Yajur Veda· Yajurveda Saṁhitā
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अध्याय 17 / 40

Adhyāya 17

अध्याय 17

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अध्याय १७

श्लोक 1

अश्म॒न्नूर्जं॒ पर्व॑ते शिश्रिया॒णाम॒द्भ्य ओष॑धीभ्यो॒ वन॒स्पतिभ्यो॒ अधि॒ सम्भृ॑तं॒ पय॑: ।तां न॒ इष॒मूर्जं॑ धत्त मरुतः सᳪररा॒णाः अश्मँ॑स्ते॒ क्षुन्मयि॑ त॒ ऊर्ग्यं द्वि॒ष्मस्तं ते॒ शुगृ॑च्छतु

aśmannūrjaṃ parvate śiśriyāṇāmadbhya oṣadhībhyo vanaspatibhyo adhi sambhṛtaṃ paya: | tāṃ na iṣamūrjaṃ dhatta marutaḥ sararāṇāḥ aśma~ste kṣunmayi ta ūrgyaṃ dviṣmastaṃ te śugṛcchatu

हिन्दी अर्थ

९. हम वृष्टि से उत्पन्न अन्न व रस को प्राप्त करे। २. हमें इन ओषधियों का सेवन करनेवाली गौवों का दृध प्राप्त हो। ३. हमें सदा उचित भूख लगे। ४. अन्न हमारे इमा मेऽअग्नऽडइष्ट॑का धेनवः सन्त्वेकां च दश॑ च दश च शतं च॑ शातं च॑ सहस्त्र मध्यं चान्त॑श्च परार्द्धश्चैता मेऽअग्नऽ इष्ट॑का धेनवः सन्त्वमुत्रामुर्मिल्लोके ॥२॥

English

com The Texts of the White Yajurveda, tr. Ralph T.H. Griffith, [1899], THE food and strength contained in stone and mountain, drink gathered from the plants and trees and waters, That food and strength, Maruts! free-givers, grant us. In the stone is thy hunger. In me is thy food. Let thy pain reach the man we hate.

अध्याय १७

श्लोक 2

इ॒मा मे॑ अग्न॒ इष्ट॑का धे॒नव॑: स॒न्त्वेका॑ च॒ दश॑ च॒ दश॑ च श॒तं च॑ श॒तं च॑ स॒हस्रं॑ च स॒हस्रं॑ चा॒युतं॑ चा॒युतं॑ च नि॒युतं॑ च नि॒युतं॑ च प्र॒युतं॒ चार्बु॑दं च॒ न्य॑र्बुदं समु॒द्रश्च॒ मध्यं॒ चान्त॑श्च परा॒र्धश्चै॒ता मे॑ अग्न॒ इष्ट॑का धे॒नव॑: सन्त्व॒मुत्रा॒मुष्मिँ॑ल्लो॒के

imā me agna iṣṭakā dhenava: santvekā ca daśa ca daśa ca śataṃ ca śataṃ ca sahasraṃ ca sahasraṃ cāyutaṃ cāyutaṃ ca niyutaṃ ca niyutaṃ ca prayutaṃ cārbudaṃ ca nyarbudaṃ samudraśca madhyaṃ cāntaśca parārdhaścaitā me agna iṣṭakā dhenava: santvamutrāmuṣmi~lloke

हिन्दी अर्थ

हम अपने जीवनों को यज्ञमय बनाएं यज्ञ इस लोक में सात्विक अन्न व नीरोगता देनेवाला होकर कल्याण करता है तथा यज्ञ में निहित त्याग की भावना परलोक मे कल्याण करनेवाली होती हे। घृतश्च्युतो मधुश्च्युतों विराजो नाम॑ कामदुघाऽअक्षीयमाणाः ॥३॥

English

O Agni, may these bricks be mine own milch kine: one, and ten, and ten tens, a hundred, and ten hundreds, a thousand, and ten thousand a myriad, and a hundred thousand, and a million, and a hundred millions, and an ocean middle and end, and a hundred thousand millions, and a billion. May these bricks be mine own milch-kine in yonder world and in this world.

अध्याय १७

श्लोक 3

ऋ॒तव॑ स्थ ऋता॒वृध॑ ऋतु॒ष्ठा स्थ॑ ऋता॒वृध॑: ।घृ॒त॒श्च्युतो॑ मधु॒श्च्युतो॑ वि॒राजो॒ नाम॑ काम॒दुघा॒ अक्षी॑यमाणाः

ṛtava stha ṛtāvṛdha ṛtuṣṭhā stha ṛtāvṛdha: | ghṛtaścyuto madhuścyuto virājo nāma kāmadughā akṣīyamāṇāḥ

हिन्दी अर्थ

-हमारी गति नियमित हो। यज्ञो से हम शक्तियों का वर्धन करे। अनिष्ट समुद्र की अवक्रा ( रक्षा-शक््ति) समुद्रस्य त्वाव॑कयाग्ने परि व्ययामसि । पावकोऽअस्मभ्य॑-शिवो भ॑व ।४॥ १९. गत मन्त्र के अनुसार जीवन-निर्माण से शरीर का स्वास्थ्य -ही नहीं, मनःस्वास्थ्य

English

Ye are the Seasons, strengthening Law, fixed in due season, strengthening Law, Called Splendid, dropping butter down and honey, yielders of every wish, imperishable.

अध्याय १७

श्लोक 4

स॒मु॒द्रस्य॒ त्वाऽव॑क॒याग्ने॒ परि॑ व्ययामसि ।पा॒व॒को अ॒स्मभ्य॑ᳪ शि॒वो भ॑व

samudrasya tvā'vakayāgne pari vyayāmasi | pāvako asmabhya śivo bhava

हिन्दी अर्थ

१. हम कर्मो के तो निवास-स्थान बन जार्ण। २. सदा प्रसन्न मन का हममें प्रवेश हो। ३. प्रभु-प्राप्त प्रेरणाओं को ओरों तक पहंचानेवाले बनें। ४. पवित्र जीवनवाले युर्वेदभाष्यम् ५5७ सप्तदशोऽध्यायः होकर। ५. सभी का कल्याण करे। यही प्रभु-प्राप्ति का मार्ग हे।

English

With the lake's mantling need we robe thee, Agni: to us he purifying and auspicious.

अध्याय १७

श्लोक 5

हि॒मस्य॑ त्वा ज॒रायु॒णाऽग्ने॒ परि॑ व्ययामसि ।पा॒व॒को अ॒स्मभ्य॑ᳪ शि॒वो भ॑व

himasya tvā jarāyuṇā'gne pari vyayāmasi | pāvako asmabhya śivo bhava

हिन्दी अर्थ

प्रभु का प्रिय वही है जो ज्लान-दीप्त व मधुर वाणीवाला बनकर लोकहित मेँ प्रवृत्त होता है ओर प्रभु के सन्देश को मधुर शब्दों मे उन तक पहँचाता है। स न॑; पावक दीदिवो ऽग्न देवांँर। इहावह । उप॑ यज्ञश्ह विश्च नः ॥ ९॥ १. गत मन्त्र की भावना को ही अधिक विस्तृत करते हए कहते है कि हे

English

With cold's investing garb we gird thee, Agni: to us be purifying and auspicious.

अध्याय १७

श्लोक 6

उप॒ ज्मन्नुप॑ वेत॒सेऽव॑ तर न॒दीष्वा ।अग्ने॑ पि॒त्तम॒पाम॑सि॒ मण्डू॑कि॒ ताभि॒रा ग॑हि॒ सेमं नो॑ य॒ज्ञं पा॑व॒कव॑र्णᳪ शि॒वं कृ॑धि

upa jmannupa vetase'va tara nadīṣvā | agne pittamapāmasi maṇḍūki tābhirā gahi semaṃ no yajñaṃ pāvakavarṇa śivaṃ kṛdhi

हिन्दी अर्थ

प्रभु का प्यारा दिव्य गुणों को अपनाता है, यज्ञशील होता है ओर अपने जीवन को हविरूप बना देता है, सदा दानपूर्वक यज्ञशेष को ही खानेवाला होता हे। सप्तदशोऽध्यायः ५६८ युर्वेदभाव्यम् १. पिछले मन्त्रों कौ प्रेरणा को सुननेवाला व्यक्ति अपने में शक्ति को भरनेवाला

English

Descend upon the earth, the reed, the rivers: thou art the gall, O Agni, of the waters. With them come hither, female Frog, and render this sacrifice of ours bright-hued, successful.

अध्याय १७

श्लोक 7

अ॒पामि॒दं न्यय॑नᳪ समु॒द्रस्य॑ नि॒वेश॑नम् ।अ॒न्याँस्ते॑ अ॒स्मत्त॑पन्तु हे॒तय॑: पाव॒को अ॒स्मभ्य॑ᳪ शि॒वो भ॑व

apāmidaṃ nyayana samudrasya niveśanam | anyā~ste asmattapantu hetaya: pāvako asmabhya śivo bhava

हिन्दी अर्थ

हम ऊँचे-से-ऊंचे ज्ञानी बनें। ज्ञान को चारों ओर फलाने का प्रयल करे। ज्ञान को फैलाकर वातावरण को पवित्र वनां। अनज्ञानावृत लोगों से घृणा करके सुदूर पर्वत- अन्यास्तैऽअस्मत्त॑पन्तु हेतयः: पावकोऽअस्मभ्यैःशिवो भ॑व । ९५५॥ यचुर्वेदभाव्यम् ५७१ सप्तदसोऽध्यायः

English

This is the place where waters meet; here is the gathering of the flood. Let thy shaft burn others than us: be thou cleanser, propitious unto us.

अध्याय १७

श्लोक 8

अग्ने॑ पावक रो॒चिषा॑ म॒न्द्रया॑ देव जि॒ह्वया॑ ।आ दे॒वान् व॑क्षि॒ यक्षि॑ च

agne pāvaka rociṣā mandrayā deva jihvayā | ā devān vakṣi yakṣi ca

हिन्दी अर्थ

वे प्रभु वन=उपास्य है, यह संसार वृक्षनकछेदनीय है। याते धामानि परमाणि यावमा या म॑ध्य॒मा विंश्वकर्म्नुतेमा । १. है विष्वकर्मन्-सारे संसार के निर्माण करनेवाले! स्वधावः अपनी धारण शक्तिवाले! ओर किसी से न धारण किये जानेवाले प्रभो! ते=आपकं याजो परमाणि धामानि उत्कृष्ट

English

O Agni, purifier, God, with splendour and thy pleasant tongue Bring hither, and adore, the Gods.

अध्याय १७

श्लोक 9

स न॑: पावक दीदि॒वोऽग्ने॑ दे॒वाँ२ इ॒हा व॑ह ।उप॑ य॒ज्ञᳪ ह॒विश्च॑ नः

sa na: pāvaka dīdivo'gne devā~2 ihā vaha | upa yajña haviśca naḥ

हिन्दी अर्थ

उन्नति के मार्ग पर चलें। ४. शरीर की शक्तियों को बदार्णँ, मस्तिष्क को प्रकाशमय करे। ५. बाह्य व आन्तर शत्रुओं को जीते। ६. यज्ञशील हों। ७. ज्ञानी बनकर ओरों को भी उत्तम वाचस्पतिः विश्वकर्माणमूतये मनोजुवं वाजैऽअद्या हुवेम । स नो विश्वानि हव॑नानि जोषद्धिश्वशंम्भूरव॑से साधुकर्मा । २३॥

English

So, Agni, purifying, bright, bring hither to our sacrifice, To our oblation bring the Gods.

अध्याय १७

श्लोक 10

पा॒व॒कया॒ यश्चि॒तय॑न्त्या कृ॒पा क्षाम॑न् रुरु॒च उ॒षसो॒ न भा॒नुना॑ ।तूर्व॒न् न याम॒न्नेत॑शस्य॒ नू रण॒ आ यो घृ॒णे न त॑तृषा॒णो अ॒जर॑:

pāvakayā yaścitayantyā kṛpā kṣāman ruruca uṣaso na bhānunā | tūrvan na yāmannetaśasya nū raṇa ā yo ghṛṇe na tatṛṣāṇo ajara:

हिन्दी अर्थ

प्रभु की उपासना से मेरा जीवन शान्त होगा, मेरा योगक्षेम ठीक चलेगा सप्तदसोऽध्यायः ५७६ यजुर्वेद भाष्यम् (अवसे) मेरे कर्म सदा उत्तम व सफलतावाले होगे। विश्व॑कर्मन् हविषा वर्दधनेन त्रातारमिन्द्र॑मकृणोरवध्यम् ।

English

He who with purifying, eye-attracting form hath shone upon the earth as with the light of Dawn; Who speeding on, as in the fleet steed's race, in fight, cometh untouched by age, as one athirst in heat.

अध्याय १७

श्लोक 11

नम॑स्ते॒ हर॑से शो॒चिषे॒ नम॑स्ते अस्त्व॒र्चिषे॑ ।अ॒न्याँस्ते॑ अ॒स्मत्त॑पन्तु हे॒तय॑: पाव॒को अ॒स्मभ्य॑ᳪ शि॒वो भ॑व

namaste harase śociṣe namaste astvarciṣe | anyā~ste asmattapantu hetaya: pāvako asmabhya śivo bhava

हिन्दी अर्थ

-हम अपनी इन्द्रियों को एकाग्र करके उस परमात्मा का चिन्तन करें जो “विश्वकर्मा विमना-विहाया-धाता--विधाता- परम व सन्दृक् ' है, जो "पर! है। एेसा करने पर हम प्रेरणा के सुननेव्पले होंगे ओर आनन्द का अनुभव करेगे। यो न॑: पिता ज॑निता यो विधाता धामानि वेद् भुव॑नानि विश्वां ।

English

Obeisance to thy wrath and glow! Obeisance to thy fiery flame! Let thy shot missiles burn others than us: be thou cleanser, propitious unto us.

अध्याय १७

श्लोक 12

नृ॒षदे॒ वेड॑प्सु॒षदे॒ वेड् ब॑र्हि॒षदे॒ वेड् व॑न॒सदे॒ वेड् स्व॒र्विदे॒ वेट्

nṛṣade veḍapsuṣade veḍ barhiṣade veḍ vanasade veḍ svarvide veṭ

हिन्दी अर्थ

- १. मस्तिष्क व मस्तिष्क की साधना करनेवाले देवों से वह प्रभु दूर हे। २. शरीर व शरीर की साधना करनेवाले असुरो से तो वह निश्चित ही दूर है। ३. उस ग्रहणीय व्यापक प्रभु को प्राण ही धारण करते है। ४. इस प्राण-साधना के होने पर अधीतपूर्णविद्या देव उस प्रभु का सम्यग् दर्शन करते है।

English

To him who dwells in man, Hail! To him who dwells in waters, Hail! To him who dwells in sacred grass, Hail! To him who dwells in the wood, Hail! To him who finds the light, Hail!

