Vishnu Purana· Viṣṇu Purāṇa
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अध्याय 116 / 126

Book 5 - Adhyaya 36

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अध्याय ११६

श्लोक 1

[[इति श्रीविष्णुपुराणे पञ्चमे ऽंशे पञ्चत्रिंशो ऽध्यायः ]] मैत्रेय श्रूयतां तस्य बलस्य बलशालिनः कृतं यद् अन्यत् तेनाभूत् तद् अपि श्रूयतां त्वया

[[iti śrīviṣṇupurāṇe pañcame 'ṃśe pañcatriṃśo 'dhyāyaḥ ]] maitreya śrūyatāṃ tasya balasya balaśālinaḥ kṛtaṃ yad anyat tenābhūt tad api śrūyatāṃ tvayā

हिन्दी अर्थ

जो पुरुष भगवान् कृष्णके इस चरित्रको

English

JT arasara said : — Listen, OTnaitreya, to anotherachieve- ment accomplished by the powerful Balarama. The great Asura, Naraka, the enemy of the friends of the celestials, had a friend of exceeding might in a monkey named Dwivida, who was worked up with implacable hostility against the celestials, and vovved to revenge on all of them the destruction of Naraka by Krishna at the insti- gation of the king of the celestials, by preventing sacrificfs and brinoin<» about the total destruction of the world. Blinded by ignorance therefore, he interrupted all religious practices, put down all righteous observances, and brought about the death of living creatures ; he set fire to forests, to villages and towns : sometimes he deluged cities and villages with a downpour of rocks or lifting up mountains in the waters he cast them into the ocean ; then placing himselfin the midst of the deep, he agitated the waves until the foaming sea rose above its confines and swept away the vil- lages, and cities situated upon its shores. Dwivida, who was capable of assuming shapes as he liked, enlarged his bulk to an immense proportion, and rolling and tumbling and trampling amidst the corn-fields, he crushed and spoiled tbe harvest. The whole world, disorganised by this vicious monkey, was deprived of sacred study and religious ceremonies, and was greatly afflicted.

अध्याय ११६

श्लोक 2

नरकस्यासुरेन्द्रस्य देवपक्षविरोधिनः सखाभवन् महावीर्यो द्विविदो नाम वानरः

narakasyāsurendrasya devapakṣavirodhinaḥ sakhābhavan mahāvīryo dvivido nāma vānaraḥ

हिन्दी अर्थ

नाहं देवो न गन्धर्वो न यक्षो न च दानव: तदफप्राप्तिमहादुःखविलीनाशेषपातका ॥ २१ मैं न देव हूँ, न गन्धर्व हूँ, न यक्ष हूँ और न दानव हूँ। मैं तो आपके बान्धवरूपसे ही उत्पन्न हुआ हूँ ; आपलोगोंको श्रीपराशरजी बोले--हे महाभाग! श्रीहरिके प्रणयकोपयुक्त होकर कहे हुए इन वाक्योंको सुनकर वे समस्त गोपगण चुपचाप वनको चले गये चन्द्रिका और दिशाओंको सुरभित करनेवाली विकसित कुमुदिनी तथा वन-खण्डीको मुखर मधुकरोंसे मनोहर देखकर गोपियोंक साथ रमण करनेकी इच्छा की॥ १४-१५॥ उस समय बलरामजीके बिना ही उनकी उस सुरम्य गीतध्वनिको सुनकर गोपियाँ अपने-अपने घरोंको छोड़कर तत्काल जहाँ श्रीमधुसूदन थे वहाँ चली आयीं

English

Once on a time Halayudha was drinking in the groves of Raivata along with the illustrious Revati and other beautiful females ; and the celebrated Yadu whose glories were sung and who was pre-eminent amidst graceful and sportive women, resembled Kuvera, the god of riches, in his palace. In the meantime, the monkey Dwivida came there and stealing tbe plough;shace and the club of Balarama, grinned at and

