अध्याय ८४
श्लोक 1
॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे हनूमन्तेश्वरतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम त्र्यशीतितमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय ८४ श्रीमार्कण्डेय उवाच: अत्रैवोदाहरन्तीमम् इतिहासं पुरातनम् ।कैलासे पृच्छते भक्त्या षण्मुखाय शिवोदितम्
|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe hanūmanteśvaratīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma tryaśītitamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 84 śrīmārkaṇḍeya uvāca: atraivodāharantīmam itihāsaṃ purātanam / kailāse pṛcchate bhaktyā ṣaṇmukhāya śivoditam
हिन्दी अर्थ
का प्रचार मनु और सप्त ऋषियों ने किया था । सातों ऋषियों ने ऋग्वेद, यजुर्वदं और समावेद से अनुमत स्त्री परिग्न ह, अग्निहोत्रादि श्रौत धर्म का उपदेश किया था। परम्परा से चले आतनेवाले वर्णाश्रम . के अनृपम आचार व्यवहार के पोषक स्माते धर्म का प्रचार स्वायम्भुव मनु ने किया था ।३९-४१। उस त्रेता युग के आदिम काल में उन परम तपस्वी सातों ऋषियों और मनु के सत्य, ब्रह्मचयें, ज्ञान एवं तपस्या के कारण वेदोक्त क्रम से बुद्धि व्यापार एवं कमण्यता के बिना ही उन मन्त्रों की अभिव्यक्ति हुईं। आदि कल्प में वे मन्त्र तारकादि निदर्शनों द्वारा देवताओं को स्वयमेव प्राप्त हुये थे किन्तु सिद्धियों के नष्ठ हो जाने पर उनका फिर से प्रवर्तन
English
When the Caksusa Manvantara had elapsed, when the Devas (pertaining to that epoch) too had gone, the kingdom of the earth was assigned to the great Vaivasvata (Manu). 3