अध्याय १७

श्लोक 13

ये दे॒वा दे॒वानां॑ य॒ज्ञिया॑ य॒ज्ञिया॑नाᳪ संवत्स॒रीण॒मुप॑ भा॒गमास॑ते ।अ॑हु॒तादो॑ ह॒विषो॑ य॒ज्ञे अ॒स्मिन्त्स्व॒यं पि॑बन्तु॒ मधु॑नो घृ॒तस्य॑

ye devā devānāṃ yajñiyā yajñiyānā saṃvatsarīṇamupa bhāgamāsate | ahutādo haviṣo yajñe asmintsvayaṃ pibantu madhuno ghṛtasya

हिन्दी अर्थ

प्रभु-दर्शन के लिए आवश्यक है कि ९. हम अज्ञान को दूर करें। २. गपशप न मारते रहे। ३. सांसारिक सुख-साधनों का ही संग्रह न करते रह जाँ ओर ४. यज्ञो द्वारा स्वर्ग प्राप्ति ही हमारा ध्येय न बन जाए्। विष्वकर्मा ह्यज॑निष्ट देवऽआदिद् ग॑न्धर्वोऽअ॑भवव् द्वितीयः ।

English

Worshipful Gods of Gods who merit worship, those who sit down beside their yearly portion, Let them who eat not sacrificial presents drink in this rite of honey and of butter.

अध्याय १७

श्लोक 14

ये दे॒वा दे॒वेष्वधि॑ देव॒त्वमाय॒न् ये ब्रह्म॑णः पुर ए॒तारो॑ अ॒स्य ।येभ्यो॒ न ऋ॒ते पव॑ते॒ धाम॒ किञ्च॒न न ते दि॒वो न पृ॑थि॒व्या अधि॒ स्नुषु॑

ye devā deveṣvadhi devatvamāyan ye brahmaṇaḥ pura etāro asya | yebhyo na ṛte pavate dhāma kiñcana na te divo na pṛthivyā adhi snuṣu

हिन्दी अर्थ

- हम अपनी आत्मा को ' संक्रन्दन-अनिमिष-जिष्णु- युत्कार- दुश्च्यवन - धृष्णु इषुहस्त व वृषण ' बनाएंगे तो इस आत्मा से शत्रुओं को अवश्य पराभूत करेगे। १. सः=वह “अप्रतिरथ ' अद्वितीय योद्धा इषुहस्तैः -प्रेरणारूप हाथों से, अर्थात् प्रभु की प्रेरणा के अनुसार कार्य करनेवाले हाथों से ओर सः=वह न -भिः=अनासक्ति-

English

Those Gods who have attained to Godhead over Gods, they who have led the way in this our holy work, Without whose aid no body whatsoever moves, not on heaven's heights are they, nor on the face of earth.

अध्याय १७

श्लोक 15

प्रा॒ण॒दा अ॑पान॒दा व्या॑न॒दा व॑र्चो॒दा व॑रिवो॒दाः ।अ॒न्याँस्ते॑ अ॒स्मत्त॑पन्तु हे॒तय॑: पाव॒को अ॒स्मभ्य॑ᳪ शि॒वो भ॑व

prāṇadā apānadā vyānadā varcodā varivodāḥ | anyā~ste asmattapantu hetaya: pāvako asmabhya śivo bhava

हिन्दी अर्थ

-हम अपने शरीररूप रथों से चमक, उन्नति करनेवाले बने। १. अप्रतिरथ वह है जो बलविज्ञायः =अपने बल के कारण प्रसिद्ध है। २. स्थविरः= स्थिरमति= स्थितप्रज्ञ हे, विषयों से डँवोँडोल होनेवाला नहीं है। ३. प्रवीरः प्रकृष्ट वीर है, यह वैषयिक वृत्तियों को विशेषरूपेण कम्पित करनेवाला है (विशेषेण ईरयति) ४.

English

Giver of breath, of out-breath, breath diffusive, giver of lustre, giving room and freedom, Let thy shot missiles burn others than us: be thou cleanser, propitious unto us.

अध्याय १७

श्लोक 16

अ॒ग्निस्ति॒ग्मेन॑ शो॒चिषा॒ यास॒द्विश्वं॒ न्यत्रिण॑म् ।अ॒ग्निर्नो॑ वनते र॒यिम्

agnistigmena śociṣā yāsadviśvaṃ nyatriṇam | agnirno vanate rayim

हिन्दी अर्थ

हम अपने जीवन में बल ओर ज्ञान का समन्वय करके विजयी बनें। इमर्संजाताऽअनु वीरयध्वमिन्द्र॑सखायोऽअनु सश्रभध्वम् ।३८॥ १. प्रभु कहते हहे सजाताः=समान जन्मवाले जीवो! इमम्-इस इन्द्र के अनु- वीरयध्वम्-अनुसार तुम भी वीरतापूर्णं कर्म करो। उस इन्दर के अनुसार जो गोत्रभिदम्=( गोत्र

English

May Agni with his sharpened blaze cast down each fierce devouring fiend. May Agni win us wealth by war.

अध्याय १७

श्लोक 17

य इ॒मा विश्वा॒ भुव॑नानि॒ जुह्व॒दृषि॒र्होता॒ न्यसी॑दत् पि॒ता न॑: ।स आ॒शिषा॒ द्रवि॑णमि॒च्छमा॑नः प्रथम॒च्छदव॑राँ॒२ आ वि॑वेश

ya imā viśvā bhuvanāni juhvadṛṣirhotā nyasīdat pitā na: | sa āśiṣā draviṇamicchamānaḥ prathamacchadavarā~2 ā viveśa

हिन्दी अर्थ

-हम धनों का अवगाहन करें, परन्तु उनमें ही आसक्त न हो जापं। हममे दिव्य गुणों का विकास हो। लोभ ही दिव्य गुणरूप पुरुषों के लिए तुहिनरूप होता है। इन्द्र॑ऽआसां नेता वृहस्पतिर्दक्षिणा यज्ञः पुरऽ एतु सोम॑: । देवसेनानांमभिभजञ्जतीनां जयन्तीनां मरुतो यन्त्वग्र॑म् ॥४०॥

English

He who sate down as Hotar priest, the Rishi, our Father offering, up all things existent He, seeking with his wish a great possession, came among men on earth as archetypal.

अध्याय १७

श्लोक 18

किᳪस्वि॑दासीदधि॒ष्ठान॑मा॒रम्भ॑णं कत॒मत्स्वि॑त्क॒थाऽऽसी॑त् ।यतो॒ भूमिं॑ ज॒नय॑न् वि॒श्वक॑र्मा॒ वि द्यामौर्णो॑न्महि॒ना वि॒श्वच॑क्षाः

kisvidāsīdadhiṣṭhānamārambhaṇaṃ katamatsvitkathā''sīt | yato bhūmiṃ janayan viśvakarmā vi dyāmaurṇonmahinā viśvacakṣāḥ

हिन्दी अर्थ

-हम प्राण-साधना करें, जिससे हममे दिव्य गुणों का विकास हो। इन्द्रियों के अधिष्ठाता बनकर हम देवसेनाओं के सेनापति बनें। हमारे जीवन में ‹ ज्ञान-दान- यज्ञ- सौम्यता व सोमरक्षा' को महत्त्व प्राप्त हो। म॒हाम॑नसां भुवनच्यवानां घोषो देवानां जय॑तामुद॑स्थात् ।॥ ४९॥

English

What was the place whereon he took his station? What was it that upheld him? What the manner, Whence Visvakarman, seeing all, producing the earth, with mighty power disclosed the heavens?

अध्याय १७

श्लोक 19

वि॒श्वत॑श्चक्षुरु॒त वि॒श्वतो॑मुखो वि॒श्वतो॑बाहुरु॒त वि॒श्वत॑स्पात् ।सं बा॒हुभ्यां॒ धम॑ति॒ सं पत॑त्रै॒र्द्यावा॒भूमी॑ ज॒नय॑न् दे॒व एक॑:

viśvataścakṣuruta viśvatomukho viśvatobāhuruta viśvataspāt | saṃ bāhubhyāṃ dhamati saṃ patatrairdyāvābhūmī janayan deva eka:

हिन्दी अर्थ

हम इन्द्र, वरूण व आदित्य" बनने का प्रय करे। विशाल हदयवाले हों, अधिक-से-अधिक त्याग कौ वृत्तिवाले हों। उद्धर्षय मघवन्नायुंधान्युत्सत्व॑नां मामकानां मनाश्सि । १. विजय के लिए अस्त्रो का ठीक होना अत्यन्त आवश्यक है। अध्यात्म संग्राम के

English

He who hath eyes on all sides round about him, a mouth on all sides, arms and feet on all sides, He the sole God, producing earth and heaven, weldeth them with his arms as wings together.

अध्याय १७

श्लोक 20

किᳪस्वि॒द्वनं॒ क उ॒ स वृ॒क्ष आ॑स॒ यतो॒ द्यावा॑पृथि॒वी नि॑ष्टत॒क्षुः ।मनी॑षिणो॒ मन॑सा पृ॒च्छतेदु॒ तद्यद॒ध्यति॑ष्ठ॒द्भुव॑नानि धा॒रय॑न्

kisvidvanaṃ ka u sa vṛkṣa āsa yato dyāvāpṛthivī niṣṭatakṣuḥ | manīṣiṇo manasā pṛcchatedu tadyadadhyatiṣṭhadbhuvanāni dhārayan

हिन्दी अर्थ

जीवन-संग्राम में विजय के लिए हमारे मन, इन्दिय व शरीररूप सब अस्माक वीराऽ उत्त॑रे भवन्त्वस्मोँ २।ऽॐ देवाऽअवता ह वेषु ।॥४३॥ १. ध्वजेषु समृतेषु=ध्वजाओं व पताकाओं के ठीकरूप से प्राप्त कर लेने पर अस्माकम्-हम आस्तिक बुद्धिवालों का नियामक इन्द्रः = परमात्मा हो, अर्थात् हम प्रभु को

English

What was the tree, what wood in sooth produced it, from which they fashioned out the earth and heaven? Ye thoughtful men, inquire within your spirit whereon he stood when he established all things.

अध्याय १७

श्लोक 21

या ते॒ धामा॑नि पर॒माणि॒ याऽव॒मा या म॑ध्य॒मा वि॑श्वकर्मन्नु॒तेमा ।शिक्षा॒ सखि॑भ्यो ह॒विषि॑ स्वधावः स्व॒यं य॑जस्व त॒न्वं॒ वृधा॒नः

yā te dhāmāni paramāṇi yā'vamā yā madhyamā viśvakarmannutemā | śikṣā sakhibhyo haviṣi svadhāvaḥ svayaṃ yajasva tanvaṃ vṛdhānaḥ

हिन्दी अर्थ

-१. जीवन-लक््य को ओङ्लल न होने देते हुए हम प्रभु को अपना आश्रय समञ्चं। २. हमारे जीवन मे हृदयस्थ प्रभु की प्रेरणा की विजय हो, न कि हमारी इच्छा की। ३. हम सदा वीरतापूर्ण कार्य ही करे ओर ४. हम सदा अध्यात्म-संग्रामों में देवों की रक्षा १. लोभ कौ प्रवृत्ति बड़ी विचित्र है (क) यह कम-से-कम प्रयत से अधिक-से-

English

Thine highest, lowest sacrificial natures, and these thy midmost here, O Visvakarman, Teach thou thy friends at sacrifice, O Blessd, and come thy- self, exalted, to our worship.

अध्याय १७

श्लोक 22

विश्व॑कर्मन् ह॒विषा॑ वावृधा॒नः स्व॒यं य॑जस्व पृथि॒वीमु॒त द्याम् ।मुह्य॑न्त्व॒न्ये अ॒भित॑: स॒पत्ना॑ इ॒हास्माकं॑ म॒घवा॑ सू॒रिर॑स्तु

viśvakarman haviṣā vāvṛdhānaḥ svayaṃ yajasva pṛthivīmuta dyām | muhyantvanye abhita: sapatnā ihāsmākaṃ maghavā sūrirastu

हिन्दी अर्थ

१. हमारा जीवन लक्ष्य-दृष्टि से शून्य न हो। २. हम द्वेषादि कौ भावना सप्तदशोऽध्यायः ५९० यजुर्वेद भाष्यम् १. पिछले मन्त्र की भावना के अनुसार हमारे जीवन का लक्ष्य बनता है ' वासनाओं का समूल उन्मूलन '। यह वासनाओं का उन्मूलन करनेवाला व्यक्ति "न रम्" है, “न रम्'त्न

English

Bring those, thyself exalted with oblation, O Visvakarman, Earth and Heaven to worship. Let enemies around us live in folly: here let us have a rich and liberal patron. 23, 24. = VIII. 45, 46.

अध्याय १७

श्लोक 23

वा॒चस्पतिं॑ वि॒श्वक॑र्माणमू॒तये॑ मनो॒जुवं॒ वाजे॑ अ॒द्या हु॑वेम ।स नो॒ विश्वा॑नि॒ हव॑नानि जोषद्वि॒श्वश॑म्भू॒रव॑से सा॒धुक॑र्मा

vācaspatiṃ viśvakarmāṇamūtaye manojuvaṃ vāje adyā huvema | sa no viśvāni havanāni joṣadviśvaśambhūravase sādhukarmā

हिन्दी अर्थ

हम लक्ष्य की ओर आगे बद, विघ्नों को जीते। प्रयल में लगे रहे, जिससे वासनाओं का शिकार न हों। प्रयल में लगे हुए को प्रभु भी कल्याण प्राप्त कराते हेै। असौ या सेनां मरुतः परेंषामभ्यैति नऽओज॑सा स्पर्धमाना । १. असौो=वह याजो परेषाम् पराये, अर्थात् शत्रुभूत कामादि की सेना स्पर्धमाना

English

The Father of the eye, the Wise in spirit, created both these worlds submerged in fatness.

अध्याय १७

श्लोक 24

विश्व॑कर्मन् ह॒विषा॒ वर्ध॑नेन त्रा॒तार॒मिन्द्र॑मकृणोरव॒ध्यम् ।तस्मै॒ विश॒: सम॑नमन्त पू॒र्वीर॒यमु॒ग्रो वि॒हव्यो॒ यथाऽस॑त्

viśvakarman haviṣā vardhanena trātāramindramakṛṇoravadhyam | tasmai viśa: samanamanta pūrvīrayamugro vihavyo yathā'sat

हिन्दी अर्थ

वासनाओं के त्याग के दुद् निश्चय से ही हम वासनाओं को जीत सकगे। १. यत्र=जर्होँ, अर्थात् जिस स्थान से बाणाः=(शरो ह्यात्मा) प्रणवरूप धनुष के शर बने हुए आत्मा, निरन्तर प्रणव-जप में लगे आत्मा अथवा “वण् 10 5०76 ' प्रभु के नाम का निरन्तर जप करनेवाले आत्मा सम्पतन्ति-सम्यक् गतिशील होते है ओर अपने को सदा

English

Mighty in mind and power is Visvakarman, Maker, Disposer, and most lofty Presence.

अध्याय १७

श्लोक 25

चक्षु॑षः पि॒ता मन॑सा॒ हि धीरो॑ घृ॒तमे॑ने अजन॒न्नम्न॑माने ।य॒देदन्ता॒ अद॑दृहन्त॒ पूर्व॒ आदिद् द्यावा॑पृथि॒वी अ॑प्रथेताम्

cakṣuṣaḥ pitā manasā hi dhīro ghṛtamene ajanannamnamāne | yadedantā adadṛhanta pūrva ādid dyāvāpṛthivī aprathetām

हिन्दी अर्थ

हम बाण हों, प्रभु लक्ष्य हों। हम शर की भति ब्रह्मरूप लक्ष्य में तन्मय हो जा्ेँ। यही कल्याण- प्राप्ति का साधन हेै। उरोर्वरीयो वरूणस्ते कृणोतु जय॑न्तं त्वानुं देवा म॑दन्तु ॥४९॥ ९. इस वासना-संग्राम में ते मर्माणि=तेरे मर्मस्थलों को वर्मणा-कवच से

English

Then when the eastern ends were firmly fastened, the heavens and the earth were far extended.