अध्याय ११६

श्लोक 3

वैरानुबन्धं बलवान् स चकार सुरान् प्रति नरकं हतवान् कृष्णो देवराजेन चोदितः

vairānubandhaṃ balavān sa cakāra surān prati narakaṃ hatavān kṛṣṇo devarājena coditaḥ

हिन्दी अर्थ

वहाँ आकर कोई गोपी तो उनके स्वर-में-स्वर मिलाकर धीरे-धीरे गाने लगी और कोई मन-ही-मन उन्हींका स्मरण करने लगी कोई प्रेमोन्मादिनी होकर तुरन्त उनके पास जा खड़ी कोई गोपी बाहर गुरुजनोंको देखकर अपने घरमें ही रहकर आँख मूँदकर तन्मयभावसे श्रीगोविन्दका तथा कोई गोपकुमारी जगत्के गयी, क्योंकि भगवद्धयानके विमल आह्ादसे उसकी गये थे॥२१-२२॥ गोपियोंसे घिरे हुए रासारम्भरूप रात्रिको रास करके सम्मानित किया कृष्णचेष्टके अधीन हुईं गोपियाँ यूथ बनाकर वृन्दावनके

English

mocked him, and lauglied at the women and threw over aud broke the cups fillei with wine. Enraged at this, Balarama threatened th fljjyjto fcey ; but the latter disregard-

अध्याय ११६

श्लोक 4

करिष्ये सर्वदेवानां तस्माद् एष प्रतिक्रियाम् यज्ञविध्वंसनं कुर्वन् मर्त्यलोकक्षयं तथा

kariṣye sarvadevānāṃ tasmād eṣa pratikriyām yajñavidhvaṃsanaṃ kurvan martyalokakṣayaṃ tathā

हिन्दी अर्थ

कृष्णमें निबद्धचित्त हुई लगी--उसमेंसे एक गोपी कहती थी-- “मैं ही कृष्ण हूँ; देखो, कैसी सुन्दर चालसे चलता हूँ; तनिक मेरी विलोक्यैका भुव॑ं प्राह गोपी गोपवराड़ना। कहने लगती--' अरे गोपगण ! मैंने गोवर्धन धारण कर लिया है, तुम वर्षासे मत डरो, निश्शंक होकर इसके नीचे आकर कोई दूसरी गोपी कृष्णतीलाओंका अनुकरण करती हुई बोलने लगती--'' मैंने धेनुकासुरको मार दिया है, अब यहाँ गौएँ स्वच्छन्द होकर विचरें '” वृन्दावनके अन्दर विचरने लगीं

English

Balarima started up and Teized his club in anger, and the raonkey laid hbld of a large rock which he hurled at the hero. And casting his club at it as it approched hiin, Bala broke it into a thousand pieces, which together with the club, fell upon the ground. Beholding the club thus fallen, the monkey sprang over it and struck the Yádava violently on the Ijreast with his paws. Bala returned it with a blow of his fist upou the fore-head of Dwivida which felled him, vomitliug biood and lifeless to the earth. The crest of the mountain on which he fell was sundered into a hundied pieces by the weight of his body, as if the Thunderer had shivered it with his thunder-bolt. The celestials threw down a shower of flowers upon Káma and approached liim and praised him for the glorious feat he had performed. " Well has the world been freed" said they " by thy prowess, hero, of his vile ape, who was the enemy of the celes- tials." Then well-pleased, they and their attendant spirits returned to heaven. Many such inimitable deeds were performed by the illustrious Baladeva, the impersonation of Sesha, the supporter of the earth.

