नरेश्वरः ।किं चकार क्व वा वासं किमाहारो बभूव ह
|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcamāvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe dīrghatapasaḥ svargārohaṇavarṇanaṃ nāma catuḥpañcāśattamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 55 uttānapāda uvāca: māhātmyaṃ tīrthajaṃ dṛṣṭvā citraseno nareśvaraḥ / kiṃ cakāra kva vā vāsaṃ kimāhāro babhūva ha
हिन्दी अर्थ
सोदका वत्सकाश्चका बाराहा हारवासकाः । शड्भूगरुवा भाविचन्द्राश्न उत्तरा हैमभोौमकाः खूतजी बोले--महायशस्वियों ! ऋषियों ! भद्राष्ववासियों का जो स्वरूप हमने बताया है, उसे पहले सिद्धों ने जंसा कहा है, उसी के अनुरूप हम विस्तार के साथ कहते हैं उसे आप सब सुनें। प्रसिद्ध देवकूट गिरि के पूर्व की ओर से चारों ओर वतंमान पाँचों कुल पबंतों, नदियों और देशों का वर्णन जेसा हमने देखा और सुना है वेसा कह दिया है ।११-१३। शैवाल, वर्णमालाग्र, कोरज्ज, ब्वेत और नील ये पाँच कुल पर्वत
English
O eloquent one, who is the greatest in regard to attri¬ butes, activities and power? We wish to hear clearly the descrip¬ tion of his good, wonderful qualities in detail.