अध्याय १७

श्लोक 26

वि॒श्वक॑र्मा॒ विम॑ना॒ आद्विहा॑या धा॒ता वि॑धा॒ता प॑र॒मोत स॒न्दृक् ।तेषा॑मि॒ष्टानि॒ समि॒षा म॑दन्ति॒ यत्रा॑ सप्त ऋ॒षीन् प॒र एक॑मा॒हुः

viśvakarmā vimanā ādvihāyā dhātā vidhātā paramota sandṛk | teṣāmiṣṭāni samiṣā madanti yatrā sapta ṛṣīn para ekamāhuḥ

हिन्दी अर्थ

१. हम उत्कृष्ट अध्यात्म-सम्पत्ति को प्राप्त करे। २. काम, क्रोध आदि सहज भावों को वशीभूत करनेवाले हों। ३. "अक्षीण वर्चस्" बनें। ४. यज्ञशेष का सेवन तस्मै देवाऽअधिं ल्रुवन्नयं च ब्रह्मणस्पतिः ॥५२॥ ९ गत मन्त्र की समाप्ति "देवानां भागदा असत्” शब्दों पर हुई हे। यह “ अप्रतिरथ '

English

Their offerings joy in rich juice where they value One, only One beyond the Seven Rishis.

अध्याय १७

श्लोक 27

यो न॑: पि॒ता ज॑नि॒ता यो वि॑धा॒ता धामा॑नि॒ वेद॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑ ।यो दे॒वानां॑ नाम॒धा एक॑ ए॒व तᳪ स॑म्प्र॒श्नं भुव॑ना यन्त्य॒न्या

yo na: pitā janitā yo vidhātā dhāmāni veda bhuvanāni viśvā | yo devānāṃ nāmadhā eka eva ta sampraśnaṃ bhuvanā yantyanyā

हिन्दी अर्थ

जिस घर में विद्वान् अतिथि आते रहते है, उसे सदा उत्तम उपदेश मिलता है ओर यह “शुद्ध हदय! होकर प्रभु की प्रेरणा को भी सुन पाता ै। उद् त्वा विश्वै देवाऽअग्ने भरन्तु चित्तिभिः । स नो भव शिवस्त्वश्सु प्रतीको विभावसुः ।॥५३॥

English

Father who made us, he who, as Disposer, knoweth all races and all things existing, Even he alone, the Deities’ name-giver,—him other beings seek for information.

अध्याय १७

श्लोक 28

त आऽय॑जन्त॒ द्रवि॑ण॒ᳪ सम॑स्मा॒ ऋष॑य॒: पूर्वे॑ जरि॒तारो॒ न भू॒ना ।अ॒सूर्ते॒ सूर्ते॒ रज॑सि निष॒त्ते ये भू॒तानि॑ स॒मकृ॑ण्वन्नि॒मानि॑

ta ā'yajanta draviṇa samasmā ṛṣaya: pūrve jaritāro na bhūnā | asūrte sūrte rajasi niṣatte ye bhūtāni samakṛṇvannimāni

हिन्दी अर्थ

१. हमारे राष्ट के सब लोग परमेश्वर के उपासक हों। २. यज्ञ कौ रक्षा करे। ३. प्रकाशमय जीवनवाले होकर तमोगुण व रजोगुण से ऊपर उटें। ४. धन कौ वृद्धि होने पर यज्ञपति प्रभु की उपासना से दूर न हो जार्पं। ५. धनी होकर अधिक यज्लिय तप्तं घर्म प॑रिगृह्यायजन्तोर्जा यद्यज्ञमय॑जन्त देवाः ॥५५५॥

English

To him in sacrifice they offered treasures,—Rishis of old, in numerous troops, as singers, Who, in the distant, near, and lower region, made ready all these things that have existence.

अध्याय १७

श्लोक 29

प॒रो दि॒वा प॒र ए॒ना पृ॑थि॒व्या प॒रो दे॒वेभि॒रसु॑रै॒र्यदस्ति॑ ।कᳪस्वि॒द् गर्भं॑ प्रथ॒मं द॑ध्र॒ आपो॒ यत्र॑ दे॒वाः स॒मप॑श्यन्त॒ पूर्वे॑

paro divā para enā pṛthivyā paro devebhirasurairyadasti | kasvid garbhaṃ prathamaṃ dadhra āpo yatra devāḥ samapaśyanta pūrve

हिन्दी अर्थ

-१. यज्ञ द्वारा प्रभु-पूजन होता है। २. प्रभु-स्तवन ही जीवनयात्रा मेँ वाहन बने। ३. हम उत्तम स्तुति करनेवाले बनेँ। ४. ज्ञान का ग्रहण करे। ५. ज्लान-दीप्त शक्ति प्राप्त करके यक्ञशील हों। ६. प्रभु के मेल से अपने मे शक्ति का सञ्चार करें। देवश्रीः-श्रीमनाः-शतपयाः

English

That which is earlier than this earth and heaven, before the Asuras and Gods had being, What was the germ primeval which the waters received where the first Gods beheld each other?

अध्याय १७

श्लोक 30

तमिद्गर्भं॑ प्रथ॒मं द॑ध्र॒ आपो॒ यत्र॑ दे॒वाः स॒मग॑च्छन्त॒ विश्वे॑ ।अ॒जस्य॒ नाभा॒वध्येक॒मर्पि॑तं॒ यस्मि॒न् विश्वा॑नि॒ भुव॑नानि त॒स्थुः

tamidgarbhaṃ prathamaṃ dadhra āpo yatra devāḥ samagacchanta viśve | ajasya nābhāvadhyekamarpitaṃ yasmin viśvāni bhuvanāni tasthuḥ

हिन्दी अर्थ

- १. हम दिव्य गुणों का आश्रय करके ""देव्य'' प्रभु के हित के पात्र बने। २. हम श्रीमनाः सेवावृकत्तिवाले बनकर ओरों का धारण करते हुए “धर्ता ' प्रभु का अर्चन करे। ३. ओरों की सेवा के लिए सैकड़ों आप्यायनोवाले बने ओर इस प्रकार प्रेम से सबका भला करते हुए ' जोष्टे ' प्रभु कौ पद-पद्धति पर चलें। ४. यज्ञशील हों। ५. दिव्य गुणों की

English

The waters, they received that germ primeval wherein the Gods were gathered all together. It rested set upon the Unborn's navel, that One wherein abide all things existing.

अध्याय १७

श्लोक 31

न तं वि॑दाथ॒ य इ॒मा ज॒जाना॒न्यद्यु॒ष्माक॒मन्त॑रं बभूव ।नी॒हा॒रेण॒ प्रावृ॑ता॒ जल्प्या॑ चासु॒तृप॑ उक्थ॒शास॑श्चरन्ति

na taṃ vidātha ya imā jajānānyadyuṣmākamantaraṃ babhūva | nīhāreṇa prāvṛtā jalpyā cāsutṛpa ukthaśāsaścaranti

हिन्दी अर्थ

-१. ठम सात्विक भोजनवाले हों। २. शुभ गुणयुक्त, ३. यज्ञशील हों। ४. -परमात्मा-प्राप्तिरूपं चोभे कदम को रखनेवाले बनें। ५. जिससे हम ज्ञानी व सत्य कामनाओंवाले सूर्यरश्मिर्हसिकेशः पुरस्तात्सविता ज्योतिरुद्ाँ २।।ऽअज॑स््रम् । १. पिछले मन्त्र की समाप्ति पर कहा था कि उसे वेदवाणिरयोँ प्राप्त होती हे। वहीं

English

Ye will not find him who produced these creatures: another thing hath risen up among you. Enwrapt in misty cloud, with lips that stammer, hymn-chanters wander and are discontented.

अध्याय १७

श्लोक 32

वि॒श्वक॑र्मा॒ ह्यज॑निष्ट दे॒व आदिद्ग॑न्ध॒र्वो अ॑भवद् द्वि॒तीय॑: ।तृ॒तीय॑: पि॒ता ज॑नि॒तौष॑धीनाम॒पां गर्भं॒ व्य॒दधात् पुरु॒त्रा

viśvakarmā hyajaniṣṭa deva ādidgandharvo abhavad dvitīya: | tṛtīya: pitā janitauṣadhīnāmapāṃ garbhaṃ vyadadhāt purutrā

हिन्दी अर्थ

सब वेदवाणियाँ उस प्रभु का वर्णन कर रही है जो प्रभु इन्द्र, समुद्रव्यचस, रथीनां रथीतम, वाजानां पति व सत्पति' हे। हम भी “ वासनारूप शत्रुओं का नाश करनेवाले “इन्द्र बने, मन को महान् बनाकर मनःप्रसाद् का साधन करे। शरीररूप रथ की बागडोर प्रभु को सौपकर शक्तियों के पत्ति वनें। जीवन में "सत्" के रक्षक हों। इन उत्तम इच्छाओं

English

First was the God engendered, Visvakarman: then the Gandharva sprang to life as second. Third in succession was the plants’ begetter: he laid the waters’ germ in many places.

अध्याय १७

श्लोक 33

आ॒शुः शिशा॑नो वृष॒भो न भी॒मो घ॑नाघ॒नः क्षोभ॑णश्चर्षणी॒नाम् ।सं॒क्रन्द॑नोऽनिमि॒ष ए॑कवी॒रः श॒तᳪ सेना॑ अजयत् सा॒कमिन्द्र॑:

āśuḥ śiśāno vṛṣabho na bhīmo ghanāghanaḥ kṣobhaṇaścarṣaṇīnām | saṃkrandano'nimiṣa ekavīraḥ śata senā ajayat sākamindra:

हिन्दी अर्थ

१. हम पूर्व दिशा को लक्ष्य बनाकर आगे ओर आगे बदं। २. आगे बद्नेवालों में भी आगे बद्कर “ शिरोमणि" (10०७) बनने का प्रयत्न कर। ३. अपने ज्ञान से सव दिशाओं को दीप्त करें। ४. सभी के लिए अन्न का धारण करते हुए् अन्न का सेवन करे। ९. पिच्छले मन्त्र मे पूर्व दिशा का लक्ष्य करके आगे बने" का उल्लेख भा। उसी

English

Swift, rapidly striking, like a bull who sharpens his horns, terrific, stirring up the people, With eyes that close not, bellowing, Sole Hero, Indra subdued at once a hundred armies.

अध्याय १७

श्लोक 34

सं॒क्रन्द॑नेनानिमि॒षेण॑ जि॒ष्णुना॑ युत्का॒रेण॑ दुश्च्यव॒नेन॑ धृ॒ष्णुना॑ ।तदिन्द्रे॑ण जयत॒ तत्स॑हध्वं॒ युधो॑ नर॒ इषु॑हस्तेन॒ वृष्णा॑

saṃkrandanenānimiṣeṇa jiṣṇunā yutkāreṇa duścyavanena dhṛṣṇunā | tadindreṇa jayata tatsahadhvaṃ yudho nara iṣuhastena vṛṣṇā

हिन्दी अर्थ

हम पृथिवी से अन्तरिक्ष को, अन्तरिक्ष से द्युलोक को, तथा द्युलोक से स्वयं देदीप्यमान ज्योति ब्रह्य को प्राप्त करे। यज्ञं ये विर्वतोधारध्सुविंद्राश्शसो वितेनिरे ॥६८॥ १. गत मन्त्र में स्वर्ज्योति की प्राप्ति का उल्लेख दहै। उसी के साधनों का वर्णन

English

With him loud-roaring, ever watchful, Victor, bold, hard to overthrow, Rouser of battle, Indra the Strong, whose hand bears arrows, conquer, ye warriors, now, now vanquish in the combat.

अध्याय १७

श्लोक 35

स इषु॑हस्तैः॒ स नि॑ष॒ङ्गिभि॑र्व॒शी सᳪस्र॑ष्टा॒ स युध॒ इन्द्रो॑ ग॒णेन॑ ।स॒ᳪसृष्ट॒जित्सो॑म॒पा बा॑हुश॒र्ध्युग्रध॑न्वा॒ प्रति॑हिताभि॒रस्ता॑

sa iṣuhastaiḥ sa niṣaṅgibhirvaśī sasraṣṭā sa yudha indro gaṇena | sasṛṣṭajitsomapā bāhuśardhyugradhanvā pratihitābhirastā

हिन्दी अर्थ

हम सुपर्ण बनें। गरुत्मान् बनकर शरीर पर पूर्णं आधिपत्य प्राप्त करे। हदय को दीप्त करके मस्तिष्क को ज्ञानोज्ज्वल करे। हमारे इस शरीर-दुर्ग के चारों रार दृढ होँ। रषिः-कुत्सः। देवता--अग्निः। छन्दः आर्षीत्रिष्टुप्ः। स्वरः-धैवतः।। अस्मिन्तसधस्थेऽअध्युत्तरस्मिन् विश्वदेवा यज॑मानश्च सीदत ॥७३॥

English

He rules with those who carry shafts and quivers, Indra who with his band brings hosts together, Foe-conquering, strong of arm, the Soma-drinker, with mighty bow, shooting with well-laid arrows.

अध्याय १७

श्लोक 36

बृह॑स्पते॒ परि॑ दीया॒ रथे॑न रक्षो॒हाऽमित्राँ॑२ अप॒बाध॑मानः ।प्र॒भ॒ञ्जन्त्सेना॑: प्रमृ॒णो यु॒धा जय॑न्न॒स्माक॑मेध्यवि॒ता रथा॑नाम्

bṛhaspate pari dīyā rathena rakṣohā'mitrā~2 apabādhamānaḥ | prabhañjantsenā: pramṛṇo yudhā jayannasmākamedhyavitā rathānām

हिन्दी अर्थ

हम आजुह्वान व सुप्रतीक बनकर उन्नति करते हए घरों मे उत्तम कर्मो में आसीन हों। मिलकर चलें, देव बनें, यनज्ञशील हों। यज्ञ ही तो हमें बुराइयों से बचाकर "कुत्स ' बनाएगा। यज्ञ से हम बुराइयों को भी भस्म कर देगे। षिः--कण्वः। देवता-सविताः। छन्दः-निचृदार्षीत्रिष्टुप्। स्वरः-धैवतः।।

English

Brihaspati, fly with thy chariot hither, slayer of demons, driving off our foemen. Be thou protector of our cars, destroyer, victor in battle, breaker-up of armies.