अध्याय ११६

श्लोक 5

ततो विध्वंसयाम् आस यज्ञान् अज्ञानमोहितः बिभेद साधुमर्यादां क्षयं चक्रे च देहिनाम्

tato vidhvaṃsayām āsa yajñān ajñānamohitaḥ bibheda sādhumaryādāṃ kṣayaṃ cakre ca dehinām

हिन्दी अर्थ

जैसे नेत्रोंवाली एक सुन्दरी गोपांगना सर्वांग पुलकित हो पृथिवीकी ओर देखकर कहने लगी-- अंकुश और कमल आदिकी रेखाओँसे सुशोभित पदचिह्न और देखो, उनके साथ कोई पुण्यवती मदमाती युवती भी आ गयी है, उसके ये घने छोटे-छोटे और पतले चरणचिह्न दिखायी दे रहे हैं निश्चय ही दामोदरने ऊँचे होकर पुष्पचयन किये हैं; इसी कारण यहाँ उन महात्माके चरणोंके केवल अग्रभाग ही यहाँ बैठकर उन्होंने निश्चय ही किसी बड़भागिनीका पुष्पोंसे श्रृंगार किया है; अवश्य ही

English

Then, deluded by ignorance, he destroyed sacrifices, broke the bounds of the good and brought destruction on embodied beings.

अध्याय ११६

श्लोक 6

ददाह चपलो देशान् पुरग्रामान्तराणि च क्वचिच् च पर्वताक्षेपैर् ग्रामादीन् समचूर्णयत्

dadāha capalo deśān puragrāmāntarāṇi ca kvacic ca parvatākṣepair grāmādīn samacūrṇayat

हिन्दी अर्थ

और यह देखो, पुष्पबन्धनके सम्मानसे इस मार्गसे चले गये हैं अरी सखियो! देखो,यहाँ गयी है, इसीसे उसके चरणचिह्नोंके अग्रभाग कुछ नीचे दिखायी देते हैं हाथमें अपना पाणिपललव देकर चली है, इसीसे उसके चरणचिह्न पराधीन-से दिखलायी देते हैं यहाँसे उस मन्दगामिनीके निराश होकर लौटनेके चरणचिहन दीख रहे हैं, मालूम होता है उस धूर्तने उसकी अन्य आन्तरिक अभिलाषाओंको पूर्ण किये बिना ही केवल कर-स्पर्श करके उसका अपमान किया है

English

The fickle one burned lands, cities and villages; sometimes he crushed villages and the like by hurling mountains.

अध्याय ११६

श्लोक 7

शैलान् उत्पाट्य तोयेषु मुमोचाम्बुनिधौ तथा पुनश् चार्णवमध्यस्थः क्षोभयाम् आस सागरम्

śailān utpāṭya toyeṣu mumocāmbunidhau tathā punaś cārṇavamadhyasthaḥ kṣobhayām āsa sāgaram

हिन्दी अर्थ

ततो ददृशुरायान्तं विकासिमुखपंकजम्। काचिदालोक्य गोविन्द निमीलितविलोचना। हस्तेन गृहा चेकेकां गोपीनां रासमण्डलम् । चकार तत्करस्पर्शनिमीलितदृशं हरि: ॥ ५० यहाँसे कृष्णचन्द्र गहन वनमें चले गये हैं, इसीसे उनके चरण-चिहन दिखलायी नहीं देते; अब सब लौट चलो; इस स्थानपर चन्द्रमाकी किरणें नहीं पहुँच सकतीं तदनन्तर वे गोपियाँ कृष्ण-दर्शनसे निराश होकर लौट आयीं और यमुनातटपर आकर उनके चरितोंको उस समय कोई गोपी तो श्रीगोविन्दको आते इतना ही कहती रह गयी और कुछ न बोल सकी कोई प्रणयकोपवश अपनी भ्रूभंगीसे ललाट सिकोड़कर मुखकमलका मकरन्द पान करने लगी

English

Uprooting mountains, he flung them into the waters and the ocean; and again, standing in the midst of the ocean, he agitated the sea.

अध्याय ११६

श्लोक 8

तेन विक्षोभितश् चाब्धिर् उद्वेलो द्विज जायते प्लावयंस् तीरजान् ग्रामान् पुरादीन् अतिवेगवान्

tena vikṣobhitaś cābdhir udvelo dvija jāyate plāvayaṃs tīrajān grāmān purādīn ativegavān

हिन्दी अर्थ

तब श्रीमाधव किसीसे प्रिय भाषण करके, किसीकी ओर भ्रूभंगीसे देखकर और किसीका हाथ पकड़कर उन्हें गोपियोंके साथ रासमण्डल बनाकर आदरपूर्वक रमण सन्निधिको न छोड़ना चाहती थी; इसलिये एक ही स्थानपर स्थिर रहनेके कारण रासोचित मण्डल न बन सका तब उन गोपियोंमेंसे एक-एकका हाथ पकड़कर श्रीहरिने रासमण्डलकी रचना की। उस समय उनके करस्पर्शसे प्रत्येक गोपीकी आँखें आनन्दसे मुँद जाती थीं

English

Agitated by him, the ocean overflowed its shores, brahmin, flooding with great force the villages, cities and the like on its banks.

अध्याय ११६

श्लोक 9

कामरूपी महारूपं कृत्वा सस्यान्य् अशेषतः लुठन् भ्रमणसंमर्दैः संचूर्णयति वानरः

kāmarūpī mahārūpaṃ kṛtvā sasyāny aśeṣataḥ luṭhan bhramaṇasaṃmardaiḥ saṃcūrṇayati vānaraḥ

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर रासक्रीडा आरम्भ हुई। उसमें गोपियोंके चंचल कंकणोंकी झनकार होने लगी और फिर क्रमश: करने लगे; किन्तु गोपियोंने तो बारम्बार केवल कृष्णनामका ही गान किया करते-करते थककर चंचल कंकणकी झनकारसे युक्त अपनी बाहुलता श्रीमधुसूदनके गलेमें डाल दी पुलकोदगमसस्याय स्वेदाम्बुघनतां गतौ॥ ५५ किसी निपुण गोपीने भगवान्के गानकी प्रशंसा करनेके बहाने भुजा फैलाकर श्रीमधुसूदूनको आलिंगन करके श्रीहरिकी भुजाएँ गोपियोंके कपोलोंका चुम्बन पाकर उन (कपोलों)-में पुलकावलिरूप धान्यकी उत्पत्तिके लिये स्वेदरूप जलके मेघ बन गयीं

English

The monkey, able to take any form, assumed a huge form and crushed all the crops, rolling, roaming and trampling.

अध्याय ११६

श्लोक 10

तेन विप्रकृतं सर्वं जगद् एतद् दुरात्मना निःस्वाध्यायवषट्कारं मैत्रेयासीत् सुदुःखितम्

tena viprakṛtaṃ sarvaṃ jagad etad durātmanā niḥsvādhyāyavaṣaṭkāraṃ maitreyāsīt suduḥkhitam

हिन्दी अर्थ

कृष्ण!!!” की ही ध्वनि लगा रही थीं आगे जानेपर गोपियाँ उनके पीछे जातीं और लौटनेपर सामने चलती, इस प्रकार वे अनुलोम और प्रतिलोम- गतिसे श्रीहरिका साथ देती थीं गोपियोंके साथ इस प्रकार रासक्रीडा कर रहे थे कि उनके बिना एक क्षण भी गोपियोंको करोड़ों वर्षोके पति, माता-पिता और भ्राता आदिके रोकनेपर भी

English

By that wicked one this whole world was wronged; without Vedic recitation and the vashat call, Maitreya, it was in great distress.

अध्याय ११६

श्लोक 11

एकदा रैवतोद्याने पपौ पानं हलायुधः रेवती च महाभागा तथैवान्या वरस्त्रियः

ekadā raivatodyāne papau pānaṃ halāyudhaḥ revatī ca mahābhāgā tathaivānyā varastriyaḥ

हिन्दी अर्थ

मान करते हुए रात्रिके समय उनके साथ रमण करते जिस प्रकार आकाश, अग्नि, हैं उसी प्रकार वे भी सब पदार्थोमें व्यापक हैं श्रीपराशरजी बोले--एक दिन सायंकालके समय मदोन्मत्त असुर वृषभरूप धारणकर सबको भयभीत करता इस अरिष्टासुरकी कान्ति सजनल जलधरके तेजस्वी थे और अपने खुरोंकी चोटसे वह मानो पृथिवीको वह दाँत पीसता हुआ पुन:-पुनः अपनी जिहासे ओठोंको चाट रहा था, उसने क्रोधवश अपनी

English

Once, in the Raivata garden, the plough-armed one was drinking liquor, with the fortunate Revati and other lovely women.