अध्याय १७

श्लोक 37

ब॒ल॒वि॒ज्ञा॒य स्थवि॑र॒: प्रवी॑र॒: सह॑स्वान् वा॒जी सह॑मान उ॒ग्रः ।अ॒भिवी॑रो अ॒भिस॑त्वा सहो॒जा जै॑त्रमिन्द्र॒ रथ॒मा ति॑ष्ठ गो॒वित्

balavijñāya sthavira: pravīra: sahasvān vājī sahamāna ugraḥ | abhivīro abhisatvā sahojā jaitramindra rathamā tiṣṭha govit

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु कौ सुमति का ही वरण करे ओर सचमुच ' कण्व '=मेधावी वने। मेधावी बनकर निम्न शब्दों से प्रभु स्तवन करे १. है अग्ने=(योग- संस्कारों से अथवा) सुमति से दुष्ट कर्मो को दहन करनेवाले प्रभो! हम परमे जन्मन् = सर्वोत्कृष्ट जन्म के होने पर ते विधेम आपकी पूजा (उपासना)

English

Conspicuous by thy strength, firm, foremost fighter, mighty and fierce, victorious, all-subduing, The Son of Conquest, passing men and heroes, kine-winner, mount thy conquering car, O Indra.

अध्याय १७

श्लोक 38

गो॒त्र॒भिदं॑ गो॒विदं॒ वज्र॑बाहुं॒ जय॑न्त॒मज्म॑ प्रमृ॒णन्त॒मोज॑सा ।इ॒मᳪ स॑जाता॒ अनु॑ वीरयध्व॒मिन्द्र॑ᳪ सखायो॒ अनु॒ सᳪ र॑भध्वम्

gotrabhidaṃ govidaṃ vajrabāhuṃ jayantamajma pramṛṇantamojasā | ima sajātā anu vīrayadhvamindra sakhāyo anu sa rabhadhvam

हिन्दी अर्थ

१. हम प्रभु की उपासना ज्ञान के विकास के द्वारा करे, यही परम उपासना हे। २. मन, बुद्धि व इन्द्रियो से प्रभु का स्मरण कर यही मध्यम उपासना है। तथा ३. प्रभु-प्राप्ति के उपायों को अपनाए, यही उपासना का प्रारम्भ है। इस सबके लिए मेँ यचुर्वेदभाष्यम् ०७ सप्तदशोऽध्यायः

English

Cleaver of stalls, kine-winner, armed with thunder, who quells an army and with might destroys it, Follow him, brothers! quit yourselves like heroes, and like this Indra show your zeal and courage.

अध्याय १७

श्लोक 39

अ॒भि गो॒त्राणि॒ सह॑सा॒ गाह॑मानोऽद॒यो वी॒रः श॒तम॑न्यु॒रिन्द्र॑: ।दु॒श्च्य॒व॒नः पृ॑तना॒षाड॑यु॒ध्योऽस्माक॒ᳪ सेना॑ अवतु॒ प्र यु॒त्सु

abhi gotrāṇi sahasā gāhamāno'dayo vīraḥ śatamanyurindra: | duścyavanaḥ pṛtanāṣāḍayudhyo'smāka senā avatu pra yutsu

हिन्दी अर्थ

हम अपने हदयों मे प्रभु के प्रकाश को देखनेवाले बनेंगे तभी हमारी बुराइयों समाप्त होंगी ओर हम अच्छाइयों को प्राप्त होगे। हम क्रियाशील बने, शक्तिशाली हों, त्याग की वृत्ति को अपनारपँ। यही प्रभु-प्राप्ति का मार्ग है। १. गत मन्त्र का वसिष्ठ प्रभु के नेतृत्व में, उसी कौ प्रेरणा के प्रकाश में चलता

English

Piercing the cow-stalls with surpassing vigour, Indra, the pitiless Hero, wild with anger, Victor in fight, unshaken and resistless,—may he protect our armies in our battles.

अध्याय १७

श्लोक 40

इन्द्र॑ आसां ने॒ता बृह॒स्पति॒र्दक्षि॑णा य॒ज्ञः पु॒र ए॑तु॒ सोम॑: ।दे॒व॒से॒नाना॑मभिभञ्जती॒नां जय॑न्तीनां म॒रुतो॑ य॒न्त्वग्र॑म्

indra āsāṃ netā bṛhaspatirdakṣiṇā yajñaḥ pura etu soma: | devasenānāmabhibhañjatīnāṃ jayantīnāṃ maruto yantvagram

हिन्दी अर्थ

प्राण ज्ञानाग्नि को समिद्ध करते है, क्योंकि इन प्राणों के द्वारा इन्द्रियों के मल दग्ध होकर इन्द्रिय ज्ञानयज्ञ को करने में अधिक समर्थ हो जाती है। प्राणसराधना से ज्ञान.+ क्रिया को शुद्धि शुक्रज्यो तिश्च चित्रज्योतिश्च सत्यज्योतिश्च ज्योतिंष्मांश्च ।

English

Indra guide these: Brihaspati precede them, the guerdon, and the sacrifice, and Soma; And let the banded Maruts march in forefront of heavenly hosts that conquer and demolish.

अध्याय १७

श्लोक 41

इन्द्र॑स्य॒ वृष्णो॒ वरु॑णस्य॒ राज्ञ॑ आदि॒त्यानां॑ म॒रुता॒ᳪ शर्ध॑ उ॒ग्रम् ।म॒हाम॑नसां भुवनच्य॒वानां॒ घोषो॑ दे॒वानां॒ जय॑ता॒मुद॑स्थात्

indrasya vṛṣṇo varuṇasya rājña ādityānāṃ marutā śardha ugram | mahāmanasāṃ bhuvanacyavānāṃ ghoṣo devānāṃ jayatāmudasthāt

हिन्दी अर्थ

प्राणसाधना हमारी ज्योति व क्रिया का वर्धन करनेवाली हो। प्राणसाधना से युक्ताहारविहार १. गत मन्त्र का प्राणसाधक संसार के स्वरूप को भी ठीक. ठीक समञ्लता हे। वह यह जान लेता है कि यह संसार (क) ईदृङ् च=(अनेन तुल्यः) एेसा ही है। संसार के

English

Ours be the potent host of mighty Indra, King Varuna, and Maruts, and Âdityas. Uplifted is the shout of Gods who conquer, high-minded Gods who cause the worlds to tremble.

अध्याय १७

श्लोक 42

उद्ध॑र्षय मघव॒न्नायु॑धा॒न्युत्सत्व॑नां माम॒कानां॒ मना॑ᳪसि ।उद्वृ॑त्रहन् वा॒जिनां॒ वाजि॑ना॒न्युद्रथा॑नां॒ जय॑तां यन्तु॒ घोषा॑:

uddharṣaya maghavannāyudhānyutsatvanāṃ māmakānāṃ manāsi | udvṛtrahan vājināṃ vājinānyudrathānāṃ jayatāṃ yantu ghoṣā:

हिन्दी अर्थ

हम प्राणसाधना द्वारा यज्िय वृत्ति का विकास करे। जितनी-जितनी हमारी वृत्ति यज्जय होगी उतनी-उतनी हमें लोकानुकरूलता प्राप्त होगी। १. सब प्रकार की वासनाओं को समाप्त करके तथा यिय वृत्ति को उत्पन्न करके “सप्त ऋषयः' को चाहिए कि वे प्रभु की इस वेदवाणी का श्रवण कररे। वेदवाणी गौ ' हे।

English

Bristle thou up, O Bounteous Lord, our weapons: excite the spirits of my warring heroes. Urge on the strong steeds’ might, O Vritra-slayer, and let the din of conquering cars go upward.

अध्याय १७

श्लोक 43

अ॒स्माक॒मिन्द्र॒: समृ॑तेषु ध्व॒जेष्व॒स्माकं॒ या इष॑व॒स्ता ज॑यन्तु ।अ॒स्माकं॑ वी॒रा उत्त॑रे भवन्त्व॒स्माँ२ उ॑ देवा अवता॒ हवे॑षु

asmākamindra: samṛteṣu dhvajeṣvasmākaṃ yā iṣavastā jayantu | asmākaṃ vīrā uttare bhavantvasmā~2 u devā avatā haveṣu

हिन्दी अर्थ

-हम सात्विक अन्नं का सेवन करते हुए अपने स्वास्थ्य व ज्ञान को बद्धापँ ओर प्रभु के प्रकाश को प्राप्त करनेवाले हों। प्रभु के प्रकाश को प्राप्त करके हम गृणाति माद्यति '= स्तुति करे, प्रसन्न हों ओर इस मन्त्र के ऋषि गृत्समद ' वने। घृतस्य नाम गुह्यं यदस्ति जिह्वा देवानाममृत॑स्य नाभिः ॥८९॥

English

May Indra aid us when our flags are gathered: victorious be the arrows of our army. May our brave men of war prevail in battle. Ye Gods protect us in the shout of onset.

अध्याय १७

श्लोक 44

अ॒मीषां॑ चि॒त्तं प्र॑तिलो॒भय॑न्ती गृहा॒णाङ्गा॑न्यप्वे॒ परे॑हि ।अ॒भि प्रेहि॒ निर्द॑ह हृ॒त्सु शोकै॑र॒न्धेना॒मित्रा॒स्तम॑सा सचन्ताम्

amīṣāṃ cittaṃ pratilobhayantī gṛhāṇāṅgānyapve parehi | abhi prehi nirdaha hṛtsu śokairandhenāmitrāstamasā sacantām

हिन्दी अर्थ

अग्निको वे ज्ञान कौ वाणि्योँ प्राप्त होती हँ जो उसका हित चाहती हुई उसे अशुभ से प्रथक् ओर शुभ से संयुक्त करती है। उसका कल्याण करती हुई उसके मनःप्रसाद् का कारण बनती हें। उसे ज्ञान-दीप्त करके क्रियाशील बनाती हेै। सोमाभिषव-व यज्ञ ( ज्ञानोत्पादन व रक्षण)

English

Bewildering the senses of our foemen, seize thou their bodies and depart, O Apvâ. Attack them, set their hearts on fire and burn them: so let our foes abide in utter darkness.

अध्याय १७

श्लोक 45

अव॑सृष्टा॒ परा॑ पत॒ शर॑व्ये॒ ब्रह्म॑सᳪशिते ।गच्छा॒मित्रा॒न् प्र प॑द्यस्व॒ माऽमीषां॒ कं च॒नोच्छि॑षः

avasṛṣṭā parā pata śaravye brahmasaśite | gacchāmitrān pra padyasva mā'mīṣāṃ kaṃ canocchiṣaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभु- प्राप्ति के साधन निम्न हैँ ९. मनःप्रसाद् के द्वारा अपने को आधि-व्याधियों से बचाना। २. ज्ञान के द्वारा जीवन को पवित्र बनाना। ३. सभी का कल्याण करना। हिमस्य॑ त्वा जरायुणाग्ने परिं व्ययामसि । पावकोऽअस्मभ्यैःशिवो भ॑व ।॥५॥ १९. गत मन्त्र मेँ मनःप्रसाद' का उल्लेख था। प्रस्तुत मन्त्र मेँ उसके कभी क्षुब्ध न

English

Loosed from the bowstring fly awry, O Arrow, sharpened by our prayer. Go to the foemen, strike them home, and let not one of them escape.

अध्याय १७

श्लोक 46

प्रेता॒ जय॑ता नर॒ इन्द्रो॑ व॒: शर्म॑ यच्छतु ।उ॒ग्रा व॑: सन्तु बा॒हवो॑ऽनाधृ॒ष्या यथाऽस॑थ

pretā jayatā nara indro va: śarma yacchatu | ugrā va: santu bāhavo'nādhṛṣyā yathā'satha

हिन्दी अर्थ

१. हम अपने व्यवहार में सदा शान्त रहें। २. पवित्र जीवनवाले हों। ३. सभी का कल्याण कररे। यही प्रभु-प्राप्ति का मार्ग हे। उप ज्मन्नुप॑ वेतसे ऽव॑तर नदीष्वा । अग्नपित्तमपाम॑सि मण्डूकि ताभिरागंहि सेमं नो यज्ञं पावकवर्णशिवं कधि ॥६॥

English

Advance, O heroes, win the day. May Indra be your sure defence. Exceeding mighty be your arms, that none may wound or injure you.

अध्याय १७

श्लोक 47

असौ॒ या सेना॑ मरुत॒: परे॑षाम॒भ्यैति॑ न॒ ओज॑सा॒ स्पर्ध॑माना ।तां गू॑हत॒ तम॒साऽप॑व्रतेन॒ यथा॒ऽमी अ॒न्यो अ॒न्यं न जा॒नन्

asau yā senā maruta: pareṣāmabhyaiti na ojasā spardhamānā | tāṃ gūhata tamasā'pavratena yathā'mī anyo anyaṃ na jānan

हिन्दी अर्थ

१. तू गतिशील, नम्र, यञ्लशील व स्तोता बन। २. कर्मो मे लगा रहकर तेजस्वी बन। ३. अपने को सद्गुणो से सुभूषित करके कर्मो द्वारा प्रभु को प्राप्त हो। ४. ये यज्ञ तुञ्चे पावकवर्ण व शिव बनार्णेगे। अन्योस्तिःऽअस्मत्त॑पन्तु हेतय॑ः पावकोऽअस्मभ्यैरशिवो भ॑व ।।७॥

English

That army of our enemies, O Maruts, that comes against us with its might, contending , Meet ye and wrap it in unwelcome darkness so that not one of them may know another.

अध्याय १७

श्लोक 48

यत्र॑ बा॒णाः स॒म्पत॑न्ति कुमा॒रा वि॑शि॒खा इ॑व ।तन्न॒ इन्द्रो॒ बृह॒स्पति॒रदि॑ति॒: शर्म॑ यच्छतु वि॒श्वाहा॒ शर्म॑ यच्छतु

yatra bāṇāḥ sampatanti kumārā viśikhā iva | tanna indro bṛhaspatiraditi: śarma yacchatu viśvāhā śarma yacchatu

हिन्दी अर्थ

१. भारद्वाज पवित्र व सान-सम्पत्न शक्ति से चमकता है। २. यह इद्िय-संग्राम में विजयी होता है। ३. इसकी ज्ञान की प्यास प्रबल होती है। ४. ज्ञान की प्यास इसे विषयों से बचाकर अजीर्णशक्ति बनाये रखती हे। सूचना-वेद के शब्दों में शक्ति वही प्रशंसनीय हे, जिसके साथ पवित्रता व ज्ञान

English

There where the flights of arrows fall like boys whose locks are yet unshorn, May Indra, may Brihaspati, may Aditi protect us well, protect us well through all our days.

अध्याय १७

श्लोक 49

मर्मा॑णि ते॒ वर्म॑णा छादयामि॒ सोम॑स्त्वा॒ राजा॒ऽमृते॒नानु॑वस्ताम् ।उ॒रोर्वरी॑यो॒ वरु॑णस्ते कृणोतु॒ जय॑न्तं॒ त्वाऽनु॑ दे॒वा म॑दन्तु

marmāṇi te varmaṇā chādayāmi somastvā rājā'mṛtenānuvastām | urorvarīyo varuṇaste kṛṇotu jayantaṃ tvā'nu devā madantu

हिन्दी अर्थ

हम ' नृषद्, अप्सुषद्, बर्हिषद्, वनसद् तथा स्वर्वित् का आदर करते है।! ये देवा देवान यज्ञियां यज्ञियानाश्शसंवत्सरीणमुप॑ भागमासं ते । अहतादो! हविषो यज्ञेऽअस्मिन्तस्वयं पिबन्तु मधुनो घृतस्य ।। ९३॥ १. ये-जो देवानां देवाः देवों मे भी देव है, विद्वानों मे भी विद्वान् हें, अर्थात् उच्च

English

Thy vital parts I cover with thine armour: with immortality King Soma clothe thee. Varuna give thee what is more than ample, and in thy triumph may the Gods be joyful.