अध्याय ११६

श्लोक 12

उपगीयमानो विलसल्ललनामौलिमध्यगः रेमे यदुवरश्रेष्ठः कुबेर इव मन्दरे

upagīyamāno vilasallalanāmaulimadhyagaḥ reme yaduvaraśreṣṭhaḥ kubera iva mandare

हिन्दी अर्थ

सिंहनादं ततश्चक्रे तलशब्दं च केशव: । उसके ककुद (कुहान) और शरीरका प्रमाण अत्यन्त हुआ था। तथा वह समस्त गौओंकों भयभीत कर रहा खोंखलेके समान अति गम्भीर था। वह वृषभरूपधारी हैत्य गौओंके गर्भोको गिराता हुआ और तपस्वियोंको मारता हुआ सदा बनमें विचरा करता था॥ ५-६॥ तब उस अति भयानक नेत्रोंवाले हैत्यको देखकर उनका शब्द सुनकर श्रीकेशवने घोर सिंहनाद किया और ताली बजायी उसे सुनते ही वह श्रीदामोदरकी दुरात्मा वृषभासुर आगेको सींग करके

English

Sung to, amid the heads of sporting women, the best of the Yadus was enjoying himself like Kubera on the Mandara.

अध्याय ११६

श्लोक 13

ततः स वानरो ऽभ्येत्य गृहीत्वा सीरिणो हलम् मुसलं च चकारास्य संमुखं सविडम्बनम्

tataḥ sa vānaro 'bhyetya gṛhītvā sīriṇo halam musalaṃ ca cakārāsya saṃmukhaṃ saviḍambanam

हिन्दी अर्थ

किन्तु महाबली कृष्ण वृषभासुरको अपनी ओर आता देख अवहेलनासे लीलापूर्वक मुसकराते हुए उस स्थानसे विचलित न हुए श्रीमधुसूदनने उसे इस प्रकार पकड़ लिया जैसे ग्राह किसी क्षुद्र जीवको पकड़ लेता है; तथा सींग पकड़नेसे अचल हुए उस देत्यकी कोखमें घुटनेसे प्रहार किया इस प्रकार सींग पकड़े हुए उस हैत्यका दर्प तदनन्तर उसका एक सींग उखाड़कर उसीसे उसपर आघात किया, जिससे वह महाहैत्य मुखसे रक्त वमन करता हुआ मर गया कंसका श्रीकृष्णको बुलानेके लिये अक्रूरको भेजना ककुझति हतेऊरिष्टे धेनुके विनिपातिते। वसुदेवं प्रति तदा कोप॑ं चक्रे सुदुर्मति:॥ ४ सो5तिकोपादुपालभ्य सर्वयादवसंसदि।

English

Then that monkey came, seized the plough-bearer's plough and club, and mimicked him to his face.

अध्याय ११६

श्लोक 14

तथैव योषितां तासां जहासाभिमुखं कपिः पानपूर्णांश् च करकाञ् चिक्षेपाहत्य वै पदा

tathaiva yoṣitāṃ tāsāṃ jahāsābhimukhaṃ kapiḥ pānapūrṇāṃś ca karakāñ cikṣepāhatya vai padā

हिन्दी अर्थ

उसने अत्यन्त कोपसे वसुदेवजीको सम्पूर्ण यादवोंकी सभामें डाटा तथा समस्त यादवॉकी भी निन्दा की और यह कार्य विचारने लगा--'ये प्राप्त नहीं करते हैं तभीतक मुझे इन्हें मार देना बुलाकर ऐसे-ऐसे उपाय करूँगा, जिससे वे नष्ट हो यादवश्रेष्ठ शूरवीर अक्रूरको गोकुल भेजूँगा साथ ही व॒ृन्दावनमें विचरनेवाले घोर असुर केशीको भी आज्ञा दूँगा, जिससे वह महाबली हैत्य उन्हें

English

Likewise the monkey laughed in the faces of those women, and kicking with his foot he knocked over the cups full of liquor.

अध्याय ११६

श्लोक 15

ततः कोपपरीतात्मा भर्त्सयाम् आस तं बलः तथापि तम् अवज्ञाय चक्रे किलकिलाध्वनिम्

tataḥ kopaparītātmā bhartsayām āsa taṃ balaḥ tathāpi tam avajñāya cakre kilakilādhvanim

हिन्दी अर्थ

प्रकार बचकर वे दोनों वसुदेवपुत्र गोप मेरे पास श्रीपराशरजी बोले--ऐसा सोचकर उस दुष्टात्मा कंसने वीरवर राम और कृष्णको मारनेका निश्चय वसुदेवसुताौ तत्र विष्णोरंशसमुद्धवौ। स वा हनिष्यते पापौ वसुदेवात्मजो शिशू॥ १७ कंस बोला--हे दानपते! मेरी प्रसन्‍नताके लिये आप मेरी एक बात स्वीकार कर लीजिये। यहाँसे नाशके लिये उत्पन्न हुए वे दुष्ट बालक वहाँ पोषित मेरे यहाँ चतुर्दशीको धनुषयज्ञ होनेवाला है; अत: आप वहाँ जाकर उन्हें मल्लयुद्धके लिये ले

English

Then Bala, filled with anger, rebuked him; yet the monkey, scorning him, made a chattering noise.

अध्याय ११६

श्लोक 16

ततः समुत्थाय बलो जगृहे मुसलं रुषा सो ऽपि शैलशिलां भीमां जग्राह प्लवगोत्तमः

tataḥ samutthāya balo jagṛhe musalaṃ ruṣā so 'pi śailaśilāṃ bhīmāṃ jagrāha plavagottamaḥ

हिन्दी अर्थ

उन दोनोंके साथ मेरे इन पहलवानोंका दन्द्रयुद्ध यहाँ अथवा महावतसे प्रेरित हुआ कुवलयापीड नामक गजराज उन दोनों दुष्ट वसुदेव- पुत्र बालकोंको नष्ट कर देगा मारकर मैं दुर्मत वसुदेव, नन्दगोप और इस अपने मन्दमति पिता उग्रसेनको भी मार डालूँगा गोपोंके सम्पूर्ण गोधन तथा धनको में छीन लूँगा

English

Then Bala rose and seized his club in wrath, and the best of monkeys seized a dreadful mountain rock.

अध्याय ११६

श्लोक 17

चिक्षेप च स तां क्षिप्तां मुसलेन सहस्रधा बिभेद यादवश्रेष्ठः सा पपात महीतले

cikṣepa ca sa tāṃ kṣiptāṃ musalena sahasradhā bibheda yādavaśreṣṭhaḥ sā papāta mahītale

हिन्दी अर्थ

हे दानपते! आपके अतिरिक्त ये सभी यादवगण मुझसे द्वेष करते हैं, अत: मैं क्रमश: इन सभीको नष्ट करनेका प्रयत्न करूँगा भोगूँगा, अत: है वीर! मेरी प्रसन्‍्नताके लिये आप गोकुलमें पहुँचकर गोपगणोंसे इस प्रकार कहें जिससे वे माहिष्य (भेंसके) घृत और दधि आदि उपहारोंके सहित शीघ्र ही यहाँ आ जायँ श्रीपराशरजी बोले--हे द्विज! कंससे ऐसी आज्ञा देखूँगा'--यह सोचकर अति प्रसन्न हुए प्रिय अक्रूरजी राजा कंससे “जो आज्ञा' कह एक अति सुन्दर रथपर चढ़े और मथुरापुरीसे बाहर निकल आये

English

He hurled it, and the best of the Yadavas shattered it into a thousand pieces with his club as it came, and it fell to the ground.