अध्याय १७

श्लोक 50

उदे॑नमुत्त॒रां न॒याग्ने॑ घृतेनाहुत ।रा॒यस्पोषे॑ण॒ सᳪ सृ॑ज प्र॒जया॑ च ब॒हुं कृ॑धि

udenamuttarāṃ nayāgne ghṛtenāhuta | rāyaspoṣeṇa sa sṛja prajayā ca bahuṃ kṛdhi

हिन्दी अर्थ

उत्तम जीवन के लक्षण ये हँ १. ऊँचे-से-ऊँचा ज्ञान। २. यज्ञिय वृत्ति। ३. जीवन को कार्यक्रम के साथ चलाना। ४. दान से जीविका न करना। ५. जीवन-यज्ञ में हविरूप बनना। ६. स्वयं पुरुषार्थ से कमाकर घृत, शहद आदि उत्तम पदार्थो का सेवन करना। न स्वर्ग में न पर्वत-शिखरों पर

English

Worshipped with butter, Agni, lead this man to high preeminence. Vouchsafe him growth of riches and multiply him with progeny .

अध्याय १७

श्लोक 51

इन्द्रे॒मं प्र॑त॒रां न॑य सजा॒ताना॑मसद्व॒शी ।समे॑नं॒ वर्च॑सा सृज दे॒वानां॑ भाग॒दा अ॑सत्

indremaṃ pratarāṃ naya sajātānāmasadvaśī | samenaṃ varcasā sṛja devānāṃ bhāgadā asat

हिन्दी अर्थ

विद्वान् संन्यासियों के व्याख्यान के विषय निम्न होने चाहि। १. प्राण, अपान व व्यान कौ शक्तियों कौ वृद्धि। २. शरीर को कैसे वर्चस्वी बनाना? ३. "धन प्राप्ति के उचित उपाय क्या है?" ४. प्रभु-उपासना का प्रकार क्या है ? ५. आनन्द प्राप्ति का मार्ग क्या है? इस प्रकार विद्वान् लोग वैदिक प्रेरणाओं से ओरों के जीवनों को दीप्त करे।

English

Indra, lead him to eminence: controller of his foes be he. Vouchsafe him lustre: let him give their sacred portions to the Gods.

अध्याय १७

श्लोक 52

यस्य॑ कु॒र्मो गृ॒हे ह॒विस्तम॑ग्ने वर्धया॒ त्वम् ।तस्मै॑ दे॒वा अधि॑ ब्रुवन्न॒यं च॒ ब्रह्म॑ण॒स्पति॑:

yasya kurmo gṛhe havistamagne vardhayā tvam | tasmai devā adhi bruvannayaṃ ca brahmaṇaspati:

हिन्दी अर्थ

१. ' अग्नि' वह है जो तीव्र ज्ञान से कामादि वासनाओं को क्षीण कर देता सप्तदशोऽध्यायः ५७२ यजुर्वेद भाव्यम् है। वासनाओं को क्षीण करके यह भारद्वाज ' अपने मे शक्ति भरनेवाला बनता है। २, यह धन कमाता है, परन्तु उसे प्रभु का समञ्जता हआ सदा संविभागपूर्वक सेवन करता है।

English

The man within whose house we pay oblation, Indra, prosper him. May the Gods bless and comfort him, they and this Brahmanaspati.

अध्याय १७

श्लोक 53

उदु॑ त्वा॒ विश्वे॑ दे॒वा अग्ने॑ भरन्तु॒ चित्ति॑भिः ।स नो॑ भव शि॒वस्त्वᳪ सु॒प्रती॑को वि॒भाव॑सुः

udu tvā viśve devā agne bharantu cittibhiḥ | sa no bhava śivastva supratīko vibhāvasuḥ

हिन्दी अर्थ

प्रलयकाल में ये सब लोक-लोकान्तर प्रकृतिरूप होकर प्रभु के गर्भं में रहते है। सृष्टि बनने पर प्रभु सब लोकों को आच्छादित करके उनमें व्याप्त हो रहे है। यतो भूमिँ जनय॑च्विश्वकर्मा वि दद्यामोौर्णोन्महिना विश्वचक्षाः ॥ ९८॥ १. गत मन्त्र में कहा है कि विश्वकर्मा ने सृष्टि का निर्माण किया। संसार में

English

May the All-Gods, O Agni, bear and lift thee upward with their thoughts. Fair to be looked on, rich in light, he thou propitious unto us.

अध्याय १७

श्लोक 54

पञ्च॒ दिशो॒ दैवी॑र्य॒ज्ञम॑वन्तु दे॒वीरपाम॑तिं॒ दुर्म॑तिं॒ बाध॑मानाः ।रा॒यस्पोषे॑ य॒ज्ञप॑तिमा॒भज॑न्ती रा॒यस्पोषे॒ अधि॑ य॒ज्ञो अ॑स्थात्

pañca diśo daivīryajñamavantu devīrapāmatiṃ durmatiṃ bādhamānāḥ | rāyaspoṣe yajñapatimābhajantī rāyaspoṣe adhi yajño asthāt

हिन्दी अर्थ

वे सर्वव्यापक प्रभु, अपने स्वरूप मेँ ही स्थित हए, जीवों के धर्माधर्म कौ अपेक्षा से निरन्तर क्रियाशील परमाणुओं से सृष्टि का निर्माण कर देते हे। उन्हे किन्हीं उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती। सप्तदसोऽध्यायः ५७४ यसजुर्केद भाष्यम्

English

May the Five Regions guard, divine, our worship, Goddesses chasing lack of thought and hatred, Giving the Sacrificer growth of riches. Let sacrifice be based on growth of riches.

अध्याय १७

श्लोक 55

समि॑द्धे अ॒ग्नावधि॑ मामहा॒न उ॒क्थप॑त्र॒ ईड्यो॑ गृभी॒तः ।त॒प्तं घ॒र्मं प॑रि॒गृह्या॑यजन्तो॒र्जा यद्य॒ज्ञमय॑जन्त दे॒वाः

samiddhe agnāvadhi māmahāna ukthapatra īḍyo gṛbhītaḥ | taptaṃ gharmaṃ parigṛhyāyajantorjā yadyajñamayajanta devāḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभु के सब धाम=सम्पत्तियाँ=ज्ञान, धन व बल अपनी शक्तियों का विस्तार करनेवालों को ही प्राप्त होते हे। विश्व॑कर्मन् हविषां वावृधानः स्वयं य॑जस्व पृथिवीमुत द्याम् । यचुर्वेदभाव्यम् ५७५ सप्तदशोऽध्यायः

English

Inspirited above enkindled Agni, adorable, winged with hymns, was it accepted, When the Gods offered sacrifice with viands, circling the heated caldron, paving worship.

अध्याय १७

श्लोक 56

दै॑व्याय ध॒र्त्रे जोष्ट्रे॑ देव॒श्रीः श्रीम॑नाः श॒तप॑याः ।प॒रि॒गृह्य॑ दे॒वा य॒ज्ञमा॑यन् दे॒वा दे॒वेभ्यो॑ अध्व॒र्यन्तो॑ अस्थुः

daivyāya dhartre joṣṭre devaśrīḥ śrīmanāḥ śatapayāḥ | parigṛhya devā yajñamāyan devā devebhyo adhvaryanto asthuḥ

हिन्दी अर्थ

हमारा जीवन तेजस्वी ओर विहव्य हो। हम तेजस्वी हों, परन्तु भयंकर न हो। लोगों कौ दृष्टि में हम आदरणीय हों। तेजस्विता के कारण हम “ अधृष्य" हों , परन्तु क्रोधादि से ऊपर उठे होने के कारण “अभिगम्य' हो। १. गत मन्त्र का "उग्र ओर विहव्य ' व्यक्ति चक्षुषः पिता चक्षु आदि इन्द्रियों का

English

Lord of a hundred draughts. benign, God-serving—to him divine, establisher, protector, The Gods approached the sacrifice, encircling. Gods for the Gods stood fain for sacred service.

अध्याय १७

श्लोक 57

वी॒तᳪ ह॒विः श॑मि॒तᳪ श॑मि॒ता य॒जध्यै॑ तु॒रीयो॑ य॒ज्ञो यत्र॑ ह॒व्यमेति॑ ।ततो॑ वा॒का आ॒शिषो॑ नो जुषन्ताम्

vīta haviḥ śamita śamitā yajadhyai turīyo yajño yatra havyameti | tato vākā āśiṣo no juṣantām

हिन्दी अर्थ

हम शरीर में चारों अन्तों को दृद करके तेजस्वी व ज्लान-दीप्त बनें। विश्वकर्मां विम॑नाऽआद्धिहाया धाता विधाता परमोत सन्दक् । १. वे प्रभु विश्वकर्मा =( विश्वं कर्म यस्य) इस सृष्टिरूप कर्मवाले हें, इस ब्रह्माण्ड के निर्माता है। २. विमनाः (विविधं मनो विज्ञानं यस्य--द०) विविध व विशिष्ट ज्ञानवाले

English

When the fourth sacrifice reaches the oblation, accepted offering which hath been made ready, fit for the Inmolator's sacrificing, Thence bless us prayers and holy recitations!

अध्याय १७

श्लोक 58

सूर्य॑रश्मि॒र्हरि॑केशः पु॒रस्ता॑त्सवि॒ता ज्योति॒रुद॑याँ॒२ अज॑स्रम् ।तस्य॑ पू॒षा प्र॑स॒वे या॑ति वि॒द्वान्त्स॒म्पश्य॒न्विश्वा॒ भुव॑नानि गो॒पाः

sūryaraśmirharikeśaḥ purastātsavitā jyotirudayā~2 ajasram | tasya pūṣā prasave yāti vidvāntsampaśyanviśvā bhuvanāni gopāḥ

हिन्दी अर्थ

वे प्रभु सब तेजो व लोकों के देनेवाले है। वे प्रभु ही संप्रश्न=सम्यग् असूर्ते सूर्ते रज॑सि निषत्ते ये भूतानि समकरुण्वन्निमानिं ।॥। २८॥ १. ये=जो ऋषयः = तत्त्वज्ञानी होते हैं पूर्वे=अपना पूरण करनेवाले होते है जरितारः प्रभु के स्तोता होते है तथा २. असूर्ते-(असुभिः ईरिते) प्राणँ से प्रेरित, अर्थात् प्राण-साधना

English

Savitar, golden-hued, hath lifted eastward, bright with the sunbeams, his eternal lustre, He at whose furtherance wise Pûshan marches surveying all existence like a herdsman.

अध्याय १७

श्लोक 59

वि॒मान॑ ए॒ष दि॒वो मध्य॑ आस्त आपप्रि॒वान् रोद॑सी अ॒न्तरि॑क्षम् ।स वि॒श्वाची॑र॒भि च॑ष्टे घृ॒ताची॑रन्त॒रा पूर्व॒मप॑रं च के॒तुम्

vimāna eṣa divo madhya āsta āpaprivān rodasī antarikṣam | sa viśvācīrabhi caṣṭe ghṛtācīrantarā pūrvamaparaṃ ca ketum

हिन्दी अर्थ

पूर्व श्रेष्ठ ऋषि भी प्रभु-प्राप्ति के लिए, योगादि में निश्चिन्ततापूर्वक प्रवृत्त होने के लिए मर्यादित धन-संग्रह करते हे। परो दिवा परऽएना पुंथिव्या परो देवेभिरसुं रैर्यदस्तिं । किश्शस्विद् गर्भः प्रथमं द॑श्चऽआपो यत्र देवाः समपश्यन्त पूर्वे" ॥ २९॥

English

He sits, the measurer, in the midst of heaven, filling the two world-halves and air's mid-region. He looks upon the rich far-spreading pastures between the eastern and the western limit.

अध्याय १७

श्लोक 60

उ॒क्षा स॑मु॒द्रो अ॑रु॒णः सु॑प॒र्णः पूर्व॑स्य॒ योनिं॑ पि॒तुरा वि॑वेश ।मध्ये॑ दि॒वो निहि॑त॒: पृश्नि॒रश्मा॒ वि च॑क्रमे॒ रज॑सस्पा॒त्यन्तौ॑

ukṣā samudro aruṇaḥ suparṇaḥ pūrvasya yoniṃ piturā viveśa | madhye divo nihita: pṛśniraśmā vi cakrame rajasaspātyantau

हिन्दी अर्थ

९. प्रभु सारे लोक-लोकान्तरों को जन्म देते हें। जीवों को कर्मानुसार शरीर देते है। २. शरीर देते ही जीवों को वेदज्ञान देते है, जिससे वे प्रकृति के प्रयोग में व परस्पर व्यवहार मे गलती न कररे। ३. उनके शरीरो के. रक्षार्थं ओषधियों को जन्म देते है , ओषधियों की उत्पत्ति के लिए बादलों की व्यवस्था करते हेँ।

English

Steer, Sea, Red Bird with strong wings, he hath entered the dwelling-place of the Primeval Father. A gay-hued Stone set in the midst of heaven, he hath gone forth and guards the air's two limits.

अध्याय १७

श्लोक 61

इन्द्रं॒ विश्वा॑ अवीवृधन्त्समु॒द्रव्य॑चसं॒ गिर॑: ।र॒थीत॑मᳪ र॒थीनां॒ वाजा॑ना॒ᳪ सत्प॑तिं॒ पति॑म्

indraṃ viśvā avīvṛdhantsamudravyacasaṃ gira: | rathītama rathīnāṃ vājānā satpatiṃ patim

हिन्दी अर्थ

संक्रन्दं नेनानिभिषेण जिष्णुना युत्कारेण॑ दुश्च्यवनेन धृष्णुना । १. वासनाओं को जीतना अत्यन्त कठिन है। इनके साथ युद्ध करनेवाला मनुष्य सचमुच ' युधः" है। यह निरन्तर आगे बने के कारण ' नरः' है। यह अपने को एक आदर्श उपासक बनाने का प्रयत करता है ओर इस “उपासक आत्मा" से वासनाओं का पराभव

English

All sacred songs have glorified Indra expansive as the sea, The best of warriors borne on cars, the Lord, the Very Lord of strength.

अध्याय १७

श्लोक 62

दे॒व॒हूर्य॒ज्ञ आ च॑ वक्षत्सुम्न॒हूर्य॒ज्ञ आ च॑ वक्षत् ।यक्ष॑द॒ग्निर्दे॒वो दे॒वाँ२ आ च॑ वक्षत्

devahūryajña ā ca vakṣatsumnahūryajña ā ca vakṣat | yakṣadagnirdevo devā~2 ā ca vakṣat

हिन्दी अर्थ

इन्द्र बनकर हम धन के लोभ का विदारण करें। ज्ञानी बनकर इस अध्यात्म-संग्राम में शत्रुओं को कुचल दे। दुश्च्यवनः पुंतनाषाडंयुध्यो,ऽस्माकःसेनां अवतु प्र युत्सु ॥३९॥। १. इन्द्रः इन्द्रियों का अधिष्ठाता जीव गोत्राणि=धनों को सहसरा अपनी शक्ति से,

English

May God-invoking sacrifice bring the Gods hitherward to us. May bless-invoking sacrifice bring the Gods hitherward to us. May Agni, God, make offering and hither bring the Gods to us.