अध्याय ११६

श्लोक 18

आपतन् मुसलं चासौ समुल्लङ्घ्य प्लवंगमः वेगेनागम्य रोषेण तलेनोरस्य् अताडयत्

āpatan musalaṃ cāsau samullaṅghya plavaṃgamaḥ vegenāgamya roṣeṇa talenorasy atāḍayat

हिन्दी अर्थ

केशी चापि बलोदग्र: कंसदूतप्रचोदित: । तस्य हेषितशब्देन गोपाला हैत्यवाजिन:। अलं त्रासेन गोपाला: केशिन: कि भयातुरैः । किमनेनाल्‍पसारेण हेषिताटोपकारिणा। अपने खुरोंसे पृथिवीतलको खोदता, ग्रीवाके बालोंसे बादलोंको भी पार करता गोपोंकी ओर दौड़ा हैत्यके हिनहिनानेके शब्दसे भयभीत होकर समस्त गोप और गोपियाँ श्रीगोविन्दकी शरणमें आये मेघकी गर्जनाके समान गम्भीर वाणीसे बोले--

English

Leaping over the descending club, the monkey came with speed and struck him on the chest with his palm in rage.

अध्याय ११६

श्लोक 19

ततो बलेन कोपेन मुष्टिना मूर्ध्नि ताडितः पपात रुधिरोद्गारी द्विविदः क्षीणजीवितः

tato balena kopena muṣṭinā mūrdhni tāḍitaḥ papāta rudhirodgārī dvividaḥ kṣīṇajīvitaḥ

हिन्दी अर्थ

गोपालगण ! आपलोग केशी (केशधारी अश्व)-से न डेरें, आप तो गोप-जातिके हैं, फिर इस प्रकार भयभीत होकर आप अपने वीरोचित पुरुषार्थका लोप क्यों करते हैं 2 यह अल्पवीर्य, हिनहिनानेसे आतंक फैलानेवाला और करते हैं, आपलोगोंका क्‍या बिगाड़ सकता है ?!” इस प्रकार गोपोंको धैर्य बँधाकर वे केशीसे वीरभद्रने जिस प्रकार पूषाके दाँत उखाड़े थे, उसी प्रकार मैं कृष्ण तेरे मुखसे सारे दाँत गिरा दूँगा'' ऐसा कहकर श्रीगोविन्द उछलकर केशीके सामने आये और वह अश्वरूपधारी हैत्य भी मुँह खोलकर 'फैलाकर उस अश्वरूपधारी दुष्ट हैत्यके मुखमें डाल

English

Then, struck on the head by Bala's fist in anger, Dvivida fell vomiting blood, his life ended.

अध्याय ११६

श्लोक 20

पतता तच्छरीरेण गिरेः शृङ्गम् अशीर्यत मैत्रेय शतधा वज्रिवज्रेणेव हि ताडितम्

patatā taccharīreṇa gireḥ śṛṅgam aśīryata maitreya śatadhā vajrivajreṇeva hi tāḍitam

हिन्दी अर्थ

केशीके मुखमें घुसी हुई भगवान् कृष्णकी बाहुसे टकराकर उसके समस्त दाँत शुभ्र मेघखण्डोंके समान टूटकर बाहर गिर पड़े गयी व्याधि जिस प्रकार नाश करनेके लिये बढ़ने लगती है, उसी प्रकार केशीके देहमें प्रविष्ट हुई कृष्णचन्द्रकी भुजा बढ़ने लगी फट जानेसे वह फेनसहित रुधिर वमन करने लगा और उसकी आँखें स्नायुबन्धनके ढीले हो जानेसे तब वह मल-मूत्र छोड़ता हुआ पृथिवीपर पैर पटकने लगा, उसका शरीर पसीनेसे भरकर ठण्डा पड़ गया और वह निश्चेष्ट हो गया

English

By the fall of his body the mountain peak was shattered into a hundred pieces, Maitreya, as if struck by the thunderbolt of the thunderbolt-wielder.

अध्याय ११६

श्लोक 21

पुष्पवृष्टिं ततो देवा रामस्योपरि चिक्षिपुः प्रशशंसुस् तथाभ्येत्य साध्व् एतत् ते महत् कृतम्

puṣpavṛṣṭiṃ tato devā rāmasyopari cikṣipuḥ praśaśaṃsus tathābhyetya sādhv etat te mahat kṛtam

हिन्दी अर्थ

केशिनस्ते द्विधाभूते शकले द्वे विरेजतु:॥ १५७ हत्वा तु केशिनं कृष्णो गोपालैरमुदितैर्व॑त:ः । ततो गोप्यएच गोपाश्च हते केशिनि विस्मिता: । केशिनं निहतं दृष्टवा हर्षनिर्भमानस: ॥ १८ केशीके शरीरके वे दोनों खण्ड दो पाँव, आधी पीठ, आधी मूँछ तथा एक-एक कान-आँख और नासिकारन्भ्रके सहित सुशोभित हुए केशीके मारे जानेसे विस्मित हुए गोप और गोपियोंने अनुरागवश अत्यन्त है विप्र! उसे मरा देख मेघपटलमें छिपे हुए श्रीनारदजी हर्षितचित्तसे कहने लगे-- हे अच्युत !! आप धन्य हैं, धन्य हैं। अहा ! आपने देवताओंको दुःख देनेवाले इस केशीको लीलासे ही मार डाला

English

Then the gods rained flowers on Rama and came and praised him: "Well done! This is a great deed of yours.

अध्याय ११६

श्लोक 22

अनेन दुष्टकपिना दैत्यपक्षोपकारिणा जगन् निराकृतं वीर दिष्ट्या स क्षयम् आगतः इत्य् उक्त्वा दिवम् आजग्मुर् देवा हृष्टाः सगुह्यकाः

anena duṣṭakapinā daityapakṣopakāriṇā jagan nirākṛtaṃ vīra diṣṭyā sa kṣayam āgataḥ ity uktvā divam ājagmur devā hṛṣṭāḥ saguhyakāḥ

हिन्दी अर्थ

में मनुष्य और अश्वके इस पहले और कहीं न होनेवाले हे मधुसूदन! आपने अपने इस विस्मित और सन्तुष्ट हो रहा है समय यह अश्व अपनी सटाओंको हिलाता और हींसता हुआ आकाशकी ओर देखता था तो इससे सम्पूर्ण देवगण हे जनार्दन! आपने इस दुष्टात्मा केशीको मारा है; इसलिये आप लोककमें 'केशव' नामसे विख्यात होंगे

English

By this wicked monkey, who helped the daityas' side, the world was harassed, hero; fortunately he has met his end." Having said this, the gods went to heaven delighted, with the guhyakas.

अध्याय ११६

श्लोक 23

एवंविधान्य् अनेकानि बलदेवस्य धीमतः कर्माण्य् अपरिमेयानि शेषस्य धरणीभृतः

evaṃvidhāny anekāni baladevasya dhīmataḥ karmāṇy aparimeyāni śeṣasya dharaṇībhṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

हे केशिनिषूदन ! आपका कल्याण हो, अब में जाता हूँ। परसों कंसके साथ आपका युद्ध होनेके समय में फिर आऊँगा अनुगामियों सहित उग्रसेनके पुत्र कंसके मारे जानेपर आप पृथिवीका भार उतार देंगे मैं अनेक राजाओंके साथ आप आयुष्मान् पुरुषके किये हुए अनेक प्रकारके युद्ध देखूँगा मैं जाना चाहता हूँ। आपने देवताओंका बहुत बड़ा कार्य किया है। आप सभी कुछ जानते हैं मैं अधिक क्‍या कहूँ ? आपका मंगल हो, मैं जाता हूँ”” तदनन्तर नारदजीके चले जानेपर गोपगणसे सम्मानित साथ गोकुलमें प्रवेश किया

English

Such are the many immeasurable deeds of the wise Baladeva, Shesha, the upholder of the earth.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_viSNupurANa-crit.txt · प्राप्त 3/6/2026

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६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vishnu Purana — Chapter 116
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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