अध्याय १७

श्लोक 63

वाज॑स्य मा प्रस॒व उ॑द्ग्रा॒भेणोद॑ग्रभीत् ।अधा॑ स॒पत्ना॒निन्द्रो॑ मे निग्रा॒भेणाध॑राँ२ अकः

vājasya mā prasava udgrābheṇodagrabhīt | adhā sapatnānindro me nigrābheṇādharā~2 akaḥ

हिन्दी अर्थ

हम लोभ की भावना से ऊपर उदे, जिससे हृदयो मे शोकाग्नि से सन्तप्त १. संसार मे न फंसने व निरन्तर आगे ओर आगे बदने के लिए आवश्यक है कि मनुष्य अपने सामने एक लक्ष्य (ध्येय) रखे। लक्ष्य ओञ्ल हआ ओर मनुष्य भटका। यह लक्ष्य ही "शरव्या" है। २. यह लक्ष्य बडा सोच-समञ्चकर बनाया जाना चाहिए। मन्त्र में

English

May the abundant growth of wealth with elevation lift me up, And with his subjugating power may Indra keep my foemen down.

अध्याय १७

श्लोक 64

उ॒द्ग्रा॒भं च॑ निग्रा॒भं च॒ ब्रह्म॑ दे॒वा अ॑वीवृधन् ।अधा॑ स॒पत्ना॑निन्द्रा॒ग्नी मे॑ विषू॒चीना॒न्व्य॒स्यताम्

udgrābhaṃ ca nigrābhaṃ ca brahma devā avīvṛdhan | adhā sapatnānindrāgnī me viṣūcīnānvyasyatām

हिन्दी अर्थ

१. हम ज्ञान के कवच को धारण कर वासना-शरों से अभेद्य होँ। २. सप्तदसोऽध्यायः ५९२ यजुकेदभाष्यम् वीर्यरक्षासे शरीर को नीरोग बना्ँ। ३. द्वेष-निवारण से हमारा हदय विशाल हो। ४. दिव्य गुण हमारे जीवन को आनन्द-मय बनार्णे।

English

Upraising and depression and devotion may the Gods increase. May Indra, too, and Agni drive my foes away to every side.

अध्याय १७

श्लोक 65

क्रम॑ध्वम॒ग्निना॒ नाक॒मुख्य॒ᳪ हस्ते॑षु॒ बिभ्र॑तः ।दि॒वस्पृ॒ष्ठᳪ स्व॑र्ग॒त्वा मि॒श्रा दे॒वेभि॑राध्वम्

kramadhvamagninā nākamukhya hasteṣu bibhrataḥ | divaspṛṣṭha svargatvā miśrā devebhirādhvam

हिन्दी अर्थ

९. प्रभु को अपना कवच बनानेवाला व्यक्ति वासनाओं को जीतकर उत्कर्षं प्राप्त करता है। २. उत्तम धन का संचय करनेवाला होता है। ३. ओर अपनी सन्तान से इन्द्रेमं प्र॑तरां न॑य सजातानामसद्वशी । समेनं वर्चसा सृज देवान भागदाऽअ॑सत् ॥५९॥

English

Go ye by Agni to the sky bearing the Ukhya in your hands. Reaching the heights of sky and heaven stay intermingled with the Gods.

अध्याय १७

श्लोक 66

प्राची॒मनु॑ प्र॒दिशं॒ प्रेहि॑ वि॒द्वान॒ग्नेर॑ग्ने पुरो अ॑ग्निर्भवे॒ह ।विश्वा॒ आशा॒ दीद्या॑नो॒ वि भा॒ह्यूर्जं॑ नो धेहि द्वि॒पदे॒ चतु॑ष्पदे

prācīmanu pradiśaṃ prehi vidvānagneragne puro agnirbhaveha | viśvā āśā dīdyāno vi bhāhyūrjaṃ no dhehi dvipade catuṣpade

हिन्दी अर्थ

९. देवता तुञ्ञे ज्ञान के द्वारा विषय-वासनाओं से ऊपर उठा्ं। २. तू सबका कल्याण करनेवाला हो। ३. तेरा मुख मुस्कराहट से युक्त, अतएव सुन्दर हो। ४. विविध विज्ञानो में तू निवास करनेवाला बने। षिः अप्रतिरथः। देवता- दिक्। छन्दः स्वराडार्षीत्निष्टुप्। स्वरः -धेवतः।।

English

Agni, go forward to the eastern region, well-skilled, be here the fire in front of Agni. Illuming all the quarters, shine with splendour: supply with food our quadrupeds and bipeds.

अध्याय १७

श्लोक 67

पृ॒थि॒व्या अ॒हमुद॒न्तरि॑क्ष॒माऽरु॑हम॒न्तरि॑क्षा॒द्दिव॒मारु॑हम् ।दि॒वो नाक॑स्य पृ॒ष्ठात् स्व॒र्ज्योति॑रगाम॒हम्

pṛthivyā ahamudantarikṣamā'ruhamantarikṣāddivamāruham | divo nākasya pṛṣṭhāt svarjyotiragāmaham

हिन्दी अर्थ

“ अप्रतिरथ" ऋषि वह है जो सूर्य के समान ज्ञान कौ किरणोँवाला हे। "दुखहरण व सुखप्रापण' जिसका ध्येय है। वह निरन्तर आगे ओर आगे बद रहा हे, उत्पादन के कार्य में लगा है, निरन्तर ज्ञान की ज्योति को बदाता हुआ, शक्तियों का पोषण करता हुआ प्रभु की अनुज्ञा में चल रहा है, कर््तव्य-अकर््तव्य को समञ्लता हुआ, सभी का

English

From earth to air's mid-region have I mounted, and from mid-air ascended up to heaven. From the high pitch of heaven's cope I came into the world of light.

अध्याय १७

श्लोक 68

स्व॒र्यन्तो॒ नापे॑क्षन्त॒ आ द्याᳪ रो॑हन्ति॒ रोद॑सी ।य॒ज्ञं ये वि॒श्वतो॑धार॒ᳪ सुवि॑द्वाᳪसो वितेनि॒रे

svaryanto nāpekṣanta ā dyā rohanti rodasī | yajñaṃ ye viśvatodhāra suvidvāso vitenire

हिन्दी अर्थ

ज्ञान का प्रसार करनेवाला, सदा आनन्दमय, तेजस्वी, उत्तमता से अपना पूरण करनेवाला “ अप्रतिरथ ' परमात्मा मे पहुंचता है। सदा सज्ञान मेँ स्थित (नित्य सत्यस्थ) ज्योतियों के स्पर्शवाला, दृढ शरीर यह निरन्तर पुरुषार्थं करता है ओर अपने विचार-आचार १. गत मन्त्र में "पूर्वं पिता के गृह मे प्रवेश" का वर्णन था। प्रस्तुत मन्त्र में उसी

English

Mounting the sky they look not round: they rise to heaven through both the worlds— Sages who span the sacrifice that pours its stream on every side.

अध्याय १७

श्लोक 69

अग्ने॒ प्रेहि॑ प्रथ॒मो दे॑वय॒तां चक्षु॑र्दे॒वाना॑मु॒त मर्त्या॑नाम् ।इय॑क्षमाणा॒ भृगु॑भिः स॒जोषा॒: स्व॒र्यन्तु॒ यज॑मानाः स्व॒स्ति

agne prehi prathamo devayatāṃ cakṣurdevānāmuta martyānām | iyakṣamāṇā bhṛgubhiḥ sajoṣā: svaryantu yajamānāḥ svasti

हिन्दी अर्थ

९. यज्ञ हमारे लिए सुखमय स्थिति उत्पन्न करके इस लोक को अच्छा बनाते है। २. हमारी अशुभ-वृत्तियों को समाप्त करके, दिव्यता को जन्म देकर आमुष्मिक निःश्रेयस के साधक होते हे। १. वाजस्य प्रसवः=सब शक्तियों का उत्पत्तिस्थान प्रभु मा=मुञ्े उद्म्राभेण = उत्कृष्ट

English

Foremost of those who seek the Gods come forward, thou who art eye of Gods and men, O Agni. Accordant with the Bhrigus, fain to worship, to heaven in safety go the Sacrificers.

अध्याय १७

श्लोक 70

नक्तो॒षासा॒ सम॑नसा॒ विरू॑पे धा॒पये॑ते॒ शिशु॒मेक॑ᳪ समी॒ची ।द्यावा॒क्षामा॑ रु॒क्मो अ॒न्तर्वि भा॑ति दे॒वा अ॒ग्निं धा॑रयन् द्रविणो॒दाः

naktoṣāsā samanasā virūpe dhāpayete śiśumeka samīcī | dyāvākṣāmā rukmo antarvi bhāti devā agniṃ dhārayan draviṇodāḥ

हिन्दी अर्थ

९. प्रभु मुञ्लमें शक्ति उत्पन्न करं, जिससे उत्कृष्ट गुणों के ग्रहण से मेँ प्रभु का प्रिय बन पाँ २. प्रभु कामक्रोधादि सपलोँ को मेरे वशीभूत -करे। उव्ग्राभं च॑ निग्राभं च ब्रह्य देवाऽञ॑वीवृधन् । १. देवाः विद्वान् लोग उदप्राभं च=उत्कृष्ट वसुओं के बारम्बार ग्रहण से चतथा

English

Night and Dawn, different in hue, accordant, etc., as in XII. 2.

अध्याय १७

श्लोक 71

अग्ने॑ सहस्राक्ष शतमूर्धञ्छ॒तं ते॑ प्रा॒णाः स॒हस्रं॑ व्या॒नाः ।त्वᳪ सा॑ह॒स्रस्य॑ रा॒य ई॑शिषे॒ तस्मै॑ ते विधेम॒ वाजा॑य॒ स्वाहा॑

agne sahasrākṣa śatamūrdhañchataṃ te prāṇāḥ sahasraṃ vyānāḥ | tva sāhasrasya rāya īśiṣe tasmai te vidhema vājāya svāhā

हिन्दी अर्थ

१. हम सत्य का ग्रहण व असत्य का त्याग करके ब्रह्म वर्धन करनेवाले बनें। २. जितेन्द्रियता व अग्नित्व के द्वारा हम विरोधी वासनाओं का विनाश करनेवाले हों। दि वस्यृष्ठश्शस्वर्गत्वा सिश्रा देवेभिराध्वम् ॥६५५॥ १. अग्निनात्यक्ञ की अग्नि से, अर्थात् अग्निहोत्र की अग्नि के द्वारा नाकं

English

O Agni, thousand-eyed and hundred-headed, thy breaths are hundred, thy through-breaths a thousand. Thou art the Lord of thousandfold possessions. To thee; for strength, may we present oblation.

अध्याय १७

श्लोक 72

सु॒प॒र्णो॒ऽसि ग॒रुत्मा॑न् पृ॒ष्ठे पृ॑थि॒व्याः सी॑द ।भा॒साऽन्तरि॑क्ष॒मा पृ॑ण॒ ज्योति॑षा॒ दिव॒मुत्त॑भान॒ तेज॑सा॒ दिश॒ उद्दृ॑ᳪह

suparṇo'si garutmān pṛṣṭhe pṛthivyāḥ sīda | bhāsā'ntarikṣamā pṛṇa jyotiṣā divamuttabhāna tejasā diśa uddṛha

हिन्दी अर्थ

१. यज्ञाग्नि हमारे जीवनों को नीरोग व सुखी बनाये। २. हम पुरुषार्थं से अन्नं का अर्जन कररे। ३. ज्ञानप्रधान जीवन बिता्ं। ४. उस स्वयं देदीप्यमान ज्योति के समीप उपस्थित हो। ५. देवों से मिलकर उस प्रभु में स्थित हुए-हुए ज्ञानच्चरपिं करे। पूर्वं दिशा को लक्ष्य करके

English

Thou art the Bird of goodly wing: be seated on the ridge of earth. Fill air's mid-region with thy glow, supporting with thy light the sky, confirm the quarters with thy sheen.

अध्याय १७

श्लोक 73

आ॒जुह्वा॑नः सु॒प्रती॑कः पु॒रस्ता॒दग्ने॒ स्वं योनि॒मा सी॑द साधु॒या ।अ॒स्मिन्त्स॒धस्थे॒ अध्युत्त॑रस्मि॒न्विश्वे॑ देवा॒ यज॑मानश्च सीदत

ājuhvānaḥ supratīkaḥ purastādagne svaṃ yonimā sīda sādhuyā | asmintsadhasthe adhyuttarasminviśve devā yajamānaśca sīdata

हिन्दी अर्थ

कोकम करते हे। २. दुःख-शोक निरोधक ज्ञान का अपने में वर्धन करते है ओर ३. जगत् के धारणहेतुभूत यज्ञो को विस्तृत करते है। देवयतां प्रथमः “भृगुभिः सजोषाः ' अग्ने प्रहि प्रथमो देवयतां चक्ष्दवानामुत मत्यीनाम् ।

English

Receiving offerings, fair of aspect, eastward be duly seated in thy place, O Agni. In this the more exalted habitation be seated All-Gods and the Sacrificer.

अध्याय १७

श्लोक 74

ताᳪ स॑वि॒तुर्वरे॑ण्यस्य चि॒त्रामाऽहं वृ॑णे सुम॒तिं वि॒श्वज॑न्याम् ।याम॑स्य॒ कण्वो॒ अदु॑ह॒त्प्रपी॑नाᳪ स॒हस्र॑धारां॒ पय॑सा म॒हीं गाम्

tā saviturvareṇyasya citrāmā'haṃ vṛṇe sumatiṃ viśvajanyām | yāmasya kaṇvo aduhatprapīnā sahasradhārāṃ payasā mahīṃ gām

हिन्दी अर्थ

१. हम अग्नि बनें, आगे बदँ, दिव्य गुणों का वर्धन करनेवालों में प्रथम हों। २. प्राकृतिक देवों का ज्ञान प्राप्त करें, जिससे उनके ठीक उपयोग से स्वस्थ हों। मनुष्यों का ज्ञान प्राप्त करं, जिससे उनके स्वभाव को समञ्जकर वर्तते हए इ्गडों मेन उलद् जार्णँ। ३. यज्ञशील बनकर ज्ञानियों के साथ ज्ञानचर्चाओं का सेवन करते हुए स्वस्थ

English

That wondrous all-mankind-embracing favour of Savitar, choice-worthy, I solicit, Even his which Kanva wont to milk, the mighty, the teeming Cow who yields a thousand milk-streams.

अध्याय १७

श्लोक 75

वि॒धेम॑ ते पर॒मे जन्म॑न्नग्ने वि॒धेम॒ स्तोमै॒रव॑रे स॒धस्थे॑ ।यस्मा॒द्योने॑रु॒दारि॑था॒ यजे॒ तं प्र त्वे ह॒वीᳪषि॑ जुहुरे॒ समि॑द्धे

vidhema te parame janmannagne vidhema stomairavare sadhasthe | yasmādyonerudārithā yaje taṃ pra tve havīṣi juhure samiddhe

हिन्दी अर्थ

१. पति-पल्री ने उचित त्रीडाशील व दोष-दहनवाला होना है। २. समान मनवाला ३. विशिष्ट रूपवाला। ४. ये दोनों (समीची) सङ्गतिवाले होकर एक सन्तान का सुन्दर पालन करते हैँ। ५. इनके दीप्त मस्तिष्क व दृद शरीर के मध्य में निर्मल मन चमकता है। ६. ये देव बनकर प्रभु को अपने निर्मल मन मेँ धारण करते है ओर ७. धनां

English

May we adore thee in thy loftiest birth place, Agni! with praise-songs in thy lower station. The place whence those hast issued forth I worship. In thee, well kindled, have they paid oblations

अध्याय १७

श्लोक 76

प्रेद्धो॑ अग्ने दीदिहि पु॒रो नऽज॑स्रया सू॒र्म्या॒ यविष्ठ ।त्वाᳪ शश्व॑न्त॒ उप॑ यन्ति॒ वाजा॑:

preddho agne dīdihi puro na'jasrayā sūrmyā yaviṣṭha | tvā śaśvanta upa yanti vājā:

हिन्दी अर्थ

हे प्रभो! आप अनन्त सिर, ओंँखों व प्राणोँवाले है। आपकी कृपा से हम भी अपनी शक्तियों को बद्ानेवाले हों। आपका धन सभी का पालन करता है, हम भी कृपण न होकर ओरों का पालन करनेवाले हों। आपके सम्पर्क से शक्तिलाभ करें ओर सूचना--आचार्य ने भावार्थ मे लिखा है कि योगी अनेक प्राणियों के शरीर में प्रवेश

English

Shine thou before us, Agni, well enkindled, with flame, most youthful God, that never fadeth. Unceasing unto thee come sacred viands.

अध्याय १७

श्लोक 77

अग्ने॒ तम॒द्याश्वं॒ न स्तोमै॒: क्रतुं॒ न भ॒द्रᳪ हृ॑दि॒स्पृश॑म् ।ऋ॒ध्यामा॑ त॒ ओहै॑:

agne tamadyāśvaṃ na stomai: kratuṃ na bhadra hṛdispṛśam | ṛdhyāmā ta ohai:

हिन्दी अर्थ

मे लिखा है कि योगी अनेक प्राणियों के शरीर में प्रवेश करके अनेक शिर, नेत्र आदि अङ्गो से देखने आदि के कार्यो को कर सकता है। १. गत मन्त्र के उपासक को प्रेरणा देते हुए प्रभु कहते है कि सुपर्णः असि (शोभनानि पर्णानि पूर्णानि शुभलक्षणानि यस्य-द०) तू अच्छे-अच्छे पूर्ण शुभ लक्षणों से युक्त है। २.

English

Agni, this day with lands, etc., as in XV. 44.

अध्याय १७

श्लोक 78

चित्तिं॑ जुहोमि॒ मन॑सा घृ॒तेन॒ यथा॑ दे॒वा इ॒हागम॑न्वी॒तिहो॑त्रा ऋता॒वृध॑: ।पत्ये॒ विश्व॑स्य॒ भूम॑नो जु॒होमि॑ वि॒श्वक॑र्मणे वि॒श्वाहाऽदा॑भ्यᳪ ह॒वि:

cittiṃ juhomi manasā ghṛtena yathā devā ihāgamanvītihotrā ṛtāvṛdha: | patye viśvasya bhūmano juhomi viśvakarmaṇe viśvāhā'dābhya havi:

हिन्दी अर्थ

१. कर्मो मेँ लगे रहकर हम घोडे की भति शक्तिशाली बनें। २. शक्ति प्राप्त करके सभी का कल्याण कररे। सभी के हदयों में हमारे लिए स्थान हो। सप्तदसोऽध्यायः ० यजुर्वेदभावष्यम् चित्तिं जुहोमि मन॑सा घृतेन यथां देवाऽ इहागमंन्वीतिहोत्राऽ ऋतावृध; ।

English

I dedicate the thought with mind and butter so that the Gods may come who love oblation, strengthing Law, To Visvakarman, Lord of all the earth, I offer up day after day the inviolable sacrifice.

अध्याय १७

श्लोक 79

स॒प्त ते॑ अग्ने स॒मिध॑: स॒प्त जि॒ह्वाः स॒प्त ऋष॑यः स॒प्त धाम॑ प्रि॒याणि॑ ।स॒प्त होत्रा॑: सप्त॒धा त्वा॑ यजन्ति स॒प्त योनी॒रा पृ॑णस्व घृ॒तेन॒ स्वाहा॑

sapta te agne samidha: sapta jihvāḥ sapta ṛṣayaḥ sapta dhāma priyāṇi | sapta hotrā: saptadhā tvā yajanti sapta yonīrā pṛṇasva ghṛtena svāhā

हिन्दी अर्थ

१. में सान-मननशक्ति व स्वास्थ्य को धारण करता हूँ २. मै अपने जीवन में दिव्य गुणों को अपनाकर प्रकाशमय ज्ञानवाणी को प्राप्त करता हुव अपने में ऋत का वर्धन करता हूं ३. उस विश्वकर्मा विश्वपति के लिए अपना अर्पण करता हूँ। ४. मेरा जीवन सदा हवि को ग्रहण करनेवाला होता है। मै केवलादी नहीं बनता।

English

Seven fuel logs hast thou, seven tongues, O Agni, seven Rishis hast thou, seven belovd mansions. Seven-priests in sevenfold manner pay thee worship. Fill full—All-hail to thee!—seven wombs with butter.

अध्याय १७

श्लोक 80

शु॒क्रज्यो॑तिश्च चि॒त्रज्यो॑तिश्च स॒त्यज्यो॑तिश्च॒ ज्योति॑ष्माँश्च ।शु॒क्रश्च॑ ऋत॒पाश्चात्य॑ᳪहाः

śukrajyotiśca citrajyotiśca satyajyotiśca jyotiṣmā~śca | śukraśca ṛtapāścātyahāḥ

हिन्दी अर्थ

प्राणसाधक का जीवन ऋत व सत्यमय होता है। वेह नीति-मार्ग में ध्रुवता से चलता है। अच्छाइयों का धरुण बनता है। सभी का धारण करता है। इन्द्रियो व मन को वशीभूत करता है ओर इन्हे विविध उत्तम क्रियाओं में लगाये रखता है। ऋ तजिच्च॑ सत्यजिच्च सेनजिच्च सुषेणश्च ।

English

Purely-Bright, Wonderfully-Bright, Really-Bright, All-Luminous, Bright, Law's-Protector, Safe-from-Ill;

अध्याय १७

श्लोक 81

ई॒दृङ् चा॑न्या॒दृङ् च॑ स॒दृङ् च॑ प्रति॑सदृङ् च॑ ।मि॒तश्च॒ सम्मि॑तश्च॒ सभ॑राः

īdṛṅ cānyādṛṅ ca sadṛṅ ca pratisadṛṅ ca | mitaśca sammitaśca sabharāḥ

हिन्दी अर्थ

हम ऋत.से स्वास्थ्य का विजय करे। सत्य से हदय की वासना-सैन्य को जीतनेवाले बनें। धृति आदि उत्तम गुणों की सेनावाले हों। स्नेह की भावना हमारे समीप हो ओर द्वेष की भावना दूर हो। इस प्रकार हम सच्चे प्रभु-भक्तों मे परिगणित हो। सम्भिंतासो नोऽअद्य सभ॑रसो मरुतो यज्ञेऽअस्मिन् ।८४॥।

English

Such, Other-Looking, Equal, Similar, Measured, Commensurate, Jointly-Bearing-up.

अध्याय १७

श्लोक 82

ऋ॒तश्च॑ स॒त्यश्च॑ ध्रु॒वश्च॑ ध॒रुण॑श्च ।ध॒र्ता च॑ विध॒र्ता च॑ विधार॒यः

ṛtaśca satyaśca dhruvaśca dharuṇaśca | dhartā ca vidhartā ca vidhārayaḥ

हिन्दी अर्थ

इस जीवनयज्ञ में हमारा सम्पर्क ' ईदृक्षास, एतादुक्षास, प्रतिसदृक्षास, मित, सम्मित व सभरस्' मरुतो से होगा तो हम भी इस प्रकार के जीवनवाले बन पार्पगे। क्रीडी च॑ शाकी चोँज्जेषी ॥८५॥ १. यह प्राणसाधक स्वतर्वँश्च = (यः स्वं तौति वर्धयति) आत्मशक्ति को बद्धाता है

English

Right, Real, Firm, Strong-to-Support, Bearer, Disposer, Manager.

अध्याय १७

श्लोक 83

ऋ॒त॒जिच्च॑ सत्य॒जिच्च॑ सेन॒जिच्च॑ सु॒षेण॑श्च ।अन्ति॑मित्रश्च दू॒रे अ॑मित्रश्च ग॒णः

ṛtajicca satyajicca senajicca suṣeṇaśca | antimitraśca dūre amitraśca gaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

१. हम वेदवाणीरूप गौ का दूध पीँ। यह हमें शक्ति देगा। यह हमें हमारे कर्तव्यो का बोध देगा। २. माधुर्यमय ज्ञान के स्रोत का सेवन करते हुए हम उस प्रभुमें प्रवेश करनेवाले बनें, वे प्रभु तो हमारे आनन्दमय सदन" है। अनुष्वधमावह मादयस्व स्वाहाकृतं वृषभ वक्षि हव्यम् ॥८८॥

English

Winner-of-Right, Winner-of-Truth, Host-Conquering, Lord-of-Goodly-Host, Whose-Friends-are-Near-at-Hand, Whose-Banded-Enemies-are-Far-Away:

अध्याय १७

श्लोक 84

ई॒दृक्षा॑स एता॒दृक्षा॑स ऊ॒ षु ण॑: स॒दृक्षा॑स॒: प्रति॑सदृक्षास॒ एत॑न ।मि॒तास॑श्च॒ सम्मि॑तासो नो अ॒द्य सभ॑रसो मरुतो य॒ज्ञे अ॒स्मिन्

īdṛkṣāsa etādṛkṣāsa ū ṣu ṇa: sadṛkṣāsa: pratisadṛkṣāsa etana | mitāsaśca sammitāso no adya sabharaso maruto yajñe asmin

हिन्दी अर्थ

९. प्रमु के प्रकाश में हदय उल्लासमय होता है। २. प्रभु की समीपता के 'परिणामस्वरूप ज्ञान की किरणों से द्योतित हदयवाले असद्कशस्त्र से इस संसार वृक्ष को काट पाते है। ३. प्रभु का नाम हमारी जिह्वा पर हो, हाथों से कर्म करें, तभी हम मोक्ष प्राप्त कर पार्णेगे। वयं नाम प्र ब्र॑वामा घृतस्यास्मिन् यज्ञे धारयामा नमोभिः ।

English

To day in this our sacrifice be present, Such, Looking-Thus, Same, Similar-in-appearance, Measured, Commensurate, Joint-Bearers, Maruts!

अध्याय १७

श्लोक 85

स्वत॑वाँश्च प्रघा॒सी च॑ सान्तप॒नश्च॑ गृहमे॒धी च॑ ।क्री॒डी च॑ शा॒की चो॑ज्जे॒षी

svatavā~śca praghāsī ca sāntapanaśca gṛhamedhī ca | krīḍī ca śākī cojjeṣī

हिन्दी अर्थ

१. हम निरन्तर प्रभु-नाम स्मरण कररे। हमारी वाणी सदा प्रभु के नाम का उच्चारण करे, वह प्रभु हमसे नाम को ही उच्चारण किया जाता हआ सुने। २. हम चतुःशङ्ख- गौर" बनें। हमारे श्वासप्रश्वास के साथ प्रभु के नाम का जप हो। त्रिधा बद्धो वुषभो रोरवीति महो देवो मर्त्यो २।।ऽआविंवेशा ॥९९१॥

English

Self-Powerful, Voracious-One, Kin-to-the-Sun, The House-holder, Play-Lover, Mighty, Conqueror. Fierce, Terrible, The Resonant, The Roaring. Victorious, Assailant, and Dispeller, All-Hail!

अध्याय १७

श्लोक 86

इन्द्रं॒ दैवी॒र्विशो॑ म॒रुतोऽनु॑वर्त्मानोऽभव॒न्यथेन्द्रं॒ दैवी॒र्विशो॑ म॒रुतोऽनु॑वर्त्मा॒नोऽभ॑वन् ।ए॒वमि॒मं यज॑मानं॒ दैवी॑श्च॒ विशो॑ मानु॒षीश्चानु॑वर्त्मानो भवन्तु

indraṃ daivīrviśo maruto'nuvartmāno'bhavanyathendraṃ daivīrviśo maruto'nuvartmāno'bhavan | evamimaṃ yajamānaṃ daivīśca viśo mānuṣīścānuvartmāno bhavantu

हिन्दी अर्थ

हम मन्त्र वर्णित साधना करते हए ' महोदेव ' बनें, लोकहित में प्रवृत्त हो। त्रिधा हितं पणिभिर्गुह्यमानं गिं देवासो घुतमन्व॑विन्दन् । १. प्रभु त्रिधा हितम् तीन प्रकार से हमारे हृदयो में निहित होते टे। जिस समय हम " शारीरिक स्वास्थ्य, मानस-नैर्मल्य व बौद्धिक ज्ान-दीप्ति' को धारण करते है तव अपने

English

The Maruts, clans divine, became the followers of Indra; as The Maruts, clans divine, became the followers of Indra, so May clans divine and human he the Sacrificer's followers.

अध्याय १७

श्लोक 87

इ॒मᳪ स्तन॒मूर्ज॑स्वन्तं धया॒पां प्रपी॑नमग्ने सरि॒रस्य॒ मध्ये॑ ।उत्सं॑ जुषस्व॒ मधु॑मन्तमर्वन्त्समु॒द्रिय॒ᳪ सद॑न॒मा वि॑शस्व

ima stanamūrjasvantaṃ dhayāpāṃ prapīnamagne sarirasya madhye | utsaṃ juṣasva madhumantamarvantsamudriya sadanamā viśasva

हिन्दी अर्थ

हम इन्द्र" बनकर ज्ञान का सम्पादन करे, सूर्य-शिष्य बनकर कर्मठ बनें तथा वेन बनकर स्वधा का सेवन करते हुए भक्ति की भावना को जागरित करे। यही प्रभु-प्राप्ति का मार्ग हे। इसपर चलते हए ही हम प्रभु का आलिङ्खन करनेवाले बनेगे। १. एताः = ये ज्ञान की धारार्णँ हद्यात्-हदयदेश में निवास करनेवाले समुद्रात्-(स- मुद् )

English

Drink in the middle of the flood, O Agni, this breast stored full of sap, teeming with water. Welcome this fountain redolent of sweetness. O Courser, enter those thy watery dwelling.

अध्याय १७

श्लोक 88

घृ॒तं मि॑मिक्षे घृ॒तम॑स्य॒ योनि॑र्घृ॒ते श्रि॒तो घृ॒तम्व॑स्य॒ धाम॑ ।अ॒नुष्व॒धमा व॑ह मा॒दय॑स्व॒ स्वाहा॑कृतं वृषभ वक्षि ह॒व्यम्

ghṛtaṃ mimikṣe ghṛtamasya yonirghṛte śrito ghṛtamvasya dhāma | anuṣvadhamā vaha mādayasva svāhākṛtaṃ vṛṣabha vakṣi havyam

हिन्दी अर्थ

१. हृदयस्थ प्रभु से ज्ञान की धारां उद्गत होती हे। २. ये कामाग्नि से लुञ्याई नहीं जा सकती। ३. कामाग्नि की शान्ति से ज्ञान की धारार्णँ चारों ओर प्रवाहित होती ह ४. इन ज्ञान-धाराओं के मध्य में वह कान्त, ज्योर्तिमय रह रहा हे, इनसे उस प्रभु का १. अन्तर्हदाहदय के अन्दर से मनसा पूयमानाः =मन से पवित्र कौ जाती हुई

English

Oil hath been mixed: oil is his habitation. In oil he rests: oil is his proper province. Come as thy wont is. O thou Steer, rejoice thee. Bear off the oblation duly consecrated.

अध्याय १७

श्लोक 89

समु॒द्रादू॒र्मिर्मधु॑माँ॒२ उदा॑र॒दुपा॒ᳪशुना॒ सम॑मृत॒त्वमा॑नट् ।घृ॒तस्य॒ नाम॒ गुह्यं॒ यदस्ति॑ जि॒ह्वा दे॒वाना॑म॒मृत॑स्य॒ नाभि॑:

samudrādūrmirmadhumā~2 udāradupāśunā samamṛtatvamānaṭ | ghṛtasya nāma guhyaṃ yadasti jihvā devānāmamṛtasya nābhi:

हिन्दी अर्थ

हमारे हदय में ज्ञान कौ वाणि्यँ नदियों के समान प्रवाहित हों। ये मनन द्वारा हमें पवित्र बनानेवाली हों। व्याध से मृगो के समान वासना हमसे भयभीत होकर दूर भाग जार्। सिन्धोरिव प्राध्वने शघनासरो वात॑प्रमियः पतयन्ति यह्वाः । घृतस्य धारांऽअरूषो न वाजी काष्ठां भिन्दन्नूर्मिभिः पिन्व॑मानः ॥ ९५॥

English

Forth from the ocean sprang the wave of sweetness: together with the stalk it turned to Amrit, That which is holy oil's mysterious title: but the Gods’ tongue is truly Amities centre.

अध्याय १७

श्लोक 90

व॒यं नाम॒ प्र ब्र॑वामा घृ॒तस्या॒स्मिन् य॒ज्ञे धा॑रयामा॒ नमो॑भिः ।उप॑ ब्र॒ह्मा शृ॑णवच्छ॒स्यमा॑नं॒ चतु॑:शृङ्गो॒ऽवमीद्गौ॒र ए॒तत्

vayaṃ nāma pra bravāmā ghṛtasyāsmin yajñe dhārayāmā namobhiḥ | upa brahmā śṛṇavacchasyamānaṃ catu:śṛṅgo'vamīdgaura etat

हिन्दी अर्थ

टम ज्ञानी बनकर अध्यात्म-संग्राम में विजय प्राप्त करे, दूसरों को भी ज्ञान अभिप्र॑वन्त सम॑नेव योषाः कल्याण्युः स्मय॑मानासोऽअग्निम् । घृतस्य धाराः समिधो नसन्त ता जुषाणो ह॑र्यति जातवेदाः ॥९६॥ १. घृतस्य धाराः = सान की वाणिर्याँ (क) समनेव योषाः समान मनवाली स्त्रियों

English

Let us Declare aloud the name of Ghrita, and at this sacrifice held it up with homage. So let the Brahman hear the praise we utter. This hath the four-horned Buffalo emitted.

अध्याय १७

श्लोक 91

च॒त्वारि॒ शृङ्गा॒ त्रयो॑ अस्य॒ पादा॒ द्वे शी॒र्षे स॒प्त हस्ता॑सो अस्य ।त्रिधा॑ ब॒द्धो वृ॑ष॒भो रो॑रवीति म॒हो दे॒वो मर्त्याँ॒२ आ वि॑वेश

catvāri śṛṅgā trayo asya pādā dve śīrṣe sapta hastāso asya | tridhā baddho vṛṣabho roravīti maho devo martyā~2 ā viveśa

हिन्दी अर्थ

१. में अपने चारों ओर उस ज्ञान को देखँ जो मु्में विद्यमान सब शत्रुओं का विनाश करनेवाला बनता हे। २. इस ज्ञान के उत्पादन के लिएमैंसोम की रक्षा करं, ओर ३. उत्पत्न ज्ञान कौ रक्षा के लिए यज्ञात्मक जीवनवाला हों। इमं यज्ञं न॑यत देवतां नो घृतस्य धारा मधुमत्पवन्ते ।॥ ९८॥

English

Four are his horns, three are the feet that bear him: his heads are two, his hands are seven in number. Bound with a triple bond the Bull roars loudly: the mighty God hath entered into mortals.

अध्याय १७

श्लोक 92

त्रिधा॑ हि॒तं प॒णिभि॑र्गु॒ह्यमा॑नं॒ गवि॑ दे॒वासो॑ घृ॒तमन्व॑विन्दन् ।इन्द्र॒ एक॒ᳪ सूर्य॒ एकं॑ जजान वे॒नादेक॑ᳪ स्व॒धया॒ निष्ट॑तक्षुः

tridhā hitaṃ paṇibhirguhyamānaṃ gavi devāso ghṛtamanvavindan | indra eka sūrya ekaṃ jajāna venādeka svadhayā niṣṭatakṣuḥ

हिन्दी अर्थ

हम स्तुति करें, इन्द्रिय-संग्राम को जीते, सुपथ से धनार्जन करर, यज्ञशील हों, माधुर्यमयी ज्ञान कौ वाणियों को प्राप्त कर। अपामनीके समिथे यञआभुंतस्तम॑श्याम मधुमन्तं तऽ ऊर्मिम् ।॥९९॥ १. है प्रभो! ते धामन्-आपके तेज मे विश्वं भुवनम्-यह सारा ब्रह्माण्ड अधि

English

That oil in triple shape the Gods discovered laid down with- in the Cow, concealed by Panis. Indra produced one shape, Sûrya another: by their own power they formed the third from Vena.

अध्याय १७

श्लोक 93

ए॒ता अ॑र्षन्ति॒ हृद्या॑त्समु॒द्राच्छ॒तव्र॑जा रि॒पुणा॒ नाव॒चक्षे॑ ।घृ॒तस्य॒ धारा॑ अ॒भि चा॑कशीमि हिर॒ण्ययो॑ वेत॒सो मध्य॑ आसाम्

etā arṣanti hṛdyātsamudrācchatavrajā ripuṇā nāvacakṣe | ghṛtasya dhārā abhi cākaśīmi hiraṇyayo vetaso madhya āsām

हिन्दी अर्थ

९. सारे ब्रह्माण्ड का आधार जो प्रभु है वह प्रसन्न हदय में, क्रियाशील जीवन में. कर्मो की शक्ति में तथा वासनाओं से किये जानेवाले संग्राम में विजेता मे निवास करता हे। २. उस प्रभु का निवास-स्थान बनकर मै जान कौ माधुर्यमयी तरङ्गोवाला बन पाऊं। एवं, यह सत्रहवाँ अध्याय "प्रभु को धारण करने कौ भावना! पर समाप्त होता हे।

English

From inmost reservoir in countless channels flow down these rivers which the foe beholds not. I look upon the streams of oil descending, and lo! the Golden Reed is there among them.

अध्याय १७

श्लोक 94

स॒म्यक् स्र॑वन्ति स॒रितो॒ न धेना॑ अ॒न्तर्हृ॒दा मन॑सा पू॒यमा॑नाः ।ए॒ते अ॑र्षन्त्यू॒र्मयो॑ घृ॒तस्य॑ मृ॒गा इ॑व क्षिप॒णोरीष॑माणाः

samyak sravanti sarito na dhenā antarhṛdā manasā pūyamānāḥ | ete arṣantyūrmayo ghṛtasya mṛgā iva kṣipaṇorīṣamāṇāḥ

हिन्दी अर्थ

९. सारे ब्रह्माण्ड का आधार जो प्रभु है वह प्रसन्न हदय में, क्रियाशील जीवन में. कर्मो की शक्ति में तथा वासनाओं से किये जानेवाले संग्राम में विजेता मे निवास करता हे। २. उस प्रभु का निवास-स्थान बनकर मै जान कौ माधुर्यमयी तरङ्गोवाला बन पाऊं। एवं, यह सत्रहवाँ अध्याय "प्रभु को धारण करने कौ भावना! पर समाप्त होता हे।

English

Like rivers our libations flow together, cleansing themselves in inmost heart and spirit. The streams of holy oil pour swiftly downward like the wild beasts that fly before the bowman.

अध्याय १७

श्लोक 95

सिन्धो॑रिव प्राध्व॒ने शू॑घ॒नासो॒ वात॑प्रमियः पतयन्ति य॒ह्वाः ।घृ॒तस्य॒ धारा॑ अरु॒षो न वा॒जी काष्ठा॑ भि॒न्दन्नू॒र्मिभि॒: पिन्व॑मानः

sindhoriva prādhvane śūghanāso vātapramiyaḥ patayanti yahvāḥ | ghṛtasya dhārā aruṣo na vājī kāṣṭhā bhindannūrmibhi: pinvamānaḥ

हिन्दी अर्थ

९. सारे ब्रह्माण्ड का आधार जो प्रभु है वह प्रसन्न हदय में, क्रियाशील जीवन में. कर्मो की शक्ति में तथा वासनाओं से किये जानेवाले संग्राम में विजेता मे निवास करता हे। २. उस प्रभु का निवास-स्थान बनकर मै जान कौ माधुर्यमयी तरङ्गोवाला बन पाऊं। एवं, यह सत्रहवाँ अध्याय "प्रभु को धारण करने कौ भावना! पर समाप्त होता हे।

English

As rushing down the rapids of a river, flow swifter than the wind the vigorous currents, The streams of oil in swelling fluctuation like a red courser bursting through the fences.

अध्याय १७

श्लोक 96

अ॒भि प्र॑वन्त॒ सम॑नेव॒ योषा॑: कल्या॒ण्यः स्मय॑मानासो अ॒ग्निम् ।घृ॒तस्य॒ धारा॑: स॒मिधो॑ नसन्त॒ ता जु॑षा॒णो ह॑र्यति जा॒तवे॑दाः

abhi pravanta samaneva yoṣā: kalyāṇyaḥ smayamānāso agnim | ghṛtasya dhārā: samidho nasanta tā juṣāṇo haryati jātavedāḥ

हिन्दी अर्थ

९. सारे ब्रह्माण्ड का आधार जो प्रभु है वह प्रसन्न हदय में, क्रियाशील जीवन में. कर्मो की शक्ति में तथा वासनाओं से किये जानेवाले संग्राम में विजेता मे निवास करता हे। २. उस प्रभु का निवास-स्थान बनकर मै जान कौ माधुर्यमयी तरङ्गोवाला बन पाऊं। एवं, यह सत्रहवाँ अध्याय "प्रभु को धारण करने कौ भावना! पर समाप्त होता हे।

English

Like women at a gathering fair to look on and gently smiling, they incline to Agni. The streams of holy oil attain the fuel, and Jâtavedas joyfully receives them.

अध्याय १७

श्लोक 97

क॒न्या॒ इव वह॒तुमेत॒वा उ॑ अ॒ञ्ज्य॒ञ्जा॒ना अ॒भि चा॑कशीमि ।यत्र॒ सोम॑: सू॒यते॒ यत्र॑ य॒ज्ञो घृ॒तस्य॒ धारा॑ अ॒भि तत्प॑वन्ते

kanyā iva vahatumetavā u añjyañjānā abhi cākaśīmi | yatra soma: sūyate yatra yajño ghṛtasya dhārā abhi tatpavante

हिन्दी अर्थ

९. सारे ब्रह्माण्ड का आधार जो प्रभु है वह प्रसन्न हदय में, क्रियाशील जीवन में. कर्मो की शक्ति में तथा वासनाओं से किये जानेवाले संग्राम में विजेता मे निवास करता हे। २. उस प्रभु का निवास-स्थान बनकर मै जान कौ माधुर्यमयी तरङ्गोवाला बन पाऊं। एवं, यह सत्रहवाँ अध्याय "प्रभु को धारण करने कौ भावना! पर समाप्त होता हे।

English

As maidens deck themselves with gay adornment to join the bridal feast, I now behold them. Where Soma flows and sacrifice is ready, thither the streams of holy oil are running.

अध्याय १७

श्लोक 98

अ॒भ्य॒र्षत सुष्टु॒तिं गव्य॑मा॒जिम॒स्मासु॑ भ॒द्रा द्रवि॑णानि धत्त ।इ॒मं य॒ज्ञं न॑यत दे॒वता॑ नो घृ॒तस्य॒ धारा॒ मधु॑मत्पवन्ते

abhyarṣata suṣṭutiṃ gavyamājimasmāsu bhadrā draviṇāni dhatta | imaṃ yajñaṃ nayata devatā no ghṛtasya dhārā madhumatpavante

हिन्दी अर्थ

९. सारे ब्रह्माण्ड का आधार जो प्रभु है वह प्रसन्न हदय में, क्रियाशील जीवन में. कर्मो की शक्ति में तथा वासनाओं से किये जानेवाले संग्राम में विजेता मे निवास करता हे। २. उस प्रभु का निवास-स्थान बनकर मै जान कौ माधुर्यमयी तरङ्गोवाला बन पाऊं। एवं, यह सत्रहवाँ अध्याय "प्रभु को धारण करने कौ भावना! पर समाप्त होता हे।

English

Send to our eulogy a herd of cattle: bestow upon us excellent possessions. Bear to the Gods the sacrifice we offers the streams of oil flow pure and full of sweetness.

अध्याय १७

श्लोक 99

धामं॑ ते॒ विश्वं॒ भुव॑न॒मधि॑ श्रि॒तम॒न्तः स॑मु॒द्रे हृ॒द्यन्तरायु॑षि ।अ॒पामनी॑के समि॒थे य आभृ॑त॒स्तम॑श्याम॒ मधु॑मन्तं त ऊ॒र्मिम्

dhāmaṃ te viśvaṃ bhuvanamadhi śritamantaḥ samudre hṛdyantarāyuṣi | apāmanīke samithe ya ābhṛtastamaśyāma madhumantaṃ ta ūrmim

हिन्दी अर्थ

९. सारे ब्रह्माण्ड का आधार जो प्रभु है वह प्रसन्न हदय में, क्रियाशील जीवन में. कर्मो की शक्ति में तथा वासनाओं से किये जानेवाले संग्राम में विजेता मे निवास करता हे। २. उस प्रभु का निवास-स्थान बनकर मै जान कौ माधुर्यमयी तरङ्गोवाला बन पाऊं। एवं, यह सत्रहवाँ अध्याय "प्रभु को धारण करने कौ भावना! पर समाप्त होता हे।

English

The universe depends upon thy power and might within the sea, within the heart, within all life. May we attain that sweetly-flavoured wave of thine, brought, at this gathering, o’er the surface of the floods.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Yajur Veda — Chapter 17
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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